निबंधन संख्या पी0टी0-40 बिहार गजट
बिहार सरकार }kjk प्रकाशित
भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-3 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---
भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची i`"B
i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA ---
पूरक
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पूरक-क 4-8बिहार गजट, 20 uoEcj 2019 2 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————
वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचनाएं
6 नवम्बर 2019
सं0 6/गो॰-34-02/2019-3252--वाणिज्य-कर विभाग के राज्य-कर अपर आयुक्त कोटि के निम्नलिखित पदाधिकारियों को उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-6 में अंकित पद एवं स्थान पर स्थानान्तरण/पदस्थापन किया जाता है :-
| क्रम स 0 ं | पदाधिकारी का नाम | ब ैंच स ख्या ं | ग ह जिला ृ | वर्त्तमान पदस्थापन | पदस्थापन का स्थान |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| 1 | श्री मार्कण्डेय ओझा, राज्य-कर अपर आयुक्त | 34वीं0 | भोजपुर | वाणिज्य-कर विभाग, मुख्यालय, बिहार, पटना। | राज्य-कर अपर आयुक्त (प्रशासन), मगध प्रमंडल, गया का अतिरिक्त प्रभार। |
| 2 | श्री सजन कुमार रूॅगटा, राज्य-कर अपर आयुक्त | 36वीं0 | पूर्णियॉ | राज्य-कर अपर आयुक्त (प्रशासन), मगध प्रमंडल,गया | राज्य-कर अपर आयुक्त (अंकेक्षण), दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा। |
| 3 | श्री बृज किशोर सिंह, राज्य-कर अपर आयुक्त | 36वीं0 | जहानाबाद | राज्य-कर अपर आयुक्त, वसूली कोषांग तिरहुत प्रमंडल,मुजफ्फरपुर | राज्य-कर अपर आयुक्त (अंकेक्षण), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर। |
| 4 | श्री आनन्द कुमार वैरोलिया, राज्य-कर अपर आयुक्त | 36वीं0 | मधुबनी | राज्य-कर अपर आयुक्त, वसूली कोषांग केन्द्रीय प्रमंडल, पटना। | राज्य-कर अपर आयुक्त (अंकेक्षण), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर। |
| 5 | श्री प्रकाश चन्द्र झा, राज्य-कर अपर आयुक्त | 36वीं0 | भागलपुर | राज्य-कर अपर आयुक्त, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ,मुख्यालय, बिहार, पटना। | राज्य-कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पूर्णियॉ प्रमंडल, पूर्णियॉ। |
| 6 | श्री प्रणव बोध रूॅगटा, राज्य-कर अपर आयुक्त | 36वीं0 | भागलपुर | राज्य-कर अपर आयुक्त (प्रशासन), पूर्णियॉ प्रमंडल, पूर्णियॉ। | राज्य-कर अपर आयुक्त, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना। |
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जनक राम, उप-सचिव।
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6 नवम्बर 2019
सं0 6/गो॰-34-02/2019-3253--वाणिज्य-कर विभाग के राज्य-कर सहायक आयुक्त कोटि के पदाधिकारी को उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-6 में अंकित पद एवं स्थान पर स्थानान्तरण/पदस्थापन किया जाता है :-
3 बिहार गजट, 20 uoEcj 2019| क्र म स 0 ं | पदाधिकारी का नाम | ब च ै ं स ख्या ं | ग ह जिला ृ | वर्त्तमान पदस्थापन | पदस्थापन का स्थान |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| 1 | श्री राम कृपाल साह, राज्य-कर सहायक आयुक्त | 56वीं0 से 59वीं0 | सीतामढ़ी | राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना मध्य अ चल, पटना। ं | राज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना पश्चिमी अ चल, पटना। ं |
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जनक राम, उप-सचिव।
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————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 35—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 20 uoEcj 2019 4
बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी }kjk प्रकाशित
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सं0 कारा/नि0को0(क)-70/08--9492 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 7 नवम्बर 2019
श्री विष्वनाथ प्रसाद, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, गया सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध उनके केन्द्रीय कारा, गया में पदस्थापन के दौरान निविदा संबंधी कार्य में अनियमितता बरतने एवं नियम विरूद्ध कार्य करने, आपूरकों से पक्षपात करने, कारा की पंजियों का अनियमित संधारण करने एवं जिला प्रशासन के जांच के दौरान भंडार में खाद्यानों की गुणवत्ता स्वीकृत मानक से कम पाये जाने के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2119 दिनांक 20.05.2010 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई। संस्थित विभागीय कार्यवाही के फलाफल के पश्चात् प्रमाणित आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया :-
''आरोपित पदाधिकारी को अनुमान्य वेतनमान के वर्तमान वेतन प्रक्रम से दो वेतन प्रक्रम नीचे अर्थात् दो वेतन वृद्धियाँ कम कर, वेतन निर्धारण किये जाने का दण्ड।''
3. विभागीय पत्रांक 1359 दिनांक 14.03.2013 द्वारा उक्त विनिश्चयी दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गई। इसी बीच श्री प्रसाद दिनांक 31.10.2013 को सेवानिवृत्त हो गये। फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 6140 दिनांक 16.12.2013 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध संस्थित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। तदोपरान्त बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2663 दिनांक 10.02.2015 द्वारा श्री प्रसाद को दिये गये उक्त विभागीय दण्ड को आनुपातिक नहीं बताते हुए असहमति व्यक्त की गयी।
4. उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में आरोपित पदाधिकारी पर गठित आरोपों की गंभीरता तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों को प्रमाणित पाये जाने एवं उपलब्ध अभिलेखाें के सम्यक् विचारोपरांत आयोग से प्राप्त परामर्श से असहमति व्यक्त करते हुए प्रस्तावित विभागीय दण्ड को यथावत् रखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1644 दिनांक 13.03.2015 द्वारा निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया :-
''आरोपित पदाधिकारी को अनुमान्य वेतनमान के वर्तमान वेतन प्रक्रम से दो वेतन प्रक्रम नीचे अर्थात् दो वेतन वृद्धियाँ कम कर, वेतन निर्धारण किये जाने का दण्ड।''
5. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में C.W.J.C. No-6561/2015 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 02.04.2019 को माननीय न्यायालय द्वारा निम्नांकित आदेष पारित किया गया :-
"Learned counsel for the petitioner submits that the petitioner would be availing of the remedy of review by way of memorial provided under Rule 24(2) of the Bihar CCA Rules, 2005.
Writ petition is disposed of with liberty to the petitioner to prefer a memorial within a period of four weeks from today. In the event, the same is done respondent authorities should consider the same on merits without raising the issue of delay in filing the memorial.
It is expected that the review application/memorial would be disposed of by the respondent authorities expeditiously and without any undue delay."
6. श्री प्रसाद द्वारा उक्त न्यायादेश के आलोक में अपना पुनर्विलोकन आवेदन दिनांक 13.06.2019 विभाग में समर्पित किया है। श्री प्रसाद का अपने पुनर्विलोकन आवेदन में कहना है कि वे दिनांक 31.10.2013 को ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। सेवानिवृत्ति के बाद केन्द्रीय कारा, गया के मामले में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1644 दिनांक 13.03.2015 द्वारा उनकी दो (02)5 बिहार गजट, 20 uoEcj 2019 वेतन वृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोक दी गयी थी जिस कारण उनका पेंशन काफी प्रभावित हो गया है। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा C.W.J.C. No-6561/2015 में दिनांक 02.04.2019 को पारित न्यायादेश में विभाग को पुनः विचार कर निर्णय लेने का निदेश दिया गया।
7. उपरोक्त वर्णित परिप्रेक्ष्य में विभागीय पत्रांक 6015 दिनांक 12.07.2019 द्वारा प्रभारी पदाधिकारी, वित्त (वै.दा.नि.को.) विभाग, बिहार, पटना/महालेखाकार, बिहार से श्री प्रसाद के विरूद्ध अधिरोपित उक्त दण्ड के क्रियान्वयन के बिन्दु पर प्रतिवेदन की मांग की गई। तद्आलोक में प्रभारी पदाधिकारी, वित्त (वै.दा.नि.को.) विभाग, बिहार, पटना द्वारा पत्रांक 1151 (23) दिनांक 22.07.2019 के माध्यम से संसूचित किया गया कि श्री प्रसाद दिनांक 31.10.2013 को वार्धक्य सेवानिवृत्त हो गये है। श्री प्रसाद के पक्ष में सेवान्त लाभ के संबंध में अपेक्षित कार्रवाई कोषांग के स्तर से कर दी गई है। विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1644 दिनांक 13.03.2015 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध अधिरोपित दण्ड का अनुपालन किया जाना संभव प्रतीत नहीं होता है; उनके द्वारा उक्त अधिसूचित दण्ड की पुनर्समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई किये जाने का अनुरोध किया गया।
8. उपरोक्त परिपे्रक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया है कि श्री प्रसाद के विरूद्ध अधिरोपित उक्त दण्ड का विनिश्चय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा दिनांक 11.02.2013 को किया गया था। तदोपरान्त बिहार लोक सेवा आयोग से दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श की मांग की गयी। इसी बीच श्री प्रसाद दिनांक 31.10.2013 को सेवानिवृत्त हो गये। बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श दिनांक 10.02.2015 को प्राप्त हुआ जिसमें आयोग द्वारा प्रस्तावित दण्ड से असहमति व्यक्त की गई। आयोग से प्राप्त परामर्श से असहमति व्यक्त करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार उक्त दण्ड को यथावत् रखा गया। परन्तु वित्त (वै.दा.नि.को.) विभाग, बिहार, पटना द्वारा पत्रांक 1151 (23) दिनांक 22.07.2019 के माध्यम से संसूचित किया गया है कि उक्त अधिरोपित दण्ड का क्रियान्वयन संभव नहीं है। 9. अतएव वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री विश्वनाथ प्रसाद, तत्कालीन काराधीक्षक, केन्द्रीय कारा, गया (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1644 दिनांक 13.03.2015 द्वारा अधिरोपित उक्त दण्ड को रूपभेदित करते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 (ए) के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित करने का विनिष्चिय किया गया :-
''पेंशन से 20% (बीस प्रतिशत) की राशि की कटौती दो (02) वर्षों तक।'' 10. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 7056 दिनांक 19.08.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1830 दिनांक 30.10.2019 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है।
11. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री विश्वनाथ प्रसाद, तत्कालीन काराधीक्षक, केन्द्रीय कारा, गया (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1644 दिनांक 13.03.2015 द्वारा अधिरोपित उक्त दण्ड को रूपभेदित करते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 (ए) के तहत निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया जाता है :-
''पेंशन से 20% (बीस प्रतिशत) की राशि की कटौती दो (02) वर्षों तक।'' आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
-------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-12/2018--9468 ------- संकल्प 6 नवम्बर 2019 श्री सुरेष चौधरी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति निलंबित) संलग्न शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा, भागलपुर के विरूद्ध उनके मंडल कारा, बेतिया में पदस्थापन के दौरान दिनांक 11.08.2018 को जिला प्रशासन द्वारा मंडल कारा, बेतिया में की गयी औचक छापेमारी में 16 मोबाईल फोन, 13 मोबाईल चार्जर, मो0-48,300/- (अड़तालीस हजार तीन सौ रूपये मात्र) नगद एवं अन्य आपतिजनक सामग्रियों की हुई बरामदगी तथा पुनः दिनांक 21.08. 2018 को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा कारा में की गयी संयुक्त छापेमारी में कारा प्रवेश मुख्य द्वार के बगल में अवस्थित जेनरेटर रूम के बगल के एक कमरे से भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्रियों की हुई बरामदगी की घटना में बरती गई लापरवाही के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6499 दिनांक 11.09.2018 द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए निलंबनावस्था में उन्हें शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा, भागलपुर में संलग्न किया गया। साथ ही उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 105 दिनांक 04.01.2019 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक 12/वि0जॉ0 दिनांक 02.05.2019 के माध्यम से श्री चौधरी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल तीन (03) आरोपों में से आरोप संख्या-01 को आंषिक प्रमाणित, आरोप संख्या-02 को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-03 के लिए आरोपित पदाधिकारी को अप्रत्यक्ष रूप से जवाबदेह ठहराते हुए आरोप अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया6 बिहार गजट, 20 uoEcj 2019 जिसकी समीक्षा की गई एवं कतिपय बिन्दुओं पर संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष अस्वीकार्य पाया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांंक 5134 दिनांक 20.06.2019 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए आरोप संख्या-02 एवं 03 के संदर्भ में असहमति के बिन्दु अभिलेखित कर श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
3. श्री चौधरी द्वारा दिनांक 25.06.2019 को द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि विभागीय कार्यवाही के अधिगम के आधार पर जिन आरोपों को अप्रमाणित पाया गया है, उसके संबंध में उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिनांक 07.02.2019 को समर्पित बचाव अभिकथन में स्थिति स्पष्ट की गई थी। साथ ही प्रधान सचिव, गृह विभाग एवं महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना को दिनांक 03.10.2018 को निलम्बन के संबंध में उनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन, बचाव अभिकथन एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये अधिगम के आधार पर विभागीय स्तर पर तथ्यों का विष्लेषण भली-भाँति नहीं किया गया है एवं एकपक्षीय पूर्वाग्रह से ग्रसित (Prejudiced) तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त के विपरीत द्वितीय कारण पृच्छा की गई है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि जहाँ तक आरोप संख्या 02 का प्रष्न है उनके द्वारा स्थिति को पूर्णरूपेण पूर्व में ही स्पष्ट किया गया है तथा ससमय कार्रवाई की गई है। इस संबंध में तत्कालीन उपाधीक्षक का बयान भी उल्लेखनीय है जो दृष्टिपथ में नहीं रखा गया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बिहार कारा हस्तक के प्रावधानों के अधीन मिनट बुक अधीनस्थों को निदेषित किये जाने का माध्यम है। मिनट बुक में अंकित किये गये उनके निर्देषों को र्काव्य की इतिश्री माना जाना उचित नहीं है। विभागीय कार्यवाही में उन्हें निर्दोष पाये जाने पर विभागीय कार्यवाही के अधिगम से बिना तार्किक आधार के असहमति व्यक्त करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गई है। द्वितीय कारण पृच्छा में प्रावधानों के आलोक में तथ्यों का विश्लेषण नहीं किया गया है। 4. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, असहमति के बिन्दु एवं श्री चौधरी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जबाव के समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पाया गया कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-01 का कोई विशिष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। उनके द्वारा पूर्व में उठाये गये बिन्दुओं पर सम्यक् विचारोपरान्त विभाग द्वारा अस्वीकृत किया जा चुका है। श्री चौधरी द्वारा कोई नया बिन्दु नहीं उठाया गया है। विभाग द्वारा आरोप संख्या-02 के संबंध में अंकित असहमति के बिन्दु पर श्री चौधरी द्वारा ससमय कार्रवाई करने का दावा किया जा रहा है, परन्तु की गयी कार्रवाई का विवरण अंकित नहीं किया गया है जबकि असहमति के बिन्दु में उनके द्वारा कर्तव्य के प्रति बरती गयी लापरवाही, कार्यलोप एवं कारा के सुरक्षित क्षेत्र में प्रतिबंधित सामग्रियों के भंडारण में उनकी संलिप्तता संबंधी विशिष्ट बिन्दु अंकित हैं जिसका जवाब आरोपित पदाधिकारी द्वारा नहीं दिया गया है। आरोप संख्या-03 के संदर्भ में यह सही है कि मिनट बुक अधीनस्थों को निदेशित करने का माध्यम है परन्तु दिये गये निदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेवारी भी श्री चौधरी की थी जिसका उनके द्वारा निर्वह्न नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित निष्कर्ष से असहमति के बिन्दु में असहमति का विशिष्ट कारण अंकित करते हुए श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी थी। श्री चौधरी द्वारा असहमति के बिन्दु पर कोई जवाब नहीं दिया गया है। अतः श्री चौधरी का द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार करने योग्य नहीं है।
5. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री चौधरी के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त करने का विनिष्चय किया गया :- (i) तीन (03) वर्ष तक प्रोन्नति पर रोक।
(ii) कालमान वेतन में तीन (03) वेतन वृद्धियों के समतुल्य राषि घटाकर वेतन अवनति का दंड।
6. उपर्युक्त विनिष्चित वृहत् दंड (कंडिका-05-ii) के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 7321 दिनांक 27.08.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1831 दिनांक 30.10.2019 द्वारा दण्ड प्रस्ताव (कंडिका-05-ii) पर सहमति संसूचित की गयी है। 7. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सुरेष चौधरी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बेतिया (सम्प्रति निलंबित) संलग्न शहीद जुब्बा सहनी केन्द्रीय कारा, भागलपुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त किया जाता है :- (i) तीन (03) वर्ष तक प्रोन्नति पर रोक।
(ii) कालमान वेतन में तीन (03) वेतन वृद्धियों के समतुल्य राषि घटाकर वेतन अवनति का दंड। 8. इनके निलंबन अवधि के संबंध में अलग से निर्णय लिया जायेगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।7 बिहार गजट, 20 uoEcj 2019 सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-06/2018--9467 ------- संकल्प 6 नवम्बर 2019 श्री विधु कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, बक्सर के विरूद्ध उनके केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ में पदस्थापन के दौरान बंदी रॉकी सिंह उर्फ राकेष कुमार सिंह, पे0-रमेष कुमार सिंह के समुचित इलाज के अभाव में दिनांक 14.07.2018 को मृत्यु की घटना में बरती गई लापरवाही के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5523 दिनांक 03.08.2018 द्वारा उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए निलंबनावस्था में उन्हें केन्द्रीय कारा, बक्सर में संलग्न किया गया। साथ ही उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10 दिनांक 02.01.2019 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, विभागीय जाँच, समाहरणालय, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 2. अपर समाहर्त्ता, विभागीय जाँच, समाहरणालय, पटना-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 257 दिनांक 27.05. 2019 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल पाँच (05) आरोपों को प्रमाणित पाया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांंक 5102 दिनांक 19.06.2019 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री कुमार के द्वारा दिनांक 01.07.2019 को द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया गया, जिसमें उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा कारा अस्पताल का दिनांक 12.07.2018 को भ्रमण किया गया। जैसे ही दिनांक 11.07.2018 को सूचना मिली कि एक बंदी की तबियत खराब है, उसी दिन कारा का रात्रि परिभ्रमण किया गया। इसके साथ ही दिनांक-12.07.2018 को दिन में कारा अस्पताल का भी भ्रमण किया ये दोनों तथ्य संचालन पदाधिकारी के द्वारा स्वयं अपने मंतव्य में स्वीकार किया गया है तथा ''जिसकी पुष्टि गेट रजिस्टर से होती है''। किन्तु संचालन पदाधिकारी ने इन दस्तावेजों का अंकण करने के बाद भी इनका संज्ञान नहीं लिया। जबकि Health Screening में चिकित्सक के द्वारा बंदी को Chronic Alcoholic घोषित करने के बावजूद बंदी को बाहर के लिए रेफर नहीं किया गया। चिकित्सकों के आदेष पर ही हथकड़ी लगाई गई और वह भी थोड़े समय के लिए दवाएँ देने अथवा अपना ही नुकसान न करने के लिए। चिकित्सकों ने दिनांक-14.07.2018 के पूर्व कोई अनुषंसा उन्हें इस संबंध में नहीं की न ही न्यायालय का कोई आदेष प्राप्त हुआ। 4. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जवाब की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी समीक्षा में पाया गया कि बंदी रॉकी सिंह उर्फ राकेष कुमार सिंह अल्प निद्रा एवं Chronic Alcoholism का आदी था तथा दिनांक 12.07.2018 को अस्पताल भ्रमण के दौरान उक्त बंदी को आरोपित पदाधिकारी द्वारा स्वयं देखा गया था एवं कारा के मुख्य उच्च कक्षपाल द्वारा उन्हें इसकी पूर्व सूचना भी दी गयी थी इससे स्पष्ट है कि बंदी की गंभीर स्थिति की जानकारी आरोपित पदाधिकारी को पूर्व से ही थी।
श्री कुमार का कहना है कि चिकित्सकों द्वारा इस बंदी को 14.07.2018 के पूर्व refer नहीं किया गया था इसलिए वे उक्त बंदी को बेहतर इलाज के लिए दिनांक 14.07.2018 से पूर्व नहीं भेज सके। यह सही है कि चिकित्सकों द्वारा इलाज में लापरवाही बरती गयी परन्तु किसी बंदी के इलाज में चिकित्सकों द्वारा लापरवाही नहीं बरती जाये इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेवारी काराधीक्षक की ही है। उक्त बंदी के असामान्य गंभीर स्थिति के बावजूद उसे हथकड़ी लगाकर अमानवीय ढंग से अस्पताल में रखा गया तथा बेहतर इलाज हेतु अन्य अस्पताल या नशा विमुक्ति केन्द्र नहीं भेजा गया। बिहार कारा हस्तक 2012 के नियम-135 में हिंसक बंदी को हथकड़ी लगाकर रखे जाने का प्रावधान है, परन्तु chronic alcoholic बंदी को withdrawal syndrome के कारण होने वाले कंपन (trembling) को रोकने के लिए हथकड़ी लगाकर रखने का प्रावधान नहीं है। इस प्रकार के रोगी को तुरन्त बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए जो श्री कुमार द्वारा नहीं की गयी एवं समुचित इलाज के अभाव में मरीज बंदी की मृत्यु हो गयी। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार्य योग्य नहीं है।
5. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त करने का विनिष्चय किया गया :-
'' संचयात्मक प्रभाव से चार (04) वेतन वृद्धियाँ अवरूद्ध करने का दंड ''। 6. उपर्युक्त विनिष्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 7282 दिनांक 27.08.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1829 दिनांक 30.10.2019 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है।
7. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री विधु कुमार, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, केन्द्रीय कारा, पूर्णियाँ (सम्प्रति निलंबित) संलग्न केन्द्रीय कारा, बक्सर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित करते हुए निलंबन से मुक्त किया जाता है :-
बिहार गजट, 20 uoEcj 2019 8'' संचयात्मक प्रभाव से चार (04) वेतन वृद्धियाँ अवरूद्ध करने का दंड ''।
8. इनके निलंबन अवधि के संबंध में अलग से निर्णय लिया जायेगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 35—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in