िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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सं॰ वन्य प्राणी-01/13-81(ई॰)/प0व0—राज्य में गैर-वन इलाकों में घोड़परास (Boselaphus tragocamelus) तथा जंगली सूअर (Sus scrofa) के कारण खेती के फसलों की व्यापक क्षति एवं अन्य स्वरूप के खतरों/दुर्घटना में मानवीय क्षति के प्रशमन हेतु वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (यथा संशोधित) की धारा-5(2) के अन्तर्गत मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक बिहार को अधिनियम की धारा-11(1)(b) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्ति को वन प्रमंडल पदाधिकारियों को उनके क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत प्रत्यायोजित करने हेतु प्राधिकृत किया जाता है। उक्त शक्तियों का प्रत्यायोजन एवं इनका प्रयोग निम्नांकित शर्त्तों एवं प्रावधानों के अधीन होगाः-
2. गैर-वन इलाकाें में घोड़परास एवं जंगली सूअर के कारण फसलों की क्षति एवं अन्य स्वरूप के खतरों/दुर्घटना में मानवीय क्षति के प्रशमन हेतु वन संरक्षक की अध्यक्षता में उनके क्षेत्राधिकार अन्तर्गत प्रत्येक जिले के लिए निम्नांकित समिति का गठन किया जाता है।
1) वन संरक्षक - अध्यक्ष 2) वन प्रमंडल पदाधिकारी - सदस्य सचिव 3) जिला पदाधिकारी द्वारा मनोनीत अपर समाहर्त्ता/उप समाहर्त्ता - सदस्य 4) प्रभावित अनुमंडलों के अनुमंडल पदाधिकारी - सदस्य 5) जिला कृषि पदाधिकारी - सदस्य 6) जिला पशुपालन पदाधिकारी - सदस्य यह समिति संबंधित इलाके के प्रखंडों/राजस्व अंचलों में इस संदर्भ में किसानों एवं अन्य नागरिकाें से प्राप्त आवेदनों या परिवादों के आधार पर घोड़परास तथा जंगली सूअर द्वारा अथवा उनके कारण घटित या आशंकित कृषि फसल क्षति या अन्य स्वरूप की क्षति या खतरा/जोखिम का अनुमान/आकलन एवं तत्संबंधी परिस्थिति की समीक्षा करेगी। ऐसी समीक्षा के आधार पर संबंधित प्रखंडों मेें क्षति पहुँचाने वाले घोड़परास अथवा जंगली सूअर को नष्ट करने या उनकी आबादी को कम एवं नियंत्रित करने हेतु सक्षम/दक्ष निशानेबाज द्वारा आग्नेयास्त्र की गोली से मारने/आखेट के लिए अनुज्ञा जारी किये जाने की सीमित संख्या समय-समय पर निर्धारित करेगी एवं इसके अनुसरण में कृत कार्रवाई एवं उसके फलाफल का अनुश्रवण करेगी।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22222222 जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15) 2019201920192019 3. समस्या ग्रस्त क्षेत्रों में किसानों या नागरिकों से क्षतिकारक या खतरनाक घोड़परास या जंगली सूअर की समस्या के निदान हेतु आवेदन पत्र या परिवाद अंचल अधिकारी/प्रखंड विकास पदाधिकारी/ वनों के क्षेत्र पदाधिकारी के पास प्राप्त किये जायेंगे। अंचल अधिकारी/प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा ऐसे आवेदन संकलित कर अपने प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के साथ अनुमंडल पदाधिकारी को 15 दिनों में समर्पित करेंगे। वनों के क्षेत्र पदाधिकारी ऐसे आवेदनों को अपने प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के साथ वन प्रमंडल पदाधिकारी को 15 दिनों में समर्पित करेंगे। अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी/अंचल अधिकारी के प्रतिवेदन को अपने अनुशंसा के साथ वन प्रमंडल पदाधिकारी को अग्रसारित किया जायेगा। आवश्यकतानुसार वन प्रमंडल पदाधिकारी ऐसे अग्रसारित आवेदनों एवं परिवादों के संबंध में स्वयं अथवा सहायक वन संरक्षक/वनों के क्षेत्र पदाधिकारी द्वारा स्थलीय प्रेक्षण 15 दिनों में करेंगेे। तदुपरान्त वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा उपर्युक्त समिति की बैठक संबंधित जिले में आयोजित की जायेगी एवं समिति द्वारा उपर्युक्त कंडिका-2 में इंगित आकलन एवं समीक्षा करके घोड़परास या जंगली सूअर के मारने/आखेट की संख्या निर्धारित की जायेगी। इस निर्धारित संख्या के अन्तर्गत घोड़परास या जंगली सूअर के मारने/आखेट हेतु सक्षम/दक्ष आग्नेयास्त्र लाईसेंसधारी शूटर/निशानेबाज को वन प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रत्येक दफा 100 से अनधिक एवं वन संरक्षक द्वारा प्रत्येक दफा 100 से अधिक एवं 500 से अनधिक की संख्या में मारने/आखेट के लिए अनुज्ञा जारी की जायेगी, जिसकी सूचना संबंधित किसानों या अन्य नागरिकाें को भी दी जायेगी।
4. समिति ऐसे आग्नेयास्त्र लाईसेन्सधारी, जिनके पास राईफल हो या 12 बोर की बंदूक के साथ, एलजी कार्टरेज हो एवं क्षति पहुँचाने वाले घोड़परासों या जंगली सूअर को मारने के इच्छुक होें, का पैनेल तैयार करेगी एवं उसमें अंकित व्यक्तियों या पूर्व से उपलब्ध ऐसे पेशेवर लाईसेंसधारी को वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा-11(1)(b) के अन्तर्गत पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अधीन आतंकी घोड़परास या जंगली सूअर को मारने की अनुज्ञप्ति वन प्रमंडल पदाधिकारी/वन संरक्षक द्वारा जारी की जायेगी।
5. उपर्युक्त घोड़परास/जंगली सूअर के मारने/आखेट की अनुज्ञा निम्नांकित प्रावधानों के अन्तर्गत विनियमित होगाः-
1) अनुज्ञप्ति की अवधि दो माह की होगी, जिसे विशेष परिस्थितियों में पुनः दो माह के लिए नवीकृत किया जा सकेगा।
2) इस प्रक्रिया के अन्तर्गत घोड़परास/जंगली सूअर के मारने/आखेट की कार्रवाई वन प्रमंडल पदाधिकारी अथवा उनके द्वारा प्रतिनियुक्त सहायक वन संरक्षक/वनों के क्षेत्र पदाधिकारी के पर्यवेक्षण में एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी/अंचल अधिकारी अथवा उनके द्वारा प्रतिनियुक्त पदाधिकारी/राजस्व कर्मचारी, एवं संबंधित पंचायतों/नगर पंचायतों के पदाधिकारियों/प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जायेगा तथा इस संबंध में संबंधित क्षेत्र में पूर्व सूचना दी जायेगी। 3) मारे गये घोड़परास/जंगली सूअर के शव का निष्पादन मिट्टी में दफना कर किया जायेगा तथा इनके अन्यथा उपयोग की अनुमति नहीं होगी।
4) अनुज्ञप्तिधारी को आतंकी घोड़परास या जंगली सूअर को मारने पर प्रति घोड़परास/जंगली सूअर रू0 750/- (सात सौ पचास रूपये) कार्टिज खर्च की भरपायी के रूप में देय होगा। मारे गये घोड़परास/जंगली सूअर को जमीन में गाड़ने हेतु रू॰ 1250/-(एक हजार दो सौ पचास रूपये) प्रति घोड़परास/ रू॰ 750/-(सात सौ पचास रूपये) प्रति जंगली सूअर के दर पर व्यय किया जायेगा। ये दर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार द्वारा कार्टिज इत्यादि के कीमत में परिवर्तन एवं मजदूरी दर में वृद्धि की समीक्षोपरान्त 20 प्रतिशत से अनधिक बढाये जा सकेंगे।
5) बाह्य पेशेवर शूटर की सेवा लेने के लिए यात्रा एवं अन्य प्रासंगिक खर्च का वहन युक्तिसंगत प्रावधानों के अनुसार किया जायेगा।
6) कार्टिज खर्च की भरपायी की राशि तथा मारे गये घोड़परास एवं जंगली सूअर को जमीन में गाड़ने हेतु देय राशि का भुगतान मुख्य शीर्ष-2406 वानिकी तथा वन्यप्राणी, उप-मुख्य शीर्ष-01 वानिकी, लघु शीर्ष-001 निदेशन तथा प्रशासन, माँग संख्या-19, उपशीर्ष-0001 निदेशन और प्रशासन, विपत्र कोड-19-2406010010001 के विषयशीर्ष 0001.33.02 मुआवजा इकाई से किया जायेगा।
7) समिति के सदस्य सचिव द्वारा मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक द्वारा विनिर्दिष्ट प्रपत्र में एक पंजिका संधारित की जायेगी। इस पंजिका में अनुज्ञा का विवरण के साथ-साथ हरेक दफा जारी शूटिंग अनुज्ञा के क्रियान्वयन के फलाफल के साथ इसकी प्रति मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक, बिहार को उपलब्ध कराया जायेगा।
6. इस आदेश के अन्तर्गत निम्नांकित सूची के जिलाें के चिन्हित प्रखंडों जिनमें प्राकृतिक वनक्षेत्र उपलब्ध हैं, के गैर-वन इलाकों में उनमें घोड़परास तथा जंगली सूअर की आबादी के नियंत्रण हेतु आखेट/मारने के पूर्व मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक को समस्या के स्वरूप के संबंध में तथ्यपूर्ण प्रतिवेदन समर्पित कर पूर्वानुमति प्राप्त की जायेगी।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22222222 जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15) 2019201920192019
| जिला | प्रखंड/अंचल |
| पश्चिमी चम्पारण | बगहा 2 (सिधाव), रामनगर, गौनहा, मैनाटाँड़, बैरिया |
| कैमूर | भगवानपुर, अधौरा, रामपुर, चैनपुर |
| रोहतास | चेनारी, शिवसागर, सासाराम, तिलौथु, रोहतास, नौहट्टा |
| औरंगाबाद | कुटुम्बा, देव, मदनपुर |
| गया | इमामगंज, डुमरिया, बांके बाजार, अमास, डोभी, बाराचट्टी, मोहनपुर, फतेहपुर, टनकुप्पा, वजीरगंज, मोहरा, नीमचक बथानी, अतरी |
| नवादा | सिरदल्ला, रजौली, गोविन्दपुर, कौआकोल, रोह |
| नालन्दा | राजगीर, गिरियक |
| जमुई | खैरा, सिकन्दरा, इस्लामनगर-अलीगंज, सोनो, चकाई, झाझा, लक्ष्मीपुर, बरहट |
| मु गेर ं | धरहरा, खड़गपुर, जमालपुर |
| लखीसराय | चानन, पिपरिया |
| बांका | बेलहर, चानन, कटोरिया, बौंसी, फुल्लीडुमर, बांका |
7. पूर्व की अधिसूचना संख्या, तिथि को अवक्रमित किया जाता है तथा इस अधिसूचना के अन्तर्गत व्यवस्था को आदेश निर्गत की तिथि से 05 (पाँच) वर्षों तक, अथवा इसके पूर्व राज्य सरकार द्वारा संशोधन किये जाने तक, के लिए लागू किया जाता है।
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