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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 September 2019

Published 04 September 2019

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-09-04.36
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार }kjk प्रकाशित

भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-154 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 155-164 पूरक

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पूरक-क 165-181बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 2 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————

जल संसाधन विभाग ------- अधिसूचनाएं 2 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(मुज0)-06-02/2018/22--श्री राम जनम शर्मा (आई0डी0-3553), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल सं0-02, महनार, वैशाली सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण मद में कब्रिस्तान की घेराबंदी से संबंधित निविदा का बगैर प्रचार प्रसार के निष्पादन में बरती गई अनियमितता के लिए योजना एवं विकास विभाग, पटना द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप पत्र के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1043, दिनांक 11.05. 2018 द्वारा श्री शर्मा को निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1063, दिनांक 16.05.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल सं0-2, महनार के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। जिसके आलोक में मामले के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री शर्मा को विभागीय अधिसूचना सं0-2169, दिनांक 26.09.2018 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए उक्त मामले में आरोप मुक्त किया गया। श्री शर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 01.10.18 द्वारा विभाग में समर्पित पत्र में निलंबन अवधि का पूर्ण वेतन भुगतान करने से संबंधित अनुरोध किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- "बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(3) में प्रावधानित है कि जहाँ अनुशासनिक प्राधिकार की राय में निलंबन पूर्णरूपेण अनुचित था तो सरकारी सेवक को इस नियम के उप नियम-8 के उपबंधों के अधीन वैसे पूरे वेतन तथा भत्ते का भुगतान किया जायेगा, जिसके लिए वह निलंबित नहीं किये जाने पर हकदार होता एवं ऐसा भुगतान करने के क्रम में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता एवं अन्य भत्तों का समायोजन कर लिया जायेगा।" विषयांकित मामले में जिस आरोप के लिए श्री शर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। वह आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। इस प्रकार श्री शर्मा का निलंबन औचित्यपूर्ण नहीं था। समीक्षोपरांत सकरार द्वारा श्री राम जनम शर्मा, तत0 कार्यपालक अभियंता, सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि दिनांक 11.05.2018 से दिनांक 26.09.2018 को कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी तथा निलंबन अवधि में पूर्व में लिये गये जीवन निर्वाह भत्ता को घटाकर शेष वेतनादि का भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम जनम शर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, ग्राम-गिराधारीपुर, पो0-अतियावाँ, जिला-जहानाबाद के निलंबन अवधि दिनांक 11.05.18 से दिनांक 26.09.2018 को कर्त्तव्य अवधि माना जायेगा तथा निलंबन अवधि में पूर्व में लिये गये जीवन निर्वाह भत्ता को घटाकर शेष वेतनादि का भुगतान की स्वीकृति दिया एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 2 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(कटि0)-25-02/2017/23--श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के विरूद्ध दिनांक 08.04.17 एवं दिनांक 09.04.17 को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर के अन्तर्गत एजेण्डा सं0-137/299 हरोहर नदी के बाँये तट पर ग्राम-सहजादपुर एवं बी0सी0ई0, भागलपुर के पास चल रहे कटाव निरोधक कार्य के निरीक्षण के समय अनुपस्थित पाये जाने दिनांक 10.04.17 को मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में आयोजित मासिक बैठक में बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाये जाने एवं दिनांक 24.04.17 को मुख्य अभियंता के जमींदारी बाँध के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाये जाने के आरोप के लिए मुख्य अभियंता, कटिहार द्वारा श्री सिन्हा के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए अग्रेत्तर अनुशासनिक कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराया गया। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, कटिहार से प्राप्त पत्र के आलोक में विभागीय पत्रांक-1160, दिनांक 18.07.2017 द्वारा श्री सिन्हा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, तदालोक में श्री सिन्हा ने अपने पत्रांक-102, दिनांक 27.10.2018 द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित किया गया।3 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 श्री सिन्हा ने अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया है कि वे दिनांक 10.04.2017 को अपने कार्यक्षेत्र में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे, उक्त तिथि को लखीसराय जिला अन्तर्गत चल रहे योजना यथा हरोहर नदी के बाँये तट पर अवस्थित दरियापुर गाँव में कटाव निरोधक कार्य, हरोहर नदी के बाँये तट पर अवस्थित सहजादपुर गाँव में कटाव निरोधक कार्य तथा मुँगेर जिला अन्तर्गत गंगा नदी के दायाँ तट अवस्थित तौफिर गाँव में कटाव निरोधक कार्य का स्थल निरीक्षण किया तथा स्थल निरीक्षण पंजी में हस्ताक्षर भी अंकित किया है। दिनांक 24.04.2017 को अनुपस्थित रहने के आरोप के संबंध में श्री सिन्हा का कहना है कि इस निरीक्षण की कोई अधिकारिक सूचना पत्र अथवा किसी अन्य माध्यम से मुझे नहीं दी गई थी अतएव सूचना के अभाव में मैं स्थल पर निरीक्षण के समय उपस्थित नहीं हो सका तथा अपने अन्य सरकारी दायित्वों का निर्वहन तत्समय कर रहा था। श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी, समीक्षा में पाया गया कि श्री सिन्हा ने अपने स्पष्टीकरण के जवाब के साथ मुख्य अभियंता, कटिहार को भेजे गये पत्र की छायाप्रति संलग्न किया है जिसमें उल्लेख है कि वे दिनांक 05. 04.2017 को विभागीय समीक्षात्मक बैठक में भाग लेने के पश्चात दाँत का ईलाज कराने हेतु दिनांक 06.04.2017 से दिनांक 08.04.2017 तक आकस्मिक अवकाश में रहेंगे। साथ ही मुख्य अभियंता से आकस्मिक उक्त तिथि के साथ 09.04.17 को रविवारीय अवकाश स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया है। इस प्रकार दिनांक 08.04.17 एवं दिनांक 09.04.17 को अनुपस्थित रहने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। दिनांक 24.10.17 को अनुपस्थित रहने के आरोप के संबंध में श्री सिन्हा का कहना कि उन्हे स्थल निरीक्षण की कोई अधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं थी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट है मुख्य अभियंता के निरीक्षण के समय सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता को मुख्य अभियंता के स्थल निरीक्षण की जानकारी पूर्व में थी तो अधीक्षण अभियंता को इसकी जानकारी कैसे प्राप्त नहीं हुई है यह समझ से परे है। संवादहीनता के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है इसलिए आरोप पत्र में यह गठित यह आरोप कि अधीक्षण अभियंता जानबूझकर निरीक्षण के समय उपस्थित नहीं हुए, आंशिक रूप से प्रमाणित होता है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री राजू कुमार सिन्हा, अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध अनाधिकृत अनुपस्थित रहने के आरोप को अंशतः प्रमाणित मानते हुए "चेतावनी" निर्गत करने का निर्णय लिया गया है। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता रूपांकण, आयोजन एवं मोनिटरिंग अंचल, सहरसा को "चेतावनी" अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 3 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(पू0)-01-03/2015/34--श्री सुरेश मिस्त्री (आई0डी0-जे-4831), तत्कालीन सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के अधीन पूर्वी कोशी नहर पुनस्र्थापन कार्य से संबंधित योजना में प्राक्कलन की विशिष्टियों एवं गुणवत्ता का ध्यान नहीं रख कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराने, पक्की संरचनाओं में सीमेंट की मात्रा कम होने, कराये गये मिट्टी कार्य में सेटलमेंट मद में मिट्टी की मात्रा की कटौती किये बगैर संवेदक को भुगतान करने, बिना सर्वेक्षण किये ही स्थल के अनुरूप DPR प्राक्कलन में प्रावधान नहीं करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने इत्यादि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1599, दिनांक 25.07.2018 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-2158, दिनांक 25.09.2018 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी। स्पष्टीकरण प्राप्त करने के क्रम में ही श्री मिस्त्री द्वारा अभ्यावेदन दिया गया कि वे दिनांक 31.12.2018 को सेवानिवृत हो रहे हैं। श्री मिस्त्री से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत इनकी सेवानिवृति को देखते हुए दिनांक 31.12.2018 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुरेश मिस्त्री, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति (निलंबित) को दिनांक 31.12.2018 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 8 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2014/96--श्री राहुल कुमार मिश्र (आई0डी0-जे॰-3557), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ढकराहा शिविर गोपालगंज के विरूद्ध सल्लेहपुर टंडसपुर छरकी टूटान में बरती गयी लापरवाही आदि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए इन्हें विभागीय अधिसूचना सं0-1299, दिनांक-09.09.2014 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1902, दिनांक-08.12.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।4 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री मिश्र के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया, किन्तु संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं पर श्री मिश्र से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई एवं उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युार की समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-421, दिनांक 10.03.2016 द्वारा निलंबन मुक्त करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-1729, दिनांक 10.08.16 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (1) देय प्रोन्नति पर तीन वर्षों तक रोक

(2) दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक निलंबन अवधि के विनियमन एवं वेतन भत्ता की अनुमान्यता के संबंध में श्री मिश्र से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11(5) के तहत विभागीय पत्रांक-2226, दिनांक 07.10.16 द्वारा नोटिस निर्गत किया गया।

श्री मिश्र द्वारा उक्त नोटिस के जवाब में निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है :- (I) जब वे कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ठकराहा शिविर गोपालगंज के रूप में पदस्थापित थे। बाढ़ 2014 के दौरान, अधीक्षण अभियंता बाढ़ नियंत्रण अंचल, गोपालगंज का, जिनका मुख्यालय गोपालगंज में ही अवस्थित था, कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी या प्रतिवेदन नहीं था।

(II) विभाग द्वारा उनके विरूद्ध की गई कार्रवाई, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान द्वारा विभाग को समर्पित प्रतिवेदन पर आधारित था।

(III) तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान स्वयं विभाग द्वारा आर्थिक अपराध में आरोपित थे एवं विभाग द्वारा उन पर आवश्यक कार्रवाई की गई।

(IV) जैसा कि उन्होंने पूर्व में प्रतिवेदित किया है, तत्कालीन मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग, सिवान का उनके खिलाफ प्रतिवेदन विद्वेषपूर्ण था। उनके द्वारा अपने पदीय दायित्व का सम्यक निर्वहन नहीं किया जाता था, यह इससे भी स्पष्ट है कि अपने कार्यावधि के दौरान उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकतर कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता के खिलाफ विभाग को प्रतिवेदित किया है। यह उनके कार्य शैली को दर्शाता है, क्योंकि ये संभव नहीं है कि सिर्फ एक पदाधिकारी सही हों और अधीनस्थ सभी पदाधिकारी अक्षम होंं। कहीं न कहीं उनके मार्गदर्शन में कमी परिलक्षित होता है। श्री मिश्र द्वारा दिये गये तथ्यों की समीक्षा में पाया गया कि श्री मिश्र ने अपने स्पष्टीकरण में न तो आरोपों का खंडन किया है और न हीं आरोपों को अप्रमाणित करने वाले साक्ष्य संलग्न किये हैं। मात्र तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध शिकायत की गई है। पूर्व में इनके द्वारा जो अभ्यावेदन समर्पित किया गया था उसके सम्यक समीक्षोपरांत हीं आरोपों को प्रमाणित किये जाने की स्थिति में उनके विरूद्ध "देय प्रोन्नति पर तीन वर्षों तक रोक एवं दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया है। श्री मिश्र ने अपने स्पष्टीकरण में ऐसे किसी भी तथ्य का उल्लेख नहीं किया है जो आरोपाें का खंडन करता हो। इनका स्पष्टीकरण उत्तर अस्वीकार्य योग्य है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में श्री मिश्र से प्राप्त जवाब के समीक्षोपरांत इनके निलंबन अवधि (दिनांक 09.09.2014 से 09.03.2016 तक) को निम्न रूपेण विनियमित करने का निर्णय लिया गया :- "निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि नहीं मानी जायेगी।"

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री राहुल कुमार मिश्र (आई0डी0-जे॰-3557), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, ढकराहा शिविर गोपालगंज की निलंबन अवधि (दिनांक 09.09.2014 से 09.03.2016 तक) को निम्न रूपेण विनियमित किया जाता है।

"निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि नहीं मानी जायेगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 14 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(पट0)-03-04/17/135--श्री ख्वाजा जमाल नासिर (आई0डी0-4542), तत्का0 सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-01, पटना के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध 14.01.2017 को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव के दौरान हुयी नाव र्दुघटना के दिन प्रतिनियुक्ति स्थल से अनधिकृत अनुपस्थिति, कर्त्तव्य में लापरवाही एवं अनुपस्थिति के कारण विधि व्यवस्था के संधारण में हुई कठिनाई का आरोप गठित कर जिलाधिकारी, पटना के पत्रांक-1419, दिनांक 20.03.17 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' उपलब्ध कराया गया। जिसके आलोक में श्री नासिर को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-867, दिनांक 07.06.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

उल्लेखनीय है कि उक्त मामले में माननीय उच्च न्यायालय में दायर वाद संख्या सी0डब्लू0जे0सी0 नं0-16934/2017 में दिनांक 12.02.18 को पारित आदेश के आलोक में श्री नासिर को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1281, दिनांक 12.06.18 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया।5 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोप :- जिला नियंत्रण कक्ष, पटना के संयुक्तादेश ज्ञापांक- 160 जि॰नि॰क॰ दिनांक- 13.01.2017 द्वारा पतंग उत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिनांक- 14.01.2017 से 17.01.2017 तक के लिए श्री नासिर प्रतिनियुक्ति दण्डाधिकारी के रूप में की गयी थी।

पतंग उत्सव कार्यक्रम के दौरान दिनांक- 14.01.2017 की संध्या में नाव दुर्घटना की घटना घटित हुई। इस घटना की जाँच हेतु सरकार की ओर से दो सदस्यीय जाँच दल का गठन किया। जाँच दल द्वारा उच्च स्तरीय जाँच कराते हुए श्री नासिर के मोबाईल फोन के टावर लोकेशन के आधार पर समर्पित प्रतिवेदन में श्री नासिर प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थित रहने के आलोक में दोषी पाया गया है। राज्य सरकार द्वारा लिय गये निर्णय के आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक- 3091, दिनांक- 15.03.2017 के आधार पर चिन्हित पदाधिकारियों जो अनुपस्थित रहे है, जिनमें श्री नासिर भी सम्मिलित है, के विरूद्ध प्रपत्र- 'क' में आरोप गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार को भेजने का निदेश प्राप्त हुआ है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री नासिर अपने प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थित थे। श्री नासिर द्वारा अपनी अनुपस्थिति के संबंध में न तो कोई अनुमति ली गयी अथवा इसकी सूचना ही वरीय पदाधिकारियों को दी गयी। यह विधि व्यवस्था संबंधी संवेदनशील मामले में आदेश की अवहेलना सहित अनाधिकृत अनुपस्थिति एवं कर्त्तव्य में लापरवाही का द्योतक है, जो एक गंभीर मामला है, तथा श्री नासिर के इस अनुपस्थिति के कारण विधि-व्यवस्था संधारण में कठिनाई हुई। आरोपित पदाधिकारी का कथन - आरोपित पदाधिकारी ने अपने मूल बचाव बयान पत्रांक- शून्य दिनांक- 08.07. 2017 में स्पष्ट किया है कि जिलाधिकारी, पटना द्वारा संयुक्तादेश में प्रतिनियुक्ति स्थल पर 9.00 बजे पूर्वाहन में पहुँचने का समय निर्धारित किया था। उन्होने अपना मोबाईल नं॰- 9128099677 के निजी मोबाईल नंबर बताया है। उनका कहना है उन्होने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया है। उन्होने संयुक्तादेश में वर्णित प्रतिनियुक्त अन्य तीन अन्य दण्डाधिकारी एवं दल में शामिल दो अन्य सहायक अवर निरीक्षक द्वारा निर्गत अपनी उपस्थिति के साक्ष्य के रूप में प्रमाण पत्र संलग्न करते हुए अपने कथन की पुष्टि करने का प्रयास किया है।

उन्होने विधि व्यवसथा की देखरेख में लगे मो॰ शफी उल्लाह खाँ, पशुधन निरीक्षक, श्री चन्द्रहाश कुमार तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा भी गाँधी घाट पर देखे जाने संबंधी लिखित साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है। उक्त आलोक में अपने उपर अनुपस्थित रहने के आरोप को साक्ष्यविहीन बताया गया है।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पूरक बचाव बयान दिनांक-25.07.2017 द्वारा विशेष रूप से बताया गया कि आरोप पत्र में वर्णित मोबाईल सं॰-9128099677 का टावर लोकेशन आरोप पत्र में संलग्न हीं नहीं किया गया है बल्कि दो भिन्न मोबाइल नंबर के बारे में कॉल डिटेल दिया गया है जो उनका नहीं है। उन्होने आरोप पत्र में श्री नासिर के विरूद्ध लगे आरोप का साक्ष्य नहीं रहने का उल्लेख किया है।

अपने द्वितीय पूरक बचाव-बयान में उन्होने वर्णित मोबाईल संख्या को निजी बताते हुए इसे हमेशा साथ में नहीं रहने का उल्लेख किया है, उन्होने विशेष रूप से सुनवाई में मौखिक रूप से यह भी बताया है कि आरोप से संबंधित तिथि को कुछ देर के लिए वर्णित मोबाईल चार्ज हेतु बाहर भेजा गया था। संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-2909, दिनांक 15.11.17 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। जिसमें अंकित किया गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य के आधार तथा संदर्भित मोबाईल नं0 का स्पष्ट कॉल डिटेल के अभाव में आरोप प्रमाणित नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री नासिर से प्राप्त बचाव-बयान की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई।

समीक्षा :- आरोप पत्र में आरोपित पदाधिकारी के नाम के सामने अंकित मोबाईल नं॰ 9128099677 का कॉल डिटेल आरोप पत्र में संलग्न नहीं किया गया है अपितु अन्य व्यक्तियों का कॉल डिटेल संलग्न है अतएव इस कार्यालय के पत्रांक-2268 दिनांक-18.08.2017 द्वारा आरोपित पदाधिकारी से संबंधित मोबाईल नं॰-9128099677 का कॉल डिटेल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को भी उक्त अभिलेख प्रस्तुत करने का निदेश दिया गया। विभागीय पत्रांक-1543 दिनांक-06.09.2017 द्वारा जिलाधिकारी, पटना से उपरोक्त मोबाईल नम्बर सहित अन्य नंबरों का कॉल डिटेल प्राप्त करने का अनुरोध किया गया पुनः लगभग एक माह के पश्चात अधोहस्ताक्षरी के पत्रांक-2644 दिनांक-07.10.2017 द्वारा भी जिलाधिकारी, पटना से वांछित नंबरों का कॉल डिटेल प्रतिवेदन मांगा गया। अबतक संबंधित नंबरो के कॉल डिटेल उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे यह प्रतीत होता है कि आरोपित पदाधिकारी क मोबाईल नंबर का कॉल डिटेल संभवतः उपलब्ध नहीं है।

आरोपित पदाधिकारी साथ में प्रतिनियुक्त अन्य दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों द्वारा प्राप्त प्रमाण पत्र के अधार पर स्वयं को कार्यस्थल पर उपस्थित होने संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है परन्तु आरोप पत्र जिस साक्ष्य के आधार पर गठित होने का उल्लेख है वह साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। आरोपित पदाधिकारी ने निम्नलिखित पदाधिकारियों द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र संलग्न किया है जिसमें उनके प्रतिनियुक्ति स्थल पर उपस्थित रहने का बोध होता है :- 1. श्री विनय कुमार, सहायक अवर निरीक्षक, सुल्तानगंज, पुलिस पदाधिकारी। 2. श्री शिवशंकर महतो, सहायक अवर निरीक्षक, सुलतानगंज, पुलिस पदाधिकारी। 3. श्रीमति प्रतिमा कुमारी, कनीय अभियंता, नई राजधानी प्रमंडल, पटना, प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी। 4. श्री सुनील कुमार राय, कनीय अभियंता, छज्जूबाग अवर प्रशाखा, पटना प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी। 5. श्री कमलेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल- 2, पटना, प्रतिनियुक्त पदाधिकारी।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 6 6. श्री मो॰ शफी उल्लाह खाँ, पशुधन निरीक्षक सह प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी, जिला नियंत्रण कक्ष, पटना। 7. श्री चन्द्रहाश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल- 1, पटना, वर्त्तमान कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, पटना।

अतः उपरोक्त आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त बचाव बचान, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा कार्य स्थल पर उपस्थित होने संबंधी प्रमाण-पत्र संलग्न किया है जो समीक्षा में वर्णित है। साथ ही आरोपित पदाधिकारी का मोबाईल नम्बर का स्पष्ट कॉल डिटेल नहीं होने के कारण आरोप प्रमाणित नहीं है। आरोप प्रपत्र-'क' जिला पदाधिकारी, पटना के द्वारा भेजा गया था जिसके आलोक में श्री ख्वाजा जमाल नासिर पर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी थी इसलिए कॉल डिटेल का स्पष्ट साक्ष्य की मांग करने हेतु जिला पदाधिकारी, पटना को इस कार्यालय के पत्रांक-1543 दिनांक-06.09.2017, मुख्य अभियंता, पटना के पत्रांक-2644 दिनांक-07.10.2017, 561 दिनांक-06. 03.2018, अर्द्धसरकारी पत्र-783 दिनांक-23.03.2018, स्मार-2175 दिनांक-26.09.2018 स्मारित किया गया किन्तु जिला पदाधिकारी, पटना द्वारा अब तक कोई प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया। मात्र उन्होंने अपने पत्रांक-1751 दिनांक-30.04. 2018 से सामान्य प्रशासन विभाग से कॉल डिटेल उपलब्ध कराने पर विभाग को उपलब्ध कराने की बात कही है। इस प्रकार प्रस्तुत विभागीय कार्यवाही में निर्णय लंबित है। श्री ख्वाजा जमाल नासिर द्वारा इस संबंध में एक अभ्यावेदन दिया गया है कि उनके विभागीय कार्यवाही में अविलम्ब निर्णय लिया जाय क्योकि ताकि उनका प्रोन्नति बाधित हो गया है। श्री ख्वाजा जमाल नासिर की प्रतिनियुक्ति स्थल पर उपस्थित होने से संबंधित दो पुलिस पदाधिकारी एवं पांच प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी द्वारा यह प्रमाण-पत्र दिया गया है कि वे कार्य स्थल पर उपस्थित थे। साथ ही मो॰ शफीउल्लाह खाँ, पशुधन निरीक्षक -सह- प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी, जिला नियंत्रण कक्ष, पटना द्वारा यह संपुष्ट किया गया है कि दिनांक-14.01.2017 को गाँधी घाट पर पतंग उत्सव कार्यक्रम में विधि व्यवस्था देखने हेतु अपने कर्त्तव्य पर श्री नासिर को उपस्थित पाया। जिला नियंत्रण कक्ष, पटना के Log and Message रजिस्टर में श्री ख्वाजा जमाल नासिर को प्रतिनियुक्ति स्थल पर बने रहने की सूचना उपलब्ध कराई गई है। इसलिए ऐसी स्थिति में आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध काराये गये साक्ष्य के आधार पर तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं होने के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री ख्वाजा जमाल नासिर को आरोप मुक्त किया जाता है। उक्त प्रस्ताव पर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

उक्त निर्णित प्रस्ताव से श्री ख्वाजा जमाल नासिर, सहायक अभियंता, को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

------- 15 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-02-101/98/177--श्री नागेन्द्र कुमार सिन्हा (आई0डी0-1902), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण रूपांकण अंचल, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध कर्त्तव्य का पालन सही से नहीं करने के संबंध में विभागीय पत्रांक-2331, दिनांक 20.10.16 द्वारा निम्न आरोप के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया :- श्री उमेशचन्द्र चौधरी, तत्कालीन कनीय अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा के विरूद्ध आरोप पत्र-'क' का गठन कर दो आरोपों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय आदेश सं0-145 सहपठित ज्ञापांक-1932, दिनांक 11.12.14 द्वारा श्री नागेन्द्र कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत श्री सिन्हा द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-203 दिनांक 31.03.15 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया; परन्तु श्री सिन्हा द्वारा जाँच प्रतिवेदन में कोई स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया। तदुपरांत विभागीय पत्रांक-1492, दिनांक 02.07.15 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए पत्र भेजा गया, जिसमें निदेश दिया गया कि स्पष्ट मंतव्य के साथ जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध करायें। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-441, दिनांक 31.07.15 द्वारा पुनः जाँच प्रतिवेदन स्पष्ट मंतव्य के साथ विभाग को उपलब्ध कराया गया जिसमें प्रथम आरोप अप्रमाणित एवं द्वितीय आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया; परन्तु उक्त जाँच प्रतिवेदन पर श्री सिन्हा के हस्ताक्षर के अतिरिक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का भी हस्ताक्षर अंकित था जो कि नियमानुकूल नहीं था, क्योंकि विभागीय कार्यवाही एक अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया है। उक्त के आलोक में पुनः श्री सिन्हा को विभागीय पत्रांक-2673 दिनांक 16.12.15 द्वारा पत्र भेजते हुए निदेश दिया गया कि स्वयं के हस्ताक्षरयुक्त जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया जाय। तदुपरांत श्री सिन्हा द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-784, दिनांक 31.12.15 द्वारा पुनः स्वयं के हस्ताक्षरयुक्त जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। परन्तु पूर्व के जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-441, दिनांक 21.07.15 द्वारा जिसमें प्रथम आरोप अप्रमाणित एवं द्वितीय आरोप प्रमाणित पाया गया था, से भिन्न जाँच प्रतिवेदन जिसमें दोनों आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। इस प्रकार बार-बार अपने मंतव्य से भिन्न मंतव्य गठित करने के लिए प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाया गया। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए बिहार पेंशन नियामवली के नियम-43(बी) में विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-713, दिनांक 10.04.17 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु श्री हरिनारायण, मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं श्री प्रेम प्रकाश वर्मा, कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल, अनिसाबाद, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।7 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-3388, दिनांक 20.12.17 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-483, दिनांक 22.02.18 द्वारा जाँच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया है :- (i) मेरे द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक 441, दिनांक 21.07.2015 एवं पत्रांक 784, दिनांक 31.12.2015 का कृपया अवलोकन करना चाहेंगे, जिसमें मेरे द्वारा सभी वर्णित तथ्यों को स्पष्ट रूप से सरकार के द्वारा की गयी सभी पृच्छाओं का जवाब दे दिया गया है। (ii) संचालन पदाधिकारी का यह कहना कि मेरे पत्रांक-441, दिनांक 21.07.15 द्वारा दिया गया जवाब उनका स्वयं का हीं है। अगर यह सही है तो सरकार अपने विभागीय पत्रांक-2673, दिनांक 16.12.15 के द्वारा मेरे मंतव्य को यह कह कर लौटा देना कि आप सिर्फ अपना मंतव्य दीजीए। मैंने लिखा था कि उसमें प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का भी मंतव्य सन्निहित हैं। अगर संचालन पदाधिकारी के अभिमत से सरकार सहमत है तो पुनः मुझसे मंतव्य मांगने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है। मेरे द्वारा समर्पित पत्रांक-441, दिनांक 21.07.15 को अंतिम जाँच प्रतिवेदन मानकर सरकार को कार्रवाई करना चाहिए था। ऐसा नहीं करके पुनः मुझसे जाँच प्रतिवेदन की मांग करना सरकार एवं संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में विरोधाभाष उत्पन्न करता है। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जिसमें निम्न तथ्य पाया गया :- संचालन पदाधिकारी के रूप में श्री सिन्हा का यह दायित्व बनता था कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोप, आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान एवं प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों के आधार पर आरोपों के संबंध में स्पष्ट मंतव्य गठित करना था। किन्तु इनके द्वारा दो तरह का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। पहला जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-1 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। किन्तु उस जाँच प्रतिवेदन पर प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का भी हस्ताक्षर ले लिया गया, जो नहीं होना चाहिए था। फलस्वरूप जाँच प्रतिवेदन वापस करते हुए श्री सिन्हा को अपने स्तर से जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। किन्तु श्री सिन्हा द्वारा दूसरे जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया जिसके आधार पर आरोपित पदाधिकारी श्री उमेशचन्द्र चौधरी आरोप मुक्त हो गये। जबकि इनके विरूद्ध 17.03 लाख रू0 एवं 2.50 लाख रू0 के लोक निधि के गबन का आरोप था। श्री सिन्हा ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में परस्पर विरोधाभाषी जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने के संबंध में किसी प्रकार का उत्तर नहीं दिया गया है, बल्कि अनावश्यक बातों का उल्लेख किया गया है, बल्कि अनावश्यक बातों का उल्लेख किया गया है। संचालन पदाधिकारी के रूप में परस्पर विरोधाभाषी जाँच प्रतिवेदन समर्पित करना घोर कदाचार की श्रेणी में आता है। इसलिए श्री सिन्हा का द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। उक्त के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए श्री नागेन्द्र कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता (आई0डी0-1902), बाढ़ नियंत्रण रूपांकण अंचल, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है :- "पेंशन से दस (10) प्रतिशत की कटौती पाँच (05) वर्षों के लिए" उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मंत्री का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री नागेन्द्र कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता (आई0डी0-1902) बाढ़ नियंत्रण रूपांकण अंचल, पटना सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है। "पेंशन से दस (10) प्रतिशत की कटौती पाँच (05) वर्षों के लिए"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 15 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-02-04/2014/179--श्री सच्चिदानंद सिन्हा (ID-J-4966), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-02, झंझारपुर के पद पर पदस्थापित थें तो कमला-बलान दायाँ तटबंध के कि0मी0 70.80 एवं कि0मी0 74.00 के पास कुम्हरौल एवं बौड़ ग्राम के पास दिनांक-15.08.2014 को हुए टूटान आदि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-1107 दिनांक-16.08.2014 द्वारा निलंबित करते हुए आपके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 में विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2089 दिनांक-24.12.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही में नियुक्त संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-621 दिनांक-22.07.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर किया गया एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-730 दिनांक-05.05.2016 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा किया गया। साथ ही निलंबन8 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अवधि डेढ़ साल व्यतीत हो जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-755 दिनांक-10.05.2016 द्वारा श्री सिन्हा को निलंबन मुक्त किया गया। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण-पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत श्री सिन्हा का द्वितीय कारण-पृच्छा का उार स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। फलस्वरूप श्री सच्चिदानंद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-02, झंझारपुर को प्रमाणित आरोप के लिए ''01 (एक) वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड संसूचित किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री सिन्हा को दिनांक-16.08.2014 द्वारा निलंबित किया गया एवं विभागीय अधिसूचना सं0-755 दिनांक-10.05.2016 द्वारा निलंबन मुक्त किया गया। इस प्रकार श्री सिन्हा दिनांक-16.08.2014 से दिनांक-09.05. 2016 तक निलंबित रहें, जिसका विनियमन किया जाना है। इसलिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 13(3) में दिये गये प्रावधान के आलोक में श्री सच्चिदानंद सिन्हा के निलंबन अवधि (दिनांक-16. 08.2014 से 09.05.2016) का निम्नरूपेण विनियमित किया जाता है :- ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा एवं निलंबन अवधि कर्तव्य अवधि नहीं मानी जाएगी।''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 16 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(मुज0)-06-07/2007/181--श्री ब्रह्यदेव दूबे, तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती अवर प्रमंडल, रीगा, सीतामढ़ी को उनके उक्त अवर प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान सीतामढ़ी एवं शिवहर जिलान्तर्गत वर्ष 1994-97 ई0 में कराये गये विभिन्न योजना में बरती गई अनियमितता की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री दूबे से स्पष्टीकरण पूछा गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक-582, दिनांक 19.05.14 द्वारा श्री दूबे के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री दूबे के एक अन्य मामले में विभागीय अधिसूचना संख्या-18, दिनांक 05.01.2015 द्वारा "सेवा से बर्खास्त" किये जाने के कारण उनके विरूद्ध सेवाकाल के दौरान किसी अन्य आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के अन्तर्गत नियमानुकूल नहीं होने के कारण विभागीय आदेश संख्या-175, सह ज्ञापांक-1984 दिनांक 03.09.15 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही को स्थगित रखा गया था।

श्री ब्रह्यदेव दूबे, तत्का0 सहायक अभियंता के संबंध में संयुक्त सचिव (प्रबंधन), जल संसाधन विभाग, पटना से विभागीय पत्रांक-2137, दिनांक 25.09.18 द्वारा उनके जीवित होने अथवा नहीं होने के संबंध में सूचना की माँग की गई, जिसके आलोक में उप सचिव (प्रबंधन) द्वारा अपने पत्रांक-2729, दिनांक 11.12.18 द्वारा सूचना उपलब्ध कराई गई है कि उनकी मृत्यु दिनांक 01.07.2018 को दुर्गापुर पश्चिम बंगाल में हो गई है।

अतः प्रबंधन कोषांग द्वारा उपलब्ध कराये गये सूचना/प्रतिवेदन के आलोक में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत श्री ब्रह्यदेव दूबे, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-582, दिनांक 19. 05.2014 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री ब्रह्यदेव दूबे, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-582, दिनांक 19.05.2014 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 16 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-06/2010/182--श्री भरत पूर्वे (आई0डी0-1894), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-01, मोतिहारी के विरूद्ध उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के वर्ष 2004-05 से 2009-10 के दौरान उनके द्वारा संपादित शिविर मरम्मति कार्यों की अभिलेखीय एवं स्थलीय जाँच संबंधी उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित आरोपों के विभागीय संकल्प ज्ञापांक-511 दिनांक-24.02.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री पूर्वे के दिनांक-31.03.2015 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना सं0-1621 दिनांक-20.07.2015 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-351 दिनांक-06.03.2017 द्वारा श्री पूर्वे से द्वितीय कारणपृच्छा की गई। उक्त आलोक प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा उार के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-1234 दिनांक-05.06.2018 द्वारा उनके विरूद्ध निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- ''पेंशन से दस प्रतिशत की कटौती पाँच वर्षों के लिए''। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री पूर्वे द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया जिसका मुख्य अंश निम्नवत हैः-9 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (1) पहला आरोप मापी पुस्त में नियमानुसार जाँच नहीं करने के इस आचरण से सरकारी राशि/धन का किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं पहुँची है। (2) दुसरा आरोप में रु 10,000/-(दस हजार) अगले विाीय वर्ष में भुगतान किया जाना एवं मापी पुस्त में 20 प्रतिशत प्लास्टर की मात्रा को रोककर पुनः उसी मात्रा को विमुक्त करना नियमानुसार नहीं माना गया। विभाग द्वारा समीक्षा में यह अंकित है कि राशि की मात्रा का भुगतान बिना कार्य कराये ही किया गया। यह भुगतान नियमानुसार नहीं किया जाना अंकित है। उनके इस आचरण से सरकारी राशि/धन की किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं पहुँची है। (3) आरोप-03 सही नहीं पाया गया है। (4) चौथा आरोप में लिखा गया है कि उपके द्वारा दिये गये साक्ष्य से स्पष्ट नहीं हो सका कि 2009-10 में कलर वाशिंग का कार्य एकरारनामा के अनुसार हुआ है, परन्तु विभाग द्वारा भी कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। मात्र अनुमान के आधार पर ही आरोप को सही माना गया है परन्तु उनके इस कार्य से सरकारी राशि/धन की क्षति हुआ है अंकित नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-806 दिनांक-16.01.2018 के क्रमांक 5(i) में स्पष्ट उद्धित है कि सेवानिवृत सेवकों के विरूद्ध संचालित अनुशासनिक कार्रवाई में पेंशन से कटौती का प्रावधान पेंशन नियमावली के नियम 43 एवं 139 में किया गया है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण,नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 में पेंशन कटौती को दण्ड के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इसलिए पेंशन से कटौती का निर्णय लेने हेतु अनुशासनिक प्राधिकार की अवधारणा प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। (5) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में प्रावधान है कि राज्य सरकार को पेंशन या उसके किसी अंश को रोक रखने या वापस लेने का अधिकार है। चाहे स्थायी रूप से या विशिष्ट अवधि के लिए। यदि न्यायिक या विभागीय कार्यवाही से पता चले कि उसके सेवाकाल या पुनर्नियुक्ति की अवधि में धोखे से राज्य सरकार को आर्थिक हानि पहुँची है तो पेंशन से उस हानि की पूरी या आंशिक वसूली कर सकती है। उनके द्वारा कहा गया है कि प्रमाणित सभी आरोप सामान्य प्रकृति का है। किसी आरोप में साबित नहीं हो रहा है कि उनके द्वारा धोखे से या किसी तरह के सरकारी राशि/धन की क्षति पहुँचाई गयी है विभाग द्वारा भी सरकारी धन राशि के क्षति का आकलन नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में सेवानिवृति के उपरांत बिना किसी आधार के पेंशन से कोई कटौती करना स्थापित नियम के विरूद्ध है जिस पर पुनः विचार करना चाहिए। अन्यथा बाध्य होकर न्यायालय के शरण में जाना पड़ेगा। समीक्षा :- श्री पूर्वे के पुनर्विलोकन अर्जी के अवलोकन से स्पष्ट है कि उनके द्वारा प्रमाणित आरोपों जिसके लिए उन्हें पेंशन से दस प्रतिशत की कटौती पाँच वर्षों के लिए दण्ड संसूचित किया गया है, से संदर्भित कोई तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत किया गया हो जिससे स्थापित हो सके कि उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालनोपरांत उनसे प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा उार के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोप सं0-01, 02 एवं 04 यथा माप पुस्त में अंकित कार्य की मापी को नियमानुसार जाँच की गयी है, माप पुस्त में सुधारात्मक कार्रवाई हेतु काटी गयी राशि को त्रुटिपूर्ण अथवा कार्य कराने के पश्चात विमुक्त किया गया है तथा प्रावधान के अनुरूप शिविर का रंगाई-पोताई किया गया है तथा कलरवाश कराया गया है। श्री पूर्वे द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में यह साबित करने की कोशिश की गयी है कि उनके विरूद्ध प्रमाणित आरोप अर्थात उनके उक्त अनियमित कृत के कारण सरकार को कोई राशि/धन की क्षति एवं गबन नहीं हुआ है तथा सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-806 दिनांक 16.01.2018 के कंडिका 5(i) एवं (ii) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सेवानिवृत सरकारी पदाधिकारी/कर्मी से उनके सेवाकाल में धोखे अथवा उनके गलत कृत के कारण सरकार को कोई आर्थिक क्षति पहुँची है तभी पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत पेंशन से कटौती की जा सकती है परन्तु मामले मे बिना सरकार को आर्थिक क्षति हुए ही पेंशन से कटौती किया जाना नियम के विरूद्ध है। उल्लेखनीय है कि श्री पूर्वे के विरूद्ध प्रमाणित तीनों आरोपों में से आरोप सं0-02 एवं 04 से स्पष्ट है कि इनके द्वारा प्राक्कलन में किये गये प्रावधान एवं नियम के विपरीत मनमाने ढंग से माप पुस्त में अंकित मापी को नहीं काट कर राशि को सुधारात्मक कार्य के नाम पर अकारण ही With held किया गया है तथा अगले विाीय वर्ष में बिना सुधारात्मक कार्य कराये अथवा बिना कराये ही उक्त राशि को विमुक्त कर दिया गया तथा प्रावधान के विपरीत न्यून विशिष्टि के कार्य यथा घटिया स्तर के रंगाई-पोताई तथा पुराने कोट पर कलरवाश होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करना परिलक्षित करता है कि उनके उक्त अनियमित कृत के कारण सरकार को आर्थिक क्षति हुई है, जिसके लिए श्री पूर्वे दोषी हैं। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री पूर्वे के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री भरत पूर्वे (ID-1894), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल सं0-01, मोतिहारी द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-1234 दिनांक-05.06.2018 से संसूचित दण्ड के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 10

17 जनवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2011/194--श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4436) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर को उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान गंडक बराज के गेट सं0-33 के क्षतिग्रस्त होने, कार्य स्थल का समय-समय पर निरीक्षण नहीं किये जाने, बराज के देखरेख एवं गेटों के संचालन में लापरवाही बरतने एवं अपने पदीय दायित्वों की घोर उपेक्षा करने से संबंधित मामले में बरती गई अनियमितता से संबंधित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1660, दिनांक 03.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1702, दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' के साथ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप सं0-1- मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01 (बराज) कैन्ट दिनांक 23.07.16 में स्पष्ट उल्लेख है कि मुख्य अभियंता द्वारा अनेकों बार दूरभाष एवं पत्रांक-297, दिनांक 18.07.2016 द्वारा आपात स्थिति से निबटने के लिए प्राप्त संख्या में मजदूर रखने का निदेश दिया गया था एवं विशेष रूप से हिदायत दी गई थी कि गंडक बराज के गेटों एवं बाँधों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाय, परन्तु इनके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण गेटों को कम से कम समय में उठाया जाना संभव नहीं हुआ है। जिसके कारण बराज का गेट सं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों की घोर उपेक्षा की गई जिससे एक अति विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।

आरोप सं0-2-श्री संजय कुमार तिवारी, कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल सं0-05 (प्रतिनियुक्त बगहा स्थल) द्वारा दिनांक 22.07.2016 को सुबह 06ः00 बजे गंडक नदी का जलश्राव अत्यधिक बढ जाने एवं इससे हुई क्षति की सूचना देने हेतु इनको जगाने का प्रयास किया गया।

मुख्य अभियंता द्वारा आपको अनेको बार दूरभाष एवं पत्रांक-297, दिनांक 18.07.16 से आपात स्थिति से निपटने के लिये प्रयाप्त संख्या में मजदूर रखने का निदेश दिया गया था एवं विशेष रूप से हिदायत दी गयी थी कि गंडक बराज के गेटों एवं बाँधों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाय, परन्तु आपके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण गेटों को कम से कम समय में उठाया जाना संभव नहीं हुआ। जिसके कारण बराज के गेट नं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया इससे स्पष्ट है कि आपने अपने दायित्वों की घोर उपेक्षा की गयी।

आरोप-3-दिनांक 22.07.16 को गेट संचालन में हुए चूक से स्पष्ट होता है इनके द्वारा समय-समय पर निरीक्षी पदाधिकारी के रूप में कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं किया जाता रहा है और न ही अधीनस्थ के कार्यकलाप पर नियंत्रण रखा गया। अतः इनकी कर्त्तव्य उपेक्षा के कारण एक विनाशकारी परिस्थिति उत्पन्न होने जैसी स्थिति बनी जो इनकी पूर्ण अक्षमता को प्रमाणित करता है।

आरोप-4-इनके द्वारा कार्य पर्यवेक्षण को नजर अंदाज किये जाने के कारण गंडक बराज का एक गेट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया। गेटिंग व्यवस्था के अन्य अव्यव भी काफी क्षतिग्रस्त हुए। जिसकी क्षतिपूर्ति में एक बहुत बड़ी सरकारी राशि का व्यय होगा। यह व्यय एक Avoidable Expenditure था। जिसके लिए आप दोषी है।

उपरोक्त तथ्यों से प्रमाणित होता है कि आपके द्वारा गंडक बराज के देख-रेख एवं गेटों के संचालन में लापरवाही बरती गई है। इनके द्वारा न तो ससमय सही निर्णय लिया गया और न ही इनके अधीनस्थ पर कोई नियंत्रण रहा। साथ ही इनके द्वारा किसी भी विपरीत परिस्थति का सामना करने हेतु पूर्व से कोई तैयारी भी नहीं की गई। जो इनके कर्त्तव्यों का सम्यक पालन नहीं किया जाना प्रमाणित करता है। फलतः इस तरह की घटना घटित हुई।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-44, दिनांक 27.02.2017 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोप यथा आरोप सं0-01, 02, 03 एवं 04 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1944, दिनांक 07.11.17 द्वारा श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 04.01.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

गेट सं0 33 के टूटने के संदर्भ में पूर्व में ही बचाव बयान में कहा था कि Dam Safety के Expert Review Committee द्वारा गेट सं0 5, 7, 8, 9, 21 एवं 23 जो buckled था को बदलने के परामर्श का अनुपालन का घटना की तिथि तक नहीं हो पाया था। जब गेट सं० 33 का S S Plate टूटा हुआ था एवं उक्त गेट में दो पेड फँस जाने के कारण उक्त गेट को याँत्रिक प्रभाग द्वारा नहीं उठाया जा सका। विभागीय मंतव्य से भी गेट के टूटने एवं बदलने/मरम्मति के लिये इन्हें दोषी नहीं माना गया है।

मुख्य अभियंता के पत्रांक 297 दिनांक 18.0716 के निदेश के क्रम में उक्त पत्र को पत्रांक-57 दिनांक 18.07.16 को पृष्ठांकित करते हुए कार्यपालक अभियंता को आवश्यक निदेश दिया गया था। यद्यपि गेटों के संचालन एकरारनामा के तहत P I System Pvt. Ltd. के जिम्मे याँत्रिक प्रभाग के नियंत्रणाधीन प्राधिकृत था, फिर भी कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वविवेक से 4 अकुशल मजदूर रखे गये थे।11 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 दिनांक 22.07.16 के सुबह 6ः00 बजे कार्यपालक अभियंता के साथ गेट सं0 33 पर था तथा गेट उठाने की कारवाई की जा रही थी। जिस साक्ष्यों के आधार पर यह आरोप आधारित है उसका बिना प्रतिपरीक्षण कराये ही आरोप प्रमाणित मान लिया गया।

दिनांक 15.06.16 के पूर्व याँत्रिक प्रभाग द्वारा सभी गेटों के जुगाड़ विधि से संचालन किया गया था न कि डैम सेफ्टी द्वारा परामर्शित कार्यों को पूरा कर किया गया था। गेटों के मरम्मति एवं बदलने के प्राक्कलन स्वीकृति की कारवाई घटना के दिन तक प्रक्रियाधीन था। अतः संचालन पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियंता (याँ) का कथन कि दिनांक 15.06.16 को सभी 52 गेटों को ठीक करा लिया गया था। सही नहीं है (विभागीय पत्रांक 562 दिनांक 03.07.16)।

जिला पदाधिकारी द्वारा भी गेट टूटने तथा संचालन के लिये याँत्रिक प्रभाग को जिम्मेवार माना गया है। मुख्यालय में रहकर अधीनस्थ प्रमंडलों के क्षेत्रों का समय-समय पर निरीक्षण करते हुए आवश्यक निदेश देता रहा है। गेट टूटान के पूर्व से ही बराज पर प्रयाप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध था। जिसके बारे में सहायक अभियंता ने अपने बचाव-बयान में वर्णन की है।

गेट का टूटना प्रमाणित है जिसके लिये P I System Pvt. Ltd. को दोषी मानते हुए विभाग द्वारा 10 वर्षों के लिये इन्हें कालीकृत किया गया है।

संचालन पदाधिकारी का कथन कि उभय पक्षों में किसी भी पक्ष ने अवसर दिये जाने के बावजूद भी कोई गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। जबकि संचालन पदाधिकारी से स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को साक्ष्य का परीक्षण करने का निदेश दिया जाय। परन्तु अवसर नहीं दिया गया। कृपया संचालन संबंधी Day by Day अंकित आदेश का Order Sheet की प्रति उपलब्ध करायी जाय। ताकि स्पष्ट हो सके कि कब अवसर दिया गया। जो CCA नियमावली के तहत आवश्यक है। गवाहों के मौखिक गवाही द्वारा दस्तावेजों को प्रमाणित कराये बिना उन दस्तावेजों का शाश्वत सत्य मानकर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य देना न्याय का उल्लंघन है एवं विधि सम्मत नहीं है।

इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा State of UP Vrs. Saroj Kumar Sinha के मामले में पारित न्यायादेश (2010) IOS.C.C.972(para-28) में प्रतिवेदित है कि -

"28 ……………………………….Since no oral evidence has been examined the documents have not been proved, and could not have been taken into consideration to conclude that the charges have been proved against the respondent"

परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। अनुरोध है कि जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न परिशिष्टि के साथ-साथ विभागीय मंतव्य की प्रति एवं संचालन प्रक्रिया में संधारित आदेशफलक की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध करायी जाय, द्वितीय कारण पृच्छा का प्रभावी पूरक उत्तर प्रस्तुत कर सकूँ।

श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा की जिसमें निम्न तथ्य पाये गये।

श्री कुमार द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में लगभग वही तथ्य एवं साक्ष्य दिया गया जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है एवं जिसकी समीक्षा संचालन पदाधिकारी के द्वारा माँगी गई विभागीय अभिमत के समय की गई। जो निम्नवत है :-

आरोप-1-इस आरोप का मुख्य अंश है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक-297, दिनांक 18.07.16 में निहित निदेश के आलोक में आपात स्थिति से निपटने के लिये प्रयाप्त संख्या में मजदूरों को नहीं रखा गया तथा बराज के गेटों एवं बाँधों की विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था नहीं करने के कारण गेट नं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया।

एकरारनामा एवं अन्य अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि गंडक बराज के गेटों का संधारण एवं संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित P I System Pvt. Ltd. को दिनांक 20.05.15 को दिया गया था।

मुख्य अभियंता (याँ0) के पत्रांक-1508, दिनांक 11.07.16 Expert Review comette का परामर्श एवं मुख्य अभियंता (याँ0) के पत्रांक-74, दिनांक 11.01.16 एवं 1575 दिनांक 20.07.16 तथा 1508 दिनांक 11.07.16 अभियंता प्रमुख के पत्रांक-65, दिनांक 27.07.16 तथा बेतार संवाद 154 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 21.07.16 से स्पष्ट होता है कि बराज के कई गेटों के S S Plate की मरम्मति करने की आवश्यकता थी तथा स्काडा सिस्टम भी Dysfunctional था। अभियंता प्रमुख के बेतार संवाद 154 दिनांक 20.07.16 से स्पष्ट होता है कि गेट सं0 33 के साथ अन्य कई गेटों का मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से संचालन करने की व्यवस्था को दिनांक 21.07.16 तक ठीक नहीं कराया जा सका था।

विभागीय पत्रांक- 65 दिनांक 27.07.16 से स्पष्ट होता है कि दिनांक 15.07.16 को प्रधान सचिव द्वारा बराज के निरीक्षण/समीक्षा के दौरान सभी 52 गेटों के सम्पोषण एवं स्काडा सिस्टम के तहत संचालन हेतु अविलंब ठीक करने का निदेश संवेदक तथा याँत्रिक प्रभाग के अभियंताओं को दी गयी है।

आरोपी द्वारा मुख्य रूप से कहा गया है कि याँत्रिक प्रभाग के स्थल आदेश पंजी पर गेटों की खराबियों को उजागर करते हुए उसकी मरम्मति एवं संचालन व्यवस्था को दुरूस्त करने का निदेश दिनांक 15.05.16 से लगातार याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक को दिया जाता रहा है। अंततः मेरे मार्गदर्शन में कार्यपालक अभियंता अपने बेतार संवाद 65 दिनांक 13.07.16 एवं 134 दिनांक 19.07.16 से गेटों को Mechanically संचालित नहीं होने की विवसता की सूचना उच्च पदाधिकारी तथा विभाग12 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 को दिया गया। जिसके क्रम में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा तो कोई कार्रवाई नहीं की गयी। परन्तु अभियंता प्रमुख अपने बेतार संवाद-54 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 21.07.16 से सभी अक्रियाशील गेटों की मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से सभी गेटों का संचालन सुनिश्चित करने का निदेश याँत्रिक प्रभाग को दिया गया है। तथा कार्यपालक अभियंता (याँ) को संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने का भी निदेश दिया गया है। जिसकी पुष्टि स्थल आदेश पंजी तथा अभिलेख से होती है परन्तु आरोपी द्वारा ऐसा कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि इनके द्वारा स्वयं के स्तर से असंचालित गेटों एवं संचालन में हो रहे कठिनाई को समीक्षा करते हुए वस्तुस्थिति से उच्च पदाधिकारी को अवगत कराया गया हो एवं इनके द्वारा याँत्रिक प्रभाग अथवा अधीनस्थ पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निदेश दी गयी है। यहाँ तक कि आपात स्थिति से निपटने के संदर्भ में मुख्य अभियंता द्वारा दिये गये निदेश पत्र को मात्र पृष्ठांकित करते हुए कार्यपालक अभियंता को दी गयी।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि याँत्रिक प्रभाग एवं सम्पोषण/संचालन कार्य में संलग्न संवेदक द्वारा कार्य में उदासीनता बरतने के कारण दिनांक 21.07.16 तक बराज के सभी गेटों का मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से संचालन को ठीक किया गया। परन्तु आरोपी द्वारा भी आपात स्थिति से निपटने हेतु कोई ठोस प्रयास नहीं किया जाना परिलक्षित होता है। मुख्य अभियंता के पत्रांक 297, दिनांक 18.07.16 से आपात स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक संख्या में मजदूर रखने एवं हरहाल में बराज को सुरक्षित रखने का दिये गये निदेश के आलोक में आरोपी द्वारा कहा गया है कि मेरे दिशा निदेश के आलोक में कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वविवेक से 4 अद्‌द मजदूर उक्त आदेश के पूर्व से (दिनांक 11.07.16) से ही रखा गया था। आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि गेटों के संचालन हेतु अनुबंधित संवेदक P I Systems Pvt. Ltd. द्वारा भी 9 मजदूर रखा गया था। गेटों की खराबी को घटना के दिन तक ठीक नहीं होने की स्थिति में घटना के समय याँत्रिक प्रभाग के 9 मजदूर एवं मेरे द्वारा रखे गये चार मजदूरों के सहायता से गेट को उठाया गया। परन्तु गेट सं0 33 में पेड फँस जाने के कारण तत्काल गेट नहीं उठाया जा सका। मास्टर रौल से स्पष्ट है कि 3 अद्‌द मजदूर दिनांक 11.07.16 से नियोजित किया गया था। मुख्य अभियंता के पत्रांक-297 दिनांक 18.07.16 से स्पष्ट होता है कि इस पत्र को अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 25.07.11 को कार्यपालक अभियंता को पृष्ठांकित किया गया है। पत्र में अंकित है कि आपात स्थिति में गेटों को उठाने एवं गिरने हेतु समुचित संख्या में मजदूरों को रखना सुनिश्चित करेंगे एवं हर हाल में गेट एवं बाँध को सुरक्षित रखना सुनिश्चित करेंगे। परन्तु उक्त पत्र में निश्चित सं0 में मजदूरों को रखने का उल्लेख नहीं है। ऐसी स्थिति में अधीक्षण अभियंता का दायित्व बनता था कि गेटों की मरम्मति एवं संचालन प्रणाली की स्थिति समीक्षोपरांत समुचित सं0 में मजदूरों को गेट के उठाने एवं गिराने हेतु रखने का निदेश कार्यपालक अभियंता को देते परन्तु इनके द्वारा मात्र उक्त पत्र को अग्रसारित कर दिया गया जो इनके कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही दर्शाता है। जहाँ तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था नहीं करने के कारण गेट नं0-33 क्षतिग्रस्त होने का प्रश्न है। जिला पदाधिकारी के प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि समय पर गेट का उठाव नहीं होने के कारण गेट नं0 33 से पेड फँस जाने के कारण उक्त गेट का उठाव नहीं हो सका है। परन्तु उपर वर्णित तथ्यों से परिलक्षित होता है कि याँत्रिक प्रभाग द्वारा अनुबंधित संवेदक द्वारा घटना की तिथि तक गेटों को मरम्मति तथा स्काडा सिस्टम को ठीक नहीं कराया जा सका था फलतः यथा समय गेटों को उठाव नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में उक्त घटना के लिये याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक को मुख्य रूप से दोषी माना जा सकता है साथ ही श्री कुमार समुचित व्यवस्था नहीं करने के लिये कुछ हद तक दोषी है। आरोप-2-इस आरोप का मुख्यतः दो भाग है। (क) श्री संजय तिवारी वर्तमान में अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना (प्रवाह बगहा) के द्वारा दिनांक 22.07.16 को सुबह 6ः00 बजे जगाने पर कोई प्रतिउत्तर नहीं देना। (ख) मुख्य अभियंता के पत्रांक 290 दिनांक 15.07.16 एवं 338 दिनांक 21.07.16 द्वारा निदेश देने के बाद भी नेपाली सिम का क्रय नहीं करना। आरोपी द्वारा कहा गया है कि दिनांक 22.07.16 को सुबह 5ः00 बजे सहायक अभियंता से सूचना प्राप्त होने पर कार्यपालक अभियंता के साथ बराज के गेट नं0 33 के पास पहुँचकर गेट को खुलवाने का प्रयास किया जा रहा था तथा बाद में श्री तिवारी से बराज पर उनके बगहा जाने के क्रम में मुलाकात हुई। मेरे आवास पर वृद्ध मामा एवं पिता रहते थे। यदि तिवारी द्वारा दरवाजा खटखटाया भी गया होगा तो मेरी अनुपस्थिति में माँ एवं पिता द्वारा आवाज नहीं सुनी गयी होगी। यह आरोप पूर्णतः श्री तिवारी के द्वारा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को दूरभाष से सूचित किये गये तथ्य के आधार पर आधारित हैं। ऐसी स्थिति में आरोपी के कथन को स्वीकार योग्य मानने अथवा नहीं मानने से पूर्व श्री संजय तिवारी, अधीक्षण अभियंता योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना से मंतव्य प्राप्त किया जाना श्रेष्कर प्रतीत होता है। क्योंकि मुख्य अभियंता द्वारा कहा गया है कि काफी प्रयास के बाद सुबह लगभग 7ः45 बजे श्री रंजन कुमार, कनीय अभियंता से गेट सं0 33 क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। ऐसी स्थिति में आरोपी का कहना की वे सहायक अभियंता से सूचना प्राप्त होने पर सुबह 5ः00 बजे बराज के गेट सं0 33 पर थे संदिग्ध प्रतीत होता है। नेपाल सिम के क्रय के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक-290 दिनांक 15.07.16 दिनांक 23.07.16 को प्राप्त हुआ। फिर भी मुख्य अभियंता के द्वारा दूरभाष पर दी गयी सूचना के आलोक में दिनांक 16.07.16 को ही सम्पर्क पदाधिकारी को बुलाकर नेपाल सिम उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया। आरोपी का उक्त कथन की पुष्टि सम्पर्क पदाधिकारी के पत्रांक 11 दिनांक 23.08.16 आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 338 दिनांक 21.07.16 तथा सिम प्राप्त नहीं होने की स्थिति में सम्पर्क पदाधिकारी को पत्रांक 61 दिनांक 22.07.16 द्वारा नेपाली13 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सिम हेतु पुनः अनुरोध किया गया। जिसके क्रम में सम्पर्क पदाधिकारी के पत्रांक 10 दिनांक 16.08.16 से 6 अद्‌द सिम उपलब्ध कराया गया। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में माना जा सकता है कि नेपाली सिम प्राप्त करने हेतु विभागीय पत्रांक 501, दिनांक 14. 07.16 एवं मुख्य अभियंता के पत्रांक 290 दिनांक 15.07.16 के अनुपालन में इनके द्वारा ससमय कार्रवाई की गयी है। अतएव श्री कुमार को निदेश का अनुपालन किया जाना परिलक्षित होता है। आरोप-3- इस आरोप के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि याँत्रिक प्रभाग के आदेश पंजी में मेरे एवं अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा गेटों की मरम्मति एवं संचालन व्यवस्था को ठीक कराने हेतु दिनांक 15.05.16 से लगातार टिप्पणी दर्ज करते हुए याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त मेरे मार्गदर्शन में कार्यपालक अभियंता अपने बेतार संवाद 65 दिनांक 13.07.16 एवं 134 दिनांक 19.07.16 से गेटों की खामियाँ एवं संचालन संबंधी कमियों को उजागर करते हुए ठीक कराने हेतु उच्चाधिकारियों को लिखा गया है जिसके क्रम में अभियंता प्रमुख द्वारा अपने बेतार संवाद 154 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 21.07.16 से याँत्रिक प्रभाग को आवश्यक दिशा निदेश दिया गया है। इस प्रकार कर्त्तव्यों का निर्वहन करते हुए घटना की पूर्व से व्यवस्था ठीक कराने की कार्रवाई का बोध होता है। परनतु इनके स्वयं के स्तर पर गेटों के रख-रखाव/ मरम्मति एवं संचालन के संदर्भ एक भी पत्राचार किया गया हो परिलक्षित नहीं होता है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि अंचल एवं इनके अधीन दोनों प्रमंडलों में सहायक अभियंता के 12 स्वीकृत बल के विरूद्ध मात्र 5 सहायक अभियंता कार्यरत थे एवं कनीय अभियंता के कुल स्वीकृत पद 31 के विरूद्ध मात्र तीन ही कनीय अभियंता कार्यरत थे। जिसमें से दो कनीय अभियंता को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा में मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिनियुक्त कर दिया गया था। जिस कारण मात्र एक कनीय अभियंता से बराज पर तीनों पाली में ड्‌यूटी कराना जाना विवशता थी। फलतः पाली ड्‌यूटी प्रभावित होना स्वभाविक है। मुख्य अभियंता के पत्रांक 01, दिनांक 18.06.16 से स्पष्ट होता है कि शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के एक सहायक अभियंता तथा दो कनीय अभियंता को बाढ़ नि0 प्र0 बगहा में प्रतिनियुक्त किया गया है। ऐसी स्थिति में आरोपी के उपरोक्त कथन को सही माना जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा बराज एवं गेटों का निरीक्षण करते हुए खामियों को स्थल आदेश पंजी में दर्ज की गयी है परन्तु इनके अपने स्वयं के स्तर से गेटों का समुचित संचालन होने की दिशा में कोई पत्राचार किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। हलांकि अभियंताओं की कमी की स्थिति में गठित पाली ड्‌यूटी को सुचारू रूप से संचालन होने में कठिनाई होना स्वभाविक है। आरोप-4-आरोपी द्वारा इस संदर्भ में कहा गया है कि गेटों का रख-रखाव तथा संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक P I Systems Pvt. Ltd. की थी। चूँकि उक्त तिथि (दिनांक 21.07.16) तक गेटों में पायी गयी कमियों को ठीक करना तथा स्काडा सिस्टम से गेटों की संचालन हेतु उच्चाधिकारी एवं इनके स्तर से निदेश देने के बावजूद याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक द्वारा ठीक नहीं कराया जा सका था। साथ ही जेनरेटर के संचालन हेतु Automatic Voltage Regulator की व्यवस्था भी याँत्रिक प्रभाग द्वारा नहीं किये जाने के कारण गेटों के उठाव शीघ्र नहीं हो सका एवं गेट सं0 33 में पेड फँस जाने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। जिसे स्वीकार योग्य माना जा सकता है। किन्तु क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मति पर होने वाले व्यय के लिए श्री कुमार जिम्मेवार हैं। श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता द्वारा पूर्व में दिये गये बचाव बयान के अतिरिक्त अंकित किया गया है कि CCA नियमावली एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा State of UP Vrs सरोज कुमार सिन्हा के मामले में 2016 में पारित न्यायादेश के विपरीत उन्हें समुचित प्रति परीक्षण का अवसर दिये बिना एवं दस्तावेजों को प्रमाणित कराये बिना ही सत्य मानकर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य दिया गया है। जो विधि सम्मत नहीं है एवं इनके द्वारा पूरक उत्तर हेतु जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न परिशिष्टि के साथ-साथ विभागीय मंतव्य की प्रति एवं संचालन प्रक्रिया में संधारित आदेश फलक की प्रति की माँग की गई है। जबकि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-6 में अंकित है कि उच्च पक्षों में किसी की पक्ष ने अवसर दिये जाने के बावजूद कोई गवाही/गवाह प्रस्तुत नहीं की गई। उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है। समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करते हुए आपात स्थिति से निपटने तथा ससमय सूचना देने की ठोस व्यवस्था नहीं करने का आरोप प्रमाणित होता है एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया।

"दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1912, दिनांक 04.09.18 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 1976 दिनांक 06.09.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई।14 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-2628, दिनांक 31.12.18 द्वारा श्री कुमार, तत0 अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति कार्यपलाक अभियंता पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। "दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

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18 जनवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(वीर0)7-01/16/197--श्री उदय नारायण चौधरी, (आई0डी0-जे0-6024) तत्कालीन कनीय अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, निर्मली, वीरपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके द्वारा बिना पूर्व विभागीय अनुमति के विदेश यात्रा करने संबंधी प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1253 दि0 01-07-16 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गई।

श्री चौधरी से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब के विभाग के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री चौधरी, सहायक अभियंता(अवर प्रमंडल पदाधिकारी), मुख्य नहर अवर प्रमंडल, बथनाहा (सिंचाई प्रमंडल नरपतगंज) के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प सं0-2044 दिनांक 21.11.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (बर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विहित रूप से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री चौधरी, तत0 सहायक अभियंता के दिनांक-31.01.18 को सेवानिवृति के पश्चात उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-32 सह-पठित ज्ञापांक-871 दि0 05.04.18 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभाग के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री चौधरी, तत0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत से विभागीय पत्रांक-2491 दि0-05.12.18 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की माँग की गई।

श्री चौधरी से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- श्री चौधरी द्वारा यात्रा करने से पूर्व विभाग को उचित माध्यम से अनुमति हेतु अपना अभ्यावेदन समर्पित किया गया था, किंतु विभाग द्वारा इनके आवेदन को स्वीकृत किया गया अथवा अस्वीकृत इसकी सूचना श्री चौधरी को नही दी गयी। फलस्वरूप श्री चौधरी द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सिंगापुर की यात्रा की गई। श्री चौधरी के अभ्यावेदन में संलग्न कागजात से स्पष्ट है कि पूर्व में विभाग द्वारा दिनांक-23.02.09 से दिनांक 17.03.09 तक सिंगापुर की यात्रा को उपार्जित अवकाश के रूप में स्वीकृती दी गई है। पश्चातवर्ती तिथियों को सिंगापुर जाने की अनुमति संंबंधी आवेदन पत्र पर विभाग द्वारा कोई निर्णय नही लिया गया। फलस्वरूप श्री चौधरी द्वारा अन्य वर्णित निम्न तिथियों में सिंगापुर की यात्रा की गई। (¡) दिनांक-01.01.11 से 30.01.11 तक (¡¡) दिनांक-21.04.12 से 09.05.12 तक (¡¡¡) दिनांक-02.12.13 से 26.12.13 तक। श्री चौधरी द्वारा सरकार को किसी प्रकार की वित्तीय क्षति नही पहुँचाई गई है। सिंगापुर यात्रा करने से संबंधित आवेदन पत्र की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति का संसूचन नही किये जाने के कारण इनके द्वारा सिंगापुर की यात्रा की गई। उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री उदय नारायण चौधरी, तत0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर ली गई है।

अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री उदय नारायण चौधरी, तत0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।

------- 23 जनवरी 2019 सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-4)/210--श्री विनोद किशोर सहाय (आई0डी0-2366), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक परियोजना के अन्तर्गत दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के तहत दोन शाखा नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्न आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-757 दिनांक-19.03.2018 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- (1) दोन शाखा नहर के पुनस्र्थापन कार्य में 37वें चालू विपत्र के भुगतान तक कार्य में कुल 87067.08 घन मी0 कोर्स एग्रीगेट का उपयोग किया गया, परन्तु जिला खनन पदाधिकारी शेखपुरा एवं पाकुड़ से मात्र 71937.87 घन मी0 एग्रीगेट का ही चालान एवं एम0 एण्ड एन0 फार्म का सत्यापन होने के बावजूद कार्य में प्रयुक्त कुल 87067.08 घन मी0 एग्रीगेट का भुगतान शेखपुरा के लीड से किया गया, जो नियम विरूद्ध है एवं सरकारी राजस्व की क्षति होना परिलक्षित होता है, जिसके लिए वे दोषी हैं।

(2) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका-01 से स्पष्ट है कि 37वें चालू विपत्र तक के भुगतान में कार्य में प्रत्युक्त कुल एग्रीगेट में से 15129.21 घन मी0 एग्रीगेट के चालान का सत्यापन नहीं होने के फलस्वरूप कार्य में15 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 15129.21 घन0 मी0 कोर्स एग्रीगेट (Blasted Rock) प्रावधानित खदान शेखपुरा के अतिरिक्त अन्य खदान से प्राप्त कर कार्य में प्रत्युक्त किया जाना परिलक्षित होता है, परन्तु उक्त कोर्स एग्रीगेट का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय प्रावधानित लीड से अनियमित ढंग से करने के कारण सरकारी राशि की क्षति होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निष्कर्षतः निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :- (i) कार्यपालक अभियंता द्वारा उक्त मात्रा का लीड का भुगतान कार्यस्थल से न्यूनतम दूरी पर स्थित चिन्हित शेखपुरा से किया गया है, जो सत्यापन के बाद सही पाया गया है। अतः नियम के विरूद्ध सरकारी कार्य करने एवं राजस्व क्षति होने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। साथ ही उनके द्वारा लीड का अधिक भुगतान किये जाने का मामला भी नहीं बनता है।

(ii) कार्यपालक अभियंता के द्वारा भुगतान किये गये कुल मात्रा 87067.08m3 का सत्यापन जाँच की तिथि को नहीं हुआ था किन्तु अब शेखपुरा खदान से सत्यापित हो चुका है। अतः वास्तविक लीड के बजाय प्रावधानित लीड से अनियमित ढंग से करने के कारण सरकारी राशि की क्षति होने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया :- आरोप-1 :- एकरारनामा के अनुसार विपत्र का भुगतान जिला खनन पदाधिकारी से एम0 एण्ड एन0 फार्म के सत्यापन होने के पश्चात करने का प्रावधान है । एकरारनामा के अनुसार एम0 एण्ड एन0 फार्म सत्यापित नहीं रहने की स्थिति मे विपत्र से निर्धारित दर पर Royality कार्यों का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि एम0 एण्ड एन0 फार्म का सत्यापन कराने मे वक्त लगता है। अतः अंतरिम रूप से चालू विपत्र से Royality काटकर भुगतान किया जाता है एवं सत्यापन होने के पश्चात सत्यापित मात्रा का Royality Release कर दी जाती है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य पेश किया गया है कि वर्तमान में जिला खनन कार्यालय, शेखपुरा के पत्रांक-481 दिनांक-21.06.2017 द्वारा 6,74,000 घन फिट (यथा 19033 घन मी0) मेटल एवं चिप्स की आपूर्ति का सत्यापन प्राप्त है जिसमें उनके द्वारा बगैर सत्यापन के भुगतान किये गये मात्रा (87067.08-71937.87)= 15129.21 घन मी0 शामिल है।

उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता जाँच की तिथि तक 37वें चालू विपत्र तक का (87067.08 घन मी0) कोर्स एग्रीगेट का उपयोग कार्य में किया गया था तथा उक्त तिथि (दिनांक-11.09.2014) तक शेखपुरा एवं पाकुड़ जिला खनन पदाधिकारी से कुल 71937.87 घन मी0 कोर्स एग्रीगेट का सत्यापन हुआ था। इसी के आलोक में (87067.08-71937.87) = 15129.21 घन मी0 कोर्स एग्रीगेट का भुगतान बिना एम0 एण्ड एन0 का सत्यापन कराये ही प्रावधानित खदान शेखपुरा से अनियमित भुगतान का मामला बना है। कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के पत्रांक-449 दिनांक-03.05.2017 से कुल 674000 घन फीट मेटल एवं चिप्स का एम0 एण्ड एन0 फार्म सत्यापन हेतु जिला खनन पदाधिकारी शेखपुरा से अनुरोध किया गया, जिसके क्रम में खनिज विकास पदाधिकारी, शेखपुरा द्वारा अपने पत्रांक-481 दिनांक-21.06.2017 से कुल 647000 घन फीट (यथा 19033 घन मी0) मेटल एवं चिप्स सत्यापन किया गया है। चूँकि वर्तमान में कार्य में प्रत्युक्त कुल कोर्स एग्रीगेट कुल 87067. 08 घन मी0 से अधिक का एम0 एण्ड एन0 फार्म सत्यापन हो चुका है। ऐसी स्थति में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप-01 को प्रमाणित नहीं माना गया।

आरोप -02 :- 37वें चालू विपत्र तक कार्य में प्रत्युक्त कुल कोर्स एग्रीगेट में से 15129.21 घन मी0 के चालान एवं एम0 एण्ड एन0 फार्म का सत्यापन जाँच की तिथि तक नहीं हुआ था। वर्तमान में 15129.21 घन मी0 से अधिक मात्रा शेखपुरा खदान से सत्यापित हैं इस कार्य में न्यूनतम दुरी वाले अनुमोदित खदान शेखपुरा खदान है। सारे विपत्रों में कोर्स एग्रीगेट का न्यूनतम दूरी वाला शेखपुरा खदान के लीड पर ही एकरारनामा के अनुसार भुगतान किया गया है, ऐसी स्थिति में राजस्व की क्षति होने का मामला नहीं बनता है। चूँकि वर्तमान मे एकरारित लीड (शेखपुरा) से भुगतान किये गये कुल कोर्स एग्रीगेट की मात्रा का सत्यापन खनिज विकास पदाधिकारी शेखपुरा के द्वारा कर दी गयी है एवं कोर्स एग्रीगेट के ढुलाई का जिस लीड से भुगतान किया गया एवं सत्यापित लीड के बराबर है, ऐसी स्थिति में माना जा सकता है कि 15129.21 घन मी0 कोर्स एग्रीगेट शेखपुरा खदान से प्राप्त कर कार्य में उपयोग किया गया है। उक्त के आलोक में सरकारी राशि की क्षति होना परिलक्षित नहीं होता है। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत श्री विनोद किशोर सहाय (ID-2366), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति उन्हें आरोपमुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनोद किशोर सहाय (ID-2366), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर संप्रति सेवानिवृत को आरोप मुक्त करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजभूषण प्रसाद, उप-सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 16

25 जनवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2016/217--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, कटिहार के परिक्षेत्राधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के अधीन एजेण्डा सं0-133/201 एवं 133/202 के तहत कोशी नदी के दाँये तट पर क्रमशः सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर वर्ष 2016 बाढ़ के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता द्वारा की गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री ज्ञान प्रकाश लाल, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर से निम्नांकित आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण किया गया :-

(1) कोशी नदी के दाँये तटबंध पर स्थित मदरौनी ग्राम के समीप बाढ़ वर्ष 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य के डाउन स्ट्रीम में 300 मी० विस्तारित भाग में बोल्डर रिभेटमेंट कराने का सुझाव अध्यक्ष विशेष जाँच दल द्वारा दिनांक 24.04.16 को दी गई। तत्‌संबंधी प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लेते हुए विलंब से वांछित प्रस्ताव मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक 1197, दिनांक 11.05.16 से दिनांक 12.05.16 को विभाग को प्राप्त करायी गई जिसकी स्वीकृति विभागीय पत्रांक 1764, दिनांक 26.05.16 से दी गई एवं विस्तारित भाग में दिनांक 02.06.16 को विलंब से कार्य प्रारंभ कराया गया। तब तक नदी का जल स्तर न्यूनतम जल स्तर (LWL) से अधिक हो चुका था। जो स्कोप ऑफ वर्क में बदलाव का कारण बना तथा कराये गये कार्य क्षतिग्रस्त होने तथा ससमय कार्य पूरा नहीं होने का कारक बना। जबकि दिनांक 31.05.16 तक आप मुख्य अभियंता, भागलपुर के प्रभार में रहे हैं। इससे परिलक्षित होता है कि आप नदी में जल स्तर बढ़ने पर कार्य प्रारंभ कराने का इंतजार कर रहे थे ताकि जैसे-तैसे कार्य करा कर सरकारी राशि का गबन हो सके। इस प्रकार विस्तारित कार्य का प्रभाव विभाग में विलंब से समर्पित करने एवं स्वीकृति के उपरांत विलंब से कार्य प्रारंभ करने के कारण कराये गये कार्य का क्षतिग्रस्त होना परिलक्षित करता है कि आपके द्वारा पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती गई है तथा अधिनस्थ पदाधिकारी पर प्रशासनिक नियंत्रण का अभाव रहा है, जिसके लिये आप दोषी है।

(2) सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर कराये गये कटाव निरोधक कार्य की जाच में बोल्डर क्रेटिंग कार्य में Voids मानक से अधिक पाया गया। बोल्डर का वजन, G.I. Wire Crate का मेश का आकार मानक के अनुरूप नहीं पाया गया। साथ ही Boulder Crating कार्य में प्रावधान के अनुरूप G.I. binding wire का उपयोग नहीं पाया गया। इस प्रकार प्राक्कलन/एकरारनामा में निहित विशिष्टि से न्यून विशिष्टि का कार्य होना परिलक्षित करता है कि आपके द्वारा स्थल निरीक्षण एवं कार्यों के पर्यवेक्षण में पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है जिसके लिये आप दोषी हैं।

श्री ज्ञान प्रकाश लाल से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी, समीक्षोपरांत आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-609, दिनांक 26.04.17 द्वारा "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री ज्ञान प्रकाश लाल, अधीक्षण अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया।

श्री लाल द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी में लगभग वही तथ्य उद्धित किया गया है जो उनके द्वारा पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है, जिसमें श्री लाल के विरूद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप प्रमाणित पाया गया है।

इसके अतिरिक्त श्री लाल द्वारा कहा गया है कि मूल रूप से सचिव प्रावैद्यिक मुख्य अभियंता, भागलपुर के पद पर कार्यरत रहते हुए दिनांक 30.04.16 से अधीक्षण अभियंता सिंचाई अंचल, भागलपुर एवं अधीक्षण अभियंता, रूपांकण अंचल, भागलपुर के अतिरिक्त प्रभार में थे। उक्त दोनों अंचल के अधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया सिंचाई प्रमंडल, भागलपुर एवं गंगा पम्प नहर प्रमंडल, शिवनारायणपुर के अधीन विभिन्न एजेण्डों के तहत कुल 08 स्थलों पर कटाव निरोधक कार्य का कार्यान्वयन हो रहा था। आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि चूँकि दिनांक 30.02.16 तक आलोच्य कार्य यथा सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर कार्य की प्रगति क्रमशः 78 प्रतिशत एवं 74 प्रतिशत था तथा शेष 06 अद्‌द स्थलों पर कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्यों की प्रगति समानुपातिक नहीं रहने के कारण इन स्थलों पर विशेष रूप से स्थल निरीक्षण पर्यवेक्षण करते हुए निर्धारित तिथि 15.05.16 तक कार्य पूरा कराने का प्रयास किया गया तथा दिनांक 15.05.16 तक उक्त 06 अद्‌द कार्यों में से एजेण्डा सं0 133/204, 134/61, 136/06 का कार्य पूर्ण कराया गया तथा शेष एजेण्डा सं0-135/21 का 90 प्रतिशत एजेण्डा संख्या 126/39 का 67 प्रतिशत कार्य हो सका। इन स्थलों पर विशेष रूप से समय देने के कारण आलोच्य कार्य का निरीक्षण दिनांक 02.05.16 के पश्चात 31.05.16 को किया गया संभव हो सका।

श्री लाल का उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि आलोच्य कार्य के अतिरिक्त अंचलाधीन चल रहे अन्य कार्यों का निरीक्षण/पर्यवेक्षण से संबंधित न तो कोई निरीक्षण प्रतिवेदन ही उपलब्ध कराया गया है न ही ऐसा कोई अभिलेख ही दिया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि अन्य स्थलों पर चल रहे कार्यों का प्रभार ग्रहण करने की तिथि दिनांक 30.04. 16 से भारयुक्ति की तिथि दिनांक 08.06.16 के बीच नियमित रूप से स्थल निरीक्षण करते हुए गुणवत्ता अनुरूप कार्य कराने का निदेश अधीनस्थ पदाधिकारी को दिया गया है। इनके द्वारा मात्र साक्ष्य के रूप में स्थल पंजी के कुल पन्ना संलग्न किया गया है जिससे दिनांक 04.05.16 एवं 09.05.16 को क्रमशः इस्माईलपुर एवं BCE भागलपुर के पास चल रहे कार्यों के स्थल पंजी पर इनका हस्ताक्षर अंकित है। जबकि अधीक्षण अभियंता का कोडल दायित्व है कि अंचलाधीन कार्यान्वयन किये जा रहे सभी कार्यों का नियमित रूप से निरीक्षण/पर्यवेक्षण करते हुए विशिष्टि एवं गुणवत्ता अनुरूप कार्य कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करना है। परन्तु उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि आलोच्य कार्य में कई तरह की अनियमितता पायी गयी है। श्री लाल द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि आलोच्य कार्य का स्थल निरीक्षण दिनांक 03.05.16 के पश्चात दिनांक 31. 05.16 को मुख्य अभियंता के साथ किया गया है, जबकि यह एक महत्वपूर्ण कार्य था, जो इनकी लापरवाही दर्शाता है।17 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री लाल का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री ज्ञान प्रकाश लाल, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर को पूर्व से संसूचित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखते हुए संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 जनवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2016/218--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर वर्त्तमान में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, कटिहार के परिक्षेत्राधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के अन्तर्गत एजेण्डा सं0-133/201 एवं 133/202 के तहत बाढ़ वर्ष 2016 के पूर्व कोशी नदी के दाँये तट पर क्रमशः सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता द्वारा की गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोपों के लिए श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण किया गया :-

सहोरा एवं मदरौनी ग्राम के निकट बाढ़ वर्ष 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य के विस्तारित कार्य का दिनांक 26.05.16 को विभागीय स्वीकृति संसूचित होने के बावजूद नदी के जल स्तर बढ़ने के बाद न्यूनतम जल स्तर (LWL) से उपर विलंब से दिनांक 02.06.16 को कार्य प्रारंभ कराया गया। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.00 से विस्तारित कार्य कई बिन्दुओं पर क्षतिग्रस्त पाया गया जिससे न्यून विशिष्टि का कार्य कराया जाना एवं जाँच तिथि तक पूर्ण नहीं होना परिलक्षित करता है। जिससे स्पष्ट है कि आपके द्वारा स्थल निरीक्षण एवं कार्यों के पर्यवेक्षण में पदीय दायित्व का निर्वहन नहीं किया गया है, जिसके लिए आप दोषी है।

श्री सिन्हा से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-611, दिनांक 24.06.17 द्वारा "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री राजू कुमार सिन्हा, अधीक्षण अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। श्री सिन्हा द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी में कहा गया है कि मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन में कार्य द्रूत गति से होने के आधार पर कार्य बाढ़ 2016 के पूर्व समाप्त कराने हेतु ठोस प्रबंधन एवं पर्यवेक्षण नहीं करने के लिये दोषी माना जाना उचित नहीं है। जबकि क्रेट लेईंग पंजी से स्पष्ट है कि नाईलन क्रेटिंग कार्य 02.06.16 से प्रारंभ करते हुए उनके प्रभार ग्रहण करने की तिथि दिनांक 08.06.16 तक मात्र 1600 नाईलॉन क्रेट कराया गया था एवं प्रभार ग्रहण के पश्चात दिनांक 09.06.16 से बोल्डर क्रेटिंग कार्य प्रारंभ हुआ है, स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि सहोरा स्थल पर कराये गये कार्यों के क्रेट पंजी से स्पष्ट है कि विस्तारित कार्य में बोल्डर क्रेटिंग कार्य दिनांक 02.06.16 से प्रारंभ करते हुए दिनांक 08.06.16 तक 780 बोल्डर क्रेटिंग का कार्य कराया गया है।

श्री सिन्हा द्वारा कंडिका-2 में वही तथ्य उद्धित किया गया है जो उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण में किया गया था, जिसकी समीक्षा पूर्व में की गयी है। NH-80 पर सवौर के पास पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण दिनांक 20.06.16 से बोल्डर आपूर्ति बाधित होना स्वभाविक है एवं संवेदक के अनुरोध पर दिनांक 23.06.16 को विभागीय बोल्डर (300 घन मी0) संवेदक को उपलब्ध कराकर पूर्ण कराया जाना परिलक्षित है।

श्री सिन्हा द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा विस्तारित भाग का दिनांक 11.05.16 को प्रस्ताव समर्पित करने के बाद दिनांक 26.05.16 अर्थात 16 दिनों बाद विभागीय स्वीकृति प्रदान की गयी। जिसे भी कार्य विलंब से पूरा होने का मुख्य कारण माना जा सकता का विभाग में समीक्षा नहीं की गयी है, जो कार्य को बाढ़ 2016 के पूर्व समाप्त करने में हुए विलंब का अहम कारण है। विभाग द्वारा प्रस्ताव की स्वीकृति में किये गये विलम्ब की जिम्मेवारी क्षेत्रीय पदाधिकारी पर डालना युक्ति संगत नहीं है।

मुख्य अभियंता के पत्रांक-1197, दिनांक 11.05.16 से स्पष्ट है कि विस्तारित कार्य का प्रस्ताव मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा दिनांक 12.05.16 को विभाग में समर्पित किया गया है तथा विभाग द्वारा पत्रांक-1764, दिनांक 26.05.16 से मूल कार्य के अनुरूप ही विस्तारित/अतिरिक्त कार्य की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस प्रकार दिनांक 12.05.16 से 26.05.16 अर्थात 15 दिन विभागीय स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया में व्यतीत होना परिलक्षित है एवं आरोपी का कथन कि विलंब से स्वीकृति प्राप्त होना भी बाढ़ 2016 के पूर्व कराये गये कार्य समाप्त नहीं होने का एक मुख्य कारण रहा है, एवं इसके लिए मुख्यालय स्तर पर बाढ़ मोनिटरिंग संगठन दोषी है। इस संदर्भ में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना से मंतव्य की माँग की गयी, तदालोक में मंतव्य समर्पित किया गया। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्वीकृत Scope of work में बदलाव की सूचना क्षेत्रीय मुख्य अभियंता के द्वारा वस्तुस्थिति कारण एवं औचित्य के साथ विभाग को प्रतिवेदित किया जाना है, जो श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार के द्वारा नहीं किया गया। श्री पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार के द्वारा अपने प्रसंग का हवाला नहीं देकर कार्यपालक अभियंता के पत्र के पत्रांक एवं दिनांक का बिना उल्लेख किये उसका हवाला देना ही इस बात की पुष्टि करता है कि स्वीकृत Scopeबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 18 of work में श्री पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार के द्वारा किये गये बदलाव की सूचना उनके द्वारा विभाग को नहीं दी गई।

तत्कालीन मुख्य अभियंता, भागलपुर के द्वारा विषयक अतिरिक्त कार्य हेतु स्पष्ट प्रस्ताव समर्पित नहीं किया गया, बल्कि उनके पत्रांक-1197, दिनांक 11.05.2016 से स्थलीय वस्तु स्थिति से संबंधित प्रतिवेदन अपने मंतव्य के साथ समर्पित किया गया। उक्त पत्र के साथ नदी के Regime Plan जलस्तर आँकड़ा एवं अन्य वांछित तकनीकी अभिलेख भी संलग्न नहीं किया गया था।

बाढ़ मोनिटरिंग अंचल के द्वारा त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से नदी का Regime Plan जलस्तर एवं अन्य वांछित अभिलेखों की माँग दूरभाष पर की गई। दिनांक 16.05.2016 को मात्र नदी का Regime Plan उपलब्ध कराया गया। बाढ़ मोनिटरिंग अंचल के द्वारा अग्रेतर कार्रवाई की गई तथा दिनांक 26.05.2016 को विभागीय आदेश संसूचित किया गया। स्पष्ट है कि दिनांक 16.05.2016 को नदी का Regime Plan प्राप्त होने पर दिनांक 17.05.2016 से दिनांक 26.05.2016 के बीच उपलब्ध मात्र 7 (सात) कार्य दिवसों में मामले का निष्पादन किया गया।

कार्य विलंब से पूरा होने के संदर्भ में श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार एवं श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा दिये गये बचाव बयान के संबंध में तत्कालीन मुख्य अभियंता, भागलपुर के दिनांक 31.05.2016 के स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित कार्य की स्थिति श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार द्वारा दिनांक 03.06.16 को स्थल निरीक्षण के क्रम में कार्य पूर्ण करने हेतु दिये गये निदेश एवं पुनः दिनांक 10.06.2016 को स्थल निरीक्षण के क्रम में पुर्नालोकन के अनुसार कार्य पूर्ण करने हेतु दिये गये निदेश से स्पष्ट है कि कार्य को 15.06.2016 तक पूर्ण किया जा सकता था जो कि संबंधित क्षेत्रीय वरीय पदाधिकारियों श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, एवं श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा विषयक कार्य का समुचित प्रबंधन/पर्यवेक्षण नहीं किये जाने के कारण पूर्ण नहीं हो सका।

उक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार एवं श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा अपने बचाव बयान में अंकित "विलंब से स्वीकृति प्राप्त होना भी बाढ़ 2016 के पूर्व कार्य समाप्त नहीं होने का एक मुख्य कारण रहा है" तथ्यों से परे एवं पूर्णतः आधारहीन है।

वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार के द्वारा Scope of work में बदलाव की सूचना विभाग को नहीं दी गयी है तथा विस्तारित अतिरिक्त कार्य विलंब से पूरा होने का मुख्य कारण संबंधित मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के द्वारा समुचित प्रबंधन/पर्यवेक्षण नहीं किया जाना है एवं आरोपी का कथन कि विलंब से स्वीकृति प्राप्त होना भी बाढ़ 2016 के पूर्व कार्य समाप्त नहीं होने का एक मुख्य कारण रहा है तथ्यों से परे एवं पूर्णतः आधारहीन है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, भागलपुर का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक मेें श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर को पूर्व में संसूचित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखते हुए संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 जनवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2016/219--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर वर्त्तमान में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, कटिहार के परिक्षेत्राधीन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के अन्तर्गत एजेण्डा सं0-133/201 एवं 133/202 के तहत बाढ़ वर्ष 2016 के पूर्व कोशी नदी के दाँये तट पर क्रमशः सहोरा एवं मदरौनी स्थल पर कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच उड़नदस्ता द्वारा की गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार से निम्नांकित आरोप के लिए प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण किया गया :-

सहोरा एवं मदरौनी ग्राम के निकट बाढ़ वर्ष 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य के विस्तारित कार्य का दिनांक 26.05.16 को विभागीय स्वीकृति संसूचित होने के बावजूद नदी के जल स्तर बढ़ने के बाद न्यूनतम जल स्तर (LWL) से उपर विलंब से दिनांक 02.06.16 को कार्य प्रारंभ कराया गया। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.00 से विस्तारित कार्य कई बिन्दुओं पर क्षतिग्रस्त पाया गया जिससे न्यून विशिष्टि का कार्य कराया जाना एवं जाँच तिथि तक पूर्ण नहीं होना परिलक्षित करता है। जिससे स्पष्ट है कि आपके द्वारा स्थल निरीक्षण एवं कार्यों के पर्यवेक्षण में पदीय दायित्व का निर्वहन नहीं किया गया है, जिसके लिए आप दोषी है।19 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 श्री पासवान से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरांत आरोप को प्रमाणित पाते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-610, दिनांक 26.04.17 द्वारा "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसमें लगभग वही तथ्य उद्धित किया गया है जो उनके द्वारा पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण में अंकित है। उसके अतिरिक्त श्री पासवान द्वारा कहा गया है कि -

विभाग द्वारा स्वीकृत Scope of work में बदलाव की सूचना कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया द्वारा प्रमंडलीय Email [email protected] से विभागीय Email id- [email protected] पर दिनांक 11.06.16 को 10ः08AM बजे मोनिटरिंग शाखा को भेजा गया है। उक्त कथन की संदर्भित कोई साक्ष्य श्री पासवान द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि मूल कार्य दिनांक 15.05.16 को पूर्ण हो जाने के पश्चात विभाग द्वारा काफी विलम्ब से दिनांक 26.05.16 को अतिरिक्त कार्य की स्वीकृति देने एवं नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने के कारण LWL से उपर कार्य प्रारंभ करना पड़ा जबकि मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा दिनांक 11.05.16 को ही विस्तारित कार्य का प्रस्ताव समर्पित किया गया था। अतएव कार्य परिस्थितिजन्य विलंब से पूरा हुआ।

मुख्य अभियंता, भागलपुर के पत्रांक-1197, दिनांक 11.05.16 से स्पष्ट होता है कि अतिरिक्त कार्य का प्रस्ताव मुख्य अभियंता, भागलपुर द्वारा दिनांक 12.05.16 को विभाग को समर्पित किया गया है तथा विभागीय पत्रांक-1764, दिनांक 26.05. 16 से स्पष्ट है कि मूल कार्य के अनुरूप ही विस्तारित (अतिरिक्त) कार्य की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस प्रकार दिनांक 12.05.16 से 26.05.16 तक का समय स्वीकृति की प्रक्रिया में व्यतीत होना परिलक्षित है। आरोपी का कथन कि विलम्ब से स्वीकृति प्राप्त होना भी बाढ़ 2016 के पूर्व कार्य समाप्त नहीं होने का एक मुख्य कारण रहा है, एवं इसके लिए मुख्यालय स्तर से बाढ़ मोनिटरिंग संगठन के पदाधिकारी को दोषी बताया गया है। इस संदर्भ में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना से मंतव्य की माँग की गयी। अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण तथा बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग संगठन द्वारा मंतव्य समर्पित किया गया। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्वीकृत Scope of work में बदलाव की सूचना क्षेत्रीय मुख्य अभियंता के द्वारा वस्तुस्थिति कारण एवं औचित्य के साथ विभाग को प्रतिवेदित किया जाना है, जो श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार के द्वारा नहीं किया गया। श्री पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार के द्वारा अपने प्रसंग का हवाला नहीं देकर कार्यपालक अभियंता के पत्र के पत्रांक एवं दिनांक का बिना उल्लेख किये उसका हवाला देना ही इस बात की पुष्टि करता है कि स्वीकृत Scope of work में श्री पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार के द्वारा किये गये बदलाव की सूचना उनके द्वारा विभाग को नहीं दी गई।

तत्कालीन मुख्य अभियंता, भागलपुर के द्वारा विषयक अतिरिक्त कार्य हेतु स्पष्ट प्रस्ताव समर्पित नहीं किया गया, बल्कि उनके पत्रांक-1197, दिनांक 11.05.2016 से स्थलीय वस्तु स्थिति से संबंधित प्रतिवेदन अपने मंतव्य के साथ समर्पित किया गया। उक्त पत्र के साथ नदी के Regime Plan जलस्तर आँकड़ा एवं अन्य वांछित तकनीकी अभिलेख भी संलग्न नहीं किया गया था।

बाढ़ मोनिटरिंग अंचल के द्वारा त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से नदी का Regime Plan जलस्तर एवं अन्य वांछित अभिलेखों की माँग दूरभाष पर की गई। दिनांक 16.05.2016 को मात्र नदी का Regime Plan उपलब्ध कराया गया। बाढ़ मोनिटरिंग अंचल के द्वारा अग्रेतर कार्रवाई की गई तथा दिनांक 26.05.2016 को विभागीय आदेश संसूचित किया गया। स्पष्ट है कि दिनांक 16.05.2016 को नदी का Regime Plan प्राप्त होने पर दिनांक 17.05.2016 से दिनांक 26.05.2016 के बीच उपलब्ध मात्र 7 (सात) कार्य दिवसों में मामले का निष्पादन किया गया।

कार्य विलंब से पूरा होने के संदर्भ में श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार एवं श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा दिये गये बचाव बयान के संबंध में तत्कालीन मुख्य अभियंता, भागलपुर के दिनांक 31.05.2016 के स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित कार्य की स्थिति श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार द्वारा दिनांक 03.06.16 को स्थल निरीक्षण के क्रम में कार्य पूर्ण करने हेतु दिये गये निदेश एवं पुनः दिनांक 10.06.2016 को स्थल निरीक्षण के क्रम में पुर्नालोकन के अनुसार कार्य पूर्ण करने हेतु दिये गये निदेश से स्पष्ट है कि कार्य को 15.06.2016 तक पूर्ण किया जा सकता था जो कि संबंधित क्षेत्रीय वरीय पदाधिकारियों श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता एवं श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्का0 अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा विषयक कार्य का समुचित प्रबंधन/पर्यवेक्षण नहीं किये जाने के कारण पूर्ण नहीं हो सका।

उक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सियाराम पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बा0नि0 एवं ज0नि0, कटिहार एवं श्री राजू कुमार सिन्हा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, भागलपुर के द्वारा अपने बचाव बयान में अंकित "विलंब से स्वीकृति प्राप्त होना भी बाढ़ 2016 के पूर्व कार्य समाप्त नहीं होने का एक मुख्य कारण रहा है" तथ्यों से परे एवं पूर्णतः आधारहीन है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 20 वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होता है श्री पासवान, तत्कालीन मुख्य अभियंता, कटिहार के द्वारा Scope of work में बदलाव की सूचना विभाग को नहीं दी गयी है तथा विस्तारित अतिरिक्त कार्य विलंब से पूरा होने का मुख्य कारण संबंधित मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के द्वारा विषयक कार्य का समुचित प्रावधान/पर्यवेक्षण नहीं किया जाना है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री सियाराम पासवान का पूर्णविलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सियाराम पासवान, तत्का0 मुख्य अभियंता, कटिहार को पूर्व में संसूचित दण्ड "दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को यथावत रखते हुए संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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30 जनवरी 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(पट0)-03-39/2018/255--श्री विनय प्रसाद, आई0डी0-जे-7429, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, बक्सर द्वारा अपने स्थानांतरण हेतु आवेदनपत्र सीधे स्थानीय माननीय सांसद महोदय को दिया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित आवेदन पत्र तत्का0 माननीय राज्य मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के पत्रांक-1453/कैम्प, दिनांक 15.10.2018 द्वारा विभाग को प्राप्त हुआ। स्थानांतरण/पदस्थापन हेतु जन प्रतिनिधि/बाह्‌य व्यक्ति को सीधे आवेदन देना स्थापित नियमों के विरूद्ध है। अतः श्री प्रसाद के विरूद्ध निम्न आरोप परिलक्षित किया गया -

1. मंत्रीमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-434, दिनांक 01.03.2007 के कंडिका-1(ग) का उल्लंघन।

2. बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-22 का उल्लंघन। उक्त आरोपों के लिए श्री प्रसाद से अवर सचिव (प्र0) का पत्रांक-8/विविध-10-03/ 2018-4153, दिनांक 08.11. 18 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। जिसमें श्री प्रसाद द्वारा आरोपों को स्वीकार करते हुए नियमों की जानकारी नहीं होने और भविष्य में ऐसी पुनरावृति नहीं करने की बात कही गई है।

श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उनके उक्त कृत के लिए "चेतावनी" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित दण्ड श्री विनय प्रसाद, सहायक अभियंता को अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रमा प्रसाद, अवर सचिव।

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11 फरवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)01-04/2009-280--श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अन्तर्गत वर्ष 2000-01 में जानकी शाखा नहर के पुर्नस्थापन कार्य एवं सी0डी0 संरचना की मरम्मति संबंधित एकरारनामा सं0-25F2/2000-01 एवं 29F2/2000-01 के तहत कराये गये कार्य का भुगतान लंबित रहने के कारण संवेदक श्री किशोर जयसवाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में वाद सं0-14371/07 एवं 15090/07 दायर किया गया। उक्त वाद में पारित न्याय निर्णय के आलोक में दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित करने हेतु विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप :-

कार्यपालक अभियंता के द्वारा प्रेषित कार्य प्रतिवेदन को बिना जाँचे ही भुगतान हेतु आवंटन के लिए अनुशंसा करने। उक्त आरोप के लिए श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-577, दिनांक 05.04.2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु-

"विभागीय पत्रांक-353, दिनांक 03.03.2001 की कंडिका-2 में अंकित निदेश की अवहेलना करते हुए विभाग से आवंटन हेतु उच्चाधिकारियों का अनुशंसा करना"। असहमति के उक्त बिन्दु पर श्री पासवान से विभागीय पत्रांक-98, दिनांक 22.01.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री पासवान द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया, समीक्षोपरांत वित्तीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण आरोपमुक्त करने का निर्णय लिया गया।

उक्त प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय के अनुमोदन के क्रम में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा मामले की पुनः नये सिरे से जाँच हेतु विभागीय जाँच आयुक्त को Remand कर दिया गया, तदोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः नये सिरे से जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।21 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत श्री पासवान से विभागीय पत्रांक 1816, दिनांक 09.10.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। तदालोक में श्री पासवान द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा का उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें लगभग वही तथ्य दोहराते हुए कहा गया कि संवेदक के अवशेष राशि के भुगतान के लिए कार्यपालक अभियंता नरपतगंज से आवंटन की माँग की गयी, जिसे जाँचोपरान्त मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ को अनुशंसा किया गया स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि जाँच में अनुशंसा करने का कोई उल्लेख नहीं पाया गया। उक्त पत्र में मात्र अंकित है कि प्रासंगिक पत्र अर्थात कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-138 दिनांक 12.03.2005 की प्रति संलग्न करते हुए श्री किशोर कुमार जायसवाल के द्वारा वर्ष 2000-01 में कराये गये कार्य का दायित्व भुगतान की अनुशंसा की जाती है। विदित है कि विभागीय पत्रांक-353 दिनांक 03.03.2001 से आलोच्य कार्य के भुगतान हेतु दिशा र्निदेश निर्गत है जिसमें दिये गये निदेश के अनुसार 40% अंतरिम भुगतान करने, शेष कार्य पूर्ण करने एवं शेष राशि के भुगतान हेतु मिट्टी कार्य 100% कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँच कर उड़नदस्ता से जाँच कराते हुए भुगतान करना है, इसके बावजूद कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-138 दिनांक 12.03.2005 से शत-प्रतिशत भौतिक प्रगति होने एवं विपत्र का 60% भुगतान के अनुशंसा को श्री पासवान द्वारा पत्रांक-318 दिनांक 14.3.2005 से बिना जाँचे अनुशंसा की गयी। इस प्रकार स्पष्ट है कि विभागीय दिशा निदेश के बावजूद तथ्यों के जाँच-पड़ताल किये बिना ही इनके द्वारा अनुशंसा की गयी है। यदि श्री पासवान द्वारा सम्पूर्ण मामले के जाँचोपरान्त विभागीय निदेश का अनुपालन कराया जाता तो मामला न तो न्यायालय में होता एवं न ही दायित्व समिति के सुपुर्दगी की स्थिति बनती, इसलिए श्री पासवान का द्वितीय कारणपृच्छा स्वीकार योग्य नहीं है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री चन्द्रशेखर पासवान तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः- "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षो तक"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की माँग की गयी, तदालोक में आयोग द्वारा पत्रांक-2629 दिनांक-31.12.2018 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति दी गयी है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री चन्द्रशेखर पासवान, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत को निम्नांकित दण्ड "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षो तक" अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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14 फरवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुक0)मोति0-19-17/2001/302--वर्ष 1982-83 में तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया के अन्तर्गत सीमेंट आपूर्ति कार्य में बरती गयी अनियमितता यथा 470 मि॰ टन॰ गायब करने, 204 बोरे सीमेंट में छाई एवं धूल मिलाने के आरोप के लिए श्री कुलदीप नारायण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, केसरिया को विभागीय आदेश सं॰-2597 दि॰ 27.08.82 से निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प सं॰ 3199 दि॰ 10.10.83 से विधिवत विभागीय कार्यवाही चलाई गयी। ततपश्चात विभागीय आदेश 165 दि॰ 21.03.87 के द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया एवं विभागीय कार्यवाही को निरस्त किया गया। पुनः विभागीय आदेश सं॰ 46 दि॰ 06.05.88 से श्री सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं॰ 573 दि॰ 04.06.88 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए सेवा से बर्खास्तगी के निर्णय के आलोक में उनसे विभागीय पत्रांक-3424, दिनांक 19.12.97 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। CWJC No. 6774/1988 में दि॰ 14.09.88 में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश एवं द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में विभागीय पत्रांक 3424 दि॰ 19.12.97 को अगले आदेश तक स्थगित रखा गया, तब तक विभागीय कार्यवाही पर रोक रखा गया। CWJC No. 2765/1998 में दि॰ 09.04.98 को पारित आदेश में उनके द्वारा दायर रिटपिटीशन डिसमिश हो गया। उक्त न्यायनिर्णय के पश्चात पुनः विभागीय पत्रांक 881 दिनांक 16.04.99 द्वारा श्री सिंह सेवा से बर्खास्तगी के निर्णय पर पुनः द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा की गई एवं निम्न आरोप के लिये इन्हें बर्खास्तगी निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं होगा का दण्ड विभागीय अधिसूचना सं॰ 1271 दि॰ 30.10.2000 से संसूचित की गयी :- (i) वर्ष 1982 में तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया में ट्रक से गंडक परियोजना हेतु सिमेंट बंजारी फैक्ट्री से मोतिहारी तक ढुलाई संवेदक के माध्यम से हो रही थी। ढुलाई दिनांक 01.03.82 से 17.04.82 तक हुई जिसमें 470 मि॰ टन सीमेंट मोतिहारी में प्राप्त नहीं हुआ जो इनके द्वारा गबन किया गया। उक्त दण्डादेश पर पुनर्विचार हेतु एक अभ्यावेदन इनके द्वारा पूर्व में दिया गया था जिसे अस्वीकृत दिया गया। श्री सिंह द्वारा दायर CWJC No. 7143/2001 में दिनांक 13.08.2018 को पारित आदेश के आलोक में उनके द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन के अस्वीकृति संबंधी विभागीय आदेश दिनांक 04.06.2001 को विभागीय आदेश सं॰ 118 सहपठित ज्ञापांक 2362 दि॰ 15.11.18 द्वारा निरस्त करते हुए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक 2363 दि॰ 15.11.18से पुनर्विचार22 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अभ्यावेदन की माँग की गयी। जिसके क्रम में श्री सिंह से पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 06.02.18 को प्राप्त हुआ, जिसका मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :- (i) That the applicant and one SMA hami Jr. Engg. was deputed to Banjari Cement factory to receive 7723 MT cement vide memo no. 933 dt. 23-02-1982 issued by E.E Tirhut Canal division Chakia

(ii) That E.E. Tirhut Canal Division Chakia vide memo no. 55 dt. 26-02-1982 sent the list of Contractors along with quantity to be Transported by each of Contractors.

(iii) That on the request of E.E. Chakia to EE Sone Baraj Sub division indrapuri vide memo no. 427 dt. 03-03-1982 arranged godown for storage of cement on the same letter the EE, Tirhut Canal Division chakia in writing SMA Hami Jr. Engg. was made in charge of the godown.

(iv) That when missing of Cement was noticed matter was referred to learned govt. pleader for his opinion who vide reported dt. 09.07.1982 opined that the cement was duly entrusted to the transporters there for applicant and Jr. Engg. are not responsible (v) That this applicant vide letter dt. 10.07.1982 requested the E.E. Chakia for loading FIR but not direction was issued. but instead of loging FIR aganist the Contractor EE lodged Motihari PS Case no. 175/82 against the applicant and SMA Hami

(vi) That the applicant appeared before SP where investigating officer of Motihari PS case no. 175/82 was also present SP submitted and their agents have been held to be guilty and net the Petitioner

(vii) That vide memo no. 3199 dt. 10.10.1983 departmental proceeding was initiated against the petitioner that the applicant came to know that memo of charge dt. 11.10.1983 was prepared but the same was not served report upon the petitioner that the Ex-parte enquiry report was submitted by learned enquiry officer holding petitioner to be quality. That in the meantime suspension of the applicant was revoked vide memo no. 165 dt. 21.03.87 keeping departmental proceeding pending.

(viii) That again Fresh departmental proceeding was initiated vide momo no. 379 dt.

19.05.1987 and appoint enquiry officer Sri R.C. Jha, Superintending Engg.

(ix) That the applicant was again suspended vide memo no. 444 dt. 06.05.1988 due to . Criminal Case pending against the applicant. (x) That again fresh departmental proceeding (is 3rd times) was initiated vide memo no. 573 dt. 04.06.1988 and Sri Jayshankar Thakur C.E. Motihari was appointed as enquiry officer.

(xi) That inquiry officer of 2nd Det. Pro. namely Sri R.C. Jha submitted his enquiry reported dt. 23.07.1987

(xii) That there after 2nd show cause notice contained in memo no. 881 dt. 16.04.99 was issued to the applicant without annexing the copy of enquiry report.

(xiii) That out of sudden the applicant was dismissed from service vide memo no. 1271 dt. 30.10.20000 that aggrieved by award of punishment, the application preferred appeal dt. 23.01.2001.

(xiv) When no order was passed in the appeal filed. he preferred CWJC No. 7143 of 2001. The Court was stated that the appellate authority had Examined the appeal and same has been rejection on 06.06.2001 if self. There after the Hon'ble court set a side the appellate order vide order dt. 13.08.2018 with liability to appellate authority to pass speaking order after hearing the applicant. The applicant in filing the present memo of appeal.

(xv) That the presenting officer at no point of time has produced any evidence, documentary or oral, to prove that it was the duty of applicant to verify. whether cement handed over to be allotted contractor had reached to its destination or not. it will be relevant to mention their in that this application and Mr. hami was deputed to receive cement from23 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 banjari factory and the cement so received to given to recognized Transporter who was under obligation to transport the cement so received to the respective destination. thus the duty of the applicant was limited to received cement from the factory and to hand over either to the recognized transporter or the godown in charge Mr. hami

(xvi) That in police investigate it has come that this applicant has no role to play in loss of cement, but EE Sri BP sahani is main accused. it will be noted here in that this EE had chosen the Transporter and decided the quantity each Transporter will carry the cement. Thus, when this applicant did not shortlisted the Transporter and that also with the fixed quantity the how the responsibility of Transport to carry cement to particular destination can be shifted to this applicant. Otherwise also from the enquiry report. it will be relevant that this applicant has been found guilty only for the reason that he did not physically verified whether cement reached the destination or not, but the learned enquiry officer failed to appreciate, that it was not humanly possible verify whether cement reached its destination or not. it may be important to noted that what quantity has to be sent to which destination was to be decided by E.E and by this applicant.

(xvii) That it is further submitted that impugned order of Punishment contained in memo no. 1271 dt. 30.10.2000 in none speaking and has been awarded without applicant of Judicial mind and without considering the materials made available by applicant. समीक्षा :- श्री कुलदीप नारायण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, चकिया के विरूद्ध आरोप का मुख्य अंश है कि वर्ष 1982 में तिरहुत नहर प्रमंडल चकिया में ट्रक से गंडक परियोजना हेतु इनको बंजारी सिमेंट फैक्टरी में सिमेंट प्राप्त कर बंजारी से मोतिहारी तथा आसपास के स्थान तक ढुलाने हेतु प्रतिनियुक्त किया गया था। उन्होंनेे बंजारी फैक्ट्री से 5995 मैट्रीक टन सिमेंट प्राप्त किया, किन्तु उसमें से 470 मैट्रिक टन सिमेंट मोतिहारी नहीं पहुँचा। सिमेंट ढुलाई का कार्य दिनांक 01.03.82 से 17.04.82 तक हुई। इस प्रकार कुल 470 मे॰ टन सिमेंट गायब होने में इनकी सहभागिता पायी गयी। श्री सिंह द्वारा अपने अपील अभ्यावेदन के कंडिका 1 से लेकर 29 तक में उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही, निर्गत दण्डादेश तथा इनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका में निर्गत आदेश का उल्लेख किया गया है। इनके द्वारा आरोप के संदर्भ में मुख्य रूप से कहा गया है कि सिमेंट ढुलाई कार्य में इनका दायित्व था कि बंजारी फैक्ट्री से सिमेंट प्राप्त कर कार्यपालक अभियंता द्वारा नियुक्त ट्रान्सपोर्टर को Handover करना। इनका यह दायित्व नहीं था कि Transporter सिमेंट Destination स्थान पर पहुँचा रहे है अथवा नहीं। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 933 दि॰ 28.02.82 से श्री सिंह एवं एस॰एम॰ हामी कनीय अभियंता को 7725 मे॰ टन सिमेंट प्राप्त करने हेतु प्रतिनियुक्त किया गया था तथा पत्रांक VPS/82/55 दि॰ 26.02.82 से श्री सिंह को बंजारी में अस्थाई गोदाम का निर्माण कर सिमेंट रखने एवं ढुलाई का प्रबंध करने का आदेश दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि सिमेंट क्रयादेश के विरूद्ध बंजारी सिमेंट फैक्ट्री से सिमेंट प्राप्त करने एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा नियुक्त किये गये Transporter के माध्यम से ढुलाई कराने का कार्य दिया गया था अर्थात इनका दायित्व बंजारी फैक्ट्री से सिमेंट प्राप्त कर कार्यपालक अभियंता के स्तर से नियुक्त संवेदक अथवा कार्यपालक अभियंता के स्तर से प्राधिकृत संवेदक के प्रतिनिधि को हस्तपावति पर देना था। इनके द्वारा पूर्व के स्पष्टीकरण में कहा गया है कि इनके द्वारा बंजारी फैक्ट्री से कुल 5995 मे॰ टन सीमेंट प्राप्त किया तथा कुल 5992 मे॰ टन सिमेंट दिनों दिन संवेदक अथवा उसके प्रतिनिधि को ढुलाई कराने हेतु प्राप्त कराया गया। परन्तु इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जो स्थापित कर सके की संवेदक के प्रतिनिधि जिनको सिमेंट ढुलाई हेतु दिया गया, वे सभी प्रतिनिधि कार्यपालक अभियंता के स्तर से प्राधिकृत थे। जबकि कुछ संवेदक ने इन्कार किया है कि उनलोगों ने इस मात्रा का सिमेंट (470-3)=467 मे॰टन श्री सिंह से प्राप्त किया है, जबकि श्री सिंह भलीभाँति अवगत थे कि किन-किन संवेदक के माध्यम से सिमेंट ढुलाई कराना है। इनके द्वारा पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण में स्वयं स्वीकार किया गया है कि इनके द्वारा कुल 5995 मे॰ टन सिमेंट प्राप्त किया गया एवं कुल 5992 मे॰ टन संवेदक को ढुलाई हेतु हस्तगत कराया गया। अर्थात 3 मे॰ टन सिमेंट इनके द्वारा किसी भी संवेदक को नहीं दिया गया है। श्री सिंह का यह कथन कि कार्यपालक अभियंता द्वारा सिमेंट ढुलाई कार्य हेतु ट्रान्सपोर्टर/संवेदक नियुक्त किया गया एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा ही प्रति संवेदक सिमेंट ढुलाई हेतु मात्रा का निर्धारण किया गया। ऐसी स्थिति में ट्रान्सपोर्टर के द्वारा गंतव्य स्थान पर सिमेंट ढुलाई करने की जबावदेही थी न कि श्री सिंह की, स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि P.W.D Code के अनुसार हर पदाधिकारी का दायित्व निर्धारित है। इसी दायित्व के तहत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपनी सक्षमता के तहत सिमेंट ढुलाई हेतु संवेदक (Transporter) का चयन करते हुए सिमेंट की मात्रा का निर्धारण किया जाना परिलक्षित है। जिसकी सूचना श्री सिंह को पत्र के माध्यम से दिया गया अर्थात श्री सिंह भलीभाँति अवगत थे कि किस संवेदक को कितनी मात्रा में सिमेंट की ढुलाई करना है। वास्तविकता यह है कि इस पूरे प्रकरण में श्री सिंह के द्वारा फैक्ट्री24 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 से कुल 5995 मे॰ टन सिमेंट प्राप्त किया गया एवं गन्तव्य स्थान में 470 में॰ टन सिमेंट कम पहुँचा। श्री सिंह यह स्थापित करने में नाकाम रहे है कि इनके द्वारा फैक्ट्री से प्राप्त सिमेंट की पूरी मात्रा संवेदक को अथवा सक्षम प्राधिकार के स्तर से प्राधिकृत संवेदक के प्रतिनिधि को ही सिमेंट हस्तगत कराया गया है। इस मामले में नियुक्त दोनों संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उपरोक्त तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। अतएव सिमेंट के गबन होने में इनकी संलिप्तता परिलक्षित है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरांत श्री सिंह से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री कुलदीप नारायण सिंह, तत्का0 सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, केसरिया द्वारा विभागीय अधिसूचना संख्या-1271, दिनांक 30.10.2000 द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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21 फरवरी 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-02-03/2018/337--श्री सुरेश्वर बैठा, तत्कालीन सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल, खगड़िया द्वारा जिलास्तरीय बैठकों में बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने, मुख्यमंत्री सात (07) निश्चय योजना से संबंधित गली-नाली निर्माण योजनाओं के प्राक्कलन निर्माण, निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण में कोताही बरतने, मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अन्तर्गत खगड़िया विधानसभा क्षेत्र से संबंधित वर्ष 2015-16 की योजनाओं को लंबित रखने, प्रशासनिक स्वीकृति के बावजूद भी कई योजनाओं में कार्य प्रारम्भ नहीं करने संबंधित जिलाधिकारी, खगड़िया द्वारा प्रतिवेदित आरोप की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री बैठा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-09(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 02. निलंबन अवधि में श्री बैठा का मुख्यालय केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, अनिसाबाद निर्धारित किया जाता है। 03. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भाा देय होगा। 04. श्री बैठा के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र गठित करते हुए आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण करने संबंधित पत्र अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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21 फरवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-02/2019-343--श्री पुरेन्द्र सिंह (आई0डी0 सं०-3714), अवर प्रमंडल पदाधिकारी, शीर्ष कार्य प्रमंडल-2, वाल्मीकिनगर को जलापूर्ति प्रतिष्ठान के वार्षिक सम्पोषण का प्राक्कलन प्रमंडल से लौटाये जाने के मामले में अपने कार्यपालक अभियंता से गाली-गलौज करने तथा मारपीट करने एवं अभद्र व्यवहार करने के मामले में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में प्रतिवेदित आरोपों के लिए सरकार के स्तर पर पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री सिंह का मुख्यालय मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

4. श्री सिंह के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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28 फरवरी 2019

सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-14/2016-430--श्री राजेश कुमार (आई0डी0-3599), कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नावानगर के विरूद्ध सिंचाई प्रमंडल, नावानगर के अन्तर्गत निर्माणाधीन मलई बराज योजना के निर्माण में अनियमितता बरतने के मामले में विभागीय स्तर से गठित संयुक्त जाँच समिति के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2069, दिनांक 28.11.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित है। पुनः उक्त मामले में तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई एवं सम्यक विचारोपरांत श्री राजेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल,25 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 नावानगर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए पूरक आरोप पत्र गठित करने का निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश कुमार (आई0डी0-3599), सिंचाई प्रमंडल, नावानगर को तत्काल प्रभाव से विभागीय अधिसूचना संख्या-662, दिनांक 14.03.18 द्वारा निलंबित किया गया।

श्री कुमार दिनांक 31.01.2019 को सेवानिवृत हो चुके हैं। अतएव श्री राजेश कुमार, कार्यपालक अभियंता (सेवानिवृत) को सेवानिवृति की तिथि दिनांक 31.01.2019 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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1 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पट0)03-07/2005-454--श्री रियाज अहमद आतिश, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला, नवादा/तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत) के विरूद्ध उक्त पदस्थापन अवधि में विभिन्न आरोपों के संबंध में तीन अलग-अलग विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसका सार निम्नवत है :-

(क) संचिका सं0-22/नि0सि0(पट0)-03-07/2005 -श्री आतिश के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला (नवादा) में पदस्थापन काल से संबंधित श्री रामदेव प्रसाद सिंह, सहायक अभियंता, सेवानिवृत से प्राप्त परिवाद पत्र की जाँच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत प्रथम द्रष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिए श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी :-

(I) व्यक्तिगत दूरभाष सं0-25090 के कॉल शुल्क 5,934/- (पाँच हजार नौ सौ चौतीस रूपये) का भुगतान सरकारी मद से करना।

(II) अधीनस्थ सहायक अभियंता के एक ही वेतन को दो बार निकासी करने के फलस्वरूप उस अधिकारी विशेष के सामान्य भविष्य निधि मद में 660/- (छः सौ साठ रू0) की कटौती राशि करवाकर सरकार को इतनी ही राशि का वित्तीय घाटा लगवाना।

(III) अनुसेवकों को वर्दी आपूर्ति में घोटाला करना। दस (10) व्यक्तियों को 2,817/- (दो हजार आठ सौ सतरह रू0) की देय वर्दी आपूर्ति पर 10,000/- (दस हजार) रू0 का भुगतान दिखाना। इस तरह सरकार को 7,183/- (सात हजार एक सौ तिरासी रू0) की वित्तीय क्षति पहुँचाना।

उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड हेतु श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं उक्त तीनों आरोपों में से मात्र दो आरोप सं0-(I) एवं (III) प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए पाँच (5) प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

(ख) संचिका सं0-22/नि0सि0(पट0)-03-09/2006 -श्री आतिश के विरूद्ध दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बाँध एवं बादलगढ (रोहतास) स्थल पर दो अद्‌द हाई मास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में कतिपय अनियमितता बरतने का आरोप है। तत्संबंधी प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री आतिश पर बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री आतिश के विरूद्ध निम्नलिखित आरोप प्रमाणित पाये गये :-

(I) वर्ष 2003-04 में दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बाँध एवं बादलगढ रोहतास स्थल पर दो अद्‌द हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन हेतु निविदाओं के निस्तार में अनियमितता बरतने, दर निर्धारण में गडबड़ी करने एवं विभागीय क्रय समिति के समक्ष पूर्ण तथ्यों को नहीं रखने के पीछे सरकार को वित्तीय क्षति पहुँचाने की आपराधिक मंशा थी रू0 4,99,777/-के स्थान पर रू0 6,55,544/-प्रति सेट की दर इन्होंने अनुमोदित किया एवं अतिरेक भुगतान कराया।

(II) जाँच पदाधिकारी का स्पष्ट मंतव्य है कि दिनांक 17.12.03 को आयोजित क्रय समिति के लिए तैयार संलेख में पूर्व के आमंत्रित दो निविदाओं के दर को उद्धत नहीं करना एवं मौखिक रूप से इसकी जानकारी क्रय समिति को नहीं देना इनके आपराधिक मंशा को प्रमाणित करता है। इसका अभिप्राय आपूर्तिकर्त्ता मेसर्स एक्सेल को आर्थिक लाभ पहुँचाना था। इस कारण मंशा को प्रमाणित करता है। इसका अभिप्राय आपूर्तिकर्त्ता मेसर्स एक्सेल को आर्थिक लाभ पहुँचाना था। इस कारण विभाग को प्रति सेट 1,55,000/- रू0 की दर से दो हाई मास्ट लाईट की आपूर्ति पर 3,10,000/- (तीन लाख दस हजार) रू0 का घाटा विभाग को उठाना पड़ा।26 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभाग द्वारा दस (10) वर्षों तक शत-प्रतिशत पेंशन के भुगतान पर रोक का दण्ड प्रस्तावित किया गया।

उक्त प्रमाणित आरोपोें के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री आतिश से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर से असहमत होते हुए पूर्व के प्रस्तावित दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लिया गया।

(ग) संचिका सं0-22/नि0सि0(पट0)-03-11/2005- श्री आतिश, तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन को उनके पदस्थापन अवधि में निम्न आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी।

(I) मे0 केशरी वायर प्रोडक्टस प्रा0 लि0, मोगलपुरा, पटना सिटी को वर्ष 2004 में विभिन्न प्रमंडलों के लिए बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का आदेश दिया गया जिसका क्रयादेश सं0-44 दिनांक 31.01.14 था, जिसमें जल पथ प्रमंडल, गया के लिए 27मे0 टन बी0ए0 वायर की आपूर्ति 30,650/-रू0 प्रति मे0 टन की दर से करना था। उनके द्वारा इस क्रयादेश को पत्रांक-626, दिनांक 24.09.09 द्वारा आंशिक संशोधन करते हुए 17.30 मे0 टन बी0ए0 वायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर में 4 प्रतिशत अधिक एक्साइज ड्‌यूटी की वृद्धि करके (अर्थात रू0 1,226/- प्रति मे0 टन) कुल रू0 21,209,80 (इक्कीस हजार दो सौ नौ रू0 अस्सी पैसे) का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया, जो नियमानूकुल नहीं है।

(II) उसी फर्म को वर्ष 2004 में क्रयादेश सं0-160, दिनांक 15.06.04 द्वारा शीर्ष कार्य प्रमंडल, वीरपुर एवं गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा को 140मे0 टन बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का क्रयादेश सं0-248, दिनांक 03.09.04 द्वारा संशोधित करते हुए 134.63 मे0 टन बी0 ए0 वायर आपूर्ति करने के लिए स्वीकृत दर प्रति मे0 टन में 4 प्रतिशत अधिक एक्साईज ड्‌यूटी के वृद्धि करके कुल 1,64,248/-रू0 का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया गया जो नियमानुकूल नहीं है। इस प्रकार कुल 1,85,458.40 रू0 (एक लाख पचासी हजार चार सौ अठावन रू0 चालीस पैसे अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश उनके द्वारा दिया गया, जिसके लिए वे दोषी हैं।

जाँच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए प्रस्तावित दण्ड पर श्री आतिश से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा की गयी एवं द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर से असहमत होते हुए कुल 1,80,937.62 (एक लाख अस्सी हजार नौ सौ सैतीस रू0 बासठ पैसे) की सरकारी क्षति की वसूली तक पेंशन से 50 प्रतिशत की राशि की वसूली तथा 5 वर्ष तक 20 प्रतिशत पेंशन पर रोक एवं एक वर्ष तक 5 प्रतिशत पेंशन पर रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

(2) उपर्युक्त तीनों संचिकाओं में अलग अलग विभागीय कार्यवाहियों के प्रतिफलों को एक साथ समेकित कर विभागीय स्तर पर समीक्षा की गयी और समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री आतिश द्वारा अपने सेवाकाल में मनमाने ढंग से विभागीय कार्यों का सम्पादन किया जाता रहा है एवं सरकार को इनके कृत्यों से वित्तीय क्षति पहुँची है जबकि इन्हें समय रहते हुए तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव द्वारा आगाह भी किया गया था।

(3) उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रियाज अहमद आतिश के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43बी0 में अन्तर्निहित प्रावधानों के अन्तर्गत संचालित विभागीय कार्यवाही एवं पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत श्री आतिश के विरूद्ध सभी आरोपों को समेकित करते हुए "आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस (10) वर्षों तक रोक" का दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। विभागीय अधिसूचना सं0-1152, दिनांक 09. 09.11 द्वारा सरकार का उक्त निर्णय श्री रियाज अहमद आतिश, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को संसूचित किया गया। (4) उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री आतिश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-18651/2011 दायर किया गया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 16.02.12 को न्याय निर्णय पारित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय ने अपने न्यायाधीश में अंकित किया है कि -

"Considering all aspects of the matter, the court is of the considered opinion that even if there is a misconduct on the part of the petitioner causing pecuniary loss to the Government or that it may not necessarily relate to the extent of pecuniary loss only, the nature of the punishment raises a serious issue with regard to the fundamental rights of the petitioner under Article 21 of the Constitution of India. He cannot be visited with the punishment of a nature which virtually takes away his right to life. In his days of superannuation, with no source of income, he undoubtedly stands deprived of his life and liberty without any pension. It can hardly be a palliative for him that it was to be so for 10 years only. Those ten years prove so arduous that he may not survive to see the period thereafter.

न्यायालय ने न्यायादेश के अंतिम पारा में यह अंकित किया है :- The court finds it difficult to accept the submission on behalf of the petitioner that pending such a fresh decision by the respondents, they may be directed at least to pay requisite pension to him for survival. To do so by the Court at this stage may amount to pre-judging issues to the prejudice of the respondents. Liberty is given to the petitioner that he may seek27 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 such interim relief before the respondents themselves and which the court in fairness expects that respondents as a welfare state shall take a decision forthwith without any unreasonable delay and a final decision on the quantum within a maximum period of four months from the date of receipt and/or production of a copy of this order.

(5) माननीय उच्च न्यायालय के निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा अपना अभ्यावेदन विभाग में दि0-12.03.12 को समर्पित किया गया। श्री आतिश से प्राप्त अभ्यावेदन के आलोक में उन्हें दि0- 12.04.12 को अपना पक्ष रखने का निदेश दिया गया। निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा निर्धारित तिथि को उपस्थित होकर निम्न तथ्य रखा गयाः-

(I) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय में उल्लेखित माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्ध आरोप साबित होने का कोई ठोस वैद्विक आधार नहीं बनता है।

(II) तीनों आरोपों पर अलग-अलग दंडादेश की प्रकृति, समय एवं 100 प्रतिशत पेंशन पर 10 साल तक रोक के परिमाण का प्रश्न पर माननीय उच्च न्यायालय का निदेश दि0-16.02.12 द्वारा उनके गुण दोष पर पुनर्विचार करने का अनुरोध है। यदि सरकार को वितीय क्षति हुई है, तो पेंशन से उस घाटे को आसान किस्तों में वसूला जा सकता है।

(III) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 41 की ओर माननीय उच्च न्यायालय ने ''जीने का अधिकार'' एवं 'सहायता पाने का अधिकार'' जो जीवन की संध्या में बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्ता के समय 10 साल तक 100 प्रतिशत पेंशन पर रोक ''जीने का अधिकार'' के आत्मा के खिलाफ है, जो संविधान की धारा अनुच्छेद 21 में प्रावधानों को वंचित करता है एवं न्यायालय के आंतरिक चेतना को गंभीर रूप से झिझोर कर दुखित करता है।

(Iv) जीवन की संध्या में शान्तिपूर्ण समय अन्य राजपत्रित पदाधिकारियों की तरह बिताने के लिए आदेश सं0-1152 दि0-09.09.2011 पर रोक लगाया जाय या तत्काल 95 प्रतिशत पेंशन पर से रोक हटाया जाय जबतक पुनर्विचार/पुनर्समीक्षा याचिका आवेदन पर सेवा के अधिकार के तहत समय रहते अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता है।

(6) श्री आतिश द्वारा रखे गये तथ्यों के आलोक में मामले की पुनः समीक्षा की गई तथा समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :-

(क) श्री आतिश द्वारा कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदला, नवादा में पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता से राज्य सरकार को 13,200/-रू0 की क्षति हुई।

(ख) श्री आतिश द्वारा दुर्गावती परियोजनान्तर्गत भीतरी बाँध एवं बादलगढ रोहतास स्थल पर दो अद्‌द हाई मास्ट स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन से संबंधित निविदा निष्पादन में बरती गई अनियमितता से राज्य सरकार को कुल 3,10,000/- की क्षति हुई।

(ग) श्री आतिश द्वारा निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन के रूप में पदस्थापन अवधि में बरती गई अनियमितता से राज्य सरकार को कुल 1,80,937.62 रू0 की क्षति हुई।

(7) इस प्रकार श्री आतिश के कार्यकलाप से कुल 5.04 लाख रू0 की क्षति राज्य सरकार को हुई। समीक्षा में यह पाया गया कि शत-प्रतिशत पेंशन रोकने से सेवानिवृत कर्मी को जिन्दगी जीने में कठिनाई होगी। उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी न्याय निर्णय में 100 प्रतिशत पेंशन रोकने से जीने के अधिकार से वंचित रखने की बात कही गई है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यो के आलोक में सरकार द्वारा विचारोपरांत, श्री आतिश के पक्ष मे असीम अनुकम्पा दर्शाते हुए अधिसूचना सं0-1152, दि0-9.9.11 द्वारा संसूचित आदेश निर्गत की तिथि से पूर्ण पेंशन पर दस वर्षो तक रोक दंड को संशोधित करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-260, दिनांक- 25.02.2013 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया। 1. ''पचास प्रतिशत पेंशन पर दस वर्षो तक रोक''। उक्त दंड के विरूद्ध श्री आतिश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No -20248/2013 दायर किया गया जिसमें दिनांक-27.06.2018 को पारित न्यायादेश में निम्न निर्णय पारित किया गया- Since the petitioner has an adequats alternative statutory remedy by way of asheas/ review before the authorities under rule 24(l) of Bihar Government servants (classification, control and Atheal) rule 2015 (her in after to as" the Bihar C.C.A. Rules, 2005) the rea of sititioner may be considered by the statutory authority in light of the legal patitions as-discussed in earlies order dated 16-02-2012 hassed on the sititioner's writ sitition be aring CWJC No- 18651 of 2012." माननीय उच्च न्यायालय के निदेश के आलोक में श्री आतिश द्वारा अपना Review आवेदन समर्पित किया गया। जिसकी तकनीकी समीक्षा की गई। जिसके फलस्वरूप निम्न तथ्य पाये गएः- (1) संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं पुनर्विलोकन आवेदन में दिए गए साक्ष्य के आलोक में फुलवरिया नहर प्रमंडल सिरदला के पदस्थापन अवधि में व्यक्तिगत दूरभाष संख्या-25090 के कॉलशुल्क के रूप में रू 5934/-(पांच हजार नौ सौ चौंबीस रूपये) भुगतान सरकारी मद से किए जाने को संचालन पदाधिकारी द्वारा भी अतिकारातित एवं अनियमित माना गया है। परन्तु दूरभाष का अधिष्ठापन कार्यहित में किया गया, बताया गया। व्यक्तिगत दूरभाष के कॉलशुल्क को सरकारी मद से भुगतान को सही नहीं ठहराया जा सकता। इसी प्रकार वर्दी आपूर्ति में 7183/-(सात हजार एक सौ तिरासी रूपए) का किया28 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 गया भुगतान अनियमित एवं अतिकारित माना जा सकता है। श्री आतिश द्वारा कोई नया तथ्य नहीं देने से आरोप प्रमाणित होने की पुष्टि होती है। (2) संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं श्री आतिश द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दिए गए तथ्यों के आलोक में वर्ष 2003-04 में निदेशक क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन निदेशालय, पटना के पदस्थापन अवधि में दुर्गावती परियोजना अन्तर्गत भीतरी बांध एवं बादलगढ़ में हाइमास्ट प्रकाश स्तम्भ की आपूर्ति एवं अधिष्ठापन के संबंधित निविदा निष्पादन में पूर्व में कतिपय तकनीकी कारणों से रद्द किए गए निविदाआें के संबंध में संयोजक के रूप में तैयार किए गए निविदा संलेख में निविदा समिति के समक्ष नही रखने के कारण न्यूनतम निविदादाता में0 एक्सेल को प्रति हाईमास्ट रू 6,55,544/- (छः लाख पचपन हजार पांच सौ चौबालिस) का दर अनुमोदित हो गया जबकि एक माह के अन्दर इसी फर्म द्वारा प्रथम निविदा में रु0 5,98,000/- (पाँच लाख अंठानवे हजार रूपये) एवं द्वितीय निविदा में 4,97,777/- (चार लाख संतानवे हजार सात सौ सतहत्तर) का दर उद्धत किया गया जो कतिपय तकनीकी कारणों से रद्द्‌ कर दिया गया था। उक्त दोनों निविदा में मो0 एक्सेल ही न्यूनतम निविदादाता था/ इस प्रकार आतिश द्वारा संयोजक के रूप में यदि तथ्यों को निविदा समिति के समक्ष उपस्थापित किए गए संलेख में लाई गई होती तो दर वार्ता कर मे0 एक्सेल को कम दर पर निविदा दी जा सकती थी एवं सरकार को प्रतिसेट 1.55 लाख की क्षति होने से रोकी जा सकती थी। इस प्रकार कोई नया तथ्य नहीं देने से यह आरोप प्रमाणित होता है। (3) संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं श्री आतिश द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दिए गए तथ्यों के आलोक में श्री आतिश के क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन निदेशालय में निदेशक के पद पर पदस्थापन अवधि में विभिन्न प्रमंडलों के लिए विभागीय क्रय समिति के अनुशंसा के आलोक में बी0ए0 वायर आपूर्ति करने का क्रयादेश संख्या-44, दिनांक-31.01.2004 एवं 160,दिनांक-15.06.2004 द्वारा क्रमशः 27 मी0टन एवं 140 मी0टन मेसर्स केसरी वायर प्रोडक्ट प्रा0 लि0, पटना को दिया गया, जिसके आलोक में 9 मी0टन मात्र की आपूर्ति 30.06.2004 के पूर्व निर्गत कार्यादेश के अनुमोदित दर पर लिया गया। कतिपय कारणों से अवशेष सामग्री की आपूर्ति नहीं होने के कारण उक्त तिथि के बाद एकतरफा आपूर्तिकर्त्ता के द्वारा 12% एक्साइज ड्‌यूटी की मांग की गई तो दुसरी तरफ नेपाली आपूर्त्तक प्रीमियर वायर प्रा0लि0 द्वारा 4% इन्ट्री टैक्स की मांग की गई। दिनांक 14.8.2004 को केन्द्रीय क्रय समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रीमियर वायर प्रा0लि0, विराटनगर, नेपाल से सम्पर्क कर दर में कोई बढ़ोतरी नही ंहोने पर उन्हीं से सामग्री प्राप्त करने के निर्णय के विपरीत मेसर्स केसरी वायर प्रोडक्टस प्रा0लि0, पटना सिटी को श्री आतिश द्वारा पूर्व क्रयादेश को बिना केन्द्रीय क्रय समिति की अनुशंसा प्राप्त किए क्रय समिति के अनुशंसित दर से 4% एक्साईज ड्‌यूटी के रूप में अतिरिक्त दर देने का संशोधित क्रयादेश निर्गत करने से कुल 1,85,458/-(एक लाख पचासी हजार चार सौ अंठावन रूपये) अतिरिक्त भुगतान हुआ जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा भी अनियमित एवं अतिकारित बताया गया है। इस प्रकार श्री आतिश पर अधिरोपित उक्त आरोप प्रमाणित परिलक्षित होता है। इस प्रकार श्री आतिश ने अपने अभ्योवदन में जो वित्तीय क्षति हुई है उसकी भरपाई कर दंड से मुक्त करने का अनुरोध किया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा श्री आतिश को दिए गए उक्त दंड के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत अपील दायर करने का निदेश दिया गया। श्री आतिश से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है- (1) श्री आतिश द्वारा हुए वितीय क्षति मो0 5,08,575/-(पांच लाख आठ हजार पांच सौ पचहत्तर रूपये मात्र) तक की वसूली करते हुए अधिसूचना सं0-260 दिनांक-25.02.2013 में दिए गए दंड को संशोधित करते हुए 10% पेंशन की राशि पर 5 वर्षो तक रोक। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2890, दिनांक 29.01.19 द्वारा उक्त विभागीय प्रस्ताव को बिना परामर्श के यह कहते हुए वापस किया गया कि वित्तीय क्षति की वसूली में आयोग का परामर्श आवश्यक नहीं है तथा बिहार लोक सेवा आयोग (कार्य-सीमन) विनियमावली, 1957 के नियम-14 में यह प्रावधान है कि "किसी ऐसे मामले में आयोग से परामर्श करना आवश्यक न होगा, जहाँ आयोग किसी पूर्व प्रक्रम में दिए जाने वाले आदेश के बारे में अपनी सलाह दे चुका हो और उसके बाद कोई नया निर्धारणीय प्रश्न न उठा हो"।

अतः उक्त अनुमोदित निर्णय के आलोक में श्री रियाज अहमद आतिश को निम्न दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता हैः- (1) श्री रियाज अहमद आतिश, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमंडल, सिरदल्ला, नवादा/तत्कालीन निदेशक, क्रय भंडार एवं सामग्री प्रबंधन, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत) द्वारा हुए वितीय क्षति मो0 5,08,575/-(पांच लाख आठ हजार पांच सौ पचहत्तर रूपये मात्र) तक की वसूली करते हुए अधिसूचना सं0-260 दिनांक-25.02.2013 में दिए गए दंड को संशोधित करते हुए 10% पेंशन की राशि पर 5 वर्षो तक रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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1 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(औ0)-17-12/2017/457--श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570), तत्कालीन तकनीकी सलाहका, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद एवं कार्यपालक अभियंता रूपांकण प्रमंडल, औरंगाबाद (अतिरिक्त प्रभार) द्वारा29 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के संबंध में मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, औरंगाबाद द्वारा अपने पत्रांक-1214, दिनांक 23.09.17 एवं पत्रांक-1300, दिनांक 16.10.17 के माध्यम से कतिपय आरोप प्रतिवेदित किया गया। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, औरंगाबाद के अनुशंसा के आलोक में मामले की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री ईश्वर सहाय राम के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-108, दिनांक 12.01.18 द्वारा आरोप पत्र के साथ साक्ष्य संलग्न करते हुए श्री ईश्वर सहाय राम से स्पष्टीकरण किया गया।

आरोप सं0-(1) सरकारी कार्यों का निष्पादन ससमय नहीं करना। आरोप सं0-(2) उच्चाधिकारी के आदेश का अवहेलना। आरोप सं0-(3) मनमाने ढंग से मुख्यालय से बाहर रहना। आरोप सं0-(4) कर्मचारियों को प्रतातिडत करना। आरोप सं0-(5) सरकारी आवास खाली नहीं करना। श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा पत्रांक-106, दिनांक 24.08.18 के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण विभाग में समर्पित किया। श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई।

आरोप सं0-1- सरकारी कार्यों का निष्पादन में विलंब। उक्त आरोप के संदर्भ में श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा कहा गया कि मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, औरंगाबाद के सभी आदेशों का अनुपालन उनके द्वारा ससमय किया गया। मुख्य अभियंता के पत्रांक-706, दिनांक 20.06.17 तथा पत्रांक-862, दिनांक 10.07.17 के आदेशानुसार खरीफ अवधि 2017 में सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक और 2 बजे अपराह्‌न से 10 बजे रात्रि तक कार्य पर उपस्थित रहे। मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक-44(अ), दिनांक 09.07.17 तथा पत्रांक-865, दिनांक 10.07.17 से स्पष्ट है कि सरकारी कार्यों का निष्पादन ससमय किया गया।

समीक्षा - श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा कहा गया कि कार्य हित में आवश्यकता पड़ने पर प्राधिकृत करने का कार्य किया गया। किन्तु उत्तर संतोषप्रद प्रतीत नहीं होता है क्योंकि यदि समय पर कार्य करते तो नियंत्री पदाधिकारी द्वारा क्यों उनके विरूद्ध आरोप प्रतिवेदित किया जाता। अतः आरोप सं0-1 प्रमाणित पाया गया।

आरोप सं0-2- उच्चाधिकारी के आदेश का अवहेलना। मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, औरंगाबाद के पत्रांक-728, दिनांक 27.06.17 द्वारा रूपांकण प्रमंडल, औरंगाबाद का प्रभार देने का आदेश दिया था परन्तु ससमय प्रभार का आदान-प्रदान नहीं किया गया। साथ ही पदस्थापित सहायक अभियंता जो अन्य कार्यालय में प्रतिनियुक्त थे, कि अनुपस्थिति विवरणी उपलब्ध रहने के बावजूद बिना कारण बताये लगातार चार माह से वेतन को रोके रखा गया।

श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा अपने स्पष्टीकरण में अभ्यावेदन देने की बात कही गयी है ताकि अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो सके।

समीक्षा- श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा विभागीय आदेश का पालन नहीं कर अभ्यावेदन दिया गया। जबकि आदेश का पालन कर अभ्यावेदन देना चाहिए था ताकि उनके विरूद्ध आरोप नहीं बनता। इस प्रकार आरोप सं0-02 प्रमाणित पाया गया। आरोप सं0-3- मनमाने ढंग से मुख्यालय से बाहर रहना। श्री ईश्वर सहाय राम ने अपने स्पष्टीकरण में अपने बचाव पक्ष में संतोषप्रद जवाब नहीं दिया। समीक्षा-जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद को ससमय प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने का साक्ष्य उपलब्ध है। अतः आरोप प्रमाणित पाया गया।

आरोप सं0-4- कर्मचारियों को प्रताडित करना। श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा अपने स्पष्टीकरण में इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा गया। समीक्षा-मुख्यालय से बराबर अनुपस्थित रहने से संबंधित पत्र एवं सिंचाई कोषांग के प्रभारी के रूप में मनमाने ढंग से कार्य करना जैसे प्रतिवेदन पर अग्रिम हस्ताक्षर कर मुख्यालय से बाहर रहने का प्रमाण उपलब्ध रहने के कारण यह आरोप प्रमाणित पाया गया।

आरोप सं0-5- सरकारी आवास खाली नहीं करना। श्री ईश्वर सहाय राम द्वारा अपने स्पष्टीकरण में स्वीकार किया कि निजी कारणों समय पर सरकार आवास खाली नहीं किया।

समीक्षा- आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए "02 (दो) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570), तत्कालीन तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद-सह-कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल, औरंगाबाद (अतिरिक्त प्रभार) के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-19 के तहत लघु दण्ड यथा "02 (दो) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" दिया एवं संसूचित किया जाता है।

प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 30

1 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-07/2018-459--श्री अशोक कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) प्रमंडल, डिहरी जो कुरथा काण्ड संख्या-195/16 में आरोपी हैं, दिनांक 13.06.2018 को आत्म सर्मपण करने के पश्चात जेल में हैं।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियमावली 2005 के नियम-9 में निहित प्रावधान के तहत उनके जेल जाने की तिथि 13.06.18 के प्रभाव से विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1985, दिनांक 10.09.18 द्वारा निलंबित किया गया।

श्री कुमार द्वारा हिरासत से छूटने के बाद दिनांक 06.10.18 को गुण नियंत्रण प्रमंडल, डिहरी में योगदान समर्पित किया गया। श्री कुमार को योगदान की तिथि से निलंबन मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित निर्णय श्री अशोक कुमार, प्राक्कलन पदाधिकारी, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) प्रमंडल, डिहरी को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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1 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पट0)03-02/2016-476--श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, प्रखंड-पुनपुन, जिला-पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (आई0डी0-3223) स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, भागलपुर के पदस्थापन काल में रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए मिट्‌टी भराई के लिए करीब तैतालिस हजार रूपये के काम को 4,25,000/-(चार लाख पचीस हजार रूपये) का प्राक्कलन बनाने और उसके कार्यान्वयन के संबंध में परिवाद पत्र दिनांक 25.04.07 निगरानी विभाग में दिया गया। निगरानी विभाग के तकनीकी कोषांग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में गलत प्राक्कलन बनाने, प्राक्कलन में अतिरिक्त लीड शिफ्ट का प्रावधान करने, कार्य के पूर्व प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी पुस्तिका में दर्ज नहीं करने एवं बिना वास्तिवक मापी लिए विपत्र समर्पित करने के प्रमाणित आरोप के लिए श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-323, दिनांक 19.02.16 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप :-राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए श्री सुरेन्द्र सिंह यादव के खेत से हरेन्द्र सिंह के खेत होते हुए लोदीपुर प्राथमिक विद्यालय तक नदी तटबंध जमींदारी बांध पर मिट्‌टी भराई कार्य की जाँच निगरानी विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग, बिहार, पटना द्वारा की गई। निगरानी विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग, बिहार, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निम्न आरोप गठित किया गया -

1. प्राक्कलन में 35 प्रतिशत मिट्‌टी की मात्रा के लिए अतिरिक्त दो लीड एवं एक लिफ्ट का प्रावधान किया गया है, परन्तु मिट्‌टी के संपीडन (कं्रपेक्शन) हेतु प्रावधान नहीं किया गया है। स्पष्ट है कि प्राक्कलन के निर्माण में श्री समैयार द्वारा पर्याप्त तकनीकी ज्ञान का उपयोग नहीं किया गया है। जिसके लिए श्री समैयार प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

2. मापीपुस्त के पृ0-5 पर चैनेज 8 से 19 तक का एक्जेस्टींग का रिकार्ड इन्ट्री दिनांक 20.03.2007 की तिथि में कनीय अभियंता द्वारा दर्ज है। पुनः पृष्ठ 05-06 पर चैनेज 18 से 32 का प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी दिनांक 05.04.2007 को कनीय अभियंता द्वारा दर्ज किया गया। रिकार्ड मापी की जाँच सहायक अभियंता द्वारा नहीं किया हुआ है। स्पष्ट है कि श्री समैयार द्वारा अपने कर्त्तव्यों का सही तरीक से निर्वहन नहीं किया गया, जिसके लिए प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

3. मापीपुस्त में पूर्व की तिथि में प्रविष्टियों दर्ज करने में कनीय अभियंता के साथ श्री रंजन प्रसाद समैयार की संलिप्तता स्पष्टतः परिलक्षित होती है। जिसके लिए प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

4. बिना स्थल निरीक्षण के प्राक्कलन, मापीपुस्त तैयार किया जाना एवं मापीपुस्त में गलत मापी दर्ज कर अभिकर्त्ता को फायदा पहुँचाने का कार्य करने के लिए श्री समैयार प्रथम द्रष्टया देाषी प्रतीत होते हैं।

5. राज्य सरकार का आदेश 462, (त0प0को0) दिनांक 30.03.1982 के भाग कंडिका (ग)(10)(च) का उल्लंघन करने के लिए श्री समैयार प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

6. कार्य करने के पूर्व प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी नहीं दर्ज करने एवं सहायक अभियंता के रूप में श्री समैयार द्वारा रेकर्ड मापी की जाँच नहीं करने हेतु निगरानी विभाग के पत्रांक 2347, दिनांक 13.12.1983 के अनुलग्नक 2(ग), (ख) के अनुसार श्री समैयार प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोपों 01 से 06 के लिए जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। विभागीय स्तर पर जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत निम्न निष्कर्ष अभिलेखित किया गया-

1. विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-1, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है।31 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 2. विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-2, 3, 4, 5 एवं 6 पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए प्रमाणित प्रतीत होता है।

उक्त विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-2, 3, 4, 5 एवं 6 पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री समैयार से द्वितीय कारण पृच्छा करने का निर्णय लिया गया। विभागीय पत्रांक-2527, दिनांक 08.12.2016 द्वारा श्री समैयार से आरोप संख्या-2,3,4,5 एवं 6 पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य पर असहमति व्यक्त करते हुए आरोपवार असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

श्री रंजन प्रसाद समैयार के पत्रांक-21/मुज0, दिनांक 10.10.17 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग को समर्पित किया गया। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत निम्न निष्कर्ष अभिलेखित किया गया -

"वर्णित तथ्यों, बचाव बयान एवं जाँच प्रतिवेदन के परिप्रेक्ष्य में श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता प्रखंड-पुनपुन के विरूद्ध निगरानी विभाग के पत्रांक-2347, दिनांक 13.12.1983 के अनुलग्नक-2(ग) (ख) के अनुसार कार्य के पूर्व प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी दर्ज नहीं करने एवं दर्ज रिकार्ड मापी की जाँच नहीं करने का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।"

अतः आरोपित पदाधिकारी श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता, प्रखंड-पुनपुन, जिला-पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, आई0डी0-3223 स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, भागलपुर के विरूद्ध बिना स्थल निरीक्षण के प्राक्कलन का स्वीकृति देना तथा मापीपुस्त तैयार किया जाना एवं मापीपुस्त में दर्ज प्रविष्टियों में कनीय अभियंता द्वारा की गई अनियमितता में श्री समैयार की संलिप्तता प्रमाणित होती है। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-2314, दिनांक 27.12.2017 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया- 1. आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। 2. तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त निर्गत दंडादेश के संदर्भ में महालेखाकार, बिहार पटना का पत्रांक-465, दिनांक 30.01.2018 द्वारा उल्लेखित किया गया है कि उक्त दण्डादेश द्वारा अधिरोपित दंड "तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का कार्यान्वयन करना संभव प्रतीत नहीं होता है। चूँकि श्री समैयार 31.03.2021 को सेवानिवृत हो रहे हैं।

अतएव समीक्षोपरांत श्री रंजन प्रसाद समैयार को दिए गए दंड तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक के स्थान पर कालमान वेतन में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थाई रूप से अवनती का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। शेष दंड यथावत रहेगा।

उक्त निर्णित दंड पर विभागीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित निर्णय श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता, प्रखंड-पुनपुन, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्यप्रमंडल-1, भागलपुर को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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8 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(कटि0)25-01/2019-505--श्री आलोक कुमार (आई0डी0-5070) सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना का स्थानान्तरण विभागीय अधिसूचना संख्या-2349, दिनांक 22.06.2018 द्वारा अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अवर प्रमंडल-3, पूर्णियाँ के पद पर किया गया। पुनः विभागीय पत्रांक-3685, दिनांक 28.09.2018 द्वारा श्री कुमार को सूचित किया गया कि नियंत्री पदाधिकारी द्वारा विरमित नहीं किये जाने की स्थिति में दिनांक 20.10.18के प्रभाव से स्वतः विरमित होकर दिनांक 22.10.2018 तक निश्चित रूप से नवपदस्थापित स्थान पर प्रभार ग्रहण कर विभाग को ई-मेल से अवगत कराने का निदेश दिया गया।

उक्त निदेश के बाद भी श्री कुमार ने नव पदस्थापन स्थान पर दिनांक 22.10.2018 तक योगदान न देकर दिनांक 01.11.2018 को योगदान समर्पित किया।

विभागीय आदेश का उल्लंघन करने के कारण विभागीय पत्रांक-4082, दिनांक 05.11.2018 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, तदालोक में श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण का उत्तर समर्पित किया गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय आदेश की अवहेलना करने के आरोप को प्रमाणित पाते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

"एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री आलोक कुमार, तत्का0 सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण योजना एंव मोनिटरिंग अंचल, पटना सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अवर प्रमंडल-3, पूर्णियाँ को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 32

8 मार्च 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(वीर)-7-03/03/506--श्री महेन्द्र चौधरी (आई0डी0-4372) तत्कालीन सहायक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सुपौल के विरूद्ध उनके उक्त प्रमंडल मेें पदस्थापन की अवधि में बरती गई अनियमितताओं की जाँच उड़नदस्ता अंचल से करायी गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता से असैनिक सेवा(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 ए के तहत विभागीय पत्रांंक 1074 दिनांक-22.10.2003 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई तथा सम्यक समीक्षोपरांत श्री चौधरी को निम्न आरोपों के लिए दोषी पाये गयेः- (1) समय के पूर्व बाढ़ निरोधत्मक कार्य नही कराना। (2) कार्य के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही । उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता को निम्न दंड देने का निर्णय लिया गयाः- (क) 'निंदन' प्रविष्टि वर्ष-1999-2000 (ख) देय प्रोन्नति पर तीन वर्ष तक रोक। (ग) बाढ़ प्रमंडलो में कही भी आगे पदस्थापन के अयोग्य। उक्त निर्णय श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता को विभागीय आदेश सं0-127 ज्ञापांक-884 दिनांक-18. 10.2004 द्वारा संसूचित किया गया। उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री चौधरी द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा सरकार द्वारा की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी के द्वारा अपने अपील अभ्यावेदन में ऐसा कोई नया तथ्य नही दिया गया है जिस पर नये सिरे से विचार किया जाय। उक्त निर्णय श्री चौधरी को विभागीय आदेश सं0-148 ज्ञापांक-1010 दिनांक-17.12.2008 द्वारा संसूचित किया गया। उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में C.W.J.C सं0 14731/2010 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा C.W.J.C सं0 14731/2010 में दिनांक-15.05.2018 को न्याय निर्णय पारित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना के न्याय निर्णय से सहमत होते हुए विभागीय आदेश सं0-127, ज्ञापांक-884 दिनांक-18.10.2004 को निरस्त करने का निर्णय इस आशय के साथ लिया गया कि श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण की पुनः बिंदुवार समीक्षा की जायेगी। उक्त के आलोक में श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर बिंदुवार की गई। समीक्षा में पाया गया कि उपलब्ध अभिलेखों से परिलक्षित होता है कि श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा प्रश्नगत स्थल पर अवस्थित E2 स्पर एवं पुरानी बॉंध को बचाने में अपने दायित्व का सही ढं़ग से निर्वहन करते हुए E2 स्पर को पंचर होने से बचाने का प्रयास किए। इनके द्वारा कार्य में उदासीनता एवं पर्यवेक्षण में कमी किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। स्पर पंचर होने का मुख्य कारण एकाएक Under Mining होना प्रतीत होता है एवं कुछ हद तक दिनांक 01.09.99 से बाढ़ सर्घषात्मक कार्य बंद होना भी एक कारण हो सकता है। अतएव स्पर कार्य का पर्यवेक्षण सही ढं़ग से नहीं करने एवं कार्य नहीं कराने के लिए श्री चौधरी दोषी प्रतीत नहीं होते हैं। उक्त स्थिति में श्री चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण को स्वीकार करने तथा विभागीय आदेश सं0-127 ज्ञापांक-884 दिनांक 18.10.04 एवं विभागीय आदेश सं0-148 ज्ञापांक-1010 दिनांक 17.12.08 को निरस्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर ली गई है। अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेन्द्र चौधरी के विरूद्ध विभागीय आदेश सं0-127, ज्ञापांक-884 दिनांक- 18.10.2004 एवं विभागीय आदेश सं0-148 ज्ञापांक-1010 दिनांक 17.12.08 को निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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11 मार्च 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-13/2018/535--श्री विनयकांत झा (आई0डी0-जे0 7765), तत्कालीन कनीय अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल-01, मोतिहारी का विभागीय अधिसूचना सं0-6150 दिनांक-29.11.2016 द्वारा सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति के फलस्वरूप अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, पैगम्बरपुर, शिविर-गोरौल के पद पर स्थानांतरण किये जाने के पश्चात विभागीय पत्रांक-3891 दिनांक-15.10.2018 द्वारा दिनांक-27.10.2018 (अपराह्‌न) से स्वतः विरमित किये जाने के बावजूद भी नव पदस्थापित पद का प्रभार नहीं ग्रहण करने संबंधी आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-4225 दिनांक-16.11.2018 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त आलोक में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में कहा गया है कि विभागीय अधिसूचना सं0-6150 दिनांक-29. 11.2016 द्वारा किये गये स्थानांतरण के आलोक में कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी के पत्रांक-865 दिनांक-29.12.2016 द्वारा उन्हें प्रभार श्री जफर कमाल, कनीय अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, तुरकोलिया को सौंपना33 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 था, परन्तु श्री कमाल द्वारा प्रभार नहीं लिया गया एवं कहा गया कि उन्हें पहले से ही प्रभार मिला हुआ है तथा वे विभागीय आदेश के बिना प्रभार नहीं लेंगें। उक्त के संबंध में उनके द्वारा वरीय पदाधिकारी को कई बार मौखिक रूप से कहा गया, लेकिन अभियंता की कमी के चलते खरीफ पटवन एवं रब्बी पटवन के मद्देनजर उच्चाधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया गया। अल्पवृष्टि के चलते बार-बार विभागीय आदेश द्वारा नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुँचाने में व्यस्त रहा तथा पूर्ण सिंचाई लक्ष्य प्राप्त किया गया। विभागीय पत्रांक-3891 दिनांक-15.10.2018 की जानकारी स-समय नहीं होने के चलते वे तिरहुत नहर प्रमंडल, गोरौल में सहायक अभियंता के पद पर योगदान नहीं कर सके। उक्त की जानकारी उन्हें दिनांक-20.11.2018 को हुई जिसके आलोक में वे दिनांक-22.11.2018 को अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, पैगम्बरपुर, शिविर-गोरौल के पद पर कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, गोरौल के कार्यालय में योगदान समर्पित किये। श्री झा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उल्लेखित है कि विभागीय अधिसूचना सं0-6150 दिनांक-29.11.2016 द्वारा सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति के फलस्वरूप स्थानांतरण अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, पैगम्बरपुर के पद पर किये जाने के आलोक में कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल सं0-01, मोतिहारी के पत्रांक-865 दिनांक-29.12.2016 द्वारा उन्हें अपना संपूर्ण प्रभार मो0 जफर कमाल, कनीय अभियंता को सौंप कर अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया था। श्री कमाल के प्रभार ग्रहण करने से इनकार कर दिये जाने की सूचना उनके द्वारा सिर्फ मौखिक रूप से वरीय पदाधिकारी को दी गयी, परन्तु उनके द्वारा लिखित रूप से उसकी सूचना विभाग एवं वरीय पदाधिकारी को नहीं दी गयी एवं विभागीय पत्रांक-3891 दिनांक-15.10.2018 द्वारा दिनांक-27.10.2018 (अपराह्‌न) से स्वतः विरमित किये जाने की तिथि के बाद भी अनधिकृत रूप से कार्य किया गया जो कि विभागीय आदेश की अवहेलना है। मामले के समीक्षोपरांत श्री विनयकांत झा (आई0डी0-जे0 7765), सहायक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, गोरौल के विरूद्ध उक्त आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा ''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनयकांत झा (आई0डी0-जे0 7765), सहायक अभियंता, तिरहुत नहर प्रमंडल, गोरौल के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :- ''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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12 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2014-543--श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह (आई0डी0-3356), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सालमारी को मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन कटिहार एवं सालमारी के अन्तर्गत अपर महानंदा योजना फेज-1 के अधीन केन्द्रीय प्रायोजित योजना के अन्तर्गत महानंदा नदी के बायाँ एवं दायाँ तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य में स्वीकृत प्राक्कलन के मद संख्या-9 का प्रावधान तकनीकी रूप से सही नहीं होने, साथ ही इस मद के अतिरेक भुगतान करने, एक ही कार्य के लिए दो बार प्रावधान करना, बगैर काम कराये हुए संवेदक को भुगतान करने एवं बरती गई अनियमितता के आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-2198, दिनांक 01.10.18 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, तथा श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गई, तदालोक में श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

2. श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा की गई, समीक्षोपरांत श्री सिंह को निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।

3. सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री जितेन्द्र कुमार सिंह (आई0डी0-3356) अधीक्षण अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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12 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2014-544--श्री मोइनुद्‌दीन अंसारी (आई0डी0-जे-7545), तत्कालीन कनीय अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, कदवा (कटिहार) को मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन कटिहार एवं सालमारी के अन्तर्गत अपर महानंदा योजना फेज-1 के अधीन केन्द्रीय प्रायोजित योजना के अन्तर्गत महानंदा नदी के बायाँ एवं दायाँ तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य में स्वीकृत प्राक्कलन के मद संख्या-9 का प्रावधान तकनीकी रूप से सही नहीं होने, साथ ही इस मद के अतिरेक भुगतान करने, एक ही कार्य के लिए दो बार प्रावधान करना, बगैर काम कराये हुए संवेदक को भुगतान करने एवं बरती गई अनियमितता के आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-1505, दिनांक 13.07.18 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, तथा श्री अंसारी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गई, तदालोक में श्री अंसारी द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

2. श्री अंसारी से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा की गई, समीक्षोपरांत श्री अंसारी को निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।34 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 3. सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री मोइनुद्‌दीन अंसारी (आई0डी0-जे-7545) सहायक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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12 मार्च 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2014-545--श्री मुखलाल राम (आई0डी0-जे-9004), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, कदवा को मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन कटिहार एवं सालमारी के अन्तर्गत अपर महानंदा योजना फेज-1 के अधीन केन्द्रीय प्रायोजित योजना के अन्तर्गत महानंदा नदी के बायाँ एवं दायाँ तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य में स्वीकृत प्राक्कलन के मद संख्या-9 का प्रावधान तकनीकी रूप से सही नहीं होने, साथ ही इस मद के अतिरेक भुगतान करने, एक ही कार्य के लिए दो बार प्रावधान करना, बगैर काम कराये हुए संवेदक को भुगतान करने एवं बरती गई अनियमितता के आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-1507, दिनांक 13.07.18 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, तथा श्री राम के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गई, तदालोक में श्री राम द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

2. श्री राम से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा की गई, समीक्षोपरांत श्री राम को निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।

3. सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री मुखलाल राम (आई0डी0-जे-9004) सहायक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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2 अप्रील 2019

सं॰ 22नि0सि0(पट0)-03-12/2015/700--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पटना के परिक्षेत्र में सोन नहर प्रमण्डल, खगौल के कार्याक्षेत्रान्तर्गत पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक अवैध बालू खनन के मामले में प्राप्त परिवाद की जाँच कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमण्डल सं0-1, जल संसाधन विभाग से करायी गयी। कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन का सरकार के स्तर पर की गयी समीक्षा में निम्नलिखित आरोपों के लिए श्री संजय रमण (आई0 डी0-3365), तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल, पटना को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए विभागीय पत्रांक 2314 दिनांक 08.10.15 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र 'क' संलग्न करते हुए स्पष्टीकरण पूछा गयाः- आरोप सं0-1- पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक बायें तटबंध के सेवा पथ से सटाकर 4716.55 घनमीटर (400'x52'x8') मिट्‌टी सरकारी भूखंड (chart land) से अवैध खनन जून, 2015 में न्यूनतम 15-20 दिनों तक जे0 सी0 बी0 मशीन से किया गया है। जिसमें सेवापथ का स्लोप की मिट्‌टी के अवैध खनन से सेवापथ असुरक्षित हो गया एवं न्यूनतम रू0 4,79,201.00 सरकारी राजस्व की हानि हुई। मुख्य अभियंता, पटना के पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 से अवैध खनन की सूचना भी श्री रमण को थी। उनके द्वारा न तो अवैध मिट्‌टी खनन को रोका गया और न ही विधि सम्मत कार्रवाई ही ससमय की गयी। अतः खननकर्त्ता के साथ मिलीभगत से सरकारी भूखंड से 4716.55 घनमीटर अवैध मिट्‌टी खनन एवं न्यनूतम रू0 4,79,201.00 सरकारी राजस्व की क्षति के लिए उनको प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। आरोप सं0-2- पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक बायें तटबंध के सेवा पथ से सटाकर 4716.55 घनमीटर मिट्‌टी सरकारी भूखंड (chart land) से अवैध खनन जून, 2015 में न्यूनतम 15-20 दिनों तक जे0 सी0 बी0 मशीन से किया गया। उक्त खरीफ अवधि में सिंचाई सुनिश्चित कराने हेतु पदीय दायित्वों के अनुरूप निरीक्षण/भ्रमण किया जाता है। मुख्य अभियंता, पटना का पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 के द्वारा अवैध मिट्‌टी खनन पर रोक एवं दोषियों पर कार्रवाई का भी निदेश दिया गया था। परन्तु उनके द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। अतः पदीय दायित्वों के निर्वहन नहीं करने तथा उच्चाधिकारियों के आदेश के अनुपालन में कमी के लिए श्री रमण दोषी पाये गये।

श्री रमण से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गयाः- 1. जॅाच प्रतिवेदन के अनुसार पटना मुख्य नहर के 75 वें मील पर सेवा पथ के टो से सटाकर काटी गयी मिट्‌टी की गणना की गयी, जिसके अनुसार 400' लम्बाई तथा 52' चौड़ाई में 8' गहरा में मिट्‌टी काटी गयी है। अर्थात 400'x 52'x 8'=166400 धन फीट तथा 4716.55 धन मिट्‌टी होता है। 01.10.14 से प्रभारी अनुसूचित दर 101.60 प्रति धन मीटर के अनुसार उक्त मिट्‌टी लागत राशि 4,79,201.48 रूपये होती है। इस संबंध में श्री रमण, अधीक्षण अभियन्ता एवं मुख्य अभियन्ता द्वारा कहा गया है कि जॅाच पदाधिकारी द्वारा सरकारी भू-खण्ड से काटी गयी मिट्‌टी की गणना पूर्णतः चौकोर एवं समतल होने के आधार पर(400'x 52'x 8') की गयी है जो सरासर गलत है, क्योंकि काटी गयी भूमि एक ही निर्धारित आकार में नहीं है और नही समतल है साथ ही मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 3573 दिनांक 15.12.15 के साथ संलग्न कार्यपालक अभियन्ता का पत्रांक 400 दिनांक 16.11.15 से काटी गयी मिट्‌टी की मात्रा की गण्ना कर एक प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। जिसके अनुसार सरकारी भू-भाग से काटी गयी मिट्‌टी की मात्रा 1805.75 धन मीटर बताया गया। इनके द्वारा मिट्‌टी की गणना गणितीय एवं ग्राफिकल विधि से किया गया। परन्तु श्री रमण द्वारा न तो गणितीय विधि से की गयी गणना का कोई आधार दर्शाया गया है। जबकि ग्राफिकल विधि से मिट्‌टी की गणना के लिए प्री लेवल तथा पोस्ट लेवल होना अनिवार्य है। सरकारी35 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 भू खण्ड से मिट्‌टी कट जाने के बाद किसी भी प्रकार से प्री लेवल लाना संभव नहीं होता है। अतएव श्री रमण द्वारा की गयी मिट्‌टी की गणना भी संदिग्ध हो जाता है परन्तु इतना तो स्थापित है कि सरकारी भू खण्ड से अवैध रूप से मिट्‌टी कटाई की गयी है जबकि उक्त स्थल प्रमण्डलीय कार्यालय से मात्र 3 कि0 मी0 की दूरी पर अवस्थित है।

मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 से अवैध मिट्‌टी कटाई की सूचना प्राप्त होने के बावजूद भी अवैध कटाई को नहीं रोका जाना एवं विधि सम्मत ससमय कार्रवाई नहीं करने के संदर्भ में श्री रमण का कथन कि सहायक अभिन्ता एवं कनीय अभियन्ता द्वारा दिनांक 30.06.15 को स्थल निरीक्षण में पाया गया कि उक्त स्थल से निसृत नाला की सफाई तथा बॅाध की मरम्मत कार्रवाई नहीं की गयी को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है, क्योंकि जॅाच पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट उल्लेख किया है कि अवैध मिट्‌टी की कटाई माह जून 2015 में किया गया है एवं परिवादी द्वारा भी अवैध मिट्‌टी कटाई की सूचना दिनांक 22.06.15 को ही दिया गया।

2. मिट्‌टी का अवैध खान जून 2015 में न्यूनतम 15-20 दिनों तक जे0सी0सी0 से किया है जबकि उक्त खरीफ अवधि में सिंचाई सुनिश्चित कराने हेतु पदीय दायित्वों के अनुरूपन निरीक्षण/भ्रमण किया जाना है। परन्तु ऐसा नहीं कर पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करना एवं उपरोक्त तथ्यों के आलोक में अवैध मिट्‌टी कटाई में श्री रमण की मिलीभगत का बोध होता है।

श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा अपने व्यस्तता एवं कठिनाई को बचाव बयान में दर्शाया गया है कि मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 के आलोक में सहायक अभियन्ता एवं कनीय अभियन्ता द्वारा दिनांक 30.06.15 को उक्त स्थल का निरीक्षण किया गया एवं उच्च अधिकारी को बताया गया कि सिंचाई हित में उक्त स्थल के पास निसृत करहा की सफाई तथा बॅाध की मरम्मति की जा रही है फलतः किसी प्रकार की विधि सम्मत कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। उक्त कथन के संदर्भ में किसी भी स्तर से किसी भी पदाधिकारी को कोई लिखित वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं दी गयी है। जबकि इतने गंभीर मामले में मुख्य अभियन्ता से प्राप्त निदेश के अनुपालन में कार्यपालक अभियन्ता को स्वयं स्थल निरीक्षण कर अनुपालन प्रतिवेदन उच्च पदाधिकारी को उपलब्ध कराना चाहिए था।

अतः समीक्षोपरान्त श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल, पटना के विरूद्व अवैध मिट्‌टी खनन होने की सूचना होने के बावजूद अवैध मिट्‌टी खनन पर रोक नहीं लगाने तथा ससमय विधि सम्मत कार्रवाई नहीं करने, मिलीभगत कर अवैध मिट्‌टी कटाई काटकर कुल 4,79,201/-रू0 का सरकारी राजस्व की क्षति पहुॅचाने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने तथा उच्चाधिकारियों के आदेश का अनुपालन नहीं करने के आरोप को प्रमाणित पाया गया।

अतएव प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, खगड़िया को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2216, दिनांक 06.10.16 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया-

1. एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। 2. 1,50,000 (एक लाख पचास हजार) रूपए वेतन से वसूली।

उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री रमण द्वारा पत्रांक-1169, दिनांक 14.11.16 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गई।

समीक्षा -

मुख्य अभियंता, पटना का पत्रांक-1929, दिनांक 22.06.15 द्वारा अवैध कटाई पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश के आलोक में सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा उक्त स्थल का निरीक्षण किया गया। जिसमें पाया गया कि उक्त स्थल के पास निसृत करहा की सफाई एवं बांध की मरम्मति ग्रामीणों के द्वारा की जा रही है जो एक सामान्य घटना एवं सिंचाई हित में है जबकि पाँच पदाधिकारी द्वारा दिनांक 01.08.2015 को स्थल निरीक्षण में उल्लेख किया है कि मुख्य नहर का सेवापथ का पूर्वी साईड स्लोप पूर्णतया काट लिया गया पाया। नहर में पानी चल रहा था जिसे काटी गई मिट्टी से बना गड्‌ढा पानी से उस जल स्तर तक भरा हुआ था जिसकी नापी लेने पर गडढे की गहराई 8फीट पाई गई। मुख्य अभियंता, पटना का पत्रांक-1929, दिनांक 22.06.15 द्वारा अवैध मिट्टी कटाई संबंधित लिखित आदेश के अनुपालन में आरोपियों द्वारा एक सामान्य घटना बताते हुए लिखित रूप से अनुपालन किए जाने का बचाव बयान में उल्लेख नहीं है जबकि पदाधिकारी द्वारा उक्त अवधि में 8 फीट गड्‌ढा पाये जाने से किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन एवं उच्चाधिकारी के आदेश के अनुपालन में कमी का मामला जिसे पूर्व में ही विभागीय समीक्षा में प्रमाणित पाए जाने एवं पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य नहीं रहने के आलोक में आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में वर्णित आरोपों पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक वालें तटबंध के सेवापथ से सटाकर सरकारी भूखंड (Chartland) में अवैध रूप से मिट्टी कटाई होने से 4,79,201/- रूपये की सरकारी राजस्व की क्षति होने एवं दायित्वों का निर्वहन नहीं करने संंबंधी आरोप सं0-1 एवं आरोप सं0-2 प्रमाणित परिलक्षित होने से श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, खगड़िया के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित निर्णय से श्री संजय रमण, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, खगड़िया को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 36

2 अप्रील 2019

सं॰ 22नि0सि0(पट0)-03-12/2015/701--मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पटना के परिक्षेत्र में सोन नहर प्रमण्डल, खगौल के कार्याक्षेत्रान्तर्गत पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक अवैध बालू खनन के मामले में प्राप्त परिवाद की जाँच कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमण्डल सं0-1, जल संसाधन विभाग से करायी गयी। कार्यपालक अभियंता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी एवं निम्नलिखित आरोपों के लिए श्री संतोष कुमार प्रभाकर, सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर, पटना को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए विभागीय पत्रांक 2317 दिनांक 08.10.15 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र 'क' संलग्न करते हुए स्पष्टीकरण पूछा गयाः-

आरोप सं0-1- पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक बायें तटबंध के सेवा पथ से सटाकर 4716.55 घनमीटर (400'x52'x8') मिट्‌टी सरकारी भूखंड (chart land) से अवैध खनन जून, 2015 में न्यूनतम 15-20 दिनों तक जे0 सी0 बी0 मशीन से किया गया है। जिसमें सेवापथ का स्लोप की मिट्‌टी के अवैध खनन से सेवापथ असुरक्षित हो गया एवं न्यूनतम रू0 4,79,201.00 सरकारी राजस्व की हानि हुई। मुख्य अभियंता, पटना के पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 से अवैध खनन की सूचना भी उनको थी। उनके द्वारा न तो अवैध मिट्‌टी खनन को रोका गया और न ही विधि सम्मत कार्रवाई ही ससमय की गयी। अतः खननकर्त्ता के साथ मिलीभगत से सरकारी भूखंड से 4716.55 घनमीटर अवैध मिट्‌टी खनन एवं न्यनूतम रू0 4,79,201.00 सरकारी राजस्व की क्षति के लिए उनको प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।

आरोप सं0-2- पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक बायें तटबंध के सेवा पथ से सटाकर 4716.55 घनमीटर मिट्‌टी सरकारी भूखंड (chart land) से अवैध खनन जून, 2015 में न्यूनतम 15-20 दिनों तक जे0 सी0 बी0 मशीन से किया गया। उक्त खरीफ अवधि में सिंचाई सुनिश्चित कराने हेतु पदीय दायित्वों के अनुरूप निरीक्षण/भ्रमण किया जाता है। मुख्य अभियंता, पटना का पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 से द्वारा अवैध मिट्‌टी खनन पर रोक एवं दोषियों पर कार्रवाई का भी निदेश दिया गया था। परन्तु उनके द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। अतः श्री प्रभाकर पदीय दायित्वों के निर्वहन एवं उच्चाधिकारी के आदेश के अनुपालन में कमी के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये।

श्री प्रभाकर से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गयाः- 1. पटना मुख्य नहर के 75 वें मील पर सेवापथ के टो से सटाकर काटी गयी मिट्‌टी की गणना की गयी जिसके अनुसार 400' लम्बाई तथा 52' चौड़ाई में 8' गहरा में मिट्‌टी काटी गयी है। अर्थात 400'x52'x8''=166400 धन फीट तथा 4716.65 धन मिट्‌टी होता है। 01.10.14 से प्रभारी अनुसूचित दर 101.60 प्रति धन मीटर के अनुसार उक्त मिट्‌टी का लागत राशि 4,79,201.48 रूपये होती है।

इस संबंध में श्री प्रभाकर द्वारा कहा गया कि जॅाच पदाधिकारी द्वारा सरकारी भू खण्ड से काटी गयी मिट्‌टी की गणना पूर्णतः चौकोर एवं समतल होने के आधार पर(400'x 52'x 8') की गयी है जो सरासर गलत है, क्योंकि काटी गयी भूमि एक ही निर्धारित आकार में नहीं है और न समतल है साथ ही मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 3573 दिनांक 15.12.15 के साथ संलग्न कार्यपालक अभियन्ता का पत्रांक 400 दिनांक 16.11.15 से काटी गयी मिट्‌टी की मात्रा की गण्ना कर एक प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया जिसके अनुसार सरकारी भू-भाग से काटी गयी मिट्‌टी की मात्रा 1805.75 धन मीटर बताया गया। इनके द्वारा मिट्‌टी की गणना गणितीय एवं ग्राफिकल विधि से किया गया परन्तु श्री प्रभाकर द्वारा भी न तो गणितीय विधि से की गयी गणना का कोई आधार दर्शाया गया है। जबकि ग्राफिकल विधि से मिट्‌टी की गणना के लिए प्री लेवल तथा पोस्ट लेवल होना अनिवार्य है। सरकारी भू खण्ड से मिट्‌टी कट जाने के बाद किसी भी प्रकार से प्री लेवल लाना संभव नहीं होता है। अतएव श्री प्रभाकर द्वारा की गयी मिट्‌टी की गणना भी संदिग्ध हो जाता है परन्तु इतना तो स्थापित है कि सरकारी भू खण्ड से अवैध रूप से मिट्‌टी कटाई की गयी जबकि उक्त स्थल प्रमण्डलीय कार्यालय से मात्र 3 कि0 मी0 की दूरी पर अवस्थित है।

मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 से अवैध मिट्‌टी कटाई की सूचना प्राप्त होने के बावजूद भी अवैध कटाई को नहीं रोका जाना एवं विधि सम्मत ससमय कार्रवाई नहीं करने के संदर्भ में श्री प्रभाकर का कथन कि उनके एवं कनीय अभियन्ता द्वारा दिनांक 30.06.15 को स्थल निरीक्षण में पाया गया कि उक्त स्थल से निसृत नाला की सफाई तथा बॅाध की मरम्मति कृषको द्वारा किया जा रहा था जो सिंचाई हित में सही था। इस कारण विधि सम्मत कार्रवाई नहीं की गयी को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है, क्योंकि जॅाच पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि अवैध मिट्‌टी की कटाई माह जून 2015 में किया गया है एवं परिवादी द्वारा भी अवैध मिट्‌टी कटाई की सूचना दिनांक 22.06.15 को ही दिया गया। अगर मान भी लिया जाए कि जून 2015 में अवैध मिट्‌टी कटाई नहीं किया गया है तो भी श्री प्रभाकर को सतर्कता बरती जानी चाहिए थी, जबकि उक्त स्थल प्रमण्डलीय कार्यालय मात्र 3 कि0 मी0 की दूरी पर अवस्थित है। अतएव माना जा सकता है कि अवैध मिट्‌टी कटाई को इनके द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया। फलतः इतनी अधिक मात्रा में 15-20 दिनों तक मिट्‌टी कटाई होता रहा एवं सरकार को लगभग 4,79,201 रूपये का राजस्व की क्षति हुई जिसके लिए श्री प्रभाकर भी दोषी पाये गए।

2. श्री संतोष कुमार प्रभाकर, सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर, नौबतपुर, पटना द्वारा अपने व्यस्तता एवं कठिनाई को बचाव बयान में दर्शाया गया है एवं कहा गया है कि मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 1929 दिनांक 22.06.15 के आलोक में उनके एवं कनीय अभियन्ता द्वारा दिनांक 30.06.15 को उक्त स्थल का निरीक्षण किया गया एवं उच्च पदाधिकारियों को बताया गया कि सिंचाई हित में उक्त स्थल के पास निसृत करहा की सफाई तथा बॅाध की मरम्मति की जा रही है। फलतः किसी प्रकार की विधि सम्मत कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। उक्त कथन के संदर्भ में किसी भी स्तर से किसी भी पदाधिकारी को कोई लिखित वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं दी गयी है।37 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अतः समीक्षोपरान्त श्री संतोष कुमार प्रभाकर, सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर, नौबतपुर के विरूद्व अवैध मिट्‌टी खनन होने की सूचना होने के बावजूद अवैध मिट्‌टी खनन पर रोक नहीं लगाने तथा ससमय विधि सम्मत कार्रवाई नहीं करने, मिलीभगत कर अवैध कटाई काटकर कुल 4,79,201/-रू0 का सरकारी राजस्व की क्षति पहुॅचाना, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करना तथा उच्चाधिकारियों के आदेश का अनुपालन नहीं करने के आरोप को प्रमाणित पाया गया।

अतएव प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संतोष कुमार प्रभाकर, सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2217, दिनांक 06.10.16 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया -

1. एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। 2. 1,50,000 (एक लाख पचास हजार) रूपए वेतन से वसूली।

उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री प्रभाकर द्वारा पत्रांक-309, दिनांक 17.11.16 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गई।

समीक्षा -

मुख्य अभियंता, पटना का पत्रांक-1929, दिनांक 22.06.15 द्वारा अवैध कटाई पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश के आलोक में सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा उक्त स्थल का निरीक्षण किया गया। जिसमें पाया गया कि उक्त स्थल के पास निसृत करहा की सफाई एवं बांध की मरम्मति ग्रामीणों के द्वारा की जा रही है जो एक सामान्य घटना एवं सिंचाई हित में है जबकि पाँच पदाधिकारी द्वारा दिनांक 01.08.2015 को स्थल निरीक्षण में उल्लेख किया है कि मुख्य नहर का सेवापथ का पूर्वी साईड स्लोप पूर्णतया काट लिया गया पाया। नहर में पानी चल रहा था जिसे काटी गई मिट्टी से बना गड्‌ढा पानी से उस जल स्तर तक भरा हुआ था जिकसी नापी लेने पर गडढे की गहराई 8फीट पाई गई। मुख्य अभियंता, पटना का पत्रांक-1929, दिनांक 22.06.15 द्वारा अवैध मिट्टी कटाई संबंधित लिखित आदेश के अनुपालन में आरोपियों द्वारा एक सामान्य घटना बताते हुए लिखित रूप से अनुपालन किए जाने का बचाव बयान में उल्लेख नहीं है जबकि पदाधिकारी द्वारा उक्त अवधि में 8 फीट गड्‌ढा पाये जाने से किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन एवं उच्चाधिकारी के आदेश के अनुपालन में कमी का मामला जिसे पूर्व में ही विभागीय समीक्षा में प्रमाणित पाए जाने एवं पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य नहीं रहने के आलोक में आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में वर्णित आरोपों पटना मुख्य नहर के 75वें मील के नजदीक वालें तटबंध के सेवापथ से सटाकर सरकारी भूखंड (Chartland) में अवैध रूप से मिट्टी कटाई होने से 4,79,201/- रूपये की सरकारी राजस्व की क्षति होने एवं दायित्वों का निर्वहन नहीं करने संंबंधी आरोप सं0-1 एवं आरोप सं0-2 प्रमाणित परिलक्षित होने से श्री संतोष कुमार प्रभाकर, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त अनुमोदित निर्णय से श्री संतोष कुमार प्रभाकर, सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, नौबतपुर को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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9 अप्रील 2019

सं॰ 22नि0सि0(दर0)-16-12/2010/741--श्री रामजी प्रसाद यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता (आई0डी0-जे-7779) पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, अंघराठाढ़ी (मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, दरभंगा परिक्षेत्राधीन) द्वारा उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनुशासनहीनता से संबंधित तदेन कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रतिवेदित आरोप के आलोक में मामले के सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1607, दिनांक 27.10.10 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री यादव द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं सम्यक समीक्षोपरांत मामले की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु मुख्य अभियंता, दरभंगा को विभागीय पत्रांक-938, दिनांक 24.04.15 द्वारा निदेशित किया गया।

मुख्य अभियंता, दरभंगा द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें श्री यादव को दोषी मानते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' उपलब्ध कराया गया। मामले के समीक्षोपरांत श्री यादव से आरोप पत्र प्रपत्र-'क' संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-2691, दिनांक 17.12.15 द्वारा स्पष्टीकरण भी मांग की गई।

आरोप सं0-01- दिनांक 17.09.10 को श्री नरेश प्रसाद चौधरी, तत्का0 कार्यपालक अभियंता को कार्यालय कक्ष में बन्द कर श्री चौधरी के साथ दुव्र्यवहार करने एवं अनुशासनहीनता बरतने के लिए आप दोषी प्रतीत होते है।

आरोप सं0-02- जाँच समिति के समक्ष पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराये गये बयान के आधार पर सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने, उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने एवं अनैतिक आचरण करने के लिए आप दोषी प्रतीत होते है।

श्री यादव द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। अपने स्पष्टीकरण में श्री यादव द्वारा कहा गया कि दिनांक 17.09. 2010 को माह अगस्त 2010 का वेतन विमुक्त करने हेतु श्री नरेश प्रसाद चौधरी, तत्का0 कार्यपालक अभियंता द्वारा रूपये 60,000.00 (साठ हजार रूपये) का हैन्ड रिसिट की मांग की गई किन्तु मेरी असमर्थता व्यक्त करने के बाद कार्यपालक अभियंता उत्तेजित हो गये और उन्होने मेरे साथ असंसदीय भाषा एवं अमर्यादित शब्द का प्रयोग किये जिसका मेरे द्वारा प्रतिकार किया गया। पुनः मैं अपने इस व्यवहार पर बार-बार माफी भी मांग रहा था परन्तु कार्यपालक अभियंता इतना ज्यादा आवेशित थे कि मेरे कॉलर को पकड़कर लप्पड़-थप्पड़ कर दिये एवं गले से सोने की चेन भी झपट लिये।38 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 विभागीय समीक्षा :-मुख्य अभियंता, दरभंगा द्वारा समर्पित श्री यादव के विरूद्ध आरोप पत्र में कार्यपालक अभियंता श्री नरेश प्रसाद चौधरी के साथ गाली गलौज करने एवं मारपीट करने का आरोप लगाया गया। इस संबंध में कार्यपालक अभियंता द्वारा श्री यादव के विरूद्ध अंघराठाढ़ी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

श्री यादव द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि श्री यादव द्वारा कार्यपालक अभियंता के साथ दुव्र्यवहार किया गया। श्री यादव ने अपने स्पष्टीकरण में इस बात का उल्लेख किया है कि वे अपने वरीय पदाधिकारी के साथ किये गये इस व्यवहार पर बार-बार माफी मांग रहे थे जो प्रपत्र-क में गठित आरोप की पुष्टि करता है।

मुख्य अभियंता, दरभंगा द्वारा समर्पित मंतव्य में भी इस बात का उल्लेख है कि आपसी सामंजस्य के अभाव में मामला आदेश उल्लंघन, अवहेलना तथा अनुशासनहीनता के स्तर तक जा पहुँचा। इससे स्पष्ट है कि श्री यादव द्वारा बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1976 में उल्लेखित प्रावधान के प्रतिकूल कार्य किया गया। यदि कार्यपालक अभियंता श्री यादव से साठ हजार रूपये का हैन्ड रिसिट माँग रहे थे तो इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देना चाहिए था। किन्तु श्री यादव द्वारा उचित माध्यम का प्रयोग न कर कार्यपालक अभियंता के साथ दुव्र्यवहार किया गया। आरोप को प्रमाणित पाते हुए श्री यादव के विरूद्ध लघु दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त के आलोक में श्री रामजी प्रसाद यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, अंघराठाढ़ी को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

(1) आरोप वर्ष (2010-11) के लिए निन्दन। (2) एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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9 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)-01-07/2014-749--श्री उदयभान सिंह (आई0डी0-4010), तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी, पूर्णियाँ को मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन कटिहार एवं सालमारी के अन्तर्गत अपर महानंदा योजना फेज-1 के अधीन केन्द्रीय प्रायोजित योजना के अन्तर्गत महानंदा नदी के बायाँ एवं दायाँ तटबंध के उच्चीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं ब्रीक सोलिंग कार्य में स्वीकृत प्राक्कलन के मद संख्या-9 का प्रावधान तकनीकी रूप से सही नहीं होने, साथ ही इस मद के अतिरेक भुगतान करने, एक ही कार्य के लिए दो बार प्रावधान करना, बगैर काम कराये हुए संवेदक को भुगतान करने एवं बरती गई अनियमितता के आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-1506, दिनांक 13.07.18 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, तथा श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गई, तदालोक में श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

2. श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा की गई, समीक्षोपरांत श्री सिंह को निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।

3. सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री उदयभान सिंह (आई0डी0-4010) कार्यपालक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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10 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-1)/752--श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई0डी0-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना गंडक परियोजना-2009 के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग करने संबंधी विाीय अनियमितता एवं जानबूझकर तथ्य छिपाने आदि आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-294, दिनांक-12.03.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 17 के तहत्‌ आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

(1) नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है। तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया है कि स्थानीय सामग्री के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रवधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। कार्य के निरीक्षण के दौरान उनके द्वारा स्थानीय सामग्री के उपयोग का उदघोषणा नही कर तथ्य को छिपाकर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रतिवेदित किया गया। इससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित भुगतान में उनके स्तर से सहयोग करने का आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी है। श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) ने निष्कर्षतः मंतव्य गठित किया कि आरोपित मुख्य अभियंता के रूप में श्री चौधरी द्वारा कई बार उक्त कार्य का निरीक्षण करने के बावजूद अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में इन अनियमितताओं का उल्लेख नही किया गया है। अतः उक्त अनियमित भुगतान में आरोपित के स्तर पर सहयोग करने का आरोप सिद्ध होता है। आरोपित ने अपने बचाव बयान मे ऐसा कोई ठोस सबूत पेश39 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 नही किया है जिससे यह प्रतीत हो कि इस अनियमित भुगतान में उन्होने सहयोग नही किया हो। अतः आरोपित के विरूद्ध गठित विाीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित होता है।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2406, दिनांक-09.11.2016 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री चौधरी से द्वितीय कारणपृच्छा उार की माँग की गयी।

उक्त आलोक में प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा उार (अभ्यावेदन) के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोप के लिए श्री चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1721 दिनांक-26.09.2017 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

''स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।'' उक्त विभागीय दण्डादेश के विरूद्ध श्री चौधरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No-16258/2017 दायर किया गया, जिसमें दिनांक-04.12.2018 को पारित आदेश में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निम्न कारणों से विभागीय दण्डादेश को निरस्त किया गया :- 1. तकनीकी परीक्षक कोषांग के जिन अभियंताओं द्वारा मामले की जाँच की गयी, उन अभियंताओं का बयान संचालन पदाधिकारी द्वारा दर्ज नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी ने जाँच पदाधिकारियों का न तो परीक्षण किया और न तो ही आरोपित पदाधिकारी को इन पदाधिकारियों से प्रतिपरीक्षण करने का अवसर प्रदान किया। महज जाँच प्रतिवेदन के आधार पर आरोपों के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य गठित किया जाना न तो विधि सम्मत है और नहीं ही ग्राह्‌य। 2. केवल जाँच प्रतिवेदन को साक्ष्य के रूप में तबतक ग्राह्‌य नहीं किया जायेगा जबतक जाँच करने वाले पदाधिकारी का परीक्षण या प्रतिपरीक्षण न हो जाय। इस मामले में श्री चौधरी के विरूद्ध जो विभागीय कार्यवाही संचालित की गई है, उसमें इस नियमों का अनुपालन नहीं किया गया है। माननीय उच्च न्यायालय ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Union of India & Ors. Vs. P Gunasekaran (2 SCC 610) एवं Roop Singh Negi Vs. Punjab National Bank & Ors. (2 SCC 570) में पारित आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन में स्थापित नियमों की अनदेखी की गई है। इसलिए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विभागीय दंडादेश को निरस्त करते हुए सम्पूर्ण मामले को संचालन पदाधिकारी के स्तर से नये सिरे से कार्रवाई करने हेतु मामले को remand back किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में अपर विभागीय जाँच आयुक्त (श्री शिशिर सिन्हा) द्वारा विभागीय कार्यवाही का संचालन करते हुए जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है जो अब सेवानिवृत हो चुके हैं। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध LPA दायर करने हेेतु विधि विभाग से मंतव्य प्राप्त किया गया। विधि विभाग द्वारा मंतव्य दिया गया कि इस मामले में LPA दायर करने का कोई आधार नहीं है, इसलिए प्रशासी विभाग को नियमानुसार पुनः जाँच करना चाहिए। वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना सं0-1721 दिनांक-26.09. 2017 द्वारा श्री दिनेश कुमार चौधरी (आई0डी0-3476), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध संसूचित ''स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति'' के दण्ड को निरस्त किया जाता है। श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन संबंधी संकल्प अलग से निर्गत किया जा रहा है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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10 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(वीर॰) 07-13/18-757--श्री शिवदानी पासवान, (आई0डी0-4615) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमण्डल बिहारीगंज के पद पर पदस्थापित थे तब विभागीय पत्रांक-3891 दि0-15.10.18 द्वारा इन्हे दिनांक-27.10.18 के प्रभाव से स्वतः विरमित संबंधी विभागीय निदेश संसूचित किया गया। इनके द्वारा नव पदस्थापित पद पर दिनांक-05.11.18 को योगदान दिया गया। जबकि इनके द्वारा पूर्व पद का प्रभार दिनांक-20.11.18 को सौपा गया। उक्त के आलोक में श्री शिवदानी पासवान, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, जल निस्सरण अवर प्रमंडल, बिहारीगंज सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॉ तट नहर अवर प्रमंडल, मल्हीपुर से विभागीय पत्रांक-4223 दि0-16.11.18 द्वारा प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए स्पष्टीकरण की मॉग की गयी। श्री पासवान द्वारा स्पष्टीकरण के जवाब में मुख्य रूप से निम्न का उल्लेख किया गया हैः- विभागीय अधिसूचना-3258 दि0-14.07.15 द्वारा मेरा स्थानान्तरण जल निस्सरण अवर प्रमंडल, बिहारीगंज से अवर प्रमंडल दुर्गावती दायॉ तट नहर अवर प्रमंडल, मल्हीपुर किया गया। दिनांक-21.07.15 को प्रभार हस्तान्तरण हेतु कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण, सहरसा से आग्रह किया गया। कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, सहरसा द्वारा स्थानान्तरण के बजाय एक और सहायक अभियंता का प्रभार ग्रहण करने का आदेश दिया गया।40 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 मेरा अधिसूचित जल निस्सरण अवर प्रमंडल बिहारीगंज था, इसके अतिरिक्त अवर प्रमंडल कार्यालय सुपौल, अवर प्रमंडल कार्यालय, सहरसा, अवर प्रमंडल कार्यालय उदाकिशुनगंज, प्राक्कलन पदाधिकारी, जल निस्सरण प्रमंडल, सहरसा, यॉत्रिक अवर प्रमंडल सहरसा एवं कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, सहरसा का कैंप कार्यालय अररिया का प्रभार भी था। आसन्न अधिकारी द्वारा प्रभार हस्तान्तरण का आदेश के बिना विरमन की समस्या मेरे साथ थी। उपरोक्त कार्यालय का सभी वित्तीय प्रभार भी मेरे जिम्मे था। फलस्वरूप बिना प्रभार हस्तान्तरण का विरमित नही हो सका। उपरोक्त आदेश के पूर्व ही विभागीय आदेश के दवाब में दिनांक-05.11.18 को मेरे द्वारा नव पदस्थापित स्थान यथा कार्यपालक अभियंता, दुर्गावती दायॉ तट नहर अवर प्रमंडल, मल्हीपुर, चेनारी के अधीन योगदान समर्पित किया गया। श्री पासवान के स्पष्टीकरण के जवाब की सरकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री पासवान को दिनांक-27.10.18 के प्रभाव से स्वतः विरमित संबंधी विभागीय निदेश विभागीय अधिसूचना 3891 दिनांक 15.11.18 द्वारा देने के बावजूद भी नव पदस्थापित पद पर निर्धारित अवधि (तिथि) को योगदान नही किया गया। यह स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता का द्योतक है। उक्त के आलोक में श्री पासवान द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के जवाब को अस्वीकृत करते हुए निम्न दंड देने का सरकार के स्तर पर निर्णय लिया गयाः-

''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''

अतः श्री शिवदानी पासवान(आई0डी0-4615) तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल बिहारीगंज, सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॉ तट नहर अवर प्रमंडल, मल्हीपुर को निम्न दंड दिया जाता है-

''एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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15 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(भाग0)-09-08/2013/783--श्री कैलू सरदार (आई0डी0-3485), तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया अन्तर्गत बाढ़ 2012 के पूर्व इस्माईलपुर बिन्द टोली ग्रामाें के बीच निर्मित स्परों के पुनस्र्थापन एवं रिभेंटमेन्ट कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए संकल्प ज्ञापांक-77 दिनांक 09.01.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी अभियंता प्रमुख (दक्षिण), जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा आरोप पत्र में वर्णित दोनों आरोपों को अप्रमाणित पाया गया है। आरोप पत्र आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान एवं साक्ष्य तथा जाँच प्रतिवेदन के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य सेे सहमत होते हुए सम्यक समीक्षोपरांत श्री कैलू सरदार, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के विरूद्ध आरोप संख्या-1 यथा कार्य के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति प्रदान किये बगैर परिमाण विपत्र का औपबंधिक स्वीकृति देते हुए निविदा निष्पादन एवं भुगतान से संबंधित आरोप तथा समुचित पर्यवेक्षण नहीं किये जाने से संबंधित आरोप संख्या-2 प्रमाणित नहीं माना जा सकता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री कैलू सरदार, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को आरोपमुक्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है। सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री कैलू सरदार, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को आरोपमुक्त करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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15 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(भाग0)-09-08/2013/784--श्री देवेन्द्र कुमार (आई0डी0-3448), तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर के विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया अन्तर्गत बाढ़ 2012 के पूर्व इस्माईलपुर बिन्द टोली ग्रामाें के बीच निर्मित स्परों के पुनस्र्थापन एवं रिभेंटमेन्ट कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए संकल्प ज्ञापांक-78 दिनांक 09.01. 15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी अभियंता प्रमुख (दक्षिण), जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा आरोप पत्र में वर्णित आरोप को अप्रमाणित पाया गया है। आरोप पत्र, आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान एवं साक्ष्य तथा जाँच प्रतिवेदन के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य सेे सहमत होते हुए सम्यक समीक्षोपरांत श्री देवेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर के विरूद्ध इस्माईलपुर बिन्दटोली ग्रामों के बीच निर्मित स्परों के पुनस्र्थापन एवं रिभेटमेंट कार्य का समुचित पर्यवेक्षण नहीं किये जाने से संबंधित आरोप प्रमाणित नहीं माना जा सकता है।41 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री देवेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को आरोपमुक्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है। सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री देवेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को आरोपमुक्त करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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15 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(भाग0)-09-08/2013/785--श्री विनय कुमार गुप्ता (आई0डी0-4545), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया अन्तर्गत बाढ़ 2012 के पूर्व इस्माईलपुर बिन्द टोली ग्रामाें के बीच निर्मित स्परों के पुनस्र्थापन एवं रिभेंटमेन्ट कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए संकल्प ज्ञापांक-79 दिनांक 09.01.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी अभियंता प्रमुख (दक्षिण), जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा आरोप पत्र में वर्णित आरोप को अप्रमाणित पाया गया है। आरोप पत्र, आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान एवं साक्ष्य तथा जाँच प्रतिवेदन के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य सेे सहमत होते हुए सम्यक समीक्षोपरांत श्री विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के विरूद्ध इस्माईलपुर बिन्दटोली ग्रामों के बीच स्पर संख्या-3 एवं 4 के पुनस्र्थापन कार्य में विशिष्टि युक्त बोल्डर एवं वायर क्रेट व्यवहार नहीं किये जाने एवं 5 प्रतिशत राशि उनके द्वारा कीप बैक किये जाने का आरोप प्रमाणित नहीं माना जा सकता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को आरोपमुक्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिया गया है। सक्षम प्राधिकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को आरोपमुक्त करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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15 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(पट0)-03-16/2016/786--श्री माधो प्रसाद सिंह (आई0डी0-J-7741), तत्कालीन कनीय अभियंता, रूपांकण प्रमंडल संख्या-1, अनिसाबाद, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, नौतन (तिरहुत नहर प्रमंडल-2, बेतिया) के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल संख्या-1, अनिसाबाद, पटना द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर समुचित कार्रवाई करने हेतु विभाग को समर्पित किया गया। आरोप :- आरोप-1 ः- उच्चाधिकारियों के साथ असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी देना तथा अमर्यादित व्यवहार करना। आरोप-2 :- स्वेच्छा से बिना आवेदन दिए हुए कार्यालय से अनुपस्थित रहने के आदि। उक्त आरोप अनुशासनहीनता को परिलक्षित करता है जिसके लिए श्री माधो प्रसाद सिंह से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-19 के तहत आरोप पत्र एवं संलग्न साक्ष्य के साथ विभागीय पत्रांक-1998 दिनांक-07.09.2016 द्वारा उपलब्ध कराते हुए आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने हेतु निदेशित किया गया। इस क्रम में श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की प्रति मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना को विभागीय पत्रांक-887 दिनांक-12.06.2017 द्वारा उपलब्ध कराते हुए मंतव्य उपलब्ध कराने हेतु निदेशित किया गया। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-824 दिनांक-01.07.2017 द्वारा उक्त स्पष्टीकरण के संदर्भ में मंतव्य उपलब्ध कराया गया। श्री माधो प्रसाद सिंह के विरूद्ध गठित उक्त आरोपों के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण एवं स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा प्राप्त मंतव्य पर समीक्षा से स्पष्ट होता है कि श्री माधो प्रसाद सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता को कार्य के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और सरकारी सेवक के अनुकूल आचरण करना चाहिए। अतएव सम्यक समीक्षोपरांत विभाग के स्तर पर श्री माधो प्रसाद सिंह (आई0डी0-J-7741), तत्कालीन कनीय अभियंता, रूपांकण प्रमंडल संख्या-1, अनिसाबाद, पटना को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-758 दिनांक-19.03.2018 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- 1. एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। 2. चेतावनी।42 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पत्रांक-29 दिनांक-03.05.2018 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की गहन समीक्षा की गयी। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप और उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण तथा इस संबंध में मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना द्वारा समर्पित मंतव्य की गहन समीक्षोपरांत ही उक्त दण्ड संसूचित किया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया। अतएव समीक्षोपरांत श्री माधो प्रसाद सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, रूपांकण अवर प्रमंडल सं0-03 अनिसाबाद, पटना संप्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत नहर अवर प्रमंडल, नौतन, बेतिया के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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16 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-02/2017/800---विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-उद0- 1-001/2016-04 दिनांक-23.01.2017 के आलोक में समीक्षोपरांत श्री अजय कुमार गुप्ता (आई0डी0-5198), सहायक अभियंता, सिकहरना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-954 दिनांक-14.06. 2017 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए स्पष्टीकरण की माँग की गयी :- (1) सिकहरना तटबंध अवर प्रमंडल सं0-02, मोतिहरी के अधीन योगदान के बाद प्रायः कार्यपालक अभियंता के अनुमति के बिना उनका मुख्यालय से अनुपस्थित रहना। प्रायः 11ः00 बजे से 12ः00 बजे के बीच कार्यालय आना एवं 3ः00 बजे से 04ः00 बजे के बीच में कार्यालय छोड़ देना।

(2) सौंपे गये कार्य के लिए दिए गये आदेश का अनुपालन नहीं करना। जैसे-गंडक शिविर सं0-02 एवं उसमें अवस्थित कार्यपालक अभियंता के आवास की चहारदिवारी की मरम्मति का प्राक्कलन समर्पित करने का आदेश दिया गया, परन्तु उनके द्वारा कार्य लंबित रखा गया।

मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) के मुख्यालय कार्यालय, वाल्मीकिनगर से ई-टेन्डरिंग संबंधी अभिलेख (अग्रधन अन्य अभिलेख) लाने हेतु निदेशित किये जाने के बावजूद उनके द्वारा निदेश का अनुपालन नहीं किया गया।

(3) तत्कालीन प्रमंडलीय प्राक्कलन पदाधिकारी के स्थानांतरण के कारण उनको कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-1096 दिनांक-22.10.2013 के द्वारा प्राक्कलन पदाधिकारी का प्रभार लेने हेतु आदेशित किया गया परन्तु उनके द्वारा अनावश्यक पत्राचार कर प्रभार नहीं लिया गया।

(4) उनके द्वारा स-समय दायित्वों का निर्वहन नहीं किये जाने यथा निरीक्षण भवन का सम्पोषण मद की राशि का व्यथन लंबित रहने, स्वीपर, माली आदि का भुगतान नहीं किये जाने पर उनको अंतिम रूप से सख्त हिदायत दी गयी एवं पदनुरूप कार्रवाई नहीं करने पर उनके वेतन भुगतान अवरूद्ध करने की चेतावनी दी गई।

(5) सिकरहना बायाँ तटबंध के 22-23 आर0डी0 के बीच सरोग ग्राम में एजेण्डा सं0-125/74 एकरारनामा सं0-12F2/14-15 के द्वारा उनके द्वारा जनवरी 2015 के पूर्व कटाव निरोधक कार्य शुरू किया गया। दिनांक-12. 02.2015 को कार्यपालक अभियंता के साथ स्थल का निरीक्षण किया गया, जिसमें वे एवं कनीय अभियंता अनुपस्थित पाये गये। निरीक्षण के उपरांत वे स्थल पर आए।

उनसे Laying Register स्थल आदेश पंजी, निरीक्षण पंजी आदि की माँग की गयी, जिसे उनके द्वारा स्थल पर उपलब्ध नहीं कराया गया। सीमा के अनुरूप कार्य की प्रगति समानुपातिक नहीं ब्ल्कि काफी धीमी पाई गयी।

दिनांक-03.03.2015 को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के द्वारा उक्त कटाव निरोधक स्थल का निरीक्षण किया गया। लगभग दो माह बाद भी कार्य की प्रगति 10% पायी गयी एवं कार्य भी गुणवाा के अनुरूप नहीं थें।

दिनांक-22.03.2015 को कार्यपालक अभियंता के द्वारा स्थल का निरीक्षण किया गया। बालू भरे जियो बैग में से सैम्पल के रूप में पाँच जियो बैग का वजन उनके समक्ष किया गया, वजन मानक से कम पाया गया। सभी जियो बैग को खोलकर मानक के अनुरूप लोकल बालू भरने का निर्देश संवेदक, कनीय अभियंता एवं उनको दिया गया। दिनांक-23.03.2015 को पुनः निरीक्षण के क्रम में कार्य की गुणवा में सुधार नहीं किया गया।

कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-367 दिनांक-24.03.2015 के द्वारा अधीक्षण अभियंता को सूचित किया गया कि जब भी कार्यपालक अभियंता या उच्चाधिकारियों द्वारा कार्य का निरीक्षण किया गया, कार्य में त्रुटि पाई गयी एवं इसमें उनके द्वारा सुधार नहीं किया गया। साथ ही प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गयी। कार्यपालक अभियंता के द्वारा सन्देह व्यक्त किया गया कि उनके रहते विशिष्टि एवं गुणवाा के अनुरूप स-समय कार्य करा पाना संभव प्रतीत नहीं हो पा रहा है, ऐसी स्थिति में उनको हटाकर किसी दुसरे सहायक अभियंता को उक्त कार्य स्थल पर प्रतिनियुक्ति हेतु अनुशंसा की गयी।43 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 मुख्य अभियंता से विमर्शोपरांत उनकी सहमति से अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-266 दिनांक-24.03.2015 के द्वारा उनको उक्त स्थल से हटाकर दुसरे सहायक अभियंता, श्री नवप्रकाश भारती को प्रतिनियुक्ति किया गया। श्री भारती द्वारा पूर्व के त्रुटिपूर्ण कार्य में सुधार कर शेष सम्पूर्ण कार्य को स-समय पूरा किया गया। आवंटन प्राप्त रहने एवं संवेदक द्वारा स-समय कार्य करा लेने पश्चात संवेदक को भुगतान हेतु कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-497 दिनांक-25.04.2015 एवं 549 दिनांक-11.05.2015 द्वारा पूर्व में निर्गत मापीपुस्त प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित करने हेतु अनेक पत्राचार किये जाने के पश्चात भी कार्य में व्यवधान उत्पन्न की नियत से उनके द्वारा मापी पुस्ति समर्पित नहीं की गई। कार्यहित में नया मापी पुस्त निर्गत कर मापी लेकर संवेदक को कराये गये कार्य का भुगतान किया गया।

(6) तटबंधो पर दरार, क्षरण, कटाव, चुहा एवं अन्य जानवरो से निर्मित छिद्र, रेनकट्‌स आदि भागों की मरम्मति हेतु कार्यपालक अभियंता एवं उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए सख्त निदेशों के बावजूद आपके द्वारा तटबंधों का सम्पोषण कार्य नहीं कराया गया।

(7) नगरपालिका, मोतिहारी द्वारा वांछित होल्डिंग टैक्स के निर्धारण हेतु निर्देश दिये जाने के बावजूद उनके द्वारा संबंधित कोई कार्य नहीं किया गया।

(8) बाढ़ 2014 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में मिट्टी ढुलाई स्थानीय बालू ढुलाई एवं बाढ़ 2014 में सरोगढ़ स्थल एवं गुलाब खॉ स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में ढुलाये गये स्थानीय बालू का लीक प्लान अनेक स्मार के बावजूद भी समर्पित नहीं किया गया।

(9) सरोगढ़ स्थल पर चल रहे कटाव निरोधक कार्य का मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये गये निरीक्षण के दौरान कार्य की प्रगति धीमी रहने के विरूद्ध दिए गये सरल निर्देशों दिनांक-12.02.2015 को कार्य स्थल से अनुपस्थित रहने पर रोके गये वेतन के विरूद्ध उनके द्वारा दिनांक-28.05.2015 को 11ः00 बजे पूर्वाहन में कार्यपालक अभियंता के कार्यालय कक्ष में जबरन घुसकर उनके साथ अभद्र व्यवहार के साथ गाली-गलौज एवं उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इस तरह का अभद्र व्यवहार इनके द्वारा पूर्व में भी किया गया था। इसके विरूद्ध स्थानीय थाना प्रभारी, नगर थाना, मोतिहारी मे प्राथमिकी भी दर्ज की गयी जिसकी सूचना उच्चाधिकारियों को भी दी गयी।

(10) तटबंध पर हुए अतिक्रमण को हटाने हेतु ठोस एवं कारगर कार्रवाई करने के लिए उनको निदेशित किया गया परन्तु उनके द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

(11) परिसम्पति का ब्योरा माँग किये जाने के बावजूद आपके द्वारा समर्पित नहीं किया गया। (12) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-763 दिनांक-24.06.2015 द्वारा सभी अवर प्रमंडल पदाधिकारी को तटबंध एवं तटबंध पर उपस्थित संरचनाओं की निगरानी करने का आदेश दिया गया जिसके लिए भी उनके द्वारा दिनांक-24. 06.2015 को कार्यपालक अभियंता के कार्यालय कक्ष में आकर गाली-गलौज किया गया तथा जान से मारने की धमकी दी गयी।

इस प्रकार सरकारी कार्य/दायित्वों का निर्वहन स-समय निष्पादित नहीं करने, कार्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता अकर्मण्यता, अनुशासनहीनता, उच्चाधिकारियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट करना एवं जान से मारने की धमकी देने के लिए वे प्रथम दृष्टया दोषी हैं।

उक्त आलोक में श्री गुप्ता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधीनस्थ कनीय अभियंता से किये गये पत्राचार का उल्लेख करते हुए कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता पर कई आरोप लगाते हुए अपने को निर्दोष बताया गया। चूँकि श्री गुप्ता के विरूद्ध मुख्य अभियंता से प्राप्त आरोप पत्र एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में आरोप गठित कर स्पष्टीकरण की माँगी की गयी। फलतः श्री गुप्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-1160 दिनांक-23.05.2018 से मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर से मंतव्य की माँग की गयी। जिसके अनुपालन में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने पत्रांक-2566 दिनांक-25.08.2018 से श्री गुप्ता के बचाव बयान ताकि आरोपों से संबंधित मामले के समीक्षोपरांत आरोपवार मंतव्य उपलब्ध कराया गया। मुख्य अभियंता द्वारा दिये गये आरोपवार मंतव्य में उनके द्वारा मामले के समीक्षोपरांत श्री गुप्ता, सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप सं0-01, 02, 03, 05, 08, 11 एवं 12 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-04, 06, 07 एवं 10 को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। आरोप सं0-09 के संबंध में मंतव्य अंकित किया गया कि आरोपी द्वारा भी अपने बचाव-बयान में कार्यपालक अभियंता के उपर गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी दिये जाने का उल्लेख किया गया है। दोनों ही पदाधिकारी द्वारा एक दुसरे के विरूद्ध संबंधित थाना को लिखित रूप से आवेदन दिया जाना परिलक्षित है। ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों के प्रतिपरीक्षण होने के पश्चात स्थिति स्पष्ट हो सकता है। वर्णित तथ्यों के आलोक में मुख्य अभियंता के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री गुप्ता के विरूद्ध आरोप सं0-01, 02, 03, 05, 08, 11 एवं 12 यथा बिना अनुमति के बराबर मुख्यालय से अनुपस्थित रहना, आदेश के बावजूद प्राक्कलन समर्पित नहीं करना, अनावश्यक पत्राचार करना, कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने के कारण कटाव निरोधक कार्य की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तथा कार्य में व्यवधान उत्पन्न करना, कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का लीड प्लान स्मार के बाद भी समर्पित नहीं करना, कार्यपालक अभियंता के साथ अभद्र व्यवहार करना, अनुशासनहीनता, अकर्मण्यता आदि आरोप प्रमाणित माना गया।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 44 मामले के समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अजय कुमार गुप्ता (ID- 5198), सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :- ''दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।'' अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री अजय कुमार गुप्ता (ID-5198), सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :- ''दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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16 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-07/2015-801--श्री धर्मेन्द्र चौधरी (आई0डी0-5478), सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल सं0-2, सिवान के विरूद्ध सारण नहर प्रमंडल सिवान के अधीन पिथौरी सिवान वितरणी के पुनस्र्थापन का कार्य निर्धारित विशिष्टियों के अनुरूप नहीं कराये जाने संबंधी आरोपों के लिए गठित आरोप पत्र प्रपत्र-'क' मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान के पत्रांक-1463, दिनांक 15.06.15 से प्राप्त हुआ। प्राप्त आरोप पत्र के क्रम में श्री चौधरी से विभागीय पत्रांक-1986, दिनांक 03.09.15 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। जिसके आलोक में श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-42, दिनांक 22.09.15 को स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1764, दिनांक 19.08.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत प्रपत्र-'क' में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

1. पिथौरी-सिवान वितरणी में संवेदक द्वारा एकरारनामा का उल्लंघन कर लाईनिंग कार्य में 43 ग्रेड ओ0पी0सी0 सीमेंट के बदले पी0सी0सी0 सीमेंट के उपयोग को सहायक अभियंता द्वारा नहीं रोका जाना।

2. समुचित स्थल निरीक्षण नहीं किया जाना तथा कार्य में लापरवाही बरतना। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-01, दिनांक 17.10.17 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रपत्र-'क' में गठित दोनों आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं के संबंध में विभागीय पत्रांक-75, दिनांक 11.01. 2018 द्वारा श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी :-

(i) उनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है, जिससे परिलक्षित हो सके कि उक्त अनियमित कार्य मात्र दो दिन ही दिनांक 18.05.2015 एवं 21.05.2015 को संवेदक द्वारा कराया गया है। जबकि मुख्य अभियंता के दिनांक 21.05. 2015 के स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित है कि स्थल जाँच में नहर के बायें भाग में 640मी0, दायें भाग में 376मी0 एवं बेड में 385मी0 में पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य किया हुआ पाया गया एवं इस अनियमित कार्य में उनके द्वारा स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया जा सका। इतनी लंबाई में लाईनिंग कार्य मात्र दो दिन में कराया जाना संभव प्रतीत नहीं होता है। यदि उक्त अनियमित कार्य मात्र दो दिन ही भूलवश संवेदक द्वारा कराया गया था तो इसे मुख्य अभियंता को स्थल निरीक्षण के दौरान वास्तविक वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए था अथवा मुख्य अभियंता के स्थल जाँच के पूर्व ही संवेदक से उक्त कार्य को तोड़कर पुनः कार्य कराने का निदेश देते हुए इसकी सूचना वरीय पदाधिकारियों को देना उनका दायित्व था जो उनके द्वारा नहीं किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा काफी पूर्व से ही स्थल निरीक्षण नहीं किया गया है। (ii) उनके द्वारा उक्त अनियमित कार्य को तोड़कर पुनः विशिष्टि के अनुरूप कार्य कराने से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं दिये जाने से उक्त कथन की पुष्टि नहीं होती है। जबकि इसकी विशिष्टि की जाँच हेतु मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध संस्थान, पटना से अनुरोध किया गया एवं कार्यपालक अभियंता को गुण नियंत्रण के पदाधिकारी से सम्पर्क कर गुणवत्ता की जाँच कराने का निदेश दिया गया है। गुणवत्ता जाँचफल में नमूना संग्रहण का कोई विशेष लोकेशन अंकित नहीं रहने से स्पष्ट नहीं होता है कि पी0पी0सी0 सीमेंट से कराये गये कार्य की गुणवत्ता की जाँच की गयी है अथवा नहीं। अतएव उक्त गुणवत्ता जाँचफल के आधार पर माना जाना कि गुणवत्ताविहीन सीमेंट से कराये गये कार्य तोडकर पुनः गुणवत्ता अनुरूप ही कार्य कराया गया है, स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता।

(iii) दिनांक 28.02.2015 एवं 24.04.2015 को विभागीय स्तर पर आयोजित बैठक में गुणवत्ता अनुरूप कार्य कराने का दिये गये निदेश के बावजूद भी उनका कथन कि भूलवश ओ0पी0सी0 सीमेंट कि बदले पी0सी0सी0 सीमेंट का कार्य में उपयोग हुआ है यह आश्चर्यजनक स्थिति पैदा करता है। इससे स्पष्ट होता है कि " उनके द्वारा कार्य के प्रति उदासीनता बरती गई है।"

(iv) उनका यह कथन कि Hot Weather में लाईनिंग कार्य कराने हेतु आवश्यक मदों का प्रावधान प्राक्कलन में नहीं रहने के कारण उक्त मदों का कार्य नहीं कराया गया, फलतः लाईनिंग कार्य में क्रैक उत्पन्न हुआ स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता। क्योंकि अगर उनको जानकारी थी कि Hot Weather में लाईनिंग कार्य कराने के लिए प्राक्कलन में आवश्यक मदों का प्रावधान नहीं है तो इस स्थिति में या तो कार्य बन्द कर देना चाहिए था अथवा इस तथ्य को उजागर करते हुए आवश्यक दिशा निदेश की माँग उच्चाधिकारियों से किया जाना चाहिए था। परन्तु न ही उनके द्वारा उक्त दोनों तथ्यों के आलोक में कोई कार्रवाई ही की गयी, न ही कोई साक्ष्य ही प्रस्तुत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि उनके द्वारा45 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 ससमय स्थल निरीक्षण कर आवश्यक निर्णय नहीं लिया गया। फलतः संवेदक के द्वारा मनमाने ढंग से कार्य कराया जाता रहा एवं लाईनिंग कार्य में क्रैक उत्पन्न हुआ। साथ ही प्रोपर क्युरिंग किये जाने से संबंधित भी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो उनकी विफलता दर्शाता है।

उक्त के आलोक में श्री चौधरी के पत्रांक-11, दिनांक 06.02.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर समर्पित किया गया जिसमें अंकित किया गया कि -

(i) स्वयं की शादी में सम्मिलित होने के लिये दिनांक 19.05.15 से 30.05.15 तक आकस्मिक अवकाश में रहने के दौरान दिनांक 21.05.15 को मुख्य अभियंता द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया। पूर्व में जो भी लाईनिंग कार्य कराया गया था वह गुणवत्ता पूर्ण था। मात्र एक दिन 18.05.15 को साईट इंचार्ज द्वारा भूलवश ओ0पी0सी0, ग्रेड-43 के जगह पर पी0पी0सी0 सीमेंट का उपयोग किया गया था। उस समय सारण नहर अवर प्रमंडल-2 एवं सारण नहर अवर प्रमंडल, दुरौधा, सिवान में पुनस्र्थापन कार्य के तहत लाईनिंग कार्य चल रहे थे। दिनांक 18.05.15 को दुरौधा अवर प्रमंडल के अन्तर्गत बगौरा उप वितरणी में चल रहे लाईनिंग कार्य को देखने गया था। लगभग 2ः00 बजे श्री शिवनारायण मंडल, कनीय अभियंता से पता चला कि कार्य में पी0पी0सी0 सीमेंट का उपयोग किया गया है। फलतः लाईनिंग कार्य को रोक दिया गया एवं इस घटना को तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को दूरभाष पर सूचना दिया गया एवं दिनांक 19.05.15 से 30.05.15 तक आकस्मिक अवकाश में चला गया। अवकाश से आने के बाद कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-25, दिनांक 06.06.2015 के निदेशानुसार दिनांक 18. 05.15 एवं 21.05.15 को पी0पी0सी0 सीमेंट से किये गये लाईनिंग कार्य को दिनांक 08.06.15 को पूर्ण रूप से तोड दिया गया। इसकी सूचना कार्यपालक अभियंता को पत्रांक-26, दिनांक 09.06.15 के माध्यम से दे दिया गया एवं दिनांक 25.06.15 को तोडे गये भाग में पुनः विशिष्टि के अनुरूप लाईनिंग कार्य करा दिया गया।

46

बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उपर्युक्त विनिश्चित दण्ड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-1398 दिनांक-22.06..2018 के द्वारा उक्त प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-3580 दिनांक 28.03.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी। अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री धर्मेन्द्र चौधरी (आई0डी0-5478), सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल सं0-2, सिवान के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (समय-समय पर यथा संशोधित) के तहत निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- "चार वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

16 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-07/2015-802--श्री अशोक कुमार नागमणि (आई0डी0-3404) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, सिवान के विरूद्ध सारण नहर प्रमंडल, सिवान के अधीन पिथौरी सिवान वितरणी के पुनस्र्थापन का कार्य निर्धारित विशिष्टियों के अनुरूप नहीं कराये जाने संबंधी आरोपों के लिए गठित आरोप पत्र प्रपत्र-'क' मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान के पत्रांक-1463, दिनांक 15.06.15 से प्राप्त हुआ। प्राप्त आरोप पत्र के क्रम में श्री नागमणि से विभागीय पत्रांक-1987, दिनांक 03.09.15 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। जिसके आलोक में श्री नागमणि द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-850, दिनांक 22.09.15 को स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1765, दिनांक 19.08.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत प्रपत्र-'क' में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

3. पिथौरी-सिवान वितरणी में संवेदक द्वारा एकरारनामा का उल्लंघन कर लाईनिंग कार्य में 43 ग्रेड ओ0पी0सी0 सीमेंट के बदले पी0सी0सी0 सीमेंट के उपयोग को कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं रोका जाना।

4. स्थल निरीक्षण नहीं किया जाना तथा कार्य में लापरवाही बरतना। 5. उच्च पदाधिकारी के निदेश की अवहेलना करना। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-01, दिनांक 17.10.17 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रपत्र-'क' में गठित तीनों आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत आरोप सं०-1 एवं 2 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं के संबंध में विभागीय पत्रांक-73, दिनांक 11.01.2018 द्वारा श्री नागमणि से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी :-

(i) उनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है, जिससे परिलक्षित हो सके कि उक्त अनियमित कार्य मात्र दो दिन ही दिनांक 18.05.2015 एवं 21.05.2015 को संवेदक द्वारा कराया गया है। जबकि मुख्य अभियंता के दिनांक 21.05. 2015 के स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित है कि स्थल जाँच में नहर के बायें भाग में 640मी0, दायें भाग में 376मी0 एवं बेड में 385मी0 में पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य किया हुआ पाया गया एवं इस अनियमित कार्य में उनके द्वारा स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया जा सका। इतनी लंबाई में लाईनिंग कार्य मात्र दो दिन में कराया जाना संभव प्रतीत नहीं होता है। यदि उक्त अनियमित कार्य मात्र दो दिन ही भूलवश संवेदक द्वारा कराया गया था तो इसे मुख्य अभियंता को स्थल निरीक्षण के दौरान वास्तविक वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए था अथवा मुख्य अभियंता के स्थल जाँच के पूर्व ही संवेदक से उक्त कार्य को तोड़कर पुनः कार्य कराने का निदेश देते हुए इसकी सूचना मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता को देना उनका दायित्व था जो उनके द्वारा नहीं किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा काफी पूर्व से ही स्थल निरीक्षण नहीं किया गया है। फलतः संवेदक को उक्त अनियमित कार्य करने का मौका मिला।

(ii) उनके द्वारा उक्त अनियमित कार्य को तोड़कर पुनः विशिष्ट के अनुरूप कार्य कराने से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं दिये जाने से उक्त कथन की पुष्टि नहीं होती है। जबकि इसकी विशिष्टि की जाँच हेतु मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध संस्थान, पटना से अनुरोध किया गया एवं उनको गुण नियंत्रण के पदाधिकारी से सम्पर्क कर गुणवत्ता की जाँच कराने का निदेश दिया गया है। गुणवत्ता जाँचफल में नमूना संग्रहण का कोई विशेष लोकेशन अंकित नहीं रहने से स्पष्ट नहीं होता है कि पी0पी0सी0 सीमेंट से कराये गये कार्य की गुणवत्ता की जाँच की गयी है अथवा नहीं। अतएव उक्त गुणवत्ता जाँचफल के आधार पर माना जाना कि गुणवत्ताविहीन सीमेंट से कराये गये कार्य तोडकर पुनः गुणवत्ता अनुरूप ही कार्य कराया गया है, स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता।

(iii) दिनांक 28.02.2015 एवं 24.04.2015 को विभागीय स्तर पर आयोजित बैठक में गुणवत्ता अनुरूप कार्य कराने का दिये गये निदेश के बावजूद भी उनका कथन कि भूलवश ओ0पी0सी0 सीमेंट कि बदले पी0सी0सी0 सीमेंट का कार्य में उपयोग हुआ है यह आश्चर्यजनक स्थिति पैदा करता है। इससे स्पष्ट होता है कि " उनके द्वारा कार्य के प्रति उदासीनता बरती गई है।"

(iv) उनका यह कथन कि Hot Weather में लाईनिंग कार्य कराने हेतु आवश्यक मदों का प्रावधान प्राक्कलन में नहीं रहने के कारण उक्त मदों का कार्य नहीं कराया गया, फलतः लाईनिंग कार्य में क्रैक उत्पन्न हुआ स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता। क्योंकि अगर उनको जानकारी थी कि Hot Weather में लाईनिंग कार्य कराने के लिए प्राक्कलन में आवश्यक मदों का प्रावधान नहीं है तो इस स्थिति में या तो कार्य बन्द कर देना चाहिए था अथवा इस तथ्य को उजागर करते हुए आवश्यक दिशा निदेश की माँग उच्चाधिकारियों से किया जाना चाहिए था। परन्तु न ही उनके द्वारा उक्त दोनों तथ्यों के आलोक में कोई कार्रवाई ही की गयी, न ही कोई साक्ष्य ही प्रस्तुत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि उनके द्वारा47 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 ससमय स्थल निरीक्षण करने का आवश्यक निर्णय नहीं लिया गया। फलतः संवेदक के द्वारा मनमाने ढंग से कार्य कराया जाता रहा एवं लाईनिंग कार्य में क्रैक उत्पन्न हुआ। साथ ही प्रोपर क्युरिंग किये जाने से संबंधित भी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो उनकी विफलता दर्शाता है।

उक्त के आलोक में श्री नागमणि के पत्रांक-179, दिनांक 06.03.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर समर्पित किया गया जिसमें अंकित किया गया कि -

(i) पिथौरी-सिवान वितरणी में संवेदक द्वारा भूलवश खलासी शेड मरम्मति हेतु कार्य स्थल पर लाये गये पी0पी0सी0 सीमेंट का प्रयोग मात्र दो दिन दिनांक 18.05.15 एवं 21.05.15 को किया गया था। संबंधित सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा इस संबंध में सूचना देने के उपरांत जिस भाग में पी0सी0सी0 सीमेंट से ढलाई किया गया था, उसे तोड़वाकर इसकी सूचना पत्रांक-530, दिनांक 10.06.15 द्वारा अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता को दी गई। जिसे पुनः दिनांक 25.06.15 को विशिष्टि के अनुरूप ढलवा दिया गया।

(ii) Extreme Hot weather में Concrete lining कार्य के दौरान अन्य प्रमंडलों में भी कराये गये नहर लाईनिंग कार्य में क्रैक पाये गये, जिसे रोकने हेतु विभागीय समीक्षात्मक बैठकों में Chemical Compound का उपयोग कर Practical Demonstration करने का उल्लेख किया गया है। Extreme hot weather में नहर लाईनिंग कार्य में क्यूरिंग कराने के उपरांत भी क्रैक पाया जाना स्वभाविक है। जिसका उल्लेख अधीक्षण अभियंता उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना ने भी अपने पत्रांक-30, दिनांक 30.07.15 द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में किया है।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर की समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा लगभग वही तथ्य उद्धित किया गया है जो पूर्व में इनसे विभाग द्वारा माँगी गयी स्पष्टीकरण के प्रत्युत्तर एवं विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया। कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्य अभियंता, सिवान से इनके विरूद्ध प्राप्त प्रपत्र-'क' के आलोक में इनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, सिवान का मंतव्य प्राप्त किया गया। मुख्य अभियंता द्वारा इनके बचाव बयान को अस्वीकार योग्य मानते हुए अधीक्षण अभियंता द्वारा दिये गये मंतव्य से सहमत होते हुए कहा गया है कि स्थल निरीक्षण के दौरान वहाँ पर जे0पी0 कम्पनी के पी0पी0सी0 सीमेंट का खाली बैग पाये गये थे। जबकि एकरारनामा के अनुसार ओ0पी0सी0 ग्रेड-43 सीमेंट का उपयोग किया जाना है, परन्तु स्थल पर इसके बैग नहीं पाये गये थे। स्पष्ट है कि कार्य में न्यून विशिष्टि के पी0पी0सी0 सीमेंट का उपयोग किया हुआ पाया गया था। यह इनके लापरवाही का ही फलाफल है कि संवेदक द्वारा इस प्रकार का कार्य कराया गया और इनके द्वारा न्यून विशिष्टि के कार्य पर रोक नहीं लगायी गयी। यह तथ्य संवेदक के पत्रांक-PEL/SARAN/343/51 दिनांक 09.06.15 से भी स्पष्ट है। मुख्य अभियंता के दिनांक 21.05.15 के निरीक्षण प्रतिवेदन के तृतीय खण्ड में भी स्पष्ट रूप से अंकित है कि "संवेदक द्वारा बताया गया कि ओ0पी0सी0 सीमेंट का आर्डर उनके द्वारा दिया गया है, परन्तु अभी तक नहीं आया है जिसके कारण तत्काल पी0पी0सी0 सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है"। इससे स्पष्ट है कि दिनांक 21.05.15 तक ओ0पी0सी0 सीमेंट स्थल पर उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति में आरोपी का कथन कि मात्र दो दिन यथा दिनांक 18.05.15 एवं 21.05.15 को ही पी0पी0सी0 सीमेंट का उपयोग कार्य में किया गया है स्वीकार योग्य नहीं है। अधीक्षण अभियंता सारण नहर अंचल, सिवान के पत्रांक-1300, दिनांक 09.12.15 जो मुख्य अभियंता को संबोधित है, से आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त स्पष्टीकरण पर बिन्दुवार तथ्यों की विवेचना करते हुए मंतव्य दिया गया है। जिसमें अधीक्षण अभियंता द्वारा भी आरोपी पदाधिकारी को अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने तथा कार्य के प्रति लापरवाही बरतने तथा उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करने के लिय दोषी माना गया है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री नागमणि के द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर स्वीकार योग्य नहीं है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अशोक कुमार नागमणि (आई0डी0-3404), तत0 कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, सिवान के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (समय-समय पर यथा संशोधित) के प्रावधानों के तहत उन्हें निम्न दण्ड निरूपित करने का निर्णय लिया गयाः- "तीन वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" उपर्युक्त विनिश्चित दण्ड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-1397 दिनांक-22.06..2018 के द्वारा उक्त प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की माँग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-3579 दिनांक 28.03.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी। अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अशोक कुमार नागमणि (आई0डी0-3404), कार्यपालक अभियंता, के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (समय-समय पर यथा संशोधित) के तहत निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- "तीन वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 48

16 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मोति0)08-02/2017-803--विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-उद0-1-001/ 2016-04 दिनांक-23.01.2017 के आलोक में भी विधानन्द प्रसाद (आई0डी0- 4517) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-951 दिनांक-14.06.2017 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए स्पष्टीकरण की माँग की गईः-

1. तटबंध पर हुए अतिक्रमण को हटाने हेतु ठोस एवं कारगर कार्रवाई हेतु उन्हे निदेशित किया गया, किन्तु उनके द्वारा कोई कार्रवाई नही की गयी।

2. तटबंधों पर दरार, क्षरण, कटाव, चुहा एवं अन्य जानवरों से निर्मित छिद्र रेन कट्‌स आदि भागों की मरम्मति हेतु उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिये गये निदेश के बावजूद भी उनके द्वारा तटबंधों का सम्पोषण कार्य नही कराया गया। इसके चलते आगामी बाढ़ 2015 में किसी भी प्रतिकूल स्थिति से इन्कार नही किया जा सकता था, परन्तु उनके द्वारा सूचित किया गया कि इसे राम-भरोसे छोड़ देना ही उचित होगा।

3. बाढ़ 2014 में लालपरसा, बिगुईया एवं लक्ष्मीनिया स्थल पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में ढुलाये गये स्थानीय बालू का लीड प्लान कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में समर्पित नही किया गया।

4. परिसम्पति के ब्योरा की माँग की गई, परन्तु उनके द्वारा समर्पित नही किया गया। 5. जिला पदाधिकारी के पत्रांक-299 दिनांक-01.05.2015 के निदेशानुसार कार्यपालक अभियंता को सभी सहायक अभियंताओं के साथ आपदा प्रबंधन से संबंधित विडियो कॉन्फ्रेसिंग में दिनांक-02.05.2015 को भाग लेना था, दिनांक-01.05. 2015 को उनको कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में इस संबंध में बताने एवं मोवाईल सं0-9430891373 एवं 9473197316 से भी एस0एम0एस0 दिये जाने के पश्चात भी उनके द्वारा विडियों कॉन्फ्रेसिंग में भाग नही लिया गया।

दिनांक-12.02.2015 एवं दिनांक-17.04.2015 को कार्यपालक अभियंता के साथ अधीक्षण अभियंता के द्वारा बाढ़ 2015 के पूर्व एजेण्डा सं0-126/38 के अन्तर्गत बेलवतिया स्थल पर कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य का निरीक्षण के दौरान वे अनुपस्थित थे जबकि पूर्व से इसकी सूचना उनको दी गयी थी।

6. अध्यक्ष, कटाव निरोधक समिति, मुख्य अभियंता परिक्षेत्र, बाल्मीकिनगर के द्वारा दिनांक-10.04.2015 को स्थल निरीक्षण के दौरान बिना पूर्व सूचना के स्थल से अनुपस्थित पाये गये।

7. कार्यपालक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी को आयोजन एवं गुण नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी के अतिरिक्त प्रभार में रहने के समय सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी में निरीक्षण वाहन सं0-BRE 9545 एवं BPE-70 चालू अवस्था मे है। सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी में एक ही ड्राइवर महमूद आलम है। इसलिए इस प्रमंडल में दोनो गाड़ी एक साथ नही चल पाती है। यह चालक गाड़ी चलाने में टाल-मटोल भी करता है, किन्तु आयोजन एवं गुण नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी का निरीक्षण वाहन चलाने में सक्रिय रहता है। दिनांक-13.05.2015 के पूर्व निरीक्षण वाहन BRE 7980 का बैट्री डाउन हो गया था, जिसके कारण गाड़ी चलाने में चालक को दिक्कत था। सरकारी कार्यहित में सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के नियंत्रणाधीन निरीक्षण वाहन सं0- BPE-70 की बैट्री को कार्यपालक अभियंता के समक्ष निकालकर उसे आयोजन एवं गुण नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी के नियंत्रणाधीन वाहन BRE 7980 में लगा दिया गया। इसकी जानकारी चालक महमूद आलम को दी गयी थी, फिर भी उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता से बिना पुछे नाका प्रभारी, नाका-04, राजा बाजार को उनके पत्रांक-111 दिनांक-13.05.2015 द्वारा सूचना दी गयी कि BRE 70 का बैट्री अज्ञात व्यक्ति द्वारा चोरी कर ली गयी है, जिसका खण्डन कर इसकी सूचना कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-559 दिनांक-14.05.2015 के द्वारा नाका प्रभारी, नाका सं0-04, राजा बाजार को दी गयी। उनके पत्रांक-111 दिनांक-13.05.2015 की प्रति अग्रेतर कार्रवाई हेतु कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-643 दिनांक-05.06.2015 द्वारा माँगी गयी परन्तु उसे उपलब्ध नही कराया गया। उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता को परेशान करने एवं मानसिक प्रताड़ना के नियत से नाका प्रभारी को अज्ञात व्यक्ति द्वारा बैट्री चोरी होने की सूचना दी गयी। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-640 दिनांक-17.06.2015 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण भी किया गया। 8. उनके द्वारा प्रपत्र 8,9 एवं 10 कार्यपालक अभियंता के कार्यालय को एक ही प्रति में उपलब्ध कराया गया जबकि इसे चार प्रति में माँग की गई थी, परन्तु उनके द्वारा चार प्रति में उपलब्ध नही कराया गया। निदेश के बावजूद भी मापी पुस्त में रिकार्ड इन्ट्री के अनुसार प्रपत्र 8 एवं 9 में सुधार नही किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि वे कर्त्तव्य के प्रति लापरवाह एवं अनुशासनहीन है।

9. श्री अबुल हसन, कनीय अभियंता, सिकरहना तटबंध अवर प्रमंडल-03, मोतिहारी एवं श्री रामनरेश अनुज, कनीय अभियंता, सिकरहना तटबंध अवर प्रमंडल-04 को उनके द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया।

10. एजेण्डा सं0-125/80 (कटहॉ RBGE 43-44)बाढ़ 2015 के पूर्व कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य दिनांक-09.03.2015 को निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता के द्वारा निदेश दिया गया था कि स्थल पर पूर्व मे कराये गये Purcu Pine को यथावत छोड़कर उसमें झाँकी भरा जाय। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-345 दिनांक-19.03.2015 द्वारा भी उनको पूर्व में कराये गये Purcu Pine कार्य में झाँकी भरने का निदेश दिया गया किन्तु उनके द्वारा ऐसा नही किया गया बल्कि मुख्य अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता के आदेश का उल्लंधन किया गया।

11. अभियंता प्रमुख (उ0) के पत्रांक-140 दिनांक-03.07.2015 के द्वारा भुधारियों के लंबित भुगतान हेतु लालबोगिया घाट पर कराये गये ग्राम सुरक्षात्मक कार्य एवं कटहाँ स्थल पर कराये गये कटाव निरोधक कार्य में भू-अर्जन मद में क्रमशः रू0 44.23480/लाख एवं रू0 195.95626लाख का आवंटन प्राप्त हुआ जिसके भुगतान हेतु विपत्र तैयार करने के लिए कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-840 दिनांक-09.07.2015 , पत्रांक-868 दिनांक-14.07.2015 एवं 870 दिनांक-15.07.201549 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 द्वारा उनको निदेशित एवं स्मारित किया गया किन्तु कनीय अभियंता के द्वारा माँग किये जाने पर उनके द्वारा न तो पुष्टि दी गयी और न ही कनीय अभियंता के द्वारा तैयार विपत्र पर हस्ताक्षर किया गया।

इस प्रकार सरकारी कार्य में उदासीनता बरतना, दायित्वों का ससमय निर्वहन नही करना, कार्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता, अधीनस्तों के साथ अभ्रद व्यवहार आदि के लिए वे प्रथम दृष्टया दोषी है।

उक्त आलोक में श्री प्रसाद द्वारा प्राप्त स्पष्टीकरण पर मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निसरण, मुजफ्फरपुर से विभागीय पत्रांक-1160 दिनांक-23.05.2018 द्वारा आरोपवार मंतव्य की माँग की गयी।

मुख्य अभियंता के पत्रांक-2566 दिनांक-25.08.2018 द्वारा उपलब्ध कराये मंतव्य में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित कुल 11 आरोपों में से आरोप सं0-2.5.6.7.8 एवं 10 को प्रमाणित होने तथा आरोप सं0-1.3.4.9 एवं 11 को प्रमाणित नही होने का मंतव्य दिया गया। श्री प्रसाद द्वारा अपने नियंत्री पदाधिकारी एवं अधीक्षण अभियंता से किये गये पत्राचार के आधार पर निर्दोश होना बताया गया है तथा कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता पर भी कई तरह के आरोप लगाये गये थे। इसी परिपेक्ष्य में श्री प्रसाद का बचाव-बयान तथा मुख्य अभियंता के स्तर से आरोप पत्र में गठित आरोप पत्र पर मुख्य अभियंता से मंतव्य प्राप्त किया गया। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप सं0- 2.5.6.7.8 एवं 10 जो क्रमशः उच्चाघिकारी के आदेश के बावजूद तटबंध की मरम्मति कर्य में रूचि नही लेना, सूचना दिये जाने के बावजूद जिला पदाधिकारी के स्तर से आयोजित विडियो काँन्फ्र्रसिंग भाग नही लेना, अनुमति प्राप्त किये बिना अनुपस्थित रहना, गलत ढ़ंग से बिना नियंत्री पदाधिकारी को सूचना दिये ही अनावश्यक रूप से बैट्री चोरी की सूचना थाना को दिया जाना, कटाव निरोधक कार्य का विपत्र 8.9. एवं 10 के प्रेषण में लापरवाही बरतना एवं कर्त्तव्य का निर्वहन नही करना एवं मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद एजेंडा सं0-125/80 मे कराये गये परक्यूपाईन लेईग कार्य में झाँकी भराई नही कराने के आरोप केा प्रमाणित माना गया है। मामले के समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा श्री विधानन्द प्रसाद (आई0डी0-4517) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया हैः-

'' दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''। अनुशासनिक प्राधिकारी के उक्त निर्णय के आलोक में श्री विधानन्द प्रसाद (आई0डी0-4517) तत्कालीन सहायक अभियंता, सिकरहना तटबंध प्रमंडल, मोतिहारी संप्रति सहयक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल, छपरा के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हे संसूचित किया जाता हैः- '' दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मोति0)-08-08/2016/834--दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के अन्तर्गत वर्ष 2013 बाढ़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से 15.07.2013 तक गनौली बायॉ एवं दयॉ बॉध तथा हथुबनवा बॉध में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो का प्रपत्र-24 लगभग तीन वर्ष बाद अत्यंत विलंब से उपलब्ध कराये जाने संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए श्री रामपुकार रंजन (आई0डी0-3272) तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर (मोतिहारी) संप्रति अभियंता प्रमुख सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, बिहार पटना से विभागीय पत्रांक-361 दिनांक-16.02.2018 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयीः- आलोच्य स्थल पर वर्ष 2013 बाढ़़ अवधि में दिनांक-01.07.2013 से 15.07.2013 तक तथाकथित रूप से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र-24 अपने अधीनस्थों से ससमय प्राप्त कर उनके द्वारा विभाग को उपलब्ध नही कराया जाना विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 से निर्गत आदेश का उल्लंघन है। न ही प्रपत्र-24 अधीनस्थ पदाधिकारी से स-समय प्राप्त नही होने पर उनके द्वारा अधीनस्थों के विरूद्ध विभागीय निदेश का उल्लंघन करने के लिए कोई कार्रवाई की गयी । यह कृत्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्य के प्रति घोर लापरवाही कर्त्तव्य एवं दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता दर्शाता है।

उक्त के आलोक में श्री रंजन, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा समर्पित बचाव-बयान का मुख्य अंश निम्नवत हैः-

विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.5.2013 को दिनांक-13.05.2013 को ही अग्रेतर कार्रवाई हेतु मुख्य अभियंता के सचिव, प्रावैधिक को पृष्ठांकित किया गया। उनके द्वारा पत्रांक-802 दिनांक-13.05.2013 के माध्यम से विभागीय निदेश के अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु अधीनस्थ कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को प्रेषित किया गया।

कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के पत्रांक-1110 दिनांक-21.08.2013 से समर्पित प्रपत्र-24 काफी विलंब से तिरहुत नहर अंचल, बेतिया कार्यालय में दिनांक-21.03.2014 को हस्तगत कराया गया। अधीक्षण अभियंता द्वारा जाँचोपरांत पायी गयी त्रुटियों के सुधार हेतु प्रपत्र-24 कार्यपालक अभियंता को पत्रांक-243 दिनांक-21.03.2014 से वापस किया गया है। इससे स्वतः स्पष्ट है कि विलंब कार्यपालक अभियंता, दोन नहर प्रमंडल, रामनगर के स्तर पर हुआ है। अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल, बेतिया के पत्रांक-257 दिनांक-31.03.2015 द्वारा स्पष्टीकरण मुख्य अभियंता को प्राप्त हुआ। उक्त से स्पष्ट है कि उनके द्वारा दिनांक-10.02.2014 को प्रभार सौंपने तक प्रपत्र-24 कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण50 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अभियंता द्वारा मुख्य अभियंंता का कार्यालय में समर्पित नहीं किया गया था। जबकि अद्यतन प्रपत्र-24 अविलंब समर्पित करने हेतु पत्रांक-2171 दिनांक-28.09.2013 द्वारा सभी अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता को निदेशित किया गया था। उक्त के आलोक में उनके विरूद्ध विभागीय निदेशों का उल्लंघन का कोई मामला नहीं बनता है।

समीक्षाः- श्री रंजन, तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध आरोप है कि विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 में प्रपत्र-24 के समर्पण के लिए दिये गये निदेश का उल्लंघन करते हुए आलोच्य स्थल पर दिनांक-01.07.2013 से 15.07.2013 तक कराये गये तथाकथित बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का प्रपत्र-24 इनके द्वारा पदस्थापन अवधि दिनांक-10.02.2014 तक विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया एवं तथा -कथित प्रपत्र-24 अधीनस्थ पदाधिकारियों से स-समय प्राप्त नहीं होने पर उनके विरूद्ध विभागीय निदेश का उल्लंघन करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

उनके द्वारा स-समय प्रपत्र-24 विभाग को समर्पित नहीं करने के संदर्भ में कहा गया कि उनके पदस्थापन अवधि दिनांक-10.02.2014 तक आलोच्य कार्य का प्रपत्र-24 अंचल कार्यालय से प्राप्त नहीं होने के कारण विभाग को समर्पित नहीं किया जा सका, स्वीकार योग्य है क्योंकि बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटंिरग की समीक्षा से स्पष्ट है कि अधीक्षण अभियंता द्वारा उक्त कार्य का प्रपत्र-24 अंचल के पत्रांक-269 दिनांक-29.03.2014 से प्रथम बार मुख्य अभियंता बाल्मीकिनगर को भेजा गया है जबकि श्री रंजन दिनांक-10.02.2014 तक ही पदस्थापित रहे है।

श्री रंजन, तत्कालीन मुख अभियंता द्वारा विभगाीय पत्रांक-964 दिनांक-09.5.2013 में निहित निदेशों का उल्लंघन करते हुए वांछित प्रपत्र-24 स-समय अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध नहीं कराने पर उनके विरूद्ध कार्रवाई के संदर्भ में कहा गया है कि विभागीय पत्रांक-964 दिनांक-09.05.2013 में निहित निदेश को सुनिश्चित करने हेतु मुख्य अभियंता कार्यालय के पत्रांक-802 दिनांक-13.05.2013 सेअधीनस्थ सभी अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता को निदेश दिया गया था अद्यतन प्रपत्र-24 के सर्मपण हेतु पुनः पत्रांक-2171 दिनांक-28.09.2013 से सभी अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता के निदेशित किया गया। मुख्य अभियंता के पत्रांक-2171 दिनांक-28.09.2013 की प्रतिलिपि से स्पष्ट होता है कि अविलंब अद्यतन प्रपत्र-24 समर्पित करने हेतु सक्ष्त निदेश देते हुए चारत्री में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने तथा अुनशासनिक कार्रवाई करने की धमकी अधीनस्थ पदाधिकारी को दी गयी है। उक्त के आलोक कमे ंउनके द्वारा विभागीय निदेशों का उल्लंघन किया जाना परिलक्षित नहीं होता है, परन्तु अधीनस्थों के विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई नही किया जाना परिलक्षित है। मामले के समीक्षोपरांत उक्त कृत्य के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उनके विरूद्ध निन्दन (उनके वर्ष 2013-14) का दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया है।

अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्ण के आलोक में श्री रामपुकार रंजन (आई0डी0-3272) तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर(मोतिहारी) संप्रति अभियंता प्रमुख सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता हैः- (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2013-14)

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 अप्रील 2019

सं॰ 22नि0सि0(सिवान)-11-04/2013/835--श्री युगेश्वर पासवान (आई0डी0-4665), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, अन्वेषण एवं योजना प्रमंडल, गाडा, छपरा के विरूद्ध दामोदरपुर जलवाहा के वि0दू0 2.94 (एल0) एवं 3.20 (आर0) पर बिना नाला निर्माण कराये हुए कुल 5,44,349/- रू0 भुगतान करने के आरोप में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-468 दिनांक-17.03.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-1875, दिनांक 30.08.18 द्वारा श्री युगेश्वर पासवान (आई0डी0-4665) कार्यपालक अभियंता, अन्वेषण एवं योजना प्रमंडल, गाड़ा छपरा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (समय-समय पर यथा संशोधित) के तहत निम्न दण्ड दिया गया :- (i) सरकार को पहूँचाई गयी आर्थिक क्षति की राशि मो0 5,44,349/- (पाँच लाख चौवालीस हजार तीन सौ उनचास रू0) की लगभग आधी राशि 2,73000/-(दो लाख तेहत्तर हजार रू0) वेतन से वसूली। (ii) कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। इन्हें भावी वेतन वृद्धि भी देय नहीं होगी। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी (अभ्यावेदन दिनांक 28.10.18) समर्पित किया गया जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-

विभागीय कार्यवाही में भाग लेकर अपना बचाव बयान समर्पित किया। कार्यवाही के दौरान आरोप प्रमाणित करने के लिये प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा एक भी गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। फलतः प्रति परीक्षण का मौका नहीं मिला। केवल प्रारंभिक जाँच रिर्पोट को सत्यापन कराया गया। जबकि इनके द्वारा गवाहों की सूची प्रस्तुत किया गया जो सब ने गवाही में नालों का निर्माण का पुष्टि किया था। संचालन पदाधिकारी द्वारा सभी तथ्यों एवं गवाहों के बयान को नकारते हुए आरोप को सिद्ध पाया जो नियमानुकूल नहीं है। द्वितीय कारण पृच्छा के अनुपालन में अपने पत्रांक-101, दिनांक 07.03.17 के द्वारा साक्ष्य सहित जवाब समर्पित किया गया। परन्तु र्दुभाग्यवश न्याय नहीं मिला एवं दण्ड संसूचित किया गया। वि0दू0 2.94(2) पर निर्माण संभव नहीं था। इस कारण से स्थान बदला गया था, परन्तु अभिकर्त्ता एवं श्री विजय कुमार सिंह के बीच आपसी51 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 रंजिश के कारण नाला को ध्वस्त कर दिया गया। लाभान्वित कृषकों के दिये गये बयान को अनदेखी करना नियमानुकूल नहीं है। साथ ही कार्य पूर्ण होने के दो साल के बाद जाँच किया गया है जाँच में प्रश्नगत बिन्दु से अलग नाला निर्माण पाया गया। फिर भी दोषी करते हुए दण्ड निर्गत किया गया है। कार्य पूर्ण होने के बाद दिनांक 18.12.2012 को संवेदक को अंतिम भुगतान जाँच करने के उपरांत किया गया तथा उक्त नाला जन उपयोगिता समिति को विधिवत हस्तानांतरित कर दिया गया एवं रख-रखाव की जिम्मेवारी कृषकों को सौंप दी गयी। निम्नलिखित तथ्यों पर पुनः विचार करने योग्य है - (1) आरोप गठन में ही आरोप प्रमाणित पाया गया है। अतः आगे की कार्यवाही केवल खानापूर्ति की गयी। (2) संचालन पदाधिकारी के समक्ष लाभुक कृषकों के द्वारा दिये गये गवाही को अनदेखी कर दोष सिद्ध करना सही नहीं है।

(3) प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा एक भी गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। (4) आरोप के अनुरूप ही दण्ड संसूचन करने का प्रावधान है जबकि उनके मामले में वृहत दण्ड निर्गत किया गया। (5) द्वितीय कारण पृच्छा का स्पष्टीकरण पर बिना विचार किये ही दण्ड संसूचित किया गया है जो निरस्त करने योग्य है। पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा में पाया गया कि श्री पासवान द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में लगभग वही तथ्य उद्धित किया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी अथवा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में दिया गया है। कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। जिससे स्थापित हो सके कि उक्त दोनों स्थलों पर नाला का निर्माण कराया गया है।

उल्लेखनीय है कि श्री विजय कुमार सिंह द्वारा दिये गये परिवाद पत्र की जाँच गंडक कमाण्ड क्षेत्र विकास अभिकरण, छपरा द्वारा त्रिसदस्यीय समिति का गठन कर करायी गयी है। जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से अंकित है कि दामोदर जलवाहा के वि0दू0 (एल0) 3.20 (आर0) पर न तो नाला का दिवार एवं न ही नाले के तल में किये गये ढलाई का कोई अवशेष पाया गया। अन्य वर्णित बिन्दुओं पर नाला दिखायी पडा जो जगह-जगह टूटा हुआ है। दामोदरपुर जलवाहा के उक्त दोनों बिन्दुओं पर नाला निर्माण कराया गया है, प्रमाणित नहीं हुआ। जबकि इस नाला निर्माण के लिये संवेदक को कुल 5,44,349/- रूपये का भुगतान किया गया। श्री पासवान ने पुनर्विलोकन अर्जी में उल्लेख किया है कि संवेदक के आपसी रंजिश के कारण परिवादी द्वारा नाला क्षतिग्रस्त कर ईंट ले भागा गया है। इनके द्वारा यह भी बताने का प्रयास किया गया है कि जाँच दल द्वारा जिन बिन्दुओं पर नाला निर्माण नहीं होने की बात कही गयी है उस बिन्दु पर वास्तव में नाला निर्माण नहीं हुआ था। इनका उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। क्योंकि जाँच दल ने अपने जाँच प्रतिवेदन में इस बात का उल्लेख किया है कि इन दो बिन्दुओं के अतिरिक्त अन्य बिन्दुओं पर नाला का निर्माण किया गया था, जिसे टूटा हुआ पाया गया। इनके द्वारा अन्य बिन्दुओं पर निर्मित टूटे हुए नाला को ही आलोच्य नाला निर्माण कराने की बात सिद्ध करने का प्रयास किया गया। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी ने विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान गवाहों की बात को अनदेखी करते हुए आरोप सिद्ध होने का मत दिया गया है। संचालन पदाधिकारी ने आरोपी के उक्त कथन को यह कहते हुए नकार दिया है कि किसी गवाहों ने यह नहीं कहा कि दामोदरपुर जलवाहा के वि0दू0 2.94(एल0) एवं 3.20 (आर0) पर नाला निर्माण हुआ है। जबकि दो पदाधिकारियों ने गवाही देकर आरोप की पुष्टि की है एवं त्रिसदस्यीय समिति के जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट अंकित है कि उक्त दोनों स्थलों पर नाला का न दीवार और न ही नाला के तल में किये गये ढलाई का कोई अवशेष पाया गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री पासवान द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 28.10.18 को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री युगेश्वर पासवान (आई0डी0-4665), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, अन्वेषण एवं योजना प्रमंडल, गाडा, छपरा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 28.10.18 को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-1875, दिनांक 30.08.18 द्वारा अधिरोपित निम्न दण्ड को पूर्ववत्‌ रखा जाता है :- (i) सरकार को पहूँचाई गयी आर्थिक क्षति की राशि मो0 5,44,349/- (पाँच लाख चौवालीस हजार तीन सौ उनचास रू0) की लगभग आधी राशि 2,73000/-(दो लाख तेहत्तर हजार रू0) वेतन से वसूली। (ii) कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। इन्हें भावी वेतन वृद्धि भी देय नहीं होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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29 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(पू॰)01-04/2009/845--श्री अमरेन्द्र कुमार अमन (आई0डी0-3483), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल नरपतगंज के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, पूर्णियाँ के परिक्षेत्राधीन नहर प्रमंडल, नरपतगंज के अन्तर्गत वर्ष 2000-01 में जानकी शाखा नहर के पुर्नस्थापन कार्य एवं सी0डी0 संरचना की मरम्मति संबंधित एकरारनामा सं0-25F2/2000-01 एवं 29F2/2000-01 के तहत कराये गये कार्य का भुगतान लंबित रहने के कारण संवेदक श्री किशोर जयसवाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में वाद सं0-14371/07 एवं 15090/07 दायर किया गया। उक्त वाद में पारित न्याय निर्णय के आलोक में दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित करने हेतु विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 52 उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप

(i) असम्बद्ध गुण नियंत्रण प्रमंडल से प्री लेवल की जाँच कराये बिना ही कार्य प्रारम्भ कर दिया गया एवं स्वंय द्वारा भी प्री लेवल की जाँच नहीं की गयी।

(ii) दिनांक-26.06.2001 को कार्य समाप्त होने के पश्चात पोस्ट लेवल की जाँच बरसात पूर्व नहीं की गयी। के लिए श्री अमरेन्द्र कुमार अमन के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-576 दिनांक- 05.04.2010 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर श्री अमन से विभागीय पत्रांक-97 दिनांक-22.01. 2013 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री अमन से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की सम्यक समीक्षोपरांत एकरारनामा सं0-25F2/2000-01 से संबंधित कार्य प्रारम्भ कराने हेतु कोई कार्रवाई नहीं करने के प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :- (i) निन्दन वर्ष 2000-01 (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त दण्ड पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय के अनुमोदन प्राप्त करने के क्रम में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर अनुमोदन नहीं देकर मामले की पुनः नये सिरे से जाँच हेतु विभागीय जाँच आयुक्त को Remand कर दिया गया। तदोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोप के लिए श्री अमन से विभागीय पत्रांक-1818 दिनांक-09.10.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। आरोप-1 :- वर्ष 2000-01 में प्रमंडलाधीन कराये गये मिट्टी कार्य का प्री-लेवल की जाँच न तो स्वयं की गयी न ही असम्बद्ध प्रमंडल के अभियंता से कराये जाने से संबंधित है। इस आरोप के संदर्भ में श्री अमन द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में वही तथ्यों एवं साक्ष्यों का उल्लेख किया गया जो उनके द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। जिसकी समीक्षा विभागीय स्तर पर करते हुए विभागीय मंतव्य से संचालन पदाधिकारी को अवगत कराया गया है। जिसमें प्री-लेवल की असम्बद्ध प्रमंडल एवं स्वयं के स्तर से बिना जाँच कराये ही मिट्टी कार्य प्रारम्भ करने के आरोप प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री अमन द्वारा मुख्य रूप से कहा गया है कि उड़नदस्ता जाँच में एकरारनामा सं0-29F2/2000-01 के संदर्भ में पाया गया है कि इस एकरारनामा के तहत के कार्यो का प्री-लेवल की जाँच असम्बद्ध प्रमंडल एवं कार्यपालक अभियंता के स्तर से की गयी है। जो उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.0.2 में उल्लेखित तथ्यों के आलोक में सही है। एकरारनामा सं0 25F2/2000-01 के संदर्भ में कहा गया है कि इस एकरारनामा का कार्य इनके पदस्थापन अवधि (दि0 25.10.2000 तक) प्रारम्भ नहीं होने के कारण सहायक अभियंता द्वारा इस कार्य का प्री-लेवल से संबंधित माप पुस्त जाँच हेतु उपस्थापित नहीं किया गया। फलतः इस एकरारनामा के तहत प्री-लेवल एवं पोस्ट लेवल की जाँच न तो इनके द्वारा की गयी और न ही असम्बद्ध प्रमंडल के अभियंताओं से कराया जा सका। यह भी कहा गया है कि कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा समय वृद्धि की जटील प्रक्रिया से बचने के लिये बरसात 2000 के पश्चात कार्य कराकर बैक डेटिंग कर माप पुस्त में अंकित कर दिया गया है। परन्तु उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 2.0.2 में एकरारनामा सं0 25F2/2000- 2001 के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि माप पुस्त सं0- 155 के पृ0-1-7 में प्री लेवल की प्रविष्टि दिनांक 05.06.2000 एवं पृ0-8 से 28 तक में अन्य कार्यो की रेकर्ड इंट्री दिनांक 14.06.2000 की गयी है। तथा सहायक अभियंता द्वारा उक्त इंट्री की जाँच भी दिनांक-20.06.2000 एंव 08.07.2000 में की गयी है। लेकिन कार्यपालक अभियंता द्वारा इसकी जाँच न तो असम्बद्ध प्रमंडल के अभियंता से एवं स्वयं भी इसकी जाँच नही ंकी गयी है, जिसके लिये श्री अमन को दोषी पाया गया है। उक्त के संदर्भ में आरोपी द्वारा माप पुस्त के पृ0-5-7 पर सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 09.06.2000 एवं 12.06. 2000 एवं पृ0-1-4 पर बाढ़ की तिथि 20.06.2000 में सहायक अभियंता द्वारा जाँचित होने के आधार पर कहा गया है कि इनके प्रभार मुक्त होने के पश्चात बैक डेट में माप पुस्त में इंट्री की गयी है, स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि नियमानुसार किसी कार्य की मापी कनीय अभियंता द्वारा माप पुस्त में अंकित किया जाता है जिसकी जाँच सहायक अभियंता द्वारा की जाती है। चूँकि सहायक अभियंता एक जाँच पदाधिकारी होने है, ऐसी स्थिति में कनीय अभियंता द्वारा माप पुस्त मे तिथिवार दर्ज मापी को बाद की तिथि में सहायक अभियंता द्वारा किये गये जाँच के आधार पर कहना है कि बैक डेट में मापी दर्ज की गयी है, उचित नहीं है। आरोपी द्वारा पत्रांक-960 दि0-28.06.2000 से विगत दिनों में भारी वर्षा होने के कारण वर्म का आंशिक कटने एवं 2'0'' से 2.5' तक नहर में पानी बहने की सूचना अधीक्षण अभियंता को दी गयी है परन्तु एकरारनामा सं0-25F2-2/2000- 01 के तहत कार्य प्रारम्भ नहीं होने अथवा कार्य बन्द रहने का उल्लेख नहीं किया गया है। एकरारनामा सं0-25F2- 2/2000-01 के संवेदक कार्य प्रारम्भ नहीें करने, कनीय अभियंता/सहायक अभियंता द्वारा प्री-लेवल/पोस्ट लेवल जाँच हेतु53 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 माप पुस्त उपलब्ध नहीं कराने पर की गयी कार्रवाई से संबंधित कोई पत्राचार का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। इस प्रकार इनका कथन कि एकरारनामा सं0-25F2-2/2000-01 से संबंधित कार्य बरसात के पूर्व नहीं कराया गया है स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव एकरारनामा सं0-25F2-2/2000-01 सें संबंधित प्री-लेवल, पोस्ट लेवल की जाँच स्वयं के स्तर से किए बिना एवं असम्बद्ध प्रमंडल के अभियंता से कराये बिना कार्य प्रारम्भ करने के लिये दोषी पाये गये है। आरोप-2 ः- आलोच्य कार्य का दिनांक-26.06.01 को कार्य समाप्त होने के पश्चात पोस्ट लेवल की जाँच नहीं करने से संबंधित है। श्री अमन द्वारा कहा गया है कि वे दि0- 25.10.2000 तक ही कार्यरत थे। अतएव दिनांक 26.06.01 को समाप्त हुए कार्य का पोस्ट लेवल की जाँच उनके मामले में अप्रासंगिक है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 3.0.2 से स्पष्ट है कि एकरारनामा सं0-29F2-2/2000-01 से संबंधित माप पुस्त 136 के पेज सं0 35-43 पर आरोपी द्वारा पोस्ट लेवल की जाँच की गयी है। परन्तु कंडिका 2.0.2 में एकरारनामा सं0-25F2-2/2000-01 के तहत पोस्ट लेवल जाँचित नहीं होने का बोध होता है माप पुस्त सं0-155 के पृ0 29-31 से स्पष्ट होता है कि इस एकरारनामा के मिट्टी कार्य वस्तुतः दि0 26.06.2000 को समाप्त होने की पुष्टि होती है न कि 26.06.01 को। इनकी जाँच इनके द्वारा नहीं की गयी है। जिसके लिये इन्हें दोषी माना गया है। श्री अमन से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के सम्यक समीक्षोपरांत श्री अमरेन्द्र कुमार अमन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज संप्रति अधीक्षण अभियंता को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :- ''तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की माँग की गयी, तदालोक में आयोग द्वारा अपने पत्रांक-3582 दिनांक- 28.03.2019 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति दी गयी है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अमरेन्द्र कुमार अमन (आई0डी0-3483), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमण्डल नरपतगंज सम्प्रति अधीक्षण अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है। ''तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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29 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(कटि॰)-25-04/2017/846--श्री बालेश्वर पासवान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, बनमनखी के विरूद्ध विकास योजनाओं के पूर्ण हो जाने के बाद भी संवेदकों को भुगतान लंबित रखने, उच्चाधिकारी के सरकारी आदेशों की अवहेलना करने एवं सरकारी सेवक के निर्धारित आचार संहिता के प्रतिकूल व्यवहार करने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(1) क के तहत योजना एवं विकास विभाग के अधिसूचना सं0-936 दिनांक-18.02.2016 द्वारा निलंबित किया गया, तदोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17(2) में विहित रीति से अधिसूचना सं0-1277 दिनांक-04.03.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत अधिसूचना सं0-1638 दिनांक-27.07.2018 द्वारा श्री बालेश्वर पासवान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (i) तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (ii) आरोप वर्ष के लिए निन्दन। (iii) दो वर्षों के लिए प्रोन्नति की देय तिथि से प्रोन्नति पर रोक। उक्त संसूचित दण्ड के बाद श्री पासवान से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण, एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11(5) में निहित प्रावधानों के तहत निलंबन अवधि दिनांक- 18.02.2016 से दिनांक-26.07.2018 तक के सेवा के निरूपण एवं वेतनभाा की अनुमान्यता के संबंध में विभागीय पत्रांक-1994 दिनांक-11.09.2018 द्वारा नोटिस निर्गत की गयी। उक्त नोटिस के विरूद्ध श्री पासवान द्वारा उार समर्पित किया गया, जिसमें श्री पासवान द्वारा कहा गया कि उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही को एक वर्ष के अन्दर पूर्ण नहीं किया गया, यदि विभागीय कार्यवाही को एक वर्ष के अन्दर पूर्ण कर लिया जाता तो पश्चातवर्ती अवधि के लिए उन्हें पूर्ण वेतनादि का भुगतान किया जाता। श्री पासवान द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा किसी प्रकार की अनियमितता बरतने अथवा सरकार को विाीय क्षति पहुँचाने का आरोप नहीं है इसलिए विभाग द्वारा उनके विरूद्ध जो दण्ड संसूचित किया गया है वह समानुपातिक नहीं है। श्री पासवान से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी, समीक्षा में पाया गया कि श्री पासवान ने अपने स्पष्टीकरण में आरोपों के संदर्भ में किसी प्रकार का खंडन नहीं किया है विभागीय कार्यवाही को एक साल से अधिक अवधि तक जारी रहने एवं सरकार को विाीय क्षति नहीं होने के आधार पर निलंबन अवधि को विनियमित किये जाने का आग्रह किया गया है। श्री पासवान पर योजनाओं के पूर्ण हो जाने के बाद भी संवेदक को भुगतान नहीं करने, उच्चाधिकरियों के आदेश की अवहेलना54 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 करने एवं सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रतिकूल व्यवहार करने के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत दण्डादेश निर्गत किया गया है। श्री पासवान द्वारा आरोप पत्र में वर्णित आरोपों का न तो खंडन किया गया है और न ही एतद संबंधी कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है, जो यह प्रमाणित करता हो कि श्री पासवान का निलंबन औचित्यपूर्ण नहीं था। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री बालेश्वर पासवान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-02, बनमनखी संप्रति कार्यपालक अभियंता, कमाण्ड क्षेत्र विकास प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के निलंबन अवधि (दिनांक-18.02.2016 से दिनांक-26.07.2018 तक) को निम्नरूपेण विनियमित किये जाने का निर्णय लिया गया :- ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि नहीं मानी जायेगी।'' सरकार द्वारा लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री बालेश्वर पासवान, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-02, बनमनखी संप्रति कार्यपालक अभियंता, कमाण्ड क्षेत्र विकास प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि नहीं मानी जायेगी।'' अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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29 अप्रील 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(डि॰) 14-01/2019-847--श्री कुमार ब्रजेश (आई0डी0-5145) अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमण्डल करगहर का स्थानान्तरण विभागीय अधिसूचना संख्या 2349 दिनांक-22.06.18 द्वारा अवर प्रमण्डल पदाधिकारी बाढ़ नियंत्रण एवं जल निससरण अवर प्रमण्डल सोनपुर के पद पर किया गया, पुनः विभागीय पत्रांक-3685 दिनांक-28.09.2018 द्वारा श्री कुमार को सूचित किया गया कि नियंत्री पदाधिकारी द्वारा विरमित नहीं किये जाने की स्थिति में दिनांक-20.10.18 के प्रभाव से स्वतः विरमित होकर दिनांक-22.10.18 तक निश्चित रूप से नव पदस्थापित स्थान पर प्रभार ग्रहण कर विभाग को ई-मेंल से अवगत कराया जाय। उक्त निदेश के बाद भी श्री कुमार के नव-पदस्थापन स्थान पर दिनांक-22.10.2018 तक योगदान न देकर दिनांक-06.11.2018 को योगदान समर्पित किया। विभागीय आदेश का उल्लंधन करने के कारण विभागीय पत्रांक-4086 दिनांक-05.11.2018 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की माँग की गयी, तदालोक में श्री कुमार द्वारा स्पष्टीकरण का उत्तर समर्पित किया गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय आदेश की अवहेलना करने के आरोप को प्रमाणित पाते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः- (i) निन्दन संगत वर्ष के लिए। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री कुमार ब्रजेश, तत्कालीन सहायक अभियंता सिंचाई अवर प्रमण्डल करगहर सम्प्रति अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अवर प्रमण्डल शेखपुरा को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है। '' निन्दन संगत वर्ष के लिए''।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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7 मई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-02/2015-900--श्री बबन प्रसाद लाल (आई0डी0-जे-5390A), तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती प्रमंडल सं0-1, सीतामढ़ी सम्प्रति सेवानिवृत के उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान अधवारा समूह के मुख्य नदी के तटबंध निर्माण कराने में करोड़ो रूपये की अनियमितता की जाँच से संबंधित श्री नवल किशोर राय, (पूर्व सांसद) से प्राप्त परिवाद पत्र के आलोक में मामले की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, सूचना भवन, पटना द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-2389, दिनांक 16.10.15 द्वारा श्री लाल से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री लाल से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1523, दिनांक 27.07.2016 से श्री लाल, सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई - (1) फसल लगी खेतों से जबरन मिट्‌टी कटवाने तथा फसल मुआवजा का भुगतान नहीं किये जाने के लिये आप दोषी है।

(2) फसल/जमीन मुआवजा मद में संवेदक को पूर्व में भुगतान होने के बावजूद बिना राशि वसूले एक ही कार्य अंश के लिये पुनः फर्जी मापपुस्त अंकन कर भुगतान करने के लिये आप दोषी हैं।

(3) मूल सहायक अभियंता, श्री सुभाष चन्द्र भट्‌ट को जमीन/फसल मुआवजा भुगतान से अलग कर एवं किसी कुस्सित मंशा से आपके द्वारा श्री सुभाष चन्द्र भट्‌ट के अधीन के ही एक कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह के55 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 साथ जमीन/फसल मुआवजा भुगतान में बरती गई अनियमितता एवं विभागीय स्तर से वितरित मुआवजा भुगतान में पायी गयी त्रुटियों एवं अनियमित भुगतान के लिये आप दोषी है।

संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री लाल, सेवानिवृत सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित अपने बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

(1) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522, सीतामढ़ी दिनांक 18.05.2013 के अनुपालन एवं सरकारी हित में किसानों की परेशानी को देखते हुए शेष फसल क्षतिपूर्ति भुगतान में कनीय अभियंता का सहयोग अपनी ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ किया गया है।

आलोच्य कार्य मेेरे कार्यक्षेत्र में नहीं है। जबरन मिट्टी कटवाने एवं तटबंध निर्माण मेरे कार्यक्षेत्र में नहीं है। फसल मुआवजा के भुगतान संबंधित कोई शिकायत मेरे पास नहीं आया था। मेरे पूर्व में भी भुगतान हुआ है।

(2) फसल एवं जमीन मुआवजा मद में संवेदक को इस कार्यमद अंश के लिये की गयी भुगतान एवं वसूली का कोई सूचना नहीं थी एवं मूल कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह द्वारा प्रमाणक पत्र तैयार कर भुगतान किया गया है। प्रमंडल द्वारा पारित भी किया गया है। यदि पूर्व में पारित रहता तो पुनः प्रमंडल द्वारा पारित नहीं होता।

(3) मूल सहायक अभियंता श्री सुभाष चन्द्र भट्‌ट स्वयं अपने जवाबदेही से भागे है। फसल क्षतिपूर्ति भुगतान बहुत ही संघर्षमय एवं कठिन कार्य है मौजा के किसान जमा होते है और भुगतान पाने हेतु हल्ला करते है। मैं मात्र कार्यपालक अभियंता के आदेश का भलीभांति एवं निष्ठा से पालन किया। कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह जो मूल सहायक अभियंता के अधीन के थे उनके द्वारा विपत्र बनाया गया था। श्री जवाहर लाल सिंह, कनीय अभियंता द्वारा फसल भुगतान कराने की अनियमितता की गयी होगी मेरी नहीं है। विभागीय स्तर पर भी सभी मुआवजा का भुगतान जवाहर लाल सिंह, कनीय अभियंता द्वारा ही की गयी है और पहचान भी किया गया है इनके द्वारा जितनी अग्रिम राशि की माँग की गई। इन्हें Hand Received (प्रति रसीद) पर दी गयी। सभी प्रमाणक कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँचित एवं पारित होने के बाद समायोजन किया गया है। पारित प्रमाणक एवं राशि का मिलान किया जो सही पाया गया।

श्री जवाहर लाल सिंह, कनीय अभियंता द्वारा भुगतान एवं पहचान के क्रम में कुछ प्राप्तकर्त्ता के हस्ताक्षर में पिता के बदले पुत्र पुत्र के बदले पिता, पत्नी के बदले पति का हस्ताक्षर एवं पावना कराया गया है। कनीय अभियंता द्वारा बताया गया है कि उपस्थित किसान के समक्ष एवं सर्वसम्मति से इन्हें भुगतान किया गया है। प्राप्तकर्त्ता का कोई शिकायत अभी तक नहीं है।

अतएव कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह से फलस मुआवजा भुगतान कराने की अनियमितता एवं विभागीय स्तर से भुगतान में अनियमितता से मुझे दोष मुक्त किया जाय।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में मुख्य रूप से निम्न बातें ही गई हैं :- आरोप-1 आरोपी श्री लाल द्वारा प्रथम आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि आलोच्य कार्य उनके कार्यक्षेत्र से नहीं था एवं न ही कोई कार्य कराया गया है। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.3.0 से स्पष्ट है कि इस एकरारनामा के तहत अधवारा समूह के मुख्य नदी के बाँये तटबंध के कि0मी0 0.0 से 43.60 तथा दाँये तटबंध के कि0मी0 0.0 से 44.0 के बीच उच्चाकरण कार्य कराने का प्रावधान है। पृ0 33/प0 फोल्डर-IV पर रक्षित कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522, दिनांक 18.05.13 से परिलक्षित होता है श्री सुभाष चन्द्र भट्‌ट, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल-1, सीतामढ़ी के अवकाश में रहने के कारण श्री बबन प्रसाद लाल, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, ढाका को मात्र फसल/जमीन मुआवजा की क्षतिपूर्ति के भुगतान हेतू प्रतिनियुक्त किया गया है। उक्त के आलोक में माना जा सकता है कि आरोपी द्वारा आलोच्य कार्य में फसल/जमीन की क्षतिपूर्ति भुगतान के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं कराया गया है अतएव श्री लाल को फसल लगी खेतों से जबरन मिट्टी कटवाने तथा फसल मुआवजा का भुगतान नहीं किये जाने के लिये दोषी नहीं माना जा सकता है। आरोप-2 के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि फसल/जमीन मुआवजा मद में संवेदक को पूर्व में किये गये भुगतान एवं वसूली की कोई सूचना उन्हें नहीं थी एवं कार्य में संलग्न मूल कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह द्वारा प्रमाणक तैयार किया गया एवं प्रमंडल से प्रमाणक पारित होने के पश्चात भुगतान किया गया है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522, दिनांक 18.05.13 में आरोपी श्री लाल को स्पष्ट निदेश है कि कार्य स्थल की जाँच कर होने वाले क्षतिपूर्ति का विपत्र तैयार कर तदनुसार अग्रीम हेतु अधियाचना प्रस्तुत करेंगे। ऐसे भी विभागीय नियमानुसार सहायक अभियंता का दायित्व है कि कनीय अभियंता द्वारा तैयार किय गये प्रमाणक/विपत्र को जाँच कर अगे्रतर कार्रवाई किया जाना है। आरोपी के कथन से परिलक्षित होता है कि इनके द्वारा न तो कार्यपालक अभियंता का आदेश का पालन किया गया। न ही अपने दायित्वों का निर्वहन किया गया फलस्वरूप एक ही मद में अनियमित ढंग से पूर्व में संवेदक को फसल/जमीन क्षतिपूर्ति में भुगतान की गयी कुल 792862.00 रूपये का इनके द्वारा पुनः भुगतान किया गया है। अतएव कुल 792860.00 रूपये के अनियमित भुगतान होने में श्री लाल की सहभागिता माना जा सकता है।

आरोप-3 -इस आरोप के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है मूल सहायक अभियंता श्री सुभाष चन्द्र भट्‌ट स्वयं अपने दायित्वों से भागने के कारण कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522 दिनांक 18.05.13 से प्राप्त आदेश के अनुपालन में मूल कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह द्वारा तैयार किये गये प्रमाणक को प्रमंडल से पारित होने के पश्चात श्री सिंह द्वारा अधियाचित राशि को Hand Receipt के आधार पर कनीय अभियंता को राशि दी गयी है एवं उन्हीं के द्वारा किसानों का पहचान कर भुगतान किया गया है। इसमें मेरी मात्र प्रमंडल से राशि प्राप्त कर कनीय अभियंता को दी गयी है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि अगर भट्‌ट सहायक अभियंता अपने जवाबदेही से भाग रहे थे एवं कार्यपालक अभियंता के आदेश के आलोक में फसल क्षतिपूर्ति का भुगतान करना आवश्यक था तो कार्यपालक अभियंता के निदेशानुसार इन्हें स्वयं56 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 कार्यस्थल की जाँच किया जाना था एवं सही किसानों को भुगतान होना सुनिश्चित करते। ऐसे भी विभागीय नियमानुसार सहायक अभियंता की उपस्थिति में जन प्रतिनिधि यथा मुखिया, सरपंच के द्वारा किसानों की पहचान के पश्चात अपने देख-रेख में फसल क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होता है न कि मात्र कनीय अभियंता को राशि देकर छोड़ देना होता है। यदि इनके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन किया जाता तो जाँच प्रतिवेदन में उद्धित त्रुटियाँ न ही होती एवं वास्तव में क्षतिपूर्ति के हकदार को भुगतान होता। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 10.2.10, 10.2.11 एवं 10.2.12 द्र0। जाँच दल द्वारा भी श्री लाल को उक्त अनियमित कृत के लिये दोषी हैं।

अतएव आरोप संख्या-1 अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-2 एवं 3 पूर्णतः प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री लाल, सेवानिवृत सहायक अभियंता से विभागीय पत्रांक-743, दिनांक 26.05.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई। उक्त के आलोक में श्री लाल, सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग द्वारा समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कहीं गई हैं -

आरोप संख्या-2-फसल मुआवजा का विपत्र बागमती अवर प्रमंडल के कनीय अभियंता, श्री जवाहर लाल सिंह एवं उसी अवर प्रमंडल के दूसरे कनीय अभियंता द्वारा तैयार किया गया था जिसका भुगतान संवेदक को किया गया था। भूलवश कार्यपालक अभियंता द्वारा दोनों विपत्र पारित हो गया था पर बाद में कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक के भुगतान को रद्‌द करते हुए उसकी वसूली 15वें चालू विपत्र से कर ली गयी । इस तरह मेरे द्वारा किये गये भुगतान को वैद्य एवं सही माना गया है। अतः आरोप की एक ही कार्यमद अंश के लिये पुनः फर्जी मापपुस्त अंकण किया गया है तथ्यहीन है।

आरोप-3- श्री भट्‌ट, सहायक अभियंता, बागमती अवर प्रमंडल, सीतामढ़ी के अवकाश के चलते अस्थायी रूप से अंशतः जमीन/फसल मुआवजा का वितरण का कार्य कार्यपालक अभियंता के आदेशानुसार उचित प्रक्रिया अपनाकर किया गया है। जाँच के क्रम में कुछ मामले प्रकाश में आये कि वास्तविक रैयत के बदले अन्य को मुआवजा भुगतान किया गया है। यह अन्य कोई और नहीं बल्कि उसी परिवार के सदस्य थे। जिसकी पहचान कराकर भुगतान किया गया था। मेरे द्वारा मात्र उच्चाधिकारियों के आदेश एवं जवाबदेही का निर्वहन किया गया है। मेरी भूमिका अग्रिम प्राप्त करने, कनीय अभियंता को उपलब्ध कराने एवं वितरण के दौरान निगरानी करना था जिसका निर्वहन किया गया है।

श्री बबन प्रसाद लाल, सेवानिवृत सहायक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये -

आरोप-1- जो कार्य के कार्यान्वयन के दौरान फसल लगी खेतों से जबरन मिट्‌टी कटवाने तथा फसल मुआवजा का भुगतान नहीं करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन कि संदर्भित कार्य उनके कार्यक्षेत्र से नहीं था एवं न ही कार्य करया गया है को कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522, दिनांक 18.05.13 से श्री सुभाष चन्द्र भट्‌ट , अवर प्रमंडल पदाधिकारी के अवकाश में रहने के कारण आरोपी श्री लाल को मात्र फसल/जमीन मुआवजा की क्षतिपूर्ति के भुगतान हेतु प्रतिनियुक्त किया गया है के आलोक में आरोपी द्वारा मात्र फसल/जमीन मुआवजा का भुगतान के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं कराया गया है। स्वीकार योग्य मानते हुए इस आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया है। आरोपी द्वारा भी इस आरोप के संदर्भ में द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई तथ्य नहीं दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत हाते हुए आरोप सं0-1 प्रमाणित नहीं होता हैं।

आरोप-2- जो फसल मुआवजा मद में संवेदक को पूर्व में भुगतान होने के बावजूद बिना राशि की वसूली किये ही उसी कार्यमद अंश के लिये फर्जी मापपुस्त अंकन कर भुगतान किये जाने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने श्री लाल का कथन कि संवेदक को पूर्व में किये गये भुगतान एवं वसूली की सूचना उन्हें नहीं थी एवं कार्य में संलग्न मूल कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह द्वारा प्रमाणक तैयार किया गया एवं प्रमंडल से पारित प्रमाणक के पश्चात भुगतान किया गया को कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522, दिनांक 18.05.13 में श्री लाल को स्पष्ट निदेश है कि कार्यस्थल की जाँच कर होने वाले क्षतिपूर्ति का विपत्र तैयार कर तदनुसार अग्रिम हेतु अधियाचना प्रस्तुत करेंगे के आधार पर अस्वीकार योग्य मानते हुए एक ही मद में अनियमित ढंग से पूर्व में संवेदक को फसल/जमीन क्षतिपूर्ति में भुगतान की गयी कुल राशि 792862/- का इनके द्वारा पुनः अनियमित भुगतान होने में इनकी सहभागिता होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है बल्कि वही तथ्य एवं साक्ष्य को अंकित किया गया हे। ऐसी स्थिति में श्री लाल का बचाव बयान को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए फसल/जमीन मुआवजा के मद में इनकी सहभागिता मानी जा सकती है एवं आरोप-2 प्रमाणित होता है।

आरोप-3- जो मूल सहायक अभियंता को फसल/भूमि मुआवजा भुगतान से अलग कर किसी कुत्सित मंशा से मूल अवर प्रमंडल के कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह के साथ मिलकर मुआवजा भुगतान में अनियमितता बरतना एवं विभागीय स्तर से वितरीत मुआवजा में त्रुटिपूर्ण एवं अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोपी का कथन कि मूल सहायक अभियंता श्री भट्‌ट स्वयं अपने दायित्व से भागने के कारण कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-522, दिनांक 18.05.13 के अनुपालन में मूल कनीय अभियंता द्वारा तैयार किये गये प्रमाणक एवं प्रमंडल से पारित होने के पश्चात अधियाचित राशि को प्राप्त कर कनीय अभियंता को दी गयी। तथा उन्हीं के द्वारा किसानों को पहचान कर भुगतान किया गया को अस्वीकार योग्य मानते हुए कहा गया है कि कार्यपालक अभियंता के आदेश के आलोक में इन्हें स्वयं स्थल की जाँच करते हुए सही किसानों को भुगतान सुनिश्चित करते परन्तु ऐसा नहीं किया57 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 गया। अतएव जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 10.2.10, 10.2.11 एवं 10.2.12 में उद्धित तथ्यों के आलोक में किसानों का पहचान मुखिया, जन प्रतिनिधि संरपच से बिना कराये त्रुटिपूर्ण एवं अनियमित ढंग से फसल मुआवजा का भुगतान करने के लिये इन्हें दोषी माना गया है।

आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव इनके द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकार योग्य मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 10.2.10, 10.2.11 एवं 10.2.12 में वर्णित तथ्यों से सहमत होते हुए फसल/जमीन मुआवजा में बरती गई अनियमितता एवं विभागीय स्तर से वितरित मुआवजा में पायी गयी त्रुटियों एवं अनियमित भुगतान के लिये दोषी माना जाता है। उल्लेखनीय है कि तकनीकी परीक्षक कोषांग की कंडिका 5.5.3 में जमीन/फसल मुआवजा के भुगतान मद में कुल 65,30, 178/- रूपये का अतिरिक्त भुगतान होना बताया गया है। जो एक गंभीर मामला है एवं उक्त अनियमित भुगतान के लिये श्री बबन प्रसाद लाल, सेवानिवृत कनीय अभियता को भी दोषी पाया गया है। अतएव आरोप संख्या-3 प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री बबन प्रसाद लाल, तत्कालीन सहायक अभियंता, बागमती प्रमंडल-1, सीतामढ़ी को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

" पेंशन से 25 (पच्चीस) प्रतिशत की स्थायी कटौती"।

उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक-1174, दिनांक 24.05.2018 द्वारा परामर्श/सहमति की माँग की गई। जिसमें उनके द्वारा अपने पत्रांक-3577., दिनांक 28.03.2019 से प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री बबन प्रसाद लाल, सेवानिवृत सहायक अभियंता, शिव कॉलोनी, फजलगंज, सासाराम, रोहतास को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

" पेंशन से 25 (पच्चीस) प्रतिशत की स्थायी कटौती"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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7 मई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2008-902--श्री श्रीधर वासुदेव (आई0डी0-1997) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल शिवहर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान बागमती नदी के दायाँ एफलक्स बाँध के कटएण्ड के 2362मी0 से 3262मी0 तक बेलवा इनरवा के पास बाढ़ 2008 के पूर्व HSCL द्वारा कराए गए रिभर्टमेंट कार्याें में बरती गयी अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता द्वारा की गयी। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1143 दिनांक-16.10.2012 द्वारा श्री वासुदेव से स्पष्टीकरण पूछा गया एवं तत्पश्चाता विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1718 दिनांक-05.08.2015 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

आरोप सं0-01 :- बी0ए0 वायर क्रेट बुनाई कार्य विशिष्टि के विपरीत डबल नॉट के स्थान पर सिंगल नॉट का क्रेट तैयार कर कम वजन वाले क्रेट को कार्य में उपयोग कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाया गया। जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं।

आरोप सं0-02 :- ब्रीक रेटिंग कार्य में विशिष्टि के विपरीत कमतर गुणवाा के 10 से 15 प्रतिशत ईंट के टुकड़े का उपयोग कर सरकारी राजस्व का क्षति पहुँचाना। जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं।

आरोप सं0-03 :-उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार जाँच की तिथि 16.01.2009 तक भुगतान नहीं हुआ था। मुख्य अभियंता के पत्रांक-593 दिनांक-25.02.2015 से स्पष्ट है कि कराए गए कार्य का भुगतान दिनांक-10.10.2009 को किया गया है। चूँकि उड़नदस्ता जाँच में न्यून विशिष्टि का वी0ए0 वायर क्रेट (Double knot के जगह पर Single knot) का तथा ब्रीक क्रेटिंग कार्य में न्यून विशिष्टि के ईंट एवं ईंट के टुकड़े (10 से 15 प्रतिशत तक) का उपयोग करने की अनियमितता प्रकाश में आ गयी थी। जिसके बावजूद भी प्रावधानित बी0ए0 वायर क्रेट के अनुरूप ही 24.67 कि0ग्रा0 प्रति क्रेट की दर से भुगतान कर दिया गया तथा न्यून विशिष्टि के ईंट एवं ईंट के टुकड़े का उपयोग होने के बावजूद ईंट के गुणवाा जाँच हेतु काटी गई राशि 10 प्रतिशत को मात्र एक फॉग मार्क (आरती) की गुणवाा जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विमुक्त कर दिया गया है जबकि कार्य में कई मार्कों के ईंटों का प्रयोग किया गया है साथ ही 10 से 15 प्रतिशत ईंट के टुकड़े का भी उपयोग किया गया है। इस प्रकार अनियमितता प्रकाश में आने के बावजूद भी जान बूझ कर अतिरेक भुगतान कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचायी गयी। जिसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री वासुदेव सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप सं0-1 एवं आरोप सं0-2 को अप्रमाणित एवं आरोप सं0-3 को प्रमाणित पाया। फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0-2 को अप्रमाणित एवं आरोप सं0-3 को प्रमाणित एवं असहमत होते हुए आरोप सं0-1 को प्रमाणित पाते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर विभागीय पत्रांक-838 दिनांक-05.06.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। आरोप सं0-01 जो विशिष्टि के विपरीत बी0ए0 वायर क्रेट बुनाई कार्य में डबल नॉट के स्थान पर सिंगल नॉट का क्रेट तैयार कर कम वजन वाले क्रेट को कार्य में उपयोग कर सरकारी राशि की क्षति पहुँचाने से संबंधित है। संचालन58 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 पदाधिकारी ने अपने निष्कर्ष कंडिका में अंकित किया है कि उड़नदस्ता द्वारा केवल कुछ क्षतिग्रस्त क्रेटों का अवलोकन कर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि डबल नॉट की जगह पर सिंगल नॉट का क्रेट तैयार किया गया है। जबकि अत्याधिक जल दबाव के कारण डबल नॉट सिंगल नॉट प्रतीत होने की संभावना है। निरीक्षण दल द्वारा क्रेट का तौल होना संभव नहीं हो सका तथा अनुमान के आधार पर तौल में कमी बताया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा कोई स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया। अतएव उनके मंतव्य से निम्न बिन्दु पर असहमत हुआ गया है :- जलीव दबाव के कारण किसी भी क्षतिग्रस्त ईंट भरे बी0ए0 वायर क्रेट में तनाव आना स्वाभाविक है। जिसे माना जा सकता है। उक्त दबाव/तनाव के कारण किसी भी क्रेट के मेस साईज में अंतर आ सकता है परन्तु क्रेट की बुनाई अगर डबल नॉट देकर की गयी है तो तनाव/दबाव के कारण नॉट का साईज छोटा हो सकता है परन्तु डबल नॉट सिंगल नॉट में प्रतीत होना संभव नहीं है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.2.3 एवं 3.2.2 में स्पष्ट रूप से अंकित है कि खुले बी0ए0 वायर क्रेट के मेस साईज प्रावधानित 4'' x 4'' की जगह 5'' x 4.5'' पाया गया तथा डबल नॉट की जगह सिंगल नॉट पाया गया इसलिए क्रेट के तौल में कमी निश्चित है। क्योंिक जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि क्रेट का वजन नहीं लिया गया है। परन्तु क्रेट में नॉट की संख्या देखकर ही स्थापित किया जा सकता है कि क्रेट सिंगल नॉट अथवा डबल नॉट से बुनाई की गयी है। उड़नदस्ता द्वारा की गयी स्थलीय जाँच में क्रेट के डबल नॉट की जगह पर सिंगल नॉट पाया गया है। हालॉकि क्रेट के वजन में वास्तविक रूप से कितने की कमी है उसे तौल कर ही ज्ञात किया जा सकता है परन्तु यह तो परिलक्षित है कि कार्य मे न्यून विशिष्टि के बी0ए0 वायर क्रेट का उपयोग हुआ है एवं प्रावधान के अनुरूप भुगतान कर अनियमितता बरती गयी है। उड़नदस्ता द्वारा क्रेट का वजन नहीं लिया गया है परन्तु स्वभाविक है कि क्रेट में डबल नॉट की जगह सिंगल नॉट से बुनाई करने पर बी0ए0 वायर क्रेट की बचत होगी एवं डबल नॉट की जगह पर सिंगल नॉट का बी0ए0 वायर क्रेट का वजन कम होना भी स्वभाविक है। जहाँ तक अनुवीक्षण दल के जाँच प्रतिवेदन के कडिका 4(ख) में विभागीय सामग्री जो उपयोग मेें लाया गया है संतोषप्रद अंकित किया गया है। इस कार्य में क्रेट बुनाई का कार्य संवेदक द्वारा किया गया है। ऐसी स्थिति में इस प्रतिवेदन के आधार पर उड़नदस्ता द्वारा स्थलीय जाँचोपरांत की गयी टिप्पणी को नाकारा नहीं जा सकता। अतएव आरोप सं0-1 प्रमाणित होता है। उक्त के आलोक में श्री वासुदेव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-21.08.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया जिसमें मुख्य रूप से निम्न तथ्य अंकित किया गया है :- विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये एम0बी0 सं0-687 के पृ0 73 के अवलोकन से स्पष्ट है कि उनके द्वारा रिकार्ड इंट्री पर दिनांक-14.06.2008 को हस्ताक्षर है तथा पृ0 81 पर 1st A/c bill पर दिनांक-13.07.2008 को passing Order का हस्ताक्षर अंकित है। जो उड़नदस्ता के जाँच की तिथि दिनांक-16.01.2009 के बहुत पूर्व का है। इस प्रकार जाँच पदाधिकारी के आरोप प्रमािणत होने का निष्कर्ष इनसे संबंधित नहीं है। उड़नदस्ता द्वारा क्रेट के वजन में वास्तविक रूप से कितनी कमी है अंकित नहीं है मात्र अनुमान के आधार पर न्यून विशिष्टि का होना बताया गया है। सिंगल नॉट के क्रेट में Shape, Size एवं Mesh को विशिष्टि के अनुरूप रखते हुए ब्रीक पैकिंग संभव नहीं है। कतिपय क्रेट में कुछ नॉट का सिंगल रह जाना किसी तरह के स्टीफनेस या उसके बनाने वाले मजदूरों का मानवीय भूल हो सकता है। यदि व्यापक रूप से परिलक्षित होता तो उच्चाधिकारी निश्चित रूप से इंगित करते, परन्तु ऐसा नहीं हुआ है। यदि उड़नदस्ता को यह परिलक्षित हुआ कि कार्य में न्यून विशिष्टि के बी0ए0 वायर क्रेट का उपयोग हुआ एवं प्रावधान के अनुरूप भुगतान कर अनियमितता बरती गयी है एवं यह कार्य HSCL द्वारा MOU के अन्तर्गत कराया गया था। Defect liability Period के अन्तर्गत उड़नदस्ता जाँच किया गया था तो उक्त त्रुटियों को Clause-13 के तहत HSCL से दूर कराया जा सकता था। जो नहीं कराया जा सका। अतः बचाव बयान स्वीकार करने की कृपा की जाय। श्री वासुदेव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

आरोप सं0-1 :- जो विशिष्टि के विपरीत बी0ए0 वायर क्रेट के बुनाई डबल नॉट के स्थान पर सिंगल नॉट का तैयार कर कम वजन वाले क्रेट को कार्य में उपयोग कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने अपने निष्कर्ष में अंकित किया है कि उड़नदस्ता द्वारा केवल कुछ क्षतिग्रस्त क्रेटों के अवलोकन कर निष्कर्ष निकाला गया कि क्रेट का निर्माण डबल नॉट के जगह पर सिंगल नॉट का तैयार कर कार्य में उपयोग किया गया है। जबकि अत्याधिक जल दबाव के कारण डबल नॉट सिंगल नॉट प्रतीत होने की संभावना है। निरीक्षण दल द्वारा क्रेट का तौल लेना संभव नहीं हो सका एवं अनुमान के आधार पर तौल में कमी होना बताया गया है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी का आरोप की प्रमाणिकता पर स्पष्ट मंतव्य नहीं होने की स्थिति में आरोपी का कथन कि जलीय दबाव के कारण क्षतिग्रस्त बी0ए0 वायर क्रेट में तनाव के कारण डबल नॉट सिंगल नॉट प्रतीत होना स्वभाविक है, को स्वीकार योग्य नहीं माना गया। क्योंकि अगर क्रेट की बुनाई डबल नॉट से की गयी हो तो दबाव/तनाव के कारण नॉट का साईज छोटा हो सकता है लेकिन डबन नॉट सिंगल नॉट में परिवर्तित होना संभव प्रतीत नहीं है। साथ ही स्थल जाँच के क्रम में (उड़नदस्ता कंडिका 3.2.3 एवं 3.2.2) खुले हुए क्रेट के मेस साईज 4'' x 4'' की जगह 5'' x 4.5'' पाया गया तथा डबल नॉट की जगह सिंगल नॉट का पाये जाने के कारण उसके वजन में कमी होना बताया गया है, के आलोक में द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। श्री वासुदेव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा बी0ए0 वायर क्रेट के बुनाई में पायी गयी कमी के संदर्भ में वही तथ्य अंकित करते हुए कहा गया है कि कार्य में क्रेट के साईज, गेज, मेस, नॉट तथा वजन से संतुष्ट होकर उपयोग मे लाया59 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 गया था। अगर मानवीय भूलवश (क्रेट का निर्माण मैनुअल किया जाता है) ऐसा हुआ भी है तो एकरारनामा के कंडिका-13 के अनुसार जाँच के समय कराये गये कार्य Defect liability में था तो इसमें सुधारात्मक कार्य HSCL को करना था। श्री वासुदेव के उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि इनके द्वारा कार्य में प्रत्युक्त क्रेट डबल नॉट का ही था से संबंधि न तो कोई सम्पुष्ट तथ्य ही दिया गया है एवं न ही कोई साक्ष्य ही उपलब्ध कराया गया है। अतएव श्री वासुदेव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है एवं कार्य में न्यून विशिष्टि के क्रेट का उपयोग करने का आरोप प्रमाणित होता है।

आरोप सं0-3 :- जो दिनांक-10.01.2009 को उड़नदस्ता जाँच में न्यून विशिष्टि के बी0ए0 वायर क्रेट तथा ईंट के टुकड़े का उपयोग होने की अनियमितता प्रकाश में आने के बावजूद जाँच के तिथि के बाद की ईंट की गुणवाा मद में काटी गयी 10 प्रतिशत की राशि को विमुक्त करने तथा गुणवाा विहिन कार्यों का भुगतान प्रावधान के अनुरूप अनियमित ढंग से किये जाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने श्रीधर वासुदेव को इनके द्वारा एम0बी0 सं0-687 के पेज सं0-73 पर अंतिम विपत्र के भुगतान हेतु दिनांक-10.10.2009 को हस्ताक्षर अंकित होने, जो उड़नदस्ता जाँच की तिथि दिनांक-16.01.2009 के बाद का है। अर्थात उड़नदस्ता जाँच के लगभग 9 माह के बाद संवेदक को पूर्ण भुगतान कर दिया गया है, के आलोक में दोषी माना गया है। श्री वासुदेव द्वारा एम0बी0 सं0-687 पेज सं0-73 के प्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि इसमें दर्ज Record Entry पर दिनांक-14.06.2008 को हस्ताक्षर है एवं पृ0 81 पर 1st on A/c Bill पर दिनांक-13.07.2008 को Passing Order पर हस्ताक्षर है। जो उड़नदस्ता के जाँच के तिथि पूर्व का है। माप पुस्त सं0-687 के पेज 1 से 5 एवं 69-73 से स्पष्ट है कि इस माप पुस्त के इन पृष्ठों पर मापी दर्ज की गयी है। जिनपर सभी पदाधिकारी का 14.06.2008 को हस्ताक्षर किया गया है के आलोक में आरोप का कथन की आंशिक पुष्टि होती है परन्तु इस माप पुस्त के पृ0 81 की प्रति नहीं रहने के कारण इनका कहना है कि उक्त पृ0 81 पर दिनांक-13.07.2008 को प्रथम चालू विपत्र पारित किया गया है कि पुष्टि नहीं होती है एवं इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे परिलक्षित हो कि दिनांक-16.01.2009 (जाँच की तिथि) के बाद इनके द्वारा काटी गयी राशि को विमुक्त नहीं किया गया है तथा न्यून विशिष्टि के क्रेट का भुगतान प्रावधान के अनरूप नहीं किया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए यह आरोप प्रमाणित होता है। चूँकि मामला वर्ष 2008-09 का है एवं श्री वासुदेव दिनांक-30.11.2012 को ही सेवानिवृत हो चुके है तथा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन से संबंधित संकल्प दिनांक-05.08.2015 को निर्गत है। इसलिए इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के अन्तर्गत कालबाधित है। समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री श्रीधर वासुदेव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, शिवहर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मामले को कालबाधित होने के कारण संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्रीधर वासुदेव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, मोहल्ला-गोपेश्वर नगर, पो0-छपरा, जिला-सारण, को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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7 मई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-02/2015-903--श्री भीम शंकर राय (आई0डी0-2243), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल सं0-1, सीतामढ़ी सम्प्रति सेवानिवृत के उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान अधवारा समूह के मुख्य नदी के तटबंध निर्माण कराने में करोड़ो रूपये की अनियमितता की जाँच से संबंधित श्री नवल किशोर राय, (पूर्व सांसद) से प्राप्त परिवाद पत्र के आलोक में मामले की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, सूचना भवन, पटना द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-2385, दिनांक 16.10.15 द्वारा श्री राय से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री राय से निर्धारित अवधि के अन्दर स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण विभागीय पत्रांक-387, दिनांक 04.03.2016 द्वारा श्री राय को स्मारित भी किया गया। बावजूद इसके इनके द्वारा अपना स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित न कर कतिपय साक्ष्य/अभिलेख की मांग की गई। जिसकी समीक्षोपरांत सरकार द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1521, दिनांक 27.07. 2016 द्वारा श्री राय, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई -

(1) स्थल निरीक्षण के दौरान विभिन्न स्थानों पर रेनकटस की विराटता एवं गढे की प्रकृति के आधार पर माना गया कि तटबंध के सभी चैनेज पर स्तरीय संपीडनता नहीं की गयी है। अतएव न्यून संपीडनता के कार्य कराने के लिय आप जिम्मेवार है।

(2) इंडियन स्टैन्डर्स कोड 11532 के प्रावधान का उल्लंघन करते हुए तटबंध के टो से सटकर एवं 25मी0 के अंदर मिट्टी काटे जाने की अनियमितता के लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

(3) फसल लगी खेतों से जबरन मिट्टी कटवाने तथा फसल मुआवजा का भुगतान नहीं किये जाने के लिये आपको दोषी माना जा सकता है।60 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (4) बौरो एरिया एवं अन्य मद की वास्तविक मापी नहीं लेकर कुल गणित मिट्टी की मात्रा में 0.6मी0 से भाग देकर प्राप्त भू-क्षेत्रफल के आधार पर Borrow Area Preparation कार्यमद का भुगतान किये जाने के लिये आपको दोषी माना जा सकता है।

(5) बौरो एरिया एवं लीड की स्वीकृति के बिना ही Mechanical Means से मिट्टी कार्य कराने एवं अवास्तविक मापी के आधार पर अनियमित भुगतान करने के लिये आपको दोषी माना जा सकता है।

(6) मिट्टी कार्य के साथ-साथ समानुपातिक ढंग से संरचना का कार्य नहीं किया गया। संवेदक एवं विभागीय अभियंता समानुपातिक प्रगति से बेखबर होकर मूलतः मिट्टी कार्य कराकर भुगतान करने के लिये आपको दोषी माना जा सकता है।

(7) जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.2.0 में वर्णित त्रुटियों/अनियमितताओं (मापपुस्तो की निर्गती एवं अंकण) के लिये आपको दोषी माना जा सकता है।

(8) प्रीलेवल का गुण नियंत्रण प्रमंडल, मुजफ्फपुर से जाँच कराये बगैर ही कार्य प्रारंभ कर दिया गया जिसे अनियमित माना जा सकता है एवं प्रीलेवल की प्रमाणिकता संदिग्ध मानी जा सकती है। बाद में गुण नियंत्रण के अभियंताओं द्वारा तथा कथित सत्यापित प्री लेवल के आधार पर पोस्ट लेवल से गणित मिट्टी की मात्रा संदिग्ध मानी जा सकती है। अतएव प्री लेवल की तमाम कार्रवाई विश्वसनीय नहीं है। किया गया भुगतान को अनियमित माना जा सकता है। जिसके लिये आपको दोषी माना जा सकता है।

(9) निविदा एवं एकरारनामा शर्त्तों का उल्लंघन करते हुए राज्य के बाहर स्थित बै।क से निगत बैंक गारंटी के विरूद्ध एवं बिना मूल बैंक गारंटी प्राप्त किये संवेदक को Mobilisation Advance भुगतान करने तथा प्रथम Mobilisation Advance का उपयोगिता प्रमाण पत्र (आश्वस्त हुए बिना) देखे बिना द्वितीय एवं तृतीय Mobilisation Advance के लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

(10) अपनी सक्षमता से बाहर जाकर कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता का स्वतंत्र रूप से कार्य क्षेत्र का निर्धारण एवं कार्यक्षेत्र के अतिक्रमण के आधार पर दर्ज मापी/विपत्र की पुनः मान्यतः देने के लिए उत्तरदायी माना जा सकता है।

(11) एकरारनामा के अनुरूप निर्धारित Milestone से पिछडने के बावजूद विपत्रों से इस हेतु एक प्रतिशत की कटौती नहीं करने के अनियमितता के लिए उत्तरदायी माना जा सकता है।

(12) दसवें चालू विपत्र से किसी प्रकार का रोक संबंधी लिखित आदेश नहीं रहने के बावजूद memo of payment में 20-20% की दर से राशि स्वेच्छा से रोक ली गई। जिसका कोई औचित्य कहीं लिखित में नहीं है। अतएव स्वेच्छा पूर्वक भुगतान से कटौती की अनियमितता के लिए आपको उत्तरदायी माना जा सकता है। चौदहवें विपत्र में स्लूईस मरम्मति का 2,81,172/- के मापी पर बिना किसी कनीय अभियंता, सहायक अभियंता के हस्ताक्षर के विपत्र पारित कर भुगतान करने के लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

(13) एकरारनामा के अनुसार संवेदक को जमीन/फसल मुआवजा का भुगतान नहीं करना था, किन्तु जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 5.1.0 से स्पष्ट है कि संवेदक को अनियमित ढंग से भुगतान किया गया है। जिसके लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

(14) जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 5.1.0 एवं 5.5.0 एवं 5.5.1 के आलोक में एक कार्य अंश के लिए दो बार राशि की निकासी/भुगतान करने की अनियमितता तथा संवेदक को की गई । इस अधिक भुगतान की राशि की वसूली नहीं करने तथा संवेदक को पूर्व में भुगतान के बावजूद सहायक अभियंता को समान्य कार्य हेतु भुगतान करने एवं प्रमाणक को समांझित करने (बिना संवेदक से राशि वसूली किये) की अनियमितता के लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

(15) राज्य के बाहर के बैंक ब्रांच से निर्गत बैंक गारंटी एवं बगैर कार्य संवेदकीय निबंधन पत्र (विभागी) के ही निविदा सड़को के विपरीत एकरारनामा पर लिये जाने की अनियमितता के लिए आपको दोषी माना जा सकता है। (16) जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 5.5.3 में वर्णित तथा कथित अनियमितता एवं अतिरिक्त भुगतान की कुल राशि 65,30,1783,85,78,227 = 4,51,08,405.00 रूपये करने के लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

(17) मूल सहायक अभियंता श्री सुभाष चन्द्र भट्ट को जमीन/फसल मुआवजा भुगतान से अलग कर एवं किसी कुत्सित मंशा से अन्य (अवर प्रमंडल, ढाका) के श्री बबन प्रसाद लाल, सहायक अभियंता सहित श्री सुभाष चन्द्र भट्ट के अधीन के ही एक कनीय अभियंता श्री जवाहर लाल सिंह से जमीन/फसल मुआवजा भुगतान कराने की अनियमितता एवं विभागीय स्तर से वितरित सभी मुआवजा भुगतान में जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-10.2.11, 10.2.13 में परिलक्षित त्रुटियों एवं अनियमितता के लिए आपको दोषी माना जा सकता है।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान श्री राय द्वारा अपने पत्रांक-8, दिनांक 31.07.2016 द्वारा पुनः साक्ष्यों/अभिलेखों की मांग विभाग से की गई। जिसकी सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-2224, दिनांक 07.10.16 द्वारा कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल सं0-1, सीतामढ़ी को श्री राय से प्राप्त पत्र की छायाप्रति प्रेषित करते हुए वांछित अभिलेख उन्हें उपलब्ध कराने के साथ ही विभाग को भी सूचित करने का निदेश दिया गया। साथ ही श्री राय सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को भी अपने स्तर से संबंधित कार्यालय से सम्पर्क स्थापित कर यथावांछित अभिलेख प्राप्त कर संचालन पदाधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखने हेतु सूचित किया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्न बातें कही गई है -61 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोपी ने नोटिस प्राप्त किया और स्पीड पोस्ट से एक पत्र भेजा कि उनको संचालन पदाधिकारी नियुक्त करने का कोई अभिलेख उन्हे प्राप्त नहीं है किन्तु आरोपी कभी भी उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट नहीं करते है। प्रपत्र-'क' उन्हें निबंधित डाक से भेजा गया, जिसका प्रमाण रेकर्ड में संधारित है।

आरोपी को दूसरी बार पत्रांक-175, दिनांक 26.10.2016 से विभागीय कार्यवाही में प्रत्येक बुधवार को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा किन्तु वे उपस्थित नहीं हुए अंतिम रूप से उन्हें एक अंतिम नोटिश इस कार्यालय के पत्रांक-207, दिनांक 21.12.2016 द्वारा भेजा गया। फिर भी वे कभी स्वयं उपस्थित नहीं हुए। वे स्पीड पोस्ट/निबंधित डाक/एक बार किसी दूत से कार्यालय में पत्र भेज दिये, किन्तु स्वयं कभी उपस्थित नहीं हुए।

डाक से भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि "प्रतिवेदन वर्णित अनियमितताओं/त्रुटियों एवं परिस्थितयों के आलोक में एकरारित एवं विशिष्टि युक्त कार्य की समेकित विस्तृत वास्तविक मापी नियमानुसार कराकर कार्य के विरूद्ध भुगतान एवं कार्य गुणवता की विस्तृत स्थिति से प्रशासी विभाग एवं स्वयं संतुष्ट होकर शीघ्र निर्णय लेना चाहेगी।" आरोपी के विरूद्ध गंभीर आरोप है। आरोप की कंडिका 'द' में 4,51,08,405/- (चार करोड़ एकावन लाख आठ हजार चार सौ पाँच) रूपये का अनियमित एवं अतिरिक्त भुगतान का गंभीर आरोप है।

तीन किश्तों में Mobilisation Advance भी संवेदक फर्म को कुल रू0 चार करोड़ रूपये से अधिक की राशि दिया गया है।

प्रथम एवं द्वितीय Mobilisation Advance स्वीकृति/भुगतान के दौरान उसके विरूद्ध ली गई, बैक गारंटी (प्रत्येक रू0 2,42,19,329.00) क्रमशः दिनांक 18.05.2012 एवं 07.06.2012 को Indian Overseas Bank दरियागंंंज, नई दिल्ली शाखा से निर्गत है। बैंक गारंटी बिहार राज्य स्थित किसी Schedule Bank से ही प्राप्त कर समर्पित करना था। किन्तु राज्य के बाहर से प्राप्त बैंक गारंटी के विरूद्ध Mobilisation Advance के भुगतान की अनियमितता के लिए तत्कालीन कार्यपालक श्री भीमशंकर राय मुख्यतः दोषी है।

इस करोडों रू0 की अनियमितता के ये Kingpin है। इस मामले में अनियमितता के बदले लूट शब्द का प्रयोग होना चाहिए। श्री गुंजालाल राम, तत0 मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर ने अपने पत्रांक-1882, दिनांक 19.07.2013, 316, 30.01.13 879, 30.03.13, 1882, 19.07.13, 1922, 23.07.13, 78, 15.01.14 एवं पत्रांक 200, दिनांक 27.01.14 का हवाला देते हुए कहा है कि इतना निदेश देने के बावजूद भी जू नहीं रेंगा।

विभागीय कार्यवाही की एक निश्चित प्रक्रिया है। आरोपी को प्रपत्र-'क' का तामिला उप सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा करा दिया गया। आरोपी को संचालन पदाधिकारी की ओर से नोटिस भेजा जा रहा है। वे नोटिस प्राप्त कर रहे है और प्रत्येक नोटिस का जवाब डाक से भेजते है। उन्हें प्रत्येक बुधवार को विभागीय कार्यवाही में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया किन्तु वे कभी उपस्थित नहीं हुए।

सात महीना में एक बार भी उपस्थित नहीं हुए। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अनन्त काल तक उनकी प्रतीक्षा की जाय। उन्होंने आरोप पर कुछ नहीं कहा बल्कि प्रशासी विभाग को ही निर्णय लेने का अधिकृत कर दिया। आरोपी द्वारा विभागीय कार्यवाही में भाग नहीं लेने, आरोप के संबंध में कुछ भी अपना पक्ष नहीं रखने से स्पष्ट है कि उन्हें आरोप के लिए कुछ सफाई नहीं देनी है। ऐसी स्थिति में प्रपत्र-'क' गठित सारे आरोप उनके लिए प्रमाणित माना जाता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-738, दिनांक 26.05.2017 द्वारा श्री राय, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई। उक्त के आलोक में श्री राय द्वारा अपने पत्रांक-114/नि0, दिनांक 19.07.17 द्वारा विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कहीं गई हैं :-

श्री राय द्वारा कंडिका-1 के उपकंडिका (i) से लेकर (vii) तक में स्पष्टीकरण की मांग करने से लेकर विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु निर्गत पत्रों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि विभागीय कार्यवाही तथ्यों से परे है तथा कंडिका- (viii) में संचालन पदाधिकारी के रूप में तकनीकी पदाधिकारी को नियुक्त करने की मांग की गई। कंडिका- (ii) में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्रांक-3448, दिनांक 02.12.06 सी0डब्लू0जे0सी0 नं0-11293/05 में दिनांक 30.07. 2007 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्रांक-3128, दिनांक 18.09.2007, 1893, दिनांक 14.06.11, 9407, दिनांक 02.07.12 तथा 17696, दिनांक 23.12.14 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन पत्रों मेें प्रावधान का घोर उल्लंघन करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया जाना उचित नहीं है। कंडिका-3 में मुख्य सचिव, बिहार के स्तर से निर्गत पत्रांक-945, दिनांक 24.06.05 निगरानी विभाग के पत्रांक-445, दिनांक 29.01.15 से समर्पित जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 1.4.0 निगरानी विभाग की अधिसूचना सं0-205, दिनांक 22.02.17 ज्ञापांक-360, दिनांक 07.04.17 जाँच प्रतिवेदन उद्धित तथ्यों का नकारने का प्रयास किया गया है कि निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग के 64पृ0 के जाँच प्रतिवेदन में कही भी सरकार को वित्तीय क्षति या गबन होना प्रतिवेदित नहीं है। इसके बावजूद बिना माननीय मुख्यमंत्री के अनुमोदन प्राप्त किये बिना ही दिनांक 29.12.16 को FIR दर्ज करने का कोई औचित्य नहीं है।

कंडिका-5 में आरोप प्रपत्र-क में गठित आरोपों एवं संचालन पदाधिकारी के अंतिम जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित आरोपों में रूपभदेन एवं भिन्नता का तुल्यनात्मक विवरणी अंकित करते हुए कहा गया है कि विभागीय कार्यवाही में उनके विरूद्ध कुल 17 आरोप लगाये गये थे परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के मात्र 7 आरोपों पर ही अपना प्रतिवेदन दिया गया है जो नियम के विरूद्ध है। संचालन पदाधिकारी दिनांक 28.02.17 को अपनी सेवानिवृति के कारण नियम के62 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 विरूद्ध समय पूर्व ही जाँच प्रतिवेदन समर्पित कर दिया जाना परिलक्षित करता है कि मनमाने तौर पर दण्डित किये जाने की कार्रवाई की गयी है।

कंडिका -6 में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-3 आरोपी का बचाव-बयान के आलोक में संचालन पदाधिकारी को दिये गये बचाव-बयान को सारणीबद्ध करते हुए संचालन पदाधिकारी की टिप्पणी कि आरोपी ने प्रपत्र-क में गठित आरोप में कोई बचाव बयान नहीं दिया केवल अनावश्यक पत्राचार करते रहे है के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी से अपेक्षित अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध करने पर भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि नियमानुसार संचालन पदाधिकारी को समीक्षा करने का अधिकार नहीं है बल्कि संचालन पदाधिकारी को मात्र जाँच प्रतिवेदन समर्पित करना है।

कंडिका-7 में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-4 के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-175, दिनांक 26.10.16 के आलोक में सुनवाई की तिथि दिनांक 09.11.16 को उपस्थित हुआ था। परन्तु उनके राज्यस्तरीय बैठक में रहने के कारण उनके निजी सहायक को प्रपत्र उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी का कथन कि डाक से भेजे गये अपने पत्र में मैंने प्रशासी विभाग को स्वयं संतुष्ट होकर निर्णय लेने का अनुरोध किया है गलत है। बल्कि संचालन पदाधिकारी द्वारा मुझे दण्डित किये जाने के लिये ऐसा समीक्षा किया है। निगरानी विभागी द्वारा तकनीकी परीक्षक कोषांग की जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 10.2.19 में प्रासंगिक कंडका 5.5.3 में फसल मुआवज एवं बिना लीड स्वीकृत कराये लीडयुक्त मिट्‌टी की मात्रा के अनुसार (6530178-830028)=5700150/- फसल मुआवजा का अधिक भुगतान किया जाना परिलक्षित है तथा लीड स्वीकृति के बिना मिट्‌टी ढुलाई मद का भुगतान में प्रारंभिक लीड सहित मिट्टी कार्य में निम्न राशि के अतिरिक्त भुगतान हुआ माना गया है।

150मी0 से 1/2कि0मी0 - 1120817-857 (89.2-78.50)=1199275.07 1/2कि0मी0 से 1कि0मी लीड - 843983-377 (110-78.50)=26585476.38 कुल राशि 38578227.45 इस करोड़ो रू0 की अनियमितता के ये किंगपीन है तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा मुख्य अभियंता के विभिन्न पत्राें को हवाला देते हुए लिखा है कि इतना निदेश देने के बाद भी कान पर जू नहीं रेंगा। उचित नहीं है क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 के अनुसार संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिलेखों पर विचार नहीं किया गया एवं उसकी प्रति आरोपी को नहीं दी गई। उसे दिखाया नहीं गया। मुख्य अभियंता के ये सारे पत्र मुझे उपलब्ध नहीं कराया गया।

संचालन पदाधिकारी के द्वारा उल्लेख करना की सात माह में एक बार भी उपस्थित नहीं हुए पूर्णतः तथ्य से परे है। जबकि दिनांक 09.11.16 को उनके समक्ष उपस्थित हुए।

वस्तुतः मेरे द्वारा नियम के विरूद्ध कोई अनियमित या अधिकाई भुगतान नहीं किया गया है। अन्यथा महालेखाकार द्वारा भी भुगतान से संबंधित आपत्ति दर्ज की गयी होती। तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन में उस नियम का उल्लेख नहीं किया जाना प्रमाणित करता है कि भुगतान सही है। अतः सभी आरोप निराधार है। अतः दोषमुक्त करने की कृपा की जाय।

श्री भीम शंंकर राय, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये -

श्री भीम शंकर राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन के विभिन्न कंडिकाओं में उद्धित तथ्यों के आधार पर स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री राम से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के फलस्वरूप तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री राय के विरूद्ध कुल 17 आरोप के लिये प्रपत्र-क गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

संचालन पदाधिकारी श्री श्यामानन्द झा, तत्कालीन संयुक्त सचिव से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि विभागीय कार्यवाही के दौरान भी श्री राय द्वारा आरोप से संदर्भित कोई तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है न ही विभागीय कार्यवाही के दौरान सुनवाई हेतु निर्धारित किसी भी तिथि पर उपस्थित हुए है। अंततः संचालन पदाधिकारी द्वारा मामले की गंभीरता एवं इनके अनियमित कृत के कारण कुल 45108405 रूपये का अतिरिक्त भुगतान होने से संबंधित तथ्य एवं साक्ष्य आरोपी द्वारा नहीं दिये जाने के आलोक में राय को किंगपीन मानते हुए इनके विरूद्ध गठित सभी आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री राय से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। जिसके आलोक में श्री राय से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के अवलोकन से स्पष्ट है कि उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में किसी भी आरोप से संदर्भित न तो कोई तथ्य दिया गया न ही किसी प्रकार का कोई साक्ष्य ही दिया गया है। मात्र स्पष्टीकरण पत्र के निर्गत होने से लेकर विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान निर्गत पत्राें का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही नियम संगत नहीं है तथा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उद्धित तथ्यों पर विभाग को दिग्भ्रमित करने के लिये बिना साक्ष्य का अनावश्यक तथ्य रखा गया है। जिसका इनके विरूद्ध गठित आरोप से कोई संदर्भ नहीं है। कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी के पत्रांक-736, दिनांक 19.12.16 से स्पष्ट है कि बिना लीड प्लान के स्वीकृति के ढुलाई कार्य के भुगतान में रूपया 2,74,88,186/- एवं अस्थायी भू-अर्जन तथा फसल मुआवजा के भुगतान में कुल रूपया 65,30,178/- अर्थात कुल रूपये 3,40,18,364/- का अधिक भुगतान श्री राय द्वारा किया जाना परिलक्षित है। उल्लेखनीय है कि तकनीकी परीक्षा कोषांग द्वारा समर्पित अपने जाँच प्रतिवेदन के विभिन्न कंडिकाओं में उक्त अनियमित/अतिरिक्त भुगतान होने के लिए श्री राय को ही मुख्य रूप से सूत्रधार63 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 माना गया है। जिसके लिए श्री राय पूर्णतः दोषी हैं। अतएव श्री राय का द्वितीय कारण पृच्छा को अस्वीकार करते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इनके विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित सभी 17 आरोप प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री भीम शंकर राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

"शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक"।

उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय पत्रांक-1175, दिनांक 24.05.2018 द्वारा परामर्श/सहमति की माँग की गई। जिसमें उनके द्वारा अपने पत्रांक-3578, दिनांक 28.03.2019 से प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री भीम शंकर राय, सेवानिवृत कार्यपलाक अभियंता 402, भुवनेश्वर इनक्लेव, ए0जी0 कॉलोनी, आशियाना नगर, पटना-25 को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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7 मई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(दर0)-16-04/06/907--श्री अवधेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता (आई0डी0-2150), पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, केवटी द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के विरूद्ध श्री शशिभूषण ठाकुर, सदस्य विधान सभा (बचौल) 24, विस्फी, मधुबनी से मुख्य अभियंता दरभंगा परिक्षेत्राधीन कमला/कोशी नहर के निर्माण कार्य में बरती गई भारी अनियमितता के संदर्भ में प्राप्त परिवाद के आलोक में मामले की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक-1710 दिनांक-22.11.10 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाते हुए श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प सह पठित ज्ञापांक 1088 दिनांक-12.05.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही संचालन के कालक्रम में श्री कुमार दिनांक-30.11.2015 को सेवानिवृत हो गये। मामले के समीक्षोपरांत विभागीय आदेश सं0-43 सह पठित ज्ञापांक-628 दिनांक-12.04.16 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 में सम्परिवर्तित किया गया। श्री कुमार के विरूद्ध आरोपः- (1) कार्यो के स्वीकृत परिमाण विपत्र एवं प्राक्कलन में कन्सोलिडेशन मद में 3939448/रूपये एवं डिवाटरिंग मद में 1801850/रूपये का प्रावधान स्वीकृत है, परन्तु उक्त कार्यमदों के विरूद्ध कराये गये कार्यो का भूगतान विभागीय नियमानुसार किये जाने का कोई साक्ष्य संलग्न नहीं है। अतएव बिना Compaction Test Report प्राप्त किये एवं लॉगबुक संधारित किये हुए उक्त मद में किया गया भुगतान अनियमित है। जिसके लिए आप दोषी है। (2) कार्य में प्रयुक्त सामग्रियों की जाँच क्षेत्रीय स्तर पर करायी गई जो विभागीय नियमानुकूल नहीं है। क्षेत्रीय स्तर पर किये गये गुणवत्ता जाँच में 100 ए ब्रीक का Compaction Test अधिकतम 88.16 कि0ग्राम/से0मी0 से 72.88 कि0ग्राम/से0मी0 पाया गया जो विशिष्टि के अनुरूप नहीं है परन्तु भुगतान प्रावधानित दर से किया गया हे। अतएव संरचना कार्य में न्यून विशिष्टि के ईंट का उपयोग कर भुगतान प्रावधान के अनुरूप होने के कारण अनियमित भुगतान करने के लिए आप दोषी है। (3) कार्य में प्रयुक्त सीमेंट की गुणवत्ता की जाँच हेतु उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा एकत्रित नमूनों की जाँच सिंचाई गवेषण संस्थान, खगौल से कराई गई। जाँच में सीमेंट की fineness and setting time मानक के अन्तर्गत पाया गया तथा 3 दिन एवं 7 दिन का Compressive Strength मानक के अनुरूप पाया गया परन्तु 28 दिनों का Compressive Stregth 26 एम0पी0ए0 पाया गया, जो मानक 33 एम0पी0ए0 से कम है अर्थात कार्य में न्युन विशिष्टि का सीमेंट का उपयोग कर भुगतान प्रावधान के अनुरूप कर वित्तीय अनियमितता बरतने के लिए आप दोषी है। (4) उड़दस्ता जाँच के दौरान नहर बॉध में कराये गये मिट्टी कार्य के तहत स्लोप में डे्रसिंग की कमी पाये जाने तथा वर्कमेन सीप की कमी पाये जाने के कारण कार्य की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना परिलक्षित होता है, जो दर्शाता है कि अपने-अपने दायित्वों का सही ढ़ंग से निर्वहन नही किया गया है, जिसके लिए आप दोषी है। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर श्री कुमार से द्वितीय कारणपृच्छा करने का निर्णय लिया गयाः- असहमति के विन्दुः- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न BOQ के मद सं0-05 में स्पष्ट उल्लेख है कि "watering and consolidation of earth laid in 150 mm to 225 mm layers by manuel labour with CI Hammer to achieve minimum 85% of dry density including supply of water and neccesury tools andबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 64 plants" इससे स्पष्ट होता है कि नहर बाँध एवं सेवा पथ पर मिट्टी भराई कार्य के पश्चात watering and consolidation (compaction) मद का प्रावधान था। जिसके तहत 85% Dry density प्राप्त करना था। इसकी जाँच नेत्रानुमान के आधार पर किया जाना संभव प्रतीत नही होता है। चूकिं इसमें कूल 492431.03 धन मीटर मिट्टी का प्रावधान है। अतएव आरोपित पदाधिकारी का कहना कि बॉध पर मिट्टी भराई कार्य छिटपुट रूप से कराया था को स्वीकारयोग्य नहीं माना जा सकता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा Compaction की जाँच से संबंधित कोई भी जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसी स्थिति में बिना जाँच प्रतिवेदन के स्थापित किया जाना कि प्रावधान के अनुरूप मिट्टी भराई कार्य में 85% density प्राप्त हुआ है, संभव प्रतीत नहीं होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए बिना Compaction जाँच प्रतिवेदन प्राप्त किये ही Compaction मद में कुल 3939448 रूपये का अनियमित भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है। असहमति के उक्त विन्दु पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1722 दि0-09.08.2016 द्वारा श्री कुमार से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 18 के तहत अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मॉग की गई। श्री कुमार द्वारा अपने पूर्व के बचाव वयान का उल्लेख करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिया गया। श्री कुमार द्वारा कहा गया कि मिट्टी कार्य में Compaction करने का पथ बेलन अथवा अन्य मशीन से करने का प्रावधान एकरारनामा में नही था। क्योकि ऐसा करना व्यवहारिक रूप से कार्यस्थल पर संभव नहीं था। क्योंकि नहर पर मिट्टी कार्य की भराई छिटपुट स्थानों पर स्थल की आवश्यकतानुसार करना था। फलतः एकरारनामा Manual Compaction मद सं0-05 के प्रावघान के अनुरूप किया गया तथा गुण नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा से मिट्टी कार्य का Compaction की जॉच कराई गई थी। लेकिन जॉचफल प्रमंडल में उपलब्ध नहीं होने के कारण पूर्व कं बचाव बयान में संलग्न नही की गई थी। काफी खोजबीन के पश्चात कराये गये कार्यो का Compaction जॉचफल से संबंधित जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध हो सका जिसे द्वितीय कारणपृच्छा के साथ संलग्न किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा का जवाब) की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार द्वारा समर्पित मिट्टी की कम्पैक्शन से संबंधित छः अदद गुणवत्ता जॉचफल संदेहास्पद है इसकी सत्यापन हेतु विभागीय उड़नदस्ता अंचल को संचिका पृष्ठांकित की गई। किन्तु अभिलेख की अनुपलब्ध्धता के कारण सत्यापन नहीं हो सका। पुनः कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा को विभागीय पत्रांक-471 दि0-03.04.2017 द्वारा जॉचफल सत्यापन हेतु निदेशित किया गया। जिसके अनुपालन में कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा द्वारा अपने पत्रांक-190 दि0-04.11.2017 द्वारा सूचित किया गया कि विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी छः अदद गुणवत्ता जाँचफल में जिन पदाधिकारी का हस्ताक्षर है उसकी जॉच प्रमंडलीय कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों से की गयी। जॉच से स्पष्ट हुआ कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित मिट्टी कम्पैक्शन से संबंधित गुणवत्ता जॉचफल में अंकित श्री श्रीशचन्द्र झा, तत्कालीन शोध सहायक, श्री अक्षय कुमार वर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी एवं मो0 उमर अंसारी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा के हस्ताक्षर उनके मुल हस्ताक्षर से नहीं मिलते है। ऐसी स्थिति में जॉच की प्रमाणिकता संदिग्ध हो जाती है। ऐसी स्थिति में आरोपी पदाधिकारी का कथन कि कार्य के दौरान कम्पैक्शन जाँचोपरांत गुणवक्ता जाँचफल के आधार पर भुगतान की कार्रवाई की गई है, स्वीकारयोग्य नही है। अतएव श्री कुमार के विरूद्ध मिट्टी भराई कार्य में बिना कम्पैक्शन जाँचफल प्राप्त किये ही अनियमित ढं़ग से कम्पैक्शन मद में कुल 3939448/रूपये का अनियमित भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए सरकार के स्तर पर लिए गये निर्णय के आलोक में श्री अवधेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, केवटी सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- ''15 (पन्द्रह) प्रतिशत पेंशन से स्थायी कटौती''

उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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7 मई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(दर0)-16-04/06/908--श्री राजवंश राय (आई0डी0-1721) , तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, केवटी द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के विरूद्ध श्री शशिभूषण ठाकुर, सदस्य विधान सभा (बचौल)24, विस्फी, मधुबनी से मुख्य अभियंता दरभंगा परिक्षेत्राधीन कमला /कोशी नहर के निर्माण कार्य में बरती गई भारी अनियमितता के संदर्भ में प्राप्त परिवाद के आलोक में मामले की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री राय के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक-1712 दिनांक-22.11.10 द्वारा श्री राय से स्पष्टीकरण किया गया। श्री राय द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री राय के विरूद्ध गठित आरोप को प्रथमदृष्टया प्रमाणित पाते हुए श्री राय के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43 बी0 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।65 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प सह गठित ज्ञापांक 1087 दिनांक-12.05.15 द्वारा श्री राय के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री राय के विरूद्ध आरोपः-

(1) कार्यो के स्वीकृत परिमाण विपत्र एवं प्राक्कलन में कन्सोलिडेशन मद में 3939448/रूपये एवं डिवाटरिंग मद में 1801850/रूपये का प्रावधान स्वीकृत है, परन्तु उक्त कार्यमदों के विरूद्ध कराये गये कार्यो का भुगतान विभागीय नियमानुसार किये जाने का कोई साक्ष्य संलग्न नहीं है। अतएव बिना Compaction Test Report प्राप्त किये एवं लॉगबुक संधारित किये हुए उक्त मद में किया गया भुगतान अनियमित है। जिसके लिए आप दोषी है।

(2) कार्य में प्रयुक्त सामग्रियों की जाँच क्षेत्रीय स्तर पर करायी गई जो विभागीय नियमानुकूल नहीं है। क्षेत्रीय स्तर पर किये गये गुणवक्ता जाँच में 100 ए ब्रीक का Compaction Test अधिकतम 88.16 कि0ग्राम/से0मी0 से 72.88 कि0ग्राम/से0मी0 पाया गया जो विशिष्टि के अनुरूप नहीं है परन्तु भुगतान प्रावधानित दर से किया गया हे। अतएव संरचना कार्य में न्यून विशिष्टि के ईंट का उपयोग कर भुगतान प्रावधान के अनुरूप होने के कारण अनियमित भुगतान करने के लिए आप दोषी है।

(3) कार्य में प्रयुक्त सीमेंट की गुणवत्ता की जाँच हेतु उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा एकत्रित नमूनों की जाँच सिंचाई गवेषण संस्थान, खगौल से कराई गई। जाँच में सीमेंट की fineness and setting time मानक के अन्तर्गत पाया गया तथा 3 दिन एवं 7 दिन का Compressive Strength मानक के अनुरूप पाया गया परन्तु 28 दिनों का Compressive Stregth 26 एम0पी0ए0 पाया गया, जो मानक 33 एम0पी0ए0 से कम है अर्थात कार्य में न्युन विशिष्टि का सीमेंट का उपयोग कर भुगतान प्रावधान के अनुरूप कर वित्तीय अनियमितता बरतने के लिए आप दोषी है।

(4) उड़दस्ता जाँच के दौरान नहर बॉध में कराये गये मिट्टी कार्य के तहत स्लोप में डे्रसिंग की कमी पाये जाने तथा वर्कमेन सीप की कमी पाये जाने के कारण कार्य की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना परिलक्षित होता है, जो दर्शाता है कि अपने-अपने दायित्वों का सही ढ़ंग से निर्वहन नही किया गया है, जिसके लिए आप दोषी है। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राय के विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दु पर श्री राय से द्वितीय कारणपृच्छा करने का निर्णय लिया गया। असहमति के विन्दुः- उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न BOQ के मद सं0-05 में स्पष्ट उल्लेख है कि watering and consolidation of earth laid in 150 mm to 225 mm layers by manuel labour with CI Hammer to achieve minimum 85% a dry density including supply of water and neccesury tools and plants इससे स्पष्ट होता है कि नहर बाँध एवं सेवा पथ पर मिट्टी भराई कार्य के पश्चात watering and consolidation (compaction) मद का प्रावधान था। जिसके तहत 85% Dry density प्राप्त करना था। इसकी जाँच नेत्रानुमान के आधार पर किया जाना संभव प्रतीत नही होता है। चूकिं इसमें कूल 492431.03 धन मीटर मिट्टी का प्रावधान है। अतएव आरोपित पदाधिकारी का कहना कि बॉध पर मिट्टी भराई कार्य छिटपुट रूप से करना था को स्वीकारयोग्य नहीं माना जा सकता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा Compaction की जाँच से संबंधित कोई भी जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसी स्थिति में बिना जाँच प्रतिवेदन के स्थापित किया जाना कि प्रावधान के अनुरूप मिट्टी भराई कार्य में 85% density प्राप्त हुआ है, संभव प्रतीत नहीं होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए बिना Compaction जाँच प्रतिवेदन प्राप्त किये ही Compaction मद में कुल 3939448 रूपये का अनियमित भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है। असहमति के उक्त विन्दु पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1724 दि0-09.08.2016 द्वारा श्री राय से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 18 के तहत अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा) की मॉग की गई। श्री राय द्वारा अपने पूर्व के बचाव वयान का उल्लेख करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिया गया। श्री राय द्वारा कहा गया कि मिट्टी कार्य में Compaction करने का पथ बेलन अथवा अन्य मशीन से करने का प्रावधान एकरारनामा में नही था। क्योकि ऐसा करना व्यवहारिक रूप से कार्यस्थल पर संभव नहीं था। क्योंकि नहर पर मिट्टी कार्य की भराई छिटपुट स्थानों पर स्थल की आवश्यकतानुसार करना था। फलतः एकरारनामा Manual Compaction मद सं0-05 के प्रावघान के अनुरूप किया गया तथा गुण नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा से मिट्टी कार्य का Compaction की जॉच कराई गई थी। लेकिन जॉचफल प्रमंडल में उपलब्ध नहीं होने के कारण पूर्व में बचाव बयान में संलग्न नही की गई थी। काफी खोजबीन के पश्चात कराये गये कार्यो का Compaction जॉचफल से संबंधित जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध हो सका जिसे द्वितीय कारणपृच्छा के साथ संलग्न किया गया। श्री राय द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारणपृच्छा का जवाब) की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री राय द्वारा समर्पित मिट्टी की कम्पैक्शन से संबंधित छः अदद गुणवत्ता जॉचफल संदेहास्पद है इसकी सत्यापन हेतु विभागीय उड़नदस्ता अंचल को संचिका पृष्ठांकित की गई। किन्तु अभिलेख की अनुपलब्ध्धता के कारण66 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सत्यापन नहीं हो सका। पुनः कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा को विभागीय पत्रांक-471 दि0-03.04.2017 द्वारा जॉचफल सत्यापन हेतु निदेशित किया गया। जिसके अनुपालन में कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल, दरभंगा द्वारा अपने पत्रांक-190 दि0-04.11.2017 द्वारा सूचित किया गया कि विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी छः अदद गुणवत्ता जाँचफल में जिन पदाधिकारी का हस्ताक्षर है उसकी जॉच प्रमंडलीय कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों से की गयी। जॉच से स्पष्ट हुआ कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित मिट्टी कम्पैक्शन से संबंधित गुणवत्ता जॉचफल में अंकित श्री श्रीशचन्द्र झा, तत्कालीन शोध सहायक, श्री अक्षय कुमार वर्मा, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी एवं मो0 उमर अंसारी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा के हस्ताक्षर उनके मुल हस्ताक्षर से नहीं मिलते है। ऐसी स्थिति में जॉच की प्रमाणिकता संदिग्ध हो जाती है। ऐसी स्थिति में आरोपी पदाधिकारी का कथन कि कार्य के दौरान कम्पैक्शन जाँचोपरांत गुणवत्ता जाँचफल के आधार पर भुगतान की कार्रवाई की गई है, स्वीकारयोग्य नही है। अतएव श्री राय के विरूद्ध मिट्टी भराई कार्य में बिना कम्पैक्शन जाँचफल प्राप्त किये ही अनियमित ढं़ग से कम्पैक्शन मद में कुल 3939448/रूपये का अनियमित भुगतान करने का आरोप प्रमाणित होता है। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री राजवंश राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, केवटी सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः-

''15 (पन्द्रह) प्रतिशत पेंशन से स्थायी कटौती''

उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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21 मई 2019

सं॰ 22नि0सि0(भाग0)-09-03/2017/1032--श्री अरविन्द प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, शेखपुरा के विरूद्ध समायोजन के आधार पर समूह-'घ' में नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को नियमों एवं निदेशों का उल्लंघन कर नियमित भुगतान करने के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1245, दिनांक 27.07.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-3414, दिनांक 22.12.2017 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा किए जाने के उपरांत सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के फलस्वरूप जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित पाए गए आरोपों के लिए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होकर श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री अरविन्द प्रसाद, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर किए जाने के उपरांत निम्नलिखित तथ्य पाए गए :-

आरोपित द्वारा अपने बचाव-बयान के साथ संलग्न किये गये अभिलेखों के अवलोकन से ज्ञात होता है कि इनके पत्रांक-229, दिनांक 06.05.2015 द्वारा संपुष्टि हेतु मुख्य अभियंता को पत्र लिखा गया था। पुनः पत्रांक-74, दिनांक 02.02. 2016 को स्मारित किया गया साथ ही अनुरोध किया गया कि नियुक्ति पत्र की संपुष्टि की जाय ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। पुनः पत्रांक-47, दिनांक 30.06.2016 द्वारा मुख्य अभियंता को प्रतिवेदित किया गया कि संपुष्टि के अभाव में वेतनादि का भुगतान लंबित है जिससे इन कर्मियों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी है। उक्त पत्र में सम्पुष्टि करने का अनुरोध किया गया था ताकि कर्मियों को वेतनादि का भुगतान किया जा सके।

मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग द्वारा निर्गत नियुक्ति आदेश के पत्रांक-1385, दिनांक 13.04.2015 के कंडिका-7 में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि नियुक्ति होने वाले उम्मीदवारों के वेतनादि का भुगतान नियुक्ति पत्र की संपुष्टि के पश्चात ही देय होगा। इसका तात्पर्य यह था कि बिना संपुष्टि के नियुक्त दैनिक वेतन भोगियों को वेतनादि देय नहीं था। आरोप पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों में नव नियुक्त कर्मियों (श्री संजय कुमार, श्री अनिल कुमार सिन्हा एवं श्री विजय यादव) के आवेदन पत्रों पर क्रमशः दिनांक 21.07.2015, 21.08.2015 एवं 21.08.2015 को भुगतान की स्वीकृति प्रदान करने का उल्लेख किया गया है।

आरोपित पदाधिकारी के पत्रांक-261, दिनांक 23.05.2015 द्वारा कोषागार पदाधिकारी, शेखपुरा से Pran No. निर्गत करने का अनुरोध किया गया है ताकि भुगतान किया जा सके वेतन नियमावली के अवलोकन से ज्ञात होता है कि संदर्भित कर्मियों के माह जुलाई 2015 का वेतन विपत्र दिनांक 30.07.2015 को श्री संजय कुमार के माह मई एवं जून 2015 का बकाया वेतन विपत्र दिनांक 30.07.2015 को एवं श्री अनिल कुमार सिन्हा, विजय यादव एवं जमीरी राय का माह मई एवं जून 2015 का वेतन विपत्र दिनांक 29.08.2015 को तथा कर्मियों के माह अप्रैल 15 के अंश भाग का बकाया वेतन विपत्र दिनांक 29.08. 2015 को तैयार किया गया है। चारो कर्मियों को मई 2016 तक वेतन भुगतान किया गया है। इनके द्वारा दिनांक 20.05.2015 को कर्मियों का सेवापुस्त नियमित कर्मी के रूप में खोला गया है। आरोपित के पास बचाव बयान में आरोप के विरूद्ध कोई ठोस प्रत्युत्तर नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-01 एवं 02 को प्रमाणित पाया गया है।

श्री अरविन्द प्रसाद, कार्यपालक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में लिखा गया है कि संबंधित नियुक्ति पत्र के सम्पुष्टि हेतु कार्यालय के पत्रांक-229, दिनांक 06.05.2015, पत्रांक-74, दिनांक 02.02.2016 एवं पत्रांक-47, दिनांक 03.06. 2016 से अनुरोध किया गया किन्तु कोई सूचना नहीं दी गई। अतः मानवीय आधार पर बिना सम्पुष्टि के वेतन भुगतान का आदेश कार्यपालक अभियंता द्वारा किया गया।67 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 इस प्रकार उपर्युक्त समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा नियुक्ति पत्र में दिये निदेश का पालन नहीं किया गया और बिना नियुक्ति पत्र के सम्पुष्टि के भुगतान का आदेश दिया गया जिसमें वैसे भी कर्मी थे जिनका अनुशंसा चयन समिति द्वारा नहीं किया गया था। उक्त भुगतान से माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका दायर की गई और विभाग के लिए अकारण समस्या उत्पन्न हो गई है। अतः श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप प्रमाणित है एवं वह दोषी पाए गए हैं।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री अरविन्द प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, शेखपुरा के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया-

(i) संगत वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 के लिए निन्दन की सजा। (ii) एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (iii) भविष्य में कोई प्रोन्नति देय नहीं होगा। (iv) अनियमित रूप से नियुक्त किए गए कर्मियों के वेतनादि के भुगतान की राशि की रिकवरी। उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरविन्द प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, सिचांई प्रमंडल, शेखपुरा को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है -

(i) संगत वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 के लिए निन्दन की सजा। (ii) एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (iii) भविष्य में कोई प्रोन्नति देय नहीं होगा। (iv) अनियमित रूप से नियुक्त किए गए कर्मियों के वेतनादि के भुगतान की राशि की रिकवरी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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21 मई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-102/98/1036--श्री रामप्रवेश शर्मा, तत्कालीन कनीय अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, इन्द्रपुरी डिहरी संप्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को पदस्थापन अवधि वर्ष 1995-96 एवं 1996-97 में बरती गयी अनियमितता के संबंध में उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55(ए0) के अधीन उन्हें विभागीय पत्रांक-1712 दिनांक-29.05.1998 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री शर्मा को कई बार स्मारित किया गया, परंतु उनका स्पष्टीकरण विभाग को प्राप्त नहीं हो सका। विभाग में उपलब्ध साक्ष्य एवं अभिलेखों के आधार पर सरकार के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत आरोप प्रमाणित पाए गए। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री शर्मा को निम्न दण्ड देने का निर्णय हुआ :-

(i) ''निन्दन'' जिसकी प्रविष्टि उनके चारित्री वर्ष 96-97 में की जाएगी। (ii) असंचयात्मक प्रभाव से 3 (तीन) वेतनवृद्धि पर रोक। उक्त निर्णित दण्ड को विभागीय अधिसूचना सं0-596 दिनांक-13.06.2001 द्वारा संसूचित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री शर्मा द्वारा पत्रांक-60 दिनांक-07.09.2001 से अपील अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया परंतु तत्समय कोई निर्णय नहीं हो सका। पुनः श्री शर्मा द्वारा पत्रांक-10 दिनांक-06.03.2006 द्वारा अपील अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया परन्तु अंकित निदेश के बाद कोई निर्णय नहीं हो सका। पुनः पत्रांक-05 दिनांक-21.02.2015 द्वारा उक्त निर्णित दण्डादेश को निरस्त करने का अनुरोध किया गया। तदुपरांत पत्रांक-5 दिनांक-29.10.2018 द्वारा प्राप्त अभ्यावेदन के माध्यम से दण्डादेश को निरस्त करते हुए दोषमुक्त करने का अनुरोध किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड पर प्राप्त अपील अभ्यावेदन के बचाव-बयान उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन तत्समय विभागीय टिप्पणी एवं सम्यक विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत अपील अभ्यावेदन को अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। अतएव श्री रामप्रवेश शर्मा, तत्कालीन कनीय अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, इन्द्रपुरी संप्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता से प्राप्त अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए पूर्व से निर्गत दण्डादेश यथावत रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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4 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-08/2015-1118--श्री अशोक कुमार नागमणि (आई0डी0-3404), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, सिवान से मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्राधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्यों में हो रहे पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य की गुणवत्ता की जाँच से संबंधित उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-30, दिनांक 30.07.2015 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य स्वीकृत Drawing (जिसके अनुसार Longitudinal/Transverse Sleeper की Casting पहले करना हैबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 68 तथा इस पर LDPE Film बिछाने के उपरांत Panels में कंक्रीटिंग कार्य सम्पादित किया जाना है) के अनुरूप नहीं कराये जाने आदि के लिए विभागीय पत्रांक-216, दिनांक 02.02.18 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री नागमणि द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-321, दिनांक 21.04.18 में कहा गया है कि उड़नदस्ता द्वारा लाईनिंग कार्य से संबंधित कार्यस्थल से लिये गये नमूनों का प्रयोगशाला में जाँच करायी गयी। जाँच के क्रम में पाया गया कि पी0सी0सी0 के नमूनों में बालू की मात्रा प्रावधान से थोड़ा अधिक है। जिसे मान्य सीमा के अन्तर्गत पाया गया है। पुनस्र्थापन कार्य के दौरान वरीय पदाधिकारी एवं जाँच दल के पदाधिकारियों द्वारा दिये गये निदेशों का अनुपालन किया गया है। स्वीकृत Drawing एवं प्राक्कलन के अनुसार कार्य सम्पादित किया गया है।

श्री नागमणि द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत पाया गया कि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के स्थलीय जाँच में पिथौरी सिवान वितरणी के कि0मी0 1.0 (Bridge के U/s में) के पास कराये गये लाईनिंग कार्य दो चरणों में LDPF Film के ऊपर Sleeper एवं Panel के पी0सी0सी0 Monolithic कंक्रीटिंग कार्य किया हुआ पाया गया है। स्वीकृत आलेख्य एवं प्राक्कलन के अनुसार वस्तुतः स्लीपर का कैस्टिंग पहले करते हुए इसके Hardening के बाद दो लेयर में Sealing Compound से पेंट किया जाना है। इसके बाद LDPE Film बिछाने के उपरांत Alternate Panel में कंक्रीटिंग कराया जाना है। जिसे पैनल में 14mm का गैप बने। इस प्रकार कैस्टिंग करने पर Expension एवं Contraction का असर नहीं पडता है परन्तु मोनोलिथिक कैस्टिंग करने पर उद्‌देश्य की पूर्ति नहीं हो पाता है तथा Shrinkage के कारण हेयर क्रैक होता है। अतएव स्वीकृत आलेख्य एवं प्राक्कलन के अनुरूप कैनाल लाईनिंग कार्य नहीं कराये जाने का आरोप प्रमाणित होता है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत उक्त बरती गई अनियमितता के लिए श्री नागमणि के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अशोक कुमार नागमणि (आई0डी0-3404), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, सिवान के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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4 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-08/2015-1119--श्री अनिल कुमार (आई0डी0-4467), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, मढौरा से मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्राधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्यों में हो रहे पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य के गुणवत्ता की जाँच से संबंधित उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-30, दिनांक 30.07. 2015 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य स्वीकृत Drawing ( जिसके अनुसार Longitudinal/Transverse Sleeper की Casting पहले करना है तथा इस पर LDPE Film बिछाने के उपरांत Panels में कंक्रीटिंग कार्य सम्पादित किया जाना है) के अनुरूप नहीं कराये जाने आदि के लिए विभागीय पत्रांक-216, दिनांक 02.02.18 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-120, दिनांक 12.03.18 में कहा गया है कि उनके प्रमंडल के अन्तर्गत पी0सी0सी0 लाईनिंग का कार्य सबसे अन्त में शुरू किया गया था। कार्य शुरू कराने के पहले उनके द्वारा अधीनस्थ सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंताओं के साथ अन्य प्रमंडलों में चल रहे कार्यों को देखा गया था। चूँकि उनके लिए एवं अधीनस्थ सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंताओं के लिए पी0सी0सी0 लाईनिंग का कार्य बिल्कुल ही नया था। कार्य शुरू कराने के बाद दिनांक 20.06.15 को ही अभियंता प्रमुख (उत्तर) जल संसाधन विभाग, पटना के स्थल भ्रमण के क्रम में पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य का निरीक्षण किया गया। उस समय तक नारायणपुर उप वितरणी के 0.00RD पर मात्र 17 मीटर ही कार्य कराया गया था। Transverse Sleeper के उपर LDPF Film बिछाकर पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य में पाये गये त्रुटि को तत्काल ही निदेशानुसार सुधार कर लिया गया। उनकी प्रोन्नति अधीक्षण अभियंता के पद चालू प्रभार में होने के फलस्वरूप दिनांक 04.07.15 को प्रभार भी दे दिया गया। उनके द्वारा उक्त कार्य का कोई भी भुगतान नहीं किया गया है। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत पाया गया कि उड़नदस्ता जाँच की तिथि के पूर्व प्रावधान के अनुरूप लाईनिंग का कार्य कराया जाना परिलक्षित नहीं होता है। फलतः उड़नदस्ता जाँच के पूर्व 17 मीटर की लंबाई में आलेख्य के अनुसार Longitudinal एवं Transverse Sleeper की ढलाई पर बिना LDPF Film बिछाये ही Monolithic रूप से ढलाई कराने का आरोप बनता है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत उक्त बरती गई अनियमितता के लिए श्री कुमार के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अनिल कुमार (आई0डी0-4467) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।69 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

4 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-08/2015-1120--श्री दिलीप कुमार प्रसाद (आई0डी0-3881), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज से मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्राधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्यों में हो रहे पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य की गुणवत्ता की जाँच से संबंधित उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-30, दिनांक 30.07.2015 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य स्वीकृत Drawing (जिसके अनुसार Longitudinal/Transverse Sleeper की Casting पहले करना है तथा इस पर LDPE Film बिछाने के उपरांत Panels में कंक्रीटिंग कार्य सम्पादित किया जाना है) के अनुरूप नहीं कराये जाने आदि के लिए विभागीय पत्रांक-216, दिनांक 02.02.18 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण (पत्रांक-353 दिनांक 20.03.18) में कहा गया है कि गोपालगंज वितरणी के वि0दू0 5.00 के पास कराये जा रहे लाईनिंग कार्य का जाँच दिनांक 21.06.15 को उड़नदस्ता द्वारा किया गया। लाईनिंग कार्य से संबंधित नमूना संग्रह किया गया था। जिसकी प्रयोगशाला जाँच में बालू की मात्रा अधिक एवं सीमेंट की मात्रा कम पायी गयी थी। पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य में प्रावधानित मात्रात्मक सुधार किया गया है। जाँच के दौरान दिये गये निदेशों का अनुपालन किया गया। स्वीकृत Drawing एवं प्राक्कलन के प्रावधानों के अनुरूप कार्य सम्पादित किया गया है एवं कराया जा रहा है।

श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत पाया गया कि उड़नदस्ता जाँच के पूर्व कैनाल लाईनिंग का कार्य स्वीकृत नक्शा एवं प्राक्कलन के विपरीत Longitudinal एवं Transverse Sleeper को पैनल के साथ Monolithic रूप से कराया जाना परिलक्षित होता है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत उक्त बरती गई अनियमितता के लिए श्री प्रसाद के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री दिलीप कुमार प्रसाद (आई0डी0-3881) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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4 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-08/2015-1121--श्री धर्मेन्द्र चौधरी (आई0डी0-5478), तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल सं0-2, सिवान से मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्राधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्यों में हो रहे पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य की गुणवत्ता की जाँच से संबंधित उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-30, दिनांक 30.07.2015 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य स्वीकृत Drawing (जिसके अनुसार Longitudinal/Transverse Sleeper की Casting पहले करना है तथा इस पर LDPE Film बिछाने के उपरांत Panels में कंक्रीटिंग कार्य सम्पादित किया जाना है) के अनुरूप नहीं कराये जाने आदि के लिए विभागीय पत्रांक-216, दिनांक 02.02.18 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-24, दिनांक 21.04.18 में कहा गया है कि उड़नदस्ता द्वारा लाईनिंग कार्य से संबंधित कार्यस्थल से लिये गये नमूनों का प्रयोगशाला में जाँच करायी गयी। जाँच के क्रम में पाया गया कि पी0सी0सी0 के नमूनों में बालू की मात्रा प्रावधान से थोड़ा अधिक है। जिसे मान्य सीमा के अन्तर्गत पाया गया है। पुनस्र्थापन कार्य के दौरान वरीय पदाधिकारी एवं जाँच दल के पदाधिकारियों द्वारा दिये गये निदेशों का अनुपालन किया गया। स्वीकृत Drawing एवं प्राक्कलन के अनुसार कार्य सम्पादित किया गया है।

श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत पाया गया कि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के स्थलीय जाँच में पिथौरी सिवान वितरणी के कि0मी0 1.0 (Bridge के U/s में) के पास कराये गये लाईनिंग कार्य दो चरणों में LDPF Film के ऊपर Sleeper एवं Panel के पी0सी0सी0 Monolithic कंक्रीटिंग कार्य किया हुआ पाया गया है। स्वीकृत आलेख्य एवं प्राक्कलन के अनुसार वस्तुतः स्लीपर का कैस्टिंग पहले करते हुए इसके Hardening के बाद दो लेयर में Sealing Compound से पेंट किया जाना है। इसके बाद LDPE Film बिछाने के उपरांत Alternate Panel में कंक्रीटिंग कराया जाना है। जिसे पैनल में 14mm का गैप बने। इस प्रकार कैस्टिंग करने पर Expension एवं Contraction का असर नहीं पडता है, परन्तु मोनोलिथिक कैस्टिंग करने पर उद्‌देश्य की पूर्ति नहीं हो पाता है तथा Shrinkage के कारण हेयर क्रैक होता है। अतएव स्वीकृत आलेख्य एवं प्राक्कलन के अनुरूप कैनाल लाईनिंग कार्य नहीं कराये जाने का आरोप प्रमाणित होता है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत उक्त बरती गई अनियमितता के लिए श्री चौधरी के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया।70 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री धर्मेन्द्र चौधरी (आई0डी0-5478) तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल सं0-2, सिवान के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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4 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)01-04/2009-1122--श्री ब्रह्नचारी पशुपतिनाथ, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल नरपतगंज सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के अन्तर्गत वर्ष 2000-01 में जानकी शाखा नहर के पुर्नस्थापन कार्य एवं सी0डी0 संरचना की मरम्मति संबंधित एकरारनामा सं0-25F2/2000-01 एवं 29F2/2000-01 के तहत कराये गये कार्य का भुगतान लंबित रहने के कारण संवेदक श्री किशोर जयसवाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में वाद सं0-14371/07 एवं 15090/07 दायर किया गया। उक्त वाद में पारित न्याय निर्णय के आलोक में दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित करने हेतु विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप :-

"आपके द्वारा आधे अधूरे कार्य का बिना जाँचे ही शत-प्रतिशत पूर्ण प्रतिवेदित किया गया।" उक्त आरोप के लिए श्री ब्रह्नचारी पशुपतिनाथ, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-579, दिनांक 05.04.2010 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर श्री पशुपतिनाथ से विभागीय पत्रांक-95, दिनांक 22.01.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री पशुपतिनाथ द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया, समीक्षोपरांत वित्तीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण आरोपमुक्त करने का निर्णय लिया गया।

उक्त प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय के अनुमोदन के क्रम में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा मामले की पुनः नये सिरे से जाँच हेतु विभागीय जाँच आयुक्त को Remand कर दिया गया, तदोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा पुनः नये सिरे से जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत श्री पुशपतिनाथ से विभागीय पत्रांक 1819, दिनांक 09.10.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। तदालोक में श्री पशुपतिनाथ द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा का उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें लगभग वही तथ्य दोहराया गया जो संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में दिया गया है। विभागीय पत्रांक-353 दिनांक 03.03.2001 से आलोच्य कार्य के भुगतान हेतु दिशा र्निदेश निर्गत है जिसमें दिये गये निदेश के अनुसार 40% अंतरिम भुगतान करने, शेष कार्य पूर्ण करने एवं शेष राशि के भुगतान हेतु मिट्टी कार्य 100% कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँच कर उड़नदस्ता से जाँच कराते हुए भुगतान करना है, इसके बावजूद कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-138 दिनांक 12.03.2005 से शत-प्रतिशत भौतिक प्रगति होने एवं विपत्र का 60% भुगतान की अनुशंसा की गयी। कार्य भौतिक रूप से 100% पूर्ण पूर्व से ही होने, विपत्र राशि रूपये 10,7654/- एवं शत प्रतिशत जाँचित होने की सूचना अधीक्षण अभियंता को दी गयी एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 2.0.3 एवं 3.0.2 से आरोपी पदाधिकारी द्वारा अधूरे कार्य को भौतिक रूप से 100% पूर्ण होने की सूचना दिया जाना प्रमाणित होता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि विभागीय दिशा निदेश के बावजूद तथ्यों के जाँच-पड़ताल किये बिना ही इनके द्वारा अनुशंसा की गयी है। यदि श्री पशुपतिनाथ द्वारा सम्पूर्ण मामले के जाँचोपरान्त विभागीय निदेश का अनुपालन कराया जाता तो मामला न तो न्यायालय में होता एवं न ही दायित्व समिति के सुपुर्दगी की स्थिति बनती, इसलिए श्री पशुपतिनाथ का द्वितीय कारणपृच्छा स्वीकार योग्य नहीं है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री ब्रह्नचारी पशुपतिनाथ तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नरपतगंज सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः- "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षो तक"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की माँग की गयी, तदालोक में आयोग द्वारा पत्रांक-270 दिनांक-08.05.2019 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति दी गयी है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री ब्रह्नचारी पशुपतिनाथ, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नरपतगंज सम्प्रति सेवानिवृत को उक्त दण्ड "पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्षो तक" अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।71 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

4 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-08/2015-1125--श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5430), तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी, सारण नहर प्रमंडल, मढौरा से मुख्य अभियंता, सिवान परिक्षेत्राधीन नहरों के पुनस्र्थापन कार्यों में हो रहे पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य की गुणवत्ता की जाँच से संबंधित उड़नदस्ता अंचल, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-30, दिनांक 30.07.2015 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य स्वीकृत Drawing (जिसके अनुसार Longitudinal/Transverse Sleeper की Casting पहले करना है तथा इस पर LDPE Film बिछाने के उपरांत Panels में कंक्रीटिंग कार्य सम्पादित किया जाना है) के अनुरूप नहीं कराये जाने आदि के लिए विभागीय पत्रांक-216, दिनांक 02.02.18 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

उक्त के क्रम में श्री रंजन द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 19.03.18 में कहा गया है कि उनके प्रमंडल के अन्तर्गत पी0सी0सी0 लाईनिंग का कार्य सबसे अन्त में शुरू किया गया था। कार्य शुरू करने के पहले कार्यपालक अभियंता एवं कनीय अभियंताओं के साथ अन्य प्रमंडलों में चल रहे कार्यों को देखा गया था। चूँकि उनके लिए लाईनिंग का कार्य बिल्कुल ही नया था। इस कारण दूसरे प्रमंडल में देखे गये कार्य के अनुरूप कार्य प्रारंभ किया। इसके बाद दिनांक 20.06.15 को ही अभियंता प्रमुख (उत्तर) एवं कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता के द्वारा स्थल भ्रमण में पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य का निरीक्षण किया गया। उस समय नारायणपुर उप वितरणी में 0.00RD पर मात्र 17 मीटर ही कार्य कराया गया था। Transverse Sleeper की ढलाई पर बिना LDPF Film बिछाकर पी0सी0सी0 लाईनिंग कार्य में पाये गये त्रुटियों को तत्काल सुधार निदेशानुसार कर लिया गया था। अतएव सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए इसे अंतिम भूल मानकर स्पष्टीकरण स्वीकार करने की कृपा की जाय।

श्री रंजन द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत पाया गया कि उड़नदस्ता जाँच की तिथि के पूर्व प्रावधान के अनुरूप लाईनिंग का कार्य कराया जाना परिलक्षित नहीं होता है। फलतः उड़नदस्ता जाँच के पूर्व 17 मीटर की लंबाई में आलेख्य के अनुरूप Longitudinal एवं Transverse Sleeper की ढलाई पर बिना LDPF Film बिछाये ही Monolithic रूप से ढलाई कराने का आरोप बनता है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत उक्त बरती गई अनियमितता के लिए श्री रंजन के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री राजीव रंजन (आई0डी0-5430) तत्कालीन प्राक्कलन पदाधिकारी, सारण नहर प्रमंडल, मढ़ौरा के विरूद्ध "एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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11 जून 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(सम॰) 02-12/2014-1159--श्री प्रदीप कुमार मंडल, (आई0डी0-जे0-7576), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगुसराय सम्प्रति बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लि0, सैदपुर, पटना-800004 द्वारा खगड़िया टाउन प्रोजेक्ट से संबंधित तटबंध निर्माण कार्य में मात्र 3.285 कि0मी0 लंबाई में तटबंध निर्माण कार्य हुआ जबकि भुगतान 3.72 कि0मी0 लंबाई में किया गया, जो अधिकाई भुगतान का मामला बनता हैं। उक्त अधिकाई भुगतान के लिए जिम्मेवार श्री मंडल से स्पष्टीकण किया गया; परंतु श्री मंडल द्वारा जवाब समर्पित नहीं किया गया। स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में पुनः श्री मंडल को स्मारित भी किया गया। परंतु उन्हें पत्र तामिला होने के बावजूद स्पष्टीकरण का उत्तर समर्पित नहीं किया गया। तत्पश्चात्‌ मामले के समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री मंडल को बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-09 (1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि में श्री प्रदीप कुमार मंडल का मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, मोतिहारी का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा।

4. श्री प्रदीप कुमार मंडल के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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12 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(दर0)16-02/2015-1178--श्री प्रसुन कुमार (आई0डी0-3405), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-02, बेनीपुर (पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग) द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के संबंध में जिलाधिकारी, दरभंगा द्वारा योजना एवं विकास विभाग को आरोप पत्र साक्ष्य सहित समर्पित किया गया। योजना एवं विकास विभाग द्वारा अपने पत्रांक-5893, दिनांक 15.12.14 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध72 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अनुशासनिक कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग से अनुरोध किया गया। मामले की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-1098, दिनां 13.05.15 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया।

श्री कुमार ने अपने पत्रांक-01पी0, दिनांक 29.01.16 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य पाते हुए श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प-सह-पठित ज्ञापांक-991, दिनांक 27.05.16 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप :- आरोप सं0-01-13 कब्रिस्तान घेराबन्दी की योजना (प्राक्कलित राशि 22169530.00 रूपये) की मात्र 2 योजना में कार्य प्रारंभ किये जाने शेष 11 योजना में निविदा के बावजूद एकरारनामा कई माह से निष्पादित नहीं किये जाने तथा अद्यतन कोई समय सीमा भी नहीं बताने से कार्य के प्रति लापरवाही एवं अरूचि का आरोप। आरोप सं0-02-बडी संख्या में निविदा निस्तार हेतु निविदोपरांत एकरारनामा हेतु तथा एकरारनामा के उपरांत योजनाएँ कार्यान्वयन हेतु लंबित रहने से विलंब के कारण प्राक्कलन में वृद्धि होने, योजनाओं के पूर्ण न होने का आरोप। आरोप सं0-03-सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना अन्तर्गत वर्ष 2012-13 में 30 योजनाओं का एवं 2013-14 में 60 योजनाओं (कुल प्राक्कलित राशि 673.272 लाख) में से जून माह 2014 तक एक भी योजना के पूर्ण नहीं होने, मात्र 8 योजनाओं में कार्य प्रगति पर बताये जाने, आवंटित 388.909 लाख रूपये के विरूद्ध मात्र 13.79लाख रूपये व्यय किये जाने से कार्य के प्रति अरूचि एवं अकर्मन्यता का आरोप। आरोप सं0-04- प्रमंडलीय कार्यालय, बेनीपुर में अवस्थित होने के बावजूद कार्यपालक अभियंता का अधीनस्थ सभी सहायक अभियंता/कनीय अभियंता के साथ मुख्यालय से नहीं रहकर दरभंगा में रहने का आरोप।

श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-233, दिनांक 14.06.17 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया। जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न निष्कर्ष अंकित किया गया।

(i) आरोप सं0-01 - आरोप पूर्णतः प्रमाणित नहीं है। (ii) आरोप सं0-02 - आरोप अप्रमाणित है। (iii) आरोप सं0-03 - यह आरोप पूर्णतः प्रमाणित नहीं है। (iv) आरोप सं0-04- यह आरोप अप्रमाणित है। जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित आरोप सं0-01, 02 एवं 03 से संबंधित मंतव्य से सहमत होते हुए एवं आरोप सं0-04 से संबंधित मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दू पर द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) करने का निर्णय लिया गया।

आरोप सं०-4 से संबंधित असहमति के बिन्दु :- संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि इनके द्वारा बिना साक्ष्य की समीक्षा किये ही आरोपित का कथन कि वे प्रमंडल कार्यालय बेनीपुर में रहते थे, को स्वीकार योग्य मानते हुए आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। जबकि दिनांक 08.07.14 को जिला पदाधिकारी के समीक्षात्मक बैठक से संबंधित प्रतिवेदन की कंडिका-06 में श्री कुमार को निदेश दिया गया है कि वे प्रतिदिन 10 बजे से 05बजे तक बेनीपुर स्थित प्रमंडलीय कार्यालय में सभी अधीनस्थ सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के साथ कैम्प करते हुए सभी आवंटित कार्यों का निष्पादन करे एवं इसकी प्रति आरोपित को भी गई तथा जिलाधिकारी द्वारा गठित आरोप पत्र में अंकित किया गया है कि दिनांक 08.07.14 की बैठक में पूछताछ के क्रम में आरोपित पदाधिकारी द्वारा बताया गया है कि प्रमंडलीय कार्यालय, बेनीपुर में अवस्थित है परन्तु उनके सहित उनके अधीनस्थ सभी सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता प्रमंडलीय कार्यालय में नहीं रहकर दरभंगा में रहते है। इनके इस आचरण से योजनाओं की प्रगति बाधित है।

उक्त से स्पष्ट है कि श्री कुमार का कथन कि वे प्रमंडलीय कार्यालय बेनीपुर में ही रहते थे, संदिग्ध प्रतीत है। आरोपित द्वारा बेनीपुर में रहने से संबंधित कोई साक्ष्य (यथा आवासीय पता, अन्य अभिलेख जिससे स्थापित हो सके कि वे बेनीपुर में रहकर कार्यों का निष्पादन करते थे) उपलब्ध नहीं कराया गया। अतएव साक्ष्य के अभाव में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप सं0-4 प्रमाणित होता है।

उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक-1403, दिनांक 23.08.17 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। द्वितीय कारण पृच्छा का पत्र निबंधित डाक से प्रेषित किया गया। कई स्मार के बावजूद श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित नहीं किया गया जबकि भेजे गये सभी पत्र श्री कुमार को delivered हुए। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपित बिन्दुओं पर श्री कुमार को कुछ नहीं कहना है। इस प्रकार श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाए गए। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री प्रसुन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, बेनीपुर को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है -

"चार (04) वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" सरकार के उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।73 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

19 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(पू0)01-03/2014-1227--मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, चम्पानगर के पदस्थापन अवधि के दौरान पूर्वी कोशी नहर प्रणाली पुनस्र्थापन कार्य योजना के तहत कुर्सेला वितरणी 61.90 पर निर्माणाधीन कैनाल साईफन हेतु सम्बद्ध कार्यक्रम का निर्धारण कर संरचना कार्य नहीं कराये जाने समुचित ढ़ग से सरकारी राशि 17,17,04,202 (सतरह करोड़ सतरह लाख चार हजार दो सौ दो रूपये) के विरूद्ध 8,06,71,790 (आठ करोड़ छः लाख एकहत्तर हजार सात सौ नब्बे रूपये) के अनुचित भुगतान के प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपो के लिए श्री उपेन्द्र, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, चम्पानगर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1512, दिनांक 16.10.14 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए श्री रामपुकार रंजन, अभियंता प्रमुख (मध्य) को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप को प्रमाणित पाया गया।

उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच-प्रतिवेदन की छायाप्रति देते हुए श्री उपेन्द्र से विभागीय पत्रांक-2321, दिनांक 24.10.16 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी, तदालोक में श्री उपेन्द्र द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया गया। श्री उपेन्द्र से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा उच्च स्तर पर निम्नरूपेण की गयी :-

श्री उपेन्द्र, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, चम्पानगर आरोप ः- "पूवी कोशी नहर प्रणाली पुनस्र्थापन (ERM) कार्य योजना के तहत कुर्सेला वितरणी 61.90 पर निर्माणाधीन कैनाल सायफन हेतु समयबद्ध कार्यक्रम का निर्धारण कर संरचना कार्य नहीं कराये जाने, समुचित ढ़ग से पर्यवेक्षण नहीं किये जाने, डिवाटरिंग जैसे कार्य को अनियंत्रित ढ़ग से कराये जाने तथा सुनियोजित ढ़ग से सरकारी राशि 17,17,04,202/- रूपये के विरूद्ध 8,06,71,790/- रूपये का अनुचित भुगतान के लिए प्रथम दृष्टया आप दोषी हैं।" संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-समीक्षोपरांत आरोपित पदाधिकारी श्री उपेन्द्र (ID-3757)तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, चम्पानगर के विरूद्ध गठित विभागीय आरोप प्रमाणित होता है।

आरोपी पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा के क्रम में बचाव बयान ः- कंडिका -3 में प्रतिवेदित किया गया है कि द्वितीय पृच्छा के क्रम में मेरे पत्रांक-100 दिनांक 25.11.16 से कतिपय कागजात की माँग की गयी। वांछित कागजात उपलब्ध नहीं होने के बावजूद विलंब को टालने के लिए उत्तर समर्पित कर रहा हूँ।

2. कंडिका-4 से 7 तक आरोप, उनको उपलब्ध कराये गये साक्ष्य एवं संचालन पदाधिकारी को एक मात्र आरोप को पाँच प्रमुख अंशों में विभक्त कर साक्ष्यों के आधार पर आरोप लेश मात्र भी प्रमाणित नहीं होने को स्पष्ट किये जाने को उल्लेखित किया गया है।

3. कंडिका-8 में प्रतिवेदित किया गया है कि बचाव बयान के साक्ष्यों/तथ्यों की सही संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा विश्लेषण एवं विवेचन नहीं किया गया एवं बिल्कुल सतही तौर पर किया गया जिससे संचालन पदाधिकारी की समीक्षा में सही वस्तुस्थिति परिलक्षित नहीं हो पायी। विभागीय समीक्षा में भी इस महत्वपूर्ण बिन्दु पर ध्यान नहीं दिया गया।

4. कंडिका-9 में प्रतिवेदित किया गया है कि उपर्युक्त पृष्ठभूमि में संचालन पदाधिकारी द्वारा जिन महत्वपूर्ण बिन्दुओं का संज्ञान जो बचाव बयान में निवेदित है, को द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर में उल्लेखित किया जाना अपरिहार्य प्रतीत होता है।

5. कंडिका-10 में प्रतिवेदित किया गया है कि :- (i) समयबद्ध कार्यक्रम निर्धारित कर मेरे द्वारा कार्य नहीं कराया गया- SBD एकरारनामा के अनुसार संवेदक को कार्यक्रम तैयार कर कार्यपालक अभियंता को देना है जो उनके द्वारा नहीं किया गया। इसकी अपेक्षा सहायक अभियंता से किया जाना नियमसंगत नहीं है। डिवाटरिंग मद का प्रावधान एकरारनामा में नहीं होने के बावजूद 82 HP के 18 से 24 पम्पों के चालू करने के बाद सायफन निर्माण में अपेक्षित गतिशिलता नहीं होने के कारण अवर प्रमंडल के पत्रांक-85, दिनांक 01.05.13 से मेरे एवं संवेदक के संयुक्त हस्ताक्षर से कार्यक्रम कार्यपालक अभियंता को समर्पित किया गया जो परि0-'क' के रूप में संलग्न है। ऐसी परिस्थिति में संचालन पदाधिकारी द्वारा अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा समयबद्ध कार्यक्रम तैयार करने के लिए किसी प्रकार का प्रयास नहीं किये जाने को उल्लेखित किये जाने का कोई आधार औचित्य नहीं है। Working pit दो-दो बार Collapse किया जिसके कारण डिवाटरिंग को उसी स्थिति में लाने में समय लगा जिसके कारण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निर्माण कराने में विलंब हुआ। डिवाटरिंग कार्य काफी जटिल हो गया क्योंकि इस मद का प्रावधान नहीं था जिसका निर्णय मुख्य अभियंता स्तर पर लिया जाना था। उनके तकनीकी पर्यवेक्षण में ही कार्य कराया गया। तीनों पालियों में डिवाटरिंग का कार्य नहीं कराये जाने को व्यक्त किया जाना निराधार है क्योंकि यह एक सतत प्रक्रिया है।

6. कंडिका-11 में प्रतिवेदित किया गया है कि कार्यक्रम को सही ढ़ग से पर्यवेक्षण नहीं करने एवं डिवाटरिंग जैसे कार्य को अनियंत्रित ढ़ग से कराये जाने का संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित माना लिये जाने के संदर्भ में कहना है74 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 कि नदी तल से करीब 21'-0" नीचे कंक्रीट ढलाई का प्रावधान था। ऐसी स्थिति में डिवाटरिंग को पूरी तत्परता से किये जाने के बाद ही सायफन निर्माण का जटिल कार्य पूरा किया गया।

7. कंडिका-12 में प्रतिवेदित किया गया है कि जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-2 में डिवाटरिंग मद के कार्य की मापीपुस्त में दर्ज मापी की जाँच कर मेरे द्वारा कार्यपालक अभियंता द्वारा उपस्थापित किया गया जिसे कार्यपालक अभियंता द्वारा पारित किया गया जिसके लिए अनुचित भुगतान बनने के संचालन पदाधिकारी की अवधारण पूर्णतः आधारहीन है क्योंकि इस मद का प्रारंभ मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ के पत्रांक-2659, दिनांक 09.12.11 एवं भुगतान उनके पत्रांक-184, दिनांक 23.01. 13 के आलोक में हुआ। यह कार्य लॉगबुक के आधार पर मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ के निदेश एवं भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ। बचाव बयान में लोक निर्माण लेखा संहिता की कंडिका 243, 244, एवं 245 नोट-2 को प्रसंगित किया गया है जिसके आधार पर रू0 806,71,790/- का भुगतान अनुचित करार देना युक्तिसंगत एवं समीचीन नहीं है। वस्तुतः मुख्य अभियंता एवं संबंधित अभियंता प्रमुख द्वारा पुनरीक्षित प्रशासनिक अनुमोदन एवं तकनीकी स्वीकृति को ससमय सरकार के समक्ष नही ंउठाये जाने से सायफन निर्माण की समस्या और जटिल हो गई क्योंकि प्रशासनिक स्वीकृति की राशि से बहुत अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। इस तरह मुख्य अभियंता एवं अभियंता प्रमुख द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन किये जाने के लिए सहायक अभियंता को अनुचित भुगतान के लिए दोषी मानने का निष्कर्ष निकाला जाना नियम संगत एवं न्याय संगत नहीं है।

8. कंडिका-13 एवं 14 में अवशेष कार्य कराकर नहर को नदी से पार कराये जाने के सरकार के निर्णय के अनुसार कार्य पूर्ण कराया गया है। मेरे इस तथ्य को स्वीकार करते हुए आरोप मुक्त किया जाय।

समीक्षा ः-आरोपित पदाधिकारी श्री उपेन्द्र, सहायक अभियंता, कमला सायफन निर्माण कार्य एवं इसके अतिरिक्त डिवाटरिंग कार्य (19.02.12 से 01.0713 तक) में संलग्न रहे एवं डिवाटरिंग मद का भुगतान से संबंधित विपत्र इनके द्वारा तैयार किया गया परिलक्षित होता है।

श्री उपेन्द्र द्वारा उनके बचाव बयान के साक्ष्यों/तथ्यों को सही संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा विश्लेषण/विवेचन नहीं किये जाने की पृष्ठभूमि में उन महत्वपूर्ण बिन्दुओं को द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर में उललेखित किये जाने को प्रतिवेदित किया गया है (कंडिका 8 एवं 9)। उक्त से द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में कोई नया तथ्य नहीं दिया जाना परिलक्षित होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है।

श्री उपेन्द्र का कहना है कि SBD एकरारनामा के अनुसार संवेदक को कार्यक्रम तैयार कर कार्यपालक अभियंता को देना है एवं इसकी अपेक्षा उनसे किया जाना नियम संगत नहीं है। यह सही है कि एकरारनामा/निविदा के समय ही कार्यक्रम संवेदक द्वारा दिया जाना है। परन्तु श्री उपेन्द्र आलोच्य कार्य के प्रभारी सहायक अभियंता है एवं उनका भी दायित्व होता है कि स्वीकृत कार्यक्रम के अनुसार कार्य कराने एवं कार्यक्रम नहीं रहने की स्थिति में प्रत्येक बैरल पर डिवाटरिंग में लगने वाले समय को आकलित करते हुए एक कार्यक्रम की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त की जाती, जो किया गया प्रतीत नहीं होता है। श्री उपेन्द्र द्वारा अपने पत्रांक 85 दिनांक 02.05.13 से संयुक्त हस्ताक्षर के साथ कार्यक्रम कार्यपालक अभियंता को भेजा गया है। स्पष्ट है कि यह कार्य के अंतिम चरण में किया गया क्योंकि 19.02.12 से 01.07.13 तक डिवाटरिंग कार्य हुआ है। विभागीय/मुख्यालय पर गठित जाँच समितियों द्वारा समयबद्ध कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वयन नहीं किये जाने को प्रकाश में लाया गया। उक्त से समयबद्ध कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वयन नहीं किये जाने को प्रकाश में लाया गया। उक्त से समयबद्ध कार्यक्रम तैयार कर क्रियान्वयन नहीं किया जाना परिलक्षित होता है जैसा कि संचालन पदाधिकारी ने समीक्षा में अंकित किया है।

पर्यवेक्षण में कमी एवं अनियंत्रित ढ़ग से डिवाटरिंग कराये जाने के प्रमाणित आरोप के संदर्भ में श्री उपेन्द्र का कहना है कि नदी तल से 21'-0" नीचे नींव तल में कार्य कराये जाने की स्थिति में डिवाटरिंग को पूरी तत्परता से किये जाने के बाद ही निर्माण का जटिल कार्य पूर्ण हुआ। स्थल निरीक्षण प्रतिवेदनों, स्थल आदेश पंजी एवं जाँच समितियों के प्रतिवेदन से विदित होता है कि मशीन की कमी श्रमबल एवं निर्माण सामग्रियों का अभाव, डिवाटरिंग होते हुए भी कार्य नहीं होना, कार्यस्थल सूखा रहने की स्थिति में भी मिट्‌टी कार्य नहीं होना, तीनों पालियों में कार्य नहीं विदित होता है जिससे पर्यवेक्षण में कमी एवं अनियंत्रित डिवाटरिंग कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है। सहायक अभियंता के रूप में श्री उपेन्द्र की उक्त दायित्व बनता है। डिवाटरिंग मद में अनियमित भुगतान के संबंध में श्री उपेन्द्र का कहना है कि मुख्य अभियंता, पूर्णियां एवं अधीक्षण अभियंता के आदेशानुसार लॉगबुक संधारित करते हुए उसके आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया जाने का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। उनके द्वारा तैयार विपत्र से कुल 45404 घंटो का कार्यपालक अभियंता द्वारा अमान्य किया गया। स्पष्ट है कि उक्त अनुपयोगी घंटो को लॉगबुक में श्री उपेन्द्र द्वारा अमान्य नहीं किया गया। जबकि स्थल निरीक्षण प्रतिवेदनों/स्थल निरीक्षण पंजी से ऐसा किये जाने का निदेश उच्चाधिकारियों द्वारा दिया जाना परिलक्षित होता है। डिवाटरिंग मद जो अतिरिक्त कार्यमद है, की सक्षम पदाधिकारी से स्वीकृति के उपरांत ही भुगतान किया जाना नियमित भुगतान की श्रेणी में माना जाता है। अनुपयोगी घंटो को लॉगबुक में अमान्य नहीं किये जाने की स्थिति में ही संवेदक द्वारा उसके आधार पर रू0 17,17,04,202/- का दावा माननीय न्यायालय में किये जाने की स्थिति बनी। इस प्रकार सुनियोजित ढ़ग से अनियमित भुगतान का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों, साक्ष्य एवं जाँच प्रतिवेदनों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री उपेन्द्र, सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल, चम्पानगर के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होता है। अतएव उनका द्वितीय स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है।75 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री उपेन्द्र, तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई अवर प्रमंडल, चम्पानगर को उक्त प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-47, दिनांक 05.01.18 द्वारा "चार वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक तथा देय तिथि से तीन वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक" का दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया गया।

उक्त दण्ड के अनुपालन के क्रम में महालेखाकार कार्यालय द्वारा सूचित किया गया कि श्री उपेन्द्र दिनांक 31.05. 2021 को सेवानिवृत हो रहे है इसलिए चार वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड का कार्यान्वयन संभव नहीं है। इसी क्रम में श्री उपेन्द्र द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री उपेन्द्र से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की सम्यक समीक्षा की गयी, समीक्षोपरांत पर्यवेक्षण की कमी एवं अनियंत्रित डिवाटरिंग कार्य कराये जाने तथा सुनियोजित ढंग से अनियमित भुगतान करने के प्रमाणित आरोप के लिए श्री उपेन्द्र से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।

चूँकि श्री उपेन्द्र को पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-47, दिनांक 05.01.18 द्वारा अधिरोपित दण्ड "चार वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" महालेखाकार कार्यालय द्वारा कार्यान्वयन नहीं होने के कारण सम्यक समीक्षोपरांत चार वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक के स्थान पर "तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री उपेन्द्र (आई0डी0-3757) तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-47, दिनांक 05.01.2018 द्वारा पूर्व निर्गत दण्डादेश "चार वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोक तथा देय तिथि से तीन वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक" में आंशिक संशोधन करते हुए "तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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20 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-09/2017-1231--श्री राम विनय सिन्हा (आई0डी0-3574) तत0 कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ रिंग बाँध के मसान नरोत्तम ग्राम में क्षतिग्रस्त होने, कर्त्तव्य में लापरवाही बरतने सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1604, दिनांक 14.09.17 द्वारा श्री सिन्हा को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1687 दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17(2) में निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप - दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ रिंग बाँध मसान नरोतम ग्राम में सीपेज के कारण टूट गया जिसके कारण जान-माल की व्यापक क्षति हुई। रिंग बाँध में सीपेज की मरम्मति की सूचना आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। विभागीय स्तर से आपको स्पष्ट रूप से निदेशित किया गया था कि बाँध की सतत निगरानी करायी जाय एवं आवश्यकतानुसार उसकी मरम्मति करा ली जाय। किन्तु आपके द्वारा विभागीय दिशा निर्देश का उल्लंघन किया गया। आपका यह कृत्य बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता, स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। आपका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(iii) के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राम विनय सिन्हा, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोप को प्रमाणित पाया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिन्हा, तत0 कार्यपालक अभियंता से विभागीय पत्रांक-1039, दिनांक 11.05.18 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की गई।

उक्त के आलोक में श्री सिन्हा द्वारा अपने पत्रांक-16, दिनांक 08.06.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :-

श्री सिन्हा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के कंडिका 1 से 5 तक में इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्य के नियम के तहत साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 के विपरीत कार्यवाही करना, तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा किये गये समीक्षा के कई बिन्दु पर अपना आपत्ति दर्ज किया गया है। आरोप से संदर्भित द्वितीय कारण पृच्छा में निम्न तथ्य अंकित किया गया है -

(क) आरोप खण्ड-i- यह स्पष्ट नहीं है कि बैरगनियाँ रिंग बाँध में सीपेज की सूचना प्राप्त होने पर स्थल पर गये। BSNL मोबाईल के CDR (मो0 9431276371) से स्पष्ट है कि दिनांक 13.08.17 को सबेरे 05ः38 बजे Sisaula Kalan Tower Range में था। पुनः 05ः49 बजे बैरगनियाँ के Tower Range में था जिस समय बैरगनियाँ रिंग बाँध पर पहुँच चुके थे। इस प्रकार सीपेज की सूचना के पश्चात 1 घंटे के भीतर उस स्थल पर पहुँच चुका था। इससे स्पष्ट है कि जानबूझ कर अस्वीकार कर Intentionally आरोपित करने का प्रयास किया गया है। (ख) आरोप खण्ड-ii- संचालन पदाधिकारी के जाँच पत्र के अनुसार आरोपित पदाधिकारी द्वारा सीपेज की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दिये जाने के बचाव बयान स्थापित नहीं होता है। क्योंकि रिंग बाँध में सीपेज मरम्मति नहीं होने से टूटान हुआ एवं मुख्य अभियंता जो परिक्षेत्र के वरीय पदाधिकारी है द्वारा सूचना नहीं दिये जाने का प्रतिवेदित किया गया।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 76 सीपेज मरम्मति की सूचना सभी उच्च पदाधिकारी को अपने निजी मोबाईल से दिया। साक्ष्य के रूप में CDR संलग्न किया गया है। श्री सिन्हा द्वारा एक सारणीबद्ध तथ्य अंकित किया गया है एवं निम्न तथ्य अंकित किया गया है - (i) जिला पदाधिकारी से कुल 11 बार सम्पर्क में था एवं बातचीत हुआ। (ii) जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष से 2 बार वार्ता हुई। (iii) अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल, सीतामढ़ी से 6 बार वार्ता हुई। (iv) अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक दल से 7 बार बातचीत हुई। (v) मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर से जिला पदाधिकारी, सीतामढी द्वारा 2 बार बातचीत हुई। (vi) मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से एक बार बातचीत हुई। (vii) श्री रामाशंकर प्रसाद, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना से 8 बार बातचीत हुई। (viii) अनुमंडल पदाधिकारी, सीतामढी से 3 बार बातचीत हुई।

मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर से सम्पर्क करने पर बात नहीं हो सकी, परन्तु उनके कार्यालय से बातचीत हुई एवं मरम्मति कार्य की पुरी जानकारी दी गयी। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराकर परिस्थति को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा था, परन्तु जल स्तर के वृद्धि के चलते सीपेज नियंत्रित नहीं हो पा रही थी तथा H.G. Line Failure के कारण तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। (ग) आरोप खण्ड-iii- बिहार लोक निर्माण संहिता के कंडिका 30, 33, 143 में उल्लेखित तथ्य कार्यपालक अभियंता के दायित्वों से संबंधित है तथा मुख्य सचिव के पत्रांक-1934 दिनांक 11.06.17 से निर्गत बाढ़ नियंत्रण आदेश 2017 के कंडिका 8.02 का अभिकथन अंकित है का अनुपालन नहीं करने से संबंधित है। (ग) आरोप खण्ड-iv- वर्षा एवं लगातार बढते जलस्तर की स्थिति में सतत निगरानी चौकसी बरती जाती तो प्रारंभिक अवस्था में ही सीपेज पर नियंत्रण संभव हो पाता। तटबंध की देख रेख हेतु एक-एक कि0मी0 पर होम गार्ड तैनात किया गया था तथा सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा भी निगरानी की जा रही थी। यह स्थल संवेदनशीलता की दृष्टि से सामान्य स्थल के रूप में चिन्हित था। नदी की अप्रत्याशित जल प्रवाहित होने के कारण Overtop करने के चलत बायाँ तटबंध करीब 17 जगहों पर क्षतिग्रस्त हुआ तथा बागमती दायाँ तटबंध करीब तीन जगहों पर क्षति हुआ। बैरगनियाँ रिंग बाँध में कई जगहों पर रिसाव की सूचना 05ः38 बजे सबेरे मिली। तुरन्त मसहा स्थल पर प्रस्थान किया। सूखी मिट्टी की अनुपलब्धता के बावजूद कार्य प्रारंभ किया गया। जलस्तर बढते रहने के कारण रिसाव भी तेज होता जा रहा था, स्थानीय जन विरोध के कारण सुरक्षात्मक कार्य में कठिनाई होने के बावजूद कार्य जारी रखा गया। परन्तु H.G. Line Fail होने के कारण तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ। अतः यह तर्क देना कि सतत निगरानी बरती जाती तो प्रारंभिक अवस्था में ही सीपेज पर नियंत्रण संभव हो पाता, बेबुनियाद है। शाम को मसान स्थल पर पिछले HFL-72.81M से बढ़कर 73.90M एवं बागमती नदी का जलस्तर ढेंग पुल पर पिछले HFL- 72.34M से बढ़कर 72.95M हो गया। (घ) आरोप खण्ड-V- स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। परन्तु उनके द्वारा कराये गये कार्य की पुष्टि नहीं होती है फलतः सीपेज के कारण टूटान हुआ। विभाग द्वारा भी इस सम्पुष्ट नहीं बताया गया तथा मुख्य अभियंता के पत्रांक-2, दिनांक 13.08.17 से भी आरोप प्रमाणित पाया गया है। दिनांक 13.08.17 को कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का NR (108 दिनांक 30.08.17) से कार्य का प्रतिवेदन समर्पित है तथा प्रपत्र-24 की छायाप्रति संलग्न है। जिससे 13.08.17 को बैरगनियाँ रिंग बाँध पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की पुष्टि होती है। (ड) आरोप खण्ड-VI- आरोपी पदाधिकारी का कृत्य संतोषजनक एवं विभागीय दिशा निदेशों के अनुकूल नहीं रहा जो उनके संवेदनशील कार्य के प्रति लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता दर्शाता है। इस संदर्भ में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी लोक निर्माण विभाग संहिता vol-1 की कंडिका 30, 33 एवं 143 तथा बिहार वित्त नियमावली vol-1 के नियम-33 का गलत ढंग से विशलेषण करते हुए आरोप प्रमाणित होने का निष्कर्ष अंकित किया गया है। कार्यपालक अभियंता अपने अधीक्षण अभियंता के प्रति अपने कार्यों के कार्यान्वयन एवं प्रबंधन के लिये जिम्मेवार है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव बयान जो साक्ष्य आधारित थे पर बिना विचार किये एवं बिना जाँचे ही प्रतिवेदन समर्पित किया गया। अतः तथ्यों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आरोपमुक्त से मुक्त किया जाय।

श्री सिन्हा, तत0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री सिन्हा के विरूद्ध आरोप का मुख्य अंश है कि दिनांक 13.08.17 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ रिंग बाँध बशान नरोत्तम में सीपेज के कारण टूटने से व्यापक क्षति पहुँची एवं सीपेज मरम्मति की सूचना उच्चाधिकारी को नहीं दी गयी। साथ ही, बाँध की सतत निगरानी एवं आवश्यकतानुसार उसकी मरम्मति हेतु निर्गत विभागीय दिशा निदेशों का उल्लंघन किया गया जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(iii) का उल्लंघन है तथा कार्यों के प्रति लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता, स्वेच्छाचारिता से संबंधित है।77 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोपी द्वारा कहा गया है कि सीपेज होने की सूचना प्राप्त होने पर प्रातः 6.49 बजे बैरगनिया रिंग बाँध पर पहुँच चुका था। (साक्ष्य के रूप में अपना मोबाईल सं0 9431276371 का CDR संलग्न किया गया है) संचालन पदाधिकारी ने सीपेज होने की सूचना प्राप्त होने पर स्थल पर जाने एवं इसकी सूचना उच्चाधिकारी को दिये जाने संबंधी कोई साक्ष्य संलग्न नहीं है तथा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा कहा गया कि शाम 5.20 बजे टूटान होने की सूचना दी गयी, के आलोक में मोबाईल का CDR को औचित्यहीन मानते हुए सीपेज की सूचना उच्चाधिकारियों को दिये जाने का आरोपी का बयान को स्वीकार योग्य नहीं माना गया है जिससे सहमत हुआ जा सकता है।

श्री सिन्हा द्वारा यह भी कहा गया है कि सीपेज की मरम्मति की सूचना सभी पदाधिकारी को निजी मोबाईल के माध्यम से दिया गया था तथा CDR के आधार पर दिनांक 13.08.17 को विभिन्न पदाधिकारी से किये गये सम्पर्क एवं हुई बातचीत से संबंधित एक सारणी अंकित किया गया है। परन्तु उनके द्वारा एक भी ऐसा साक्ष्य नहीं दिया गया है जिससे स्थापित हो सके कि उनके द्वारा तटबंध में हो रहे सीपेज एवं उसकी मरम्मति से संदर्भित सूचना उच्चाधिकारी को दी गयी हो। ऐसी स्थिति मात्र CDR के आधार पर यह स्थापित करना संभव नहीं है कि उनके द्वारा सीपेज होने एवं उसकी मरम्मति की सूचना मुख्य अभियंता एवं अन्य उच्च पदाधिकारी को दी गयी है। परन्तु CDR से परिलक्षित है कि 13.08.17 के 11.58 बजे मुख्य अभियंता से श्री सिन्हा के द्वारा सम्पर्क किया गया है।

श्री सिन्हा द्वारा बिहार लोक निर्माण संहिता vol-1 की कंडिका 30, 33 एवं 143 तथा मुख्य सचिव, पटना के पत्रांक-1934 दिनांक 11.05.17 से निर्गत बाढ़ नियंत्रण आदेश 2017 के कंडिका 8.02 के उल्लंघन करने के संदर्भ में मूल आरोप प्रपत्र-'क' के कंडिकाओं का उल्लेखित करते हुए कहा गया है कि आरोप पत्र-'क' में ऐसा कोई आरोप नहीं है तथा यह कार्रवाई सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 के कंडिका-5(क) के आलोक में उचित नहीं है। जबकि संचालन पदाधिकारी ने बिहार लोक निर्माण संहिता vol-1 की कंडिका 30, 33 एवं 143 तथा मुख्य सचिव के पत्रांक 1934 दिनांक 11.05.17 के कंडिका 8.02 के अनुसार मुख्य अभियंता से कार्यपालक अभियंता तक के पदाधिकारी बाढ की स्थिति की सूचना तुरन्त संबंधित जिला पदाधिकारी तथा केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कोषांग, पटना को देना है, का भी उल्लंघन किया जाना माना गया है।

संचालन पदाधिकारी के मत कि वर्षा एवं लगातार बढते जलस्तर की स्थिति में सतत निगरानी एवं चौकसी बरती जाती तो प्रारंभिक अवस्था में सीपेज पर नियंत्रण संभव हो पाता। इस संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया कि तटबंधों की निगरानी हेतु होम गार्ड के पाँच जवान करीब एक-एक कि0मी0 के अन्तराल पर प्रतिनियुक्त था। उक्त स्थल पर सीपेज को रोकने हेतु सुरक्षात्मक कार्य कराया जा रहा था, परन्तु जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने एवं पुराने एच0एफ0एल0 से करीब 4 फीट उपर जलस्तर हो जाने पर H.G. Line के उपर Cover कमजोर होने के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गयी। अंततः तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ। संचिका में रक्षित अभिलेखों से स्पष्ट है कि ढेंग पुल पर दिनांक 13.08.17 को जलस्तर 72.95मी0 तथा Goabari वीयर पर जलस्तर 73.80मी0 पाया गया है। जो क्रमशः उक्त स्थल के HFL-72.34M एवं 73.81M से अधिक है।

उक्त स्थल पर सीपेज को रोकने हेतु कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की सम्पुष्टि हेतु NR एवं प्रपत्र-24 दिया गया है। परन्तु बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना द्वारा दिये गये मंतव्य में अंकित किया गया है कि आरोपी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य की पुष्टि भी इस कार्यालय से संबंधित नहीं होने के कारण संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत हुआ जा सकता है। इसके अतिरिक्त आरोपी पदाधिकारी द्वारा वहीं तथ्य दिया गया है जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया एवं जिसकी समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में करते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। अतएव आरोप प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिन्हा को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "कालमान वेतनमान में पाँच वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2082, दिनांक 18.09.18 द्वारा श्री सिन्हा को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2232 दिनांक 04.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-521, दिनांक 07.06.19 द्वारा श्री सिन्हा, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री राम विनय सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, सीतामढ़ी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन बराज प्रमंडल, इन्द्रपुरी, रोहतास को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"कालमान वेतनमान में पाँच वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 78

25 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2017-1258--श्री सतीश कुमार (आई0डी0-4045), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुए टूटान में जानमाल की व्यापक क्षति सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1608, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1691, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई - (1) बागमती नदी पर निर्मित तटबंध के रून्नीसैदपुर में सीपेज के संबंध में ससमय जानकारी आपको नहीं थी। जिससे स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा विभागीय निदेशों के प्रतिकूल तटबंध के आक्रमित स्थलों का निरीक्षण नहीं किया गया।

(2) पाईपिंग के कारण तटबंध टूट जाने तक आपके द्वारा स्थल भ्रमण नहीं किया गया। (3) इसके अतिरिक्त घनौर कटरा रिंग बाँध में ओभर टॉपिंग होने के कारण क्षतिग्रस्त हुआ। इस स्थल का भी आपके द्वारा न तो प्रारम्भ में और न ही बाद में निरीक्षण किया गया।

(4) रिसाव एवं पाईपिंग होने के बावजूद इसकी सूचना आपके द्वारा उच्चाधिकारी को नहीं दी गयी और बाँध से रिसाव एवं पाईपिंग को आपके द्वारा ठीक नहीं कराया गया।

(5) तटबंध के चार स्थलों पर टूटने के कारण जानमाल की व्यापक क्षति हुई। (6) दिनांक 15.08.17 को मुख्य अभियंता द्वारा क्षतिग्रस्त भाग का निरीक्षण किया गया। किन्तु आप उस समय में भी टूटान स्थल पर उपस्थित नहीं थे।

(7) दिनांक 14.08.17 एवं 15.08.17 को आपका सरकारी मोबाईल बन्द पाया गया। (8) इस प्रकार विभागीय निर्देशों के बावजूद भी आपके द्वारा बाढ से निपटने हेतु अपेक्षित पूर्व तैयारी नहीं की गयी थी। (9) निरीक्षण के समय कटाव स्थल पर भरे हुए बोरे की मात्रा कम थी और बोरा भरने की गति भी धीमी थी। (10) दिनांक 14.08.17 को टूटान हुआ, लेकिन टूटान के बाद सुरक्षात्मक कार्य दिनांक 16.08.17 के मुख्य अभियंता के निरीक्षण तक आरम्भ नहीं किया गया था।

आपका यह कृत बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो के प्रति घोर लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(iii) के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सतीश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों में से आरोप संख्या-01 एवं 07 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-02, 04, 06 को अंशतः प्रमाणित एवं आरोप संख्या-03, 05, 08, 09 एवं 10 को अप्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अंशतः प्रमाणित/प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1197, दिनांक 29.05.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई।

उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर द्वारा अपने पत्रांक-25, दिनांक 12.06.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :- बचाव बयान के कंडिका (1) (a) से (g) तक में इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के संदर्भ में आपत्ति, आरोप को अप्रमाणित करने हेतु संदर्भित माँगे गये अभिलेख तथा उक्त के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये पत्र का उल्लेख किया गया है तथा कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 12196 दिनांक 07.09.16 के अनुसार आरोपी द्वारा अधियाचित अभिलेख को उपलब्ध कराया जाना है। परन्तु विभाग या संचालन पदाधिकारी द्वारा वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया एवं सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 1893 दिनांक 14.06.11 का बिना अनुपालन किये ही संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना तथ्यों के समीक्षा किये ही जाँच प्रतिवेदन दिया गया है। जो नैसर्गिक न्याय सिद्धान्तों के विपरीत है। बचाव बयान के कंडिका-2 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित आरोप-1 के संदर्भ में कहा गया है कि- (क) प्रमंडलीय बेतार संवाद सं॰ 32 दिनांक 14.08.17 को संलग्न करते हुए कहा गया है कि अपने कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत हो रहे रिसाव की ससमय जानकारी थी एवं उक्त बेतार संवाद से रिसाव एवं पाईपिंग की सूचना ससमय उच्चाधिकारी के साथ-साथ विभाग को दी गयी थी।

(ख) विभागीय मोबाईल सं॰ 7463889934 के Call detail report से न्यायहित में सम्पुष्टि की जा सकती है। इस संबंध में संचालन पदाधिकारी का तर्क की आरोपी अभियंता द्वारा समर्पित कॉल डिटेल्स की प्रमाणिकता उनके उच्चाधिकारियों/विभागीय मंतव्य द्वारा भी सम्पुष्ट नहीं की गयी है। उचित नहीं है।

(ग) NR 32 दि॰ 14.08.17 द्वारा नदी के दायाँ एवं बायें बाँध में हो रहे रिसाव की सूचना अधीक्षण अभियंता, सीतामढ़ी, अध्यक्ष बाढ़ संघर्षात्मक बल एवं विभागीय उच्चाधिकारियों को ससमय दी गयी थी। उक्त से स्पष्ट है कि सिपेज की जानकारी उन्हें थी एवं तटबंधों का निरीक्षण किया गया था।79 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (घ) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप-2 में कहा गया है कि विभिन्न स्थलों पर हो रहे रिसाव/पाईपिंग के रोकथाम में व्यस्त रहने के कारण दिनांक 14.08.17 को टूटान स्थल का निरीक्षण टूटान के पूर्व नहीं किया जा सका है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप-8 के समीक्षा के क्रम में अंकित किया है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 6 दिनांक 12.07.17 से स्पष्ट है कि बाढ़ पूर्व की गयी तैयारी पर सहमति व्यक्त की गयी है। इससे स्पष्ट है कि उनके द्वारा सभी आक्राम्य स्थलों का निरीक्षण किया गया था।

NR 41 दि॰ 15.08.17 से स्पष्ट है कि आलोच्य स्थल का निरीक्षण ससमय करते हुए बाँध को सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक कारवाई की गयी है। स्थल निरीक्षण की सम्पुष्टि प्रमंडलीय निरीक्षण वाहन सं॰ BR-30P- 2775 के लॉग बुक से होती है। अतः यह आरोप साक्ष्यविहीन है।

बचाव बयान के कंडिका-3 :- में आरोप सं॰ 7 यथा दिनांक 14.08.17 एवं 15.08.17 को सरकारी मोबाईल बन्द पाये जाने के संदर्भ में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा माना है कि दिनांक 14.08.17 को सरकारी मोबाईल पूर्ण रूप से चालू था। दिनांक 15.08.17 को मोबाईल बन्द रहने के संदर्भ में कहा गया है कि इस संबंध में विभाग द्वारा स्पष्टीकरण की माँग करने पर बेतार संवाद सं॰ 42 दिनांक 16.08.17 से वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए विभाग को अवगत कराया गया था। जिसमें अंकित है कि दिनांक 14.08.17 को टूटान होने के पश्चात बिजली आपूर्ति पूर्णतः बन्द कर दी गयी है। लगातार स्थल पर रहने के कारण मोबाईल के साथ पावर बैंक भी डिस्चार्ज हो चुका था। रून्नीसैदपुर परिसर में लगभग 4.5 फिट पानी प्रवेश करने के कारण प्रमंडलीय जेनरेटर भी पानी मे डुबा हुआ था। इसके बावजूद दिनांक 15.08.17 को सहायक अभियंता के मोबाईल के माध्यम से मुख्य अभियंता के सम्पर्क में रहने के कारण टूटान निरीक्षण में सम्मिलित थे। साक्ष्य के रूप में दिनांक 15.08.17 का आवासीय परिसर एवं कार्यालय में पानी भरे रहने से संबंधित फोटोग्राफ तथा NR 41 दि॰ 15.08.17 की प्रति दी गयी है। आरोप-2 ः- के संबंध में कहा गया है कि पाईपिंग के कारण तटबंध किस स्थल पर टूटा अंकित नहीं है। अतः आरोप अस्पष्ट है। जो आरोप पत्र गठन नियमावली के अनुरूप नहीं है। आरोप-4 :- के संबंध में कहा गया है कि जाँच प्रतिवेदन में आरोप-4 के मंतव्य के रूप में अंकित किया गया है कि NR 41 दि॰ 14.08.17 से स्पष्ट है कि श्री कुमार द्वारा दिनांक 14.08.17 को बाँयें एवं दाँयें तटबंध में हो रहे रिसाव की सूचना उच्च पदाधिकारी के साथ-साथ विभाग को दी गयी। अतएव ससमय सूचना नहीं देने का आरोप नहीं बनता है। संचालन पदाधिकारी के आरोप-4 में मंतव्य के रूप में उद्धित तथ्यों से स्पष्ट है कि बाँध में हो रहे रिसाव एवं पाईपिंग नियंत्रित करने का प्रयास उनके द्वारा की गयी है। अर्थात्‌ बाँध को सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक कारवाई की गयी है। आरोप-6 :- संचालन पदाधिकारी के समीक्षा में उद्धित तथ्यों से स्पष्ट है कि मुख्य अभियंता द्वारा क्षतिग्रस्त भाग का किये गये निरीक्षण के समय टूटान स्थल पर उपस्थित नहीं रहने की बात सत्य से परे है। उपरोक्त सभी कंडिकाओं से स्पष्ट है कि लगाये गये आरोप का कोई अंश प्रमाणित नहीं होता है एवं पदीय दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा तथा वरीय पदाधिकारी के मार्गदर्शन के अनुरूप कार्य कराया गया है। अतएव आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। श्री कुमार, तत्का0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी ने श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित कुल 10 आरोपों में से आरोप सं॰-1 एवं 7 को प्रमाणित, आरोप सं॰ 2, 4 एवं 6 को अंशतः प्रमाणित तथा आरोप 3, 5, 8, 9 एवं 10 को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है तथा विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी है। श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव के आलोक में संचालन पदाधिकारी के द्वारा प्रमाणित आरोपों की स्थिति निम्नवत्‌ बनती है। आरोप-1 :- जो आरोपी श्री कुमार को तटबंध में सिपेज की ससमय जानकारी नहीं होने एवं विभागीय निदेशों के अनुरूप तटबंध के आक्राम्य स्थलों का निरीक्षण नहीं करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने मुख्य अभियंता के प्रतिवेदन के अनुसार दिनांक 14.08.17 को कटौंझा स्थल पर मुलाकात होने के क्रम में श्री कुमार द्वारा सूचना नहीं दी गयी कि कुल कितने स्थलों पर सिपेज हो रहा है एवं कितने पर नियंत्रण पाया गया। इस संदर्भ में कुमार द्वारा कोई तथ्य नहीं दिया गया है एवं न ही किसी भी पदाधिकारी के प्रतिवेदन से यह सम्पुष्ट होता है कि उसके द्वारा रिसाव एवं पाईपिंग होने की सूचना ससमय प्राप्त हुई, के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री कुमार द्वारा कहा गया है कि उन्हें कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत हो रहे सिपेज की ससमय जानकारी रहने के आधार पर ही बेतार संवाद 32 दिनांक 14.08.17 से बागमती नदी के बाँयें एवं दाँयें तटबंध में हो रहे रिसाव एवं पाईपिंग की सूचना उच्चाधिकारियों के साथ-साथ विभाग को दी गयी थी। साथ ही मोबाईल द्वारा भी अधीक्षण अभियंता एवं अध्यक्ष बाढ़ संघर्षात्मक बल को रिसाव की सूचना दी गयी थी। इसकी सम्पुष्टि सरकारी मोबाईल के CDR से की जा सकती है। NR-32 दिनांक 14.08.17 से स्पष्ट है कि कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 14.08.17 को बागमती तटबंध के बाँयें तटबंध के कि॰मी॰ 28.71 से 57.70 एवं दाँयें तटबंध के कि॰मी॰ 52.428 से 56.97 के बीच कई बिन्दुओं पर सिपेज प्रारम्भ होने तथा धनौर रिंग बाँध के कि॰मी॰ 1.0 पर गैप भराई की सूचना दी गयी है। कॉल डिटेल्स से स्पष्ट होता है कि श्री80 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 कुमार दिनांक 12.08.12 से 14.08.11 तक रून्नीसैदपुर, देवना, कटरा, पिंडौली, बोखरा, मुरसण्ड घोरहा, रामपुर, सैदपुर, मघकॉल इत्यादि स्थल का भ्रमण किया जाना परिलक्षित होता है। उपरोक्त तथ्यों एवं साक्ष्य से स्पष्ट होता है कि श्री कुमार द्वारा तटबंधों में सीपेज होने की ससमय सूचना उच्चाधिकारियों एवं विभाग को नहीं देने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर का कथन कि दिनांक 14.08.17 को मुलाकात होने के क्रम में पृच्छा करने पर श्री कुमार द्वारा कितने जगहों पर सिपेज हो रहा है एवं कितने जगहों पर नियंत्रण पाया गया के संदर्भ में कोई स्पष्ट जबाव दिया जाना परिलक्षित करता है कि इनके द्वारा सम्पूर्ण स्थलों निरीक्षण नहीं किया गया है परन्तु इनके सरकारी मोबाईल के लोकेशन डिटेल्स से परिलक्षित होता है कि श्री कुमार दिनांक 12.08.17 से 14.08.17 तक तटबंध के विभिन्न बिन्दुओं का निरीक्षण किया गया है। उक्त के आलोक में यह माना जाना कि तटबंध के सम्पूर्ण आक्राम्य स्थलों का इनके द्वारा निरीक्षण किया गया है। उचित प्रतीत नहीं होता है। अतएव आरोप सं॰-1 आंशिक प्रमाणित होता है। आरोप-2 :- जो पाईपिंग के कारण तटबंध के टूट जाने तक आरोपी द्वारा स्थल भ्रमण नहीं किये जाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने श्री कुमार के बयान को आंशिक स्वीकार योग्य मानते हुए इस आरोप को आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री कुमार द्वारा आरोप के संदर्भ में कहा है कि आरोप अस्पष्ट है क्योंकि पाईपिंग के कारण तटबंध के किस स्थल पर टूटा अंकित नहीं है। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि श्री कुमार एक कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। उन्हें ज्ञात था कि किस-किस स्थल पर टूटान हुआ है। फिर भी आरोप को अस्पष्ट कहना उचित नहीं माना जा सकता है। अतएव आरोप-2 को आंशिक यथा टूटान के पूर्व उक्त स्थल का निरीक्षण नहीं करने के आरोप को प्रमाणित माना जाता है। आरोप-4 :- जो तटबंध में रिसाव एवं पाईपिंग होने के बावजूद उच्चाधिकारियों की सूचना नहीं देने एवं उसे ठीक नहीं कराने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि उनके समीक्षित टिप्पणी में तथ्यों के समीक्षोपरान्त आरोप-4 आंशिक प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है जबकि निष्कर्ष कंडिका-II में इस आरोप को अंशतः प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया है। समीक्षित टिप्पणी में ससमय सूचना नहीं देने का आरोप नहीं बनता है, अंकित किया गया है साथ ही कहा गया है कि श्री कुमार दिनांक 14.08.17 को पूरे रात दिन तटबंध पर उपस्थित रहकर तटबंध के बाँयें बाँध के विभिन्न बिन्दुओं पर हो रहे रिसाव को नियंत्रण करने का प्रयास करते हुए स्थल को सुरक्षित किया गया है। आरोपी द्वारा इन्हीं तथ्यों को उल्लेखित करते हुए कहा गया है कि जाँच प्रतिवेदन में उद्धित मंतव्य के आलोक में आरोप प्रमाणित नहीं होता है। ऐसी स्थिति के संचालन पदाधिकारी के समीक्षित टिप्पणी के आलोक में आरोप-4 प्रमाणित नहीं होता है। आरोप-6 :- जो दिनांक 15.08.17 को मुख्य अभियंता द्वारा क्षतिग्रस्त भाग का निरीक्षण किया गया किन्तु आप उस समय टूटान स्थल पर उपस्थित नहीं होने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने इस आरोप को आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया बल्कि है। श्री कुमार द्वारा अपने बचाव बयान में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है वही तथ्यों को ठुकराया गया है, जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि श्री कुमार मुख्य अभियंता के टूटान स्थल के निरीक्षण के समय स्थल पर विलम्ब से पहुँचते थे से सहमत होते हुए आरोप संख्या-6 को आंशिक प्रमाणित माना जा सकता है।

आरोप-7 :- जो दिनांक 14.08.17 और दिनांक 15.08.17 को सरकारी मोबाईल बन्द पाये जाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने श्री कुमार का कथन कि मोबाईल के लोकेशन विवरणी के अनुसार दिनांक 14.08.17 को मोबाईल पूर्ण रूप से खुला था तथा दिनांक 13.08.17 से 14.08.17 तक लगातार कार्यक्षेत्र में रहने के कारण दिनांक 15.08.17 को रखने से मोबाईल एवं पावर बैंक पूर्णतः डिस्चार्ज होने के कारण बन्द हो गया था। विद्युत आपूर्ति बन्द होने के कारण तथा प्रमंडलीय कार्यालय एवं आवासीय उपलब्ध जेनेरेटर पानी में डुब हाने के कारण मोबाईल चार्ज करना संभव नहीं हो सका को, उनके उच्चाधिकारियों/अधीनस्थ/विभागीय मंतव्य द्वारा सम्पुष्ट नहीं की गयी है के आलोक में अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। लोकेशन डिटेल्स से स्पष्ट है कि दिनांक 14.08.17 को श्री कुमार का मोबाईल पूर्ण रूप से खुला था तथा दिनांक 13.08.17 से 14.08.17 तक लगातार क्षेत्र में रहने के कारण मोबाईल एवं पावर बैंक डिस्चार्ज हो गया था। तथा दिनांक 14. 08.17 को तटबंघ के हुए टूटान के कारण विद्युत आपूर्ति पूर्णतः बाधित हो जाने तथा प्रमंडलीय कार्यालय में लगभग 4.5 फीट पानी भर जाने के कारण जेनरेटर डुब जाने के कारण मोबाईल 15/18/17 को चार्ज नहीं हो सका। प्रमंडल के पत्रांक 41 दिनांक 15.08.17 तथा फोटोग्राफ से परिलक्षित है कि दिनांक 15.08.17 को रून्नीसैदपुर में विद्युत आपूर्ति बाधित था तथा कार्यालय परिसर में पानी भरा हुआ था। अतएव दिनांक 15.08.12 को श्री कुमार का मोबाईल बन्द रहना परिस्थितिजन प्रतीत होता है। इसमें श्री कुमार के स्तर से लापरवाही बरतना परिलक्षित नहीं होता है। अतएव आरोप संख्या-7 प्रमाणित नहीं होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं॰ 1, 2 एवं 6 यथा दिनांक 14.08.2017 के पूर्व सभी आक्राम्य स्थल का निरीक्षण टूटान के पूर्व उक्त स्थल का निरीक्षण नहीं करना, टूटान स्थल का दिनांक 15.08.2017 को मुख्य अभियंता का स्थल निरीक्षण में विलंब से स्थल पर पहुँचने का आरोप आंशिक प्रमाणित होता है एवं आरोप संख्या-03, 05, 08, 09 एवं 10 प्रमाणित नहीं होता है। साथ ही संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप संख्या- 7 एवं 481 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 यथा दिनांक 14.08.2017 एवं दिनांक 15.08.2017 को सरकारी मोबाईल बन्द रखने तथा तटबंध से हो रहे रिसाव/पैकिंग की ससमय सूचना नहीं देने एवं उसे ठीक कराने का प्रयास नहीं करने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "कालमान वेतनमान में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2141, दिनांक 25.09.18 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2311 दिनांक 11.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-520, दिनांक 07.06.19 द्वारा श्री कुमार, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री सतीश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बागमती प्रमंडल, रून्नीसैदपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"कालमान वेतनमान में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2017-1259--श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4366), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण बलुआ ग्राम, सपही ग्राम एवं फुलवरीया ग्राम में हुए टूटान सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1609, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1686, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई - मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के प्रतिवेदन के अनुसार बाढ़ का पानी कम होने पर टूटान स्थल पर जाने से निम्नांकित चार स्थलों पर टूटान परिलक्षित हुआ :- (1) ललबकैया दायाँ मार्जिनल बाँध के वि॰दू॰ 3.0 कि॰मी॰ पर बलुआ ग्राम के लगभग 65 मी॰, वि॰दू॰ 2.50 पर 128 मी॰, वि॰दू॰ 9.80 कि॰मी॰ सपही ग्राम में 70 मी॰ तथा वि॰दू॰ 1.0 कि॰मी॰ पर फुलवरिया ग्राम मेें 80 मी॰ की लम्बाई में टूटान हुआ।

(2) घनौरा कटरा रिंग बाँध के वि॰दू॰ 1.0 कि॰मी॰ पर बाँध अधूरा है तथा ऊँचाई लगभग 3 फीट है। यह स्थल कटरा प्रखंड के नूनिया टोला के पास है। जिसकी जानकारी आपको थी फिर भी जलस्तर में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होने की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी, न ही इसके पूर्व पानी की निकासी को रोकने के लिये डाबेल आदि का का निर्माण कराया गया, जिसके कारण बाढ़ का पानी कंट्री साईड के ग्रामों में फैला तथा कटाव हुआ। जिससे जान-माल की व्याप्क क्षति हुई।

आपका यह कृत बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो के प्रति घोर लापरवाही, कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है साथ ही आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक अचार नियमावली, 1976 के नियम-3(iii) के प्रतिकूल है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों में से आरोप संख्या-01 को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-02 को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1035, दिनांक 11.05.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-15, दिनांक 11.06.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :- श्री कुमार तत्कालीन सहायक अभियंता ने बचाव बयान के कंडिका 1 से 9 तक में उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही, आरोप से संदर्भित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने, संचालन पदाधिकारी के स्तर से नियम के विरूद्ध कृत कारवाई, उनके बचाव बयान का संज्ञान नहीं लेने, गलत तरीके से जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने तथा विभाग से वांछित अभिलेख की माँग करने पर सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 12196 दिनांक 07.09.16 एवं 15548 दि॰ 06.12.17 तथा 1893 दिनांक 14.06.11 के अनुरूप कारवाई नहीं करने का उल्लेख किया गया है तथा संचालित विभागीय कार्यवाही को उचित नहीं बताया गया है। कंडिका 10 के विभिन्न उप कंडिका में प्रमाणित आरोप सं॰-2 के संदर्भ में निम्नवत्‌ तथ्य उद्धित किया गया है।82 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उप कंडिका (क) से (घ) में विभिन्न तथ्यों को उद्धित करते हुए कहा गया है कि तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा दिया गया प्रतिवेदन बिना साक्ष्य एवं निरीक्षण किये ही तैयार किया गया। उक्त प्रतिवेदन को साक्ष्य विहिन, आधारहीन एवं असत्य है। उप कंडिका (ड़) में कहा गया है कि मुख्य अभियंता द्वारा घनौर कटरा रिंग बाँध के प्रतिवेदित स्थल पर तटबंध का निर्माण नहीं हुआ था। जब तटबंध ही नही था तो कटाव होने की बात अधारहीन है। उपकंडिका (च) में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-5 के संदर्भ में कहा गया है कि दिनांक 03. 08.17 को पूर्व से भरकर रखे गये बोरा से डावेल का निर्माण हेतु प्राप्त निदेश के आलोक में उसी दिन से प्रारम्भ करा दिया गया था। साक्ष्य के रूप में भाउचर एवं स्थल पंजी दी गयी है एवं दिनांक 14.08.17 से 15.08.17 को क्रमशः 5000 एवं 15000 खाली सिमेंट बोरा में बालू भरकर पूर्व निर्मित डावेल को नियुक्त संवेदक से मजबूतीकरण कर सुरक्षित रखा गया जिसकी पुष्टि स्थल पंजी एवं लेईंग पंजी तथा अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 133 दिनांक 08.11.17 तथा फोटोग्राफ से होती है। जलस्तर में हो रहे अप्रत्याशित वृद्धि के कारण निर्मित डावेल की ऊँचाई बढ़ाते रहने के कारण गाँव में तरफ जल का फैलाव नहीं हुआ। फलतः न तो कटाव हुआ और न ही जान-माल की क्षति हुई। डावेल निर्माण कार्य की जाँच अधीक्षण अभियंता द्वारा उनके पत्रांक 1051 दिनांक 26.08.17 से निर्गत से आदेश के आलोक में जाँच कर कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रपत्र 24, प्राक्कलन तथा परिमाण विपत्र उनके पत्रांक 1283 दिनांक 04.11.17 से भेजा गया। इससे स्पष्ट है कि निर्मित डाबेल दिनांक 04.11.17 तक सुरक्षित था। निर्मित डावेल में दिनांक 14.08.17 को कराये गये कार्य का विभागीय पत्रांक 1298 दिनांक 24.03.18 से प्राप्त स्वीकृति के पश्चात संवेदक को भुगतान किया गया है। इनके द्वारा कहा गया है कि जल स्तर की सूचना प्रत्येक तीन घंटे पर कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को दिया गया है। जिसे प्रमंडलीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा नियमित रूप से बेतार संवाद से उच्चाधिकारी एवं विभाग को दिया गया है। मेरे द्वारा बाढ़ प्रबंधन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया के कंडिका 4.4 में निहित निदेश का पालन निष्ठापूर्वक किया गया है। उनके द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारी हेतु स्थल का बोरा संग्रहण कर, भरकर दि॰ 10.06.17 को ही रख दिया गया था जिसकी पुष्टि मुख्य अभियंता के पत्रांक 6 दिनांक 12.07.17 से होती है। कार्यपालक अभियंता के आदेशानुसार दिनांक 13.07.18 से कार्य करते हुए दिनांक 14.07.18 एवं 15.07.18 को कार्य पूर्ण करा दिया गया। तथा खैरियत प्रतिवेदन तथा प्रगति प्रतिवेदन ससमय प्रमंडल को दिया जाता था। अतः लापरवाही, कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता का आरोप स्थापित नहीं होता है।

श्री कुमार, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री कुमार तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध निम्न दो आरोप गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है। जिसका मुख्य अंश निम्नवत्‌ है :-

(1) ललबकैया दायाँ बाँध के विभिन्न बिन्दुओं पर टूटान होना।

(2) घरौना कटरा रिंग बाँध के वि॰दू॰ 1.0 कि॰मी॰ पर बाँध अधूरा रहने तथा वहाँ ऊँचाई कम रहने की जानकारी रहने के बावजूद भी जल स्तर में अप्रत्याशित वृद्धि की सूचना नहीं देना तथा पानी को रोकने हेतु डाबेल आदि का निर्माण नहीं करने के कारण कंट्री साईड में पानी का फैलाव होने के कारण जान-माल की व्यापक क्षति होना कार्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता, कर्त्तव्य का पालन नहीं करना। मामले के समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी ने आरोप-1 को उक्त कार्य स्थल से असम्बद्ध होने के आधार पर प्रमाणित नहीं होने तथा आरोप-2 प्रमाणित होने का मंतव्य दिया जिसके आलोक में श्री कुमार से मात्र आरोप सं॰-2 के लिये द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। (क) संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रति से स्पष्ट है कि श्री कुमार के बचाव बयान कि प्रश्नगत स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु सामग्री का संग्रह किया गया था एवं डाबेल का निर्माण किया गया है, स्वीकार योग्य नहीं माना गया है। आरेापी का कथन कि दिनांक 14.08.17 को नामांकण के आधार पर उक्त स्थल पर बाँध को मजबूतीकरण कर पानी को नियंत्रित किया गया। को मात्र नामांकण प्रस्ताव के आलोक में अस्वीकार योग्य माना गया एवं अन्य तथ्यों को अस्वीकार योग्य मानते हुए श्री कुमार को बाढ़ जैसे आपात स्थिति में घोर लापरवाही तथा कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने तथा स्वेच्छाचारिता बरतने के लिये दोषी माना गया है।

श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में आरोप के संदर्भ में मुख्य रूप से कहा गया है कि प्रश्नगत स्थल पर कार्यपालक अभियंता के दिनांक 13.08.17 को दिये गये निदेश के आलोक में दिनांक 13.08.17 से घनौरा कटरा रिंग बाँध के 1 कि॰मी॰ के गैप भाग में पूर्व से संग्रहित बालू भरे बोरा से डाबेल का निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया था तथा अधीक्षण अभियंता द्वारा नामांकित संवेदक के द्वारा दिनांक 14.08.17 एवं 15.08.17 को क्रमशः 5000 अदद्‌ EC Bags एवं 15000 अदद्‌ ई॰सी॰ बैग पिचिंग कर मजबूतीकरण कराकर स्थल को सुरक्षित रखा गया। इस भाग से पानी ओभर टॉप नहीं हो पाया। फलतः जान-माल की कोई क्षति नहीं हुई। साक्ष्य के रूप में पारित प्रमाणक, नामांकण प्रस्ताव, तथा अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता का पत्र दिया गया है। पारित प्रमाण पत्र से स्पष्ट है कि दिनांक 13.08.17 को उक्त रिंग बाँध पर पूर्व से रखे बालू भरे बोरा से डाबेल बनाने का कार्य कराया गया है। तथा कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1283 दिनांक 04.11.17 से स्पष्ट होता है कि घनौर83 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 कटरा रिंग बाँध के कि॰मी॰ 1.0 पर दिनांक 14.08.17 एवं 15.08.17 तक गैप भराई का कार्य कराया गया है। स्पष्ट है कि उक्त स्थल पर दिनांक 14.08.17 एवं 15.08.17 को कुल 20000 अदद्‌ ई॰सी॰ बैग में बालू भराई कर पिचिंग का कार्य कराया गया है। परिलक्षित है कि उक्त कार्य की स्वीकृति विभाग द्वारा प्रदान की गयी।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में आरोपी का कथन कि उक्त स्थल पर दिनांक 13.08.17 से 15.08.17 के बीच डाबेल का निर्माण कराया गया है स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। आरोपी द्वारा उक्त गैप से नदी का पानी कन्ट्री साईड में फैलाव नहीं होने से संबंधित साक्ष्य के रूप में फोटोग्राफ दिया गया है जिसे देखा जा सकता है इसके अतिरिक्त आरोपी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जो स्थापित कर सके कि उक्त भाग से पानी का का फैलाव कंट्री साईड में नहीं हुआ है। जबकि मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 4 दि॰ 18.08.17 कंडिका-2 में स्पष्ट रूप से अंकित है कि जलस्तर में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होने अथवा इसके पूर्व पानी की निकासी को रोकने के लिये डाबेल आदि का निर्माण नहीं किया। फलतः पानी कन्ट्री साईड के ग्राफों में फैला। ऐसी स्थिति में आरोप के इस अंश को प्रमाणित माना जा सकता है। आरोप के दूसरा अंश नदी में जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं देने के संदर्भ में दोनों आरोपी द्वारा कहा गया है कि नदी के जलस्तर में हो रहे वृद्धि की सूचना प्रत्येक तीन घंटे पर कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को प्रतिदिन दी जाती थी। परन्तु इन दोनों पदाधिकारी द्वारा उक्त कथन की पुष्टि के लिये कोई साक्ष्य/अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतः श्री कुमार के कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। एवं ससमय आवश्यक सूचना देने में इनके द्वारा दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जाना प्रतीत होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री अरूण कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप संख्या-1 अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-2 यथा नदी के जल स्तर में हो रहे अप्रत्याशित वृद्धि की सूचना उच्चाधिकारी को नहीं देने एवं गैप भाग से नदी के पानी का हो रहे फैलाव को नहीं रोकने के आलोक में दायित्वों का निर्वहन नहीं करने तथा कार्य के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप प्रमाणित होता है। परन्तु इसी आरोप का अंश यथा आदेश का अवहेलना करने तथा स्वेच्छाचारिता का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2144, दिनांक 25.09.18 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2308 दिनांक 11.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-540, दिनांक 07.06.19 द्वारा श्री कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर, सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, गंगा पम्प नहर अवर प्रमंडल, धुआबे, कहलगाँव, भागलपुर को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2017-1260--श्री संजय कुमार (आई0डी0-5379), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुए टूटान में बरती गई अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1611, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1684, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई - (1) बागमती बायाँ तटबंध के कि॰मी॰ 46.92 से 88.72 के बीच चार स्थलों पर क्रमशः कि॰मी॰ 48.85, 48.70, 48.67 एवं 48.43 कि॰मी॰ पर बागमती नदी में जलस्तर बढ़ने से सीपेज/पाईपिंग के कारण दिनांक 14.08.17 को टूटान हुआ। जो आपके कार्यक्षेत्र में पड़ता है। टूटान के संबंध पूछताछ करने पर ग्रामीणों द्वारा यह जानकारी दी गयी कि आपको रिसाव/पाईपिंग होने की पूर्व सूचना देने पर भी आपके द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया एवं प्रभावित स्थल से चले गये।

(2) दिनांक 16.08.17 को खडका ग्राम में चले रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को कराने हेतु मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर द्वारा कनीय अभियंता श्री दिलीप कुमार को भेजने हेतु आपको आदेश दिया गया किन्तु आपके द्वारा श्री दिलीप कुमार के ऑपरेशन होने की गलत सूचना दी गयी एवं उन्हें कटाव स्थल पर नहीं भेजा गया। बाद में जाँच करने पर श्री दिलीप कुमार के ऑपरेशन होने का तथ्य गलत पाया गया। इस प्रकार आपके द्वारा वरीय पदाधिकारी को गलत सूचना देकर दिगभ्रमित किया गया।84 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आपका उक्त कृत बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो के प्रति घोर लापरवाही, कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(iii) के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री संजय कुमार, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1036, दिनांक 11.05.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई।

उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 08.06.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :- श्री संजय कुमार अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव के कंडिका (iv) से (v) तक में इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही को प्रारम्भ करने अभिलेख की माँग करने, संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन तैयार करने में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 1893 दिनांक 14.06.11 का उल्लंघन किये जाने का उल्लेख किया गया है। कंडिका-6 में कहा गया है कि रिसाव/पाईपिंग की सूचना तटबंध पर प्रतिनियुक्त गृह रक्षा वाहिनी द्वारा कनीय अभियंता श्री दिलीप कुमार को दी गयी उनसे प्राप्त हुई। उस समय वे बायाँ तटबंध के कि॰मी॰ 50.06 एवं 50.03 पर रिसाव को नियंत्रित कर रहे थे। कंडिका-7 में संचालन पदाधिकारी के समीक्षा टिप्पणी में विभागीय बाढ़ निदेशिका के उल्लेख के संदर्भ में कहा गया है कि इस निदेशिका का उल्लेख आरोप पत्र में नहीं है। जो C.C.A Rule का उल्लंघन है। कंडिका 8.9.10 एवं 11 में संचालन पदाधिकारी द्वारा तत्कालीन मुख्य अभियंता के साथ किये गये प्रतिपरीक्षण को उचित नहीं माना गया है। कंडिका-13 (घ) में आरोप-1 के संदर्भ में कहा गया है कि दि॰ 14.08.17 को तटबंध में हो रहे रिसाव/पाईपिंग की रोकथाम के लिये उनके द्वारा नामांकण के आधार पर पिंकी कुमारी, संवेदक को नियुक्त किया गया। जिसकी स्वीकृति कंडिका 13 (घ) (e) से (t) तक में दिनांक 14.08.17 को सुबह 6.0 बजे से रात्रि 9.0 बजे तक के क्रियाकलाप का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कार्यपालक अभियंता को रिसाव की सूचना कनीय अभियंता के मोबाईल से सुबह दे दी गयी थी एवं पल-पल की घटनाक्रम की जानकारी दी जा रही थी। कंडिका (4) से (7) तक में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के कारण जनाक्रोश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बागमती नदी में अप्रत्याशित जलश्राव एवं घटना स्थल के निम्न प्रवाह में Afflex के प्रभाव के कारण HG Line fail हाने एवं नदी में आयी बदलाव आदि प्राकृतिक कारणों से बाँध क्षतिग्रस्त हुआ। कंडिका (च) में तटबंधों पर सतत निगरानी एवं चौकसी बरतने के संदर्भ में विभागीय निदेशों का उल्लंघन करने के संदर्भ में कहा गया है कि इस तरह का आरोप प्रपत्र 'क' में नहीं रहने के कारण इस बिन्दु का अपना पक्ष रखा था। मुख्य अभियंता को गलत सूचना देने के संदर्भ में कहा गया है कि उनके द्वारा मुख्य अभियंता को कोई गलत सूचना न तो दी गयी है एवं न ही आदेश की अवहेलना की गयी है। अतः तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा लगा गया आरोप निराधार है एवं सत्य से परे है क्योंकि ई॰ विनोद सिंह, कनीय अभियंता का ऑपरेशन वास्तव में हुआ था। ऐसी स्थिति में उनके स्थान पर ई॰ दिलीप कुमार, कनीय अभियंता का नाम अपने वरीय पदाधिकारी के समक्ष लेने का न तो कोई औचित्य था और न ही कोई कारण था। श्री कुमार, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित दोनों आरोपों का मुख्य अंश है कि (1) तटबंध में हो रहे रिसाव/पाईपिंग की सूचना ग्रामीणों द्वारा श्री कुमार को देने में बावजूद उनके द्वारा गंभीरता से नहीं लेते हुए स्थल से चला जाना। एवं उक्त स्थल पर बाँध क्षतिग्रस्त होना।

(2) तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा कनीय अभियंता श्री दिलीप कुमार, तत्कालीन कनीय अभियंता को टूटान स्थल पर भेजने का दिये गये निदेश के क्रम में श्री कुमार द्वारा गलत ढंग से श्री दिलीप कुमार के ऑपरेशन होने की गलत सूचना देते हुए स्थल पर नहीं भेजा गया । बाद में श्री दिलीप कुमार के ऑपरेशन होने की बात गलत पाया गया।

(क) संचालन पदाधिकारी ने श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान दिये गये बचाव बयान तथा तत्कालीन मुख्य अभियंता से प्रतिपरीक्षण करने के पश्चात मामले के समीक्षोपरान्त दोनों आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में वही तथ्य को उलट फेर कर उद्धित किया गया है, जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है जिसकी सम्यक समीक्षा संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में किया जो निम्न लिखित है :- प्रस्तुत आरोप मुख्य अभियता, मुजफ्फरपुर के परिक्षेत्राधीन बागमती अवर प्रमंडल, कटरा के अधीन बाढ़ अवधि 2017 में बागमती बायाँ तटबंध के वि0दू0 46.92 कि0मी0 से 88.72कि0मी0 के बीच चार जगहों पर क्रमशः 48.85 कि0मी0, 48. 70कि0मी0, 48.67कि0मी0 एवं 48.43कि0मी0 पर बागमती नदी में जलस्तर बढने से सीपेज/पाईपिंग के कारण दिनांक 14.08.

85 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

2017 को टूटान हुआ। यह क्षेत्र बागमती अवर प्रमंडल, कटरा के अन्तर्गत का कार्यक्षेत्र है। टूटान के संबंध में पूछताछ करने पर ग्रामीणों द्वारा यह जानकारी दी गयी की उन्हें रिसाव/पाईपिंग होने की पूर्व सूचना देने पर भी उनके द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया एवं प्रभावित स्थल पर चले गये। दिनांक 16.08.2017 को खड़का ग्राम में चल रहे कार्यों को कराने हेतु तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर द्वारा कनीय अभियंता, दिलीप कुमार को भेजने हेतु आरोपी को आदेश दिया गया, किन्तु आरोपी के द्वारा श्री दिलीप कुमार के ऑपरेशन होने की गलत सूचना दी गयी एवं उन्हें कटाव स्थल पर नहीं भेजा गया। बाद में जाँच करने पर श्री दिलीप कुमार के ऑपरेशन होने का तथ्य गलत पाया गया। इस प्रकार आरोपी के द्वारा वरीय पदाधिकारी को गलत सूचना देकर दिगभ्रमित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' उपलब्ध कराये जाने के उपरांत दिनांक 01.11.2017 की सुनवाई के दौरान आरोपी सहायक अभियंता, श्री संजय कुमार द्वारा अपना बचाव बयान समर्पित किया गया। आरोपित पदाधिकारी श्री संजय कुमार को अपने बचाव बयान में आरोप सं0-01 के संबंध में यह कथन कि स्थल पर रिसाव/पाईपिंग की सूचना ग्रामीणों द्वारा उन्हें नहीं वरन्‌ उनके कनीय अभियंता को दी गयी थी, अतः उन्हें बाँध में रिसाव की सूचना मिलने एवं तदनुसार उसे रोकने की कार्रवाई नहीं करने के आरोप सही नहीं है। इस संदर्भ में आरोपी का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि विभागीय बाढ़ निर्देशिका में स्पष्ट उल्लेखित है कि संबंधित अभियंता सभी तटबंधो की सतत्‌ निगरानी एवं चौकसी रखेंगे एवं आवश्यकतानुसार अविलम्ब बाँध में रिसाव/पाईपिंग को रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस संबंध में यह उनकी जिम्मेवारी थी कि तटबंधाें की सतत निगरानी एवं चौकसी रखी जाय एवं रिसाव/पाईपिंग परिलक्षित होने पर इसे रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। आरोपित सहायक अभियंता द्वारा आरोप सं0-02 के संबंध में अपने बचाव बयान में कहा गया है कि दिनांक 16.08. 2017 को कार्यों को कराने हेतु श्री विनोद सिंह कनीय अभियंता को भेजने को निदेश दिया गया था न कि श्री दिलीप कुमार को भेजने का निदेश दिया गया था। उक्त मामलों में प्रतिपरीक्षण हेतु श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता दिनांक 22.11.2017 को उपिस्थत हुए। सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा स्थल पर उपस्थित ग्रामीणों की पहचान एवं उनसे वार्ता के क्रम में रिसाव की जानकारी देने से इन्कार किया गया। उक्त के संबंध में तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा कहा गया कि उनका प्रतिवेदन ग्रामीणों से हुई पूछताछ के बाद ही समर्पित किया गया था। प्रतिपरीक्षण के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता ने यह भी कहा कि बाँध में रिसाव/पाईपिंग की घटना को आरोपी अभियंता द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया और वे स्थल से प्रस्थान कर गये। प्रतिपरीक्षण के क्रम में तत्कालीन मुख्य अभियंता ने यह भी बताया कि दिनांक 16.08.2017 को खड़का ग्राम में चल रहे कार्यों को कराने हेतु निदेश दिये जाने के बावजूद आरोपी सहायक अभियंता द्वारा कनीय अभियंता, श्री दिलीप कुमार को उनके आपरेशन का बहाना बनाकर नहीं भेजा गया अपितु उनके स्थान पर अन्य कनीय अभियंता श्री विनोद सिंह को कार्यस्थल पर जाने को कहा गया। तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिपरीक्षण के क्रम में बताया गया कि उनके द्वारा इस घटना को पुनः संज्ञान लेते हुए संबंधित कनीय अभियंता को डाँटने के बाद, कनीय अभियंता टूटान स्थल पर गये। उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी अभियंता श्री संजय कुमार द्वारा तटबंध में हो रहे रिसाव/पाईपिंग की सूचना ससमय उपलब्ध हो जाने के बाद भी उसकी रोकथाम के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी। उनके द्वारा बाँधों की सतत निगरानी एवं चौकसी बरतने के संबंध में विभागीय दिशा निदेशों का उल्लंघन किया गया। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा मुख्य अभियंता को गलत सूचना देने के साथ-साथ आरोपी पदाधिकारी श्री संजय कुमार के द्वारा तत्कालीन मुख्य अभियंता तथा विभागीय निदेशों की अवहेलना की गई। इन परिस्थितियों में आरोपी श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता का बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।

आरोपी द्वारा आरोप से संदर्भित न तो कोई नया तथ्य ही दिया गया है न ही कोई पूर्व के अतिरिक्त कोई नया साक्ष्य ही दिया गया है। ऐसी स्थिति में श्री कुमार का द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव अस्वीकार योग्य मानते हुए दोनों आरोपों को प्रमाणित माना जा सकता है। अर्थात्‌ इनके द्वारा बाढ़ जैसे आपदा की स्थिति में उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना, कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता/दायित्वों के निर्वहन में उपेक्षा बरतना दर्शाता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप-1 एवं 2 यथा तटबंध में रिसाव/पाईपिंग की जानकारी मिलने के बाद भी उसे गंभीरता से नहीं लेना एवं स्थल से चले जाना। फलतः टूटान होना तथा उच्च पदाधिकारी को गलत सूचना देकर दिग्भ्रमित करना। उच्चाधिकारी के आदेश का पालन नहीं करने के आरोप को प्रमाणित माना जाता है एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "आठ (8) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2142, दिनांक 25.09.18 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2310 दिनांक 11.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-522, दिनांक 07.06.19 द्वारा श्री कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया।86 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, कटरा सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल, करगहर, डिहरी को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"आठ (8) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-10/2017-1261--श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार (आई0डी0-5335), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 14.08.17 को बागमती नदी के बाँयें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुए टूटान में बरती गई अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1610, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री कुमार को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक संख्या-1683, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई -

बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद का कार्यक्षेत्र बायाँ तटबंध के 38.76कि0मी0 से 46.92कि0मी0 कटाव प्रभावित भाग है। (1) दिनांक 17.08.17 को मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा मोबाईल पर आदेश देने के बावजूद आप कटाव स्थल पर नहीं पहुँचे एवं मोबाईल भी आपके द्वारा बन्द कर लिया गया।

(2) इसके पश्चात लगभग 2.30 बजे अपराह्‌न में आप आये एवं लगभग 3.0 बजे अपराह्‌ण में स्वेच्छा से चले गये एवं मोबाईल बन्द कर लिया गया ।

(3) दिनांक 17.08.17 को ही आप मेडिकल के आधार पर अवकाश का आवेदन देकर बिना अवकाश स्वीकृत कराये चले गये। कटाव के गंभीर स्थिति के दृष्टिगत आपके द्वारा मोबाईल बन्द रखने के कारण अवकाश अस्वीकृति की सूचना आपको नहीं दी जा सकी। आपका उक्त कृत बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो के प्रति घोर लापरवाही, कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। आपका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(iii) के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1034, दिनांक 11.05.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई।

उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 26.06.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :- श्री कुमार द्वारा बचाव बयान के कंडिका 1 एवं 2 में इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को नियम 17(3) (i) (ii) (क) एवं (ख) के अनुरूप नहीं किया जाना बताया गया है। कंडिका-4 में आरोप सं॰-1 के संदर्भ में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी उनके बचाव बयान को स्वीकार योग्य नहीं माना जा गया है क्योंकि उनका मोबाईल बन्द था। तो उनके द्वारा उस दौरान पदाधिकारी से सम्पर्क में रहने संबंधी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी। जबकि अभियंता प्रमुख द्वारा पावर बैंक क्रय करने की अनुमति प्रदान की गयी थी। परन्तु पावर बैंक खरीदने की प्रक्रिया का कोई उल्लेख नहीं है। न ही कोई मार्गदर्शन था तथा पावर बैंक को चालू रखने हेतु बिजली की आवश्यकता होती है जबकि बिजली ही वांछित था तो पावर बैंक कैसे चालू रखा जा सकता था। कंडिका-5 :- में आरोप सं॰ 3 के संदर्भ में कहा गया है कि बिमार होने/घायल होने पर विभाग की स्वीकृति आने तक चिकित्सक से बिना ईलाज कराये कैसे रहा जा सकता था चिकित्सा अवकाश में जाने के लिये स्वीकृति करना संभव नहीं था। गृह रक्षकों एवं ग्रामीणों से पुष्टि की जा सकती है, कि वे दिनांक 17.08.17 को वर्णित स्थल पर मौजूद थे एवं उक्त स्थल कटाव प्रभावित नहीं था। संचालन पदाधिकारी का कहना कि मुझे इस बात की जानकारी थी कि अवकाश की स्वीकृति मुख्यालय स्तर से दी जाती है, उचित नहीं है। क्योंकि छुट्‌टी में जाने का आवेदन उचित माध्यम से दिया जाना है। ऐसी परिस्थति में जबकि वे अस्वस्थ थे तो यह कहा जाना कि मैं अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित था उचित नहीं है। कंडिका-6 ः- में आरोप सं॰-2 के संदर्भ में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी उनके स्पष्टीकरण को यह कहकर अस्वीकार किया गया है कि उनके बचाव बयान में अंकित नहीं है कि किस समय स्थल पर पहुँचा और कब चले गये। संचालन पदाधिकारी का यह मंतव्य साक्ष्य आधारित नहीं है। इस आरोप के संदर्भ में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 15548 दिनांक 06.12.17 के कंडिका-5 का बिना अनुपालन किये ही जाँच प्रतिवेदन दिया गया है। श्री कुमार, तत्का0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

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मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के द्वारा निदेश देने के बावजूद दिनांक 17.08.17 को कटाव स्थल पर नहीं पहुँचना, बाढ़ में कार्य स्थल पर पहुँचने एवं स्वेच्छा से कटाव स्थल से चले जाने, मोबाईल बन्द कर देने एवं बिना अनुमति प्राप्त किये ही मेडिकल के आवेदन देकर अवकाश में प्रस्थान करने, बाढ़ संघर्षात्मक की प्रति घोर लापरवाही बरतने, कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने एवं स्वेच्छाचारिता बरतने से संबंधित है। (क) आरोप-1 :- संचालन पदाधिकारी ने आरोपी पदाधिकारी के अनुरोध पर इस आरोप के संदर्भ में उनका कथन कि निदेश के बावजूद कटाव स्थल पर नहीं पहुँचने एवं मोबाईल बन्द करने का प्रतिपरीक्षण तत्कालीन मुख्य अभियंता से दिनांक 27.11.17 को करायी गयी। ततपश्चात इनके बचाव बयान को अस्वीकार योग्य मानते हुए अभियंता प्रमुख के पत्रांक 2408 दिनांक 23.06.17 से पावर बैंक क्रय करने की अनुमति के साथ-साथ चेतावनी दी गयी कि किसी भी परिस्थति में मोबाईल बन्द न हो। बन्द होने की स्थिति में संबंधित पदाधिकारी दण्ड के भागी होने के आलोक में इस आरोप को प्रमाणित माना गया है। श्री कुमार द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में इस आरोप के संदर्भ में कोई नया तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। फलतः संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जाता है।

(ख) आरोप-2 :- जो स्वेच्छापूर्वक 2.30 बजे कटाव स्थल पर आने एवं स्वेच्छापूर्वक लगभग 3.0 बजे स्थल से चले जाने तथा मोबाईल बन्द कर लेने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने आरोपी के कथन कि आरोप साक्ष्य विहिन है को अस्वीकार करते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री कुमार द्वितीय कारण पृच्छा में आरोप-2 के संदर्भ में न तो कोई नया तथ्य दिया गया है। न ही स्थल पर कब पहुँचे एवं स्थल से कब गये से संबंधित कोई साक्ष्य ही दिया गया है। ऐसी स्थिति में इस आरोप को प्रमाणित माना जाता है।

(ग) आरोप-3 :- जो बिना अनुमति प्राप्त किये ही मेडिकल के आधार पर आवेदन देकर अवकाश में प्रस्थान करने एवं मोबाईल बन्द रहने के कारण आवेदन की अस्वीकृति की सूचना नहीं देने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने तत्कालीन मुख्य अभियंता से प्रतिपरीक्षण के दौरान श्री कुमार द्वारा आवेदन के साथ मेडिकल कागजात उपलब्ध नहीं कराये जाने तथा कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1 दिनांक 18.08.17 की प्रति (जो अवकाश के आवेदन को रदद्‌ किये जाने का) उपलब्ध कराये जाने तथा विभागीय पत्रांक 1981 दिनांक 15.05. 17 से अवकाश की स्वीकृति हेतु दिये गये निदेश के आलोक में इस आरोप को प्रमाणित माना गया है। श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में इस आरोप के संदर्भ में न तो कोई नया तथ्य दिया गया है न ही कोई साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है। मात्र संचालन पदाधिकारी के मंतव्य को उचित नहीं होना बताया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जाता है। समीक्षोपरांत उपरोक्त समीक्षा के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार के विरूद्ध तीनों आरोपों यथा बाढ़ जैसे आपात स्थिति में भी उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करते हुए कटाव स्थल पर नहीं पहुँचने, मोबाईल बन्द रखने तथा स्वेच्छापूर्वक अवकाश में प्रस्थान करने, कर्त्तव्य का निर्वहन में उदासीनता, लापरवाही एवं संवेदनहीनता तथा स्वेच्छाचारिता बरतने, कटाव स्थल पर नहीं पहुँचने, मोबाईल बन्द रखने का आरोप प्रमाणित होता है एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "आठ (8) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2143, दिनांक 25.09.18 द्वारा श्री कुमार को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2309 दिनांक 11.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-539, दिनांक 07.06.19 द्वारा श्री कुमार, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी कोशी नहर अवर प्रमंडल, दरभंगा को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"आठ (8) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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25 जून 2019

सं॰ 22/नि0सि0(दर0)16-02/2016-1268--श्री राजेन्द्र प्रसाद केसरी (आई0डी0-3531), पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल सं०-01, जयनगर द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के संबंध में विभागीय पत्रांक-7/परि0 11-1001/11/333 दिनांक 17.03.15 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री केसरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत अवर सचिव (प्रबंधन) के गै0स0प्रे0सं0-113 दिनांक 02.02.16 द्वारा अग्रेतर कार्रवाई हेतु सम्पूर्ण अभिलेख निगरानी शाखा को समर्पित किया गया।88 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 मामले के सम्यक समीक्षोपरांत श्री केसरी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प सहपठित ज्ञापांक-1789, दिनांक 06.10.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप सं0-01-कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल सं0-01, जयनगर शिविर-खजौली ने सूचित किया है कि अवर सचिव (वै0दा0नि0को0) वित्त विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2216 (21), दिनांक 26.07.10 द्वारा निर्गत वेतनपूर्जा इस कार्यालय को श्री केसरी, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कार्यालय को प्राप्त कराया गया तथा वही वेतनपूर्जा निबंधित डाक द्वारा इस कार्यालय को प्राप्त हुआ जो पटना के स्थान पर भगवानपुर (मुजफ्फरपुर) से भेजा गया था। दोनो वेतनपूर्जा एक दूसरे से भिन्न पाया गया। उनके द्वारा प्राप्त कराये गये वेतनपूर्जा में जबरन इन्दराज किया गया था तथा डाकवाले वेतनपूर्जा में उस इन्दराज का कोई जिक्र नहीं था। ऐसी स्थिति में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने पर श्री विन्देश्वरी लाल, तत्कालीन अवर सचिव (वै0दा0नि0को0) वित्त विभाग, बिहार, पटना को कार्यालय को प्राप्त दोनों वेतनपूर्जा सत्यापन हेतु इस कार्यालय के पत्रांक-743, दिनांक 16.08.2010 द्वारा प्रेषित किया गया। अवर सचिव (वै0दा0नि0को0) वित्त विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3070(21) दिनांक 16.09.10 द्वारा स्पष्ट रूप से उत्तर दिया गया कि पत्रांक-2216(21) दिनांक 26.07.10 उनके कार्यालय द्वारा निर्गत नहीं किया गया है।

प्रथम दृष्टया ही श्री केसरी द्वारा जाली निर्गत वेतनपूर्जा तथा उस पर भी गलत इन्दराज उनके द्वारा किया जाना एक गंभीर अपराध है जो सरासर जालसाजी है।

आरोप सं0-02-श्री राजेन्द्र प्रसाद केसरी, तत्कालीन सहायक अभियंता इस कार्यालय में दिनांक 27.11.2008 को योगदान दिया तथा दिनांक 18.02.2012 को विरमित हुए।

आरोप सं0-03-अवर सचिव (वै0दा0नि0को0) वित्त विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3217, दिनांक 06.10.2010 द्वारा श्री केसरी, सहायक अभियंता का एक नया वेतनपूर्जा निबंधित डाक से इस कार्यालय को प्राप्त हुआ जो साधारण डाक की जगह निबंधित डाक से आया था तथा वेतनपूर्जा का पत्र मधुबनी डाकघर द्वारा निबंधित था, जबकि वैयक्तिक दावा निर्धारण कोषांग पुराना सचिवालय के बैरक नं0-12 में अवस्थित डाकघर से निबंधित होना चाहिए था तथा उक्त वेतनपूर्जा में कहीं भी संचिका सं0 दर्ज नहीं था। जबकि वैयक्तिक दावा निर्धारण कोषांग द्वारा निर्गत वेतनपूर्जा में संचिका सं0 दर्ज रहना अपरिहार्य होता है।

प्रथम दृष्टया उक्त वेतनपूर्जा भी जालसाजी के तहत ही श्री केसरी के द्वारा भेजा गया जो सरासर जालसाजी का मामला बनता है। कार्यालय को भ्रम की स्थिति में बनाये रखकर श्री केसरी द्वारा सरकारी राशि के गबन का प्रयास किया गया है जो सरासर जघन्य अपराध है।

आरोप सं0-04-श्री केसरी, तत्कालीन सहायक अभियंता ने वैयक्तिक दावा निर्धारण कोषांग बिहार, पटना के पत्रांक-2216(21) दिनांक 26.07.2010 के विरूद्ध अपने स्तर से कम्प्युटरकृत वेतनपूर्जा तैयार कर उस पर अवर सचिव का जाली हस्ताक्षर कर तथा जाली पत्रांक-3217, दिनांक 06.10.2010 देकर दिनांक 01.04.2007 से दिनांक 01.07.2010 तक की अवधि का जाली वेतनपूर्जा का प्रेषण मधुबनी डाकघर द्वारा इसे निबंधित कराकर इस कार्यालय को भेजा गया। उक्त वेतनपूर्जा में 34,315/- रूपये की जगह 39985/- कर के कार्यालय को दिगभ्रमित किया जो सरासर भ्रामक एवं जालसाजी है।

इस प्रकार आपके द्वारा खुले आम सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए जालसाजी कर सरकारी राशि के गबन का प्रयास किया गया जिसके लिए आप दोषी है।

विभागीय कार्यवाही के कालक्रम में श्री केसरी दिनांक 28.02.18 को सेवानिवृत हो गये। मामले के सम्यक समीक्षोपरांत लिए गए निर्णय के आलोक में विभागीय आदेश सं0-38 सहपठित ज्ञापांक-997, दिनांक 04.05.2018 द्वारा श्री केसरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जिसमें श्री केसरी के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के संबंध में श्री केसरी से अभ्यावेदन प्राप्त करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-1007 दिनांक 08.05.2018 द्वारा श्री केसरी से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। श्री केसरी द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसमें निम्न बातों का उल्लेख किया गया :-

(i) द्वेष भावना से मेरे विरूद्ध किसी के द्वारा गलत पत्राचार में वेतनपूर्जा 2010 प्रेषित करने पर मुझे ही आरोपित करना न्यायोचित नहीं है।

(ii) आरोपित वेतनपूर्जा 2010 मेरे जानकारी में नहीं था। मुझे प्रमंडल से उपलब्ध वेतनपूर्जा का सत्यापन दावा कोषांग, वित्त विभाग के पत्रांक-3923, दिनांक 29.12.10 द्वारा प्राप्त होने पर मेरे द्वारा भुगतान भी नहीं किया गया है तथा इन्दराज की जानकारी भी मुझे नहीं थी। इन्दराज में कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं है और न वित्तीय लाभ/अनियमितता दिखाई पड़ रही हैं।89 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (iii) जाली वेतनपूर्जा सं0-3207, दिनांक 06.10.10 की जानकारी मुझे कभी भी नहीं दी गई है और न कभी मेरे द्वारा भुगतान का दावा किया गया है। परन्तु जाली वेतनपूर्जा में दर्ज मूल वेतन से अधिक या समतुल्य मूल वेतनों को दर्ज कर वेतनपूर्जा सं0-954, दिनांक 05.09.17 द्वारा जाली वेतनपूर्जा को सही प्रमाणित किया गया है। विभागीय समीक्षा -कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल सं0-01, जयनगर, शिविर खजौली द्वारा सूचित किया गया कि अवर सचिव, वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2216(21) दिनांक 26.07.2010 द्वारा निर्गत वेतनपूर्जा इस कार्यालय को श्री केसरी द्वारा प्राप्त कराया गया तथा वहीं वेतनपूर्जा निबंधित डाक द्वारा इस कार्यालय को प्राप्त हुआ। जो पटना के स्थान पर भगवानपुर (मुजफ्फरपुर) से भेजा गया था। दोनो वेतनपूर्जा एक दूसरे से भिन्न पाया गया। श्री केसरी द्वारा प्राप्त कराये गये वेतनपूर्जा में जबरन इन्दराज किया गया था तथा डाक वाले वेतनपूजा में उस इन्दराज का कोई जिक्र नहीं था। ऐसी स्थिति में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने पर श्री विन्देश्वरी लाल, तत्कालीन अवर सचिव, वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना ने अपने पत्रांक-3070(21) दिनांक 16.09.2010 द्वारा स्पष्ट रूप से उत्तर दिया कि पत्रांक-2216(21) दिनांक 26.07.10 उनके कार्यालय द्वारा निर्गत नहीं किया गया है। श्री केसरी का कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा आपराधिक षड़यंत्र के तहत जाली वेतनपूर्जा बनाकर प्रेषित किया गया, स्वीकारयोग्य नहीं है। क्योंकि पूर्व में किसी स्तर पर श्री केसरी द्वारा ऐसा नहीं कहा गया। इस प्रकार श्री केसरी का अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए आरोप को प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री केसरी के विरूद्ध "पाँच (5) प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच (5) वर्षों के लिए" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद केसरी, तत्कालीन सहायक अभियंता (आई0डी0-3531) पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल सं0-01, जयनगर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है -

"पाँच (5) प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच (5) वर्षों के लिए" अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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4 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(ल0सिं0)05-02/2018-1345--श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मधुबनी जिलान्तर्गत 50 अद्‌द उदवह सिंचाई योजनाओं के जीर्णोद्धार एवं पुनस्र्थापन कार्य में बरती गई अनियमितता संबंधी आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-2582, दिनांक 28.6.17 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा आरोप पत्र में वर्णित दोनों आरोपों को प्रमाणित पाया गया। लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा समीक्षोपरांत लिए गए निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होकर द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

लघु जल संसाधन विभाग द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा के क्रम में यह ज्ञात होने पर कि आरोपित पदाधिकारी का पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग है, दण्ड के बिन्दु पर निर्णय लेने हेतु सभी संगत कागजात, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को प्रेषित किया गया।

श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर एवं अन्य संगत अभिलेखों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत निम्नलिखित तथ्य पाए गए :- आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान :- (i) सर्च टैंक के प्लेट के मोटाई की जाँच अधिष्ठान के दौरान ही संभव है। तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक-2347, दिनांक 21.12.83 के अनुसार सभी प्रकार की मापी दर्ज कराया है वैसे कार्याे की मापी की जाँच बाद में नहीं की जा सकती है एवं PWD Code के कंडिका 231बी0 अनुरूप मापी दर्ज की जायेगी। इसी क्रम में सिंचाई विभाग के पत्रांक-975 दिनांक 21.02.83 की कंडिका-3 अंकित है कि जिस कार्य की मापी बाद में करना कठिन है या उसकी मापी बाद नहीं की जा सकती है इस संबंध में कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता की जिम्मेवारी है कि समय पर मापी कार्यपालक अभियंता को प्रस्तुत करे तथा कार्यपालक अभियंता का दायित्व है कि उक्त मापी की जाँच अवश्य करें। इस मामले में भी Surge Tank की मोटाई की जाँच की जवाबदेही तृतीय चालू विपत्रों को पारित करने वाले कार्यपालक अभियंता की ही है। श्री अमरेन्द्र सिंह, सहायक अभियंता द्वारा उनके सेवानिवृति के पश्चात परिवाद पत्र दिनांक 30.07.14 का है। अतः संचालन पदाधिकारी का कहना कि परिवाद पत्र मार्च 2013 में प्राप्त हुआ था, कतई संभव नहीं है, जिसकी पुष्टि जाँच प्रतिवेदन से होती है।

PWD Code के कंडिका 275(A) वित्त नियमावली के नियम 302 एवं 303 एवं PWD Code के कंडिका 227 (A) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि सर्च टैंक के प्लेट की मुटाई में कमी होने के कारण अधिक भुगतान की90 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 राशि 3.54लाख तथा पुनरीक्षित प्राक्कलन के अनुसार अधिक भुगतेय राशि 89.71 लाख की कटौती अंतिम विपत्र से की जा सकती है।

सर्च टैंक के प्लेट की मोटाई के संबंध में कहा गया है कि जाँच करने पर 3.4mm पायी गयी है। जबकि सर्च टैंक के निर्माण हेतु जो प्रावधानित रािश है उसमें 3mm प्लेट से ही बनाने का प्रावधान था। जाँच पदाधिकारी द्वारा मात्र परिवाद में अंकित तथ्यों को सही मानकर आरोप लगाया गया।

उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा भी मात्र 8mm तथा 3mm की मोटाई की अन्तर के आकलन के आधार पर प्रति सर्च टैंक अधिक भुगतान की राशि का आकलन कर दिया गया है एवं 353751/- रूपये का अधिक भुगतान होना बताया गया है।

वस्तुतः योजना प्राक्कलन में एक सर्च टैक की गणना राशि 62700 है तथा इसका विस्तृत प्राक्कलन के अवलोकन से स्थापित है कि वस्तुतः 3mm के MS Plate मुटाई वाले से सर्च टैंक की लागत राशि 62700 रू0 है। पुनरीक्षित प्राक्कलन में यह राशि 122745 है जिसमें भी 3mm मुटाई वाले सर्च टैंक के अधिष्ठापन का प्रावधान है। सर्च टैंक की जो विशिष्टि दी गयी है उसमें MS Plate के मुटाई की कोई चर्चा नहीं है अतः यह आरोप निर्मूल है।

(ii) श्री श्रीवास्तव द्वारा पुनरीक्षित प्राक्कलन के समर्पण के संबंध में कहा गया है कि प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति तथा निविदा स्वीकृति के अन्तराल में कार्य स्थलों का गहन निरीक्षण किया गया। उक्त योजनाओं के कार्यान्वयन के लिये आवश्यक सामग्री एवं उपकरण की आवश्यकता का आकलन किया गया।

पूर्ण स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार 41 अद्‌द योजनाओं का कार्य प्रारंभ हुआ परन्तु 9 अद्‌द योजनाओं का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। उद्‌वह सिंचाई योजनाओं के भूगर्भीय नाला से जल निकासी हेतु 18 स्पॉट चैम्बर खेतों में बनाया गया था, परन्तु किसानों द्वारा जमीन नहीं दिये जाने के कारण विकल्प के रूप में स्पौट चैम्बर के स्थान पर ह्‌यूम पाईप से MS Pipe निकालकर उस पर ही ढक्कन एवं चेन का प्रावधान किया गया। स्वीकृत प्राक्कलन में MS Pipe, PSC Pole रैबिट कन्डक्टर की प्रावधानित कम मात्रा को आवश्कतानुसार बढ़ाया गया। ह्‌यूम पाईप, NTP बाल्ब, M S Surge Tank, PSC Pole, MST नट बोल्ट मोटर, 63 KV ट्रान्सफर के दर में वृद्धि हो गयी थी। फलतः अद्यतन दर किया गया। डीजल मजदूरी दर में वृद्धि के कारण भी योजनाओं के व्यय में हुई वृद्धि को प्रावधान किया गया। इस क्रम में बिहार वित्त नियमावली के नियम 300 का अनुसरण में ही पुनरीक्षित प्राक्कलित तैयार कराया गया तथा संवेदक के भुगतान हेतु नये दरों की स्वीकृति की अनुशंसा हेतु PWD Code के नियम 182 (A) का सहारा लिया गया। मूल एकरारनामा में स्वीकृत दर/प्राक्कलन दर से 1.11 प्रतिशत कम थी। अतः इन मदों के लिये अनुसूचित दर से 1.11 प्रतिशत कम पर पुनरीक्षित प्राक्कलन की अनुशंसा की गयी। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति की प्रत्याशा में कार्य कराये जाने के संबंध में बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता में प्रावधानित वित्त नियमावली के नियम 302 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस योजना हेतु विभाग से आवंटन प्राप्त होता रहा है। एक ओर तो एकरारनामा रद्‌द करने की अपेक्षा किया जाता है, वही दूसरी ओर एकरारनामा के अधीन कार्य करने हेतु वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में राशि आवंटित की जाती है। यह आरोप विरोधाभाषी है। अतएव पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति की प्रत्याशा में कार्य रोकना नियमानुकूल नहीं था।

बिहार वित्त नियमावली के नियम 303 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 9वें चालू विपत्र तक विपत्रों से सुरक्षित जमा के रूप में कुल राशि 101303529 का 8 प्रतिशत 8104283 रूपये एवं प्रारम्भिक सुरक्षित जमा राशि 28.0 लाख सहित कुल 10964282/- रूपये जमा है उड़नदस्ता के अनुसार सर्च टैंक पर अधिक भुगतान राशि 3,53,751/- तथा पुनरीक्षित प्राक्कलन के अनुसार भुगतित राशि 94,92,258/- सहित कुल 9846009/- रूप मात्र में से 10964282-9492258=1118273 रूपये अधिक है। अतः संवेदक को अनुचित लाभ देने या फिर सरकार को किसी क्षति के होने का कोई प्रश्न नहीं उठता है। क्योंकि अंतिम विपत्र से समायोजन किया जा सकता है।

वित्त विभाग के संकल्प सं॰ 1721 दि॰ 09.04.91 को किये गये प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पुनरीक्षित प्राक्कलन का प्रस्तुतीकरण सर्वथा नियमित कार्रवाई है चूँकि व्यय निर्धारित बेंच मार्क 954.56 लाख से 20 प्रतिशत अधिक अर्थात्‌ 1145.472 लाख की सीमा में है। अतः पुनरीक्षित प्राक्कलन पर प्रशासनिक स्वीकृति नहीं ली गयी है। महालेखाकार के लेखा पदाधिकारी जो प्रमंडल के वित्तीय सलाहकार होते है, की टिप्पणी कतई मान्य नहीं है, क्योंकि बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के नियम के अनुसार जिस प्रस्ताव पर लेखापाल कार्यपालक अभियंता के निर्णय से सहमत नहीं है। उन पर उन्हें अपनी आपत्ति प्रपत्र 60 में दर्ज करते हुए इसे मासिक लेखा के साथ महालेखाकार को भेजा जाना चाहिये था। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। यहाँ तक कि पुनरीक्षित एकरारनामा के पश्चात पर भुगतान के सभी विपत्रों एवं चेको पर उनके द्वारा हस्ताक्षर भी किया है। अतः यह आरोप किसी भी दृष्टि से सही नहीं है।

श्री श्रीवास्तव द्वारा अन्त में कई न्याय निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर प्रस्तुत करने का आरोप प्रमाणित नहीं है। उनके किसी भी कार्रवाई से न तो कदाचार और न ही वित्तीय क्षति का कोई बिन्दु अन्तर्लीन है।91 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 समीक्षा :- आरोप-1 :- जो आलोच्य योजना के तहत पंचम चालू विपत्र से 8वें चालू विपत्र तक कुल 97856256/- रूपये का भुगतान दिनांक 28.12.13 तक किया गया जिसमेें सर्च टैंक अधिष्ठापन मद में पूर्व में ही ज्यादा भुगतान होने के बावजूद उसकी कटौती नहीं करने कारण कुल 353751/- रूपये की हानि होने तथा मापी जाँच नहीं करने से संबंधित है।

जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा सर्च टैंक के अधिष्ठापन कार्य में अनियमित भुगतान की राशि की गणना एकरारनामा के अनुसार 8mm thick M S Plate से प्रावधानित सर्च टैंक निर्माण को मानते हुए के जगह पर स्थल निरीक्षण में पाये गये 3mm thicks MS Plate से निर्मित सर्च टैंक के आधार पर किया गया है तथा इस योजना के तहत श्रीवास्तव के द्वारा पंचम चालू विपत्र से 8वें चालू विपत्र तक कुल 41 अद्‌द सर्च टैंक का भुगतान किये जाने के आलोक में 353751.00 रूपये का अधिक भुगतान की गणना की गयी है। स्थलीय जाँच में 3mm thick MS Plate का सर्च टैंक का निर्माण किया हुआ पाया गया है। जाँच प्रतिवेदन में कहा गया है कि एकरारनामा के अनुसार 8mm प्लेट की मोटाई के प्रत्येक सर्च टैंक का दर 62700/- रूपये प्रावधानित है। 3mm प्लेट की मोटाई के प्रत्येक सर्च टैंक का दर 53975/- रूपये आता है।

आरोपी द्वारा उड़नदस्ता के उक्त तथ्य कि एकरारनामा के अनुसार सर्च टैंक 8mm मोटाई के प्लेट से निर्माण करने का प्रावधान है को सही नहीं बताया गया है तथा उनके द्वारा सर्च टैंक के दर विश्लेषण (जिसमें प्रति सर्च टैंक के निर्माण से लेकर अधिष्ठापन तक की राशि 64832/- रूपये है) की प्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि सर्च टैंक का निर्माण 3mm मोटाई के M S Plate से करने का प्रावधान है एवं उसी के अनुरूप 3mm मोटाई के प्लेट से सर्च टैंक का निर्माण किया गया है। मात्र एकरारनामा एवं प्राक्कलन के मद सं॰ 42 में 8mm thick plate का उल्लेख नहीं है बल्कि उसमें भूलवश 8mm dia अंकित है। किसी प्लेट की मोटाई dia में नहीं हो सकती है। सर्च टैंक के अधिष्ठापन के दर विश्लेषण के अवलोकन से स्पष्ट है कि सर्च टैंक के निर्माण में 3mm thick plate का प्रावधान किया गया है जिसकी पुष्टि उक्त विश्लेषण में लिये गये 23.5 Kg/M2 प्लेट के वजन से होती है। उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा भी 3mm thick plate से सर्च टैंक के निर्माण की गणना में भी 23.50 Kg./M2 प्लेट का वजन लिया गया है।

परन्तु आरोपी द्वारा उपलब्ध कराये गये दर विश्लेषण के अनुसार सर्च टैंंक के अधिष्ठापन हेतु प्रति सर्च टैंक की राशि 64832 प्रति यूनिट के आधार पर कुल 3135000/- रूपये प्रावधानित है। जो मामले को संदिग्ध बनाता है। कार्य मद सं॰ 42 में Supplying fitting and fixing of 900mm dia, 1500mm high MS Surge thank made of 8mm dia 3 nos. of outlet too nos. inculding all taxes and carriage of wake size अंकित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन तथा आरोपी पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उपलब्ध कराये गये बचाव बयान तथा उस पर संबंधित विभाग द्वारा दिये गये मंतव्य के समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में श्री श्रीवास्तव तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप सं॰-1 को प्रमाणित माना जा सकता है।

आरोप-2 :- आलोच्य कार्य के कार्यान्वयन के निर्धारित तिथि दिनांक 31.03.13 तक होने के बावजूद कार्य का न तो Resign किया गया, न ही संवेदक के विरूद्ध कारवाई की गयी। उल्टे इनके द्वारा दिनांक 03.10.13 को एकरारित कार्य मद के दर को बढ़ाकर कुल 1133.55 लाख का पुनरीक्षित प्राक्कलन समर्पित किया गया तथा गलत ढंग से पूरक एकरारनामा कर एवं दर से बढ़ोत्तरी कर संवेदक को कुल 16690979/- रूपये का लाभ दिया गया। जबकि दिनांक 18.11.13 को पूरक एकरारनामा के पूर्व प्रमंडलीय लेखा पाल द्वारा संचिका में अंकित टिप्पणी कि विभिन्न दरों में संशोधित किया गया है जो SBD के कंडिका का विरोधाभाष है। उक्त सुझाव का पालन नहीं करने के कारण सरकार को वित्तीय क्षति होने से संबंधित है।

श्री श्रीवास्तव तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर प्रस्तुत करने के संबंध में लगभग वही तथ्य दिया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया। जिसका विश्लेषण संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में करते हुए विभागीय अभिमत से सहमत होते हुए अस्वीकार योग्य माना गया है।

इस योजना के निर्धारित तिथि दिनांक 31.03.13 के पश्चात Work Resign नहीं करने के संबंध में कहा गया है कि इस योजना हेतु विभाग द्वारा आवंटन वर्ष 2014-15 तक उपलब्ध कराया जाता रहा है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि किसी भी कार्य के कार्यान्वयन हेतु क्षेत्रीय पदाधिकारी से आवंटन के अधियाचना के विरूद्ध ही आवंटन उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका दायित्व था कि दिनांक 31.03.13 के बाद यदि उसी संवेदक से कार्य कराना आवश्यक था, तो वस्तुस्थिति की जानकारी विभाग को देते हुए दिशा निदेश की माँग करते एवं विभागीय दिशा निदेश के आलोक में ही कार्यो का पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर अग्रेत्तर कारवाई करते। परन्तु ऐसा नहीं कर मनमाने ढंग से पुनरीक्षित प्राक्कलन में एकरारित कार्य मद के दर में बढ़ोत्तरी कर पूरक एकरारनामा करते हुए अनियमित ढंग से भुगतान की कार्रवाई किया जाना परिलक्षित होता है। उक्त अनियमित कृत के कारण उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा कुल 16690978 रूपये का अधिकाई भुगतान के लिये श्री श्रीवास्तव को जिम्मेवार माना गया है।92 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 प्रमंडलीय लेखापाल द्वारा पूरक एकरारनामा के पूर्व संचिका में की गयी टिप्पणी कि मुख्य अभियंता के द्वारा 50 अदद्‌ उद्‌वह ंिसंचाई योजना के अन्तर्गत पूरक एकरारनामा करने हेतु दिये गये निदेश SBD के कंडिका का विरोधाभाषी है, को अनदेखी कर पूरक एकरारनामा करने के संबंध में कहा गया है कि PWD Code के अनुसार जिस प्रस्ताव पर लेखापाल, कार्यपालक अभियंता के निर्णय से सहमत नहीं है। उनपर उन्हें अपनी आपत्ति प्रपत्र 60 में दर्ज करते हुए मासिक लेखा के साथ महालखाकार को भेजना चाहिये था। परन्तु लेखापाल द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया। यहाँ तक कि उनके द्वारा भुगतान के सभी विपत्र एवं चेक पर हस्ताक्षर भी किया गया। श्री श्रीवास्तव द्वारा उपरोक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव उनका यह कथन स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों को संचालन पदाधिकारी द्वारा भी स्वीकार योग्य नहीं माना गया है।

उपर्युक्त समीक्षा में वर्णित तथ्यों तथा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध दोनों आरोप सं॰ 1 एवं 2 यथा कराये गये कार्यो की मापी की जाँँच नहीं करने तथा सर्च टैंक के अधिष्ठापन में पूर्व में किये गये अधिक भुगतान की कटौती बाद के विपत्र यथा 5वें चालू विपत्र से 8th चालू विपत्र में नहीं करने के कारण कुल 353751/- रूपये का अनियमित भुगतान होने तथा आलोच्य कार्य निर्धारित तिथि तक सम्पन्न नहीं होने पर कार्य को Resign नहीं कर उल्टे संवेदक को लाभ पहुँचाने के लिये गलत ढंग से पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर मूल एकरारनामा में प्रावधानित कार्य मद के दर बढ़ाकर पूरक एकरारनामा कर कुल 166.90979 लाख अनियमित भुगतान कर सरकारी राशि की क्षति पहुँचाने का आरोप प्रमाणित पाया गया है।

उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

"शत प्रतिशत पेंशन की स्थायी कटौती"। उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मंत्री का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है। "शत प्रतिशत पेंशन की स्थायी कटौती"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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4 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2016-1346--श्री राम विनय शर्मा (आई0डी0-3612) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रबंधन, वाल्मीकिनगर के उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान गंडक बराज में दिनांक 21. 07.2016 के शाम से दिनांक 22.07.2016 के सुबह तक गंडक नदी के जलश्राव में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण गंडक बराज के गेट संख्या-33 क्षतिग्रस्त हो जाने एवं पूर्वी मुख्य नहर में तीव्र गति से पानी प्रवेश करने तथा 6.00 RD पर नहर बाँध ओभरटॉप करने एवं जिसके कारण त्रिवेणी पावर हाउस के यंत्रो की क्षति तथा कॉलोनी के घरों की क्षति होने में बरती गई अनियमितता की जाँच मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर, मुख्य अभियंता, (याँत्रिक) एवं जिला पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण के द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त तीनों जाँच प्रतिवेदनाें के समीक्षोपरांत श्री शर्मा के विरूद्ध प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1661, दिनांक 03.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1703, दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप ः- मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01 (बराज) कैम्प, दिनांक 23.07.16 में स्पष्ट उल्लेख है कि मुख्य अभियंता द्वारा आपको अनेको बार दूरभाष एवं पत्रांक 297 दिनांक 18.07.16 से आपात स्थिति से निपटने के लिये पर्याप्त संख्या में मजदूर रखने का निदेश दिया गया था एवं विशेष रूप से हिदायत दी गई थी कि गंडक बराज के गेटों एवं बाँधाें की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाय। परन्तु आपके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण गेटों को कम से कम समय में उठाया जाना संभव नहीं हुआ। जिसके कारण बराज का गेट सं॰ 33 क्षतिग्रस्त हो गया। उक्त से स्पष्ट है कि आपके द्वारा दायित्वों का निर्वहन में घोर उपेक्षा की गयी जिससे एक विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी एवं जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं। (2) श्री संजय कुमार तिवारी, कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिंटरिंग प्रमंडल संख्या-5, (प्रतिनियुक्त बगहा स्थल) द्वारा दिनांक 22.07.16 को सुबह 6 बजे गंडक नदी का जलश्राव अत्यधिक बढ जाने एवं इससे हुई क्षति की सूचना देने हेतु आपको जगाने का प्रयास किया गया फिर भी आप न तो जागे एवं न हीं आपके द्वारा कोई प्रत्युत्तर दिया गया। ज्ञातव्य है कि घटना की अवधि में गंडक बराज से 2.00लाख घनसेक से अधिक का जलश्राव प्रवाहित हो रहा था एवं जिस अवधि में आपसे सामान्य से अधिक कार्य सजगता की अपेक्षा की गयी, उस विषम परिस्थिति में भी आप अपने कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाह रहते हुए सोये रहे। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01 (बराज) कैम्प, दिनांक 23.07.16 से स्पष्ट होता है कि निदेश देने के बावजूद भी (पत्रांक-290, दिनांक 15.07.2016, 338, दिनांक 21.07.16) आपके द्वारा नेपाली सिम क्रय नहीं किया गया। इससे परिलक्षित होता है कि आपके द्वारा अपने उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना की गई है। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं।93 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (3) दिनांक 22.07.16 को गेट के संचालन में हुए गंभीर चूक से यह स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा समय समय पर निरीक्षी पदाधिकारी के रूप में कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं किया जाता रहा। और न ही अधीनस्थों के कार्यकलाप पर नियंत्रण ही रखा गया। आपकी कर्त्तव्य उपेक्षा के कारण एक विनाशकारी र्दुघटना की स्थिति उत्पन्न हुई। जो आपकी पूर्ण अक्षमता को प्रमाणित करता है एवं जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी है। (4) आपके द्वारा कार्य पर्यवेक्षण को नजर अंदाज किये जाने के कारण गंडक बराज वाल्मीकिनगर का एक गेट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया। गेटिंग व्यवस्था के अन्य अव्यव भी काफी क्षतिग्रस्त हुए जिसकी प्रतिपूर्ति में एक बहुत बड़ी सरकारी राशि का व्यय होगा। यह व्यय एक Avoidable Expenditure था, जिसके लिये आप दोषी हैं।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-47, दिनांक 27.02.2017 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोप यथा आरोप सं0-01, 02, 03 एवं 04 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1943, दिनांक 07.11.17 द्वारा श्री शर्मा, तत0 कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

उक्त के आलोक में श्री शर्मा, तत्का0 कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 06.12.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

विभागीय अभिमत में उन्हें दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने, उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने के लिये दोषी माना गया है तथा क्षतिग्रस्त गेट के मरम्मति पर होने वाले व्यय के लिये दोषी नहीं माना गया है। संचालन पदाधिकारी ने विभागीय मंतव्य को नहीं मानते हुए गठित चारों आरोपों को सही होने का मंतव्य दिया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक के नियमावली 2005 में विहित रिति के बिल्कुल ही विपरीत है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन का बिन्दुवार उत्तर निम्नवत्‌ है :-

(1) आलोच्य गेट का रख-रखाव, मरम्मति, पुनस्र्थापन, निर्माण तथा संचालन याँत्रिक प्रभाग के जिम्मे था। चार वर्ष पूर्व से ही प्रमंडल द्वारा बराज गेटों के संचालन हेतु मजदूर नहीं रखे जा रहे थे। नदी में जलश्राव अत्याधिक वृद्धि के कारण ससमय गेटों को खोलना एवं अन्य याँत्रिक कार्य कराने में इनकी कोई भूमिका नहीं थी। अतः उन्हें जिम्मेवार नहीं माना जा सकता है। जहाँ तक गेट सं॰-33 के टूटने का प्रश्न है, Expert Review Committee द्वारा अनुशंसित Under Sluice Gate 1 से 6, 31 से 36 का S.S. Plate का Repair नहीं हो पाया था। यह याँत्रिक प्रभाग का कार्य था। कमिटी गेट सं॰ 7, 8, 9, 21 एवं 23 को Buckled पाया था। जब गेट सं॰ 33 का S.S. Plate क्षतिग्रस्त था एवं उक्त गेट में पेड़ फँस जाने के कारण गेट को शीघ्र उठाव नहीं हो सका एवं क्षतिग्रस्त हो गया। मैं अपने पत्रांक 3 दिनांक 09.06.16 से गेट सं॰ 31 से 33 की खराबी के ओर ध्यान याँत्रिक प्रभाग को आकृष्ट किया था। इस तरह गेट टूटने में उनकी जिम्मेवारी नहीं बनती है। (2) गेटों का संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग की थी। उनके द्वारा संचालन एवं सहयोग हेतु कोई पत्र या सुझाव नहीं दिया गया था। इस प्रकार गेटों के संचालन एवं सुरक्षा में उनके द्वारा लापरवाही नहीं बरती गयी है। जाँच पदाधिकारी द्वारा भी गेट टूटने एवं गेट के संचालन के लिये याँत्रिक प्रभाग को जिम्मेवार माना है। (3) दिनांक 21.07.16 के मध्य रात्रि के बाद ही जलस्तर में तीव्र गति से वृद्धि होने की सूचना सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 22.07.16 को सुबह 5ः00 बजे दी गयी। उसके पश्चात सभी आवश्यक कारवाई की गयी। (4) जेनेरेटर में तेल खत्म होने पर सुरक्षित भंडार में रखे गये डीजल से कुछ ही मिनट में तेल डाला गया। यह आरोप तथ्य आधारित नहीं है। (5़) वे शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर में पदस्थापित थे परन्तु बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा के कार्यपालक अभियंता एवं अंचल में तकनीकी सलाहकार के प्रभार में भी था एवं क्षेत्राधीन दोनों प्रमंडलों के क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु अनवरत भ्रमण करता रहता था।

(6) बराज गेट टूटना प्रमाणित है परन्तु यह गेट याँत्रिक प्रमंडल की निगरानी में टूटा है। गेट के टूटने में मेरी कोई भूमिका नहीं है। दिनांक 21.07.16 को पूरी तरह अपने कार्य स्थल वाल्मीकिनगर एवं बगहा के कार्य स्थलों का निरीक्षण किया है। अतः यह आरोप मनगढ़ंत है। मेरे द्वारा कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है।

(7) जिलाधिकारी बेतिया के जाँच प्रतिवेदन में भी गेट टूटने तथा गेट के संचालन के लिए याँत्रिक प्रमंडल को जिम्मेवारी माना गया है।

(8) बराज गेट टूटने को प्रमाणित माना गया है, परन्तु यह गेट याँत्रिक प्रमंडल के निगरानी में टूटा है यह भी प्रमाणित है। गेट के टूटने में मेरी कोई भूमिका नहीं है यह प्रमाणित होता है दिनांक 21.07.2016 को मैं पूरी तरफ से अपने कार्यस्थल वाल्मीकिनगर एवं बगहा कार्यस्थलों का निरीक्षण किया। इसलिए कार्यस्थल से नदारज संबंधी आरोप पूर्णतः मनगंढत है मेरे द्वारा कर्त्तव्य निर्वहन में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। मेरे द्वारा बाढ अवधि में न्यूनतम से न्यूनतम (3 से 4 घंटा) सोने की अवधि थी। इसलिए कार्य के बजाय सोने का आरोप लगाना अधारहीन है। बाढ़ के समय दो-दो प्रमंडलों को सुनिश्चित रखना ही अपने आप में बहुत ही मेहनत एवं भाग-दौड़ वाला काम है। लेकिन गेट टूटने के लिए जिम्मेवार मानना तथ्यों पर आधारित नहीं है उपरोक्त बिन्दुओं से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्ध लगाये गये लेस मात्र भी प्रमाणित नहीं होते हैं। अतः सभी आरोपों से मुक्त करने की कृपा की जाय।94 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 श्री शर्मा, तत्का0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गयेः- श्री शर्मा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में लगभग वही तथ्यों को संक्षिप्त रूप में वर्णन किया गया है। जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। आरोपी द्वारा अपने कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया है। श्री शर्मा के द्वारा विभागीय कार्यवाही के दरम्यान दिये गये बचाव बयान की समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा की गयी जो निम्नवत है :- (1) इस मामले में घटना यही है कि वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज में दिनांक 21.07.2016 के शाम से 22. 07.2016 के सुबह तक गंडक नदी के जलश्राव में अत्याधिक वृद्धि के कारण गंडक बराज का गेट सं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया। पानी तीव्र गति से ओभरटॉप कर त्रिवेणी पावर हाउस के यंत्रों की क्षति एवं कॉलोनी के घंटो में क्षति हुई। अभियंतागण की लापरवाही के कारण विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। (2) आरोपी अभियंता पर मुख्य आरोप है कि मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के द्वारा अनेको बार दूरभाष पर एवं पत्रांक-297, दिनांक 18.07.2016 द्वारा आपात स्थिति से निपटने के लिये पर्याप्त संख्या में मजदूर रखने का निर्देश दिया गया। किन्तु इस निर्देश का पालन नहीं हुआ। गेट समुचित रख-रखाव वे देखभाल नहीं हुआ गेट टूट गया। दिनांक 22.07.16 के सुबह में उन्हें घर जगाने गया तो नहीं उठें। कार्यस्थल का सम्यक निरीक्षण नहीं किये जाने के कारण गेट संचालन में गंभीर चूक हुई। अब क्षतिग्रस्त गेट को बनाने जो बनाने में व्यय होगा, वह Avoidable Expenditure हुआ। (3) आरोपी अभियंता ने बचाव बयान दिया है, उसमें से उन्होंने गेट संचालन कार्य के लिए मुख्य अभियंता (याँत्रिक), मुजफ्फरपुर को जिम्मेवार माना है। इनके अनुसार इन्होंने मुख्य अभियंता (याँत्रिक), मुजफ्फरपुर एवं वरीय अधिकारी को गेटों के Machanically संचालित करने की विवशता की सूचना दी थी। SCADA System Disfunction था। एजेंसी PI System Pvt. Ltd. पर कार्रवाई करने एवं सभी गेटों का संचालन SCADA System से सुनिश्चित करने हेतु मुख्य अभियंता (याँत्रिक) मुजफ्फरपुर को लिखा गया था। (4) संक्षेप में गेट टूटने के लिए याँत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर एवं संबंधित एजेंसी को मानते हैं। (5) जबकि कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक), सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर श्री सुभाष कुमार वर्मा (जो इस मामले में आरोपी भी हैं) ने अपने बचाव बयान में कहा है कि दिनांक 15.06.2016 तक वाल्मीकिनगर में कैम्प कर 52 गेट को स्काडा से चालू कराया। 52 गेट संचालित था। मात्र 12 एवं 19 का इन्डोर खराब होने के कारण इसे बदलने हेतु पाई सिस्टम को निर्देश दिया। (6) किन्तु यहाँ प्रश्नगत विभागीय कार्यवाही में आरोपी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित मुख्य आरोप है कि मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के निर्देश के बावजूद गेट की सुरक्षा के लिए पर्याप्त मजदूर नहीं रखें गये तथा दिनांक 22.07.2016 को घर में जगाने का प्रयास करने पर भी नहीं जगे। (7) गेट का रख-रखाव पूर्व से नहीं हो रहा था, इसके लिए संबंधित संवेदक और याँत्रिक प्रमंडल के अभियंता स्थिति स्पष्ट करेंगे कि बाढ़ के समय आरोपी अभियंता की जो जिम्मेवारी थी, उसका उन्होंने निर्वहण नहीं किया। (8) जिलाधिकारी, बेतिया के रिपोर्ट के अनुसार दिनांक 21.07.2016 को रात्रिकालीन पाली (10ः00 बजे रात्रि से सुबह 06ः00 बजे) में गंडक बराज कंट्रोल रूम में रोस्टर के अनुसार (1) सुबोध प्रसाद शर्मा, सहायक अभियंता, सिविल (2) श्री रंजन कुमार, कनीय अभियंता, सिविल (3) श्री अभिमन्यु शर्मा, निम्नवर्गीय लेखा लिपिक (4) श्री ओम प्रकाश महतो, कार्यालय परिचारी (5) श्री शत्रुधन राम, कार्यालय परिचारी तथा पाई सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड एस0के0 नगर, पटना के द्वारा नियुक्त संविदा कर्मी (6) श्री मनीष कुमार एवं (7) श्री मनीष तिवारी की ड्‌युटी थी। परंतु जाँच के क्रम में पाया गया कि पाई सिस्टम, प्राईवेट लिमिटेड के दोनों कर्मी अपनी ड्‌युटी के समय सोये हुए थे, सहायक अभियंता उपर वाले कमरे में सोये हुए थे तथा शेष सभी कर्मी एवं पदाधिकारी अपनी ड्‌युटी से अनुपस्थित थे। ड्‌युटी से अनुपस्थित इन कर्मियों द्वारा 10ः00 बजे रात्रि के बाद Log Book पर पानी का नदी से निस्सरण की मात्रा का पाठ्‌यांक भी नोट नहीं किया गया था, जिससे यह पता चलता है कि अधिक जलश्राव होने के कारण तिरहुत कैनाल का फाटक बंद कर नदी का बंद फाटक खोला गया। 01ः00 बजे रात्रि के बाद पानी का श्राव इतना बढ़ गया कि बराज के गिरे हुए फाटक के उपर से पानी बहने लगा। (9) बाढ़ के समय इन्हें घर में सोने या आराम करने की जिम्मेवारी नहीं दी गई थी। प्रपत्र-'क' में गठित आरोप, आरोपी के बचाव बयान एवं विभागीय समीक्षा एवं अभिमत से स्पष्ट है कि दिनांक 21.07.16 को ही उक्त बराज गेट पर पानी का दबाव काफी बढ गया। आरोपी अभियंता को पूरी सजगता बरतनी चाहिए। दिनांक 21.07.2016 को यदि स्थल का निरीक्षण करते तो उसी दिन वहाँ की स्थिति के बारे में जिलाधिकारी सहित सभी वरीय पदाधिकारी को सूचित करते, किन्तु दिनांक 21.07.2016 को उनलोगों के द्वारा स्थल पर उपस्थित रहने एवं उचित कार्रवाई करने का कोई प्रमाण नहीं। (10) बराज गेट पर पर्याप्त मजदूर रखने का निर्देश था। यहाँ जो स्थिति हो रही है कि जेनरेटर में तेल नहीं था, जिस कारण गेट को मशीन के बदले Manually कुछ मजदूर से उठाने का प्रयास हुआ। इससे विलंब हुआ। गेट पर दबाव बढा और गेट टूट गया। आपात स्थिति में भी बराज गेट पर मजदूर नहीं रखने और जेनरेटर में तेल नहीं रहने से सिविल के अभियंतागण की घोर लापरवाही है। (11) बाढ के समय इस तरह के कार्य की अपेक्षा वरीय पदाधिकारी से नहीं की जाती है। बाढ़ का समय आपात काल की स्थिति है। थोडी से लापरवाही से जानमाल की बडी क्षति हो सकती है। इस समय 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है।95 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (12) बराज गेट टूट गया यह प्रमाणित है। दिनांक 21.07.2016 को आरोपी अभियंता कार्यस्थल से नदारद थे, यह भी प्रमाणित है। गेट टूटने पर दौड-भाग करते है। आरोपी अभियंता ने कर्त्तव्य निर्वहण में घोर लापरवाही बरती है। बाढ के समय इनके लिए ड्‌युटी के बजाय सोना ज्यादा महत्वपूर्ण था। अतएव गेट टूटने के लिए ये जिम्मेवार माने जाते हैं। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा गठित आरोप से संबंधित साक्ष्य, आरोपी के बचाव बयान तथा विभागीय अभिमत के सम्यक समीक्षोपरान्त श्री शर्मा के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को पूर्णतः प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है चूँकि श्री शर्मा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में आरोप से संदर्भित न तो कोई नया तथ्य ही दिया गया है न ही कोई नया साक्ष्य ही दिया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं विभागीय अभिमत के समय समीक्षित टिप्पणी के आलोक में श्री शर्मा को उच्चाधिकारी के निदेश देने के बावजूद आपात स्थिति से निपटने तथा घटित घटना का ससमय सूचना देने की ठोस व्यवस्था नहीं कर दायित्वों में लापरवाही बरतने के कारण गेट टूटने जैसी घटित घटना के लिये दोषी माना जाता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को उच्चाधिकारी के आदेश देने के बावजूद आपात स्थिति से निपटने एवं ससमय सूचना देने हेतु ठोस व्यवस्था नहीं कर दायित्व के निर्वहन में लापरवाही बरतने के कारण गेट टूटने जैसी घटना से संबंधित प्रमाणित आरोपों के लिए श्री शर्मा को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "तीन वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1911, दिनांक 04.09.18 द्वारा श्री शर्मा को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 1977 दिनांक 06.09.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-542, दिनांक 07.06.19 द्वारा श्री शर्मा, तत0 कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति कार्यपलाक अभियंता बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, आरा को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। "तीन वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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8 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मोति0)08-03/2013(अंश-2)-1409--श्री ब्रज किशोर चौधरी (आई0डी0-3593), तत0 सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-02, खगौल के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अन्तर्गत पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता के तथ्यों की अनदेखी करने, मूल तथ्य को छिपाकर कार्य में स्थानीय सामग्री उपयोग को जाँचफल में रेखांकित नहीं करने संबंधी निम्न आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-947, दिनांक 18.05.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, पटना द्वारा किया गया। जाँच में पाया गया कि एकरारनामा के विरूद्ध कार्य में स्थानीय सामग्री यथा स्टोन मेटल का उपयोग होने के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद में वास्तविक लीड के बजाय एकरारित दर से अनियमित भुगतान किया गया। फलस्वरूप सरकार को एक बड़ी राशि की क्षति हुई।

उनके द्वारा कार्यों के कार्यान्वयन के दौरान स्थल से प्रयुक्त सामग्रियों का नमूना संग्रह करते हुए गुणवत्ता की जाँच की गयी एवं विभिन्न तिथियों में जाँचफल कार्य में संलग्न प्रमंडल को प्रेषित किया गया, जिसमें स्थानीय सामग्री के प्रयोग के अनियमित कृत्य को रेखांकित नहीं किया गया। जबकि कार्य में स्थानीय सामग्री का प्रयोग स्पष्ट रूप से परिलक्षित था। मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा भी विभिन्न पत्रों के माध्यम से कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने की उद्‌घोषणा बार-बार किया जाता रहा। यहाँ तक कि मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-481, दिनांक 31.03.2012 से विशेष रूप से गुणवत्ता जाँच हेतु मुख्य अभियंता, रूपांकण एवं शोध अनिसाबाद, पटना से अनुरोध भी किया गया है। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.0.0 (स्थल निरीक्षण) में उद्धत है कि स्थल निरीक्षण से स्पष्ट परिलक्षित था कि शेखपुरा से भिन्न स्थानीय पत्थर का इस्तेमाल कार्य में किया गया है।

अतएव माना जा सकता है कि वे भली-भाँति अवगत थे कि कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग हो रहा है। इन सब तथ्यों की अनदेखी करते हुए उनके द्वारा मूल तथ्य को छिपाकर कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने का जाँचफल में रेखांकित नहीं करना दर्शाता है कि उक्त अनियमित कृत में उनकी सहभागिता रही है, जिसके लिए वे दोषी है।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग द्वारा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2463, दिनांक 24.11.2016 द्वारा श्री चौधरी को संचालन96 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गयी। उक्त आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-1236, दिनांक 05.06.2018 द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

"कालमान वेतनमान में एक वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति और भावि वेतनवृद्धि देय नहीं होगी"। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री चौधरी द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया, जिसका मुख्य अंश निम्नवत है :-

कंडिका 1 से 5 तक में श्री चौधरी द्वारा उनके विरूद्ध प्रश्नगत मामले में प्रारम्भ की गयी विभागीय कार्यवाही से लेकर दण्ड अधिरोपित करने तक के बीच कृत कारवाई का उल्लेख किया गया। कंडिका 6 में कहा गया कि मुख्य अभियंता द्वारा बार-बार उद्‌घोषित किया जा चुका था कि स्थानीय पत्थर का प्रयोग किया जा रहा था, इस तथ्य की जानकारी उन्हें नहीं थी। मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के पत्रांक 481 दि॰ 13.03.12 से मुख्य अभियंता, रूपांकण एवं शोध से विशेष रूप से गुणवत्ता जाँच किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसमें कही उल्लेख नहीं है कि इस कार्य में क्या जाँच करानी है। स्थानीय पत्थर के उपयोग किये जाने की कोई जानकारी इन्हें नहीं दी गयी। इस तरह मात्र रूटिन जाँच किये जाने आग्रह परिलक्षित है। अतः इस पत्र के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि इन्हें जानकारी थी। विभाग द्वारा कोई पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे प्रमाणित किया जा सके कि शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2 को क्षेत्रीय पदाधिकारी के उक्त कृत की जानकारी देकर रूटिन जाँच के अतिरिक्त विशिष्ट जाँच का आग्रह किया गया है। जहाँ तक विभागीय पत्रांक 756 दि॰ 28.05.12 द्वारा विशेष रूप से गुणवत्ता की जाँच हेतु उन्हें निदेश दिया गया था। उक्त पत्र में कही भी उल्लेख नहीं है कि विशेष ढंग से गुणवत्ता की जाँच की जाय। इसमें भी स्थानीय सामग्री की जाँच एवं आकलन का कोई विशेष निदेश नहीं है। मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के पत्रांक 276 दि॰ 21.03.12, 480 दि॰ 31.03.12 एवं पत्रांक 499 दि॰ 09.04.12 की प्रति किसी भी श्रोत से प्राप्त नहीं हुआ था। फिर भी इन पत्रों में उद्‌घोषित अनियमितता के आधार पर विभाग द्वारा यह मान लिया गया कि वे अवगत थे एवं इसकी अनदेखी कर अपने जाँचफल में इस आशय का उल्लेख नहीं किया गया। विभागीय समीक्षा में कहना कि रूटिन जाँच का जो प्रपत्र शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल में उपलब्ध है। उसमें गोल पत्थर अथवा स्थानीय सामग्री का जाँच का कॉलम नहीं होने के कारण त्रुटिपूर्ण है। यह प्रपत्र किस स्तर से अनुमोदित है के संबंध में कहा गया है कि उनके पूर्व एवं बाद में भी उसी प्रपत्र में जाँच की जाती है। यदि प्रपत्र त्रुटिपूर्ण है तो इसे संशोधित करने की कारवाई विभागीय स्तर पर की जानी चाहिये थी। तकनीकी परीक्षक कोषांग के अनुशंसा के आलोक में उड़नदस्ता द्वारा अन्य दो प्रमंडल की जाँच की गयी तथा स्थल से एकत्रित नमूनों की जाँच शोध प्रशिक्षण प्रमंडल को अपने पत्रांक 69 दि॰ 14.02.14 द्वारा सामान्य जाँच के अतिरिक्त निम्न जाँच की अपेक्षा की गयी। (क) WMM+GSB के लिये :- (i) Aggregate का physical Characteristic यथा Colour, Shape, Testtime (ii) Aggregate का Impact Value (iii) व्यवहृत एग्रीगेट दो या अधिक तरह के पत्थर से प्राप्त है या एक ही तरह के पत्थर से। (iv) व्यवहृत Aggregate Rive bed material से प्राप्त है अथवा blasted rock से इससे उनके कथन की पुष्टि होती है जो प्रपत्र प्रचलन में है, उसमें मात्र रूटिन जाँच का उपबंध है। विशेष जाँच के लिये विशेष निदेश/आग्रह आवश्यक है जैसा की उड़नदस्ता द्वारा अनुरोध किया गया। भुगतान के पूर्व लीड का सत्यापन करने का दायित्व कार्य से संलग्न अभियंता का है न कि गुणवत्ता जाँच कार्य में संलग्न पदाधिकारी का। दिनांक 28.06.12 को प्रेषित जाँचफल में दूरी 13.50, 15.0, 32.80 एवं 40.10 से संग्रहित नमूनों पर आधारित था। जबकि कोषांग द्वारा 42.0 से 62.0 वि॰दु॰ के बीच लिये गये नमूनों पर आधारित जाँचफल है। दि॰ 03.05.12 को भी दो गुणवत्ता जाँचफल निर्गत किया गया था जिसमें लोकेशन बिन्दु 0.0 से 62.50 अंकित है। यह नमूना उनके द्वारा संग्रहित नहीं था बल्कि क्षेत्रीय प्रमंडल द्वारा नमूना प्राप्त कराया गया था। जिसमें संग्रह स्थल अंकित नहीं था। अतः इनके द्वारा संग्रहित नमूना एवं जाँचफल द्वारा संग्रहित नमूना का कार्य स्थल बिन्दु दूरी अलग-अलग होने के कारण दोनों श्रोत से प्राप्त जाँचफल में भिन्नता होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। विभाग ने कहा है कि दिनांक 30.05.12 को उनके द्वारा निर्गत जाँचफल के आलोक में आरोप स्पष्ट बनता है क्योंकि दिनांक 03.05.12 के पूर्व मुख्य अभियंता द्वारा अनेकों पत्र के माध्यम से आलोच्य कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग होने की घोषणा की जा चुकी थी। इस तरह इस घोषणा से मुझे अवगत हुआ मान लिया गया। जबकि ऐसा कोई पत्र विभाग ने प्रस्तुत नहीं किया है जिससे प्रमाणित हो की उक्त घोषणा की जानकारी देकर तत्संबंधी जाँच का कोई निदेश दिया गया है। श्री चौधरी द्वारा कुलदीप सिंह बनाम कमिश्नर ऑफ पुलिस तथा नरेन्द्र मोहन आर्य बनाम United Insurance Co. Ltd. में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जब तक इस आशय का साक्ष्य नहीं है कि स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री की मात्रा को भी आकलित करने का किसी स्तर से कोई निदेश था एवं इसकी अनदेखी कर स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री को उनके द्वारा रेखांकित नहीं किया गया। तब तक उन्हें इस लांक्षण से97 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संयोजित (link) करने का कोई वैद्यिक आधार नहीं है। मात्र अनुमान्य एवं संभावना के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों एवं न्याय निर्णयों के मद्‌देनजर उन्हें दोषी ठहराये जाने का कोई विधिमान्य आधार नहीं होने के कारण उनकी निर्दोषिता प्रमाणित होता है क्योंकि संदेह अथवा अनुमान्य एवं सम्भावता प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता है। समीक्षा :- श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप है कि प्रश्नगत कार्य में एकरारनामा के विपरीत स्थानीय सामग्री के उपयोग होने के बावजूद इनके द्वारा स्थल से नमूना संग्रह कर जाँचोपरान्त निर्गत किये गये जाँचफल में उक्त अनियमित कृत का रेखांकण नहीं करने के कारण कार्य प्रमंडल द्वारा प्रावधान के अनुरूप शेखपुरा के लीड से अनियमित भुगतान किये जाने में इनकी भी सहभागिता रही है। श्री चौधरी द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में आरोप से संदर्भित लगभग वही तथ्य अंकित किया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही एवं द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में दिया गया है, जिसके समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोप के लिये इन्हें कालमान वेतनमान में एक प्रक्रम स्थायी रूप से अवनति एवं भावी वेतन वृद्धि देय नहीं होगी का दण्ड संसूचित किया गया है। इनके द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के द्वारा विभिन्न पत्रों के माध्यम से बार-बार कार्य में स्थानीय सामग्री के प्रयोग की उद्‌घोषणा किया जा रहा था उसकी जानकारी उन्हें नहीं थी स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि इनके द्वारा कार्य स्थल से स्वयं सामग्री के नमूना को एकत्रित कर जाँचोपरान्त जाँचफल निर्गत किया गया है। ऐसे भी किसी भी जाँच पदाधिकारी जिनके द्वारा स्थल भ्रमण किया गया है। ऐसी स्थिति में नियमानुसार माना गया है कि उन्हें हर पहलू की जानकारी प्राप्त कर ही जाँचफल दिया जाना होता है। इनके द्वारा यह भी कहा गया है कि किसी भी स्तर से उन्हें विशेष जाँच करने का आदेश/निदेश नहीं दिया गया है, स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि रूटिन जाँच करना शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल का दायित्व है एवं इनके कार्यक्षेत्र में है। जबकि इस मामले में मुख्य अभियंता अपने पत्रांक 481 दि॰ 31.03.12 से मुख्य अभियंता, रूपांकण एवं शोध से गुणवत्ता जाँच कराने का अनुरोध किया गया तथा विभागीय पत्रांक 756 दि॰ 28.05.12 से श्री चौधरी को गुणवत्ता जाँच हेतु विशेष रूप से करने का निदेश दिया गया है। ऐसी स्थिति में कहना कि इन्हें विशेष जाँच करने का निदेश नहीं दिया गया स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। इनके द्वारा कहा गया है कि पूर्व में एवं उसके बाद भी रूटिन जाँच का जो प्रपत्र शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल-2, खगौल में उपलब्ध था उसी में पत्थर की जाँच की जाती थी उसमें गोल पत्थर अथवा स्थानीय पत्थर का जाँच का कॉलम नहीं है। इस संदर्भ में नया तथ्य के रूप में अपने पूरक बचाव बयान में तत्कालीन अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त सह विशेष सचिव, जल संसाधन विभाग श्री के॰ एन॰ लाल द्वारा विभाग के लिये स्वीकृत Quality Control Manual की प्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि आपूरित पत्थर के श्रोत से प्राप्त किया जाना है इस आशय की जाँच नहीं की जाती है, स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि Quality Control Manual के पेज-33 से स्पष्ट है कोर्स एग्रीगेट का जिन पारा मीटर की जाँच करने का प्रावधान है एवं इनके द्वारा निर्गत जाँचफल में जिन पारामीटर की जाँच की गयी है उसका विवरणी नीचे अंकित की जा रही है :-

क्र॰ Quality Control Manual निर्गत गुणवत्ता जाँचफल
1. Sp. gravity Sp. gravity
2. Absorption Absorption
3. Cushing value Cushing value
4. Soundness -
5. Flakiness -
6. Bulk density -
7. Sieve Analysis Sieve Analiysis

उपरोक्त से स्पष्ट है कि श्री चौधरी द्वारा जल संसाधन विभाग के स्तर से निर्गत Quality Control Manual के अनुसार Soundness, Flankiness एवं bulk density पारामीटर की जाँच किये बिना ही जाँचफल निर्गत किया गया है। यदि उक्त तीनों पारामीटर खासकर Flankiness की जाँच की जाती तो संभव था कि प्रश्नगत कार्य में प्रत्युक्त स्थानीय कोर्स एग्रीगेट के Shape के आधार पर ज्ञात की जा सकती है। उक्त के आलोक में श्री चौधरी का कथन की न तो स्वीकृत प्रपत्र में ही स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री की जाँच करने का प्रावधान था अथवा विभाग द्वारा ही सामान्य जाँच के अतिरिक्त स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री को चिन्हि्‌त करने का ही दिशा निदेश था स्वीकार योग्य नहीं है। श्री चौधरी द्वारा यह भी कहा गया है कि उड़नदस्ता द्वारा अन्य प्रमंडल की जाँच के क्रम में स्थल से नमूना संग्रह कर शोध प्रमंडल से निम्न जाँच करने का अनुरोध किया गया।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 98 Aggregate का physical Charecteries यथा Colour, Shape, Texture, Aggregate का Impact Value, व्यवहृत एग्रीगेट दो या दो से अधिक तरह के पत्थर से प्राप्त है या एक ही तरह के पत्थर से एवं व्यवहृत Aggregate river bed material से प्राप्त है अथवा blasted rock से। इससे स्पष्ट है कि विशेष जाँच के लिये विशेष निदेश/आग्रह आवश्यक है। परन्तु इनका कथन की इन्हें किसी भी स्तर से विशेष जाँच का निदेश नहीं था स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि इन्हें विशेष रूप से विभाग द्वारा पत्रांक-756, दिनांक 28.05.12 द्वारा गुणवत्ता जाँच का निदेश दिया गया है।

श्री चौधरी द्वारा कुलदीप नारायण सिंह बनाम कमिश्नर ऑफ पुलिस के मामले में माननीय सर्वोच्य न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उक्त न्याय निर्णयों के आलोक में जब तक इस आशय का साक्ष्य नहीं है कि स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री की मात्रा को भी आकलित करने का किसी स्तर से कोई निदेश था एवं इसकी अनदेखी कर स्थानीय श्रोत से प्राप्त सामग्री को मेरे द्वारा रेखांकित नहीं किया गया। तब तक उन्हें इस लांक्षण से संयोजित (लिंक) करने का कोई वैधिक आधार नहीं है। मात्र अनुमान्य एवं सम्भावता के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि शोध प्रमंडल में कार्यरत पदाधिकारी का दायित्व है परिक्षेत्राधीन चल रहे कार्यो का गुणवत्ता की जाँच करना होता है एवं विशेष परिस्थिति में ही मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा मुख्य अभियंता रूपांकण एवं शोध से गुणवत्ता की जाँच का अनुरोध किया गया है एवं मुख्य अभियंता के द्वारा स्थानीय सामग्री कार्य में उपयोग होने की सूचना के आलोक में ही विभागीय पत्रांक-756, दिनांक 28.05.2012 से इन्हें एवं इनके कार्यपालक अभियंता को विशेष परिस्थिति में गुणवत्ता जाँच करने का निदेश दिया गया है। अतएव माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा दूसरे के मामले में पारित न्यायादेश इनके मामले में लागू होना परिलक्षित नहीं होता है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री चौधरी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किये जाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1236, दिनांक 05.06.2018 द्वारा संसूचित दण्ड "कालमान वेतनमान में एक वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति और भावि वेतनवृद्धि देय नहीं होगी" के विरूद्ध श्री ब्रज किशोर चौधरी (आई0डी0-3593) तत0 सहायक अभियंता, शोध एवं प्रशिक्षण प्रमंडल सं0-02, खगौल सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल सं0-10, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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8 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(ल0सिं0)05-02/2018-1411--श्री बालकृष्ण गुप्ता, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिना विभाग की स्वीकृति के एक करोड़ से अधिक की राशि जिला परिषद औरंगाबाद से नियम के विपरीत प्राप्त करने, वित्तीय नियमों का उल्लंघन कर एक अग्रिम के समायोजन कराये बिना लगातार अग्रिम स्वीकृत करने एवं कर्त्तव्य में घोर लापरवाही बरतने आदि विनिर्दिष्ट आरोपों के लिये लघु जल संसाधन विभाग के आदेश सं0-252 सहपठित ज्ञापांक-5162, दिनांक 18.10.03 के द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरान्त लघु जल संसाधन विभाग द्वारा अपने आदेश सं॰ 132 ज्ञापांक 2491 दिनांक 27.06.05 से श्री गुप्ता के सेवानिवृत की तिथि 31.05.2004 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (i) पेंशन एवं उपादान पर सदा के लिये शत प्रतिशत रोक। (ii) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त शेष राशि देय नहीं होगा। (iii) रू॰ 80300 (अस्सी हजार तीन सौ रू॰) मात्र की वसूली।

उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री गुप्ता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एक याचिका CWJC No. 10040/2007 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 24.04.12 को याचिका निरस्त कर दिया गया। पुनः श्री गुप्ता द्वारा LPA सं॰ 1596/2012 दायर किया गया। जिसमें दिनांक 29.01.16 को न्याय पारित किया गया कि पुनः नये संचालन पदाधिकारी नियुक्त कर प्रशासी विभाग द्वारा निर्णय लेते हुए आदेश पारित किया जाय।

उक्त न्याय निर्णय के आलोक में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध संकल्प सं॰ 1889 दि॰ 26.04. 16 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43बी॰ के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति श्री गुप्ता को उपलब्ध कराते हुए लघु जल संसाधन विभाग द्वारा अपने पत्रांक 4978 दिनांक 28.11.17 से लिखित अभ्यावेदन या निवेदन उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। जिसके आलोक में श्री गुप्ता द्वारा लघु जल संसाधन विभाग को अपना लिखित अभ्यावेदन/निवेदन का प्रत्युत्तर उपलब्ध कराया गया।

चूँकि श्री गुप्ता तदेन कार्यपालक अभियंता की सेवानिवृति की तिथि 31.05.04 संवर्ग विभाजन के पूर्व है। उक्त के आलोक में श्री गुप्ता के सेवान्त लाभ सहित अन्य मामले का निष्पादन उनके पैतृक विभाग, जल संसाधन विभाग द्वारा किये जाने एवं दिनांक 29.01.16 को एल0पी0ए0 सं0-1596/2012 में पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री गुप्ता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही पर निर्णय लेने हेतु लघु जल संसाधन विभाग के विभागीय आदेश सं0- 197, सहपठित99 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 ज्ञापांक-3894, दिनांक 14.09.18 द्वारा आदेश सं0-132, ज्ञापांक-2491, दिनांक 27.06.05 के दण्डादेश को निरस्त करते हुए सभी संगत कागजात जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना को प्रेषित किया गया।

श्री बाल कृष्ण गुप्ता, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उतर एवं अन्य संगत अभिलेखों की समीक्षा सक्षम प्राधिकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाए गए :-

आरोप पत्र एवं पूरक आरोप पत्र से स्पष्ट है कि श्री गुप्ता के विरूद्ध कुल 14 आरोप गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि संचालन पदाधिकारी ने आरोप सं॰-1, 5, 6, 7, 8 तथा पूरक आरोप पत्र के आरोप सं॰ 1 को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है। शेष आरोप सं॰ 2, 3, 4, 9 एवं 11 को आंशिक रूप से एवं आरोप सं॰ 10, 12 तथा पूरक आरोप पत्र के आरोप सं॰ 2 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। चूँकि श्री गुप्ता से मात्र जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए लिखित अभ्यावेदन/आवेदन की माँग की गयी है। फलतः श्री गुप्ता द्वारा अपने अभ्यावेदन में उनके विरूद्ध संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में आंशिक रूप से प्रमाणित अथवा प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में अपना बचाव बयान दिया गया है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के द्वारा आंशिक प्रमाणित एवं प्रमाणित आरोपों की समीक्षा आरोपवार निम्नवत्‌ है :- (1) आरोप-2 :- वित्त विभाग द्वारा बैंक खाते को बन्द करने के नियम के विपरीत 8,47,128.65 रूपये की राशि बैंक एवं नगद रूप में रखा गया जबकि उक्त राशि को कोषागार में डिपोजिट शीर्ष में रखना चाहिये था एवं आवश्यकतानुसार निकासी की जानी चाहिये थी। इस प्रकार कोषागार संहिता के नियम 107 का उल्लंघन करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि बैंक खाता बन्द करने का आदेश था तो राशि चेक द्वारा उपलब्ध नहीं कराना चाहिये था क्योंकि चेक से प्राप्त राशि का भुगतान के पूर्व किसी खाता में जमा करना आवश्यक है। फलतः मुख्य दोष जिला प्रशासन का है। डिपोजिट शीर्ष में राशि रखकर खर्च करने की बात है तो इस हद तक चूक श्री गुप्ता से हुई है। परन्तु राशि समायोजन अगर हो गया है तो वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बनता है। इस संदर्भ में आश्वस्त हो लेना होगा, कि जिला योजना की राशि डिपोजिट शीर्ष में उक्त तिथि में रखी जा सकती थी अथवा नहीं। आरोपी द्वारा इस आरोप के संदर्भ में कहा गया है कि कार्यपालक अभियंता, औरंगाबाद के पत्रांक 127 दिनांक 15. 01.2017 से स्पष्ट है कि उनके द्वारा किसी प्रकार का सरकारी राशि के लेन देन में कर्त्तव्यहीनता नहीं बरती गयी है एवं सभी राशि का समायोजन हो चुका है। कार्यपालक अभियंता, औरंगाबाद के पत्रांक 127 दिनांक 15.01.2017 से स्पष्ट है कि मार्च 2016 तक पूर्व में ली गयी अग्रिम में मात्र 28000/- रूपये का समायोजन नहीं हो सका है शेष राशि का समायोजन हो चुका है। परन्तु आरोप का अंश कि प्रशासन से प्राप्त राशि को डिपोजिट शीर्ष में क्यों नहीं रखा गया के संदर्भ में आरोपी द्वारा कोई तथ्य नहीं दिया गया है। अतएव आरोप का यह अंश प्रमाणित प्रतीत होता है। (ii) आरोप-3 :- मध्यम सिंचाई योजना के मुआवजा के रूप में स्टील ऑथरिटी ऑफ इंडिया से 4.50 लाख दिनांक 03.06.02 को प्राप्त करने के बाद दिनांक 11.09.02 को डिपोजिट शीर्ष में रखा गया। इस प्रकार वित्त नियम के विपरीत 3 माह 8 दिन तक अपने पास रखे रहना कर्त्तव्यहीनता दर्शाता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि राशि प्राप्त होने के पश्चात शीर्ष में जमा करना चाहिये था। अतः आरोप आंशिक प्रमाणित होता है। श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि प्राप्त राशि शीर्ष में प्रभारी कैशियर के अनुभवहीन होने के कारण जमा करने में थोड़ा विलम्ब हुआ । उक्त से स्पष्ट है कि आरोपी द्वारा विलम्ब से राशि जमा कराने की बात स्वीकार किया गया है। अतः कर्त्तव्यहीनता का आरोप प्रमाणित होता है। (iii) आरोप-4 ः- जो सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजनान्तर्गत योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए 4663 क्वींटल स्वीकृत चावल के विरूद्ध 3110.78 क्वींटल प्राप्त किया गया। चावल प्राप्ति एवं निर्गत संबंधी कोई भी अभिलेख संधारित नहीं किया गया जो निश्चित ही गबन का प्रतीक है। संचालन पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि चावल की प्राप्ति कनीय अभियंता के द्वारा की गयी एवं प्राप्ति एवं निर्गत का प्रथम दायित्व कनीय अभियंता का था परन्तु नियंत्री पदाधिकारी श्री गुप्ता का दायित्व था कि अभिलेखों का संधारण कराते, परन्तु ऐसा नहीं कराया जा सका। जिसके आलोक में आरोप को आंशिक प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपी द्वारा कहा गया है कि कनीय अभियंता को बार-बार मौखिक निदेश अभिलेख संधारण हेतु दिया गया था। इस संदर्भ में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। अतएव श्री गुप्ता का बयान स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित माना जा सकता है। (iv) आरोप-9 :- जो लेखा लिपिक को अग्रिम दिया गया है परन्तु प्रयोजन अज्ञात है, न ही रोकड़वही में दर्शाया गया है। अतः गबन के उदे्‌श्यों से, अनियमित कृत किये जाने से संबंधित है। आरोपी श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि उनके द्वारा श्री सिंह पर वसूली के लिये कारवाई की गयी है। अतः आरोप नहीं बनता है। परन्तु कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव श्री गुप्ता का उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है। (v) आरोप-10 :- जो प्रमंडलीय लेखापाल के अनुरोध के बावजूद समय पर रोकड़वही बन्द नहीं करने, समय से मासिक लेखा एवं RF-51 नहीं भेजने तथा बैंक लेखा बन्द नहीं कर राशि की निकासी एवं व्यय का कोई हिसाब नहीं रखने से संबंधित है।100 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि प्रमंडलीय मासिक लेखा एवं आर॰ एफ॰ 51 कार्यकारी लेखा लिपिक द्वारा विलम्ब से उपस्थापित किया गया। फलतः महालेखाकार को विलम्ब से भेजा गया। प्रश्न यह है कि जब प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी द्वारा बार-बार मौखिक एवं लिखित सूचना दी गयी उसके बावजूद यदि लेखा लिपिक द्वारा विलम्ब से मासिक लेखा, रोकड़ वही एवं R.F.-51 दिया जाता था तो उसके विरूद्ध कारवाई क्यों नहीं की गयी। कार्रवाई से संदर्भित कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव श्री गुप्ता के कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है एवं आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है। (vi) आरोप-11 :- जो अधीक्षण अभियंता द्वारा अनेकों स्मार/निदेश दिये जाने के बावजूद विभागीय कार्यो की जाँच हेतु अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसा इनके द्वारा गलत मंशा से गबन को छिपाने के लिये किये जाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा राशि का समायोजन हो जाने एवं जिला प्रशासन द्वारा कोई शिकायत की गयी हो इसका उल्लेख आरोप में नहीं होने से गबन का मामला नहीं दिखता है, के आधार पर आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 127 दि॰ 15.01.17 से स्पष्ट है कि इसमें कोई गबन का मामला नहीं दिखता है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 127 दिनांक 15.01.17 में यह कही नहीं उल्लेख है कि श्री गुप्ता द्वारा गबन किया गया है अथवा नहीं। मात्र अग्रिम के समायोजन का उल्लेख है। परन्तु इतना तो स्पष्ट है कि उच्चाधिकारियों के आदेश/निदेश की अवहेलना करते हुए वांछित कागजात जाँच हेतु उपलब्ध नहीं कराया गया जो इनकी गलत मंशा परिलक्षित करता है। अएतव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है। (vii) आरोप-12 :- जो कर्त्तव्य की अवहेलना, लापरवाही, बीस सूत्री कार्यक्रम की बैठक की उपेक्षा करते हुए भाग नहीं लेकर अकर्मण्यता छिपाने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी ने इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया है। श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 जनाक्रोश से जाम किया गया। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि आरोप पत्र में स्पष्ट रूप से अंकित है कि इनके द्वारा हमेशा अपने कर्त्तव्य की अवहेलना करते रहने के कारण इनके विरूद्ध कई बार जनाक्रोश भड़का एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 2 जाम किया गया है। बीस सूत्री कार्यक्रम की बैठक में भाग नहीं लेने के संदर्भ में कहा गया है कि अस्वस्थता के कारण भाग नहीं ले सका था। आरोप पत्र से विदित होता है कि जिला पदाधिकारी के पत्रांक 104 दि॰ 08.09.03 के अनुसार बीस सूत्री कार्यक्रम की दिनांक 18.08.03 की बैठक की सूचना दिनांक 08.08.03 को ही श्री गुप्ता को दी गयी है। यदि ये अस्वस्थ थे तो अधीनस्थ किसी अभियंता को बैठक हेतु प्राधिकृत किया जाना चाहिये था। परन्तु इनके द्वारा ऐसा कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। अतः आरोप प्रमाणित माना जा सकता है। (viii) आरोप- पूरक आरोप पत्र के आरोप सं॰-2 :- जो दिनांक 27.06.03 को प्रमंडलीय रोकड़ पाल श्री मुकुल कृष्ण प्रसाद के विरूद्ध 1.50 लाख रूपये सरकारी राशि के गबन हेतु स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी। परन्तु अधीक्षण अभियंता द्वारा मामले के जाँचोपरान्त श्री प्रसाद के विरूद्ध गबन का आरोप नहीं पाये जाने पर इनके कार्यकाल में पत्रांक 445 दिनांक 04.07.03 एवं 624 दिनांक 25.09.03 स्वयं लिखित पत्र द्वारा थाना प्रभारी से प्राथमिकी वापस लेने हेतु अनुरोध किया गया। जो स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि बिना किसी जाँच पड़ताल के दुराग्रह से प्रेरित होकर श्री प्रसाद, रोकड़पाल के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर पद का दुरूपयोग किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। महालेखाकार द्वारा उनके अव्यवहृत राशि से रूपये 80300/- रूपये की वसूली कर ली गयी है अतएव आरोप प्रमाणित होता है। श्री गुप्ता द्वारा कहा गया है कि कार्यालय द्वारा उनके सामने जो प्रस्ताव उपस्थापित किया गया, उसके अनुरूप अग्रेत्तर कार्रवाई की गयी। स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि किसी अधीनस्थ कर्मचारी यथा रोकड़पाल के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के पूर्व पूरे मामले की जाँच करना इनका दायित्व था। परन्तु बिना जाँचे-परखे प्राथमिकी दर्ज करने हेतु थाना प्रभारी से अनुरोध किया गया एवं बाद में अधीक्षण अभियंता के जाँच में मामला अप्रमाणित पाये जाने के पश्चात श्री गुप्ता द्वारा प्राथमिकी को वापस लिया गया, जो इनके कर्त्तव्यहीनता, दुराग्रह एवं पद का दुरूपयोग किया जाना दर्शाता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री बाल कृष्ण गुप्ता, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव को अस्वीकार योग्य मानते हुए उनके विरूद्ध आरोप सं॰ 2, 3, 4, 9, 10, 11, 12 तथा पूरक आरोप सं॰ 2 को प्रमाणित माना जा सकता है। शेष आरोप को अप्रमाणित माना जा सकता है। प्रमाणित आरोप से स्पष्ट है कि श्री गुप्ता द्वारा वित्त विभाग के नियम के विरूद्ध बैंक में खाता रखा गया, मुआवजा के राशि को 3 माह तक डिपोजिट शीर्ष से बाहर रखना, चावल की प्राप्ति एवं निर्गत से संबंधित अभिलेख अद्यतन नहीं करना एवं समय पर लेखा को महालेखाकार को नहीं भेजना, जाँच में सहयोग नहीं करना, बीस सूत्री कार्यक्रम में बैठक में भाग नहीं लेना, उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करना तथा अपनी गलती को छिपाने एवं दुराग्रह से प्रेरित होकर गलत ढंग से प्राथमिकी दर्ज करना, मनमाने ढंग से राशि का अग्रिम देकर गबन करने की मंशा रखना इत्यादि क्रियाकलाप इनकी अकर्मण्यता, लापरवाही, कार्य के प्रति उदासीनता, कर्त्तव्यहीनता दर्शाता है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री बाल कृष्ण गुप्ता, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।101 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 "पेंशन से 15 (पन्द्रह) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती"।

उक्त निर्णित दण्ड पर माननीय मंत्री का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री बाल कृष्ण गुप्ता, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है। "पेंशन से 15 (पन्द्रह) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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8 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(पट॰)03-27/16-1412--श्री आनन्द कुमार झा (आई0डी0-3763), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के विरूद्ध मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1267, दिनांक-22.12.17 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर साक्ष्य सहित विभाग को उपलब्ध कराया गया। जल संसाधन विभाग का पत्रांक-680, दिनांक-15.03.2018 द्वारा श्री झा के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली के नियम-17(4) के तहत स्पष्टीकरण किया गया है। आरोप निम्न है-

(1) श्री संदीप खलखो का वेतन भुगतान नियमानुसार नहीं किया जाना । (2) श्री प्रभाकर श्रीवास्तव, भंडारपाल को दिनांक-05.07.17 से 27.07.18 तक का अवकाश स्वीकृत किया गया, जो नियमानुकूल नहीं पाया गया।

(3) श्रीमती श्रुति कुमारी, निम्नवर्गीय लिपिक की सेवापुस्त में ए0सी0पी0 की प्रविष्टियॉ अंकित नहीं पाया जाना । (4) श्री कृष्णा राम, सेवानिवृत, लेखा लिपिक का बकाया रहित प्रमाण पत्र को लंबित रखना। (5) निरीक्षण दल को जांच कार्य में मांगी गई वाहन पंजी, वाहन लॉग बुक, भंडार पंजी इत्यादि ससमय उपलब्ध नहीं कराया जाना। उक्त आरोप के आलोक में श्री झा द्वारा कार्यपालक अभियंता का कार्यालय, गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) प्रमंडल, औरंगाबाद का पत्रांक-226, दिनांक-05.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित किया गया । श्री झा द्वारा प्राप्त जवाब पर विभागीय पत्रांक-2636, दिनांक-21.12.2018 द्वारा मंतव्य की मांग मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण,शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना से की गई। मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण, शोध एवं गुण नियंत्रण कार्यालय, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-184, दिनांक-26.02.2019 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। जिसमें प्रत्येक आरोप पर उन्हें दोषी नहीं पाते हुए आरोप अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। श्री झा द्वारा प्राप्त स्पष्टीकरण एवं मुख्य अभियंता द्वारा उपलब्ध कराए गए मंतव्य की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत निम्न तथ्यों को उल्लेखित किया गया कि-

1. गठित आरोप पत्र, आरोपी पदाधिकारी द्वारा समर्पित स्पष्टीकण एवं मुख्य अभियंता द्वारा समप्रित मंतच्य की समीक्षा से आरोप संख्या-1,2 एवं 4 में दिए गए स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। 2. आरोप संख्या-3 में आरोपी पदाधिकारी का कथन कि पूर्व से ही ए0सी0पी0 की प्रविष्टि सेवापुष्ट में नहीं की गई थी और पूर्व से ही श्रीमती श्रुति कुमारी को रू0 2400/- ग्रेड पे में वेतन का भुगतान किया जा रहा था। यह स्वीकार योग्य नहीं है। वित्तीय कार्य समव्यवहार में इस कार्यालय में योगदान के पश्चात वेतन विपत्र बनाने से पूर्व उनके आधारो का जांच किया जाना आवश्यक था और इसमें आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपेक्षित सावधानी नही बरती गई। सेवा पुस्त में प्रविष्टि के बिना वेतन निर्गत करना स्वस्थ परम्परा नही कही जा सकती और इसमें गलती हो जाने की संभावना भी प्रबल हो जाती है। 3. आरोप संख्या-05 में आरोपी पदाधिकारी का कथन स्वीकार योग्य नहीं है। वाहन का लॉग बुक और वाहन की पंजी यदि तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा उन्हें सुपूर्द नहीं किया जा रहा था तो ये इनकी जवाबदेही थी कि उनसे ससमय प्राप्त करते । क्योंकि तत्कालीन सहायक अभियंता इनके नियंत्रणाधीन थे। साथ ही दिनांक-31.01.16 को श्री कृष्णा राम की सेवानिवृत के पश्चात्‌ भी इतनी लंबी अवधि तक वे प्रभार नहीं सौंप रहे थे तो यह कहीं न कहीं श्री झा की प्रशासनिक विफलता का परिचायक है। उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए था कि सेवानिवृत कर्मी यथाशीघ्र प्रभार का आदान-प्रदान करेंं। क्योंकि इसके अभाव में भंडार संबंधी कार्य भी प्रभावित हुआ होगा, इस प्रकार इस स्तर पर लापरवाही हुई है। परन्तु उक्त मामले में ऐसा नहीं हुआ तथा उनकी इस प्रशासनिक विफलता के कारण ही जांच की तिथि को जांच दल के अवलोकनार्थ वाहन पंजी, वाहन लॉग बुक एवं भंडार पंजी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। अतएव श्री झा का यह कृत कार्य निष्पादन में उनकी लापरवाही तथा अपेक्षित सावधानी के अभाव का परिचायक है। अतः उपरोक्त समीक्षोपरांत उक्त चूक के लिए श्री आनन्द कुमार झा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल, सम्प्रति गुण नियंत्रण (सिंचाई सृजन) प्रमंडल, औरंगाबाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14 (i) के तहत निन्दन (वर्ष 2015-16) एवं (2016-17) का दंड अधिरोपित करने का प्रस्तावित किया गया। उक्त प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त है।102 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 श्री आनन्द कुमार झा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण(सिंचाई सृजन) प्रमंडल, औरंगाबाद को निम्न दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। (1) निन्दन (वर्ष-2015-16 एवं 2016-17)

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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8 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-10/2012-1426--श्री वेदाकान्त पाठक (आई0डी0-1696) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा उनके उक्त पदस्थापन अवधि में निविदा संख्या-03/2011-12 के कार्यों का निष्पादन से संबंधित कार्यपालक अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमंडल, सासाराम शि0-डिहरी के प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लेने एवं दो पदावनत कार्यपालक अभियंताओं से संबंधित विभागीय निदेश के अनुपालन में अनियमितता बरतने का आरोप प्रपत्र-'क' में प्रतिवेदित किया गया। गठित आरोप के लिए संदर्भित विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1443, दिनांक 26.06.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 2005 के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप-1-पश्चिमी संयोजक नहर के कि0मी0 2.0 से 2.13 एवं कि0मी0 2.25 से 2.36 तक बाएँ बाँध के मरम्मति के प्राक्कलन (संख्या-SCMC '0' 9 एवं SCMC '0' 10) में नक्शा से विपरीत दो ROW के बदले एक ROWमें बम्बू पाईलिंग एवं 1.5 मीटर के बदले 3.0 मीटर पाईल गाड़ने के लिए प्रावधान वाले प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दिनांक 14.02.2012 को आपके द्वारा दी गई। साथ ही तकनीकी रूप से Protection work के लिए उपर्युक्त नाईलॉन क्रेट के बदले अनुपयुक्त Loose sand filled E.C. bags की भी स्वीकृति दी गई। इस प्रकार के प्रावधान से झांकी भराई की उपयोगिता नहीं रह गई एवं उड़नदस्ता जाँच में Protection Work क्षतिग्रस्त एवं अस्त-व्यस्त पाया गया।

इस प्रकार नक्शा से अलग एवं तकनीकी रूप से अनुपयुक्त कार्यमद के प्राावधान वाले प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति देने से कराया गया कार्य कारगर साबित नहीं हुआ एवं भुगतान भी बेकार गया उक्त अनियमितता के लिए दोषी हैं। आरोप-2-सोन उच्च स्तरीय नहर प्रमण्डल, सासाराम के कार्यालय भवन की मरम्मति के क्रम में उसमें कार्यरत सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, सासाराम शिविर-डिहरी के दो अवर प्रमण्डलों के कार्यालय कार्य को सुचारू रूप से निष्पादन हेतु अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यपालक अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण प्रमण्डल, सासाराम, शिविर-डिहरी के न्यू डिलिया सिंचाई कॉलनी के सरकारी आवास संख्या-2 में चलाने के पत्रांक-262 दिनांक 20.04.2010 द्वारा दिये गये प्रस्ताव पर उनके द्वारा कोई निर्णय/कार्रवाई नहीं की गई, जिसके लिए वे दोषी है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन स्वीकृत करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। परन्तु अन्य आरोप विन्दु प्रमाणित नहीं पाया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा अन्य आरोप को प्रमाणित नहीं पाये जाने संबंधि तथ्य से असहमत होते हुए प्रमाणित एवं असहमति के बिन्दु पर आरोपित पदाधिकारी से विभागीय पत्रांक-831, दिनांक 01.06.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त बचाव बयान की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा-प्राक्कलन के साथ संलग्न नक्शा में दो ROW में Bamboo piling का प्रावधान था जबकि सम्बद्ध क्षेत्रीय पदाधिकारी (अधीक्षण अभियंता) द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन में एक ही ROW के लिए Bamboo की गणना की गई तथा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 7.2.7.2 में अंकित है कि प्राक्कलन के गणना भाग के अनुसार वास्तविक रूप में भी यह कार्य एक ROW में ही कराया गया साथ ही 7.2.7.3 में Bush filling कार्य मद में भुगतान संशयपूर्ण एवं अनियमित माना गया है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए Photographs से दो ROW में कार्य कराना जाना परिलक्षित होता है जिससे संचालन पदाधिकारी द्वारा भी मान्य किया गया है। उपरोक्त विरोधाभाष की स्थिति में अभियंता प्रमुख सिंचाई सृजन से मंतव्य की मांग की गई जो निम्नवत है - "आरोपी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसकी समीक्षा निगरानी प्रशाखा द्वारा की गई। कराए गए कार्य को प्राक्कलन के साथ संलग्न नक्शा में दो ROW में बम्बू पाईल का प्रावधान था जिसके अनुसार आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए Photographs से दो ROW में बम्बू पाईल का कार्य कराया जाना परिलक्षित होता है। जिसकी मान्यता संचालन पदाधिकारी द्वारा भी दी गई है।" तकनीकी समीक्षा, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं अभियंता प्रमुख द्वारा समर्पित मंतव्य के आलोक में स्थिति निम्नवत है - (1) प्राक्कलन में संलग्न नक्शा के अनुसार दो ROW Bamboo piling का कार्य कराये जाने को आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए Photographs को आधार एवं तर्क को संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वीकार किया गया जिसे अभियंता प्रमुख (सिंचाई सृजन), जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा सहमति दी गई है। जिससे स्पष्ट होता है कि दोनों स्थलों पर Double ROW में Bamboo piling कराये जाने पर सहमति प्रदान की गई है।103 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि कनीय अभियंता द्वारा प्राक्कलन त्रुटिपूर्ण बनाया गया जिसकी जाँच संबंधित सहायक अभियंता एवं तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को द्वारा नहीं की गई। त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन को संलग्न नक्शा से बिना मिलान किए प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति श्री वेदाकान्त पाठक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता द्वारा दी गई। मामले की पूर्ण समीक्षोपरांत उक्त अनियमितता के लिए श्री वेदाकान्त पाठक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को विभागीय अधिसूचना संख्या-1887, दिनांक 31.08.2018 द्वारा "पेंशन से 10% की कटौती एक वर्ष के लिए" का दण्ड संसूचित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री पाठक द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि प्रस्तुत पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है और न ही कोई ऐसा नया आधार उल्लेखित किया है, जिस पर विचार करके दण्ड में संशोधन किया जा सके। अतः उनके तथ्यविहीन पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड "पेंशन से 10% की कटौती एक वर्ष के लिए" को यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री वेदाकान्त पाठक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (आई0डी0-1696) सम्प्रति सेवानिवृत को पूर्व में संसूचित दण्ड "पेंशन से 10% की कटौती एक वर्ष के लिए" को यथावत रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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9 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-09/2017-1431--श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह (आई0डी0-जे-7886) तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बैरगनियाँ को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ रिंग बाँध के मसान नरोत्तम ग्राम में सीपेज के कारण क्षतिग्रस्त होने, कर्त्तव्य में लापरवाही बरतने सहित अन्य अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1605, दिनांक 14.09.17 द्वारा श्री सिंह को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1688 दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17(2) में निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप - दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ रिंग बाँध मसान नरोतम ग्राम में सीपेज के कारण टूट गया जिसके कारण जान-माल की व्यापक क्षति हुई। रिंग बाँध में सीपेज की मरम्मति की सूचना आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। विभागीय स्तर से आपको स्पष्ट रूप से निदेशित किया गया था कि बाँध की सतत निगरानी करायी जाय एवं आवश्यकतानुसार उसकी मरम्मति करा ली जाय। किन्तु आपके द्वारा विभागीय दिशा निर्देश का उल्लंघन किया गया। आपका यह कृत्य बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता, स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। आपका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(iii) के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित आरोप को प्रमाणित पाया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी से विभागीय पत्रांक-1040, दिनांक 11.05.18 द्वारा लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की गई।

उक्त के आलोक में श्री सिंह द्वारा अपने पत्रांक-25, दिनांक 08.06.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :-

श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के कंडिका 1 से 5 तक में विभागीय कार्यवाही के संचालन के नियम, वांछित दस्तावेज उपलब्ध नहीं करोकर सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 के कंडिका 5(क) का अनुपालन नहीं होने, आरोप के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी की समीक्षा बिना साक्ष्य के होने, प्रतिपरीक्षण का अवसर नहीं देना तथा मुख्य सचिव निगरानी के पत्रांक-1992 दिनांक 01.11.2017 के अनुरूप साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने का उल्लेख किया गया है। साथ ही इनके द्वारा दिये गये तथ्यों एवं साक्ष्य का सही ढंग से विशलेषण किये बिना ही जाँच प्रतिवेदन देने से संबंधित तथ्यों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही आरोप से संदर्भित तथ्यों को चार भागों मेंं विभक्त कर निम्न बातें कही गयी हैं :- (क) प्रथम भाग - संचालन पदाधिकारी का कथन कि कॉल डिटेल से बातचीत की प्रकृति का पता नहीं चलता है कि बातचीत सीपेज/मरम्मति के बारे में हुई है के संदर्भ में कहा गया है कि विषय बाढ़ जैसे स्थिति में मैं सात बार कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता से क्या बात करूँगा। बाढ़ग्रस्त हाल में अपने अन्य पदाधिकारी से हुई बातचीत में कराये जा रहे कार्यों से हटकर कोई दूसरी जानकारी देना कल्पना भी नहीं की जा सकती है। (ख) द्वितीय भाग- संचालन पदाधिकारी का कहना है कराये गये कार्यों के साक्ष्य स्वरूप समर्पित फोटो से पता नहीं चलता है कि यह फोटो उक्त स्थल पर कराये गये कार्य के है इस संदर्भ में कहा गया है कि समर्पित NR में कार्य स्थल के कॉलम में बाँधाें का जिक्र किया गया है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 104 (ग) तृतीय भाग - कराये गये कार्यों का स्पष्ट प्रमाण नहीं है के संदर्भ में कहा गया है कि कार्य से संबंधित NR एवं HR से भी यह स्पष्ट हो गया कि कार्य इन्हीं बाँधों से संबंधित है। साथ ही प्रपत्र-24 की छायाप्रति संलग्न है, जिसे मुख्य अभियंता द्वारा विभाग को प्रेषित है। (घ) चतुर्थ भाग - बाँध की सतत निगरानी नहीं करने एवं आवश्यकतानुसार मरम्मति कार्य नहीं कराने के संबंध में कहा गया है कि तटबंध की निगरानी हेतु होम गार्ड के 31 जवानों को बाँध पर प्रतिनियुक्त किया गया था तथा कनीय अभियंता द्वारा लगातार चौकसी की जा रही थी एवं उनके द्वारा भी सतत पर्यवेक्षण किया जा रहा था। जिसके साक्ष्य स्वरूप लॉग बुक तथा तेल भाउचर की प्रति संलग्न किया गया। संयुक्त निरीक्षण में भी उक्त तटबंध की मरम्मति की आवश्यकता नहीं पायी गयी। संचालन पदाधिकारी के उपरोक्त टिप्पणी साक्ष्य आधारित नहीं है। जिसे विधिसंगत नहीं माना जा सकता है। श्री सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जिसमें निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री सिंह के विरूद्ध आरोप का मुख्य अंश है कि - (1) दिनांक 13.08.17 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ रिंग बाँध के मसान नरोत्तम ग्राम में सीपेज होने एवं सीपेज की मरम्मति की सूचना उच्चाधिकारी को नहीं दी गयी एवं बाँध टूट गया।

(2) बाँधों की सतत निगरानी एवं आवश्यकतानुसार उसकी मरम्मति का विभागीय दिशा निदेशों को उल्लंघन किया गया जो बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता, स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। संचालन पदाधिकारी ने आरोपी श्री सिंह द्वारा उपलब्ध कराये गये बचाव बयान के आलोक में समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्न बातें कहीं हैं :-

मुख्य आरोप यह है कि दिनांक 13.08.17 ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनियाँ, रिंग बाँध मसान नरोत्तम ग्राम में टूटान मरम्मती की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। साथ ही बाँध की सतत निगरानी एवं आवश्यकतानुसार उसकी मरम्मति का विभागीय दिशा निदेशों का उल्लंघन किया गया जो बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता, स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के कंडिका 49 के आलोक में सहायक अभियंता का पदीय दायित्व का निर्वहन करते हुए उनके द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के संदर्भ में कार्रवाईयों की सूचना कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता को दी गई है। जिससे इसकी पुष्टि में मोबाईल सं0-7250918599 का कॉल डिटेल संलग्न किया गया है। जिससे आरोपित पदाधिकारी द्वारा क्रमशः कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता का मोबाईल बताया गया है। परन्तु उक्त कॉल डिटेल से संवाद की प्रकृति स्थापित करना संभव नहीं है जिससे यह स्थापित किया जा सके कि संवाद विषयांकित सीपेज/टूटान से ही संबंधित है। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर अपने परिक्षेत्र के वरिष्ठतम पदाधिकारी होते है। उनके द्वारा अपने पत्रांक-2(सी), दिनांक 13.08.2017 में स्पष्ट प्रतिवेदित किया गया है कि बाँध के प्रभारी अवर प्रमंडल पदाधिकारी (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा भी तटबंध से सीपेज की सूचना नहीं उपलब्ध करायी गई। जबकि गश्ती नियमावली बाढ़ नियंत्रण आदेश एवं अन्य विभागीय पत्रों से सूचना प्रेषण एवं अन्य दिशा-निर्देश विभाग के द्वारा निर्गत किया गया था। इस प्रकार उपरोक्त से विषयांकित रिंग बाँध से सीपेज/मरम्मति की सूचना उच्चाधिकारियों को दिये जाने को स्थापित नहीं होता है।

सीपेज मरम्मति के संदर्भमें आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि नेपाल और बिहार के उतरी जिलों में अतिवृष्टि के कारण एकाएक लालबकिया, झाझा एवं बागमती नदी में उफान आया एवं बैरगनियाँ, रिंग बाँध मसान पर नरोत्तम ग्राम के नेपाल की ओर से Flash Flood में अत्याधिक वेग से जल प्रवाह हुआ जिससे बैरगनियाँ, रिंग बाँध पर भारी दबाव एकाएक बढ गया। उक्त बाँध से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए River Side में बालू भरे बोरे से पीचींग एवं Country Side में well बनाकर सीपेज नियंत्रण का प्रयास किया गया परन्तु रिसाव नियंत्रित नहीं हुआ और 05ः15 बजे रिंग बाँध क्षतिग्रस्त हो गया। सम्पुष्टि में फोटोग्राफ, हस्तपावती रसीद, विभागीय एन0आर0 एवं समाचार पत्र का कतरन संलग्न किया गया है। इस संदर्भ में विभागीय मंतव्य में "बाँध में हो रहे सीपेज को नियंत्रित करने हेतु किये गये प्रयास के संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा कोई स्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है," यह प्रतिवेदित किया गया है। स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य विभाग द्वारा संतोषप्रद नहीं माना गया। फोटोग्राफ्स के अवलोकन से यह स्थापित नहीं किया जा सकता है कि फोटोग्राफ्स में दिखाये गये कार्य विषयांकित मसान नरोत्तम ग्राम में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य से ही संबंधित है। इस प्रकार हस्तपावती रसीद से प्राप्त सामग्री विषयांकित स्थल के मरम्मती में ही प्रयोग किया गया है इससे स्थापित नहीं होता है। इस प्रकार विभागीय मंतव्य से सहमत होने का आधार बनता है।

उपरोक्त से आरोपित पदाधिकारी द्वारा आपात स्थिति की सूचना वरीय पदाधिकारी को नहीं देने, बाँध की सतत चौकसी नहीं बरतने एवं आवश्यकतानुसार मरम्मती कार्य नहीं कराने संबंधित विभागीय दिशा निदेशों का उल्लंघन का मामला बनता है जिसके कारण सीपेज की जानकारी एवं इसकी ससमय मरम्मती नहीं होने के कारण रिंग बाँध क्षतिग्रस्त हुआ। अगर ससमय सीपेज की रोकथाम के लिए आरोपित पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई की जाती तो बाँध के सुरक्षित होने की संभावना बनती। कॉल डिटेल से संवाद की प्रकृति स्थापित करना संभव नहीं है के आलोक में आरोपी का कथन कि उनके द्वारा अधीक्षण अभियंता को सीपेज एवं उसकी मरम्मति की सूचना दी गयी को मुख्य अभियंता के पत्रांक-2(सी) दिनांक 13.08.17 में प्रतिवेदित किया जाना कि तटबंध से सीपेज की सूचना नहीं उपलब्ध करायी गयी, के आलोक में अस्वीकार योग्य माना गया है। सीपेज/मरम्मति की सूचना उपलब्ध कराने के संदर्भ में आरोपी द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं करायी गयी है।105 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आपात स्थिति की सूचना वरीय पदाधिकारी को नहीं देने, बाँध की सतत चौकसी नहीं करने एवं आवश्यतानुसार मरम्मति कार्य नहीं करा कर विभागीय निदेशों का उल्लंघन करने के कारण सीपेज का ससमय मरम्मति नहीं होने से रिंग बाँध क्षतिग्रस्त होने से संबंधित आरोप श्री सिंह के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाया जाता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2083, दिनांक 18.09.18 द्वारा श्री सिंह को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2231 दिनांक 04.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-699, दिनांक 26.06.2019 द्वारा श्री सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बैरगनियाँ सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमंडल, सिद्धीपुर (सोन नहर प्रमंडल, विक्रमगंज), रोहतास को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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9 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-3)/1434--श्री चन्द्रभूषण प्रसाद (आई0डी0-2092), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-12 दिनांक-25. 03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-75 दिनांक-18.01.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :- (1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं गुण नियंत्रण जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एकरारनामा मे प्रावधान के तहत कराये गये कार्य की मात्रा 10569.95 घन मी0 (Coarse aggregate) के विरूद्ध 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर एकरारनामा के विरूद्ध व्यवहार में लाया गया परिलक्षित है। जो Coarse Aggregate की मात्रा का 63.94 प्रतिशत होता है। स्थानीय श्रोत से प्राप्त Coarse Aggregate की मात्रा का भी वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान किया गया। उक्त अनियमित कृत के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति का आकलन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा की गयी। जिसके अनुसार राजस्व की क्षति की आकलित राशि 1,99,71,777/- रूपये मात्र बताया गया है। अतएव एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान करने के लिए वे दोषी है।

(2) इस योजना के तहत SLR Bridge एवं Bathing Ghat के निर्माण कार्य से उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमुनों की जाँच गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, खगौल से कराया गया। प्राप्त जाँचफल एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि Bathing Ghat के निर्माण कार्य में प्रावधानित PCC में सिमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2ः4 के जगह पर दो नमूनों में PCC में सिमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। अतएव PCC में प्रावधान से अधिक बालू की मात्रा होना परिलक्षित है। अतएव न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होना स्थापित होता है। जिसके लिए वे दोषी हैं।

(3) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.0.0(g), 9.0.0(x) एवं 10.0.0(i) से स्पष्ट होता है कि नियम के विरूद्ध कार्य में प्रत्युक्त सामग्री का भुगतान बिना एम0 एण्ड एन0 फार्म के सत्यापन कराये ही अनियमित ढंग से भुगतान किया गया। जिसके लिए वे दोषी हैं।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1340 दिनांक-18.08.2017 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री प्रसाद से द्वितीय कारणपृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री प्रसाद से प्राप्त बचाव बयान के मुख्य अंश निम्नवत है :- इनके पदभार ग्रहण करने के पूर्व आलोच्य कार्य का 8th on A/c bill का भुगतान दिनांक-15.06.2013 को किया गया है जिसमें स्थानीय श्रोत से प्राप्त कोर्स एग्रीगेट की मात्रा का वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान एवं न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद के अनियमित भुगतान करने का मामला है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 106 इनके कार्यकाल में एक मात्र 9th A/c bill का भुगतान किया गया है। जिसमें मात्र बोल्डर की आपूर्ति, ढुलाई तदोपरांत एप्रोन पीचिंग कार्य का भुगतान के साथ अतिरिक्त कार्य मद के अन्तर्गत कराये गये कार्य यथा Contraction of Sub grade and earthen solder तथा जियो बैग में Load send भरकर लेईंग कार्य का किया गया है। उक्त कार्य का विपत्रीकरण करने हेतु मात्र Abstract of Quantity तैयार किया गया, जिसमेंं पूर्व में कराये गये कार्य की मात्रा का समावेश किये जाने की बाध्यता थी। इसी परिप्रेक्ष्य में उनके द्वारा कराये गये कार्यों का Abstract of Cost 8th A/c bill तक का कार्य जो दूसरे पदाधिकारी द्वारा पारित किया गया था, कि मात्रा को जोड़कर नौवाँ चालू विपत्र का Abstract तैयार किया गया है, जिसमें Carriage of sand एवं चिप्स का भुगतान नहीं किया गया है। अतएव पारित 9th A/c bill में स्थानीय श्रोत से प्राप्त कोर्स एग्रीगेट की मात्रा का वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए अनियमित भुगतान अथवा न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान करने का मामला अभिलेखों के आधार पर नहीं बनता है। 2. 9th A/c bill में SLR Bridge एवं Bathing Ghat के निर्माण से संबंधित किसी भी कार्य मद का मापी अंकित नहीं किया गया है। वस्तुतः दोनों कार्य प्रभार ग्रहण करने के पूर्व में ही कराया गया है जिसकी मापी एवं भुगतान 8th A/c bill में किया जा चुका था। अतएव इन दोनों कार्यों में न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप भुगतान किये जाने का मामला अभिलेखों के आधार पर नहीं बनता है। 3. उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6.0.0(g) एवं 10.0.0(i) में स्थानीय श्रोत से प्राप्त कोर्स एग्रीगेट को एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए ढुलाई मद में भुगतान एवं बिना एम0 एण्ड एन0 प्रपत्र की विधिवत्‌ सत्यापन कराये ही भुगतान किये जाने का उल्लेख है तथा कंडिका 19.0.0(x) में अंकित है कि तृतीय एवं नवें चालू विपत्र से रॉयल्टी मद में कटौती नहीं की गयी है। शेष विपत्रों से रॉयलटी मद में किये गये कटौती से परिलक्षित होता है कि एम0 एण्ड एन0 फार्म के सत्यापन के पूर्व ही संवेदक को भुगतान किया गया। इनके द्वारा 9th A/c bill में कराये गये कार्य मदों मेंं शेखपुरा से सामग्री की ढुलाई से संबंधित कार्य मद नहीं रहने के कारण रॉयल्टी की कटौती की आवश्यकता नहीं थी। अतएव नियम विरूद्ध कार्य में उपयोग में लाये गये सामग्रियों का भुगतान बिना एम0 एण्ड एन0 प्रपत्र के सत्यापन कराये ही अनियमित ढंग से करने का मामला अभिलेख के आधार पर नहीं बनता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युार (अभ्यावेदन) एवं उपलब्ध अभिलेख के समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :- आरोप-01 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा नवें चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एग्रीगेट की कुल मात्रा 10569.95 घन मी0 का भुगतान होने एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार सड़क निर्माण कार्य में स्थानीय श्रोत से एग्रीगेट लाकर उपयोग किया गया। साथ ही 2 अदद्‌ एक पथीय सेतु एवं 2 अदद्‌ स्नान घाट के कार्य में भी स्थानीय स्टोन एग्रीगेट का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। स्थानीय श्रोत से ढुलाई की गयी निर्माण सामग्री के कारण अधिकाई भुगतान के आकलन से संबंधित प्रतिवेदन के अनुसार भी सामग्री ढुलाई हेतु निर्धारित लीड से कम दूरी से ढुलाई किये जाने का उल्लेख है परन्तु पदाधिकारी द्वारा प्रावधानित लीड का भुगतान किये जाने के आधार पर आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। श्री प्रसाद द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में कहा गया है कि सड़क निर्माण कार्य एवं SLR Bridge एवं Bathing Ghat का निर्माण एवं उक्त कार्य का भुगतान इनके प्रभार ग्रहण करने के पूर्व ही दिनांक-15.06.2013 तक आठवाँ चालू विपत्र के माध्यम से किया जा चुका था। माप पुस्त के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य का आठवाँ चालू विपत्र का भुगतान दिनांक-15.06.2013 को किया गया है जबकि श्री प्रसाद द्वारा दिनांक-22.07.2013 को कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर का प्रभार ग्रहण किया गया। आरोपी का कथन कि आठवाँ चालू विपत्र का भुगतान इनके पूर्वर्वाी कार्यपालक अभियंता द्वारा किया गया है स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। श्री प्रसाद द्वारा कहा गया कि इनके द्वारा मात्र बोल्डर पीचिंग Construction of Sub grade and earthen सोल्जर तथा जीयो बैग लेईग का कार्य कराया गया है एवं इन कार्यों का विपत्रीकरण करने हेतु Abstract of Quantity तैयार करने के क्रम मे आठवाँ चालू विपत्र तक कराये गये कार्यों की मात्रा जोड़कर नौवाँ चालू विपत्र का Abstract of Quantity तैयार किया गया। जिसका भुगतान इनके द्वारा किया गया। तुल्यनात्मक विवरणी से स्पष्ट है कि नौवाँ चालू विपत्र में आठवाँ चालू विपत्र में अंकित कार्य मद की मात्रा को Carring over करते हुए बोल्डर पीचिंग Supply of boulder, Carriage of Boulder, Construction of Sub grade एवं geo bags pitching कार्य का भुगतान किया गया। अतएव आरोपी का कहना कि इनके द्वारा सड़क निर्माण कार्य एवं SLR Bridge एवं Bathing Ghat का कार्य इनके पूर्ववाी कार्यपालक अभियंता द्वारा कराया गया है, स्वीकार योग्य है परन्तु माप पुस्त से स्पष्ट होता है कि आठवाँ चालू विपत्र की कुल राशि 63,41,393/- रूपये को limit करते हुए मात्र 60,00,000/- रूपये का भुगतान किया गया है। चूँकि आठवाँ चालू विपत्र में अंकित कार्य मद की मात्रा को ही नौवाँ चालू विपत्र में Carry Over करते हुए विपत्र तैयार करने के कारण आठवाँ चालू विपत्र तक कराये गये कार्यों में से (63,41,393-60,00,000)=3,41,393/- (तीन लाख इकतालीस हजार तीन सौ तिरानवें) रूपये का भुगतान नौवाँ चालू विपत्र के माध्यम से होना परिलक्षित है। अतएव आरोपी का कथन कि उनके द्वारा सड़क निर्माण कार्य जिसमें स्थानीय सामग्री के107 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उपयोग होने के बावजूद वास्तविक लीड के बजाय प्रावधान के अनुरूप भुगतान उनके द्वारा नहीं किया गया है, स्वीकार योग्य नहीं है। ऐसे भी पूर्व मे कराये गये कार्यों की मात्रा का समावेश कर नौवाँ चालू विपत्र तैयार कर भुगतान किया गया ऐसी स्थिति में माना जायेगा कि इनके द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों की मात्रा एवं गुणवाा से पूर्णतः संतुष्ट हो लिये होंगे। अगर इनके द्वारा नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान के समय मामले की जाँच कर ली जाती तो संभव था कि पूर्व में की गयी अनियमित भुगतान की कुछ हद तक वसूली हो जाती। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने के बावजूद प्रावधानित लीड से अनियमित भुगतान होने में इनकी आंशिक भूमिका मानी जा सकती है। आरोप-2 ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा मात्र उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमूनों के जाँचफल के आलोक में न्यून विशिष्टि के PCC का कार्य होने के लिए दोषी होने का मंतव्य दिया गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि SLR Bridge एवं Bathing Ghat के निर्माण कार्य में प्रावधानित PCC (1ः2ः4) के स्थान पर जाँचफल में सिमेंट एवं बालू का अनुपात क्रमशः 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। जिसके आलोक में सिमेंट की मात्रा में प्रतिशत कमी निम्नवत है :- SLR Bridge - 1/7-1/8.35 x100=16.17% 1/7 Bathing Ghat - 1/7-1/8.75 x100=19.96% 1/7 तकनीकि परीक्षक कोषांग के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 के अनुसार विभिन्न कारणों के आलोक में 15-20 प्रतिशत तक भिन्नता को अनुमान्य सीमा माना गया है। चूँकि प्रस्तुत कार्य में अधिकतम 19.96 प्रतिशत ही सिमेंट की मात्रा मे कमी पाया जाना परिलक्षित है। अतएव न्यून विशिष्टि के PCC का कार्य कराने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है। आरोप-03 :- संचालन पदाधिकारी ने इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपी श्री प्रसाद द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 9.0.0(x) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा नौवाँ चालू विपत्र में कराये गये कार्यों में शेखपुरा से सामग्री के ढुलाई से संबंधित कार्य मद नहीं रहने के फलस्वरूप रायल्टी मद में कटौती की आवश्यकता नहीं थी। अतएव नियम के विरूद्ध बिना एम0 एण्ड एन0 फार्म के सत्यापन कराये ही भुगतान करने का आरोप नहीं बनता है स्वीकार योग्य नहीं माना जायेगा क्योंकि इनके द्वारा नौवाँ चालू विपत्र में आठवाँ चालू विपत्र में अंकित कार्य मद की मात्रा का समावेश करते हुए तैयार कराकर भुगतान किया गया। इनका दायित्व बनता था कि पूर्व मे किये गये कार्यों का भुगतान नियमानुकूल हुआ है अथवा नहीं, की जाँच करने के पश्चात ही नौवाँ चालू विपत्र का भुगतान करना चाहिये था। साथ ही नौवाँ चालू विपत्र मेंं बोल्डर पिचींग में बोल्डर की आपूर्ति लेकर उपयोग किया गया है एवं भुगतान भी किया गया है नियमानुसार उक्त सामग्री यथा बोल्डर मेंं रॉयल्टी की कटौती किये बिना ही भुगतान किया गया है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में आरोप-03 प्रमाणित होता प्रतीत होता है। सरकार द्वारा वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरांत श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप सं0-02 यथा SLR bridge एवं स्नान घाट के निर्माण में न्यून विशिष्टि के PCC का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने का आरोप अप्रमाणित पाया गया। परन्तु आरोप सं0-01 यथा स्थानीय सामग्री का उपयोग होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने के आरोप को आंशिक एवं आरोप सं0-03 यथा नियम के विरूद्ध बिना रॉयल्टी की कटौती किये ही एवं बिना एम0 एण्ड एन0 फार्म को सत्यापन कराये ही भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित पाया गया। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चन्द्रभूषण प्रसाद (ID-2092), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध ''दस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए'' का दण्ड दिये जाने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-518 दिनांक-07.06.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री चन्द्रभूषण प्रसाद (ID-2092), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध ''दस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए'' का दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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9 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-03/2013(अंश-3)/1436--श्री बीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-5139), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध विभागीय उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-12 दिनांक-25.03.2015 के आलोक में नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना के तहत शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर अन्तर्गत पूर्वी मुख्य नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-70 दिनांक-18.01.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 108

(1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं गुण नियंत्रण जाँचफल के समीक्षोपरांत पाया गया कि नौवाँ चालू विपत्र के भुगतान अवधि तक एकरारनामा मे प्रावधान के तहत कराये गये कार्य की मात्रा 10569.95 घन मी0 (Coarse aggregate) के विरूद्ध 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर एकरारनामा के विरूद्ध व्यवहार में लाया गया परिलक्षित है। जो Coarse Aggregate की मात्रा का 63.94 प्रतिशत होता है। स्थानीय श्रोत से प्राप्त Coarse Aggregate की मात्रा का भी वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा के अनुसार शेखपुरा से प्राप्ति दिखलाते हुए प्रावधानित कार्य मद दर से ढुलाई मद में अनियमित भुगतान किया गया। उक्त अनियमित कृत के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति का आकलन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा की गयी। जिसके अनुसार राजस्व की क्षति की आकलित राशि 1,99,71,777/- रूपये मात्र बताया गया है। अतएव एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर ढुलाई मद में अनियमित भुगतान की जानकारी होने के बावजूद भी उनके द्वारा पूर्व में कराये गये अनियमित कार्य एवं अनियमित भुगतान को बिना जाँचे परखे उनके द्वारा अगले विपत्र में समावेश करते हुए नौवाँ चालू विपत्र करते हुए भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी है। फलतः पूर्व में किये गये अनियमित भुगतान की वसूली करने के बजाय अधिक भुगतान किया जाना परिलक्षित है, जिसके लिए वे दोषी है।

(2) इस योजना के तहत SLR Bridge एवं Bathing Ghat के निर्माण कार्य से उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमुनों की जाँच गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, खगौल से कराया गया। प्राप्त जाँचफल एवं उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि Bathing Ghat के निर्माण कार्य में प्रावधानित PCC में सिमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः2ः4 के जगह पर दो नमूनों में PCC में सिमेंट एवं बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। अतएव PCC में प्रावधान से अधिक बालू की मात्रा होना परिलक्षित है। अतएव न्युन विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किये जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होना स्थापित होता है। भलीभॉति अवगत होने के बावजूद भी पूर्व में कराये गये न्यून विशिष्टि के कार्य को सत्यापित करते हुए अन्य मदों में कराये गये कार्य के साथ नौवाँ चालू विपत्र में समावेश करते हुए भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी है। फलतः अनियमित भुगतान के वसूली के बजाय अधिक भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है, जिसके लिए वे दोषी है।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-657 दिनांक-13.03.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से द्वितीय कारणपृच्छा (अभ्यावेदन) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री कुमार से प्राप्त बचाव बयान के मुख्य अंश निम्नवत है :- (i) आलोच्य कार्य में प्रभारी सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार के द्वारा आठवाँं चालू विपत्र तक अद्यतन 7,99,90,207/- रूपये का विपत्र दिनांक-13.06.2013 को समर्पित किया जा चुका था। जिसमें सातवाँ चालू विपत्र की राशि घटाकर कुल 6,34,13,93.50 रूपये की ग्रॉस राशि आकलित थी परन्तु आवंटन के अभाव में 60,00,000/- तक सिमित कर दिनांक-15.06.2013 को भुगतान किया जा चुका था। जो भी अधिकाई भुगतान का मामला है वह आठवाँ चालू विपत्र तक के भुगतान से संबंधित है इनके प्रभार ग्रहण की तिथि दिनांक 16.07.2013 के पश्चात एक मात्र नौवाँ चालू विपत्र जिसमें आठवाँ चालू विपत्र तक की भुगतित राशि को घटाकर मात्र 24,28,900/- का विपत्र प्रस्तुत किया गया था। जो दिनांक-30.11.2013 को पारित कर भुगतान हुआ है।

(ii) आरोप में मुख्यतः कहा गया हैकि आठवाँ चालू विपत्र में 6758.64 घन मी0 स्थानीय श्रोत से प्राप्त कर व्यवहृत किया गया था उसे वास्तविक लीड के बजाय शेखपुरा से दिखलाकर अनियमित भुगतान प्रभार ग्रहण करने के पूर्व किया जा चुका था, उसकी जानकारी उन्हें थी। फिर भी बिना जाँच किये उसे अगले नौवाँ विपत्र में सम्मलित करते हुए भुगतान की अनुशंसा की गयी। फलतः अनियमित भुगतान की वसूली नहीं हो सकी। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 9(xii) में कहा गया हे कि कार्य सम्पादन अवधि में गुण नियंत्रण प्रमंडल द्वारा दिये गये जाँचफल में कार्य की विशिष्टि में कोई कमी नहीं पायी गयी तथा कंडिका 9(xi) में कहा गया है कि उपलब्ध किसी भी निरीक्षण प्रतिवेदन में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने का कोई उल्लेख नहीं है।

स्थानीय श्रोत से प्राप्त कोर्स एग्रीगेट का आकलन उड़नदस्ता द्वारा दिनांक-24.03.2015 के जाँच प्रतिवेदन में उद्‌भेदन किया गया। जबकि वे दिनांक-21.11.2013 को ही नौवाँ चालू विपत्र समर्पित किया था। उस समय उक्त अनियमितता की जानकारी नहीं थी। न ही कोई साक्ष्य दिया गया है कि जानकारी होने के बावजूद आठवाँ चालू विपत्र तक किये गये अनियमित भुगतान को सम्मलित कर नौवाँ चालू विपत्र भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी। चूँकि वे आठवाँ विपत्र के पूर्व कार्य में संलग्न नहीं थें। अतः वैकल्पिक पर्यवेक्षण में भी नहीं देख पाये कि स्थानीय श्रोत से सामग्री की आपूर्ति की जा रही थी। न ही पूर्व में गुणवाा जाँचफल में प्रतिवेदित था एवं न ही किसी पदाधिकारी के निरीक्षण प्रतिवेदन मे आदेशित था। वैसी स्थिति में आठवाँ चालू विपत्र तक की मात्रा एवं राशि को नौवाँ चालू विपत्र में सम्मिलित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इनके कार्यकाल में सम्पादित कार्य जिसका नौवाँ चालू विपत्र प्रस्तुत किया गया था उससे कोई विवाद नहीं था। इन्होंने Codel दायित्व का निर्वहन कर नौवाँ चालू विपत्र जाँच कर प्रस्तुत किया। अतः उनको अधिकाई व्यय की वसूली के लिए दोषी ठहराना उचित नहीं है। संचालन पदाधिकारी ने मंतव्य में कहा है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा परिमाण विपत्र में प्रावधानित लीड का भुगतान किया गया है। अतः आरोप प्रमाणित होता है। जबकि अनियमित भुगतान उनके द्वारा नहीं किया गया।109 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संभवतः उनके पूर्वाधिकारी श्री प्रवीण कुमार के विरूद्ध के मामले में की गयी समीक्षा के क्रम में गठित मंतव्य को ही इनके मामले में अंकित किया गया है जो Non application of mind है।

SLR Bridge & Bathing ghat का निर्माण कार्य पूर्वाधिकारी श्री प्रवीण कुमार द्वारा कराया गया है तथा उसका भुगतान भी उन्हीं के द्वारा आठवाँ चालू विपत्र के माध्यम से किया गया। इनके कार्यकाल में सम्पादित अन्य कार्य मदों का नौवाँ चालू विपत्र प्रस्तुत करने के समय मात्र आठवाँ चालू विपत्र की मात्रा एवं राशि को Carry Over करते समय पूर्व के अनियमित कार्य एवं भुगतान की जानकारी नहीं थी। क्योंकि गुणवाा जाँचफल में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं थी न ही किसी निरीक्षण प्रतिवेदन में उक्त अनियमित कृत का उल्लेख था। SLR Bridge & Bathing ghat में न्यून विशिष्टि के PCC का कार्य कराने के उदभेदन उड़नदस्ता जाँच (मार्च, 2014) में प्राप्त जाँचफल के आधार पर हुआ जबकि नौवाँ चालू विपत्र दिनांक-21.11.2013 को प्रस्तुत किया गया था। संचालन पदाधिकारी के अभिलेख में ऐसा कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं था जिससे प्रमाणित हो सके कि उक्त न्यून विशिष्टि के पूर्व में कराये गये कार्य की जानकारी उन्हें दिनांक-21.11.2013 तक थी। दूसरे तरफ जाँच प्रतिवेदन के अनुसार सिमेंट बालू का अनुपात 1ः3.35 एवं 1ः3.75 पाया गया है। PCC कार्य में प्रावधानित अनुपात 1ः2ः4 है। इस प्रकार सिमेंट की मात्रा में कमी निम्नवत होती है :-

(1) सिमेंंट बालू अनुपात (1ः3.35) - 16.17 प्रतिशत (2) सिमेंंट बालू का अनुपात (1ः3.75) - 20.02 प्रतिशत तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक-1045 दिनांक-06.07.1992 से स्पष्ट है कि विभिन्न कारणों से सिमेंट मोर्टार एवं सिमेंट कंक्रिट में सिमेंट की मात्रा में 15-20 प्रतिशत की भिन्नता को मान्य सीमा के अन्तर्गत माना गया है। अतएव इस मामले में सिमेंट में 16.17 प्रतिशत एवं 20.02 प्रतिशत की कमी को अनुमान्य सीमा के अन्तर्गत माना जा सकता है।

नौवाँ चालू विपत्र के प्रस्तुत करते समय आठवाँ चालू विपत्र तक उनके पूर्व के कार्यकाल में सम्पादित कार्य में बरती गयी अनियमितता का कोई जानकारी नहीं होने के कारण आठवाँ चालू विपत्र तक की गयी भुगतित मात्रा एवं राशि को सम्मिलित किया गया। इसमें कोई गलत मंशा नहीं थी।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, उपलब्ध अभिलेख एवं श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा प्रत्युार (अभ्यावेदन) की विभागीय समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :-

आरोप -01 ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को आरोपित पदाधिकारी द्वारा परिमाण विपत्र के अनुसार भुगतान करने के आलोक में प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच के क्रम में सड़क निर्माण कार्य एवं स्नान घाट एवं SLR bridge निर्माण कार्य से नमूना संग्रह कर प्रयोगशाला जाँचोपरांत कार्य में 63.94 प्रतिशत स्थानीय सामग्री का उपयोग होना बताया गया है। अभिलेख यथा माप पुस्त, प्रभार प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि आठवाँ चालू विपत्र तक का कार्य एवं भुगतान श्री प्रवीण कुमार, सहायक अभियंता द्वारा किया गया है। आठवाँ चालू विपत्र एवं नौवाँ चालू विपत्र के तुलनात्मक विवरणी से स्पष्ट होता है कि सड़क निर्माण कार्य एवं संरचना निर्माण कार्य में उपयोग किये गये सामग्री यथा कोर्स एग्रीगेट का पूरा कार्य आठवाँ चालू विपत्र के पूर्व ही कराया गया है। नौवाँ चालू विपत्र में मात्र बोल्डर पिचिंग, सड़क के दोनों फ्लैंक पर मिट्टी भराई एवं Sub grade एवं geo bags pitching कार्य का समावेश करते हुए आठवाँ चालू विपत्र के मात्रा को Carry over करते हुए तैयार किया गया है जिसकी जाँच आरोपी श्री बीरेन्द्र कुमार द्वारा किया गया। उक्त से स्पष्ट है कि सड़क निर्माण कार्य एवं संरचना निर्माण कार्य जिसमें स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है, का कार्य श्री बीरेन्द्र कुमार (दिनांक-16.07.2013 को श्री प्रवीण कुमार से प्रभार ग्रहण किया गया है) के द्वारा नहीं कराया गया है। श्री बीरेन्द्र कुमार द्वारा नौवाँ चालू विपत्र में पूर्व में कराये गये कार्य का भुगतान किये गये विपत्र सं0-आठवाँॅ चालू विपत्र में उद्धित मात्रा को समावेश करने के संबंध में कहा गया है कि नौवाँ चालू विपत्र को तैयार करने के समय कार्य में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने एवं संरचना निर्माण कार्य में न्यून विशिष्टि के PCC का उपयोग होने का न तो गुण नियंत्रण संगठन द्वारा उपलब्ध कराये गये गुणवाा जाँचफल में उल्लेख था। न ही उच्चाधिकारी के कोई निरीक्षण प्रतिवेदन में ही उल्लेख था। इसका उद्‌भेदन प्रथम बार उड़नदस्ता जाँच के समय मार्च 2014 में हुआ जबकि नौवाँ चालू विपत्र दिनांक-21.11.2013 को तैयार किया गया है। फलतः पूर्व में हुए अनियमित भुगतान की वसूली किया जाना संभव नहीं हो सका, आंशिक स्वीकार योग्य है। क्योंकि कार्य के दौरान गुण नियंत्रण संगठन द्वारा दिये गये किसी भी जाँचफल में स्थानीय सामग्री के उपयोग होने एवं संरचना निर्माण में न्यून विशिष्टि के PCC का उपयोग होने का कोई उल्लेख नहीं है। तत्कालीन मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक-01.03.2012 से दिनांक-05.04.2012 के बीच कई निरीक्षण प्रतिवेदन निर्गत किया गया है जिसमें कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग होने का उल्लेख है। हालाँकि यह संभावना बन सकती है कि मुख्य अभियंता का निरीक्षण प्रतिवेदन श्री कुमार को प्रमंडल से प्राप्त नहीं हुआ हो क्योंकि इस संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन में कोई तथ्य उद्धित नहीं है। संबंधित माप पुस्त से स्पष्ट होता है कि आठवाँ चालू विपत्र की कुल राशि 63,41,393/- रूपये मात्र है, को लिमिट करते हुए 60,00,000/- रूपये का भुगतान किया गया है। चूँकि नौवाँ चालू विपत्र में आठवाँ चालू विपत्र में अंकित मात्रा को समावेश करते हुए विपत्र तैयार किया गया है। फलतः (63,41,393-60,00,000)=3,41,393/- (तीन लाख इकतालीस हजार तीन सौ तिरानवें) रूपये का भुगतान नौवाँ चालू विपत्र में होना परिलक्षित होता है।110 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कार्य किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। मात्र आठवाँ चालू विपत्र में अंकित कार्य की मात्रा के नौवाँ चालू विपत्र में Carry over होने के कारण पूर्व में कराये गये कार्यों की राशि 3,41,393/- (तीन लाख इकतालीस हजार तीन सौ तिरानवें) रूपये का भुगतान होना परिलक्षित है, हालाँकि नौवाँ चालू विपत्र तैयार करने में आठवाँ चालू विपत्र में अंकित मात्रा को Carry over करना नियमानुसार सही प्रतीत होता है। आरोप -02 :- संचालन पदाधिकारी के द्वारा उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आधार पर PCC कार्य में प्रावधान से अधिक बालू पाये जाने के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। श्री कुमार द्वारा कहा गया हे कि इनके द्वारा उक्त दोनों कार्य न तो कराया गया है न ही उसका भुगतान किया यगा है। यह कार्य पूर्वर्वाी सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार द्वारा कराया गया है एवं आठवाँ चालू विपत्र तक में श्री प्रवीण कुमार द्वारा भुगतान किया गया है। आठवाँ चालू विपत्र एवं नौवाँ चालू विपत्र का आरोप-01 में विशलेषण किया गया है। उक्त के आलोक में श्री कुमार का कथन सही प्रतीत होता है। वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप सं0-02 यथा SLR bridge एवं स्थान घाट के निर्माण में न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने का आरोप अप्रमाणित पाया गया। परन्तु आरोप सं0-01 यथा स्थानीय सामग्री का उपयोग होने के बावजूद प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने के आरोप को आंशिक अप्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित पाया गया। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा उक्त आंशिक प्रमाणित आरोप के लिए श्री बीरेन्द्र कुामर (ID-5139), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर संप्रति सहायक अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-02, जल संसाधन विभाग, पटना के विरूद्ध ''तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' प्रभाव से रोक का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-519 दिनांक-07.06.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गयी है। अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री बीरेन्द्र कुमार (ID-5139), तत्कालीन सहायक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर संप्रति सहायक अभियंता, उड़नदस्ता अंचल-02, जल संसाधन विभाग, पटना के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :- ''तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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10 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(डि0)-14-13/2016-1444--श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन कमाण्ड क्षेत्र विकास एजेन्सी, भभुआ के पद पर पदस्थापन काल में सियापोखर पार्ट-2, आलाडाही, तुलसीपुर, ममरेजपुर पार्ट-2 एवं जिगना में पक्की सिंचाई नाली निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-770, दिनांक 29.05.2017 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गई। उक्त आलोक में प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत निम्न आरोपों के लिए आरोप पत्र गठित कर श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2293, दिनांक 21.12.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- आरोप सं0-1 :-सियापोखर पार्ट-2, आलाडाही, तुलसीपुर, ममरेजपुर पार्ट-2 एवं जिगना में पक्की सिंचाई नाली निर्माण में वास्तविक कार्य से अधिक मापी मापीपुस्त में दर्ज किया गया। आरोप सं0-2 :-सियापोखर पार्ट-2, आलाडाही, तुलसीपुर, ममरेजपुर पार्ट-2 एवं जिगना ग्राम में कराये गये नाली निर्माण कार्य के विपत्र के अनुसार संवेदकों को भुगतेय राशि से अधिक भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त बिना विपत्र पारित किये भी मनमाने ढंग से संवेदकों को भुगतान किया गया। आरोप सं0-3 :-उक्त कार्यों के विपत्र से न तो रॉयल्टी, वैट, लेबर सेस आदि की कटौती की गयी और न ही सरकार के खजाने में जमा की गई। आरोप सं0-4 :-अधीनस्थों पर प्रशासनिक नियंत्रण का पूर्णतः अभाव पाया गया। इस प्रकार सरकारी राशि का गबन करने, सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाने, कर्त्तव्य में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी हैं। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति श्री ईश्वर सहाय राम को उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक-1880 दिनांक 30.08.2018 द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई। श्री राम द्वारा अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) समर्पित नहीं किया गया। फलस्वरूप श्री राम के विरूद्ध गठित आरोप, आरोप पत्र के साथ संलग्न साक्ष्य एवं उपलब्ध कागजात के आधार पर मामले की सरकार के स्तर पर समीक्षा के उपरांत निम्न तथ्य पाए गए :-

आरोप सं0-1 के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी पर वास्तविक कार्य से अधिक कार्य की मापी मापीपुस्त में दर्ज करने के लांछन की समीक्षा में पाया गया कि मापीपुस्त पर न तो मापी दर्ज करने वाले पदाधिकारी का हस्ताक्षर है और न ही मापी111 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 का सत्यापन करने वाले पदाधिकारी का, यानि कि असंपुष्ट मापी के आधार पर कार्यपालक अभियंता द्वारा विपत्र पारित किया गया। इस प्रकार मापी अवैध एवं अमान्य परिलक्षित होता है। तकनीकी परीक्षक कोषांग (निगरानी विभाग) का पत्रांक-462 दिनांक 30.03.1982 एवं बिहार वित्त नियमावली की कंडिका-266 में अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता के समकक्ष पदाधिकारी) को अधीनस्थों द्वारा ली गयी मापी का कम से कम 50% (प्रतिशत) एवं कंडिका-267 में प्रमंडल पदाधिकारी (कार्यपालक अभियंता) को कम से कम 10% (प्रतिशत) जाँच करने संबंधी प्रावधान है। इस मामले में किसी भी स्तर से मापी की जाँच नहीं की गयी है। मापी में की गई प्रविष्टि का सत्यापन कराए बगैर श्री राम द्वारा संवेदक को भुगतान किया गया है।

चूँकि कार्य की मापी मात्र प्रविष्टि के आधार पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा भुगतान किया गया है इसलिए यह स्पष्ट हो जाता है कि वस्तुतः यह बिना उचित मापी के भुगतान का मामला है। सामान्यतः कनीय अभियंता मापी लेते हैं, सहायक अभियंता स्तर के पदाधिकारी इसकी जाँच करते हैं। तदुपरांत कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँच कर इसे पारित किया जाता है एवं पारित राशि का भुगतान होता है। इस प्रक्रिया में मापपुस्त का विधिवत संधारण करते हुए मापपुस्त मुवमेंट रजिस्टर पर हस्तगत एवं पावती दर्ज की जाती है। सहायक अभियंता स्तर के पदाधिकारी एवं कनीय अभियंता द्वारा विशेष रूप से सियापोखर पार्ट-2, आलाडाही एवं तुलसीपुर में स्थल निरीक्षण के दौरान मापीपुस्त में दर्ज मापी से स्थल पर कम कार्य पाया गया एवं इनके द्वारा संयुक्त रूप से निरीक्षण प्रतिवेदन हस्ताक्षरित है। चूँकि मापी लेने के लिए ये अधिकारी अधिकृत है; अतएव इनके द्वारा की गयी जाँच मान्य है। कार्यपालक अभियंता (आरोपित पदाधिकारी) द्वारा कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता को दरकिनार करते हुए स्वयं मापीपुस्त में मापीदर्ज किया गया है जो संपुष्ट नहीं है। यदि मातहत द्वारा कार्य में टाल-मटोल किया जा रहा था तो किसी अन्य सहायक अभियंता या कनीय अभियंता के प्रतिनियुक्ति पर विचार किया जा सकता था या यदि यह संभव नहीं था तो अधीक्षण अभियंता या उच्चाधिकारी के संज्ञान में लाकर मजबूरी में अधीनस्थ पदाधिकारियों के स्तर का कार्य भी कर सकते थे। उक्त के आलोक में एक अहस्ताक्षरित मापी के विरूद्ध एक हस्ताक्षरित प्रतिवेदन को माना जाना तर्क संगत है। यानि सियापोखर-2, आलाडाही एवं तुलसीपुर में नाली निर्माण का कार्य वास्तविकता से ज्यादा मापपुस्त पर दर्ज मानने का आधार पर्याप्त है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उक्त मंतव्य देते हुए आरोप को प्रमाणित माना है, जिससे सहमत होते हुए आरोप सं0-1 प्रमाणित होता है।

आरोप सं0-2 के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी पर पक्की सिंचाई नाली निर्माण में विपत्र के अनुसार संवेदक को अधिक भुगतान किए जाने एवं कतिपय विपत्र बिना पारित किए मनमाने ढंग से भुगतान किए जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का मुख्यतः कहना है कि कार्य 100% पूर्ण था एवं विपत्र की राशि से कम भुगतान संवेदक को किया गया है साथ ही कहना है कि योजना तुलसीपुर एवं जिगना के विपत्र पर चुनाव ड्‌यूटी में व्यस्तता एवं अन्य कारण से हस्ताक्षर छूट गया होगा। सोन काडा स्तर से समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं साक्ष्य से निम्न तथ्य की पुष्टि होती है -

योजना का नाम विपत्र पारित होने की स्थिति JE/AE/EE के हस्ताक्षर की स्थिति एकरारनामा सं0 मापीपुस्त सं0 विपत्र राशि (रू0) विपत्र के अनुसार संवेदक को भुगतान की जाने वाली राशि (रू0) वास्तविक रूप से संवेदक को भुगतान की गई राशि (रू0)
1 2 3 4 5 6 7 8
आलाडाही पारित 9.4.16 नहीं 26F2/15-16 2/16-17 6,17,489/- 3,81,466/- 5,00,000/-
सियापोखर-2 पारित 27.4.16 नहीं 06F2/16-17 4/16-17 8,15,315/- 5,18,088/- 6,00,000/-
जिगना नहीं नहीं 07F2/16-17 6/16-17 7,18,586/- 4,56,466/- 5,00,000/-
ममरेजपुर-2 पारित 12.5.16 नहीं 03F2/16-17 26/16-17 7,52,896/- 4,79,134/- 6,00,000/-
तुलसीपुर नहीं नहीं 04F2/16-17 36/16-17 6,07,475/- 3,86,697/- 3,00,000/-

स्तम्भ (8) में संवेदक को भुगतान की गई राशि एवं स्तम्भ (6) में अंकित विपत्र की राशि के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-1 के अपने बयान में स्वीकार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी स्तम्भ (6) में अंकित विपत्र की राशि के विरूद्ध स्तम्भ (8) में अंकित राशि का भुगतान किया गया जो संवेदक को भुगतान की जाने वाली राशि से भिन्न है, जिसे नियमसंगत भुगतान नहीं माना जा सकता है।

उपरोक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि मनमाने ढंग से चार योजनाओं में विपत्र के अनुसार संवेदक को वास्तविक रूप से भुगतान की जाने वाली राशि से अधिक एवं एक योजना (तुलसीपुर) में कम भुगतान किया गया जो नियमसंगत भुगतान नहीं है।

उपरोक्त तालिकाओं से विपत्र की राशि से कम भुगतान किए जाने की आरोपित पदाधिकारी के कथन की पुष्टि होती है। परन्तु संवेदक को किया गया भुगतान वास्तविक रूप से भुगतान की जाने वाली राशि से अधिक किया जाना प्रमाणित होता है।

मापीपुस्त की प्रति के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि मापीपुस्त न तो निर्गत है और अंकित मापी सहायक अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँचित नहीं है, जो कि विपत्र पारित करने के पूर्व नियमानुसार आवश्यक होता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा आलाडाही, सियापोखर-2 एवं ममरेजपुर-2 के विपत्र को C&P कर पारित किया गया है जबकि जिगना एवं तुलसीपुर का मनमाने ढंग से नियमों को ताक पर रखकर बिना पारित किये संवेदक को भुगतान किया गया।112 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अतः विभागीय दिशा निदेशों के बिना अनुपालन किए मनमाने ढंग से विपत्र पारित/बिना पारित के संवेदक को भुगतान किया गया।

इस प्रकार विपत्र के अनुसार संवेदक को वास्तविक रूप से भुगतान की जानेवाली राशि से मनमाने ढंग से अधिक राशि भुगतान किए जाने के मामला को संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित माना है जिससे सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित होता है।

आरोप सं0-3 उक्त कार्यों के विपत्र से न तो रॉयल्टी, वैट, लेबर सेस आदि की कटौती की गई है और न ही सरकार के खजाने में जमा किए जाने का आरोप है।

इस संबंध में समीक्षा में पाया गया कि मापीपुस्त सं0-4/2016-17, 2/2016-17, 36/2016-17, 26/2016-17 एवं 6/2016-17 के अवलोकन से ज्ञात होता है कि संदर्भित 5 अद्‌द कार्यों के विपत्रों से इनकम टैक्स 1 प्रतिशत सुरक्षित जमा राशि, रॉयल्टी, भैट, लाभुक का हिस्सा, लेबर सेस की राशि सरकारी खजाने में उचित शीर्ष में Book Transfer या चालान द्वारा जमा की जाती है। Memo of payment के अनुसार संवेदक की चेक की राशि से भिन्न राशि का भुगतान किया गया है, ऐसी स्थिति में Memo में प्रविष्टि की गई अन्य कटौतियों की राशि वास्तविक नहीं रह गई है। इन राशियों का लेखा-जोखा निश्चित रूप से संधारित किया जाना संभव नहीं होता है जब तक Memo of Payment को रद्‌द नहीं किया जाय। चूँकि संशोधित Memo of payment तैयार नहीं किया गया है अतएव विपत्रों में की गई कटौती की राशि का उल्लेख सिर्फ कागजी एवं अनियमित है। इन Memo में वर्णित राशियों को अग्रेसित कर भविष्य में अंतिम विपत्र के साथ भी आकलित कर सरकारी खजाने में नहीं जमा किया जा सकता बशर्त्ते कि संशोधित Memo न बनाया जाय। जाहिर है कि कटौती की राशियाँ केवल कागजी है। ये राशियाँ भविष्य में जमा करने योग्य है जब तक कि Memo को Revise नहीं किया जाय। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित होता है।

आरोप सं0-4 के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने नियंत्री पदाधिकारी अधीक्षण अभियंता तथा अपने अधीनस्थ सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, प्रधान लिपिक, लेखा लिपिक आदि पर कतिपय गंभीर अनियमितता करने का उल्लेख किया है, जिसे संचालन पदाधिकारी द्वारा विचारणाीय नहीं कहा गया है। यदि गंभीर अनियमितता का मामला प्रकाश में आया तो आरोपित पदाधिकारी को सक्षम स्तर के पदाधिकारियों को प्रतिवेदित किया जाना चाहिए था। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने प्रमंडल अंतर्गत कार्यों की मापी कनीय अभियंता से नहीं की तो उनके विरूद्ध, सहायक अभियंता ने जाँच नहीं की तो उनके विरूद्ध, कार्यालय के कर्मी ने यदि विपत्र को चेक करने या भुगतान करने में उदासीनता दिखलाई तो उनके विरूद्ध उचित अनुशासनिक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजना इनका उत्तरदायित्व था। उनका स्थानांतरण का प्रस्ताव भी उच्चाधिकारी को भेजकर अन्य कर्मियों का पदस्थापन/प्रतिनियुक्ति कराया जा सकता था। इस प्रकार कोई कार्रवाई किए जाने का उल्लेख आरोपित पदाधिकारी ने नहीं किया है जो अधीनस्थों पर पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण लाने के प्रयास का अभाव को प्रतिबंधित करता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त मंतव्य देेते हुए आरोप को प्रमाणित माना है, जिससे सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित माना जा सकता है।

उपरोक्त समीक्षा, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपी पदाधिकारी से पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर साढ़े तीन माह से अधिक अवधि बीत जाने के बावजूद उपलब्ध कराने में विफल रहने के फलस्वरूप विभागीय कार्यवाही के क्रम में प्राप्त बचाव-बयान के आलोक में श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन कमाण्ड क्षेत्र विकास एजेन्सी, भभुआ के पदस्थापन काल में पक्की सिंचाई नाली निर्माण कार्य में मनमाने ढंग से विभागीय दिशा-निर्देशों एवं संहिता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन करते हुए पक्की नाली निर्माण में वास्तविकता से अधिक का मापीपुस्त में मापी दर्ज करने, संवेदक को भुगतेय राशि से अधिक मनमाने ढंग से कुछ विपत्रों को नियमों की अनदेखी करते हुए विपत्र पारित कर भुगतान करने एवं कुछ में बिना विपत्र पारित के भी संवेदक को भुगतान किए जाने, विपत्रों से काटी गई रॉयल्टी, भैट, लेवर सेस आदि की राशि का उल्लेख मात्र कागजी एवं अनियमित करते हुए सरकारी खजाने में राशि जमा नहीं करने तथा अधीनस्थों पर पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण लाने के प्रयास में कोई कार्रवाई नहीं किये जाने के सभी चार आरोपों को संचालन पदाधिकारी द्वारा भी प्रमाणित पाये जाने के मंतव्य पर सहमत होते हुए आरोप सं0-1, 2, 3 एवं 4 के आरोप प्रमाणित पाया गया।

साथ ही उल्लेखनीय है कि श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति तकनीकी सलाहकार उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद तथा कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल, औरंगाबाद के विरूद्ध पूर्व से अब तक निम्न दण्ड दिया जा चुका है -

क्र0. संक्षिप्त आरोप अधिसूचना सं0/दिनांक संचालन पदा0 का मंतव्य/निष्कर्ष निर्गत दण्ड
01. श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध दिनांक 12.04.2005 से अधिसूचना सं0-1178 दिनांक 25.08.2013 केवल स्पष्टीकरण पूछा गया। (1) दिनांक 12.04.2005 से 06.12.2005 तक कार्य नहीं तो वेतन नहीं। परन्तु उक्त अवधि को पे शन प्रदायी माना ं जाएगा। (2) आदेश निर्गत की तिथि से दो वर्षों तक प्रोन्नति
06.12.2005 तक कार्य से अनुपस्थित रहने के संबंध में गठित आरोप। पर रोक।
02. श्री ईश्वर सहाय राम, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल सं0-02, वीरपुर, सुपौल में पदस्थापन के दौरान वर्ष 2006-07 एवं 2007-08 में सम विकास योजना के तहत निर्मित सात अद्‌द स्लूईस गेटों के कार्य में अनियमितता बरतने क े संबंध मे । ं अधिसूचना सं0-131 दिनांक 31.01.2013 संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। (1) निन्दन वर्ष 2006-07 (2) संचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि।
03. श्री ईश्वर सहाय राम, तत्का0 कार्यपालक अभियंता तटबंध प्रमंडल सं0-02, वीरपुर के विरूद्ध सम विकास योजना से संबंधित मूल अभिलेख आदि गायब करने के संबंध में। अधिसूचना सं0-1971 दिनांक 02.09.2015 श्री ईश्वर सहाय राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को दोषी माना है। दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।
04. श्री ईश्वर सहाय राम, तत्का0 कार्यपालक अभियंता, जल पथ प्रमंडल, मोहनियाँ द्वारा अपने कार्य स्थल से गायब रहने, नहर के टूटान की सूचना नहीं देने, गाली-गलौज करने, धमकी देने आदि क े आरोप। अधिसूचना सं0-1107 दिनांक 15.06.2016 केवल स्पष्टीकरण पूछा गया। चेतावनी।
05. श्री ईश्वर सहाय राम, तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अ चल, ं औरंगाबाद तथा कार्य0 अभि0, रूपांकण प ्रमंडल, औरंगाबाद (अतिरिक्त प्रभार) के विरूद्ध सरकारी कार्यों का ससमय निष्पादन नहीं करने उच्चाधिकारियों के आदेश के अवहेलना, मनमाने ढंग से मुख्यालय से बाहर रहने, कर्मचारियों को प्रताडित करने एवं सरकारी आवास खाली नहीं करने का आरोप। अधिसूचना सं0-457 दिनांक 01.03.2019 प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण प छा ू गया। दो वार्षिक व तनवृद्धि े पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
113 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होता है कि श्री राम को सेवाकाल में पाँच विभागीय कार्यवाही में दंडित किया जा चुका है, तथा वर्तमान में एक मामला लंबित है। इससे स्पष्टतः परिलक्षित होता है कि श्री राम का सेवाकाल पूर्णतः दागदार रहा है।

2. मामले की सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन कमाण्ड क्षेत्र विकास एजेन्सी भभुआ सम्प्रति तकनीकी सलाहकार उत्तर कोयल नहर अंचल,114 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 औरंगाबाद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के तहत "आदेश निर्गत की तिथि से अनिवार्य सेवानिवृति" करने का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त प्रस्तावित दण्ड में माननीय विभागीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय के अनुमोदनोपरांत बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-533, दिनांक 07.06.2019 द्वारा सहमति प्राप्त करते हुए दिनांक 02.07.2019 को मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित प्रस्ताव के आलोक में श्री ईश्वर सहाय राम (आई0डी0-4570) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन कमाण्ड क्षेत्र विकास एजेन्सी, भभुआ सम्प्रति तकनीकी सलाहकार, उत्तर कोयल नहर अंचल, औरंगाबाद को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है :-

"आदेश निर्गत की तिथि से अनिवार्य सेवानिवृति"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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10 जुलाई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-12/2016/1445--श्री इन्द्रनाथ प्रसाद (आई0डी0-जे-9048), तत्कालीन सहायक अभियंता, गंगा पम्प नहर अंचल, चौसा सम्प्रति सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, अंचल, पटना के पदस्थापन अवधि के दौरान उनके विरूद्ध वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से कम दर पर चाट भूमि की बन्दोबस्ती करने एवं इसके फलस्वरूप सरकार को आर्थिक हानि पहुँचाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप -बिहार सिंचाई सार संग्रह (हस्तक) तथा इसके निर्गत अनुदेशों के अंतर्गत जल दर सहित समय-समय पर संशोधित विहित दर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और भूमिहीन किसानों को जल दर पर प्राथमिकता प्रत्येक वर्ष जून से फरवरी की अवधि तक नौ महीनों के लिए पट्‌टा पर चाट भूमि की बंदोबस्ती की जाती है।

भारत नियंत्रक एवं महालेखाकार परीक्षक के प्रतिवेदन वर्ष 2003-04(रा0प्रा0) की कंडिका 6.10 के अनुसार गंगा पम्न नहर प्रमंडल, बक्सर तथा सोन नहर प्रमंडल, बक्सर में देखा गया कि वर्ष 2002-03 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से काफी कम दर अर्थात 213 रूपये प्रति एकड़ की दर से बन्दोबस्ती की गई, जिसके फलस्वरूप 23.71लाख रूपये के कम राजस्व की वसूली हुई। सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिए आप दोषी है।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा विभाग के द्वारा की गई। समीक्षा के क्रम में आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के कंडिका-'क' के विभिन्न उप कंडिकाओं में मुख्य रूप से सोन नहर अवर प्रमंडल, मनोहरपुर में 23. 07.02 से 11.11.08 अवधि तक पदस्थापित रहने एवं चाट बंदोबस्ती संबंधी संशोधित दर पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 प्राप्त नहीं रहने की स्थिति में पूर्व से संसूचित दर के आधार पर चाट लगान की वसूली की गई तथा 01.03.04 को प्रथम बार अंकेक्षण दल द्वारा उक्त पत्र उपलब्ध कराये जाने के उपरांत पत्रांक-446, दिनांक 19.03.04 से संशोधित दर से चाट लगान की वसूली करने का निदेश दिया गया। साथ ही कार्यपालक अभियंता चौसा (बक्सर) का पत्रांक-365, दिनांक 06.10.06 के आधार पर उक्त पत्र उपलब्ध नहीं होना प्रतिवेदित किया गया।

संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं विभागीय अभिमत के संदर्भ में कंडिका-'ख' एवं उप कंडिका में प्रतिवेदित किया गया है कि उक्त अवधि में ई-मेल अपना इंटरनेट से सूचनाओं का आदान प्रदान की सुविध नहीं रहने, कार्यपालक अभियंता, चौसा, बक्सर के पत्रांक-365, दिनांक 06.10.16 एवं मुख्य अभियंता, डिहरी का पत्रांक-1078, दिनांक 21.10.16 से उक्त पत्र प्राप्त नहीं होना एवं उच्चाधिकारी को प्राप्त नहीं होने की स्थिति में अवर प्रमंडल में प्राप्त नहीं होने को प्रतिवेदित किया गया है। साथ ही आयुक्त एवं सचिव के पत्रांक-432, दिनांक 17.11.06 के आधार पर उक्त पत्र प्राप्त नहीं होने की विभाग को जानकारी होने को बताया गया है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिए बयान के लगभग सदृश द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में अंकित होने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्षतः आरोपित पदाधिकारी के सरकारी राजस्व को हानि पहुँचाने के लिए दोषी माना गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा नया तथ्य नहीं दिए जाने की स्थिति में विभाग संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत हुआ।

अतएव संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के आलोक में सम्यक समीक्षोपरांत विभाग द्वारा श्री इन्द्रनाथ प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया :-

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-7-33/2018(271)/लो0से0आ0, दिनांक 08.

05.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

अतएव श्री इन्द्रनाथ प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, गंगा पम्प नहर अंचल, चौसा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।115 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 "दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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10 जुलाई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-12/2016/1446--श्री भूपेश प्रसाद सिंह (आई0डी0-3246), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अनुमंडल, कृष्णपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता सिंचाई अंचल, भभुआ के पदस्थापन अवधि के दौरान उनके विरूद्ध वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से कम दर पर चाट भूमि की बन्दोबस्ती करने एवं इसके फलस्वरूप सरकार को आर्थिक हानि पहुँचाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 से विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप -बिहार सिंचाई सार संग्रह (हस्तक) तथा इसके निर्गत अनुदेशों के अंतर्गत जल दर सहित समय-समय पर संशोधित विहित दर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और भूमिहीन किसानों को जल दर पर प्राथमिकता प्रत्येक वर्ष जून से फरवरी की अवधि तक नौ महीनों के लिए पट्‌टा पर चाट भूमि की बंदोबस्ती की जाती है।

भारत नियंत्रक एवं महालेखाकार के अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2003-04 के कंडिका 6.10 के अनुसार गंगा पम्प नहर प्रमंडल, बक्सर तथा सोन नहर प्रमंडल, बक्सर के अन्तर्गत वर्ष 2002-03 में संशोधित दर से काफी कम दर (रूपये 213/- प्रति एकड़) से बन्दोबस्ती की गई, जिसके फलस्वरूप 23.71लाख कम वसूली हुई। सरकार को आर्थिक हानि पहुँचाने के लिए आप दोषी है।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर में प्रतिवेदित किया गया है कि संकल्प के साथ संलग्न विभागीय पत्रांक-432, दिनांक 17.11.2006 में विभाग के समक्ष यह मामला प्रकाश में आया है कि विषयांकित प्रमंडलों में उक्त पत्र की प्रति ससमय उपलब्ध नहीं हो पाई जबकि संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्षतः इसकी सूचना अप्रैल 2002 में ही सभी क्षेत्रीय पदाधिकारी को संसूचित है, बिल्कुल विपरीत है। अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 6.9 एवं 6.10 से संबंधित उत्तर प्रतिवेदन से संबंधित विभागीय पत्रांक-432, दिनांक 17.

11.06 में आरोपित पदाधिकारी द्वारा यथा उल्लेखित तथ्य के साथ-साथ अंकित है कि पुराने दर से चाट बन्दोबस्ती के कारण राजस्व हानि के लिए संबंधित पदाधिकारी ही दोषी है। जिन्हें चिन्हित करते हुए अंतर की राशि की वसूली दोषी पदाधिकारी से किया जाय एवं तदनुसार माननीय न्यायालय में प्रतिशपथ पत्र दायर कर दिये जाने का उल्लेख है। मुख्य अभियंता, डिहरी के पत्रांक-1078, दिनांक 21.10.16 से विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 की प्रति उनको प्राप्त नहीं होने की संभावना व्यक्त की गई है एवं हर माह नोडल पदाधिकारी एवं मासिक बैठक में विभागीय स्तर से निर्गत निदेशों से क्षेत्रीय पदाधिकारी को अवगत कराए जाने का उल्लेख है। साथ ही विभागीय निदेशों के अनुरूप वित्तीय मामला का निष्पादन का दायित्व क्षेत्रीय पदाधिकारी को बताया गया है एवं अनियमितता पाए जाने पर पत्र की जानकारी नहीं होने के बयान को हास्यास्पद माना गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा संशोधित दर की सूचना अप्रैल 2002 में ही संसूचित होने को अंकित किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा सरकारी चाट के पट्‌टे के लिए पुनरीक्षित नियम के कंडिका-7 को उल्लेखित करते हुए प्रतिवेदित किया गया है चाट बन्दोबस्ती के लगान का निर्धारण कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाता है। समीक्षा के प्रस्तुत मामले में अंकेक्षण निरीक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 एवं 6.10 से स्पष्ट है कि विभाग द्वारा चाट बन्दोबस्ती किए जाने से कम राजस्व की वसूली हुई। इससे स्पष्ट होते है कि चाट बन्दोबस्ती में विभागीय अनुदेशों का पालन नहीं किया गया। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर की सम्यक समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई।समीक्षोपरांत श्री भूपेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया -

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-7-35/2018(274)/लो0से0आ0, दिनांक 08.

05.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

अतएव श्री भूपेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अनुमंडल, कृष्णपुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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11 जुलाई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-12/2016/1452--श्री विनोद कुमार दास (आई0डी0-3469), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी अंचल डिहरी सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, पूर्णियाँ के पदस्थापन अवधि के दौरान उनके विरूद्ध116 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से कम दर पर चाट भूमि की बन्दोबस्ती करने एवं इसके फलस्वरूप सरकार को आर्थिक हानि का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप -बिहार सिंचाई नियमावली और उसके अधीन निर्गत अनुदेशों के प्रावधान के अन्तर्गत चाट भूमि की बन्दोबस्ती प्रत्येक वर्ष 25 जून से 25 मार्च तक की अवधि के लिए नौ महीने के पट्‌टे पर प्राथमिकता के आधार पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और भूमिहीन किसानों को जल दर सहित समय-समय पर पुनरीक्षित विहित दरों पर किया जाना है। विभाग ने मार्च 2002 में एक/दो फसली चाट भूमि का बन्दोबस्ती के लिए दरों के पुनरीक्षण आदेश जारी किया। भारत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन वर्ष 2004-05(रा0प्रा0) की कंडिका 7.5 के अनुसार डेहरी प्रमंडल, डेहरी तथा सोन प्रमंडल, विक्रमगंज में देखा गया कि 5115 एकड़ की दो फसली चाट भूमि की बन्दोबस्ती वर्ष 2002-2003 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारति पुनरीक्षित दर से काफी कम दर अर्थात 213 रूपए प्रति एकड़ की दर से बन्दोबस्ती की गई, जिसके फलस्वरूप 48.60 लाख रूपए के कम की वसूली हुई। सरकार को हानि पहुँचाने के लिए आप दोषी हैं।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई।

आरोपित पदाधिकारी ने संचालन पदाधिकारी को दिए गये बचाव-बयान दिनांक 28.04.2017 की उनके द्वारा पूर्ण समीक्षा नहीं किये जाने को प्रतिवेदित करते हुए उन्हीं तथ्यों को अपने द्वितीय कारण पृच्छा बयान के प्रत्युत्तर में अंकित किया गया।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा डिहरी प्रमंडल डिहरी का जुलाई 2003 में प्रभार लेने के आलोक में वर्ष 2002-03 से संबंधित नहीं होने को प्रतिवेदित किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रभार प्रतिवेदन संलग्न नहीं किया गया। परन्तु रक्षित बायोडाटा से आरोपित पदाधिकारी के डिहरी प्रमंडल डिहरी में जुलाई 2003 से जुलाई 2009 तक पदस्थापित रहे। आरोप से स्पष्ट होता है कि जून से मार्च तक 9 माह के लिए बन्दोबस्ती किया जाना है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभागीय पत्रांक-773 दिनांक 06.04.02 उनके कार्यालय में प्राप्त नहीं होने का उल्लेख किया गया है जबकि उक्त पत्र फैक्स द्वारा मुख्य अभियंता को निदेश के साथ भेजा जाना पत्र से स्पष्ट होता है। साथ ही राजस्व क्षति की वसूली दोषी पदाधिकारी से किये जाने का शपथ पत्र माननीय न्यायालय में विभाग द्वारा दायर किया जा चुका है।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख है कि किसी पदाधिकारी का दायित्व है कि विभागीय निदेशों के अनुरूप वित्तीय मामले का निष्पादन किया जाना है। परन्तु ऐसा न कर वित्तीय अनियमितता होने के पश्चात किसी भी पदाधिकारी द्वारा तर्क दिया जाना कि उन्हें पत्र की जानकारी नहीं थी, हास्यास्पद प्रतीत होता है। इससे स्पष्ट है कि दास द्वारा विभागीय निदेशों को संज्ञान में नहीं लिया गया और निष्कर्षतः राजस्व क्षति पहुँचाने के लिए दोषी माना गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित नोडल पदाधिकारी एवं मासिक बैठक में विभागीय स्तर से निर्गत निदेशों से क्षेत्रीय पदाधिकारी को अवगत कराया जाता रहा है के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उक्त बैठक में कार्यपालक अभियंता सम्मिलित नहीं होते है तथा कार्यवाही प्रतिवेदन एवं पावती की प्रति पुनः स्थिति स्पष्ट करने हेतु मांग की गयी है साथ ही पत्र निर्गत होने से उपलब्ध हो जाने का तात्पर्य नहीं लगाया जाने को प्रतिवेदित किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभागीय पत्रांक-773 दिनांक 06.04.2002 मुख्य अभियंता को प्राप्त नहीं होने संबंधित दोषी पदाधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। इस संदर्भ में उक्त पत्र फैक्स द्वारा मुख्य अभियंता को प्रेषित किया जाना परिलक्षित होता है।

अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 से सोन नहर प्रमंडल, विक्रमगंज एवं डेहरी प्रमंडल डेहरी के अन्तर्गत वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 में कम दर पर बन्दोबस्ती किये जाने से समेकित रूप से 5115 एकड़ भूमि के विरूद्ध रू0 48.60 लाख राजस्व की क्षति हुई। आरोपित पदाधिकारी को डेहरी प्रमंडल, डेहरी में वर्ष 03-04 में पदस्थापित रहना बायोडाटा से स्पष्ट होता है। विभाग द्वारा दोषी पदाधिकारी से राजस्व क्षति की वसूली किये जाने का निर्णय लिया गया एवं माननीय उच्च न्यायालय में प्रतिशपथ पत्र दायर किया गया।

इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के सम्यक समीक्षोपरांत श्री विनोद कुमार दास को कम राजस्व की वसूली का आरोप प्रमाणित पाते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया- "दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-7-35/2018(277)/लो0से0आ0, दिनांक 08.

05.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

अतएव श्री विनोद कुमार दास (आई0डी0-3469), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डिहरी अंचल डिहरी सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, पूर्णियाँ के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।117 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

11 जुलाई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-12/2016/1453--श्री हरीश कुमार (आई0डी0-3856), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन नहर अंचल, विक्रमगंज सम्प्रति मुख्य अभियंता, बिहार मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, विस्कोमान भवन, पटना के पदस्थापन अवधि के दौरान उनके विरूद्ध वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से कम दर पर चाट भूमि की बन्दोबस्ती करने एवं इसके फलस्वरूप सरकार को आर्थिक हानि पहुँचाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप -बिहार सिंचाई नियमावली और उसके अधीन निर्गत अनुदेशों के प्रावधान के अन्तर्गत चाट भूमि की बन्दोबस्ती प्रत्येक वर्ष 25 जून से 25 मार्च तक की अवधि के लिए नौ महीने के पट्‌टे पर प्राथमिकता के आधार पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और भूमिहीन किसानों को जल दर सहित समय-समय पर पुनरीक्षित विहित दरों पर किया जाना है। विभाग ने मार्च 2002 में एक/दो फसली चाट भूमि का बन्दोबस्ती के लिए दरों के पुनरीक्षण आदेश जारी किया। भारत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन वर्ष 2004-05(रा0प्रा0) की कंडिका 7.5 के अनुसार डेहरी प्रमंडल, डेहरी तथा सोन प्रमंडल, विक्रमगंज में देखा गया कि 5115 एकड़ की दो फसली चाट भूमि की बन्दोबस्ती वर्ष 2002-2003 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से काफी कम दर अर्थात 213 रूपए प्रति एकड़ की दर से बन्दोबस्ती की गई, जिसके फलस्वरूप 48.60 लाख रूपए के कम की वसूली हुई। सरकार को हानि पहुँचाने के लिए आप दोषी हैं।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी श्री हरिश कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के कंडिका-2 एवं उपकंडिकाओं में मार्च 2002 में दो फसली चाट भूमि बन्दोबस्ती का पुनरीक्षित दर संबंधी साक्ष्य न देकर असंगत साक्ष्य पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 की प्रति संलग्न किये जाने, डिहरी प्रमंडल, डिहरी एवं सोन नहर प्रमंडल, विक्रमगंज के लिए समेकित रूप से आरोपित 5115 एकड़/रू0 48.60 लाख से प्रमंडलवार आंकड़ा बिना अलग किये विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने, विभागीय कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए विलम्ब से विभागीय अभिमत दिये जाने, मार्च 2002 का विभागीय आदेश उपलब्ध नहीं कराने, प्रति परीक्षण नहीं कराये जाने एवं अन्य तथ्यों को उद्धत करते हुए सी0सी0ए0 नियमावली 2005 के नियम एवं उपनियम सा0प्र0वि0 के पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 एवं पत्रांक-9407, दिनांक 02.07.2012 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मनमाने ढंग से आरोप प्रमाणित किए जाने को कहा गया।

विभागीय समीक्षा में अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 में चाट बन्दोबस्ती का पुनरीक्षित दर मार्च 2002 में ही भेजे जाने एवं आरोप पत्र में मार्च 2002 में पुनरीक्षित दर आदेश जारी होने का उल्लेख तथा साक्ष्य स्वरूप संलग्न पुनरीक्षित दर आदेश पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 होना परिलक्षित होता है। हालांकि वर्ष 2002-03 में चाट बन्दोबस्ती 25 जून 2002 से 25 मार्च 2003 की अवधि के लिए किया जाना है, जो आदेश पत्र निर्गत दिनांक 06.04.2002 के बाद का है।

इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन द्वितीय कारण पृच्छा प्रत्युत्तर के सम्यक समीक्षोपरांत श्री हरीश कुमार का आरोप प्रमाणित पाते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया-

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-7-35/2018(273)/लो0से0आ0, दिनांक 08.

05.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

अतएव श्री हरीश कुमार (आई0डी0-3856), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन नहर अंचल, विक्रमगंज के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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12 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सम0)02-08/2017-1460--श्री संजय कुमार सुमन (आई0डी0-5089), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल संख्या-02, झंझारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब श्री सुमन के विरूद्ध बाढ़ संघर्षात्मक कार्य संबंधी विभागीय आदेशों की अवहेलना करने, अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहने, संवेदनशील कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के बेतार संदेश के समीक्षोपरांत प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए अधिसूचना संख्या-1614, दिनांक 14.09.17 द्वारा निलंबित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1679, दिनांक 20.09.17 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु नियुक्त संचालन पदाधिकारी द्वारा विभाग में समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सुमन के विरूद्ध आरोप पत्र में गठित आरोप को तीन भाग (अंश) में विभक्त कर मामले के समीक्षोपरांत प्रथम अंश एवं तृतीय अंश118 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए निम्न प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1112, दिनांक 22.05.18 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री सुमन से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी -

आरोप -01- (प्रथम अंश) -कमला बलान दायाँ तटबंध के कि0मी0 73.50 एवं 74.60 पर हुए टूटान के कट इंड को होल्ड करने हेतु दिये गए निदेश को अनदेखी करना, जो आदेश की अवहेलना दर्शाता है एवं कार्य के प्रति उदासीनता दर्शाता है।

आरोप -03- (तृतीय अंश) -बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पर्याप्त मात्रा में सामग्री एवं मानव बल की व्यवस्था नहीं कर बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्य में घोर लापरवाही बरते जाने के कारण जान-माल की क्षति पहुँचना।

उक्त के आलेाक में श्री सुमन द्वारा विभाग में समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में मुख्यतः निम्न बातें कही गयी -

आरोप -01-(प्रथम अंश)-अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना के बेतार संवाद-348, दिनांक 13.08.17 का उल्लेख करते हुए श्री सुमन द्वारा कहा गया है कि कमला-बलान दायाँ तटबंध के कि0मी0 72.50 का पूर्ण प्रभार कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल संख्या-01, झंझारपुर को सौपा गया था। फलतः कि0मी0 74. 60 के कट इन्ड को होल्ड करने के लिए दिनांक 14.08.17 को 25000ई0सी0 बैग संवेदक श्री पप्पु सिंह को दिया गया, जिसे भरकर रखा गया था। जिस पर संचालन पदाधिकारी द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।

आरोप -03-(तृतीय अंश)-श्री सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि उक्त आरोप को प्रमाणित करने के लिए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी कोई गवाह एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जबकि 44.0 कि0मी0 से 75.0 कि0मी0 के बीच दिनांक 13.08.17 के मध्य रात्रि से पूरी गति से कार्य कराया गया है जिसमें 108,800 ई0सी0 बैग का उपयोग किया गया है। साथ ही अन्य सामग्री NC का उपयोग किया गया है।

उक्त के आलोक में श्री सुमन से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी जिसमें निम्न तथ्य पाया गया -

श्री सुमन द्वारा आरोप के प्रथम अंश के लिए अपने बचाव बयान में वही तथ्य को दोहराया गया है जो संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखा गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि मुख्य अभियंता के NR-56 दिनांक 14.08.17 में कट इण्ड को होल्ड करने के लिए कार्यपालक अभियंता को स्मारित किया गया एवं उस पत्र में श्री सुमन का भी नाम का उल्लेख है। बेतार संवाद-349, दिनांक 13.08.17 से स्पष्ट होता है कि विभाग द्वारा टूटान स्थल के मरम्मति हेतु मुख्य अभियंता, समस्तीपुर को बाढ़ संघर्षात्मक सामग्री की व्यवस्था का कार्य भार सौंपा गया है। इससे स्पष्ट है कि उक्त स्थल पर आवश्यकतानुसार सामग्री की व्यवस्था होना परिलक्षित नहीं होता है। ऐसी स्थिति में आरोपी का कथन कि कि0मी0 74.60 पर बाढ़ सामग्री उपलब्ध कराया गया था, स्वीकार योग्य नहीं है। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप के प्रथम अंश को प्रमाणित माना गया है।

श्री सुमन द्वारा आरोप के तृतीय अंश के संबंध में कहा गया है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप को प्रमाणित करने के लिए कोई गवाह या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जबकि 44.0 कि0मी0 से 75.0कि0मी0 के बीच दिनांक 13.08.17 के मध्य रात्रि से पूरी गति से कार्य कराया गया है जिसमें 108,800 ई0सी0 बैग का उपयोग किया गया है। साथ ही अन्य सामग्री NC का उपयोग किया गया है।

उक्त के आलोक में कहना है कि दिनांक 13.08.17 एवं 14.08.17 को कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के प्रगति प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि तटबंध के विभिन्न रीच में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया है परन्तु उक्त दोनों टूटान बिन्दुओं यथा 73.5 कि0मी0 एवं 74.60 कि0मी0 (यथा Specific टूटान बिन्दु) उक्त तिथि को कार्य कराया जाना परिलक्षित नहीं होता है। ऐसी स्थिति में आरोपी का यह कथन कि दिनांक 13.08.17 के मध्य रात्रि से कार्य कराकर तटबंध को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है, स्वीकार योग्य नहीं है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप के तृतीय अंश को प्रमाणित माना गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुमन द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य विभागीय आदेशों की अवहेलना करने, संवेदनशील कार्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी आरोपों के संबंध में दिया गया द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार योग्य नहीं है। फलस्वरूप श्री संजय कुमार सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-02, झंझारपुर को निलंबन मुक्त करने एवं प्रमाणित आरोप के लिए "आठ (08) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। जिस पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। तदालोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2168, दिनांक 26.09.18 द्वारा श्री सुमन को निलंबन मुक्त किया गया। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त है।

सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं0-02, झंझारपुर को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

" आठ (08) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।119 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

12 जुलाई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-12/2016/1468--श्री महेन्द्र चौधरी (आई0डी0-4732), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अंचल, विक्रमगंज सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन अवधि के दौरान उनके विरूद्ध वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से कम दर पर चाट भूमि की बन्दोबस्ती करने एवं इसके फलस्वरूप सरकार को आर्थिक हानि पहुँचाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 से विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप -बिहार सिंचाई नियमावली एवं उसके अधीन निर्गत अनुदेशों के प्रावधान के अन्तर्गत चाट भूमि की बन्दोबस्ती प्रत्येक वर्ष 25 जून से 25 मार्च तक की अवधि के लिए नौ महीने के पट्‌टे पर प्राथमिकता के आधार पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और भूमिहीन किसानों को जल दर सहित समय-समय पर पुनरीक्षित विहित दरों पर किया जाना है। विभाग ने मार्च 2002 में एक/दो फसली चाट भूमि का बन्दोबस्ती के लिए दरों के पुनरीक्षण आदेश जारी किया। भारत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन वर्ष 2004-05(रा0प्रा0) की कंडिका 7.5 के अनुसार डेहरी प्रमंडल, डेहरी तथा सोन प्रमंडल, विक्रमगंज में देखा गया कि 5115 एकड़ की दो फसली चाट भूमि की बन्दोबस्ती वर्ष 2002-2003 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारति पुनरीक्षित दर से काफी कम दर अर्थात 213 रूपए प्रति एकड़ की दर से बन्दोबस्ती की गई, जिसके फलस्वरूप 48.60 लाख रूपए के कम की वसूली हुई। सरकार को हानि पहुँचाने के लिए आप दोषी हैं।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा विभाग के द्वारा की गई। समीक्षा के क्रम में निम्न तथ्यों पर विचार किया गया।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की कंडिका (i)(क) में अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमंडल सिद्धिपुर शिविर नावानगर (बक्सर) के संदर्भ में आरोप अप्रासंगिक बताया गया है परन्तु अप्रासंगिक होने के तथ्यों को उल्लेखित किया जाना उनके प्रत्युत्तर में परिलक्षित नहीं होता है। अतएव उनका कथन स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा बयान कंडिका (1) एवं इसके उपकंडिकाओं में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर सी0सी0ए0 नियमावली 2005, सामान्य प्रशासन विभाग का पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 एवं 9407 दिनांक 02.07.2012 के प्रावधानों का उल्लंघन कर उनके विरूद्ध निराधार आरोप को प्रमाणित बनाये जाने को न्यायोचित नहीं बताया गया है।

साथ ही सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज एवं डिहरी प्रमंडल डिहरी के वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 का अवर प्रमंडलवार अलग-अलग रकवा एवं राशि न देकर समेकित रकवा 5115 एकड़ एवं रू0 48.60लाख कम वसूली का भ्रामक आरोप लगाया गया और अवर प्रमंडलवार न साक्ष्य न अभिलेख संलग्न किया गया।

अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 में उक्त दोनों प्रमंडलों के लिए समेकित रूप से 5115 एकड़ चाट भूमि पुराने दर पर बन्दोबस्ती किए जाने से रू0 48.60लाख कम राजस्व वसूली होने को प्रतिवेदित किया गया। अतएव दोनों प्रमंडलों के लिए समेकित रूप से कम राजस्व वसूली का आरोप गठित किया जाना एवं साक्ष्य के रूप में अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 संलग्न किया जाना परिलक्षित होता है। आरोपित पदाधिकारी प्रमडलान्तर्गत किसी एक अवर प्रमंडल में पदस्थापित हो सकते है। जहाँ अन्य के साथ उक्त अनियमितता की संभावना बनती है। उपलब्ध अभिलेख से प्रमंडलवार वर्षवार एवं अवर प्रमंडलवार अलग-अलग रकवा एवं राशि का आकलन किया जाना संभव प्रतीत नहीं होता है। अतएव उक्त कथन अस्वीकार योग्य है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा आरोप में उल्लेखित विभाग ने मार्च 2002 में एक/दो फसली चाट भूमि के बन्दोबस्ती के लिए दरों का पुनरीक्षण आदेश जारी किया है। परन्तु इसे साक्ष्य के रूप में न लगाकर भिन्न पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 लगाकर विभागीय कार्यवाही नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध कहा गया है।

उपलब्ध अभिलेख से स्थिति यह है कि आरोप पत्र एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 में आरोपित पदाधिकारी के कथनानुसार मार्च 2002 में संशोधित दर जारी किये जाने का उल्लेख किया जाना एवं साक्ष्य के रूप में विभागीय पत्रांक-773 दिनांक 06.04.2002 संलग्न किया जाना परिलक्षित होता है। संशोधित दर संबंधी उक्त पत्र फैक्स द्वारा मुख्य अभियंता को प्रेषित किये जाने का बोध होता है जो वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 में चाट बन्दोबस्ती किए जाने का पूर्व का है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है।

द्वितीय कारण पृच्छा का पत्रांक-1325, दिनांक 11.08.17 में "विभाग ने मार्च 2005 में एक/दो फसली चाट भूमि की बन्दोबस्ती के लिए दरों का पुनरीक्षण आदेश जारी किया" उल्लेखित तथ्य के आलोक में कोई आरोप नहीं बनने को प्रतिवेदित किया है।

उपलब्ध अभिलेख से स्पष्ट होता है कि विभागीय पत्रांक-1325, दिनांक 11.08.17 में टंकण भूल के कारण मार्च 2002 के जगह मार्च 2005 टंकित हो जाने को विभागीय पत्रांक-1705 दिनांक 22.09.17 से सुधार करते हुए आरोपित पदाधिकारी को संसूचित है। अतएव उक्त त्रुटि के कारण आरोप नहीं बनने का मामला नहीं रह जाता है। अतः उक्त आरोप प्रमाणित होता है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 उनको हस्तगत नहीं होने की संपुष्टि मुख्य अभियंता, डिहरी के पत्रांक-1078, दिनांक 21.10.2016 एवं कार्यपालक अभियंता, विक्रमगंज का पत्रांक-427, दिनांक 26.10. 2017 से होने का जिक्र किया गया।120 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोपित पदाधिकारी द्वारा संलग्न मुख्य अभियंता के पत्र में उनके कार्यालय में संभवतः प्राप्त नहीं होने एवं कार्यपालक अभियंता के पत्र में दिनांक 17.02.2005 को प्राप्त होने का उल्लेख है। विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 से फैक्स द्वारा उक्त पत्र मुख्य अभियंता को भेजे जाने का बोध होता है। अतः आरोप प्रमाणित होता है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 6.9 एवं 6.10 में गंगा पम्प नहर प्रमंडल, बक्सर एवं सोन नहर प्रमंडल, बक्सर में रू0 23.71 लाख कम वसूली से संबंधित है जिससे स्पष्ट है कि विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 क्षेत्रीय पदाधिकारी का प्राप्त नहीं होने का उल्लेख किया है।

उपलब्ध अभिलेख से स्पष्ट होता है कि महालेखाकार के निरीक्षण प्रतिवेदन में डेहरी प्रमंडल डेहरी एवं सोन प्रमंडल, विक्रमगंज के अतिरिक्त सोन नहर प्रमंडल, बक्सर एवं गंगा पम्प नहर प्रमंडल, बक्सर में पुराने दर पर बन्दोबस्ती के कारण कम राजस्व की वसूली हुई। परन्तु इसे पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 क्षेत्रीय पदाधिकारी को उपलब्ध नहीं होना उचित नहीं है क्योंकि उक्त पत्र फैक्स द्वारा मुख्य अभियंता को प्रेषित होने का बोध होता है।

आयुक्त एवं सचिव जल संसाधन विभाग के पत्रांक-405, दिनांक 16.10.16 से स्पष्ट है कि संबंधित पत्र प्रमंडलों को ससमय उपलब्ध नहीं होने की विभाग की जानकारी के बाबजूद विभागीय कार्यवाही चलाना एवं द्वितीय कारण पृच्छा किया जाना विधि सम्मत नहीं होने को प्रतिवेदित किया गया है।

विभागीय पत्रांक-405, दिनांक 16.10.06 से प्रेषित अंकेक्षण कंडिका-7.5 के उत्तर प्रतिवेदन में संदर्भित पत्र प्रमंडलों में ससमय प्राप्त नहीं होने का मामला विभाग के समक्ष आने एवं राजस्व क्षति के लिए अंतर राशि दोषी पदाधिकारी से वसूली किये जाने का उल्लेख है एवं तदनुसार माननीय न्यायालय में प्रतिशपथ पत्र दायर किये जाने का उल्लेख है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा उनके पूरके बचाव बयान दिनांक 28.04.17 संचालन पदाधिकारी द्वारा विचार नहीं किये जाने एवं इसको नैसर्गिक न्याय के दूसरे पक्ष को भी सुनो सिद्धान्त को दर किनार कर विभागीय अभिमत से सहमत होते हुए द्वेषपूर्ण जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जो निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने को प्रतिवेदित किया गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में आरोपी पदाधिकारी के पूरक बचाव-बयान का भी उल्लेख मिलता है। ऐसी परिस्थिति में पूरक बचाव बयान पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विचार नहीं किये जाने के आरोपित पदाधिकारी का बयान स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

बयान कंडिका-2 में आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में नोडल पदाधिकारी एवं मासिक बैठक में विभागीय स्तर से निर्गत निदेशों की जानकारी दिए जाने के संदर्भ में सहायक अभियंता को उक्त बैठकों के लिए प्राधिकृत नहीं होने को प्रतिवेदित किया गया है। साथ ही दंडित करने की पूर्व नियोजित विद्वेषपूर्ण मंश बताया गया है। विभागीय बैठकों में विभागीय निर्गत निदेशों की भी चर्चा की जाती रही होगी। तभी संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने समीक्षा में उक्त तथ्य को अंकित किया गया है।

बचाव-बयान कंडिका-3 में आरोपित पदाधिकारी द्वारा बन्दोबस्ती का पुनरीक्षित दर दैनिक समाचार पत्रों एवं गजट के असाधारण अंक वर्ष 2002-03/2003-04 में प्रकाशन संबंधी अभिलेख साक्ष्य के रूप में संलग्न नहीं किये जाने को प्रतिवेदित किया गया है।

चाट बन्दोबस्ती संबंधी संशोधित दर विभागीय पत्रांक-773 दिनांक 06.04.2002 फैक्स द्वारा मुख्य अभियंता, डिहरी को प्रेषित किये जाने संबंधी साक्ष्य के रूप उपलब्ध कराया गया है।

बयान कंडिका-4 में सिंचाई प्रमंडल अररिया में चाट बन्दोबस्ती पुराने दर पर होने के आधार पर संबंधित पत्र क्षेत्रीय पदाधिकारियों को उपलब्ध नहीं होने को प्रतिवेदित किया गया है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपित पदाधिकारी के दायित्व निर्वहन के तहत विभागीय निदेशों के अनुरूप वित्तीय मामले का निष्पादन नहीं कर निदेश की जानकारी नहीं होने के बताए जाने को हास्यास्पद एवं विभागीय निदेश को संज्ञान में नहीं लेने को अंकित किया गया है तथा निष्कर्षतः राजस्व की क्षति पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया है।

अंकेक्षण प्रतिवेदन कंडिका 7.5 के अनुसार सोन नहर प्रमंडल, विक्रमगंज एवं डेहरी प्रमंडल डेहरी के अन्तर्गत समेकित रूप से 5115 एकड़ चाट बन्दोबस्ती में रू0 48.60लाख की राजस्व की कमी पाया गया है। सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज अंतर्गत सोन नहर अवर प्रमंडल, सिद्धिपुर शिविर नावानगर में आरोपित पदाधिकारी के पदस्थापन वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 में इस अवर प्रमंडल से संबंधित चाट भूमि बन्दोबस्ती रकवा के लिए उत्तरदायी प्रतीत होते है। संचालन पदाधिकारी द्वारा राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोप प्रमाणित पाया गया है।

इस प्रकार उपरोक्त तथ्यो द्वितीय कारण पृच्छा बयान, जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरांत एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन की कंडिका 7.5 के आलोक में श्री महेन्द्र चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया-

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-7-35/2018(276)/लो0से0आ0, दिनांक 08.

05.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

अतएव श्री महेन्द्र चौधरी (आई0डी0-4732), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अंचल, विक्रमगंज के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"दो वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।121 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

17 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-12/2015-1502--श्री राजेन्द्र प्रसाद (आई0डी0-जे-9344) तत0 सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल, माँझी सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन सारण नहर प्रमंडल, एकमा एवं सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2394, दिनांक 08.11.16 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

आलोच्य योजना के तहत असैनिक कार्य के अन्तर्गत Pipe Line का Support System का रूपांकण एवं आलेख IS Code 5822-1994 एवं IS Code 5330-1984 के अनुरूप Pedestal एवं thrust block के रूपांकण में Static एवं dynamic load की सही गणना किये बिना ही पैडेस्टल का रूपांकण करते हुए अनुमोदन हेतु उच्चाधिकारियों को उपस्थापित किया गया तथा उसी Inadequate/Improper आलेख्य/रूपांकण के अनुसार प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृति प्राप्त की गयी तथा पैडेस्टल का निर्माण भी कराया गया। फलतः पैडेस्टल एवं पाईप लाइन क्षतिग्रस्त हो गया। अतएव उक्त योजना के अधूरे कार्यान्वयन कार्य पर किया गया व्यय भी अपव्यय होना परिलक्षित है एवं कार्य भी पूर्ण नहीं हो सका। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-145, दिनांक 06.04.17 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-883, दिनांक 12.06.17 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

उक्त के क्रम में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (बचाव-बयान) दिनांक 11.07.17 में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया :-

इस योजना के याँत्रिक भाग के कार्यान्वयन का दायित्व मुख्य अभियंता (याँ॰) एवं उनसे संबंधित पदाधिकारियों/कार्यालय का था। पाईप लेईंग का कार्य भी याँत्रिक संगठन द्वारा कराया गया है। IS Code 5822-1994 एवं 5330-1984 याँत्रिक कार्य से ही संबंधित है। यह कोड असैनिक कार्य से संबंधित नहीं है इस कारण इन दोनों कोड का Consideration नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि IS Code 5330-1984 का उपयोग Anchor Block के रूपांकण में किया जाता है। याँत्रिक प्रमंडल द्वारा उपलब्ध कराये गये डाटा के आधार पर ही मात्र पैडेस्टल का ही रूपांकण एवं आलेख्य तैयार किया गया। Anchor block का रूपांकण नहीं किया गया है। इस कारण इस कोड का Considration नहीं किया गया है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि IS Code 5822-1984 (Code of Practice for laying of electrically welded steel pipe for water supply) and (Criteria for design of anchor blocks for Penstocks with Expansion Joint) यांत्रिक कार्य से ही संबंधित है। यह कोड सिविल कार्य से संबंधित ही नहीं है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में अंकित है कि दि॰ 26.05.2016 को मुख्य अभियंता (याँ॰) के निदेशानुसार गठित अभियंताओं की टीम द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया एवं दिये गये निष्कर्ष के संबंध में कहा गया है कि याँत्रिक भाग का कार्यान्वयन का दायित्व मुख्य अभियंता (याँ) एवं उससे संबंधित कार्यालय का था। पाईप लेईंग कार्य का निविदा/एकरारनामा कार्यान्वयन आदि कार्य याँत्रिक शाखा द्वारा सम्पादित कराये गये। इस योजना से संबंधित प्रावधानों के अनुसार सुसंगत कोड के अनुरूप Design for Constraction of Support Sysytem of Pipe Line of Daha river left irrigation का रूपांकण एवं आलेख्य तैयार किया गया। जिसमें सही गणना के उपरान्त ही इसे समावेशित करते हुए रूपांकण किया गया। पैडेस्टल का रूपांकण IS Code 456 एवं Design Aid में दिये गये Example के आधार पर सभी Static एवं Dynamic load के सही गणना के उपरान्त ही किया गया है तथा उच्चाधिकारियों द्वारा जाँचोपरान्त पैडेस्टल के रूपांकण अनुमोदित किया गया है। उनके द्वारा कराये गये कार्य की गुणवत्ता विशिष्टि के अनुरूप पायी गयी। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में पैडेस्टल के टूटने का मूल कारण IS Code 5822-1994 के अनुसार प्रत्येक 300मी॰ पर Expansion Joint नहीं देने के कारण Thermal Effect होना बताया गया है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर, गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान उपलब्ध कराये गये बचाव बयान एवं साक्ष्य के समीक्षोपरान्त निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है :- (1) आरोपी का कथन कि पैडेस्टल का रूपांकण IS Code 456 एवं design Aid के अनुसार Static & Dynamic Load की गणना करते हुए किया गया है तथा सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात कार्य कराया गया। उक्त से स्पष्ट है कि IS Code 5822-1994 एवं 5330-1984 का Considration नहीं किया गया है। ये दोनों कोड पाईप लाईन एवं एंेंकर ब्लॉक से संबंधित है। इसमें दिये गये मानक का भी पैडेस्टल के डिजाईन करते समय ध्यान देना चाहिये था। (2) उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में अंकित है कि दिनांक 26.05.15 को मुख्य अभियंता (याँ॰) के द्वारा गठित अभियंता के टीम द्वारा स्थल निरीक्षण के पश्चात दिये गये निष्कर्ष कि Pedestal Supporting the pipe line should be capable of taking frictional force which act during operation & effect of Expansion andबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 122 Contraction due to temperature effect. Present Pedestal were incapable of taking even dead weight of delivery pipe system at it has to sustain & should be stable in both deal Wt. & Weight water in running condition. उक्त से स्पष्ट है कि Support System Pedestal का रूपांकण कार्य IS Code 5822-1994 एवं 5330-1984 के अनुसार पाईप लाईन हेतु निर्धारित मानक का बिना आकलन किये ही पैडेस्टल का रूपांकण किया गया तथा निर्माण भी किया गया। निर्माण के पश्चात पाईप लाईन का कार्य याँत्रिक द्वारा कराया गया। योजना के पूर्ण ही पैडेस्टल क्षतिग्रस्त हो गया।

आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में लगभग वही तथ्य उद्धित किया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है जिसकी समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा करते हुए उपरोक्त अंकित तथ्यों के आलोक में आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा अनुमोदित पैडेस्टल के आलेख्य एवं रूपांकण की जाँच श्री हरिनारायण, मुख्य अभियंता, पटना से करायी गयी। उक्त जाँच प्रतिवेदन में कहा गया है कि Pipe Support का अनुमोदित आलेख्य पाईप लाईन एवं इसके पानी के भार को सहने में पूर्णतः सक्षम है, परन्तु पाईप लाईन में तापक्रम के प्रभाव से होने वाले परिवर्तन (Expansion or Contraction) के कारण उत्पन्न Pulling or Pushing के कारण स्थानांतरित Moment को झेलने में सक्षम नहीं है तथा मंतव्य के रूप में कहा गया है कि उचित Expansion Joint एवं Anchor block के बिना ही पाईप का लेईंग सुरक्षित लम्बाई से ज्यादा (लगभग 6 कि॰मी॰) में किये जाने के कारण Excessive Thermal Expansion हुआ। जिसके कारण Pipe Support पर अवांछित एवं अत्याधिक अनियंत्रित फोर्स लगा। अतः सुरक्षित सीमा से ज्यादा फोर्स के कारण पैडेस्टल डैमेज हुआ। पाईप लाईन Pressure & torsion के कारण क्षतिग्रस्त हुआ। इससे स्पष्ट है कि पैडेस्टल का अनुमोदित आलेख्य सही था। परन्तु मुख्य अभियंता, सिवान के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि पैडेस्टल के निर्माण के दौरान उसके नींव हेतु खोदी गयी मिट्‌टी को पूर्ण रूप से नहीं भरा गया था। जिसे पैडेस्टल क्षतिग्रस्त होने का भी एक कारण माना गया है। जिसके लिये इन्हें दोषी माना जा सकता है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य जो एक याँत्रिक अभियंता के टीम के स्थल निरीक्षण के दौरान की गयी टिप्पणी पर आधारित है, से असहमत होते हुए श्री प्रसाद तत्कालीन सहायक अभियंता (असैनिक) को IS Code के अनुरूप पैडेस्टल के रूपांकण नहीं करने तथा उसी के अनुरूप कार्य कराने के कारण पैडेस्टल क्षतिग्रस्त होने के लिये दोषी माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। परन्तु पैडेस्टल के निर्माण कार्य में नींव में खोदी गयी मिट्‌टी को नहीं भरने के कारण पैडेस्टल क्षतिग्रस्त होने के लिये दोषी माना जा सकता है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री राजेन्द्र प्रसाद (आई0डी0-जे-9344) तत0 सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल, मांझी सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

"5 % (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-702, दिनांक 26.06.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेन्द प्रसाद (आई0डी0-जे-9344) तत्कालीन सहायक अभियंता, सारण नहर अवर प्रमंडल, माँझी सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"5 % (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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18 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(औ॰)-17-01/2018/1520--श्री अनिल कुमार जायसवाल (आई0डी0-2549), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल, अरवल, ग्रामीण कार्य विभाग संप्रति सेवानिवृत द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता की जाँच निगरानी तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा कराई गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-4189 दिनांक-21.11.2013 द्वारा श्री जायसवाल से स्पष्टीकरण किया गया। श्री जायसवाल द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। जिसके सम्यक समीक्षोपरांत स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य पाते हुए श्री जायसवाल के विरूद्ध आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में ग्रामीण कार्य विभाग के संकल्प सं0-1347 दिनांक 11.04.2016 द्वारा श्री अनिल कुमार जायसवाल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43(बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप सं0-(1) :- चहारदिवारी मे निम्नकोटि के ईंटो का प्रयोग किया गया है जो विशिष्टि के अनुरूप नहीं है।123 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोप सं0-(2) :- चहारदिवारी की ईंट जोड़ाई में प्रयुक्त सिमेन्ट-बालू का अनुपालन 1ः7.09 है जो प्रावधानित एवं मापीपुस्त में अंकित 1ः4 अनुपात के अनुरूप नहीं है। स्पष्ट है कि चहारदिवारी की ईंट जोड़ाई मे कम सिमेन्ट का प्रयोग किया गया है। आरोप सं0-(3) ः- चहारदिवारी में प्रयुक्त प्लास्टर में सीमेंट बालू का अनुपात 1ः8.34 है जो प्रावधानित एवं मापीपुस्त में अंकित 1ः4 के अनुपात में नहीं है। स्पष्ट है कि चहारदिवारी के सीमेंट प्लास्टर मे कम सीमेंट का प्रयोग किया गया है। आरोप सं0-(4) :- चहारदिवारी के Stiffner में प्रयुक्त सीमेंंट कंक्रिट मे सीमेंट, बालू एवं चिप्स का अनुपात 1ः6. 24ः4.67 है जो प्रावधानित एवं मापी पुस्त में अंकित 1ः2ः4 अनुपात में नहीं है। स्पष्ट है कि कंक्रिट में कम सीमेंट का प्रयोग कर Stiffner का कार्य कराया गया है। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें आरोप सं0-01 एवं आरोप सं0-03 को अप्रमाणित एवं आरोप सं0-2 एवं आरोप सं0-4 को प्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री जायसवाल से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-225 दिनांक-31.01.2017 द्वारा श्री जायसवाल से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री जायसवाल द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया जिसमें निम्न बातों का उल्लेख किया गया :- (i) जाँच पदाधिकारी, तकनीकी परीक्षक कोषांग के स्तर पर कराये गये प्रयोगशाला जाँच के आधार पर आरोप गठित किया गया जबकि कार्य सम्पादन के बाद एकत्रित नमुनें के आधार पर आरोप गठित करना तकनीकी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। कंक्रिट कार्य की गुणवाा की जाँच क्युब टेस्ट से किया जाना चाहिए।

(ii) जाँच पदाधिकारी द्वारा जाँच के क्रम में लिए गये नमुनें स्थापित नियमों के विपरीत है एवं किस बिन्दू से नमूनें का संग्रह कर जाँच कराया गया है यह भी अंकित नहीं है।

(iii) चहारदिवारी को पूर्णतः निर्धारित विशिष्टि के अनुरूप कराया गया है। (iv) जाँच प्रतिवेदन में सीमेंट के कैल्शियम कन्टेन्ट को अनुपात आकलन के लिए Assume किये जाने से अनुपात में होने वाली भिन्नता का जिक्र नहीं है। इसके अतिरिक्त अन्य जाँच नियमों का उल्लेख किया गया है।

(v) कंक्रिट कार्यों के गुणवाा की जाँच क्युब टेस्ट से किया जाना चाहिए। (vi) कंक्रिट के नमुनें को तीन भागों से नमुना एकत्रित कर परीक्षाफल एवं उनका औसत निकालने का जिक्र है एवं अन्त में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए न्याय देने की बात कही गई।

समीक्षा :- तकनीकी परीक्षक कोषांग (निगरानी विभाग), पटना द्वारा दिनांक-14.05.2013 को संबंधित कार्यालय के सहायक अभियंता श्री अजय कुमार के साथ भी स्थल जाँच में विद्यालय की चहारदिवारी के Stiffner से सटे ब्रीक वर्क को तोड़कर मोर्टार नमुना जाँच हेतु दो नमुना को लेकर कोषांग के प्रयोगशाला भेजकर जाँच कराई गई। स्थल जाँच में लिए गए नमुनों का फोटोग्राफ भी लिया गया। आरोपी द्वारा कार्य सम्पादन के बाद एकत्रित नमुनों के आधार पर आरोप गठित करना तकनीकी दृष्टिकोण से उचित नहीं मानने संबंधी तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि जाँच पदाधिकारी द्वारा Stiffner के बगल से नमुनें संग्रह किया गया एवं नमुनों का फोटोग्राफ लिया गया। जहाँ तक कैल्शियम कन्टेन्ट को Assume करने से सीमेंट मोर्टार के जाँचफल के अनुपात मे भिन्नता के संबंध में आरोपी का बयान का प्रश्न है इस संबंध में मंत्रीमंडल (निगरानी) विभाग का ज्ञापांक-1045 दिनांक 06.07.1992 के अनुसार कराये गये कार्य यथा (सीमेंट/मोर्टार) को हैण्ड मिक्सिंग करने के कारण एवं अन्य त्रुटियों के कारण सीमेंट की मान्य सीमा 15% से 20% रखी गयी है। स्थल जाँच के क्रम में चहारदिवारी के दो Stiffner को तोड़कर कंक्रिट की जाँच हेतु दो नमुना लेकर कोषांग के प्रयोगशाला में भेजकर जाँच कराई गई। उक्त जाँच में स्पष्ट है कि दो अलग अलग Stiffner से Sample लिया गया एवं स्थल जाँच मेंं लिये गये नमुनों की जाँच दल द्वारा फोटोग्राफी भी कराई गई। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी द्वारा नमुनों के बिन्दू (Location) के संबंध में दिया गया बयान स्वीकार योग्य नहीं है। जहाँ तक कंक्रिट कार्य के गुणवाा की जाँच क्युब टेस्ट से किये जाने का आरोपी का बयान है, इस संबंध में उल्लेखनीय है कि उक्त टेस्ट कार्य के दरम्यान कंक्रिट सैम्पल लेकर क्युब बनाते हुए निर्धारित अवधि यथा, 07 दिन, 28 दिन में क्युब Strength निकाला जाता है। चूँकि उक्त कार्य पूर्व में कराया जा चुका था। इसलिए या तो क्युब कटर से सावधानीपूर्वक नियमानुसार Sample लेकर क्युब Strength निकाला जा सकता था या फिर कराये गये कंक्रिट कार्य का सैम्पल Collect कर किये गये कंक्रिट कार्य मे सीमेंट बालू एवं चिप्स का प्रयोगशाला में Analysis कर अनुपात निकाला जा सकता है जो कि निगरानी जाँच दल द्वारा किया यगा जिसमें कंक्रिट में 40.87% कम सीमेंट का प्रयोग कर Stiffner का कार्य कराया गया जो विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया। इस प्रकार श्री जायसवाल का बयान स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।124 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 निष्कर्ष ः- श्री जायसवाल द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) तकनीकी परीक्षक कोषांग का जाँच प्रतिवेदन, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि सर गणेश दा इन्टरस्तरीय विद्यालय के चहारदिवारी के ईंट जोड़ाई में प्रयुक्त सीमेंट बालु का प्रावधानित अनुपात 1ः4 के विरूद्ध निगरानी जाँच में 1ः7.09 पाये जाने से 38.19% सीमेंट कम प्रयोग किया गया जो मान्य सीमा 15 से 20% के अन्दर नहीं रहने से न्युन विशिष्टि का कार्य कराने का आरोप सं0-2 प्रमाणित होता है। साथ ही चहारदिवारी के Stiffner में प्रयुक्त सीमेंट बालु एवं चिप्स का औसत 1ः6. 24ः4.67 पाया गया जबकि माप पुस्त में प्रावधानित अनुपात 1ः2ः4 था। इस प्रकार कंक्रिट में 40.87% कम सीमेंट का प्रयोग का Stiffner का कार्य कराया गया। इस प्रकार आरोप सं0-04 प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री जायसवाल के विरूद्ध ''पेंशन की राशि में से 10% की कटौती 10 वर्ष तक करने'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री अनिल कुमार जायसवाल (आई0डी0-2549), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल अरवल, ग्रामीण कार्य विभाग (पैतृक विभाग जल संसाधन विभाग) को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :- ''पेंशन की राशि में से 10% (दस प्रतिशत) की कटौती 10 (दस) वर्ष तक'' सरकार के उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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18 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सम0)02-07/2018-1521--श्री वीरेन्द्र राय (आई0डी0-2364), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-02, बेगुसराय सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा शीर्ष 3054 अंतर्गत एन0एच0-31 से कुरहा ढाला से चौकी जानेवाली सड़क से रेलवे क्रॉसिंग तक पथ मरम्मति कार्य एवं एन0एच0-31 सदानन्दपुर गुप्ता बाँध तक पथ मरम्मति कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय पत्रांक-21039, दिनांक 22.12.2011 द्वारा निम्न आरोप के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गयी :-

(1) प्राक्कलन विशेष मरम्मति का होने के बावजूद इसकी स्वीकृति कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वयं प्रदान किया गया है। इसकी स्वीकृति सक्षम पदाधिकारी अधीक्षण अभियंता द्वारा नहीं ली गयी।

(2) पुराने पथ के क्षतिग्रस्त भाग की विस्तृत मापी नहीं लेकर प्रतिशत आधार पर प्राक्कलन तैयार किया गया है जो उचित नहीं है।

(3) प्राक्कलन में चिप्स की ढुलाई पाकुड़ से Road head से करने का प्रावधान किया गया है, जिसका Lead एवं दर काफी अधिक है। कम Lead पर अन्य खादानों से चिप्स की प्राप्ति की जा सकती है। (4) जाँच के दौरान खोदे गये दो स्थानों पर पुराने निर्मित ईट सोलिंग, झामा मेटल, S/m Grade-III, Premixing कार्य के उपर Premixing कार्य किया हुआ पाया गया। किन्तु दोनों स्थानों पर S/m Grade-III की मुटाई प्रावधान से कम पायी गयी। S/m Grade-III में प्राक्कलन में मुरम का उपयोग करना था। इस तरह यह कार्य विशिष्टियों के अनुरूप नहीं माना जा सकता है।

(5) WBM Gr. III कार्य के उपर Prime coat के रूप में Emulsion का व्यवहार नहीं पाया गया। (6) प्रथम दृष्टया Premixing के बाद Seal Coat Type A का कार्य किया हुआ नहीं माना जा सकता है। (7) पथ के दोनों तरफ फ्लैंक के कुछ स्थानों पर आंशिक मिट्टी का कार्य किया हुआ पाया गया जबकि प्राक्कलन में प्रावधानित पूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है।

उपर्युक्त आरोप के लिए श्री राय द्वारा अपने पत्रांक-05, दिनांक 16.01.2012 द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब दिया गया। श्री राय से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उसे अस्वीकार योग्य पाते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के संकल्प ज्ञापांक-2541 दिनांक 04.07.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 एवं 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। परन्तु श्री राय के दिनांक 31.07.2013 को सेवानिवृत होने के कारण विभागीय संकल्प-919 दिनांक 13.03.14 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-57 दिनांक 25.07.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-1276, दिनांक 08.04.16 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी :- योजना का नाम - (i) शीर्ष 3054 अन्तर्गत एन0एच0-31 के कुरहा ढाला से चौकी जाने वाली सड़क में रेलवे क्रॉसिंग तक पथ मरम्मति। आरोप सं0-04 -जाँच के दौरान खोदे गये दो स्थानों पर पुराने निर्मित ईट सोलिंग, झामा मेटल, S/m Grade-III, Premixing कार्य के उपर Premixing कार्य किया हुआ पाया गया। किन्तु दोनों स्थानों S/m Grade-III की मुटाई प्रावधान से कम पायी गयी। S/m Grade-III में Screening Material के रूप में Local Soil/Sand का व्यवहार पाया गया जबकि प्राक्कलन में मुरम का उपयोग करना था। इस तरह का कार्य विशिष्टियों के अनुरूप नहीं माना जा सकता है। (ii) शीर्ष 3054 अन्तर्गत एन0एच0-31 सदानन्दपुर गुप्ता बाँध तक सड़क मरम्मति।125 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोप सं0-4 - जाँच के दौरान खोदे गये तीन स्थानों पर पुराने निर्मित ईंट सोलिंग, झामा मेटल, S/m Grade-III, Premixing कार्य के उपर Premixing कार्य किया हुआ पाया गया। किन्तु तीनों स्थानों पर S/m Grade-III की मुटाई प्रावधान से कम पायी गयी। WBM Gr. III कार्य में Screening Material के रूप में local Soil/sand का व्यवहार पाया गया। जबकि प्राक्कलन में मुरम का उपयोग करना था। इस तरह का कार्य विशिष्टियों के अनुरूप नहीं माना जा सकता है। उक्त के आलोक में श्री राय द्वारा अपना पत्रांक-1(p) दिनांक 12.05.16 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिया गया। श्री राय के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं सम्यक समीक्षोपरांत श्री राय के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वीकार योग्य पाते हुए उक्त आरोप को प्रमाणित पाया गया। चूँकि श्री राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत का संवर्ग जल संसाधन विभाग होने के कारण ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा सभी अभिलेख अग्रेत्तर निर्णय लेने हेतु उपब्ध कराया गया।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड प्रस्तावित किया गया जिस पर ग्रामीण विभाग के मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त के आलोक में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा की गई समीक्षा एवं दण्ड प्रस्ताव से सहमत होते हुए श्री वीरेन्द्र राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, कार्य प्रमंडल-02, बेगुसराय सम्प्रति सेवानिवृत को प्रमाणित आरोप के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है :-

(1) एक वर्ष के लिए पेंशन से पाँच प्रतिशत की कटौती। (2) रु0 6444/- (छः हजार चार सौ चौवालीस रुपये) की वसूली। उक्त दण्ड प्रस्ताव -1 पर बिहार लोक सेवा आयोग एवं दण्ड प्रस्ताव-1 एवं 2 पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है।

सरकार के स्तर पर लिये गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री वीरेन्द्र राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-02, बेगुसराय सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :-

(1) एक वर्ष के लिए पेंशन से पाँच प्रतिशत की कटौती। (2) रु0 6444/- (छः हजार चार सौ चौवालीस रुपये) की वसूली।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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19 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2017-1540--मो0 नेहाल अहमद (आई0डी0-3718), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी को उनके उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 13.08.2017 को बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया दायाँ बाँध में हुए टूटान में बरती गई अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं रहने के मामले में मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में विभागीय पत्रांक-1606, दिनांक 14.09. 2017 द्वारा मो0 अहमद को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय पत्रांक-1690, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई -

दिनांक 13.08.2017 को कि0मी0 3.00 के पास बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया दायाँ बाँध पानी के ओवरटॉप करने के कारण टूट गया। ललबकैया नदी में पानी के जलस्तर बढने की सूचना आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। साथ ही तटबंध के कम्पलेक्स बिन्दु की पहचान कर उसकी पूर्व सूचना भी आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। जिसके कारण बाँध क्षतिग्रस्त हुआ एवं जान-माल की व्यापक क्षति हुई। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के प्रति आपका यह कृत्य सरकारी कार्यों के प्र्र्र्रति उदासीनता, लापरवाही एवं संवेदनहीनता का परिचायक है। आपका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3(iii) के प्रतिकूल है। विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा अपना बचाव बयान समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं-

(1) उनके विरूद्ध प्रपत्र-'क' के गठन में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(3)(i) (ii) क एवं ख के प्रावधानों की अनदेखी की गई है।

(2) आरोप का प्रथम लांछन यह है कि मेरे द्वारा ललबकैया नदी के जलस्तर में वृद्धि की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। उक्त लांछन के संबंध में निवेदन है कि मैंने अपने निजी मोबाईल संख्या-9934617549 एवं सरकारी मोबाईल संख्या-7463889659 पर वार्ता के क्रम में उच्चाधिकारियों को नदी में जल स्तर की वृद्धि की सूचना दी है। इस बात की पुष्टि का प्रमाण यह है कि मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि दिनांक 12.08.2017 की रात्रि 08ः00 बजे से लेकर दिनांक 13.08.2017 के पूर्वाह्‌न 02ः50 बजे तक वे लगातार सम्पर्क में थे। तटबंध पर अपने सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के साथ सीपेज एवं पाईपिंग का बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराकर नियंत्रित करने के दौरान मुख्य अभियंता से भी लगातार सम्पर्क में रहना इस बात की पुष्टि करता है कि उन्हें जलस्तर में वृद्धि की जानकारी दी गई है, वरना वे मेरे द्वारा कराये जा रहे सीपेज एवं पाईपिंग के कार्य को अपने पत्र में अंकित नहीं करते।126 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (3) प्रेषित साक्ष्य में मुख्य अभियंता द्वारा उद्धृत कॉम्पलेक्स बिन्दु की परिकल्पना का आधार क्या है यह परिभाषित नहीं है। मानक संचालन प्रक्रिया बाढ़ प्रबंधन एवं तटबंध गश्ती नियमावली में कॉम्पलेक्स बिन्दु का वर्णन नहीं है आक्राम्य स्थल को परिभाषित किया गया है। ऐसी स्थिति में कॉम्पलेक्स बिन्दु का अर्थ आक्राम्य स्थल लिया जा रहा है। आलोच्य बिन्दु पूर्व से आक्राम्य घोषित नहीं था। यदि यह पूर्व से आक्राम्य स्थल घोषित होता तो श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता अपने लंबे कार्यकाल (वर्ष 2009 से वर्ष 2017) में आलोच्य बिन्दु को मानक संचालन प्रक्रिया बाढ़ प्रबंधन, जल संसाधन विभाग के कंडिका 4.3.1 के अंतिम पारा के आलोक में कभी न कभी आक्राम्य घोषित किये होते। (सुलभ प्रसंग हेतु कंडिका 4.3.1 परिशिष्टि-4 के रूप में संलग्न है)

आलोच्य बिन्दु नया आक्राम्य स्थल भी नहीं था क्योंकि बाढ़ गश्ती नियमावली के अनुसार नदी तटबंध के टो या स्लोप या फिर तटबंध के बहुत निकट आ जाय, तब तटबंध को आक्राम्य घोषित किया जाता है। ज्ञातव्य हो कि ललबकैया दायाँ मार्जिनल बाँध (ग्राम-बलुआ) की नदी से न्यूनतम दूरी 850 मीटर से भी अधिक है। ललबकैया दायाँ तटबंध (ग्राम-सपही) की नदी से न्यूनतम दूरी 1कि0मी0 से भी अधिक है। ऐसी परिस्थिति में आलोच्य बिन्दु कदापि आक्राम्य नहीं हो सका।

जिला प्रशासन के साथ दो बार संयुक्त निरीक्षण किया गया। आलोच्य स्थल आक्राम्य बिन्दु के रूप में नहीं पाया। जबकि मार्जिनल बाँध का 1.5कि0मी0 पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भंडारण करके रखा गया था। इस प्रकार प्रशासन के साथ संयुक्त निरीक्षण में भी आलोच्य बिन्दु को आक्राम्य बिन्दु नहीं माना गया।

मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त बचाव बयान पर विभागीय मंतव्य की मांग की गई, जिसमें विभाग द्वारा कहा गया है कि श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01(सी) दिनांक-13.08.2017 से स्पष्ट है कि मो0 नेहाल अहमद दिनांक-12.08.2017 को लगभग 08ः00 बजे रात्रि से सम्पर्क में थे परन्तु उनके द्वारा ललबकैया नदी के जल स्तर के लगातार वृद्धि होने की सूचना संभवतः मुख्य अभियंता को नहीं दी गयी।

मो0 नेहाल अहमद के उपर दूसरा आरोप यह है कि तटबंध के कॉम्पलेक्स बिन्दु की पहचान कर इनके द्वारा इसकी पूर्व सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। इस संबंध में स्पष्ट किया गया है कि उनके द्वारा आक्राम्य स्थल चिन्हि्‌त होने की बात अस्वीकार की गयी है। जबकि मुख्य अभियंता द्वारा बाढ़ गश्ती निमयावली 2017 में ललबकैया नदी के गोआबाड़ी में मार्जिनल बाँध के कि0मी0 2.40 से 3.50कि0मी0 तक लोकेशन को आक्रम्य स्थल की सूची में रखा गया है। दिनांक 13.08.17 को हुए टूटान स्थल का लोकेशन भी मार्जिनल बाँध के 3.00कि0मी0 (ग्राम-बलुआ) के पास ही है। स्पष्ट है कि उनके द्वारा आक्राम्य स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों को भंडारण नहीं किया गया एवं स्थल पर आवश्यकतानुसार सामग्रियाँ उपलब्ध नहीं होने से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा एवं अंततः ओवरटॉपिंग के कारण बाँध टूट गया। अतएव मो0 नेहाल अहमद का यह आचरण बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्य के प्रति उदासीनता, लापरवाही एवं संवेदनहीनता को दर्शाता है। अतः इनका बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।

मो0 नेहाल अहमद से प्राप्त बचाव बयान एवं उनके विरूद्ध प्राप्त विभागीय मंतव्य के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपना जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जिसमें निम्न बातें कहीं गई हैंः-

दिनांक 13.08.2017 को कि0मी0 3.00 के पास बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही के ललबकैया दायाँ बाँध पानी के ओवरटॉप करने के कारण टूट गया। मुख्य अभियंता के पत्रांक-01(सी) दिनांक 13.08.2017 जो प्रपत्र-'क' गठन का आधार है में वर्णित है कि कार्यपालक अभियंता मो0 अहमद द्वारा दिनांक 13.08.2017 को 02ः50बजे सूचना दी गई कि पानी के ओवरटॉप करने के कारण कि0मी0 3.00के पास ललबकैया नदी का दायाँ मार्जिनल बाँध टूट गया है। यद्यपि कार्यपालक अभियंता उनके सम्पर्क में थे किन्तु नदी के निरंतर बढते जल स्तर की सूचना उन्हें नहीं दी गई। फलस्वरूप पानी के ओवरटॉप करने के कारण तटबंध टूट गया। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उन्होंने सम्पूर्ण तथ्यों की जानकारी दूरभाष से उच्चाधिकरियों को लगातार देते रहे। जल स्तर में वृद्धि की जानकारी होने एवं उससे उत्पन्न होने वाले खतरे को समझते हुए ही मुख्य अभियंता ने अपने मोबाईल संख्या अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल एवं तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, श्री योगेश्वर प्रसाद, बाढ़ प्रमंडल, सिकरहना को दिनांक 12.08.17 की रात्रि में मार्जिनल बाँध ग्राम-बलुआ के लिए प्रस्थान करने का निर्देश दिया।

मुख्य अभियंता के पत्रांक-1(सी) दिनांक 13.08.17 से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी दिनांक 12.08.17 की रात्रि 08ः00 बजे से मुख्य अभियंता के सम्पर्क में थे किन्तु नदी के जलस्तर में हो रही निरन्तर वृद्धि की सूचना नहीं दी गई। जब बाँध टूट गया तब इसकी सूचना प्रातः 02ः50 बजे दी गई। बाँध टूटने की सूचना प्राप्त होने पर मुख्य अभियंता द्वारा अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल को कटाव स्थल पर पहुँचने का निर्देश दिया गया। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी का यह कहना कि जल स्तर में वृद्धि होने की सूचना प्राप्त होने पर मुख्य अभियंता द्वारा अध्यक्ष, बाढ़ संघर्षात्मक बल को भेजा गया, स्वीकार योग्य नहीें है।

आरोप का दूसरा भाग यह है कि तटबंध के कॉम्पलेक्स बिन्दु की पहचान कर उसकी पूर्व सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि जिला प्रशासन के साथ दो बार संयुक्त निरीक्षण किया गया। आलोच्य स्थल आक्राम्य बिन्दु के रूप में नहीं पाया गया जबकि संयुक्त निरीक्षण में चिन्हि्‌त अन्य आक्राम्य स्थलों पर सामग्री का भंडारण करके रखा गया। विभागीय अभिमत के कहा गया है कि मुख्य अभियंता द्वारा बाढ़ गश्ती नियमावली 2017 में ललबकैया नदी के गोआबाड़ी में मार्जिनल बाँध के कि0मी0 2.40 से 3.50कि0मी0 तक के लोकेशन को आक्राम्य की सूची में रखा गया है। दिनांक 13.08.17 के हुए टूटान स्थल का लोकेशन भी मार्जिनल बाँध के कि0मी0 3.00 पर है। स्पष्ट है कि इनके द्वारा आक्राम्य स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भंडारण नहीं किया गया एवं स्थल पर आवश्यकतानुसार127 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सामग्रियों का भंडारण नहीं होने से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा। अंततः ओवरटॉपिग के कारण बाँध टूट गया।

(क) बिहार लोक निर्माण संहिता Vol- I में Duties of officers of the Public work department के तहत कंडिका 30, 33 एवं 143 का अभिकथन निम्न है :-

कंडिका- 30ः-The Executive unit of Department is the division, in charge of an Executive Engineer (Divisional Officer), who is responsible to the superintending Engineer for execution and management of all works in his division.

कंडिका- 33ः- Every Executive Engineer is required to report immediately to the superintending Engineer any important accident or unusual occurrence connected with his division and to state how he has acted is condequence (See also paragraph 143)

कंडिका- 143 :- Serious accidents should be reported to the Superintendent Engineer (See paragraph 33) and also at the discretion of the Executive engineer to the state govt. direct Executive engineers and other officers or subordinates in charge of works should furnish immediate information to the proper civil authorities on the occasion of very serious accident and incase of death on the spot, they should not allow the body to be removed till on enquiry has been held (see also Rule 33 of Bihar Financial Rule vol-I)

(ख) सरकार के मुख्य सचिव, बिहार पटना के पत्रांक-1934, दिनांक 11.05.2017 से निर्गत बाढ नियंत्रण आदेश 2017 के कंडिका 8.02 का अभिकथन "जब किसी तटबंध की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हो जाय तो मुख्य अभियंता तथा उनके अधीनस्थ कार्यपालक अभियंता स्तर तक के पदाधिकारी स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित जिला पदाधिकारी को देंगे तथा इस स्थिति से केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कोषांग, पटना को भी अवगत करायेंगे जिसमें इस आशय का भी जिक्र होगा कि संभावित टूटान से कितने गाँव प्रभावित होंगे।

कंडिका 3.02 का अभिकथन - जल संसाधन विभाग के क्षेत्रीय अभियंता/कर्मी पूर्व की भाँति तटबंधों, संरचनाओं इत्यादि पर नियमित गश्ती करेंगे एवं सतत चौकसी बरतेंगे।

जब गश्ती नियमावली 2017 में मार्जिनल बाँध के कि0मी0 2.40 से 3.50 तक के लोकेशन को आक्राम्य सूची में रखा गया था तो आरोपित पदाधिकारी का यह कहना कि संयुक्त निरीक्षण में आलोच्य स्थल को टूटान बिन्दु के रूप में नहीं पाया गया, स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव प्रपत्र-'क' में गठित आरोप प्रमाणित होता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1032, दिनांक 11.05.2018 द्वारा मो0 नेहाल अहमद से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

उक्त के आलोक में मो0 नेहाल अहमद द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 08.06.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

(i) श्री अहमद द्वारा बचाव बयान के कंडिका (1) (a) से (d) तक में विभागीय कार्यवाही के संचालन, अभिलेखों की माँग के संदर्भ में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 12196 दिनांक 07.09.16 को उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्हें वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। कंडिका (e), (f), (g) एवं (h) में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 1893 दि॰ 14.06.11 की प्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी समीक्षा के क्रम में प्रस्तुत बचाव बयान में प्रत्येक बिन्दु पर बिना विचार किये मंतव्य अभिलेखित करते हुए जाँच प्रतिवेदन दिया गया। (ii) कंडिका-2 (क) में कहा गया है कि सिमित सहायक अभियंता/कनीय अभियंता की सहायता से दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए बाँधों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया तथा बाढ़ की स्थिति से निरंतर उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराते रहने का प्रयास किया गया। मार्जिनल बाँध के कि॰मी॰ 3.0 ग्राम बलुआ में भारत नेपाल सीमा रेखा पर मोबाईल नेटवर्क निरन्तर काम नहीं करता था। जल वृद्धि की सूचना मुख्य अभियंता एवं अन्य पदाधिकारी को दिनांक 12.08.17 एवं 13.08.17 को मध्य रात्रि तक निजि मो॰ 9934617549 एवं सरकारी मो॰ 7463889659 पर हुई वार्ता की क्रम में दी गयी थी। संचालन पदाधिकारी द्वारा मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। अन्यथा श्री योगेश्वर प्रसाद सिंह, अध्यक्ष बाढ़ संघर्षात्मक बल के मोबाईल का CDR देख कर पता लगाते। आक्राम्य स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्री के भंडारण नहीं करने संदर्भ में कहा गया है कि दायाँ मार्जिनल बाँध के कि॰मी॰ 1.5 का आक्राम्य स्थल के रूप में पहचान कर निरीक्षण प्रतिवेदन समर्पित किया गया था। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 577 दिनांक 08.06.17 के आलोक में सामग्री का भंडारण गोआबाडी में की गयी थी। उक्त भंडारित सामग्री से प्रश्नगत बिन्दु मार्जिनल बाँध के 3.0 कि॰मी॰ पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया है। विभागीय मंतव्य के संबंध में कहा गया है कि ललबकैया बाँध के 3.0 कि॰मी॰ पर लगातार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराते हुए बचाने का प्रयास किया गया। परन्तु जल स्तर बढ़ते रहने के कारण Over Top करने लगा। ओभर टॉपिंग बाँध के लम्बे भाग में होने के कारण कि॰मी॰ 3.0 पर दिनांक 13.08.17 के पूर्वाह्‌न 2.30 बजे बाँध टूट गया। किसी की लापरवाही से बाँध नहीं टूटा है। उनके विरूद्ध न तो अधीक्षण अभियंता न ही जिला पदाधिकारी द्वारा ही कोई प्रतिकूल टिप्पणी अंकितबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 128 की गयी है। इस स्थल पर दिनांक 12.08.17 एवं 13.08.17 को कि॰मी॰ 3.0 पर कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य का NR विभाग एवं उच्च पदाधिकारी को भेजा गया है। साथ ही प्रपत्र 24 भी विभाग को समर्पित है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उद्धित बिहार लोक निर्माण संहिता के कंडिका 30, 33 तथा 143 के संदर्भ में कहा गया है कि उक्त कंडिकाओं का पूर्ण अनुपालन करते हुए अधीक्षण अभियंता को सारी सूचनाएँ दी गयी है। मुख्य सचिव के पत्रांक 1934 दि॰ 11.05.17 से निर्गत बाढ़ नियंत्रण आदेश 2017 की कंडिका 8.02 के अनुपालन के संदर्भ में दिनांक 08.11.17 को दिये गये बयान के कंडिका-9 में साक्ष्य के साथ विचार पूर्वक निवेदन किया गया है कि वांछित सूचनाएँ विभाग एवं उच्च पदाधिकारी को ससमय दी गयी है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.02 के संदर्भ में कहा गया है कि क्षेत्रीय अभियंता, कर्मी पूर्व की भाँति तटबंधाें के संरचनाओं की नियमित गश्ती एवं चौकसी रहने के आदेश का पालन दृढता से किया गया है। जिसका विवरण विस्तार पूर्वक पूर्व के बचाव बयान में किया गया है। अतएव आरोप से मुक्त किया जाय।

मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी के अन्तर्गत दिनांक 13.08.17 को ललबकैया नदी के कि॰मी॰ 3.0 के पास बलुआ तथा मार्जिनल बाँध के सपही ग्राम के पास हुए टूटान से संबंधित आरोप का मुख्य अंश निम्न है :-

(i) ललबकैया नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि की सूचना उनके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी।

(ii) तटबंध के कम्पलेक्स बिन्दु का पहचान कर इसकी पूर्व सूचना उच्चाधिकारी को नहीं दी गयी न ही उस स्थल पर आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का पूर्व में भंडारण ही किया गया।

संचालन पदाधिकारी के द्वारा मो0 नेहाल अहमद के विरूद्ध आरोप के विरूद्ध उपरोक्त आरोप के दोनों अंशों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

(i) अंश 'क' के संदर्भ में मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा आरोप से संदर्भित वही तथ्य दिया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। जिस पर विभाग द्वारा बाढ़ नियंत्रण, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना के द्वारा गठित मंतव्य से सहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया है। मो0 नेहाल अहमद द्वारा कहा गया है कि वे मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के सम्पर्क में थे एवं नदी के जल स्तर में हो रहे लगातार वृद्धि की सूचना निरंतर रूप से मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर को दिया जा रहा था। को संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में अस्वीकार योग्य माना है। मुख्य अभियंता के पत्रांक 1(C) दिनांक 13.08.17 में कहा गया है कि आरोपित पदाधिकारी सम्पर्क में थे परन्तु नदी के जलस्तर में हो रही निरंतर वृद्धि की सूचना नहीं दी गयी। जब बाँध टूट गया तब इसकी सूचना प्राप्त होने पर अध्यक्ष बाढ़ संघर्षात्मक बल को स्थल पर पहुँचने का अनुरोध किया गया। साथ ही मुख्य सचिव के पत्रांक 1934 दिनांक 11.05.17 से निर्गत बाढ़ नियंत्रण आदेश 2017 के कंडिका 8.02 में स्पष्ट उल्लेख है कि जब किसी तटबंध पर गंभीर खतरा हो जाय तो मुख्य अभियंता तथा अधीनस्थ कार्यपालक अभियंता तक के पदाधिकारी को स्थिति की सूचना संबंधित जिला पदाधिकारी को देंगे तथा केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कोषांग, पटना को भी अवगत करायेंगे। जिसमें अभिलिखित हो कि टूटान के कारण कितने गाँव प्रभावित होगा। साथ ही कंडिका 3.02 में निहित निदेश कि पूर्व के भाँति तटबंधों को नियमित गश्ती एवं सतत चौकसी बरतना किया जाना है। मो0 अहमद द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। जिससे परिलक्षित हो सके कि इनके द्वारा नदी के जल स्तर में हो रही वृद्धि की सूचना ससमय उच्चाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी को दी गयी हो तथा मुख्य सचिव के पत्रांक 1934 दिनांक 11.05.17 के कंडिका 8.02 एवं 3.02 का अनुपालन करते हुए प्रतिवेदन दी गयी हो। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप के इस अंश को प्रमाणित माना जाता है।

(ii) दूसरा अंश ः- आरोप के इस अंश के संबंध में मो0 नेहाल अहमद द्वारा कहा गया है कि जिला पदाधिकारी के संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार तथा अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 577 दि॰ 08.06.17 के आलोक में आक्राम्य स्थल 1.5 कि॰मी॰ गोबावारी पर सामग्री का भंडारण किया गया था। आलोच्य स्थल मार्जिनल बाँध कि॰मी॰ 3.0 ग्राम बलुआ एवं ललबकैया दायाँ बाँध में सपही पूर्व से आक्राम्य स्थल नहीं था। न ही आक्राम्य स्थल के श्रेणी में था, को संचालन पदाधिकारी ने मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के स्तर से निर्गत बाढ़ गश्ति नियमावली 2017 में मार्जिनल बाँध के कि॰मी॰ 2.40 से 3.50 तक के लोकेशन को आक्राम्य स्थल के सूचि में रखा गया था, के आलोक में स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप का इस अंश को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। संचिका में रक्षित अभिलेख के आलोक में सहमत हुआ जा सकता है एवं आरोप के इस अंश को प्रमाणित माना जाता है।

समीक्षोपरांत उपर वर्णित तथ्यों के आलोक में उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "कालमान वेतनमान में चार वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"129 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2140, दिनांक 25.09.18 द्वारा मो0 अहमद को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2280 दिनांक 09.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-704, दिनांक 26.06.2019 द्वारा मो0 नेहाल अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में मो0 नेहाल अहमद, कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, मुरलीगंज को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"कालमान वेतनमान में चार वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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19 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2017-1541--श्री ओम प्रकाश (आई0डी0-जे-7488), तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल ढाका को उनके उक्त अवर प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 13.08.2017 को बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया दायाँ बाँध में हुए टूटान में बरती गई अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के प्रति संवेदनशील नहीं रहने के मामले में मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में विभागीय पत्रांक-1607, दिनांक 14.09.2017 द्वारा श्री प्रकाश को निलंबित किया गया एवं तत्पश्चात विभागीय पत्रांक-1689, दिनांक 20.09.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 में विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई -

दिनांक 13.08.2017 को कि0मी0 3.00 के पास बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया दायाँ बाँध पानी के ओवरटॉप करने के कारण टूट गया। ललबकैया नदी में पानी के जलस्तर बढने की सूचना आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। साथ ही तटबंध के कम्पलेक्स बिन्दु की पहचान कर उसकी पूर्व सूचना भी आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी। जिसके कारण बाँध क्षतिग्रस्त हुआ एवं जान-माल की व्यापक क्षति हुई। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के प्रति आपका यह कृत्य सरकारी कार्यों के प्र्र्र्रति उदासीनता, लापरवाही एवं संवेदनहीनता का परिचायक है। आपका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3(iii) के प्रतिकूल है। विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान श्री ओम प्रकाश , तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा अपना बचाव बयान समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं-

आरोप का प्रथम लांछन यह है कि मेरे द्वारा ललबकैया नदी के जलस्तर में वृद्धि की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। उक्त लांछन के संदर्भ में निवेदन है कि रात्रि 09ः00 बजे से अप्रत्याशित जलश्राव की वृद्धि शुरू हो गयी थी और मेरे कार्यपालक अभियंता, मुख्य अभियंता के सम्पर्क में लगातार 08ः00 बजे रात्रि से थे और मैं कार्यपालक अभियंता के साथ था। ज्ञातव्य है कि मुख्य अभियंता के अधीन कार्यरत बाढ़ नियंत्रण कक्ष में क्षेत्रीय कार्यालयों (जहाँ गेज पठन की व्यवस्था हो) से अनवरत गेज रीडिंग उपलब्ध होते रहता है। इसी क्रम में उल्लेखनीय है कि बाढ़ नियंत्रण कक्षों से ही क्षेत्रीय पदाधिकारियों को अपस्ट्रीम के जलस्तर की सूचना दी जाती है।

इस प्रकार मेरे विरूद्ध लगाये गये लांछन पूर्णतः आधारहीन एवं साक्ष्यविहीन स्थापित हो जाता है कि ललबकैया नदी में पानी के जलस्तर बढ़ने की सूचना मेरे द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। दिनांक 12.08.17 अपराह्‌न को मैं एवं कनीय अभियंता मो0 हारूण के द्वारा स्थानीय स्थिति की सूचना अपने कार्यपालक अभियंता को दिये जाने के बाद वे बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध पर अविलंब पहुँच गये एवं मुझको एवं कनीय अभियंता को बचाव कार्य के लिए भरपूर प्रोत्साहित एवं उत्प्रेरित करते हुए यथासंभव समुचित तकनीकी मार्गदर्शन दिये। उनके मार्ग दर्शन में ही कुशल/अकुशल श्रमिकों की सहायता से बालू भरे सीमेंट के बोरे से कुआँ बनाकर रिसाव को बंद करने का हर संभव प्रयास किया गया।

लेकिन अप्रत्याशित बाढ़ (जैसा कि परिशिष्टि 1 एवं 2 के रूप में संलग्न समाचार पत्रों में प्रकाशित सूचना से संपुष्ट है) के कारण रिसाव को बंद करने के बावजूद, मार्जिनल बाँध से पानी का बलुआ ग्राम में ओवरटॉपिंग हुआ, जिसके कारण बाँध क्षतिग्रस्त हो गया तथा ग्राम सपही में ललबकैया दायाँ तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ। जैसा कि आरोप पत्र के प्रथम वाक्य में ही उल्लेख है। मार्जिनल बाँध के कि0मी0 3.0ग्राम बलुआ में भारत नेपाल सीमा रेखा तटबंध के TOE से गुजरता है। उक्त स्थल पर मोबाईल नेटवर्क निरंतर काम नहीं करता है, साक्ष्य के रूप में प्रेषित मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1(सी) कैम्प मोतिहारी दिनांक 13.08.17 में मुख्य अभियंता द्वारा प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग, पटना को सूचित किया गया है कि दिनांक 12.08.17 को लगभग 08ः00 बजे रात्रि से वे लगातार कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी के सम्पर्क में थे। उक्त स्थल पर मोबाईल नेटवर्क निरंतर नहीं रहने के बावजूद मेरे कार्यपालक अभियंता के द्वारा जल वृद्धि की सूचना वरीय पदाधिकारियों को दिया गया। मैं कार्यपालक अभियंता के साथ था और जल स्तर की सापेक्ष वृद्धि से अवगत कराया।130 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उक्त संदर्भ में ध्यात्वय है कि कॉम्पलेक्स (आक्राम्य बिन्दु) बिन्दु की पहचान पूर्व से ही की हुई होती है। इस संदर्भ में मानक संचालन प्रक्रिया बाढ़ प्रबंधन हेतु जल संसाधन विभाग, बिहार के सुसंगत अंश की कंडिका 4.3. 1 का अंतिम पारा अवलोकनीय है, जिसमें मुख्य अभियंता का दायित्व है कि यदि कार्यपालक अभियंता के द्वारा समर्पित सूची में आवश्यक हो तो नये आक्राम्य स्थल को जोड़ते हुए विभाग को समर्पित करेंगे। मुख्य अभियंता के द्वारा आलोच्य बिन्दु को कॉम्पलेक्स बिन्दु घोषित नहीं किया गया। अतः आलोच्य बिन्दु पूर्व से आक्राम्य बिन्दु नहीं था।

अंकणीय है कि ललबकैया नदी के दायाँ मार्जिनल बाँध का टूटान बिन्दु बलुआ ग्राम में लगभग नदी से 850मीटर से भी अधिक दूरी पर है तथा सपही में दायाँ तटबंध का टूटान बिन्दु लगभग 1.0 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर है। अतः दोनों टूटान स्थल आक्राम्य बिन्दु नहीं था। बाढ़ गश्ती निर्देशिका के आलोक में आलोच्य बिन्दु न तो संवेदनशील स्थल और न तो अति संवेदनशील स्थल की श्रेणी में आता है। निवेदन है कि जिला प्रशासन के साथ संयुक्त निरीक्षण किया गया। आलोच्य स्थल कॉम्लेक्स (आक्राम्य) बिन्दु के रूप में नहीं पाया गया। जबकि मार्जिनल बाँध का 1.5कि0मी0 ग्राम गोआबाडी, आक्रम्य बिन्दु था, जो कि निरीक्षण प्रतिवेदन में भी अंकित है वहाँ टूटान नहीं हुआ। उस अनुरूप निदेशानुसार उक्त बिन्दु 1.5कि0मी0 पर मुख्य अभियंता के निर्देशानुसार बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भंडारण करके रखा गया था। इस प्रकार प्रशासन के साथ संयुक्त निरीक्षण में आलोच्य बिन्दु को आक्राम्य बिन्दु नहीं माना गया।

उक्त लांछन के संदर्भ में निवेदन है कि बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के प्रति मेरे द्वारा पूरी सर्तकता एवं तत्परता बरती गयी है। इसका सम्पुष्ट प्रमाण यह है कि मैं दिनांक 12.08.17 को आलोच्य स्थल पर कार्यरत था और रिसाव की सूचना कार्यपालक अभियंता को दिया, रिसाव की सूचना प्राप्त होते ही वे अविलंब पहुँच गये।

यहाँ यह उल्लेख करना अनिवार्य प्रतीत होता है कि मेरे अवर प्रमंडल में मात्र एक कनीय अभियंता के कार्यरत रहने के बिल्कुल प्रतिकूल परिस्थिति यथा भारी वर्षापात रहने के बावजूद मेरे द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को पूरी तत्परता एवं सर्तकता से सम्पन्न कराया गया। विदित हो कि जल निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी में मेरी प्रतिनियुक्ति माह जून में हुआ और मैं दिनांक 21.06.17 को योगदान किया था।

अप्रत्याशित बाढ के विकराल रूप का आकलन इसी तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि ललबकैया नदी के दायाँ तटबंध में नेपाल भू-भाग में भी 16 स्थलों पर टूटान हुआ है।

अतः मेरे विरूद्ध लगाये गये आरोप से मुझे मुक्त करने की कृपा की जाय। मार्जिनल बाँध के कि0मी0 3.0 ग्राम बलुआ में भारत नेपाल सीमा रेखा तटबंध के टो से गुजरता है। इस कारण मोबाईल नेटवर्क निरंतर काम नहीं करता। अतएव आरोप से मुक्त किया जाय।

श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त बचाव बयान पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय अभिमत की मांग की गई जिसमें विभाग द्वारा कहा गया है कि -

श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-1(सी) दिनांक 13.08.17 से स्पष्ट है कि श्री ओम प्रकाश दिनांक 12.08.17 मुख्य अभियंता के सम्पर्क में थे, परन्तु उनके द्वारा ललबकैया नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने की सूचना सम्भवतः मुख्य अभियंता को नहीं दी गई। परन्तु तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा अपना बचाव बयान में श्री ओम प्रकाश द्वारा जल स्तर में वृद्धि की सूचना उन्हें देने की बात स्वीकार की गई है।

श्री ओम प्रकाश के उपर दूसरा आरोप यह है कि तटबंध की कॉम्पलेक्स बिन्दु की पहचान कर इनके द्वारा इसकी पूर्व सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। इस संबंध में स्पष्ट करना है कि इनके द्वारा आक्राम्य स्थल चिन्हित होने की बात अस्वीकार की गई है जबकि मुख्य अभियंता द्वारा बाढ़ गश्ती नियमावली 2017 में ललबकैया नदी के गोआबाड़ी में मार्जिनल बाँध के कि0मी0 2.40 से 3.50 कि0मी0 तक के लोकेशन को आक्राम्य स्थल की सूची में रखा गया। दिनांक 13.08. 2017 को हुए टूटान स्थल का लोकेशन भी मार्जिनल बाँध के 3.00 कि0मी0 (ग्राम-बलुआ) के पास ही है। स्पष्ट है कि इनके द्वारा आक्राम्य स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भंडारण नहीं किया गया एवं स्थल पर आवश्यकतानुसार सामग्री उपलब्ध नहीं होने से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा एवं अंततः ओवरटॉपिंग के कारण बाँध टूट गया। उपर वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री ओम प्रकाश द्वारा बाढ़ नियंत्रण आदेश एवं बाढ़ गश्ती नियमावली 2017 में दिये गये निदेश का अनुपालन नहीं किया गया जो कि इनके बाढ़ संघर्षात्मक जैसे महत्वपूर्ण कार्य के प्रति उदासीनता, लापरवाही एवं संवेदनहीनता को दर्शाता है। अतः इनका बचाव बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।

श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त बचाव बयान एवं उनके विरूद्ध प्राप्त विभागीय मंतव्य के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपना जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें निम्न बातें कही गई हैं :-

श्री ओम प्रकाश श्री ओम प्रकाश के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' में मुख्य रूप से दो आरोप गठित है :- (1) ललबकैया नदी में पानी जलस्तर बढने की सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं देना। (2) तटबंध के कॉम्पलेक्स बिन्दु के पहचान कर इसके पूर्व सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं देना।

आरोपी पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में प्रपत्र 'क' में गठित दोनों आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि ललबकैया नदी में रात्रि 09ः00 बजे से ही अप्रत्याशित जलश्राव की वृद्धि शुरू हो गयी थी। मैं अपने कार्यपालक अभियंता तथा मुख्य अभियंता के सम्पर्क में लगातार 08ः00 बजे रात्रि से था। मुख्य अभियंता के अधीन कार्यरत बाढ़ नियंत्रण कक्ष में क्षेत्रीय कार्यालयों से अनुवरत गेज रिडिंग उपलब्ध होते रहते है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष से ही क्षेत्रीय पदाधिकारियों को अपस्ट्रीम की जल स्तर की सूचना दी जाती है। इस प्रकार उनके विरूद्ध यह आरोप भी नदी में निरन्तर हो रहे जल स्तर में वृद्धि की सूचना131 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी गलत है। अप्रत्याशित बाढ़ के कारण रिसाव को बन्द करने के बावजूद मार्जिनल बाँध से बलुआ ग्राम में पानी ओभर टॉपिंग हुआ जिसके कारण बाँध क्षतिग्रस्त हुआ। वे कार्यपालक अभियंता के साथ थे एवं मोबाईल नेटवर्क निरन्तर नहीं रहने के बावजूद भी जल स्तर में हो रही वृद्धि की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गयी।

दूसरे आरोप के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि ललबकैया नदी के दायाँ मार्जिनल बाँध के टूटान बिन्दु बलुआ ग्राम में नदी से लगभग 850मी0 से भी अधिक दूरी पर है। सपही में दायें तटबंध का टूटान बिन्दु लगभग 1 कि0मी0 से भी अधिक दूरी पर है। अतः दोनों टूटान स्थल आक्राम्य बिन्दु नहीं था। बाढ़ गश्ती निर्देश्किा में आलोच्य बिन्दु न तो संवेदनशील स्थल और न ही अतिसंवेदनशील स्थल की श्रेणी में आता है।

विभागीय अभिमत में श्री ओम प्रकाश के उपर दूसरा आरोप यह है कि तटबंध की कॉम्पलेक्स बिन्दु की पहचान कर इनके द्वारा इसकी पूर्व सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। इस संबंध में स्पष्ट करना है कि इनके द्वारा आक्राम्य स्थल चिन्हित होने की बात अस्वीकार की गई है जबकि मुख्य अभियंता द्वारा बाढ़ गश्ती नियमावली 2017 में ललबकैया नदी को गोआबाड़ी में मार्जिनल बाँध के कि0मी0 2.40 से 3.50 कि0मी0 तक के लोकेशन को आक्राम्य स्थल की सूची में रखा गया है। दिनांक 13.08.17 को हुए टूटान स्थल का लोकेशन भी मार्जिनल बाँध के 3.00 कि0मी0 (ग्राम-बलुआ) के पास ही है। स्पष्ट है कि श्री ओम प्रकाश द्वारा आक्राम्य स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का भंडारण नहीं किया गया एवं स्थल पर आवश्यकतानुसार सामग्रियों उपलब्ध नहीं होने से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य एवं इसका प्रतिकूल असर पड़ा एवं अंततः ओवर टॉपिंग के कारण बाँध टूट गया। श्री ओम प्रकाश के बचाव बयान को अस्वीकार योग्य मानते हुए प्रपत्र 'क' में गठित आरोपों के लिए उन्हें उत्तरदायी बताया गया है। प्रपत्र 'क' में गठित आरोप एवं इसके साथ सलंग्न साक्ष्य आरोपी पदाधिकारी का बचाव बयान एवं विभागीय मंतव्य से स्पष्ट है कि ललबकैया नदी में जल स्तर में निरन्तर वृद्धि हो रही थी। किन्तु इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। इस बात की पुष्टि मुख्य अभियंता के पत्रांक-1(सी) दिनांक 13.08.2017 में वर्णित तथ्यों से होती है। श्री ओम प्रकाश द्वारा यह कहना कि जल स्तर में होने वाले वृद्धि की सूचना नियंत्रण कक्ष से ही क्षेत्रीय पदाधिकारियों को दी जाती है यह मान्य नहीं है। क्षेत्रीय अभियंता होने के नाते श्री ओम प्रकाश, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी का यह दायित्व था कि नदी में हो रहे जल स्तर की वृद्धि की सूचना द्रुत माध्यम से अपने उच्चाधिकारियों को देते किन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। इसलिए श्री ओम प्रकाश के बचाव बयान का यह अंश स्वीकार योग्य नहीं है। श्री ओम प्रकाश का यह कहना कि दोनों टूटान स्थल आक्राम्य बिन्दु नहीं था तथा यह संवेदनशील अथवा अतिसंवेदनशील स्थल के रूप में चिन्हित नहीं किया गया था, यह स्वीकार योग्य नहीं है। क्योंकि आक्राम्य स्थल को चिन्हित करना क्षेत्रीय अभियंताओं की जिम्मेदारी है। सतत निगरानी के दौरान ऐसे आक्राम्य स्थल को चिन्हित किया जाना है। यदि बाँध की सतत निगरानी की जाती एवं आक्राम्य स्थलों को सही ढंग से चिन्हित किया जाता तो पानी को ओवरटॉप होने से बचाया जा सकता था । इसलिए श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के बचाव बयान का दुसरा अंश भी स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव प्रपत्र 'क' में गठित आरोप पूर्णतः प्रमाणित होता है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1033, दिनांक 11.05.2018 द्वारा श्री ओम प्रकाश से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

उक्त के आलोक में श्री ओम प्रकाश द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 08.06.18 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

श्री प्रकाश द्वारा अपने बचाव बयान के कंडिका 2 (क) से (ग) तक में विभागीय कार्यवाही के संचालन प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि तथ्यों की सम्पुष्टि हेतु आवश्यक साक्ष्य/कागजातों की माँग करने पर बताया गया कि वांछित कागजात आरोप से संबंधित नहीं है। तथा सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 12196 दिनांक 07.09.16 संलग्न करते हुए कहा गया है कि वांछित कागजात उपलब्ध नहीं कराना उक्त पत्र का उल्लंघन है। कंडिका (ड़) में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 1893 दिनांक 14.06.11 के अनुसार संचालन पदाधिकारी द्वारा तैयार किये गये आदेशफल पर विधिवत रूप से आरोपी का हस्ताक्षर कराकर एक प्रति उपलब्ध कराना है। परन्तु ऐसा नहीं कर पत्र का अवहेलना किया गया है। जाँच प्रतिवेदन के संदर्भ में बचाव बयान के कंडिका 1 से 4 तक में आरोप के गठन का आधार, उनके द्वारा दिये गये बचाव बयान (दि॰ 08.11.17 एवं 16.11.17) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बाँध के दोनों टूटान स्थल को सुरक्षित रखने हेतु हर संभव प्रयास, अपने कार्यपालक अभियंता का निदेश एवं अधीनस्थ एक कनीय अभियंता के सहायता से की गयी। तथा अपेक्षित दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया गया था। कंडिका 5 से 9 तक में उनके द्वारा दिनांक 08.11.17 एवं 16.11.17 को दिये गये बचाव बयान का सम्यक रूप से संचालन पदाधिकारी द्वारा संज्ञान नहीं लेने के संदर्भ में उल्लेख करते हुए कहा गया है कि दोनों टूटान स्थलों पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराकर सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया जिसका नियमानुसार NR सभी पदाधिकारियों को दिया गया था। कंडिका-10 में कहा गया है कि संयुक्त निरीक्षण के अनुसार आक्राम्य स्थल कि॰मी॰ 01.5 ग्राम गोआबाडी पर सामग्रियों का भंडारण किया गया था। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 577 दि॰ 08.06.17 के अनुसार सामग्री गोआबाडी में ही रखना था। उसी स्थल से सामग्री लाकर कि॰मी॰ 3.0 टूटान स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया। कंडिका-11 में कहा गया है कि बाढ़ की स्थिति से निरंतर विभागीय पदाधिकारी को अवगत कराते रहने का प्रयास किया गया। दिनांक 12.08.17 की रात्रि 8.0 से लगातार कार्यपालक अभियंता, मुख्य अभियंता के सम्पर्क में थे। कार्यपालक132 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 अभियंता जल वृद्धि की सूचना वरीय पदाधिकारी को दे रहे थे। कार्यपालक अभियंता ने बचाव बयान में आरोपित पदाधिकारी द्वारा जलस्तर में वृद्धि की सूचना उन्हें देने की बात स्वीकार की गयी है। दायाँ मार्जिनल बाँध के कि॰मी॰ 1.5 गोआबाडी में आक्राम्य स्थल के रूप में चिन्हि्‌त कर संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन प्रमंडलीय पत्रांक 214 दिनांक 01.06.17 से अधीक्षण अभियंता को समर्पित है। इसके अनुरूप बाढ़ संघर्षात्मक सामग्री का भंडारण भी किया गया था। आलोच्य स्थल कि॰मी॰ 3.0 बलुआ एवं सपही पूर्व से आक्राम्य स्थल नहीं था। दोनों बिन्दुओं पर नदी बाँध से 865 मी॰ एवं 1000 मी॰ दूर है। दोनों आक्राम्य स्थल की श्रेणी में नहीं आते है। अतः अनुरोध है कि समानुपातिक रूप से विचार करते हुए आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय।

श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध बागमती अवर प्रमंडल ढाका के अन्तर्गत दिनांक 13.08.17 को ललबकैया नदी के कि॰मी॰ 3.0 के पास बलुआ तथा मार्जिनल बाँध के सपही ग्राम के पास हुए टूटान से संबंधित आरोप का मुख्य अंश निम्न है :-

(i) ललबकैया नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि की सूचना उनके द्वारा उच्चाधिकारियों को नहीं दी गयी।

(ii) तटबंध के कम्पलेक्स बिन्दु का पहचान कर इसकी पूर्व सूचना उच्चाधिकारी को नहीं दी गयी न ही उस स्थल पर आवश्यक बाढ़ संघर्षात्मक सामग्रियों का पूर्व में भंडारण ही किया गया।

संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री ओम प्रकाश के विरूद्ध आरोप के विरूद्ध उपरोक्त आरोप के दोनों अंशों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

(i) अंश 'क' के संदर्भ में श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा आरोप से संदर्भित वही तथ्य दिया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। जिस पर विभाग द्वारा बाढ़ नियंत्रण, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना के द्वारा गठित मंतव्य से सहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया है। श्री ओम प्रकाश द्वारा कहा गया है कि वे मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के सम्पर्क में थे एवं नदी के जल स्तर में हो रहे लगातार वृद्धि की सूचना निरंतर रूप से मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर को दिया जा रहा था। को संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में अस्वीकार योग्य माना है। मुख्य अभियंता के पत्रांक 1(C) दिनांक 13.08.17 में कहा गया है कि श्री ओम प्रकाश सम्पर्क में थे परन्तु नदी के जलस्तर में हो रही निरंतर वृद्धि की सूचना नहीं दी गयी। जब बाँध टूट गया तब इसकी सूचना प्राप्त होने पर अध्यक्ष बाढ़ संघर्षात्मक बल को स्थल पर पहुँचने का अनुरोध किया गया। कंडिका 3.02 में निहित निदेश कि पूर्व के भाँति तटबंधों को नियमित गश्ती एवं सतत चौकसी बरतना किया जाना है। श्री ओम प्रकाश द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। जिससे परिलक्षित हो सके कि इनके द्वारा नदी के जल स्तर में हो रही वृद्धि की सूचना ससमय उच्चाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी को दी गयी हो तथा मुख्य सचिव के पत्रांक 1934 दिनांक 11.05.17 के कंडिका 8.02 एवं 3.02 का अनुपालन करते हुए प्रतिवेदन दी गयी हो। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप के इस अंश को प्रमाणित माना जाता है।

(ii) दूसरा अंश :- आरोप के इस अंश के संबंध में श्री ओम प्रकाश द्वारा कहा गया है कि जिला पदाधिकारी के संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन के अनुसार तथा अधीक्षण अभियंता के पत्रांक 577 दि॰ 08.06.17 के आलोक में आक्राम्य स्थल 1.5 कि॰मी॰ गोबावारी पर सामग्री का भंडारण किया गया था। आलोच्य स्थल मार्जिनल बाँध कि॰मी॰ 3.0 ग्राम बलुआ एवं ललबकैया दायाँ बाँध में सपही पूर्व से आक्राम्य स्थल नहीं था। न ही आक्राम्य स्थल के श्रेणी में था, को संचालन पदाधिकारी ने मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के स्तर से निर्गत बाढ़ गश्ति नियमावली 2017 में मार्जिनल बाँध के कि॰मी॰ 2.40 से 3.50 तक के लोकेशन को आक्राम्य स्थल के सूचि में रखा गया था, के आलोक में स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप का इस अंश को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। संचिका में रक्षित अभिलेख के आलोक में सहमत हुआ जा सकता है एवं आरोप के इस अंश को प्रमाणित माना जाता है।

समीक्षोपरांत उपर वर्णित तथ्यों के आलोक में उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, ढाका को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। "कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।" सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2145, दिनांक 25.09.18 द्वारा श्री ओम प्रकाश को निलंबन से मुक्त किया गया एवं उनके विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 2281 दिनांक 09.10.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-535, दिनांक 07.06.2019 द्वारा श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री ओम प्रकाश, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, ढाका सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, उत्तर कोयल नहर अवर प्रमंडल-4, मदनपुर,133 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 शिविर औरंगाबाद (उत्तर कोयल नहर प्रमंडल, मदनपुर शिविर- औरंगाबाद) को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

"कालमान वेतनमान में छः वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। भावी वेतनवृद्धि देय नहीं होगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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22 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-02-13/2018/1546--श्री सुनील कुमार (ID-J-7740), सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, खगड़िया द्वारा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, खगड़िया के अन्तर्गत वर्ष 2018 बाढ़ पूर्व एजेण्डा सं0-126/16 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्य में संवेदक को 5,87,73,977/- (पाँच करोड़ सतासी लाख तिहार हजार नौ सौ सतहार) रूपये का अधिकाई भुगतान करने संबंधी आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(i) के तहत आदेश की निर्गत तिथि से निलंबित किया जाता है। 2. श्री सुनील कुमार को निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय, मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी निर्धारित किया जाता है। 3. श्री सुनील कुमार को निलंबन अवधि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 10 के तहत जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान नियमानुसार देय होगा। 4. उक्त आदेश पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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22 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-02-13/2018/1547--श्री अजय कुमार (ID-3949), कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, खगड़िया द्वारा बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, खगड़िया के अन्तर्गत वर्ष 2018 बाढ़ पूर्व एजेण्डा सं0-126/16 के तहत कराये गये कटाव निरोधक कार्य में संवेदक को 5,87,73,977/- (पाँच करोड़ सतासी लाख तिहार हजार नौ सौ सतहार) रूपये का अधिकाई भुगतान करने संबंधी आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(i) के तहत आदेश की निर्गत तिथि से निलंबित किया जाता है। 2. श्री अजय कुमार को निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय, मुख्य अभियंता का कार्यालय, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी निर्धारित किया जाता है। 3. श्री अजय कुमार को निलंबन अवधि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 10 के तहत जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान नियमानुसार देय होगा। 4. उक्त आदेश पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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23 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-02/2019-1577--श्री पुरेन्द्र सिंह (आई0डी0 सं०-3714), तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, शीर्ष कार्य प्रमंडल-2, वाल्मीकिनगर सम्प्रति निलंबित को उनके उक्त अवर प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान जलापूर्ति प्रतिष्ठान के वार्षिक सम्पोषण का प्राक्कलन प्रमंडल से लौटाये जाने के मामले में अपने कार्यपालक अभियंता से गाली-गलौज करने, मारपीट करने एवं अभद्र व्यवहार करने के मामले में अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-343, दिनांक 21.02.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 15.04.2019 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया। उक्त के आलोक में श्री सिंह, अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 10.05.2019 द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। श्री सिंह से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत वर्णित मामले में श्री पुरेन्द्र सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, शीर्ष कार्य प्रमंडल-2, वाल्मीकिनगर सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया।

अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री पुरेन्द्र सिंह, तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी, शीर्ष कार्य प्रमंडल-2, वाल्मीकिनगर सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी (निलंबित) मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना का कार्यालय पटना को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 134

23 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-12/2015-1578--श्री सुभाष कुमार वर्मा (आई0डी0-एम0-0538), तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन सारण नहर प्रमंडल, एकमा एवं सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2392, दिनांक 08.11.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

IS Code 5822-1994 एवं IS Code 5330-1984 के अनुरूप याँत्रिक कार्यो के तहत पाईप लाईन का बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख्य के ही प्राक्कलन में बिना Expansion Joint का प्रावधान किये ही तैयार किया गया एवं समुचित Expansion Joint के प्रावधान किये ही कार्य कराने के कारण पाईप लाईन में Thermal Expansion/Contraction के कारण पाईप क्रेक कर गया तथा Supporting System यथा पैडेस्टल भी क्षतिग्रस्त हो गया। फलतः योजना के अधूरा कार्य पर किया गया व्यय अपव्यय होने की स्थिति बनी। श्री वर्मा के दिनांक 30.11.16 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश संख्या-08 सहपठित ज्ञापांक-60 दिनांक 18.01.17 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-234, दिनांक 03.07.17 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-137, दिनांक 15.01.18 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री वर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

उक्त के क्रम में श्री वर्मा द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (बचाव-बयान) में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया :- इस योजना का प्राक्कलन निर्माण का कार्य इनके पर्वूवर्त्ती कार्यपालक अभियंता द्वारा किया गया है तथा पुनरीक्षित भी दिनांक 24.01.13 को पूर्ववर्त्ती कार्यपालक अभियंता द्वारा ही तैयार किया गया है जिसकी स्वीकृति दिनांक 28.10.13 को दी गयी है। उनके द्वारा दिनांक 26.10.13 को प्रभार ग्रहण किया गया। माह सितम्बर, 2013 के प्रगति प्रतिवेदन जो उनके पूर्ववर्त्ती द्वारा भेजा गया था उसमें 5959 मी॰ के विरूद्ध 5460 मी॰ पाईप लाईन का कार्य का भौतिक प्रगति अंकित था। जिसके विरूद्ध कुल 8,54,64,324/- रूपये का भुगतान हुआ था। शेष पाईप लाईन माह अक्टूबर, 2013 में ही किया गया था। मात्र Welding का कार्य शेष था। जो उनके कार्यकाल में किया गया था। इस तरह शेष कार्य का भुगतान उनके कार्यकाल में हुआ था। इस कार्य का प्रारम्भ से ही उच्चाधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता रहा परन्तु कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गयी। स्वीकृत निविदा में Quoted Rate के आधार पर प्राक्कलन उनके पर्वूवर्त्ती कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 24. 01.13 को भेजा गया, जिसकी स्वीकृति दि॰ 24.01.13 को मुख्य अभियंता (याँ॰) द्वारा की गयी। तथा पाईप लेईंग का कार्य भी अंतिम चरण में था ऐसी स्थिति में IS Code के अनुरूप रूपांकण एवं प्राक्कलन निर्माण किये कार्य कराने के लिये दोषी ठहराना उचित नहीं है। संचालन पदाधिकारी का कहना कि पैडेस्टल आदि कार्यो के निर्माण में गुणवत्ता की कमी के संबंध में अपने उच्चाधिकारियों को सूचित करना चाहिये था। इस संबंध में कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। उड़नदस्ता के कंडिका 8(iii) में कहा गया है कि IS Code के मुताबिक पर्याप्त संख्या में Expansion Joint एवं Anchor block का निर्माण होता तो पाईप लाईन क्षतिग्रस्त नहीं होता। जहाँ तक अपर्याप्त Expansion Joint का प्रावधान, रूपांकण/ प्राक्कलन में करने का प्रावधान है। यह आरोप पूर्ववर्त्ती कार्यपालक अभियंता के कार्यकाल से संबंधित है। विभागीय निर्णयानुसार याँत्रिक कार्य के संवेदक M/s Flow more ltd. द्वारा पाईप लाईन में Expansion Joint का रूपांकण का आकलन समर्पित किया गया। जिसके आधार पर प्राक्कलन तैयार कर मुख्य अभियंता (याँत्रिक) को स्वीकृति हेतु भेजा गया। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि पाईप लाईन का रूपांकण/प्राक्कलन उनके पूर्वाधिकारी द्वारा निर्माण कर स्वीकृति करा लिया गया था। उनके पदभार ग्रहण करने के वक्त पाईप बिछाने का कार्य अंतिम चरण में था। मात्र बेल्डिंग का कार्य शेष था जिसे कराकर शेष राशि का भुगतान मार्च 14 तक किया गया। जिस समय तक पाईप लाईन में कोई क्षति नहीं हुई न ही किसी उच्चाधिकारी द्वारा Expansion Joint के अपर्याप्त संबंधी त्रुटियों का निराकरण कराने का कोई दिशा निदेश दिया गया। वैसी परिस्थति में त्रुटिपूर्ण रूपांकण, प्राक्कलन एवं तद्‌नुसार निर्माण कराने के लिये दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर, गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में श्री वर्मा के विरूद्ध बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख्य तथा बिना समुचित Expansion Joint का प्रावधान करते हुए पाईप लाईन का कार्य कराने से Thermal Expansion/ Contraction के कारण क्षतिग्रस्त होने के आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है :- (क) आरोपित का कहना कि पाईप लाईन क्षतिग्रस्त होने का कारण असैनिक अभियंता द्वारा निर्मित संरचना का फेलुअर होना बताया गया है। जब पाईप लेईंग करने के पूर्व असैनिक अभियंता द्वारा निर्मित पैडेस्टल आदि कार्यो के निर्माण में गुणवत्ता की कमी पायी गयी थी। तो उन्हें उच्च पदाधिकारी को सूचित करना चाहिये था। इस संबंध में कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया।135 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (ख) आरोपित का कहना है कि योजना के तहत पाईप लाईन इत्यादि का कार्य उनके प्रभार लेने के पूर्व हो गया था एवं भुगतान भी उनके द्वारा नहीं किया गया था। आरोपित द्वारा दिनांक 26.10.13 को प्रभार ग्रहण किया गया। तथा दि॰ 30.11.16 को सेवानिवृत हो गये। मुख्य अभियंता, सिवान के निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक 23.04.15, आरोपित पदाधिकारी के द्वारा अधीक्षण अभियंता (याँ॰) को कार्य से संबंधित दिये गये प्रतिवेदन तथा संवेदक Flow more ltd. को आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये निदेश से स्पष्ट है कि इनके पदस्थापन काल में भी पाईप लाईन लेर्इंग का कार्य हो रहा था। कार्य से संबंधित 9वें चालू विपत्र का भुगतान इनके द्वारा किया गया है। अतः आरोपी का कथन की इनके प्रभार लेने के पूर्व ही कार्य समाप्त हो चुका है स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में लगभग वही तथ्य को दोहराया गया है जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को विभागीय कार्यवाही के दौरान दिया गया है। आरोपी का कथन कि आलोच्य कार्य का प्राक्कलन का गठन उनके पूर्ववर्त्ती कार्यपालक अभियंता द्वारा करते हुए अंचल कार्यालय को समर्पित किया गया है, स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। क्योंकि इनके द्वारा याँत्रिक प्रमंडल का प्रभार दिनांक 26.10.13 को ग्रहण किया गया है जबकि आलोच्य कार्य के संशोधित प्राक्कलन दिनांक 24.01.13 को प्रमंडल द्वारा समर्पित किया गया है तथा दिनांक 26.10.13 को मुख्य अभियंता (याँ॰) द्वारा स्वीकृत किया गया है। परन्तु आरोपी द्वारा स्वीकार किया गया है कि पाईप लाईन की कुल लम्बाई 5959 मी॰ के विरूद्ध 5460 मी॰ पूर्व में हो चुका था। शेष कार्य इनके पदस्थापन काल में हुआ है तथा भुगतान भी किया गया है। उक्त के आलोक में माना जा सकता है कि इनके द्वारा भी बिना Expansion Joint का समुचित प्रावधान किये ही पाईप लाईन का कार्य कराया गया है। अतएव इनके विरूद्ध IS Code के अनुरूप बिना समुचित Expansion Joint के प्रावधान किये ही कार्य कराने के कारण पाईप लाईन में Thermal Expansion/Contraction के कारण हुए क्रेक के आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री सुभाष कुमार वर्मा (आई0डी0-एम0-0538), तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

"05 % (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-810, दिनांक 05.07.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुभाष कुमार वर्मा (आई0डी0-एम0-0538), तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"05 % (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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23 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-12/2015-1579--श्री सियाराम सिंह (आई0डी0-जे0एम0-0502A), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन सारण नहर प्रमंडल, एकमा एवं सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2393, दिनांक 08.11.16 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

IS Code 5822-1994 एवं IS Code 5330-1984 के अनुरूप याँत्रिक कार्यो के तहत पाईप लाईन का बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख्य के ही प्राक्कलन में बिना Expansion Joint का प्रावधान किये ही तैयार किया गया तथा उसी के अनुरूप कार्य भी कराया गया। जिसके कारण पाईप लाईन में Thermal Expansion/Contraction के कारण पाईप क्रेक कर गया। साथ ही Pedestal & thrust block भी क्षतिग्रस्त हो गया। फलतः योजना के अधूरा कार्य पर किया गया व्यय का अपव्यय होने की स्थिति बनी। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-203, दिनांक 24.05.17 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-1176, दिनांक 19.07.17 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

उक्त के क्रम में श्री सिंह द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (बचाव-बयान) में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया :- संचालन पदाधिकारी द्वारा मात्र आरोप पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों साक्ष्य यथा उड़नदस्ता का प्रारम्भिक जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन के आधार पर उन साक्ष्यों को Oral evidence के आधार पर सम्पुष्ट कराये बिना अपना प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है, जो न्याय संगत नहीं है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 136 137 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-808, दिनांक 05.07.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सियाराम सिंह (आई0डी0-जे0एम0502A), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"10 % (दस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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23 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-12/2015-1580--श्री विश्वनाथ चौधरी (आई0डी0-एम0092) तत0 मुख्य अभियंता (याँत्रिक), जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन सारण नहर प्रमंडल, एकमा एवं सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2390, दिनांक 08.11.16 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-

दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के याँत्रिक कार्यो का IS Code 5822-1994 एवं IS Code 5330-1984 के अनुरूप पाईप लाईन का बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख्य एवं बिना समुचित Expansion Joint का प्रावधान किये ही संशोधित प्राक्कलन की स्वीकृति प्रदान की गयी एवं पाईप लेईंग कार्य भी इनके ही कार्यकाल में कराया गया। स्थल के आवश्यकता के अनुरूप भी इनके द्वारा कार्यान्वयन के दौरान Expansion Joint का समुचित प्रावधान नहीं किया गया एवं कार्य होता रहा तथा कार्यपालक अभियंता द्वारा त्रुटिपूर्ण कार्यो का भुगतान भी किया जाता रहा। पाईप लाईन में समुचित Expansion Joint का प्रावधान नहीं किये जाने के कारण पाईप क्रेक कर गया तथा Pedestal & thrust block भी क्षतिग्रस्त हो गया। फलतः इस योजना पर किया गया व्यय का अपव्यय होना परिलक्षित है।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-149, दिनांक 10.04.17 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-882, दिनांक 12.06.17 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

उक्त के क्रम में श्री चौधरी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (बचाव-बयान) में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया :- इस पूरे मामले का मूल बिन्दु है कि दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के पाईप लेईंग का रूपांकण/आलेख्य किसे तैयार करना था और किसे अनुमोदित करना था ? इसका उत्तर विभागीय पत्रांक 582 दि॰ 25.04.1990 है जिसमें यह उल्लेख है कि मुख्य अभियंता अपने परिक्षेत्राधीन रूपांकण के लिये पदस्थापित अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता की सहायता से 2000 घनसेक क्षमता की सीमा तक वाली नहरों के लिये तथा 25000 घनसेक की धार पर निर्मित होने वाले संरचनाओं के रूपांकण कार्य हेतु प्राधिकृत है। कालान्तर में विभागीय पत्रांक 27 दि॰ 10.01.14 द्वारा इसे बढाकर क्रमशः 4000 घनसेक एवं 50000 घनसेक कर दिया गया है। इस निर्णय के अनुरूप मुख्य अभियंता, सिवान के पत्रांक 1400 दि॰ 25.05.10 एवं 1847 दि॰ 05.07.10 द्वारा रूपांकण तैयार कर मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना को उपलब्ध कराया गया था। मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना के पत्रांक 674 दि॰ 28.07.10 की दूसरी कंडिका में अंकित है कि मुख्य अभियंता, सिवान सहमत है कि विभागीय पत्रांक 582 दि॰ 25.04.09 के आलोक में इसके रूपांकण तथा आलेख्य स्वीकृति हेतु मुख्य अभियंता सिवान स्वयं सक्षम है। मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना द्वारा परामर्श दिया गया है कि उनके द्वारा समर्पित योजना प्रतिवेदन में तकनीकी बिन्दुओं यथा संरचना का प्रकार, भेट का लेवल, पम्प की क्षमता संबंधी गणना, पम्प एवं पाईप का एलाईनमेंट एवं अन्य बिन्दुओं का समावेश नहीं है। अतः तकनीकी बिन्दुओं का समावेश करते हुए स्वीकृत अनुसंधान प्रतिवेदन उपलब्ध कराना चाहेंगे। इस संदर्भ में संबंधित कार्यपालक अभियंता से बार-बार उपलब्ध कराने हेतु विमर्श के दौरान मौखिक रूप से अनुरोध किया गया। इसी परिपे्रक्ष्य में मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा Support Column का नक्शा दि॰ 31. 12.10 को अनुमोदित किया गया है। अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, छपरा द्वारा Proposed alignment of pipe line दि॰ 01.07.10 को अनुमोदित किया गया है। पाईप लाईन के एलाईनमेंट प्लान के आधार पर कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, सिवान द्वारा Carrier Channel, Vat, Pump house pipe support का प्राक्कलन तैयार किया गया एवं कार्य कराया गया। ई॰ कुमार जयन्त, मुख्य अभियंता, सिवान के पत्रांक 135 दि॰ 19.02.17 में स्वीकार किया गया है कि मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा मात्र पैडस्टल का रूपांकण किया गया है। परन्तु थ्रस्ट ब्लॉक तथा एंकर का रूपांकण नहीं किया गया है। जब इस योजना के पाईप बिछाई के लिये एलाईनमेंट प्लान असैनिक अभियंता तैयार करते है तथा पैडस्टल बनवाते है तो फिर यह कहना कि थ्रस्ट ब्लॉक का रूपांकण एवं निर्माण कार्य कोई अन्य संगठन करेगा आधारहीन है। स्वीकृत प्लान पर पाईप बिछानें का कार्य याँत्रिक संवर्ग का है। जब जल संसाधन विभाग का नितीगत निर्णय है कि 25000 घनसेक तक जल धारा वाली संरचनाओं का रूपांकण प्रक्षेत्र के मुख्य अभियंता करेंगे तो फिर इसमें हुई किसी अनदेखी के लिये मुख्य अभियंता (याँत्रिक) कैसे उत्तरदायी है। दि॰ 31.12.10 को मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा अनुमोदित सर्पोट सिस्टम के अनुमोदितबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 138 नक्शा पर Expansion Joint की कोई चर्चा नहीं है। जबकि दिनांक 01.12.15 को मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना द्वारा अनुमोदित नक्शा के नोट सं॰ 11 में अंकित है कि Expansion Joint should be provided as per IS Code. यदि Expansion Joint की चर्चा दिनांक 31.12.10 को अनुमोदित रूपांकण में की गई होती तो अधिक Expansion Joint का प्रावधान करने के लिये याँत्रिक संवर्ग की बाध्यता होती। जहाँ तक M/s Flow More Ltd. को आवंटित कार्य में 1000mm व्यास के पाईप लाईन के रूपांकण, निर्माण आदि के उल्लेख का प्रश्न है। इस संबंध में M/s Flow More Ltd. द्वारा विभाग को समर्पित स्पष्टीकरण से स्थापित होगा कि याँत्रिक एवं विद्युत कार्य में संबंधित सभी रूपांकण एवं आलेख सक्षम प्राधिकार से अनुमोदित एवं Third Party inspect RITES Ltd. से कराया गया है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि लगाये गये आरोप आधारहीन है। वस्तुतः असैनिक अभियंता इस कार्य को करने में असफल है। जहाँ तक Thrust block क्षतिग्रस्त होने का प्रश्न है तो Thrust block तो बनाया ही नहीं गया तो क्षतिग्रस्त कैसे हो सकता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर, गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में जबाव में लगभग वही तथ्य उद्धित किया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। संचालन पदाधिकारी ने आरोपी पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उपलब्ध कराये गये बचाव बयान, उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन तथा अन्य अभिलेखों के समीक्षोपरान्त निम्न तथ्यों के आधार पर आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है :- IS Code 5822-1994 में 300मी॰ के अन्तराल पर पाईप लाईन में Expansion Joint देने का प्रावधान है। परन्तु उक्त कोड के अनुरूप याँत्रिक प्रभाग द्वारा पाईप लाईन में समुचित Expansion Joint का प्रावधान नहीं किया गया। फलतः डिलेभरी पाईप में Expansion एवं Contraction के कारण कई जगहों पर पाईप फट गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि संशोधित प्राक्कलन में मात्र 6 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान किया गया था। जबकि पाईप की लम्बाई 5959 मी॰ थी। बाद की तिथि में उक्त लम्बाई में Flow More ltd. संवेदक (याँत्रिक कार्य का) द्वारा कुल 23 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान करते हुए प्राक्कलन दिनांक 12.08.15 को समर्पित किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक 01.11.12 को स्थल निरीक्षण भी किया गया था, परन्तु Expansion Joint के संबंध में किसी प्रकार का कोई दिशा निदेश नहींं दिया गया। इस संदर्भ में आरोपी पदाधिकारी को पाईप लाईन का अनुमोदित नक्शा संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। उनके पत्रांक 490 दि॰ 16.03.17 से उपलब्ध कराये गये अभिलख्ेा में पाईप लेईंग कार्य का रूपांकण एवं अनुमोदित नक्शा नहीं था। इससे स्पष्ट है कि पाईप लाईन का रूपांकण IS Code के अनुसार किया ही नहीं गया था। एवं बिना समुचित Expansion Joint का प्रावधान किये ही पाईप लाईन का कार्य कराया गया। फलतः थर्मल Expansion & Contraction के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में पाईप लाईन क्षतिग्रस्त होने के संबंध में कहा गया है कि मुख्य अभियंता, सिवान के द्वारा अनुमोदित पैडेस्टल के नक्शा में Expansion Joint के प्रावधान करने का कोई उल्लेख नहीं है। जबकि योजना के अवयवों के रूपांकण करने एवं अनुमोदन करने के लिये मुख्य अभियंता, सिवान सक्षम प्राधिकार थे। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि याँत्रिक कार्य कराने का दायित्व मुख्य अभियंता (याँत्रिक) का था एवं इसी के तहत मुख्य अभियंता (याँत्रिक) द्वारा याँत्रिक कार्य से संबंधित सभी अवयवों के साथ पाईप लेईंग का प्राक्कलन स्वीकृत किया गया एवं आरोपी द्वारा ही कार्य के दौरान कुछ कार्य में विचलन होने के कारण बिना समुचित Expansion Joint के प्रावधान किये ही संशोधित प्राक्कलन की स्वीकृति प्रदान की गयी एवं याँत्रिक का अधिकांश कार्य इनके कार्यकाल में ही कराया गया है तथा इनके द्वारा कार्य स्थल का निरीक्षण भी किया गया है। फिर भी इनके द्वारा अधीनस्थ पदाधिकारी को कोई दिशा निदेश नहीं दिया गया। आरोपी द्वारा यह स्थापित करने की कोशिश की गयी है कि असैनिक अभियंता द्वारा निर्माण कराये गये संरचना यथा पैडेस्टल के फेलुअर के कारण पाईप लाईन क्षतिग्रस्त हुआ है। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं अन्य जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि पाईप लाईन लेईंग कार्य में समुचित Expansion Joint का प्रावधान नहीं किये जाने के कारण पाईप एवं पैडेस्टल क्षतिग्रस्त हुआ है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे स्थापित हो सके कि IS Code के अनुरूप पाईप लाईन का रूपांकण करते हुए अनुमोदित नक्शा के आधार पर संशोधित प्राक्कलन की स्वीकृति प्रदान की गयी हो एवं उसी के अनुरूप कार्य कराया गया है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री चौधरी के द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव अस्वीकार योग्य मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री विश्वनाथ चौधरी (आई0डी0-एम0094) तत0 मुख्य अभियंता (याँत्रिक), जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

"10 % (दस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-813, दिनांक 05.07.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।139 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री विश्वनाथ चौधरी (आई0डी0-एम0094) तत0 मुख्य अभियंता (याँत्रिक), जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"10 % (दस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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23 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-12/2015-1581--श्री सतीश कुमार (आई0डी0-एम0466) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन सारण नहर प्रमंडल, एकमा एवं सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2391, दिनांक 08.11.16 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-

IS Code 5822-1994 एवं IS Code 5330-1984 के अनुरूप याँत्रिक कार्यो के तहत पाईप लाईन का बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख्य के ही प्राक्कलन में बिना Expansion Joint का प्रावधान किये ही तैयार किया गया तथा बिना समुचित Expansion Joint के ही पाईप लाईन का कार्य कराया गया। जिसके कारण पाईप लेईंग में Thermal Expansion/ Contraction के कारण पाईप क्रैक कर गया तथा Supporting system यथा Pedestal & thrust block भी क्षतिग्रस्त हो गया। फलतः योजना के अधूरे कार्य पर किया गया व्यय का अपव्यय होने की स्थिति बनी।

उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-183, दिनांक 09.05.17 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-1177, दिनांक 19.07.17 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

उक्त के क्रम में श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (बचाव-बयान) में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया :- सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा में वे दिनांक 26.10.13 तक कार्यरत रहे हैं। उनके द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति कोटेशन आमंत्रण, निविदा निष्पादन की प्रक्रिया तथा कार्य के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति, हेतु प्रस्तुत Feasibility report में 6 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान किया गया था तथा उसी को पर्याप्त मानते हुए तत्कालीन मुख्य अभियंता (याँत्रिक) द्वारा Structurally sound मानते हुए योजना विभाग को समर्पित किया गया। तथा कार्य का निविदा भी विभागीय स्तर पर निष्पादन के दौरान भी उसी को सही मानते हुए कार्यावंटन कर दिया गया। साथ ही दूसरे मुख्य अभियंता (याँत्रिक) द्वारा भी प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दिनांक 26.10.13 को प्रदान किया गया। उस समय भी प्राक्कलन में मात्र 6 अदद्‌ Expansion Joint से अधिक देने का कोई निदेश नहीं दिया गया। इस प्रकार बिना रूपांकण/आलेख्य अनुमोदन के ही एवं बिना समुचित Expansion Joint का प्रावधान नहीं करने का आरोप सही नहीं है। उच्च पदाधिकारियों तथा उड़नदस्ता के द्वारा किये गये स्थल निरीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि दिनांक 01.11.12 को दोनों प्रभाग के मुख्य अभियंता द्वारा स्थल निरीक्षण के पश्चात असैनिक में संवेदक को कई तरह का निदेश दिया गया। दिनांक 23.04.15 को मुख्य अभियंता, सिवान के द्वारा स्थल निदेश के पश्चात कहा गया कि IS Code के अनुसार प्रर्याप्त Expansion Joint का प्रावधान नहीं होना Pedestal एवं पाईप लाईन क्षतिग्रस्त होने का एक कारण है। पुनः दि॰ 03. 05.15 को दोनों प्रभाग के मुख्य अभियंता के स्थल निरीक्षण में कुछ और Expansion Joint लगाने के साथ बैंड/T Point पर thrust block के साथ अन्य कृत कारवाई करना बताया गया। इस प्रकार न तो संयुक्त निरीक्षण दि॰ 01.11.12 एवं दि॰ 26.10.13 को और न ही प्राक्कलन की स्वीकृति के समय Expansion Joint की संख्या के संबंध में कोई टिप्पणी की गयी। अंततः अप्रील-मई 2015 में इसकी आवश्यकता महसूस की गयी। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 5.1.2(iv) में अंकित किया गया कि पाईप लाईन में Proper design के पश्चात लगातार बिन्दु पर सर्पाेट सिस्टम, Anchor block एवं thrust block का प्रावधान किया जाय। साथ ही आवश्यक संख्या में Expansion Joint का प्रावधान किया जाय। दि॰ 20.07.16 को विभागीय स्तर पर आयोजित बैठक में डिलेवरी पाईप के Support System का रूपांकण/निर्माण कार्य याँत्रिक कार्य के साथ ही Flow more Ltd. द्वारा कराने का निदेश है। मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा रूपांकित Pedestal के अनुमोदन तथा बाद की तिथि में Flow more ltd. द्वारा किये गये रूपांकण का अनुमोदन केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध के मुख्य अभियंता द्वारा Vetting किये जाने को उल्लेख करते हुए उनके द्वारा कहा गया है कि Pedestal जिस पर पाईप लाईन का लेईंग हुआ उसके रूपांकण की पर्याप्तता की जाँच नहीं हो पाया। इससे स्पष्ट है कि इसका रूपांकण त्रुटिपूर्ण था। इस तरह जिस पैडेस्टल का रूपांकण की पर्याप्तता देखना उचित नहीं समझा गया और मात्र पाईप लाईन के लेईंग में पर्याप्त Expansion Joint नहीं दिये जाने के आधार पर दोषी मानाबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 140 गया। Expansion Joint के संदर्भ में कहा गया है कि IS Code 5822-1994 के अनुसार Spacing of Expansion Joint Local Condition पर निर्भर करता है। अतः 300 मी॰ की दूरी पर Provision करना बाध्यकारी नहीं है। उक्त स्थल पर तापमान किसी भी मौसम में न्यूनतम एवं अधिकतम 100C से अधिक का अन्तर नहीं होता है। फलतः लम्बाई में वृद्धि नगन्य होने की संभावना है। इस तरह अपने विवेक के आधार पर 6 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान किया गया था। जिसकी स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त है। तथा इस पर किसी भी स्तर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गयी। संचालन पदाधिकारी को दिये गये बचाव बयान में कहा गया था कि अपर्याप्त सं॰ में Expansion Joint नहीं दिये जाने के कारण पाईप लाईन एवं पैडेस्टल नहीं टूटा था। बल्कि पैडेस्टल का त्रुटिपूर्ण रूपांकण करने, Anchor Block/thrust block पर ध्यान नहीं दिये जाने तथा Faulty Alignment निर्धारण के कारण पैडेस्टल टूट गया एवं पाईप गिर गया। उड़नदस्ता ने भी अपने प्रतिवेदन के कंडिका 8.0.0(iii) में कहा है कि Static & Dynamic Load के गणना के अनुसार Pedestal, Anchor Block एवं thrust block का रूपांकण होता तो पाईप लाईन क्षतिग्रस्त होने की संभावना नहीं रहती। इस तथ्य को भी संचालन पदाधिकारी द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया। माननीय सर्वोच्य न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सम्बद्ध पदाधिकारी का बिना गवाही लिये उनके द्वारा प्रतिवेदित दस्तावेजों को संज्ञान में लेकर उसमें अंकित तथ्यों को सत्य मानते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित मान लिया गया, जो न्याय सम्मत नहीं है। संचालन पदाधिकारी यह प्रमाणित नहीं कर सके कि Pedestal का Design एवं निर्माण Faulty होने के कारण पाईप लाईन क्षतिग्रस्त हुआ अथवा अपर्याप्त संख्या में Expansion Joint दिये जाने के कारण क्षतिग्रस्त हुआ है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर, गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

संचालन पदाधिकारी ने आरोपी के बचाव बयान, उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन एवं अन्य अभिलेखों के समीक्षोपरान्त141 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 23 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान करते हुए प्रस्ताव अनुमोदन हेतु मुख्य अभियंता (याँ॰) को समर्पित किया गया है। जिसका भेटिंग मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना द्वारा दिनांक 08.10.15 को की गयी है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि समुचित संख्या में Expansion Joint का प्रावधान नहीं करने के कारण पाईप लाईन क्षतिग्रस्त होना परिलक्षित है जिसके लिए इन्हें दोषी माना जा सकता है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री सतीश कुमार (आई0डी0-एम0466) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

"10 % (दस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-812, दिनांक 05.07.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सतीश कुमार (आई0डी0-एम0466) तत0 कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"10 % (दस प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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23 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-12/2015-1582--श्री गजानन्द प्रसाद बिन्द (आई0डी0-जे0एम0-0609), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान परिक्षेत्राधीन सारण नहर प्रमंडल, एकमा एवं सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के अन्तर्गत दाहा उद्‌वह सिंचाई योजना के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2395, दिनांक 08.11.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत आरोप पत्र में गठित निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

IS Code 5822-1994 एवं IS Code 5330-1984 के अनुरूप याँत्रिक कार्यो के तहत पाईप लाईन का बिना अनुमोदित रूपांकण आलेख्य के ही प्राक्कलन में बिना Expansion Joint का प्रावधान किये ही प्राक्कलन तैयार किया गया एवं समुचित Expansion Joint के प्रावधान किये बिना ही पाईप लाईन का कार्य कराया गया। जिसके कारण पाईप लाईन में Thermal Expansion and Contraction के कारण पाईप क्रेक कर गया तथा Supporting System यथा Pedestal & Thrust block क्षतिग्रस्त हो गया। फलतः अधूरा कार्य पर किया गया व्यय का अपव्यय की स्थिति बनी। श्री बिन्द के दिनांक 30.11.16 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश संख्या-07 सहपठित ज्ञापांक-59 दिनांक 08.01.17 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-144, दिनांक 06.04.17 द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवदन में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-881, दिनांक 12.06.17 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए प्रमाणित आरोप के संबंध में श्री बिन्द से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

उक्त के क्रम में श्री बिन्द द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (बचाव-बयान) में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख करतेबिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 142 कार्य याँत्रिक अभिकर्त्ता Flow more ltd. द्वारा कराया जाना है। फर्म को ही असैनिक एवं याँत्रिक कार्य का रूपांकण उपलब्ध कराने का भी निदेश दिया गया। उपरोक्त तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि मुख्य अभियंता, सिवान द्वारा अनुमोदित पैडेस्टल का रूपांकण त्रुटिपूर्ण था। इसके कारण Support System टूट जाने के कारण पाईप लाईन लटक जाने से Joint Crack कर गया। यह क्षति अपर्याप्त संख्या में Expansion Joint प्रावधान नहीं किये जाने के कारण नहीं हुई, बल्कि Support System के Faulty design एवं आस-पास के पीट को नहीं भरने के कारण हुआ है जिसके लिये असैनिक विभाग दोषी है। संचालन पदाधिकारी का कथन कि आरोपित पदाधिकारी दि॰ 01.11.12 को स्थल निरीक्षण भी किया था परन्तु Expansion Joint के संबंध में किसी प्रकार का दिशा निदेश नहीं दिया गया। जबकि उनके द्वारा दि॰ 31.01. 2013 को प्रभार ग्रहण किया गया था। अतः संचालन पदाधिकारी का मंतव्य तथ्य के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि प्राक्कलन के आधार पर कार्य कराते रहा गया जबकि IS Code के अनुसार Expansion Joint की संख्या में संशोधन का प्रस्ताव नहीं दिया गया। उनके द्वारा Expansion Joint का प्रस्ताव देना अनुशासनहीनता मानी जाती, क्योंकि प्राक्कलन मुख्य अभियंता द्वारा स्वीकृत था। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर, गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेख की समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :- संचालन पदाधिकारी ने आरोपी से विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान दिये गये बचाव बयान, उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन, IS Code तथा अन्य अभिलेखों के समीक्षोपरान्त निम्न तथ्यों के आलोक में श्री बिन्द को बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख्य तथा बिना समुचित Expansion Joint का प्रावधान करते हुए पाईप के लाईनिंग कार्य के कराये जाने के कारण Thermal Expansion/contraction के कारण क्षतिग्रस्त होने के लिये दोषी माना गया है :- (क) IS Code 5822-1994 में 300 मी॰ के अन्तराल पर पाईप लाईन में Expansion Joint देने का प्रावधान है तथा IS Code 5330-1984 एंेंकर ब्लॉक के रूपांकण से संबंधित है। उक्त IS Code के आलोक में याँत्रिक प्रभाग द्वारा पाईप में Expansion Joint एवं ऐंकर ब्लॉक का प्रावधान नहीं किया गया। फलस्वरूप लोहे के पाईप में Expansion/Contraction के कारण कई जगहों पर क्रेक कर गया है। स्वीकृत प्राक्कलन में मात्र 6 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान था। जबकि पाईप की लम्बाई 5959 मी॰ है। उक्त लम्बाई के पाईप लाईन में Flow more ltd. (याँत्रिक के संवेदक) द्वारा पाईप क्रेक करने के बाद विभागीय निदेश के आलोक में 23 अदद्‌ Expansion Joint का प्रावधान कर प्राक्कलन दिनांक 12.08.15 को समर्पित किया गया। आरोपित द्वारा बिना समुचित प्रावधान (Expansion Joint) के प्राक्कलन के आधार पर कार्य करते रहे। उनके द्वारा IS Code के अनुसार Expansion Joint की संख्या में संशोधन करते हुए प्रस्ताव देना चाहिये था परन्तु ऐसा नहीं किया गया। (ख) आरोपी को पाईप लाईन कार्य में रूपांकण एवं अनुमोदित नक्शा उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया परन्तु उनके द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे स्पष्ट है कि पाईप लेईंग कार्य का रूपांकण IS Code के अनुसार नहीं किया गया।

आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में वही तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है।

श्री बिन्द तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कहा गया है कि आलोच्य कार्य का प्राक्कलन उनके पूर्ववर्ती सहायक अभियंता, श्री सियाराम सिंह द्वारा वर्ष 2011 में तैयार किया गया है एवं निविदा निष्पादनोंपरान्त उनके द्वारा कार्य प्रारम्भ कराते हुए कराया गया है। जबकि उनके द्वारा श्री सियाराम सिंह के सेवानिवृति के पश्चात दिनांक 31.01.2013 को प्रभार ग्रहण किया गया है। तत्‌पश्चात श्री सियाराम सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कराये गये कार्याे को उसी रूप में आगे बढ़ाया गया है। अतएव आरोप का प्रथम अंश के आलोक में IS Code के अनुरूप बिना अनुमोदित रूपांकण/आलेख एवं बिना Expansion Joint का समुचित प्रावधान के प्राक्कलन तैयार करने का आरोप बनता प्रतीत नहीं होता है। आरोप के दूसरे अंश के संबंध में कहा गया है कि पैडेस्टल के त्रुटिपूर्ण रूपांकण के कारण पैडेस्टल के क्षतिग्रस्त होने के कारण पाईप लाईन में क्रेक उत्पन्न हुआ है। इस कथन को उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 8.0.0 (1) तथा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।

वर्णित तथ्यों के आधार पर मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री गजानन्द प्रसाद बिन्द (आई0डी0-जे0एम0-0609), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

"05 % (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। तदालोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-811, दिनांक 05.07.19 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।

सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री गजानन्द प्रसाद बिन्द (आई0डी0-जे0एम0-0609), तत0 सहायक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"05 % (पाँच प्रतिशत) पेंशन की कटौती दो वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।143 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

26 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(दर0)16-01/2014-1591--श्री रविन्द्रनाथ राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, दरभंगा द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में दरभंगा जिलान्तर्गत वर्ष 2005-2006 एवं 2006-2007 में प्रशासनिक पदाधिकारियों/संबंधित अभियंताओं की मिलीभगत से 35 (पैतीस) करोड़ की राशि की लूट-खसोट एवं बन्दरबाँट से संबंधित निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग, बिहार, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार बरती गई अनियमितता के संबंध में मामले के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1223 दिनांक 01.09.14 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण किया गया। श्री राम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री राम के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक विभागीय संकल्प-सहपठित ज्ञापांक-578, दिनांक 06.04.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत श्री रविन्द्रनाथ राय, तत्का0 कार्यपलाक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप - राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना अन्तर्गत बहेड़े प्रखंड में बौआ सिंह के खेत से बिहरौना घाट होते हुए राजगीर सिंह बाँध तक कमला सोती का जीर्णोद्धार की योजना की प्रशासनिक स्वीकृति जिला पदाधिकारी, दरभंगा कार्यालय ज्ञाप सं0-98/मु0/जि0ग्रा0, दिनांक 31.05.06 द्वारा मो0 460000.00 के लिए दी गई एवं कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, दरभंगा (वर्तमान में ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सं0-02/बेनीपुर) को कार्यकारी एजेंसी नियुक्त करते हुए उक्त कार्य को 15.06.06 तक पुरा कराने का निदेश दिया गया।

(ii) दिनांक 15.06.06 तक उक्त योजना में कार्य प्रारंभ नहीं किये जाने एवं पूर्णतः मिट्टी की योजना होने के कारण जिला पदाधिकारी, दरभंगा के आदेश दिनांक 20.06.06 के द्वारा उक्त योजना को रद्‌द कर दिया गया। जिसका संसूचन उप विकास आयुक्त के ज्ञाप सं0-1693/जि0ग्रा0, दिनांक 27.06.06 द्वारा सभी संबंधित को दिया गया एवं कार्यपालक अभियंता को इस मद में विमुक्त की गई आधी राशि को अविलम्ब अभिकरण कार्यालय में लौटाने का निदेश दिया गया, जिसका अनुपालन श्री राय के द्वारा नहीं किया गया।

(iii) कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक-1066, दिनांक 29.06.06 द्वारा कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता का प्रतिवेदन संलग्न करते हुए योजना को समयानुसार पूरा करने की सूचना देते हुए उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-1693, दिनांक 27.06.06 पर पुनः विचार करने का अनुरोध किया गया। लेकिन कार्यपालक अभियंता द्वारा योजना में किए गए कार्य की मापीपुस्त समर्पित नहीं की गई जिससे यह पता चलता कि योजना में कार्य किया गया है।

(iv) इस योजना में अनियमितता किए जाने के संबंध में विभिन्न स्थानीय व्यक्ति द्वारा कई आवेदन दिये गये जिसकी जाँच करने का निदेश उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-89 गो0, दिनांक-13.02.07 द्वारा अधीक्षण अभियंता ग्राम्य अभियंत्रण संगठन कार्य अंचल, दरभंगा को दिया गया। उन्होंने अपना प्रतिवेदन पत्रांक-1545, दिनांक 16.07.07 द्वारा समर्पित किया। प्रतिवेदन के साथ उक्त योजना में कराये गये कार्य के मापीपुस्त को छायाप्रति भी समर्पित की गयी जिसका मापीपुस्त सं0-541 है, जो कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा श्री विनोदानन्द झा, सहायक अभियंता को दिनांक 31.03.06 को निर्गत किया गया है। जबकि योजना की स्वीकृति दिनांक 31.05.06 को दी गई है। मापीपुस्त के पृष्ठ सं0-01 से 06 तक प्रथम मापी दिनांक 25.04.06 की तिथि में अंकित है एवं द्वितीय मापी की प्रविष्टि पृ0 सं0-9 से 12 तक दिनांक 15.06.06 की तिथि में अंकित है। इससे स्पष्ट होता है कि योजना की प्रशासनिक स्वीकृति (31.05.06) के पूर्व ही मापीपुस्त बिना कार्य किये तैयार कर लिया गया। मापीपुस्त में कार्य प्रारंभ करने की तिथि अंकित नहीं की गई है। इससे परिलक्षित होता है कि मापीपुस्त गलत मंशा के लिए कार्य पहले ही तैयार कर ली गयी थी। योजना के मापीपुस्त में मापी का सत्यापन भी कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं किया गया है।

(v) उपरोक्त अनियमितता के संबंध में उप विकास आयुक्त्, दरभंगा के पत्रांक-410 गो0, दिनांक 24.09.07 द्वारा बिन्दुवार प्रतिवेदन एवं अनियमितता करने वाले अभियंता पर जिम्मेवारी निर्धारित कर एक सप्ताह के अन्दर प्रतिवेदन की मांग की गई थी परन्तु निर्धारित अवधि के अन्दर वांछित प्रतिवेदन कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित नहीं किया गया। पुनः उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-99गो0, दिनांक 07.03.08 के द्वारा स्मारित किए जाने के बाद भी वांछित प्रतिवेदन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा समर्पित नहीं किया गया जो उनकी कार्य के प्रति उदासीनता एवं योजना में हुई अनियमितता में उनकी संलिप्तता को दर्शाता है।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें सभी आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-

(i) निदेशक, लेखा प्रशासन पदाधिकारी द्वारा स्थल के निरीक्षणोंपरांत अपने पत्रांक-2459, दिनांक 14.09.06 द्वारा प्रतिवेदन दिया गया जिसमें योजना का कार्य संतोषजनक, उपयोगी होने का उल्लेख करते हुए पुरी लंबाई में कार्य होना बताया गया।

(ii) विमुक्त की गई राशि के संदर्भ में आरोपी के कथन कि "प्राप्त आधी राशि को इसी मद में संचालित अन्य योजनाओं के मजदूरी का बकाया भुगतान पर खर्च किया है, को स्वीकार करते हुए उक्त राशि को गबन नहीं होना बताया गया।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 144 (iii) मापपुस्त सं0-541 में दर्ज मापी के संदर्भ में आरोपी का कथन की इस कार्य की मापीपुस्त सं0-544, में दर्ज है को स्वीकार किया गया।

(iv) आरोपी का कथन कि अधीक्षण अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण कार्य अंचल, दरभंगा ने किसी अभिलेख एवं मापीपुस्त की माँग नहीं किया है न ही स्थल निरीक्षण किया है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु -

(i) आरोपी द्वारा अपने बचाव-बयान में कहा गया है कि जिला प्रशासन द्वारा श्री कौशल किशोर वर्मा, निर्देशक, लेखा प्रशासन स्वनियोजन, जिला अभिकरण दरभंगा को जाँच हेतु प्राधिकृत किया गया था एवं उनके द्वारा स्थलीय जाँचोपरांत अपने पत्रांक-2459, दिनांक 14.09.08 से जाँच प्रतिवेदन उप विकास आयुक्त, दरभंगा को दिया गया जिसमें कार्य पुरी लंबाई में किये जाने का उल्लेख है परन्तु जिला पदाधिकारी के पत्रांक-872 दिनांक 06.05.09 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि जिला पदाधिकारी द्वारा इसी मामले में श्री राय के अलावा एक सहायक अभियंता एवं श्री कौशल किशोर वर्मा, निदेशक लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, जिला अभिकरण, दरभंगा को भी दोषी मानते हुए इनके विरूद्ध भी प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में इसी मामले में आरोपी पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में योजना का कार्य पुरी लंबाई में कराया गया है, को मानना उचित प्रतीत नहीं होता है।

(ii) संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन कि इस योजना हेतु विमुक्त की गई आधी रािश को अन्य योजना पर खर्च कर दिया गया को स्वीकार किया गया है। जबकि खर्च की गई राशि से संबंधित कोई भी अभिलेख समर्पित नहीं की गई है। जिससे परिलक्षित हो सके कि वास्तविक में उक्त राशि का व्यय अन्य किस योजना पर किया गया है। यह उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा किसी खास योजना के कार्य हेतु विमुक्त राशि को किसी अन्य योजना पर खर्च करने के पूर्व जिला प्रशासन की अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य प्रतीत होता है। परन्तु आरोपी द्वारा इस संदर्भ में कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव आरोपी के उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है।

(iii) प्रश्नगत योजना के तहत कराये गये कार्य की मापी की प्रविष्टि से संबंधित मापपुस्त के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि इस योजना के कार्य की मापी मापीपुस्त सं0-544 में दर्ज की गई है। परन्तु मापपुस्त की प्रति उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपी के उक्त कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। श्री राय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया जिसका मुख्य बिन्दु निम्नलिखित है :-

(i) योजना की स्वीकृति रद्‌द किये जाने का आधार कार्य नहीं किया जाना बताया गया है जबकि कार्य की कोई जाँच नहीं करायी गयी।

(ii) योजना से संबंधित एक मामले में तथ्यकथन विवरणी जिला पदाधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया है। तथ्य कथन विवरणी के अवलोकन के बाद अधिवक्ता द्वारा इस विषय से संबंधित योजना को रद्‌द करने का आधार की मांग की गयी। किन्तु जिलास्तर से केाई सूचना सरकारी अधिवक्ता को नहीं दी गयी।

(iii) इस योजना में कराये गये कार्य की मापी मापपुस्त सं0-5044 में अंकित की गयी है। जिसकी जाँच सहायक अभियंता द्वारा की गयी थी। मापपुस्त मेरी उपस्थिति में ही उप विकास आयुक्त को दिखाया गया। किन्तु उप विकास आयुक्त द्वारा योजना के रद्‌द कर दिये जाने के बाद उसे पुनर्जिवित करने एवं स्थल की जाँच करने में कोई रूचि नहीं ली गयी। फलतः कार्यपालक अभियंता ने योजना के कराये गये कार्य की मापी का सत्यापन नहीं किया गया।

(iv) एक अधीक्षण अभियंता द्वारा बिना स्थल जाँच किये अथवा बिना कोई अभिलेखों की माँग किये मापपुस्तिका-541 जो इन्हें खण्ड-खण्ड में कहीं से प्राप्त कराया गया था, पर दी गई टिप्पणी से भ्रम पैदा हुआ। (v) इस प्रमंडल में NFFW मद से 300 योजनाएँ कार्यान्वयन के अधीन थी। मजदूरों के बाकी राशि में भुगतान हेतु प्रमण्डल में उपलब्ध राशि का उपयोग किया गया। तथ्य विवरणी में कंडिका-22 से स्पष्ट है कि इस तथ्य की स्वीकृति उप विकास आयुक्त एवं जिला पदाधिकारी द्वारा की गई। विभागीय समीक्षा श्री राय द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि-

(i) संचालन पदाधिकारी ने आरोपित के कथन कि जिला प्रशासन द्वारा प्राधिकृत श्री कौशल किशोर वर्मा, निदेशक लेखा प्रशासन स्वनियोजन, दरभंगा के स्थलीय जाँच में कार्य पूरी लंबाई में किये जाने का उल्लेख है को स्वीकार योग्य माना गया है जबकि जिला पदाधिकारी द्वारा श्री कौशल किशोर वर्मा को भी दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध प्रपत्र-क का गठन कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु पत्रांक-872, दिनांक 06.05.09 से किये गये अनुरोध के आलोक में श्री वर्मा का जाँच प्रतिवेदन स्वीकार योग्य नहीं है। इस संदर्भ में आरोपित द्वारा कहा गया है कि यदि श्री वर्मा का जाँच प्रतिवेदन गलत था तो किसी दूसरे सक्षम पदाधिकारी से जाँच कराया जाना अपेक्षित था, को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि जिला प्रशासन के स्तर पर अधीक्षण अभियंता, ग्राम अभिकरण संगठन अंचल, दरभंगा से जाँच करायी गयी एवं उनके प्रतिवेदन के आधार पर आरोप गठित कर जिला पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई हेतु अनुशंसा की गयी। अतः आरोप प्रमाणित होता है। (ii) आरोपी का कथन कि इस योजना हेतु विमुक्त की गयी आधी राशि अन्य योजना पर खर्च की गई से संबंधित अभिलेख उलपब्ध नहीं कराया गया है। लेकिन तथ्यकथन की कंडिका-22 के आलोक में राशि गबन का मामला नहीं बनता है। लेकिन भुगतान से संबंधित अभिलेख यथा मास्टररौल/मापपुस्त नहीं होने से भुगतान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होता है। अतः आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।145 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 (iii) आरोपित पदाधिकारी का कहना कि आलोच्य कार्य की मापी मापपुस्त सं0-544 में दर्ज की गयी है जबकि आरोप पत्र में अंकित है कि कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के पूर्व ही मापपुस्त सं0-541 में अनियमित ढंग से गबन करने की मंशा से दर्ज की गई है। इस प्रकार एक ही योजना था कार्य कराये बिना ही रद्‌द होने के पश्चात गलत ढंग से हड़बड़ी में मापपुस्त का सृजन करने के क्रम में मापपुस्त सं0-541 में योजना की स्वीकृति की तिथि के पूर्व ही मापी अंकित हो जाने की भूल को सुधाराने के क्रम में दूसरा माप पुस्त सं0-544 का सृजन किया गया है। इसी संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी से साक्ष्य के रूप में मापपुस्त सं0-544 की प्रति की माँग की गई थी को उपलब्ध नहीं कराया गया। मापपुस्त सं0-541 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इस मापपुस्त पर आलोच्य कार्य का ही नाम अंकित है तथा मापपुस्त पर किये गये हस्ताक्षर अन्य अभिलेख पर अंकित हस्ताक्षर से मिलते हैं। ऐसी स्थिति आरोपित के कथन कि मापपुस्त 541 दूसरे कार्य का है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। इस प्रकार आरोप प्रमाणित होता है।

(iv) उप विकास आयुक्त के पत्रांक-410, दिनांक 24.09.07 से अधियाचित बिन्दुवार प्रतिवेदन की माँग करने तथा पत्रांक-99 दिनांक 07.08.09 से स्मारित करने के बावजूद भी वांछित प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के संदर्भ में आरोपित अभियंता द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में कोई तथ्य अंकित नहीं किया गया है न ही कोई साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है। ऐसी स्थिति में वांछित प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने के कारण आरोपित द्वारा आदेश की अवहेलना, कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरता जाना परिलक्षित होता है। अतः आरोप प्रमाणित होता है।

उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री राय द्वारा जिला प्रशासन के द्वारा योजना रद्‌द करने के पश्चात विमुक्त आधी राशि लौटाये जाने के निदेश का अनुपालन नहीं करने एवं उक्त राशि को बिना अनुमति के दूसरे योजना पर व्यय करने, बिना कार्य कराये गलत मंशा से एक ही कार्य का दो मापपुस्त संधारित करने तथा उप विकास आयुक्त द्वारा अधियाचित प्रतिवेदन समर्पित नहीं करने एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के आरोप को प्रमाणित पाते हुए श्री राय के विरूद्ध "05 (पाँच) प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्ष के लिए" दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री रविन्द्रनाथ राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विेशेष प्रमंडल, बेनीपुर, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"05 (पाँच) प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्ष के लिए" उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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26 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(दर0)16-01/2014-1592--श्री विनोदानन्द झा, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, दरभंगा द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में दरभंगा जिलान्तर्गत वर्ष 2005-2006 एवं 2006-2007 में प्रशासनिक पदाधिकारियों/संबंधित अभियंताओं की मिलीभगत से 35 (पैतीस) करोड़ की राशि की लूट-खसोट एवं बन्दरबाँट से संबंधित निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग, बिहार, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार बरती गई अनियमितता के संबंध में मामले के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1224 दिनांक 01.09.14 द्वारा श्री झा से स्पष्टीकरण किया गया। श्री झा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री झा के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक विभागीय संकल्प-सहपठित ज्ञापांक-577, दिनांक 06.04.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत श्री विनोदानन्द झा, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप - राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना अन्तर्गत बहेड़े प्रखंड में बौआ सिंह के खेत से बिहरौना घाट होते हुए राजगीर सिंह बाँध तक कमला सोती का जीर्णोद्धार की योजना की प्रशासनिक स्वीकृति जिला पदाधिकारी, दरभंगा कार्यालय ज्ञाप सं0-98/मु0/जि0ग्रा0, दिनांक 31.05.06 द्वारा मो0 460000.00 के लिए दी गई एवं कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, दरभंगा (वर्तमान में ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सं0-02/बेनीपुर) को कार्यकारी एजेंसी नियुक्त करते हुए उक्त कार्य को 15.06.06 तक पुरा कराने का निदेश दिया गया।

(ii) दिनांक 15.06.06 तक उक्त योजना में कार्य प्रारंभ नहीं किये जाने एवं पूर्णतः मिट्टी की योजना होने के कारण जिला पदाधिकारी, दरभंगा के आदेश दिनांक 20.06.06 के द्वारा उक्त योजना को रद्‌द कर दिया गया। जिसका संसूचन उप विकास आयुक्त के ज्ञाप सं0-1693/जि0ग्रा0, दिनांक 27.06.06 द्वारा सभी संबंधित को दिया गया एवं कार्यपालक अभियंता को इस मद में विमुक्त की गई आधी राशि को अविलम्ब अभिकरण कार्यालय में लौटाने का निदेश दिया गया, जिसका अनुपालन श्री झा के द्वारा नहीं किया गया।

(iii) कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक-1066, दिनांक 29.06.06 द्वारा कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता का प्रतिवेदन संलग्न करते हुए योजना को समयानुसार पूरा करने की सूचना देते हुए उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-1693, दिनांक 27.06.06 पर पुनः विचार करने का अनुरोध किया गया। लेकिन कार्यपालक अभियंता द्वारा योजना में किए गए कार्य की मापीपुस्त समर्पित नहीं की गई जिससे यह पता चलता कि योजना में कार्य किया गया है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 146 (iv) इस योजना में अनियमितता किए जाने के संबंध में विभिन्न स्थानीय व्यक्ति द्वारा कई आवेदन दिये गये जिसकी जाँच करने का निदेश उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-89 गो0, दिनांक-13.02.07 द्वारा अधीक्षण अभियंता ग्राम्य अभियंत्रण संगठन कार्य अंचल, दरभंगा को दिया गया। उन्होंने अपना प्रतिवेदन पत्रांक-1545, दिनांक 16.07.07 द्वारा समर्पित किया। प्रतिवेदन के साथ उक्त योजना में कराये गये कार्य के मापीपुस्त को छायाप्रति भी समर्पित की गयी जिसका मापीपुस्त सं0-541 है, जो कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा श्री विनोदानन्द झा, सहायक अभियंता को दिनांक 31.03.06 को निर्गत किया गया है। जबकि योजना की स्वीकृति दिनांक 31.05.06 को दी गई है। मापीपुस्त के पृष्ठ सं0-01 से 06 तक प्रथम मापी दिनांक 25.04.06 की तिथि में अंकित है एवं द्वितीय मापी की प्रविष्टि पृ0 सं0-9 से 12 तक दिनांक 15.06.06 की तिथि में अंकित है। इससे स्पष्ट होता है कि योजना की प्रशासनिक स्वीकृति (31.05.06) के पूर्व ही मापीपुस्त बिना कार्य किये तैयार कर लिया गया। मापीपुस्त में कार्य प्रारंभ करने की तिथि अंकित नहीं की गई है। इससे परिलक्षित होता है कि मापीपुस्त गलत मंशा के लिए कार्य पहले ही तैयार कर ली गयी थी। योजना के मापीपुस्त में मापी का सत्यापन भी कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं किया गया है।

(v) उपरोक्त अनियमितता के संबंध में उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-410 गो0, दिनांक 24.09.07 द्वारा बिन्दुवार प्रतिवेदन एवं अनियमितता करने वाले अभियंता पर जिम्मेवारी निर्धारित कर एक सप्ताह के अन्दर प्रतिवेदन की मांग की गई थी परन्तु निर्धारित अवधि के अन्दर वांछित प्रतिवेदन कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित नहीं किया गया। पुनः उप विकास आयुक्त, दरभंगा के पत्रांक-99गो0, दिनांक 07.03.08 के द्वारा स्मारित किए जाने के बाद भी वांछित प्रतिवेदन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा समर्पित नहीं किया गया जो उनकी कार्य के प्रति उदासीनता एवं योजना में हुई अनियमितता में उनकी संलिप्तता को दर्शाता है।

विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें सभी आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य अंकित किया गया। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :-

(i) निदेशक, लेखा प्रशासन पदाधिकारी द्वारा स्थल के निरीक्षणोंपरांत अपने पत्रांक-2459, दिनांक 14.09.06 द्वारा प्रतिवेदन दिया गया जिसमें योजना का कार्य संतोषजनक, उपयोगी होने का उल्लेख करते हुए पुरी लंबाई में कार्य होना बताया गया।

(ii) विमुक्त की गई राशि के संदर्भ में आरोपी के कथन कि "प्राप्त आधी राशि को इसी मद में संचालित अन्य योजनाओं के मजदूरी का बकाया भुगतान पर खर्च किया है, को स्वीकार करते हुए उक्त राशि को गबन नहीं होना बताया गया।

(iii) मापपुस्त सं0-541 में दर्ज मापी के संदर्भ में आरोपी का कथन की इस कार्य की मापीपुस्त सं0-544, में दर्ज है को स्वीकार किया गया।

(iv) आरोपी का कथन कि अधीक्षण अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण कार्य अंचल, दरभंगा ने किसी अभिलेख एवं मापीपुस्त की माँग नहीं किया है न ही स्थल निरीक्षण किया है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु -

(i) आरोपी द्वारा अपने बचाव-बयान में कहा गया है कि जिला प्रशासन द्वारा श्री कौशल किशोर वर्मा, निर्देशक, लेखा प्रशासन स्वनियोजन, जिला अभिकरण दरभंगा को जाँच हेतु प्राधिकृत किया गया था एवं उनके द्वारा स्थलीय जाँचोपरांत अपने पत्रांक-2459, दिनांक 14.09.08 से जाँच प्रतिवेदन उप विकास आयुक्त, दरभंगा को दिया गया जिसमें कार्य पुरी लंबाई में किये जाने का उल्लेख है परन्तु जिला पदाधिकारी के पत्रांक-872 दिनांक 06.05.09 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि जिला पदाधिकारी द्वारा इसी मामले में श्री झा के अलावा एक कार्यपालक अभियंता एवं श्री कौशल किशोर वर्मा, निदेशक लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, जिला अभिकरण, दरभंगा को भी दोषी मानते हुए इनके विरूद्ध भी प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में इसी मामले में आरोपी पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में योजना का कार्य पुरी लंबाई में कराया गया है, को मानना उचित प्रतीत नहीं होता है।

(ii) संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन कि इस योजना हेतु विमुक्त की गई आधी रािश को अन्य योजना पर खर्च कर दिया गया को स्वीकार किया गया है। जबकि खर्च की गई राशि से संबंधित कोई भी अभिलेख समर्पित नहीं की गई है। जिससे परिलक्षित हो सके कि वास्तविक में उक्त राशि का व्यय अन्य किस योजना पर किया गया है। यह उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा किसी खास योजना के कार्य हेतु विमुक्त राशि को किसी अन्य योजना पर खर्च करने के पूर्व जिला प्रशासन की अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य प्रतीत होता है। परन्तु आरोपी द्वारा इस संदर्भ में कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव आरोपी के उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है।

(iii) प्रश्नगत योजना के तहत कराये गये कार्य की मापी की प्रविष्टि से संबंधित मापपुस्त के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि इस योजना के कार्य की मापी मापीपुस्त सं0-544 में दर्ज की गई है। परन्तु मापपुस्त की प्रति उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपी के उक्त कथन को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। श्री झा द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया जिसका मुख्य बिन्दु निम्नलिखित है :-

(i) श्री कौशल किशोर वर्मा के निरीक्षण/जाँच प्रतिवेदन गलत था तो तत्काल ही दूसरे सक्षम पदाधिकारी से प्राप्त कराया जाना अपेक्षित था। इसके विपरीत मेरे स्पष्टीकरण को वर्षों तक दबा कर रखा गया। उच्चाधिकारी यदाकदा147 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सुविधानुसार अपने मनोनुकुल प्रतिवेदित करते रहे और मेरी संलिप्तता उजागर कर अपनो को पाक साफ दिखाने की कोशिश करते रहे।

(ii) सभी सरकारी अभिलेख प्रमंडलीय कार्यालय में रहता है जहाँ से सभी वांछित अभिलेख को हस्तगत कर समर्पित करना संभव नहीं हो सका। किसी अन्य योजना पर उक्त राशि को खर्च करने हेतु जिला प्रशासन से अनुमति प्राप्त करने की जवाबदेही सहायक अभियंता का नहीं होता है।

(iii) मापपीपुस्त अभिलेख के साथ प्रमंडलीय कार्यालय में रहता है। मापपुस्त हेराफेरी के अभियोग लगाने से पूर्व जाँच करानी चाहिए थी। इस संबंध में स्पष्ट करना चाहता हूँ कि तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण संगठन के द्वारा स्थलीय जाँच किये बिना मामले को मनगढंत एवं भ्रामक प्रतिवेदन देकर मामले को उलझा दिया गया। जाँच प्रतिवेदन के अंतिम कंडिका में उनके द्वारा लिखा गया कि चूँकि योजना स्थगित कर दी गई है अतः जाँच की आवश्यकता नहीं है। (iv) मापपुस्त संख्या-541 का उपयोग दिनांक 31.03.06 को स्वीकृत योजना चक्का राम स्वरूप यादव के घर से नदी किनारे होते हुए रामचन्द्र सहनी के घर तक मिट्टी-सह-खरंजाकरण कार्य हेतु किया गया है। प्रश्नगत योजना की मापीपुस्त सं0-544 में अंकित की गई है। मापपुस्त सं0-544 की छायाप्रति प्राप्त करने का प्रयास किया गया परन्तु उपलब्ध नहीं हो सका। विभागीय समीक्षा श्री झा द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि-

(i) संचालन पदाधिकारी ने आरोपित के कथन कि जिला प्रशासन द्वारा प्राधिकृत श्री कौशल किशोर वर्मा, निदेशक लेखा प्रशासन स्वनियोजन, दरभंगा के स्थलीय जाँच में कार्य पूरी लंबाई में किये जाने का उल्लेख है को स्वीकार योग्य माना गया है जबकि जिला पदाधिकारी द्वारा श्री कौशल किशोर वर्मा को भी दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध प्रपत्र-क का गठन कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु पत्रांक-872, दिनांक 06.05.09 से किये गये अनुरोध के आलोक में श्री वर्मा का जाँच प्रतिवेदन स्वीकार योग्य नहीं है। इस संदर्भ में आरोपित द्वारा कहा गया है कि यदि श्री वर्मा का जाँच प्रतिवेदन गलत था तो किसी दूसरे सक्षम पदाधिकारी से जाँच कराया जाना अपेक्षित था, को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि जिला प्रशासन के स्तर पर अधीक्षण अभियंता, ग्राम अभिकरण संगठन अंचल, दरभंगा से जाँच करायी गयी एवं उनके प्रतिवेदन के आधार पर आरोप गठित कर जिला पदाधिकारी द्वारा कार्रवाई हेतु अनुशंसा की गयी। अतः आरोप प्रमाणित होता है। (ii) आरोपी का कथन कि इस योजना हेतु विमुक्त की गयी आधी राशि अन्य योजना पर खर्च की गई से संबंधित अभिलेख उलपब्ध नहीं कराया गया है। लेकिन तथ्यकथन की कंडिका-22 के आलोक में राशि गबन का मामला नहीं बनता है। लेकिन भुगतान से संबंधित अभिलेख यथा मास्टररौल/मापपुस्त नहीं होने से भुगतान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होता है। अतः आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।

(iii) आरोपित पदाधिकारी का कहना कि आलोच्य कार्य की मापी मापपुस्त सं0-544 में दर्ज की गयी है जबकि आरोप पत्र में अंकित है कि कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के पूर्व ही मापपुस्त सं0-541 में अनियमित ढंग से गबन करने की मंशा से दर्ज की गई है। इस प्रकार एक ही योजना था कार्य कराये बिना ही रद्‌द होने के पश्चात गलत ढंग से हड़बड़ी में मापपुस्त का सृजन करने के क्रम में मापपुस्त सं0-541 में योजना की स्वीकृति की तिथि के पूर्व ही मापी अंकित हो जाने की भूल को सुधाराने के क्रम में दूसरा माप पुस्त सं0-544 का सृजन किया गया है। इसी संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी से साक्ष्य के रूप में मापपुस्त सं0-544 की प्रति की माँग की गई थी को उपलब्ध नहीं कराया गया। मापपुस्त सं0-541 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इस मापपुस्त पर आलोच्य कार्य का ही नाम अंकित है तथा मापपुस्त पर किये गये हस्ताक्षर अन्य अभिलेख पर अंकित हस्ताक्षर से मिलते हैं। ऐसी स्थिति आरोपित के कथन कि मापपुस्त 541 दूसरे कार्य का है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। इस प्रकार आरोप प्रमाणित होता है।

(iv) उप विकास आयुक्त के पत्रांक-410, दिनांक 24.09.07 से अधियाचित बिन्दुवार प्रतिवेदन की माँग करने तथा पत्रांक-99 दिनांक 07.08.09 से स्मारित करने के बावजूद भी वांछित प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के संदर्भ में आरोपित अभियंता द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में कोई तथ्य अंकित नहीं किया गया है न ही कोई साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है। ऐसी स्थिति में वांछित प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने के कारण आरोपित द्वारा आदेश की अवहेलना, कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरता जाना परिलक्षित होता है। अतः आरोप प्रमाणित होता है।

उपरोक्त समीक्षा के आलोक में श्री झा द्वारा जिला प्रशासन के द्वारा योजना रद्‌द करने के पश्चात विमुक्त आधी राशि लौटाये जाने के निदेश का अनुपालन नहीं करने एवं उक्त राशि को बिना अनुमति के दूसरे योजना पर व्यय करने, बिना कार्य कराये गलत मंशा से एक ही कार्य का दो मापपुस्त संधारित करने तथा उप विकास आयुक्त द्वारा अधियाचित प्रतिवेदन समर्पित नहीं करने एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के आरोप को प्रमाणित पाते हुए श्री झा के विरूद्ध "05 (पाँच) प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्ष के लिए" दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री विनोदानन्द झा, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विेशेष प्रमंडल, बेनीपुर, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-

"05 (पाँच) प्रतिशत पेंशन की कटौती दो वर्ष के लिए" उक्त निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 148

29 जुलाई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-111/97/1601--श्री बीरेन्द्र सिंह 'प्रभाकर', तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में सरकारी खजाने से किये गये गबन हेतु आरा-नवादा थाना कांड संख्या-161/97 में दर्ज प्राथमिकी में प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय ज्ञापांक-60, दिनांक 09.08.97 द्वारा निलंबित कर असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत संकल्प संख्या-2502, दिनांक 20.06.97 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत श्री प्रभाकर के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

(1) देय प्रोन्नति पर तीन वर्षों तक रोक। (2) दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (3) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त और कुछ भी देय नहीं होगा, किन्तु पेंशन प्रयोजनार्थ अवधि की गणना की जायेगी।

उक्त दण्ड का उल्लेख करते हुए श्री प्रभाकर से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी तथा उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षोपरांत उपर्युक्त उल्लेखित दण्ड को बढाते हुए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :- (1) कार्यपालक अभियंता के पद से सहायक अभियंता के पद पर पदावनति।

(2) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त और कुछ देय नहीं, किन्तु इस अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी।

उपर्युक्त दण्ड का उल्लेख करते हुए विभागीय पत्रांक-747, दिनांक 02.07.2002 द्वारा पुनः श्री प्रभाकर से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी तथा पत्रांक-1226, दिनांक 30.09.2002 द्वारा पूरक द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। इस बीच श्री प्रभाकर द्वारा दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-9468/02 में दिनांक 06.05.2003 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-835, दिनांक 19.07.2003 द्वारा श्री प्रभाकर को दिनांक 06.05.2003 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया। श्री प्रभाकर से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरांत श्री प्रभाकर के विरूद्ध निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाये गये :- (1) 6.57लाख रूपये गबन (यदि छूटी हुई अवधि के कैशबुक लिख दिया जाय) अन्यथा 15.33 लाख रूपये उनके कार्यकाल में रोकड़पाल द्वारा किया जाना जबकि श्री प्रभाकर निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी थे और उनके द्वारा समय-समय पर कोई प्रभावकारी कदम नहीं लिया गया। (2) कैशबुक 4/97 से 6/97 तक नहीं लिखा जाना तथा वर्क कैशबुक 21 जून से 23 जून तक नहीं लिखा जाना अर्थात कैशबुक का संधारण नहीं करना, चैस्ट की दोनों चाबी रोकड़पाल के पास रखना अर्थात गैर जिम्मेदाराना कार्य करना।

(3) राशि रहने पर भी राशि की निकासी सेल्फ चेक के माध्यम से करना। इसी राशि में से 2.66लाख रूपये ट्रेजरी में वित्तीय वर्ष के बाद दिनांक 29.05.97 को जमा करना।

(4) विभागीय अधिसूचना दिनांक 11.06.97 द्वारा प्रशासनिक आधार पर स्थानान्तरण किये जाने और दिनांक 23.

06.97 को अधीक्षण अभियंता, आरा द्वारा विरमित करते हुए अन्य कार्यपालक अभियंता को प्रभार लेने का आदेश दिये जाने पर भी उन्हें प्रभार देने में आनाकानी करने और अन्ततः अधीक्षण अभियंता द्वारा निदेशित कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 24.06. 97 को स्वतः प्रभार ग्रहण करना पड़ा। रोकड़ पुस्ति का प्रभार भी नहीं सौंपा जाना।

उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार ने श्री बीरेन्द्र सिंह प्रभाकर को विभागीय अधिसूचना संख्या-658, दिनांक 30.

08.2004 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (1) कार्यपालक अभियंता के पद से सहायक अभियंता के पद पर पदावनति।

(2) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त और कुछ देय नहीं, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी।

उपर्युक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री प्रभाकर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-2225/04 में दिनांक 25.11.2004 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-658, दिनांक 30.08. 2004 द्वारा संसूचित विभागीय दण्ड को अधिसूचना संख्या-315, दिनांक 05.04.2005 द्वारा निरस्त इस शर्त के साथ किया गया कि निरस्तीकरण विभाग द्वारा दायर किये जाने वाले एल0पी0ए0 के फलाफल से प्रभावित होगा। परन्तु विधि विभाग द्वारा उक्त मामले में एल0पी0ए0 दायर करने का परामर्श प्राप्त नहीं होने पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद में पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री प्रभाकर के विरूद्ध पुनः विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-1275, दिनांक 07.10.2005 द्वारा पुनः पूर्व में गठित आरोपाें के लिए सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मत से निम्नांकित बिन्दुओं पर असहमति पायी गयी :-

श्री प्रभाकर निःसंदेह गबन की गई राशि के लिए सीधे तौर पर जिम्मेवार नहीं हैं, जिसकी सम्पुष्टि भी व्यवहार द्वारा किया गया है परन्तु गबन आपके कार्यालय में हुआ है यह भी प्रमाणित है जो उनकी प्रशासनिक विफलता का द्योतक है। इसलिए भले ही वे सीधे तौर पर जिम्मेवारी नहीं है परन्तु कार्यालय प्रधान की हैसियत से उन्हें निर्दोष नहीं माना जा सकता है।

उपर्युक्त असहमति के बिन्दु के आधार पर सरकार द्वारा श्री प्रभाकर को प्रशासनिक विफलता के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

149 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

(1) निन्दन 1997-98 (2) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त असहमति के बिन्दु और दण्ड हेतु श्री प्रभाकर से विभागीय पत्रांक-720, दिनांक 08.07.2006 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। उक्त कारण पृच्छा के उत्तर में कहा गया कि उनके द्वारा रोकड़पाल के स्थानांतरण का प्रस्ताव दिया गया था जिसे स्वीकार नहीं किया गया तथा रोकड़पाल द्वारा नियमित रूप से रोकड़वही उपस्थापित नहीं किया जाता था। जिसकी समीक्षा सरकार स्तर पर की गयी तथा सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि उक्त तथ्य मान्य नहीं है क्योंकि यदि रोकड़पाल द्वारा कैशबुक लिख नहीं जाता था तो उन्हें आगे निकासी बन्द कर देनी चाहिए थी। गबन की राशि देखने से प्रतीत होता है कि इस प्रकार कस सिलसिला लंबी अवधि तक जारी रहा है। ऐसी परिस्थति में श्री प्रभाकर को आंशिक प्रशासनिक विफलता के लिए निम्न दण्ड देने का प्रस्ताव के साथ विभागीय पत्रांक-12, दिनांक 08.01.2007 द्वारा कारण पृच्छा की गयी।

(1) निन्दन वर्ष 1997-98 (2) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (3) निलंबन अवधि के प्रारंभिक दो वर्षों तक के लिए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं परन्तु शेष अवधि में वेतनवृद्धि के साथ पूर्ण वेतन का 90प्रतिशत तथा निलंबन अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी।

उक्त के क्रम में श्री प्रभाकर द्वारा समर्पित कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी परन्तु श्री प्रभाकर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा के दिनांक 30.11.2007 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश सं0-2 सहपठित दिनांक 30.11.2007 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश सं0-2 सहपठित ज्ञापांक-12, दिनांक 09.01.2008 द्वारा पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में परिवर्तित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-14, दिनांक 09.01.2008 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत कारण पृच्छा की गयी।

उक्त के क्रम में श्री प्रभाकर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उल्लेखित किया गया कि विभाग द्वारा वित्तीय अनियमितता के लिए प्रशासनिक विफलता बताया गया है जो नया दोषारोपण है जाँच पदाधिकारी द्वारा उन्हें दोषमुक्त किया गया है तथा जाँच प्रतिवेदन में ऐसा कोई बिन्दु अंकित नहीं किया गया। जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी तथा पाया गया कि श्री बीरेन्द्र सिंह प्रभाकर के सोन नहर प्रमंडल, आरा के पदस्थापन काल में सरकारी राजस्व प्राप्ति की राशि कोषागार में जमा नहीं हुआ तथा रोकड़पाल के मिली भगत से गबन हुआ। गबन हेतु रोकड़पाल की सेवा से बर्खास्त किया गया। अतः श्री प्रभाकर को गबन के लिए प्रशासनिक विफलता के लिए उत्तरदायी पाया गया है क्योंकि उनके द्वारा रोकड़वही का नियमित सत्यापन नहीं किया गया। साथ ही यह भी पाया गया कि प्रशासनिक विफलता का आरोप नया नहीं है बल्कि पूर्व में सभी आरोपों का समाहित रूप है।

श्री प्रभाकर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा को उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए अधिसूचना ज्ञापांक-528, दिनांक 10.07.2008 द्वारा दण्ड देने का निर्णय लिया गया :-

(1) दस प्रतिशत (10%) पेंशन पर एक वर्ष तक रोक। (2) निलंबन अवधि में निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी।

श्री प्रभाकर द्वारा उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-1496/2011 बीरेन्द्र सिंह प्रभाकर बनाम बिहार राज्य व अन्य दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक 17.01.2019 को पारित न्याय निर्णय में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-528, दिनांक 10.07.2008 एवं आदेश संख्या-122, दिनांक 05.03.2009 को निरस्त करते हुए मामले को अनुशासनिक प्राधिकार को विधि सम्मत/नियमानुसार कार्रवाई हेतु वापस किया गया है। पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-528, दिनांक 10.07.2008 द्वारा संसूचित दण्ड एवं आदेश संख्या-122, दिनांक 05.03.2009 को निरस्त किया जाता है।

2. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश के आलोक में असहमति के बिन्दु पर श्री बीरेन्द्र सिंह 'प्रभाकर', कार्य0 अभि0 (सेवानिृवत) से नए सिरे से द्वितीय कारण पृच्छा अलग से करने की कार्रवाई की जा रही है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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29 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(औ0)17-09/17-1603--श्री संतोष कुमार प्रभाकर, तत्कालीन सहायक अभियंता (आई0डी0-5356) सोन नहर प्रमण्डल, खगौल द्वारा अपने उक्त पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता की जॉच विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत निम्न आरोप के संबंध मेंं विभागीय पत्रांक-63 दि0- 14.02.17 द्वारा श्री प्रभाकर से स्पष्टीकरण किया गयाः-बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 150 आरोप-

(i) कनीय अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल नौबतपुर द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि विभागीय भूमि पर नगर परिषद, खगौल द्वारा अवैध निर्माण कार्य कराय जा रहा है, परंतु आपने कोई ठोस कार्रवाई नही की।

(ii) नगर कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद, खगौल के पत्रांक-101 दिनांक-10.02.16 द्वारा मौजा बदलपुरा, थाना सं0-52 खाता सं0-189 प्लॉट सं0-413 एवं 414 से संबंधित अभिलेख की मॉग की गई जिसे ससमय उपलब्ध नही कराया गया।

श्री प्रभाकर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण का मुख्य अंश ः- श्री प्रभाकर द्वारा अपने स्पष्टीकरण में अंकित किया गया कि कनीय अभियंता से प्रतिवेदन प्राप्त होते ही अवर प्रमंडलीय पत्रांक-19 दिनांक-04.02.16 द्वारा नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, खगौल से निर्माण कार्य को रोकने एवं विभागीय अनुमति प्राप्त कर ही अग्रेतर कार्य कराने का अनुरोध किया। विभागीय अमीन से जमीन की नापी कराकर प्रतिवेदन समर्पित किया। पूनः दिनांक-08.02.16 को कार्यपालक पदाधिकारी, खगौल से निर्माण कार्य रोकने का अनुरोध किया।

आरोप सं0-(ii) के संबंध में श्री प्रभाकर कहा गया कि कार्यपालक पदाधिकारी, खगौल द्वारा याचित अभिलेख उपलब्ध कराने हेतु कार्यपालक अभियंता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल से अनुरोध किया। उक्त के क्रम में अवर प्रमंडल पदाधिकारी विक्रम के पत्रांक- 98 दिनांक-21.03.16 द्वारा सूचित किया गया कि संबंधित अभिलेख मौजूद नहीं है। अतः अभिलेख उपलब्ध नही कराया जा सका।

उड़नदस्ता द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन, श्री प्रभाकर के विरूद्ध गठित आरोप एवं श्री प्रभाकर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि सामुदायिक भवन निर्माण की सूचना सर्वप्रथम परिवादी द्वारा दिनांक-02.02.16 को दी गई। जबकि निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका था। देर से सूचना देने के लिए श्री प्रभाकर जिम्मेदार पाये गए। श्री प्रभाकर ने अपने पत्रांक-19 दिनांक-04.02.16 द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी को निर्माण रोकने हेतु अनुरोध किया। किन्तु इसकी सूचना ततसमय कार्यपालक अभियंता को नही दी गई। कनीय अभियंता द्वारा स्थानीय थाना में अवैध निर्माण संबंधी मात्र सूचना दी गई। प्राथमिकी नही दर्ज कराई गई। इस घटना की सूचना श्री प्रभाकर को दी गई। किन्तु श्री प्रभाकर द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के संबंध में कोई पहल नही की गई। इस प्रकार श्री प्रभाकर के विरूद्ध लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता का आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री प्रभाकर के विरूद्ध ''निन्दन की सजा एवं दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री संतोष कुमार प्रभाकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमण्डल, खगौल को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है-

(i) निन्दन की सजा । (ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

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30 जुलाई 2019

सं॰ 22/नि0सि0(सम0)02-06/2019-1617--श्री प्रेम प्रकाश (आई0डी0 सं०-5277), सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल संख्या-2, झंझारपुर को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत कटाव बिन्दुओं का निरीक्षण बाढ़ पूर्व नहीं करने, बेतार संवाद द्वारा दिये गये निदेश का अनुपालन नहीं करने, कर्त्तव्य में लापरवाही बरतने एवं विभागीय दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने के मामले में सरकार के स्तर पर पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री प्रकाश का मुख्यालय मुख्य अभियंता का कार्यालय, केन्द्रीय रूपांकण शोध एवं गुण नियंत्रण, अनिसाबाद, पटना निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री प्रकाश को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

4. श्री प्रेम प्रकाश के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र गठित कर अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, अपर सचिव।

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14 मई 2019

सं॰ 22नि0सि0(डि0)-14-12/2016/969--श्री महेन्द्र राम (आई0डी0-4677), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, डिहरी के पद पर पदस्थापन अवधि के दौरान उनके विरूद्ध वर्ष 2002-03 एवं 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से कम दर पर चाट भूमि की बन्दोबस्ती करने एवं इसके फलस्वरूप सरकार को आर्थिक हानि पहुँचाने का आरोप प्रतिवेदित करते हुए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित किया गया। आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।151 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोप सं0-1-बिहार सिंचाई नियमावली और उसके अधीन निर्गत अनुदेशों के प्रावधान के अन्तर्गत चाट भूमि की बन्दोबस्ती प्रत्येक वर्ष 25 जून से 25 मार्च तक की अवधि के लिए नौ महीने के पट्‌टे पर प्राथमिकता के आधार पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और भूमिहीन किसानों को जल दर सहित समय-समय पर पुनरीक्षित विहित दरों पर किया जाना है। विभाग ने मार्च 2002 में एक/दो फसली चाट भूमि का बन्दोबस्ती के लिए दरों के पुनरीक्षण आदेश जारी किया। भारत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन वर्ष 2004-05(रा0प्रा0) की कंडिका 7.5 के अनुसार डेहरी प्रमंडल और सोन नहर प्रमंडल विक्रमगंज में देखा गया कि 5115 एकड़ की दो फसली चाट भूमि की बन्दोबस्ती वर्ष 2002-03 और 2003-04 के लिए विभाग द्वारा निर्धारित पुनरीक्षित दर से काफी कम दर अर्थात 213 रूपये प्रति एकड़ की दर से बन्दोबस्ती की गई, जिसके फलस्वरूप 48.60लाख रूपये के कम राजस्व की वसूली हुई। सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिए आप दोषी है।

विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में राजस्व की हानि पहुँचाने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी श्री राम से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसकी सम्यक समीक्षा विभाग के द्वारा की गई। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि आरोपित पदाधिकारी अपने पत्र दिनांक 31.08.2017 एवं 01.10.2017 से संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन कंडिका-6 में उल्लेखित तथ्य के आलोक में नोडल/मासिक बैठक में अवर प्रमंडल को सम्मिलित नहीं होने को प्रतिवेदित करते हुए नोडल/मासिक बैठक की कार्यवाही प्रतिवेदन जिसमें विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 के अनुरूप कार्रवाई करने का विभागीय नोडल में निदेश दिया गया हो कि प्रति की मांग की गई। साथ ही अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 14.11.17 से उक्त याचित अभिलेख संचिका में नहीं होने एवं उसके अभाव में प्रत्युत्तर देने में असमर्थता व्यक्त की गई।

उपलब्ध अभिलेख से विदित होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा याचित अभिलेख की मांग संयुक्त सचिव-सह-नोडल पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग से किया गया। जिसके क्रम में कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल-3, पटना द्वारा सूचित किया गया कि नोडल बैठक की कार्यवाही प्रमंडल द्वारा निर्गत की जाती है, संग्रहण नहीं किया जाता। उपरोक्त स्थिति में आरोपित पदाधिकारी को संचिका का अवलोकन कर अभिलेख प्राप्त कर लिए जाने को सूचित किया गया।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में संशोधित दर संबंधी विभागीय पत्रांक-773, दिनांक 06.04.2002 आरोपित पदाधिकारी को प्राप्त नहीं होने के उनके बयान के संदर्भ में अंकित किया गया है कि मुख्य अभियंता, डिहरी के पत्रांक-1078, दिनांक 21.10.16 में उक्त पत्र उनके कार्यालय में प्राप्त नहीं होने की संभावना व्यक्त की गई।

विभागीय निदेश के अनुरूप ही वित्तीय मामला का निष्पादन किये जाने को किसी भी पदाधिकारी का दायित्व माना गया है एवं वित्तीय अनियमितता होने के पश्चात किसी भी पदाधिकारी द्वारा उक्त पत्र की जानकारी नहीं होने को तर्क दिया जाना संचालन पदाधिकारी द्वारा हास्यास्पद माना गया है। साथ ही संचालन पदाधिकारी द्वारा हर माह नोडल एवं मासिक बैठक में विभागीय स्तर से निर्गत निदेशों से अवगत कराये जाने को भी प्रतिवेदित किया गया है एवं अंततः राजस्व हानि पहुँचाने के लिए श्री राम को दोषी माना गया है।

अतएव संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में प्रस्तुत प्रत्युत्तर की विभागीय समीक्षोपरांत श्री महेन्द्र राम, तत्कालीन सहायक अभियंता को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है- "दो वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकी जाय"। उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार के रूप में माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-7-36/2018(179)/लो0से0आ0, दिनांक 25.

04.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

अतएव श्री महेन्द्र राम, तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर अवर प्रमंडल, डिहरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है।

"दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हमो0 रसूल मियाँ, अवर सचिव।

------ सं0 8/पी.3-10-18/2018 गृ0आ0--7143 गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ------

प्रेषक, गिरीश मोहन ठाकुर, सरकार के अवर सचिव। सेवा में, महालेखाकार (ले0 एवं हक0), बिहार, पटना।

पटना, दिनांक 29 अगस्त 2019 विषय :- राज्य पुलिस मुख्यालय स्थित आधुनिक पुलिस नियंत्रण कक्ष (हेल्पलाईन) बिहार, पटना हेतु अपर पुलिस अधीक्षक/वरीय पुलिस उपाधीक्षक-01, पुलिस उपाधीक्षक-04, पुलिस निरीक्षक-09, पुलिस अवर निरीक्षक-09,152 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सहायक अवर निरीक्षक-09, सिपाही-72, स्वीपर-01 एवं रसोईया-03 पदों सहित कुल 108 पदों के सृजन की स्वीकृति के संबंध में।

आदेशः- स्वीकृत। अन्य राज्यों में स्थापित नियंत्रण कक्ष की समीक्षोपरान्त बिहार राज्य के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर जनहित में राज्य पुलिस से संबंधित आम जनता की शिकायतों को प्राप्त कर इनके समुचित निस्तारण के लिए एक केन्द्रीयकृत शिकायत निवारण कोषांग, आधुनिक नियंत्रण कक्ष (हेल्पलाईन) की स्थापना की गयी थी, जिसका उद्‌घाटन माननीय मुख्यमंत्री, बिहार द्वारा दिनांक- 28.09.16 को किया गया। इस हेल्पलाईन में तत्कालीन्‌ आवश्यकताओं का आकलन कर सहायक पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक/पुलिस निरीक्षक/सिपाही/पी0टी0सी0 संवर्ग/कम्प्यूटर चालक इत्यादि को इस हेल्पलाईन के संचालन के लिए प्रतिनियुक्ति की गयी।

अपने स्थापना काल, अर्थात्‌ दिनांक-28.09.2016 से माह जुलाई-2018 तक इस हेल्पलाईन में 16853 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें से 13,339 शिकायतों का निष्पादन किया जा चुका है। वर्त्तमान में प्रतिदिन करीब 125 टेलीफोन कॉल इस हेल्पलाईन में प्राप्त हो रहे हैं।

इस हेल्पलाईन में सम्प्रदायिक दंगे, पुलिस के विरूद्ध शिकायतें, विभिन्न प्रकार के अपराधों, नक्सली समस्याओं, बलात्कार, मर्डर, अपहरण, चोरी, डकैती, फिरौती, टै्रफिक नियमों का उल्लघंन, महिला/कमजोर वर्ग के विरूद्ध अत्याचार इत्यादि से संबंधित विभिन्न मामलों में किसी भी समय (24x7) शिकायत दर्ज करायी जाती है।

Bihar Police C.G.R.C में 53 विभिन्न शीर्ष के अपराध से संबंधित शिकायत को Software (online/Fax/Mail/Whatsapp) के माध्यम से दर्ज की जाती है। इससे संबंधित एक Token Number Sms के माध्यम से शिकायतकर्त्ता को दी जाती है। इन दर्ज शिकायतों के निस्तारण हेतु एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गयी है। इस समय-सीमा में शिकायतों का निस्तारण नहीं होने पर यह स्वतः वरीय पदाधिकारी को अग्रेसित हो जाती है। इस प्रकार प्राप्त शिकयत संबंधित जिला के पुलिस अधीक्षक तक तथा अधिकांश शिकायत अग्रेसित होकर संबंधित क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक स्तर तक जाता है। इस प्रकार प्राप्त शिकायतें, निस्तारण न होने की स्थिति में, उच्च स्तर के पुलिस पदाधिकारी तक के संज्ञान में आती हैं। यह सम्पूर्ण व्यवस्था Online होने के कारण वरीय पदाधिकारियों के संज्ञान में रहता है। इस प्रकार यह हेल्पलाईन मूल रूप में आमजनों से प्राप्त शिकायतों का निपटारा पूर्ण रूप से होने तक कार्यशील रहता है। प्राप्त शिकायतों एवं इनके निष्पादन के आकड़ों से पुलिस कार्य प्रणाली के अध्ययन में भी सुविधा होती है।

अन्य इकाईयों/जिलों से प्रतिनियुक्ति पर मानव बल लेकर वर्त्तमान में यह हेल्पलाईन कार्यरत है। परन्तु इससे संबंधित जिला/इकाई का कार्य बाधित होने की संभावना रहती है। जिलों के अपराध नियंत्रण एवं अनुसंधान पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

एक जनतांत्रिक व्यवस्था में जनता की शिकायतों को सुनकर उनका निस्तारण करना प्रशासन की जिम्मेवारी/कर्त्तव्य है। इस कर्त्तव्य पालन में बिहार पुलिस C.G.R.C आधुनिक नियंत्रण कक्ष Helpline की महत्वपूर्ण भूमिका है। हेल्पलाईन में पदाधिकारी/कर्मी (Caller) के बीच होने वाले संवाद की Voice Recording संग्रहित रहती है। जिसे पुनः श्रवण किया जा सकता है।

समय के साथ जनसंख्या में वृद्धि, विभिन्न प्रकार के विवादों का निस्तारण, अपराध नियंत्रण, विधि-व्यवस्था संधारण इत्यादि में पुलिस की संवदेशीलता एवं सक्रियता बनाये रखने तथा इनमें आम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु इस हेल्पलाईन के महत्व को देखते हुए इसका स्थावित्व प्रदान करना आवश्यक प्रतीत होता है।

सरकार की प्राथमिकता एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य पुलिस मुख्यालय स्थित आधुनिक पुलिस नियंत्रण

क्र0सं0 पद का नाम पदों की संख्या वेतन (स्तर सारणी)
1 2 3 4
1 अपर पुलिस अधीक्षक/ वरीय पुलिस उपाधीक्षक 1 11
2 पुलिस उपाधीक्षक 4 9
3 पुलिस निरीक्षक 9 7
4 पुलिस अवर निरीक्षक 9 6
5 सहाय अवर निरीक्षक 9 5
6 सिपाही 72 3
7 स्वीपर 1 1
8 रसोईया 3 1
कुल योग 108

उपर्युक्त पदों पर होने वाले अनुमानित वार्षिक व्यय रू0-54552000/- (पाँच करोड़ पैतालीस लाख बावन हजार) होगा । इस राशि की निकासी मांग संख्या-22, मुख्य शीर्ष-2055-पुलिस, उपमुख्य शीर्ष 00, लघु शीर्ष-001 निदेशन एवं प्रशासन, उपशीर्ष-0001 अधीक्षण, विपत्र कोड-22-20550000010001 के अन्तर्गत विकलनीय होगा। पुलिस महानिरीक्षक के153 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 सहायक (कल्याण), बिहार, पटना निकासी एवं व्यय पदाधिकारी होंगे तथा राशि की निकासी सचिवालय कोषागार, सिंचाई भवन, पटना से की जायेगी।

उपर्युक्त में वित्त विभाग की सहमति एवं मंत्रिपरिषद्‌ की स्वीकृति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।

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निर्वाचन विभाग

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अधिसूचना

27 अगस्त 2019

सं0 ई2-2-31/2016-63--बिहार विधान परिशद्‌ के स्नातक एवं षिक्षक निर्वाचन क्षेत्र आगामी चुनाव को दृश्टिपथ रखते हुए प्रमंडलीय आयुक्त, दरभंगा एवं पटना द्वारा उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रिक्त पदों पर पदस्थापन करने संबंधी किये गये अनुरोध एवं सामान्य प्रषासन विभाग के आदेष ज्ञापांक 5066 दिनांक 11.04.2019 के कंडिका-3 के अन्तर्गत निहित सभी प्रोन्नतियाँ एवं प्रोन्नति हेतु विभागीय प्रोन्नति समिति के बैठक की कार्रवाई अगले आदेष तक स्थगित रहने संबंधी आदेष के क्रम में कार्यहित में बिहार निर्वाचन सेवा के उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी/उप निर्वाचन पदाधिकारियों को अपने कार्यों के अतिरिक्त उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर कार्य करने हेतु निम्नरूपेन प्रतिनियुक्त किया जाता है-

क्र ं. सं. पदाधिकारी का नाम वर्तमान में पदस्थापन की स्थिति अतिरिक्त प्रभार (प्रमंडल का नाम एवं पदनाम सहित)
1 श्री नौषाद आलम उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, गया प्रमंडल, गया उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, पटना प्रमंडल, पटना
2 श्री संजय मिश्रा उप निर्वाचन पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर
3 श्री रौषन अली उप निर्वाचन पदाधिकारी, छपरा उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, सारण प्रमंडल, छपरा
4 श्री पुश्कर कुमार उप निर्वाचन पदाधिकारी, दरभंगा उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रत्नेष झा, संयुक्त सचिव।

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बिहार विधन सभा सचिवालय

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अध्सिूचनाएं

31 जुलाई 2019

सं0 2स्था-122/2019-1738/विस।--श्री शंभु कुमार, वरीय प्रतिवेदक, बिहार विधन सभा सचिवालय को वित्त ;वैदानिकोद्ध विभाग, बिहार, पटना के पत्राांक-1531;22द्ध, दिनांक 27.06.2019 के आलोक में बिहार सेवा संहिता के नियम-230 एवं 248;कद्ध के तहत दिनांक-11.03.2019 से 16.05.2019 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है ।

विमलेन्दु भूषण कुमार, अवर सचिव।

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31 जुलाई 2019

सं0 2स्था-156/19-1758/विस।--श्री राजीव कुमार, उप सचिव, बिहार विधन सभा, पटना, जो वेतन स्तर-12 में 99,800/- ;निन्यानवे हजार आठ सौद्ध रूपये प्रतिमाह वेतन पाते हैं, को बिहार राज्य सरकारी सेवक एलटीसी नियमावली, 1986 तथा इस संबंध् में वित्त विभाग, बिहार सरकार द्वारा निर्गत पत्रा संख्या-4252, दिनांक-22.06.2000 की कंडिका-20 एवं संकल्प संख्या-8043, दिनांक 11.10.2017 की कंडिका-'G' के अन्तर्गत ब्लॉक वर्ष 2018-21 में एलटीसी सुविध के तहत दिनांक-01. 08.2019 से 06.08.2019 तक पटना से बैंगलुरू ;कर्नाटकद्ध एवं बैंगलुरू ;कर्नाटकद्ध से पटना की यात्राा के निमित्त दिनांक-01.08. 2019, 02.08.2019, 05.08.2019 एवं 06.08.2019 को आकस्मिक अवकाश तथा दिनांक 03.08.2019 एवं 04.08.2019 को सार्वजनिक अवकाश उपभोग की स्वीकृति प्रदान की जाती है ।

अध्यक्ष, बिहार विधन-सभा के आदेश से,

विमलेन्दु भूषण कुमार, अवर सचिव।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 154

Home Department

(Police Branch)

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NOTIFICATION

The 28th August 2019

No. 7/CCA-1026/2001 H(P) 7069----Consequent upon Superannuation of Hon'ble Mr. Justice Jyoti Saran, Patna High Court, who was Chairman of the Advisory Board, it is expedient to re-constitute the Advisory Board for the under mentioned Acts :

1. Bihar Control of Crimes Act, 1981 2. National Security Act, 1980 3. Conservation of Foreign Exchange and Prevention of Smuggling Activities Act, 1974 and

4. Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988.

Now, therefore, in exercise of the powers conferred under the provision of the above Acts, the State Government is pleased to reconstitute the Advisory Board for above mentioned Acts as follows :

1 Hon'ble Mr. Justice Shri Rakesh Kumar Chairman 2 Hon'ble Mr. Justice Shri Aditya Narayan Chaturvedi (Retd.) Member 3 Hon'ble Justice Smt. Rekha Kumari (Retd.) Member

The reconstitution will come into effect with the issue of the notification

By the order of the Governor of Bihar, Ranjan Kumar Sinha, Additional Secretary.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 24—571+25-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in155 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————

स्वास्थ्य विभाग (आयुष) राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषध निर्माणशाला, बिहार, पटना ------ निविदा सूचना 26 अगस्त 2019

सं0 178--एतद द्वारा सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषध निर्माणशाला, बिहार, पटना के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में गुणवत्तायुक्त औषध द्रव्यों, मशीन उपकरण, स्टेशनरी एवं विविध सामग्रियों के क्रय हेतु आपूर्तिकर्त्ताओं से मुहरबंद निविदा प्रकाशन की तिथि से 21 वें (इक्कीसवें) दिन के अन्दर अपराहन 5 बजे तक स्पीड पोस्ट या निबंधित डाक से आमंत्रित की जाती है। यदि निविदा प्राप्ति की अंतिम तिथि को अवकाश होगा तो अगले कार्य दिवस को अंतिम तिथि माना जायेगा। निविदा प्राप्ति की अंतिम तिथि के बाद, तिथि निर्धारित कर क्रय समिति के समक्ष निविदा खोली जायेगी।

आमंत्रित निविदा दो प्रकार की होगी :- 1. तकनीकी निविदा 2. वित्तीय निविदा तकनीकी निविदा :- निविदा से सम्बंधित सभी प्रकार की कागजात मुहरबंद होंगे। इस निविदा में अन्य कागजातों के अलावा आपूर्ति हेतु निविदा दिये जाने वाले औषध द्रव्यों एवं सामग्रियो की सूची दिया जाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त औषध द्रव्यों की निविदा हेतु थैलियों में बंद असली नमूना (जिस पर निविदा में अंकित औषधियों का क्रमांक तथा निविदादाता का हस्ताक्षर नाम एवं तिथि के साथ अंकित रहना चाहिए) अलग से डाक द्वारा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा जिसके साथ दिये जाने वाले नमूनों की सूची रहना आवश्यक होगा।

तकनीकी निविदा में उपलब्ध करायी जाने वाली आवश्यक अभिलेखों की सूची :- 1. प्रतिष्ठान के बिहार राज्य के वाणिज्य कर विभाग द्वारा निबंधित (जी.एस.टी.) रहने का प्रमाण पत्र की छयाप्रति। साथ ही विगत वर्षों में जी.एस.टी. भुगतान किये जाने का चालान की छायाप्रति। 2. प्रतिष्ठान के दुकान (Shop) स्थापित रहने के दुकान प्रमाण पत्र की छायाप्रति। 3. कम से कम विगत तीन वर्षों का आयकर रिर्टन आवश्यक। 4. वित्त विभाग द्वारा उपबंधित राशि 50,00,000/- का 10 प्रतिशत 5,00,000/- अग्रधन के रूप में बैंक ड्राफ्ट जमा करना अनिवार्य।

5. ड्रग लाईसेन्स की छाया प्रति अनिवार्य। कम से कम विगत तीन वर्ष पूर्व के लाईसेन्सधारी प्रतिष्ठान/ एजेन्सी/फर्म ही मान्य होंगे।

6. कम्पनी/फर्म/एजेन्सी का औसतन वार्षिक टर्नओभर एक करोड़ रहने सम्बंधि ऑडिटेड रिपोर्ट की छाया प्रति। विगत तीन वर्षों का ऑडिटेड रिपोर्ट की छाया प्रति संलग्न करना अनिवार्य।

7. आपूर्ति अनुभव (Supply Experience) ग्राहकों के नाम एवं संख्या (Name and numbers of Clients) तथा वर्षों की संख्या के साथ संलग्न करना अनिवार्य।

8. निविदा की सभी शर्तें मान्य होने का प्रमाण पत्र/घोषणा पत्र अंकित कर उपलब्ध कराना अनिवार्य। तकनीकी निविदा मूल्यांकन (Technical Bid Evaluation) :-

Sr. No. Criteria Max. Point Point System Document Require
1 Profile of bidder 26
1 No. of Year of Shop Established 10 3 years – 2 Points Certificates/ License/ Documents of Establishment
3-5 years – 4 Points
5-7 years – 6 Points
>7 years – 10 Points
2 No. of Year of Drug License 10 3 years – 2 Points Copy of Drug License
3-5 years – 4 Points
5-7 years – 6 Points
>7 years – 10 Points
3 Average Annual Turnover of Company/ Agencies/ Firm for Last 03 years. (as per Audited P & L) 6 01 Crore – 2 Points Audited report last 3 years
>1 years – 4 Points
2 Past Experience 30
1 Supply experience No. of supply order in Central Govt./ State Govt./ Agencies of Central Govt./ State Govt. with Name & No. of clients 10 1 Order – 1 points Copy of Supply order
2 Order – 2 points
3 Order – 3 points
4 Order – 4 points
5 Order – 5 points
6 Order – 6 points
7 Order – 7 points
8 Order – 8 points
9 Order – 9 points
> 10 Order –10 points
2 No of years of supply Experience No. of years of supply in Central Govt./ State Govt./ Agencies of Central Govt./ State Govt. with Name & No. of clients 1 Year – 1 points Copy of Supply order
2 Year – 2 points
3 Year – 3 points
4 Year – 4 points
5 Year – 5 points
6 Year – 6 points
7 Year – 7 points
8 Year – 8 points
9 Year – 9 points
> 10 Year –10 points
3 No. of ayush drug/ Raw materials of ayush drug supply order executed in state of Bihar 1 Order – 1 points Copy of Supply order
2 Order – 4 points
3 Order – 6 points
4 Order – 8 points
>4 Order – 10 points
बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 156

उपर्युक्त के अनुसार मूल्यांकन के आधार पर ही तकनीकी निविदा स्वीकृत की जायेगी। वित्तीय निविदा :-औषध द्रव्यों/सामग्रियों का दर/मूल्य स्पष्ट रूप से अंकित कर मुहरबंद रहना आवश्यक। निविदा में अंकित किया गया दर स्थानीय बाजार की दर से बहुत कम या बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।

नोट - प्रबंधक, राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषध निर्माणशाला, बिहार, पटना स्तर पर गठित समिति द्वारा औषध द्रव्यों/सामग्रियों का स्थानीय बाजार की दर प्राप्त की जायेगी एवं उसे क्रय समिति के समक्ष खोल कर देखा जायेगा तथा निविदा में अंकित दर को उससे मिलान किया जायेगा।

निविदा की निम्नलिखित सामान्य शर्तें होंगी :- 1. तकनीकी एवं वित्तीय निविदाएँ, जिन पर साफ-साफ अक्षरों में विविध तकनीकी निविदा एवं विविध वित्तीय निविदा क्रमषः अंकित कर अलग-अलग लिफाफों में मुहरबंद कर उन्हें एक बड़े लिफाफे में डाल कर एवं मुहरबंद कर लिफाफे पर निविदादाता का अपना नाम पूरा पता और दूरभाष संख्या अंकित कर केवल निबंधित डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से ही उपलब्ध कराना अनिवार्य है। डाक सेवा में विलम्ब के कारण निर्धारित तिथि एवं समय के बाद प्राप्त होने वाली निविदा अस्वीकृत समझी जायेगी एवं इसके लिए औषध निर्माणशाला जिम्मेवार नहीं होगा।

2. तकनीकी निविदा स्वीकृत होने की स्थिति में ही वित्तीय निविदा खोला जाना अनिवार्य होगा। 3. निविदा कम्प्युटराईज्ड होना अनिवार्य है। हस्तलिखित निविदा स्वीकारनीय नहीं है। निविदा में किसी भी तरह की कटिंग या ओभरराईटिंग मान्य नहीं है।

4. क्रय की जाने वाली काष्ठ औषधियों/ सामग्रियों की सूची अपने प्रतिष्ठान के पैड पर लिखित रूप में कार्यालय से कार्यावधि में प्राप्त किया जाना आवश्यक है। जिस प्रतिष्ठान के नाम पर सूची निर्गत नहीं की गयी होगी उनके निविदा पर विचार नहीं किया जायेगा।

5. निविदा में अंकित औषध द्रव्यों का नाम सूची में अंकित क्रमानुसार हिन्दी में अंकित करना अनिवार्य है तथा दर पूर्णांक में अंकित करना अनिवार्य है। साथ ही सभी औषध द्रव्यों का दर प्रति किलोग्राम/ प्रति लिटर पर अंकित करना आवष्यक है। जिन औषध द्रव्यों/सामानों का कम्पनी का नाम निविदा में अंकित होगा उसी का दर अंकित करना अनिवार्य है।

6. स्वीकृत निविदादाता/आपूर्तिकर्ता द्वारा औषध निर्माणशाला तक औषध द्रव्यों एवं सामग्रियों की आपूर्ति अपने खर्च पर करना अनिवार्य होगा।157 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 7. स्वीकृत निविदादाता को पूरे निविदित वर्ष तक आदेशानुसार औषध द्रव्यों एवं सामग्रियों की आपूर्ति निर्धारित तिथि के अन्दर करना अनिवार्य होगा, ऐसा नहीं करने की स्थिति में अग्रधन की राशि जब्त कर काली सूची में डालने की कार्रवाई किया जाना आवश्यक होगा।

8. प्रावधानानुसार टैक्स की कटौति आपूर्तिकर्ता को स्वयं खजाने में जमा कर उसकी चालान की प्रति कार्यालय को समर्पित करना अनिवार्य होगा तथा टैक्स की कटौति सम्बंधी समय-समय पर निर्गत अन्य सरकारी प्रावधान निविदादाता/आपूर्तिकर्ता को स्वीकार करना अनिवार्य होगा।

9. गुणवत्तायुक्त औषध द्रव्य स्वीकृत औषध द्रव्य नमूना से मिलान कर संतोषप्रद पाये जाने पर ही सम्बंधित चिकित्सा पदाधिकारीयों द्वारा स्वीकार की जायेगी अन्यथा आपूर्तिकर्त्ता को अपने खर्च पर वापस ले जाना अनिवार्य होगा।

10. निविदा को आंशिक या पूर्ण रूप से स्वीकृत या रद्द करने का अधिकार प्रबंधक, राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषध निर्माणशाला, बिहार, पटना के पास सुरक्षित रहेगा।

11. किसी भी वाद का निपटारा पटना उच्च न्यायालय के अधीन होगा।

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, प्रबंधक।

क्र.सं. कच्ची औषधि की सूची दर क्र.सं. कच्ची औषधि की सूची दर
1 अंजन प्रति किग्रा. 36 कंटकारी / रेंगनी हरा प्रति किग्रा.
2 आकरकरा प्रति किग्रा. 37 कंटकारी / रेंगनी सुखा प्रति किग्रा.
3 अभ्रक भस्म प्रति किग्रा. 38 कथपोखरा प्रति किग्रा.
4 अर्क गुलाब ब्रांडेड प्रति लीटर. 39 कबीला / कमीला प्रति किग्रा.
5 अम्बा/ आमा हल्दी प्रति किग्रा. 40 कर्कटश्र्‌ंगी प्रति किग्रा.
6 अम्लवेतस प्रति किग्रा. 41 कमल फूल प्रति किग्रा.
7 अमलतास गुद्‌दा प्रति किग्रा. 42 कमल गट्‌टा प्रति किग्रा.
8 अरिमेद की लकडी प्रति किग्रा. 43 भीमसेनी कपूर ढेला प्रति किग्रा.
9 आबे्रशम खान प्रति किग्रा. 44 कचूरकचरी प्रति किग्रा.
10 आजवाईन प्रति किग्रा. 45 करंज बीज / तुख्म करंजवा प्रति किग्रा.
11 आजवाईन सत्व प्रति किग्रा. 46 कासीस (हरा कशीश) प्रति किग्रा.
12 ऑवला सूखा बीज रहित प्रति किग्रा. 47 काला नमक / नमक स्याह प्रति किग्रा.
13 असारूण प्रति किग्रा. 48 कालाजीरी प्रति किग्रा.
14 अश्वगंध प्रति किग्रा. 49 कुष्ट /कुठ/ कुष्त सीरी प्रति किग्रा.
15 अफतिमून बिलायती प्रति किग्रा. 50 कुंदुर प्रति किग्रा.
16 अतीस / अतीस सीरीन प्रति किग्रा. 51 कुमबादाना(पुम्बादाना) प्रति किग्रा.
17 अजमोद /तुख्म करफस प्रति किग्रा. 52 कुचीला प्रति किग्रा.
18 अनार दाना प्रति किग्रा. 53 कुटकी प्रति किग्रा.
19 अकीक प्रति किग्रा. 54 कुलंजन प्रति किग्रा.
20 अरणी / अग्निमंथ छाल प्रति किग्रा. 55 कुल्थी प्रति किग्रा.
21 अगर बुरादा प्रति किग्रा. 56 कतीरा प्रति किग्रा.
22 इसपंद प्रति किग्रा. 57 कटफल/ कायफल प्रति किग्रा.
23 इन्द्र जौ तल्ख प्रति किग्रा. 58 कलमी सोरा प्रति किग्रा.
24 इन्द्रयव / इन्द्र जौ सीरीन प्रति किग्रा. 59 किशमिश हरा प्रति किग्रा.
25 इलायची बडी प्रति किग्रा. 60 खस प्रति किग्रा.
26 इलायची छोटी प्रति किग्रा. 61 खुरमा (छोहारा) प्रति किग्रा.
27 इलायची तैल ब्रांडेड प्रति लीटर. 62 खैर की लकडी प्रति किग्रा.
28 ईसबगोल भूसी प्रति किग्रा. 63 खडिया / दुधिया खल्ली प्रति किग्रा.
29 उसतोखूद्‌दूश प्रति किग्रा. 64 गिलोय लता सुखा प्रति किग्रा.
30 उन्नाव बिलायती प्रति किग्रा. 65 गिलोय सत्व प्रति किग्रा.
31 उश्वा मगरवी प्रति किग्रा. 66 गम्भारी छाल प्रति किग्रा.
32 एरण्ड तैल ब्रांडेड प्रति लीटर. 67 गोखरु बीज प्रति किग्रा.
33 ऐ ठीज्योठी ं प्रति किग्रा. 68 गोक्षरु पंचांग प्रति किग्रा.
34 कषैली/सूपारी गोटा प्रति किग्रा. 69 गोदन्ती प्रति किग्रा.
35 कंकोल / शीतलचीनी/कबाबचीनी प्रति किग्रा. 70 गड़ी गोला प्रति किग्रा.
71 गुड़ मगही प्रति किग्रा. 109 तालमखाना प्रति किग्रा.
72 गुडमार /गुलमाऱ वुटी प्रति किग्रा. 110 तालीसपत्र प्रति किग्रा.
73 गुग्गुल(मुक्कील) प्रति किग्रा. 111 तुख्म धतुरा प्रति किग्रा.
74 गुलकन्द आफताबी प्रति किग्रा. 112 तुख्म ख्यारैन प्रति किग्रा.
75 गुले बानफ्सा प्रति किग्रा. 113 तुख्म खरबूजा प्रति किग्रा.
76 गुले मुंडी प्रति किग्रा. 114 तुख्म खशखास(पोस्तादाना) प्रति किग्रा.
77 गुले निलोफर प्रति किग्रा. 115 तुख्म खुब्बाजी प्रति किग्रा.
78 गुले सुर्ख (गुलाब फुल) प्रति किग्रा. 116 तुख्म खुरफा स्याह प्रति किग्रा.
79 गुले जुफा प्रति किग्रा. 117 तुख्म खत्मी प्रति किग्रा.
80 गुले गाफीस प्रति किग्रा. 118 तुख्म बरियार प्रति किग्रा.
81 गुले गॉंवजुवा प्रति किग्रा. 119 तुख्म बाबूना प्रति किग्रा.
82 गेरु (गिले अरमनी) प्रति किग्रा. 120 तुख्म कासनी प्रति किग्रा.
83 गजपिप्पली/गजपीपर प्रति किग्रा. 121 तुख्म कोरैया प्रति किग्रा.
84 गन्धक अमलासार प्रति किग्रा. 122 तुख्म कसूस प्रति किग्रा.
85 घृतकुमारी हरा प्रति किग्रा. 123 तुख्म कवॉच/ केवॉच बीज प्रति किग्रा.
86 चित्रकमूल प्रति किग्रा. 124 तुख्म कतॉॅं (तीसी) प्रति किग्रा.
87 चिरायता तल्ख प्रति किग्रा. 125 तुख्म हल्वा(मेथी) प्रति किग्रा.
88 चकबर बीज प्रति किग्रा. 126 तुख्म शाहतरा प्रति किग्रा.
89 चौबगज प्रति किग्रा. 127 तुख्म सम्भालू प्रति किग्रा.
90 चोपचीनी / चौबचीनी प्रति किग्रा. 128 तुख्म सोया प्रति किग्रा.
91 चालमुगरा प्रति किग्रा. 129 तुख्म तमर हिन्द (इमली बीज) प्रति किग्रा.
92 चव्य / चाभ प्रति किग्रा. 130 तुख्म जामुन/ जामुन बीज प्रति किग्रा.
93 छड़िला प्रति किग्रा. 131 तुख्म गाजर प्रति किग्रा.
94 जयपाल/जमालघोटा प्रति किग्रा. 132 तुरंजबीज खुरासानी प्रति किग्रा.
95 जीरा काला (स्याह जीरा) प्रति किग्रा. 133 तुदरी सुर्ख प्रति किग्रा.
96 जीरा सफेद प्रति किग्रा. 134 तुदरी सफेद प्रति किग्रा.
97 जायफल प्रति किग्रा. 135 तुत्थ/ तुतीया प्रति किग्रा.
98 जावित्री प्रति किग्रा. 136 तेजपत्र / तेजपात प्रति किग्रा.
99 जदवार सीरी प्रति किग्रा. 137 तगर बुरादा प्रति किग्रा.
100 जटामांसी प्रति किग्रा. 138 दारुहल्दी प्रति किग्रा.
101 जरावंद प्रति किग्रा. 139 दारूनज अकरवी प्रति किग्रा.
102 जरम्बाद प्रति किग्रा. 140 दंतिमूल प्रति किग्रा.
103 जुन्तियाना प्रति किग्रा. 141 दालचीनी प्रति किग्रा.
104 जाफरान(केशर) ब्राण्डेड प्रति ग्राम 142 दालचीनी तैल ब्राण्डेड प्रति लीटर.
105 जस्मीन ऐसेन्स (400 मि.लि.) प्रति बोतल 143 देवदारु/ देवदार प्रति किग्रा.
106 तिखुर प्रति किग्रा. 144 धनियॉ / किशनीजी प्रति किग्रा.
107 तिल तेल (ब्राण्डेड) प्रति लीटर. 145 धातकी पुष्प/गुले धावा/धाय का फूल प्रति किग्रा.
108 ताम्र भस्म प्रति किग्रा. 146 धतूर पत्र /वर्ग धतूरा हरा/ प्रति किग्रा.
147 घुना /राल प्रति किग्रा. 183 मंजीष्ठ/ मंजीठ प्रति किग्रा.
148 नख / व्याघ्रि नखी प्रति किग्रा. 184 मंगरैला प्रति किग्रा.
149 नागकेशर प्रति किग्रा. 185 मकोह खुस्क / मकोय प्रति किग्रा.
150 नागरमोथा प्रति किग्रा. 186 मरीच / काली मिर्च प्रति किग्रा.
151 निशोथ / त्रिव्‌त प्रति किग्रा. 187 मोम जर्द प्रति किग्रा.
152 नीलक प्रति किग्रा. 188 मोचरस प्रति किग्रा.
153 नीम बीज/तुख्म नीम प्रति किग्रा. 189 मस्तगी रूमी (ब्राण्डेड) प्रति किग्रा.
154 नीमपत्र / नीमपत्ता / (वर्ग नीम) प्रति किग्रा. 190 मदनफल पीप्पली प्रति किग्रा.
155 नीमपुष्प / नीम फूल प्रति किग्रा. 191 मुसब्बर प्रति किग्रा.
156 नीमछाल प्रति किग्रा. 192 मुस्कतरामसीह प्रति किग्रा.
157 नीममूल / नीम जड प्रति किग्रा. 193 मुसली स्याह/ काली मुसली प्रति किग्रा.
158 निर्मली प्रति किग्रा. 194 मुसला सम्भल प्रति किग्रा.
159 निर्गुण्डी / सम्भालू पत्र प्रति किग्रा. 195 मुर्दा शंख प्रति किग्रा.
160 पलाश बीज प्रति किग्रा. 196 मुनक्का प्रति किग्रा.
161 पदम्क/ पद्‌म काष्ठ प्रति किग्रा. 197 मुलतानी मिट्टी प्रति किग्रा.
162 पत्रांग प्रति किग्रा. 198 मिश्री ढेला प्रति किग्रा.
163 पिप्पलीमूल / पिपरामूल प्रति किग्रा. 199 मिर्च सफेद प्रति किग्रा.
164 पिप्पली / पीपर बडी प्रति किग्रा. 200 यवक्षार /जवाखार प्रति किग्रा.
165 पिपरमिंट सत्व प्रति किग्रा. 201 यवासा प्रति किग्रा.
166 प्रियंगु प्रति किग्रा. 202 यष्ठिमधु / असलसूस प्रति किग्रा.
167 प्रवाल / मूंगाशाखा प्रति किग्रा. 203 रास्ना प्रति किग्रा.
168 पुष्करमूल प्रति किग्रा. 204 रसांजन / रसौत प्रति किग्रा.
169 प्रपौण्ड्रिक/ नीला कमल प्रति किग्रा. 205 रसना काली प्रति किग्रा.
170 पृश्नीपर्णी प्रति किग्रा. 206 रोगन तारपीन (ब्राण्डेड) प्रति लीटर.
171 पाटला छाल प्रति किग्रा. 207 रोगन सरसो (ब्राण्डेड)/सरसो तेल ं प्रति लीटर.
172 पुनर्नवादि मण्डूर प्रति किग्रा. 208 रोगन बादाम सीरी(ब्राण्डेड) प्रति लीटर.
173 फिटकरी/स्फटिक प्रति किग्रा. 209 रसवत प्रति किग्रा.
174 बोेजीदाना प्रति किग्रा. 210 रतन जोत प्रति किग्रा.
175 बबूल छाल प्रति किग्रा. 211 रसकपूर प्रति किग्रा.
176 बिल्वमूल छाल / बेल छाल प्रति किग्रा. 212 रेवंद चीनी प्रति किग्रा.
177 बहमन सफेद प्रति किग्रा. 213 लकड़ी जलावन प्रति किग्रा.
178 बाकुची/बाबची प्रति किग्रा. 214 लाजवंती प्रति किग्रा.
179 बुरादा सन्दल सुर्ख(चन्दन लाल पाउडर) प्रति किग्रा. 215 लाही प्रति किग्रा.
180 बुरादा सन्दल सफेद(चन्दन सफेद पाउडर) प्रति किग्रा. 216 लवंग/करंफल प्रति किग्रा.
181 बिल्व गुदा / बिल्लो सोंठ प्रति किग्रा. 217 लवंग तैल बा्रण्डे ड े प्रति लीटर.
182 भृन्गराज प्रति किग्रा. 218 लज्जालु मूल प्रति किग्रा.
219 लोध्र छाल प्रति किग्रा. 256 संगजराहत प्रति किग्रा.
220 लौह भस्म प्रति किग्रा. 257 सकाई प्रति किग्रा.
221 लकुच / बडहल छाल प्रति किग्रा. 258 सकाकुल मिश्री प्रति किग्रा.
222 लहशून प्रति किग्रा. 259 समुद्र सोख प्रति किग्रा.
223 वच प्रति किग्रा. 260 समुद्र लवण/नमक पांगा प्रति किग्रा.
224 विदारीकन्द प्रति किग्रा. 261 समग्र ढाक प्रति किग्रा.
225 विभीतकी / बहेडा बीज रहित प्रति किग्रा. 262 समग्र अरबी प्रति किग्रा.
226 विडंग / वायविडंग प्रति किग्रा. 263 सहजन / शिग्रु छाल प्रति किग्रा.
227 विधारा/तुबुर्द प्रति किग्रा. 264 सपिसतॉ प्रति किग्रा.
228 वरुण छाल प्रति किग्रा. 265 सरसो पीला प्रति किग्रा.
229 वृहती / बडी कटेरी प्रति किग्रा. 266 साम्भर नमक प्रति किग्रा.
230 वंशलोचन(तबासीर) प्रति किग्रा. 267 सावर्चल / सौचर लवण प्रति किग्रा.
231 वराहीकन्द प्रति किग्रा. 268 सौंफ(वादयान) प्रति किग्रा.
232 वादावर्द प्रति किग्रा. 269 सोहागा सोनारी प्रति किग्रा.
233 वेख इजखर प्रति किग्रा. 270 सालपर्णी प्रति किग्रा.
234 वेख करफस प्रति किग्रा. 271 स्वर्णमाक्षिक भस्म प्रति किग्रा.
235 वेख कासनी प्रति किग्रा. 272 सुरंजान सीरी प्रति किग्रा.
236 वेख वादयान प्रति किग्रा. 273 सफेद मुसली प्रति किग्रा.
237 वेख अनजवायर प्रति किग्रा. 274 सत्व पोदीना प्रति किग्रा.
238 वर्ग बबूल प्रति किग्रा. 275 सत्व लेमन/ निम्बू सत्व प्रति किग्रा.
239 वर्ग बादरंज बोया प्रति किग्रा. 276 सेन्धा नमक(नमक लाहोरी) प्रति किग्रा.
240 वर्ग कटैला प्रति किग्रा. 277 सज्जीक्षार / सज्जीखार प्रति किग्रा.
241 वर्ग पोदीना प्रति किग्रा. 278 सनाय पत्ती(वर्ग सनाय) प्रति किग्रा.
242 वर्ग शाहतरा प्रति किग्रा. 279 स्नुही / थुहर प्रति किग्रा.
243 वर्ग सुद्‌दाव प्रति किग्रा. 280 सिंघारा प्रति किग्रा.
244 वर्ग अकवन हरा/ अर्क पत्र प्रति किग्रा. 281 सिरका जामून(450 मि.लि. )ब्राण्डेड प्रति बोतल.
245 वर्ग गॉवजूबा/ गोजिहवा प्रति किग्रा. 282 सिरका गन्ना(450 मि.लि. )ब्राण्डेड प्रति बोतल.
246 वर्ग झाउ प्रति किग्रा. 283 हींग तलाई (ब्राण्डेड) प्रति किग्रा.
247 विषफायज प्रति किग्रा. 284 हर्रे छोटी प्रति किग्रा.
248 शंख टुकड़ा प्रति किग्रा. 285 हउबेर प्रति किग्रा.
249 शीप टुकड़ा प्रति किग्रा. 286 हलयुन देशी प्रति किग्रा.
250 शुद्ध घी/रोगन जर्द(सुधा घी) प्रति लीटर. 287 हल्दी प्रति किग्रा.
251 शुण्ठी / सोंठ सफेद प्रति किग्रा. 288 हरितकी / बडी हर्रे बीज रहित प्रति किग्रा.
252 शुुद्ध शिलाजीत (ब्राण्डेड) प्रति किग्रा. 289 गो दूग्ध / गाय का दूध प्रति लीटर.
253 शहद/मधु ब्राण्डेड प्रति किग्रा. 290 गो मूत्र / गाय का मूत्र प्रति लीटर.
254 श्योनक छाल प्रति किग्रा. 291 नींबू हरा प्रति अदद
255 शतावर प्रति किग्रा. 292 स्टार्च (Starch I.P.) प्रति किग्रा.
293 कैल्सियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate I.P.) प्रति किग्रा. 298 डी.सी.पी. (D.C.P./ Di Calcium Phosphate I.P.) प्रति किग्रा.
294 उपला/ गोइठा (प्रति वजन 200 ग्र्रा. से ज्यादा) प्रति अदद 299 बबूल गोंद चूर्ण . (Gum Acacia I.P.) प्रति किग्रा.
295 चूना बुरादा प्रति किग्रा. 300 मण्डूर भस्म प्रति किग्रा.
296 जीवंती प्रति किग्रा. 301 वटारोह / बरगद का जड. हरा प्रति किग्रा.
297 केला का जड हरा प्रति किग्रा. 302
बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 158 159 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 160 161 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 162

राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषध निर्माणशाला हेतु सामग्रियों की सूची

क्र.सं. सामग्रियों की सूची विशिष्टताएॅं दर
1 स्टेनलेश स्टील का छोलनी बडा आगे का भाग (पंजा)-लगभग 90mm x 90mm एवं लम्बाई-750 mm व्यास- 20 , हैण्डल-़ 300mm,व्यास- 20 mm प्रति अदद
2 चलनी- 60 न. प्रति अदद
3 चलनी- 80 न. प्रति अदद
4 चलनी- 100 न. प्रति अदद
5 चलनी- 24 न. प्रति अदद
6 कपडा मारकीन प्रति मीटर
7 ब्रश 25 mm प्रति अदद
8 ब्रश 50 mm प्रति अदद
9 प्लास्टिक बैग 500 ग्राम चूर्ण पैक करने योग्य, पारदर्शी, माटाई 50 माइक्रोन से ज्यादा प्रति किग्रा.
10 प्लास्टिक सीलिंग मशीन प्रति अदद
11 टीप/ कीप छोटा प्लास्टिक प्रति अदद
12 टीप/ कीप बडा प्लास्टिक प्रति अदद
13 गडासी प्रति अदद
14 सोडा/ डिटर्जेंट Wheel , packing size- 1 kg प्रति पैकेट
15 लोहे का स्क्राबर / स्टील वूल प्रति अदद
16 माचिस प्रति अदद
17 ए4 स्टीकर पेपर A4 Sticker paper प्रति पैकेट
18 शीशी 50 मिली. Transprent , 50 ml capacity, with stopper & aotu louck Caps प्रति सैकडा
19 शीशी 200 मिली. Transprent , 200 ml capacity, with stopper & aotu louck Caps प्रति सैकडा
20 शीशी 10 मिली. Transprent , 10 ml capacity, with dropper & Auto louck Caps प्रति सैकडा
21 प्लास्टिक डिब्बा Container having wide mouth , capacity 100 gm Powder, with Cap प्रति सैकडा
22 प्लास्टिक डिब्बा Container having wide mouth , capacity 50 gm Powder, with Cap प्रति सैकडा
23 रजिस्टर- क दिये गए प्रारूप के अनुसार तीन प्रतियों (With Triplicate) में 50 पृष्ट का प्रति अदद
24 रजिस्टर- च दिये गए प्रारूप के अनुसार दो प्रतियों (With Duplicate) में 100 पृष्ट का प्रति अदद
25 रजिस्टर- ख दिये गए प्रारूप के अनुसार 300 पृष्ट का प्रति अदद
26 रजिस्टर- ग दिये गए प्रारूप के अनुसार 150 पृष्ट का प्रति अदद
27 रजिस्टर- घ दिये गए प्रारूप के अनुसार 150 पृष्ट का प्रति अदद
28 प्लास्टिक माप 10 ml Measuring cylender 10 ml प्रति अदद
29 प्लास्टिक माप 50 ml Measuring cylender 50 ml प्रति अदद
30 प्लास्टिक माप 100 ml Measuring cylender 100 ml प्रति अदद
31 प्लास्टिक माप 200 ml Measuring cylender 200 ml प्रति अदद
32 गमला सिमेंट का मध्यम साइज प्रति अदद
33 फोेटो कॉपियर A4 प्रति पैकेट
34 तौलिया फरवाला बडा प्रति अदद
35 तौलिया बिना फरवाला बडा प्रति अदद
36 तौलिया छोटा प्रति अदद
37 फिनाइल बा्रण्डेड 450 ml बा्रण्डेड, 450 ml प्रति बोतल
38 गोन्द Camel, 700 ml प्रति अदद
39 कार्टज (कैनन प्रिन्टर का न. 925) प्रति अदद
40 टोनर (Sharp AR- 5316) फोटो स्टेट मशीन का प्रति अदद
41 स्याही (Ink Set) HP Deskjet GT 5811 प्रिन्टर का प्रति अदद
42 फुलझाडू प्रति अदद
43 डस्टर प्रति अदद
44 फिनाइल गोली प्रति अदद
45 वाथरूम ब्रश प्रति अदद
46 LED बल्ब 5 watt प्रति अदद
47 LED बल्ब 11 watt प्रति अदद
48 LED बल्ब 20 watt प्रति अदद
49 बॉल/डॉट पेन (लाल, काला, नीला, हरा) Link प्रति अदद
50 रिफिल (लाल, काला, नीला, हरा) Link प्रति अदद
51 एसिड प्रति अदद
52 पेपर कटर प्रति अदद
53 फैसी रजिस्टर (2 जिस्ता) प्रति अदद
54 रजिस्टर (2 जिस्ता) प्रति अदद
55 रजिस्टर (4 जिस्ता) प्रति अदद
56 अवकाश पंजी (1 जिस्ता) प्रति अदद
57 लाइफ वॉय साबून बडा प्रति अदद
58 डिटॉल हैंडवॉस 150 ml प्रति अदद
59 सी.डी. मार्कर प्रति अदद
60 परमानेन्ट मार्कर काला/ नीला प्रति अदद
61 हाई लाइटर प्रति अदद
62 व्हाइटनर (corrector pen) बडा प्रति अदद
63 स्केल स्अील (12 इंच) प्रति अदद
64 अवकाश पंजी 1 प्रति अदद
65 रूम फ्रेशनर (Room freshner) प्रति अदद
163 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 164

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, प्रबंधक।

-------- सूचना -----

सं0 900--मैं Yash Aishwarya सुपुत्र श्री कुमार शिवम, निवासीः फ्‌लैट नं0 बी-305 मिलेनियम होम्स, बिंद टोली, शेखपुरा, पटना-800014 एफिडेविट नं0 11063 दिनांक 27.06.2019 के द्वारा घोषित करता हूॅं कि मेरा सही नाम Yash Aishwaryaa है जो कि Yash Aishwarya के स्थान पर भविष्य में सभी प्रमाण पत्रों तथा अन्य सभी राजकीय कार्यकलापों में प्रयोग किया जाएगा।

Yash Aishwarya.

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No. 901---I, Gaurav, S/O Anil Kumar Verma, R/O of Shivpuri, Lane no-2, Damuchak, Muzaffarpur shall henceforth be known as "Gaurav Sharan" vide affidavit no 258 at Patna dated 08/04/2019.

Gaurav.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 24—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in165 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी }kjk प्रकाशित

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सं0 2/आरोप-01-30/2015-सा0प्र0-9248

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

11 जुलाई 2019

जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ के पत्रांक 1727 दिनांक 24.07.2015 द्वारा विभाग को प्रतिवेदित किया गया कि श्रीमती एकता वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 955/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग, पटना के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या 1883 दिनांक 11.02.2014 द्वारा इनका पदस्थापन वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ के पद पर किया गया था। दिनांक 21.02.2014 को इनके द्वारा योगदान दिये जाने के पश्चात्‌ दिनांक 22. 02.2014 से 28.02.2014 तक आकस्मिक अवकाश का आवेदन देकर लगातार ईलाज हेतु अवधि विस्तार का आवेदन दिया जाता रहा। विभागीय अधिसूचना संख्या 7999 दिनांक 04.06.2015 द्वारा इनका स्थानान्तरण किये जाने के पश्चात्‌ इनके द्वारा दिनांक 04.06.2015 के पूूर्वाह्‌न में वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ के पद से स्वतः प्रभार परित्याग कर दिनांक 04.06.2015 के अपराह्‌न में पटना में विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग, पटना में स्वतः प्रभार ग्रहण कर लिया गया। वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ के पद पर योगदान के पश्चात्‌ गंभीर बिमारियों के ईलाज हेतु ये अवकाश पर थे लेकिन विभागीय अधिसूचना संख्या-7999 दिनांक 04.06.2015 द्वारा निर्गत आदेश की प्रति लेकर पूर्णियाँ जाकर दिनांक 04.06.2015 के पूर्वाह्‌न में स्वतः प्रभार परित्याग करना एवं दिनांक 04.06.2015 के अपराह्‌न में ही विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग के पद पर स्वतः प्रभार ग्रहण किया। यह तकनीकी रूप से संभव नहीं है। चूँकि पटना से पूर्णियाँ की दूरी लगभग 300 कि0मी0 है। इस प्रकार का अनियमित कार्यकलाप बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी से कतई अपेक्षित नहीं है। श्रीमती वर्मा का कार्यकलाप प्रथम दृष्टया संदेहास्पद एवं भ्रामक है। उक्त के आलोक में जिला पदाधिकारी द्वारा श्रीमती वर्मा के विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

जिला पदाधिकारी से प्रतिवेदित आरोपों के लिए श्रीमती वर्मा से स्पष्टीकरण की मांग की गई। जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ से प्राप्त आरोप-पत्र एवं श्रीमती वर्मा से प्राप्त स्पष्टीकरण के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया, जिसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। श्रीमती वर्मा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' की प्रति उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक 12071 दिनांक 18.08.2015 द्वारा श्रीमती वर्मा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्रीमती वर्मा के पत्रांक 15 दिनांक 04.09.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें श्रीमती वर्मा ने अपने स्पष्टीकरण की कंडिका-5 में उल्लेख की है कि सामान्य प्रषासन विभाग के अधिसूचना संख्या 7999 दिनांक 04.06.2015 द्वारा उनका स्थानान्तरण विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग, पटना के पद पर किया गया। इसके एक दिन पूर्व दिनांक 03.06.2015 को चिकित्सक द्वारा दिये गये सलाह एवं फिटनेस प्रमाण-पत्र के आधार पर रात में ही अपने निजी वाहन से पूर्णियाँ के लिए प्रस्थान कर गयी। दूसरे दिन प्रातः पूर्णियाँ में थी। समाहरणालय जाने पर सामान्य प्रशासन विभाग के बेवसाईट के माध्यम से स्थानान्तरण आदेश प्राप्त हुआ। स्थानान्तरण आदेश प्राप्त होने के उपरांत जिला पदाधिकारी से मिलने का प्रयास किया, परन्तु उनके व्यस्त रहने के कारण उनसे नहीं मिल सकी। तत्पश्चात्‌ चूँकि पूर्णियाँ जिले में कभी किसी कार्य के प्रभार में नहीं रही थी, अतः वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ का प्रभार स्वतः त्याग दिया। फिर अपने निजी वाहन से पटना के लिए प्रस्थान किया। अपराह्‌न (देर शाम) में पटना पहुँकर सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश का अनुपालन करते हुए विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग के पद पर आयोग के सदस्य सचिव के समक्ष स्वतः प्रभार ग्रहण किया। चिकित्सक के फिटनेस प्रमाण-पत्र के आधार दिनांक 03.06.2015 को पूर्णियाँ के लिए निजी वाहन से प्रस्थान किया और सरकार के आदेश का अनुपालन करते हुए निजी वाहन से पूर्णियाँ से पटना आकर दिनांक 04.06.2015 के अपराह्‌न में नवपदस्थापित स्थान पर स्वतः ग्रहण किया। लम्बे समय से चिकित्सा कारणों से अवकाश पर रहने के उपरांत शीघ्रातिशीघ्र योगदान देना उनका उद्‌देश्य था और दिनांक 03.06.2015 को ही पूर्णियाँ प्रस्थान कर गयी। यह संयोग ही है166 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 कि स्थानान्तरण संबंधी अधिसूचना निर्गत होने के दिन पूर्णियाँ में उपस्थित रही थी और उसी दिन प्रभार त्याग एवं प्रभार ग्रहण किया।

श्रीमती वर्मा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 8698 दिनांक 02.07.2018 द्वारा जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ से मंतव्य की मांग की गयी। उक्त के आलोक में जिला पदाधिकारी एवं समार्हाा, पूर्णिया के पत्रांक 158 दिनांक 01.02.2019 द्वारा श्रीमती वर्मा के स्पष्टीकरण पर कंडिकावार मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जो निम्नवत्‌ है :-

(1) श्रीमती एकता वर्मा (बि0प्र0से0) दिनांक 21.02.2014 को वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ के पद पर योगदान कीं थी। ये नियंत्री पदाधिकारी से अवकाश स्वी—त कराये बिना ही दिनांक 22.02.2014 से 28.02.2014 तक का आकस्मिक अवकाश का आवेदन देकर चलीं गयीं, जिसे तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा अस्वी—त किया गया फिर भी ये अवकाश से वापस नहीं लौटीं तथा स्वयं के ईलाज हेतु अवकाश अवधि विस्तारित करने का आवेदन-पत्र भेजती रहीं।

(2) अगर ये दिनांक 04.06.2015 को पूर्णियाँ पहुँच चुकीं थीं तो इन्हें नियमतः फिटनेस प्रमाण-पत्र के साथ योगदान/प्रभार ग्रहण करना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया।

(3) इन्हें दिनांक 04.06.2015 को स्थानान्तरण अधिसूचना प्राप्त हो चुका था तो इन्हें नियंत्री पदाधिकारी के अनुमति/आदेश के आलोक में वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ का प्रभार त्याग करना चाहिए था उसके बाद ही नये पद विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग, पटना का प्रभार ग्रहण करने के लिए मुख्यालय छोड़ना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया।

गठित आरोप-पत्र, श्रीमती वर्मा का स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी के मंतव्य की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्रीमती वर्मा ईलाज हेतु नियंत्रणी पदाधिकारी से अवकाश स्वी—ति कराये बिना ही दिनांक 22.02.2014 से 28. 02.2014 तक का आकस्मिक अवकाश का आवेदन देकर चली गयी, जिसे तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा अस्वी—त किया गया, फिर भी श्रीमती वर्मा अवकाश से वापस नहीं लौटीं, लेकिन विभागीय अधिसूचना संख्या 7999 दिनांक 04.06.2015 की प्रति लेकर एवं पूर्णियाँ जाकर दिनांक 04.06.2015 के पूूर्वाह्‌न में स्वतः प्रभार परित्याग करना एवं दिनांक 04.06.2015 के अपराह्‌न में ही विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग के पद पर स्वतः प्रभार ग्रहण करना संदेहास्पद है। जबकि पटना से पूर्णियांँ की दूरी लगभग 300 कि0मी0 है। श्रीमती वर्मा दिनांक 04.06.2015 को पूर्णियाँ पहुंच चुकी थी तो उन्हें नियमतः फिटनेस प्रमाण-पत्र के साथ योगदान/प्रभार ग्रहण करना चाहिए था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। श्रीमती वर्मा का यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है। विभागीय पत्रांक 8237 दिनांक 06.07.2017 का प्रावधान निम्नवत्‌ है :- ''अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन का निर्णय लिये जाने के पूर्व, आरोपों की प्र—ति एवं गम्भीरता का आकलन किया जाय। यदि प्रतिवेदित आरोप गम्भीर प्र—ति के नहीं होें और लघु शास्तियाँ अधिरोपित किये जाने योग्य हो तो, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों का अनुसरण करते हुए आरोप प्रकरण का अंतिम निष्पादन किया जाय। आरोप की प्र—ति एवं गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए, विभागीय कार्यवाही उन्हीं मामलों में प्रारम्भ किया जाय, जिसमें अनुशासनिक प्राधिकार की राय में आरोपित सरकारी सेवक को बृहत दण्ड दिये जाने की सम्भावना हो।''

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक्‌ समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा गठित आरोप-पत्र एवं जिला पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में श्रीमती वर्मा के स्पष्टीकरण को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत (प) निन्दन एवं (पप) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्रीमती एकता वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 955/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन, (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-41/2014-सा0प्र0-9756

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संकल्प

22 जुलाई 2019

श्री अशोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 621/11, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गोपालगंज-सह-प्रभारी अधीक्षक, मंडल कारा, गोपालगंज सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गोपालगंज के पदस्थापन अवधि में निगरानी थाना कांड सं0167 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 090/10 दिनांक 22.12.2010 के प्राथमिकी अभियुक्त श्री भानू प्रताप चौहान, पंचायत सचिव, ग्राम-पंचायत राज-करकटहाँ, प्रखंड-कटेयॉ, जिला-गोपालगंज के द्वारा परिवादी श्री रामदेव राम, पिता श्री भृगुराशन राम, ग्राम-सरकड़ही, पोस्ट-बेलहीं खास, थाना-कटेयॉ, जिला-गोपालगंज से इंदिरा आवास आवंटन एवं उसकी राशि भुगतान करने हेतु रिश्वत में मो0 5000.00 रूपये मॉगने एवं धावादल के द्वारा श्री चौहान को 3000.00 रूपये रिश्वत की राशि लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के आधार पर जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से अभियोजन स्वी—ति हेतु प्रस्ताव समर्पित किया गया था, जिसके आलोक में जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के पत्रांक 157 दिनांक 03.02.2011 के द्वारा श्री चौहान के विरूद्ध अभियोजन की स्वी—ति प्रदान की गयी।

उक्त मामले में श्री चौहान के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री चौहान के विरूद्ध समुचित कार्रवाई हेतु संचिका श्री कुमार के माध्यम से अनुशासनिक प्राधिकार के समक्ष उपस्थापित की गयी। श्री कुमार द्वारा दिए गए टिप्पणी एवं प्रस्ताव के अवलोकन से स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री चौहान, निलंबित पंचायत सचिव को र्काव्यों के निर्वहन नहीं करने का दोषी पाए जाने के बावजूद उनके विरूद्ध दंड का निर्धारण करने एवं निलम्बन मुक्त करने का प्रस्ताव दिया गया है, जबकि घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने जैसे मामलों में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(xi) के प्रावधान के तहत सेवा से बर्खास्तगी का दंड दिया जाना है। स्पष्ट है, श्री कुमार द्वारा श्री चौहान के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही की सम्यक समीक्षा नहीं की गयी एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप दंड का प्रस्ताव नहीं दिया गया, जिसका अनुचित लाभ श्री चौहान को मिला। इस प्रकार श्री कुमार द्वारा घूस लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के मामले में आरोपी सरकारी सेवक श्री भानू प्रताप चौहान, पंचायत सचिव को बचाने का आरोप प्रतिवेदित है।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 2686 दिनांक 19.02.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार के अभ्यावेदन दिनांक 25.03.2015 द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा कहा गया कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(23)(ii) तथा उपनियम (i) एवं नियम-18 के अनुसार संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की समीक्षा की शक्ति अनुषासनिक प्राधिकार को प्राप्त है। इस विषय पर निर्गत आदेश ज्ञापांक 28/पं0 दिनांक 12.01.2013 से स्पष्ट है कि जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरांत ही आदेश पारित किया गया है। जिला पदाधिकारी के आदेश से असहमत होने या विपरीत टिप्पणी देने की क्षमता किसी भी अन्य अधीनस्थ पदाधिकारी को नहीं है। इनके द्वारा यह भी कहा गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित प्रतिवेदन के आधार पर दण्ड अध्यारोपण हेतु संचिका ससमय उपस्थापित की गई। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमति या असहमति का अधिकार अनुशासनिक प्राधिकार को प्राप्त है। इस प्रकार प्रश्नगत आदेश में इनकी कोई भूमिका अथवा सहभागिता नहीं है और न ही इनके द्वारा उक्त मामले में किसी तथ्य को छिपाया गया है तथा न ही दोषी कर्मी को बचाने अथवा कम दण्ड देने का प्रस्ताव दिया गया है।

श्री कुमार के उपर्युक्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 7163 दिनांक 15.05.2015 द्वारा जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के पत्रांक 443 दिनांक 11.06.2015 द्वारा समर्पित मंतव्य में श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया, लेकिन कारणों का उल्लेख नहीं किया गया। समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से प्राप्त मंतव्य एवं संचिका में उपलब्ध तथ्यों/साक्ष्यों के आधार पर आरोप-पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के विरूद्ध बिहर सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5975 दिनांक 28.04.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 3193 दिनांक 20.12.2016 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में निम्नलिखित बिन्दुओं पर असहमति व्यक्त की गयी :-

''(प) श्री भानू प्रताप चौहान, पंचायत सचिव के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की गहन समीक्षा श्री कुमार के द्वारा नहीं की गयी। श्री कुमार के द्वारा गहन समीक्षा की जानी चाहिए थी तथा गहन समीक्षा करते हुए जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए पुनः जाँच करवाने अथवा असहमति के आधार पर आरोपित पंचायत सचिव से अभ्यावेदन प्राप्त कर वृहद दंड (सेवा से बर्खास्तगी) का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए था, जो उनके द्वारा नहीं दिया गया।

(पप) श्री कुमार के द्वारा मात्र संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर प्रस्ताव दिया गया, जिस कारण घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गये आरोपी पंचायत सचिव को लाभ प्राप्त हुआ।''

उक्त असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 13569 दिनांक 25.10.2017 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन/बचाव बयान की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार के पत्रांक-कैम्प दिनांक 28.11.2017 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित कंडिकावार अभ्यावेदन में निम्नवत्‌ तथ्य रखा गयाः-

(प) पूर्व में गठित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' एवं अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा गठित असहमति के बिन्दु में लगाए गए आरोपों में कोई भिन्नता नहीं है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 168 (पप) अद्योहस्ताक्षरी के विरूद्ध गठित आरोपों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक 2686 दिनांक 19.02.2015 के द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसके आलोक में अद्योहस्ताक्षरी द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसपर जिला पदाधिकारी, गोपालगंज का मन्तव्य प्राप्त किया गया है। जिला पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा अपने पत्रांक 443/पं0 दिनांक 11.06.2015 के द्वारा अद्योहस्ताक्षरी के स्पष्टीकरण को समीक्षोपरान्त स्वीकार करते हुए स्पष्टीकरण को स्वीकारात्मक प्रतिवेदित किया गया।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार द्वारा अपने अभ्यावेदन में किसी नये तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया। उनके द्वारा उन्हीें तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण में किया गया है। श्री कुमार द्वारा आरोपित पंचायत सचिव के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए दंड अधिरोपित करने हेतु प्रस्ताव दिया गया, लेकिन वरीय पदाधिकारी होने के नाते रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने जैसे गम्भीर आरोपों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही की सम्यक्‌/गहन समीक्षा किया जाना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया। श्री कुमार द्वारा गहन समीक्षा करते हुए जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए पुनः जाँच करवाने अथवा असहमति के आधार पर आरोपी पंचायत सचिव से अभ्यावेदन प्राप्त कर वृहत्‌ दंड (जिसमें सेवा से बर्खास्तगी भी शामिल है) का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए था, जो उनके द्वारा नहीं दिया गया। श्री कुमार द्वारा मात्र संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर ही प्रस्ताव दिया गया एवं आरोप की गम्भीरता को नहीं देखा गया, जिस कारण घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गये आरोपी पंचायत सचिव को लाभ प्राप्त हुआ।

समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के अभ्यावेदन/बचाव बयान को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमवाली के संगत प्रावधानों के तहत्‌ 'निन्दन एवं दो वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक' का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।

विभागीय पत्रांक 4111 दिनांक 27.03.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति/परामर्श की मांग की गई। आयोग के पत्रांक 2878 दिनांक 28.01.2019 द्वारा अपने अभिमत में प्रतिवेदित आरोप की गहन समीक्षा किये बगैर एवं कोई तार्किक तथ्य पेश किये बिना अनुशासनिक प्राधिकार के विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त किया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा आयोग के परामर्श को अस्वीकार करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.

03.2019 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया।

(i) निन्दन एवं (ii) दो वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। श्री कुमार के पत्रांक-कैम्प दिनांक 25.03.2019 द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.03.2019 द्वारा अधिरोपित दंड के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, जिला पदाधिकारी, गोपालगंज का मंतव्य, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त अभिमत की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों को रखा गया है, जो उन्होंने पूर्व में दिनांक 25.03.2015 को समर्पित स्पष्टीकरण एवं पत्रांक-कैम्प दिनांक 28.11.2017 द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में किया है। इसके अलावे श्री कुमार द्वारा जिला पदाधिकारी, गोपालगंज, विभागीय संचालन पदाधिकारी एवं बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा समर्पित अभिमत का हवाला देते हुए दंडादेश से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा समर्पित मंतव्य में यद्यपि श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार किया गया है, परंतु स्पष्टीकरण को स्वीकार करने के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। साथ ही संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से भी अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा असहमति व्यक्त करते हुए असहमति के बिन्दुओं का उल्लेख किया गया है। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2878 दिनांक 28.01.2019 द्वारा समर्पित अभिमत में आरोप की गहन समीक्षा किये बगैर एवं कोई तार्किक तथ्य पेश किये बिना श्री कुमार के विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा असहमति व्यक्त किया गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वी—त करने का निर्णय लेते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.03.2019 द्वारा अधिरोपित दंडादेश को यथावत्‌ रखने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अशोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 621/11, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गोपालगंज-सह-प्रभारी अधीक्षक, मंडल कारा, गोपालगंज सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3243 दिनांक 08.03.2019 द्वारा अधिरोपित दंडादेश को यथावत्‌ रखा जाता है। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।169 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

सं0 2/आरोप-01-39/2015-सा0प्र0-517

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संकल्प

14 जनवरी 2019

डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 559 दिनांक 25.05.2009 द्वारा उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोप-पत्र में आचार संहिता के अनुपालन में निष्क्रियता, चुनाव सभा की विडियोग्राफी कराने के संबंध में गलत जानकारी देने, चुनावी सभा की संवेदनशीलता के प्रति उदासीनता, अपने अधीनस्थ कर्मियों को उनके र्काव्य के बारे में सही जानकारी नहीं देने, चुनाव संबंधी कार्य में समन्वय का अभाव तथा संवादहीनता पैदा करने संबंधी आरोप प्रतिवेदित किए गए।

डॉ0 रविन्द्र नाथ से उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 620 दिनांक 14.01.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर डॉ0 रविन्द्र नाथ के पत्रांक 08 दिनांक 24.01.2016 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 3821 दिनांक 11. 03.2016 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 424 दिनांक 21.04.2017 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा का मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें उनके द्वारा आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य पाए जाने की सूचना दी गई।

प्रतिवेदित आरोपों, डॉ0 रविन्द्र नाथ के स्पष्टीकरण एवं आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा समर्पित मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 रविन्द्र नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की बृहद जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10074 दिनांक 07.08.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 888 दिनांक 26.08.2017 द्वारा इस आशय की सूचना दी गई है कि उनके कार्यालय स्तर से आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप-पत्र गठित किया गया है एवं आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण पर मंतव्य भी उपलब्ध कराया गया है। ऐसी स्थिति में पुनः आयुक्त के स्तर से ही विभागीय कार्यवाही का संचालन कर जाँच प्रतिवेदन अभिलेखित किया जाना समीचीन प्रतीत नहीं होता है।

विभागीय स्तर पर आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्र की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1087 दिनांक 23.01.2018 द्वारा डॉ0 नाथ के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 341 दिनांक 06.04.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित प्रमाणित/आंषिक प्रमाणित आरोपों का विश्लेषण/जाँच परिणाम एवं अन्तिम निष्कर्ष निम्न प्रकार समर्पित किया गया है :-

आरोप संख्या-2 के संबंध में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष है कि आरोपित पदाधिकारी ने ऐसा केाई साक्ष्य नहीं दिया है, जो इन तथ्यों को काट सके। बैक डेटिंग के प्रयास को सिर्फ मानवीय भूल नहीं कहा जा सकता है और पूरी सभा के दौरान वीडियोग्राफी न करने के कारण स्थानीय बिजली का कट जाना बताया जाना स्वीकार्य नहीं है, क्याेंकि मूल वीडियो जो तैयार किया गया था उसकी सी0डी0 बिजली कटने से प्रभावित हो सकती थी, न कि मूल वीडियोग्राफी। सुनवाई के दौरान भी आरोपित पदाधिकारी ने कोई अकाट्‌य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। ऐसी स्थिति में यह आरोप प्रमाणित होता है। आरोप संख्या-4 के संबंध में निष्कर्ष दिया गया है कि सुनवाई के दौरान उन्होंने (आरोपित पदाधिकारी) कहा है कि आदर्श आचार संहिता अनुपालन संबंधी निर्वाचन आयोग के पत्र की प्रति उन्हें घटना की तिथि तक नहीं मिली थी। दोनों पक्षों के कथनों और साक्ष्यों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी को न तो आचार संहिता के बारे में बताया और न वीडियोग्राफी कराने की सूचना दी इसलिये वह यहाँ आंशिक रूप से दोषी हैं।

आरोप संख्या-5 के संबंध में निष्कर्ष दिया गया है कि यह आरोप पुनरावृाि का है, किन्तु इसमें आंशिक सच्चाई है कि आरोपित पदाधिकारी ने श्री सत्यनारायण पंडित, कनीय अभियंता-सह-दंडाधिकारी को आदर्श चुनाव आचार संहिता संबंधी निर्देश और चुनाव सभा-स्थल पर वीडियोग्राफी कराने संबंधी पत्र से अवगत नहीं कराया, जिसके लिए वह कुछ हद तक दोषी हैं, क्योंकि दूसरी ओर पंचायत सचिवों को इस संबंध में ससमय पत्र लिखा था। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा जब आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला प्रकाश में आया, तो भी आरोपित पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी से तत्क्षण कोई जानकारी नहीं ली और अपने स्तर से स्थल निरीक्षण नहीं किया और न उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी। ऐसी स्थिति में यह आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।

विभागीय पत्रांक 5996 दिनांक 10.05.2018 द्वारा डॉ0 नाथ से संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में डॉ0 नाथ द्वारा दिनांक 18.05. 2018 को अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों में संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन तथा जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित/आंषिक प्रमाणित आरोपों पर श्री नाथ का बचाव अभ्यावेदन की सम्यक्‌ समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि डॉ0 नाथ द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया। उनके द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया, जो उनके द्वारा पूर्व में किया गया था। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी170 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए डॉ0 नाथ के समर्पित अभ्यावेदन/बचाव बयान को अस्वी—त किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ 'निन्दन तथा दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11554 दिनांक 29.08.2018 द्वारा निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गयाः-

(i) निन्दन (वर्ष 2009-10) तथा (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। डॉ0 रवीन्द्रनाथ, अपर समाहर्त्ता, पूर्णियाँ द्वारा अधिरोपित दंड के विरूद्ध पुनर्विलोकन आवेदन समर्पित किया गया है, जिसमें उनकचा कहना है कि :-

(i) उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा आरोप सं0-2 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-4 एवं 5 को अंषतः प्रमाणित अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रतिवेदित है।

(ii) उक्त निष्कर्ष के आलोक में उनके द्वारा अपना लिखित अभ्यावेदन 18.05.2018 को ससमय समर्पित किया गया है।

(iii) इसके बाद प्रसंगाधीन संकल्प के द्वारा उनपर (क) निन्दन (वर्ष 2009-10) तथा (ख) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है।

(iv) उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का उपर्युक्त निष्कर्ष एवं दंड उनके द्वारा पूर्व में दिये गये तथ्यों एवं परिस्थितियों के आलोक में नैसर्गिक न्याय के तहत सही नहीं है।

उनके द्वारा उक्त के आलोक में उनके विरूद्ध अधिरोपित आरोप एवं दंड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री रवीन्द्रनाथ के पुनर्विलोकन आवेदन की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा पुनर्विलोकन आवेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। उनके द्वारा पूर्व में दिये गये तथ्यों एवं परिस्थितियों के आलोक में पुनर्विलोकन करने का अनुरोध किया गया है। उनके द्वारा लिखित अभिकथन में कोई ऐसा तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसपर पुनः विचार किया जा सके। उल्लेखनीय है कि वर्णित तथ्यों के आलोक में डॉ0 नाथ के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित आरोप, आरोपित पदाधिकारी के बचाव बयान, विभागीय मंतव्य, विभागीय मंतव्य पर आरोपित पदाधिकारी की प्रतिक्रिया पर सुनवाई कर विश्लेषणोंपरान्त डॉ0 नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप संख्या-2 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-4 एवं 5 को अंशतः प्रमाणित पाया गया। प्रतिवेदित आरोपों के लिए डॉ0 रवीन्द्रनाथ के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा अंशतः प्रमाणित/प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा दंड अधिरोपित किया गया।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सम्यक्‌ विचारोपरान्त डॉ0 रवीन्द्रनाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन आवेदन को अस्वी—त किया जाता है तथा अधिरोपित दंड (i) निन्दन तथा (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड को यथावत्‌ रखा जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

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सं0 2/सी0-1050/2009-सा0प्र0-8329

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संकल्प

24 जून 2019

श्री अंजय कुमार राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 775/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, छपरा (सारण) सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, हथुआ, गोपालगंज के विरूद्ध प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, परसा, सारण के पद पर पदस्थापन अवधि में वित्तीय अनियमितता बरतने संबंधी आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, सारण द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 4581 दिनांक 02.06.2009 द्वारा प्राप्त हुआ। विभागीय पत्रांक 6235 दिनांक 30.06.2009 द्वारा उक्त प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर श्री राय द्वारा दिनांक 27.07.2009 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री राय के स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त इनके विरूद्ध प्रथम द्रष्टया आरोप सही पाये जाने के आलोक में आरोपों की वृहत जाँच हेतु अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9366 दिनांक 04.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।171 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 434 दिनांक 28.09.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-01 को अंशतः प्रमाणित एवं आरोप सं0-02, 03 एवं 04 को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंशतः प्रमाणित एवं प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 14612 दिनांक 05.11.2018 द्वारा श्री राय से बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री राय के पत्रांक 05 दिनांक 07.01.2019 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री राय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, जाँच पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं इनसे प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों यथा-आरोप संख्या-1, आरोप संख्या-2 एवं आरोप संख्या-3, जो मुख्यतया विाीय अनियमितता एवं विाीय नियमों का उल्लंघन से संबंधित है, को अंशतः प्रमाणित/प्रमाणित पाया गया है। श्री राय के द्वारा रोकड़ बही का नियमित रूप से निरीक्षण नहीं करना, अग्रिम राशि की वापसी कराने हेतु अपेक्षित कार्रवाई नहीं करना एवं बैंक में जमा राशि के ब्याज की राशि रोकड़ पंजी में प्रविष्टि नहीं किया जाना इनके विाीय प्रबंधन एवं नियमों के प्रति र्काव्यों एवं दायित्व के निर्वहन में लापरवाही को दर्शाता है। इनके द्वारा र्काव्यों में बरती गयी शिथिलता एवं लापरवाही के कारण से विाीय अनियमितता उत्पन्न हुई। आरोप संख्या-4 को भी जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित पाया गया है, जो श्री राय के अनुशासनिक र्काव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री राय द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकार किया गया तथा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''संचयात्मक प्रभाव से (ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज) दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड विनिश्चित किया गया।

उक्त विनिश्चित दंड पर विभागीय पत्रांक 2077 दिनांक 14.02.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 514 दिनांक 07.06.2019 द्वारा श्री राय के विरूद्ध विनिश्चित दंड पर सहमति प्रदान की गयी है।

अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री राय के विरूद्ध समर्पित अभ्यावेदन में प्रमाणित आरोप एवं बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा विनिश्चित दंड पर व्यक्त किये गये सहमति के आलोक में श्री अंजय कुमार राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 775/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, छपरा (सारण) सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, हथुआ, गोपालगंज के विरूद्ध ''संचयात्मक प्रभाव से (ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज) दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-09/2018-सा0प्र0-8325

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संकल्प

24 जून 2019

श्री दिनेश राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1196/11, तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी सम्प्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, अरवल के विरूद्ध बाबूबरही प्रखंड अन्तर्गत ग्राम पंचायत नसहा के आंगनबाड़ी केन्द्र सं0-75 मदनटोला नवटोली में चयनित सेविका बबीता कुमारी, शत्रुध्न दास, ग्राम-मदनडोम, प्रखंड-बाबूबरही को जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 682 दिनांक 29.06.2007 द्वारा फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अपना चयन करने के आलोक में इन पर प्राथमिकी दर्ज करने हेतु निदेश दिया गया, परन्तु इनके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के आरोप के लिए समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3858 दिनांक 23.11. 2017 द्वारा प्रपत्र 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।

उल्लेखनीय है कि माननीय लोकायुक्त के आदेश के आलोक में श्री राम के विरूद्ध संचिका में उपलब्ध कागजात/दस्तावेजों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। विभागीय पत्रांक 57 दिनांक 02.01.2019 द्वारा प्रतिवेदित आरोप के आलोक में श्री राम से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री राम के पत्रांक 1142 दिनांक 28.01.2019 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें श्री राम का कहना है कि-

1. मेरा पदस्थापन दिनांक 02.04.2008 से 13.06.2008 जो मात्र दो माह का है, यह मात्र अतिरिक्त प्रभार है। 2. जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी का पत्रांक 682 दिनांक 29.06.2007 है। यह मेरे अतिरिक्त प्रभार/पदस्थापन के पूर्व का है।

3. जहाँ तक इस पत्र का प्रश्न है इसके पूर्व के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी द्वारा दिनांक 18.07.2007 में पत्र जो देखी गई है एवं हस्ताक्षर की गई है।172 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 4. ज्ञातव्य हो कि 2007 से लेकर 2006 तक चार प्रधान सहायकों द्वारा अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया है कि दिनांक 29.06.2007 नहीं आया इसे स्पष्ट होता है कि यह पत्र जिस बाल विकास परियोजना पदाधिकारी/कर्मचारी द्वारा पत्र का अवलोकनन किया गया है। उनके द्वारा कार्यालय के संचिका में उपस्थापित नहीं किया गया है।

5. जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा स्मार पत्र पुनः भेजी जानी चाहिए थी परन्तु 2016 तक इस पत्र का अनुपालन नहीं किया जा सका। जिसके जिए जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, स्वयं जिम्मेवार है न की आने वाले पदाधिकारी जवाबदेह है।

श्रीमती बबीता कुमारी, सेविका ऑगनबाड़ी केन्द्र सं0-75 से चयन मुक्त सेविका पर प्राथमिकी दर्ज करने की कल्याण पदाधिकारी-सह-प्रोग्राम पदाधिकारी से संबंधित आदेश की प्रति जो मेरे कार्यकाल में प्राप्त ही नहीं हुआ है। उसके लिए मुझे जवाबदेह मानना उचित प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार उल्लेखित करना है कि मेरे द्वारा पद एवं कर्तव्यों के अनुकूल कार्य एवं दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जाना आरोप निराधार एवं उचित नहीं है।

श्री राम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 3368 दिनांक 12.03.2019 द्वारा समाज कल्याण विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। समाज कल्याण विभाग के पत्रांक 2516 दिनांक 09.05.2019 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें समाज कल्याण विभाग का मंतव्य है कि श्री दिनेश राम, बाबूबरही परियोजना प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के पद पर दिनांक 02.04.2008 से 13.06.2008 तक पदस्थापित थे। उक्त अवधि में श्री राम द्वारा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही के प्रभार में रहते हुए फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर चयनित सेविका श्रीमती बबीता कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया गया, जो सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही एवं सरकारी आदेश के उल्लंघन करने में दोषी पाये गये हैं।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा गठित आरोप-पत्र, श्री राम का स्ष्टीकरण एवं समेकित बाल विकास सेवाएॅ निदेशालय, समाज कल्याण विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री दिनेश राम, बाबूबरही परियोजना प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के पद पर दिनांक 02.04.2008 से 13.06.2008 तक पदस्थापित थे। जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 682 दिनांक 29.06.2007 द्वारा फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर चयनित सेविका श्रीमती बबीता कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज करने हेतु निदेश दिया गया था, परन्तु उक्त अवधि में श्री राम द्वारा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही के प्रभार में रहते हुए श्रीमती बबीता कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया, जो सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही एवं सरकारी आदेश के उल्लंघन है। चूँकि श्री दिनेश राम पर विाीय अनियमितता/गबन का आरोप नहीं है तथा लधु शास्तियाँ अधिरोपित किये जाने योग्य है।

वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों के तहत श्री राम के विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए ''निन्दन एवं असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोप, श्री राम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं समाज कल्याण विभाग से प्राप्त मंतव्य के सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों के तहत श्री दिनेश राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1196/11, तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी सम्प्रति नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, अरवल के विरूद्ध निम्नांकित शास्तियाँ अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन, (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-76/2013-सा0प्र0-8602

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संकल्प

27 जून 2019

श्री अभिराम त्रिवेदी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 964/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, वैशाली-सह- प्रभारी कारा अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, पूर्णियाँ के विरूद्ध मंडल कारा, हाजीपुर में सजावार बंदी की मृत्यु हो जाने के कारण उत्पन्न परिस्थिति की सूचना दिए जाने के बावजूद कारा पर उपस्थित नहीं होने तथा इस संबंध में बरती गई गंभीर लापरवाही, कर्त्तव्यहीनता एवं स्वेच्छारिता संबंधी आरोपों के लिए गृह विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 5496 दिनांक 07.11.2013 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया।

उक्त आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18775 दिनांक 10.12.2013 द्वारा श्री त्रिवेदी को निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

प्रमंडलीय आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 38 दिनांक 20.01.2014 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री त्रिवेदी के विरूद्ध सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।173 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 श्री त्रिवेदी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों तथा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी समीक्षा में पाया गया कि श्री त्रिवेदी द्वारा काराधीक्षक के रूप में अपने र्काव्यों का निवर्हन सही ढ़ंग से नहीं किया एवं कारा में सजावार बन्दी की मृत्यु होने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। फलतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के संगत प्रावधानों के तहत असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 6645 दिनांक 21.05.2014 द्वारा श्री त्रिवेदी को अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में श्री त्रिवेदी द्वारा दिनांक 30.05.2014 को अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री त्रिवेदी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, गृह विभाग का मंतव्य एवं आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिवेदी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8079 दिनांक 16.06.2014 द्वारा इन्हें निलंबन मुक्त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा-संशोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत ''निन्दन एवं तीन वर्षों के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतनमान में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' का दंड संसूचित किया गया।

उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री त्रिवेदी द्वारा दिनांक 23.07.2014 को विभाग में पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। उक्त पुनर्विलोक अर्जी के समीक्षोपरान्त पाया गया कि इसमें इनके द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो उन्होंने दिनांक 30.05.2014 को समर्पित अभ्यावेदन में किया है।

सम्यक विचारोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिवेदी के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वी—त करते हुये विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8079 दिनांक 16.06.2014 द्वारा अधिरोपित दंड ''निन्दन (वर्ष 2013-14)'' एवं ''तीन वर्षों के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतनमान में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14506 दिनांक 21.10.2014 द्वारा पूर्ववत्‌ बरकरार रखा गया।

उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री त्रिवेदी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या 12229/2014 दायर किया गया, जिसमें में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 01.04.2019 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

ष्प्द जीम मअमदजए उमउवतपंस पे ेनइउपजजमक इमवितम जीम तमेचवदकमदज ंनजीवतपजपमे ूपजीपद जीम ंवितमेंपक चमतपवकए जीपे ब्वनतज ूवनसक मगचमबज जींज जीम चमजपजपवदमतष्े चसमं जींज जीम क्पेबपचसपदंतल ।नजीवतपजल ीें दवज ेंेपहदमक ंदल तमेंवद वित पजे कपेंहतममउमदज ूपजी जीम पिदकपदहे व ि जीम म्दुनपतल व्पििबमतए ूपसस इम सववामक पदजव इल जीम ंनजीवतपजपमेण् ।चंतज तिवउ जींज पज ूवनसक इम वचमद वित जीम चमजपजपवदमत जव तंपेम ंदल वजीमत पेेनमेण्

ब्संपउ व िजीम चमजपजपवदमत ेीवनसक इम बवदेपकमतमक मगचमकपजपवनेसल ंदक ूपजीवनज तंपेपदह जीम पेेनम व िउमउवतपंस इमपदह इंततमक इल कमसंलण्

ज्ीम उंजजमत ेीवनसक इम बवदेपकमतमक वद पजे उमतपज ंदक कपेचवेमक व ि इल ं तमेंवदमक ंदक ेचमांपदह वतकमत ूपजीवनज ंदल नदकनम कमसंल मगचमकपजपवनेसल ंदक चतममितंइसल ूपजीपद विनत उवदजीे तिवउ जीम कंजम व ि तमबमपचजध्चतवकनबजपवद व िं बवचल व िजीपे वतकमतण्

ॅतपज चमजपजपवद ेजंदके कपेचवेमक वण्ष् ि माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 01.04.2019 को पारित आदेष के आलोक में श्री त्रिवेदी द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया।

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, श्री त्रिवेदी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी, श्री त्रिवेदी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु एवं उपलब्ध अभिलेख की एक साथ सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि :-

(i) दिनांक 22.10.2013 को मंडल कारा, हाजीपुर के बन्दियों द्वारा मारपीट की घटना के संबंध में पूरे घटनाक्रम की जाँच करते हुए महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवायें, गृह विभाग, बिहार, पटना के ज्ञापांक 26/गो0 दिनांक 25.11.2013 द्वारा संयुक्त जाँच दल का जाँच का प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसके कंडिका-17(ii) में प्रतिवेदित किया गया है कि सहायक अधीक्षक द्वारा दिनांक 21.10.2013 की रात्रि में काराधीक्षक को कैदियों के असंतोष एवं आक्रोश के संबंध में सूचना दी गयी, किन्तु काराधीक्षक द्वारा जिला पदाधिकारी, वैशाली अथवा पुलिस अधीक्षक, वैशाली को समय पर सूचना नहीं दी गयी एवं सूचना मिलने के बाद भी अनाधि—त रूप से मुख्यालय से बाहर रह गये तथा अगले दिन भी घटना के काफी देर के बाद आया गया, जिसके कारण मारपीट की बड़ी घटना को रोका नहीं जा सका।

(ii) जिला पदाधिकारी, वैशाली के पत्रांक 2241 दिनांक 09.12.2013 द्वारा भी प्रतिवेदित किया गया कि श्री अभिराम त्रिवेदी, वरीय उप समाहर्त्ता-सह-तत्कालीन काराधीक्षक द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में अपने पक्ष में साक्ष्य जुटाने हेतु मंडल कारा के अभिलेख एवं पंजी में जान-बूझकर छेड़छाड़ किया गया जो एक सरकारी सेवक के आचारण के प्रतिकूल है एवं गैरकानूनी —त्य है।बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 174 (iii) मंडल कारा में आपराधिक कांडों के सजावार बन्दी एवं अन्य बन्दी रहते हैं तथा मंडल कारा के कार्यों की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए कारा के कार्यों के निष्पादन हेतु बिहार कारा हस्तक नियम भी बनाये गये है। बिहार कारा हस्तक नियम में काराधीक्षक का प्रतिदिन कारा में आने का प्रावधान किया गया है तथा बीमारी या कर्त्तव्य के निर्वहन में असमर्थता की स्थिति में अपनी अनुपस्थिति के तिथियों को कारण सहित मिनट पुस्तिका में दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। दिनांक 20.10.2013 से 25.10.2013 तक जिला स्थापना के कार्य से माननीय उच्च न्यायालय में प्रतिनियुक्ति की स्थिति में श्री त्रिवेदी द्वारा कारा का प्रभार प्रभारी जेलर को सौंपना चाहिए था एवं मिनट पुस्तिका में इसका उल्लेख करना चाहिए था, जो नहीं किया गया है।

(iv) श्री त्रिवेदी द्वारा पूर्व में दिनांक 30.05.2014 को समर्पित अभ्यावेदन में उल्लेखित किया गया है कि वे दिनांक 20.10.2013 से 25.10.2013 तक स्थापना संबंधी कार्यों के लिए माननीय उच्च न्यायालय, पटना में प्रतिनियुक्त थे। दूसरी तरफ इनके अभ्यावेदन में यह भी कहा गया कि दिनांक 21.10.2013 को सजावर बंदी की मृत्यु की सूचना मिलते ही वे कारा में उपस्थित हो गये तथा सुबह से रात तक वे कारा में कर्त्तव्य का निर्वहन करते रहे। श्री त्रिवेदी के दिनांक 21.10.2013 को अनाधि—त रूप से अनुपस्थित रहने के संबंध में जिला पदाधिकारी के द्वारा जाँच समिति को प्रतिवेदन समर्पित किया गया। (v) संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के संबंध में गृह विभाग से भी मंतव्य प्राप्त किया गया। ंगृह विभाग द्वारा अपने मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया है कि :-

(क) बिहार कारा हस्तक 2012 के नियम 796 द्वारा कारा का सम्पूर्ण दायित्व अधीक्षक को सौंपा गया है। नियम 796(ii) द्वारा प्रतिदिन कारा में आने का प्रावधान किया गया है। बीमारी या कर्त्तव्य के निर्वहन में असमर्थता की स्थिति में अपनी अनुपस्थिति के तथ्यों को कारण सहित मिनट पुस्तिका में दर्ज करने का प्रावधान है।

(ख) श्री अभिराम त्रिवेदी दिनांक 20.10.2013 से 25.10.2013 तक जिला स्थापना के कार्य से माननीय उच्च न्यायालय में प्रतिनियुक्त हुए तो उनके द्वारा कारा का प्रभार प्रभारी जेलर को नहीं सौंपा गया और न ही इसका उल्लेख जेल मिनट पुस्तिका में किया गया। साथ ही इस संबंध में उनके द्वारा किसी अन्य को प्रभारी बनाये जाने हेतु जिला प्रशासन से अनुरोध नहीं किया गया।

(ग) उनके द्वारा बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम-796(ii) एवं 796(v) के द्वारा निहित प्रावधानों के अंतर्गत कारा का प्रभार उपाधीक्षक कोे नहीं दिया गया था अर्थात्‌ वे कारा के प्रभार में थे और नियम-796 के तहत उनके कार्य एवं दायित्व विहित है।

उपरोक्त तथ्यों के आधार पर स्पष्ट है कि मंडल कारा, हाजीपुर में सजावार बंदी की मृत्यु होने के बावजूद श्री त्रिवेदी द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया एवं काराधीक्षक के रूप में अपने कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया गया, जिसके कारण दिनांक 22.10.2013 को मंडल कारा, हाजीपुर में बंदियों के बीच मारपीट की बड़ी घटना को नहीं रोका जा सका। वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सी0डब्ल्यू0जे0सी0 सं0 12229/2014 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 01.04.2019 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में श्री त्रिवेदी द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8079 दिनांक 16.06.2014 द्वारा अधिरोपित दंड ''निन्दन एवं तीन वर्षो के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतनमान में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' को पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अभिराम त्रिवेदी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 964/11, तत्कालीन वरीय उपसमाहर्त्ता, वैशाली-सह-प्रभारी कारा अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, पूर्णियाँ के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8079 दिनांक 16.06.2014 द्वारा अधिरोपित दंड ''निन्दन एवं तीन वर्षो के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतनमान में निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-35/2014-सा0प्र0-8147

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संकल्प

19 जून 2019

श्री अभिराम त्रिवेदी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 964/11 तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, वैशाली-सह-अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर के विरूद्ध मंडल कारा, हाजीपुर के अभिलेखों से छेड़-छाड़ करने, मुख्यालय से बाहर रहने, जिला पदाधिकारी के साथ अमर्यादित व्यवहार करने, गेट वार्डन को धमकाकर गेट पंजी में फर्जी प्रविष्टि करने इत्यादि के आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, वैशाली के पत्रांक 2241 दिनांक 09.12.2013 द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर श्री त्रिवेदी के विरूद्ध विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया।

उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री त्रिवेदी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 का नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 139175 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 दिनांक 05.01.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया।

आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल-सह-संचालन पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 1380 दिनांक 25.04.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 के संदर्भ में कोई भी मंतव्य या निष्कर्ष नहीं दिया गया तथा आरोप संख्या 04 को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

आरोप संख्या-04 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य निम्नवत्‌ है :- ''प्रपत्र 'क' के गठित आरोपों की समीक्षा संलग्न साक्ष्यों से किये जाने पर स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी के समर्पित स्पष्टीकरण में भले ही तथ्य जो रहे हों, परन्तु उक्त स्पष्टीकरण की भाषा निसंदेह एक वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी, जो उनका नियंत्री पदाधिकारी हो, के साथ पत्राचार की भाषा के अनुरूप नहीं है। वैसे ही उनका स्पष्टीकरण जिला पदाधिकारी जैसे वरीय पदाधिकारी को समर्पित है, उक्त स्थिति में वरीय पदाधिकारी से पत्राचार में उग्र एवं सामान्य शिष्टाचार का प्रयोग नहीं किये जाने से सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल आचरण करने का मामला प्रमाणित माना जा सकता है। निष्कर्ष :- आरोप प्रमाणित है।'' अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 की जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के संगत प्रावधानों के तहत नहीं की गयी है। फलतः विभागीय पत्रांक 11851 दिनांक 13.08.2015 द्वारा आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 की अग्रेतर जाँच कर प्रतिवेदन समर्पित करने का अनुरोध किया गया। आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के अर्द्धसरकारी पत्र संख्या 891 दिनांक 01.08.2016 द्वारा संचालन पदाधिकारी को परिवर्तन करने संबंधी अनुरोध के आलोक में समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14662 दिनांक 25.10.2016 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जाँच आयुक्त (सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त), बिहार, पटना के पत्रांक 217 दिनांक 24.02.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष निम्नवत्‌ है :-

आरोप संख्या-(1), (2) एवं (3) में कहा गया है कि आरोपित पदाधिकारी तत्कालीन काराधीक्षक, हाजीपुर का कारा में दिनांक 22.10.2013 को दो छायाप्रतियों में भिन्न-भिन्न समय पर आने और जाने की प्रविष्टि दर्ज है और उसकी संपुष्टि में आरोप संख्या-2 में कक्षपाल श्री अरविन्द तिर्की के लिखित बयान की प्रति दी गयी है और आरोप संख्या-3 में दिनांक 22.10. 2013 को आरोपित पदाधिकारी श्री अभिराम त्रिवेदी की 6.55 बजे प्रातः बीबीगंज, मुजफ्फरपुर, 9.22 बजे प्रातः से 9.23 बजे तक ग्राम-सैदपुर बिजली, भगवानपुर में एवं 9.54 बजे प्रातः ग्राम-दिग्धीकला, हाजीपुर (जहां जेल है) में उनके मोबाइल की सी0डी0आर0 में उनका लोकेशन दिखाता है। सामान्यतः सी0डी0आर0 झूठ नहीं हो सकता यदि उसमें छेड़-छाड़ न की गयी हो। यदि आरोपित पदाधिकारी 9.54 बजे प्रातः ग्राम-दिग्धीकला, हाजीपुर (जहां मंडल कारा, हाजीपुर अवस्थित है) पहुंचे थे तो उसके पूर्व 8.10 बजे प्रातः वह कैसे कारा के अंदर प्रवेश किए ? इसी प्रकार कक्षपाल का बयान और गेट पंजी में प्रविष्टि की दो छायाप्रतियों में भिन्न-भिन्न आवद एवं प्रस्थान की प्रविष्टियां स्थिति को संदेहास्पद बनाती हैं। अनुमंडल पदाधिकारी, हाजीपुर और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, हाजीपुर के संयुक्त जांच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के 8.10 बजे प्रातः जेल में आने की प्रविष्टि को संदेहास्पद बताया गया है। दूसरी ओर आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उन्हें जिला पदाधिकारी, हाजीपुर (वैशाली) ने हाई कोर्ट, पटना सरकारी कार्य हेतु भेजा था, किन्तु उनके स्थान पर किसी दूसरे पदाधिकारी को प्रभारी काराधीक्षक नहीं बनाया गया था। आरोपित पदाधिकारी के इस बयान/दलील को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी या विभाग के द्वारा साक्ष्य के आधार पर नहीं काटा गया है। इसके अलावा आरोपित पदाधिकारी के इस कथन को पूरी तरह से नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है कि घटना के करीब डेढ़ माह बाद कक्षपाल से दबाव में बयान लिया गया और दुर्भावनापूर्ण से उनके विरूद्ध कूट रचना करके उन्हें परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है। विशेषकर आरोपित पदाधिकारी ने यह भी उल्लेख किया कि कारा में पदस्थापित पदाधिकारियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जो घटना के समय वहां उपस्थित थे। उसके अलावा आरोपित पदाधिकारी ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गयी थी, जिसमें सरकारी अधिवक्ता ने सलाह दी है कि वह दुर्भावनापूर्ण रूप से प्रेरित होकर दर्ज की गयी थी और बाद में जिला पदाधिकारी ने उसे वापस लेने का भी आदेश दिया है, किन्तु अभी तक उसे वापस नहीं लिया गया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का पर्याप्त साक्ष्य एवं आधार नहीं था, फिर भी अन्य अज्ञात कारणों से उक्त प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। इतना ही नहीं, यदि कक्षपाल ने घटना के डेढ़ माह बाद अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष बयान दिया कि उन्हें धमकी देकर और दबाव में जेल गेट पंजी में तत्कालीन काराधीक्षक के 8.10 बजे प्रवेश एवं 9.25 बजे प्रस्थान की प्रविष्टि करायी गयी, तो उक्त कक्षपाल ने जिस दिन धमकी दी गयी थी उस दिन या उसके अगले दिन कारा के उपाधीक्षक, कारापाल आदि अधिकारियों को इसे क्यों नहीं बताया। यदि वह उन्हें इसकी पूर्व में ही सूचना दिये होते, तो कक्षपाल के द्वारा अनुमंंडल पदाधिकारी, हाजीपुर के समक्ष दिये गये दिनांक 29.11.2013 के बयान की पूर्णतः संतुष्टि होती और वह आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अकाट्‌य साक्ष्य माना जाता, किन्तु ऐसा नहीं किये जाने के कारण उक्त साक्ष्य को एकपक्षीय या अधिक-से-अधिक अंशतः सत्य ही माना जा सकता है। इसके अलावा आरोपित पदाधिकारी द्वारा यह भी बात उठाई गई है कि सी0डी0आर0 सत्यापित नहीं है और इसे प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने नहीं काटा।

चूँकि श्री त्रिवेदी को पूर्व में ही उस घटना के बावत दंड मिल चुका है और इस विभागीय कार्यवाही में शामिल किए गए आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 उसी घटना से पूरी तरह संबद्ध हैं इसलिए इन्हें स्वतंत्र आरोप नहीं माना जा सकता, बल्कि176 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 एक ही आरोप के तीन हिस्से हैं, जो परस्पर संबद्ध एवं अंतरनिर्भर रहने के कारण सम्यक्‌ विवेचना के आधार पर आंशिक रूप से प्रमाणित होते हैंं।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक 3670 दिनांक 16.03.2018 द्वारा श्री त्रिवेदी से पूर्व से प्रमाणित आरोप संख्या 04 एवं अंशतः प्रमाणित आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 के लिए बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री त्रिवेदी के पत्रांक 177 दिनांक 09.04.2018 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया। बचाव अभ्यावेदन में श्री त्रिवेदी द्वारा आरोप के सभी बिन्दुओं पर कंडिकावार स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोपों से इन्कार करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया।

श्री त्रिवेदी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उनसे प्राप्त लिखित अभ्यावेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री त्रिवेदी के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में कुल 04 आरोप गठित किये गये हैं। कुल 04 आरोपों में से आरोप संख्या 04 को प्रमाणित पाया गया है तथा आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 को आंशिक प्रमाणित पाया गया है। श्री त्रिवेदी के विरूद्ध आंषिक प्रमाणित आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 पूर्व के घटनाक्रम से संबद्ध है एवं इस आरोप के लिए उन्हें पूर्व में दंड दिया जा चका है। आरोप संख्या 04 वरीय पदाधिकारी के विरूद्ध अनुशासनहीनता बरतने के लिए प्रमाणित है।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित आंशिक प्रमाणित आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 के लिए श्री त्रिवेदी के अभ्यावेदन को स्वी—त करने तथा प्रमाणित आरोप संख्या 04 के लिए संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ (प) निन्दन (वर्ष 2013-14) तथा (पप) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अभिराम त्रिवेदी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 964/11 तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, वैशाली-सह-अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, पूर्णियां के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है-

(i) निन्दन (वर्ष 2013-14) तथा (ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/परि0-716/2008-सा0प्र0-8240

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संकल्प

20 जून 2019

श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध आरोप यथा-सहायक रोकड़ बही एवं सामान्य रोकड़ बही का भौतिक सत्यापन नहीं करने, दिनांक 01.07.2001 से 02.12.2001 तक सामान्य रोकड़ बही पर हस्ताक्षर नहीं करने, जिला नजारत उप समार्हाा का प्रभार सौंपने के वक्त पंचायत अग्रिम पंजी में दर्ज राषि के वास्तविक जाँचोपरान्त अन्तर पाये जाने तथा दायित्वों के निर्वहन में अक्षमता के कारण सरकारी राशि का दुर्विनियोग एवं गबन होने के लिए आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1038 दिनांक 23.09.2008 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित प्राप्त हुआ।

उक्त प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1845 दिनांक 17.03.2009 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक 260 दिनांक 23.03.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संबंधी निर्गत संकल्प को वापस करते हुए कतिपय त्रुटियों के निराकरण के उपरान्त संकल्प भेजने का निदेश दिया गया। इसके आलोक में विभागीय पत्रांक 9526 दिनांक 23.09.2009 द्वारा श्री त्रिपाठी को आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) की प्रति भेजते हुए इनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री त्रिपाठी के पत्रांक 01 दिनांक 09.06.2014 द्वारा स्पष्टीकरण एवं पत्रांक 01 दिनांक 07.11.2014 द्वारा पूरक स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 540 दिनांक 11.03.2015 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 2245 दिनांक 03.12.2014 द्वारा श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण पर गठित मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया।

विभागीय पत्रांक 6044 दिनांक 21.04.2015 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधी पूर्व में निर्गत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1845 दिनांक 17.03.2009 की प्रति अन्य कागजातों के साथ विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को प्रेषित करते हुए विभागीय कार्यवाही का संचालन कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया।177 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 विभागीय जाँच आयुक्त, पटना के पत्रांक 171 दिनांक 30.03.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री त्रिपाठी के विरूद्ध लेखा संधारण संबंधी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता और विफलता संबंधी आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय पत्रांक 6312 दिनांक 05.05.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी से अभ्यावेदन की मांग की गयी।

उक्त के आलोक में श्री त्रिपाठी के पत्रांक कैम्प 01 दिनांक 24.05.2016 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री त्रिपाठी से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री त्रिपाठी के विरूद्ध जिला नजारत शाखा में लेखा संधारण संबंधी दायित्वों तथा पंजियों का नियमित संधारण एवं नियमित भौतिक सत्यापन के निर्वहन में शिथिलता का आरोप प्रमाणित पाया गया।

अतएव उक्त के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत इनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए ''निन्दन एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया। उक्त विनिश्चित दंड पर विभागीय पत्रांक 10768 दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य/परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक 2137 दिनांक 19.10.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिश्चित दंड पर सहमति संसूचित की गयी।

श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपों एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया :-

(i) निन्दन (वर्ष 2001-02), (ii) संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक। उक्त दंड के विरूद्ध श्री त्रिपाठी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या 6689/2017 श्री अशोक कुमार त्रिपाठी बनाम्‌ राज्य सरकार एवं अन्य दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 07.01.2019 को आदेश पारित किया गया, जिसका कार्यान्वयन अंश निम्नलिखित है :-

ष्12ण् प्द जींज अपमू व ि जीम उंजजमतए जीम पउचवेपजपवद व िजीम ंवितमेंपक चनदपेीउमदज व ि बमदेनतम ंदक ेजवचचंहम व ि जीतमम पदबतमउमदजे ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज ूें जीवतवनहीसल नदूंततंदजमकण् प्ज ीें ंसेव इममद ेनइउपजजमक वद इमींस िव िजीम चमजपजपवदमत जींज वित ेपउपसंत बींतहमेए ।तइपदक ज्ञनउंत श्रींए वदम व िजीम चमतेवदे ंहंपदेज ूीवउ कमचंतजउमदजंस चतवबममकपदह ूें पदपजपंजमक ंदक ूीव जवव ूें पद.बींतहम व ि उंदंहपदह जीम ंंििपते व ि जीम छं्रंतंजए ीें वदसल इममद ेसंचचमक ूपजी ं चनदपेीउमदज व ि बमदेनतम वदसलण् ॅीपसम पदजपउंजपदह जीपे ंिबज जव जीपे बवनतजए डतण् ैपदींए समंतदमक ेमदपवत ंकअवबंजम ीें वदसल जतपमक जव बंदअेंे जींज जीमतम ीें जव इम ेवउम चंतपजल पद जीम चनदपेीउमदजए प िंज ंसस जीम बींतहमे ंतम ेपउपसंतण् ज्ीम ंदबपससंतल हतवनदक वद ूीपबी जीम चतमेमदज चमजपजपवद ीें इममद चतमेेमक पे जींज जीवनही ं चतमेमदजंजपवद वपििबमत ूें ंचचवपदजमक इनज जीम जमदवत व िजीम मदुनपतल तमचवतज बसमंतसल मेजंइसपेीमे जींज जीम चतमेमदजपदह वपििबमत कपक दवज चतमेमदज जीम चंचमते जीम ूंल पज ेीवनसक ींअम इममद कवदमण्

13ण् व्द जीमेम हतवनदकेए समंतदमक बवनदेमस वित जीम चमजपजपवदमत ीें ेवनहीज ुनेंीपदह व ि जीम तमेवसनजपवदध्वतकमत बवदजंपदमक पद डमउव छवण् 15512 कंजमक 17ण्11ण्2016ए इल ूीपबी ीम ीें इममद पदसिपबजमक ूपजी जीम चनदपेीउमदज व ि बमदेनतम ंदक ेजवचचंहम व ि जीतमम पदबतमउमदजे ूपजी बनउनसंजपअम ममििबजण्

14ण् थ्वत जीम ंवितमेंपक ंिबजेए जीपे ब्वनतज पे बवदअपदबमक जींज जीम पिदकपदहे व िजीम मदुनपतल तमचवतज कव दवज उांम वनज ं बेंम वित पउचवेपजपवद व ि चनदपेीउमदज व ि जीम चमजपजपवदमत ंदक जींज ंसेवए ं उंरवत चनदपेीउमदज ूपजी जीम पदबसनेपवद व ि ेजवचचंहम व ि जीतमम पदबतमउमदजे व ि जीम ेंसंतल ूपजी बनउनसंजपअम ममििबजण्

15ण् ज्ीनेए जीम तमेवसनजपवद बवदजंपदमक पद डमउव छवण् 15512 कंजमक 17ण्11ण्2016 नदकमत बींससमदहम पे ेमज ेंपकमण्

16ण् ज्ीम उंजजमत पे तमउंदकमक जव जीम कपेबपचसपदंतल ंनजीवतपजल वित चेंेपदह वनज ं तिमेी वतकमत पद ंबबवतकंदबम ूपजी सूं ंजिमत जांपदह पदजव ंबबवनदज जीम मदजपतम तमबवतके व िजीम मदुनपतल चतवबममकपदहण् 17ण् ज्ीम कपेबपचसपदंतल ंनजीवतपजल ेींसस चेंे ं तमेंवदमक वतकमत ूपजीपद ं चमतपवक व ि जीतमम उवदजीे तिवउ जीम कंजम व िपिसपदह ं तमचतमेमदजंजपवद व िजीम चमजपजपवदमतए ंददमगपदह ं बवचल व िजीम चतमेमदज वतकमत ूपजीपद ं चमतपवक व िविनत ूममो तिवउ जवकंलण्

18ण् ज्ीम चमजपजपवद पे ंबबवतकपदहसल ंससवूमक ंदक कपेचवेमक वण्ष् ि178 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपी के स्पष्टीकरण की पुनः समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2002-03 (सिविल) की कंडिका-4.1.4 कि आपत्ति पर श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण को जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा अस्वीकार प्रतिवेदित किया गया। श्री त्रिपाठी के विरूद्ध जाँचोपरान्त प्रथम दृष्टया आरोप यथा-रोकड़ पंजी का संधारण, अग्रिम पंजी का संधारण, अभिश्रव पंजी के रख-रखाव पर नियमानुकूल नियंत्रण नहीं रखने तथा बिहार कोषागार संहिता, भाग-1 के नियम 86 में विहित प्रावधानों के अनुसार कार्य नहीं करने का आरोप सही पाये के आलोक में जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 42 मु0 दिनांक 28.08.2008 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर समर्पित किया गया।

श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की वृहत जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरान्त प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध सभी आरोपों के जाँचोपरान्त उल्लेख किया गया कि-

''जहाँ तक गबन का सवाल है आरोपित पदाधिकारी का बयान विरोधाभासी है। एक तरफ वे कहते हैं कि गबन में अन्तगर््रस्त राशि वही है (प) जो नाजिर के सिंगल लॉक में थी और (पप) बिना किसी अधियाचना या पदाधिकारी की अनुशंसा के जिला पदाधिकारी द्वार चेक काटकर नाजिर को दी गई थी। दूसरी ओर उन्होंने यह प्रमाणित करने की कोशिश की है कि गबन उनके कार्यकाल में नहीं वरन्‌ उनके उाराधिकारी के कार्यकाल में हुआ है। यह विरोधाभासी इसलिए है कि जिला पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित चार लाख रूपये के चेक उनके पदस्थापन काल में ही नाजिर के नाम काटे गए हैं।'' आरोपित पदाधिकारी ने जिला पदाधिकारी सहित अन्य प्राधिकारों के दायित्वों और उनकी विफलताओं का विवरण दिया है, परन्तु अपने दायित्वों के निर्वहन करने के संबंध में बचाव में संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया है। उनका यह कहना कि नजारत उप समाहर्त्ता अभिश्रवों और नगद राशि का मिलान करके प्रभार नहीं लेता, प्रभार लेने की सामान्य प्रक्रिया से आच्छादित नहीं है। प्रभार लेने का अर्थ ही है, उस तिथि को रोकड़ पंजी और सभी सहायक पंजियों और समर्थक भाउचर्स आदि की जॉंच हो जाना।

नजारत उप समाहर्त्ता, नाजिर और कार्यालय प्रधान समाहर्त्ता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि समाहर्त्ता द्वारा नजारत का निरीक्षण किया जा रहा था तो जिला नजारत उप समाहर्त्ता का दायित्व था कि उस तिथि के पूर्व सभी पंजियों को अद्यतन कराते, बैंक खातों को अद्यतीकरण कर उसका रोकड़ पंजी से मिलान कराते और नाजिर के पास उपलब्ध भाउचर्स आदि का सत्यापन कराते। समाहर्त्ता द्वारा कैश डिटेल के लिए पदेपेज नहीं करना निरीक्षण की गुणवर्त्ता में कमी की ओर इंगित करता है तो नजारत उप समाहर्त्ता द्वारा निरीक्षण की तैयारियों की कमी को भी दर्शाता है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा सत्यापन के संदर्भ में अपने बचाव बयान में यह कहा गया है कि उन्होंने सामान्य रोकड़ पंजी पर 6 माह तक हस्ताक्षर नहीं किया था क्योंकि उनके निर्देशों का पालन नाजिर द्वारा नहीं किया जा रहा था। इससे यह भी प्रतीत होता है कि उन्हें कहीं-न-कहीं यह आशंका थी कि नाजिर के द्वारा लेखा संधारण में गड़बड़ियॉं की जा रही हैं। ऐसी आशंका की स्थिति में उनके द्वारा अपने प्रभार की नाजरत का निरीक्षण क्यों नहीं किया गया, जिसके आधार पर नाजिर द्वारा की जा रही गड़बड़ियॉं उजागर हो जाती। सिर्फ इस आधार पर कि वर्ष 1998 में कार्यालय अधीक्षक द्वारा नाजिर को पंचायत निर्वाचन नजारत के प्रभार से हटाने की अनुशंसा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोपित पदाधिकारी द्वारा नाजिर के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा नहीं किया जाना स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया। आरोपित पदाधिकारी ने अपने इस तर्क को मजबूत करने के लिए सारा दोष नाजिर का है, अंकेक्षण रिपोर्ट का निम्नांकित उद्धरण दिया गया :- ष्।दक ंसेव उंदपचनसंजपवद व ि चंहमे ंचचमंत जव ींअम इममद उंकम पद ंकअंदबम तमहपेजमत इल बेंीपमत छं्रपतष् परन्तु ये डंदपचनसंजपवदे पहले ही उजागर हो जाते अगर आरोपित पदाधिकारी द्वारा नजारत शाखा का विस्तृत निरीक्षण किया गया होता।

आरोपित पदाधिकारी के जिम्मे समाहरणालय की कई शाखाओं का प्रभार था यथा गोपनीय शाखा, शस्त्र शाखा, सामान्य शाखा, विधि शाखा, नीलाम पत्र पदाधिकारी एवं जिला परिवहन पदाधिकारी, परन्तु इतनी महत्वपूर्ण प्रशाखाओं के प्रभार में होने का यह अर्थ भी है कि वे जिला पदाधिकारी के नियमित सम्पर्क में थे। ऐसी स्थिति में यदि उनके अधीनस्थ कर्मी द्वारा वित्तीय अनियमितता बरती जा रही थी और वह उनके प्रभार की शाखा (नजारत) थी और अगर वास्तव में नाजिर उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था, तो एक टीम बनाकर नजारत की विस्तृत जॉंच का प्रस्ताव समाहर्त्ता के समक्ष रखा ही जा सकता था। अगर उनके द्वारा नजारत की जॉंच और नाजिर के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव सिर्फ इसलिए नहीं दिया गया कि समाहर्त्ता द्वारा नाजिर के विरुद्ध पूर्व में कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी, तो यह उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा पर भी प्रश्न उठाता है। विशेषकर लेखा संधारण के मामले में समुचित कार्रवाई नहीं किये जाने के आरोप पर आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान संतोषजनक नहीं पाया गया। उनके विरुद्ध जिला नजारत शाखा में लेखा संधारण संबंधी अपने दायित्वों यथा पंजियों का नियमित संधारण एवं नियमित भौतिक सत्यापन के निर्वहन में शिथिलता का आरोप बनता है।

यह निष्कर्ष स्थापित होता है कि आरोपित पदाधिकारी के जिम्मे समाहरणालय की कई महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार होने के चलते कार्य की अधिकता थी, नजारत शाखा में नाजिर द्वारा किए गए गबन में उनकी संलिप्तता प्रतीत नहीं होती परन्तु नजारत में लेखा संधारण संंबंधी उनके दायित्वों के निर्वहन में उनकी शिथिलता और विफलता प्रमाणित होती है।'' संचालन पदाधिकारी के उपर्युक्त जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि श्री त्रिपाठी के विरूद्ध जिला नजारत शाखा में लेखा संधारण संबंधी अपने दायित्वों एवं पंजियों का नियमित संधारण तथा नियमित भौतिक सत्यापन के निर्वहन में शिथिलता बरतने संबंधी आरोप प्रमाणित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्ष में यह भी प्रतिवेदित किया गया है कि ''आरोपित179 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 पदाधिकारी के जिम्मे समाहरणालय की कई महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार होने के चलते कार्य की अधिकता थी, नजारत शाखा में नाजिर द्वारा किए गए गबन में उनकी संलिप्तता प्रतीत नहीं होती परन्तु नजारत में लेखा संधारण संंबंधी उनके दायित्वों के निर्वहन में उनकी शिथिलता और विफलता प्रमाणित होती है।''

उल्लेखनीय है कि नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद के पद पर श्री अशोक कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल दिनांक 24.

12.1999 से 20.08.2002 तक एवं श्री अरविन्द कुमार झा का कार्यकाल दिनांक 21.08.2002 से 10.01.2005 तक था। जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय जाँच दल के जाँच प्रतिवेदन के अनुसार नाजिर द्वारा राशि का दुर्विनियोग अथवा गबन का मामला श्री त्रिपाठी के कार्यकाल का है। इस संबंध में श्री अरविन्द कुमार झा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन में जाँच पदाधिकारी द्वारा भी उल्लेख किया गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 07.01.2019 को पारित आदेश के आलोक में सम्यक्‌ समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद के विरूद्ध निर्गत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा अधिरोपित दंड को निरस्त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत इनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए (प) निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं (पप) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन जिला नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध पूर्व में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा अधिरोपित दंड को प्रतिस्थापित करते हुए निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (वर्ष 2001-02), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-11/2016-सा0प्र0-8738

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संकल्प

1 जुलाई 2019

माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 17550/2012 में दिनांक 04.04.2013 को पारित आदेश पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के ज्ञापांक 1230/रा0 दिनांक 02.11.2015 द्वारा निर्गत सकारण आदेश के आलोक में जिला पदाधिकारी, पटना के पत्रांक 957/भू-अर्जन दिनांक 18.04.2016 द्वारा श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 427/11, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बिहार, पटना सम्प्रति संयुक्त सचिव, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार, पटना के विरूद्ध परियोजना-220/132 K.V ग्रीड उप केन्द्र निर्माण हेतु मौजा-जुझारपुर, थाना नं0 128 L.A. Case No. 07/2008-09 में गलत तरीके से 80% मुआवजा भुगतान किये जाने से संबंधित आरोप प्रतिवेदित किया गया।

उक्त प्रतिवेदित आरोप पर विभागीय पत्रांक 7708 दिनांक 31.05.2016 द्वारा मो0 अंसारी से स्पष्टीकरण की मांग की गई, जिसके आलोक में उनके पत्रांक 16/गो0 दिनाक 17.12.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। इस बीच पुनः मो0 अंसारी के पत्रांक 17/गो0 दिनांक 18.09.2017 द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 17550/2012 में दिनांक 22.08.2017 को पारित आदेश के आलोक में आरोप से मुक्त किये जाने हेतु अपना स्पष्टीकरण/अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री अंसारी के स्पष्टीकरण/अभ्यावेदन पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 456 दिनांक 07.05.2019 द्वारा मंतव्य समर्पित किया गया, जिसमें श्री अंसारी के स्पष्टीकरण/अभ्यावेदन को स्वीकार योग्य नहीं बताया गया।

श्री अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण/अभ्यावेदन एवं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से प्राप्त मंतव्य पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ समीक्षा की गयी तथा समीक्षोपरान्त इनके विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की वृहत जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही में आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, पटना द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, पटना से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त करते हुए उक्त आषय की सूचना संचालन पदाधिकारी आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना तथा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को दिया जाय।180 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019 श्री अंसारी से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-7/2016-सा0प्र0-9464

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संकल्प

16 जुलाई 2019

श्री मुकेश कुमार मुकुल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1053/11, तत्कालीन प्रभारी पदाधिकारी, जिला-गोपनीय शाखा, औरंगाबाद सम्प्रति जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अररिया के विरूद्ध औरंगाबाद पदस्थापन अवधि में ''प्रेरणा-2016'' पत्रिका में लिखे गये लेख ''रूका हुआ संसद-जितने सूरज उतने सवेरे'' में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमुल कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के नेताओं के विरूद्ध आपत्तिजनक लेख लिखने एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1)(iii) एवं 9(2)(ख)(ii) के प्रतिकूल आचरण के लिए संचिका में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित किया गया।

विभागीय पत्रांक 1858 दिनांक 11.02.2019 द्वारा उक्त आरोप के लिए श्री मुकुल से स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री मुकुल द्वारा दिनांक 07.03.2019 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। अपने स्पष्टीकरण में श्री मुकुल ने जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के आदेश ज्ञापांक-25/मुख्य (गो), दिनांक 20.07.2016 द्वारा अपर समाहर्त्ता, औरंगाबाद की अध्यक्षता में गठित टीम के जाँच प्रतिवेदन, जिसमें उनके द्वारा लिखे गये लेख को बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1)(iii) एवं नियमावली, के नियम-9(2)(ख)(ii) के प्रतिकूल नहीं पाया गया है, का उल्लेख करते हुए आरोपों को अस्वीकार किया गया है। श्री मुकुल का कहना है कि उनके द्वारा लिखे गये लेख के अंतिम पाद पृष्ठ पर वर्णित वाक्यांष..' यह उनके व्यक्तिगत विचार है, इससे सरकार, किसी विशेष राजनीतिक पार्टी व दल-विशेष के सम्बद्धता से कोई लेना देना नहीं है' अंकित कर राजनीतिक असम्बद्धता के बारे में पूर्व में ही लिख दिया गया था। परन्तु खेदजनक स्थिति है कि इस निमित गठित स्मारिका प्रकाशन उपसमिति द्वारा लेख प्रकाशन हेतु दिये गये प्रूफरिडिंग संबंधी पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पाने के कारण ही यह अंश भी उक्त स्मारिका में प्रकाशित नहीं हो पाने से सारगर्भित अर्थ नहीं निकल पाया एवं उनको प्रतिकूल परिस्थिति का सामना करना पड़ा।

श्री मुकुल के विरूद्ध आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोप, स्पष्टीकरण एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा की गयी। बिहार सरकारी सेवक आचार के संदर्भ में बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 मे ंविस्तृत प्रावधान किये गये हैं। उक्त नियमावली की कंडिका-9(2) में सरकारी सेवकों द्वारा लिखित लेखों के प्रकाशन के संदर्भ में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि कोई सरकारी सेवक, सरकार की या विहित प्र्र्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना, अथवा अपने कर्त्तव्यों के वास्तविक पालन के अलावा-

(क) स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति के जरिये या किसी प्रकाशक के जरिये कोई पुस्तक प्रकाशित न करेगा या किसी पुस्तक या रचनाओं के संकलन में रचना न देगा, या

(ख) अपने नाम से या गुमनाम से अथवा किसी अन्य व्यक्ति के नाम से किसी रेडियो प्रसारण में भाग लेगा या किसी समाचार पत्र या पत्र-पत्रिका को रचना न भेजेगा या पत्र न लिखेगा, परन्तु ऐसी मंजूरी अपेक्षित न होगी, यदि- (i) ऐसा प्रकाशन किसी प्रकाशक के जरिये किया जाए, और विशुद्ध साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक ढंग का हो, या

(ii) ऐसी रचना, प्रसारण या लेखन विशुद्ध साहित्यिक या कलात्मक या वैज्ञानिक ढंग का हो। उक्त के आलोक में समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री मुकुल का लेख विशुद्ध साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक ढंग का नहीं है, बल्कि पूर्णतः राजनैतिक एवं आपत्तिजनक लेख है। उक्त वर्णित लेख में 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, 'तृणमूल कांग्रेस' एवं 'आप' के नेताओं के संदर्भ में वर्णित आपत्तिजनक टिप्पणियां सरकारी सेवक आचरण के प्रतिकूल है और श्री मुकुल का उक्त —त्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1)(iii) एवं नियमावली, के नियम-9(2)(ख)(ii) के प्रतिकूल है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक्‌ समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मुकुल को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत(प) निन्दन एवं (पप) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मुकेश कुमार मुकुल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1053/11, तत्कालीन प्रभारी पदाधिकारी, जिला-गोपनीय शाखा, औरंगाबाद सम्प्रति जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अररिया को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

181 बिहार गजट, 4 सितम्बर 2019

(i) निन्दन, (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-18/2018-सा0प्र0-9104

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संकल्प

9 जुलाई 2019

मो0 जफर रकीब (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 528/11, तत्कालीन अपर समार्हाा, कटिहार सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध अप्रा—तिक यौनाचार करने संबंधी आरोप के लिए नगर थाना कटिहार में कांड संख्या 318/2018 दिनांक 25.08.2018 दर्ज है।

उक्त आरोप के लिए मो0 रकीब के विरूद्ध आरोप-पत्र गठित कर विभागीय पत्रांक 14985 दिनांक 19.11.2018 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में मो0 रकीब द्वारा दिनांक 03.12.2018 को समर्पित स्पष्टीकरण के आलोक में जिला पदाधिकारी, कटिहार से प्राप्त मंतव्य में इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार प्रतिवेदित किया गया।

मो0 रकीब के विरूद्ध गठित आरोप, इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, कटिहार से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत मोे0 रकीब के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप सही पाये जाने के आलोक में इनके विरूद्ध अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के प्रावधानों के तहत्‌ आरोपों की बृहद्‌ जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, कटिहार द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, कटिहार से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त करते हुए उक्त आशय की सूचना संचालन पदाधिकारी आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ तथा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को दिया जाय।

मो0 रकीब से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराजेन्द्र राम, अपर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 24—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 September 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-09-04.36/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-09-04.36.