Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 09 January 2019

Published 09 January 2019

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-01-09.2
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार }kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-7 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 8-8 पूरक

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पूरक-क 9-17बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 2 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग

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अधिसूचना

18 दिसम्बर 2018

सं0 प्र03-प्रो0-04/2014-5798/खाद्य--वित्त विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना ज्ञापांक-4685 दिनांक 25.06.2003 एवं संकल्प संख्या-7566 दिनांक 14.07.2010 के द्वारा परिचारित बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त (सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना) नियमावली-2003 बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त रूपांतरित सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना-2010 के आलोक में बिहार आपूर्ति सेवा संवर्ग के कार्यरत/सेवा निवृत, आपूर्ति निरीक्षक/पणन पदाधिकारी/सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकरियों को सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना/रूपांतरित सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना के लाभ की मंजूरी के मामलों पर विचारण के लिए निम्नांकित प्रकार से विभागीय स्कीनिंग/प्रोन्नति समिति गठित की जाती हैः- (1) श्री पंकज कुमार (भा0प्र0से0) - अध्यक्ष

सचिव,

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना । (2) श्री चन्द्रशेखर (भा0प्र0से0) - सदस्य अपर सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना । (3) श्री भरत कुमार दुबे (भा0प्र0से0), - सदस्य

संयुक्त सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना ।

(4) सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मनोनित - सदस्य अनु0 जाति/अनु0 जनजाति के पदाधिकारी । (5) सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मनोनित - सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय के पदाधिकारी । (6) वित्त विभाग का एक प्रतिनिधि जो - सदस्य संयुक्त सचिव से निम्न स्तर के न हो । (7) श्रीमती प्रतिभा सिन्हा, - सदस्य विशेष कार्य पदाधिकारी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना । 2 स्कीनींग/प्रोन्नति समिति की बैठक प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो बार यथा संभव जनवरी और जुलाई के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जायेगी । 3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत कुमार दुबे, संयुक्त सचिव।

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचनाएं

28 दिसम्बर 2018

सं0 6/अनु॰ 27-08/2011/7264--वाणिज्य-कर विभाग, बिहार पटना के नियंत्राणाधीन बिहार वित्त सेवा के श्री शिवानन्द सिंह, राज्य-कर सहायक आयुक्त, बिहारशरीफ अंचल, बिहारशरीफ को बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 56वीं से 59वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार पुलिस सेवा के अंतर्गत पुलिस उपाधीक्षक के पद पर पुनरीक्षित वेतन स्तर-9 में चयनित एवं नियुक्ति हेतु अनुशंसित होने के उपरान्त गृह विभाग (आरक्षी शाखा), बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 11621 दिनांक 17.12.2018 के आलोक में बिहार सेवा संहिता के सुसंगत नियमों के अधीन राज्य-कर सहायक आयुक्त के पद पर गहनाधिकार के साथ3 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 बिहार पुलिस सेवा में परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक के पद पर योगदान करने हेतु श्री सिंह को राज्य कर सहायक आयुक्त के पद से दिनांक 28.12.2018 के अपराह्‌न से विरमित किया जाता है।

2. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जनक राम, उप-सचिव।

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27 दिसम्बर 2018

सं0 6/पे0उ0-14-15/2010-378/सी--बिहार वित्त सेवा के पदाधिकारी श्री विनोदानन्द पाण्डेय, सेवानिवृत्त वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील), पटना पूर्वी एवं पश्चिमी प्रमंडल, पटना तथा मगध प्रमंडल, गया के पदस्थापनकाल में व्यवसायी की मिलीभगत से पारस्परिक लाभ के लिए राज्य के राजस्वहित के प्रतिकूल कार्य करने एवं बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-72(5) एवं बिहार वित्त अधिनियम, 1981 की धारा-45(2) में वर्णित प्रावधानों के विपरीत संबंधित अंचल को सुनवाई की सूचना का नोटिस बिना तामिला कराये अपीलीय आदेश पारित करने संबंधी आरोपों के लिए श्री पाण्डेय के विरूद्ध आरोप पत्र (प्रपत्र-'क') गठित करते हुए विभागीय संकल्प संख्या-63/सी0 (अनु0) दिनांक 04.04. 2014 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(b) के तहत्‌ बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 में वर्णित विहित रीति से विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के संचालन में विभागीय कार्यवाही चलायी गयी। विभागीय कार्यवाही में अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री पाण्डेय के विरूद्ध लगाये गये दोनो आरोपों में से कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मुख्य सचिव महोदय के द्वारा जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए यह प्रस्तावित किया गया कि श्री विनोदानन्द पाण्डेय, तत्कालीन वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील), सम्प्रति सेवानिवृत के पेंशन से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत्‌ 5 प्रतिशत की कटौती 5 वर्षो के लिए की जा सकती है। इस प्रस्तावित दंड पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त निर्धारित दंड के बिन्दु पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श/सहमति की माँग की गयी। साथ ही साथ बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के तहत्‌ दंड की सूचना देते हुए श्री पाण्डेय से 15 दिनों के अन्दर अभ्यावेदन की माँग की गयी। इसी बीच विभाग को श्री विनोदानन्द पाण्डेय की मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई। इस प्रकार श्री पाण्डेय के विरूद्ध उक्त विनिश्चित दण्ड संसूचन के पूर्व ही उनका निधन हो गया।

उपरोक्त के आलोक में इस मामले में अग्रेतर कार्रवाई के संबंध में विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया। जिसके आलोक में विद्धान महाधिवक्ता से प्राप्त परामर्श की अंतिम कंडिका में वर्णित किया गया कि-"In present case, the delinquent died on 26.10.2017 much before the submission of representation/submission to the punishment as per requirement Rule 18(3) of CCA Rules and accordingly the departmental proceeding has not been concluded. Therefore in light of clarification by the General Administration Department as contained under memo no. 8811 dated 18-07-2017 which is self explanatory, I am of the opinion that the departmental proceeding initiated against Sri. pandey comes to an end on the date of death itself."

वर्णित परिप्रेक्ष्य में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र सं0-8811, दिनांक 18.07.2017 एवं विद्धान महाधिवक्ता के उपरोक्त परामर्श के आलोक में इस मामले को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनोदानन्द पाण्डेय, सेवानिवृत्त वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील), पटना पूर्वी एवं पश्चिमी प्रमंडल, पटना के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करते हुए इस मामले को संचिकास्त किया जाता है।

उक्त पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जनक राम, उप-सचिव।बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 4

गृह विभाग

(आरक्षी शाखा)

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अधिसूचनाएं

31 दिसम्बर 2018

सं0 1/एल1-10-15/2016-गृ0आ0/12029--श्री संतोष कुमार, भा0पु0से0 (2014) पुलिस अधीक्षक, षिवहर को अपनी पत्नी के प्रसव के निमित्त हेतु अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्‌टी) नियमावली 1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 18.12.2018 से 08.01.2019 तक कुल 22 (बाईस) दिनों के उपार्जित अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री कुमार की अवकाष अवधि में उनके द्वारा धारित पद के अतिरिक्त प्रभार में श्री सुजीत कुमार, भा0पु0से0 (2006), पुलिस अधीक्षक, सीतामढ़ी रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरीष मोहन ठाकुर, अवर सचिव।

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3 जनवरी 2019

सं0 2/पी01-20-02/2017 गृ0आ0/49--श्री अयोध्या सिंह (CRPF) अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान), अरवल को अपने कार्याें के अतिरिक्त अपर पुलिस अधीक्षक, (अभियान), जहानाबाद का अतिरिक्त प्रभार अगले आदेश तक दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दुर्गेश कुमार पाण्डेय, उप सचिव।

------- गृह विभाग (विषेष शाखा) ------ अधिसूचना 28 दिसम्बर 2018 सं0 एल/एच॰जी॰-14-06/2018-11602--बिहार गृह रक्षा वाहिनी में जिला समादेष्टा के रूप में पदस्थापित निम्नांकित पदाधिकारी की सेवा बिहार पुलिस मैनुअल के नियम 648(क) के आलोक में जिला समादेष्टा (पुलिस उपाधीक्षक स्तर) कोटि में उनके नाम के सामने अंकित तिथि से सम्पुष्ट की जाती हैः-

क्रम सं॰ नाम/पदनाम सम्पुष्टि की तिथि
1 श्री सुबोध कुमार, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, नालंदा 24.01.2018

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, अपर सचिव।

------ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परितर्वन विभाग, ------ अधिसूचना 27 दिसम्बर 2018

सं0 वन भूमि-75/2018-1386 (ई०)/प०व०--प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि अधिनियम, 2016, (2016 का 38) की धारा 4 की उपधारा (1) में प्रदान की गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बिहार सरकार, इस अधिनियम के उपयोगार्थ, बिहार के लोक-लेखा के ब्याज उपचित करने वाले खण्ड के अंतर्गत ''मुख्य-शीर्ष 8121-सामान्य तथा अन्य आरक्षित निधियाँ'' के नीचे एक विशिष्ठ-लघु-शीर्ष 129-राज्य क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि (एस0सी0ए0एफ0) के अंतर्गत एक विशेष निधि के रूप में संदर्भित बिहार प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि (बिहार कम्पनसैटरी एफोरेस्टेशन फण्ड) का एतद्‌द्वारा गठन किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह०) अस्पष्ट, अपर मुख्य सचिव।

The 27th December 2018

No. van bhumi-75/2018-1386 (ई०) /E.F.--In exercise of the powers conferred by sub- section (1) section 4 of the Compensatory Afforesation fund Act, 2016 (38 of 2018), the State Government hereby establishes for the purposes of this Act, a special Fund referred as "State Compensatory Afforestation Fund (SCAF)" under interst bearing section of Public Account of5 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 State of Bihar under distinct Minor head 129-State Compensatory Afforestation Fund (SCAF)" below the "Major Head 8121-General and other Reserve Funds".

By order of Governor of Bihar (Sd.) Illegible, Additional Chief Secretary.

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सामान्य प्रशासन विभाग

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अधिसूचना

4 जनवरी 2019

सं0 21/पि॰व॰रा॰आ॰-01/2012,सा॰प्र॰-143--पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग अधिनियम 1993 की धारा-3 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए धारा-9 में यथा विर्निदिष्ट कृत्यों के निष्पादन हेतु सेवानिवृृत्त न्यायमूर्ति, पटना उच्च न्यायालय, पटना श्री संजय कुमार को अगले तीन वर्षों के लिए राज्य स्तर पर गठित पिछडे़ वर्गों के लिए राज्य आयोग, बिहार, पटना का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है । 2. यह आदेश पदभार-ग्रहण की तिथि से प्रभावी माना जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हिमांशु कुमार राय, संयुक्त सचिव।

------ आपदा प्रबंधन विभाग ------ कार्यालय आदेश 24 दिसम्बर 2018 सं0 2/स्था0-03-07/2018/4424/आ0प्र0--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के आदेश सं0-498 दिनांक 01.12.2018 (क्रमांक-166) के आलोक में श्री विकाश कुमार पाण्डेय, नवनियुक्त सहायक द्वारा दिनांक 03.12.2018 के पूर्वाहन्‌ में आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना में योगदान समर्पित किया गया है।

2. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्गत कार्यालय आदेश संख्या-498 दिनांक-01.12.2018 की कंडिका-4 के आलोक में श्री पाण्डेय का दिनांक-03.12.2018 के पूर्वाहन्‌ में दिये गये योगदान को तीन माह के लिए औपबंधिक रूप से स्वीकृत किया जाता है।

3. सामान्य प्रशासन विभाग के कार्यालय आदेश के अनुसार इनके वेतनादि का भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान की तिथि 27.11.2018 से तीन माह तक औपबंधिक रूप से देय होगा। तीन माह के अन्दर सामान्य प्रशासन विभाग से नियुक्ति पत्र की सम्पुष्टि करा लेने के पश्चात्‌ ही वेतनादि का भुगतान किया जायेगा।

4. प्रथम वेतन विपत्र के साथ नियुक्ति पत्र की अभिप्रमाणित फोटो प्रति कोषागार में भेजी जायेगी। जिससे नियुक्ति पदाधिकारी के हस्ताक्षर का मिलान कोषागार पदाधिकारी पूर्व से कोषागार में उपलब्ध कराये गये नियुक्ति पत्र से कर लेंगे। 5. अधीक्षक, सचिवालय मुद्रणालय, गुलजारबाग, पटना से भी नियुक्ति पत्र की सत्यता की जाँच करायी जायेगी।

आदेश से, प्रत्यय अमृत, प्रधान सचिव।

------ आपदा प्रबंधन विभाग ------ कार्यालय आदेश 21 दिसम्बर 2018 सं0 2/स्था0-03-08/2018/4407/आ0प्र0--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के आदेश सं0-513 दिनांक 07.12.2018 के क्रमांक-03 एवं 04 पर अंकित श्री मोहम्मद अकिल एवं श्री अमरेश यादव, नवनियुक्त सहायक द्वारा दिनांक 12.12.2018 के पूर्वाहन्‌ में आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना में योगदान समर्पित किया गया है।

2. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्गत कार्यालय आदेश संख्या-498 दिनांक 01.12.2018 की कंडिका-4 के आलोक में श्री मोहम्मद अकिल एवं श्री अमरेश यादव का दिनांक 12.12.2018 के पूर्वाहन्‌ में दिये गये योगदान को उनके योगदान की तिथि से तीन माह के लिए औपबंधिक रूप से स्वीकृत किया जाता है।

3. सामान्य प्रशासन विभाग के कार्यालय आदेश संख्या-498 दिनांक 01.12.2018 के अनुसार इनके वेतनादि का भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान की तिथि (श्री मोहम्मद अकिल दिनांक 19.11.2018 एवं श्री अमरेश यादव दिनांक 23.11.2018) से तीन माह तक औपबंधिक रूप से देय होगा। तीन माह के अन्दर सामान्य प्रशासन विभाग से नियुक्ति पत्र की सम्पुष्टि करा लेने के पश्चात्‌ ही वेतनादि का भुगतान किया जायेगा।6 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 4. प्रथम वेतन विपत्र के साथ इनकी नियुक्ति पत्र की अभिप्रमाणित फोटो प्रति कोषागार में भेजी जायेगी। जिससे नियुक्ति पदाधिकारी के हस्ताक्षर का मिलान कोषागार पदाधिकारी द्वारा पूर्व से कोषागार में उपलब्ध कराये गये नियुक्ति पत्र से कर लेंगे।

5. अधीक्षक, सचिवालय मुद्रणालय, गुलजारबाग, पटना से भी नियुक्ति पत्र की सत्यता की जाँच करायी जायेगी।

आदेश से, एम॰ रामचन्द्रुडु, अपर सचिव।

------ Office of The Commissioner, Magadh Division, Gaya ------ Office Order (Revised) The 25th October 2018

No. XIL-रा॰-31/2017-3113--In the light of proposal received from Collector, Nawadah (letter no. 243 dt. 23.07.2018) power of certificate officer had been delegated to Sri Devenda Suman, Excutive Officer, Nagar Parishad, Nawadah for Nagar Parishad, Nawadah due to typing mistake. Now his region is extended to whole Nawadah District for disposal of certificate cases.

Sl. Name of Officer Designation Remarks
1 Sri Devendra Suman Executive Officer, Nagar Parisad, Nawada Nawada District

By Order, (Sd.) Illegible, Secretary to Commissioner.

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The 27th November 2018

No. I-स्था॰-71/2017-3458--In the light of proposal received from Collector, Gaya (letter no. 981 dt. 09.10.2018) power of certificate officer has been delegated to Sri Nikesh Kumar, District Co-oprative Officer, Gaya for disposal of certificate cases u/s-03(3) of Bihar & Orrisha public demand recovery act 1914.

Sl. Name of Officer Designation Remarks
1 Sri Nikesh Kumar District Co-operative Officer, Gaya Gaya District

By Order, (Sd.) Illegible, Secretary to Commissioner.

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The 1st December 2018

No. I-स्था॰-71/2017-3531--In the light of proposal received from Collector, Gaya (letter no.1113 dt.12/11/2018) power of certificate officer have been delegated to following officer for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914

Sl. Name of Officer & Designation Remarks
1 Sri Shailesh Kumar Das, Sr. Depy. Collector, Gaya Gaya Distrtict
2 Sri Ravi Kumar Sharma, Sr. Deputy Collector, Gaya Gaya District

By Order,

(Sd.) Illegible, Secretary to Commissioner.

7 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019

The 22nd December 2018

No. I-स्था॰-71/2017-3741--In the light of proposal received from Collector, Arwal (letter no.111 dt.30.11.2018) power of certificate officer has been delegated to Sri Prabhu Das, District Supply Officer, Arwal for disposal of certificate cases u/s 3(3) of Bihar & Orrisa Public Demand Recovery Act. 1914

Order of Commissioner, Magadh Division, Gaya dt. 14/12/2018

By Order, (Sd.) Illegible, Secretary to Commissioner.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 42—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 9 जनवरी 2019 8

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————

सूचना --------

सं0 12--मैं, देवेन्द्र कुमार, पिता-महेन्द्र प्रसाद, मुहल्ला-बजरंगपुरी, पो॰-गुलजारबाग, थाना-आलमगंज, जिला-पटना-800007 शपथ पत्र संख्या IN-BR00945121381012Q दिनांक 01.12.18 से अब मैं देवेन्द्र राजवीर के नाम से जाना जाऊँगा।

देवेन्द्र कुमार। No. 12---I, DEVENDRA KUMAR, S/O Mahendra Prasad, Mohalle- Bajrangpuri, P.O.-Gulzarbagh P.S.-Alamganj, Dist-Patna-800007 Affidavit No. IN-BR00945121381012Q Dated 01.12.18 that now onwards I shall be known as and from now the new name will be Devendra Rajveer for all purpose.

DEVENDRA KUMAR.

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No. 13---I, SUPRIYA D/O Ramballabh Sah R/O Bhagwan Nagar Gola road, Bailley Road, P.S. Rupaspur P.O. Danapur Cantt. Dist. Patna, Bihar Declare vide Afd. no: 26101 dt. 20.11.2018 shall be known as Supriya Raj for all future purposes.

SUPRIYA.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 42—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in9 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 बिहार गजट का पूरक(अ0) प्राधिकारी }kjk प्रकाशित

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सं0 कारा/स्था0(अधी0)-01-10/09--05 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 1 जनवरी 2019 विषयः-बिहार कारा सेवा के परीक्ष्यमान काराधीक्षकों का आधारभूत प्रशिक्षण।

बिहार कारा सेवा नियमावली, 1953 के नियम 33 में प्रशिक्षण का प्रावधान है, जिसके अन्तर्गत बिहार कारा सेवा के परीक्ष्यमान कारा अधीक्षकों का 01 वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित है।विभागीय पत्रांक-4952 दिनांक 30.11.2009 द्वारा बिहार कारा सेवा के परीक्ष्यमान कारा अधीक्षकों का 01 वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल रिट 406/2013, Re-Inhuman Conditions of Prisoners in 1382 Prisons of India में पारित आदेश के आलोक में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित ट्रेनिंग माड्‌यूल्स ऑफ बेसिक कोर्स फॉर प्रिजन ऑफिसर्स 2017 के आलोक में बिहार राज्य के अधीन बिहार कारा सेवा के नवनियुक्त परीक्ष्यमान काराधीक्षकों के लिए पूर्व से निर्धारित प्रशिक्षण का विषय एवं अवधि में संशोधन किया जाना आवश्यक हो गया है।

अतः सम्यक विचारोपरान्त बिहार कारा सेवा के नवनियुक्त परीक्ष्यमान काराधीक्षकों के लिए कुल 10 माह 01 सप्ताह

चरण पाठ्‌यक्रम समयावधि
चरण-1 भाग-1 नियमित अन्तर्वासी एवं बहिर्वासी सत्र 1. कारा एवं सुधार प्रशासन 2. अपराध शास्त्र एवं आहत शास्त्र 3. दण्ड शास्त्र एवं कारावास के लिए विकल्प 4. मनोविज्ञान 5. समाज शास्त्र एवं समाज कार्य 6. आपराधिक कानून एवं लघु कानून 7. मानव अधिकार एवं उत्—ष्ट कारा प्रबंधन 8. भारत का संविधान 9, आपराधिक न्याय प्रणाली 10. विधि विज्ञान 11. जेल अधिकारियों के लिए प्रबंधन के सिद्धांत 12. कारा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी 13. E-prison/ERP System/Computer 14. बिहार लोकल लॉ 15. सामान्य शासकीय नियम एवं नियमावली 6 माह
क्षेत्रीय भ्रमण देश के अंदर अध्ययन भ्रमण विशेष अल्पकालिक पाठ्‌यक्रम एवं प्रशिक्षण सत्र
पी0टी0/यू0ए0सी0/योग/विपश्यना एम.डी./मस्केट्री/अग्निशमन/वॉकी-टॉकी वायरलेस का प्रयोग
भाग-2 परीक्षा 1 माह
पारण परेड अभ्यास
पारण परेड
फेज-2 व्यवहारिक प्रशिक्षण हेतु संस्थागत संलग्नता 1. केन्द्रीय कारा, मंडल कारा, उप कारा में कारापाल, सहायक कारापाल, चिकित्सा पदाधिकारी, अधीक्षक, बंदियों एवं कारा की सुरक्षा के संबंध में व्यवहारिक प्रशिक्षण 6 सप्ताह 3 माह
2. संलग्न केन्द्रीय कारा के जिला मे न्यायिक कार्य संबंधी प्रशिक्षण ं 2 सप्ताह
3. संलग्न केन्द्रीय कारा के जिला के जिला पदाधिकारी के साथ प्रशिक्षण कार्य 1 सप्ताह
4. संलग्न केन्द्रीय कारा के जिला मे पुलिस अधीक्षक के साथ प्रशिक्षण ं कार्य 1 सप्ताह
5. संलग्न केन्द्रीय कारा के जिला में कोषागार प्रशिक्षण 2 सप्ताह
फेज-3 संस्थागत प्रशिक्षण का डिब्रीफिंग एवं प्रदर्शन मूल्यांकन 1 सप्ताह
बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 10

सभी नवनियुक्त परीक्ष्यमान काराधीक्षकों को सांस्थिक प्रशिक्षण हेतु बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान, हाजीपुर मेंं संलग्न किया जाएगा। सांस्थिक प्रशिक्षण के उपरान्त सभी प्रशिक्षु काराधीक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण हेतु केन्द्रीय काराओं में संलग्न किया जायेगा। संबंधित केन्द्रीय काराधीक्षक अपने-अपने वृताधीन काराओं में प्रशिक्षण हेतु निर्धारित अवधि एवं विषयों के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। साथ ही केन्द्रीय काराधीक्षक संबंधित जिला पदाधिकारी/पुलिस अधीक्षक/कोषागार पदाधिकारी/न्यायालय से संपर्क कर प्रशिक्षु काराधीक्षकों को जिला स्तर पर निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण दिलाने हेतु समय प्राप्त करने एवं प्रशिक्षण दिलवाने की भी व्यवस्था करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्प्ष्ट, उप सचिव-सह-उप निदेशक (प्र0)।

------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-06/2018--10 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 2 जनवरी 2019

चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि दिनांक 14.07.2018 को केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के संसीमित बंदी रॉकी सिंह उर्फ राकेष कुमार सिंह, पे0-रमेष कुमार सिंह की इलाज के दौरान हुई मृत्यु की घटना में श्री विधु कुमार, तत्कालीन काराधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ (सम्प्रति निलंबित) द्वारा बिहार कारा हस्तक-2012 का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करते हुए गंभीर कोताही एवं अपने कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता बरती गई है। साथ ही उनके द्वारा अपने दायित्वों का सम्यक्‌ निर्वह्‌न न करके उक्त बंदी के इलाज में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई है जिसके कारण बंदी की असमय मृत्यु हुई है। श्री कुमार का यह कृत्य बिहार कारा हस्तक के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।

2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री विधु कुमार, तत्कालीन काराधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, बक्सर के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र 'क' में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय। 3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के तहत अपर समाहर्त्ता, विभागीय जाँच, समाहरणालय, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा श्री राजीव कुमार झा, सहायक कारा महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4. श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।

5. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव पर माननीय मुख्य (गृह) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 6. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अंजनि कुमार, उप सचिव-सह-उप निदेषक (प्र0)।11 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-01/2017--198 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 7 जनवरी 2019 श्री संजय कुमार चौधरी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, बक्सर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (क्षेत्र), कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना के विरूद्ध उनके केन्द्रीय कारा, बक्सर में पदस्थापन काल में दिनांक 30/31.12.2016 की रात्रि में पाँच (05) सजायाफ्ता बंदियों के पलायन की घटना में बरती गई लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 218 दिनांक 16.01.2017 के द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, मोतिहारी निर्धारित किया गया। साथ ही उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2146 दिनांक 28.04.2017 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 3748 दिनांक 14.07.2017 के द्वारा श्री चौधरी को निलंबन से मुक्त करते हुए उन्हें कारा निरीक्षणालय (मुख्यालय) में प्रक्षेत्रीय सहायक कारा महानिरीक्षक के पद पर पदस्थापित किया गया। 3. संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 158 अनु0 दिनांक 09.02.2018 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल छः (06) आरोपों में से आरोप संख्या-04 एवं 06 को प्रमाणित, आरोप संख्या-01 एवं 03 को आंषिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप संख्या-02 एवं 05 को अप्रमाणित पाया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांक 1834 दिनांक 21.03.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री चौधरी से उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 4. श्री चौधरी ने अपने पत्रांक 3017 दिनांक 15.05.2018 के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि जाँच प्रतिवेदन के अनुसार वार्ड संख्या-29 के शौचालय की खिड़की को तोड़कर ठीक बगल में अवस्थित सेनिटरी पाईप की सहायता से उक्त पांचों बंदी नीचे उतरे थे और मुख्य पेरीमीटर वॉल पर चादर, गमछा, पानी का पाईप, पाकषाला में रोटी सेंकने वाले छड़ आदि को जोड़कर सीढ़ीनुमा रस्सी के सहारे कारा का मुख्य पेरीमीटर वॉल फाँदकर वे सब पलायन कर गये थे। शौचालय की खिड़की के बगल में लोहे का सेनेटरी पाइप अवस्थित है जो कि शौचालय से दूषित जल की निकासी के लिए है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि यह शौचालय का एक मौलिक संरचना है। उनका कहना है कि वहाँ पर प्रकाष की पर्याप्त व्यवस्था थी और वार्ड संख्या-29 की उार दिषा में लगभग 40 फीट की दूरी पर सोलर लाईट, अंदर एवं बाहर एल0ई0डी0 बल्ब लगे थे।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि पलायन की घटना को कार्यरूप देने के लिए शौचालय की जिस खिड़की को तोड़ा गया वह बिहार कारा हस्तक 2012 के नियम 714 (v) एवं (vi) के सुरक्षा मानक के अनुरूप निर्मित नहीं रहने कारण एवं दोषपूर्ण भवन संरचना के कारण उसे बंदियों द्वारा तोड़ा जा सका है, न कि छड़-जंगला की भौतिक रूप से नियमित तलाषी नहीं करने के कारण तोड़ा गया है। शौचालय की सभी खिड़कियों में स्पष्ट रूप से छड़ एवं जंगला दिखाई पड़ रहा है। जिस खिड़की को तोड़ा गया था उसमें भी छड़ एवं जंगला था एवं उक्त कक्ष की सुरक्षा के लिए आवष्यक कार्रवाई भी सुनिष्चित की गयी थी। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनके द्वारा बिहार कारा हस्तक-2012 के नियम-97,128,129,823 (vi) 830 (i) (ii) (iii) के अनुसार सुरक्षा प्रबंधन किया गया था। पलायन की घटना रात्रि के जिस पाली में हुयी थी उस समय कारा में एक कक्षपाल, एक उच्च कक्षपाल एवं एक मुख्य उच्च कक्षपाल की डयूटी लगाई गई थी। उनके द्वारा कारा से बंदी पलायन रोकने के लिए पर्याप्त कदम ससमय उठाये गये थे एवं कारा की स्थिति के संबंध में जिला स्तरीय एवं राज्य स्तरीय प्रषासन को ससमय अवगत कराया गया था। किसी भी क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया एवं कोई कार्रवाई नहीं की गई। 5. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री चौधरी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जबाव की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी समीक्षा में पाया गया कि जहां से भी पलायन सम्भावित था उसके सुरक्षा हेतु कार्रवाई करना अधीक्षक का कर्त्तव्य एवं दायित्व था जो उनके द्वारा नहीं किया गया। कारा के नियंत्री पदाधिकारी होने के नाते तथा बिहार कारा हस्तक 2012 के विहित प्रावधानों के तहत कारा पर समुचित निगरानी एवं अनुश्रवण रखने में वे विफल रहे हैं, जो इनकी कार्य के प्रति उदासीनता का द्योतक है। श्री चौधरी का यह कथन असत्य है कि बंदी पलायन की घटना के समय वहां प्रकाष की पर्याप्त व्यवस्था थी। विभाग के स्तर से गठित द्विसदस्यीय जांच दल ने भी जांच के क्रम में पाया कि पलायन की घटना जिस चहारदीवारी को फांदकर हुई थी वहां दूर-दूर तक प्रकाष की कोई व्यवस्था नहीं थी। जांच के क्रम में वहां एक भी बल्ब नहीं पाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि श्री चौधरी द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर विभाग को गुमराह करने का प्रयास किया गया।

आरोपित पदाधिकारी का यह बयान कि दोषपूर्ण भवन संरचना के कारण शौचालय के खिड़की को बंदियों द्वारा तोड़ा जा सका है स्वीकार करने योग्य नहीं है। उनका पदीय दायित्व था कि कारा के अंदर खिड़की-दरवाजा आदि के12 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 छड़-जंगला की भौतिक रूप से जांच समय-समय पर नियमित रूप से कराते, जो उनके द्वारा नहीं किया गया और इस कारण ही 05 बंदी कारा से पलायन कर गये। कारा जैसे संवेदनषील स्थान पर समुचित निगरानी नहीं रखने, कारा भवनों का रख-रखाव सही ढंग से नहीं होने के लिए कारा के नियंत्री पदाधिकारी होने के नाते वे इसके लिए पूर्ण रूप से दोषी है। केन्द्रीय कारा, बक्सर से पलायन की घटना उक्त तिथि को सुरक्षा में लगाये गये सुरक्षाकर्मियों की घोर लापरवाही का परिणाम है। सुरक्षाकर्मियों को पलायन के पूर्व एवं पलायन की घटना के बाद घटना की भनक क्यों नहीं लगी। यदि नियमित रूप से पूर्ण चुस्ती के साथ रात्रि गष्ती की जाती तो बंदी पलायन की उक्त घटना घटित नहीं होती। स्पष्ट होता है कि रात्रि गष्ती के नाम पर कारा के पदाधिकारियों/कर्मियों के द्वारा सिर्फ खानापूर्ति की जाती थी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मियों के कार्यों पर निगरानी नहीं रखे जाने एवं सतत्‌ अनुश्रवण नहीं किये जाने के परिणामस्परूप बंदी पलायन संभव हो पाया जिसके लिए आरोपित पदाधिकारी कारा सुरक्षा प्रबंधन में हुई लापरवाही एवं चूक के लिए पूर्णतः दोषी हैं। अतः उनका द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार योग्य नहीं है।

6. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री चौधरी के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :- '' संचयात्मक प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धि अवरूद्ध करने का दंड ''। 7. उपर्युक्त विनिष्चयी दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 5830 दिनांक 14.08.2018 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2626 दिनांक 31.12.2018 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 8. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री संजय कुमार चौधरी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, बक्सर सम्प्रति सहायक कारा महानिरीक्षक (क्षेत्र), कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय, बिहार, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :-

'' संचयात्मक प्रभाव से तीन (03) वेतनवृद्धि अवरूद्ध करने का दंड ''।

9. श्री चौधरी के निलंबन अवधि के संबंध में अलग से निर्णय लिया जायेगा।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अंजनि कुमार, उप सचिव-सह-उप निदेषक (प्र0)।

------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-12/2018--105 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 4 जनवरी 2019

चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री सुरेष चौधरी, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति निलंबित) संलग्न शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा, भागलपुर के द्वारा अपने कर्त्तव्यों में गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता बरती गई जिसके कारण दिनांक 11.08.2018 एवं दिनांक 21.08.2018 को जिला पदाधिकारी, पष्चिम चम्पारण, बेतिया एवं पुलिस अधीक्षक, पष्चिम चम्पारण, बेतिया द्वारा संयुक्त रूप से मंडल कारा, बेतिया में औचक रूप से की गई छापेमारी में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियां बरामद की गई। श्री चौधरी का यह कृत्य बिहार कारा हस्तक के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।

2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री सुरेष चौधरी, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति निलंबित) संलग्न शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा, भागलपुर के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र 'क' में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय।

3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के तहत आयुक्त तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4. श्री चौधरी से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।

5. विभागीय कार्यवाही के संचालन के प्रस्ताव पर माननीय मुख्य (गृह) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 6. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे।13 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव।

-------- सं0 कारा/नि0को0(विविध)-10-22/2015--106 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 4 जनवरी 2019 श्री जितेन्द्र कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ के विरूद्ध उनके विषेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर में पदस्थापन अवधि में दवा क्रय करने में वित्तीय अनियमितता बरतने तथा उनके शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में पदस्थापन के दौरान जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के द्वारा उनके विरूद्ध कर्त्तव्य में लापरवाही एवं विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन करने के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3815 दिनांक 24.06.2016 द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए निलंबनावस्था में केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ में संलग्न किया गया। साथ ही उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7140 दिनांक 28.11.2016 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु विभागीय जांच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जांच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 315 अनु0 दिनांक 27.03.2018 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल ग्यारह (11) आरोपों में से दो (02) आरोपों को प्रमाणित, तीन (03) आरोपों को आंषिक रूप से प्रमाणित तथा छः (06) आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांंक 2635 दिनांक 26.04.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री कुमार के द्वारा दिनांक 07.05.2018 को द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में लेखा सहायक द्वारा दवाओं के भुगतान हेतु विपत्र कंटिन्जेन्ट रजिस्टर में बनाया गया था तथा बिल बुक में भी चढ़ाकर बिल नंबर अंकित किया गया था परन्तु तत्कालीन कारापाल द्वारा अपने व्यक्तिगत लोभ के कारण हस्ताक्षर नहीं किये जाने की वजह से बनाये गये विपत्रों को काटकर अतिरिक्त आवंटन प्राप्त होने के बावजूद भी भुगतान न कर राषि प्रत्यर्पित कर दी गयी। विभागीय निदेष के अनुपालन में दवा भंडार मद में शेष आवंटन राषि `844336/- को प्रत्यर्पित किया गया। आरोपित पदाधिकारी ने कारा हस्तक के विभिन्न नियमों का हवाला देते हुए उल्लेख किया है कि कारा में पदस्थापित मिश्रक एवं कारा चिकित्सक बंदियों हेतु दवा का ईन्डेन्ट करते है। कारा चिकित्सक, तत्कालीन मिश्रक द्वारा बंदियों के प्राणरक्षार्थ भारत सरकार के उपक्रम मेसर्स कर्नाटका एण्टीबायोटिक्स एण्ड फर्मास्यूटिकल्स लि0 बंगलोर से दवाओं के क्रय का निर्णय लिया गया। जिला के अस्पतालों में दवाओं के क्रय की स्वीकृति देने के लिए सिविल सर्जन ही प्राधिकृत है।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि सुमित कुमार, राईटर कोई सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि सजावार बंदी था। बंदियों को वर्दी अनुमान्य नहीं है। जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के औचक निरीक्षण में उक्त बंदी को सिविल ड्रेस में देखा गया तो उनके द्वारा कारा हस्तक नियमों में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए कारा हस्तक नियम 395(i) के तहत लघु दण्ड के रूप में औपचारिक चेतावनी तथा कारा हसतक नियम 396(x) के तहत वृहत्‌ दण्ड के रूप में मेडिकल वार्ड राईटर से हटाकर अन्य साधारण वार्ड में तीन माह के लिए भेजा गया। जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा कोई कच्चा मांस या बनाया जा रहा मांस बरामद नहीं किया गया, केवल अनुमान लगाया गया है। कारा की सुरक्षा, बंदियों के निगरानी एवं बंदियों/काराकर्मियों को अनुषासित रखने की सम्पूर्ण जवाबदेही कारा के उपाधीक्षक की है। जिला पदाधिकारी के निरीक्षण प्रतिवेदन में दिये गये आदेष का अक्षरषः अनुपालन करते हुए उनके द्वारा दिनांक 04.08.2016 विपत्र संख्या-130 द्वारा आपूरक, श्री बृजकिषोर कुमार का 50 प्रतिषत (2572/-) तथा विपत्र संख्या-131 द्वारा आपूरक, श्री अविनाष शुक्ला का (33462/-) का भुगतान काट लिया गया है। 4. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जबाव की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी समीक्षा में पाया गया कि कारा अधीक्षक सम्पूर्ण कारा भंडार एवं स्टोर (गोदाम) सहित का नियंत्री पदाधिकारी होता है। अधीक्षक ही वित्तीय मामलों पर नियंत्रण तथा राज्य के कोषों के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के रूप में कार्य करता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अधियाचना कर एवं अतिरिक्त आवंटन प्राप्त करने के बाद भी भुगतान नहीं करने एवं राषि प्रत्यर्पित करने के लिए उनके द्वारा त्वरित कार्रवाई नहीं की गयी। श्री कुमार का यह कथन कि श्री रामचन्द्र महतो, तत्कालीन उपाधीक्षक द्वारा बकाये विपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किये जाने की वजह से राषि प्रत्यर्पित की गयी, को स्वीकार नहीं किया जा सकता।बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 14 बिहार कारा हस्तक 2012 के नियम-390(xxxi) में स्पष्ट अंकित है कि ''बंदी को दिये गये वस्त्र को पहनने से चूकना या इन्कार करना या अन्य बंदियों के पहनने के लिए इसका कोई भाग अदला-बदली करना या इसका कोई भाग खो देना, हटा देना, या बदल देना'' कारा अपराध होने के रूप में परिभाषित किया गया है। सुमित कुमार सजावार बंदी था और वह कैदी वस्त्र नहीं पहना था जो इस बात को परिलक्षित करता है कि कारा के अंदर अनियमितता व्याप्त थी और काराधीक्षक के रूप में कारा प्रषासन द्वारा उदासीनता बरती गयी है, जो श्री कुमार के कारा प्रषासन में नियंत्रण की कमी को दर्षाता है। श्री कुमार का यह कथन कि बाहरी प्रतिबंधित वस्तुओं के प्रवेष के लिये मुख्य रूप से कारा उपाधीक्षक जिम्मेवार हैं, अपने उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास है। उनका यह कहना कि उपाधीक्षक द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया जाता था, यह इस बात को दर्षाता है कि आरोपित पदाधिकारी का अपने अधीनस्थ कर्मियों पर नियंत्रण का अभाव था और आरोपित पदाधिकारी द्वारा काराधीक्षक के रूप में अपने कर्त्तव्य एवं पदीय दायित्वों का निर्वह्‌न नहीं की जाती थी।

5. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त करने का विनिष्चय किया गया :- ''दो (02) वेतनवृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड''। 6. उपर्युक्त विनिष्चयी दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 6607 दिनांक 14.09.2018 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2624 दिनांक 31.12.2018 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है। 7. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री जितेन्द्र कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त किया जाता है :-

''दो (02) वेतनवृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड''। 8. श्री कुमार के निलंबन अवधि के संबंध में अलग से निर्णय लिया जायेगा।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अंजनि कुमार, उप सचिव-सह-उप निदेषक (प्र0)।

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समाहरणालय,बक्सर

(स्थापना शाखा)

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आदेश

10 सितम्बर 2018

सं0 92/2018-19--अंचलाधिकारी,नावानगर के ज्ञापांक 625, दिनांक 31.08.2016, अनुमण्डल पदाधिकारी, डुमरॉंव के पत्रांक 2480, दिनांक 07.09.2016 एवं पुलिस अधीक्षक,निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2056, दिनांक 07.09.2016 के द्वारा प्राप्त प्रतिवेदनानुसार परिवादी श्री राजेश कुमार सिंह पिता श्री जग्रनाथ सिंह, ग्रामपो0-मोहनपुर, थाना-काराकाट गोड़ारी, जिला-रोहतास से चन्द्रभूषण प्रवीण, राजस्व कर्मचारी, हल्का नं0 5 एवं 6, अंचल नावानगर द्वारा 9000/- (नौ हजार) रूपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथो गिरफ्तार किये जाने एवं माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-I, पटना के न्यायालय में प्रस्तुत किये जाने के फलस्वरूप उन्हें निगरानी थाना काण्ड संख्या 083/2016, दिनाक 30.08.2016 अन्तर्गत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा 7/13(2)-सह-पठित धारा 13(1)(डी) के तहत न्यायिक हिरासत में दिनांक 30.

08.2016 को आदर्श केन्द्रीय कारा, बेउर पटना में भेजा गया। श्री प्रवीण, राजस्व कर्मचारी का उपर्युक्त कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 3 के उप नियम (i) के प्रतिकूल होने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(ग) में वर्णित प्रावधानों के आलोक में न्यायिक हिरासत की तिथि 30.08. 2016 के प्रभाव से इस कार्यालय के आदेश संख्या 72/2016-17, संसूचित ज्ञापांक 01-1122/स्था0, दिनांक 19.09.2016 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु अंचलाधिकारी, नावानगर से प्रपत्र 'क' की मांग की गयी।15 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 अंचलाधिकारी, नावानगर ने अपने पत्रांक 868, दिनांक 10.11.2016 द्वारा श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, निलंबित राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' अनुमण्डल पदाधिकारी, डुमरॉंव के माध्यम से प्राप्त कराया गया।

उपरोक्त प्राप्त प्रपत्र 'क' के आलोक में इस कार्यालय के आदेश संख्या 118/2016-17, संसूचित ज्ञापांक 01-1432/स्था0, दिनांक 15.11.2016 द्वारा श्री प्रवीण के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करते हुए संचालन पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त, बक्सर को नियुक्त किया गया एवं उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में अंचलाधिकारी, नावानगर को नामित किया गया था।

अंचलाधिकारी, नावानगर के पत्रांक 850, दिनांक 04.11.2016 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि श्री प्रवीण कारागार से मुक्त होने के फलस्वरूप दिनांक 04.11.2016 के पूर्वाह्‌न में योगदान किये है। श्री प्रवीण पर लगा आरोप गंभीर प्रकृति के होने तथा उनके विरूद्ध आपराधिक/कदाचार का मामला अन्वेषण/जॉंच/विचारण के अधीन होने के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(ग) में वर्णित प्रावधान के आलोक में इस कार्यालय के आदेश संख्या 142/2016-17, संसूचित ज्ञापांक 01-1556/स्था0, दिनांक 19.12.2016 द्वारा श्री प्रवीण के निलम्बन को यथावत बरकरार रखते हुए निलम्बन अवधि में इनका मुख्यालय भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर का कार्यालय निर्धारित किया गया।

संचालन पदाधिकारी -सह- उप विकास आयुक्त, बक्सर के पत्रांक 02मु0/अभि0, दिनांक 10.06.2017 द्वारा श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, निलंबित राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, नावानगर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत अधिगम/जॉंच अभिलेख प्राप्त कराया गया है। जॉंच अभिलेख के अवलोकन से प्रतीत होता है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, निलंबित राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' के आरोपों के संबंध में संलग्न साक्ष्यों सहित पत्रांक 1957/अभि0, दिनांक 25.11.2016 द्वारा श्री प्रवीण से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। उक्त स्पष्टीकरण हेतु पत्रांक 2012/अभि0, दिनांक 13.12.2016, पत्रांक 33/अभि0, दिनांक 09.01.2017, पत्रांक 157/अभि0, दिनांक 17.02.2017, पत्रांक 266/अभि0, दिनांक 10.03.2017 एवं पत्रांक 396/अभि0,दिनांक 10.04.2017 द्वारा श्री प्रवीण को स्मारित किया गया,परन्तु श्री प्रवीण द्वारा संचालन पदाधिकारी को विभागीय कार्यवाही के संचालन मे सहयोग प्रदान न करते हुए अनावश्यक कागजातों की मांग की जाती रही। श्री प्रवीण द्वारा अपना स्पष्टीकरण भी समर्पित नही किया गया। संचालन पदाधिकारी उप विकास आयुक्त, बक्सर द्वारा पत्रांक 02मु0/अभि0, दिनांक 10.06.2017 द्वारा श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, निलंबित राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, नावानगर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत अधिगम/जॉंच अभिलेख प्राप्त कराया गया है, जिसमें आरोपित कर्मी के विरूद्ध आरोपों को पूर्णतया प्रमाणित पाया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच अभिलेख में श्री प्रवीण के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाये जाने की स्थिति में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18 के उप नियम 3 में निहित प्रावधान के आलोक में आरोपी कर्मी श्री प्रवीण से इस कार्यालय के ज्ञाप सं0 01-1268/स्था0, दिनांक 04.09.2017 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न कर भेजते हुए 15 दिनों के अंदर द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी।

श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, निलंबित राजस्व कर्मचारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा न देकर दिनांक 23.11.2017 को एक आवेदन पत्र देते हुए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन (Inquiry Report) की प्रति एवं उपस्थापन पदाधिकारी का मंतव्य प्राप्त नही होने का उल्लेख करते हुए उक्त कागजातों को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में पुनः आरोपी कर्मी श्री प्रवीण को अंचल अधिकारी, नावानगर -सह- उपस्थापन पदाधिकारी का प्रतिवेदन पत्रांक 625, दिनांक 31.08.2016 की छायाप्रति/अनुमण्डल पदाधिकारी, डुमरांव के पत्रांक 2480, दिनांक 07.09.2016 की छायाप्रति तथा संचालन पदाधिकारी का जॉंच प्रतिवेदन पत्रांक 02मु0/अभिकरण, दिनांक 10.06.2017 की छायाप्रति (कुल 244 पृष्ठ) इस कार्यालय के ज्ञाप सं0 01-0091/स्था0, दिनांक 15.01.2018 के साथ संलग्न करते हुए कार्यालय के पत्रांक 01-0092/स्था0, दिनांक 15.01.2018 के द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के माध्यम से आरोपी कर्मी को तामिला कराने हेतु प्रेषित किया गया।

आरोपी कर्मी को प्रेषित पत्र का तामिला कराते हुए भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के ज्ञापांक 76, दिनांक 27.01. 2018 द्वारा तामिला प्रतिवेदन यथा पत्र वितरण पंजी की छायाप्रति प्राप्त करायी गयी, जो अभिलेख के साथ संलग्न है। पुनः दिनांक 08.02.2018 को द्वितीय कारण पृच्छा न देकर आरोपी कर्मी द्वारा एक आवेदन पत्र दिया गया जिसमें उप विकास आयुक्त -सह- संचालन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा विभागीय कार्यवाही का एकपक्षीय निष्पादन करने, विभागीय कार्यवाही संचालन के संबंध में संचालन पदाधिकारी को प्रक्रिया से अवगत कराने आदि का उल्लेख किया गया है। आरोपी कर्मी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा न देकर विषय से इतर आवेदन देना विभागीय कार्यवाही के निष्पादन को लंबित रखने का प्रयास है तथा सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल है।

आरोपी कर्मी द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा प्रस्तुत नही किये जाने के फलस्वरूप पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक 01-0533, दिनांक 19.04.2018 द्वारा आरोपी कर्मी को बिन्दुवार अभिलेख में उपलब्ध कागजातों का उल्लेख कर उनके द्वारा मांग की गयी कागजातों की छाया प्रतियॉं कुल 17 पन्ने संलग्न करते हुए इस कार्यालय के पत्रांक 01-0543/स्था0, दिनांक 20.04.2018 द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के माध्यम से तामिला कराने हेतु प्रेषित किया गया, जिसके आलोक में भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के पत्रांक 356, दिनांक 18.05.2018 द्वारा आरोपी कर्मी को तामिला कराये गये पत्र की प्रति संलग्न करते हुए तामिला प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया है, जो अभिलेख के साथ संलग्न है।16 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने हेतु आरोपी कर्मी को बार-बार स्मार पत्र दिये जाने के बावजूद भी श्री प्रवीण द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा न देने के कारण पुनः इस कार्यालय के ज्ञाप सं0 01-0970/स्था0, दिनांक 23.06.2018 द्वारा श्री प्रवीण को अंतिम अवसर प्रदान करते हुए 07 दिनों के अंदर अपना पक्ष रखने हेतु निदेशित किया गया, परन्तु आरोपी कर्मी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा न देकर दिनांक 18.05.2018 एवं दिनांक 02.07.2018 को पुनः आवेदन पत्र दिया गया जिसमें उप विकास आयुक्त -सह- संचालन पदाधिकारी एवं उपस्थापन पदाधिकारी को विभागीय कार्यवाही के निष्पादन संबंधी प्रशिक्षण लेने, आरोपी कर्मी का पक्ष नही सुनने तथा परिवादी श्री राजेश कुमार से आरोपी कर्मी द्वारा रू0 9000.00 रिश्वत की मांग को गलत एवं बनावटी बताते हुए अपने आवेदन पत्र में उनके उपर लगाये गये आरोप को निराधार बताया गया तथा निम्नांकित कागजातों की मांगी की गयी है :- 1. उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य की छायाप्रति। 2. जप्त प्रदर्श ए0,बी0,सी0,डी0 के नमूना की प्रति/सोडियम कार्बोनेट एवं फिनॉफथलीन पाउडर के नमूना की प्रति। उपरोक्त क्रमांक 01 में वर्णित उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य की प्रति इस कार्यालय के ज्ञापांक 01-1268/स्था0, दिनांक 04.09.2017, ज्ञापांक 01-0091/स्था0, दिनांक 15.07.2018 द्वारा आरोपी कर्मी को प्राप्त करा दी गयी है। क्रमांक 02 में वर्णित कागजात जो इस कार्यालय में उपलब्ध नही है। आरोपी कर्मी भी इस बात से अवगत है कि उनके द्वारा मांगा गया कागजात इस कार्यालय में उपलब्ध नही है फिर भी जानबूझकर बार-बार आवेदन देकर कार्यालय को गुमराह किये जाने एवं विभागीय कार्यवाही को पथभ्रष्ट एवं विलंबित करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपी कर्मी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा दाखिल नही करने एवं उनके द्वारा बार-बार आवेदन देकर अनावश्यक/अनुपलब्ध कागजात की मांग किये जाने से उनके विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित आरोप एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा दिया गया मंतव्य खंडित नही होता है। उप विकास आयुक्त -सह- संचालन पदाधिकारी से प्राप्त अभिलेख में उल्लेखित है कि पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2056, दिनांक 07.09.2016 द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार आरोपी कर्मी श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, निलंबित राजस्व कर्मचारी द्वारा उमा देवी उर्फ सिमली देवी पिता पचासी सिंह उर्फ श्री भगवान सिंह, ग्रामपो0-कड़सर, थाना-सोनवर्षा ओ0पी0, अंचल-नावानगर से अनुमण्डल पदाधिकारी,डुमरॉंव के न्यायालय आदेश ज्ञापांक 1618,दिनांक 04.08.2016 के आलोक में परिवादी के पक्ष में जॉच प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु प्रथम किस्त के रूप में दिनांक 29.08.2016 को मो0 1000.00/-रू0 लिया गया एवं मो0 9000.00/- रू0 लेते हुए दिनांक 30.08.2016 को निगरानी धावा दल द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

जॉचोपरान्त संचालन पदाधिकारी ने आरोपी कर्मी के विरूद्ध सभी आरोपों को पूर्णतया प्रमाणित पाया। आरोपी कर्मी को द्वितीय कारण पृच्छा हेतु बार बार मौका दिये जाने के बावजूद उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा दाखिल नही किया जाना भी आरोपी कर्मी के विरूद्ध लगाये गये आरोप को प्रमाणित करता है।

किसी भी सरकारी सेवक द्वारा अपने पदीय दायित्व से संबंधित सभी कार्याे को नियमानुसार ससमय सम्पादित किया जाना है तथा इसके लिए अवैध राशि की मांग भ्रष्ट आचरण का प्रतीक है। बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम 3 में यह प्रावधान है कि हर सरकारी सेवक सदा :- (1) पूरी शील निष्ठा रखेगा (2) कत्र्तव्य के प्रति निष्ठा रखेगा और (3) ऐसा कोई काम नही करेगा जो सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय हो।

श्री चन्द्रभूषण प्रवीण, सम्प्रति निलंबित ने राजस्व कर्मचारी, नावानगर के रूप में पदस्थापन के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी, डुमरॉव को परिवादी के पक्ष में जॉच प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु रिश्वत की मांग की एवं रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकडे़ गये। एक सरकारी कर्मचारी के लिये कार्य के बदले रिश्वत लेना गंभीर मामला है। इस तरह श्री प्रवीण द्वारा ऐसा कार्य किया गया जो सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय है एवं जो उनके कत्र्तव्य के प्रति निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह खडा करता है। श्री चन्द्रभूषण प्रवीण सम्प्रति निलंबित के कृत्य से प्रशासन की छवि धुमिल हुई है। श्री प्रवीण द्वारा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 3-1(I)(II)(III) के प्रतिकूल आचरण किया गया है। ऐसी स्थिति में श्री प्रवीण का सरकारी सेवा में बने रहना लोकहित एवं राज्यहित के विरूद्ध होगा, इससे भ्रष्टाचार एवं अराजकता को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकारी कर्मी के बीच गलत संदेश जायेगा। आरोपित कर्मी के विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड में पुलिस अधीक्षक, निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो) बिहार पटना के पत्रांक-2368/अप0 सा0 दिनांक-07/10/2016 से आरोपी कर्मी श्री चन्द्रभूषण प्रवीण के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, बक्सर से अभियोजन स्वीकृति की मांग की गयी थी, जिसके आलोक में जिला पदाधिकारी, बक्सर के आदेश ज्ञापांक-06-1294/विधि दिनांक-18/10/2016 द्वारा श्री प्रवीण के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी।

अतः मैं राघवेन्द्र सिंह, भा0प्र0से0, समाहर्ता -सह- जिला दण्डाधिकारी, बक्सर श्री चन्द्रभूषण प्रवीण सम्प्रति निलंबित राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं जॉच पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त आरोपित कर्मी के विरूद्ध प्राप्त जॉच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आरोपित कर्मी श्री चन्द्रभूषण प्रवीण को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित-2007 के नियम 14(xi) के तहत सेवा से ''बर्खास्तगी'' (DISMISSAL) जो ''सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी एवं निलंबन अवधि के लिए मात्र जीवन यापन भत्ता इन्हें देय होगा, की शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित करता हूॅ। श्री प्रवीण को इसके अलावा पेंशन, ग्रेच्यूटी एवं अन्य सेवान्त लाभ देय नही होगा। श्री चन्द्रभूषण प्रवीण से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्नवत है :-

1. नाम ः- श्री चन्द्रभूषण प्रवीण 2. पिता का नाम ः- स्व0 रामजी राम17 बिहार गजट, 9 जनवरी 2019 3. पदनाम ः- राजस्व कर्मचारी 4. जन्म तिथि ः- 06.05.1987 5. नियुक्ति तिथि ः- 23.08.2007 6. वेतनमान ः- 5200-20200 7. स्थायी पता ः- ग्राम-श्रीपुर, पो0-कहेन, थाना-आयर जगदीशपुर, जिला-भोजपुर इसकी सूचना सभी संबंधितों को दी जाय।

आदेश से,

(ह0) अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी।

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 42—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 09 January 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-01-09.2/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-01-09.2.