िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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वित्त विभाग के संकल्प संख्या-14303, दिनांक 22.12.2010 द्वारा दिनांक 02.09.2008 या उसके बाद सेवानिवृत होने वाले न्यायिक पदाधिकारी के लिए 33 वर्ष की अर्हक सेवा के बदले 20 वर्ष की सेवा पूर्ण पेंशन हेतु निर्धारित की गयी। 20 वर्ष से कम किन्तु 10 वर्ष से अधिक सेवा होने पर अनुपातिक रूप में कम करके पेंशन अनुमान्य किया गया है।
2. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायादेश के आलोक में संकल्प संख्या-14303, दिनांक 22.12.2010 की कंडिका-3(i) एवं 3(iii) में समेकित संशोधन संकल्प संख्या-11859, दिनांक 28.12.2011 के द्वारा पूर्ण पेंशन हेतु 33 वर्षों की अर्हक सेवा को दिनांक 01.01.2006 या उसके बाद सेवानिवृत्त होनेवाले न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों के लिए दिनांक 01.01.2006 से समाप्त करते हुये यह प्रावधान किया गया कि-
"पूर्ण पेंशन के लिए 33 वर्षों की अर्हक सेवा की शर्त्त को दिनांक 01 जनवरी, 2006 के प्रभाव से समाप्त कर दिया जाय। दिनांक 01 जनवरी, 2006 के प्रभाव से अथवा उसके बाद सेवानिवृत्त हो चुके/होेने वाले न्यायिक सेवा के पदाधिकारी का पेंशन पिछले 10 महीनों के दौरान प्राप्त औसत परिलब्धियों पर अथवा अंतिम परिलब्धि इनमें से उसके लिए जो ज्यादा लाभकारी हो, के आधार पर 50 प्रतिशत पेंशन परिकलित किया जाय।"2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 28282828 फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) फरवर(cid:15) 2019201920192019 3. वित्त विभागीय संकल्प संख्या-1529, दिनांक 11.02.2019 के द्वारा राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया कि पूर्ण पेंशन के लिए संकल्प संख्या-11859, दिनांक 28.12.2011 के प्रावधान के साथ यह स्पष्ट किया जाता है कि पूर्ण पेंशन के लिए संकल्प संख्या-14303, दिनांक 22.12.2010 के द्वारा विहित अर्हक सेवा के लिए 20 वर्षों की सेवा अनिवार्य है। 20 वर्ष से कम किन्तु 10 वर्ष से अधिक सेवा होने पर आनुपातिक रूप से पेंशन परिकलित किया जायेगा।
4. वित्त विभागीय परिपत्र संख्या-10412, दिनांक 10.10.1975 तथा पी॰सी॰-11-40-30-76-3042, दिनांक 20.03.1976 के द्वारा सेवानिवृत जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, जो 'बार' (वकीलों में से) सीधी नियुक्त हुये हैं, को वास्तविक पेंशन प्रदायी सेवा में निम्नांकित अतिक्ति वर्ष जोड़ने का प्रावधान हैः-
(i) सरकारी सेवा में नियुक्ति की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से जितनी अधिक आयु में नियुक्ति हुई थी, उतनी अवधि
या
(ii) 5 वर्ष जो भी कम हो ।
उपर्युक्त सुविधा सिर्फ वार्धक्य पेंशन के लिए ही अनुमान्य है, दूसरे किसी प्रकार के पेंशन के लिए नहीं। उपर्युक्त लाभ के लिए आवश्यक होगा कि सेवा से मुक्त होते समय कम से कम 10 (दस) वर्ष की स्थायी सेवा पूर्ण हो।
5. वर्ष 1975 एवं 1976 के कथित संकल्प/परिपत्र की संपुष्टि के बिन्दु पर सामान्य प्रशासन विभाग एवं महालेखाकार, बिहार द्वारा वित्त विभाग से अनुरोध किया गया है । लेकिन वर्ष 1975 एवं 1976 के उक्त संकल्प/परिपत्र बिहार पेंशन नियमावली की अद्यतन पुस्तिका में मुद्रित नहीं है और न ही वित्त विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग/महालेखाकार (ले॰ एवं हक॰) कार्यालय/उच्च न्यायालय (स्थापना) में कोई अभिलेख उपलब्ध हो सका जो इन पत्रों को सम्पुष्ट कर सके। तत्पश्चात् इस समस्या के निराकरणार्थ सामान्य प्रशासन विभाग एवं विधि विभाग का भी परामर्श प्राप्त किया गया ।
6. सामान्य प्रशासन विभाग एवं विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में सम्यक् विचारोपरांत राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि वर्ष 1997 एवं 2003 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर 'बार' से सीधे नियुक्त को वास्तविक पेंशन प्रदायी सेवा में निम्नांकित अतिक्ति वर्ष जोड़कर पेंशन की गणना की जायेगीः-
(i) सरकारी सेवा में नियुक्ति की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से जितनी अधिक आयु में नियुक्ति हुई थी, उतनी अवधि
या
(ii) 5 वर्ष जो भी कम हो । उपर्युक्त सुविधा सिर्फ वार्धक्य पेंशन के लिए ही अनुमान्य है, दूसरे किसी प्रकार के पेंशन के लिए नहीं। उपर्युक्त लाभ के लिए आवश्यक होगा कि सेवा से मुक्त होते समय कम से कम 10 (दस) वर्ष की स्थायी सेवा पूर्ण हो।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के आगामी असाधारण अंक में सर्वसाधारण के सूचनार्थ प्रकाशित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राहुल सिंह, सचिव (व्यय)।