िनबंधन सं(cid:8)यािनबंधन सं(cid:8)यािनबंधन सं(cid:8)यािनबंधन सं(cid:8)या पी पी पी पी0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000----40404040 ॢबह(cid:4)र गजट
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सं॰ foŒlŒfoŒ&18@2018&5260@foŒlŒ—'' औद्योगिक विवाद (बिहार संशोधन) विधेयक, 2018'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक 28 नवम्बर, 2018 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।
अध्यक्ष, बिहार विधान सभा के आदेश से,
बटेश्वर नाथ पाण्डेय,
सचिव।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1111 जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15) 2019201920192019 औद्योगिक विवाद (बिहार संशोधन) विधेयक, 2018
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औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (अधिनियम 14, 1947) का संशोधन करने के लिए विधेयक। भारत-गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम औद्योगिक विवाद (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2018 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह इसके राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगा।
2. केन्द्रीय अधिनियम 14, 1947 की धारा-2 में संशोधन ।- औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा-2 का खंड-(ध) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा :-
(ध) ''कर्मकार'' से अभिप्रेत है कोई ऐसा व्यक्ति (शिक्षु सहित), जो किसी उद्योग में भाड़े या इनाम के लिए कोई शारीरिक, अकुशल, कुशल, तकनीकी, संक्रियात्मक, लिपिकीय या पर्यवेक्षी कार्य या विक्रय संवर्धन के लिए नियोजित हो, चाहे नियोजन के निबंधन अभिव्यक्त हों या विवक्षित, और किसी औद्योगिक विवाद के संबंध में इस अधिनियम के अधीन की किसी कार्यवाही के प्रयोजनार्थ उसमें कोई भी व्यक्ति शामिल है जो उस विवाद के संबंध में या उनके परिणामस्वरुप पदच्युत या उन्मोचित कर दिया गया हो या जिसकी छंटनी कर दी गई हो अथवा जिसकी पदच्युति, उन्मोचन या छंटनी किए जाने से वह विवाद उत्पन्न हुआ हो, किन्तु उसमें कोई ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं है जो-
(1950 का 46) या नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) के अध्यधीन हो; अथवा (ii) पुलिस सेवा में या किसी कारागार के अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रुप में नियोजित हो; अथवा
(iii) मुख्यतः प्रबंधकीय या प्रशासनिक हैसियत में नियोजित हो; अथवा
(iv) पर्यवेक्षी हैसियत में नियोजित होते हुए प्रतिमास दस हजार रुपये से अधिक मजदूरी लेता हो अथवा या तो पद से संलग्न कर्त्तव्यों की प्रकृति के या अपने में निहित शक्तियों के कारण ऐसे कृत्यों का प्रयोग करता हो जो मुख्यतः प्रबन्धकीय प्रकृति के हैं।
उद्देश्य एवं हेतु
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा-2 का खंड-'ध' में दिए गए 'कर्मकार' की परिभाषा में 'विक्रय संवर्धन (Promotion of Sales)' से जुड़े हुए कर्मी सम्प्रति शामिल नहीं है, जिस कारण उन्हें औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 द्वारा कर्मियों के हित संबंधी प्रावधानों का लाभ नहीं प्राप्त हो रहा है। विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 द्वारा विहित शक्ति का प्रयोग करते हुए उक्त औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा-2 का ख्ांड-'ध' में राज्य संशोधन के माध्यम से विक्रय संवर्धन से जुड़े कर्मियों को कर्मकार (Workman) की परिभाषा में शामिल किया गया है। बिहार राज्य में भी अन्य राज्यों की तरह विक्रय संवर्धन से जुड़े हुए कर्मी को कर्मकार की परिभाषा में शामिल करने का बिन्दु सरकार के समक्ष विचाराधीन था। प्रस्तावित संशोधन से विक्रय संवर्धन से जुड़े हुए कर्मी भी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अन्तर्गत कर्मियों के हित संबंधी प्रावधानों का समुचित लाभ प्राप्त कर सकेंगे। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा-2 का खंड-'ध' में कर्मकार की परिभाषा में संशोधन कर 'विक्रय संवर्धन (Promotion of Sales)' से जुड़े हुए कर्मियों को कर्मकार (Workman) की परिभाषा में शामिल किए जाने से उनको उक्त औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा-2 का खंड 'ध' [Industrial Disputes Act, 1947, Clause-'S' of Section-'2'] के अन्तर्गत कर्मियों के हित संबंधी प्रावधानों का समुचित लाभ प्राप्त हो सकेगा।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1111 जनवर(cid:15) जनवर(cid:15) जनवर(cid:15) जनवर(cid:15) 2019201920192019 बिहार राज्य में भी अन्य राज्यों की तरह विक्रय संवर्धन कार्य से जुड़े हुए कर्मी को कर्मकार (Workman) की परिभाषा मेें शामिल करने से राज्य संशोधन के माध्यम से 'विक्रय संवर्धन (Promotion of Sales)' से जुड़े कर्मी कामगार की श्रेणी में आयेंगे एवं उनको न्याय-निर्णय का लाभ प्राप्त हो सकेगा। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (अधिनियम, 14, 1947) की धारा-2 का खंड-'ध' में वर्णित कर्मकार की परिभाषा में विक्रय संवर्धन से जुड़े हुए कर्मी को शामिल करने हेतु उक्त औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में संशोधन कराना ही इस विधेयक का उद्देश्य है, जिसे अधिनियमित कराना इस विधेयक का मुख्य अभीष्ठ है।
(विजय कुमार सिन्हा) भार-साधक सदस्य। पटना
बटेश्वर नाथ पाण्डेय, दिनांक-28.11.2018
सचिव, बिहार विधान-सभा।
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