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श्री प्रदीप कुमार, बिहार लेखा सेवा,कोटि क्रमांक-92/2017 तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी, सीतामढ़ी को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 09.12.2014 को परिवादी श्री सुनील कुमार से ````20,000/-(बीस हजार रुपये) रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया एवं निगरानी थाना कांड सं॰-097/2014 दिनांक 09.12.2014 दर्ज किया गया।
2. पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2916 अप॰शा॰ दिनांक 11.12.2014 द्वारा प्रतिवेदित सूचना के आधार पर विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 12228 दिनांक 24.12.2014 द्वारा हिरासत में जाने की तिथि दिनांक 09.12.2014 के प्रभाव से श्री कुमार को निलंबित किया गया। जमानत पर कारागार से रिहा होने के पश्चात् उनके द्वारा दिनांक 14.07.2015 के पूर्वाह्न में मुख्यालय में योगदान दिया गया, जिसके आलोक में वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-7067 दिनांक 12.08.2015 द्वारा श्री प्रदीप कुमार का योगदान स्वीकृत करते हुए दिनांक 14.07.2015 से निलंबन से मुक्त किया गया। पुनः वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-7076 दिनांक 13.08.2015 द्वारा श्री कुमार को तात्कालिक प्रभाव (Retrospective Effect) से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया, अर्थात् दिनांक 14.07.2015 के प्रभाव से इन्हें पुनः निलंबित किया गया। प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर श्री कुमार के विरुद्ध आरोप प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 2813 दिनांक 19.03.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। श्री कुमार द्वारा पत्रांक शून्य दिनांक 29.07.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
3. श्री कुमार के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9939 दिनांक 02.12.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
4. संयुक्त सचिव-सह-संचालन पदाधिकारी, वित्त विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 36/सं॰स॰ कोषांग दिनांक 04.08.2016 द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाए गए आरोप संख्या-02 निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दिनांक 09.12.2014 को परिवादी श्री सुनील कुमार से ````20,000/- रंगे हाथों रिश्वत लेते आरोपित पदाधिकारी को उनके आवास से गिरफ्तार करने एवं आरोप संख्या-03निगरानी द्वारा गिरफ्तारी के पश्चात् आरोपित2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 24242424 (cid:21)दस(cid:23)ब(cid:21)दस(cid:23)ब(cid:21)दस(cid:23)ब(cid:21)दस(cid:23)बरररर 2018201820182018 पदाधिकारी को शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में भेजने तथा उनके विरुद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-097/2014 दर्ज किये जाने संबंधी आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
5. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) के संगत प्रावधान के तहत् संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 7762 दिनांक 28.09.2016 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का निदेश दिया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक 21.10.2016 की तिथि में द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया गया।
6. श्री कुमार के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीेकरण एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक् समीक्षोपरांत पाया गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है । समीक्षा के क्रम में निगरानी विभाग के धावा दल के प्रभारी श्री पारसनाथ सिंह, पुलिस उपाधीक्षक का बयान दिनांक 15.05.2017 को प्राप्त किया गया, जिसमें उनके द्वारा प्री-टै्रप मेमोरन्डम/पोस्ट ट्रैप मेमोरन्डम में उल्लिखित तथ्यों को पुष्ट किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय कार्यवाही में सम्यक् जाँचोपरांत आरोपित पदाधिकारी के पास से राशि का बरामद होना तथा श्री प्रदीप कुमार आरोपित पदाधिकारी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाने पर घोल के गुलाबी हो जाने के आधार पर आरोपों को सही पाया गया।
7. उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं होने के कारण अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा इसे अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(xi) के तहत् सेवा से बर्खास्तगी का दंड दिये जाने का विनिश्चय किया गया।
8. विनिश्चित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति की मांग किये जाने पर आयोग द्वारा विनिश्चित दंड पर सहमति संसूचित की गयी।
9. बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति प्राप्त होने के उपरान्त श्री प्रदीप कुमार, बिहार लेखा सेवा, तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी, सीतामढ़ी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के प्रावधानों के तहत् सेवा से बर्खास्तगी का दंड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया, जिस पर मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति प्राप्त कर संकल्प संख्या-32 दिनांक 03.01.2018 के द्वारा बर्खास्तगी का दण्ड संसूचित किया गया है।
10. सेवा से बर्खास्तगी आदेश के विरुद्ध श्री प्रदीप कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर CWJC No.-554/2018 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 06.04.2018 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् है :-
''For the reasons aforesaid as also considering the law laid down by the Hon'ble Apex Court, as discussed hereinabove, I am of the view that the punishment order of dismissal dated 03.01.2018 as contained in Memo. No.-32 passed by the Additional Secretary, Finance Department, Government of Bihar, cannot be sustained since the same has been erroneously passed by the disciplinary authority by (i) considering inadmissible evidence, which has influenced the impugned finding; (ii) by disabling itself from reaching a fair conclusion by taking into account considerations extraneous to the evidence and merits of the case and (iii) by allowing itself to be influenced by irrelevant and extraneous evidence which were never part of the departmental enquiry/enquiry report, hence the punishment order of dismissal dated 03.01.2018 is hereby quashed, however, with liberty to the disciplinary authority to pass a fresh order considering the reply of the petitioner herein to the second show cause notice dated 28.09.2016 as also the enquiry report submitted by the Enquiry Officer, in its true perspective,
The writ petition is allowed to the aforesaid extent." 11. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा श्री पारसनाथ सिंह, पुलिस उपाधीक्षक, धावा दल के प्रभारी पदाधिकारी द्वारा दिये गये बयान को irrelevant and extraneous evidence मानते हुए उपरोक्त आदेश पारित किया गया है।
12. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा CWJC No.-554/2018 में दिनांक 06.04.2018 को पारित न्यायनिर्णय के आलोक में वित्त विभागीय संकल्प संख्या-5821 दिनांक 01.08.2018 द्वारा वित्त विभागीय संकल्प, ज्ञापांक 32 दिनांक 03.01.2018 को उसके निर्गत तिथि से निरस्त करते हुए श्री प्रदीप कुमार, बिहार लेखा सेवा, कोटि क्रमांक-92/2017 को सेवा में पुर्नस्थापित किया गया तथा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर पर विचार करते हुए नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्णय लिया गया। 13. संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-1 को साक्ष्य के अभाव में प्रमाणित नहीं पाया गया है।आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की कंडिका-1 से 3 में आरोप संख्या-1 के संबंध में उल्लेख किया गया है।संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप मद के समर्थन में संलग्न कागजात/दस्तावेज, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा दिया गया प्रतिवेदन, गवाहों के बयान, प्री-ट्रैप मेमोरन्डम/पोस्ट-ट्रैप मेमोरन्डम, आरोपित पदाधिकारी के पास से रिश्वत की राशि ````20,000/- का बरामद होना, आरोपित पदाधिकारी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाने पर घोल का रंग गुलाबी हो जाने तथा आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव में दिये गये साक्ष्य/दस्तावेज के3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 24242424 (cid:21)दस(cid:23)ब(cid:21)दस(cid:23)ब(cid:21)दस(cid:23)ब(cid:21)दस(cid:23)बरररर 2018201820182018 आधार पर आरोप संख्या-2 को प्रमाणित पाया गया है। इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में आरोपित पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है कि निगरानी टीम उक्त तिथि को घटनास्थल पर गये ही नहीं थे, बल्कि सुनील कुमार के दो आदमियों द्वारा उन्हें जबरदस्ती उठाकर सीतामढ़ी से अन्यत्र ले जाया गया और बनाये गये सभी प्रदर्श सुनील कुमार एवं निगरानी टीम के मिलीभगत का कुपरिणाम है। परन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा उल्लेख नहीं किया गया है कि जब निगरानी टीम उनके आवास पर गये ही नहीं थे, तो आरोपित पदाधिकारी को निगरानी टीम द्वारा कैसे, कहाँ पर गिरफ्तार किया गया और उन्हें जेल में कैसे भेजा गया। साथ ही आरोपित पदाधिकारी द्वारा पोस्ट-ट्रैप मेमोरन्डम पर 09.12.2014 की तिथि में हस्ताक्षर किया गया है एवं अंकित किया गया है कि एक प्रति पाया। 09.12.2014 की तिथि में ही प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत गवाहों द्वारा भी उल्लेख किया गया है कि निगरानी विभाग के लोग दिनांक 09.12.2014 को गेट खोलकर अन्दर आये थे एवं आरोपित पदाधिकारी को गाड़ी में बैठाकर ले गये। आरोप संख्या-3 के संबंध में आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है तथा स्वीकार किया गया है कि उन्हें 09.12.2014 से 08.07.2015 तक न्यायिक हिरासत के तहत् कारावास में रखा गया।
14. उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया तथा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा इसे अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(XI)के तहत् श्री कुमार को सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड दिये जाने का विनिश्चय किया गया।
15. विभागीय पत्रांक-7164 दिनांक 24.09.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री कुमार के विरुद्ध विनिश्चित दण्ड पर परामर्श की मांग की गई। आयोग का पत्रांक-1985 दिनांक 24.10.2018 द्वारा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित सेवा से बर्खास्तगी के दंड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी।
16. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रदीप कुमार, बिहार लेखा सेवा, कोटि क्रमांक-92/2017, तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी, सीतामढ़ी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(XI)के प्रावधानों के तहत सेवा से बर्खास्तगी का दंड दिये जाने का निर्णय लिया गया है।
17. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री प्रदीप कुमार, बिहार लेखा सेवा, कोटि क्रमांक-92/2017, तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी, सीतामढ़ी सम्प्रति निलंबित को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(XI)के तहत् सेवा से बर्खास्तगी का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति श्री प्रदीप कुमार (बिहार लेखा सेवा), कोटि क्रमांक-92/2017 तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी, सीतामढ़ी एवं सभी संबंधितों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिये भेज दी जाय।
विश्वासभाजन, जयन्त कुमार सिंह, सरकार के विशेष सचिव।
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