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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 05 February 2019

Published 05 February 2019

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-02-05.185
Languages
English, Hindi
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सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति0)-125/1994/1489—श्री नन्द कुमार राणा, तत्कालीन कनीय अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण अवर प्रमंडल, बगहा के पदस्थापन अवधि में विभागीय भंडार से जाली व्ययादेश पर 5.18 लाख रूपये के लोहे के सामान गबन करने संबंधी प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के आरोप में विभागीय आदेश ज्ञापांक-647 दिनांक 04. 03.1985 द्वारा निलंबित किया गया एवं विभागीय आदेश सं0-283 सहपठित ज्ञापांक-1795 दिनांक 25.08.1995 द्वारा दिनांक 12.07.1995 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया। विभागीय संकल्प सं0-727 दिनांक 09.04.1996 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभाग द्वारा जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक-846 दिनांक 21.04.2001 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए उनसे द्वितीय कारणपृच्छा की गयी। उक्त आलोक में प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा उार को अमान्य करते हुए विभागीय आदेश सं0-713 सहपठित ज्ञापांक-1556 दिनांक 24.08.2001 द्वारा श्री राणा के विरूद्ध निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

1. 3.16 (तीन लाख सोलह हजार) रूपये की वसूली। यदि यह वसूली इनके सेवाकाल में नहीं हो पाती है तो सेवानिवृति के देय परिलब्धियों से की जायेगी।

2. संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक। 3. निलंबन अवधि में निलंबन भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा किन्तु पेंशन के प्रयोजनार्थ उक्त अवधि की गणना की जायेगी एवं वेतनवृद्धि देय होगा।

उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध श्री राणा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-14003/2008 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 21.05.2015 को पारित न्याय निर्णय में विभागीय दण्डादेश की कंडिका-01 (3.16 लाख रूपये की वसूली) को निरस्त करते हुए निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए आवश्यक निर्णय लेने का आदेश पारित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0-22 सहपठित ज्ञापांक-554 दिनांक 28.02.2018 द्वारा दण्डादेश की कंडिका सं0-01 एवं 03 को निरस्त करते हुए निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में विभागीय पत्रांक-555 दिनांक 28.02.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 11(5) के तहत श्री राणा से स्पष्टीकरण की माँग की गई। उक्त आलोक में श्री राणा से प्राप्त स्पष्टीकरण में अंकित किया गया 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5555 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2019201920192019 कि उनकी उम्र लगभग 72 साल की हो गई है। वे हमेशा अस्वस्थ रहते है तथा आर्थिक आभाव से जुझ रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में निलंबन अवधि को कर्तव्य अवधि मानते हुए पूर्ण वेतन भुगतान करने का आदेश निर्गत किया जाय। श्री राणा पर भण्डार का लेखा अद्यतन नहीं करने, 1.50 मे0 टन लौह छड़ का गबन करने, बिना किसी आदेश के 150 बोरा सीमेन्ट निर्गत करने आदि का आरोप है। विभागीय कार्यवाही के संचालन में संचालन पदाधिकारी ने आरोप सं0-04 (सक्षम पदाधिकारी के अनुमति के बगैर 150 बोरा सीमेन्ट निर्गत करने का आरोप) को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। अन्य बिन्दू पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री राणा से द्वितीय कारणपृच्छा की गई। उनसे प्राप्त द्वितीय करणपृच्छा उार के समीक्षोपरांत उनके विरूद्ध दण्ड संसूचित किया गया। यद्यपि कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विभागीय दण्डादेश की कंडिका-01 को निरस्त किया गया किन्तु दण्डादेश की कंडिका 3 के संबंध में निलंबन अवधि के विनियमन हेतु विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए आवश्यक निर्णय लेने का आदेश पारित किया गया। उक्त आलोक में विभागीय पत्रांक-555 दिनांक 28.02.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 11(5) के तहत श्री राणा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री राणा ने अपने स्पष्टीकरण में आरोपों के संदर्भ में न किसी प्रकार की व्याख्यात्मक टिप्पणी अंकित की गयी और न ही आरोपों के खण्डन के समर्थन में किसी प्रकार का साक्ष्य संलग्न किया गया। बिहार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 11(3) में उपबंधित है कि निलंबन अवधि का पूर्ण वेतन भुगतान तभी किया जायेगा जब अनुशासनिक प्राधिकार को यह समाधान हो जाए कि आरोपित कर्मी का निलंबन पूर्णतः औचित्यहीन है। इस मामले में श्री राणा सरकारी गोदामों से सामग्रियों के गबन में संलिप्त पाये गये है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 21.05.2015 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0-22 सहपठित ज्ञापांक-554 दिनांक 28.02.2018 द्वारा श्री राणा के विरूद्ध पूर्व संसूचित दण्ड दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक को यथावत रखा गया है जो इस बात का परिचायक है कि इनका निलंबन औचित्यपूर्ण है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राणा के निलंबन अवधि (दिनांक 04.03.1985 से 12.07.1995 तक) को ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, किन्तु यह अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि मानी जायेगी'' के रूप में विनियमित किये जाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री नन्द कुमार राणा, तत्कालीन कनीय अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण अवर प्रमंडल, बगहा संप्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के निलंबन अवधि (दिनांक 04.03.1985 से 12.07.1995 तक) को निम्नरूपेण विनियमित किया जाता है :-

''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, किन्तु यह अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि मानी जायेगी''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, सरकार के अवर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 05 February 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-02-05.185/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-02-05.185.