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अध्सिूचना
10 अक्तूबर 2018
सं॰ 22/नि॰सि॰(मुज॰)-06-05/2017/2291—श्री रमण कुमार (ID-3366), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान प्रमंडल, मोतिहारी संप्रति अधीक्षण अभियंता को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2016-17 में एजेण्डा सं0 133/293 एवं एजेण्डा सं0 133/294 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्यो को गुणवाा एवं विशिष्टि के अनुरूप निर्धारित तिथि तक पूर्ण नहीं किये जाने के मामले की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित निम्नलिखित आरोपों के लिए श्री कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-968 दिनांक 14.06.2017 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
(i) आपके द्वारा कार्य के कार्यान्वयन के दौरान वरीय पदाधिकारियों द्वारा बार-बार निदेशित करने के बावजूद स्थल पर कैम्प नहीं किया जाना, बिना सूचना के मुख्यालय से बाहर रहना, कार्य में आने वाली समस्याओं का निदान नहीं करना, अधीक्षण अभियंता को प्रगति की सूचना नहीं देना, जानकारी रहने के बाद भी वरीय पदाधिकारी के निरीक्षण में स्थल पर उपस्थित नहीं रहना यह दर्शाता है कि आपके द्वारा कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरती गयी तथा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना किया गया है। फलतः कार्य स-समय पूर्ण नहीं होना परिलक्षित होता है।
(ii) आपको तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा निदेश देने के बावजूद नजर अंदाज कर एजेण्डा सं0 133/294 के कार्यों की प्रगति 80% (अस्सी प्रतिशत) रहने के बावजूद गलत ढंग से जानबूझ कर कार्य को पूर्ण घोषित किया जाना आपकी गलत मंशा को परिलक्षित करता है एवं जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये है। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 फरवर(cid:15) 2019 श्री कुमार को उपलब्ध करा दिया गया। पुनः श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-863 दिनांक 20.09.2017 द्वारा कुछ कागजात की माँग की गई। श्री कुमार से प्राप्त पत्र की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत उनके द्वारा याचित कागजात/अभिलेख का आरोप से संदर्भित नहीं रहने के कारण विभागीय पत्रांक-2000 दिनांक 14.11.2017 द्वारा इस निदेश के साथ की अपना जवाब एक सप्ताह के अन्दर समर्पित किया जाय। श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता को सूचित किया गया। उक्त पत्र के आलोक में श्री कुमार द्वारा अपने पत्रांक-13 दिनांक 03.01.2018 से दिनांक 10.02.2018 तक अपना जवाब समर्पित करने हेतु समय की माँग विभाग से की गयी। पुनः श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-219 दिनांक 23.03.2018 द्वारा विभाग में समर्पित पत्र में दिनांक 31.05.2018 तक अपना स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु विभाग से समय देने की माँग की गयी। जिसे विभाग द्वारा स्वीकार करते हुए निश्चित रूप से अपना स्पष्टीकरण का जवाब दिनांक 31.05.2018 तक उपलब्ध कराने हेतु इस निदेश के साथ की जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में विभाग में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा, उन्हें संसूचित किया गया। अतएव श्री रमण कुमार, तत्कालीन कार्यपाल अभियंता, जल निस्सरण, मोतिहारी संप्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर से पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री कुमार से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण उनके विरूद्ध दोनों आरोपों को प्रमाणित पाया गया।
अतः उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री रमण कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी संप्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :- ''एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री रमण कुमार, अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। ''एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के अपर सचिव।
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