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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 February 2019

Published 04 February 2019

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-02-04.165
Languages
English, Hindi
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अध्सिूचना

24 सितम्बर 2018

laŒ 22@fuŒflŒ¼eksfrŒ½&08&08@2012@2126— श्री कृष्णनन्दन पासवान, माननीय सदस्य, बिहार विधान सभा से प्राप्त परिवाद के आलोक में पूर्वी चम्पारण जिलान्तर्गत जमुनिया शाखा नहर एवं सजावल नहर से निःसृत नहर के प्रणालियों के पुनस्र्थापन कार्यों में बरती गई अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-56 दिनांक-18.12.2012) के समीक्षोपरांत श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई0डी0-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) से विभागीय पत्रांक-266 दिनांक-10.02.2016 द्वारा निम्नांकित आरोप के लिए स्पष्टीकरण की माँग की गई :- आलोच्य कार्य के दौरान स-समय पर्याप्त स्थल निरीक्षण नहीं करने तथा अधीनस्थ पदाधिकारियों को आवश्यक निदेश नहीं देने के कारण कार्य स-समय पूर्ण नहीं होने तथा कार्य त्रुटिपूर्ण होने के लिए दोषी हैं। उक्त आलोक में श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित बचाव-बयान के मुख्य अंश निम्नवत हैः- आलोच्य दोनों कार्यों का एकरारनामा कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-01, मोतिहारी द्वारा क्रमशः 16F2/2011-12 दिनांक-02.06.2011 एवं 17F2/2011-12 दिनांक-03.06.2011 को किया गया है तथा दोनों कार्यों का कार्य समाप्ति की तिथि 15.06.2011 थी। कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के अनुशंसा के आलोक में समय वृद्धि पत्रांक-437 दिनांक-13.02.2012 से 15.03.2012 तक प्रदान की गयी। उनके द्वारा कहा गया कि वे दिनांक-15.06.2010 से 16.02.2012 तक मुख्य अभियंता के प्रभार में रहे है। उक्त पदस्थापन अवधि में निजी कार्यों एवं बाढ़ अवधि कार्यों में काफी व्यस्त रहा तथा पिताजी के बिमारी के कारण दिनांक-01.03.2011 से 14.03.2011 तक उपार्जित अवकाश में रहा तथा दिनांक-02.06.2011 को उनकी मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप दिनांक-02.06.2011 से 26.06.2011 तक पुनः उपार्जित अवकाश में रहा तथा माताजी के देहान्त के कारण भी दिनांक-19.09.2011 से 02.10.2011 तक उपार्जित अवकाश में रहना पड़ा। घरेलू उलझन के बावजूद वर्ष 2011 में बाढ़ अवधि के दौरान गंडक, पण्डई एवं मसान आदि नदियों में बाढ़ अवधि में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में व्यस्तता रही तथा गंडक नदी में बाढ़ के कारण काफी प्रयास के बाद P.D Ring बाँध को बचाया गया। इसके आलावे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बाढ़ के कटाव से प्रभावित स्थलों पर सुरक्षात्मक कार्य के योजनाओं के टी0ए0सी0, SRC तथा निविदा निस्तार आदि कार्यों को कराने की प्रक्रिया में अतिव्यस्त रहा। इस प्रकार पदस्थापन अवधि में उक्त कार्य के एकरारनामा की तिथि 03.06.2011 से दिनांक-16.02.2012 के दौरान सरकारी 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 फरवर(cid:15) 2019

दायित्वों का निर्वहन निजी परेशानियों के बावजूद किया गया। इस सब कारण से विषयांकित कार्यों में अपेक्षाकृत समुचित समय नहीं मिल पाया। फिर भी कार्यों की प्रगति की समीक्षा मासिक बैठक में की जाती रही तथा आवश्यक अनुशंसा के फलस्वरूप समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गयी।

बाढ़ अवधि में बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों तथा बाढ़ अवधि के बाद कटाव निरोधक कार्य के चयन, तकनीकी सलाहकार समिति/योजना समीक्षा समिति की बैठक में योजनाओं को स्वीकृत कराने एवं निविदा आदि के निष्पादन करने आदि कार्यो में नहर/बाढ़ आदि कार्यों से सम्बद्ध मुख्य अभियंता के प्राथमिकता विभागीय निदेशानुसार स्वतः रहती है। इन कार्यों में अतिव्यस्तता के कारण नहर कार्यों के लिए समुचित समय नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में कार्यों के सुचारू रूप से कराने की मूल जिम्मेदारी नहर के कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता की रहती है। जब तक की कोई विशेष मामला मुख्य अभियंता के समक्ष नहीं लाया जाता है। इसके बावजूद मासिक बैठक में समीक्षा के दौरान एवं मोबाईल पर नहर से संबंधित कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता को नहर कार्यों को सुचारू रूप से कार्यान्वयन हेतु उनके द्वारा निर्देश दिया जाता रहा। इसी क्रम में उनके प्रस्ताव के आलोक में प्रासंगिक कार्यों के समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गयी थी। उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में उनके द्वारा स्पष्टीकरण पर विचार करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री चौधरी के विरूद्ध प्रश्नगत दोनों कार्यों के कार्यान्वयन के दौरान पर्याप्त स्थल निरीक्षण करते हुए अधीनस्थों को दिशा-निर्देश नहीं देने के कारण स-समय कार्य पूर्ण नहीं होना एवं त्रुटिपूर्ण कार्य का विपत्र तैयार किये जाने से संबंधित है। उड़नदस्ता द्वारा स्थल आदेश पंजी पर इनके द्वारा किसी प्रकार का अभ्युक्ति दर्ज नहीं करने तथा स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं रहने के आधार पर कार्यों का निरीक्षण नहीं करने तथा अधीनस्थों को दिशा-निदेश नहीं देने के लिए इन्हें दोषी होने का अभ्युक्ति दर्ज की गयी। श्री चौधरी द्वारा मुख्य रूप से कहा गया कि बाढ़ अवधि में बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों तथा बाढ़ के बाद कटाव निरोधक कार्यों के चयन, तकनीकि सलाहकार समिति/योजना समीक्षा समिति की बैठक में योजना स्वीकृत कराने एवं निविदा के निष्पादन आदि कार्यों में अतिव्यस्तता के कारण नहर कार्यों में कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता पर निर्भरता रहती है, जब तक कि कोई विशेष मामला मुख्य अभियंता के समक्ष नहीं लाया जाता है। इसके बावजूद मासिक बैठक में समीक्षा के दौरान एवं मोबाईल से नहरों से संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को नहर के कार्यों को सुचारू रूप से कार्यान्वयन हेतु दिशा-निदेश दिया जाता रहा है तथा आवश्यकतानुसार स्थल निरीक्षण भी किया जाता रहा है। इस क्रम में उनके द्वारा अनुशंसित प्रस्ताव के आलोक में प्रासंगिक दोनों कार्यों का समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गयी। श्री चौधरी का उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि दिनांक-01.06.2016 के पूर्व मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के परिक्षेत्राधीन बाढ़ एवं नहरों से संबंधित कार्यों का सम्पादन किया जाता था। इनके द्वारा बचाव बयान के साथ कार्यों के पर्यवेक्षण/निरीक्षण से संबंधित मात्र एक निरीक्षण प्रतिवेदन (जो कटाव निरोधक कार्य से संबंधित है) उपलब्ध कराया गया, जबकि श्री चौधरी दिनांक-15.06.2010 से 16.02.2012 अर्थात लगभग एक वर्ष आठ माह मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) के पद पर कार्यरत रहे। उक्त अवधि में नहरों में कराये जा रहे पुस्र्थापन कार्य का न तो कोई निरीक्षण प्रतिवेदन, न ही कोई समीक्षात्मक बैठक से संबंधित प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। अतएव इनका कथन कि बाढ़ कार्य में अतिव्यस्तता के कारण नहर पुनस्र्थापन कार्य में पर्याप्त समय नहीं दिया जा सका, स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि इनके द्वारा प्रश्नगत दोनों कार्यों के समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गयी। इससे स्पष्ट है कि इनके द्वारा कार्यों का बिना समीक्षा किये ही समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गयी जो उचित नहीं है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री चौधरी से प्राप्त स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए प्रश्नगत कार्यों का स-समय निरीक्षण/पर्यवेक्षण नहीं करने के लिए दोषी पाया गया। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री दिनेश कुमार चौधरी (ID-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध ''निन्दन (वर्ष 2012-13)'' की शास्ति अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री दिनेश कुमार चौधरी (ID-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर संप्रति अधीक्षण अभियंता, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) अंचल, पटना के विरूद्ध ''निन्दन (वर्ष 2012-13)'' की शास्ति अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, jktHkw"k.k izlkn] ljdkj ds mi lfpoA

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 February 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-02-04.165/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-02-04.165.