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((((स(cid:25)(cid:23) पटन(cid:4) (cid:21)(cid:28)3) ) ) ) पटन(cid:4)(cid:30) सोमवारसोमवारसोमवारसोमवार(cid:30) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 जल संसाधन विभाग ——— अधिसूचना 31 मई 2019
सं 22/नि॰सि॰(मुज॰)-06-05/2017/1101—श्री रमण कुमार (ID-3366), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान प्रमंडल, मोतिहारी संप्रति अधीक्षण अभियंता को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2016-17 में एजेण्डा सं0-133/293 एवं एजेण्डा सं0-133/294 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्यो को गुणवाा एवं विशिष्टि के अनुरूप निर्धारित तिथि तक पूर्ण नहीं किये जाने के मामले की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा की गई। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित निम्नलिखित आरोपों के लिए श्री कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-968 दिनांक-14.06.2017 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
(i) आपके द्वारा कार्य के कार्यान्वयन के दौरान वरीय पदाधिकारियों द्वारा बार-बार निदेशित करने के बावजूद स्थल पर कैम्प नहीं किया जाना, बिना सूचना के मुख्यालय से बाहर रहना, कार्य में आने वाली समस्याओं का निदान नहीं करना, अधीक्षण अभियंता को प्रगति की सूचना नहीं देना, जानकारी रहने के बाद भी वरीय पदाधिकारी के निरीक्षण में स्थल पर उपस्थित नहीं रहना यह दर्शाता है कि आपके द्वारा कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरती गयी तथा उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना किया गया है। फलतः कार्य स-समय पूर्ण नहीं होना परिलक्षित होता है।
(ii) आपको तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा निदेश देने के बावजूद नजर अंदाज कर एजेण्डा सं0-133/294 के कार्यों की प्रगति 80% (अस्सी प्रतिशत) रहने के बावजूद गलत ढंग से जानबूझ कर कार्य को पूर्ण घोषित किया जाना आपकी गलत मंशा को परिलक्षित करता है एवं जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये है।
उक्त के आलोक में श्री रमण कुमार, अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-700 दिनांक 22.07.2017 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कुछ साक्ष्य/अभिलेख की माँग विभाग से की गयी। जिसके क्रम में विभागीय पत्रांक-1397 दिनांक 22.08.2017 से जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न सभी अनुलग्नक/परिशिष्ट की छायाप्रति श्री कुमार को उपलब्ध करा दिया गया। पुनः श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-863 दिनांक 20.09.2017 द्वारा कुछ कागजात की माँग की गई।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 श्री कुमार से प्राप्त पत्र की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत उनके द्वारा याचित कागजात/अभिलेख का आरोप से संदर्भित नहीं रहने के कारण विभागीय पत्रांक-2000 दिनांक 14.11.2017 द्वारा इस निदेश के साथ की अपना जवाब एक सप्ताह के अन्दर समर्पित किया जाय। श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता को सूचित किया गया।
उक्त पत्र के आलोक में श्री कुमार द्वारा अपने पत्रांक-13 दिनांक 03.01.2018 से दिनांक 10.02.2018 तक अपना जवाब समर्पित करने हेतु समय की माँग विभाग से की गयी। पुनः श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-219 दिनांक 23.03.2018 द्वारा विभाग में समर्पित पत्र में दिनांक 31.05.2018 तक अपना स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु विभाग से समय देने की माँग की गयी। जिसे विभाग द्वारा स्वीकार करते हुए निश्चित रूप से अपना स्पष्टीकरण का जवाब दिनांक 31.05.2018 तक उपलब्ध कराने हेतु इस निदेश के साथ की जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में विभाग में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा, उन्हें संसूचित किया गया।
अतएव श्री रमण कुमार, तत्कालीन कार्यपाल अभियंता, जल निस्सरण, मोतिहारी संप्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर से पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री कुमार से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण उनके विरूद्ध दोनों आरोपों को प्रमाणित पाया गया।
अतः उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री रमण कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी संप्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर को विभागीय अधिसूचना संख्या-2291, दिनांक 10.10.2018 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया।
''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा अपने पत्रांक-794, दिनांक 22.11.18 द्वारा पुर्वाविलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कहीं गई हैं :-
उड़नदस्ता का जाँच प्रतिवेदन सम्यक एवं ठोस नहीं है अतएव कागजातों की माँग की जाती रही। ऐसे में बिना वांछित अभिलेखों का जबाव देना कितना उचित है। जबकि दण्ड अधिरोपित कर दिया गया है। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह याचिका विचारार्थ समर्पित किया जा रहा है।
श्री कुमार द्वारा बचाव बयान के कंडिका 5 से 15 तक में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन अधीक्षण अभियंता श्री अरूण कुमार पर आरोप प्रत्यारोप से संबंधित तथ्यों का उल्लेख किया गया है।
कंडिका-16 में दिनांक 06.08.16 से 08.08.16 के बीच माननीय मंत्री महोदय के द्वारा क्षेत्र भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि तत्कालीन प्रधान सचिव द्वारा सभा में कहा गया कि यह पहली बार है कि जल संसाधन विभाग के किसी अभियंता ने प्रशासन को इम्प्रेस किया है। वैसे स्थिति में उन्हें आधारहीन एवं असत्य आरोप के लिये दण्डित करना यह भी वित्तीय दण्ड न्यायोचित नहीं है।
कंडिका-17 में कहा गया है कि वर्ष 2016 के दो वर्ष बाद अर्थात वर्ष 2018 में एजेण्डा सं॰ 133/293 एवं 133/294 के कार्र्याे की समय वृद्धि के प्रस्ताव पर जब विभागीय निविदा समिति की बैठक दिनांक 29.06.18 को होती है तब समिति इस निर्णय पर पहुँचती है कि जिला प्रशासन, मोतिहारी से अपेक्षित सहयोग प्राप्त नहीं होने/कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने का मुख्य कारण मानते हुए दोनों एजेण्डा का समय वृद्धि की स्वीकृति प्रदान की गयी। उक्त स्वीकृत्यादेशों में यह वर्णित नहीं है कि कार्यपालक अभियंता के रूप में मेरे किसी कार्रवाई/लापरवाही के कारण कार्य सम्पादन में विलम्ब हुआ है।
निविदा शर्त्त के अनुरूप विलम्ब से कार्य पूरा करने के लिये संवेदकों के साथ-साथ कार्य कराने वाले सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता को दोषी नहीं बनाया गया एवं एक मात्र कार्यपालक अभियंता को दोषी बनाना उड़नदस्ता के चरित्र पर प्रश्न चिन्ह् खड़ा करता है।
कंडिका-18 में आरोपों से संदर्भित तथ्यों का कंडिकावार जबाव दिया गया है जो निम्नवत् है। (1) आरोप-1 का अंश :- (क) आपके द्वारा कार्य के कार्यान्वयन के दौरान वरीय पदाधिकारी द्वारा बार-बार निदेशित करने के बावजूद स्थल पर कैम्प नहीं किया जाना।
जबाव :- यह बिल्कुल असत्य एवं आधारहीन है। अनु॰-12 से स्पष्ट होगा कि वे मुख्य अभियंता एवं जिला पदाधिकारी के आदेश से फुलवार गाँव में कैम्प कर रहा था। उस स्थल से प्रमंडलाधीन तीनों एजेण्डा का कार्यो का पर्यवेक्षण एवं मोनिटरिंग कर रहा था। यदि कैम्प नहीं करता तो जिला पदाधिकारी को पत्र नहीं लिखता, फसल मुआवजा के भुगतान हेतु सहायक अभियंता को निदेश नहीं दे पाता। संवेदक पर दबाव बनवाने एवं उन्हें दण्डित करने के लिये अधीक्षण अभियंता को पत्र नहीं लिखता, उच्चाधिकारी के निरीक्षण के समय उपस्थित नहीं रहता। इसका सीधा एवं स्पष्ट अर्थ है कि स्थल पर कैम्प कर रहा था।
(ख) बिना सूचना के मुख्यालय से बाहर रहने के संदर्भ में कहा गया है कि कंडिका-13 में स्थिति स्पष्ट कर दी गयी है मेरे स्पष्टीकरण को मुख्यालय द्वारा अस्वीकार नहीं करने की स्थिति में उसे स्वीकार्य माना जायेगा। संलग्न अभिलेख से स्पष्ट है कि वे बिना सूचना के मुख्यालय से बाहर नहीं रहे है।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 (ग) कार्य में आने वाली समस्याओं का निदान नहीं करने के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य में आनेवाली प्रथम बाधा यथा वृक्ष हटवाने के लिये जिला पदाधिकारी को लिखे गये विभिन्न पत्र, दूसरी बाधा फसल मुआवजा का भुगतान के निवारण के लिये अवर प्रमंडल पदाधिकारी को लिखे गये पत्र, तिसरा बाधा भू-मुआवजा के निवारण के लिये लिये गये पत्र से स्पष्ट होता है कि कार्य में आने वाली बाधाएँ के निराकरण के लिये वे कितना तत्पर एवं सजग थे। परिमाण स्वरूप सभी बाधाओं को दूर कर कार्य को पूर्ण कर लिया गया। उपरोक्त कंडिका 16, 8, 9, 10 एवं 12 की संयुक्त समीक्षा के उपरान्त इस निष्कर्ष पर पहुँचने की कृपा करेंगे कि कार्य में आने वाली बाधाएँ के निदान नहीं करने का आरोप आधारहीन है।
(घ) अधीक्षण अभियंता को प्रगति की सूचना नहीं देने के संदर्भ में कहा गया है कि उड़नदस्ता के कंडिका 7.02.3 से स्पष्ट होगा कि कार्य की प्रगति की सूचना अधीक्षण अभियंता को दी जाती रही है, उड़नदस्ता एवं अधीक्षण अभियंता ने ऐसा एक भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है कि अंचलाधीन सभी प्रमंडलों के अन्तर्गत चल रहे कटाव निरोधक कार्यो की समेकित विवरणी में कार्य की प्रगति अप्राप्त दिखायी गयी हो।
(ड़) जानकारी रहने के बावजूद भी वरीय पदाधिकारी के निरीक्षण में स्थल पर उपस्थित नहीं रहने के संदर्भ में कहा गया है कि मुख्य अभियंता के निरीक्षण के दौरान इनकी उपस्थिति का विवरण कंडिका-13 में वर्णित की गयी है। स्वीकार स्पष्टीकरण से स्पष्ट होगा कि प्रोटोकॉल के तहत मुख्य अभियंता कार्यालय में उनकी उपस्थिति नहीं मानी जा सकती है। पत्रांक 594 दिनांक 31.05.16 में अंकित है कि वे दिनांक 04.05.16 एवं 11.05.16 को जिला पदाधिकारी की साप्ताहिक बैठक में संलग्न था। जिसके कारण अधीक्षण अभियंता के स्थल निरीक्षण में उपस्थित नहीं हो सका। (च) कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के संदर्भ में कहा गया है कि कंडिका 5, 7, 8, 9, 10, 12, 14 एवं 17 में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होगा कि कार्य को गुणवत्ता के साथ एवं बाधाओं को दूर करने के लिये दुव्र्यवहार एवं गाली सुनने के बाद भी कार्यो को पूर्ण कराने हेतु सतत प्रयत्नशील रहा। ऐसी स्थिति में कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता का आरोप आधारहीन है।
(छ) उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना किये जाने के संदर्भ में कहा गया है कि उपर सभी कंडिकाओं एवं अनुलग्नकों से स्पष्ट है कि आदेश की अवहेलना का आरोप निराधार एवं असत्य है। (ज) ससमय कार्य पूर्ण नहीं होने के संदर्भ में कहा गया है कि उपरोक्त कंडिकाओं में वर्णित कि जब प्रधान सचिव स्वयं स्वीकार कर रहे है कि प्रशासन के द्वारा वृक्षों को हटाने में विलम्ब किया जा रहा है तो कार्य का ससमय पूर्ण होना संदिग्ध है।
आरोप-2ः-मुख्य अभियंता महोदय ने भी स्वीकार किया है कि उनके द्वारा अधीक्षण अभियंता को कभी नजर अंदाज नहीं किया गया है इनके द्वारा ससमय संशोधित प्रतिवेदन के अनुरूप ही एक दिन बाद की तिथि में अध्यक्ष का प्रतिवेदन है। उनके द्वारा समर्पित संशोधित प्रतिवेदन दिनांक 18.05.16 की तिथि का है तथा अध्यक्ष का प्रतिवेदन दिनांक 19.05.16 की तिथि का है। कंडिका-14 के समग्र विवेचना से स्पष्ट होगा कि जानबूझ कर अथवा गलत मंशा से प्रतिवेदन समर्पित करने का आरोप असत्य है।
श्री कुमार से प्राप्त पूर्णविलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-
(1) आरोप सं॰-1 का मुख्य अंश है कि
(क) कार्यो का कार्यान्वयन के दौरान वरीय पदाधिकारियों द्वारा बार-बार निदेशित करने के बावजूद स्थल पर कैम्प नहीं किया जाना। (ख) बिना सूचना के मुख्यालय से बाहर रहना। (ग) कार्य में आने वाली बाधाओं का निदान नहीं करना। (घ) अधीक्षण अभियंता को प्रगति की सूचना नहीं देना। (ड़) जानकारी रहने के बाद भी वरीय पदाधिकारी के निरीक्षण में स्थल पर उपस्थित नहीं रहना। (च) कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरतना एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करना। आरोप सं॰-1 के अंश बार आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी के आलोक में स्थिति निम्नवत् बनती है।
(क) अंश 'क' के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता एवं जिला पदाधिकारी के आदेश से फुलवार गाँव में कैम्प कर प्रमंडलाधीन तीनों एजेण्डा के कार्यो का पर्यवेक्षण एवं मोनिटरिंग कर रहा था। साक्ष्य के रूप में जिला पदाधिकारी एवं अवर प्रमंडल पदाधिकारी से किये गये पत्राचार की प्रति दी गयी है। इनके द्वारा आरोप के इस अंश के संदर्भ में दिये गये साक्ष्य में कही भी उल्लेख नहीं है कि इनके द्वारा फुलवार में कैम्प कर रहे थे। एवं ये सभी पत्र प्रमंडल द्वारा निर्गत किया जाना परिलक्षित होता है जबकि अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक 579 दिनांक 05.05.16 से कार्यपालक अभियंता श्री कुमार को स्थल पर कैम्प नहीं कर आदेश की अवहेलना करने हेतु अनुशंसा भी किया गया है। अतएव4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 साक्ष्य के अभाव में श्री कुमार को निदेश के बावजूद स्थल पर कैम्प नहीं करने के लिये दोषी प्रतीत होते है।
(ख) अंश-(ख) के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा दिनांक 06.06.16 के अनुपस्थित रहने के संबंध में कहा गया है कि दिनांक 06.06.16 को नये मुख्य अभियंता से दूरभाष पर वार्त्ता के उपरान्त नये मुख्य अभियंता श्री दिनेश चौधरी से मिलने मुजफ्फरपुर गये थे। परन्तु उसी तिथि को मुख्य अभियंता स्थल भ्रमण किया गया। इस संदर्भ में श्री कुमार द्वारा अपने पत्रांक 799 दिनांक 19.07.16 से स्पष्टीकरण मुख्य अभियंता को दिया गया। उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार नहीं किया जाना स्थापित करता है कि वे अनाधिकृत रूप से अनुउपस्थित नहीं थे। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि मुख्य अभियंता के पत्रांक 28 दिनांक 08.06. 16 से स्पष्ट है कि पूर्व सूचना के बावजूद श्री कुमार न तो मुख्यालय में थे न ही कार्य स्थल पर थे। मुख्य अभियंता के पत्रांक 28 दिनांक 08.06.16 के क्रम में श्री कुमार अपना स्पष्टीकरण अधीक्षण अभियंता को पत्रांक 799 दिनांक 19.07.16 से दिया गया है। तथा प्रति मुख्य अभियंता को भी दी गयी है। परन्तु मुख्य अभियंता द्वारा इनका स्पष्टीकरण स्वीकार किया गया अथवा नहीं सूचना संचिका में नहीं है। ऐसी स्थिति में माना जा सकता है कि उक्त तिथि को श्री कुमार मुख्यालय एवं कार्य स्थल से अनुपस्थित थे।
(ग) आरोप के अंश 'ग' के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने के संदर्भ में जिला पदाधिकारी, अवर प्रमंडल पदाधिकारी तथा भू-मुआवजा के निराकरण के संदर्भ में किये गये पत्राचार से स्पष्ट है कि बाधाओं के निवारण हेतु तत्परता बरतने का परिणामस्वरूप सभी बाधाओं को दूर करने पर कार्य पूर्ण कर लिया गया। अभिलेखों से परिलक्षित होता है कि एजेण्डा सं॰ 133/294 एवं 133/293 के तहत बंगरी नदी के दोनों किनारे पर पूर्व से निर्मित तटबंध में उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में प्रथम बाधा वृक्ष हटवाना, द्वितीय बाधा फसल मुआवजा तथा तिसरा बाधा भू-मुआवजा के भुगतान से संबंधित है। वृक्ष हटवाने हेतु कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा मुख्य अभियंता द्वारा जिला पदाधिकारी से काफी पत्राचार किया गया है। यहाँ तक कि तत्कालीन प्रधान सचिव महोदय द्वारा भी जिला पदाधिकारी को वृक्ष हटवाने एवं अन्य व्यवधानों को दूर करने हेतु निदेश निर्गत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि कार्य में आने वाले बाधाओं को दूर करने का प्रयास इनके द्वारा किया गया है।
(घ) आरोप के अंश (घ) के संदर्भ में कहा गया है कि अधीक्षण अभियंता एवं उड़नदस्ता द्वारा ऐसा एक भी साक्ष्य नहीं दिया गया है जिससे प्रमाणित है कि विभाग ने कभी कहा गया हो कि चल रहे कटाव निरोधक कार्यो की प्रगति अप्राप्त है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 9.0.0 2(1) से स्पष्ट है कि श्री कुमार द्वारा अधीक्षण अभियंता को नजरअंदाज करते हुए एजेण्डा सं॰ 133/294 के कार्यो की प्रगति सीधे मुख्य अभियंता को कार्य पूर्ण नहीं होने के बावजूद भी पूर्ण नहीं होने के बावजूद पूर्ण होने का प्रतिवेदन दिया गया है। जो साक्ष्य आधारित है। अएतव श्री कुमार का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
(ड़) आरोप के अंश (ड़) के संदर्भ में कहा गया है कि प्रोटोकॉल के तहत मुख्य अभियंता कार्यालय में उनकी उपस्थिति को स्थल से मेरी अनुपस्थिति नहीं मानी जा सकती है एवं उन्हें स्थल निरीक्षण के पूर्व सूचना प्राप्त नहीं था। उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6.0.1.3 (iv) एवं (v) से परिलक्षित है कि दिनांक 06.06.16 को मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के स्थल निरीक्षण के दौरान श्री कुमार स्थल से अनुपस्थित थे। इस संदर्भ में मुख्य अभियंता द्वारा पत्रांक 28 दिनांक 08.06.16 से स्पष्टीकरण की माँग आरोपी से किया गया है। अतएव श्री कुमार का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
(छ) आरोप के अंश-(च) यथा कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरती जाने के संबंध में कहा गया है कि कार्य को गुणवत्ता एवं विशिष्टि के साथ एवं बाधाओं को दूर करने के लिये दुव्र्यवहार एवं गाली सुनने के बाद भी कार्यो को पूर्ण कराने हेतु सतत प्रयत्नशील रहा। फलतः कार्य पूर्ण हुआ। यह आरोप असत्य एवं आधारहीन है। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6. 0.2.3 एवं 6.0.2.3 से स्पष्ट है कि समय पर फसल मुआवजा एवं अस्थाई भू-मुआवजा का भुगतान में प्रक्रिया नहीं अपनाने, स्थल निरीक्षण के दौरान या विभिन्न पत्रों के माध्यम से निदेशित करने के बावजूद इनके द्वारा स्थल पर कैम्प नहीं करना, बिना सूचना के मुख्यालय से बाहर रहना, स्थल पर कैम्प कर किसानों की समस्या का समाधान नहीं करना, कार्य में आने वाली अन्य समस्याओं का निराकरण नहीं करना, अधीक्षण अभियंता को कार्य की प्रगति की सूचना नहीं देना, उनका फोन नहीं उठाना, स्थल निरीक्षण में स्थल पर नहीं रहना, आदेश का अवहेलना भी की गयी। फलतः ससमय कार्य पूर्ण नहीं होना इनकी लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता माना जाता है।5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 अगःतअगःतअगःतअगःत 2019201920192019 आरोप-2ः-जो तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा निदेश देने के बावजूद नजरअंदाज कर एजेण्डा सं॰ 133/294 के कार्यो की प्रगति 80 प्रतिशत रहने के बावजूद गलत ढंग से जानबूझ कर कार्य को पूर्ण घोषित किया जाना गलत मंशा से संबंधित है।
श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि दिनांक 15.06.16 को सभी सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के चुनाव कार्य में प्रतिनियुक्त रहने पर मुख्य अभियंता के समक्ष मोबाईल से कनीय अभियंता से प्रगति पूछा गया। मोबाईल का नेटवर्क खराब था फिर भी यह बात सुनाई दी कि एजेण्डा सं॰ 133/294 का कार्य पूर्ण हो गया होगा, के आधार पर उक्त एजेण्डा का कार्य पूर्ण होना प्रतिवेदित किया गया है। पुनः दिनांक 18.05.16 को स्थल जाँचोपरान्त इस एजेण्डा का कार्य मात्र 80 प्रतिशत प्रगति का संशोधित प्रतिवेदन दिया गया। एक कार्यपालक अभियंता के स्तर पर इस तरह की लापरवाही स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। अभिलेखों से स्पष्ट परिलक्षित होता है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा सीधे मुख्य अभियंता को दिनांक 16.05.18 को एजेण्डा सं॰ 133/294 के कार्य को पूर्ण होने का प्रतिवेदन दिया गया है। इनका कहना कि दूरभाष पर कनीय अभियंता से प्राप्त सूचना के आधार पर उक्त प्रतिवेदन मुख्य अभियंता को दिया गया, स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। इनका दायित्व था कि कार्यो का स्थल जाँचोपरान्त ही प्रगति प्रतिवेदित करते। परन्तु ऐसा नहीं कर गलत मंशा के तहत प्रतिवेदन दिया जाना परिलक्षित होता है। उड़नदस्ता द्वारा भी गलत प्रगति प्रतिवेदन देने हेतु इन्हें दोषी माना गया है।
समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में सरकार द्वारा श्री रमण कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर के पुर्णविलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-2291, दिनांक 10.10.18 द्वारा संसूचित दण्ड को बरकरार रखा जाता है एवं उक्त निर्णय श्री रमण कुमार, अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के अपर सचिव।
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