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अध्सिूचना
13 सितम्बर 2018
सं॰ 22/नि॰सि॰(मुज॰)-06-03/2018/2055— श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर को उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी के सुप्पी प्रखण्ड के अन्तर्गत बागमती नदी के बाँये तटबंध के रामपुरकंठ स्थल पर बाढ़ वर्ष 2017 के पूर्व कटाव निरोधक कार्य एवं बाढ़ अवधि के दौरान कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की जाँच माननीय सांसद श्रीमती रमा देवी से प्राप्त परिवाद पत्र के आलोक में विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-813 दिनांक-02.04.2018 द्वारा श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता से स्पष्टीकरण पूछा गया। रामपुरकंठ स्थल पर बाढ़ 2017 के दौरान कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की जाँच हेतु तत्काल स्थलीय जाँचोपरांत आपके स्तर से प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया जाना अपेक्षित था। परन्तु अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, सीतामढ़ी के पत्रांक-1031 दिनांक-19.08.2017 एवं विभागीय बेतार संवाद सं0-450 दिनांक-26.08.2017 तथा पुनः विभागीय बेतार संवाद सं0-79 दिनांक-19.09.2017 को संज्ञान में नही लेने एवं इस पर विभाग को जाँचोपरांत प्रतिवेदन समर्पित नहीं किये जाने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। उक्त के आलोक में श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर संप्रति अभियंता, गुण नियंत्रण अंचल, अनिसाबाद, पटना द्वारा अपने पत्रांक-210 दिनांक-03.05.2018 द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गयी है :-
(क) श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा कहा गया है कि बाढ़ अवधि 2017 (15 जून से 15 अक्टूबर) में पश्चिमी चम्पारण के विभिन्न नदियों में बाढ़ की स्थिति के मद्देनजर मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के रूप में अस्थाई मुख्यालय, बेतिया निर्धारित किया गया था, के अनुपालन में बेतिया आई0बी0 मे अस्थाई कैम्प बनाया गया एवं कार्यालय आदेश सं0-49 दिनांक-07.07.2017 के द्वारा सचिव (प्रा0) एवं कार्यालय के विजय कुमार वर्मा, कार्यपालक अभियंता को निदेश दिया गया था कि वे प्राप्त डाक को प्रतिदिन देखेंगे एवं निष्पादन हेतु संचिका प्रस्तुत करेंगे। विभाग से प्राप्त निदेश/आदेश के संबंध में दूरभाष पर उन्हें अवगत करायेंगे।
(ख) श्री चौधरी द्वारा कंडिका 3 एवं 4 में कहा गया है कि मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर परिक्षेत्राधीन विभिन्न नदियों में आयी प्रलयकारी बाढ़ आदि के कारण विभिन्न स्थल पर हुए टूटान की मरम्मति2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 फरवर(cid:15) 2019 युद्ध स्तर पर कराना बाध्यता थी। जिसके लिए विभागीय पत्रांक-1980 दिनांक-15.05.2017 विभागीय बेतार संवाद सं0-481 दिनांक-30.08.2017, 486 दिनांक-31.08.2017, 71 दिनांक- 16.09.2017 से आदेश दिये जा रहे थे। फलतः मुजफ्फरपुर कार्यालय एवं बेतिया कैम्प कार्यालय में बैठकर संचिकाओं का निष्पादन एवं अन्य कार्य का समय नहीं था।
(ग) श्री चौधरी द्वारा कंडिका 5 एवं 6 में कहा गया है कि बाढ़ अवधि में विभिन्न स्थलों पर हो रहे कठिनाईयों एवं उसके समाधान के लिये कृत कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो में लगातार अतिव्यस्तता एवं स्थल पर कैम्प करने के कारण अधीक्षण अभियंता से प्राप्त प्रतिवेदन को देखने का अवसर भी नहीं मिला। इस प्रकार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में टूटान स्थल पर कैम्प करने एवं अतिव्यस्त रहने के कारण विभागीय N.R-450 दिनांक-26.08.2017 एवं 79 दिनांक-19.09.2017 को भी देखने का अवसर नहीं मिला। फिर भी विभागीय N.R के आलोक में कार्यालय के N.R-164 दिनांक-27.08.2017 के द्वारा अधीक्षण अभियंता, सीतामढ़ी से पूर्ण जाँचोपरांत मंतव्य सहित प्रतिवेदन की माँग की गई थी। परन्तु अधीक्षण अभियंता से प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुए एवं पदावनत होने के कारण दिनांक-04.10.2017 को स्वतः प्रभार सौंपकर विभाग में योगदान कर लिया गया।
(घ) श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा कंडिका 7, 8 एवं 9 मे दिनांक-12.08.2017 से 03.10.2017 तक में परिक्षेत्राधीन विभिन्न स्थलों पर हुए टूटान को उल्लेख करते हुए उसकी मरम्मति/बन्द करने हेतु की गयी कार्रवाई एवं उसमें व्यस्तता तथा कटाव प्रभावित स्थल के सुरक्षा के दृष्टिकोण से टी0ए0सी0 के लिये योजनाओं का चयन, टी0ए0सी0 में योजनाओं को जमा कराने में व्यस्तता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि श्रीमती रमा देवी, माननीय सांसद सदस्य द्वारा की गयी शिकायत के आलोक में अधीक्षण अभियंता से जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया एवं उनके द्वारा प्रतिवेदन दिया गया। इस प्रकार विभागीय बेतार संवाद का संज्ञान लिया गया। विभागीय बेतार संवाद एवं अधीक्षण अभियंता के पत्र के आलोक में प्रलयकारी बाढ़ से युद्ध की तरह बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में स्थलीय प्रकृति के अनुसार अतिव्यस्त रहने के कारण जाँच करने एवं विभाग को प्रतिवेदित करने का अवसर नहीं मिला। इस स्थिति में उारदायी ठहराना न्यायोचित नहीं है। श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये हैं :-
श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध आरोप है कि रामपुरकंठ स्थल पर बाढ़ वर्ष 2017 के दौरान कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में बरती गई अनियमितता के जाँचोपरांत जाँच प्रतिवेदन विभागीय निदेश के बावजूद भी उपलब्ध नहीं कराने से संबंधित है।
उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.3.0 एवं निष्कर्ष कंडिका 8.0.0 (iii) तथा संचिका में रक्षित अभिलेख से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य स्थल का जिला पदाधिकारी सीतामढ़ी के साथ माननीय सांसद महोदया श्रीमती रमा देवी द्वारा दिनांक-17.08.2017 को स्थल निरीक्षण के दौरान पायी गई कमी तथा ई0सी0 बैग में बालु पूर्ण रूपेण भरे जाने के बदले 5-10 अदद् खाली बैग एवं 5 से 10 kg मिट्टी पाये जाने को उद्धित करते हुए विभाग को प्रतिवेदित किया गया है। जिसके क्रम में विभागीय बेतार सं0-450 दिनांक-26.08.2017 से आरोपों की पूर्ण जाँचोपरांत एक प्रतिवेदन विभाग को तीन दिनों के अन्दर उपलब्ध कराने का निदेश आरोपी पदाधिकारी श्री चौधरी को दिया गया था। अधीक्षण अभियंता, सीतामढ़ी द्वारा प्रश्नगत स्थल पर माननीय सांसद श्रीमती रमा देवी द्वारा दिनांक-17.08.2017 को स्थल निरीक्षण के दौरान सार्वजनिक रूप से अभद्र एवं अमर्यादित व्यवहार करने के संदर्भ में वस्तुस्थिति को उद्धित करने के संदर्भ में एक प्रतिवेदन तत्कालीन मुख्य अभियंता श्री चौधरी को दिया गया है एवं उनके स्तर से भी कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की जाँच कराने का अनुरोध किया गया एवं उसकी प्रति विभाग को दिया गया। जिसके क्रम में विभागीय बेतार संवाद सं0-79 दिनांक-19.09.2017 से पुनः जिला पदाधिकारी सीतामढ़ी के पत्र में वर्णित बिन्दुओं को समावेश करते हुए समेकित रूप से पूर्ण प्रतिवेदन की माँग की गई।
श्री चौधरी द्वारा अपने बचाव बयान मे मुख्य रूप से बाढ़ 2017 के दौरान बाढ़ विभिषिका के कारण विभिन्न स्थलोंं पर टूटान की मरम्मति तथा बाढ़ 2017 के पश्चात कराये जाने वाले कटाव निरोधक कार्य के लिये T.A.C में योजना का चयन एवं योजना के उपस्थापन के व्यस्तता को उद्धित करते हुए कहा गया है कि विभागीय बेतार संवाद एवं अधीक्षण अभियंता के पत्र के आलोक में प्रलयकारी बाढ़ से युद्ध की तरह बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में स्थलीय स्थिति के अनुसार एवं विभागीय निदेशानुसार अतिव्यस्त रहने के कारण प्रश्नगत स्थल की जाँच करने एवं विभाग को प्रतिवेदित करने का अवसर नहीं मिला एवं अधीक्षण अभियंता के पद पर पदावनत होने के कारण दिनांक-04.10.2017 को मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को स्वतः प्रभार सौंपकर विभाग में योगदान पड़ा। इतने गंभीर अनियमितता के संबंध में जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी द्वारा विभाग को दी गयी सूचना एवं अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, सीतामढ़ी द्वारा माननीय सांसद श्रीमती रमा देवी द्वारा सार्वजनिक रूप से किये गये अभद्र व्यवहार एवं उक्त अनियमितता के संबंध में दिये गये प्रतिवेदन जो परस्पर विरोधाभाषी है, के संदर्भ में विभाग द्वारा स्थल जाँचोपरांत पूर्ण प्रतिवेदन की माँग की गयी एवं स्मारित करने के बावजूद की वांछित प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध नहीं कराया जाना एवं कहना कि बाढ़ अवधि में अतिव्यस्तता के कारण स्थल जाँचोपरांत प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया जा सका, स्वीकार योग्य नहीं है,3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 4 फरवर(cid:15) 2019 क्योंकि अगर श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता कार्य में अतिव्यस्त थें तो क्षेत्रीय स्तर पर एक समिति का गठित कर मामले की जाँच कराकर विभागीय निदेश के अनुपालन में पूर्ण प्रतिवेदन समर्पित करना इनका दायित्व था, परन्तु ऐसा श्री चौधरी के द्वारा नहीं किया गया न ही स्वंय के स्तर से जाँच की गयी। जो श्री चौधरी के कार्य के प्रति उदासीनता एवं कर्तव्यहीनता तथा उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना को दर्शाता है।
समीक्षोपरांत श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर संप्रति अधीक्षण अभियंता को विभागीय निदेश के बावजूद वांछित प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप प्रमाणित होता है एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चौधरी को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है :-
''आरोप वर्ष 2017-18 के लिए निन्दन की शास्ति'' अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय श्री दिनेश कुमार चौधरी, अधीक्षण अभियंता, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) अंचल, पटना को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। ''आरोप वर्ष 2017-18 के लिए निन्दन की शास्ति''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, सरकार के उप सचिव।
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[ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त?