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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 11 September 2019

Published 11 September 2019

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2019-09-11.37
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार }kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-6 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA ---

पूरक

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पूरक-क 7-12बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 2 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

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अधिसूचना

4 जुलाई 2019

सं0 अ॰स॰क॰-01 (छात्रावास)-119/2016/1512--भारत-संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल ''छात्रावास प्रबंधक, अल्पसंख्यक कल्याण संवर्ग नियमावली-'2018' में संशोधन करने हेतु निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।-(i) यह नियमावली ''छात्रावास प्रबंधक, अल्पसंख्यक कल्याण संवर्ग(संशोधन) नियमावली, 2019'' कही जा सकेगी।

(ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा।

(iii) यह तुरत प्रवृत होगा।

2. छात्रावास प्रबंधक, अल्पसंख्यक कल्याण संवर्ग नियमावली, 2018 के नियम-02 का खण्ड (iv) का प्रतिस्थापन।- उक्त नियमावली के नियम-02 का खण्ड (iv) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा :-

(iv) "आयोग" से अभिप्रेत है "बिहार कर्मचारी चयन आयोग"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

मो॰ एस॰ आई॰ फैसल, विशेष सचिव-सह-निदेशक।

The 4th July 2019

No. M.W.D.-01(Hostel)-119/2016/1512--In exercise of the powers conferred by proviso to Article-309 of the Constitution of India, the Governor of Bihar is pleased to make the following rules for amendment of the "Hostel Manager, Minority Welfare Cadre Rules, 2018" :- 1. Short title, extent and commencement - (i) These rules may be called the "Hostel Manager, Minority Welfare Cadre (Amendment) Rules, 2019."

(ii) It shall extend to whole of the state of Bihar.

(iii) It shall come into force at once.

2. Substitution of clause(iv) of Rule 02 of the "Hostel Manager, Minority Welfare Cadre Rules, 2018". Clause(iv) of Rule 02 of the said Rules shall be substituted by the following :-

(iv) "Commission" means "Bihar Staff Selection Commission".

By the order of the Governor of Bihar,

Md. S.I. Faisal, Special Secretary-cum-Director.

3 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019

गृह विभाग

(आरक्षी शाखा)

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अधिसूचना

7 अगस्त 2019

सं0 2/एम2-20-08/12गृ0आ0/6464--श्री अषोक कुमार खरे, सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक, विषेष शाखा, पटना, जिनकी पुनर्नियुक्ति अवधि विभागीय अधिसूचना सं0-7521, दिनांक 28.08.2018 के द्वारा दिनांक 15.08.2019 (67 वर्ष की आयु सीमा) तक विस्तारित की गयी थी, को मंत्रिपरिषद्‌ की स्वीकृति के आलोक में निम्न शर्त्तो के अधीन अगले तीन वर्षो के लिए अर्थात्‌ दिनांक 15.08.2022 (70 वर्ष की आयु सीमा) तक पुनर्नियुक्ति अवधि को विस्तारित की जाती है :-

(i) श्री खरे को उक्त पुनर्नियुक्ति की अवधि में मासिक मानदेय के रूप में, उन्हें सेवानिवृति के समय प्राप्त होने वाले अंतिम वेतनसेवानिवृति के समय अंतिम वेतन पर प्राप्त महँगाई भत्ता के योगफल की राषि में से पेंषन की राषि सेवानिवृति के समय पेंषन की राषि पर प्राप्त महँगाई राहत की राषि को घटाने के बाद जो राषि शेष होगी वही राषि प्राप्त होगी।

(ii) श्री खरे को देय पेंषन पर महँगाई राहत का भुगतान होता रहेगा तथा महँगाई राहत में जब-जब वृद्धि होगी पेंषन पर महँगाई राहत की राषि बढ़ोतरी होती जायेगी।

(iii) श्री खरे को विस्तारित पुनर्नियुक्ति में पूर्व की भाँति मकान भत्ता, परिवहन भत्ता तथा चिकित्सा भत्ता अनुमान्य होगा।

(iv) श्री खरे पूर्व की भॉंति पुलिस उपाधीक्षक, विषेष शाखा, प्रभारी आसूचना एवं अप्रवासन (पटना एयरपोर्ट) पटना के पद पर बने रहेंगे ।

(v) श्री खरे का मासिक मानदेय आदि का भुगतान विषेष शाखा, बिहार, पटना से पूर्ववत्‌ होता रहेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से,

रंजन कुमार सिन्हा, अपर सचिव।

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परिवहन विभाग

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अधिसूचना

1 सितम्बर 2019

सं0 02/शमन-07(A)/2015, परि॰-6497--अपराध एवं यातायात नियंत्रण हेतु मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 200 के तहत पटना जिलान्तर्गत यातायात पुलिस के पदाधिकारियों को दिनांक 23.04.2019 के प्रभाव से अगले 6 (छः) माह के लिए तथा जिलों में पदस्थापित थानाध्यक्ष तथा उनसे वरीय पदाधिकारियों को दिनांक 27.04.2019 के प्रभाव से बारह माह के लिये क्रमशः विभागीय अधिसूचना संख्या-2906, दिनांक 26.04.2019 एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-2907, दिनांक 26.04.2019 द्वारा मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा- 177, 178, 179, 180, 181, 182, 183, 184, 185, 186, 187, 188, 189, एवं 190 के अन्तर्गत विनिर्दिष्ट दण्डनीय अपराधों के लिए शमन की शक्ति प्रदान की गई थी ।

मोटरयान (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा शमन की उपर्युक्त धाराओं में कतिपय संशोधनोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-2906, दिनांक 26.04.2019 एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-2907, दिनांक 26.04.2019 में विनिर्दिष्ट धाराओं को मोटरयान (संशोधन) अधिनियम, 2019 की नवीन धाराओं यथा- 177, 177A, 178(3)(b), 179, 180, 181, 182(1), 183(1),बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 4 184, 185, 186, 187, 188, 189, 190(2), 194B, 194C, 194D, 194E, 194F, 199A एवं 201 से प्रतिस्थापित किया जाता है। शमन की राषि उक्त धाराओं मेें विहित राशि से कम नहीं होगी।

2. विभागीय अधिसूचना संख्या-2906, दिनांक 26.04.2019 एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-2907 दिनांक 26.04.2019 को इस हद तक संशोधित समझा जाय ।

3. यह अधिसूचना दिनांक 01.09.2019 की तिथि से प्रभावी होगा।

बिहार के राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, सचिव।

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(cid:356)ामीण िवकास िवभाग

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अिधसूचना

19 अगस्त 2019

सं0 (cid:356)ा0कव0-14 (कतर(cid:352)त) मु0-02/2018/437261--(cid:373)ी र्मो0 आकसफ, तत्ािलीन (cid:356)ामीण कवािस पदाकधािरी-सह-(cid:366)भारी (cid:366)ख(cid:503) कवािस पदाकधािरी, सरै या, मुज(cid:608)रपुर ेि कव(cid:349)(cid:544) ािय(cid:330) ेि (cid:366)कत लापरवाही, ति(cid:330)व्यहीनता, वरीय पदाकधािरी ेि आदे ीि अवहेलना, अनाकधृि त (cid:349)प से मुख्यालय से अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहने ेि आर्रोपं पर कजला पदाकधािरी, मुज(cid:608)रपुर ेि प(cid:361)ांि-466 कदनांि 02.02.2018 (cid:554)ारा आर्रोप (cid:366)प(cid:361) 'ि' गकठत रि कवभाग र्ोि उपलब्ध रिाया गया।

आर्रोप प(cid:361) ेि आर्लोि म(cid:336) कवभागीय प(cid:361)ांि-357559 कदनांि 05.03.2018 ेि (cid:554)ारा (cid:373)ी र्मो0 आकसफ से स्पष्टीकरण ीि मँग ीि गई एवं प्राप्त स्पष्टीकरण पर कवभागीय प(cid:361)ांि-371895 कदनांि- 29.05.2018 ेि (cid:554)ारा कजला पदाकधािरी, मुज(cid:608)रपुर से मंतव्य ीि मँग ीि गयी। कजला पदाकधािरी, मुज(cid:608)रपुर से प्राप्त मंतव्य म(cid:336) (cid:373)ी र्मो0 आकसफ ेि स्पष्टीकरण र्ोि असंर्तोषजनि र्होने ाि मंतव्य कदया गया है। उक्त संदभ(cid:330) म(cid:336) (cid:373)ी र्मो0 आकसफ ेि कव(cid:349)(cid:544) (cid:366)कतवेकदत आर्रोप, प्राप्त स्पष्टीकरण एवं कजला पदाकधािरी, मुज(cid:608)रपुर ेि मंतव्य ीि समी(cid:407)ा ीि गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि कदनांि 18.12.2017 से 22.12.2017 ति अवाि म(cid:336) जाने से पूव(cid:330) (cid:373)ी र्मो0 आकसफ (cid:554)ारा अवाि ीि स्वीकृति प्राप्त नही ं ीि गयी। अतएव सम्यक्‌ विचारोपरान्त कबहार सरािरी सेवि (वग(cid:334)रिण, कनयं(cid:361)ण एवं अपील) कनयमावली, 2005 ेि सुसंगत (cid:366)ावधानं ेि तहत (cid:373)ी र्मो0 आकसफ र्ोि भविष्य में सचेष्ट रहने ीि चेतावनी ेि साथ निम्नांकित दण्ड अकधर्रोकपत कयिा जाता है:-

1) ''वष(cid:330) 2017-18 ेि कलए निन्दन ीि सजा।'' (cid:373)ी र्मो0 आकसफ र्ोि अकधर्रोकपत उक्त ा(cid:304)(cid:721) र्ोि इनेि चा(cid:303)र(cid:361)ी म(cid:336) दज(cid:330) कयिा जाय। उक्त आदे पर स(cid:407)म (cid:366)ाकधािर ाि अनुर्मोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राधा िकशोर झा, अपर सकचव।

------- मुख्य अभियंता का कार्यालय श्सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग ,सिवान ------- कार्यालय आदेश 18 जून 2019

सं0 1स्था0अनु0-12-108/2016-23--स्थापना उप समाहर्ता गोपालगंज.के पत्रांक 45 दिनांक 16.01.2019 द्वारा जिला स्तर पर गठित अनुकंपा समिति गोपालगंज की दिनांक 12.01.2019 की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में श्री देवतानन्द यादव, पिता- स्व0 शंकर चौधरी, भूतपूर्व अनुसेवक, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज की अनुकंपा के आधार पर वेतनमान लेभल-I ग्रेड पें-1800/- रूपये एवं समय-समय पर सरकार द्वारा स्वीकृत भत्ते सहित कार्यालय परिचारी के पद पर नियुक्त किया जाता है। उन्हें आदेश दिया जाता है कि वे अपना योगदान, कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज के कार्यालय में दिनांक 12.07.2019 तक निश्चित रूप से दें दें अन्यथा उनकी नियुक्ति रद्‌द समझी जायेगी। यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थाई है।

2. अगर इनके नियुक्ति के पूर्व से नियुक्ति के लिए संबंधित पदाधिकारी के अधीन कोई सूची तैयार की गई हो तो उनकी वरीयता उक्त सूची में अंकित व्यक्तियों के बाद होगी।

3. स्व0 शंकर चौधरी के आश्रित परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण का दायित्व श्री देवतानन्द यादव पर होगी। उत्तरदायित्व का निर्वाह पूरी तत्परता के साथ नहीं करने पर गंभीर कदाचार माना जायेगा। इसके लिए उनके विरूद्ध5 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 नियमानुसार कार्रवाई भी की जायेगी। इसके अलावा दायित्व की अवहेलना की संपुष्टि होने पर उनकी परिलब्धियों को एक अंश सरकारी सेवक के आश्रित सदस्यों को देने का आदेश सरकार दे सकती हे।

4. नियुक्त पद पर योगदान करते समय उन्हें जिला गोपालगंज के असैनिक शैल्य चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र हर हालत में प्रस्तुत करना होगा।

5. अगर श्री देवतानन्द यादव की नियुक्ति आरक्षित कोटा से रोस्टर पर हुई हो तो उक्त आरक्षित कोटा के पद को अग्रणित कर दिया जायेगा।

6. योगदान करने हेतु किसी प्रकार का यात्रा भत्ता किसी भी परिस्थिति में देय नहीं होगी। 7. किसी तरह की गलत सूचना अथवा धोखाधडी के आधार पर नियुक्ति प्राप्त कर लेने पर उन्हें सेवा से विमुक्त कर दिया जायेगा तथा समुचित कार्रवाई नियमानुसार की जायेगी।

8 अनुकंपा के आधार पर किसी पद पर नियुक्त होने पर उन्हें अनुकम्पा का दोबारा लाभ लेते हुए प्रोन्नति अथवा संवर्ग परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।

9. नियुक्त पद पर योगदान करते समय उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता का मूल प्रमाण पत्र एवं वास्तविक जन्म तिथि से संबंधित प्रमाण पत्र मूल में संबंधित पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। जिसकी जॉच कर संतुष्ट होकर उनके द्वारा इनका योगदान स्वीकृत किया जायेगा तथा इसकी सूचना तुरंत अधोहस्ताक्षरी को दी जायेगी।

10. योगदान लेने के साथ ही संबंधित पदाधिकारी श्री देवतानन्द यादव से भरण पोषण पत्र एवं विवाह में तिलक दहेज नहीं लेने देने का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेंगे।

11. उप सचिव , वित्त विभाग के पत्रसंख्या 1964 दिनांक 31.8.2005 के अनुसार दिनांक 01.09.2005 एवं उसके बाद नियुक्त राज्य कर्मियों के लिए अंशदायी पेंशन योजना लागू होगा।

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, मुख्य अभियंता।

------- सं॰ 16/एम.1-21/2019/1165 (आ0चि0) स्वास्थ्य विभाग -----

प्रेषक,

रवीन्द्र यादव, सरकार क अवर सचिव।

सेवामें,

महालेखाकार, बिहार, वीरचन्द पटेल पथ, पटना। प्रभारी पदाधिकारी, विा (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार, पटना।

पटना, दिनांक 2 सितम्बर 2019 विषय :- स्व॰ डा॰ शंकर माँझी, सेवानिवृत होमियोपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी, जिला संयुक्त औषधालय, सारण, छपरा की पत्नी-श्रीमती माधुरी देवी को सेवान्त लाभ एवं पारिवारिक पेंशन का लाभ देने क सम्बन्ध में।

प्रसंग :- विभागीय स्वी—त्यादेश संख्या-1622(आ॰चि॰), दिनांक 20.12.2018. महाशय,

निदेशानुसार उपर्युक्त विषय क सम्बन्ध में कहना है कि विभागीय स्वी—त्यादेश संख्या-1622(आ॰चि॰), दिनांक 20.

12.2018 द्वारा बिहार आयुष चिकित्सा सेवा संवर्ग क चिकित्सा पदाधिकारी जो 62 वर्ष की आयु में 28.01.2011 से 22.12.2011 क बीच वार्धक्य सेवानिवृत हो चुक है, उन्हें 65 वर्ष की आयु तक सेवा में मानते हुए तदनुसार वेतन एवं अन्य सेवान्त लाभ का भुगतान SLP(Civil)CC संख्या-24758-24765/2016 में पारित होनेवाले आदेश से प्रभावित होने एवं यथावश्यक भुगतान की गई राशि सम्बन्धित चिकित्सा पदाधिकारी से वसूलनीय होने की र्शा पर स्वी—ति प्रदान की गयी है। स्व॰ डा॰ शंकर माँझी, होमियोपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी, जिला संयुक्त औषधालय, सारण, छपरा का सेवानिवृति तिथि 31.08.2011 है। स्व॰ डा॰ माँझी का देहान्त दिनांक 10.05.2012 को हुई (छायाप्रति संलग्न)।

उपरोक्त आलोक में श्रीमती माधुरी देवी, पत्नी-स्व॰डा॰ शंकर माँझी, सेवानिवृत होमियोपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी, जिला संयुक्त औषधालय, सारण, छपरा द्वारा सेवान्त लाभ एवं पारिवारिक पेंशन का लाभ प्रदान करने हेतु अनुरोध किया गया है जिसक आलोक में विधि विभाग द्वारा परामर्श प्राप्त किया गया जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत है :-

" …….In view of the discussion made above the undersigned is of the legal view that payment of retiral benefit and family pension may be made to Smt. Madhuri Devi subject to result of the aforesaid SLP (Civil) CC no.-24758-24765/2016 on submission of an affidavit to the aforesaid effect."

अतः विधि विभाग क परामर्श क आलोक में स्व॰ डा॰ शंकर माँझी, सेवानिवृत होमियोपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी, जिला संयुक्त औषधालय, सारण, छपरा को 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की आयु तक सेवा में मानते हुए तदनुसार वेतन एवंबिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 6 अन्य सेवान्त लाभ का भुगतान SLP(Civil)CC संख्या-24758-24765/2016 में पारित होने वाले आदेश से प्रभावित होने एवं यथावश्यक भुगतान की गई राशि उनकी पत्नी-श्रीमती माधुरी देवी से वसूलनीय होने की र्शा पर स्वी—ति प्रदान की जाती है।

एतद्‌ संबंधी भुगतान करने हेतु प्राधिकार पत्र/वेतन पर्ची (यथा स्थिति अन्तर राशि का समायोजनोपरान्त) निर्गत करने क पूर्व स्व॰ डा॰ शंकर माँझी, सेवानिवृत होमियोपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी, जिला संयुक्त औषधालय, सारण, छपरा की पत्नी-श्रीमती माधुरी देवी से राशि की वसूली का लिखित शपथनामा (Undertaking) संलग्न विहित प्रपत्र में लेना सुनिश्चित करेंगे एवं प्रतिलिपि विभाग को देगें।

प्रस्ताव में माननीय मंत्री, स्वास्थ्य का अनुमोदन प्राप्त है।

विश्वासभाजन, (ह॰) अस्पष्ट, अवर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 25—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in7 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी }kjk प्रकाशित

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सं0 1/एम02-60-02/2017 गृ0आ0--1724 x`g foHkkx (आरक्षी शाखा) ------ संकल्प 21 फरवरी 2019

सारण जिला के सबलपुर दियारा क्षेत्र में दिनांक 14.01.2017 को हुई नाव दुर्घटना के संबंध में राज्य सरकार द्वारा गठित द्विसदस्यीय जॉच समिति द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन के आधार पर श्री पंकज कुमार राज, भा0पु0से0 (2006), तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के विरूद्ध सबलपुर दियारा क्षेत्र में आयोजित पतंग उत्सव, 2017 के कार्यक्रम में कोई रूची नही लेने, माननीय मुख्य मंत्री, बिहार सहित अन्य माननीय मंत्रियों के प्रस्तावित/संभावित कार्यक्रम के बावजूद आयोजन स्थल का निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण नही करने, जिला स्तर पर दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी तथा सिपाहियों की प्रतिनियुक्ति हेतु जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर से संयुक्त आदेश निर्गत करने हेतु आवश्यक कदम नही उठाने, घटनास्थल पर घटना के काफी देर बाद पहुँचने आदि के कारण उनकी प्रशासनिक विफलता, कर्तव्य के निर्वहन के प्रति घोर लापरवाही, जिम्मेवारी से भागने की प्रवृति, दूरदर्शिता का अभाव, हठधर्मिता एवं संवेदनहीनता तथा अनुशासनहीनता जैसे आरोपों के लिए अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 8 के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के निमित्त विभागीय ज्ञापन सं0-2503, दिनांक 24.03.2017 द्वारा आर्टिकल ऑफ चार्जेज, स्टेटमेंट ऑफ इम्प्यूटेशन्स ऑफ मिसविहेवियर एण्ड मिसकण्डक्ट, साक्ष्य सूची सहित निर्गत करते हुए श्री राज से बचाव-बयान समर्पित करने हेतु अनुरोध किया गया। 2. और चूँकि श्री राज का बचाव-बयान पत्रांक-1/कैम्प/पुलिस मुख्यालय, दिनांक 11.04.2017 पुलिस मुख्यालय के पत्रांक-3102/एक्स0पी0, दिनांक 25.04.2017 के माध्यम से विभाग को प्राप्त हुआ। श्री राज द्वारा समर्पित बचाव बयान की समीक्षोपरांत उनका बचाव-बयान असंतोषप्रद होने के कारण इसे अस्वीकृत करते हुए विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु अखिल भारतीय सेवाएॅं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8(2) के तहत विभागीय संकल्प सं0 5911, दिनांक 20.07.2017 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. और चूँकि विभागीय जांच आयुक्त द्वारा मामले को आदेश ज्ञापांक 381, दिनांक 10.08.017 द्वारा श्री के0 के0 पाठक, अपर विभागीय जांच आयुक्त-सह-अपर सदस्य, राजस्व पर्षद को हस्तांतरित कर दिया गया। अपर विभागीय जांच आयुक्त द्वारा पत्रांक 483, दिनांक 06.10.2017 के माध्यम से जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्री राज के विरूद्ध आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। अपर विभागीय जांच आयुक्त द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत उनके मंतव्य से असहमत होते हुए अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 9(2) के तहत जांच प्रतिवेदन की प्रति असहमति के बिन्दु के साथ विभागीय पत्रांक 9822, दिनांक 15.12.2017 द्वारा आरोपित पदाधिकारी को उपलब्ध कराते हुए 15 दिनों के अंदर लिखित अभिकथन समर्पित करने का अनुरोध किया गया।

4. और चूँकि श्री राज का लिखित अभिकथन पुलिस मुख्यालय के पत्र 118/348076 एक्स0पी0, दिनांक 12.01.2018 द्वारा विभाग को प्राप्त हुआ। आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोपों, जांच पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन एवं उसपर असहमति के बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी के द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन के सम्यक समीक्षोपरांत आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया तथा इसपर संघ लोक सेवा आयोग का परामर्श हेतु विभागीय पत्रांक 2437, दिनांक 21.03.2018 द्वारा आयोग से अपेक्षा की गयी।

5. और चूँकि उक्त विभागीय पत्रांक के आलोक में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा मामले में प्रेक्षण एवं निष्कर्ष संसूचित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में उन्हें ''परिनिन्दा'' का दण्ड अधिरोपित करना न्यायसंगत होगा और तद्‌नुसार यही आयोग का परामर्श है।बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 8 6. और चूँकि अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 9(5)(b) के तहत विभागीय पत्रांक-521 दिनांक 17.01.2019 द्वारा आयोग के परामर्श की प्रति आरोपित पदाधिकारी को लिखित अभिकथन समर्पित करने हेतु उपलब्ध करायी गयी।

7. और चूँकि उक्त पत्र के आलोक में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपना लिखित अभिकथन ज्ञापांक 277/प्रशि0, दिनांक 28.01.2019 के माध्यम से समर्पित किया गया। आयोग द्वारा संसूचित परामर्श पर आरोपित पदाधिकारी का लिखित अभिकथन समीक्षोपरांत स्वीकार योग्य नहीं होने के कारण इसे अस्वीकार करने एवं उनकेे विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आयोग द्वारा संसूचित परामर्श के आलोक में ''परिनिन्दा (Censure)'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

8. अतः श्री पंकज कुमार राज, भा0पु0से0 (2006), तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, सारण सम्प्रति पुलिस महानिरीक्षक के सहायक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना के विरूद्ध विभागीय ज्ञापन सं0 2503, दिनांक 24.03.2017 एवं तद्‌संबंधी विभागीय संकल्प 5911, दिनांक 20.07.2017 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही सं0 32/17 में आयोग के परामर्श के आलोक में ''परिनिन्दा (Censure)'' का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

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सं0 1/एम02-60-05/2018 गृ0आ0--5138

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संकल्प

21 जून 2019

श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007), तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विशेष निगरानी ईकाई, बिहार, पटना द्वारा संज्ञेय अपराध के लिए धारा 13(2) सह पठित 13(1)(e) भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत केस दर्ज करने एवं मामला अनुसंधानान्तर्गत होने के फलस्वरूप राज्य सरकार द्वारा विचारोपरांत अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3 (3) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प सं0 3290, दिनांक 17.04.2018 द्वारा तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया।

2. अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के अनुलग्नक II में विहित प्रक्रिया के आलोक में श्री कुमार के निलंबन के संबंध में अपेक्षित प्रतिवेदन गृह मंत्रालय, भारत सरकार को भेजते हुए निलंबन की सम्पुष्टि हेतु अनुरोध किया। साथ ही, मामला अभी भी अनुसंधानान्तर्गत होने एवं श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की संभावना को दृष्टिपथ में रखते हुए श्री कुमार को 30 दिनाें के बाद की अवधि में भी उन्हें निलंबित रखने हेतु निलबंन की सम्पुष्टि हेतु भारत सरकार से अनुरोध किया गया। इस संबंध में गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उक्त नियमावली के नियम 3 (3), जिसके अंतर्गत श्री कुमार को निलंबित किया गया है, के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया है कि उक्त नियम के अनुसार श्री कुमार के निलंबन की सम्पुष्टि भारत सरकार से आवश्यक नहीं है।

3. अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(8)(a) के अद्यतन प्रावधान के अनुसार निलम्बन का विस्तारण के पूर्व 60 दिनाें तक वैध रहता है और इसका विस्तारण एक बार में अधिकतम 120 दिनों के लिए किया जाता है।

4. उक्त प्रावधान एवं भारत सरकार के प्रासंगिक पत्र के आलोक में श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007) के निलंबन की अवधि साठ (60) दिनों तक अर्थात दिनांक 17.04.2018 से 15.06.2018 तक वैध है। श्री कुमार को जिस उप नियम के तहत निलंबित किया गया है, उसके अंतर्गत आरोप से संबंधित कार्यवाही की समाप्ति तक उन्हें निलंबित रखा जा सकता है। 5. श्री विवेक कुमार के विरूद्ध अप्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में विषेष निगरानी ईकाई, बिहार, पटना द्वारा कांड दर्ज करते हुए ईकाई द्वारा सूचित किया गया था कि कांड वर्तमान में अनुसंधानान्तर्गत है। अनुसंधान के दौरान कुछ और जानकारियॉ प्रकट हुयी हैं, जिसके संबंध में ईकाई द्वारा विस्तृत सूचना/कागजात संकलन की कार्रवाई की जा रही है। मामला अभी भी अनुसंधानान्तर्गत है और जांच पूरी होने में अभी और समय लगने की संभावना है। ऐसी स्थिति में श्री कुमार के निलंबन अवधि के विस्तारण के संबंध में दिनांक 04.06.2018 को निलंबन समीक्षा समिति द्वारा विचार किया गया तथा विचारोपरांत समिति द्वारा श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007) के निलंबन की अवधि दिनांक 15.06.2018 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 13.10.2018 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी, जिसे अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।

6. अतः अखिल भारतीय सेवाएॅं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के संशोधित प्रावधानों के अनुरूप निलम्बन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007), के निलम्बन अवधि को दिनांक 15.06.2018 के आगे 120 दिनों अर्थात्‌ दिनांक 13.10.2018 तक विस्तारित की जाती है।

7. श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007) को निलंबन अवधि में नियमानुसार निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।9 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019

सं0 1/एम02-60-30/2018 गृ0आ0--3071

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संकल्प

10 अप्रैल 2019

श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003), तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक-सह-उप महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना के विरूद्ध कर्तव्य के प्रति लापरवाही, वरीय पदाधिकारी के आदेशोल्लंघन, स्वेच्छाचारिता, स्थापित नियमों एवं प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं करने, वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार का सम्पोषण एवं संवर्द्धन, वरीय पुलिस पदाधिकारी की गरिमा के विरूद्ध कार्य करने एवं अदूरदर्शिता जैसे गंभीर आरोपों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(1)(a) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प 8309, दिनांक 19.09.2018 द्वारा उन्हें तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया। श्री संजीव के विरूद्ध भ्रष्टाचार एवं संदिग्ध आचरण से संबंधित प्रकरणों में उनकी भूमिका की जॉच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से कराने एवं अग्निशाम मुख्यालय में लेखा कार्यों की गड़बड़ी की संभावना को दृष्टिपथ में रखते हुए इसके विशेष अंकेक्षण महालेखाकार, बिहार, पटना से कराने का भी निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। साथ ही, उक्त गंभीर आरोपों के लिए आरोप पत्र विभागीय ज्ञापन 8310, दिनांक 19.09.2018 द्वारा निर्गत किया गया।

2. और चूँकि श्री संजीव के विरूद्ध विभिन्न प्रकरणों से संबंधित मामले की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में जाँच प्रक्रियाधीन रहने तथा अग्निशाम मुख्यालय में लेखा कार्यों की गड़बड़ी की संभावना को दृष्टिपथ में रखते हुए इसके विशेष अंकेक्षण महालेखाकार, बिहार, पटना से कराकर विस्तृत प्रतिवेदन मंतव्य के साथ महानिदेषक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना से प्रतीक्ष्य होने के मद्‌देनजर श्री संजीव के निलंबन के 60 दिनों की आरंभिक अवधि के बाद निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में निलंबन अवधि विभागीय संकल्प सं0 9628, दिनांक 15.11. 2018 एवं संकल्प सं0 2502, दिनांक 15.03.2019 द्वारा क्रमशः 120 दिन एवं 180 दिनों के लिए विस्तारित की गयी है। श्री संजीव के निलंबन की विस्तारित अवधि 13.09.2019 तक है।

3. और चूँकि श्री संजीव के निलंबन अवधि छः माह से अधिक हो गयी है। श्री संजीव के विरूद्ध कतिपय आरोपों के लिए अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 8 के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित है। श्री संजीव के विरूद्ध निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में जाँच की कार्रवाई चल रही है एवं उनके पूर्व के कार्यालय अग्निशाम मुख्यालय में लेखा कार्यों की गड़बड़ी की संभावना के मद्‌देनजर विशेष अंकेक्षण की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है, जिसमें समय लगने की संभावना है। वर्तमान में भा0पु0से0 के राज्य संवर्ग में रिक्तियों एवं चुनाव प्रेक्षक के रूप में नामांकन के फलस्वरूप पदाधिकारियों की भारी कमी है।

4. और चूँकि उक्त तथ्य को दृष्टिपथ में रखते हुए दिनांक 05.04.2019 को आहूत निलंबन समीक्षा समिति की बैठक में श्री संजीव के निलंबन के औचित्य पर विचार किया गया। समिति द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री रत्नमणि संजीव को निलंबन से मुक्त करने की अनुषंसा की गयी।

5. और चूँकि निलंबन समीक्षा समिति की अनुषंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएॅं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3 (7)(C) में प्रदत शक्त्यिों का प्रयोग करते हुए श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003) को निलंबन से मुक्त करने एवं उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का निर्णय लिया गया है। 6. अतः श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है तथा पुलिस मुख्यालय में योगदान हेतु निदेशित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------ सं0 1/एम02-60-30/2018 गृ0आ0--2502 ----- संकल्प 15 मार्च 2019 श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003), तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक-सह-उप महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना के विरूद्ध कर्तव्य के प्रति लापरवाही, वरीय पदाधिकारी के आदेशोल्लंघन, स्वेच्छाचारिता, स्थापित नियमों एवं प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं करने, वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार का सम्पोषण एवं संवर्द्धन, वरीय पुलिस पदाधिकारी की गरिमा के विरूद्ध कार्य करने एवं अदूरदर्शिता जैसे गंभीर आरोपों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(1)(a) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प 8309, दिनांक 19.09.2018 द्वारा श्री संजीव को तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया। साथ ही, उक्त गंभीर आरोपों के लिए आरोप पत्र विभागीय ज्ञापन 8310, दिनांक 19.09.2018 द्वारा निर्गत किया गया।

2. उक्त नियमावली के अंतर्गत श्री संजीव के निलंबन की तिथि से नियत सयमावधि 30 दिनों के अंदर आरोप पत्र निर्गत किया गया। फलस्वरूप उनके निलंबन अवधि की वैधता निलंबन की तिथि 19.09.2018 से 60 दिनों की हो गयी। इस प्रकार श्री संजीव का निलंबन दिनांक 19.09.2018 से 60 दिनों तक अर्थात दिनांक 17.11.2018 तक बरकरार थी।10 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 3. दिनांक 17.11.2018 के आगे की अवधि के निलंबन के संबंध में समीक्षा हेतु दिनांक 26.10.2018 को मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में निलंबन समीक्षा समिति की बैठक आयोजित की गयी। अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(8)(a) एवं नियमावली के साथ संलग्न Annexure-II में विहित प्रक्रिया के आलोक में समिति द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री संजीव के निलंबन की अवधि दिनांक 17.11.2018 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 17.03. 2019 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी। निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय संकल्प सं0 9628, दिनांक 15.11.2018 द्वारा श्री संजीव के निलंबन अवधि को दिनांक 17.11. 2018 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 17.03.2019 तक विस्तारित की गयी।

4. श्री संजीव के निलंबन की विस्तारित अवधि दिनांक 17.03.2019 को पूरी हो रही है। श्री संजीव के विरूद्ध विभागीय ज्ञापन 8310, दिनांक 19.09.2018 द्वारा निर्गत आरोप पत्र के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त बचाव-बयान की समीक्षोपरांत बचाव-बयान को अस्वीकृत करते हुए आरोपों की जांच हेतु विभागीय संकल्प सं0 1781, दिनांक 25.02.2019 द्वारा मुख्य जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री संजीव के विरूद्ध भ्रष्टाचार एवं संदिग्ध आचरण से संबंधित प्रकरणों में उनकी भूमिका की जॉच का मामला निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में प्रक्रियाधीन है। अग्निषमन मुख्यालय के लेखा कार्यां की गड़बड़ी की संभावना को दृष्टिपथ में रखते हुए इसके विशेष अंकेक्षण, महालेखाकार, बिहार से कराकर विस्तृत प्रतिवेदन मंतव्य के साथ महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना से प्रतीक्ष्य है। ऐसी स्थिति में श्री संजीव के निलंबन अवधि के विस्तारण के संबंध में दिनांक 05.03.2019 को निलंबन समीक्षा समिति द्वारा विचार किया गया तथा विचारोपरांत समिति द्वारा श्री संजीव के निलंबन अवधि दिनांक 17.03.2019 के आगे 180 दिनों तक अर्थात दिनांक 13.09.2019 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी, जिसे अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।

5. अतः अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के संगत प्रावधानों के अंतर्गत निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003) के निलंबन की अवधि दिनांक 17.03.2019 के आगे 180 दिनों तक अर्थात दिनांक 13.09.2019 तक विस्तारित की जाती हैै।

6. श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003) को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

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सं0 1/या0-46/2013 गृ0आ0--3035

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संकल्प

9 अप्रैल 2019

श्री आलोक कुमार, भा0पु0से0 (JK:1997), जब बिहार राज्य में अंतःसंवर्गीय प्रतिनियुक्ति पर पुलिस उप-महानिरीक्षक, सारण क्षेत्र के पद पर पदस्थापित थे, उक्त अवधि में पद का दुरूपयोग करने, वरीय पुलिस पदाधिकारी की गरिमा के विरूद्ध कार्य करने, भ्रष्ट आचरण एवं कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने जैसे गंभीर आरोपाें के लिए विभागीय संकल्प सं0 796, दिनांक 05.02.2013 द्वारा उन्हें निलंबित किया गया तथा उक्त आरोपों के लिये उनके विरूद्ध उक्त नियमावली के नियम 8 के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। इसके निमित विभागीय ज्ञापन सं0 2302, दिनांक 21.03.2013 द्वारा आरोप पत्र निर्गत करते हुए 15 दिनों के अंदर बचाव-बयान समर्पित करने का अनुरोध किया गया। 2. और चूँकि बचाव बयान समर्पित करने हेतु दिये गये निर्धारित समय के अलावे तीन माह से अधिक की अवधि बीत जाने के बाद भी श्री कुमार द्वारा बचाव बयान समर्पित नहीं किया गया। फलतः विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु अध्यक्ष-सह-सदस्य, राजस्व पर्षद, बिहार, पटना को विभागीय संकल्प सं0 5803, दिनांक 31.07.2013 द्वारा संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। निलंबन अवधि में ही उनकी सेवायें दिनांक 08.07.2013 को उनके पैतृक संवर्ग जम्मू एवं कश्मीर को प्रत्यार्पित कर दी गयी।

3. और चूँकि उक्त विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय जम्मू एवं कश्मीर, उच्च न्यायालय में SWP No.- 1516/2013, CMP No.-2431/2013 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद में दिनांक 24.09.2013 को पारित अंतरिम आदेश से विभागीय कार्यवाही को स्थगित किया गया। तदुपरांत उक्त वाद में दिनांक 06.08.2015 को पारित अंतिम आदेश द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने संबंधी स्वीकृत्यादेश 5803, दिनांक 31.07.2013 एवं नियमित विभागीय कार्यवाही को इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि बिहार सरकार को श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की शक्ति एवं अधिकारिता नहीं थी।

4. और चूँकि माननीय उच्च न्यायालय जम्मू एवं कश्मीर द्वारा पारित उक्त आदेश के विरूद्ध एल0पी0ए0 दायर करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया। जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय में इस हेतु नियुक्त अधिवक्ता को एल0पी0ए0 दायर करने हेतु अनुमोदित तथ्य विवरणी एवं grounds for seeking condonation of delay उपलब्ध कराया गया। संबंधित वादों में पारित आदेश की सर्टिफाइड कॉपी के लिए सरकारी अधिवक्ता द्वारा माननीय श्रीनगर उच्च न्यायालय में आवेदन किया गया परंतु वहाँ के हालातों के कारण सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त होने में काफी विलम्ब हुआ। साथ ही, अपील दाखिल करने हेतु दो-तीन अन्य कागजात की आवश्यक्ता हुयी, जो उपलब्ध नहीं होने के कारण अपील दाखिल नहीं की जा सकी। इस क्रम में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 06.08.2015 के आदेश को पारित हुये साढ़े तीन वर्ष से अधिक11 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 अवधि बीत गयी, जबकि एल0पी0ए0 दायर करने की समयावधि 90 दिन ही निर्धारित है। एक अन्य मामले में माननीय उच्च न्यायालय, जम्मू एवं कश्मीर द्वारा मात्र 211 दिनों के विलम्ब होने के कारण एल0पी0ए0 को स्वीकार नहीं किया गया है। 5. और चूँकि न्यायादेश के अनुपालन न होने के कारण माननीय न्यायालय के अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी प्रकरण से संबंधित श्री आलोक कुमार के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृत्यादेश को माननीय जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया है, जिसके अनुपालन का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है। उक्त स्थिति को दृष्टिपथ में रखते हुए माननीय उच्च न्यायालय, जम्मू एवं कष्मीर द्वारा SWP No.- 1516/2013, CMP No.- 2431/2013 में दिनांक 06.08.2015 को पारित अंतिम आदेश के अनुपालन हेतु श्री आलोक कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0 5803, दिनांक 31.07.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

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सं0 1/एम02-60-17/2013 गृ0आ0--5591

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संकल्प

12 जुलाई 2019

श्री आलोक कुमार, भा0पु0से0 (J&K:1997) तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना सम्प्रति पैतृक संवर्ग (जम्मू एवं कष्मीर) में प्रत्यार्पित, के कार्यकाल के दौरान अपने आवास पर कार्यरत्‌ चतुर्थवर्गीय पुलिस कर्मचारियों से बेगार ड्‌यूटी कराने, दुव्र्यवहार एवं प्रताड़ित करने जैसे आरोप के लिए अखिल भारतीय सेवाएॅं (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8 के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया। इसके निमित्त ज्ञापन संख्या-6306, दिनांक 23.08.2013 द्वारा ''आर्टिकल ऑफ चार्जेज'', ''स्टेटमेंट ऑफ इम्प्यूटेषन्स ऑफ मिसबिहेवियर एण्ड मिसकण्डक्ट'' साक्ष्य सूची सहित निर्गत किया गया। श्री आलोक कुमार की सेवाएँ विभागीय संकल्प सं0 5133, दिनांक 08.07. 2013 द्वारा उनके पैतृक संवर्ग जम्मू एवं कश्मीर राज्य में प्रत्यार्पित कर दी गयी है।

2. और चूँकि श्री कुमार के विरूद्ध एक अन्य आरोप के लिए विभागीय ज्ञापन सं0 2302, दिनांक 21.03.2013 एवं तद्‌संबंधी विभागीय संकल्प सं0 5803, दिनांक 31.07.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय जम्मू एवं कश्मीर, उच्च न्यायालय में SWP No.- 1516/2013, CMP No.-2431/2013 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद में दिनांक 06.08.2015 को पारित अंतिम आदेश द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने संबंधी स्वीकृत्यादेश 5803, दिनांक 31.07.2013 एवं नियमित विभागीय कार्यवाही को इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि बिहार सरकार को श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की शक्ति एवं अधिकारिता नहीं थी। फलतः उक्त आदेश के अनुपालनार्थ विभागीय संकल्प सं0 5803, दिनांक 31.07.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प सं0 3035, दिनांक 09.04.2019 द्वारा समाप्त कर दिया गया है।

3. और चूँकि इसी परिप्रेक्ष्य में श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय ज्ञापन सं0 6306, दिनांक 23.08.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

4. अतः श्री आलोक कुमार, भा0पु0से0 (JK:1997), तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना सम्प्रति पैतृक संवर्ग जम्मू एवं कश्मीर संवर्ग में प्रत्यार्पित, के विरूद्ध ज्ञापन सं0 6306, दिनांक 23.08.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

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सं0 1/एम02-60-05/2018 गृ0आ0--3070

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संकल्प

10 अप्रैल 2019

श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007), तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विशेष निगरानी ईकाई, बिहार, पटना द्वारा संज्ञेय अपराध के लिए धारा 13(2) सह पठित 13(1)(e) भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत केस दर्ज करने एवं मामला अनुसंधानान्तर्गत होने के फलस्वरूप राज्य सरकार द्वारा विचारोपरांत अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(3) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प सं0 3290, दिनांक 17. 04.2018 द्वारा तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया।12 बिहार गजट, 11 सितम्बर 2019 2. और चूँकि विशेष निगरानी ईकाई, बिहार, पटना द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध दर्ज मामला अनुसंधानांतर्गत होने के कारण श्री कुमार के 60 दिनाें की आरंभिक निलंबन अवधि के बाद निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में निलंबन अवधि विभागीय संकल्प सं0 5138, दिनांक 12.06.2018 एवं संकल्प सं0 8883, दिनांक 10.10.2018 द्वारा क्रमशः 120 दिन एवं 180 दिनों तक के लिए विस्तारित की गयी। श्री कुमार के निलंबन की विस्तारित अवधि दिनांक 11.04.2019 तक है। 3. और चूँकि श्री कुमार की निलंबन अवधि एक वर्ष पूरी होने वाली है। उक्त कांड से संबंधित कतिपय आरोपों के लिए अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 8 के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है और इसके निमित्त विभागीय ज्ञापन सं0 2720 दिनांक 26.03.2019 द्वारा आरोप पत्र निर्गत किया गया है। उनके विरूद्ध विशेष निगरानी इकाई, बिहार में मामला अभी भी अनुसंधानान्तर्गत है, जिसमें समय लगने की संभावना है। वर्तमान में भा0पु0से0 के राज्य संवर्ग में रिक्तियों एवं चुनाव प्रेक्षक के रूप में नामांकन के फलस्वरूप पदाधिकारियों की भारी कमी है। 4. और चूँकि उक्त तथ्य को दृष्टिपथ में रखते हुए दिनांक 05.04.2019 को आहूत निलंबन समीक्षा समिति की बैठक में श्री कुमार के निलंबन के औचित्य पर विचार किया गया। समिति द्वारा सम्यक विचारोपरांत श्री विवेक कुमार को निलंबन से मुक्त करने की अनुशंसा की गयी है।

5. और चूँकि निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएॅं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3 (7)(C) में प्रदत शक्त्यिों का प्रयोग करते हुए श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007) को निलंबन से मुक्त करने एवं उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान करने का निर्णय लिया गया है। 6. अतः श्री विवेक कुमार, भा0पु0से0 (2007) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है तथा पुलिस मुख्यालय में योगदान हेतु निदेशित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 25—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 11 September 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2019-09-11.37/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2019-09-11.37.