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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 January 2019

Published 01 January 2019

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-01-01.1
Languages
English, Hindi

(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट

[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क

ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत

11 प(cid:19)ष 1(cid:21)4(cid:23) (cid:24)श(cid:23)(cid:25)

(स(cid:26)(cid:23) पटन(cid:4) (cid:23)1) पटन(cid:4)(cid:28) म(cid:26)गलव(cid:4)र(cid:28) 1 जनवर(cid:15) 2019 बिहार विधान सभा सचिवालय ——— vf/klwpukvf/klwpukvf/klwpukvf/klwpuk 27272727 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2012012012018888

सं॰ foŒlŒfoŒ&15@2018&5214@foŒlŒ—''बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2018'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक 27 नवम्बर, 2018 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।

अध्यक्ष, बिहार विधान सभा के आदेश से, बटेश्वर नाथ पाण्डेय, सचिव।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019

बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2018

[वि॰स॰वि 12/2018]

का संशोधन करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2018 कहा जा सकेगा।

(2) अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे, जो राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, नियत करे : परंतु इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का अर्थान्वयन उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रतिनिर्देश के रूप में किया जाएगा।

2. बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे इसके पश्चात्‌ ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 में,-

(1) खंड (4) में, ''अपील प्राधिकारी और अपील अधिकरण'' शब्दों के स्थान पर ''अपील प्राधिकारी, अपील अधिकरण और धारा 171 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी'' शब्द, अंक और कोष्ठक रखे जाएंगे;

(2) खंड (16) में, "केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्दों के स्थान पर, "केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्द रखे जाएंगे ;

(3) खंड (17) में, उपखंड (ज) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड रखा जाएगा, यथाः-

''(ज) किसी घुड़दौड़ क्लब की गतिविधियाँ, जिसमें योगक या अनुज्ञप्ति से बुकमेकर के रूप में ऐसे क्लब की गतिविधियाँ शामिल है, अथवा ऐसे क्लब में अनुज्ञप्तिधारी बुकमेकर की गतिविधियाँ; और'';

(4) खंड (18) का लोप किया जाएगा ; (5) खंड (35) में, ''खंड (ग)'' शब्द, कोष्ठक और अक्षर के स्थान पर ''खंड (ख)'' शब्द कोष्ठक और अक्षर रखा जाएगा ;

(6) खंड (69) में, उपखंड (च) में ''अनुच्छेद 371'' शब्द और अंक के पश्चात्‌ ''और अनुच्छेद 371ञ'' शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;

(7) खंड (102) में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः-

'स्पष्टीकरण-शंकाओं के निवारण के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि ''सेवा'' पद में प्रतिभूतियों में संव्यवहारों को सुकर बनाना या प्रबंध करना सम्मिलित है ;'।

3. मूल अधिनियम की धारा 7 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 7 में, 1 जुलाई, 2017 से,- (1) उपधारा (1) में,-

(क) खंड (ख) में, ''चाहे वह कारबार के अनुक्रम में या उसे अग्रसर करने के लिए हो या नहीं;'' शब्दों के पश्चात्‌, ''और'' शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा और सदैव अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा ;

(ख) खंड (ग) में, ''क्रियाकलाप;'' शब्द के पश्चात्‌, ''और'' शब्द का लोप किया जाएगा और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा ;

(ग) खंड (घ) का लोप किया जाएगा और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा ;

(2) उपधारा (1) के पश्चात्‌ निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी और सदैव अंतःस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(1क) जहां कतिपय कार्यकलाप या संव्यवहार उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार कोई पूर्ति हैं, उन्हें अनुसूची 2 में यथानिर्दिष्ट माल की पूर्ति या सेवा की पूर्ति माना जाएगा।'';

(3) उपधारा (3) में, ''उपधारा (1) और उपधारा (2)'' शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर, ''उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)'' शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे। 4. मूल अधिनियम की धारा 9 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (4) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ :-

''(4) सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो किसी अरजिस्ट्रीकृत पूर्तिकार से प्राप्त माल या सेवाओं या दोनों के विनिर्दिष्ट प्रवर्गों की पूर्ति के संबंध में ऐसे माल या सेवा या दोनों के प्राप्तिकर्त्ता के रूप में प्रतिलोम प्रभार के आधार पर कर का संदाय करेंगे तथा इस अधिनियम के सभी उपबंध ऐसे प्राप्तिकर्ता को लागू होंगे मानो वह माल या सेवा या दोनों की ऐसी पूर्ति के संबंध में कर का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति है।''।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019 5. मूल अधिनियम की धारा 10 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 10 में,-

(1) उपधारा (1) में,-

(क) ''उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर, ऐसी दर पर,'' शब्दों के स्थान पर, ''धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के बदले ऐसी दर पर'' शब्द, अंक और कोष्ठक रखे जाएंगे :

(ख) परंतुक में, ''एक करोड़ रूपए'' शब्दों के स्थान पर ''एक करोड़ पचास लाख रूपए'' शब्द रखे जाएंगे ;

(ग) परंतुक के पश्चात्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः--

''परंतु यह और कि कोई व्यक्ति, जो खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन कर का संदाय करने का विकल्प लेता है, किसी राज्य में पूर्ववर्ती वित्त वर्ष में कारबार के दस प्रतिशत से अनधिक मूल्य की सेवा (अनुसूची 2 के पैरा 6 के खंड (ख) में निर्दिष्ट से भिन्न) या पांच लाख रूपए, जो भी अधिक हो, की पूर्ति कर सकेगा।''; (2) उपधारा (2) के खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-

''(क) उपधारा (1) में यथा उपबंधित के सिवाय, वह सेवा की पूर्ति में नहीं लगा हुआ है;''। 6. मूल अधिनियम की धारा 12 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (2) के खंड (क) में, ''की उपधारा (1)'' शब्द कोष्ठक और अंक का लोप किया जाएगा।

7. मूल अधिनियम की धारा 13 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (2) में, दोनों स्थानों पर आने वाले ''की उपधारा (2)'' के शब्द, कोष्ठक और अंक का लोप किया जाएगा।

8. मूल अधिनियम की धारा 16 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (2) में,- (1) खंड (ख) में, स्पष्टीकरण के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-

''स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने, यथास्थिति, माल या सेवा को प्राप्त किया है-

(i) जहां माल का परिदान किसी प्रदायकर्त्ता द्वारा किसी प्राप्तिकर्ता को या किसी अन्य व्यक्ति को, चाहे वह अभिकर्ता के रूप में या अन्यथा कार्य कर रहा हो, माल के संचलन के पूर्व या दौरान, ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश पर माल के मालिकाना दस्तावेजों के अंतरण के माध्यम से या अन्यथा किया गया है,;

(ii) जहां सेवा का उपबंध प्रदायकर्त्ता द्वारा किसी व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के

निदेश पर और उसके मद्‌दे किया जाता है।'';

(2) खंड (ग) में, "धारा 41" शब्द और अंक के स्थान पर, "धारा 41 या धारा 43क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।

9. मूल अधिनियम की धारा 17 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 17 में,-

(1) उपधारा (3) में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ -

'स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ''छूट-प्राप्त प्रदाय का मूल्य'' पद में अनुसूची 3 के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट के सिवाय उस अनुसूची में विनिर्दिष्ट कार्यकलापों या संव्यवहारों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा।';

(2) उपधारा (5) के खंड (क) और खंड (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखे जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(क) तेरह से अनधिक (चालक सहित) बैठने की क्षमता रखने वाले व्यक्तियों के परिवहन के लिए मोटरयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग निम्नलिखित कराधेय प्रदाय करने के लिए किया जाता है, अर्थात्‌ :- (अ) ऐसे मोटरयान की और प्रदाय ; या (आ) यात्रियों का परिवहन ; या (इ) ऐसे मोटरयान को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना;

(कक) जलयान और वायुयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग-

(i) निम्नलिखित कराधेय प्रदाय करने के लिए किया जाता है, अर्थात्‌ :--

(अ) ऐसे जलयान और वायुयान का और प्रदाय ; या (आ) यात्रियों का परिवहन ; या (इ) ऐसे जलयान चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना ; या (ई) ऐसे वायुयान चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना ;

(ii) माल के परिवहन के लिए ;

4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019

(कख) साधारण बीमा, मोटरयानों की सर्विसिंग, मरम्मत और अनुरक्षण की सेवाएं, जहां उनका संबंध खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान से है : परंतु ऐसी सेवा के लिए इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा --

(i) जहां खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान का

उपयोग उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है ; (ii) जहां किसी कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जाता है, जो-

(I) ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के विनिर्माण में लगा हुआ है ; या (II) उसके द्वारा बीमाकृत ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के संबंध में

साधारण बीमा सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है :

(ख) माल या सेवा या दोनों का निम्नलिखित का प्रदाय-

(i) खाद्य और सुपेय, आउटडोर कैटरिंग, सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएं, कास्मेटिक और प्लास्टिक शल्यक्रिया, खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान को किराया अथवा भाड़ा पर लिया जाना, सिवाय तब जब उनका उपयोग उनमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा :

परंतु ऐसे माल या सेवा या दोनों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा जब ऐसे माल या सेवा या दोनों की आवक प्रदाय का उपयोग किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उसी प्रवर्ग के माल या सेवा या दोनों की जावक कराधेय प्रदाय के लिए या कराधेय समिश्र प्रदाय या मिश्रित प्रदाय के एक तत्व के रुप में किया जाता है ;

(ii) किसी क्लब, स्वास्थ्य और फिटनेट केन्द्र की सदस्यता ; और (iii) छुट्‌टी या गृह यात्रा रियायत, जैसे छुटि्‌टयों पर कर्मचारियों को विस्तारित यात्रा

फायदे :

परंतु ऐसे माल या सेवा या दोनों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा, जहां किसी नियोक्ता के लिए अपने कर्मचारियों को तत्समय प्रवृत किसी विधि के अधीन उपबंध करना बाध्यकर हो ।''।

10. मूल अधिनियम की धारा 20 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 20 में, स्पष्टीकरण में, खंड (ग) में, ''प्रविष्टि 84'' शब्दों और अंक के स्थान पर, ''प्रविष्टि 84 और प्रविष्टि 92क'' शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।

11. मूल अधिनियम की धारा 22 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 22 में, --

(1) उपधारा (1) में, परंतुक के पश्चात्‌,निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः- ''परंतु यह और कि जहाँ ऐसा व्यक्ति, विशेष प्रवर्ग के किसी राज्य से जिसके संदर्भ में केन्द्र सरकार द्वारा प्रथम परन्तुक में निर्दिष्ट संकलित आवर्त्त को बढ़ाया गया है, माल या सेवाओं या दोनों का कराधेय प्रदाय करता है, रजिस्ट्रीकृत किये जाने का दायी होगा, यदि एक वित्तीय वर्ष में उसका संकलित आवर्त्त ऐसे वर्द्धित आवर्त के समतुल्य राशि से अधिक है।;'';

(2) स्पष्टीकरण में, खंड (iii) में, ''यथाविनिर्दिष्ट राज्य'' शब्दों के पश्चात्‌ '',जम्मू-कश्मीर राज्य और अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड राज्य को छोड़कर,'' शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।

12. मूल अधिनियम की धारा 24 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 24 के खंड (x) में ''वाणिज्य ऑपरेटर'' शब्दों के पश्चात्‌ ''जिससे धारा 52 के अधीन कर का संग्रहण करने की अपेक्षा है'' शब्द और अंक अंतःस्थापित किए जाएंगे।

13. मूल अधिनियम की धारा 25 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 25 में,-

(1) उपधारा (1) में, पहले परंतुक के पश्चात्‌ और स्पष्टीकरण से पहले निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

''परंतु यह और कि विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 में यथा परिभाषित किसी विशेष आर्थिक जोन विकासकर्ता या ऐसा कोई व्यक्ति जिसके पास, विशेष आर्थिक जोन के बाहर परंतु राज्य के अन्दर उसके कारबार के स्थान से सुभिन्न, विशेष आर्थिक जोन में कोई यूनिट है को, पृथक्‌ रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करना होगा।'';

(2) उपधारा (2) में, परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परंतुक रखा जाएगा, अर्थात्‌ :- ''परंतु ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसके पास किसी राज्य में कारबार के बहु स्थान हैं, वहां विहित की जाने वाली शर्तों के अधीन रहते हुए, कारबार के ऐसे प्रत्येक स्थान के लिए पृथक रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया जा सकेगा।''।5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019 14. मूल अधिनियम की धारा 29 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 29 में,--

(1) शीर्ष में, ''रद्‌दीकरण'' शब्द के पश्चात्‌ ''या निलंबन'' शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे; (2) उपधारा (1) में, खंड (ग) के पश्चात्‌, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

''परंतु रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकरण के रद्‌दीकरण के संबंध में फाइल की गई कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान, रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निलंबित किया जा सकेगा।'';

(3) उपधारा (2) में, परंतुक के पश्चात्‌, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :- ''परंतु यह और कि रजिस्ट्रीकरण के रद्‌दीकरण से संबंधित कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान, समुचित अधिकारी द्वारा रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निलंबित किया जा सकेगा।''।

15. मूल अधिनियम की धारा 34 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 34 में,--

(1) उपधारा (1) में,--

(क) ''कोई कर बीजक जारी किया गया है'' शब्दों के स्थान पर ''एक या अधिक कर बीजक जारी किए गए है'' शब्द रखे जाएंगे;

(ख) ''जमा पत्र जारी'' शब्दों के स्थान पर ''किसी वित्तीय वर्ष में की गई प्रदायों के लिए एक या अधिक जमा पत्र जारी'' शब्द रखे जाएंगे;

(2) उपधारा (3) में,--

(क) ''कोई कर बीजक जारी किया गया है'' शब्दों के स्थान पर ''एक या अधिक कर बीजक जारी किए गए है'' शब्द रखे जाएंगे ;

(ख) ''नामे पत्र'' शब्दों के स्थान पर ''किसी वित्तीय वर्ष में की गई प्रदायों के लिए एक या अधिक नामे पत्र जारी'' शब्द रखे जाएंगे।

16. मूल अधिनियम की धारा 35 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (5) में निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :--

''परंतु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी स्थानीय प्राधिकार को लागू नहीं होगी, जिसकी लेखाबहियां, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी स्थानीय प्राधिकार के लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी लेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षा किए जाने के अधीन हैं।''। 17. मूल अधिनियम की धारा 39 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 39 में,--

(1) उपधारा (1) में,--

(क) ''ऐसे प्ररुप और रीति में, जो विहित की जाए'' शब्दों के स्थान पर ''ऐसे प्ररुप और रीति में तथा ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए'' शब्द रखे जाएंगे;

(ख) ''ऐसे कलैंडर मास या उसके किसी भाग के उत्तरवर्ती मास के 20वें दिन या इससे पूर्व'' शब्दों का लोप किया जाएगा;

(ग) निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-- ''परंतु सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्ताें और सुरक्षोपायों के, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, अधीन रहते हुए, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे।'';

(2) उपधारा (7) में, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :--

''परंतु सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्ताें और सुरक्षोपायों के, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, अधीन रहते हुए, ऐसी विवरणी के अनुसार, ऐसी विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए उससे अपेक्षित अंतिम तारीख को या उससे पूर्व सरकार को, शोध्य कर या उसके किसी भाग का संदाय करेंगे।'';

(3) उपधारा (9) में,--

(क) ''उस मास या तिमाही, जिसके दौरान ऐसा लोप या अशुद्ध विशिष्टियां ध्यान में आई हैं'' शब्दों के स्थान पर, ''ऐसे प्ररुप और रीति में, जो विहित की जाए'' शब्द रखे जाएंगे;

(ख) ''परंतुक में ''वित्तीय वर्ष की समाप्ति'' शब्दों के स्थान पर, ''ऐसे वित्तीय वर्ष, जिससे ऐसे ब्यौरे संबंधित हैं, की समाप्ति'' शब्द रखे जाएंगे।6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019 18. मूल अधिनियम में नयी धारा 43क का अंतःस्थापन।-मूल अधिनियम की धारा 43 के पश्चात्‌ निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ :-

''43क. विवरणी प्रस्तुत करने और इनपुट कर प्रत्यय के प्राप्यता के लिए प्रक्रिया।- (1) धारा 16 की उपधारा (2), धारा 37 या धारा 38 में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत विवरणियों में, प्रदायकर्त्ताओं द्वारा किए गए प्रदायों के ब्यौरों का सत्यापन, विधिमान्यकरण, उसमें उपांतरण करेगा या उन्हें हटाएगा।

(2) धारा 41, धारा 42 या धारा 43 में किसी बात के होते हुए भी, प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया और उसका सत्यापन उस प्रकार किया जाएगा, जो विहित किया जाए।

(3) प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के प्रयोजनों के लिए, सामान्य पोर्टल पर प्रदायकर्त्ता द्वारा जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया वह होगी, जो विहित की जाए।

(4) ऐसे जावक प्रदायों जो उपधारा (3) के अधीन दाखिल नहीं किए गए हैं, के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया वह होगी, जो विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में इनपुट कर प्रत्यय की अधिकतम रकम, जो उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय के 20 प्रतिशत से अनधिक हो, सम्मिलित हो सकेगी।

(5) ऐसी जावक प्रदायों में, जिसके लिए प्रदायकर्त्ता द्वारा उपधारा (3) के अधीन ब्यौरों को प्रस्तुत किया गया है, विनिर्दिष्ट कर की रकम को, अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के रुप में माना जाएगा।

(6) उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन प्रस्तुत किए गए ऐसे जावक प्रदायों के ब्यौरे जिनकी बावत विवरणी दाखिल नहीं की गयी है, के सम्बन्ध में कर या, यथास्थिति, लिए गए इनपुट कर प्रत्यय के संदाय हेतु प्रदायकर्त्ता तथा प्राप्तिकर्ता, संयुक्ततः और पृथकतः, दायी होंगे। (7) उपधारा (6) के प्रयोजनों के लिए, वसूली ऐसी रीति में की जाएगी, जो विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में गलती से प्राप्त की गई एक हजार रूपए से अनधिक कर या इनपुट कर प्रत्यय की रकम की वसूली न करने के लिए उपबंध हो सकेगा।

(8)(क) रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने के छह मास के भीतर; या (ख) ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जिसने कर के संदाय में व्यतिक्रम किया है और जहाँ ऐसा व्यतिक्रम, व्यतिक्रम की रकम के संदाय की अंतिम तारीख से दो मास से अधिक की अवधि के लिए जारी रहता है-

द्वारा उपधारा (3) के अधीन अपेक्षित जावक प्रदायों के ब्यौरों को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया, सुरक्षोपाय एवं कर राशि की अवसीमा वह होगी, जो विहित की जाए।''

19. मूल अधिनियम की धारा 48 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 48 की उपधारा (2) में, ''प्रस्तुत करने के लिए'' शब्दों के पश्चात्‌ ''और ऐसे अन्य कृत्य करने के लिए'' शब्द अतःस्थापित किए जाएंगे। 20. मूल अधिनियम की धारा 49 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 49 में, --

(1) उपधारा (2) में, ''धारा 41'' शब्द और अंकों के स्थान पर, ''धारा 41 या धारा 43क'' शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;

(2) उपधारा (5) में, --

(क) खंड (ग) में, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः -

''परंतु राज्य कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहाँ किया जाएगा, जहाँ केन्द्रीय कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है,'';

(ख) ख्ांड (घ) में, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌;-

''परंतु संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहाँ किया जाएगा, जहाँ केन्द्रीय कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है;''।

21. मूल अधिनियम में नयी धारा 49क और 49ख का अंतःस्थापन।- मूल अधिनियम की धारा 49 के पश्चात्‌ निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात्‌ :-

''49क. कतिपय शर्ताें के अधीन रहते हुए इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग।- धारा 49 में किसी बात के होते हुए भी राज्य कर इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग, यथास्थिति, एकीकृत कर या राज्य कर के संदाय के मद्‌दे, केवल तब किया जाएगा, जब एकीकृत कर के मद्‌दे उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय का पहले ही ऐसे संदाय के प्रति पूर्णतया उपयोग कर लिया गया है।7 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019 49ख. इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग का आदेश।- इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी और धारा 49 की उपधारा (5) के खंड (ड.) और खंड (च) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों से, यथास्थिति, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या संघ राज्यक्षेत्र कर का, ऐसे कर के संदाय के मद्‌दे उपयोग किए जाने के क्रम और रीति को विहित कर सकेगी।''।

22. मूल अधिनियम की धारा 52 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (9) में, ''धारा 37'' शब्द और अंकों के स्थान पर, ''धारा 37 या धारा 39'' शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।

23. मूल अधिनियम की धारा 54 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 54 में, --

(1) उपधारा (8) के खंड (क) में ''शून्य दरवाले मालों या सेवाओं या दोनोंं'' शब्दों, के स्थान पर, ''निर्यात'' शब्द तथा ''शून्य दर वाले प्रदायों'' शब्दों के स्थान पर ''निर्यातों'' शब्द रखे जाएंगे।

(2) स्पष्टीकरण के खंड (2) में, -

(क) उपखंड (ग) की मद (i) में, ''विदेशी मुद्रा में'' शब्दों के पश्चात्‌ ''या भारतीय रूपए में, जहाँ कहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जाए,'', शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;

(ख) उपखंड (ड.) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखंड रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-

''(ड.) उपधारा (3) के पहले परंतुक के खंड (ii) के अधीन उपयोग न किए गए इनपुट कर प्रत्यय के प्रतिदाय की दशा में, उस अवधि के लिए, जिसमें ऐसे प्रतिदाय के लिए दावा उत्पन्न होता है, धारा 39 के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख;''।

24. मूल अधिनियम की धारा 79 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 79 में उपधारा (4) के पश्चात्‌ निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः -

'स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''व्यक्ति'' शब्द में, यथास्थिति, धारा 25 की उपधारा (4) या उपधारा (5) में यथानिर्दिष्ट ''विशिष्ट व्यक्ति'' सम्मिलित होंगे।'।

25. मूल अधिनियम की धारा 107 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 107 की उपधारा (6) के खंड (ख) में, ''बराबर राशि का'' शब्दों के पश्चात्‌,'', अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपए के अधीन रहते हुए,'' शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।

26. मूल अधिनियम की धारा 112 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 112 की उपधारा (8) के खंड (ख) में, ''बराबर राशि'' शब्दों के पश्चात्‌,'', अधिकतम पचास करोड़ रूपए के अधीन रहते हुए, '' शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।

27. मूल अधिनियम की धारा 129 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 129 की उपधारा (6) में, दो स्थलों पर अंकित ''सात दिन'' शब्दों के स्थान पर, ''चौदह दिन'' शब्द रखे जाएंगे।

28. मूल अधिनियम की धारा 143 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 143 की उपधारा (1) के खंड (ख) में, परंतुक के पश्चात्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः -

''परंतु यह और कि पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर, एक वर्ष और तीन वर्ष की अवधि को, आयुक्त द्वारा क्रमशः एक वर्ष और दो वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए आगे और बढ़ाया जा सकेगा।''।

29. मूल अधिनियम की अनुसूची 1 में संशोधन।- मूल अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 4 में, ''कराधेय व्यक्ति'' शब्दों के स्थान पर ''व्यक्ति'' शब्द रखा जाएगा।

30. मूल अधिनियम की अनुसूची 2 में संशोधन।- मूल अधिनियम की अनुसूची 2 के शीर्षक में, ''क्रियाकलापों'' शब्द के पश्चात्‌ ''या संव्यवहार'' शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे और 1 जुलाई, 2017 से अंतःस्थापित किए गए समझे जाएंगे।

31. मूल अधिनियम की अनुसूची 3 में संशोधन।- मूल अधिनियम की अनुसूची 3 में, -

(1) पैरा 6 के पश्चात्‌, निम्नलिखित पैरा अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

''7. भारत के बाहर किसी स्थान से, भारत के बाहर किसी अन्य स्थान पर माल का, ऐसे माल का भारत में प्रवेश किए बिना, प्रदाय।

8.(क) घरेलू उपभोग के लिए अनुमति प्रदान किए जाने से पूर्व किसी व्यक्ति को भांडागार में रखे गए माल का प्रदाय।

(ख) परेषिति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को माल का, भारत से बाहर अवस्थित मूल पत्तन से प्रेषण किए जाने के पश्चात्‌ किंतु घरेलू उपभोग के लिए अनुमति दिए जाने से पूर्व, माल के मालिकाना हक के दस्तावेज में पृष्ठांकन द्वारा माल का प्रदाय।''8 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019 (2) स्पष्टीकरण को, ''स्पष्टीकरण 1'' के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के पश्चात्‌ निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, यथाः- स्पष्टीकरण 2- पैरा 8 के प्रयोजनों के लिए, ''भांडागार में रखे गए माल'' पद का वही अर्थ होगा, जो सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का केन्द्रीय अधिनियम, 52) में उसका है।''। 32. निरसन एवं व्यावृत्ति।-

(1) इस अधिनियम में यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से ही बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 (बिहार अध्यादेश संख्या 1, 2018) इसके द्वारा निरसित किया जाता है।

(2) व्यावृत्ति-

(i) बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 सभी प्रयोजनों हेतु इसके प्रभावी होने की तारीख के प्रभाव से सभी तात्विक समय से विधिमान्यतः एवं प्रभावकारी रूप से, प्रवृत्त एवं सदैव प्रवत्त समझा जायेगा।

(ii) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के द्वारा या के अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अधीन कृत कोई कार्रवाई अथवा किया गया कुछ भी या किए जाने के लिए तात्पार्यित कुछ भी या कोई अन्य कार्रवाई, कर निर्धारण, कर संग्रह, समायोजन, कर में कटौती या की गई गणना सभी प्रयोजनों हेतु विधिमान्यतः एवं प्रभावकारी रूप से की गई समझी जाएगी या किया गया समझा जाएगा एवं सदैव समझी जायेगी या समझा जाएगा मानों इस अध्यादेश द्वारा संशोधित अधिनियम सभी तात्विक समय में प्रवृत्त था तथा, तद्‌नुसार, कृत कोई कार्रवाई अथवा किया गया कुछ भी किये जाने के लिए तात्पार्यित कुछ भी या कोई कार्रवाई, कर निर्धारण, कर संग्रह, समायोजन, कर में कटौती या की गई गणना सभी प्रयोजनों हेतु विधिमान्यतः एवं प्रभावकारी रूप से की गई समझी जायेगी या किया गया समझा जाएगा एवं किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण अथवा अन्य प्राधिकार के किसी निर्णय, डिक्री अथवा आदेश में किसी बात के होते हुए भी-

(क) किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण अथवा अन्य प्राधिकार में ऐसे कर, ब्याज अथवा शास्ति के रूप में प्राप्त की गई अथवा भुगतायी गयी किसी राशि की वापसी हेतु कोई वाद या कोई अन्य कार्रवाई न तो प्रारम्भ की जायेगी, न चलायी जायेगी और न ही जारी रखी जायेगी;

(ख) किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण अथवा अन्य प्राधिकार द्वारा प्राप्त या वसूले गए ऐसे कर, ब्याज अथवा शास्ति की राशि की वापसी हेतु डिक्री अथवा आदेश का प्रवर्तन नहीं कराया जायेगा।

(ग) ऐसी सभी राशि की, जो बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 के फलस्वरूप संग्रहित की जा सकती थी परन्तु जिनका संग्रहण नहीं किया गया हो, वसूली जा सकेगी।

(iii) शंकाओं के निराकरण हेतु एतद्‌द्वारा यह घोषित किया जाता है कि किसी व्यक्ति की ओर से ऐसा कोई कार्य या लोप जो इस अध्यादेश के प्रवृत्त नहीं होने की दशा में दंडनीय नही होता, अपराध के रूप में दंडनीय नहीं होगा।

वित्तीय संलेख

प्रस्तावित बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2018 में राज्य की संचित निधि से कोई आवर्ती या गैर-आवर्ती व्यय शामिल नहीं है। विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।

(सुशील कुमार मोदी) भार-साधक सदस्य9 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 जनवर(cid:15) 2019

उद्देष्य एवं हेतु

दिनांक 01 जुलाई, 2017 से पूरे देश में माल और सेवा कर प्रणाली लागू है। तद्‌नुसार राज्य में भी बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 प्रख्यापित किया गया है। भारत जैसे विशाल देश में इस नयी कर प्रणाली के लागू होने के उपरान्त कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हुई। इन समस्याओं के समाधान के लिए जीएसटी परिषद्‌ की बैठको में विचार किया गया और परिषद्‌ की अनुशंसाओं के आलोक में लोक सभा द्वारा यथा पारित केन्द्रीय माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2018 पर महामहिम राष्ट्रपति महोदय का अनुमोदन प्राप्त हो चुका है तथा यह भारत के राजपत्र में प्रकाशित भी हो चुका है। चूंकि केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम तथा राज्य माल और सेवा कर अधिनियम एक दूसरे के प्रतिबिंब (Mirror Image) हैं। अतः केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम में किये गये किसी भी संशोधन के आलोक में बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन किया जाना वांछनीय है। प्रस्तावित (संशोधन) विधेयक की मुख्य बातों में आपूर्ति के दायरे को स्पष्ट करने के लिए अधिनियम की धारा 7 में संशोधन, Reverse Charge की व्यवस्था में परिवर्तन लाने के उद्‌देश्य से अधिनियम की धारा 9 में संशोधन, Composition dealer के सकलावर्त की सीमा रूपये 1 करोड़ से बढ़ाकर रूपये 1.5 करोड़ करने हेतु अधिनियम की धारा 10 में संशोधन, राज्य मेें कई स्थानों के लिए एक से अधिक रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने का विकल्प प्रदान करने के उद्‌देश्य से अधिनियम की धारा 25 में संशोधन, रिटर्न की दाखिला और इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करने की एक नयी प्रणाली लागू करने के उद्‌देश्य से एक नयी धारा 43A का अंतःस्थापन एवं अपील दायर करने के पूर्व जमा की जानेवाली राशि की अधिकतम सीमा रू॰ 25 करोड़ किया जाना आदि शामिल हैं।

बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन कराना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का मुख्य अभीष्ठ है।

(सुशील कुमार मोदी) भार-साधक सदस्य iVuk

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 January 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-01-01.1/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-01-01.1.