िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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((((स(cid:26)(cid:23) पटन(cid:4) 1(cid:29)(cid:18)) ) ) ) पटन(cid:4)(cid:30) म(cid:26)गलव(cid:4)र 5555 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2012012012019999 जल संसाधन विभाग ——— अधिसूचना 5 twu 2018
सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति0)-08-06/2010/1234—श्री भरत पूर्वे (आई0डी0-1894), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-01, मोतिहारी के विरूद्ध उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि वर्ष 2004-05 से 2009-10 के दौरान उनके द्वारा संपादित शिविर मरम्मति कार्यों की अभिलेखीय एवं स्थलीय जाँच संबंधी उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-511 दिनांक 24.02.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
(1) संपादित कार्यों की माप पुस्त में अंकित मापी की नियमानुकूल जाँच कार्यपालक अभियंता के रूप में उनके द्वारा नहीं की गयी।
(2) माप पुस्त सं0-2511 एवं 2521 में अंकित विपत्र में कार्यपालक अभियंता के रूप में उनके द्वारा सुधार हेतु राशि की कटौती की गयी, जो कोडल प्रावधान के विरूद्ध है। उस राशि को बिना सुधार कराने से संबंधित साक्ष्य के विमुक्त किया गया है, जो विाीय अनियमितता का द्योतक है। (3) पी0सी0सी0 सड़क कार्य की गुणवाा जाँच में सीमेंट बालू का अनुपात 1ः2 के स्थान पर 1ः4.1 पाया गया जो विशिष्टि से काफी कम है।
(4) वर्ष 2009-10 में संपादित कार्यों की स्थलीय जाँच में रंगाई पोताई एवं पेंटिंग कार्य घटिया स्तर का पाया गया। कलरवाश का कार्य पुराने कोट पर ही किया हुआ पाया गया जिसके लिए वे दोषी है। श्री पूर्वे के दिनांक 31.03.2015 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना सं0-1621 दिनांक 20.07.2015 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43बी0 में सम्परिवर्तित किया गया।
उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री पूर्वे के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01, 02 एवं 04 को प्रमाणित तथा आरोप सं0-03 को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-351 दिनांक 06.03.2017 द्वारा श्री पूर्वे से संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए द्वितीय कारणपृच्छा की गयी। उक्त आलोक में श्री पूर्वे से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा के बचाव बयान का मुख्य अंश निम्नवत है :-
2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5555 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2019201920192019सिंचाई हस्तक अनुरूप (1993) के पृ0-198 के 8, 2क में बिहार सरकार के तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा कार्य के मापी हेतु निर्गत दिशा निदेश में अंकित है कि वैसे कार्य जिसकी मापी की जाँच बाद में नहीं की जा सकती है ऐसे कार्य की मापी की जाँच कार्यपालक अभियंता को दस प्रतिशत करनी है। प्रस्तुत कार्य पुराने आवास की मरम्मति सम्पोषण कार्य है। इस कार्य के अन्तर्गत कोई नया निर्माण कार्य नहीं हुआ है।
पिछले वर्ष की रोकी गई ` 10,000/-(दस हजार) की राशि कार्य करने के पश्चात अगले विाीय वर्ष में भुगतान की गयी। इसमें प्रक्रियात्मक भूल हो सकती है, परन्तु कोई अनियमितता नहीं की गयी।
वर्ष 2009-10 का कार्य मार्च 2010 तक पुरा हुआ है। 07.02.2010 को वहाँ प्रभार किया था। वैसे भी कलरवाश का कार्य सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के देख रेख में होता है, वाशिंग कार्य की जाँच हेतु विभाग द्वारा कोई प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं है ताकि जाँचफल प्राप्त होने के बाद भुगतान किया जाय। महिनों बाद यदि कोई त्रुटि परिलक्षित होता है तो इसके लिए तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को दोषी ठहरना उचित प्रतीत नहीं होता है। विभागीय समीक्षा आरोप-1 :- संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन कि सम्पोषण एवं मरम्मति कार्य में दस प्रतिशत मापी की जाँच किये जाने का नियम लागू नहीं होता है, को साक्ष्य के आभाव में अस्वीकार योग्य मानते हुए प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।
आरोपी द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा में सिंचाई हस्तक अनुपूरक (1993) के पृ0 198 की छायाप्रति संलग्न करते हुए कहा गया कि ऐसे कार्य जिसकी मापी की जाँच बाद में नहीं की जा सकती है, वैसे कार्यों की ही मापी की जाँच कार्यपालक अभियंता को दस प्रतिशत करनी है, को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता क्योंकि उक्त अभिलेख में यह अंकित नहीं है कि सम्पोषण मद से कराये गये कार्यों की मापी कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं किया जाना है, जबकि मुख्य सचिव का परिपत्र सं0-01/स्था0-108/81-462 दिनांक 30.03.82 के विविध कंडिका 10 के अनुसार कार्यपालक अभियंता को प्रत्येक एकरारनामा के 10 प्रतिशत संख्या एवं राशि बिल अवश्य जाँच करना है। अतएव श्री पूर्वे के बचाव बयान को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया।
आरोप-2 :- संचालन पदाधिकारी ने मरम्मति एवं सम्पोषण कार्य का कार्यक्रम विाीय वर्ष विशेष के लिए प्राप्त आवंटन के तहत उसी विाीय वर्ष के लिए स्वीकृत होता है तथा कार्य भी इसी के तहत उसी विाीय वर्ष में पूर्ण कराना होता है। किसी विशेष विाीय वर्ष के लिए स्वीकृत कार्यक्रम के कार्य इससे भिन्न वर्षों में कराना एवं भुगतान करना नियम के विरूद्ध मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया।
आरोपी द्वारा कहा गया कि पिछले वर्ष रोकी गई ` 10,000/- (दस हजार) की राशि कार्य कराने के पश्चात अगले विाीय वर्ष में भुगतान की गयी है। इसमें कोई विाीय अनियमितता नहीं की गयी है। मात्र प्रक्रियात्मक त्रुटि है। माप पुस्त सं0-2511 पेज-36 से स्पष्ट है कि Rectification of wood work हेतु 10,000/- (दस हजार) रूपये की कटौती विपत्र से की गयी है। इसी तरह माप पुस्त 2521 पेज-43 से स्पष्ट है कि बिना मापी की जाँच किये ही बीस प्रतिशत सीमेन्ट प्लास्टर एरिया की कटौती की गयी है। नियमानुसार माप पुस्त में मापी अधिक अंकित होने एवं गुणवाा के अनुरूप कार्य नहीं होता है तो उक्त कार्य की मापी अस्वीकार करते हुए विपत्र पारित करने का प्रावधान है ताकि अधिकाई भुगतान नहीं हो परन्तु आरोपी द्वारा ऐसा नहीं कर विपत्र के राशि का कुछ भाग With hold कर बाद में भुगतान किया गया है, जिसे नियम विरूद्ध मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया।
आरोप-3 ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी द्वारा उपलब्ध कराये गये गुणवाा जाँच प्रतिवेदन के आधार पर आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया।
उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित मात्र एक नमूने के जाँच में पी0सी0सी0 (1ः2ः4) के कार्य में प्रावधानित सीमेन्ट एवं बालू का अनुपात 1ः2 के बदले 1ः4.1 पाया गया। प्रावधानित पी0सी0सी0 सीमेन्ट बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2.4 है तथा जाँचफल में सीमेन्ट एवं बालू का अनुपात 1ः4.1 उक्त के आलोक में सीमेन्ट की कमी का प्रतिशत निम्नवत होता है :-
= 1/7-1/9.1 जो मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्रांक-2961 दिनांक 03.12.1990 x = 24.44%
1/7
के अनुसार 25 प्रतिशत की भिन्नता मान्य सीमा के अन्तर्गत माना जा सकता है। आरोप-4 :- संचालन पदाधिकारी ने कार्य की मापी की समुचित जाँच नहीं करने एंव आरोपी कथन की उनके कार्यफल में आंशिक कार्य हुए थें, को साक्ष्य के आभाव में अस्वीकार योग्य मानते हुए इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।
आरोपी द्वारा ऐसा कोई तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया जिससे परिलक्षित हो सके कि एकरारनामा के प्रावधान के अनुरूप शिविर सम्पोषण/मरम्मति का कार्य कराकर भुगतान किया गया, जबकि उड़नदस्ता द्वारा स्थलीय जाँच में घटिया स्तर का व्हाईट वाश एवं पेंटिंग किया हुआ पाया गया तथा कलरवाश पुराने कोट पर ही कराया हुआ पाया गया। उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री पूर्वे के विरूद्ध इस आरोप को प्रमाणित माना गया।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5555 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2019201920192019 इस प्रकार मामले की समीक्षोपरांत श्री भरत पूर्वे (आई0डी0-1894), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-01, मोतिहारी के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01, 02 एवं 04 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-03 को अप्रमाणित पाते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उनके विरूद्ध निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया :-
''पेंशन से दस प्रतिशत की कटौती पाँच वर्षों के लिए।'' उक्त निर्णित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-85 दिनांक 11.04.2018 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री भरत पूर्वे (आई0डी0-1894), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-01, मोतिहारी संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :- ''पेंशन से दस प्रतिशत की कटौती पाँच वर्षों के लिए।''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव।
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