िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत
4 भ(cid:4)(cid:19) 1(cid:21)41 (cid:22)श(cid:23)(cid:24)
((((स(cid:25)(cid:23) पटन(cid:4) (cid:21)(cid:28)(cid:23)) ) ) ) पटन(cid:4)(cid:29) सोमवारसोमवारसोमवारसोमवार(cid:29) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 जल संसाधन विभाग ——— अधिसूचना 18 मार्च 2019
सं॰ 22/नि॰सि॰(वि0)-1020/90(अंश-1) 581—मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डाल्टेनगंज के अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों में वर्ष 1987-88 में सोडियम भैपर लैम्प एवं चौक्स की खरीदगी में बरती गई गंभीर अनियमितताओं के लिए मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग द्वारा निगरानी थाना में दायर मुकदमा सं0-51/90 में श्री के0सी0 प्रधान (कृष्ण चन्द्र प्रधान) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता यांत्रिक प्रमंडल मंडल (पलामू) को धारा-420/467/468/471/477/477(ए॰)/120बी0/109 भा0द0वि0 एवं धारा 5(2) सहपठित धारा-5(1) डी0भ्र0नि0 अधि0 का संज्ञेय अभियुक्त बनाये जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश सं0-18 दिनांक 08.02.1991 के द्वारा निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2138 दिनांक 07.10.1991 द्वारा सिविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई :- इनके विरूद्ध मुख्य रूप से निम्न आरोप गठित किये गये :- (क) जब वे यांत्रिक प्रमंडल मंडल, पलामू में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थें तो 200 अद्द सोडियम भैपर लैम्प 250 वाट के चौक्स आपातिक खरीद के लिए आपातिक स्थिति की पृष्ठभूमि तैयार कर साजिशपूर्वक मनमाने ढंग से सिमित निविदा के आधार पर मनचाहे फर्म से काफी अधिक कीमत पर समानों की खरीदगी के लिए आपातिक व्यादेश बनाना।
(ख) उपर्युक्त आपातिक व्यादेश पर निदेशक, क्रय एवं परिवहन के पत्र सं0-25/परि0-5-302/88 दिनांक 24.03.88 द्वारा मे0 स्कायी मास्टर सिनेमा रोड, हाजीपुर से जमानत की राशि जमाकर आपूर्ति का आदेश दिया गया। इस आदेश के साथ आपूर्ति किये जाने वाले समानों की सूची, कीमत एवं शर्तो की सूची संलग्न थी।
(ग) संलग्न शर्तो में यह बात निहित थी कि आपूर्तिर्काा किसी भी प्रकार का भुगतान का दावा करने के पहले संबंधित फर्म का अद्यतन बिक्री कर एवं इनकम टैक्स क्लिियरेन्स सर्टिफिकेट, भुगतानर्काा पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगें। भुगतान के पूर्व सप्लायर से उपरोक्त कागजात जानबूझ कर आपके द्वारा प्राप्त नहीं किया गया। अगर वह ऐसा करते तो फिश्टिसस व्यक्ति श्री पी0के0 सिंह को भुगतान करना उनके लिए संभव नहीं होता।
(घ) उनके द्वारा बैंक ड्राफ्ट पर भुगतानर्काा मे0 स्कायी मास्टर लिखा गया परन्तु जानबुझकर एवं साजिशपूर्वक इस फर्म का पता सिनेमा रोड हाजीपुर नहीं लिखा गया और बाद में साजिश के तहत2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 इसे हाजीपुर के बदले पेबुल ऐट पटना कराया गया। उपर्युक्त सभी अनियमितताओं के लिए वह दोषी पाये गये।
संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया जिसमें इनके विरूद्ध निम्नांकित कारणों से आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया।
(क) प्रायः व्यादेशित मात्रा के मुताबिक सामान कम ही मिल पाता है। ऐसी स्थिति मे कार्यपालक अभियंता के द्वारा प्रेषित व्यादेश कोई विषम परिस्थिति पैदा नहीं करती है तथा इसमें साजिश की कोई बात नहीं दिखती। यह आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
(ख) श्री प्रधान द्वारा आपूर्तिर्काा से भुगतान के पूर्व बिक्रीकर एवं आयकर मुक्त प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया गया था।
(ग) श्री प्रधान ने एकाउन्ट पेयी बैंक ड्राफ्ट मे0 स्कायी मास्टर के नाम दिया। चेक या बैंक ड्राफ्ट में सिर्फ पेयी का नाम ही देने का प्रचलन है। ड्राफ्ट बनवाने वाले का पूरा पता रहता है। एकाउन्ट पेयी चेक या ड्राफ्ट उसी के एकाउन्ट में जमा होगा चाहे वे किसी जगह पेयबुल हो इसमें साजिश की कोई बात नहीं है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1966 दिनांक 06.07.1996 द्वारा जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। उनसे प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत उक्त आरोप प्रमाणित पाये गये। तदोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-3075 दिनांक 22.09.1997 द्वारा इन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
(क) 1,60,000/- रूपये (एक लाख साठ हजार रूपये मात्र) की वसूली जो उनके वेतन से पाँच हजार रूपये प्रति माह की दर से प्रत्येक माह की जायेगी। अगर सेवा अवधि में उक्त राशि की वसूली नहीं हो पाती है तो उनके सेवानिवृति के उपरांत शेष राशि की वसूली देय उपादन एवं पावनाओं से एक मुश्त की जायेगी।
(ख) निलंबन अवधि में उन्हें जीवन-यापन भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। परन्तु उक्त अवधि पेंशन के प्रयोजनार्थ गणना की जाएगी।
दण्डादेश के विरूद्ध श्री प्रधान सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता द्वारा CWJC सं0-7535/98 दायर किया गया जिसमें न्याय निर्णय पारित कर दण्डादेश सं0-3075 दिनांक 22.09.97 को निरस्त कर दिया गया। विभाग द्वारा उक्त न्याय निर्णय के विरूद्ध एल0पी0ए0 सं0-98/2000 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 09.10.2000 को न्याय निर्णय पारित करते हुए विभाग को जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा कर निर्णय लेने का आदेश पारित किया गया। उक्त न्याय निर्णय के अनुपालन में श्री प्रधान से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1282 दिनांक 04.10.2002 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-
(1) 1,60,000/- रू0 (एक लाख साठ हजार रूपये मात्र) की वसूली जो उनके वेतन से पाँच हजार रूपये प्रति माह दर से प्रत्येक माह की जायेगी। अगर सेवा अवधि में उक्त राशि की वसूली नहीं हो पाती है तो उनके सेवानिवृति के उपरांत शेष राशि की वसूली देय उपादन एवं पावनाओं से एक मुश्त की जायेगी।
(2) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, लेकिन इसकी गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जाएगी।
उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री प्रधान द्वारा पुनः याचिका CWJC सं0-10530/03 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 26.09.2003 को माननीय न्यायालय के द्वारा उक्त दण्डादेश दिनांक 04.10.2002 को निरस्त कर दिया गया एवं एल0पी0ए0 सं0-98/2000 में पारित न्याय निर्णय के आलोक में पुनः कार्रवाई करने का आदेश पारित किया गया। जिसके अनुपालन मे विभागीय पत्रांक-667 दिनांक 03.09.2004 द्वारा श्री प्रधान से पुनः द्वितीय कारण पृच्छा की गई :-
श्री प्रधान द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया। प्राप्त जवाब के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-406 दिनांक 02.05.2005 द्वारा पूर्व में संसूचित दण्ड को बरकरार रखने का आदेश निर्गत किया गया।
श्री प्रधान द्वारा उक्त विभागीय दण्डादेश दिनांक 02.05.2005 के विरूद्ध पुनः याचिका CWJC No-8469/05 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 01.07.2011 को न्याय निर्णय पारित करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा कहा गया कि उक्त दण्डादेश निर्गत करने में पुनः गलती की गयी है। दण्डादेश में वादी के द्वारा किये गये अनियमितता का उल्लेख किया गया है लेकिन वादी द्वारा समर्पित जवाब को अस्वीकार करने के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दण्डादेश दिनांक 02.05.2005 को निरस्त करते हुए नया आदेश निर्गत करने का आदेश पारित किया गया, जिसके अनुपालन में श्री प्रधान से विभागीय पत्रांक-1609 दिनांक 27.12.11 द्वारा दिनांक 02.01.12 को विभाग में उपस्थित होकर पक्ष रखने का अनुरोध किया गया। उनके द्वारा दिनांक-02.01.12 को उपस्थित होकर पक्ष रखा गया। सुनवाई के दौरान उन्हें निगरानी थाना में दायर मुकदमा सं0-51/90 में माननीय व्यवहार न्यायालय द्वारा गठित आरोप की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया। उक्त निदेश के आलोक में श्री प्रधान द्वारा दिनांक 20.01.12 को माननीय व्यवहार न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय निर्णय की छायाप्रति प्राप्त करायी गई।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 उक्त न्याय निर्णय के आलोक में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। पाया गया कि विभागीय पत्रांक-667 दिनांक 03.09.04 द्वारा श्री प्रधान से निम्नांकित असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी :-
जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु :- (क) संचालन पदाधिकारी द्वारा विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखों को नजरंदाज कर जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया।
(ख) श्री प्रधान द्वारा प्रक्रियाओं का बिना अनुपालन किए ही आपातिक व्यादेश दिनांक 11.11.87 दिया गया।
(ग) श्री प्रधान को भंडार में चौक्स उपलब्ध रहने की पूर्ण जानकारी रहने के बावजूद उनके द्वारा चौक्स के क्रय हेतु आपातिक व्यादेश दिया गया, जो जरूरी नहीं था।
अभिलेखों से ज्ञात होता है कि मे0 स्कायी मास्टर के प्रोप्राइटर श्री इशरार अहमद खान द्वारा सब इन्सपेक्टर कैबिनेट भिजिलेंस को आवेदन देते हुए कहा गया है कि इनके तरफ से निविदा नहीं भरा गया है। उस निविदा पर ओम प्रकाश का हस्ताक्षर है उसे वे नहीं जानते है लेकिन श्री प्रधान द्वारा एक योजना के तहत फर्जी व्यक्ति से सामग्रियों की प्राप्ति की गयी एवं उसे भुगतान किया गया।
(घ) उनके उक्त कृत्य के लिए उनके विरूद्ध भिजिलेंस केस सं0-51/90 दिनांक-16.11.90 दायर की गयी।
(ड.) श्री प्रधान द्वारा उँचे दर पर व्यक्तिगत लाभ के लिए 5,50,295/- रूपये की चौक्स की खरीदगी की गयी।
(च) श्री प्रधान द्वारा जाली व्यक्ति श्री ओम प्रकाश से सामग्री प्राप्त की गई एवं उसे 5,50,295/- रूपये का बैंक ड्राफ्ट पेबुल ऐट पटना द्वारा भुगतान किया गया जो मे0 स्कायी मास्टर सिनेमा रोड, हाजीपुर का प्रोप्राइटर नहीं था। बैंक ड्राफ्ट को पेबुल ऐट पटना करके बैंक ड्राफ्ट निर्गत करने के कुकृत्य से प्रमाणित होता है कि वे कार्य के प्रति इमानदार नहीं थें।
(छ) श्री प्रधान द्वारा अप्रील 1988 में 200 सोडियम भैपर लैम्प की चौक्स की खरीदगी की गयी। लेकिन दिनांक 30.12.88 तक मात्र एक चौक का उपयोग किया गया तथा दिनांक 12.10.90 तक मात्र 54 चौक्स का उपयोग किया गया। शेष सभी चौक्स भंडार में पडे हुए थे जिससे स्पष्ट है कि 200 चौक्स की खरीदगी की आवश्यकता नहीं थी।
(ज) अभिलेखों से ज्ञात होता है कि वर्ष 1988 में चौक्स का बाजार मूल्य 800/- रूपये प्रति चौक था, लेकिन श्री प्रधान द्वारा वर्ष 1988 में 2500/- रूपये प्रति चौक की दर से निजी लाभ के लिए 200 चौक्स की खरीदगी की गयी जिससे सरकार को भारी क्षति हुई।
श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर दिनांक 20.
09.04 में मुख्य रूप से निम्न तथ्य कही गयी है :-
जब वे नार्थ कोयल मेकेनिकल डिविजन मंडल पलामू में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब बांध निर्माण कार्यों के लिए एवं कॉलोनियों के लिए उनके पत्रांक-1696 दिनांक 11.11.87 द्वारा 200 अद्द सोडियम भैपर लैम्प के चौक्स की खरीदगी हेतु आपत्ति व्यादेश अधीक्षण अभियंता मंडल के प्रतिहस्ताक्षर के उपरांत उनके पत्रांक-1560, दिनांक 27.11.87 द्वारा निदेशक क्रय एवं परिवहन जल संसाधन विभाग, बिहार को एक माह के अन्दर आपूर्ति करने हेतु भेजा गया। निदेशक क्रय एवं परिवहन द्वारा आपूर्तिकर्ता एवं दर का निर्धारण किया गया एवं लगभग साढे चार माह बाद अप्रील 1988 में सामग्रियों को प्राप्त कराया गया। इस मामले में सारी प्रक्रियाओं को पालन निदेशक क्रय एवं परिवहन जल संसाधन विभाग द्वारा किया जाना था। इसके लिए वे संबंधित नहीं है उक्त बातों के अतिरिक्त श्री प्रधान द्वारा असहमति के बिन्दु का बिन्दुवार उत्तर दिया गया जो निम्न है -
(1) विभाग द्वारा आरोप सिद्ध करने हेतु जाँच पदाधिकारी को कोई अभिलेख प्राप्त नहीं कराया गया, बल्कि वे ही आरोप के जवाब दिनांक 13.11.91 के साथ अभिलेख जाँच पदाधिकारी को प्राप्त कराये थे।
(2) जैसाकि उक्त वर्णित है, सारी प्रक्रियाओं के पालन करते हुए दिनांक 11.11.87 का व्यादेश भेजा गया। (3) व्यादेश भेजने के समय भंडार में एक भी चौक उपलब्ध नहीं था।
उनके द्वारा खरीदगी का आदेश नहीं दिया गया। यह सभी कार्रवाई सचिवालय स्तर पर निदेशक क्रय एवं परिवहन सिंचाई विभाग द्वारा की गयी। क्षेत्रीय पदाधिकारी होने के कारण खरीदगी की प्रक्रिया उनसे संबंधित नहीं है।
(4) यह सही है कि 14 अन्य व्यक्तियों के साथ उनके विरूद्ध निगरानी केस सं0-51/90 दिनांक 16.11.90 रजिस्टर्ड की गयी।
(5) यह सही नहीं है कि 5,50,295/- रूपये के उँची दर पर चौक्स उनके द्वारा खरीदगी की गयी। परचेज आर्डर निदेशक, क्रय एवं परिवहन, जल संसाधन विभाग बिहार द्वारा दी गयी।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 (6) मे0 स्कायी मास्टर, हाजीपुर द्वारा सामग्रियों को कार्यपालक अभियंता नार्थ कोयल मेकेनिकल डिविजन मंडल के नाम से बुक किया गया। सामग्रियों को साइट पर उनके द्वारा प्राप्त किया गया। यह बिल्कुल गलत है कि बैंक ड्राफ्ट ओम प्रकाश के नाम से तैयार किया गया।
यह सही है कि मेसर्स स्कायी मास्टर पेबुल ऐट हाजीपुर के पक्ष में बैंक ड्राफ्ट सं0-383542 दिनांक 19.04.88 तैयार कर उन्हें दिया गया। कुछ दिनों के बाद उनके अनुरोध पर उक्त बैंक ड्राफ्ट को कैंसिल करते हुए दूसरा बैंक ड्राफ्ट सं0-522070 दिनांक 2.5.88 मे0 स्कायी मास्टर पेबुल ऐट पटना बनाकर उन्हें प्राप्त कराया गया।
| क्र0 | स्थल की विवरणी | प्रस्तावित/कार्यरत भैपर लैम्प स्थल | अनुमानित चौक की संख्या | अभियुक्ति |
| 1. | 350मी0 लम्बा डैम स्थल के दोनों तरफ 15-15 अद्द | 30 | 30 | बिजली के भोल्टेज में यदाकदा अचानक वृद्धि होने पर बल्ब फ्यूज अधिक होते थे तथा चौक जल कर जाता था। |
| 2. | तीन एप्रोच रोड में 3-3 अद्द | 09 | 09 | |
| 3. | कार्य स्थल पर उपलब्ध मैटेरियल यार्ड, सीमेंट गोदाम आदि | 06 | 06 | |
| 4. | डाउन स्ट्रीम ब्रिज का निर्माण | 05 | 05 | |
| 5. | 37 कॉलोनी का पुराना स्थल तथा 50 प्रभावित नया स्थल के रख-रखाव के लिए लगभग डेढ़ चौक प्रति स्थल के दर से | 87 | 150 | |
| कुल योग | 137 | 200 |
उनके द्वारा व्यादेश दिनांक 11.11.87 को अधीक्षण अभियंता को भेजा गया। अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 27.11.87 को निदेशक, क्रय एवं परिवहन को भेजा गया और एक माह के अन्दर उन सामग्रियों का वर्क सिजन दिसम्बर 87 से मई 88 तक के लिए प्राप्त कराने का अनुरोध किया गया। परन्तु सामग्रियों को बहुत विलम्ब से वर्किंग सिजन के समाप्ति के बाद अप्रील 88 में आपूर्ति हुई जिससे उसका उपयोग नहीं किया जा सका।
(8) उँची दर 2500/- रूपये प्रति चौक की खरीदगी निदेशक, क्रय एवं परिवहन, सिंचाई विभाग द्वारा की गयी। यह आरोप उनसे संबंधित नहीं है।
उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले की समीक्षा की गयी, जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-
(1) श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान द्वारा आपातिक व्यादेश के औचित्य के संबंध में कंडिका (07) में उल्लेखित कारण को मान्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि उनके द्वारा 137 प्रस्तावित/कार्यरत भैपर लैम्प स्थल के विरूद्ध 200 चौक्स की मांग की गयी। उसमें भी मात्र 54 चौक्स का ही उपयोग किया जा सका। शेष भंडार में पडे रहे। उनका कहना है कि बिजली भोल्टेज में यदाकदा अचानक वृद्धि होने पर बल्ब फ्यूज होते थे तथा चौक जल कर पिघल जाता था। इस बात को भी मान्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि जब उनके द्वारा अप्रील 88 में 200 चौक्स की प्राप्ति की गयी उसमें से कम से कम 137 चौक्स का उपयोग हो जाने चाहिए था। अर्थात 200 भैपरलैम्प के चौक्स की खरीदगी आपतिक स्थिति नहीं थी लेकिन निजी लाभ के लिए आवश्यकता से अधिक भैपर लैम्प के चौक्स का आपतिक व्यादेश भेजा गया।
(2) श्री प्रधान का कहना है कि आपातिक व्यादेश दिनांक 27.11.87 को निदेशक, क्रय एवं परिवहन को भेजा गया और एक माह में प्राप्त कराने का अनुरोध किया गया लेकिन उन्हें साढ़े चार माह बाद सामग्री प्राप्त करायी गयी जिससे वर्किंग सीजन समाप्त हो चुका था। जिसके चलते उन चौक्स का उपयोग नहीं किया जा सका। इस तथ्य को मान्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि सामग्री प्राप्त करते समय श्री प्रधान को यह बात मालूम था कि इन 200 चौक्स का5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 उपयोग नहीं हो सकेगा तब उन्हें 200 चौक्स प्राप्त नहीं करनी चाहिए थी जिससे सरकारी राशि क्षति होने से बच सकती थी।
(3) श्री प्रधान द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि स्कायी मास्टर पेबुल ऐट हाजीपुर के पक्ष में बैंक ड्राफ्ट तैयार कर फर्म को दिया गया। बाद में फर्म के अनुरोध पर उक्त बैंक ड्राफ्ट को कैंसिल कर नया बैंक ड्राफ्ट सं0-522070 दिनांक 2.5.88 पेबुल ऐट पटना के पक्ष में तैयार कर फर्म को प्राप्त कराया गया। भुगतान के पूर्व आयकर बिक्री कर का प्रमाण पत्र लिया गया।
इस संबंध में समीक्षा में पाया गया कि आरक्षी उपाधीक्षक मंत्रिमंडल निगरानी विभाग, अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक-1293, दिनांक 22.11.91 के कंडिका-17 से स्पष्ट है कि श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, यांत्रिक प्रमंडल, मंडल (पलामू) द्वारा बिना आयकर एवं बिक्री कर क्लियरेंस प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये ही भुगतान आदेश पारित किया गया।
क्रयादेश के मुताबिक आपूर्ति मेसर्स स्कायी मास्टर सिनेमा रोड, हाजीपुर ने किया था परन्तु श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, यांत्रिक प्रमंडल, मंडल (पलामू) द्वारा भुगतान बैंक ड्राफ्ट स्कायी मास्टर पेबुल ऐट हाजीपुर द्वारा किया गया। बाद में जानबूझ कर उक्त बैंक ड्राफ्ट को कैंसिल कर नया बैंक ड्राफ्ट स्कायी मास्टर पेबुल ऐट पटना कर दिया गया, अर्थात बैंक ड्राफ्ट में जानबूझकर सिनेमा रोड हाजीपुर अंकित नहीं किया गया एवं फर्जी व्यक्ति को प्राप्त कराया गया। फलस्वरूप फर्जी व्यक्ति द्वारा स्कायी मास्टर स्टेशन रोड, पटना के नाम से बैंक ऑफ मदुरा में खोले गये छद्मनामी खाता से उक्त राशि की निकासी की गयी।
दिनांक 2.1.12 को श्री प्रधान द्वारा समर्पित लिखित पक्ष के समीक्षा में पाया गया कि उनके द्वारा पूर्व में कही गयी बातों को ही दुहराई गई है।
(4) दिनांक 20.1.12 को श्री प्रधान द्वारा प्राप्त कराये गये माननीय व्यवहार न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय निर्णय में श्री प्रधान के विरूद्ध निगरानी थाना में दायर मुकदमा सं0-51/90 में धारा-120बी0 आर0/डब्लू0 धारा 467/468/471/एवं धारा 477(ए) भा0द0वि0 एवं धारा 5(2)आर0/डब्लू0-5(1)(डी0)भ्र0नि0अधि0 1947 कौरेसपौडिंग सेक्सन 13(2) आर/डब्लू0 धारा-13(1)डी0 भ्रष्टाचार नि0 अधि0 1988 के तहत आरोप गठित की गई है।
उक्त वर्णित स्थिति में श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाये गये।
समीक्षा में यह भी पाया गया कि सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-9197/2000 इन्द्रदेव नारायण सिंह बनाम बिहार सरकार एवं अन्य में पारित न्याय निर्णय में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा श्री सिंह सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संसूचित दण्ड को निरस्त कर दिया गया, लेकिन विभागीय कार्यवाही चलाने की छूट नहीं दी गई। विधि विभाग द्वारा उक्त न्याय निर्णय के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर करने का परामर्श नहीं देने के कारण उच्च न्याय निर्णय का अनुपालन करते हुए श्री सिंह के विरूद्ध संसूचित दण्डादेश निरस्त किया गया।
श्री प्रधान के मामले में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-8469/05 माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 01.07. 11 को पारित न्याय निर्णय में इनके विरूद्ध संसूचित दण्डादेश को निरस्त करते हुए विभाग को नया आदेश निर्गत करने का आदेश पारित किया गया, जिसके अनुपालन में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई है। समीक्षोपरांत श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) प्रमंडल मंडल (पलामू) सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाया गया है। समीक्षा में यह भी पाया गया है कि श्री प्रधान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध उनके सेवाकाल में ही सिविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाई गई थी एवं विभागीय अधिसूचना सं0-3075, दिनांक 22.9.97 द्वारा दण्ड संसूचित किया गया था। इस बीच वे दिनांक 30.09.2001 को सेवानिवृत हो गये।
समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री प्रधान सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध पूर्व में संसूचित दण्ड से संबंधित विभागीय अधिसूचना सं0-406 दिनांक 02.05.2005 को निरस्त करने का निर्णय लिया गया एवं साथ ही सरकार द्वारा इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित मानते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया -6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 (क) 1,00,000/- रूपये (एक लाख रूपये) मात्र की वसूली। इस राशि की वसूली उनके बकाये उपादान की राशि से की जायेगी।
(ख) निलंबन अवधि में इन्हें जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि पेंशन के प्रयोजनार्थ गणना की जाएगी।
उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्रदान करने हेतु विभागीय पत्रांक-576, दिनांक 01.06.12 द्वारा अनुरोध किया गया जिसके प्रसंग में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1014, दिनांक 30.07.12 द्वारा सूचित किया गया कि उपादान से वसूली करने हेतु आयोग का परामर्श वांछनीय नहीं है। तत्पश्चात मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा निर्णित दंड को संसूचित करने का निर्णय लिया गया।
उक्त के आलोक में श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, याँत्रिक प्रमंडल, मंडल (पलामू) सम्प्रति सेवानिवृत को पूर्व में संसूचित दण्ड से संबंधित विभागीय अधिसूचना सं0-406, दिनांक 02.05.2005 को निरस्त करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-62, दिनांक 15.01.2013 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
(क) 1,00,000/- रूपये (एक लाख रूपये) मात्र की वसूली। इस राशि की वसूली उनके बकाये उपादान की राशि से की जायेगी।
(ख) निलंबन अवधि में इन्हें जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु उक्त अवधि पेंशन के प्रयोजनार्थ गणना की जाएगी।
उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री प्रधान द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-5529/2013 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 18.07.18 को माननीय न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए अधिसूचना सं0-62, दिनांक 15.01.13 द्वारा निर्गत दण्डादेश को निरस्त करते हुए उनके सभी देय पावनाओं को भुगतान करने का आदेश दिया गया।
उक्त न्याय निर्णय के आलोक में श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-62, दिनांक 15.01.13 द्वारा निर्गत दण्डादेश को निरस्त करने एवं उनके सभी देय पावनाओं के भुगतान करने का निर्णय लिया गया है जिस पर प्रधान सचिव के अनुमोदनोपरांत माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है।
उक्त निर्णय श्री कृष्ण चन्द्र प्रधान, तत0 कार्यपालक अभियंता, याँत्रिक प्रमंडल मंडल (पलामू) सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 अनसार अहमद, सरकार के अपर सचिव।
————
[ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 980%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in