Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 06 February 2019

Published 06 February 2019

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-02-06.6
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-63 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

---

भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 64-64 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण।

---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची पृष्ठ

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 65-65 पूरक

---

पूरक-क 66-74बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 2 भाग-1 नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। —————

सं0 वर्षा/AWS-05/2018--55

योजना एवं विकास विभाग

(अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय) --------

स्वीकृत्यादेश 15 जनवरी 2019 विषयः-केन्द्रीय प्रक्षेत्र स्कीम के अंतर्गत सांख्यिकी तंत्र सुदृढ़ीकरण सहयोग (Support for Statistical Strengthening -SSS) परियोजना के कार्यान्वयन हेतु मो॰ 3437.53 लाख रूपये (चौतीस करोड़ सैतीस लाख तिरपन हजार रूपये मात्र) की पुनरीक्षित स्वीकृति तथा राज्य योजना मद से मो॰ 1424.14 लाख रूपये (चौदह करोड़ चौबीस लाख चौदह हजार रूपये मात्र) व्यय करने की स्वीकृति।

1. सर्वप्रथम सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार तथा योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार के बीच दिनांक-09.08.2011 को भारत सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण परियोजना (India Statistical Strengthening Project -ISSP) के कार्यान्वयन हेतु मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग (Memorandum of Understanding - MoU) हस्ताक्षरित किया गया। इस मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के आलोक में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारत सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण परियोजना के कार्यान्वयन हेतु प्रथम किस्त के रूप में बिहार सरकार को मो॰ 1754.25 लाख रूपये पत्र सं.-1-21057/4(17) Bihar 2009 दिनांक-28.09.2011 द्वारा विमुक्त किया गया।

पुनः दिनांक-02.12.2015 को भारत सरकार एवं बिहार सरकार के बीच इस परियोजना के कार्यान्वयन हेतु संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग हस्ताक्षरित किया गया, जिसके तहत इस योजना का नाम भारत सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण परियोजना से बदलकर सांख्यिकी तंत्र सुदृढ़िकरण सहयोग योजना (Support for Statistical Strengthening Plan -SSSP) कर दिया गया। संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के अनुसार परियोजना का पुनरीक्षित लागत मो॰ 2013.39 लाख रूपये निर्धारित किया गया। संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के अनुसार परियोजना के सभी घटको के लिए समस्त राशि मो॰ 2013.39 लाख रूपये भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जानी है, जिसमें से भारत सरकार द्वारा मो॰ 1754.25 लाख रूपये पूर्व में विमुक्त की जा चूकी है। इस राशि के व्यय होने के पश्चात्‌ परियोजना की शेष राशि मो॰ 259.14 लाख रूपये भारत सरकार द्वारा विमुक्त की जाएगी।

2. भारत सरकार के साथ हुई संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के अनुसार इस परियोजना के तहत्‌ अनुमान्य गतिविधियाँ एवं उसके लिए अनुमानित राशि निम्नवत्‌ है।

परियोजना की पुनरीक्षित लागत

क्र॰सं॰ गतिविधि भारत सरकार (GoI) बिहार सरकार (GoB) कुल
1 सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) 0.70 0.00 0.70
2 भौतिक अधोसंरचना (Physical Infrastructure) 3.1339 0.00 3.1339
3 अन्य संबद्ध लागत यथा- वार्षिक रखरखाव, हार्डवेयर का उन्नयन, वेब हॉसिटिंग आदि (सूचना प्रौद्योगिकी लागत का 30%) (Other associated costs viz. Annual maintenance. Hardware upgrades, web- hosting etc. @ 30% of IT cost) 0.30 0.00 0.30
4 स्टेट स्ट्रेटजिक स्टैटिकल प्लान को तैयार करने एवं राज्य का भारत सरकार के साथ मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग हस्ताक्षर करने के लिए। (Preparation of State Strategic Statistical Plan(SSSP) and signing of MoU by States with Govt. of India.) 0.1(#) 0.00 0.1(#)
5 राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशों के अतिरिक्त संबंधों सहित मौजूदा और अपेक्षित/उभरते डाटा गैप को भरने के लिए तकनीकी समूहों/निकायों की सिफारिशों का कार्यान्वयन। (Implementation of recommendations of Technical Groups/Bodies for filling up existing and expected/emerging data gaps, including State/UT specific additionalties.) 0.50 0.00 0.50
6 एचआरडी, क्षेत्रीय विकास केंद्र के समर्थन सहित क्षमता विकास और कौशल संवर्धन/उन्नयन के लिए प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ जारी करता है। (HRD issues with a focus on Training for Capacity Development and Skills Enhancement/upgradation, including support to Regional Training Centre.) 2.00 0.00 2.00
7 सांख्यिकीय प्रक्रियाओं और संचालन की प्रभावकारिता में सुधार के लिए नवीन तकनीकों और विधियों का परिचय। (Introduction of Innovative Techniques and Methodologies for improving the efficacy of statistical processes and operations.) 0.00 0.00 0.00
8 उपयोगकर्त्ता की संतुष्टि पर नियमित आवधिक (प्रत्येक वर्ष म ं े एक बार) उपयोगकर्त्ता-निर्माता संवाद, हिस्सेदारी-धारकों के परामर्श और आचार का संचालन (वार्षिक)। Holding of regular/periodic (say once every year) User-Producer dialogues, stake- holders consultations and Conduct of periodic (say annual) surveys on user- satisfaction. 0.50 0.00 0.50
9 राज्य सांख्यिकीय प्रणालियों के प्रदर्शन पर वर्षिक रिर्पोट का प्रसार और लागत प्रभावशीलता में सुधार और डेटा पहुॅच/एक्सेस। Dissemination of Annual Reports on the performance of State Statistical Systems and improving the cost effectiveness and ease of data access. 0.50 0.00 0.50
10 डेटा की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार के उपाय। (Data quality and efficiency improvement measures.) 12.00 0.00 12.00
11 वकालत के विषय यथा- सांख्यिकीय उत्पाद और सेवाओं के उपयोग में सुधार के लिए प्रचार और आईसीसी (सूचना शिक्षा और संचार)। Advocacy Issues viz. Publicity and IEC (Information Education and Communication) to improve usage of Statistical Products & Services. 0.50 0.00 0.50
12 अन्य संबद्ध वस्तुओं/गतिविधियों पर व्यय जो नियोजन चरण अनुमानित नहीं है। (लगभग कुल लागत का 5%)। Expenditure on other associated items/activities which are not foreseeable at the planning Stage Approx. 5% of Total Cost 0.00 0.00 0.00
क ल लागत (Total Cost) ु 20.1339* 0.00 20.1339*
3 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 4

* सीड मनी मो॰ 0.1 करोड़ रूपये को छोड़कर (excludes seed money of Rs. 0.1 Crore.) (#) मो॰ 0.1 करोड रूपया पूर्व में ही सीड मनी के रूप एसएसएस योजना की तैयारी में विमुक्त की जा चुकी है। (Additional Amount of Rs. 0.1 Crore has been already been disbursed as seed money for preparation of SSSP.)

3. अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के तहत स्वीकृत गतिविधियों पर मो॰ 367.57 लाख रूपये व्यय करने तथा भारत सरकार को इस राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रेषित करने के पश्चात्‌ इस परियोजना की शेष राशि मो॰ 1645.82 लाख रूपये व्यय करने की प्रशासनिक स्वीकृति स्थायी वित्त समिति की बैठक में दिनांक-26.10.2016 को प्राप्त की गई तथा दिनांक-22.11.2016 को वित्त विभागीय संकल्प संख्या-96 दिनांक- 03.01.2008 के आलोक में वित्त विभाग के माध्यम से माननीय वित्त मंत्री से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की गयी।

4. माननीय वित्त मंत्री, बिहार सरकार से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने के पश्चात्‌ भारत सरकार से प्राप्त प्रथम किस्त की राशि मो. 1754.25 लाख रूपये में से व्यय की गई राशि मो॰ 367.56545 लाख रूपये घटाने के पश्चात्‌ शेष राशि मो॰ 1386.68 लाख रूपये की एकमुश्त निकासी कर योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत गठित बिहार सांख्यिकी तंत्र विकास अभिकरण (BSSDA) को उपलब्ध कराई गयी, जो बिहार सांख्यिकी तंत्र विकास अभिकरण के पी॰एल॰ (PL) खाता सं-पी॰एल॰ए॰ 284 (PLA 284) में जमा करायी गयी। भारत सरकार से प्रथम किस्त के रूप में प्राप्त मो॰ 1754.25 लाख रूपये में से मो॰ 626.76 लाख रूपये का व्यय प्रतिवेदन एवं भौतिक प्रगति प्रतिवेदन भारत सरकार को अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के पत्रांक-934 दिनांक-13.08.2018 द्वारा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा गया है। इस वित्तीय एवं भौतिक प्रतिवेदन में संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के तहत स्वीकृत गतिविधियों का भौतिक उपलब्धि तथा वित्तीय उपलब्धि को स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग में स्वीकृत गतिविधियों के क्रम संख्या-10 पर डेटा की गुणवत्ता और5 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 दक्षता में सुधार के उपाय (Data Quality and Efficiency Improvement Measures) को छोड़कर सभी स्वीकृत गतिविधियों पर कार्य किया जा रहा है।

5. भारत सरकार द्वारा इस परियोजना के कार्यान्वयन हेतु उपलब्ध करायी गयी प्रथम किस्त की राशि मो॰ 1754.25 लाख रूपये को दिनांक-31.12.2018 तक व्यय करने हेतु अनुमति प्राप्त है। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (योजना एवं विकास विभाग), बिहार, पटना के पत्रांक-358 दिनांक-07.12.2018 द्वारा दिनांक-31.03.2019 तक इस परियोजना अंतर्गत बची हुई राशि के व्यय हेतु अनुमति मांगी गयी है तथा भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा इसकी मौखिक सहमति भी प्रदान की गयी है।

6. सांख्यिकी तंत्र सुदृढ़िकरण सहयोग (Support for Statistical Strengthening -SSS) योजना के संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के अनुसार डेटा की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार के उपाय (Data Quality and Efficiency Improvement Measures) के लिए मो॰ 1200.00 लाख रूपये का प्रावधान स्वीकृत है, परंतु वर्त्तमान में इस परियोजना के उपलब्ध राशि में से संशोधित मेमोरेंडम ऑफ अडंरस्टैडिंग के तहत स्वीकृत अन्य गतिविधियों के तहत योजनाओं की स्वीकृति के पश्चात्‌ इस गतिविधि के लिए मात्र मो॰ 940.86 लाख रूपये ही उपलब्ध है। इस गतिविधि के अंतर्गत 135 स्वचालित मौसम केंद्र (Automatic Weather Station-AWS) के अधिष्ठापन का ही प्रावधान है।

7. वर्त्तमान में राज्य के सभी प्रखंडों में स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) तथा राज्य स्तर पर एक सेन्ट्रल डाटा रिसिविंग एवं प्रोसेसिंग सेंटर का अधिष्ठापन किया जाना है। राज्य के सभी प्रखंडों में स्वचालित मौसम केन्द्र की स्थापना से स्वचालित तरीकों से हवा का तापमान, हवा की दिशा, हवा की गति, सापेक्षित आदर््रता, वायुमंडलीय दाब एवं वर्षापात (Air Temperature, Wind Direction, Wind Speed, Relative Humidity, Atmospheric Pressure & Rainfall) के आंकड़ें की हर घंटे जानकारी जिला/राज्य को प्राप्त हो सकेगी। प्राप्त आंकड़ों का कृषि प्रक्षेत्र में नीति निर्धारण, कृषि बीमा का निस्तारण, आपदा प्रबंधन, राज्य में निर्माण संबंधित विशिष्ट कार्यो में सहुलियत के साथ-साथ इन प्रक्षेत्रों के लिए भविष्य के योजना सूत्रण में भी प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया जा सकेगा।

8. वर्त्तमान में अन्य योजना से राज्य के 50 स्थानों पर स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) अधिष्ठापित है तथा कृषि विभाग, बिहार द्वारा राज्य के पाँच जिलों यथा-नालंदा, पूर्वी चम्पारण, सुपौल, गया तथा अरवल के 87 प्रखंडों में टेलिमेट्रिक मौसम केन्द्र (Telemetric Weather Station-TRG) का अधिष्ठापन कराया जा रहा है। राज्य के शेष 33 जिलों के 400 प्रखंडों में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 400 स्वचालित मौसम केन्द्र अधिष्ठापित कराये जाने की योजना है।

राज्य के 400 प्रखंडों में स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) के अधिष्ठापन हेतु मुख्य अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, योजना एवं विकास विभाग के पत्रांक-2237 दिनांक-15.09.2018 द्वारा स्थूल प्राक्कलन उपलब्ध कराया गया है, जिसके अनुसार 400 स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) तथा राज्य स्तर पर एक सेन्ट्रल डाटा रिसिविंग एवं प्रोसेसिंग सेंटर के अधिष्ठापन पर मो॰ 2365.00 लाख रूपये व्यय होने का अनुमान है। 9. राज्य के 33 जिलों के 400 प्रखंडों में स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) के अधिष्ठापन, रखरखाव एवं संचालन हेतु एजेंसी का चयन रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (Request for Proposal-RFP) प्रकाशित कर नियमानुसार किया जायेगा। रिक्वेस्ट फॅार प्रपोजल (Request for Proposal-RFP) के माध्यम से चयनित एजेंसी को सभी प्रखंड मुख्यालयों में निर्धारित समय सीमा के अंदर स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) का अधिष्ठापन करना होगा तथा अधिष्ठापन के पश्चात्‌ 5 वर्षो तक स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) का परिचालन एवं रख रखाव की व्यवस्था उस एजेंसी को ही करनी होगी। साथ ही 5 वर्षो तक राज्य स्तर पर आंकड़ों का संग्रह एवं उसका समेकन भी स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) के अधिष्ठापन हेतु चयनित एजेंसी द्वारा ही किया जायेगा।

10. प्रत्येक प्रखंड मुख्यालय में स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) के अधिष्ठापन हेतु उपयुक्त भूमि, संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) के अधिष्ठापन के पश्चात्‌ इसे एजेंसी द्वारा सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को हस्तगत कराया जायेगा। स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी की होगी।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 6 11. सांख्यिकी तंत्र सुदृढ़िकरण सहयोग (SSS) परियोजना के तहत भारत सरकार से प्राप्त प्रथम किस्त की राशि में से स्वचालित मौसम केंद्र (AWS) की स्थापना हेतु मात्र मो॰ 940.86 लाख रूपये ही उपलब्ध है। एतद्‌ स्थिति में शेष राशि (मो॰ 2365.00 लाख - मो॰ 940.86 लाख) मो॰ 1424.14 लाख रूपये राज्य योजना मद से व्यय किया जाएगा।

12. भारत सरकार द्वारा सांख्यिकी तंत्र सुदृढ़िकरण सहयोग (SSS) परियोजना के लिए स्वीकृत राशि मो॰ 2013.39 लाख रूपये में राज्य योजना की राशि मो॰ 1424.14 लाख रूपये सम्मिलित करने पर इस परियोजना की पुनरीक्षित लागत राशि मो॰ 3437.53 लाख रूपये हो जाती है, जो स्वीकृत परियोजना लागत से 20% अधिक है। 13. इस तरह इस परियोजना पर संभावित व्यय मो॰ 3437.53 लाख रूपये का वहन भारत सरकार से स्वीकृत राशि मो॰ 2013.39 लाख रूपये तथा शेष मो॰ 1424.14 लाख रूपये राज्य योजना मद से निम्न बजट शीर्ष से व्यय किया जाएगा।

मुख्य शीर्ष - 3454 -जनगणना सर्वेक्षण तथा सांख्यिकी,

उप मुख्य शीर्ष - 02 -सर्वेक्षण तथा सांख्यिकी, लघु शीर्ष - 204 -केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन,

उप शीर्ष - 0422 -भारत सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण परियोजना, विपत्र कोड - 35-3454022040422

14. केन्द्रीय प्रक्षेत्र स्कीम के अंतर्गत सांख्यिकी तंत्र सुदृढ़िकरण सहयोग (Support for Statistical Strengthening - SSS) परियोजना के कार्यान्वयन हेतु मो॰ 3437.53 लाख रूपये (चौतीस करोड़ सैतीस लाख तिरपन हजार रूपये मात्र) की पुनरीक्षित स्वीकृति तथा राज्य योजना मद से मो॰ 1424.14 लाख रूपये (चौदह करोड़ चौबीस लाख चौदह हजार रूपये मात्र) व्यय करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

15. इसमें दिनांक-02.01.2019 को आयोजित मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक में मद संख्या-13 के तहत स्वीकृति प्राप्त है।

आदेश से,

राजेश्वर प्रसाद सिंह, अपर सचिव।

--------- अंकेक्षण निदेशालय, वित्त विभाग बिहार, पटना ------ कार्यालय आदेश 31 जनवरी 2019

क्रमांक कोटि क्रमांक पदाधिकारी का नाम पूर्व धारित पदनाम वर्त्तमान पद स्थापना का कार्यालय अभ्युक्ति
1 2 3 4 5 6
1 386 अशोक कुमार दास उप लेखा नियंत्रक विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना
2 588 सुरेन्द्र कुमार वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
3 596 नागेन्द्र राम वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना
4 599 महेश कुमार वरीय अंकेक्षक-1 तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर
5 600 रामानन्द राम वरीय अंकेक्षक-1 तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर
6 394 दिलीप कुमार गुप्ता वरीय अंकेक्षक-1 कोशी प्रमण्डल, सहरसा
7 395 श्रवण कुमार अग्रवाल वरीय अंकेक्षक-1 सारण प्रमण्डल, छपरा
8 397 कौलेश्वर प्रसाद साह वरीय अंकेक्षक-1 तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर

सं॰ स्था॰नि॰अं॰नि॰ (01)-02/2018--27/अं॰नि॰--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-9706 दिनांक-20.07.2018 एवं पत्रांक-7433 दिनांक-05.06.2018 तथा वित्त विभाग के अधिसूचना सं0-209 दिनांक-20.03.2017 एवं संकल्प-335 दिनांक-11.04.2018 के आलोक में दिनांक-15.01.2019 को सम्पन्न प्रोन्नति समिति की बैठक की अनुशंसा के आलोक में निम्नांकित उप लेखा नियंत्रक एवं वरीय अंकेक्षक-1 को क्रमशः पे लेवल 9 एवं पे लेवल 8 से बिहार अंकेक्षण सेवा नियमावली, 2017 के अंतर्गत वरीय अंकेक्षण अधिकारी/सहायक निदेशक स्तर (दिनांक 01.01.2016 से प्रभावी वेतन संरचना में Pay level-11) में दिनांक 11.04.2018 के प्रभाव से प्रोन्नति प्रदान की जाती हैः- क्रमांक कोटि क्रमांक

7 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019
9 398 रतन कुमार वरीय अंकेक्षक-1 दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा
10 404 सुनील कुमार वरीय अंकेक्षक-1 भागलपुर प्रमण्डल, भागलपुर
11 405 अशोक कुमार वरीय अंकेक्षक-1 विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना
12 406 अनिल कुमार झा वरीय अंकेक्षक-1 दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा
13 408 मुकेश कुमार सिंह वरीय अंकेक्षक-1 विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना
14 413 नागेन्द्र सिंह वरीय अंकेक्षक-1 दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा
15 414 सुरेेश प्रसाद वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना
16 415 प्रमोद कुमार वरीय अंकेक्षक-1 दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा
17 416 कुमार गंगानन्द सिंह वरीय अंकेक्षक-1 विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना
18 417 संजय कुमार वरीय अंकेक्षक-1 भागलपुर प्रमण्डल, भागलपुर
19 418 सुनील कुमार सिंह वरीय अंकेक्षक-1 विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना
20 419 सुनील प्रकाश सिंह वरीय अंकेक्षक-1 ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना।
21 420 रमेश प्रसाद वरीय अंकेक्षक-1 सारण प्रमण्डल, छपरा
22 421 नवीन कुमार अम्बष्ठ वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना
23 422 राम वृन्द प्र0 सिंह वरीय अंकेक्षक-1 तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर
24 423 मो0 जावेद अनवर वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
25 425 शंम्भु ठाकुर वरीय अंकेक्षक-1 विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना
26 432 ओम प्रकाश गुप्ता वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना
27 439 राजेन्द्र प्रसाद वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
28 441 सत्येन्द्र कुमार शर्मा वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना
29 444 सियाराम सिंह वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
30 446 श्री संजय वरीय अंकेक्षक-1 सारण प्रमंडल, छपरा
31 452 पृथ्वी राज यादव वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
32 453 हृदय रंजन प्रसाद वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
33 454 अशोक कुमार ओझा वरीय अंकेक्षक-1 सारण प्रमंडल, छपरा
34 455 दिलीप पोद्दार वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना
35 456 रामेश्वर प्रसाद वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
36 458 अनिल कुमार वरीय अंकेक्षक-1 दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा
37 463 संजय श्रीवास्तव वरीय अंकेक्षक-1 सारण प्रमंडल, छपरा
38 464 अविनाश कुमार वरीय अंकेक्षक-1 मगध प्रमंडल, गया
39 388 हरेन्द्र मांझी उप लेखा नियंत्रक पटना प्रमण्डल, पटना दिनांक-30.11.18 को सेवा निवृत
40 402 बसीरूद्धीन वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना दिनांक-30.11.18 को सेवा निवृत
41 429 विजय कान्त झा वरीय अंकेक्षक-1 पटना प्रमण्डल, पटना दिनांक-31.07.18 को सेवा निवृत
42 460 शिवनाथ कुमार प्रसाद वरीय अंकेक्षक-1 विभागीय मुख्यालय, बिहार, पटना दिनांक-30.09.18 को सेवा निवृत

(2) दिनांक 11.04.2018 की तिथि अर्थात भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है। (3) यह प्रोन्नति माननीय सर्वोच्चय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन एस॰ एल॰ पी॰ सं॰ 29770/2015, बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगी।

(4) उपरोक्त में से कार्यरत पदाधिकारीगण तत्काल पूर्व पदस्थापित स्थल पर बने रहेंगे एवं पूर्व से आवंटित दायित्वों का निष्पादन करते रहेंगे।

(5) प्रस्ताव सक्षम स्तर से अनुमोदित है।

आदेश से, राहुल सिंह, सचिव (व्यय)।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 8

जल संसाधन विभाग

--------

आदेश

30 जनवरी 2019

सं0 बा॰प्र॰सु॰स॰के॰-50/2016(अंश-1)-84--जल संसाधन विभाग, पटना, बिहार के अधीन बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केन्द्र, पटना के नियंत्रण में विश्व बैंक सम्पोषित बिहार कोशी बेसिन विकास परियोजना के अंतर्गत उत्कृष्टता केन्द्र (Centre of Excellence-CoE) के लिए गणितीय प्रतिमान केन्द्र (Mathematical Modelling Centre- MMC) के सुचारू संचालन हेतु विभागीय संकल्प सं॰ 5/डी॰-04-10-01/2017-1334 दिनांक-26/05/2017 द्वारा प्रदत्त स्वीकृृति के क्रम में विभागीय चयन समिति की अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित पाँच अदद अभ्यर्थियों को उनके नाम के सम्मुख स्तंभ 4 में अंकित पदों पर स्तंभ 5 में अंकित प्रति माह पारिश्रमिक दर पर अस्थायी रूप से एक

क्रं सं॰ नाम गृह जिला पदनाम प्रति माह पारिश्रमिक
1. 2. 3. 4. 5.
1. श्री साद असगर मोईनी बेगुसराय, बिहार कनीय बाढ़ प्रतिरूपक रु॰ 92,800/- (रू॰ बानवे हजार आठ सौ) प्रतिमाह ।
2. श्री जतीन आनन्द मधेपुरा, बिहार कनीय बाढ़ प्रतिरूपक रु॰ 92,800/- (रू॰ बानवे हजार आठ सौ) प्रतिमाह ।
3. श्री चेतन शर्मा कोटा, राजस्थान नदीशास्त्र अभियंता रु॰ 92,800/- (रू॰ बानवे हजार आठ सौ) प्रतिमाह ।
4. श्री धीरज कुमार सिंह सारण, बिहार बेवमास्टर/बेव अभिकल्पन विशेषज्ञ रु॰ 63,800/- (रू॰ तिरसठ हजार आठ सौ) प्रतिमाह ।
5. श्री चंदन ओझा भोजपुर, बिहार आंकड़ा स चय ं प्रबंध विशेषज्ञ रु॰ 63,800/- (रू॰ तिरसठ हजार आठ सौ) प्रतिमाह ।

2. संविदा के आधार पर चयन प्रथमतः 01(एक) वर्ष की अवधि या 65(पैंसठ) वर्ष की उम्र (जो भी पहले हो) तक के लियेे होगी । कार्य संतोषजनक पाये जाने पर संविदा सेवा अवधि विस्तार की संभावना है । 3. संविदा के आधार पर नियोजित व्यक्ति सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे एवं इस संविदा नियोजन के पश्चात्‌ सरकारी सेवा में विनियमितिकरण का दावा मान्य नहीं होगा ।

4. संविदा नियुक्ति के क्रम में किये गये अनुबंध समाप्ति की तिथि के पूर्व यदि नियोजित व्यक्ति का पुनर्नियोजन/सेवा विस्तार नहीं होता है तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को उनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिये अलग से आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा ।

5. नियुक्त कर्मियों की सेवाएँ संतोषप्रद नहीं पाये जाने पर एक माह की पूर्व सूचना देकर उनका नियोजन रद्‌द किया जा सकता है ।

6. उक्त नियोजन बिना कोई कारण बताये कभी भी समाप्त की जा सकेगी । साथ ही संविदा पर नियोजन के दौरान यदि उनके विरूद्ध किसी प्रकार का गंभीर आरोप अथवा गैर अनुशासनिक कार्रवाई की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उनका नियोजन रद्‌्‌द कर दिया जायेगा ।

7. संबंधित अभ्यर्थियों का नियोजन मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के साथ विहित प्रपत्र में एकरारनामा किये जाने के पश्चात्‌्‌ संबंधित पद पर योगदान की तिथि से अनुमान्य होगा । 8. संविदा के आधार पर नियोजित पद के कार्यो की समीक्षा सावधिक अंतराल पर की जायेगी और कार्य संतोषजनक नहीं रहने पर उनका नियोजन रद्‌द कर दिया जायेगा ।9 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 9. शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य अर्हताओं की जॉंच संबंधित संस्थान/सक्षम प्राधिकार से कराये जाने के बाद प्रमाण पत्र यदि गलत पाया जाता है तो संबंधित नियोजित पद की सेवा तत्‌्‌क्षण समाप्त कर दी जायेगी एवं उनको भुगतान किये गये मानदेय की वसूली नियमानुसार की जायेगी । साथ ही अन्य सुसंगत वैधानिक कार्रवाई की जायेगी । 10. एक माह के अन्दर सभी अभ्यर्थी संविदा के आधार पर नियोजित पद पर बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायक केन्द्र, जल संसाधन विभाग, अनिसाबाद, पटना के कार्यालय में योगदान करेंगे । निर्धारित अवधि के अन्दर योगदान नहीं करने पर उनका नियोजन स्वतः समाप्त समझा जायेगा तथा नियोजन का कोई भी दावा मान्य नहीं होगा । 11. योगदान करने के लिए किसी प्रकार का यात्रा भत्ता देय नही होगा । 12. स्ांविदा के आधार पर नियोजित पद के मानदेय/पारिश्रमिक का भुगतान पदस्थापित कार्यालय में योगदान करने की तिथि से देय होगी ।

13. इनके पारिश्रमिक भुगतान पर होने वाला व्यय मुख्य शीर्ष-2711-बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकास, उप मुख्य शीर्ष-01-बाढ़ नियंत्रण, लघु शीर्ष-001- निदेशन एवं प्रशासन उप शीर्ष-003-क्षेत्रीय स्थापना; विपत्र कोड-49-2711.01.001.0003 के अन्तर्गत 28.04 व्यावसायिक/कला/तकनीकी सेवाएॅं विषय शीर्ष के अन्तर्गत भारित होगा ।

14. सभी अभ्यर्थियों को निदेश दिया जाता है कि एकरारनामा के समय निम्नलिखित मूल अभिलेखों के साथ इनकी एक-एक स्व-अभिप्रमाणित छाया प्रति भी प्रस्तुत करेंगे -

i. असैनिक शल्य-चिकित्सा-सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र । ii. योग्यता एवं अनुभव संबंधित मूल अभिलेख । iii. जन्म-तिथि से संबंधित प्रमाण-पत्र ।

आदेश से,

संजय कुमार शर्मा, संयुक्त सचिव (प्र॰)।

------- मुख्य अभियंता का कार्यालय श्सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग,सिवान ------- कार्यालय आदेश 21 दिसम्बर 2018

सं0 1स्था0अनु0-12-101/2018ः-66--समाहर्ता सह अध्यक्ष जिला अनुकंपा समिति पष्चिमी चम्पारण.के पत्रांक 566 दिनांक 23.08.2018 द्वारा जिला स्तर पर गठित अनुकंपा समिति पष्चिमी चम्पारण की दिनांक 25.04.2018 की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में श्री कुन्दन कुमार, पिता- स्व0 सुरेन्द्र सहनी, अनुसेवक, मुख्य पष्चिमी नहर प्रमंंडल, बाल्मीकिनगर की अनुकंपा के आधार पर वेतनमान लेभल-I ग्रेड पें-1800/- रूपये एवं समय-समय पर सरकार द्वारा स्वीकृत भत्ते सहित कार्यालय परिचारी के पद पर नियुक्त किया जाता है। उन्हें आदेश दिया जाता है कि वे अपना योगदान, कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, मढौरा के कार्यालय में दिनांक 19.01.2019 तक निश्चित रूप से दें दें अन्यथा उनकी नियुक्ति रद्‌द समझी जायेगी। यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थाई है। 2. अगर इनके नियुक्ति के पूर्व से नियुक्ति के लिए संबंधित पदाधिकारी के अधीन कोई सूची तैयार की गई हो तो उनकी वरीयता उक्त सूची में अंकित व्यक्तियों के बाद होगी। 3. स्व0 सुरेन्द्र सहनी के आश्रित परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण का दायित्व श्री कुन्दन कुमार पर होगी। उत्तरदायित्व का निर्वाह पूरी तत्परता के साथ नहीं करने पर गंभीर कदाचार माना जायेगा। इसके लिए उनके विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जायेगी। इसके अलावा दायित्व की अवहेलना की संपुष्टि होने पर उनकी परिलब्धियों को एक अंश सरकारी सेवक के आश्रित सदस्यों को देने का आदेश सरकार दे सकती हे। 4. नियुक्त पद पर योगदान करते समय उन्हें जिला सारण, छपरा के असैनिक शैल्य चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र हर हालत में प्रस्तुत करना होगा। 5. अगर श्री कुन्दन कुमार की नियुक्ति आरक्षित कोटा से रोस्टर पर हुई हो तो उक्त आरक्षित कोटा के पद को अग्रणित कर दिया जायेगा। 6. योगदान करने हेतु किसी प्रकार का यात्रा भत्ता किसी भी परिस्थिति में देय नहीं होगी। 7. किसी तरह की गलत सूचना अथवा धोखाधडी के आधार पर नियुक्ति प्राप्त कर लेने पर उन्हें सेवा से विमुक्त कर दिया जायेगा तथा समुचित कार्रवाई नियमानुसार की जायेगी। 8 अनुकंपा के आधार पर किसी पद पर नियुक्त होने पर उन्हें अनुकम्पा का दोबारा लाभ लेते हुए प्रोन्नति अथवा संवर्ग परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।10 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 9. नियुक्त पद पर योगदान करते समय उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता का मूल प्रमाण पत्र एवं वास्तविक जन्म तिथि से संबंधित प्रमाण पत्र मूल में संबंधित पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। जिसकी जॉच कर संतुष्ट होकर उनके द्वारा इनका योगदान स्वीकृत किया जायेगा तथा इसकी सूचना तुरंत अधोहस्ताक्षरी को दी जायेगी। 10. योगदान लेने के साथ ही संबंधित पदाधिकारी श्री कुन्दन कुमार से भरण पोषण पत्र एवं विवाह में तिलक दहेज नहीं लेने देने का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेंगे। 11. उप सचिव , वित्त विभाग के पत्रसंख्या 1964 दिनांक 31.8.2005 के अनुसार दिनांक 01.09.2005 एवं उसके बाद नियुक्त राज्य कर्मियों के लिए अंशदायी पेंशन योजना लागू होगा।

आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, मुख्य अभियंता।

------ पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ------ अधिसूचना 1 फरवरी 2019

सं0 6 एस॰एस॰(11)07/18-388--जमुई जिले के वर्त्तमान कृषि विज्ञान केन्द्र को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के अधीन अंतरित करने हेतु अंचल जमुई, मौजा-गारहोनवादा, थाना-33, खाता-124, खेसरा संख्या-548, अंश रकवा-25.00 ए॰ गैरमजरूआ खास किस्म बालुबुर्द भूमि पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना को निःशुल्क अन्तरविभागीय भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति मंत्रिपरिष्‌द द्वारा दिनांक-04.12.2018 को मद संख्या-10 के रूप में सम्मिलित करते हुये प्रदान की गई है। उक्त प्रदान की गई स्वीकृति के आलोक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के स्वीकृत्यादेश संख्या ज्ञापांक-6/खा॰म॰ जमुई-77/2018-1641(6)/रा॰, पटना-15, दिनांक-31.12.2018 के द्वारा संसूचित आदेश के क्रम में उक्त भूमि बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना को वर्त्तमान कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना हेतु अंतरित करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है। सुलभ प्रसंग हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से निर्गत स्वीकृत आदेश की छाया-प्रति संलग्न। 2. स्वीकृति इस शर्त्त के साथ दी जाती है कि जिस प्रयोजन हेतु भूमि दी जा रही है उसमें उसकी उपयोगिता नहीं रहने पर भूमि स्वतः विभाग के माध्यम से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को लौट जायेगी।

3. अन्य शर्त्तें खास महाल मैनुअल के प्रावधानों एवं समय-समय पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा निगर्त परिपत्रों के तहत मान्य होगा।

4. प्रस्ताव में माननीय विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 5. यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से प्रभावी होगा।

राज्यपाल के आदेश से, मधुरानी ठाकुर, संयुक्त सचिव।

------

गृह विभाग

(आरक्षी शाखा)

------

अधिसूचनाएं

29 जनवरी 2019

सं0 1/पी05-10-03/2008 खण्ड-I गृ0आ0/929--श्री गणेश कुमार, भा0पु0से0 (2000) को विभागीय अधिसूचना सं0-7544, दिनांक-15.09.2014 द्वारा अन्य पदाधिकारियों के साथ पुलिस उप महानिरीक्षक कोटि में नियमित प्रोन्नति प्रदान की गयी थी। उक्त कोटि में प्रोन्नति के समय श्री कुमार केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। उन्हें यह प्रोन्नति कनीय की सापेक्षता में प्रोफॉर्मा प्रोन्नति के रूप में अनुमान्य होती है।

2. अतः श्री कुमार को अधिसूचना सं0-7544, दिनांक-15.09.2014 द्वारा पुलिस उप-महानिरीक्षक की कोटि में दी गयी नियमित प्रोन्नति को संशोधित करते हुये उनसे ठीक कनीय श्री शिवेश्वर प्रसाद शुक्ल, भा0पु0से0 (2000) द्वारा उक्त कोटि में प्रभार ग्रहण करने की तिथि के प्रभाव से प्रोफॉर्मा प्रोन्नति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

31 जनवरी 2019

सं0 1/पी04-02/2019 गृ0आ0-1057--भारतीय पुलिस सेवा (परिवीक्षा) नियमावली, 1954 के नियम-3A के आलोक में बिहार संवर्ग के भा0पु0से0 के परिवीक्षाधीन पदाधिकारियों की सेवा में सम्पुष्टि हेतु अनुशंसा पर विचारार्थ विभागीय समीक्षा समिति का गठन निम्नवत किया जाता है :- (i) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, गृह विभाग, बिहार - अध्यक्ष (ii) पुलिस महानिदेशक, बिहार - सदस्य11 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 (iii) पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय), बिहार - सदस्य

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

31 जनवरी 2019

सं0 1/पी01-02/2018 गृ0आ0-1040--श्री गुप्तेश्वर पाण्डेय, भा0पु0से0 (BH:1987), महानिदेशक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- महानिदेशक, बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर) को स्थानांतरित करते हुये अगले आदेश तक पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

29 नवम्बर 2018

सं0 3/वि0वि0प्रयो0-04/2018 गृ0आ0-10104--बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से प्राप्त अनुषंसा के आलोक में गृह विभाग (आरक्षी शाखा) की अधिसूचना संख्या-8587, दिनांक-01.10.2018 तथा 9015, दिनांक-12.10.2018 द्वारा बिहार राज्य के विधि विज्ञान प्रयोगषाला के लिए सहायक निदेषक, राजपत्रित (पुनरीक्षित वेतनमान, Level-07, अपुनरीक्षित-पी0बी0-2-9300-34800 ग्रेड वेतन-4600) के पद पर नियुक्त अभ्यर्थियों को उनके नाम के सामने अंकित कार्यालय में पदस्थापित किया जाता हैः-

क्र0 सहायक निदेषक का नाम प्रषाखा का नाम पदस्थापन हेतु प्रस्तावित कार्यालय का नाम
1 श्रीमती अम्बालिका त्रिपाठी आग्नेयास्त्र प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, मुजफ्फरपुर
2 श्री मिथिलेष कुमार आग्नेयास्त्र प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, भागलपुर
3 मो0 मुस्ताक अहमद आग्नेयास्त्र प्रषाखा विधि विज्ञान प्रयोगषाला, पटना
4 श्री संदीप सिंह फोटो प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, भागलपुर
5 श्रीमती तलहत जहाँ रसायनप्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, भागलपुर
6 श्री संदीप कुमार रसायनप्रषाखा विधि विज्ञान प्रयोगषाला, पटना
7 सुश्री श्रेष्ठा जायसवाल विस्फोटक प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, मुजफ्फरपुर
8 श्री अनुप कुमार विस्फोटक प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञानप्रयोगषाला, भागलपुर
9 श्री अमित कुमार चौधरी विस्फोटक प्रषाखा विधि विज्ञान प्रयोगषाला, पटना
10 श्री सवे र्षत्तम कुमार विष विज्ञान प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, भागलपुर
11 सुश्री पूजा मेहता विष विज्ञान प्रषाखा विधि विज्ञान प्रयोगषाला, पटना
12 श्री दीपक कुमार सीरम प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, भागलपुर
13 श्री जितेन्द्र कुमार जीवविज्ञान प्रषाखा विधि विज्ञान प्रयोगषाला, पटना
14 मो0 मतलूब रजा खान जीव विज्ञान प्रषाखा क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगषाला, भागलपुर
15 मो0 सईद आलम नारकोटिक्स प्रषाखा विधि विज्ञान प्रयोगषाला, पटना

2. विभागीय अधिसूचना सं0-8587, दिनांक 01.10.2018 तथा 9015, दिनांक 12.10.2018 के आलोक में संबंधित अभ्यर्थियों द्वारा सहायक निदेषक के पद पर योगदान की तिथि से वेतनादि का भुगतान किया जायेगा।

आदेश से, दुर्गेष कुमार पाण्डेय, उप-सचिव।

------

1 अक्तूबर 2018

सं0 3/वि0वि0प्रयो0-04/2018 गृ0आ0-8587--बिहार राज्य के विधि विज्ञान प्रयोगषालाओं के लिए सृजित सहायक निदेषक (राजपत्रित) के पद पर सीधी नियुक्ति हेतु बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-65, दिनांक-22.06. 2018, पत्रांक-66, दिनांक 22.06.2018 तथा पत्रांक-76, दिनांक 04.07.2018 से प्राप्त अनुषंसा के आलोक में निम्न अभ्यर्थियों को सहायक निदेषक के पद पर पुनरीक्षित वेतनमान, Level-07 में (अपुनरीक्षित-पी0बी0-2-9300-34800 ग्रेड वेतन-4600) औपबंधिक रूप से नियुक्त किया जाता है :-

क्र0 उम्मीदवार का नाम जन्म तिथि प्रषाखा का नाम
1 श्रीमती अम्बालिका त्रिपाठी 11.05.1986 आग्नेयास्त्र प्रषाखा
2 श्री संदीप सिंह 10.05.1984 फोटो प्रषाखा
3 श्री मिथिलेष कुमार 07.04.1988 आग्नेयास्त्र प्रषाखा
4 श्रीमती तलहत जहाँ 07.02.1983 रसायन प्रषाखा
5 श्री संदीप कुमार 12.11.1981 रसायन प्रषाखा
6 मो मुस्ताक अहमद 13.10.1970 आग्नेयास्त्र प्रषाखा
बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 12

2. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार की सहमति प्राप्त है।

आदेश से, दुर्गेष कुमार पाण्डेय, उप-सचिव।

------ कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ अधिसूचनाएं 2 जनवरी 2019

सं0 कारा/स्था0 (चि0)01-21/2018-22--महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा दिनांक 25.09.2018 को Walk-in-interview के माध्यम से राज्य की विभिन्न काराओं में संविदा के आधार पर नियुक्ति हेतु 29 (उनतीस) सामान्य चिकित्सकों के कागजातों/प्रमाण-पत्रों की जांच की गयी।

2. उपरोक्त के आलोक में 29 सामान्य चिकित्सकों को नियुक्त करते हुए उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-7 में अंकित

क्र0 सं0 अभ्यर्थी का नाम पिता/पति का नाम ग ृह जिला अभ्यर्थी का स्थाई पता आरक्षण कोटि (जिसमें चयनित हुए हैं) पदस्थापन कारा का नाम
1 2 3 4 5 6 7
1 डॉ० अनिल कुमार श्री कुशेश्वर ठाकुर समस्तीपुर ग्राम-पछियारी टभका, पो.-पंडित टोला टभका थाना-विभूतिपुर, जिला-समस्तीपुर-8481 14 अनारक्षित मंडल कारा, दरभंगा
2 डॉ० नम्रता सिंहा स्व0डा0 यदुनंदन प्रसाद सिंहा नालंदा C/O-कुन्ति सिंहा, ग्राम-कोरवां, थाना-इस्लामपुर, जिला-नालंदा अनारक्षित मंडल कारा, जमूई
3 डाँ० संजय कुमार साहु श्री गिरधारी प्रसाद साहु रोहतास ग्राम-गरन्दुआ, थाना-चेनारी, जिला-रोहतास, सासाराम पिन-821104 अनारक्षित मंडल कारा, सासाराम
4 डॉ० विनय कुमार श्री रविन्द्र प्रसाद कापरी बांका ग्राम-रामचन्द्रपुर पो.-भदारिया थाना-अमरपुर जिला-बांका-812101 अनारक्षित मंडल कारा, बाँका
5 डॉ० अभिनव दीप स्व० डा० आर० एन०यादव पटना अलका हाँस्पीटल, नवनीत कॉलनी, रूकनपुरा बेली रोड, पटना, अनारक्षित मंडल कारा, आरा
6 डॉ० जैनेन्द्र कुमार श्री रघुनन्दन प्र. सिंह नालंदा ग्राम-पुरा पो.-खड्‌डी लोदीपुर प्रखंड-एकंगरसराय जिला-नालंदा-801301 अनारक्षित केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर
7 डॉ० अनु कुमारी श्री गणेश प्रसाद यादव पटना हाथीखाना मोड़, मैनपुरा, दानापुर, पटना पिन-801503 अनारक्षित मंडल कारा, किशनगंज
8 डॉ० कृष्ण गोपाल श्री अरबिन्द कुमार सिंह भागलपुर AT-सैलतपुर पो०-खानपुरमल भाया-सुुल्लानगंज जिला-भागलपुर पिन-813213 अनारक्षित उपकारा, नवगछिया
9 डॉ० पूजा कुमारी श्री विजय पंडित गया मारनपुर, हनुमानपुर, पो. - चान्दचौरा, गया-823001 अनारक्षित केन्द्रीय कारा, गया
10 डॉ० शाजिया तरन्नुम श्री शकील सिद्धिकी पूर्वी चम्पारण भवानीपुर जिराट, रोइंग क्लब रोड, मोतिहारी(पूर्वी चम्पारण)-845401 अनारक्षित महिला केन्द्रीय कारा, मोतिहारी
11 डॉ० अमृता कुमारी सुुमन स्व० अशोक कुमारा सुमन पटना 64/48- बहादुरपुर हाउसिंग कॉलनी भूतनाथ रोड, पटना-800026 अनारक्षित महिला केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर
12 डॉ० सजनी प्रिया श्री सतीश कुमार सिन्हा गिरिडीह (झारखण्ड) बड़ा चौक, सहाना कॉलोनी, गिरिडिह-झारखण्ड अनारक्षित महिला मंडल कारा, बक्सर
13 डॉ० अमित कुमार सिन्हा स्व० डा० यदुनन्दन प्रसाद सिन्हा पटना म० सं0-75, C/o-स्व० डाूँ० यदुनन्दन प्रसाद सिन्हा बहादुरपुर बगीचा, राजेन्द्र नगर, पटना-16 पिछड़ा वर्ग मंडल कारा, जहानाबाद
14 डॉ० राजू रंजन श्री राजकिशोर राय सारण ग्राम-सिसवाँ, पो. -केरवां, थाना-हसुआपुर, जिला-सारण-841411 पिछड़ा वर्ग मंडल कारा, गोपालगंज
15 डॉ० अश्विनी कुमार श्री उमेश प्रसाद नालंदा ग्राम-गोपी बिगहा, थाना-चण्डी, पो०-तुलसीगढ़ जिला नालंदा पिछड़ा वर्ग विशेष केन्द्रीय कारा, भागलपुर
16 डॉ० उमा शंकर गुप्ता स्व0 भूवनेश्वर प्रसाद नवादा ग्राम-सिकंदरपुर, पो0-असाढ़ी थाना-मुफ्फसील, जिला-नवादा पिछड़ा वर्ग मंडल कारा, शेखपुरा
17 डॉ० सुजीत कुमार स्व. केदार सिंह पटना सगुना, नया टोला, दानापुर, पटना-801503 पिछड़ा वर्ग मंडल कारा, सहरसा
18 डॉ० निधि डाँ नंद किशोर महतो लखीसराय कोनी पर थाना-सूर्यगढ़ा जिला-लखीसराय पिन-84126 पिछड़ा वर्ग महिला मंडल कारा, लखीसराय
19 डॉ० राजीव रंजन स्व० कृष्णा प्रसाद पटना बैंकर्स काँलनी कदम गली, जे०पी० नगर पो०-जी०पी०ओ० थाना-जक्कनपुर, पटना अ0पि0 वर्ग मंडल कारा, नवादा
20 डॉ० ज्ञानी गौरव कुमार श्री नीलम संजीव कुमार नालंदा ग्रामपोे.-कछियावाँ थाना-नगरनौसा जिला-नालंदा अनुसूचित जाति मंडल कारा, सासाराम
21 डॉ० महेश कुमार श्री रामेश्वर पासवान नालंदा ग्रामपो0-सतनाग, थाना-चंडी, जिला-नालंदा, पिन-803108 अनुसूचित जाति मंडल कारा, मधेपुरा
22 डॉ० मुकेश कुमार श्री अर्जुन प्रसाद पटना यूको बैंक कॉलोनी, न्यू बस स्टैण्ड, मीठापुर, पो.-जी.पी.ओ., थाना-जक्कनपुर, पटना-800001 अनुसूचित जाति केन्द्रीय कारा, बक्सर
23 डॉ० अमितेश कुमार श्री मरई प्रसाद राम सारण (छपरा) ग्रा0पो0-नैनी थाना-मुफ्फसील जिला-सारण अनुसूचित जाति उपकारा, बगहा
24 डॉ० विधाता कुमार श्री सुखदेव चौधरी वैशाली सैदपुरा पटेढा पो०थाना-सराय, जिला-वैशाली बिहार, पिन-844125 अनुसूचित जाति मंडल कारा, नवादा
25 डॉ० रवि रंजन कुुमार श्री सुरेश प्रसाद जहानाबाद ग्रामपो0-भगवानपुर, थाना-हुलासगंज, जिला-जहानाबाद, पिन-804407 अनुसूचित जाति मंडल कारा, विक्रमगंज
26 डॉ० राजीव कुमार अमन श्री रक्षा राम गोपालगंज ग्राम-धोबवलीया, पोस्ट-उदतराय के बंगरा, थाना-मांझागढ, जिला-गोपालगंज- 841428 अनुसूचित जाति उपकारा, झंझारपुर
27 डॉ० सुदर्शन चक्रवर्ति श्री मोहन पासवान समस्तीपुर ग्रामपो0-वाजीतपुर भाया-विद्यापतिनगर जिला-समस्तीपुर अनुसूचित जाति उपकारा, दलसिंहसराय
28 डॉ० नवेन्दु कुमार श्री अवधेश पासवान पटना ग्राम-मुरेरा, पो०-बाँकीपुर मछरियावाँ थाना-फतुहा, जिला-पटना। अनुसूचित जाति मंडल कारा, शेखपुरा
29 डॉ० बिरजु भारती श्री भुनेश्वर विश्वकर्मा पटना ग्रा0पो0-बैरिया, थाना-गोपालपुर, प्रखण्ड-सम्पतचक, जिला- पटना अनुसूचित जन जाति मंडल कारा, उदाकिशुनगंज
13 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 14

उपरोक्त वर्णित नव पदस्थापित चिकित्सक यदि किसी कारण से पद त्याग करते हैं अथवा पदस्थापन कारा में योगदान नहीं देते हैं तो निम्नांकित प्रतीक्षा सूची में से वैसे चिकित्सकों का नियोजन मेधा क्रमांक के अनुसार उसी कोटी में से किया जाएगा, जिस कोटी के संविदा आधारित चिकित्सक विभिन्न कारण से पदत्याग करते हैं या अपने पदस्थापन कारा में ससमय योगदान नहीं करते हैं।

प्रतीक्षा सूची :- अनारक्षित
क्र० सं० अभ्यर्थी का नाम पिता/पति का नाम ग ृह जिला अभ्यर्थी का स्थाई पता आरक्षण कोटि (जिसमें चयनित हुए हैं) पदस्थापन कारा का नाम
1 2 3 4 5 6 7
1 डॉ० दिलीप कुमार श्री विरेन्द्र प्रसाद पूर्वी चम्पारण ग्रा०-कौरेया पो०-जमुनिया थाना-भरोखर जिला-पूर्वी चम्पारण अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-1
2 डॉ० सेतु चंद्रा स्व0 रामचन्द्र प्र0 सिंह मुजफ्फरपुर C/O- स्व0 रामचन्द्र प्रसाद सिंह, ग्राम-भीखनपुरा, पो0-खबड़ा, थाना-सदर, जिला-मुजफ्फरपुर अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-2
3 डॉ० रोहित कुमार डॉ० रमेश प्रसाद सिंह पटना प्लाट नं0-330 जगदेव नगर नियर रिलायंस टावर बेलीरोड, दानापुर, पटना अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-3
4 डॉ० अभिषेक रंजन श्री बैद्यनाथ प्रसाद पूर्वी चंपारण ग्राम-रामनगर, पो0-धनौजी, थाना-पकड़ीदयाल, जिला-पूर्वी चंपारण अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-4
5 डॉ० मो. नौशाद आलम स्व. मो. ईनामुल हक समस्तीपुर पे.-एस.ए. करीम ग्राम-मथुरापुर, थाना-वारिसनगर, जिला-समस्तीपुर- 848101 अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-5
6 डॉ० कृष्ण दयाल झा श्री सचिदानन्द झा समस्तीपुर ग्रा0-उदयपुर, पो0-अखतियारपुर थाना- सरायरंजन जिला-समस्तीपुर अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-6
7 डॉ० निखिल निलेश श्री कुमुद रंजन सिन्हा जमुई वी.आई.पी. कॉलोनी, सिरचन्द नवादा, जमुई(बिहार)-811307 अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-7
8 डॉ० ज्योर्तिमादिव्य डा० विकाश चन्द्र चौधरी पटना फ्लैट नं०-101 सूर्यू पूष्पांजली आपर्टमेन्ट हीरा पन्ना ज्वेलर्स के पीछे बोरिंग रोड, पटना अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-8
9 डॉ० शशांक कुमार श्री रत्नेश कुमार चौधरी बेगुसराय ग्रामपो.-फतेह, थाना-बछवाड़ा, जिला-बेगुसराय- 851111 अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-9
10 डॉ० नितेश कुमार श्री कौशलेन्द्र सिंह पटना ग्राम-वराह, पो.-भुआपुर, थाना-बेलछी, जिला-पटना अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-10
11 डॉ० धनन्जय कुमार श्री राम बिलास प्रसाद सिंह नालंदा ग्राम-महादेवपुुर पो०-राजगीर जिला-नालंदा अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-11
12 डॉ० रिशु रंजन श्री विनय कुमार पूर्वी चम्पारण पे.-श्री विनय कुमार, अमलापट्‌टी, मोतिहारी-845401 अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-12
13 डॉ० पप्पुु गौतम श्री लक्ष्मण सिंह सीवान ग्रामपो0-नैनपुरा, जिला-सीवान, पिन-841241 अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-13
14 डॉ० निशान्त श्री काशीनाथ चौबे पटना श्री गणेश वंदना इनक्लेव, फ्लैट नं. -301, विवेकानन्द पार्क, पी.पी. कॉलोनी, पटना-800013 अनारक्षित प्रतीक्षा सूची-14
प्रतीक्षा सूची :- पिछड़ा वर्ग
1 डॉ० अभिषेक गौरव स्व. विरेन्द्र परदे शी े पटना ग्राम-टिकिया टोली पोस्ट-महेन्दु थाना-सुल्तानगंज, जिला-पटना पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-1
2 डॉ० अनमोल कुमार श्री रामकृष्ण प्रसाद सीतामढ़ी ग्रामपो.-बखरी, थाना-सुरसण्ड, जिला-सीतामढी-843331 पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-2
3 डॉ० प्रवीण कुमार श्री शिव शंकर यादव सहरसा खजुराहा पो०-हरेवा थाना-सलखुआ, जिला-सहरसा पिन-852196 पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-3
4 डॉ० जिपो लाल श्री लक्षमण यादव भागलपुर खजुराहा, पो०-लोदीपुर, जिला-भागलपुर पिन-812005 पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-4
5 डॉ० मुकेश कुमार श्री सुरेश प्रसाद नालंदा ग्राम-लोदीपुर, पो. थाना-नगरनौसा जिला-नालंदा-801305 पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-5
6 डॉ० निप्पो कुमार श्री राम बहादुर यादव बेगुसराय नारायणवीपर,थाना-चौराही जिला-बेगुसराय बिहार पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-6
7 डॉ० राज किशोर यादव श्री रणवीर यादव दरभंगा ग्रा०-जकौली पो०-बाथो, बेनीपुर जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-847233 पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-7
8 डॉ० राजेश कुमार प्रसाद श्री सकलदेव प्रसाद गोपालगंज ग्रामपो0-सरैया नागेन्द्र, थाना-बरौली, जिला-गोपालगंज पिछड़ा वर्ग प्रतीक्षा सूची-8
प्रतीक्षा सूची :- अनुसूचित जाति
1 डॉ० राजेश कुमार भारती श्री शिवपरसन राम कैमूर ग्रा०-पतेसर, पो०-सौखरा, थाना-चाँद, जिला-कैमूर (भभुआ) बिहार, पिन-821106 अनुसूचित जाति प्रतीक्षा सूची-1
15 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 16

कोई भी चिकित्सक नियमित नियुक्ति का दावा नहीं करेंगे।

4. सभी चिकित्सक अपने पदस्थापन कारा में निम्नांकित कागजात/अभिलेख के साथ योगदान देगें-(i) सभी प्रमाण-पत्रों की स्वअभिप्रमाणित छायाप्रति (ii) असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाघिकारी (सिविल सर्जन) के स्तर से निर्गत स्वास्थ्य परीक्षण प्रमाण-पत्र (iii) संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा पूर्ण रूप से भरकर (iv) समर्पित सभी कागजात/अभिलेख सही है इससे संबंधित शपथ पत्र की प्रति।

5. सभी संबंधित चिकित्सकों को निदेश है कि वे पदस्थापन कारा में पंद्रह दिनों के अंदर अपना योगदान देना सुनिश्चित करेंगे। निर्धारित तिथि के अंतर्गत योगदान नहीं करने वाले चिकित्सकों का नियोजन स्वतः समाप्त हो जायेगा। योगदान नहीं करने वाले चिकित्सकों के स्थान पर प्रतीक्षा सूची से उसी कोटी के चिकित्सकों को पदस्थापित कर दिया जाएगा। प्रतीक्षा सूची की मान्यता आगामी Walk-in-interview तक ही मान्य होगी।

6. नव पदस्थापित संविदा आधारित चिकित्सक के प्रमाण पत्र का सत्यापन संबंधित संस्थान से काराधीक्षक तीन माह के अन्दर करा लेगें। तीन माह तक प्रमाण पत्र का सत्यापन नही होने की स्थिति में प्रमाण पत्र के सत्यापन तक संबंधित चिकित्सको के मानदेय का भुगतान स्थगित रहेगा।

आदेश से, अंजनि कुमार, उप-सचिव-सह-उप निदेशक (प्र0)।17 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019

2 जनवरी 2019

सं0 कारा/स्था0 (चि0)01-21/2018-21--महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा दिनांक 25.09.2018 को Walk-in-interview के माध्यम से राज्य की विभिन्न काराओं में संविदा के आधार पर पाँच (05) उपस्थित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति करने हेतु उनके कागजातों/प्रमाण-पत्रों की जांच की गयी।

2. उपरोक्त के आलोक में सभी 05 विशेषज्ञ चिकित्सकों को नियुक्त करते हुए उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-7 में

क्र० सं० अभ्यर्थी का नाम पिता/पति का नाम ग ृह जिला अभ्यर्थी का स्थाई पता आरक्षण कोटि (जिसमें चयनित हुए हैं) पदस्थापन कारा का नाम
1 2 3 4 5 6 7
1 डॉ० दीपिका डा० मनोहर प्रसाद जाखनवाल पटना C/o-डा० जनार्दन प्रसाद, 54 अशियाना नगर फेज नं०-1, पटना-25 अनारक्षित वि0के0 कारा, भागलपुर
2 डॉ० कमल किशोर श्री राजकिशोर सिंह पटना हाथीखाना मोड़, मैनपुरा, दानापुर, पटना, पिन-801503 अनारक्षित मंडल कारा, किशनगंज
3 डॉ० चेतना श्री सुरेश प्रसाद श्रीवास्तव पटना हाउस नं.-104, पाटलीग्राम, बजरंगपुरी, शहीद भगत सिंह पथ, कुम्हरार, पटना-800007 अनारक्षित केन्द्रीय कारा, मोतिहारी
4 डॉ० नीरज कुमार सिंह श्री विक्रम सिंह पटना बी०-151 बुद्वा कॉलनी, पटना पिन-800001 अनारक्षित केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ
5 डॉ० सुमन सौरभ श्री राजीव रंजन लाल पटना द्वारा-स्व0 राजीव रंजन लाल ए-02, देवरति अपार्टमेन्ट, कदमकुँआ पटना-800003 अनारक्षित केन्द्रीय कारा, गया

कोई भी चिकित्सक नियमित नियुक्ति का दावा नहीं करेंगे।

4. सभी चिकित्सक अपने पदस्थापन कारा में निम्नांकित कागजात/अभिलेख के साथ योगदान देगें-(i) सभी प्रमाण-पत्रों की स्वअभिप्रमाणित छायाप्रति (ii) असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाघिकारी (सिविल सर्जन) के स्तर से निर्गत स्वास्थ्य परीक्षण प्रमाण-पत्र (iii) विहित प्रपत्र में एकरारनामा पूर्ण रूप से भरकर (iv) समर्पित सभी कागजात/अभिलेख सही है इससे संबंधित शपथ पत्र की प्रति।

5. सभी संबंधित चिकित्सकों को निदेश है कि वे पदस्थापन कारा में पंद्रह दिनों के अंदर अपना योगदान देना सुनिश्चित करेंगे। निर्धारित तिथि के अंतर्गत योगदान नहीं करने वाले चिकित्सकों का नियोजन स्वतः समाप्त हो जायेगा। 6. नव पदस्थापित संविदा आधारित चिकित्सक के प्रमाण पत्र का सत्यापन संबंधित संस्थान से काराधीक्षक तीन माह के अन्दर करा लेगें। तीन माह तक प्रमाण पत्र का सत्यापन नही होने की स्थिति में प्रमाण पत्र के सत्यापन तक संबंधित चिकित्सको के मानदेय का भुगतान स्थगित रहेगा।

आदेश से, अंजनि कुमार, उप-सचिव-सह-उप निदेशक (प्र0)।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 18

जल संसाधन विभाग

-----

अधिसूचनाएं

4 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2016-1911--श्री राम विनय शर्मा (आई0डी0-3612), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर को गंडक बराज गेट सं०-33 के क्षतिग्रस्त होने, कार्य का स्थल का समय-समय पर निरीक्षण नहीं किये जाने, बराज के देखरेख एवं गेटों का संचालन में लापरवाही बरतने के आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1661, दिनांक 03.08.2016 द्वारा निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1703, दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1943, दिनांक 07.11.17 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलगन करते हुए श्री शर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री शर्मा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री शर्मा को निलंबन से मुक्त करते हुए कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम विनय शर्मा, कार्यपालक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

4 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2016-1912--श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4436), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर को गंडक बराज गेट सं०-33 के क्षतिग्रस्त होने, कार्य का स्थल का समय-समय पर निरीक्षण नहीं किये जाने, बराज के देखरेख एवं गेटों का संचालन में लापरवाही बरतने के आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1660, दिनांक 03.08.2016 द्वारा निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1702, दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1944, दिनांक 07.11.17 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार, अधीक्षण अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

10 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(डि0)-14-07/2018-1985--श्री अशोक कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) प्रमंडल, डिहरी जो कुरथा काण्ड संख्या-195/16 में आरोपी हैं, दिनांक 13.06.2018 को आत्म सर्मपण करने के पश्चात जेल में हैं।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली 2005 के नियम-9 में निहित प्रावधान के तहत उनके जेल जाने की तिथि 13.06.18 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए उन्हें निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि में श्री अशोक कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) प्रमंडल, डिहरी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली, 2005 के नियम-10 के तहत अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------ 10 सितम्बर 2018 सं॰ 22/नि॰सि॰(डि॰) 14-01/2014-1986--श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, (आई0डी0-3467), तत्कालीन मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी के पदस्थापन अवधि में रोहतास (सासाराम) मलई बराज के निर्माण कार्य में बरती गई19 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-475, दिनांक 18.02.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः- आरोप-1- मलई बराज योजना में Finish Rate पर बोल्डर पीचींग/Stone metal filter को supply and Labour Rate मे तोड़कर प्राक्कलन (सं0-SCM-4701/04/2012-13 एवं SCM- 4701-01-2013-14) स्वीकृत करने एवं एकमुश्त तकनीकी स्वीकृति दिए जाने के बावजूद दायाँ तथा बायाँ गाइड बांध निर्माण कार्य के परिमाण विपत्र की स्वीकृति के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.1.0, 6.3.0 एवं 6.6.0 के आलोक मे दोषी है। आरोप-2- नक्शा के अनुरूप प्राक्कलन स्वीकृत नहीं करने और विभाग को गुमराह कर के Boulder एवं Metal के Supply को जारी रखवाने अर्थात्‌ सरकारी निधि का संवेदक को अनावश्यक भुगतान करवाने के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.5.0 के आलोक में दोषी है। आरोप-3- मलई बराज योजना की एकमुश्त 5825.63 लाख रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति और रूपए 6699.45 लाख मात्र के एक तकनीकी स्वीकृति के बावजूद कार्य को टूकड़े-टूकड़े में बॉट कर परिमाण विपत्र की स्वीकृति करने से तकनीकी परीक्षण कोषांग के पत्रांक-462, दिनांक-30.03.1982 का उल्लंघन हुआ है। इसके अतिरिक्त मूल कार्य (संरचना कार्य) की निविदा का निष्पादन नहीं होने के बावजूद मलई बराज के दायाँ एवं बायाँ गाइड बाँध का निविदा निष्पादित किया गया। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.3.0, 6.10.0, 6.10.1 एवं 6.10.2 के आलोक में दोषी हैं। आरोप-4- निविदा आमंत्रण/निष्पादन के संबंध में भ्रामक सूचना दी गई। एक ओर प्राक्कलन के विपरीत गाइड बांधों का अलग B.O.Q अनुमोदित किया तो दूसरी ओर विभाग से स्पष्टीकरण किया गया तो विभाग से स्पष्टीकरण पूछे जाने पर गलत सूचना दी गई कि कार्य को बन्द करा दिया गया है जबकि प्रमंडलीय स्तर पर कार्य पूरी प्रगति में था। कार्य को रोकने की स्पष्ट मंशा नही रहने के कारण ही कार्य की प्रगति प्रतिवेदन से अवगत होते हुए भी कार्य को रोका नहीं गया। फलतः संवेदको को किया गया भुगतान अनुत्पादक हुआ क्योंकि सभी निविदाओं का निष्पादन विभागीय स्तर पर होना चाहिए था। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.10.3 के आलोक में दोषी है। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक्‌ समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-268, दिनांक 21.02.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। उक्त के आलोक में श्री अम्बरकर द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर समर्पित नहीं किया गया। इसलिए उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। आरोप सं0-1 :- प्रस्तुत आरोप मलई बराज योजना मेें बोल्डर पीचींग एवं मेटल फिल्टर कार्य मद का आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान वाले प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दिये जाने तथा एकमुश्त तकनीकी स्वीकृति के बावजूद दायें एवं बायें गाईड बाँध का परिमाण विपत्र स्वीकृत करने से संबंधित है। बोल्डर/मेटल कार्यमद का Finish Rate पर प्रावधान नहीं करने के संबंध में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि केन्द्रीय रूपांकण संगठन द्वारा योजना की स्वीकृति के अनुसार बोल्डर से संबंधित कार्य मदों का व्यवहार किया गया है। साथ ही कहना है कि विभागीय अनुसूचित दर में अलग-अलग प्रावधान है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6.1.0 में अंकित किया गया है कि वर्त्तमान में बोल्डर एवं स्टोन मेटल का कार्य फिनिस्ड रेट (विशेष परिस्थिति छोड़कर) पर करवाये जाते है एवं संवेदक को भुगतान करने के उद्देश्य से ऐसा प्रावधान किये जाने की संभावना व्यक्त की गई है तथा कंडिका-6. 6.0 से स्पष्ट होता है कि बराज एवं गाईड बाँध का Alignment Fix नहीं होने के बावजूद बोल्डर/मेटल के आपूर्ति मद में रू0 1,71,78,746/- का भुगतान किया गया है। हालाकि अन्य आरोपित पदाधिकारी के बयान से स्पष्ट होता है कि उक्त आपूरित बोल्डर/मेटल का उपयोग गाईड बाँध निर्माण में किया जा चुका है। उपर्युक्त तथ्य के आधार पर आरोपित का उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। एकमुश्त तकनीकी स्वीकृति के बावजूद दायें एवं बायें गाईड बाँध का परिमाण विपत्र स्वीकृति किये जाने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि कई दशक पुरानी योजना मेें पूर्व निर्धारित गु्रपों के अनुसार निविदा आमंत्रित किये जाने एवं सक्षमता के तहत निविदा निष्पादन किया गया एवं मूल प्राक्कलन को तोड़कर परिमाण विपत्र की स्वीकृति की बात बेमानी है। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा रू0 6699.45 लाख की प्रथम पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति दिनांक-11.08.2012 को एवं रू0 6333.41 लाख की पुनः पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति 20.04.2013 को दी गई थी। उस एकमुस्त स्वीकृति प्राक्कलन के विरूद्ध परिमाण विपत्र की स्वीकृति हेतु आरोपित पदाधिकारी (मुख्य अभियंता) सक्षम प्राधिकार नहीं होते है। परन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा दायाँ एवं बायाँ गाईड बाँध के परिमाण विपत्र की स्वीकृति क्रमशः रू0 279.12 लाख दिनांक- 13.08.2012 को दी गई परिमाण विपत्र से होती है जो विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन परिलक्षित करता है। तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक- 462 दिनांक-30.03.1982 के भाग-2 कंडिका-1 के अनुसार तकनीकी स्वीकृति राशि के अनुसार निविदा निष्पादन के लिए सक्षम पदाधिकारी ही कार्य के टूकड़ों में बांटकर निविदा मांगने के लिए सक्षम प्राधिकार होते है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का आरोप-1 के संदर्भ में द्वितीय पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नही होता है। आरोप सं0-2ः- प्रस्तुत आरोप नक्शा के अनुरूप प्राक्कलन की स्वीकृति नहीं करने और विभाग को गुमराह कर बोल्डर/मेटल जारी रखवाते हुए संवेदक को अनावश्यक भुगतान कराये जाने से संबंधित है।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 20 आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि पूर्व में Stone Metal का प्रावधान था एवं मुख्य अभियंता केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध से प्राप्त निदेश के आलोक में 20.12.2012 को जी0टी0 फिल्टर के प्रावधान वाले नक्शे की स्वीकृति दी गई मलई बराज योजना के दिनांक-11.08.2012 को रूपये 6699.45 लाख की एकमुस्त तकनीकी स्वीकृति के आलोक में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक- 3840 एवं 3841 दिनांक-06.12.2012 से दायाँ एवं गाईड बाँध निर्माण का निविदा निस्तार करते हुए कार्यवंटन किया गया जिसमें बोल्डर के नीचे मेटल फिल्टर का प्रावधान है। साथ ही दिनांक-20.12.2012 को बोल्डर के नीचे G.T. Filter के प्रावधान वाले नक्शा का अनुमोदन किया गया जिसके अनुसार मेटल की आवश्यकता नहीं रह जाती है। परन्तु तदनुसार प्राक्कलन का संशोधन नहीं किया गया जिससे नक्शा के अनुसार प्राक्कलन की स्वीकृति नहीं होने का आधार बनता है। विभाग को गुमराह कर बोल्डर/मेटल की आपूर्ति जारी रखवाते हुए संवेदक को अनावश्यक भुगतान करवाये जाने के संदर्भ में अपने द्वितीय पृच्छा बयान में कोई तथ्य नहीं दिया गया है जिससे माना जा सकता है कि आरोपित पदाधिकारी सहमत हैं। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में आरोप-2 के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी को द्वितीय पृच्छा का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-3ः- प्रस्तुत आरोप मलई बराज योजना की एक मुश्त प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति के बावजूद कार्य को टुकड़ों में परिमाण विपत्र की स्वीकृति दिये जाने से तकनीकी परीक्षक कोषांग का पत्रांक-462 दिनांक-30.02.82 का उल्लंघन होने एवं साथ ही मलई बराज के निविदा निष्पादित नहीं होने की स्थिति में भी दायें एवं बायें गाईड बॉध का निविदा निष्पादन किये जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.3.0 के संदर्भ में उत्तर स्पष्ट किया जा चुका है एवं कंडिका 6.10.0 के संदर्भ में पूर्व में उत्तर दिये जाने एवं वर्त्तमान में 26.12.88 में निर्धारित ग्रुपों के आधार पर निविदा निकाले जाने को प्रतिवेदित किया गया है। साथ ही कंडिका 6.10.2 के संदर्भ में कहा गया है कि तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक-462 दिनांक-30.03.82 की अवहेलना नहीं कर कार्यहित में कार्य कराया गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.3.0 के अनुसार मलई बराज योजना का एकमुस्त तकनीकी स्वीकृति के बावजूद दायें एवं बायें गाईड बाँध का अलग-अलग परिमाण विपत्र की स्वीकृति दिये जाने को विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है। उपरोक्त की विवेचना आरोप संख्या-1 में किया गया हैं एवं आरोपित पदाधिकारी का बयान स्वीकार योग्य नहीं माना गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.10.0 से स्पष्ट होता है कि दिनांक-26.12.88 में निर्धारित गु्रपों के आधार पर 25 वर्ष बाद वर्त्तमान में निविदा आमंत्रित किये जाने का कोई औचित्य नहीं है। यदि यह आवश्यक था तो निष्पदन सक्षम प्राधिकार अर्थात विभागीय स्तर से किया जाना चाहिए था। परन्तु पूर्व के ग्रुपों पर आधारित निविदा प्रकाशित कराकर अलग-अलग निविदित राशि के लिए सक्षम प्राधिकार से निष्पादित कराया गया। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप स्थापित होता प्रतीत होता है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.10.2 से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा तकनीकी परीक्षक कोषांग को परिपत्र पत्रांक-462 दिनांक-30.03.82 द्वारा प्रचलित मान्यता को दरकिनार कर कार्य को टूकड़ों-टूकड़ों में निविदा आमंत्रित कराते हुए दायां एवं गाइड बाँध का निविदा निस्तार 06.12.12 एवं 07.12.12 को किया गया जबकि विभागीय पत्रांक-1749 दिनांक-20.12.12 में विभागीय पत्रांक-1431 दिनांक-18.12.12 से तकनीकी परीक्षक कोषांग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं करने के निदेश को स्मारित कराया गया है। इस प्रकार इसके बावजूद भी आरोपित पदाधिकारी द्वारा निविदा निस्तार किया गया। अतएव उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का आरोप सं0-3 के संदर्भ में द्वितीय पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-4ः- प्रस्तुत आरोप निविदा आमंत्रण/निष्पादन में भ्रामक सूचना दिये जाने, विभागीय पृच्छा पर कार्य बंद होने की गलत सूचना दिये जाने कार्य रोकने की स्पष्ट मंशा नहीं होने के कारण ही संवेदक को भुगतान होने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि विभाग से कार्य बंद कराने के आदेश प्राप्त होते ही पत्रांक-4003 दिनांक-18. 12.12 से विभागीय आदेश प्राप्त होने तक कार्य स्थगित करा दिया गया एवं विभागीय आदेश का अक्षरशः पालन किया गया। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6.10.3 से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभागीय आदेश प्राप्त होने तक कार्य स्थगित रहने के लिए मुख्यालय को आश्वस्त किया जाता है। वहीं उनके अधीनस्थ पदाधिकारियों के पत्राचार से निर्धारित गु्रपों के अनुसार कार्य कराया जाना स्पष्ट होता है। प्रमंडल/अंचल द्वारा समर्पित प्रगति प्रतिवेदन से कार्य होने के संबंध में आरोपित पदाधिकारी पूर्णतः अवगत रहंें है। लेकिन औपचारिक रूप से कार्य स्थगित रहने की सूचना देते रहे है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है में किये गये उपरोक्त समीक्षा के आलोक में आरोप सं0-4 के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त तथ्यों, आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान एवं साक्ष्य, उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी का आरोप संख्या-1,2,3 एवं 4 से संदर्भित द्वितीय कारण पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। समीक्षोपरांत उक्त आरोप-1,2,3 एवं 4 को प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपो के लिए श्री अम्बरकर को निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। 1. संगत वर्ष के लिए निन्दन की सजा दी जाए। 2. प्रोन्नति की देय तिथि से तीन वर्ष तक प्रोन्नति पर रोक।21 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 3. श्री अम्बरकर को भावी वेतनवृद्धि देय नहीं हो। उक्त दंड निर्णय पर माननीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। अतएव उक्त निर्णीत दंड श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------

25 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017-2142--श्री संजय कुमार (आई0डी0-5379) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त अवर प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायाँ तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण हुए टूटान, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं रहने इत्यादि मामले में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1611, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1684, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार, के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1036, दिनांक 11.05.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

10 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2012-1988--श्री राम विनोद सिंह (आई०डी०-2101) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, हाजीपुर के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2012 में मलिकपुर शाखा नहर के वि0दू0 56.00 पर कराये जा रहे कैनाल लाईनिंग कार्यों में बरती गयी अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गयी। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-657, दिनांक 11.06.2013 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1830, दिनांक 04.12.14 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही दिनांक 31.01.2016 को श्री सिंह के सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-21 सहज्ञापांक-424, दिनांक 10.3.16 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए ब्रिक लाईनिंग कार्य में व्यवहृत प्लास्टर में सीमेंट की मात्रा में कमी के आरोप को अप्रमाणित एवं असहमत होते हुए कैनाल लाईनिंग कार्य में व्यवहृत ईंट के Compressive strength 70.72kg/cm2 पाये जाने के आरोप को प्रमाणित पाया गया तथा असहमति के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 1070, दिनांक 10.6.16 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 22

corresponding class of brick more than 15% उक्त के आलोक में द्वितीय कारण पृच्छा के बिन्दु में अंकित होना कि 85kg/cm2 से किसी ब्रीक का Compressive Strength कम नहीं होने का उल्लेख भ्रामक एवं साक्ष्य समर्थित तथ्य पर आधारित नहीं है।

(ख) IS कोड कंडिकाओं 3.2.1, 3.2.2 एवं 3.2.3 में क्रमशः sampling in motion, sampling from stack एवं sampling from lorries of truck का उल्लेख है। इसमें कहीं भी कार्य में व्यवहृत ईंट (वह भी मोटर में बैठाया हुआ एवं उस पर प्लास्टर किया हुआ) से निर्मित लेयर को काटकर नमूना एकत्र कर compressive strength की जाँच प्रतिवेदन में विस्तार से उल्लेख किया गया है। इससे स्वतः स्पष्ट है कि ईंट के नमूने IS कोड 5454 के प्रावधान के आलोक में एकत्र नहीं किया गया है। फलतः IRI द्वारा प्रतिवेदित जाँचफल प्रावैधिक दृष्टिकोण से प्रमाणित विश्वसनीय एवं भरोसेमंद नहीं है।

23 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019

विभागीय बेबसाईट पर मेरे जवाब से असहमत होते हुए "पेंशन से पाँच प्रतिशत की कटौती तीन वर्षों के लिए दण्ड" अधिरोपित करने का निर्गत आदेश देखा गया है। अतएव अनुरोध है कि निर्दोष होते हुए भी मुझ पर अधिरोपित दण्ड पर पुनर्विचार करते हुए मुझे दण्ड से मुक्त करने की कृपा की जाय। ताकि में सेवानिवृत के पश्चात अपना शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकूँ।

श्री सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता से प्राप्त पूर्णविलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरांत श्री सिंह द्वारा पूर्णविलोकन अर्जी में आरोप से संदर्भित कोई तथ्य नहीं दिये जाने के कारण पूर्णविलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड यथा "पेंशन से पाँच प्रतिशत की कटौती तीन वर्षों के लिए" को बरकरार रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय श्री राम विनोद सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता, शिवशंकर पथ, क्लब रोड, मीठनपुरा, पो0-रमना, मुजफ्फरपुर को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

10 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2012-1989--श्री जीवन कुमार वर्मा (आई0 डी0 जे0-4972), तत्कालीन सहायक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमण्डल, हाजीपुर के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2012 में मलिकपुर शाखा नहर के वि0 दू0 56.00 पर कराये गये कैनाल लाईनिंग कार्यों में बरती गयी अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गयी। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-657 दिनांक 11.06.13 द्वारा श्री वर्मा से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री वर्मा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1827 दिनांक 04.12.14 द्वारा श्री वर्मा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 (2) मेंं विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए ब्रिक लाईनिंग कार्य में व्यवहृत प्लास्टर में सीमेन्ट की मात्रा में कमी के आरोप को अप्रमाणित एवं असहमत होते हुए कैनाल लाईनिंग कार्य में व्यवहृत ईंट के कम्प्रेसिव स्ट्रेन्थ 70.72 kg/cm2 पाये जाने के आरोप को प्रमाणित पाया गया तथा असहमति के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 1072 दिनांक 10.06.16 द्वारा श्री वर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।24 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 श्री वर्मा, सहायक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी जिसमें निम्न तथ्य पाये गयेः-

उड़नदस्ता जाँच में कार्य स्थल से एकत्रित पाँच अदद ईंट के नमूनों की जाँच में Compressive Strength 66.79, 79.32, 82.62, 59.49 एवं 69.40kg/cm2 पाया गया है। साथ ही ईंट का Water absorption 21.47 (मानक 20% से अधिक) Colour Non Uniform, Under Burnt, Shape Distorted, Edge Rounded एवं Sound Dull पाया गया है। उक्त से स्पष्ट है कि कार्य में उपयोग किये गये ईंट विशिष्टि के अनुरूप नहीं है।25 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 अतएव समीक्षोपरांत श्री जीवन कुमार वर्मा, सेवानिवृत सहायक अभियंता के पूर्णविलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में अधिरोपित दण्ड यथा "दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति" को बरकरार रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय श्री जीवन कुमार वर्मा, सेवानिवृत सहायक अभियंता, हाउस नं०-85, आनन्दपुरी, वेस्ट बोरिंग कैनाल रोड, पटना को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

-------

14 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुक0)पू0-19-33/2011(पार्ट)-2077--श्री शम्भु शरण सिन्हा, तत्कालीन प्रभारी उप समाहर्त्ता (सहायक अभियंता) राजस्व सिंचाई प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में बरती गई गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राशि के गबन संबंधी कतिपय आरोपों के लिए सरकार द्वारा उनके विरूद्ध सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-55 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-811, दिनांक 16.07.05 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही में आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-1052, दिनांक 12.10.2009 द्वारा श्री सिन्हा को आदेश निर्गत की तिथि से "सेवा से बर्खास्त" कर दिया गया।

उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-11259/2010 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 01.12.2011 को माननीय न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए उक्त विभागीय अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया एवं वादी द्वारा समर्पित किये जाने वाले द्वितीय कारण पृच्छा के स्टेज से पाँच माह के अंदर विभागीय कार्यवाही का निष्पादन करने का निदेश दिया गया, तदोपरांत उक्त न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1052, दिनांक 12.10.2009 द्वारा श्री सिन्हा को संसूचित दण्डादेश को विभागीय अधिसूचना संख्या-615, दिनांक 11.06. 2012 द्वारा इस शर्त्त के साथ निरस्त किया गया कि वादी (श्री सिन्हा) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब दिनांक 28.12.2011 के समीक्षोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय से यह आदेश प्रभावित होगा।

इस प्रकार श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत द्वितीय कारण पृच्छा को अस्वीकृत करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं गबन के प्रमाणित आरोपो के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-356, दिनांक 15.03.2013 द्वारा श्री सिन्हा को पुनः "सेवा से बर्खास्त" कर दिया गया। उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा द्वारा पुनः माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-8280 दिनांक 2014 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 13.04.2018 को माननीय न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए उक्त विभागीय अधिसूचना संख्या-356, दिनांक 15.03.2013 को निरस्त कर दिया गया एवं अनुशासनिक प्राधिकार को नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने का निदेश दिया गया।

माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 13.04.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सह ज्ञापांक-356, दिनांक 15.03.2013 को इस शर्त के साथ निरस्त किया जाता है कि श्री सिन्हा के विरूद्ध पुनः नये सिरे से विभागीय कार्रवाई के संचालनोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय से यह आदेश प्रभावित होगा। श्री सिन्हा के विरूद्ध नये सिरे से विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु संकल्प अलग से निर्गत किया जाएगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

-------

18 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017-2082--श्री राम विनय सिन्हा (आई0डी0-3574) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 13.08. 2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनिया रिंग बाँध के मसान नरोत्तम ग्राम में क्षतिग्रस्त होने, कर्त्तव्य में लापरवाही बरतने सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1604, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1687, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री सिन्हा, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों को प्रमाणित पाया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक-1039, दिनांक 11.5.18 द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री सिन्हा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम विनय सिन्हा, कार्यपालक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 26

18 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017-2083--श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह (आई0डी0-7886) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बैरगनिया सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त अवर प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनिया रिंग बाँध के मसान नरोत्तम ग्राम में क्षतिग्रस्त होने, कर्त्तव्य में लापरवाही बरतने सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1605, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1688, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों को प्रमाणित पाया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-1040, दिनांक 11.5.18 द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

25 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017-2140--मो0 नेहाल अहमद (आई0डी0-3718) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 13.08.2017 बलुआ ग्राम में मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया बाँध के टूटान में बरती गई अनियमितता सहित अन्य आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1606, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1690, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

विभागीय कार्यवाही के संचालन में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1032, दिनांक 11.05.18 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए मो0 अहमद से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

मो0 अहमद, तत0 कार्यपालक अभियंता (निलंबित) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए मो0 अहमद, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित को निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में मो0 नेहाल अहमद, तत0 कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

25 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017-2141--श्री सतीश कुमार (आई0डी0-4045) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायाँ तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थानों पर हुए टूटान, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं रहने के मामले में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1608, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1691, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार, के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों यथा आरोप सं०-3, 5, 8, 9 एवं 10 को अप्रमाणित 2, 4, 6 अंशतः प्रमाणित तथा आरोप सं०-01 एवं 07 को प्रमाणित पाया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अंशतः प्रमाणित/प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1197, दिनांक 29.05.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता (निलंबित) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।27 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सतीश कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

--------

25 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017-2143--श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार (आई0डी0-5335) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त अवर प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायाँ तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण हुए टूटान, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं रहने इत्यादि मामले में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1610, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1683, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार, के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1034, दिनांक 11.05.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

25 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017-2144--श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4366) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त अवर प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायाँ तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण हुए टूटान, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं रहने इत्यादि मामले में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1609, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1686, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार, के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों यथा आरोप सं०-1 को अप्रमाणित एवं आरोप सं०-2 को प्रमाणित पाया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1035, दिनांक 11.05.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

25 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017-2145--श्री ओम प्रकाश (आई0डी0-जे-7488) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, अवर प्रमंडल ढाका सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 13.08.2017 बलुआ ग्राम में मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया बाँध के टूटान में बरती गई अनियमितता सहित अन्य आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-1607, दिनांक 14.09.2017 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक28 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सं०-1689, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

विभागीय कार्यवाही के संचालन में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1033, दिनांक 11.05.18 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री प्रकाश से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

श्री प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, निलंबित द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री प्रकाश, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सम्प्रति निलंबित को निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, अवर प्रमंडल ढाका सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

26 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(सम0)-02-08/2017-2168--श्री संजय कुमार सुमन (आई0डी0-5089) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-02, झंझारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब श्री सुमन के विरूद्ध बाढ़ संघर्षात्मक कार्य संबंधी विभागीय निदेशों की अवहेलना करने, अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहने, संवेदनशील कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के बेतार संदेश के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए अधिसूचना संहृ-1614, दिनांक 14.09.17 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदुपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1679, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

विभागीय कार्यवाही के संचालन में नियुक्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1112, दिनांक 22.05.18 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री सुमन से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

श्री सुमन द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संजय कुमार सुमन, सहायक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार सुमन, सहायक अभियंता (निलंबित) को निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

26 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-02/2018-2169--श्री राम जनम शर्मा (आई0डी0-3553) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-2 महनार, वैशाली सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण मद मेें कब्रिस्तान के घेराबन्दी से संबंधित निविदा को बगैर प्रचार-प्रसार के निष्पादन में बरती गई अनियमितता के मामले में विशेष सचिव, योजना एवं विकास विभाग, पटना से प्राप्त प्रपत्र-'क' के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1043, दिनांक 11.05.2018 द्वारा श्री शर्मा को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1063, दिनांक 16.05.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

(i) स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-2, महनार में उनके पदस्थापन अवधि के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण मद के अन्तर्गत 15 ग्रुप के कब्रिस्तान घेराबन्दी की निविदा आमंत्रित की गयी। जिसका निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-08/2017-18 एवं निर्गत का पत्रांक-1301, दिनांक 23.09.2017 है। उनके द्वारा बताया गया कि NIT Notice मात्र अंचलीय कार्यालय, मुजफ्फरपुर, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, हाजीपुर में हस्तगत कराया गया है। जबकि NIT के अनुसार उक्त सूचना भवन निर्माण प्रमंडल, हाजीपुर, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, हाजीपुर, PHED कार्यालय हाजीपुर एवं कैनाल डिविजन, हाजीपुर में हस्तगत कराना था। इस प्रकार उनके द्वारा बगैर यथोचित प्रचार-प्रसार निविदा पर अग्रेतर कार्रवाई की गई, जो नियमानुकूल नहीं था। बगैर यथोचित प्रचार-प्रसार के निविदा निस्तार की कार्यवाही निविदा की पारदर्शिता को ध्वस्त करने के प्रयास को दर्शाता है।

संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री शर्मा द्वारा समर्पित बचाव-बयान में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गयी है :- (i) दिनांक 30.05.18 को हस्ताक्षरित मूल बचान बयान में मेरे द्वारा स्पष्ट किया गया कि अल्पसंख्यक कल्याण मद से संबंधित कार्यों की निविदा संख्या-08/2017-18 उनके पत्रांक-1301, दिनांक 23.09.2017 द्वारा प्रकाशित किया गया था। जिसे स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, मुजफ्फरपुर एवं स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-1, हाजीपुर को उपलब्ध29 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 कराया गया। साथ ही प्रमंडलीय कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी चिपकाया गया। सीमित संसाधन के कारण अन्य कार्यालय को नहीं भेजा गया। इस निविदा को अपने कार्यालय के पत्रांक-1418, दिनांक 03.11.2017 द्वारा रद्‌द करते हुए पुर्न निविदा संख्या-08/2017 द्वारा दिनांक 13.12.17 को निविदा आमंत्रित किये जाने एवं संबंधित सारे कार्यालयों को उपलब्ध कराने के साथ इसकी सूचना प्रमंडलीय प्राक्कलन पदाधिकारी एवं लेखा पदाधिकारी को भी प्राप्त कराया गया। इस प्रकार मेरे द्वारा विभागीय आदेश का उल्लंघन नहीं किया गया एवं निविदा में पारदर्शिता बरती गयी है अतएव आरोप से मुक्त किया जाय। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री शर्मा से प्राप्त बचाव-बयान एवं उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर कहा है कि पूर्व में बिना प्रचार-प्रसार के ही कार्यों की निविदा आमंत्रित की गई थी, किन्तु इसका निस्तार उनके द्वारा नहीं किया गया एवं उक्त निविदा को रद्‌द करते हुए पुर्न निविदा की गई। जिसका यथोचित प्रचार-प्रसार उनके द्वारा किया गया। अतः बिना प्रचार-प्रसार किये निविदा निस्तार करने की कार्रवाई संबंधी आरोप श्री शर्मा के विरूद्ध प्रमाणित नहीं होता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम जनम शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, महनार, वैशाली सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उक्त मामले में आरोप मुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम जनम शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, महनार, वैशाली सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, मुख्य अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन का कार्यालय, बिहार, पटना को निलंबन से मुक्त करते हुए आरोप मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

28 सितम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-10/2006-2194--श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, पूर्णियाँ के विरूद्ध सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अन्तर्गत निविदा आमंत्रण सूचना सं०-05/2005-2006 के ग्रुप सं०-03 के कार्यावंटन में अनियमितता बरते जाने से संबंधित आरोपों की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से कराई गई, उड़नदस्ता से प्राप्त प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-160, दिनांक 11.02.2011 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में ही श्री पासवान की सेवानिवृति के कारण उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं०-52, दिनांक 10.02.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच-प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें साक्ष्य के अभाव में आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अन्तर्गत निविदा आमंत्रण सूचना सं०-05/2005-06 के ग्रुप सं०-3 जो किशनगंज वितरणी के विभिन्न बिन्दुओं पर अवस्थित संरचना के मरम्मति कार्य से संबंधित है के लिए दिनांक 07.03.2006 को प्राप्त दो अदद निविदायें यथा मे0 माँ सरोज कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 एवं मे0 रतिलाल यादव के तकनीकी बीड का तुलनात्मक विवरणी कार्यपालक अभियंता सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के पत्रांक-340, दिनांक 16.03.2006 से प्रेषित है। तकनीकी बीड उनके चरित्र प्रमाण पत्र में ओभर राईटिंग/कटिंग अग्रधन राशि के रूप में एन0एस0सी0 के पता एवं निबंधन के पता में भिन्नता एवं सेलटैक्स सफाया प्रमाण पत्र में मे0 रतिलाल यादव के स्थान पर रतिलाल यादव अंकित होने के कारणों से अमान्य किये जाने का कार्य0 अभि0 के प्रस्ताव को स्वीकार कर वीरपुर को एकल निविदा मानते हुए मुख्य अभियंता, वीरपुर को अनुशंसा सहित अग्रसारित किया गया, जिसके आधार पर मुख्य अभियंता, वीरपुर द्वारा भी आपके अनुशंसा के आधार पर एक निविदा मानते हुए मे0 माँ कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 के पक्ष में निर्णय लिया गया। निविदा आमंत्रण सूचना-05/2005-06 में निहित शर्तों विभागीय पत्रांक-34 (पी0सी0) दिनांक 12.02.2006 एवं मे0 रतिलाल यादव के तकनीकी बीड को अमान्य किया जाना विभागीय मापदंडो नियमों एवं नैसर्गिक न्याय के अनुकूल नहीं कहा जा सकता है। इस प्रकार निविदा निस्तार के लिए विभागीय मापदंडों/नियमों के बिना जाँच-पड़ताल किये कार्यपालक अभियंता, मुरलीगंज के प्रस्ताव को यथावत अनुशंसित करने के लिए आप दोषी है, जिसके कारण मे0 माँ सरोज कन्सट्रक्शन प्र0 लि0 के तकनीकी बीड को मान्य करते हुए अनुसूचित दर पर कार्यावंटन किया गया, जिसे अग्रधन की राशि में कमी एवं अन्य कारणों से कार्यावंटन को विभाग द्वारा निरस्त करते हुए मे0 रतिलाल यादव को अनुसूचित दर से 15% कम दर पर कार्यावंटन किये जाने की स्थिति बनी।

इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के उक्त बिन्दु के लिए श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्का0 अधीक्षण अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत से विभागीय पत्रांक-1553, दिनांक 07.09.17 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री पासवान द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा निम्नरूपेण की गयी :-

श्री पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि श्री पासवान द्वारा वही तथ्य एवं साक्ष्य दिया गया है जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को विभागीय कार्यवाही के दौरान दिया गया है। श्री पासवान द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में मुख्यतः प्रश्नगत कार्य के निविदा आमंत्रण से लेकर30 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 मे0 माँ सरोज कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 को कार्यावंटन एवं उक्त कार्यावंटन को रद्‌द करने से लेकर मे0 रतिलाल यादव को कार्यावंटन एवं कराये गये कार्य का उल्लेख करते हुए आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि मे0 रतिलाल यादव के तकनीकी बीड के चरित्र प्रमाण पत्र में ओभर राईटिंग/कटिंग, अग्रधन के रूप में जमा किये गये NSC के पता एवं निबंधन के पता में भिन्नता के कारण मे0 रतिलाल यादव को तकनीकी बीड की मान्यता नहीं देते हुए छाँटा गया था। फलतः एकल निविदा हो जाने के कारण निविदा निष्पादन हेतु मुख्य अभियंता को भेजा गया था तथा मुख्य अभियंता द्वारा समीक्षोपरांत दिये गये निदेश के आलोक में मे0 माँ सरोज कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 को निविदित दर यथा अनुसूचित दर पर कार्यावंटन किया गया था। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.1.13 एवं 4.1.15 में कहा गया है कि जिस आधार पर मे0 रतिलाल यादव का तकनीकी बीड अमान्य किया गया है वह नियम के विरूद्ध है। क्योंकि विभागीय पत्रांक-34(जी0सी0) दिनांक 12.02.06 में स्पष्ट रूप से अंकित है कि आचरण प्रमाण पत्र को प्री-क्वालीफिकेशन के मापदण्ड में आवश्यक अंग नहीं बनाया जा सकता तथा मे0 रतिलाल यादव के पार्टनरशीप डीड के क्लाउज-II के अनुसार श्री जगरनाथ यादव फर्म की ओर से एकरारनामा करने NSC पासबुक आदि जमा करने के लिये प्राधिकृत है। डाकघर द्वारा NSC सामान्तय फर्म के नाम से निर्गत नहीं किया जाता है बल्कि व्यक्तिगत नाम से निर्गत किया जाता है। अतएव फर्म के पते एवं श्री जगरनाथ यादव के आवासीय पता की भिन्नता के आधार पर NSC को अमान्य किया जाना उचित नहीं है तथा सेल टैक्स सफाया प्रमाण पत्र में केवल मेसर्स नाम के सामने अंकित नहीं रहने से इसे अमान्य किया जाना उचित नहीं माना गया है क्योंकि सेल टैक्स प्रमाण पत्र एवं सेल टैक्स सफाया प्रमाण पत्र में एक ही सं०-10511104010 अंकित है।

बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम 158A के अनुसार असफल निविदादाता का प्राईस बीड लिफाफा लौटाने के उपरांत ही सफल निविदादाता का प्राईस बीड खोलने का प्रावधान है। परन्तु अधीक्षण अभियंता यथा आरोपी द्वारा मे0 रतिलाल यादव के प्राईस बीड बिना लौटाये ही मे0 माँ सरोज कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 का प्राईस बीड खोला गया तथा कार्यावंटन पत्र के साथ मे0 रतिलाल यादव का प्राईस बीड कार्यपालक अभियंता को लौटा दिया गया है।

उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.1.16 (I) से स्पष्ट है कि तुल्यनात्मक विवरणी पर अग्रधन के रूप में मे0 माँ सरोज कन्स0 प्रा0 लि0 15300/- को काटकर 15400/- किया गया है। जिसकी पुष्टि NSC सं0 2AA010715 जिसकी राशि 100 रूपये होती है। जो दिनांक 17.03.16 को निर्गत है जबकि इसी NSC जो मोनटरिंग को उपलब्ध कराया गया है उसमें दिनांक 17.03.06 को 07.03.06 बनाया गया परिलक्षित है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि श्री पासवान द्वारा संवेदक एवं कार्यपालक अभियंता से मिलीभगत कर गलत ढंग से आलोच्य निविदा का निष्पादन किया गया है। उल्लेखनीय है कि अगर इस मामले की जाँच नहीं करायी जाती तो संभव था कि आरोपी द्वारा मे0 माँ सरोज कन्स0 प्रा0 लि0 के पक्ष में निष्पादित निविदा जो अनुसूचित दर पर किया गया था के तहत ही कार्य कराया जाता एवं एक बडी राशि का दुरूपयोग होने का मामला बनता है। जबकि मामले के जाँचोपरांत विभागीय स्तर से यह कार्य मे0 रतिलाल यादव को उनके निविदित दर अनुसूचित दर से 15 प्रतिशत कम दर पर आवंटन करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि कार्य मे0 रतिलाल यादव द्वारा ही कराया जाना परिलक्षित है। अतएव सरकारी राशि का दुरूपयोग होना परिलक्षित नहीं होता है। उक्त के आलोक में श्री पासवान का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।

उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री पासवान के विरूद्ध संवेदक एवं कार्यपालक अभियंता से मिलीभगत कर गलत ढंग से नियम के विरूद्ध आलोच्य कार्य का निविदा निष्पादित करने के आरोप को प्रमाणित मानते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :-

"5 प्रतिशत पेंशन की कटौती 5 वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को उक्त दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

1 अक्तूबर 2018

सं० 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2014-2198--श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-3356), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सालमारी सम्प्रति अधीक्षण अभियंता बाढ़ नियंत्रण अंचल, गोपालगंज के विरूद्ध मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन कटिहार एवं सालमारी के अन्तर्गत अपर महानंदा योजना फेज-1 के अधीन केन्द्रीय प्रायोजित योजना के अन्तर्गत महानंदा नदी के बायाँ एवं दायाँ तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य में स्वीकृत प्राक्कलन के मद संख्या-9 का प्रावधान तकनीकी रूप से सही नहीं होने, साथ ही इस मद के अतिरेक भुगतान करने, एक ही कार्य के लिए दो बार प्रावधान करना, बगैर काम कराये हुए संवेदक को भुगतान करने एवं बरती गई अनियमितता के आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह को निलंबन अवधि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. श्री सिंह का निलंबन अवधि में मुख्यालय, मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।31 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 4. श्री सिंह के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण अलग से किया जाएगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 4 अक्तूबर 2018 सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-2)-2225--श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-2433), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं0-2, खगौल संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता के तथ्यों को अनदेखी करने, मूल तथ्य को छिपाकर कार्य में स्थानीय सामग्री उपयोग होने का जाँचफल में रेखांकित नहीं करने संबंधी निम्न आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-946 दिनांक-18.05.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनयमितता की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, पटना द्वारा किया गया। जाँच में पाया गया कि एकरारनामा के विरूद्ध कार्य में स्थानीय सामग्री यथा स्टोन मेटेल का उपयोग होने के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद में वास्तविक लीड के बजाय एकरारित दर से अनियमित भुगतान किया गया, फलस्वरूप सरकार को एक बड़ी राशि की क्षति हुई। उनके द्वारा कार्यो के कार्यान्वयन के दौरान स्थल से प्रयुक्त सामग्रियों का नमूना संग्रह करते हुए गुणवाा की जाँच की गयी एवं विभिन्न तिथियों में जाँचफल कार्य में संलग्न प्रमंडल को प्रेषित किया गया, जिसमें स्थानीय सामग्री के प्रयोग के अनियमित कृत को रेखांकित नहीं किया गया, जबकि कार्य में स्थानीय सामग्री का प्रयोग स्पष्ट रूप से परिलक्षित था। मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) द्वारा विभिन्न पत्रों के माध्यम से कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने की उद्‌घोषणा बार-बार किया जाता रहा। यहाँ तक कि मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा पत्रांक-481 दिनांक-31.03.2012 से विशेष रूप से गुणवाा जाँच हेतु मुख्य अभियंता, रूपांकण एवं शोध, अनिसाबाद, पटना से अनुरोध भी किया गया। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 4.0.0 (स्थल निरीक्षण) में उद्धित है कि स्थल निरीक्षण से स्पष्ट परिलक्षित था कि शेखपुरा से भिन्न स्थानीय पत्थर का इस्तेमाल कार्य में किया गया। अतएव माना जा सकता है कि वे भलिभाँति अवगत थे कि कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग हो रहा है। इन सब तथ्यों को अनदेखी करते हुए उनके द्वारा मूल तथ्यों को छिपाकर कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने का जाँचफल में रेखांकित नहीं करना दर्शाता है कि उक्त अनियमित कृत में उनकी सहभागिता रही है, जिसके लिए वे दोषी है। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग द्वारा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2464 दिनांक-24.11.2016 द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा की गई। उक्त आलोक में श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारणपृछा बचाव वयान को अस्वीकार योग्य पाते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-53 दिनांक 09.01.2018 द्वारा उनके विरूद्ध ''पेंशन से दस प्रतिशत की कटौती सदा के लिए'' का दण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसमें मुख्यतः निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गयाः- (i) कंडिका-2,3 एवं 4 में उनके विरूद्ध गठित आरोप से संदर्भित साक्ष्य का उल्लेख किया गया।

(ii) कंडिका 5,5.1.0 से 5.1.6तक में नियम 17 (2), 17(3), प्रपत्र 'क' माननीय मुख्यमंत्री से अनुमोदित नही होने, CCS (CCA) Rule 1965 के नियम 14 (3), माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Paul george मामलें में पारित न्याय निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की वैद्यानिकता पर ही निर्णय लिया जाना श्रेयस्कर होगा।

(iii) कंडिका-07 में आरोप मुख्यतः मुख्य अभियंता द्वारा बार-बार उद्‌घोषित किय गये तथ्य कि कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग किया जा रहा था कि जानकारी उन्हे थी फिर भी उनके द्वारा जाँचफल में रेखांकित नही किया गया। मुख्य अभियंता के पत्रांक-481 दिनांक-31.03.2012 से तीनों प्रमंडलों में चल रहे कार्य की गुणवत्ता की जाँच करने का उल्लेख है इसमें किस कार्य की जाँच करना है, उल्लेख नही है। न ही स्थानीय पत्थर के उपयोग की मात्रा आकलित करने का कोई जिक्र है। इस पत्र के आलोक में कहा जा सकता है कि उन्हे स्थानीय सामग्री के उपयोग होने की जानकारी नही दी गयी थी।

(iv) विभागीय पत्रांक- 756 दिनांक-28.05.2012 द्वारा विशेष रूप से गुणवत्ता की जाँच हेतु उन्हे निदेश दिया गया था। उक्त पत्र में कही उल्लेख नही है कि विशेष ढ़ंग से गुणवत्ता की जाँच की जाय। इसमें भी स्थानीय सामग्री की जाँच एवं आकलन का कोई विशेष निदेश नही है।

(v) मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-276 दिनांक-21.03.2012, 480 दिनांक 31.03.2012, 429 दिनांक-09.

04.2012 के आधार पर विभाग द्वारा मान लिया गया कि वे कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग से अवगत थे, एवं अनदेखी32 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 कर जाँचफल में उक्त आशय का उल्लेख नहीं किया था। जो गलत है क्योंकि उक्त तीनों पत्रों की प्रति उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया था।

(vi) रूटीन जाँच का जो प्रपत्र प्रशिक्षण एवं शोध प्रमंडल-2, खगौल में उपलब्ध है उसमें गोल पत्थर अथवा स्थानीय पत्थर के जाँच को कॉलम नहीं होने के कारण तुटिपूर्ण प्रपत्र किस स्तर से अनुमोदित है। सांक्ष्य नहीं देने पर आरोप प्रमाणित मान लिया गया, न्यायोचित नहीं है।

(vii) तकनीकी परीक्षक कोषांग के अनुशंसा के आलोक में उड़नदस्ता द्वारा अन्य दो प्रमंडलों के अधीन के कार्यो से नमूना संग्रह कर उनके बाद के कार्यपालक अभियंता को अपने पत्रांक 69 दिनांक-14.02.14 से सामान्य जाँच के अतिरिक्त एग्रीगेट की प्राप्ति किस तरह के पत्थर से किया गया है एवं व्यवहृत Aggregate River bed material से प्राप्त है अथवा Blasted Rock से । उक्त से स्पष्ट है कि जो प्रपत्र प्रचलन में है। उनमें मात्र रूटीन जाँच का उपबंध है। विशेष जाँच के लिये विशेष निदेश/आग्रह आवश्यक है, जैसा की उड़नदस्ता द्वारा जाँच के संबंध में आग्रह किया गया था।

(viii) कंडिका 7.0.1.1ः- विभाग द्वारा निम्न तथ्यों/कथनों को स्वीकार किया गया है (i) भुगतान से पूर्व लीड का सत्यापन करने का दायित्व कार्य में संलग्न पदाधिकारी का था।(ii) उनके द्वारा संग्रहृत नमूना एवं जाँच दल द्वारा संग्रहित नमूना का कार्य स्थल पर प्रत्युक्त सामग्री की गुणवत्ता एवं प्राप्ति श्रोत अलग-अलग हो सकती है। दिनांक 26.06.12 को निर्गत जाँचफल के बारे में कहा गया है कि उनके द्वारा संग्रहित नमूना एवं जाँच दल द्वारा संग्रहित नमूना का कार्यस्थल अलग-अलग होने से जाँचफल की भिन्नता होने की संभावना से इन्कार नहींं की जा सकती है।

(ix) कंडिका 7.1.1.2ः- उपरोक्त स्वीकारोक्ति के पश्चात कहा गया कि दिनांक 3.5.12 को इनके द्वारा निर्गत जाँचफल (जिसमें लोकेशन 0.0 से 62.50 अंकित है) के आलोक में आरोप बनता प्रतीत होता है क्योंकि उसके पूर्व मुख्य अभियंता द्वारा अनेकों पत्रों के माध्यम से उद्‌घोषणा की जा चुकी थी। जबकि कोई ऐसा पत्र विभाग ने प्रस्तुत नहीं किया है जिससे प्रमाणित हो सके कि उक्त घोषणा की जानकारी दी गयी है।

कंडिका 8.1, 8.2, 8.3 में श्री कुलदीप सिंह बनाम कमीश्नर ऑफ पुलिस के मामले में पारित न्यायादेश एवं Narinder Mohan Araya Vrs. United Insurance Co. Ltd. में पारित न्यायादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मात्र अनमुान एवं सम्भव्यता के आधार पर दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं है।

विभागीय समीक्षाः- श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल के विरूद्ध निम्न आरोप के लिये ''पेंशन से 10 प्रतिशत की कटौती सदा के लिये'' का दण्ड संसूचित हैः-

प्रश्नगत कार्य में एकरारनामा के विपरीत स्थानीय सामग्री (एग्रीगेट) उपयोग होने के बावजूद गुणवत्ता जाँचफल में उक्त अनियमित कृत को रेखांकण नहीं करने के कारण कार्य में संलग्न पदाधिकारी द्वारा अनियमित भुगतान किया गया। इस प्रकार उक्त अनियमित भुगतान होने मे प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से इनकी सहभागिता होना परिलक्षित है।

उक्त संसूचित दण्ड के क्रम में श्री सिंह द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में आरोप से संदर्भित मुख्यतः वही तथ्यों को उल्लेखित किया गया, जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिये गये बचाव बयान एवं विभाग को दिये गये द्वितीय कारण पृच्छा के क्रम में दिया गया।

श्री सिंह द्वारा बचाव बयान के कंडिका 5, 5.1.0, 5.1.2, 5.1.3, 5.1.4 एवं 5.1.5 में CCA नियमों के विभिन्न कंडिका का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इस मामले में आरोप पत्र अनुशासनिक प्राधिकार अर्थात्‌ माननीय मुख्यमंत्री से अनुमोदित नहीं है। फलतः सम्पूर्ण कारवाई संधारणीय नहीं है एवं परिणाम दण्डादेश सहित सभी परिणामी कारवाई भी अवैध एवं निष्प्रभावी है। फलतः CCA Rule 2005 के नियम 17(3) के तहत विभागीय कार्यवाही की वैद्यानिकता पर निर्णय लेने का भी उल्लेख श्री सिंह द्वारा किया गया है। इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु माननीय मुख्यमंत्री से प्रपत्र 'क' के पत्राचार भाग पर रखते हुए अनुमोदन प्राप्त किया गया है। उक्त के आलोक में आरोपी का उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं माना गया।

श्री सिंह द्वारा बचाव बयान के कंडिका 6.0.0 से 7.0.9 तक में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्हें विशेष जाँच हेतु कोई निदेश नहीं रहने के कारण मात्र रूटीन जाँच करते हुए पूर्व से निर्धारित प्रपत्र में ही जाँचफल निर्गत किया गया। उल्लेखनीय है कि इन्हें विभागीय पत्रांक 756 दिनांक-28.05.12 से प्रश्नगत कार्यो की गुणवत्ता जाँच करने हेतु निदेशित किया गया था। साधारणतः किसी कार्य स्थल पर चल रहे कार्यो की गुणवत्ता की जाँच करना इनका रूटीन दायित्व है। परन्तु प्रश्नगत स्थल पर विभागीय स्तर से जाँच करने का आदेश निर्गत किया जाना ही परिलक्षित करता है कि उक्त स्थल पर रूटीन के अतिरिक्त विशेष रूप से गुणवत्ता की जाँच करना है। इसके बावजूद भी स्थानीय सामग्री को रेखांकित नहीं किया गया। अतः आरोपी का कथन की इन्हें विशेष रूप से जाँच करने का निदेश नहीं था, स्वीकार योग्य नहीं माना गया।

श्री सिंह द्वारा कंडिका 8.1 में माननीय सर्वोच्य न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री की मात्रा का आकलित करने के निदेश से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं है। अतः अनदेखी कर स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री का उपयोग होने को रेखांकित नहीं किये जाने का आरोप मात्र सम्भाव्यता एवं अनुमान के आधार ठहराया जाना उचित नहीं है, स्वीकार योग्य नही है क्योंकि प्राक्कलन में सामग्री ढुलाई मद एवं एकरारनामा में संलग्न B.O.Q में सामग्री ढुलाई शेखपुरा से करना प्रावधानित था। साथ ही मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा विभिन्न पत्रों से कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग का उद्‌घोषणा लगातार किया जाता रहा । इसी परिपे्रक्ष्य में विभगाीय स्तर से विशेष ढ़ंग से गुणवत्ता की जाँच हेतु इन्हें आदेश दिया गया था। इसके बावजूद भी इनके स्तर से निर्गत गुणवत्ता जाँचफल में स्थानीय33 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सामग्री के उपयोग होने का रेखांकण नही किया जाना दर्शाता है कि उक्त तथ्यों की अनदेखी करते हुए जाँचफल निर्गत किया गया।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीककृत किये जाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-53 दिनांक-09.01.2018 द्वारा संसूचित दण्ड ''पेंशन से दस प्रतिशत की कटौती सदा के लिए'' के विरूद्ध श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-2433), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-02, खगौल संप्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------ 9 अक्तूबर 2018 सं0 22/नि0सि0(सम0)-02-08/2009/2282--श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा के पदस्थापन अवधि में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा के अन्तर्गत वर्ष 2007-08 में प्रथम चरण में सम्पादित जमींदारी बाँध निर्माण कार्यों की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता से विभागीय पत्रांक 316 दिनांक 18.02.10 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न आरोप गठित करते हुए श्री पासवान के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 268 दिनांक 04.03.2011 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। (i) आपके द्वारा स्वीकृत दो प्राक्कलन में क्षेत्रीय पदाधिकारी के द्वारा जंगल क्लीयरेंस के अनुचित प्रावधान को बिना जाँचे स्वीकृत किया गया, जिसके फलस्वरूप रू0 25,361/- का अधिकाई भुगतान हुआ। (ii) कार्यों का समुचित पर्यवेक्षण आपके द्वारा नहीं किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के सेवानिवृति के कारण विभागीय आदेश सं0 55 दिनांक 16.05.14 (ज्ञापांक 578 दिनांक 19.05.14) द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 615 दिनांक 22.05.14 द्वारा श्री पासवान से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी :- (i) साक्ष्य के अभाव में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए कार्य से संबंधित दो अदद प्राक्कलन में अनावश्यक रूप से प्रावधानित जंगल क्लीयरेंस को बिना जाँचे स्वीकृति प्रदान करना। फलस्वरूप कुल 25,361/- रूपये का अधिकाई भुगतान हुआ। (ii) कार्यों का समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया। श्री पासवान द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में निम्न तथ्य अंकित किये गये है :- 1. मेरे द्वारा जंगल क्लीयरेंस का प्रावधान स्थल के अनुरूप न्यूनतम अनुसूचित दर पर जंगल क्लीयरेंस की स्वीकृति दी गयी है एवं कार्य कराया गया है। कार्य पूर्ण होने के पश्चात उड़नदस्ता दल द्वारा स्थल जाँच जून, 2009 में किया गया। अतः कार्य पूरा होने के बाद जंगल क्लीयरेंस संबंधी आरोप बिना किसी साक्ष्य पर आधारित है। 2. उड़नदस्ता के जाँच के क्रम में स्थल पर कराये गये कार्यों को सही एवं मान्य सीमा के अन्तर्गत पाया है। कार्य के कार्यान्वयन में पर्यवेक्षण किया गया है। जो इसके साथ संलग्न है। इस अंचल के अन्तर्गत तीन प्रमंडलों में कटाव निरोधक कार्य, बॉंध के टूटान भराई एवं दो प्रमंडल में जमीनदारी बॉंध का उच्चीकरण कार्य चल रहा था। इन कार्यों के पर्यवेक्षण में लगे समय अभाव के कारण उक्त कार्यों का नियमित पर्यवेक्षण संभव नहीं था। श्री पासवान से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी ने उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-1 के समर्थन में कोई साक्ष्य/आधार नहीं देने तथा कार्य समाप्ति के एक वर्ष बाद बाँंध पर जंगल नहीं पाने के आरोप को युक्ति संगत नहीं माना है एवं आरोप को प्रमाणित नहीं माना है। परन्तु आरोपित द्वारा अपने बचाव बयान में जमींदारी बॉंध पर जंगल क्लीयरेेंस का प्राक्कलन में प्रावधान आवश्यकता आधारित था, से संबंधित कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने के कारण उक्त आरोप को प्रमाणित मानते हुए द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। आरोपित श्री पासवान के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे प्रमाणित हो सके कि आरोपी द्वारा स्वीकृत दोनों प्राक्कलन में प्रावधानित जंगल क्लीयरेंस का कार्य आवश्यकता आधारित था एवं स्थल जाँचोंपरान्त प्राक्कलन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। अतएव आरोप सं0-1 जो बिना स्थल जाँच के प्राक्कलन में क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा प्रावधानित जंगल क्लीयरेंस कार्यमद की स्वीकृति प्रदान किये जाने के कारण कुल 25,361/- (पच्चीस हजार तीन सौ एकसठ) रूपये का अधिकाई भुगतान हुआ, का आरोप प्रमाणित होता है। आरोप सं0-2 के संबंध में श्री पासवान द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में स्वीकार किया गया है कि अंचलाधीन अन्य प्रमंडलों के अधीन चल रहे विभिन्न कार्यों के पर्यवेक्षण में लगे समय के अभाव में इस कार्य का नियमित पर्यवेक्षण नहीं हो सका। आरोपित द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य द्वितीय कारण पृच्छा में प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे परिलक्षित हो34 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सके कि अंचलाधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा के अधीन एवं अन्य दो प्रमंडल में चल रहे कार्यों का नियमित पर्यवेक्षण किया गया हो। अतएव श्री पासवान के विरूद्ध कार्यों का नियमित पर्यवेक्षण नहीं करने का आरोप प्रमाणित होता है। इस प्रकार समीक्षोपरान्त श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप सं0-1 एवं 2 क्रमशः बिना स्थल निरीक्षण किये प्राक्कलन में प्रावधानित जंगल क्लीयरेंस की स्वीकृति प्रदान करना तथा कार्यों का नियमित पर्यवेक्षण नहीं करने का आरोप प्रमाणित होता है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैः- "पेंशन से 5% (पाँच प्रतिशत) की कटौती एक वर्ष के लिए"। उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दायर की गयी है। श्री पासवान द्वारा दिनांक 04.07. 2017 को पुनर्विलोकन अर्जी दायर की गयी है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 25(बी) में उपबंधित कि अपील में अंतरग्रस्त आदेश की प्रति अपीलार्थी को दिये जाने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर ही अपील दायर की जानी है, जबकि यह अपील दो वर्षों बाद दायर की गयी है। विलंब के कारण के औचित्य के संबंध में पुनर्विलोकन अर्जी में स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है। इसलिए श्री पासवान की पुनर्विलोकन अर्जी ग्राहय नहीं है। श्री पासवान ने अपने पुनर्विलोकन अर्जी में उन्हीं बातों की पुनरावृति की है, जो इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में किया गया है। द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में कही गयी बातों का विस्तृत विश्लेषण पूर्व में किया जा चुका है, जिसका उल्लेख दण्डादेश में भी है। श्री पासवान का कहना है कि उनके सेवानिवृति होने के पश्चात पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया है जो विधि सम्मत नहीं है। चूँकि विभागीय कार्यवाही श्री पासवान के सेवाकाल में ही आरंभ की गयी थी एवं सेवानिवृत होने के पश्चात विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया है, जो नियम संगत है। उक्त के आलोक में श्री पासवान के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है जिस पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

तदालोक में श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्का0 अधीक्षण अभियंता बाढ़ नियंत्रण अंचल, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व से संसूचित उक्त दण्ड यथावत रखा जाता है। उक्त आदेश श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्का0 अधीक्षण अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

11 अक्तूबर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2015-2312--श्री अम्बिका प्रसाद भगत (आई0डी0-3551) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति सेवानिवृत के उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-22123/2014 शिवेश कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के मामले में ससमय तथ्य विवरणी तैयार नहीं करने, उच्च पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने एवं MOU में वर्णित कंडिकाओं का अनुपालन में अनियमितता बरतने के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-2274, दिनांक 06.10.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17(2) के विहित रीति से निम्नलिखित आरोप के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप सं०-1ः-सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-22123/2014 शिवेश कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य के मामले में विभागीय अनुमोदन हेतु तथ्य कथन विवरणी पत्रांक-2647, दिनांक 19.12.2014 एवं पत्रांक-736, दिनांक 24.04.2015 द्वारा माँग की गई। पुनः तथ्य कथन विवरणी उपलब्ध कराने हेतु विभागीय पत्रांक-932, दिनांक 26.05.2015 द्वारा स्मारित कराया गया। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-2216, दिनांक 14.08.2015 द्वारा लगभग आठ माह की अवधि व्यतीत होने के उपरांत भी स्तरीय तथ्य विवरणी तैयार नहीं किया गया। इसमें राज्य सरकार का पक्ष मजबुती से नहीं रखे गये। साथ ही synopsis of the case संलग्न नहीं किया गया। वाद से संबंधित अधिकतर बिन्दुओं पर कंडिकावार तथ्य प्रस्तुत नहीं किये गये। अतः विभागीय पत्रांक-1586, दिनांक 19.08.2015 द्वारा कंडिकावार तथ्य विवरणी साक्ष्य के साथ विभाग को उपलब्ध कराने हेतु आपको निदेशित किया गया फिर भी आपके द्वारा वांछित तथ्यात्मक विवरणी उपलब्ध नहीं कराया गया। आपकी शिथिलता की वजह से मुख्य सचिव, बिहार, सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना एवं अभियंता प्रमुख (उ0) सहित कुल आठ पदाधिकारियों को दिनांक 14.09.15 को माननीय उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश पारित किया गया।

विभागीय निदेशों के बावजूद राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुए स्तरीय तथ्य विवरणी तैयार कर विभाग को अनुमोदन हेतु उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके फलस्वरूप मुख्य सचिव एवं सचिव, जल संसाधन विभाग सहित कुल आठ पदाधिकारियों को माननीय उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पडे़गा जिसके लिए आप दोषी है। आरोप सं0-2ः- श्री नवल किशोर शाही, अध्यक्ष, कार्यान्वयन समिति एवं श्री अवनीश कुमार सिंह, माननीय सदस्य, बिहार विधान सभा से प्राप्त पत्र के आलोक में बागमती बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत HSCL द्वारा कराये गये बागमती नदी के बाँये एवं दाँये तटबंध पर उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य की जाँच उड़नदस्ता द्वारा की गई। जाँच प्रतिवेदन में अंकित तथ्यों के आलोक में अभियंता प्रमुख (उ0) जल संसाधन विभाग द्वारा विभागीय पत्रांक-1030,35 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 दिनांक 02.06.2014 जाँचफल में उद्धिृत तथ्यों का उल्लेख करते हुए गहन समीक्षोपरांत बिन्दुवार प्रतिवेदन/साक्ष्य सहित उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया है। वांछित प्रतिवेदन अप्राप्त रहने की स्थिति में अभियंता प्रमुख (उ0) द्वारा पत्रांक-2655, दिनांक 10.11.14, 3646, दिनांक 18.12.14 तथा 2091, दिनांक 19.08.12 से भी स्मारित करने के बावजूद अभी तक आपके द्वारा न तो उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में उद्धिृत तथ्यों का अनुपालन ही किया गया एवं न ही वांछित प्रतिवेदन की उपलब्ध कराया गया है। फलस्वरूप आपकी उदासीनता के कारण मिट्‌टी ढुलाई मद में एवं अन्य मद में हुए अतिरिक्त भुगतान {78788441308153} रूपये का न तो समायोजन हो सका एवं न ही संवेदक से वसूली ही हो सकी, जो आपकी उदासीनता, आक्रमनता कार्य के प्रति लापरवाही तथा उच्च पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना को दर्शाता है। जिसके लिए आप दोषी है।

आरोप सं0-3ः- अभियंता प्रमुख (उ0) के पत्रांक-1030, दिनांक 02.06.14 के कंडिका-4 में उल्लेख है कि कार्य मद राज्यादेश के अनुसार विषयांकित कार्यों के घोषित नियंत्री पदाधिकारी मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर है किन्तु आपके द्वारा भी प्रमंडलीय पदाधिकारी को सही मार्गदर्शन एवं तकनीकी दिशा निर्देश प्राप्त नहीं किया गया। फलस्वरूप MOU के कंडिका-11 (पारा-11) जिसमें HSCL के स्तर से कार्य में किये गये विलंब की स्थिति में दण्ड का प्रावधान किया गया है का अनुपालन विधिवत रूप से नहीं हो पाया। इसके अनुपालन हेतु प्रत्येक वर्ष क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए Realistic programme of works पर विभाग एवं एजेंसी के आपसी सहमति के पश्चात अनुमोदन सक्षम पदाधिकारी द्वारा किया जाना है एवं प्रत्येक माह में इसकी उपलब्धि का आकलन करते हुए वर्ष के अंत में यदि एजेंसी के कारण उपलब्धि slippage हो तो कंडिका-11 के अनुसार एजेंसी उदासीनता के कारण कंडिका-11 के तहत संवेदक को दंड लगाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई एवं इस संबंध में न विभाग को ही कोई प्रतिवेदन दिया गया जो आपके उदासीनता, आक्रमनता कार्य के प्रति लापरवाही तथा उच्च पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं MOU में वर्णित कंडिकाओं का अनुपालन नहीं करना दर्शाता है एवं जिसके लिए आप दोषी है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री भगत कार्य0 अभियंता के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित तीन आरोपाें में से दो आरोप सं०-01 एवं 03 को प्रमाणित एवं आरोप सं०-2 को अप्रमाणित पाया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-995, दिनांक 16.06.17 द्वारा श्री भगत से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। साथ ही श्री भगत के दिनांक 31.03.2017 को सेवानिवृत हो जाने के कारण इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं०-39 सह ज्ञापांक-634, दिनांक 02.05.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।

उक्त के आलोक में श्री भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-03, दिनांक 14.07.17 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :-

आरोप सं० 1-पत्रांक-903 रून्नीसैदपुर, दिनांक-28.11.15 द्वारा बचाव बयान समर्पित किया जा चुका है। आरोप सं० 2- विभागीय पत्रांक-1030, दिनांक 02.06.2014 से स्पष्ट है कि उल्लेखित अतिरिक्त भुगतान (78788441308153) का मामला बागमती प्रमंडल, शिवहर से संबंधित है जबकि मैं बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर में पदस्थापित था।

आरोप सं० 3- गठित आरोप बागमती परियोजना फेज-1 से संबंधित है। जिसके अन्तर्गत दिनांक 31.03.2012 के पूर्व ही उपलब्ध भूमि के अनुसार कार्य करा लिया गया था मैं बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर में दिनांक 04.07.2014 को प्रभार ग्रहण किया हूँ। उस समय कार्य बन्द था इसके बावजूद कई पत्र के माध्यम से HSCL से आगे का कार्य करने Work Programme की माँग करते हुए अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता को सूचना दी गयी। MOU के तहत परियोजना का कार्य जून 2008 तक पुरा कराना था। परन्तु विभाग से कार्य पूर्ण कराने के लिये लगातार समय का विस्तार मिलता गया तथा अंतिम रूप से दिनांक 31.03.2017तक कार्य पूर्ण कराने का समय-सीमा तय किया गया।

मेरे द्वारा पत्रों के माध्यम से संवेदक को कार्य को Hand over करने हेतु कागजात की माँग किया जाता रहा परन्तु HSCL के द्वारा Hand Over करने हेतु आवश्यक कागजात 31.03.2017 तक नहीं दिया गया तथा दिनांक 31.03.2017 को सेवानिवृत हो गया। अतएव जानबूझकर कोई शिथिलता नहीं बरती गई है।

श्री भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

संचालन पदाधिकारी ने श्री भगत के विरूद्ध मामले को सम्यक समीक्षोपरांत Conclusion के रूप में अंकित किया है कि The first charge and third charge stand proved against the charge officers. as the officer has not been alert and responsive to the urgency of the issue at land. He did not give the importance to the department directives. His explained delay of atleast Eight month in Submitting. The statement of facts is a very important case before the Honbl'e High Court speak his efficiency incompetence or indefinite attitude towards departmental priorities. The 2ndबिहार गजट, 6 Qjojh 2019 36 Change against has could not be proved as the department it self accepted his explanation तथा summary में आरोप सं0-1 एवं 03 को प्रमाणित तथा आरोप सं०-2 को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोप सं0-1-श्री भगत आरोप-1 के संदर्भ में पूर्व के उनके पत्रांक-903, दिनांक 28.11.2015 को संलग्न किया गया है इसके अतिरिक्त उनके द्वारा कोई तथ्य द्वितीय कारण पृच्छा में नहीं दिया गया है। आरोपी पदाधिकारी श्री भगत के उक्त पत्र में अंकित तथ्यों की विभाग के स्तर से समीक्षा करते हुए संचालन पदाधिकारी को विभागीय अभिमत से अवगत करया गया था। जिसमें आरोप सं०-1 में उल्लेखित किया गया है कि सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-22123/2014 शिवेश कुमार बनाम अन्य के मामले में रीट आवेदन विभागीय पत्रांक-2647, दिनांक 19.12.2014 द्वारा मुख्य अभियंता को प्राप्त करने हेतु संसूचित किया गया। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा उक्त विभागीय पत्र की प्रतिलिपि कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर श्री भगत को पत्रांक-3221, दिनांक 26.12.14 से याचिका प्रति प्राप्त करने हेतु निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में श्री भगत द्वारा दिनांक 05.01.2015 को हाथों हाथ रिट आवेदन प्राप्त किया गया।

उपर्युक्त वाद में तथ्य कथन उपलब्ध कराने हेतु मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को पत्रांक-736, दिनांक 24.04.15 से स्मारित करते हुए प्रतिलिपि, कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर श्री भगत को दी गयी। पुनः विभागीय पत्रांक-932, दिनांक 26.05.15 से तथ्यकथन विवरणी उपलब्ध कराने हेतु मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को स्मारित किया गया। इस पत्र की प्रति मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने पत्रांक-1468, दिनांक 27.05.2015 से श्री भगत, कार्यपालक अभियंता, रून्नीसैदपुर को देते हुए तीन दिनों के अन्दर उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने पत्रांक-1194, दिनांक 24.04.15, 1199 दिनांक 24.04.15, 1354 दिनांक 14.05.15, 1924, दिनांक 22. 07.15, 2216 दिनांक 14.08.15, 2395 दिनांक 03.09.15 एवं 2436 दिनांक 07.09.15 से तथ्यकथन विवरणी उपलब्ध कराने हेतु स्मारित किया गया। कार्यपालक अभियंता, रून्नीसैदपुर से प्राप्त तथ्यकथन मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-2616 दिनांक 14.08.15 से विभाग को प्राप्त हुआ। तथ्यकथन अपूर्ण रहने के कारण विभागीय पत्रांक-1568, दिनांक 19.08.15 से वापस किया गया। पूर्ण तथ्यकथन विवरणी के लिए विभागीय पत्रांक-1711, दिनांक 08.09.15 द्वारा स्मारित किया गया। तत्पश्चात मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-2438, दिनांक 08.09.2015 द्वारा पूर्ण तथ्यकथन विवरणी प्राप्त हुआ। जिसे विभागीय अनुमोदन के उपरांत पत्रांक-1723, दिनांक 08.09.15 द्वारा उपलब्ध कराया गया। इस प्रकार इस वाद में तथ्यकथन प्राप्त होने में दिनांक 19.12.2014 से दिनांक 07.09.15 तक लगभग नौ माह का समय लगा। श्री भगत का कहना कि इस वाद में कुछ मामले बागमती प्रमंडल शिवहर से संबंधित था एवं उन्हें स्मारित करने के वाद भी अपेक्षित सहयोग ससमय प्राप्त नहीं होने के कारण तथ्य कथन विवरणी समर्पित करने में विलंब हुआ यदि श्री भगत का बागमती प्रमंडलीय, शिवहर से सहयोग नहीं मिल रहा था तो इसकी सूचना उच्च पदाधिकारी को दिया जाना चाहिए था अथवा इन्हें व्यक्तिगत रूप से कार्यपालक अभियंता, शिवहर से सम्पर्क स्थापित कर वांछित अभिलेख प्राप्त करते हुए तथ्यकथन विवरणी ससमय प्रस्तुत करना चाहिए था जो इनके द्वारा 3-4 पत्र बागमती प्रमंडल, शिवहर को लिख कर अपने दायित्वों का इतिश्री कर लिया गया। जबकि श्री भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता इस वाद में Respondent थे। इनकी जवाबदेही सबसे अधिक थी। अतएव संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि इतना महत्वपूर्ण एवं गंभीर मामले यथा तथ्यविवरणी समर्पित करने में श्री भगत के द्वारा लापरवाही बरती गयी है को स्वीकार योग्य पाते हुए आरोप सं०-1 प्रमाणित होता है।

आरोप सं0-2-श्री भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा कहा गया है कि विभागीय पत्रांक-1030, दिनांक 02.

06.14 के कंडिका-2 से स्पष्ट है कि अतिरिक्त भुगतान (78788441308153) का मामला बागमती प्रमंडल, शिवहर से संबंधित है संचालन पदाधिकारी को समर्पित विभागीय अभिमत में की गई समीक्षा के आलोक में स्वीकार योग्य पाया जा सकता है। श्री भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा यह भी कहा गया है कि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-(xiii) में परिवादी द्वारा लगाये गये आरोप की समीक्षा विभागीय स्तर पर करते हुए पत्रांक-1271, दिनांक 04.07.2016 के द्वारा आरोपमुक्त किया गया है। उल्लेखित है कि आरोप सं०-2 को संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। जिससे सहमत होते हुए आरोप सं०-2 अप्रमाणित होता है।

आरोप सं0-3-संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-11.19 से 11.24 के अवलोकण से स्पष्ट है कि श्री भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा वही तथ्य अपने द्वितीय कारण पृच्छा में उद्धित किया गया है। जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभागीय कार्यवाही के संचालन में दिया गया था। इनके द्वारा कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिये गये बचाव बयान के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-11.25 में कहा गया है कि It can be held against the charged officer that he did not take requssite stop to submit a complance report on the query done by the flying squad leading to delay in inposing penalty on the contractor there for i find the third charge to be proved against the officer.

अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं०-3 प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अम्बिका प्रसाद भगत, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है :-

"पेंशन से दस प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती" उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक-869, दिनांक 05.04.2018 द्वारा परामर्श/सहमति की माँग की गई। जिसमें उनके द्वारा अपने पत्रांक-1694, दिनांक 17.09.2018 से प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।37 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अम्बिका प्रसाद भगत, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, 401-A-श्री रामकुँज, अर्पाटमेंट, रोड नं०-04, महेशनगर, पटना को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। "पेंशन से दस प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

--------

24 अक्तूबर 2018

सं0 22/नि0सि0(ल0सिं0)-05-02/2017-2320--श्री श्रीकांत ठाकुर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निविदा निष्पादन में की गई अनियमितता, घोर कदाचार, पद का दुरूपयोग एवं अनुशासनहीनता संबंधी आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-2014, दिनांक 29.04.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा आरोप पत्र में वर्णित आरोपों को प्रमाणित पाया गया। लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा समीक्षोपरांत लिए गए निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होकर द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

लघु जल संसाधन विभाग द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा के क्रम में यह ज्ञात होने पर कि आरोपित पदाधिकारी का पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग है, दण्ड के बिन्दु पर निर्णय लेने हेतु सभी संगत कागजात, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को प्रेषित किया गया।

श्री श्रीकांत ठाकुर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर एवं अन्य संगत अभिलेखों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाए गएः-

आरोपी द्वारा कहा गया है कि पूर्व संचालन पदाधिकारी श्री विवेक कुमार सिंह द्वारा मामले की सुनवाई 18-19 तिथियों पर की गयी तथा इस मामले में गबन, वित्तीय अनियमितता, कदाचार आदि जैसे कोई गंभीर आरोप नहीं होने के कारण श्री विवेक कुमार सिंह द्वारा मामले को लौटा दिया गया।

पुनः सुनवाई के लिये दोबारा नियुक्त नये संचालन पदाधिकारी श्री के0के0 पाठक, अपर विभागीय जाँच आयुक्त को सौंपा गया। दोबारा शुरू की गयी सुनवाई की तिथि की कोई जानकारी संचालन पदाधिकारी के द्वारा संसूचित नहीं की गयी जो नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल है और ऐसे में सभी आरोपों को प्रमाणित होने की बात कहना पूर्वाग्रह से ग्रसित भावना का द्योतक है। सेवानिवृति के 6-7 वर्ष बाद इस प्रकार किसी पदाधिकारी को बार-बार प्रताडित करना उचित एवं न्याय संगत नहीं है।

लघु जल संसाधन विभाग द्वारा प्राप्त अभिलेख से स्पष्ट होता है कि श्री ठाकुर से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा लघु जल संसाधन विभाग द्वारा की गयी है तथा आरोपी श्री ठाकुर द्वारा आरोपों के संबंध में कोई तथ्य अथवा बचाव समर्पित न कर विभागीय कार्यवाही में नये संचालन पदाधिकारी को हस्ताक्षरित किये जाने के पश्चात उन्हें सुनवाई की सूचना नहीं देने को नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध बताया गया है, को निम्न तथ्यों के आलोक में अस्वीकार योग्य मानते हुए सभी आरोप प्रमाणित माना गया है।

विभागीय कार्यवाही के क्रम में अपना पक्ष रखने की समुचित अवसर प्रदान करने के साथ ही संचालन पदाधिकारी के अधिगम में अंकित है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के द्वारा व्यक्तिगत रूप से संसूचित किये जाने के बावजूद आरोपी नये संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। तत्पश्चात संचालन पदाधिकारी द्वारा विभाग का पक्ष एवं आरोपित पदाधिकारी का लिखित अभिकथन तथा समस्त अभिलेख के आधार पर जाँच प्रतिवेदन में तीनों आरोपी को प्रमाणित माना गया है।

आरोपी के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) में आरोप से संदर्भित कोई तथ्य नहीं दिया गया है न ही कोई साक्ष्य दिया गया। मात्र कहा गया है कि नये संचालन पदाधिकारी के द्वारा शुरू की गयी सुनवाई की तिथि की कोई जानकारी नहीं दिया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-9 में अंकित तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर प्रदान किया गया है। यहाँ तक की प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के द्वारा व्यक्तिगत रूप से संसूचित करने के बावजूद नये संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए है। उक्त के आलोक में आरोपी के उक्त कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक-4873, दिनांक 22.11.17 में उद्धत तथ्य कि 'आरोपी द्वारा कोई नया तथ्य नहीं दिये जाने के कारण श्री ठाकुर के अभ्यावेदन से असहमत है' से सहमत होते हुए श्री ठाकुर के विरूद्ध गठित तीनों आरोपों को प्रमाणित माना जा सकता है। उपुर्यक्त विभागीय समीक्षा के आलोक में श्रीकांत ठाकुर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध आरोप 1, 2 एवं 3 यथा संशोधित बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता के नियम 163 का उल्लंघन करते हुए एकल निविदा को अपने स्तर से रद्द करने के कारण आवंटित राशि अनुपयुक्त होना, निविदा निष्पादन की प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए निविदा निष्पादन करना, उपस्थिति पंजी फाड़ने वाले संवेदक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं कराना तथा अंचलाधीन कार्यान्वयन 25 अद्‌द योजनाओं का पर्यवेक्षण नहीं कर बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता के नियम 23 एवं 24 का उल्लंघन करने के आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्रीकांत ठाकुर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

"पाँच (5) प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच (5) वर्षों के लिए"। उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मंत्री का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।38 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्रीकांत ठाकुर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है :-

"पाँच (5) प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच (5) वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

-------

24 अक्तूबर 2018

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2014-2321-मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, कटिहार के अन्तर्गत वर्ष 2005 में बाढ़ पूर्व गंगा नदी पर स्थित काटाकोश नवरसिया निस्सृत एवं टोपरा चौकिया पहाड़पुर निस्सृत तटबंध पर एजेण्डा सं0 80/538 एवं 80/539 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्यों एवं तत्पश्चात उक्त स्थल पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 160 दिनांक 15.02.08 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी।

विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के क्रम में ही दिनांक 30.06.09 को श्री राम की सेवानिवृति के कारण पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0 60 दिनांक 25.02.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि दो कार्यों में से एक कार्य एजेण्डा सं0 80/539 ससमय पूरा कर लिया गया था जबकि एजेण्डा सं0 80/538 के संबंध में उड़नदस्ता के जाँच से यह स्पष्ट है कि कार्य को ससमय शुरू नहीं करने और कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं रहने के कारण नदी के बढ़ते जलस्तर से कटाव निरोधक कार्य क्षतिग्रस्त हुआ। इस संबंध में यह स्पष्ट करना है कि उक्त कार्य की निविदा का निष्पादन 15.03.05 को हुआ। कार्य आवंटन 31.03.05 को हुआ तथा कार्य समाप्ति की तिथि 31.05. 05 थी। उक्त कार्य की एकरारित राशि 121.47 लाख रूपये थी। उक्त कार्य की Alignment दिनांक 16.03.05 को किया गया, जिसकी स्वीकृति मुख्य अभियंता ने दिनांक 04.04.05 को दी थी, जिसके उपरान्त कार्य प्रारम्भ हो सकता था परन्तु आपके द्वारा Alignment की स्वीकृति में लगभग 18 दिनाें का समय लिया गया। कार्य प्रारम्भ हुआ और विशेषज्ञ दल ने स्थल निरीक्षण में दिनांक 29.05.05 तक कार्य की प्रगति मात्र 40 प्रतिशत प्रतिवेदित की है। विशेषज्ञ जाँच दल ने यह भी अंकित किया है K K N R तटबंध के चेन सं0 327 पर अवस्थित स्थल के डाउन स्ट्रीम सैन्क से तटबंध के चेन सं0 336.5 तक रिभेटमेन्ट द्वारा जोड़ने का कोई प्रयास क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा नहीें किया जा रहा है जो आवश्यक है और इससे तटब्ांध टूट सकता है। परन्तु फिर भी संवेदक एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं लायी गयी, जिसके कारण तटबंध का स्लोप भाग नैकेड रह गया और तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। जलश्राव बढ़ने के बाद भी दिनांक 15.07.05 के बाद 21.07.05 तक कोई बाढ़ संघर्षात्मक कार्य नहीं किया गया। विशेषज्ञ के सुझाव के उपरान्त ही 21.07.05 के बाद बाढ़ संघर्षात्मक कार्य करने का प्रमाण अभिलेख से मिला है और तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा स्थल निरीक्षण भी दिनांक 23.07. 05 को करने का प्रमाण मिलता है।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय पत्रांक 1022 दिनांक 07.05.15 द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति देते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

उक्त द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में श्री राम ने द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर समर्पित किया, जिसकी समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि दिनांक 04.04.05 को दिये गये Alignment की स्वीकृति के संदर्भ में श्री राम द्वारा प्राक्कलन स्वीकृति का उल्लेख किया गया है जो अप्रासंगिक प्रतीत होता है। उनके इस तथ्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि जाँच प्रतिवेदन से विदित होता है कि दिनांक 16.03.05 को निवृत रेखा का रेखाांकण का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसकी स्वीकृति श्री राम द्वारा 18 दिन विलम्ब से 04.04.05 को दी गई। रेखांकण Alignment की स्वीकृति के उपरान्त ही कार्य कराया जाना संभव हो पाता। श्री आलम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के बचाव बयान से विदित होता है कि 24.02.05 को प्राप्त निविदा का एकरारनामा 21.03.05 को किया गया। इससे विलम्ब से कार्यावंटन के लिए भी श्री राम दोषी पाये गये हैं।

उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से विदित होता है कि 30.05.05 तक स्लोप में पीचिंग कार्य प्रारम्भ नहीं किया गया है। जबकि कार्य समाप्ति की एकरारित तिथि 31.05.05 ही है, यहाँ तक कि विस्तारित अवधि 29.06.05 तक कार्य कराये जाने के बावजूद स्लोप में पीचिंग कार्य चेन 346-350 एवं चेन 340-346 के बीच नहीं ही पाया गया जिससे निर्मित निवृत रेखा तटबंध बढ़ते जलस्तर की स्थिति में दवाब सहने में सक्षम नहीं रहा। अध्यक्ष, विशेष जाँच दल द्वारा भी अपने स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में कार्य की प्रगति असंतोषजनक एवं कार्य में तेजी लाने का सुझाव दिया गया। इसके बावजूद भी श्री राम अपने पदीय दायित्व का अनुपालन सुनिश्चित कराने में असफल रहे। अध्यक्ष, विशेष जाँच दल के दिनांक 29.05.05 के दौरा प्रतिवेदन में उल्लेख है कि K K N R तटबंध के CH 327 पर अवस्थित स्पर को डाउन स्ट्रीम शैंक से तटबंध के चेन 336. 50 तक रिभेटमेन्ट द्वारा जोड़ने का कोई प्रयास क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा नहीं किया जा रहा है अगर इस भाग को नहीं जोड़ा जाता है तो नदी द्वारा इस भाग में कटाव से इंकार नहीं किया जा सकता है।39 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 स्थल पंजी से भी दिनांक 15.07.05 से दिनांक 19.07.05 तक दूरभाष संवाद द्वारा कटाव की सूचना वरीय पदाधिकारी को दिये जाने की पुष्टि होती है। परन्तु विशेषज्ञ के सुझाव के उपरान्त ही 21.07.05 के बाद से भी बाढ़ संघर्षात्क कार्य कराये जाने का उल्लेख मिलता है, परन्तु श्री राम के स्तर ऐसे महत्वपूर्ण कार्य जिसका उल्लेख अध्यक्ष, विशेष जाँच दल के हर दौरा प्रतिवेदन में किया गया है, का निरीक्षण 26.07.05 को किया गया। हालांकि जाँच प्रतिवेदन में अधीक्षण अभियंता के टिप्पणी के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का स्थल निरीक्षण 23.07.05 कोे कहा गया है परन्तु आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये निरीक्षण ब्योरा विवरणी से आलोच्य स्थल का निरीक्षण 29.04.05 के बाद 26.07.05, 03.08.05 को ही किये जाने का बोध होता है। उक्त से श्री राम के द्वारा लापरवाही एवं पदीय उत्तरदायित्व के समुचित निर्वहन में कमी का आरोप प्रमाणित पाया गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों, बचाव बयान एवं साक्ष्य के आलोक में एजेण्डा सं0 80/538 के तहत कराये जा रहे कार्य में श्री राम द्वारा रेखांकण की स्वीकृति विलम्ब से देने एवं अपने पदीय दायित्व का समुचित निर्वहन में कमी को प्रमाणित आरोप के लिए श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना सं०-2281, दिनांक 19.10.2016 द्वारा ''पन्द्रह प्रतिशत (15%) पेंशन की कटौती पाँच वर्षों तक'' का दण्ड अधिरोपित किया गया।

श्री राम प्रसाद राम, तत0 मुख्य अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसका मुख्य सार निम्नवत्‌ है :- (1) रू॰ 182.00 लाख के विभागीय गो-अहेड के आलोक में KKNR तटबंध के चेन सं॰ 336.50 से टी॰सी॰पी॰ तटबंध के चेन सं॰ 238 तक तटबंध निर्माण का कार्यकारी प्राक्कलन की स्वीकृति 09.01.2005 को मुख्य अभियंता द्वारा दी गई जिसमें नींव से प्राप्त मिट्‌टी से तटबंध का निर्माण, स्लोप पीचिंग एवं रिभेटमेंट का कार्य प्रावधानित है। (2) विभागीय स्तर से निर्धारित प्रक्रिया को अपनाते हुए 24.02.05 को पुनर्निविदा प्राप्त हुई। (3) दिनांक 11.03.05 को विभागीय निविदा समिति द्वारा तकनीकी बीड की मान्यता दी गई। (4) दिनांक 14.03.05 को विभागीय निविदा समिति द्वारा मे॰ चन्द्र प्रकाश नवरत्न हाता पूर्णिया को अनुसूचित दर से 09 प्रतिशत कम दर कार्य कराने की सहमति दी गयी।

(5) दिनांक 11.03.05 एवं 14.03.05 के विभागीय निविदा समिति के बैठक में उपस्थिति के कारण मुख्य अभियंता दिनांक 11.03.05 से 15.03.05 तक पटना में आवासित रहे।

(6) मुख्य अभियंता के पत्रांक-543 दिनांक 12.03.05 से एकरारनामा करने हेतु अधीक्षण अभियंता कटिहार को अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु एवं संवेदक को ससमय कार्य पूरा करने हेतु निदेशित किया गया।

(7) कार्यपालक अभियंता, कटिहार ने 21.03.05 को संवेदक के साथ एकरारनामा करते हुए कार्यादेश निर्गत किया जिसके उपरांत संवेदक कार्य करने को बाध्यकारी हुआ।

(8) कार्य कराने के पूर्व प्री-लेवल की प्रविष्टि कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 26.03.05 को किये जाने एवं सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता एवं असम्बद्ध प्रमंडल से जाँचित होने का उल्लेख उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के पृ॰-5 पर किया गया है।

(9) द्वितीय कारण पृच्छा में दिनांक 16.03.05 को किये गये कार्य रेखांकण की स्वीकृति दिनांक 04.04.05 को मुख्य अभियंता द्वारा दिये जाने के फलस्वरूप 18 दिनों के बाद कार्य प्रारम्भ होने के लिए पृच्छा की गयी है। इस संदर्भ में कहना है कि आलोच्य कार्य हेतु दिनांक 16.03.05 को निर्गत स्थल आदेश पंजी पर दिनांक 16.03.05 को ही कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता के संयुक्त हस्ताक्षर से स्थल निरीक्षण कर रिटायर लाईन के रेखांकण की स्वीकृति हेतु कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता को नहीं दी गयी। दिनांक 04.04.05 को स्थल भ्रमण के दौरान कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता के पंजी में अंकित अभियुक्ति का अवलोकन कर अपनी अभ्यिुक्ति के साथ हस्ताक्षर किया। उस दिन जल स्तर LWL पर नहीं रहने के कारण रिभेटमेंट का कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ। लेकिन अन्य कार्य प्रगति में था। स्थल आदेश पंजी के पृष्ठ-3 पर दिनांक 11.04.05 को LWL प्राप्त होने एवं NC Base का कार्य प्रारम्भ होने का उल्लेख है। लेकिन बोल्डर क्रेटिंग का कार्य 17.04.05 से प्रारम्भ होने का उल्लेख उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के पृ॰-6 पर है। जब एकरारनामा 21.03.05 को हुआ तो दिनांक 17.03.05 से कार्य प्रारम्भ होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। (10) दिनांक 19.05.05 को अध्यक्ष विशेष जाँच दल ने KKNR तटबंध के चेन सं॰ 327 पर अवस्थित स्पर के D/s शैंक से चेन 336.5 तक रिभेटमेंट द्वारा जोड़ने का सुझाव दिया गया। 31.05.05 कार्य समाप्ति की एकरारित तिथि थी। सरकार की स्वीकृति बिना यह कार्य संभव नहीं था फिर भी उनके आदेश के आलोक में प्रस्ताव विभाग को दिया गया जिसकी स्वीकृति दिनांक 17.06.05 को सशर्त दी गयी जो जाँच प्रतिवेदन के पृ॰ 8 से 10 पर उल्लेखित है। पूरक एकरारनामा के बाद 26.06.05 को कार्य प्रारम्भ हुआ जो कटाव निरोधक कार्य के लिए उपयुक्त समय नहीं था। इस अतिरिक्त कार्य के लिये पर्याप्त बोल्डर की आपूर्ति संभव नहीं हो सका। साथ ही जलस्तर बढ़ने के कारण विभागीय सामग्री की भी कमी रही जिसके कारण कार्य सम्पन्न नहीं हो सका।

(11) मोबाईल/लिखित आदेश के मार्फत कटाव निरोधक कार्य पूरा कराने हेतु संवेदक पर दबाव बनाये रखा गया एवं कोई कोर कसर नहीं छोड़ा गया। साथ ही क्षेत्रीय पदाधिकारियों को भी निदेशित किया गया जो साक्ष्य के रूप में बचाव बयान के साथ संलग्नित है। मेरे कार्रवाई के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा अभियुक्ति में दर्ज किया गया है जिसे अवलोकन किया जा सकता है।40 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने की दिशा में भी उनके द्वारा निदेश देने में कोताही नहीं की गयी। बल्कि तटबंध सुरक्षा हेतु हर संभव प्रयास किया गया। समय के अनुरूप स्थल का निरीक्षण किया। मुख्य अभियंता का दायित्व एक सूत्री कार्य के लिए नहीं बल्कि सभी कार्यो को सम्पादित कराने की बात होती है। उक्त अवधि में अति संवेदनशील स्थलों एवं स्पर-5 पर बाढ़ संघर्षातमक कार्य कराया जा रहा था। जिसके टूटने पर समीप के गाँवों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। इसी को लेकर अभियंता प्रमुख द्वारा उक्त स्थलपर रहकर कार्य कराने का निदेश दिया गया था।

(12) गौरतलब है कि तटबंध का कटाव अन्य कारणों के अलावे अंदरूनी कटाव (अंडर माईनिंग) से हुआ। उस वक्त गंगा का जल स्तर जमीनी स्तर से 1 मीटर नीचे था इसलिए जान-माल की कोई क्षति नहीं हुई।

(13) मेरी कार्यक्षमता पर ही 9.6.06 से 8.1.7 तक मुख्य अभियंता, वीरपुर का अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी विभाग द्वारा दिया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2008 में 18.08.08 को कुशहा तटबंध टूटान से हुई क्षति के पश्चात 23.08.08 से 31.10.08 तक अपस्ट्रीम कट इण्ड भाग की सुरक्षा हेतु प्रतिनियुक्त किया गया था एवं कड़ी मेहनत कर तटबंध को और कहने से सुरक्षित किया गया था। और आज उसी मुख्य अभियंता को लापरवाही एवं पदेन दायित्व की कमी की परिधि में लाकर दोषी ठहराया जा रहा है जो न्याय संगत नहीं है।

(14) किसी भी योजना के कार्यान्वयन में कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता की अहम भूमिका होती है। सबकी तबाही मुख्य अभियंता पर थोंपना उचित नहीं है।

(15) मुख्य अभियंता द्वारा रेखांकण की स्वीकृति देने में विलम्ब नहीं किया गया और न दायित्व निर्वहन में लापरवाही बरती गयी। अतएव आरोप निराधार एवं तथ्यहीन है। इस फैसला से परिलक्षित होता है कि मेरे दिये साक्ष्यों को दरकिनार कर अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर बदले की भावना से प्रेरित होकर, गुणदोष, समय एवं परिस्थिति का आकलन किये बिना पेंशन से 15 प्रतिशत की कटौती 5 वर्षो तक किये जाने का एक पक्षीय निर्णय लिया गया। जिससे जीवन स्तर, बच्चों के पठन-पाठन में गिरावट से इन्कार नहीं किया जा सकता।

(16) रिटायर लाईन के निर्माण के पूर्व रैयतों द्वारा लगाये गये बाँस आदि एवं भू-अर्जन भुगतान हेतु कड़ा रूख अख्तियार किया गया था। जिसे समझा बुझा कर कार्य में रूकावट नहीं आने दिया गया।

(17) निरीक्षण के क्रम में प्रतिवेदित किया गया है कि वर्ष 2005 के निरीक्षण वाहन के लॉगबुक से कटाव निरोधक एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का दस बार निरीक्षण किया जाने से स्पष्ट होगा। सभी कटाव निरोधक कार्यो का पूर्ण कराने की जिम्मेवारी विभाग द्वारा तय है। किसी एक कार्य के लिए जिम्मेवारी थोपकर 15 प्रतिशत पेंशन से कटौती किया जाना अन्याय है जिसका प्रतिकूल प्रभाव मेरे मानसिक एवं शारिरिक क्षमता पर पड़ा।

अंत में आरोप की सत्यता की जाँच तथा तथ्यों की गहराई से समीक्षा कर पूर्व फैसला कर पुनर्विचार करते हुए न्याय देने का अनुरोध किया गया है। श्री राम द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन के कंडिका 1 से 8 में दिनांक 9.01.5 को प्राक्कलन की स्वीकृति से लेकर दिनांक 21.03.05 को एकरारनामा किये जाने की स्थिति का वर्णन किया गया परिलक्षित होता है। कंडिका-9 एवं 15 में 16.03.05 को सहायक अभियंता स्तर से प्रस्तावित रेखांकण की स्वीकृति उनके द्वारा दि॰ 04.04.05 को दिये जाने के संदर्भ में कहना है कि अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा 04.04.05 को अंकित अभ्यिुक्ति पर उनके द्वारा हस्ताक्षर किया गया है। इस मामले में स्पष्ट है कि रेखांकण की स्वीकृति के उपरांत ही कार्य प्रारम्भ हो सकता है।

जिसके लिए श्री राम (आरोपी पदाधिकारी) सक्षम प्राधिकार है। उनके द्वारा दिनांक 09.01.05 को प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दिये जाने एवं दिनांक 17.03.05 को एकरारनामा करने हेतु निदेश दिये जाने के बावजूद रिभेटमेंट का कार्य प्रारम्भ होने के लिए अतिमहत्वपूर्ण रेखांकण की स्वीकृति 04.04.05 को दिये जाने से शिथिलता एवं नेतृत्व का अभाव परिलक्षित होता है। कंडिका 13 में श्री राम द्वारा उनके कार्य क्षमता पर ही अन्य प्रक्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार दिये जाने को प्रतिवेदित किया गया है जो आरोप संदर्भित परिलक्षित नहीं होता है। कंडिका 14 में क्रियान्वयन में कनीय अभियंता से लेेकर कार्यपालक अभियंता तक की भूमिका होने एवं सबकी तबाही उनपर (मुख्य अभियंता पर) थोपने को उचित नहीं होने का उल्लेख किया गया है। प्रस्तुत मामले में कनीय अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता (आरोपी पदाधिकारी) स्तर तक के पदाधिकारियों की जबावदेही निर्धारित करते हुए सभी के विरूद्ध दण्ड अधिरोपित किया गया है। कंडिका-17 में निरीक्षण के संदर्भ में निरीक्षण वाहन के लॉगबुक के आधार पर दस बार निरीक्षण करने एवं कंडिका-11 में मौखिक/लिखित निदेश क्षेत्रीय पदाधिकारियों एवं संवेदक को दिये जाने, उनके स्तर से हर सम्भव प्रयास किये जाने एवं कोताही नहीं किये जाने को उल्लेखित किया गया है। विशेष जाँच दल के अध्यक्ष के दिनांक 29.05.05 के निरीक्षण प्रतिवेदन में एजेण्डा सं॰ 80/538 में 40 प्रतिशत कार्य होने, कार्य की प्रगति लाने की दिशा में कोई सुधार नहीं होने को उल्लेखित किया गया है। कार्य समाप्ति की एकरारित तिथि 31.05.05 होने एवं 80 प्रतिशत निर्माण सामग्री उपलब्ध रहने के बावजूद अध्यक्ष के उपरोक्त तथ्य से पर्यवेक्षण एवं नेतृत्व का अभाव तथा शिथिलता परिलक्षित होता है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से भी कटाव निरोधक कार्य ससमय प्रारम्भ एवं समाप्त नहीं होने, बाढ़ संघर्षात्मक कार्य ससमय प्रारम्भ नहीं होने का उल्लेख किया गया है। स्पष्ट है कि उक्त से श्री राम तत्कालीन मुख्य अभियंता, जो प्रक्षेत्र के सर्वोच्य पदाधिकारी है के पर्यवेक्षण एवं नेतृत्व का अभाव एवं शिथिलता बरती गई है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों, पुनर्विचार अभ्यावेदन, जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "15 प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षो तक" को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।41 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत के पुर्नविचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "15 प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षो तक" को यथावत रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

25 अक्तूबर 2018

सं0 22/नि0सि0(भाग0)-09-14/2014-2325--श्री रंजीत कुमार सिन्हा (आई0डी0-3473) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, के0बी0सी0 काडा, भागलपुर सम्प्रति तकनीकी सलाहकार, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन अंचल, गया के विरूद्ध के0बी0सी0, काडा, भागलपुर के पदस्थापन काल में बिना स्वीकृति के अवकाश में चले जाने के मामले में प्रमण्डलीय आयुक्त-सह-अध्यक्ष के0बी0सी0 काडा, भागलपुर द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। गठित आरोप पत्र प्रपत्र-'क' के आधार पर श्री रंजीत कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, के0बी0सी0 काडा, भागलपुर सम्प्रति तकनीकी सलाहकार, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन अंचल, गया से विभागीय पत्रांक-528, दिनांक 25.02.2015 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया।

श्री रंजीत कुमार सिन्हा, तकनीकी सलाहकार, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन अंचल, गया द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के उत्तर की समीक्षा सक्षम प्राधिकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत निम्नलिखित तथ्य पाये गये :-

श्री रंजीत कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, के0बी0सी0 काडा, भागलपुर के विरूद्ध बिना स्वीकृति के अवकाश में चले जाने संबंधी आरोप पत्र प्रपत्र-'क' कमाण्ड क्षेत्र विकास निदेशालय से प्राप्त हुआ। श्री सिन्हा द्वारा स्पष्टीकरण के उत्तर में उल्लेख किया गया है कि अचानक तबियत खराब हो जाने के कारण छुट्टी में जाने के पूर्व छुट्टी स्वीकृत नहीं करा सका तथा ईलाज लम्बा चलने के कारण समय-समय पर अवकाश वृद्धि हेतु आवेदन भी भेजता रहा। श्री सिन्हा दिनांक 03.12.2013 से दिनांक 07.07.2014 तक बिना अवकाश स्वीकृत कराए अवैध रूप से अनुपस्थित रहे हैं। इस प्रकार बिना पूर्व स्वीकृति के अवकाश में जाने एवं अवैध रूप से अनुपस्थित रहने के प्रमाणित आरोप के लिए श्री सिन्हा दोषी हैं।

अतएव उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री रंजीत कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, के0बी0सी0, काडा, भागलपुर सम्प्रति तकनीकी सलाहकार, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन अंचल, गया के विरूद्ध "संगत वर्ष 2013-14 तथा 2014-15 के लिए 'निन्दन'" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है। उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। अतः उपर्युक्त निर्णय के आलोक में श्री रंजीत कुमार सिन्हा (आई0डी0-3473) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, के0बी0सी0, काडा, भागलपुर सम्प्रति तकनीकी सलाहकार, समग्र योजना अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन अंचल, गया के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

"संगत वर्ष 2013-14 तथा 2014-15 के लिए 'निन्दन'"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------

31 अक्तूबर 2018

सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-04/2017-2333--श्री उमेश सिंह, कार्यपालक अभियंता, आई॰डी॰-3680, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, पटना को जिला पदाधिकारी, पटना के पत्रांक-1419, दिनांक 30.03.17 के आलोक में दिनांक 14.01.2017 को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव के दौरान हुई नाव दुर्घटना के दिन प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थित पाया गया। जिसके लिए श्री उमेश सिंह को प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सामान्य प्रशासन विभाग का पत्रांक-5789, दिनांक 16.05.17 के आलोक में विभाग के स्तर से लिये गये निर्णय के तहत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से विभागीय अधिसूचना सं0-1032, दिनांक 27. 06.17 द्वारा निलंबित किया गया। साथ ही विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1033, दिनांक 28.06.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

श्री उमेश सिंह, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित दिनांक 31.10.18 को सेवानिवृत हो रहे हैं। अतः श्री सिंह को सेवानिवृत होने की तिथि से अर्थात 31.10.18 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।

उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 42

6 नवम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(ल0सिं0)-19-16/2017-2346--श्री विनय मोहन, तत्कालीन सहायक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, सासाराम सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध जाली कागजात तैयार करने फर्जी विपत्र तैयार कर सरकारी राशि का गबन करने आदि आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत श्री मोहन को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। इस बीच श्री मोहन दिनांक 31.01.2008 को सेवानिवृत हो गये। फलस्वरूप सेवा से बर्खास्तगी के समतुल्य लघु जल संसाधन विभाग के विभागीय आदेश संख्या-211, सहपठित ज्ञापांक-4259 दिनांक 05.08.2008 द्वारा "पूर्ण पेंशन एवं उपादन पर सदा के लिए रोक" का दण्ड संसूचित किया गया।

इस दण्डादेश के विरूद्ध श्री मोहन द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-17006़/2008 दायर किया गया। इस याचिका में दिनांक 12.09.2013 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय में लघु जल संसाधन विभाग के विभागीय दण्डादेश को निरस्त करते हुए सभी सेवान्त लाभों का भुगतान करने का आदेश पारित है।

इस याचिका में पारित आदेश के विरूद्ध लघु जल संसाधन विभाग द्वारा एल0पी0ए0 सं0-36/2015 दायर किया गया। इस वाद में दिनांक 17.05.2017 को माननीय उच्च न्यायालय का आदेश है कि अनुशासनिक प्राधिकार Quantum of Punishment के बिन्दु पर तीन महीने के अंदर निर्णय लें। यदि इस बिन्दु पर निर्धारित समय सीमा के अंदर निर्णय नहीं लिया जाता है तो सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-17006/2008 में पारित न्याय निर्णय लागू होगा। LPA No. 36/2015 मे पारित आदेश का Operative Part निम्न प्रकार है :-

"The court, therefore, modifies the order of learned Single Judge to the extent by relegating the punishment question to the disciplinary authority for reconsideration on the quantum of punishment which should be proportionate to the allegation and the amount for which the private respondent was called upon to answer. The disciplinary authority, therefore, will pass a fresh order keeping the above principles in mind preferably within a period of three months. Since it is an old matter, it must reach its finality soon.

Accordingly, this appeal is allowed to the extent indicated above. If no decision or order is passed within the time frame fixed by this court the order of learned Single Judge will prevail."

लघु जल संसाधन विभाग द्वारा दायर LPA No. 36/2015 में माननीय उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश था कि Quantum of Punishment के बिन्दु पर 3 महीने के अन्दर विभाग निर्णय ले, अन्यथा इस अवधि की समाप्ति के पश्चात CWJC No. 17006/2008 में पारित आदेश लागू होगा। यह आदेश दिनांक 17.05.2017 को पारित है। कई स्मार के बाद लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक-2562, दिनांक 04.07.18 द्वारा दंड के बिन्दु पर निर्णय लेने हेतु सम्पूर्ण आवश्यक अभिलेख श्री मोहन का पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग होने के कारण जल संसाधन विभाग को भेजा गया। MJC No. 2908/2017 में माननीय उच्च न्यायालय के दिनांक 17.09.2018 को दिये गये observation के आलोक में CWJC No. 17006/2008 में पारित आदेश का अनुपालन करते हुए सम्यक समीक्षोपरांत लघु जल संसाधन विभाग द्वारा निर्गत विभागीय आदेश सं0-211 सह पठित ज्ञापांक-4259 दिनांक 05.08.2008 द्वारा संसूचित दंड "पूर्ण पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिए रोक" को निरस्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है।

उक्त निर्णय पर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------ 12 नवम्बर 2018 सं0 22/नि॰सि॰(डि॰)-14-01/2014-2360--श्री धीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे0 7677), अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर के पदस्थापन अवधि में रोहतास (सासाराम) मलई बराज के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-514 दिनांक-24.02.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- आरोप सं0-01 :- मलई बराज में Finish Rate पर बोल्डर पिचिंग/Stone metal filter को Supply and labour rate में तोड़कर प्राक्कलन (सं0-SCMC-4701-04/2012-13 एवं SCMC-4701-01/2013-14) तैयार करने एवं अग्रसारण हेतु उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.1.0, 6.3.0, 6.6.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-02 :- मलई बराज योजना में Inferior quality के बोल्डर की आपूर्ति लेकर (जिसकी निकट भविष्य में आवश्यकता नहीं है और जिसका ज्यादा हिस्सा Specification के अनुरूप नहीं है) तथा नक्शे के अनुसार Stone Metal की आवश्यकता नहीं होने पर भी संवेदक को रु 46,45,670.40 का भुगतान किया जाना एवं दोनों एकरारनामा के43 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 विरूद्ध कुल मिलाकर रु 1,71,78,746/- के अनुत्पादक व्यय के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.2.0, 6.5.0 एवं 6.6.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-03 :- आपूर्ति लिए गये बोल्डर एवं स्टोन मेटल जाँच की तिथि में बिना लोकेशन डिटेल के अव्यवस्थित रूप में जहाँ-जहाँ स्टैकनुमा उक्त किये हुए थें जिनसे उनकी मापी नहीं ली जा सकती। एकरारनामा के लगभग 03 महीने पूर्व कार्यादेश निर्गत कर लिये गये उक्त आपूर्ति को वैध की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है। इस स्थिति को उत्पन्न करने के लिए एवं काल्पनिक स्टैक की मापी तथा काल्पनिक Void के अनुसार विपत्र तैयार करने और भुगतान करने के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.7 एवं 6.8 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-04 :- प्राक्कलन में Quarrysite का जिक्र नहीं किया गया है। भुगतान के पहले कार्यपालक अभियंता द्वारा खादान से स्टैक प्वाइंट तक की लीड (दूरी) का सत्यापन/जाँच स्वयं या सक्षम प्राधिकार द्वारा कर लेना अनिवार्य था। वास्तविक दूरी एकरारित लीड से काफी कम है। अतएव Excess lead के लिए रु 43,37,260.0 Excess भुगतान (प्राक्कलन में वर्णित Carriage charge गणना के आधार पर) हुआ। उक्त किये गये Extra भुगतान के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.9.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-05 :- बिना विधिवत रूप से सामग्रियों को लेखा मे लिये किसी आपूर्ति मद (Supply Item) का भुगतान किया जाना किसी भी प्रकार से नियमानुकूल नहीं है। इसके लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.11.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन मे सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-267 दिनांक-21.02.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। आरोप सं0-01 :- मलई बराज योजना के प्राक्कलन मे बोल्डर एवं मेटल कार्यमद का Finished दर का प्रावधान नहीं कर आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान कर प्राक्कलन गठित किये जाने एवं अग्रसारण करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाया गया है। उपलब्ध अभिलेख से विदित होता है कि मलई बराज योजना का पुनरीक्षित प्राक्कलन (सं0-SCMC- 4701-04/2012-13 एवं SCMC-4701-01/2013-14) की तकनीकी स्वीकृति मुख्य अभियंता डिहरी द्वारा क्रमशः दिनांक-11.08.2012 एवं 20.04.2013 को दी गई जिसमें बोल्डर पीचिंग एवं मेटल फिल्टर कार्य मद के लिए आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया गया था। उक्त दोनों प्राक्कलन के गठन एवं अग्रसारण में श्री कुमार सहभागी रहे हैं। श्री कुमार का कहना है कि मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ स्तर से वर्ष 2012 में अनुमोदित प्राक्कलन में आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान रहने से स्पष्ट है कि वर्ष 2012 में आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान होता था। साक्ष्य के रूप में संलग्नित प्राक्कलन में आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया जाना स्पष्ट होता है। श्री कुमार द्वारा संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव-बयान की तरह पीचिंग कार्य में 10% Voids की कटौती किये जाने से संवेदक को अधिक भुगतान होने, Finished दर पर प्रावधान किये जाने के लिए विभागीय निदेश निर्गत नहीं होने, विभागीय अनुसूचित दर मे अलग-अलग प्रावधान रहने, वरीय पदाधिकारी द्वारा असहमत नहीं होने तथा एक ही संवेदक द्वारा आपूर्ति एवं Laying का कार्य मराये जाने से बीच में छोड़े जाने की संभावना नहीं होने को उल्लेखित किया गया है। साथ ही उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी के यह Current Practice में नहीं होने के निष्कर्ष को व्यक्तिपरक होने को प्रतिवेदित किया गया है। उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा कंडिका 6.1.0 में प्रतिवेदित किया गया है कि प्राक्कलन में बोल्डर आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया गया जो Current Practice में नहीं है। साथ ही बोल्डर आपूर्ति की वर्तमान आवश्यकता नहीं होने के बावजूद बोल्डर आपूर्ति लिया गया। चूँकि गाइड बाँध का मूल निर्माण अर्थात E/W प्रारंभ नहीं हुआ है। स्पष्ट है कि श्री कुमार प्राक्कलन गठन एवं कार्य के कार्यान्वयन से संबंधित रहे हैं एवं अलग-अलग मद के प्रावधान का लाभ लेते हुए एकरारनामा होने के पूर्व ही मार्च 2013 में बोल्डर एवं मेटल की आपूर्ति ले ली गई है। जिसे जाँच पदाधिकारी ने अनुत्पादक श्रेणी मे माना है। इस प्रकार संवेदक को तत्काल लाभ पहुँचाने की मंशा से आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार आरोप सं0-01 के संदर्भ में श्री कुमार का बचाव-बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-02 ः- प्रस्तुत आरोप Inferior Quality का बोल्ड/आपूर्ति लिये जाने, नक्श के विपरीत रु 46,45,670.00 का मेटल का आपूर्ति लिये जाने एवं दोनों एकरारनामा के विरूद्ध कुल रु 1,71,78,746.00 का अनुत्पादक व्यय किये जाने से संबंधित है। मलई बराज योजना के दांये एवं बांये गाईड बाँध के निर्माण के लिए किये गये एकरारनामा दिनांक-16.03.2013 (SBD-01/12-13 एवं SBD-02/12-13 ) के अनुसार बोल्डर एवं मेटल का आपूर्ति लिया जाना है जिसके तहत जाँच तिथि 07.04.2014 तक रु 1,25,33,076/- का बोल्डर एवं रु 46,45,670/- का मेटल कुल रु 1,71,78,746/- का अपूर्ति आरोपी द्वारा प्राप्त किया गया जो जाँच पदाधिकारी द्वारा स्थलीय जाँच में आपूरित बोल्डर Flatter, Augular Traingular तथा Plate/Wadge Shape पाया गया।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 44 श्री कुमार का कहना है कि बोल्डर के विशिष्टि में उँचाई के अतिरिक्त अन्य दो Dimension (यथा चौड़ाई एवं मोटाई) नहीं रहने की स्थिति में Cubical एवं समरूप आकार का नहीं होने का आरोप निराधार है। उड़नदस्ता द्वारा जाँचित बोल्डर के नमूनों की ऊँचाई 9'' से अधिक एवं वजन 40-70Kg पाया गया, जो विशिष्टि के अनुरूप परिलक्षित होता है। परन्तु उड़नदस्ता के स्थलीय जाँच में बोल्डर Flatter Angular पाये जाने से न्यून विशिष्टि का होना परिलक्षित होता हैं अतएव जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। गुणवाा जाँच के लिए कार्यपालक अभियंता से अनुरोध किये जाने एवं शोध प्रमंडल की जाँच में विशिष्टि के अनुरूप पाये जाने को उल्लेखित किया गया है। परन्तु बिना गुणवाा जाँच के ही विपत्र को जाँच करते हुए भुगतान हेतु अग्रसारित किया गया। अतएव उक्त कथन भी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। रु 46,45,670/- के मेटल आपूर्ति लिये जाने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि निस्तारित निविदा में बोल्डर के नीचे स्टोन मेटल फिल्टर के आलोक में मेटल की आपूर्ति ली गयी। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6.5.0 के अनुसार मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा दिनांक 20.12.2012 को बोल्डर के नीचे G.T Filter के प्रावधान वाले नक्शा को अनुमोदित किया गया है। अर्थात मेटल फिल्टर के लिए मार्च 2013 में आपूर्ति लिये के समय मेटल की आवश्यकता नहीं रह जाती है। अतएव उनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त मात्रा में बोल्डर के भंडारण पर किये व्यय को अनुत्पादक व्यय की श्रेणी में नहीं होने को आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है। आपूरित बोल्डर का उपयोग गाईड बाँधों के निर्माण में किया जाना है, जिसमें एक साल बाद 07.02.2014 को जाँच तिथि तक मिट्टी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है एवं मूल संरचना मलई बराज का निविदा निष्पादित भी नहीं हुआ है एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा एक वर्ष पूर्व मार्च 2013 में बोल्डर की आपूर्ति प्राप्त कर ली गयी। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-03 ः- प्रस्तुत आरोप बिना लोकेशन डिटेल के अव्यवस्थित रूप से जहाँ-तहाँ स्टैकनुमा डम्प किये बोल्डर/मेटल के काल्पनिक स्टैक की मापी एवं काल्पनिक Voids के अनुसार विपत्र तैयार करने एवं भुगतान किये जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि 01.03.2013 से 16.03.2013 के बीच कार्यालय परिसर, नावानगर पथ के दोनों तरफ एवं बराज स्थल पर स्टैक में रखे आपूरित बोल्डर/मेटल की कनीय अभियंता द्वारा ली गयी मापी मापीपुस्त में दर्ज की गयी। एक साल बाद 07.02.2014 को उड़नदस्ता जाँच के दौरान स्टैक अव्यवस्थित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही कहना है कि कार्यपालक अभियंता CPWD द्वारा पथ मरम्मति के दौरान बोल्डर को हटाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा दिनांक-07.02.2014 को स्थलीय जाँच में स्टैक मापी योग्य नहीं पाया गया। प्रमंडल द्वारा स्टैकों की स्थिति के अनुकूल भी नहीं पाया गया। साथ ही मापीपुस्त में स्टैक का लोकेशन डिटेल अंकित किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। आरोप सं0-04 :- प्रस्तुत आरोप बोल्डर/मेटल की ढुलाई में खदान से स्टैक प्वाईंट तक लीड के बिना सत्यापन कराये वास्तविक लीड से अधिक लीड के लिए कुल रु 40,37,260/- अधिकाई भुगतान से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.9.0 में अंकित है कि मापीपुस्त के अनुसार बोल्डर/मेटल की ढुलाई 260 कि0मी0 लीड के आधार पर विपत्र तैयार किया गया। जाँचाधिकारी द्वारा गूगल मैप के आधार पर मानपुर (गया) खदान से आपूर्ति स्थल की दूरी 195 कि0मी0 पाया गया। इस प्रकार अतिरिक्त 65 कि0मी0 लीड के लिए रु 40,37,260/- अधिकाई भुगतान आकलित किया गया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि गूगल मैप से गणित दूरी Shortest Path का होता है जो पथ की स्थिति नहीं दर्शाता है। जबकि प्राक्कलन में गया खदान से भाया दिनारा-मोहनियाँ-सासाराम-डिहरी-नावानगर मार्ग से 260 कि0मी0 लीड का प्रावधान किया गया है, जो उपलब्ध मार्ग था। साथ ही संवेदक के चालू विपत्र से रु 40.37 लाख की कटौती कर लिये जाने को प्रतिवेदित किया गया है। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-109 दिनांक-08.04.2016 से ढुलाई मद में रु 40.37 लाख कटौती कर लिये जाने की पुष्टि होती है। परन्तु उक्त कार्रवाई उड़नदस्ता द्वारा मामला को प्रकाश में लाने के बाद किया जाना परिलक्षित होता है। साथ ही ढुलाई मद में अधिकाई भुगतान होना दर्शाता है। उड़नदस्ता द्वारा गूगल मैप के आधार पर आकलित 195 कि0मी0 लीड को आरोपित पदाधिकारी द्वारा Shortest Path बताया गया है। विपत्र तैयार करने के पूर्व लीड का सत्यापन कार्यपालक अभियंता/अन्य सक्षम प्राधिकार से करा लेना चाहिए था एवं लीड का प्रावधान Shortest Path (विशेष परिस्थिति छोड़कर) के लिए किया जाना उचित होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-05 :- प्रस्तुत आरोप आपूर्ति मद के सामग्रियों को विधिवत रूप से लेखा मे लिये बिना विपत्र अंकित कर भुगतान किये जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बोल्डर/मेटल की आपूर्ति से संबंध्तिा तीन विपत्रों के लिए तीन कनीय अभियंता, जो अन्य अवर प्रमंडल में पदस्थापित थें, से लेखा प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित करने हेतु अनुरोध किया गया एवं लेखा में लिये जाने के बाद ही विपत्र में हस्ताक्षर किया गया।45 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 प्रथम एवं द्वितीय चालू विपत्रों पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा मार्च 2013 में हस्ताक्षर किया गया है। विपत्र पर आपूरित सामग्री लेखा में लिये जाने का प्रमाण-पत्र अंकित किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। जबकि नियमानुकूल प्रमाण-पत्र अंकित किया जाना चाहिए था। आरोपित पदाधिकारी, जैसा कि बयान में अंकित किया है कि अपने पत्रांक-32 दिनांक-29.03.2014 एवं पत्रांक-35 दिनांक-07.04.2014 के माध्यम से संबंधित तीनों कनीय अभियंताओं को निदेश देने हेतु कार्यपालक अभियंता से अनुरोध किया गया है। स्पष्ट है कि विपत्र की जाँच के समय तक आपूरित सामग्री लेखा में नहीं लिया गया है। अतएव लेखा में लिये जाने के बाद विपत्र पर हस्ताक्षर किये जाने का आरोपित पदाधिकारी के कथन की पुष्टि नहीं हो पाती है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। निष्कर्ष ः- विवेचना कंडिका 3.4.1 में अंकित तथ्यों, आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान एवं संलग्नित साक्ष्य उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री धीरेन्द्र कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर का आरोप सं0-01 से 05 तक के संदर्भ में उनका द्वितीय कारण पृच्छा का उार स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। साथ ही बोल्डर/मेटल ढुलाई मद में Extra लीड के लिए अतिरिक्त भुगतित राशि रु 40.37 लाख की वसूली संवेदक के चालू विपत्र से किये जाने एवं दायें/बायें बाँध के लिए कुल रु 1,71,78,746/- के अनुत्पादक श्रेणी में आपूरित बोल्डर/मेटल का उपयोग संबंधित बाँध में होना आरोपित पदाधिकारी के बयान से स्पष्ट होता है। समीक्षोपरांत उक्त आरोप 01, 02, 03, 04 एवं 05 को प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :- 01. कालमान वेतन में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। 02. प्रोन्नति की देय तिथि से दो वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक। उक्त दण्ड निर्णय पर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है तथा अनुमोदनोपरांत उक्त दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

अतएव उक्त निर्णीत दण्ड श्री धीरेन्द्र कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------ 15 नवम्बर 2018 सं0 22/नि0सि0(वीर)-07-02/2018-2361--श्री सतीश कुमार वर्मा (आई0डी0-3651) तत0 कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-I, बेतिया को उक्त प्रमंडल में विभागीय कार्य के निष्पादन में अभिरूची नहीं लेने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने एवं सरकारी कार्य के निष्पादन में लापरवाही बरतने तथा एकरारनामा में विलंब करने संबंधी बरती गई अनियमितता के मामले में सरकार के स्तर पर पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। (2) निलंबन अवधि में श्री वर्मा का मुख्यालय, मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना को निर्धारित किया जाता है।

(3) निलंबन अवधि में श्री वर्मा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

(4) श्री वर्मा के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

27 नवम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2011-2427--श्री गुंजा लाल राम (आई0डी0-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा के अन्तर्गत तिरहुत मुख्य नहर के वि0दू0 704 से 790 वि0दू0 के बीच कराये गये पुर्नस्थापन कार्य की औचक जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, सूचना भवन, पटना द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता से स्पष्टीकरण पूछा गया। तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक-198, दिनांक 21.01.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-

कार्य का स्थल निरीक्षण नहीं करने, ओभर ऑल इम्पलीमेंटेसन शीड्‌यूल (OIS) के अनुसार कार्य नहीं कराने एवं संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई करने हेतु दिये गये निदेशों का अनुपालन नहीं करने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये हैं।46 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित अपने बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न बातें कहीं गई हैंः-

M/s Nagarjuna Construction Co. Ltd., Nagarjuna Hills, Hyderabad 500082 द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर याचिका संख्या सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-3411/2008 में दिनांक 13.04.2009 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में उक्त संवेदक को कार्यावंटन की स्वीकृति एवं सात दिनों के अंदर एकरारनामा करने हेतु श्री रामचन्द्र प्रसाद सिन्हा, सरकार के संयुक्त सचिव (इंजीनियरिंग) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के हस्ताक्षर से निर्गत पत्रांक-899, दिनांक 03.08.2009 (आरोप पत्र के साथ संलग्न) में है जिसकी प्रतिलिपि मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर, अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मोतिहारी एवं कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया मात्र को ही दी गयी, से स्पष्ट है कि तदेन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर, श्री धीरेन्द्र कुमार द्वारा ही उक्त संवेदक के साथ एकरारनामा दिनांक 06.08.2009 को किया गया तथा उसी दिन अर्थात 06.08.2009 को ही तदेन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर ने अपने पत्रांक-91 (आरोप पत्र के साथ संलग्न) द्वारा उक्त संवेदक को कार्यादेश निर्गत किया गया। उक्त संवेदक के साथ किए गए एकरारनामा में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर का भी क्षेत्र सम्मिलित है किन्दु संवेदक मेसर्स नागार्जुन कन्सट्रक्शन कं0 लि0, हैदराबाद जिन्होंने माननीय पटना उच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त कर उक्त कार्य लिया है तथा जिसका एकरारनामा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के साथ हुआ है उसमें Overall Implementation Schedule (OIS) में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के परिक्षेत्रान्तर्गत में कार्यों में कमी पाए जाने पर भी उक्त संवेदक को तदेन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर अथवा तदेन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर अथवा कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा, मुजफ्फरपुर द्वारा विधितः दण्डित नहीं किया जा सकता बल्कि उक्त संवेदक को दण्डित करने के लिए संवेदक के साथ Agreement करने वाले मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर ही विधितः सक्षम प्राधिकार (Competent Authority) है उनसे भिन्न कोई अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारी नहीं और इसलिए मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर ने अपने पत्रांक-3147, दिनांक 31.12.2010 द्वारा Overall Implementation Schedule (OIS) के लिए संवेदक पर कठोर कार्रवाई करने का हवाला दिया जैसा कि अभियंता प्रमुख (मध्य) के आदेश सं0-1814, दिनांक 18.10.2011 में उल्लेख कतरे हुए संवेदक को कठोर कार्रवाई की चेतावनी का भी प्रयास निष्फल रहा।

पटना उच्च न्यायालय में संवेदक द्वारा दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-3411/2008 में दिनांक 13.04.2009 को पारित न्यायादेश एवं उसके अनुपालन स्वरूप मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर को प्रेषित विभागीय पत्रांक-899, दिनांक 03.08.2009 तथा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा संवेदक को निर्गत पत्रांक-91, दिनांक 06.08.2009 तथा पत्रांक-3147, दिनांक 31.12.2010 द्वारा (OIS) के लिए संवेदक पर कठोर कार्रवाई करने का हवाला दिया जैसा कि अभियंता प्रमुख(मध्य) के आदेश सं0-1814, दिनांक 18.10.2011 में उल्लेख करते हुए कठोर चेतावनी भी दी गई है के परिप्रेक्ष्य में तथा PWD Code के कंडिका 15-51 तक अभियंता प्रमुख से लेकर अवर प्रमंडल पदाधिकारी तक के निर्धारित कर्त्तव्यों के अनुसार उत्तरदायित्व न तो तकनीकी परीक्षा कोषांग के दिनांक 06.06.11 के 01 वर्ष विलंब से समर्पित तथाकथित अपूर्ण औचक जाँच प्रतिवेदन में और न ही प्रशासी विभाग के स्तर पर की गई समीक्षा में इन विधि सम्मत तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए तदेन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के हैसियत से आरोपी मुख्य अभियंता को उनके पत्रांक-01, दिनांक 09.04.13 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के सप्रमाण उत्तर की अनदेखी कर जान-बूझकर साक्ष्यविहीन आरोप लगाये गये हैं। जिसे आरोपी मुख्य अभियंता पूर्णतः अस्वीकार करता है क्योंकि तदेन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फपुर, अभियंता प्रमुख (उ0) एवं सचिव स्तर पर विभागीय सभी बैठकों में स्थिति स्पष्ट की गई थी। जिसमें संवेदक के प्रतिनिधि भी शामिल होते थे तथा ऐसी स्थिति में सिर्फ आरोपी मुख्य अभियंता को बली का बकरा (Escape Goat) उसके अनुसूचित जाति के सदस्य होने के कारण बनाया जाना कहाँ तक न्यायोचित है। श्रीमान्‌ स्वयं समझ सकते हैं। आरोपित मुख्य अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(4) के प्रावधानों के अनुसार उसे व्यक्तिसहः सुना जाय तथा आरोपित मुख्य अभियंता को साक्ष्यों को उक्त नियमावली के नियम-14 के अनुसार प्रति परीक्षण की सुविधा प्रदान की जाय।

अस्तु पूर्वगामी कंडिकाओं में विश्लिेषित तथ्यों एवं आरोपित मुख्य अभियंता द्वारा पूर्व में पत्रांक-01, दिनांक 09.04.13 द्वारा समर्पित सप्रमाण उत्तर एवं अधोभाग में अंकित आरोपों से संबंधित अभिलेखीय साक्ष्य नहीं उपलब्ध कराने के आलोक में आरोपित मुख्य अभियंता को तथाकथित अवैध, अनिश्चित एवं अवशिष्टि आरोपाें से पूर्णतः आरोपमुक्त करने की कृपा की जाय। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री गुंजालाल राम, तत्का0 मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित बचाव-बयान के आधार पर समीक्षा की गई। जिसमें श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण एवं प्रगति की समीक्षा की गई। संवेदक को ससमय (OIS) का पालन करते हुए कार्य सम्पादन करने को निदेशित किया गया है। किन्तु उनके द्वारा संवेदक पर कार्रवाई करने की अनुशंसा अस्पष्ट है साथ ही एकरारनामा की शर्त्तों के अनुरूप कोई स्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतएव श्री गुंजालाल राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-553, दिनांक 20.04.2017 द्वारा श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।47 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 उक्त के आलोक में श्री गुंजालाल राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने पत्रांक-124 दिनांक 03.08.17 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैः-

SBD एकरारनामा के Contract Data के Schedule F के अनुसार Milestone achive नहीं करने की स्थिति में संवेदक के विपत्र से Tender Value का 1% with held किये जाने का प्रावधान है तथा Clause of Contract के Clause-2 के अनुसार कार्य में वांछित प्रगति प्राप्त नहीं होने की स्थिति दण्ड की राशि का निर्धारण संबंधित अधीक्षण अभियंता के निर्णय को अंतिम माना गया है।

SBD एकरारनामा के Clause-2 में मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को Authority for fixing compensation निर्धारित किया गया है तथा विभागीय पत्रांक-1814, दिनांक 18.10.11 से समानुपातिक प्रगति नहीं होने के कारण संवेदक NCCL को Defaulter घोषित किया गया है एवं SBD के उक्त प्रावधान के अनुसार घोषित सक्षम प्राधिकार मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा संवेदक पर कठोर कार्रवाई किये जाने के लिये अनुशंसा की गयी है।

दिनांक 24.05.2010 को विभागीय स्तर पर आयोजित बैठक की कार्यवाही के कंडिका 13 के अनुसार स्वीकृत OIS विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराने वाले प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को जवाबदेह माना गया है। जिसकी सूचना कार्यालय के पत्रांक-1702, दिनांक 14.06.10 द्वारा संसूचित है। पुनः दिनांक 12.06.10 को विभाग स्तर पर आयोजित बैठक की कार्यवाही के कंडिका-13 के अनुसार OIS विशिष्टि एवं गुणवत्ता के अनुरूप कार्य नहीं कराने वाले प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को एकरारनामा के अनुरूप दण्डात्मक कार्रवाई करने का निदेश है। जिसकी सूचना पत्रांक-183, दिनांक 26.06.10 द्वारा दी गयी है।

अधीक्षण अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-620, दिनांक 09.05.12 से संवेदक द्वारा अपेक्षित प्रगति नहीं लाने के फलस्वरूप सभी प्रमंडल से प्राप्त प्रतिवेदन के साथ एकरारनामा की Clause-2 में निहित प्रावधानों के तहत दण्डात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव की अनुशंसा के साथ दण्ड निर्धारण हेतु मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (एकरारनामा के अनुसार घोषित सक्षम प्राधिकार) को संसूचित की गयी।

उपरोक्त से स्पष्ट है कि SBD एकरारनामा के अनुसार संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने की अनुशंसा संबंधित कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाना है। जिसके लिये विभाग/मेरे द्वारा भी समय पर निदेश दिया गया। SBD के शर्त्तों के अनुरूप दण्ड के स्वरूप का स्पष्ट निर्धारण पर अधीक्षण अभियंता, वाल्मीकिनगर को दण्ड निर्धारण करने हेतु Authority घोषित किया गया है। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पदीय दायित्व में न तो संवेदक पर कार्रवाई करने की अनुशंसा और न ही दण्ड निर्धारण का दायित्व शामिल है। SBD के Clause-2 में निहित प्रावधानों के तहत ही दण्डात्मक कार्रवाई हेतु अधीक्षण अभियंता से अनुशंसा प्राप्त होने पर इसे घोषित सक्षम प्राधिकार मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को आवश्यक कार्रवाई हेतु अनुशंसा किया गया। अतएव आरोप से मुक्त किया जाय।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान ही श्री गुंजालाल राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के दिनांक 31.10.2017 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-138, सह ज्ञापांक-2308 दिनांक 22.12.17 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।

श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये-

(क) संचालन पदाधिकारी ने श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य के समीक्षोपरांत मंतव्य दिया गया है कि श्री राम द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण एवं कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए संवेदक को ससमय OIS का पालन करते हुए कार्य सम्पादन करने का निदेश दिया गया है। परन्तु श्री राम द्वारा संवेदक पर कार्रवाई करने की अनुशंसा अस्पष्ट है साथ ही एकरारनामा की शर्त्तों के अनुरूप कोई स्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतएव श्री राम के विरूद्ध आंशिक आरोप प्रमाणित होता है।

(ख) आरोपी द्वारा कहा गया है कि SBD एकरारनामा के Contract Date के Performa of Schedule के Schedule F के अनुसार निर्धारित Milestone achive नहीं करने की स्थिति Tender Value of works का 1 प्रतिशत with held किये जाने का प्रावधान है तथा Clause of Contract के Clause-2 के अनुसार दण्ड की राशि निर्धारित करने के लिये संबंधित अधीक्षण अभियंता के निर्णय को अंतिम माना गया है। जिसकी पुष्टि संचिका में रक्षित अभिलेख से होती है।

(ग) आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि Schedule F के अनुसार मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर Fixing Compensation under clause-2 के लिये Authority है। फलतः विभागीय पत्रांक-1814, दिनांक 18.10.11 में मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-4147, दिनांक 31.12.2010 का उल्लेख करते हुए संवेदक को डिफॉल्टर घोषित किया गया है। परन्तु विभाग का उक्त पत्र मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को भी पृष्ठांकित है।

(घ) आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि दिनांक 24.05.10 को आयोजित विभागीय बैठक में लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं कराने के लिये कार्यपालक अभियंता को जिम्मेवार माना गया है। संचिका में रक्षित विभागीय पत्रांक-1062, दिनांक 22. 06.10 के कंडिका 10 में कार्यपालक अभियंता को जिम्मेवार माना गया।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 48 (ड़) यह भी कहा गया है कि दिनांक 12.06.10 को आयोजित विभागीय बैठक में स्वीकृत OIS विशिष्टि एवं गुणवत्ता के अनुरूप कार्य नहीं कराने वाले प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को एकरारनामा के अनुरूप दण्डात्मक कारवाई करने का निदेश है।

(च) आरोपी द्वारा कहा गया है कि अधीक्षण अभियंता के 620 दिनांक 09.05.12 से एकरारनामा की Clause-2 में निहित प्रावधान के तहत दण्डात्मक कार्रवाई के प्राप्त प्रस्ताव को पत्रांक-1429, दिनांक 24.05.12 द्वारा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (एकरारनामा के अनुसार घोषित सक्षम प्राधिकार) को संसूचित किया गया है।

श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता के उपरोक्त कथन से स्पष्ट है कि इनके द्वारा कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, मुजफ्फरपुर एवं मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को एकरारनामा के विभिन्न Clause के तहत दायित्वों एवं विभागीय स्तर पर अपने दायित्वाें को इतिश्री किये जाने का बोध होता है। संचिका में रक्षित अभिलेख से स्पष्ट है कि दिनांक 22.06.10 को ही स्वीकृत OIS के अनुरूप कार्य नहीं कराने, गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं होने की स्थिति में संवेदक पर दण्डात्मक कार्रवाई करने का निदेश विभाग द्वारा दी गयी है। अंततः मुख्य अभियंता श्री राम द्वारा लगभग दो वर्ष बाद दिनांक 24.05.12को अधीक्षण अभियंता से प्राप्त प्रस्ताव को मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को मात्र अग्रसारित किया गया है। जबकि क्षेत्रीय उच्च पदाधिकारी होने के नाते इनका दायित्व बनता था कि कार्य की प्रगति का नियमित अन्तराल पर समीक्षा करते हुए संवेदक के विरूद्ध दण्ड निर्धारित कराते हुए वांछित सम्पुष्ट प्रस्ताव मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर एवं विभाग को समर्पित करना चाहिये था। ऐसा न कर मात्र अधीक्षण अभियंता के पत्र को अग्रसारित किया गया है जो इनकी लापरवाही दर्शाता है। आरोपी द्वारा इसके अतिरिक्त द्वितीय कारण पृच्छा में वही साक्ष्य दिया गया है जो इनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। उन सभी अभिलेखों के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी ने श्री राम का एकरारनामा के शर्त्तों के अनुरूप कोई स्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करने के लिए दोषी माना गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम को निर्धारित OIS के अनुरूप कार्य नहीं कराने की स्थिति में निदेश के बावजूद एकरारनामा के शर्त्तों के तहत दण्डात्मक कार्रवाई हेतु ससमय सुस्पष्ट प्रस्ताव नहीं देने से संबंधित अंशतः आरोप प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री गुंजालाल राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

"पेंशन से पाँच (5%) प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए"।

उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक-1243, दिनांक 06.06.2018 द्वारा परामर्श/सहमति की माँग की गई। जिसमें उनके द्वारा अपने पत्रांक-2088, दिनांक 02.11.2018 से प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री गुंजालाल राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत मुख्य अभियंता, B-2, विनीता विला, सिद्धार्थ नगर, पो0-वी0 भी0 कॉलेज, जगदेव पथ, पटना को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"पेंशन से पाँच (5%) प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

27 नवम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2011-2428--श्री तेज नारायण राम (आई0डी0-3478), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान तिरहुत नहर प्रमंडल, रतवारा के अन्तर्गत तिरहुत मुख्य नहर के वि0दू0 704 से 790 के बीच कराये गये पुर्नस्थापन कार्य की औचक जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, सूचना भवन, पटना द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता से स्पष्टीकरण पूछा गया। तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक-204, दिनांक 21.01.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-

कार्य का स्थल निरीक्षण नहीं करने, ओभर ऑल इम्पलीमेंटेसन शीड्‌यूल (OIS) के अनुसार कार्य नहीं कराने एवं संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई करने हेतु दिये गये निदेशों का अनुपालन नहीं करने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये हैं।

संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री राम, तत्का0 अधीक्षण अभियंता द्वारा समर्पित अपने बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न बातें कहीं गई हैंः-

(i) कार्य का स्थल निरीक्षण नहीं करने -उक्त कार्य का एकरारनामा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के साथ दिनांक 06.08.2009 को हुआ था एवं कार्य समाप्ति की तिथि 05.09.2011 निर्धारित की गई थी। जिसे सरकार के द्वारा स्वीकृति दी गई। OIS के अनुसार उक्त कार्य की प्रगति की समीक्षा अंचल कार्यालय में प्रत्येक माह के 4/5 तारीख को की जाती थी एवं कार्य स्थल का निरीक्षण एवं समीक्षा के प्रतिवेदन की प्रति विभाग को उपलब्ध कराई जाती थी। गंडक पुनस्र्थापन कार्य के अंतर्गत मिट्‌टी कटाई/भराई, संरचना की मरम्मति एवं लाईनिंग कार्य करना था। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर परिक्षेत्र में49 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 मुख्यतः नहर बांध पर मिट्‌टी भराई एवं लाईनिंग का कार्य करना था। कार्य शुरू करने के समय ही मिट्‌टी भराई के लिए बौरो जिसके कारण कार्य के प्रगति प्रभावित होने लगी। फलस्वरूप दिनांक 12.07.2010 को प्रधान सचिव महोदय द्वारा समीक्षात्मक बैठक में निदेशित किया गया कि बौरो एरिया में मिट्‌टी जहाँ भी उपलब्ध हो, ढुलाई कर कार्य करा ले और मुख्य अभियंता अपने स्तर से Verify करेंगे ताकि भविष्य में कोई विवाद उत्पन्न ना हो। इस निर्देश के पश्चात समस्या का निदान हुआ और कार्य में प्रगति शुरू हुआ। ज्ञातव्य है कि उक्त कार्य का एकरारनामा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के द्वारा किया गया था और कार्य कुल 46 पैकेजो/खण्डों में विभाजित था। जिसमें कुल 18 पैकेज मुजफ्फरपुर के 04 प्रमंडल के अन्तर्गत था, जो मुजफ्फरपुर जिला से लेकर वैशाली एवं समस्तीपुर जिला के बार्डर तक फैला हुआ है तथा सम्पूर्ण कार्य में मुख्य नहर के वि0दू0 537 से 790 तक एवं इससे निकलने वाली शाखा नहर, उप शाखा नहर, वितरणी एवं उप वितरणी प्रणाली तक का पुनस्र्थापन कार्य सम्मलित है। कार्य मुख्य नहर से लेकर उप वितरणी प्रणाली तक करना था। ऐसी स्थिति में प्रत्येक पैकेज की प्रगति एवं समस्या एक जैसी नहीं थी और एकरारनामा के अनुसार कार्य की समीक्षा एवं शर्त्तें पैकेजवार निर्धारित की गई थी। फिर भी काफी परिश्रम के पश्चात कार्य में गुणवत्ता के साथ अपेक्षित प्रगति लाने का प्रयास मेरे द्वारा किया जाता रहा। जिसके साक्ष्य में मेरेद्वारा विभिन्न तिथियों 08.04.2010, 20.04.2010, 26.05.2010, 28.05.2010, 04.06.2010, 23.06.2010 03.07. 2010, 30.07.2010, 31.12.2010, 09.04.2011, 11.04.2011, 27.04.2011, 21.05.2011, 01.06.2011 एवं 03.06.2011 को निरीक्षण एवं प्रगति की समीक्षा की गई एवं उसकी प्रति आवश्यक कार्रवाई हेतु विभाग को समर्पित किया गया है। इस प्रकार स्थल निरीक्षण नहीं करने का आरोप बेबुनियाद एवं सत्य से परे है।

(ii) OIS (Overall Implementation Schedule) के अनुसार कार्य नहीं करने -पुनस्र्थापन कार्य में OIS के अनुरूप लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होने के बहुत सारे कारण थे जिसमें बौरो एरिया की समस्या, वन विभाग की समस्या, खरीफ मौसम में नहर संचालन की समस्या, लाईनिंग कार्य में प्रयुक्त होने वाले Brick के निर्धारण की समस्या, विधान सभा के चुनाव की समस्या एवं पंचायत के चुनाव की समस्या अतिमहत्वपूर्ण थे। जो परिस्थिति जन्य एवं स्वभाविक था। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन्हीं कारणों से विभाग ने समय-समय पर समय वृद्धि की भी स्वीकृति दी। विस्तारित समय वृद्धि की स्वीकृति दी गई है। जिसकी पुष्टि संचिका में रक्षित अभिलेख से होती है। इसके अतिरिक्त कम्पनी द्वारा कार्य में काफी प्रगति लाने हेतु प्रारंभिक दौर में दिनांक 26.05.2010 को मेरे द्वारा श्री संजय कुमार परियोजना प्रभारी, मे0 नागार्जुन कन्स्ट्रक्शन कम्पनी को पत्रांक-750 दिनांक 26.05.2010 द्वारा कार्य की धीमी प्रगति के संबंध में पत्र लिखा गया था और अन्य कार्रवाई भी की गई थी। इस प्रकार कार्य की विशिष्टि के अनुसार कार्य करने तथा OIS के अनुसार कार्य की प्रगति करने का निदेश मेरेद्वारा दिया गया। इसी बीच स्थानांतरण हो जाने के फलस्वरूप मेरे द्वारा दिनांक 30.06.2011 को प्रभार सौंप दिया गया। इस प्रकार अपने कार्यकाल में मेरे द्वारा कार्य स्थल का सघन निरीक्षण एवं प्रगति की समीक्षा पुरी मुस्तैदी, सक्षमता एवं ईमानदारी से किया गया। अतएव OIS के अनुसार कार्य नहीं कराने का आरोप निराधार है।

(iii) संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई करने हेतु दिये निदेशों का अनुपालन नहीं करना -जहाँ तक संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई करने हेतु दिये गये निदेशों का अनुपालन नहीं करने का प्रश्न है यह आधारहीन है क्योंकि उक्त कार्य में किसी भी उच्च अधिकारी द्वारा मेरेके कार्यकाल में संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई करने का कोई भी निदेश सीधे प्राप्त नहीं हुआ। परन्तु समानुपातिक प्रगति नहीं होने के कारण संवेदक पर एकरारनामा के अनुसार दण्डात्मक कार्रवाई करने हेतु निदेश मेरे द्वारा सदैव अपने निरीक्षण प्रतिवेदन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को दिया जाता रहा एवं संवेदक द्वारा कराये गये कार्यों में निरीक्षण के क्रम में पायी गई त्रुटियों को दूर करने हेतु पूर्व निर्मित कार्य को तोड़कर नये सिरे से बनाने का आदेश भी दिया। संवेदक के विरूद्ध एकरारनामा के अनुसार जहाँ तक दण्डात्मक कार्रवाई करने का प्रश्न है-उसके संबंध में कहना है कि एकरारनामा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के द्वारा किया गया था। ऐसी स्थिति में दण्डात्मक कार्रवाई उनके स्तर से अपेक्षित थी। एकरारनामा के साथ संलग्न कॉन्ट्रेक्ट डाटा के Clause-16 के अनुसार अधीक्षण अभियंता के द्वारा केवल Reduce Rate का निर्णय किया जाना था न कि clause-5 के अनुसार दण्डात्मक कार्रवाई करने का जिसे कॉन्ट्रेक्ट डाटा एवं एकरारनामा में देखा जा सकता है। अतः संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने का आरोप आधारहीन है।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान ही श्री तेज नारायण राम, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर के दिनांक 31.07.2017 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-136, सह ज्ञापांक-2305 दिनांक 22.12.17 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया।

श्री राम, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री तेज नारायण राम के विरूद्ध आरोप का मुख्य अंश है कि ससमय स्थल निरीक्षण नहीं करना एवं कार्य की प्रगति OIS के दिये गये निदेश के अनुपालन में संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई नहीं करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने मामले के समीक्षोपरांत मंतव्य दिया गया है कि इनके द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया है। साथ ही प्रगति से विभाग को अवगत कराया गया है परन्तु उनके द्वारा संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने हेतु की गयी अनुशंसा स्पष्ट नहीं है एवं एकरारनामा की शर्त्तों के आलोक में कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं दिया गया है। अतएव आंशिक आरोप प्रमाणित माना जा सकता है।50 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 आरोपी द्वारा कहा गया है कि समानुपातिक प्रगति नहीं पाये जाने के क्रम में निदेश दिये जाने के बावजूद कार्यपालक अभियंता द्वारा दण्डात्मक कार्रवाई हेतु कोई भी पत्र हस्तगत नहीं कराया गया तथा उच्च पदाधिकारी से अनुरोध करने के पश्चात भी कोई निदेश नहीं प्राप्त हो सका। ऐसी स्थिति में स्वतः दण्ड का स्पष्ट प्रस्ताव भेजना नियमानुकूल नहीं होता को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि अगर कार्यपालक अभियंता द्वारा निदेश देने के बावजूद वांछित प्रस्ताव नहीं दिया जा रहा था तो उनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई हेतु विभाग अथवा मुख्य अभियंता को संसूचित किया जाना इनका दायित्व एवं कर्त्तव्य था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया।

इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि एकरारनामा के Contract Data के Clause-16 के अनुसार अधीक्षण अभियंता का दण्डात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। परन्तु एकरारनामा के Clause-2 के अनुसार वांछित प्रगति प्राप्त नहीं होने की स्थिति में अर्थ दण्ड का निर्धारण करते हुए सुस्पष्ट प्रस्ताव उच्च पदाधिकारी को समर्पित करते परन्तु ऐसा न कर इनके द्वारा अपने पत्रांक-620 दिनांक 09.05.12 से मात्र दण्डात्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर मात्र औपचारिकता निभायी गयी है। जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा भी अस्पष्ट माना गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम को विभागीय निदेश के बावजूद संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई करने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाने का अंशतः आरोप प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री तेज नारायण राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

"पेंशन से पाँच (5%) प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए"। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक-1244, दिनांक 06.06.2018 द्वारा परामर्श/सहमति की माँग की गई। जिसमें उनके द्वारा अपने पत्रांक-2084, दिनांक 02.11.2018 से प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री तेज नारायण राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत मुख्य अभियंता (याँत्रिक), वार्ड नं०-01 दौदपुर कोठी, शिव मन्दिर के नजदीक MIT, मुजफ्फरपुर को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"पेंशन से पाँच (5%) प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------ 28 नवम्बर 2018 सं0 22/नि॰सि॰(अभि॰)डि0-22-08/2014-2455--श्री देवराज रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी प्रमंडल डिहरी, सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा, दरभंगा, शिविर झंझारपुर के पदस्थापन अवधि में मौजा धौड़ाढ़ में स्वीकृत खनन पट्टा क्षेत्र से बाहर लोगों द्वारा खनन किए जाने की सूचना खनन एवं भूतत्व विभाग को नहीं देने, सरकार को खनिज एवं राजस्व की क्षति पहूॅचाने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2260 दिनांक-01.10.2015 द्वरा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत निम्न आरोपां के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः- आरोप सं0-1ः- मौजा धौड़ाढ़ में स्वीकृत खनन पट्टा क्षेत्र से बाहर लोगों द्वारा अवैध खनन किया गया था। उक्त क्षेत्र डिहरी प्रमंडल, डिहरी के अधीन है। आपके कार्यपालक अभियंता, डिहरी प्रमंडल, डिहरी के पद पर कार्यरत रहते हुए अवैध खनन के संबंध में खनन एवं भूतत्व विभाग रोहतास को सूचित नहीं किया गया जो आपकी कर्तव्य में लापरवाही एवं उदासीनता का घोतक है, जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं। आरोप सं0-2ः- आपके द्वारा अवैध खनन की सूचना ससमय खनन एवं भूतत्व विभाग, रोहतास को नहीं देने के कारण सरकारी को खनिज एवं राजस्व की क्षति हुई, जिसके लिए आप प्रथम द्रष्टया दोषी हैं। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1787 दिनांक7 06.10.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। उक्त के आलोक में श्री रजक द्वारा द्वितीय कररण पृच्छा का प्रत्युत्तर समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। आरोप सं0-1ः- प्रस्तुत आरोप में मौजा धोड़ा में नियंत्रणाधीन पहाड़ से अवैध खनन की सूचना खन एवं भुतत्व विभाग, रोहतास को नहीं देने के लिए आरोपित पदाधिकारी को कर्त्तव्य में लापरवाही एवं उदासीनता के लिए दोषी माना गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिये बयान के सदृश ही विषयांकित पहाड़ श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के नियंत्रणाधीन होने दिनांक-07.07.09 को प्रभार में आने के बाद पूर्ववर्ती कार्यपालक अभियंता श्री दास एवं सम्बद्ध अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा इसकी जानकारी नहीं देने, प्रतिनियुक्त कर्मचारी को अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा हटा लिय जाने को प्रतिवेदित किया गया है। कार्यपालक अभियंता (आरोपित पदाधिकारी) को अपने कार्यक्षेत्र की जानकारी नहीं होना उनकी कर्तव्य के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही ही परिलक्षित करता है। प्रतिनियुक्त कर्मचारियों को हटाये जाने एवं उसके कार्यकलाप की51 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 जानकारी नहीं होने के कारण उनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उनके उपरोक्त कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के विभिन्न पारा में अवैध खनन के संबंध में किए गए विभिनन पत्राचार एवं प्राथमिकी दर्ज कराये जाने को प्रतिवेदित किया गया है। किये गये पत्राचारों के अवलोकन से स्पष्ट होता हैं कि सभी पत्राचार एवं प्राथमिकी दर्ज खनन विभाग द्वारा दिनांक-20.05.10 को प्राथमिकी कराने के बाद कराया गया है जबकि अवैध खनन पूर्व से ही होते रहना परिलक्षित होता है। उपरोक्त से नियंत्रणाधीन पत्थर भूखंड से अवैध खनन की रोकथाम/सूचना आरोपित पदाधिकारी द्वार नहीं दिया जाना परिलक्षित होता है। विषयांकित पत्थर भूखंड डिहरी प्रमंडल, डिहरी के नियंत्रणधीन है जहाँ आरोपित पदाधिकारी पदस्थापित रहे है। जल संसाधन विभाग के अनापत्ति प्रमाण-पत्र के आधार पर नागार्जुन कन्स्ट्रक्शन को 30.03.2008 तक दी गई लीज को दिनांक-12.06.06 को समाप्त कर दिया गया। उसी भूखंड को बिना अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किये सहायक निदेशक, खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा दो पट्टाधारियों को पट्टा पर दिया गया। खान एवं भूतत्व विभाग के स्थलीन जाँच में कतिपय लोगों द्वारा अवैध खनन होते हुए पाया गया। पहाड़ से हटाये गये प्रतिनियुक्त कर्मचारियों को वेतन भुगतान किये जाने को संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपित पदाधिकारी के कार्यक्षेत्र में भ्रमण नहीं किया जाना मान गया है। उक्त के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी Log Book की छायाप्रति संलग्न करते हुए कर्त्तव्य का पालन नहीं करने के आरोप को गलत बताया गया है। आरोपित पदाधिािरी द्वारा संलग्न Log Book से यह वर्ष 2011 का होना स्पष्ट होता है जबकि आरोप दिनाक-20. 05.10 के पूर्व का है। इससे अवैध खनन के दौरान कार्यक्षेत्र के भ्रमण किया जाना स्पष्ट नहीं होता है। अतएव उनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अवैध खनन के लिए सहायक निदेशक खान एवं भूतत्व विभाग, रोहतास को जिम्मेवार माना गया है। आरोपित पदाधिकारी अपने कर्त्तव्य निर्वहन के लिए जिम्मेवार होते हैं आरोप उनके कर्त्तव्य निर्वहन से संबंधित है न कि सहायक निदेशक खान एवं भूतत्व विभाग से। उपरोक्त से सहायक निदश्ेाक को जिम्मेवार बताकर स्वयं को इसके लिए जिम्मेवार नहीं होने का आधार होने के उनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के परिप्रेक्ष्य में आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर आरोप संख्या-1 के सन्दर्भ में स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-2ः- प्रस्तुत आरोप अवैध खनन की सूचना नहीं दिये जाने के कारण सरकारी राजस्व एवं खनन की क्षति होने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिये बयान के सदृश ही बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के सहायक निदेशक खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा नीलामी किये जाने एवं जिला पदाधिकारी के पत्रांक-189, 190 दिनांक-21.02.2011 से भूखण्ड, जल संसाधन विभाग को सौंपे जाने का निदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए सहायक निदेशक को जिम्मेवार माना गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा मूल आरोप से हटकर उत्तर दिया जाना स्पष्ट होता है। जिला पदाधिकारी के उक्त पत्र द्वारा वर्ष 2011 में पट्टा को रद्द करते हुए भूखंड जल संसाधन विभाग को वापस करने का निदेश दिया गया । जबकि आरोप मई 2010 के पूर्व अवैध खनन से संबंधित है। जो समय पर निरीक्षण करते हुए अपने कर्त्तव्य का निर्वहन करते हुए बचाया जा सकता था। परन्तु अवैध खनन हुआ जिसके जाँचोपरांत समबद्ध पदाधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई प्रारम्भ की गई। उपलब्ध अभिलेख से अवैध पत्थर खनन के कारण हुई राजस्व/पत्थर की क्षति का आकलन किया जाना संभव प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त तथ्यों, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का आरोप सं0-2 के संदर्भ में द्वितीय कारण पृच्छा बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। उपरोक्त तथ्यों द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के आलोक में आरोप सं0-1 एवं 2 के आलोक में श्री देवराज रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी प्रमंडल, डिहरी का द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। समीक्षोपरांत उक्त आरोप-1 एवं 2 को प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री रजक को निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। (1) संगत वर्ष (2010-11) के लिए निंदन की सजा। (2) दो वार्षिक वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोका जाए। (3) प्रोन्नति की देय तिथि से 2 वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक। उक्त दण्ड निर्णय पर माननीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। अतएव उक्त निर्णीत दण्ड श्री देवराज रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी प्रमंडल, डिहरी को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 52

29 नवम्बर 2018

सं0 22/नि॰सि॰(डि॰)-14-07/2016-2463--श्री देवराज रजक (आई0डी0-4574), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी प्रमंडल, डिहरी संप्रति कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा, दरभंगा शिविर-झंझारपुर के पदस्थापन अवधि में उनके विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी से प्राप्त पत्र पत्रांक-299 दिनांक-30.01.2016 द्वारा CWJC No-6513/2015 लक्ष्मण सिंह बनाम बिहार राज्य व अन्य में बरती गई अनियमितता के लिए अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इसके आलोक में विभागीय पत्रांक-1005 दिनांक-16.06.2017 के द्वारा आरोप पत्र 'क' एवं साक्ष्य की प्रति संलग्न करते हुए श्री रजक से स्पष्टीकरण किया गया। पुनः विभागीय पत्रांक-1234 दिनांक- 26.07.2017 के द्वारा जवाब समर्पित करने हेतु स्मारित किया गया। आरोप का बिन्दु निम्न है :-

आरोप सं0-01 :- मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक-299 दिनांक-30.01.2016 के आलोक में ग्यारह स्मार एवं अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भभुआ के पत्रांक-1637 दिनांक-02.09.2016 के आलोक में चार स्मार के बावजूद माँगा गया प्रतिवेदन आपके द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया, जो आपकी कर्तव्यहीनता एवं उच्चाधिकारी की अवहेलना को परिलक्षित करता है। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं।

आरोप सं0-02 :- मुख्यअभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी द्वारा निर्गत सुनिश्चित वृति उन्नयन योजना के आदेश के विपरीत आदेश निकालकर आपके द्वारा श्री लक्ष्मण सिंह, सेवानिवृत जीप चालक को व्यक्तिगत लाभ पहुँचाया गया, जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं।

उक्त आरोप के संबंध में श्री रजक के द्वारा अपने स्पष्टीकरण में मुख्य रूप से बताया गया है कि मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी (संप्रति मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी) का पत्रांक-299 दिनांक-30.

01.2016 एवं अधीक्षण अभियंता, सिंचाई सृजन, भभुआ के पत्रांक-1637 दिनांक-02.09.2016 के आलोक में विषयांकित मामले से संबंधित तथ्य विवरणी अनुलग्नक सहित उनके कार्यालय का पत्रांक-1004 दिनांक-11.07.2015 द्वारा अधीक्षण अभियंता को समर्पित कर दिया गया था। जिसमें उनके द्वारा कुछ टिप्पणी भी की गई थी। इसी बीच जून' 2015 में उनका स्थानान्तरण कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा, पूर्णियाँ के पद पर हो गया और विभागीय निदेश के आलोक में वे योगदान करने हेतु प्रस्थान कर गए। साक्ष्य रूवरूप अधीक्षण अभियंता, जलपथ अंचल, भभुआ का पत्रांक-1225 दिनांक-17.07.2015 की प्रति एवं तथ्य कथन की प्रति संलग्न किया गया।

विभागीय पत्रांक-07 दिनांक-03.01.2018 के द्वारा श्री देवराज रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी प्रमंडल, डिहरी के स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी से मंतव्य की माँग की गयी। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, डिहरी के पत्रांक-1252 दिनांक 05.07.2018 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। जिसमें निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है :-

श्री लक्ष्मण सिंह को मुख्य अभियंता, कार्यालय, डिहरी के कार्यालय आदेश सं0-1161 दिनांक-09.03.2006 द्वारा प्रथम A.C.P दिनांक-01.01.2000 से वेतनमान 4000-6000 में स्वीकृत किया गया तथा आदेश ज्ञापांक-5186 दिनांक-31.08.

2006 द्वारा प्रथम A.C.P की देय तिथि को दिनांक-01.01.2000 से संशोधित कर 09.08.1999 किया गया। कार्यालय आदेश सं0-3841 दिनांक-31.08.2006 द्वारा श्री सिंह को द्वितीय A.C.P दिनांक-09.08.1999 से वेतनमान 4500-7000 में स्वीकृत किया गया।

श्री देवराज रजक द्वारा डिहरी प्रमंडल, डिहरी के आदेश सं0-1058 दिनांक-25.07.2015 के माध्यम से कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार संप्रति सामान्य प्रशासन विभाग के अधिसूचना सं0-1468 दिनांक-25.04.2007 के आलोक में श्री सिंह का प्रथम विाीय उन्नयन एवं द्वितीय विाीय उन्नयन के तहत स्वीकृत वेतनमानों को अपने स्तर से संशोधित कर53 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 क्रमशः 4500-7000 एवं 5000-8000 किया गया। श्री रजक द्वारा मुख्य अभियंता, डिहरी के अनुमति के बिना मुख्य अभियंता, कार्यालय, डिहरी द्वारा स्वीकृत प्रथम एवं द्वितीय A.C.P में संशोधन कर दिया गया, जो नियमानुकूल नहीं है।

श्री लक्ष्मण सिंह, सेवानिवृत वाहन चालक तृतीय संवर्ग के कर्मचारी के रूप में कार्यरत थें। मुख्य अभियंता कार्यालय, डिहरी के परिक्षेत्राधीन कार्यरत चतुर्थ वर्ग एवं तृतीय संवर्ग के कर्मचारियों के A.C.P और M.A.C.P कि स्वीकृति/संशोधन हेतु सक्षम प्राधिकार मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी है। विभागीय अधिसूचना सं0-3058 दिनांक-30.06.2015 द्वारा श्री रजक का स्थानान्तरण आदेश निर्गत हो जाने के पश्चात भी उनके द्वारा डिहरी प्रमंडल, डिहरी के आदेश सं0-1058 दिनांक-25.07.2015 द्वारा सक्षम प्राधिकार के अनुमति/आदेश के बिना स्वीकृत प्रथम एवं द्वितीय A.C.P में संशोधन करना श्री सिंह को अनुचित लाभ पहुँचाने की मंशा से प्रेरित होना प्रतीत होता है।

अतएव वर्णित तथ्यो के आलोक में श्री देवराज रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करने की अनुशंसा मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा की गई है। पूरे मामले को विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत मुख्य अभियंता से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में श्री देवराज रजक को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-

1. संगत वर्ष के लिए निन्दन की सजा दी जाय।

2. एक वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाय।

उक्त दण्ड निर्णय पर माननीय मंत्री महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है।

अतएव उक्त निर्णित दण्ड श्री देवराज रजक, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, डिहरी संप्रति कार्यपालक अभियंता, खेत विकास प्रमंडल, काडा, दरभंगा, शिविर-झंझारपुर को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------

3 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि॰सि॰(भाग॰) 09-05/2017-2473--श्री उमेश मुखिया, (आई0डी0-4455) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल औरंगाबाद के विरूद्ध माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के आदेशानुसार सिंचाई प्रमण्डल सं0-2 जमुई में कार्यरत श्री ब्रहमदेव सिंह, सेवानिवृत संग्राहक का बकाया वेतनवृद्धि, देय ए0सी0पी0 एवं पुनरीक्षित वेतन के अनुरूप सेवान्त लाभ आदि देने के संबंध में कार्रवाई न कर, कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के लिए आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 2027 दिनांक-15.11.17 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।

उक्त के आलोक में श्री मुखिया द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है कि श्री ब्रहमदेव सिंह, सेवानिवृत संग्राहक से संबंधित संचिका उनके समक्ष उपस्थापित नही होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी।

श्री मुखिया द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा सक्षम प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री मुखिया का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री उमेश मुखिया, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल औरंगाबाद के विरूद्ध '' एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

अतः सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री उमेश मुखिया, (आई0डी0-4455) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल औरंगाबाद के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

'' एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------

3 दिसम्बर 2018

सं॰ 22/नि॰सि॰(भाग॰) 09-05/2017-2474--श्री सुधीर कुमार सिंह, (आई0डी0-3748) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल लक्ष्मीपुर (जमुई) के विरूद्ध माननीय54 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 लोकायुक्त, बिहार, पटना के आदेशानुसार सिंचाई प्रमण्डल सं0-2 जमुई में कार्यरत श्री ब्रहमदेव सिंह, सेवानिवृत संग्राहक का बकाया वेतनवृद्धि, देय ए0सी0पी0 एवं पुनरीक्षित वेतन के अनुरूप सेवान्त लाभ आदि देने के संबंध में कार्रवाई न कर, कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के लिए आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 2026 दिनांक-15.11.17 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।

उक्त के आलोक में श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है कि श्री ब्रहमदेव सिंह, सेवानिवृत संग्राहक से संबंधित संचिका उनके समक्ष उपस्थापित नही होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी।

श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा सक्षम प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री सिंह का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुधीर कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल लक्ष्मीपुर (जमुई) के विरूद्ध '' एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

अतः सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुधीर कुमार सिंह, (आई0डी0-3748) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल लक्ष्मीपुर (जमुई) के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

'' एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------

3 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि॰सि॰(भाग॰) 09-05/2017-2475--श्री अरविन्द कुमार, (आई0डी0-4398) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, उत्तर कोयल नहर प्रमण्डल औरंगाबाद के विरूद्ध माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के आदेशानुसार सिंचाई प्रमण्डल सं0-2 जमुई में कार्यरत श्री ब्रहमदेव सिंह, सेवानिवृत संग्राहक का बकाया वेतनवृद्धि, देय ए0सी0पी0 एवं पुनरीक्षित वेतन के अनुरूप सेवान्त लाभ आदि देने के संबंध में कार्रवाई न कर, कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के लिए आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 2024 दिनांक-15.11.17 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।

उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है कि श्री ब्रहमदेव सिंह, सेवानिवृत संग्राहक से संबंधित संचिका उनके समक्ष उपस्थापित नही होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी।

श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा सक्षम प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री कुमार का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री अरविन्द कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, उत्तर कोयल नहर प्रमण्डल औरंगाबाद के विरूद्ध ''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

अतः सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरविन्द कुमार, (आई0डी0-4398) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल सं0-2, जमुई सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, उत्तर कोयल नहर प्रमण्डल औरंगाबाद के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

'' एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------

13 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(पू0)01-10/2006-2582--श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ के विरूद्ध सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज के अन्तर्गत निविदा आमंत्रण सूचना सं0-05/2005-2006 के ग्रुप सं0-03 के कार्यावंटन में अनियमितता बरते जाने से संबंधित आरोपों की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से कराई गई। उड़नदस्ता से प्राप्त प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप :-

"निविदा सूचना सं०-05/2005-2006 के ग्रुप सं0-3 के निविदा निष्पादन में कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज, अधीक्षण अभियंता नहर अंचल, पूर्णियाँ की गलत अनुशंसा को आधार बनाकर तुच्छ कारणों से मे0 रतिलाल यादव के Technical Bid को अमान्य करना तथा गलत ढंग से मे0 सरोज कन्स्ट्रक्शन प्र0 लि0, मुरलीगंज को कार्य आवंटित करना।"

के लिए विभागीय पत्रांक-733, दिनांक 03.09.2008 द्वारा श्री राम प्रसाद राम से स्पष्टीकरण की मांग की गई। श्री राम से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षोपरांत उपरोक्त आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-159, दिनांक 11.02.2011 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी।

विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच-प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री राम के विरूद्ध लगाये गये आरोप को आंशिक प्रमाणित पाया गया।55 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच-प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के जाँच-प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1554, दिनांक 07.09.2017 द्वारा श्री राम से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी, लेकिन श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर न देकर एक अभ्यावेदन दिया गया जिसमें उल्लेख किया गया कि वे जनवरी 2005 से हृदय रोग एवं हाई बी0पी0 से ग्रसित है, इधर कुछ दिनों से मस्तिष्क बीमारी से भी प्रभावित हो गए है ऐसी स्थिति में जब तक ब्रेन का सुचारू संचालन नहीं हो पाता है तब तक के लिए समुचित समय प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा जवाब न देकर अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। इस प्रकार समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत मुख्य अभियंता को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :-

"पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती 5 वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की माँग की गयी, तदालोक में आयोग द्वारा पत्रांक-2089, दिनांक 02.11.18 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति दी गई है। सरकार द्वारा लिये गए उक्त निर्णय एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री राम प्रसाद राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को उक्त दण्ड " "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती 5 वर्षों तक" अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

13 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(पू0)01-04/2009-2583--श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अन्तर्गत वर्ष 2000-01 में जानकी शाखा नहर के पुर्नस्थापन कार्य एवं सी0डी0 संरचना की मरम्मति संबंधित एकरारनामा सं0-25F2/2000-01 एवं 29F2/2000-01 के तहत कराये गये कार्य का भुगतान लंबित रहने के कारण संवेदक श्री किशोर जयसवाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में वाद सं0-14371/07 एवं 15090/07 दायर किया गया। उक्त वाद में पारित न्याय निर्णय के आलोक में दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित करने हेतु विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप :-

(I) अधीनस्थों के द्वारा अधूरे कार्य की प्रगति को शत-प्रतिशत पूर्ण होने के समर्पित प्रतिवेदन को आपके द्वारा बिना जाँचे ही विभाग में आवंटन हेतु समर्पित किया गया।

(II) विभागीय अनुदेश के बाद भी दायित्व समिति की बैठक ससमय निर्धारित नहीं किया गया। उक्त आरोप के लिए श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-578, दिनांक 05.04.2010 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दुओं- (a) विभागीय पत्रांक-353, दिनांक 03.03.2001 की कंडिका-2 में अंकित निदेश की अवहेलना करते हुए विभाग से आवंटन की मांग किया जाना।

(b) दायित्व समिति की बैठक बुलाने हेतु विभागीय पत्रांक-673, दिनांक 25.03.2006 में दिये गये निदेश के बावजूद लगभग तीन साल बाद दायित्व समिति की बैठक माननीय उच्च न्यायालय के निदेश के बाद बुलाना।

पर श्री राम से विभागीय पत्रांक-96, दिनांक 22.01.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया, समीक्षोपरांत वित्तीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित नहीं होने एवं सेवानिवृति के फलस्वरूप मामले को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

उक्त प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय के अनुमोदन के क्रम में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा मामले की पुनः नये सिरे से जाँच हेतु विभागीय जाँच आयुक्त को Remand कर दिया गया, तदोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः नये सिरे से जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत श्री राम से विभागीय पत्रांक 1817, दिनांक 09.

10.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी, लेकिन श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर न देकर जाँच प्रतिवेदन की हिन्दी अनुवादित प्रतिवेदन की मांग की गयी, जिसे विभाग द्वारा खारिज करते हुए पुनः स्मारित किया गया, लेकिन श्री राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में श्री राम द्वारा पूर्व में दिये गये बचाव बयान तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री राम प्रसाद राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :-

"पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती 2 वर्षों तक"।56 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सरकार द्वारा लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की माँग की गयी, तदालोक में आयोग द्वारा पत्रांक-2086, दिनांक 02.11.18 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति दी गई है। सरकार द्वारा लिये गए उक्त निर्णय एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श के आलोक में श्री राम प्रसाद राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को उक्त दण्ड " "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती 2 वर्षों तक" अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------

14 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-02/2015-2595--श्री गुंजा लाल राम (आई0डी0-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान अधवारा समूह की मुख्य नदी के बाँयें तटबंध के कि0मी0 0.00 से 43.6 एवं 44.0 से 90.5 कि0मी0 तथा दाँये तटबंध के कि0मी0 0.00 से 81.5 कि0मी0 के बीच कराये गये उच्चीकरण, एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों में बरती गई अनियमितता के लिए मामले की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, पटना द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित निम्नलिखित आरोपों के लिए श्री राम, तत0 मुख्य अभियंता से विभागीय पत्रांक-2384, दिनांक 16.10.15 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।

बिना बौरो एरिया के सत्यापन/अनुमोदन एवं लीड प्लान की स्वीकृति नहीं रहने के बावजूद लगातार कार्य सम्पादित होने एवं भुगतान करने की खुली छूट दिया गया। जिसके कारण क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा नियम का उल्लंघन करते हुए मनमाने ढंग से वित्तीय अनियमितता बरती गई है। अतएव अनियमित ढंग से हुई भुगतान में उनकी सहभागिता रही है। उक्त के आलोक में श्री राम, तत0 मुख्य अभियंता द्वारा अपना स्पष्टीकरण का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसके सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1519, दिनांक 27.07.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई है। संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री राम, तत0 मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैः-

(i) स्वीकृत प्राक्कलन पर अंकित भुगतान से संबंधित निदेश। (ii) पत्रांक 3289 दिनांक 04.12.12 :-दिनांक 29.11.12 को स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण प्रतिवेदन में कार्य के कार्यान्वयन में पायी गयी खामियाँ को सुधार करने का निदेश दिया गया। कार्य प्रारंभिक दौर में था। जिसकी प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी है।

(iii) पत्रांक 316 दिनांक 31.01.13 :-पूर्व के निदेश का अनुपालन नहीं किये जाने पर अनियमितता की आशंका जतायी गयी। जिसकी प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उ0) को दी गयी।

(iv) पत्रांक 879 दिनांक 30.03.13 :-पूर्व के निदेशों का अनुपालन नहीं करने, कार्य को सुनियोजित एवं क्रमबद्ध तरीक से नहीं करने तथा गलत/भ्रामक प्रतिवेदन देने के संबंध में पत्र लिखा गया है जिससे प्री एवं पोस्ट लेवल एवं क्रॉस लेवल सेक्सन आदि में गड़बड़ी कर घोर अनियमितता की शंका जाहिर की गयी। लीड की मापी करते हुए इसकी प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को भी दी गयी है। (v) पत्रांक 1882 दिनांक 19.07.13 :-इस पत्र के अतिरिक्त विभिन्न पत्रों द्वारा याँत्रिक विधि से मिट्‌टी ढुलाई से संबंधित लीड की माँग की जाती रही है जो अप्राप्त रहा, फिर भी कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी को याँत्रिक विधि से ढुलाई की गयी मिट्टी के लीड का भुगतान नहीं करने का निदेश दिया गया। इसकी प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को भी दी गयी।

(vi) पत्रांक 1992 दिनांक 23.07.2013 ः-कार्यपालक अभियंता से पूर्व में दिये गये निदेशों का अनुपालन की माँग की गयी। परन्तु मेरे किसी भी निदेश का अनुपालन नहीं कर रहे है। इस आशय की सूचना प्रतिलिपि की माध्यम से अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी।

(vii) पत्रांक 78 दिनांक 15.01.14 :-कार्यपालक अभियंता द्वारा पूर्व में दिये गये निदेशों का अनुपालन नहीं किये जाने तथा लीड प्लान भी उपलब्ध नहीं कराये जाने पर अधीक्षण अभियंता को कार्यपालक अभियंता द्वारा किये गये भुगतान की समीक्षा कर प्रतिवेदन देने का आदेश दिया गया एवं प्रति अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी।

(viii) पत्रांक 200 दिनांक 27.01.14 :- निरीक्षण में उपस्थित सभी पदाधिकारी एवं संवेदक को लीड से लायी गयी मिट्‌टी का बौरो पिच दिखाने में असफल रहे। कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये गये निदेशों का अनुपालन नहीं किये जाने पर अधीक्षण अभियंता को प्रमंडलीय कार्यालय में जाकर विधिवत निरीक्षण कर कराये गये कार्य के विरूद्ध भुगतान की समीक्षा कर प्रतिवेदन देने का निदेश दिया गया जिसकी प्रति अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में निम्न बातें कही गई हैंः-

प्रश्नगत मामला में साढ़े चार करोड़ से अधिक की राशि की अनियमितता एवं अतिरिक्त भुगतान का आरोप है जिसके लिए भम शंकर राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता मुख्य रूप से जिम्मेवार बताये गये है। इसके अलावे अन्य गंभीर57 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 आरोप है। यह अनियमितता नहीं, सरकारी राशि का खुल्लमखुल्ला लूट है। आरोपी अभियंता के विरूद्ध विभागीय अभिमत से मैं सहमत नहीं हूँ। आरोपी अभियंता के बचाव बयान से स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता के द्वारा किये जा रहे इस भारी गड़बड़ी की जानकारी उन्हें थी। इन्होंने केवल निर्देश पत्र लिखकर कागजी खानापुर किया है। मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता के वरीय पदाधिकारी है। वरीय पदाधिकारी को गड़बड़ी का पता हो और वे रोक नहीं पाये तो यह उनके Part पर Failure है। इन्होंने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की ? उन्हें दोषी अभियंता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही तथा FIR का प्रस्ताव विभाग को भेजना चाहिए। मुख्य अभियंता ने अपने पत्र में कहा है कि उन्होंने इसकी जानकारी अभियंता प्रमुख को दिया है। अभियंता प्रमुख भी गड़बडी की जानकारी प्राप्त करने पर यदि Silent है तो वे भी जिम्मेवार हो सकते है। वरीय पदाधिकारी को अनियमितता की जानकारी हो और वे आरोपी के विरूद्ध कोई कारवाई नहीं करें तथा अवैध और अनियमित भुगतान को न रोके तो स्पष्टतः इसमें उनकी अप्रत्यक्ष सहभागिता होगी। गैर सरकारी व्यक्ति परिवाद पत्र देता है, उसकी जाँच होती है तब विभाग के स्तर के कार्रवाई होती है। अगर गैर सरकारी व्यक्ति परिवाद नहीं देता तो संभव है यह कार्रवाई भी नहीं होती। पाँच सौ, हजार रूपये की गड़बड़ी करने वाले छोटे कर्मी पर FIR होता है, जेल जाते है, नौकरी से बर्खास्त होते है। यहाँ आरोपी कार्यपालक अभियंता करोड़ों रूपये की गड़बड़ी करते रहते है, और कुछ नहीं होता। कुछ वर्षो के बाद Retire कर जाते है। सरकारी राशि की लूट हो जाती है। निर्देश देकर आरोपी मुख्य अभियंता ने केवल कागजी खानापुरी किया है। करोड़ो रूपये की अनियमित एवं अतिरिक्त राशि के भुगतान करने वालों के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई का प्रस्ताव नहीं देने से स्पष्ट है कि इस सरकारी लूट के लिए ये भी जिम्मेवार है। प्रपत्र-'क' में गठित आरोप उनके विरूद्ध पूर्णतः प्रमाणित होता है। करोड़ो रूपये के अनियमित एवं अतिरिक्त भुगतान नहीं रोकने के लिए बिल्कुल जिम्मेवार है। भ्रष्टाचारी के विरूद्ध कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारी भ्रष्टाचारी से ज्यादा दोषी हैं।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता से विभागीय पत्रांक 740, दिनांक 26.05.2017 से द्वितीय कारण पृच्छा की गई उक्त के आलोक में उनके द्वारा अपने पत्रांक-123, दिनांक 15.07.17 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :- श्री राम से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- (i) मुख्य अभियंता संबंधित विभाग एवं Executing Body के बीच की एक कड़ी है। जिसका दायित्व क्षेत्रीय स्तर पर हो रही गतिविधियों को नियंत्रण करना एवं उक्त गतिविधियों से विभाग को अवगत कराना है। सम्पादित कार्य के विरूद्ध संवेदक को किये जा रहे भुगतान से मुख्य अभियंता का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप में कोई ताल्लुक नहीं है। साक्ष्य स्वरूप लोक निर्माण विभाग संहिता का सुंसंगत पृष्ट की प्रति संलग्न।

(ii) कार्य के कार्यान्वयन का प्राक्कलन की स्वीकृति मुख्य अभियंता द्वारा प्रदान की गयी। जिसमें अधोहस्ताक्षरी मुख्य अभियंता द्वारा उल्लेख किये गये कई शर्त्तो में से एक निम्न शर्त्त उद्धित किया गया था।

"Lead for carriage of earth by mechanical means must be approved by Competent Authority" कार्यपालक अभियंता से अपेक्षा की गयी थी कि उक्त शर्त्त का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। परन्तु ऐसा नहीं हो सका। अतः उक्त शर्त्त का उल्लंघन कर अनियमित ढंग से भुगतान के लिये कार्यपालक अभियंता को दोषी माना जाना नियम संगत है। न कि मुझे।

(iii) लीड प्लान की स्वीकृति हेतु अनेकों पत्रों, निरीक्षण प्रतिवेदन, मासिक बैठक की कार्यवाही निर्गत किया गया है (छायाप्रति संलग्न)। उक्त पत्रों में अंकित मुख्य तथ्यों को उद्धित किया जा रहा है।

(क) पत्रांक 3289 दिनांक 04.12.12 :- दिनांक 29.11.12 को स्थल निरीक्षण के दौरान जो भी कमियाँ पायी गयी, सुधारने का निदेश दिया गया एवं प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख को दो गयी।

(ख) पत्रांक 316 दिनांक 30.01.2013 ः- पूर्व के निदेश का अनुपालन कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं किये जाने पर अनियमितता की शंका जतायी गयी है। जिसकी प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी। (ग) पत्रांक 879 दिनांक 30.03.13 :- पूर्व के निदेश का अनुपालन नहीं करने, कार्य को सुनियोजित एवं क्रमबद्ध तरीके से नहीं करने तथा गलत/भ्रामक प्रतिवेदन देने के संदर्भ में पत्र निर्गत किया गया। लेवल, सेक्सन आदि में गड़बड़ी घोर अनियमितता की शंका जाहिर की गयी। साथ ही लीड प्लान की माँग करते हुए प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को भी दी गयी।

(घ) पत्रांक 1882 दिनांक 19.07.13 :- द्वारा कार्यपालक अभियंता को याँत्रिक विधि से ढुलाई की गयी मिट्‌टी के लीड का भुगतान नहीं करने का निदेश दिया गया तथा प्रति अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी। (ड़) पत्रांक 1922 दि॰ 23.07.13 ः- कार्यपालक अभियंता को पूर्व के निदेशों का अनुपालन की माँग की गयी। परन्तु उनके द्वारा अनुपालन नहीं करने की सूचना प्रतिलिपि के माध्यम से अधीक्षण अभियंता एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी थी।58 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 (च) पत्रांक 78 दिनांक 15.01.14 :- से निदेश का अनुपालन नहीं करने, लीड प्लान उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में अधीक्षण अभियंता को कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये गये भुगतान की समीक्षा कर प्रतिवेदन देने का निदेश दिया गया। तथा सूचना अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी है।

(छ) पत्रांक 200 दि॰ 27.01.14 :- स्थल निरीक्षण में उपस्थित पदाधिकारी एवं संवेदक से लायी गयी मिट्‌टी का बौरो एरिया (पीट) दिखाने में असफल रहने एवं पूर्व के निरीक्षण एवं विभिन्न पत्रों द्वारा दिये गये निदेशों का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में अधीक्षण अभियंता को प्रमंडलीय कार्यालय का विधिवत निरीक्षण कर मिट्‌टी कार्य के भुगतान की समीक्षा कर प्रतिवेदन देने का निदेश दिया गया तथा प्रतिलिपि के माध्यम से इसकी सूचना अभियंता प्रमुख (उत्तर) को दी गयी।

(iv) प्रमंडल स्तर से ज्योंही एक लीड प्लान प्राप्त हुआ, अधोहस्ताक्षरी द्वारा अविलम्ब संबंधित पदाधिकारी एवं संवेदक के प्रतिनिधि के साथ स्थल किया गया तथा लीड प्लान त्रुटिपूर्ण पाये जाने पर प्रस्ताव में सुधार करते हुए उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया (प्रति संलग्न)।

(v) कार्य में बरति जा रही अनियमितताओं को नियंत्रण करने के उद्‌देश्य से उपरोक्त सारे पत्रों की प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना एवं अभियंता प्रमुख (उत्तर) को नियमित अंतराल पर प्रेषित की जाती रही। तथा कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध कारवाई करने का प्रस्ताव भी दिया गया। परन्तु विभागीय स्तर पर उदासीनता एवं अनिर्णय के कारण कार्यपालक अभियंता द्वारा निडर होकर अनियमित भुगतान (बिना लीड प्लान की स्वीकृति के मिट्‌टी ढुलाई का भुगतान) मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के निदेश का उल्लंघन करते हुए किया जाता रहा।

(vi) योजना में मिट्‌टी कार्य के लीड प्लान की स्वीकृति हेतु अथक प्रयास किये जाने के बावजूद त्रुटिरहित प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ। फलस्वरूप अधोहस्ताक्षरी द्वारा उक्त परिक्षेत्राधीन पदस्थापन अवधि तक लीड प्लान के प्रस्ताव को स्वीकृति/अस्वीकृति प्रदान नहीं की जा सकी। संबंधित कार्यपालक अभियंता द्वारा लीड प्लान की स्वीकृति के बिना ही याँत्रिक विधि से मिट्‌टी कार्य के भुगतान किया गया। जिस पर अनेकों पत्राचार के बावजूद रोक नहीं लगायी गयी । बाध्य होकर पूर्ण वस्तुस्थिति से विभाग को अवगत कराया जाता रहा। परन्तु विभाग द्वारा संज्ञान नहीं लिये जाने के कारण कार्यपालक अभियंता निडर होकर अनियमित भुगतान किया जाता रहा। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही दिनांक 31.10.2017 को श्री राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता के सेवानिवृत हो जाने के कारण इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश संख्या-139 सहज्ञापांक-2309, दिनांक 22. 12.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जिसमें निम्न तथ्य पाये गयेः- श्री राम के विरूद्ध आरोप है कि नियम के विरूद्ध बिना बौरो एरिया के सत्यापन/अनुमोदन कराये एवं लीड प्लान की स्वीकृति नहीं रहने के बावजूद लगातार कार्य सम्पादित होता रहा तथा कार्यपालक अभियंता द्वारा मनमाने ढंग से अनियमित भुगतान किया जाता रहा। जिसमें इनकी सहभागिता होने तथा प्रशासनिक विफलता से संबंधित है। आरोपी श्री गुंजालाल राम द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में वही सभी साक्ष्य दिया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है, को संलग्न करते हुए कहा गया है कि कार्य में बरति जा रही अनियमितता को नियंत्रण करने हेतु सारे पत्रों की प्रति अभियंता प्रमुख (उत्तर) के माध्यम से अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण, योजना एवं मोनिटरिंग को उपलब्ध कराया गया है। परन्तु विभागीय स्तर पर उदासीनता एवं अनिर्णय के कारण कार्यपालक अभियंता द्वारा निडर होकर अनियमित भुगतान निदेशों का उल्लंघन करते हुए किया जाता रहा। यह भी कहा गया है कि मिट्‌टी कार्य के लीड प्लान की स्वीकृति हेतु अथक प्रयास किये जाने के बावजूद त्रुटिरहित प्रस्ताव प्राप्त नहीं होने के फलस्वरूप उनके पदस्थापन अवधि तक लीड प्लान की स्वीकृति/अस्वीकृति प्रदान नहीं की जा सकी।

संचालन पदाधिकारी अपने निष्कर्ष कंडिका में आरोपी के बचाव बयान के विशलेषणोपरान्त कहा है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा किये जा रहे भारी गड़बड़ी के जानकारी इन्हें थी। इसके बावजूद इन्होंने केवल विभिन्न निदेश पत्र लिखकर कागजी खानापूर्ति की गयी है। जबकि मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता के क्षेत्रीय वरीय पदाधिकारी होते है। एवं अनियमितता की जानकारी होने बाद भी उसे रोक नहीं पाये तो यह इनका Part of Failure है। इन्हें दोषी अभियंता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही तथा FIR का प्रस्ताव विभाग को भेजना चाहिये था। आरोपी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिससे परिलक्षित हो सके कि इनके द्वारा दोषी पदाधिकारी के विरूद्ध FIR अथवा निलंबन करते हेतु एवं विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु प्रस्ताव विभाग को दिया गया है। चूँकि श्री राम द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम को अनियमित भुगतान होने में इनकी सहभागिता होने तथा प्रशासनिक विफलता से संबंधित आरोप प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत श्री राम, तत्का0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को नियम के विरूद्ध बिना बौरो एरिया के सत्यापन/अनुमोदन किये एवं लीड प्लान की स्वीकृति नहीं रहने के बावजूद लगातार कार्य सम्पादित होते रहना तथा कार्यपालक अभियंता द्वारा मनमाने ढंग से किया जा रहे अनियमित भुगतान पर रोक नहीं लगाने में इनकी प्रशासनिक विफलता से संबंधित प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। "पेंशन से 5 प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए"।59 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक-1179, दिनांक 25.05.2018 द्वारा परामर्श/सहमति की माँग की गई। जिसमें उनके द्वारा अपने पत्रांक-2090, दिनांक 02.11.2018 से प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री गुंजालाल राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत मुख्य अभियंता, B-2, विनीता विला, सिद्धार्थ नगर, पो0-वी0 भी0 कॉलेज, जगदेव पथ, पटना को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"पेंशन से 5 प्रतिशत की कटौती एक वर्ष के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

18 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(ल0सिं0)05-02/2018-2622--श्री राजवंश राय, तत्कालीन मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मधुबनी जिलान्तर्गत 50 अद्‌द उदवह सिंचाई योजनाओं के जीर्णोद्धार एवं पुनस्र्थापन कार्य में बरती अनियमितता संबंधी आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-2570, दिनांक 28.6.17 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा आरोप पत्र में वर्णित चार आरोपों में से दो आरोपों को प्रमाणित पाया गया। लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा समीक्षोपरांत लिए गए निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होकर द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

लघु जल संसाधन विभाग द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा के क्रम में यह ज्ञात होने पर कि आरोपित पदाधिकारी का पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग है, दण्ड के बिन्दु पर निर्णय लेने हेतु सभी संगत कागजात, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को प्रेषित किया गया।

श्री राजवंश राय, तत्कालीन मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर एवं अन्य संगत अभिलेखों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत निम्नलिखित तथ्य पाए गए :- आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयानः- (i) बिहार सरकार, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 3/एम॰ 15/2012-4097 दि॰ 02.07.12 के कंडिका (iv) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस मामले में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष अनुमान पर आधारित है, न कि वास्तविकता एवं प्रभावी सरकारी नियमों/परिपत्रों एवं दिशा निदेश पर आधारित है। अतः संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष आधारहीन है। (ii) कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्र सं॰ 3/R-1-108/79-20253 दि॰ 08.11.1978 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पेंशन नियमावली के 43 बी॰ में प्रावधानित निदेश के विपरीत इस मामले में सेवानिवृति के पश्चात तथा पेंशन स्वीकृति के बाद विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी है। (iii) लोक निधि के व्यय से संबंधित वित्तीय नियमावली भाग-1 के नियम 8 का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस मामले में उक्त नियम का पूर्णतः पालन किया गया है। (iv) बिहार वित्त नियमावली भाग-1 के नियम में Standards of financial propriety का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस मामले में मुख्य अभियंता के रूप में वे अपेक्षित, विवेकपूर्ण, मितव्ययिता तथा औचित्य के मानकों का पालन किया गया है। (v) बिहार वित्त नियमावली के नियम-10 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रावधानित वित्तीय ऑर्डर तथा Strict economy का अनुपालन हर कदम पर किया गया है। (vi) कंडिका 07 में पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 10360 (एस॰) दि॰ 18.09.2008 के कंडिका-3 में मुख्य अभियंता की भूमिका एवं दायित्व का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस मामले में कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति 954.96 लाख थी। जबकि तकनीकी स्वीकृति की राशि 107472735/- रूपये है। जो प्रशासनिक स्वीकृति से 12.494 प्रतिशत (विभाग के अनुसार यह 12.58 प्रतिशत) अधिक थी।

(vii) बिहार सरकार वित्त विभाग के पत्रांक 2190 वि॰ (2) दि॰ 17.03.08 में कहा गया है कि वित्त विभाग के संकल्प 96 बी॰(2) दि॰ 03.01.08 कंडिका-5 में पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति भी प्रक्रिया, पथ निर्माण विभाग के संकल्प 2676 (5) दि॰ 15.05.05 द्वारा निर्गत लोक निर्माण संहिता के नियम 123 में प्रावधान तथा मंत्रीमंडल, सचिवालय एवं समन्वय विभाग के अधिसूचना सं॰ 602 दि॰ 20.03.07 की कंडिका 7(iii) स्वीकृत परियोजना की पुनरिक्षित प्राक्कलनों की स्वीकृति में विरोधाभाष के कारण मंत्रीमंडल, सचिवालय एवं समन्वय विभाग की अधिसूचना सं॰ 602 दि॰ 20.03.07 के कंडिका 7 (iii) में दिये गये प्रावधान के आलोक में वित्त विभाग के संलल्प 96 दि॰ 3.1.08 की कंडिका-5 के प्रावधान को विलोपित किया गया है, और निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाता है। मंत्रिपरिषद अथवा सक्षम प्राधिकार द्वारा अनुमोदित योजनाओं के कार्यान्वयन के क्रम में यदि पाया जाता है कि किसी स्वीकृत60 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 योजना के मूल प्राक्कलन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभावित है। इस मामले में विभागीय आकलन के अनुसार 12.58 प्रतिशत अधिक है जो 20 प्रतिशत की सीमाधीन है। अतः इसमें विभागीय स्तर से अनुमोदन अपेक्षित नहीं है।

(viii) इस मामले में पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 4322 दि॰ 26.03.08 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस कार्य की निविदा विभाग को समर्पित की गयी थी। एवं निविदा विभाग स्तर से अनुमोदन हुआ है। इस प्रकार उक्त पत्र का अक्षरशः अनुपालन किया गया है। (ix) दरों के पुनरीक्षण की कारवाई पथ निर्माण विभाग के ज्ञापांक 4780 दि॰ 05.04.07 में निहित निदेश के कंडिका-1 के अनुपालन में अपेक्षित थी। वित्त विभाग के संकल्प 1721 वि॰ दि॰ 09.04.1991 के अनुसार पुनरीक्षित प्रशासनिक अनुमोदन के प्रत्याशा में निम्न शर्त के अधीन कार्य प्रारम्भ किया जाता है। (क) प्रावैधिक स्वीकृति इस शर्त्त के साथ दी जाय कि इस पर व्यय प्रशासकीय अनुमोदन के ऊपर अनुज्ञेय सीमा तक सीमित रहेगा।

(ख) योजना के पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर पुनरीक्षित प्रशासकिय अनुमोदन प्राप्त करने हेतु अगले वित्तीय वर्ष में 30 जून तक समर्पित कर दिया जाय। वे दिनांक 31.10.13 को सेवानिवृत के बाद 23.12.13 को की गयी मापी में कुल व्यय 977.38 लाख तक सीमित है। उनके प्रतिस्थानी पदाधिकारी पर 30.06.14 को इसे विभागीय अनुमोदन प्राप्त करने का उत्तरदायित्व था।

(xi) वित्त नियमावली के नियम 300 एवं लोक निर्माण लेखा संहिता के नियम 225 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पुनरीक्षित प्राक्कलन स्वीकृति के अभाव में दिये गये व्यय सर्वथा नियमानुकूल ही है।

(xii) बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के नियम 304 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि चालू विपत्र के माध्यम से किये गये अधिक भुगतान का समायोजन अंतिम विपत्र से किया जा सकता है।

(xiii) दिनांक 31.10.13 के सेवानिवृति के पश्चात 23.12.13 को 18वें चालू विपत्र हेतु ली गयी मापी तथा कुल 97737753/- रूपये का भुगतान हुआ है। इस भुगतान के विरूद्ध कुल 977.38x8=78.19 लाख की कटौती सुरक्षित है तथा अतिरिक्त अग्रधन के रूप में कुल 28.60 लाख जमा है। इस प्रकार कुल 106.79 लाख रूपये संवेदक का जमा है। यदि उनका निर्णय गलत था तो पुनरीक्षित प्राक्कलन 9492258/- की भरपाई कर कार्य बन्द कर सकती थी। परन्तु ऐसा नहीं कर विभाग आवंटन दे रही है एवं कार्य सम्पादित हो रहा है। (xiv) पथ निर्माण विभाग के ज्ञापांक 9133 (S) दि॰ 11.08.11 की कंडिका-5 में राज्य मंत्री परिषद द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में निम्न व्यवस्था लागू किया गया है। अन्य कार्य विभागों की तरह पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी 70.0 लाख से अधिक असीमित राशि की परियोजनाओं पर तकनीकी अनुमोदन/प्रावैद्यिकी स्वीकृति देने का अधिकार है। (xv) समय-सीमा विस्तार के संबंध में कहा गया है कि पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 1455 दि॰ 19.04.88 का प्रावधान स्पष्ट है कि जिसमें कहा गया है कि कार्यो को पूरा करने के लिये एकरारनामा में अनुबंधित सीमा विस्तार की पूर्ण शक्ति मुख्य अभियंता को दी जाती है। (xvi) कार्य पूर्ण नहीं होने के संदर्भ में कहा गया है कि 41 अदद्‌ योजनाओं का कार्य प्रारम्भ हुआ परन्तु 9 अदद्‌ योजनाओं का कार्य प्रारम्भ नहीं हो सका उसका कारण है कि 9 अदद्‌ योजनाओं में से दो योजना भारत नेपाल (No man's land) में अवस्थित है 4 योजना स्थल नदी के कटाव में वह गया एवं दो योजनाओं के नदी के रिजाईन में बदलाव होने तथा एक योजना दलित बस्ती बसाव के कारण प्रारम्भ नहीं हो सका। (xvii) निम्नलिखित कारणों से प्राक्कलन पुनरीक्षित किया गया।

(क) स्वीकृत प्राक्कलन में SS Pipe, PSC Pole, रैविट कन्डक्टर की कम मात्रा प्रावधानित होना। (ख) ह्‌यूम पाईप, NTP बाल्ब, SS सर्ज टैंक, PSSC Pole, MST Nut bolt, मोटर, 63 Kv ट्रान्सफर के दर में वृद्धि होना।

(ग) डिजल एवं मजदूरी दर में वृद्धि होना।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य आधारहीन है। अतः आरोप मुक्त करने की कृपा की जाय। विभागीय समीक्षा लघु जल संसाधन विभाग द्वारा गठित आरोप पत्र में श्री राजवंश राय, तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध कुल चार आरोप गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है। संचालन पदाधिकारी द्वारा मामले के समीक्षोपरान्त आरोप सं॰ 1 एवं 2 प्रमाणित होने तथा आरोप-3 एवं 4 को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोप-1 :- जो मधुबनी जिलान्तर्गत 50 अदद्‌ उदवह सिंचाई योजना के जिर्णोद्धार कार्य का बिहार लोक निर्माण विभाग की संहिता के कंडिका 292 (4) के विरूद्ध अपनी सक्षमता से बाहर जाकर कुल 954.96 लाख रूपये के प्रशासनिक स्वीकृति से 12.58 प्रतिशत अधिक का कुल 1074.723 लाख का तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने से संबंधित है।61 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 श्री राय द्वारा इस आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि योजना के कार्यान्वयन के लिये प्रभावी अनुसूचित दर पर प्राक्कलन तैयार कराया गया था। तत्पश्चात कुल 1074.72 लाख रूपये की व्यय की तकनीकी स्वीकृति दी गयी। इस स्वीकृति के लिये पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 9133 दिनांक 11.08.11 के अनुसार मुख्य अभियंता सक्षम पदाधिकारी थे जो प्रशासनिक स्वीकृति से 12.58 प्रतिशत अधिक है, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 9133 दिनांक 11.08.11 के कंडिका के अनुसार बिहार लोक निर्माण संहिता की कंडिका 292 के अनुरूप मुख्य अभियंता को 70.00 लाख से अधिक असिमित राशि की परियोजनाओं पर तकनीकी अनुमोदन/प्रावैद्यिक स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। यहाँ आरोप यह नही है कि आरोपी द्वारा अपनी सक्षमता से बाहर जाकर प्राक्कलन की स्वीकृति प्रदान की गयी बल्कि आरोप का मूल अंश है कि विभाग द्वारा निर्गत प्रशासनिक स्वीकृति के 12.58 प्रतिशत अधिक का तकनीकी स्वीकृति दिया गया है। अतएव इस मामले में पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 9133 दिनांक 11.08.11 का कोई कंडिका लागू नहीं होता है।

आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी का कहना कि वित्त विभाग के पत्रांक 96 दिनांक 03.01.08 की कंडिका-5 के अनुसार प्रशासनिक स्वीकृति से 10 प्रतिशत से अधिक राशि की तकनीकी स्वीकृति के पूर्व पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति अपेक्षित थी। यह उचित नहीं है क्योंकि वित्त विभाग का पत्रांक 96 दिनांक 03.01.08 की कंडिका-5 विरोधाभाषी थी इसलिए वित्त विभाग ने अपने पत्रांक 2190 दिनांक 17.03.2008 के द्वारा कंडिका 5 को विलोपित कर स्वीकृत योजना के मूल प्राक्कलन में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि तक प्राक्कलन को पुनरीक्षित नहीं करने का निर्णय प्रतिस्थापित किया गया। फलतः तकनीकी स्वीकृति की राशि प्रशासनिक स्वीकृति की राशि से 12.58 प्रतिशत है जो 20 प्रतिशत की सीमा में है इस प्रकार सक्षमता से बाहर जाकर तकनीकी स्वीकृति का आरोप निर्मूल है। वित्त विभाग के पत्रांक 2190वि॰(2) दि॰ 17.03.08 में वित्त विभाग के पत्रांक 96 दिनांक 03.01. 08 के कंडिका 5 को विलोपित करते हुए प्रावधानित किया गया है कि "मंत्रीपरिषद अथवा सक्षम प्राधिकार द्वारा अनुमोदित योजनाओं के कार्यान्वयन के क्रम में यदि किसी स्वीकृत योजना के मूल प्राक्कलन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभावित है तो ऐसी योजना के पुनरीक्षित प्राक्कलन मंत्रीपरिषद अथवा साक्ष्य प्राधिकार से पुनः अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा"।

प्रस्तुत मामले में मुख्य अभियंता द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति से 12.58 प्रतिशत अधिक की तकनीकी स्वीकृति दी गयी है। उक्त के आलोक में श्री राय का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। परन्तु पथ निर्माण विभाग द्वारा अपने पत्रांक 4322(S) दि॰ 26.03.08 में वित्त विभाग के संकल्प सं॰ 2190 दि॰ 17.03.08 का व्याख्या करते हुए आदेशित किया गया है कि जहाँ प्रशासनिक स्वीकृति से 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी हो रही हो उसे विभाग को संज्ञान में लेकर ही कार्य कराने की स्वीकृति दी जायेगी। प्रस्तुत मामले में योजना को निविदा का निष्पादन विभागीय स्तर पर होने को ही आरोपी द्वारा मामले को विभाग के संज्ञान में लाना बताया गया है जो स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। अतएव आरोप-1 प्रमाणित होता प्रतीत होता है।

आरोप-2 :- जो योजना के पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति मूल एकरारनामा के वर्णित Item Works का दर काफी बढ़ाकर दिनांक 10.10.13 को प्रदान करते हुए उसी संवेदक को पूरक एकरारनामा का आदेश दिया गया। जो बिहार लोक निर्माण संहिता के धारा 169 (VI) (I) 292 (VI) (I), 292 (XVI) (III) एवं 123 के विरूद्ध है एवं सरकार की नीति के विरूद्ध है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा मामले के समीक्षोपरान्त इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपी द्वारा वित्त विभाग के पत्रांक 1721 दि॰ 09.04.91 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वित्त विभाग से स्वीकृति की प्रत्याशा में व्यय को प्रशासनिक स्वीकृति के 20 प्रतिशत की सीमा में रखते हुए 30 जून, 2014 तक इसे सरकार को भेजने का प्रावधान है, के तहत उनके द्वारा 10.10.13 को पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी थी, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि वित्त विभाग के पत्रांक 1721 दिनांक 09.04.91 में 20 प्रतिशत की अधिसीमा का कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे भी इस आरोप का मुख्य अंश है कि मूल एकरारनामा में प्रावधानित Item of Work का दर पुनरीक्षित प्राक्कलन में काफी बढ़ाकर स्वीकृति प्रदान करते हुए पूरक एकरारनामा करने के कारण संवेदक को कुल 166.91 लाख रूपये का लाभ पहुँचाने से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच द्वारा अपने प्रतिवेदन में P.W.D. Code के विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए माना गया है कि प्रथम बार एकरारनामा हो जाने के पश्चात बिना वित्त विभाग के अनुमति के एकरारित दर जो मूल एकरारनामा में दिया गया है। उस मुख्य अभियंता को बदलने की शक्ति प्रदत्त नहीं है। इस संदर्भ में श्री राय द्वारा कोई स्पष्ट तथ्य नहीं दिया गया है। मात्र प्रथम आरोप में दिये गये तथ्य को ही दुहराया गया है। अतएव श्री राय का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है तथा आरोप-2 को संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित माना जा सकता है। इनके इस अनियमित कृत्य के कारण उड़नदस्ता द्वारा कुल 16690978/- रूपये का अनियमित भुगतान होना बताया गया है।

उपर्युक्त समीक्षा में वर्णित तथ्यों के आलोेक में एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राजवंश राय, तत्कालीन मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध दोनों आरोप सं॰ 1 एवं 2 यथा बिहार लोक निर्माण संहिता के धारा 292 (iv) के विपरीत अपने सक्षमता से बाहर जाकर योजना हेतु प्राप्त प्रशासनिक स्वीकृति की राशि से 12.58 प्रतिशत अधिक का प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति प्रदानबिहार गजट, 6 Qjojh 2019 62 किये जाने एवं बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम 163(A), 292(iv), 292(vi), 292(xvi) (iii) प्राप्त किये ही मनमाने ढंग से योजना के मूल एकरारनामा में प्राक्कलन की स्वीकृति प्रदान करते हुए पूरक एकरारनामा का आदेश दिये जाने तथा नियम के विरूद्ध समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान किया जाना, प्रमाणित पाया गया है। उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राजवंश राय, तत्कालीन मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

"शत प्रतिशत पेंशन की स्थायी कटौती"। उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मंत्री का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजवंश राय, तत्कालीन मुख्य अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"शत प्रतिशत पेंशन की स्थायी कटौती"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------

24 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि॰सि॰(दर0)-16-03/2017-2651--मो0 कलीमुल्लाह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (आई0डी0-3488) स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई कतिपय अनियमितता के संबंध में जिलाधिकारी, मधुबनी की अनुशंसा के आलोक में योजना एवं विकास विभाग की अधिसूचना सं0-4628, दिनांक 09.09.15 द्वारा निलंबित किया गया। तदोपरांत योजना एवं विकास विभाग की अधिसूचना सं0-4627, दिनांक 09.09.15 द्वारा मो0 कलीमुल्लाह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही में मामले के सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1413, दिनांक 27.06.18 द्वारा मो0 कलीमुल्लाह के विरूद्ध "पेंशन से दो वर्षों के लिए पाँच प्रतिशत की कटौती" का दण्ड अधिसूचित किया गया।

मो0 कलीमुल्लाह के निलंबन अवधि के विनियमन से संबंधित मामला सरकार के विचराधीन था। निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के अन्तर्गत मो0 कलीमुल्लाह से विभागीय पत्रांक-1527, दिनांक 18.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया।

स्पष्टीकरण की समीक्षा :-मो0 कलीमुल्लाह, तत्का0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध कार्यालय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, विकास कार्यों में उदासीनता बरतने अपने उच्चाधिकारियों को भ्रमित कर अपने गलत कार्यों को छिपाने तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के योजनाओं के कार्यान्वयन में मनमानी एवं अराजक स्थिति पैदा करने संबंधी आरोपों के लिए विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी द्वारा चार आरोपों को प्रमाणित एवं एक आरोप को अंशतः प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। उक्त के संबंध में मो0 कलीमुल्लाह द्वारा समर्पित आवेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) के सम्यक समीक्षोपरांत सक्षम प्राधिकार द्वारा "पेंशन से दो वर्षों के लिए पाँच प्रतिशत तक कटौती" का दण्ड संसूचित किया गया। इस प्रकार प्रमाणित हुआ कि मो0 कलीमुल्लाह का निलंबन औचित्यपूर्ण था। उक्त तथ्य के आलोक में मो0 कलीमुल्लाह से प्राप्त आवेदन पत्र को अस्वीकृत करते हुए निलंबन अवधि को निम्नरूपेण विनियमित करने का निर्णय लिया गया :-

"निलंबन अवधि (दिनांक 09.09.15 से दिनांक 29.02.16 तक) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा निलंबन अवधि को पेंशन प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि नही मानी जाएगी।"

सरकार का उक्त निर्णय मो0 कलीमुल्लाह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-02, झंझारपुर (मधुबनी) सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

------ 31 दिसम्बर 2018 सं0 22/नि॰सि॰(बिहा0)-28-09/2018-2704--श्री राम प्रवेश पासवान (आई0डी0-4599), सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल-2, उदेरास्थान द्वारा विभागीय आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए स्पष्टीकरण किया गया था। जिसके अप्राप्त रहने की स्थिति में सम्यक विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 के तहत आदेश की निर्गत तिथि से निलंबित किया जाता है। 2. श्री राम प्रवेश पासवान को निलंबन अवधि में अस्थायी मुख्यालय, मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी निर्धारित किया जाता है। 3. श्री राम प्रवेश पासवान को निलंबन अवधि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान नियमानुसार देय होगा। 4. उक्त आदेश पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।63 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019

31 दिसम्बर 2018

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-09/2017-2705--श्री रामानुज प्रसाद सिन्हा, (आई0डी0-जे0-8810) तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल में नालंदा जिला अन्तर्गत नव नालंदा बिहार स्थित इन्द्रपुरायकरणी तालाब का जीर्णोद्वारा कार्य के कार्यान्वयन में अनियमितता बरतने का निम्न आरोप गठित कर ग्रामीा कर्या विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या-1209, सह पठित ज्ञापांक-1210, दिनांक-06.04.16 द्वारा बिहार सरकाहरी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14 एवं 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोपः- 1. जिला पदाधिकारी, नालंदा द्वारा राष्ट्रीय सम विकास योजना अन्तर्गत सिलाव प्रखंड स्थित नव नालंदा महाविहार स्थित इन्द्र पुरापकरणी तालाब का जीर्णोद्वार कार्य को दिनांक-28.02.2007 से बंद करने का आदेश के बावजूद आपके द्वारा जिला पदाधिकारी, नालंदा के आदेश की अनदेखी करते हुए द्वितीय विपत्र में तदेन कनीय अभियंता द्वारा की गई प्रविष्टि का दिनांक-11.06.2007 के सत्यापन कर दायित्व का सृजन करने में सहयोग किया गया, जिसके लिए आप दोषी है। आरोपः-2. तदेन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कर्या विभाग, कार्य प्रमंडल-2, बिहार शरीफ के पत्रांक-909, दिनांक-8.12.08 द्वारा जिला मतस्य पदाधिकारी, नालंदा से तालाब के जीर्णोद्वार हेतु तालाब का पनी सुखाने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग की गई। जिससे यह स्पष्ट होता है कि दिनांक-08.12.08 तक तलाब में पानी ीारा हुआ था। ऐसी स्थिति में तालाब से मिट्टी कटाई का कार्य किया जाना संभव नहीं है। इसके बावजूद भी आपके द्वारा जिला पदाधिकारी, नालंदा के पत्र की अनदेखी करते हुए द्वितीय विपत्र में की गई प्रविष्टि का सत्यापन किया गया, जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते है। उक्त आरोपा के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन मे श्री रामानुज प्रसाद सिन्हा पर अधिरोपित दोनों आरोपों को अप्रमाणित माना गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री रामानुज प्रसाद सिन्हा पर अधिरोपित दोनों आरोपों का अप्रमाणित माना गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय पत्रांक-2049, दिनांक-23.11.2017 द्वारा ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना का मंतव्य उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया। जिसके आलोक हमें ग्रामीण कार्य विभाग का पत्रांक-1943, दिनांक-01.08.18 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। जिसमें श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-1 एवं 2 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अप्रमाणित माना गया है। इस प्रकार ग्रामीण कार्य विभाग से प्राप्त मंतव्य के आलोक मे श्री रामानुज प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता के उपर कोई आरोप प्रमाणित नहीं होता है। अतएव श्री रामानुज प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2 बिहार शरीफ को आरोप से मुक्त करने का प्रस्ताव है। उक्त प्रस्ताव पर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

अतः श्री रामानुज प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, गा्रमीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, बिहारशरीफ को ''आरोपों से मुक्त'' करने का आदेश संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 46—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 6 Qjojh 2019 64

भाग-2

बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। —————

गृह विभाग

(आरक्षी शाखा)

-------

(शुद्धि-पत्र)

30 जनवरी 2019

सं0 1/पी05-10-03/2008 खण्ड-I गृ0आ0-952--श्री गणेश कुमार, भा0पु0से0 (2000) को पुलिस उप-महानिरीक्षक की कोटि में प्रोफॉर्मा प्रोन्नति के संबंध में निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-929, दिनांक-29.01.2019 की प्रतिलिपि में श्री कुमार के बैच (2000) के स्थान पर टंकण भूलवश (2010) अंकित हो गया है। अतः तद्‌नुसार शुद्ध पढ़ा एवं समझा जाय। उक्त अधिसूचना की शेष बातें यथावत रहेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 46—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in65 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। —————

सूचना --------

No. 143--I, Manindra Chandra Saha S/O Late Satish Chandra Saha R/O Vivekanand Colony Patna- 800009 declare Vide Affd No. -2520 Dated 09/04/18 sworn before Executive Magistrate that Manindra Chandra Saha and Manindar Chandra are the names of same and single Person who is me.

Manindra Chandra Saha.

--------

No. 144--I, Mala Prasad w/o Sri Sanjaya Kumar, R/o Vill-Sri Rampur, PO&P.S. Bihta, Distt-Patna. Vide Affidavit no. 112 dated 19.12.18 shall be known as Mala Kumar for all future purpose.

Mala Prasad.

--------

No. 149--I, Vinay Kumar Singh S/O Late Vishwanath Singh, R/O Village+P.O.–Pilkhi Gajpatti, P.S.- Sakra, Muzaffarpur declared that my son Neel Kamal Father's name has corrected as VINAY KUMAR SINGH vide affidavit No. 21340 dated 21/07/2018.

Vinay Kumar Singh.

--------

No. 150--I, Sanjay Kumar, Flat No-301, Moti Mansion Aptt. P.O. Lohia Nagar, P.S.-Kankarbagh, Patna-20 declare that vide Afd. No. 28891 dated 22.12.18 my son name spelling wrongly written in his school record is Aditya Narayan Tiwari and his correct name spelling is Aditya Narayan Tiwary.

Sanjay Kumar.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 46—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 6 Qjojh 2019 66

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

—————

सं0 एल/एच॰जी॰-14-23/2017-1168

गृह विभाग

(विषेष शाखा)

------

संकल्प

31 जनवरी 2019

श्री मनोज कुमार नट, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, अररिया के विरूद्ध दिनांक-06.03.2017 से 09.03. 2017 तक बिना अवकाश स्वीकृत कराये कैम्प कार्यालय, मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना से प्रस्थान करने एवं मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के वरीय अधिकारियों पर अनावश्यक आरोप लगाने से संबंधित आरोप प्रपत्र-क में मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के पत्रांक-2864, दिनांक- 02.08.2017 के द्वारा विभाग को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के पत्रांक-1953, दिनांक-01.06.2017 द्वारा श्री नट को आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया था।

2. आरोपित द्वारा स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने की स्थिति में बिहार गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय, पटना द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में श्री नट के विरूद्ध गठित आरोप प्रपत्र-'क' की बृहद्‌ जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8485, दिनांक-20.09.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही आरंभ की गई। इस हेतु श्री ईष्वरचंद्र सिन्हा, संयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेषक, अभियोजन निदेषालय, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, मुख्यालय, पटना को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1096, दिनाक-16.10.2017 एवं पत्रांक-1136, दिनांक-25.10.2017 द्वारा श्री नट से प्रपत्र 'क' के सबंध मे अपना लिखित अभिकथन/बचाव-बयान समर्पित करने का निदेश दिया गया।

4. संयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेषक, अभियोजन निदेषालय, बिहार, पटना-सह- संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-749, दिनांक-04.05.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें सभी आरोपों को प्रमाणित बताया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति विभागीय पत्रांक-5566, दिनांक-19.06.2018 द्वारा श्री नट को भेजते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-18(4) के तहत लिखित अभ्यावेदन की मांग की गई।

5. बिहार गृह रक्षा वाहिनी मुख्यालय, पटना के पत्रांक-4010, दिनांक-17.09.2018 के माध्यम से उपरोक्त के प्रसंग में श्री नट द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-शून्य, दिनांक-02.09.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन पर समर्पित लिखित अभ्यावेदन प्राप्त हुआ।

6. प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि आरोपी द्वारा कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है, जिसकी जाँच की जाय।

7. अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री मनोज कुमार नट, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, अररिया को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि रोकने का दंड संसूचित की जाती है।

आदेश :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, उमेश प्रसाद रजक, अवर सचिव।67 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सं0 (cid:356)ा0वि0-14(मु ं0)लखी0-01/2019-408332

(cid:356)ामीण कवािस कवभाग -----------

संकल्प

25 जनवरी 2019

(cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल, (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, रामग़ढ़ चौक, लखीसराय के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, लखीसराय के प(cid:361)ांक-39 दिनांक 16.01.2019 के (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त (cid:352)आ। आरोप प(cid:361) म(cid:336) (cid:373)ी अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) अपने पद एवं अधिकार का दु(cid:349)पयोग करने, अपने पद दायित्वों को आधार बनाकर निजी लाभ की राशि प्राप्त करने, जन (cid:366)तिनिधि के लिए बनाऐ गये नियम के (cid:366)तिकू ल आचरण करने, विभागीय आदेशों का उल् लंघन करने एवं विभागीय दायित्वों को मनमाने ढंग से करने, उच्चाधिकारी को गलत सूचना संसूचित करने तथा अपने उच्चाधिकारी पर गलत आरोप लगाकर (cid:407)े(cid:361)ाधिकार से बाहर काय(cid:330) करने संबंधी आरोप धा(cid:303)रत है।

जिला पदाधिकारी के (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोपों की समी(cid:407)ा की गयी । समी(cid:407)ोपरांत यह पाया गया कि आरोप प(cid:361) म(cid:336) अपने दायित्वों को आधार बनाकर निजी लाभ की राशि प्राप्त करने से संबंधित गंभीर आरोप (cid:366)तिवेदित है। अत: (cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल को निल(cid:304)(cid:646)त कर उनके वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने का निण(cid:330)य लिया जाता है।

अत: बिहार सरकारी सेवक (वग(cid:334)करण, नियं(cid:361)ण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) के (cid:366)ावधानों के तहत (cid:373)ी अ(cid:356)वाल को अगले आदेश तक निलंबित किया जाता है।

(cid:373)ी अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही के संचालन हेतु (cid:373)ी राजेश प(cid:303)रमल, उप सचिव, (cid:356)ामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नामित किया जाता है एवं जिला पदाधिकारी, लखीसराय (cid:554)ारा नामित जिला स्तर के पदाधिकारी उपस्थापन पदाधिकारी होंगे।

निलंबन की अवधि म(cid:336) (cid:373)ी अ(cid:356)वाल का मुख्यालय (cid:366)खंड काया(cid:330)लय, पटना सदर, पटना निधा(cid:330)(cid:303)रत किया जाता है।

निलंबन की अवधि म(cid:336) (cid:373)ी अ(cid:356)वाल को बिहार सरकारी सेवक (वग(cid:334)करण, नियं(cid:361)ण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के तहत अनुमान्य जीवन निवा(cid:330)ह भ(cid:517)ा दे य होगा।

उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। (cid:373)ी अ(cid:356)वाल से यह अपे(cid:407)ा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध म(cid:336) अपना प(cid:407) रखते (cid:352)ए जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति द(cid:336), उनके सम(cid:407) स्वयं उप(cid:304)(cid:830)थत होंगे। आदे:- आदे कदया जाता है कि संल्पि ीि (cid:366)कत कबहार राजप(cid:361) ेि अगले अंि म(cid:336) (cid:366)ािकत कयिा जाय तथा इसीि (cid:366)कत सभी सम्ब(cid:304)(cid:576)त र्ोि भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राधा र्कोिर झा, संयुक्त सचिव। सं0 (cid:356)ा0वि0-14(मु

------- ं0)खग0-02/2017-408324

-----------

संकल्प

25 जनवरी 2019

(cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बाराहाट, बाँका के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, बाँका के प(cid:361)ांक- 143 दिनांक- 27.02.2018 एवं प(cid:361)ांक- 03 दिनांक- 05.01.2019 के (cid:554)ारा दो आरोप प(cid:361) प्राप्त (cid:352)आ। दोनों आरोप प(cid:361) म(cid:336) (cid:373)ी अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) उच्चाधिकारी के साथ अभ(cid:363) एवं अमया(cid:330)दित व्यवहार करने, राज्यस्तरीय एम0आई0एस0 टीम (cid:554)ारा आयोजित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (cid:366)शि(cid:407)ण काय(cid:330)शाला म(cid:336) हंगामा कर बाधित करने, काय(cid:330)शाला का बहिष्कार करने, उच्चाधिकारी को धमकी दे ने एवं आदेश की अवहेलना करने तथा विभागीय नियम के वि(cid:349)(cid:544) अपने प्रतिस्थानी को (cid:366)भार सौंपने के उपरांत भी लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की राशि का भुगतान करने से संबंधित आरोप (cid:366)तिवेदित किया गया है। जिला पदाधिकारी बाँका के प(cid:361)ांक- 143 दिनांक- 27.02.2018 (cid:554)ारा (cid:373)ी अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) प्राप्त आरोप प(cid:361) पर उनका स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया।

जिला पदाधिकारी के (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोपों एवं (cid:373)ी अ(cid:356)वाल से प्राप्त स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत (cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने का निण(cid:330)य लिया जाता है।बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 68 (cid:373)ी अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही के संचालन हेतु (cid:373)ी अनुराग कौशल सिंह, उप सचिव, (cid:356)ामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नामित किया जाता है एवं जिला पदाधिकारी, बॉंका (cid:554)ारा नामित जिला स्तर के पदाधिकारी उपस्थापन पदाधिकारी होंगे।

(cid:373)ी अ(cid:356)वाल से यह अपे(cid:407)ा की जाती है कि वे अपने बचाव के सम्बन्ध म(cid:336) अपना प(cid:407) रखते (cid:352)ए जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति द(cid:336), उनके सम(cid:407) स् वयं उप(cid:304)(cid:830)थत होंगे। आदे:- आदे कदया जाता है कि संकल्प ीि (cid:366)कत कबहार राजप(cid:361) ेि अगले अंि म(cid:336) (cid:366)ािकत कयिा जाय तथा इसीि (cid:366)कत सभी सम्बन्धित र्ोि भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राधा र्कोिर झा, संयुक्त सचिव।

------- सं0 (cid:356)ा0वि0-14(कोशी)मधेपुरा-05/2018-408875/(cid:356)ा0वि0 -----------

संकल्प

29 जनवरी 2019

(cid:373)ी गोपाल कृष्णन, (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, फारबिसगंज, अर(cid:303)रया के वि(cid:349)(cid:544) बिहार राज्य निवा(cid:330)चन (cid:366)ाधिकार के प(cid:361)ांक- 867 दिनांक- 28.08.2018 के (cid:554)ारा विहित (cid:366)प(cid:361) 'क' म(cid:336) आरोप गठित कर विभागीय काय(cid:330)वाही की अनुशंसा सहित उपलब्ध कराया गया जिसम(cid:336) मुख्यतः पिछड़ा वग(cid:330) महिला को सामान्य वग(cid:330) म(cid:336) स्थानान्तरित करना, साम(cid:356)ी/बैलेट पेपर/दण्डाधिकारी एवं पुलिस बल की (cid:366)तिनियु(cid:304)(cid:389) एवं निवा(cid:330)चन से संबंधित अन्य व्यय का अपव्यय एवं दु(cid:349)पयोग एवं बिहार सरकारी सेवा आचार नियमावली-1976 के (cid:366)तिकू ल आचरण होने का आरोप (cid:366)तिवेदित है।

उक्त आरोपों पर निवा(cid:330)चन (cid:366)ाधिकार (cid:554)ारा (cid:373)ी गोपाल कृष्णन से स्पष्टीकरण की माँग की गयी एवं (cid:366)ाप्त स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, अर(cid:303)रया से मंतव्य प्राप्त किया गया। बिहार राज्य निवा(cid:330)चन (cid:366)ाधिकार के (cid:554)ारा आरोप प(cid:361), अरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकरी के मंतव्य के समी(cid:407)ोपरांत (cid:373)ी गोपाल कृष्णन के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने की अनुशंसा की गयी।

उक्त के आलोक म(cid:336) सम्यक् विचारोपरांत (cid:373)ी गोपाल कृ ष्णन, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, फरबिसगंज, अर(cid:303)रया के वि(cid:349)(cid:544) गठित आरोपों की गहन जाँच हेतु विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने का निण(cid:330)य लिया जाता है।

(cid:373)ी गोपाल कृष्णन के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही के संचालन हेतु (cid:373)ी अनुराग कौशल सिंह, उप सचिव, (cid:356)ामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नामित किया जाता है एवं जिला पदाधिकारी, अर(cid:303)रया (cid:554)ारा नामित जिला स्तर के पदाधिकारी उपस्थापन पदाधिकारी होंगे।

(cid:373)ी गोपाल कृष्णन से यह अपे(cid:407)ा की जाती है कि वे अपने बचाव के सम्बन्ध म(cid:336) अपना प(cid:407) रखते (cid:352)ए जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति द(cid:336), उनके सम(cid:407) स्वयं उप(cid:304)(cid:830)थत होंगे। आदे:-इस संकल्प ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि भेज कदया जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राधा र्कोिर झा, संयुक्त सचिव।

------- सं0 (cid:356)ा0वि0-14(सा0)गो0 -02/2018-406286 -----------

संकल्प

15 जनवरी 2019

(cid:373)ी (cid:778)(िcid:700) पाठक, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, कु चायकोट सम्(cid:366)ति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, टेटिया ँगेर के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के प(cid:361)ांक- 988/पं0 दिनांक- 08.08.2018 (cid:554)ारा पंचायत आम बम्बर, मु निवा(cid:330)चन 2006 का नामांकन प(cid:361) आथि(cid:330)क अपराध इकाई, बिहार को उपलब्ध नहीं कराने, बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 म(cid:336) वणि(cid:330)त (cid:366)ावधानों का उल्लंघन कर पंचायत आम निवा(cid:330)चन 2006 के नामांकन प(cid:361)ों के विनष्टीकरण के आरोप म(cid:336) आरोप (cid:366)प(cid:361) गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।

(cid:373)ी (cid:778)(िcid:700) पाठक के वि(cid:349)(cid:544) आरोपों पर उनके प(cid:361)ांक 886 दिनांक 10.09.2018 से (cid:366)ाप् त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के प(cid:361)ांक 1366/पं0 दिनांक 01.10.2018 (cid:554)ारा (cid:366)ाप् त मंतव् य की विभाग (cid:554)ारा समी(cid:407)ा की गई। समी(cid:407)ोपरांत वृहत जॉंच हेतु बिहार सरकारी संवक (वग(cid:334)करण, नियं(cid:361)ण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम- 17(2) म(cid:336) निहित रीति से (cid:373)ी पाठक के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने का निण(cid:330)य लिया गया है।69 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 (cid:373)ी पाठक के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने के लिए (cid:373)ी अनुराग कौशल सिंह, उप सचिव, (cid:356)ामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज (cid:554)ारा नामित पदाधिकारी को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक् त किया जाता है।

(cid:373)ी पाठक से यह अपे(cid:407)ा की जाती है कि वे अपने बचाव के सम्बन्ध म(cid:336) अपना प(cid:407) रखते (cid:352)ए जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति द(cid:336), उनके सम(cid:407) स् वयं उप(cid:304)(cid:830)थत होंगे। आदे:- आदे कदया जाता है कि संल्पि ीि (cid:366)कत कबहार राजप(cid:361) ेि अगले अंि म(cid:336) (cid:366)ािकत कयिा जाय तथा इसीि (cid:366)कत सभी सम्ब(cid:304)(cid:576)त र्ोि भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राधा र्कोिर झा, संयुक्त सचिव।

------- सं0 08/न्या0-05-16/2018 सा0प्र0-16994 सामान्य प्रशासन विभाग ------- संकल्प 26 दिसम्बर 2018 स्व॰ वीरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, बि॰प्र॰से॰, तत्कालीन उप सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, बिहार, पटना को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की अधिसूचना संख्या-9890 दिनांक 28.11.1997 द्वारा अपने पद से स्थानान्तरित करते हुए उप विकास आयुक्त, कैमुर (भभूआ) के पद पर पदस्थापित किया गया। उक्त स्थानान्तरण आदेश का अनुपालन किये बिना उन्होंने उप विकास आयुक्त, भोजपुर के इच्छित पदस्थापन हेतु माननीय मुख्यमंत्री के जाली हस्ताक्षर से एक वृतादेश का पत्र कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग में दिनांक 26.06.1998 को प्रस्तुत किया, जिसे जांचोपरांत पूर्णतः जाली पाया गया। श्रीवास्तव के उक्त जालसाजी पूर्ण कार्य के लिये सचिवालय थाना में कांड संख्या-357/98 दिनांक 28.08.1998 दर्ज हुआ। इस क्रम में ये हिरासत में लिये गये एवं विभागीय आदेश संख्या-7165 दिनांक 03.07.1998 द्वारा उन्हें हिरासत अवधि के लिए निलंबित किया गया। कालांतर में विभागीय आदेश संख्या-1101 दिनांक 06.02.1999 द्वारा अगले आदेश तक निलंबित करते हुए उक्त कृत्य में निहित आरोपों की जांच हेतु संकल्प ज्ञापांक 4763 दिनांक 11.06.1999 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय आदेश संख्या-943 दिनांक 02.02.2000 द्वारा उन्हें सेवानिवृति की तिथि (दिनांक 31.12.1999) के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन (पत्रांक 342 दिनांक 25.06.2003) के आलोक में पत्रांक 1189 दिनांक 10.02.2004 के द्वारा उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। इस क्रम में प्राप्त स्पष्टीकरण में कोई नया तथ्य नहीं पाया गया। तत्पश्चात सम्यक विचारोपरांत पत्रांक 9996 दिनांक 16.11.2004 द्वारा आरोपों की प्रमाणिकता के आलोक में 25 प्रतिशत पेंशन एवं उपादान की कटौती का निर्णय संसूचित किया गया। इस क्रम में अंतिम निर्णय फौजदारी मुकदमें के फैसले पर आधारित होने का तथ्य भी अंकित किया गया। उक्त दंडादेश के विरूद्ध उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय में रीट याचिका सी0डब्ल्यूम0जे0सी0 संख्या-1157/2005 दायर किया। कालान्तर में वादी (वीरेन्द्र कुमार, बि॰प्र॰से॰) की मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नी (श्रीमती मंजू श्रीवास्तव) उक्त रिट याचिका से संबद्ध हो गयी। उक्त याचिका की सुनवाई के उपरांत दिनांक 23.08.2018 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया। न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत हैः- "For the reasons mentioned herein above as also having regard to the facts and circumstances of the present case, this Count has no option but to quash the order of punishment dated 16.11.2004 on the ground that the second show cause notice dated 10.02.2004 is illegal in view of the law laid down by the Hon'ble Apex Court in the case of Yoginath D. Bagde (supra), whereby and where under the disciplinary authority was first required to grant an opportunity to the petitioner to place his defence with regard to difference of opinion of the disciplinary authority with the Enquiry Officer and then in case if the disciplinary authority still did not find favour with the petitioner, it was supposed to then issue a show cause to the petitioner seeking reply to the punishment proposed to be inflicted. However, in the instant case the disciplinary authority appears to have already made up its mind for inflicting the punishment, hence the same was proposed in the second show cause notice itself which is contrary to the Jaw of the land. For the reasons stated hereinabove, the order of punishment dated 16.11.2004 is quashed. The writ petition is allowed with a direction to the authorities to give the consequential reliefs to the petitioner herein by way of refund of the amount of pensionबिहार गजट, 6 Qjojh 2019 70 and gratuity recovered from the petitioner as a result of the passing of the punishment order dated I6.11.2004." वस्तुतः वादी की मृत्यु हो जाने के कारण एल॰पी॰ए॰ दाखिल नहीं किया जा सकता है, अतः सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या-1157/2005 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23.08.2018 को पारित आदेश के आलोक में वादी (स्व॰ श्रीवास्तव) को संसूचित दंडादेश संबंधी विभागीय पत्रांक 9996 दिनांक 16.11.2004 को अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। अतएव सम्यक विचारोपरांत स्व॰ वीरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, बि॰प्र॰से॰, तत्कालीन उप सचिव, स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9996 दिनांक 16.11.2004 द्वारा संसूचित दंड वापस लिया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

------- सं0 08/आरोप-01-61/2016 सा0प्र0-16000 ------- संकल्प 7 दिसम्बर 2018 श्री निरोज कुमार भगत, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-779/11 तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, बेतिया सम्प्रति संयुक्त सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध अपने पदस्थापन काल (दिनांक 21. 01.2016 से दिनांक 03.07.2017) में राजस्व क्षति का आरोप महालेखाकार, बिहार, पटना के पत्र सं॰-MVT (Review)/17 एवं 18 दिनांक 04.05.2016 द्वारा उठायी गयी आपत्तियों से उजागर हुआ। जिला स्तर पर इस संबंध में बेतिया थाना कांड सं॰-235/16 दिनांक 11.05.2016 दर्ज हुआ। इस क्रम में परिवहन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1545 दिनांक 27. 03. 2017 से प्राप्त आरोप, प्रपत्र-'क' के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-7781 दिनांक 28.06.2017 द्वारा श्री भगत से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री भगत से प्राप्त स्पष्टीकरण (दिनांक 22.08.2017) की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षा के क्रम में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा वृहद जांच कराने का निर्णय लिया गया।उक्त के क्रम मे विभागीय सकंल्प ज्ञापांक 1013 दिनांक 19.01.2018 द्वारा श्री भगत के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. विभागीय जांच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 649 दिनांक 01.08.2018 से प्राप्त जांच प्रतिवेदन में श्री भगत पर प्रतिवेदित सभी आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित बताया गया। प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक 11467 दिनांक 27.08.2018 द्वारा श्री भगत से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री भगत द्वारा अपना लिखित अभिकथन (दिनांक 10.09.2018) विभाग में समर्पित किया गया। श्री भगत द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन को अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। 3. श्री भगत के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं प्राप्त स्पष्टीकरण तथा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की पूर्ण समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गई तथा प्रमाणित आरोपों के लिये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एव अपील) नियमावली के नियम-14 के संगत प्रवधानों के तहत्‌ निम्न शास्तियां अधिरोपित/संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन तथा (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

------- सं0 08/ नि॰था॰-11-02/2018, सा0प्र0-16538 ------- संकल्प 19 दिसम्बर 2018 श्री ओम प्रकाश प्रसाद, बि॰प्र॰से॰ (कोटि क्रमांक-499/11) अपर समाहर्त्ता, बेगूसराय को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 17.11.2018 को 6,00,000/- (छः लाख) रूपया रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर आर्दश केन्द्रीय कारा, बेउर, पटना भेजे जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं॰-049/2018, दिनांक 16.11.2018 धारा-7(a) भ्र॰नि॰अधि॰,1988 दर्ज होने की सूचना निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो) बिहार, पटना के पत्रांक-3738 दिनांक 23.11.2018 द्वारा उपलब्ध कराते हुए अग्रेत्तर कार्रवाई की अनुशंसा की गयी।71 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (1) (क) एवं (ग) तथा नियम-9 (2) में निहित प्रावधानों के तहत श्री ओम प्रकाश प्रसाद, अपर समाहर्त्ता, बेगूसराय को न्यायिक हिरासत की तिथि (दिनांक 17.11.2018) के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता। 2. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

------- सं0 08/ नि॰था॰-11-08/2017, सा0प्र0-15873 ------- संकल्प 5 दिसम्बर 2018 भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, पीरो, भोजपुर के पदस्थापन काल में श्री प्रभाष कुमार, बि॰प्र॰से॰ (कोटि क्रमांक-894/11) को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 14.06.2017 को 20,000 (बीस हजार) रूपया रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं॰-44/17, दिनांक 14.06.2017 दर्ज होने की सूचना निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो) बिहार, पटना के ज्ञापांक-1650 दिनांक 20.06.2017 द्वारा उपलब्ध कराते हुए अग्रेत्तर कार्रवाई की अनुशंसा की गयी, जिसके आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8300 दिनांक 07.07.2017 द्वारा दिनांक 14.06.2017 (हिरासत की तिथि) के प्रभाव से अगले आदेश तक उन्हे निलंबित किया गया। कालान्तर में श्री कुमार जमानत पर रिहा होकर दिनांक 22.08.2017 को अपने निर्धारित मुख्यालय (आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना) में योगदान किया साथ ही उन्होंने निलंबन मुक्त करते हुए पदस्थापन करने का अनुरोध (पत्रांक 01-कैम्प पटना दिनांक 29.01.2018) विभाग में समर्पित किया। इसके पश्चात उक्त निलंबन आदेश के विरूद्ध श्री कुमार ने माननीय उच्च न्यायालय, पटना एक रिट याचिका दायर किया। एतद्‌ संबंधी सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-3465/2018 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 13.09.2018 को सम्पन्न सुनवाई में निर्गत निलंबनादेश (विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8300 दिनांक 07.07. 2017) को त्रूटिपूर्ण होने संबंधी टिप्पणी करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया गया जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :- "In such view of the matter, this writ petition is allowed . Accordingly, the order of suspension containing memo no. 8300 dated 07.07.2017 is quashed." 2. अतएव न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8300 दिनांक 07.07.2017 को निरस्त किया जाता है। 3. श्री कुमार प्रासंगिक अपराधिक मामले में दिनांक 14.06.2017 से 21.06.2017 तक काराधीन थे। अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(2)(क) के प्रावधान के आलोक में उक्त कारावास अवधि में निलंबित समझे जाएगे, जिसका विनियमन संबंधित अपराधिक मामले के अंतिम निष्पादन के उपरांत तद्‌ालोक में किया जाएगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

------- सं0 08/ नि॰था॰-11-08/2017, सा0 प्र0-15885 ------- संकल्प 5 दिसम्बर 2018 श्री प्रभाष कुमार, बि॰प्र॰से॰ (कोटि क्रमांक-894/11), तात्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, पीरो, भोजपुर को निगरानी धावा दल द्वारा दिनांक 14.06.2017 को 20,000 (बीस हजार) रूपया रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं॰-44/17, दिनांक 14.06.2017 दर्ज होने की सूचना निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो) बिहार, पटना के ज्ञापांक-1650 दिनांक 20.06.2017 द्वारा उपलब्ध करायी गयी, जिसके आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-8300 दिनांक 07.07.2017 द्वारा दिनांक 14.06.2017 (न्यायिक हिरासत की तिथि) के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए श्री कुमार को निलंबित किया गया। उक्त निलंबनादेश के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 स0 3564/18 दायर किया गया। उक्त सी0डब्लू0जे0सी0 मेंं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15873 दिनांक 05.12.2018 द्वारा उनके निलंबन आदेश(पत्रांक 8300 दिनांक 07.07.2017) को निरस्त किया गया। 2. श्री कुमार के विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड सं0 44/17 दिनांक 14.06.2017 के संबंध में विधि विभाग, बिहार,पटना के आदेश सं0 152 दिनांक 11.08.2017 द्वारा इनके विरूद्व अभियोजन की स्वीकृति दी जा चूकी है। मामले की72 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए जिला पदाधिकारी, भोजपुर के पत्रांक 306 दिनांक 22.02.2018 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरेाप पत्र के आलोक में विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 5525 दिनांक 24.04.2018 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गई। इस क्रम में श्री कुमार का स्पष्टीकरण (पत्रांक 02 कैम्प दिनांक 25.06.2018) प्राप्त हुआ। आरोप पत्र एवं स्पष्टीकरण की समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा इस मामले में वृहद जांच की आवश्यकता पायी गई, जिसके फलस्वरूप श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13539 दिनांक 09.10.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित है। अतएव वर्णित स्थिति में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1)(क) में निहित संगत प्रावधानों के आलोक में श्री प्रभाष कुमार, बि0प्र0से0 कोटि क्रमांक-894/2011 को संकल्प निर्गत की तिथि से निलंबित किया जाता है। (i)निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल निधारित किया जाता है। (ii)निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 तहत अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

-------

सं0 08/आरोप-01-86/2015,सा॰प्र॰-15959

-------

संकल्प

6 दिसम्बर 2018

पदस्थापन काल में क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर स्वत्व के मुद्‌दे पर निर्णय देने, आयुक्त न्यायालय के निर्णय के बाद भी व्यक्ति विशेष को फायदा पहुँचने के लिए गलत निर्देश निर्गत करने, कार्यालय में डाटा इन्ट्री ऑपरेटर रहते हुए भी दैनिक मजदूर से आदेश लिखवाने एवं गैर मजरूआ भूमि पर आवेदक के दखल कब्जा को बरकरार रखने का आदेश देने संबंधी आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, शेखपुरा के पत्रांक-486 दिनांक 01.06.2015 एवं पत्रांक-567 दिनांक 24.06.2015 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप-पत्र 'क'/पूरक आरोप प्रपत्र 'क' अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ।

उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप-पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-7390 दिनांक 25.05.2016 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण (दिनांक 27.04.2017) की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-1316 दिनांक 19.01.2019 द्वारा जिला पदाधिकारी, शेखपुरा सेे मंतव्य की माँग की गयी। उक्त के आलोक में जिला पदाधिकारी, शेखपुरा के पत्रांक-301 दिनांक 11.06.2018 द्वारा प्राप्त मंतव्य में श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं होने का मंतव्य दिया गया।

वर्णित स्थिति में सम्यक्‌ विचारोपरांत जिला पदाधिकारी, शेखपुर से प्राप्त मंतव्य तथा आरोप की गम्भीरता को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत मामले की वृहत जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, शेखपुरा द्वारा नामित वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

श्री प्रसाद से अपेक्षा की जाती है वे अपने बचाव बयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दे, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।73 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 सं0 08/आरोप-01-282/2014 सा॰प्र॰-12591 ------- संकल्प 19 सितम्बर 2018 चूँकि बिहार राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री संजीव जमुआर, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-952/11) भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, अरवल के विरूद्ध राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-719 दिनांक 07.08.2013 (समाहर्त्ता, अरवल का पत्रांक-545 दिनांक 13.07.2013 आरोप पत्र सहित) द्वारा श्री जमुआर पर विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा के साथ प्राप्त हुआ। श्री जमुआर के विरूद्ध अरवल जिला अन्तर्गत अरवल प्रखंड के वासिलपुर मौजा के राजस्व कर्मचारी श्री मुन्द्रिका पासवान के साथ मिलकर मोटी रकम लेकर डिमान्ड में छेड़-छाड़ करते हुए आपराधिक षड्‌यंत्र के तहत श्री विश्वनाथ गुप्ता साकिन रामजयपाल नगर, गोला रोड, दानापुर एवं उनके भाईयों के नाम से कायम जमाबन्दियों में छेड़-छाड़ कर उसी भूमि की जमाबन्दी अरूण कुमार भारती एवं उनकी पत्नी श्रीमती लालमनी भारती के नाम से डिमान्ड कायम करने संबंधी आरोप है, जैसा कि अनुलग्नक आरोप-पत्र में वर्णित है। 2. जिला पदाधिकारी, अरवल द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि श्री जमुआर के विरूद्ध लगाये गये उक्त आरोपों की जाँच अपर समाहर्त्ता, अरवल से करायी गयी। जाँच में उनके उपर लगाये गये सभी आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाये जाने तथा गम्भीर प्र—ति के होने के फलस्वरूप श्री जमुआर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करने की अनुशंसा की गयी। 3. अतएव बिहार राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री जमुआर के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की सांगोपांग जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, अरवल द्वारा मनोनीत वरीय पदाधिकारी होंगे। 4. श्री जमुआर से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हो। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

------- सं0 08/आरोप-01-83/2017,सा॰प्र॰-12113 ------- संकल्प 10 सितम्बर 2018 श्री वीरेन्द्र कुमार, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-1432/11, तत्कालीन परीक्ष्यमान उप समाहर्त्ता, मुंगेर सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, नवादा सदर के विरूद्ध केन्द्रीय परीक्षा समिति, राजस्व पर्षद्‌, बिहार, पटना द्वारा आयोजित राजपत्रित पदाधिकारियों की द्वितीय अर्द्धवार्षिक परीक्षा-2011 में दिनांक 02.02.2012 को कदाचार के लिए निष्कासित किया गया। एतद्‌संबंधी आरोप पर कार्रवाई हेतु राजस्व पर्षद्‌, बिहार, पटना के पत्रांक-173 दिनांक 21.02.2012 द्वारा आरोप, प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया। विभागीय पत्रांक-3647 दिनांक 06.03.2012 द्वारा आरोपित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण माँगी गयी, जिसके अनुपालन में उन्होंने स्पष्टीकरण दिनांक 26.03.2012 समर्पित किया। सम्यक्‌ विचारोपरांत आरोपों की वृहत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रंण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 17 (2) के प्रावधानों के तहत सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-15516, दिनांक 09.11.2012 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित बताया गया। तदुपरांत विभागीय पत्रांक-14799 दिनांक 22.11.2017 के क्रम में श्री कुमार का लिखित अभिकथन/अभ्यावेदन (दिनांक 07.12.2017) प्राप्त हुआ। जिसमें उन्होंने स्वयं के विरूद्ध लगाये गये कदाचार के आरोपों का प्रतिकार करते हुए यह उल्लेख किया कि वीक्षक की अनुमति से वे प्रसाधन उपयोग हेतु गये थे। वापस आने पर उनके टेबुल पर पुस्तक पाये जाने के कारण कदाचार के लिए उन्हें निष्कासित कर दिया गया। जबकि आरोप, जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार के लिखित अभिकथन/स्पष्टीकरण की समीक्षा में यह पाया गया कि विभागीय परीक्षा में कदाचार करते हुए पकड़े जाने के समय ही उत्तर पुस्तिका पर निष्कासन संबंधी प्रविष्टि अंकित कर उन्हें अन्य विषयों की परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया था। इस आलोक में श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दंड यथा, (i) 03 वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं (ii) 03 वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक (प्रोन्नति देयता की तिथि से), पर विभागीय पत्रांक-3853 दिनांक 20.03.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति माँगी गयी। आयोग के पत्रांक-1273 दिनांक 03.08.2018 द्वारा उक्त विनिश्चित दंड को अनुपातिक नहीं बताया गया। इसके पश्चात्‌ विभागीय स्तर पर पुनः सुसंगत अभिलेख (आरोप पत्र, जाँच प्रतिवेदन एवं स्पष्टीकरण) की समीक्षा की गयी। इस आधार पर यह पाया गया की आयोग द्वारा संदर्भित विनिश्चित दंड को अनुपातिक नहीं बताये जाने का कोई कारण नहीं दर्शाया गया है। जबकि जाँच प्रतिवेदन में साक्ष्य और प्रतिपरीक्षण के आलोक में श्री कुमार के विरूद्ध कदाचार का आरोप प्रमाणित बताया गया है। परीक्षा कक्ष में राजस्व पर्षद के तत्कालीन सचिव द्वारा उक्त कदाचार के लिए संबंधित वीक्षक को कार्रवाई का निदेश भी दिया गया था, जिसके आधार पर आरोपित पदाधिकारी की उत्तर पुस्तिका पर निष्कासन संबंधी74 बिहार गजट, 6 Qjojh 2019 प्रविष्टि अंकित की गयी तथा वे अन्य विषयों की परीक्षा से वंचित कर दिये गये। इस प्रकार श्री कुमार के विरूद्ध कदाचार से संबंधित गम्भीर प्र—ति के आरोप प्रमाणित एवं विनिश्चित दंड को औचित्यपूर्ण पाये जाने के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्श को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री वीरेन्द्र कुमार, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-1432/11 को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 में प्रावधानित निम्नलिखित शास्ति, अधिरोपित एवं संसूचित की जाती है :- (i) तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव रोक, (ii) तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक (प्रोन्नति देयता की तिथि से) आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 46—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 06 February 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-02-06.6/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-02-06.6.