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संकल्प
12 फरवरी 2019
श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण अंचल, गया (अतिरिक्त प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता (नागरिक), लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना द्वारा लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, नवादा के हरदिया ग्रामीण जलापूर्त्ति योजनान्तर्गत 20 हजार गैलन क्षमता के जलमीनार के निर्माण कार्य हेतु आमंत्रित निविदा में अपने पद एवं शक्ति का दुरूपयोग करते हुए लोक निर्माण विभाग संहिता के प्रावधानों के विपरीत अपनी प्रदत्त शक्ति से बाहर जाकर निविदा का निष्पादन किया गया, जिससे राज्य सरकार को `4.74450 लाख (चार लाख चौहत्तर हजार चार सौ पचास) मात्र की वित्तीय क्षति पहुँची। 2. उपर्युक्त अरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक-512, दिनांक-10.09.2012 द्वारा श्री श्रीवास्तव से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के कारण विभागीय पत्रांक-665 दिनांक-26.11.2012, पत्रांक-342 दिनांक-02.07.2013 तथा अर्द्ध सरकारी पत्रांक-409 दिनांक-30.08.2013 द्वारा उन्हें स्मारित भी किया गया। इसके बावजूद श्री श्रीवास्तव द्वारा कोई स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। फलतः श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध अभिकथित आरोपों के लिए आरोप प्रपत्र 'क' गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत विभागीय संकल्प संख्या-461, दिनांक-30.09.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी। आरोपित पदाधिकारी के दिनांक-30.09.2013 को सेवानिवृत्त होने के पश्चात् उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश संख्या-501, दिनांक-13.06.2018 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित की गयी।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 15151515 फरफरफरफरवर(cid:15)वर(cid:15)वर(cid:15)वर(cid:15) 2019201920192019 3. विभागीय कार्यवाही के संचालनार्थ जाँच संचालन पदाधिकारी विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को नियुक्त किया गया। विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा दिनांक-11.11.2013 को पारित आदेश में अत्याधिक कार्यबोझ के कारण उक्त विभागीय कार्यवाही को अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को हस्तांतरित किया गया।
4. अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-71, दिनांक-03.05.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया, जिसमें श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध गठित दोनों आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-503, दिनांक-13. 06.2018 द्वारा आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय कारणपृच्छा संबंधी लिखित अभिकथन की मांग हेतु उक्त पत्र स्पीड-पोस्ट एवं विशेषदूत के माध्यम से आरोपित पदाधिकारी को उनके निवास के पते पर प्रेषित किया गया, किन्तु फ्लैट बंद रहने के कारण पत्र का तामिला नहीं हो सका। द्वितीय कारणपृच्छा संबंधी पत्र का तामिला नहीं होने के कारण विभागीय पत्रांक-631, दिनांक-09.07.2018 द्वारा निदेशक, सूचना एवं जन संपर्क विभाग से प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करने हेतु अनुरोध किया गया। उक्त प्रेस विज्ञप्ति दिनांक-14.07.2018 को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ। इसके बावजूद भी आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा संबंधी विभागीय पत्र-503, दिनांक-13.06.2018 विभाग से निर्धारित अवधि के अन्दर प्राप्त नहीं किया गया।
5. आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय कारणपृच्छा संबंधी लिखित अभिकथन अप्राप्त रहने के कारण जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी से राज्य सरकार को हुई `4,74,450.00 की वित्तीय क्षति की वसूली एवं बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के पेंशन से 30% (प्रतिशत) राशि की पाँच वर्षों तक कटौती का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया तथा उक्त पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त करते हुए पेंशन से कटौती संबंधी दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से विभागीय पत्रांक-1259, दिनांक-31.10.2018 द्वारा परामर्श उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो॰-3-13/2018(2884)/लो॰से॰आ॰, दिनांक-28.01.2019 द्वारा पेंशन से 30% राशि की पाँच वर्षों तक कटौती संबंधी विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी।
6. वर्णित परिपे्रक्ष्य में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्व बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता हैः-
• पाँच वर्षों तक 30% (प्रतिशत) पेंशन की कटौती।
7. साथ ही श्री श्रीवास्तव को आदेश दिया जाता है कि वित्तीय क्षति की राशि ````4,74,450.00 (रूपये चार लाख चौहत्तर हजार चार सौ पचास मात्र) राजकोष में एक पक्ष के अंदर शीर्ष R0215011040003 में जमा किया जाय।
8. यदि निर्धारित अवधि में श्री श्रीवास्तव द्वारा उक्त राशि राजकोष में जमा नहीं किया जाता है, तो राशि की वसूली उनके पेंशन/देय पावनाओं/बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम के तहत की जायेगी। 9. उपर्युक्त दण्ड पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदेशः आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र मिश्र,
अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव।