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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 05 February 2019

Published 05 February 2019

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-02-05.178
Languages
English, Hindi
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laŒ fuŒflŒ¼eaf=0½eksfr0&3012@89@1277—श्री दिग्विजय सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, घोड़ासहन नहर प्रमंडल, रक्सौल संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध प्रभावी निगरानी थाना कांड सं0-17/87 में विशेष न्यायालय (निगरानी), मुजफ्फरपुर द्वारा दिनांक 07.05.2011 को पारित आदेश में गंभीर अपराध के लिए दोषी करार देते हुए दण्डित किये जाने के फलस्वरूप विभागीय पत्रांक-1272 दिनांक 07.08.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(क) के आलोक में गंभीर अपराध के लिए न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किये जाने के कारण ''इनका पूर्ण पेंशन क्यों न जब्त कर लिया जाय?'' के बिन्दु पर उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गई।

उक्त आलोक में श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किया गया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में उनके द्वारा अपील (Criminal appeal No-577/2011) दायर किया गया है, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने विचारण कोर्ट द्वारा दिए गये अर्थदण्ड की सजा को स्थगित कर दिया है। श्री सिंह द्वारा यह भी कहा गया कि सेवानिवृत के बीस वर्ष बाद पेंशन जब्त करने का कोई औचित्य नहीं है। श्री सिंह के विरूद्ध घोड़ासहन नहर प्रमंडल, रक्सौल के अन्तर्गत कराये गये कार्यों में बरती गयी अनियमितता के लिए निगरानी थाना कांड सं0-17/87 अन्तर्गत धारा 467, 468, 472, 420, 109, 120(बी0) भा0द0वि0 तथा धारा 5(2) सहपठित धारा 5(1)(डी0) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1947 के अधीन दर्ज किया गया। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर श्री सिंह को विभागीय आदेश सं0-186 दिनांक 24.07.1990 द्वारा निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में ही श्री सिंह, दिनांक 30.04.1995 को सेवानिवृत हो गये। तदोपरांत विभागीय आदेश ज्ञापांक-1068 दिनांक 07.06.1996 द्वारा सेवानिवृति की तिथि दिनांक 30.04.1995 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया। निलंबन अवधि के संबंध में निर्णय लिया गया कि क्रिमिनल केस के निष्पादन के उपरांत निलंबन अवधि के संबंध में निर्णय लिया जायेगा, परन्तु इस अवधि को पेंशन प्रयोजनार्थ परिगणित किया जायेगा।बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(क) में प्रावधानित है कि ''भविष्य सदाचार हर पेंशन प्रदान की मानी हुई शर्त है। राज्य सरकार को पेंशन या उसके किसी अंश को रोक रखने या वापस लेने का अधिकार होगा, यदि पेंशन भोगी गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराया जाए या घोर कदाचार का दोषी हो। इस नियम के अधीन समूची पेंशन या उसका कोई अंश रोक रखने या वापस ले लेने के संबंध में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम और निर्णयक होगा।'' विचारण न्यायालय द्वारा श्री सिंह को निगरानी थाना कांड सं0-17/87 में भा0द0वि0 की धारा 467, 468, 472, 420, 109, 120(बी0) एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 5(2) सहपठित धारा 5(1)(डी0) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए दस 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5555 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2019201920192019 वर्ष का सश्रम करावास एवं पचास हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है। श्री सिंह द्वारा दायर अपील में मात्र अर्थदण्ड की सजा पर रोक लगायी गई है, पुरी सजा पर रोक अथवा सजा को निरस्त नहीं किया गया है। वर्णित तथ्यों के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री दिग्विजय सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, घोड़ासहन नहर प्रमंडल, रक्सौल संप्रति सेवानिवृत का शतप्रतिशत पेंशन जब्त करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया।

श्री सिंह के शतप्रतिशत पेंशन जब्त करने के प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-523 दिनांक 25.05.2018 द्वारा सहमति प्रदान की गयी।

राज्य सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री दिग्विजय सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, घोड़ासहन नहर प्रमंडल, रक्सौल संप्रति सेवानिवृत का शतप्रतिशत पेंशन जब्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, thmr flag] ljdkj ds la;qDr lfpoA

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 05 February 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-02-05.178/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-02-05.178.