िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत
1 [(cid:19)ह(cid:4)यण 1(cid:22)4(cid:24) (cid:25)श(cid:24)(cid:26)
((((स(cid:27)(cid:24) पटन(cid:4) (cid:22)(cid:22)(cid:30)) ) ) ) पटन(cid:4)(cid:31) व५ह"प०तव(cid:4)र(cid:31) 22222222 नव(cid:22)बनव(cid:22)बनव(cid:22)बनव(cid:22)बरररर 2018201820182018 सं॰ 2/आरोप-01-52/2014-सा0प्र0-11623
सामान्य प्रशासन विभाग
———
संकल्प
29 अगस्त 2018
श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, तत्कालीन वरीय उप समार्हाा, सीतामढ़ी-सह-प्रभारी काराधीक्षक, सीतामढ़ी सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, सदर मधुबनी के विरूद्ध कारा के अन्तर्गत अनियमित एवं नियम के विरूद्ध कार्य होने की गुप्त सूचना के आधार पर मंडल कारा, सीतामढ़ी में औचक छापामारी के क्रम में आपत्तिजनक सामग्रियों के प्राप्त होने, जेल परिसर में मंदिर का निर्माण कराये जाने, रमजान के महीने में जेल परिसर में इफ्तार पार्टी दिये जाने तथा मुस्लिम कैदियों के बीच वस्त्र वितरण किये जाने, NGO की वैधता की जाँच किये बिना NGO से जेनरेटर लिए जाने, संसीमित कुख्यात बन्दी द्वारा नया पंखा लगाये जाने, जमीन पर कालीन लगाये जाने आदि के प्रतिवेदित आरोपों के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक 2002 दिनांक 11.08.2014 के द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया गया।
श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक 12739 दिनांक 12.09.2014 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष दिया गया। श्री सिंह के पत्रांक 286 दिनांक 10.04.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण में श्री सिंह का कहना है कि-वरीय उप समार्हाा के पद पर पदस्थापन के साथ कई विभागों के अलावा काराधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी के प्रभार भी थी। उनके कार्यकाल में समय-समय पर कारा में छापामारी की जाती थी एवं सामग्री जप्त होने पर प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है। दिनांक 08.08.2014 के औचक छापामारी की उन्हें कोई सूचना नहीं थी। कारा हस्तक, 2012 की धारा 800 की उप धारा-(i), (ii) एवं (iii) के मुताबिक जेल के अन्दर जाने वाले सामान की जिम्मेवारी डिपुटी सुपरीटेंडेंट (एडमिनिस्ट्रेषन एवं सेक्यूरिटी) की है। उनका कहना है कि पुराने जेल परिसर से संबंधित जीर्ण-षीर्ण सामग्री जेल के अन्दर मौजूद रहने के संबंध में काराधीक्षक के पत्रांक 1169 दिनांक 06.08.2018 एवं 882 दिनांक 26.04.2014 द्वारा जिला पदाधिकारी एवं कारा महानिरीक्षक को भेजा गया है। कैदियों के बीच आपसी झड़प, मार-पीट एवं रोड़ेबाजी की आषंका के संबंध में SDO/SDPO के द्वारा कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया है। रमजान के महीने में विधि व्यवस्था संधारण हेतु उनकी प्रतिनियुक्ति अन्यत्र की गयी थी। इफ्तार पार्टी के आयोजन के संबंध में उनका कहना है कि यह आरोप पूर्णतः गलत है। मुस्लिम कैदियों के बीच जेल प्रषासन द्वारा किसी प्रकार का वस्त्र वितरण नहीं किया गया है। विष्व जागरण मंच द्वारा जेनरेटर दिये जाने संबंधी कोई अनुमति उनके द्वारा नहीं दी गई है। संयुक्त प्रतिवेदन द्वारा लगायी गयी यह आरोप निराधार है। उनका आगे कहना है कि जेल में उनके प्रभार ग्रहण करने के पूर्व से हीं पंखा, कालीन और चादर लगा हुआ था। अतः उक्त सामग्रियों की खरीदगी उनके द्वारा नहीं की गयी तो कैष बुक में2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22 नव(cid:22)बर 2018 उसका संधारण कैसे किया जाता। दिनांक 09.08.2014 को जिला पदाधिकारी द्वारा सूचना दी गयी कि दो बन्दियों को जिला से बाहर भेजा जाना है। SDPO सदर तथा अन्य पुलिस पदाधिकारियों से बल की मांग किये जाने के बावजूद बल उपलब्ध नहीं कराया गया। फलस्वरूप कैदियों के बीच अफवाह फैलने एवं गुटबाजी होने का मौका मिला। आगे उनका कहना है कि काराधीक्षक के रूप में उनके द्वारा सभी कार्रवाईयाँ की गयी तथा समय-समय पर कारा की सुरक्षा एवं इसकी खामियों के बारे में काराधीक्षक, जिला पदाधिकारी तथा पुलिस प्रषासन को इसकी सूचना दी गयी।
श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप तथा समर्पित स्पष्टीकरण के सम्यक् विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9592 दिनांक 11.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1019 दिनांक 26.09.2016 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 14317 दिनांक 21.10.2016 के आलोक में श्री सिंह के पत्रांक 153 (निर्वाचन) दिनांक 31.12.2016 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के सम्यक् समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि जेल परिसर में निर्माण किये जा रहे मंदिर के संबंध में उनके द्वारा कुछ नहीं कहा गया। जेल के अन्दर विष्वजागरण मंच द्वारा जेनरेटर दिये जाने संबंधी आवेदन पर उनके द्वारा किसी प्रकार का आदेष नहीं दिया गया है, लेकिन उनके द्वारा इस तथ्य से इन्कार नहीं किया गया है कि उक्त संस्था के द्वारा जेल के अन्दर जेनरेटर नहीं दिया गया था। यदि जेल के अन्दर जेनरेटर दिया गया था तो इसकी जानकारी निष्चित रूप से काराधीक्षक को होनी चाहिए थी एवं बिना उनकी अनुमति के जेल में जेनरेटर ले जाये जाने की स्थिति में जेनरेटर को वापस किया जाना चाहिए था तथा जेनरेटर दिये जाने अथवा पहुंचाये जाने हेतु दोषी व्यक्तियों/कर्मियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। रमजान के महीने में संसीमित बन्दियों के द्वारा इफ्तार पार्टी दिये जाने के संबंध में उनके द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जेल के नियमों के तहत किस तिथि को एवं किसके आदेष से इफ्तार पार्टी दिया गया है। इस संबंध में उनके द्वारा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी कारा परिसर में मंदिर निर्माण कराये जाने, कारा परिसर के अन्दर NGO से जेनरेटर संचालित कराये जाने, संसीमित कैदियों द्वारा इफ्तार पार्टी का आयोजन तथा वस्त्र वितरण किया जाना एवं वार्डो में अवैध ढ़ंग से पंखा लगाये जाने के संबंध मे जेल में मैनुअल के विपरीत और विधि व्यवस्था के प्रतिकूल प्रतिवेदित किया गया है। काराधीक्षक के रूप में यह पद उनके दायित्वों से जुड़ा कार्य था और ऐसी स्थिति में पायी गयी अनियमितता के लिए वे अपने दायित्वों से नहीं बच सकते, इनके द्वारा सजगता में कमी, नियमित पर्यवेक्षण का अभाव एवं प्रषासनिक नियंत्रण में कमी का आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। साथ ही जाँच प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि कारा प्रबंधन में प्रषासनिक नियंत्रण एवं अनुश्रवण के अभाव के कारण कारा में अराजकतापूर्ण परिस्थिति उत्पन्न हुई, जिसके लिए अपरोक्ष रूप से इनकी जिम्मेवारी बनती है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के संगत प्रावधानों के तहत (i) 'निन्दन' तथा (ii) 'तीन वेतनवृद्धियाें पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' का दंड अधिरोपित किये जाने का विनिष्चय किया गया। श्री सिंह के विरूद्ध उक्त विनिष्चत दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 9690 दिनांक 28.07.2017 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति/परामर्ष की अपेक्षा की गयी। आयोग के पत्रांक 1541 दिनांक 22.09.2017 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध विनिष्चित विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी।
उक्त प्रतिवेदित आरोपों, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से प्राप्त सहमति के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) (संषोधन) नियमावली 2005 के विहित प्रावधानों के तहत श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11,तत्कालीन वरीय उप समार्हाा, सीतामढ़ी-सह-प्रभारी काराधीक्षक, सीतामढ़ी सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, सदर मधुबनी को (i) 'निन्दन' तथा (ii) 'तीन वेतनवृद्धियाें पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11,तत्कालीन वरीय उप समार्हाा, सीतामढ़ी-सह-प्रभारी काराधीक्षक, सीतामढ़ी सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, सदर मधुबनी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14196 दिनांक 09.11.2017 द्वारा (i) 'निन्दन' तथा (ii) 'तीन वेतनवृद्धियाें पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' का दंड संसूचित किया गया'।
संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री सिंह के पत्रांक 29/निर्वाचन दिनांक 09.05.2018 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। उनके द्वारा आरोप के सभी बिन्दुओं पर कंडिकावार स्पष्टीकरण अंकित करते हुए दंडादेश के पुनरावलोकन के पश्चात् उन्हें संसूचित दंड को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। उनके द्वारा आरोपवार अपना पक्ष अंकित करते हुए कहा गया है कि-
आरोप संख्या 01-(i) कारा अधीक्षक को पत्रांक 1169 दिनांक 06.08.2017 एवं पत्रांक 882 दिनांक 26.04.2014 के द्वारा कारा महानिरीक्षक/जिला पदाधिकारी को सूचित किया गया है कि जीर्ण-शीर्ण सामग्री पहले से मौजूद है। जिला3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22 नव(cid:22)बर 2018 पदाधिकारी ने अपने मंतव्य के पारा 02 में माना है कि इसके लिए जेल की सुरक्षा में तैनात कर्मी दोषी हैं। (ii) कारा परिसर में मंदिर पूर्व से ही स्थित था। जेल कर्मी के सहयोग से ही सब यह संभव हुआ है। कारा हस्तक 2012 के नियम की धारा-800 से स्पष्ट है कि कारा के अंदर की सामग्री में किसकी जिम्मेवारी बनती है। (iii) दिनांक 13.05.2014 से 08.08.2014 तक कोई एक्श्न नहीं लिया गया। यह आरोप बेबुनियाद है। रिपोर्ट दिनांक 12.07.2014, लेटर डेटेड 2 0.06.2014, 25.07.2014, 06.08.2014 से स्पष्ट है कि कारा हस्तक के नियम 797 का पालन किया गया है। (iv) जेल में मंदिर निर्माण में जेल कर्मियों की सहभागिता रही है। मेरे द्वारा विभिन्न प्रभार में रहने के कारण उन्होंने ऐसा किया है। अतः इस आरोप से मुक्त किया जाय।
आरोप संख्या 02-(i) जेल के अंदर संबंधित एन0जी0ओ0 को मेरे द्वारा जेनरेटर लगाने का कोई आदेश नहीं दिया गया। इसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं है। कारा हस्तक नियमावली 2012 की धारा 800 से स्पष्ट है कि इस संबंध में किसकी जिम्मेवारी है। (ii) एन0जी0ओ0 के द्वारा आवेदन में तिथि 11.07.2014 अंकित है जबकि छापेमारी दिनांक 08.08.2014 को हुई जेल कर्मियों के द्वारा साजिश के तहत् छापेमारी में पत्र उपलब्ध कराया गया जिसको एस0डी0ओ0/एस0डी0पी0ओ0 ने अपने जाँच प्रतिवेदन में संलग्न कर लिया। यह मनगढंत आरोप लगा दिया। (iii) एन0जी0ओ0 के आवेदन पर मेरा कोई लिखित आदेश नहीं है। न ही इसे मेरे सामने प्रस्तुत किये जाने का प्रमाण है। जिला पदाधिकारी का मंतव्य भी अस्पष्ट है। अतः इस आरोप को निराधार मानकर इसे हटाया जाये। कोई भी पत्र विभाग में आने पर आगत पुस्तक में इन्द्राज किया जाता है।
आरोप संख्या 03-(i) रमजान के पवित्र महीने के अंत में चांद दिखाई देने पर ईद मनाया जाता है। जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक 1890 सी0/दिनांक 25.07.2014 के आदेश स्पष्ट है कि ईद 29.07.2014 को मनाये जाने की संभावना थी। इसमें मेरी ड्यूटी संयुक्त आदेश से लगायी गयी थी। ईद 29.07.2014 को सम्पन्न हुआ एवं छापेमारी दिनांक 08.08.2014 को हुई जिस आधार पर एस0डी0ओ0/एस0डी0पी0ओ0 ने मेरे उपर उपरोक्त आरोप लगाया। करीब 10 दिनों के बाद आरोप लगाया गया है। आरोप भी बिना साक्ष्य के लगाया गया। इससे स्पष्ट है कि एस0डी0ओ0/एस0डी0पी0ओ0 ने जिला पदाधिकारी के मेल से मेरे उपर झूठा आरोप लगाया। इसका कोई ठोस सबूत नहीं है। (ii) कारा हस्तक नियम 2012 की धारा 165 और 580 के अनुसार संसीमित बंदी अपना खाद्य पदार्थ मंगा सकते है। जेल परिसर में इफ्तार पार्टी का आयोजन करने संबंधी आरोप पूर्णतः गलत है। कारा हस्तक नियम 2012 की धारा 168 के अनुसार कैदियों को स्पेशल डायट देने का प्रावधान खास अवसरों एवं त्योहारों पर है।(iii) जिला पदाधिकारी ने भी अपने मंतव्य में मेरा स्पष्टीकरण स्वीकार किया है जो नियमानुकूल है। अतः इस आरोप से पूर्णः मुक्त किया जाय। साक्ष्य देने के बावजूद भी सामान्य प्रशासन विभाग एवं संचालन पदाधिकारी के द्वारा मेरी बातों पर गौर नहीं किया गया। इससे प्रतीत होता है कि मेरे उपर आर्थिक दंड आँख मूँद कर और बिना सच्चाई पर गौर किये ही आरोपित कर दिया गया।
आरोप सं0संख्या 04-(i) इस संबंध में जिला पदाधिकारी का मंतव्य है कि यह जाँच का विषय है। मेरे द्वारा क्रय नहीं किया गया न ही कैश बुक में इसका इन्ट्री है। ये चीजें जेल परिसर में पहले से मौजूद थी। (ii) जिला पदाधिकारी ने धारा 08 में मंतव्य दिया है कि सामग्रियाँ मेरे प्रभार से पहले की है जो जाँच का विषय है।
आरोप संख्या 05-(i) पत्रांक 527/दिनांक 19.04.2014, 545/दिनांक 13.04.2015, 674/दिनांक 23.05.2014 से स्पष्ट है कि नियमित पर्यवेक्षण और सजगता की कोई कमी नहीं रही है। दिनांक 23.05.2014 से दिनांक 08.08.2014 तक में भी मैं सजग तथा नियमित पर्यवेक्षण के साथ प्रशासनिक नियंत्रण में अपने जेल को रखा है। रिपोर्ट दिनांक 12.07.2014, लेटर दिनांक 20.06.2014, 25.07.2014 एवं 06.08.2014 से यह स्पष्ट है। इसका पूर्व में जबाब दिया गया है। (ii) जेल के विभिन्न निरीक्षण रजिस्टरों से स्पष्ट होाग कि मैंने नियमित पर्यवेक्षण किया है तथा सजग रहकर आवश्यक दिशा निदेश दिया है। संचालन पदाधिकारी ने सफाई का कोई मौका नहीं दिया और आनन-फानन में आरोप को प्रमाणित कर दिया। मैंने कारा हस्तक के नियम 797 का पूर्ण रूप से पालन किया है। (iii) जेल के सिक्युरिटी ऑडिट अनुपालन प्रतिवेदन पत्रांक 863 दिनांक 26.06.2014 मेरे सतत कार्य पूरी निष्ठा से करने की और इंगित करता है। (iv) दिनांक 09.08.2014 की घटना के बारे में मुझे दोषी माना गया है। यह गलत है। बिना मेरी सहमति और जानकारी के बंदियों को शिफ्ट कर दिया गया। इससे अराजकता की स्थिति हुई। ऐसी स्थिति उत्पन्न करने में एस0डी0ओ0/एस0डी0पी0ओ0 का प्रतिवेदन, समय पर पुलिस का नहीं आना और प्रतिनियुक्ति स्थल पर अविवेकपूर्ण निर्णय लेना है। एस0के0एम0सी0एच0 हॉस्पीटल, मुजफ्फरपुर में घायल बंदी ने बयान में कहा है कि एन्काउन्टर के भय से ऐसी स्थिति हुई जिसमें लगा कि दोनों बंदियों को एन्काउन्टर कर दिया जायेगा। मेरे पूर्व के जवाब में सभी बातें शामिल है। (v) इस समय का गेट रजिस्टर भी अनुपलब्ध है। जेल कर्मियों के द्वारा इसे बर्बाद कर दिया गयाहै। मैंने इसकी मांग पत्रांक 1547 दिनांक 15.11.2014 के द्वारा की थी मगर उपलब्ध नहीं कराया गया। जेल प्रशासन ने सूचित किया कि गेट रजिस्टर जल गया है। मंडल कारा के पत्रांक 1204 दिनांक 11.08.2014 के एफ0आई0आर0 में इसका जिक्र नहीं है। अतः सभी आरोपों से बरी किया जाय।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22 नव(cid:22)बर 2018 प्रतिवेदित आरोप एवंश्री सिंह के उपर्युक्त अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा पुनर्विलोकन आवेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। श्री सिंह द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो इनके द्वारा पूर्व में किया गया है।
वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14196 दिनांक 09.11.2017 द्वारा इनके विरूद्ध 'निन्दन' तथा तीन 'वेतनवृद्धियाें पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' के संसूचित दंड को पूर्ववत् बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, तत्कालीन वरीय उप समार्हाा, सीतामढ़ी-सह-प्रभारी काराधीक्षक, सीतामढ़ी सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, सदर मधुबनी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14196 दिनांक 09.11.2017 द्वारा संसूचित 'निन्दन' तथा 'तीन वेतनवृद्धियाें पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' के दंड को पूर्ववत् बरकरार रखा जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। ह0/-
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, भीम प्रसाद, सरकार के संयुक्त सचिव।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 996%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in