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श्री शषि भूषण सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 692/08, तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिषी के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक 487 दिनांक 13.12.2000 द्वारा रोकड़ पंजी का संधारण नहीं करने/स्थानान्तरण के बावजूद भूतलक्षी प्रभाव से आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका की नियुक्ति करने/सरकार के नियमो, विभागीय अनुदेषों एवं अपने उच्च पदाधिकारियों के आदेषों का उल्लंधन करने एवं विाीय गबन का आरोप प्रतिवेदित किया गया।
2. प्रतिवेदित आरोपों के लिए कार्मिक, प्रषासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड द्वारा श्री सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संकल्प संख्या 1648 दिनांक 08.03.2002 द्वारा संचालित की गयी। राज्य विभाजन के फलस्वरूप श्री सिंह का अंतिम आवंटन बिहार राज्य होने के कारण विभागीय संकल्प संख्या 4722 दिनांक 11.07.2003 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी जिसमें प्रमंडलीय आयुक्त, सहरसा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित पाया गया। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 6 6 6 6 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 4. उक्त दंड के विरूद्ध श्री शषि भूषण सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित की गयी। पुनर्विलोकन अर्जी में श्री सिंह द्वारा कोई नया तथ्य या साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किये जाने की स्थिति में मामले की समीक्षा के उपरांत श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वी—त करते हुए दंड को बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
5. श्री सिंह द्वारा अनिवार्य सेवानिवृाि के दंडादेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका सी0डब्लू0जी0सी0 संख्या 11012/2010 दायर की गयी। उक्त याचिका में दिनांक 15.11.2011 को आदेष पारित करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 05.08.2010 के विभागीय आदेष को निरस्त कर दिया गया तथा आवेदक के पुनर्विलोकन अर्जी के आलोक में नये सिरे से तार्किक एवं मुखर आदेष पारित करने का निदेष दिया गया। उक्त क्रम में श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक विचारोपरांत यह पाया गया कि श्री सिंह द्वारा कोई भी नया तथ्य नहीं दिया गया है एवं श्री सिंह के विरूद्ध गंभीर प्रकृति के आरोप है। फलतः विभागीय आदेश ज्ञापांक 4924 दिनांक 02.04.2012 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी अस्वीकृत करते हुए पूर्व में निरूपित अनिवार्य सेवानिवृति के दंड को बरकरार रखा गया।
CWJC NO:-11868/2012 में दिनांक 26.04.2019 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः- '' In such view of the matter, the order of the Disciplinary Authority dated 25-03- 2009 as well as the order of the Revisional Authority dated 02-04-2012 including the Inquiry report dated 18-08-2005 are set aside. The matter is remanded back to the competent authority for fresh inquiry. If the respondents initiate fresh inquiry, that should be completed within six months from the date of initiation of fresh inquiry. The rider of six months will only be appliable in the event the petitioner would extednd cooperation in the early disposal of the inquiry proceeding . Any consequentioal benefit will be subject to result of the inquiry proceeding''
7. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा उक्त पारित न्यायादेश के आलोक में सम्यक विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2265 दिनांक 25.03.2009 एवं आदेश सह ज्ञापांक 4924 दिनांक 02.04.2012 को वापस लिया जाता है तथा परिणामी लाभ विभागीय कार्यवाही के फलाफल पर निर्भर करेगा। साथ ही श्री सिंह के विरूद्ध आरोपाें की पुनः नये सिरे से अग्रेत्तर जांच हेतु मुख्य जांच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, सहरसा द्वारा नामित कोई वरीय पदाधिकारी इस मामले में उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी होगे। 8. यह मामला माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से आच्छादित है, जिसमें छः माह के अन्दर विभागीय कार्यवाही को पूरा करने का आदेश है। 9. श्री सिंह से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, सरकार के अवर सचिव।