िनबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:20)0-40 िनबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र
ह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क [स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 5 vxzgk;.k 1(cid:23)41 (cid:25)श(cid:15)(cid:26)
((((स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 1290) ) ) ) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:27) eaxyokj(cid:27) 26 uoEcj 2019201920192019 बिहार विधान सभा सचिवालय
————
अधिसूचना
26 नवम्बर 2019
∫ ∫ ∫ ∫
∫ ∫
सं वि स वि -20/2019-3042/वि -20/2019-3042/वि स --''बिहार माल और सेवा कर (
2019'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक
ान सभा में दिनांक 26 नवम्बर, 2019 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विध
(संशोधन) विधेयक,
26 नवम्बर, 2019 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा
य और हेतु सहित प्रकाशित किया
की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया
की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ
जाता है ।
आदेश से,
आदेश से,
बटेश्वर नाथ पाण्डेय,
बटेश्वर नाथ पाण्डेय
सचिव।
सचिव।
2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22226666 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019∫ ∫ ∫
[वि स वि -17/2019]
बिहार माल और सेवा कर बिहार माल और सेवा कर बिहार माल और सेवा कर बिहार माल और सेवा कर (संशोधनसंशोधनसंशोधनसंशोधन) विधेयक, 2019विधेयक, 2019विधेयक, 2019विधेयक, 2019
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (बिहार अधिनियम-12, 2017बिहार अधिनियम-12, 2017बिहार अधिनियम-12, 2017बिहार अधिनियम-12, 2017) का संशोधन करने के का संशोधन करने के का संशोधन करने के का संशोधन करने के
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017
लिए विधेयक।लिए विधेयक।लिए विधेयक।लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
1111.... संक्षिप्त नाम और प्रारंभ।-संक्षिप्त नाम और प्रारंभ।-संक्षिप्त नाम और प्रारंभ।-संक्षिप्त नाम और प्रारंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2019
कहा जा सकेगा।
(2) अन्यथा उपबंधित के सिवाय इस अधिनियम के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे, जो
सरकार राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा नियत करे।
2222.... बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 2 में संशोधन,।- बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 2 में संशोधन,।- बिहार माल और सेवा बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 2 में संशोधन,।- बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 2 में संशोधन,।- कर अधिनियम, 2017 (जिसे इसमें इसके पश्चात् ''मूल अधिनियम'' ''मूल अधिनियम'' ''मूल अधिनियम'' ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 के खंड (4) में, "अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी," शब्दाें के पश्चात्, "राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण," शब्द रखे जाएंगे। 3333.... मूल अधिनियम की धारा 10 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 10 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 10 में, - मूल अधिनियम की धारा 10 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 10 में संशोधन।- (क) उपधारा (1) में दूसरे परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :- "स्पस्पस्पस्पष्टीकरणष्टीकरणष्टीकरणष्टीकरण-दूसरे परंतुक के प्रयोजनों के लिए, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदशित किया जाता है, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त
सेवाओं की पूर्ति के मूल्य को, राज्य में आवर्त के मूल्य के अवधारण के लिए गणना में नहीं
लिया जाएगा।",
(ख) उपधारा (2) में, -
(i) खंड (घ) के अन्त में आने वाले "और" शब्द का लोप किया जाएगा;
(ii) खंड (ड.) में "अधिसूचित किया जाए"; शब्दाें के स्थान पर, "अधिसूचित किया जाए; और" शब्द रखे जाएंगे; (iii) खंड (ड.) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :- "(च) वह न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति हैः"; (ग) उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :- "(2क) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होेते हुए भी, किन्तु धारा 9 की उपधारा (3) और उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन कर के संदाय का विकल्प लेने के लिए पात्र नहीं है और जिसका पूर्व वित्तीय वर्ष में सकल आवर्त पचास लाख रुपए से अधिक नहीं है, उसके द्वारा धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन संदेय कर के स्थान पर, विहित की जाने वाली दर पर, जो राज्य में उसकी आवर्त के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, संगणित कर की
रकम का निम्नलिखित शर्तो के अधीन रहते हुए संदाय करने का विकल्प ले सकेगा, यदि वह,-
(क) किसी ऐसे माल या सेवाओं की पूर्ति करने में नहीं लगा है, जो इस अधिनियम के
अधीन कर लगाने योग्य नहीं है;
(ख) माल या सेवाओं की अंतरराज्यीय जावक पूर्ति करने में नहीं लगा है;
(ग) किसी ऐसे इलैक्ट्रॉनिक वाणिज्यिक प्रचालक के माध्यम से माल या सेवाओं की ऐसी
पूर्ति में नहीं लगा है, जिससे धारा 52 के अधीन स्रोत पर कर का संग्रहण करना अपेक्षित है;
3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019(घ) ऐसे माल का विनिर्माता या ऐसी सेवाओं का पूर्तिकार नहीं है, जो सरकार द्वारा
परिषद् की सिफारिशाें पर अधिसूचित की जाएं; और
(ड.) न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति है : परंतु जहां एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का आय-कर अधिनियम, 1961 के अधीन जारी स्थायी खाता संख्यांक एक ही है, वहां ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उपधारा के अधीन तब तक स्कीम के लिए विकल्प का चुनाव करने का पात्र नहीं होगा, जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उपधारा के अधीन कर का संदाय करने के विकल्प का चुनाव नहीं करते हैं।" : (घ) उपधारा (3) में, "उपधारा (1)" शब्द, कोष्ठकों और अंक के स्थान पर, दोनों स्थानों पर, जहां वे आते हैं, "यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2क)" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ; (ड.) उपधारा (4) में, "उपधारा (1)" शब्द, कोष्ठकों और अंक के स्थान पर, "यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2क)" शब्द कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ; (च) उपधारा (5) में, "उपधारा (1)" शब्द, कोष्ठकों और अंक के स्थान पर, "यथास्थिति, उपधारा (1) या उपधारा (2क)" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ; (छ) उपधारा (5) के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :- "स्पष्टीकरण 1स्पष्टीकरण 1स्पष्टीकरण 1स्पष्टीकरण 1- इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति की कर संदाय करने की पात्रता का अवधारण करने के लिए इसके संकलित आवर्त की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, "संकलित आवर्त" पद के अंतर्गत किसी वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख तक की पूर्तियां सम्मिलित होंगी, जिसको वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण का दायी बन जाता है, किन्तु जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त सेवाओं की पूर्ति का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा। स्पष्टीकरण 2स्पष्टीकरण 2स्पष्टीकरण 2स्पष्टीकरण 2 - इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा संदेय कर का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए, "राज्य में आवर्त" में निम्नलिखित पूर्तियों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा, अर्थात् :- (i) किसी वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख तक की पूर्तियां, जिसको वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण का दायी बन जाता है; और (ii) जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त सेवाओं की पूर्ति।"। मूल अधिनियम की धारा 22 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 22 की उपधारा (1) में, 4444.... मूल अधिनियम की धारा 22 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 22 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 22 में संशोधन।-
दूसरे परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"परंतु यह भी कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, बीस लाख रुपए के संकलित
आवर्त को ऐसी रकम तक बढ़ा सकेगी, जो किसी ऐसे पूर्तिकार की दशा में, जो माल की
अनन्य पूर्ति में लगा है, चालीस लाख रुपए से अधिक नहीं होगी और यह ऐसी शर्तो और
परिसीमाओं के अधीन रहते हुए किया जाएगा, जो अधिसूचित की जाए।
स्पष्टीकरणस्पष्टीकरणस्पष्टीकरणस्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यक्ति के बारे में तब भी
यह समझा जाएगा कि वह माल की अनन्य पूर्ति में लगा है, यदि वह निक्षेपों, ऋणों या
अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त सेवाओं की पूर्ति में लगा हुआ है, जहां तक प्रतिफल को
ब्याज या बे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।"
5555.... मूल अधिनियम कमूल अधिनियम कमूल अधिनियम कमूल अधिनियम की धारा 25 में संशोधन।- ी धारा 25 में संशोधन।- ी धारा 25 में संशोधन।- ी धारा 25 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 25 में उपधारा (6) के
पश्चात् निम्नलिखित उपधाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22226666 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019"(6क) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, विहित किए जाने वाले प्ररूप और रीति तथा समय के
भीतर सत्यापन कराएगा या आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेगा :
परंतु यदि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को आधार संख्यांक समनुदेशित नहीं किया गया है,
तो ऐसे व्यक्ति को ऐसी रीति में, जो परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा अधिसूचित की
जाए, पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्थापित किया जाएगा :
परंतु यह और कि सत्यापन कराने या आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत
करने या पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्तुत करने में असफल रहने की
दशा में ऐसे व्यक्ति को आवंटित रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य समझा जाएगा और इस अधिनियम के
अन्य उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसे व्यक्ति के पास रजिस्ट्रीकरण नहीं है।
(6ख) अधिसूचित की जाने वाली तारीख को ही प्रत्येक व्यष्टि, रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के
लिए पात्र बनने हेतु, परिषद् की सिफारिशों पर सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की
जाने वाली रीति में सत्यापन कराएगा या आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत
करेगा :
परंतु जहां किसी व्यष्टि को आधार संख्यांक समनुदेशित नहीं किया गया है, वहां ऐसे
व्यष्टि को पहचान का कोई ऐसा वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्थापित किया जाएगा, जो
परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।
(6ग) अधिसूचित की जाने वाली तारीख को ही, व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यक्ति,
रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र बनने हेतु, सत्यापन कराएगा या ऐसी रीति में, जो
अधिसूचित की जाए, कर्ता, प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक, ऐसे भागीदारों, यथास्थिति,
संगम की प्रबंध समिति, न्यासी बोर्ड के सदस्यों, प्राधिकृत प्रतिनिधियों, प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं
और व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्गो द्वारा, ऐसी रीति में, जो परिषद् की सिफारिशों पर सरकार
द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत
करेगा :
परंतु जहां ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्ग, जिन्हें आधार संख्यांक समनुदेशित
नहीं किया गया है, उन्हें पहचान का कोई ऐसा वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्थापित किया
जाएगा, जो परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।
(6घ) उपधारा (6क) या उपधारा (6ख) या उपधारा (6ग) के उपबंध ऐसे व्यक्ति या
व्यक्तियों के ऐसे वर्ग या वर्गों या राज्य के किसी ऐसे भाग पर लागू नहीं होंगे, जिसे परिषद्
की सिफारिश पर सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए।
स्पष्टीकरण-स्पष्टीकरण-स्पष्टीकरण-स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए "आधार संख्यांक" पद का वही अर्थ होगा,
जो आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, फायदों तथा सेवाओं का लक्ष्यित परिदान)
अधिनियम, 2016 की धारा 2 के खंड (क) में उसका है।"।
मूल अधिनियम में नई धारा 31क का अंतःस्थापन।- मूल अधिनियम की धारा 31 के पश्चात्
6666.... मूल अधिनियम में नई धारा 31क का अंतःस्थापन।-
मूल अधिनियम में नई धारा 31क का अंतःस्थापन।-
मूल अधिनियम में नई धारा 31क का अंतःस्थापन।-
5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019"(1) किसी इनपुट सेवा वितरक या अनिवासी कराधेय व्यक्ति या धारा 10 या धारा 51 या धारा 52 के उपबंधों के अधीन कर का संदाय करने वाले व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास या उसके किसी भाग के लिए माल या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक पूर्तियों, प्राप्त किए गए इनपुट कर प्रत्यय, संदेय कर, संदत्त कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्ररूप, रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, इलैक्ट्रॉनिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करेगा : परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिश पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय वर्ग को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और निर्बधनों के, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, अधीन
रहते हुए, प्रत्येक तिमाही या उसके किसी भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेगा।
(2) धारा 10 के उपबंधों के अधीन कर का संदाय करने वाला कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति,
प्रत्येक विाीय वर्ष या उसके किसी भाग के लिए, राज्य में आवर्त, माल या सेवाओं या दोनों
की आवक पूर्तियों, संदेय कर, संदत्त कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए
ऐसे प्ररूप, रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, इलैक्ट्रॉनिक रूप से विवरणी
प्रस्तुत करेगा।";
(ख) उपधारा (7) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात् :-
"(7) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिससे उपधारा (1) के अधीन विवरणी प्रस्तुत किया
जाना अपेक्षित है और जो ऐसे व्यक्ति से भिन्न है, जिसे उसके परंतुक या उपधारा (3) या
उपधारा (5) में निर्दिष्ट किया गया है, सरकार को, ऐसी विवरणी के अनुसार शोध्य कर का
संदाय उस तारीख से पूर्व करेगा, जिसको उसके द्वारा ऐसी विवरणी प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित
है :
परंतु उपधारा (1) के परंतुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत
व्यक्ति, किसी मास के दौरान, माल या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक पूर्तियों, प्राप्त
किए गए इनपुट कर प्रत्यय, संदेय कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे
प्ररूप रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सरकार को शोध्य कर का संदाय
करेगा :
परंतु यह और कि उपधारा (2) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत
व्यक्ति, किसी तिमाही के दौरान, राज्य में आवर्त, माल या सेवाओं या दोनों की आवक पूर्तियों,
संदेय कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे प्ररूप, रीति और ऐसे समय
के भीतर, जो विहित किया जाए, सरकार को शोध्य कर का संदाय करेगा।"।
मूल अधिनियम की धारा 44 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 44 की उपधारा (1) में,
8888.... मूल अधिनियम की धारा 44 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 44 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 44 में संशोधन।-
निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :-
"परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से
अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, के लिए
वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय-सीमा को विस्तारित कर सकेगा :
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर के आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा के किसी
विस्तारण को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा।"।
मूल अधिनियम की धारा 49 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 49 में, उपधारा (9) के
9999.... मूल अधिनियम की धारा 49 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 49 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 49 में संशोधन।-
पश्चात्, निम्नलिखित उपधाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
"(10) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसी शर्तों और निर्बधनों के
अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, सामान्य पोर्टल पर, इस अधिनियम के अधीन
इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते में उपलब्ध किसी कर, ब्याज, शास्ति, फीस की किसी रकम या किसी
6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22226666 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019अन्य रकम को एकीकृत कर, केंद्रीय कर, राज्य कर या उपकर संबंधी इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते
में अंतरित कर सकेगा और ऐसे अंतरण को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते
से प्रतिसंदाय के रूप में समझा जाएगा।
(11) जहां किसी रकम को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते में
अंतरित किया गया है, वहां उसे उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार उक्त खाते में जमा किया
गया समझा जाएगा।"।
मूल अधिनियम की धारा 50 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 50 की उपधारा (1) के
10101010.... मूल अधिनियम की धारा 50 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 50 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 50 में संशोधन।-
पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"परंतु किसी कर अवधि के दौरान की गई पूर्तियों के संबंध में संदेय कर पर ब्याज को, जिसे धारा 39 के उपबंधों के अनुसार नियत तारीख के पश्चात् उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित किया गया है, सिवाय वहां के, जहां ऐसी विवरणी को उक्त अवधि के संबंध में धारा 73 या धारा 74 के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रारंभ के पश्चात् प्रस्तुत किया जाता है, कर के उस भाग पर उद्गृहीत किया जाएगा, जिसका संदाय इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते से राशि को निकालकर किया गया है।"। 11111111.... मूल अधिनियम की धारा 52 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 52 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 52 में,- मूल अधिनियम की धारा 52 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 52 में संशोधन।- (क) उपधारा (4) में, निम्नलिखित परंतुक अंतः स्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :- "परंतु आयुक्त, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग के लिए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, विवरण प्रस्तुत करने की समय-सीमा को
विस्तारित कर सकेगा :
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर के आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा के किसी
विस्तारण को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा।"।
(ख) उपधारा (5) में, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :-
"परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से,
अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग के लिए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए,
वार्षिक विवरण प्रस्तुत करने की समय-सीमा को विस्तारित कर सकेगा :
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर के आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा के किसी
विस्तारण को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा।"।
मूल अधिनियम में नई धारा 53क का अंतःस्थापन।- मूल अधिनियम अधिनियम की धारा 53
12121212.... मूल अधिनियम में नई धारा 53क का अंतःस्थापन।-
मूल अधिनियम में नई धारा 53क का अंतःस्थापन।-
मूल अधिनियम में नई धारा 53क का अंतःस्थापन।-
के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :- "53क53क53क53क.... कतिपय रकमों का अंतरणकतिपय रकमों का अंतरणकतिपय रकमों का अंतरणकतिपय रकमों का अंतरण---- जहां किसी रकम को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते से केन्द्रीय कर या एकीकृत कर या उपकर के अधीन इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते में अंतरित किया जाता है, वहां सरकार केन्द्रीय कर या एकीकृत कर या उपकर खाते को, इलैक्ट्रॉनिक नकद खाते से अंतरित की गई रकम के बराबर रकम का ऐसी रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, अंतरण करेगी"। मूल अधिनियम की धारा 54 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 54 में उपधारा (8) के 13131313.... मूल अधिनियम की धारा 54 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 54 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 54 में संशोधन।- पश्चात् निम्नलिखित उपधारा दिनांक 01 सितम्बर, 2019 के प्रभाव से अंतः स्थापित की
जाएगी, अर्थात् :-
"(8क) जहां केन्द्र सरकार ने राज्य कर के रिफंड को वितरित कर दिया है, सरकार
रिफंड की गयी धनराशि के बराबर राशि केन्द्र सरकार को हस्तांतरित करेगी।"।
14141414.... मूल अधिनियम की धारा 95 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 95 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 95 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 95 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 95 में, -
(i) खंड (क) में,-
7 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019(क) "अपील प्राधिकरण" शब्दों के स्थान पर, "अपील प्राधिकरण या राष्ट्रीय अपील
प्राधिकरण" शब्द रखे जाएंगे।
(ख) "धारा 100 की उपधारा (1)" शब्दों, अंकों और कोष्ठकों के स्थान पर, "धारा 100
की उपधारा (1) या धारा 101ग" शब्द, अंक, कोष्ठक और अक्षर रखे जाएंगेय
(ii) खंड (ङ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"(च) 'राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण' से धारा 101क में निर्दिष्ट राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय
अपील प्राधिकरण अभिप्रेत है।"।
मूल अधिनियम में नई धारा 101क, धारा 101ख और धारा 101ग का अंतःस्थापन।- मूल
15151515.... मूल अधिनियम में नई धारा 101क, धारा 101ख और धारा 101ग का अंतःस्थापन।-
मूल अधिनियम में नई धारा 101क, धारा 101ख और धारा 101ग का अंतःस्थापन।-
मूल अधिनियम में नई धारा 101क, धारा 101ख और धारा 101ग का अंतःस्थापन।-
अधिनियम अधिनियम की धारा 101 के पश्चात् निम्नलिखित धारायें अंतःस्थापित की जाएगी,
अर्थात् :- "101क101क101क101क.... राष्टराष्टराष्टराष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण का गठन ीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण का गठन---- इस अध्याय के प्रावधानों ीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण का गठन ीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण का गठन के अधीन, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 101क के अधीन गठित राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण समझा जायेगा। 101ख101ख101ख101ख.... राष्टराष्टराष्टराष्ट्रीय अपील प्राधिकरण कीय अपील प्राधिकरण कीय अपील प्राधिकरण कीय अपील प्राधिकरण को अपीलो अपीलो अपीलो अपील---- (1) जहां धारा 97 की उपधारा (2) में यथानिर्दिष्ट प्रश्नों के संबंध में, धारा 99 के तहत गठित अपीलीय प्राधिकरण और किसी अन्य राज्य या राज्यों या किसी केन्द्र शासित प्रदेश या केन्द्र शासित प्रदेशों या दोनों के अपीलीय प्राधिकारी द्वारा धारा 101 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 101 की उपधारा (3) के अधीन विरोधाभासी अग्रिम विनिर्णय दिये जाते हैं, वहां आयुक्त द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी या आवेदक, जो धारा 25 में यथाविर्निदिष्ट सुभिन्न व्यक्ति है और जो ऐसे अग्रिम विनिर्णय से व्यथित है तो वह राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण को अपील कर सकेगा। (2) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील, उस तारीख से, जिसको वह विनिर्णय, जिसके विरूद्ध अपील चाही गई है, आवेदकों, संबंधित अधिकारियों और अधिकारिता रखने वाले अधिकारियों
को संसूचित किया गया है, तीस दिन की अवधि के भीतर फाईल की जाएगी :
परन्तु आयुक्त द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, उस तारीख से, जिसको वह विनिर्णय, जिसके
विरूद्ध अपील चाही गई है, संबंधित अधिकारी और अधिकारिता रखने वाले अधिकारी को
संसूचित किया गया है, नब्बे दिन की अवधि के भीतर फाइल कर सकेगा :
परन्तु यह और कि राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण, यदि उसका यह समाधान हो जाता है
कि अपीलार्थी को, यथास्थिति, उक्त तीस दिन या नब्बे दिन के भीतर अपील प्रस्तुत करने से
पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था, तो वह ऐसी अपील को तीस दिन से अनधिक
और अवधि के भीतर प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा।
स्पष्टीकरण- शंकाओं के निराकरण के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि यथास्थिति
तीस दिन या नब्बे दिन की अवधि की गणना, उस तारीख से की जाएगी, जिसको अंतिम
विरोधाभासी विनिर्णय को, जिसके विरूद्ध अपील चाही गई है, संसूचित किया गया था।
(3) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप में होगी, उसके साथ ऐसी फीस होगी और
उसे ऐसी रीति में सत्यापित किया जाएगा, जो विहित की जाए।
101ग101ग101ग101ग.... राष्टराष्टराष्टराष्ट्रीय अपील प्राधिकरण का आदेश-ीय अपील प्राधिकरण का आदेश-ीय अपील प्राधिकरण का आदेश-ीय अपील प्राधिकरण का आदेश-
(1) राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण, आवेदक, आयुक्त द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, केंद्रीय कर के सभी
प्रधान मुख्य आयुक्त और मुख्य आयुक्त तथा सभी राज्यों के राज्य कर मुख्य आयुक्त और
आयुक्त और सभी संघ राज्यक्षेत्रों के संघ राज्यक्षेत्र कर के मुख्य आयुक्त और आयुक्त को
8 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22226666 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् उस विनिर्णय को, जिसके विरूद्ध अपील की गई है, पुष्ट या
उपांतरित करने वाला ऐसा आदेश पारित करेगा, जो वह ठीक समझे। (2) यदि राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण के सदस्यों की किसी बिन्दु या बिन्दुओं पर भिन्न राय है, तो उसका विनिश्चय बहुमत की राय के अनुसार किया जाएगा। (3) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट आदेश धारा 101 ख के अधीन अपील फाइल करने की तारीख से यथासंभव रूप से नब्बे दिन की अवधि के भीतर अवधारित किया जाएगा। (4) राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण द्वारा सुनाए गए अग्रिम विनिर्णय की प्रति को सदस्यों द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित और ऐसी रीति में प्रमाणित किया जाएगा, जो विहित की जाए, और उसे सुनाए जाने के पश्चात्, यथास्थिति, आवेदक, आयुक्त द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, बोर्ड, सभी राज्यों के राज्य कर के मुख्य आयुक्त और आयुक्त तथा सभी संघ राज्यक्षेत्रों के संघ राज्यक्षेत्र कर के मुख्य आयुक्त को और प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण को भेजा जाएगा।''। 16161616.... मूल अधिनियम की धारा 102 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 102 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 102 में,- मूल अधिनियम की धारा 102 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 102 में संशोधन।- (क) ''अपील प्राधिकरण'' शब्दों के पश्चात् दोनों स्थानों पर, जहां वे आते हैं, ''या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण'' शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगेः
(ख) "धारा 98 या धारा 101" शब्दों और अंकों के स्थान पर, "यथास्थिति, धारा 98
या धारा 101 या धारा 101ग" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
(ग) "या अपीलार्थी" शब्दों के स्थान पर " ,अपीलार्थी, प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण"
शब्द रखे जाएगें।
17171717.... मूल अधिनियम की धारा 103 में संशामूल अधिनियम की धारा 103 में संशामूल अधिनियम की धारा 103 में संशामूल अधिनियम की धारा 103 में संशोधन।- ेधन।- ेधन।- ेधन।- मूल अधिनियम की धारा 103 में,-
(i) उपधारा (1) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
"(1क) राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण द्वारा इस अध्याय के अधीन सुनाया गया अग्रिम
विनिर्णय निम्नलिखित पर आबद्धकर होगा-
(क) आवेदक, जो सुभिन्न व्यक्ति हैं, जिन्होंने धारा 101ख की उपधारा (1) के अधीन
विनिर्णय चाहा है और वे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनका वही स्थायी खाता संख्यांक है
(आय-कर अधिनियम, 1961 के अधीन जारी किया गया);
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट आवेदकों और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनका आय-कर
अधिनियम, 1961 के अधीन जारी किया गया समान स्थायी खाता संख्यांक है, की बाबत
संबंधित अधिकारी और अधिकारिता रखने वाले अधिकारी।";
(ii) उपधारा (2) में "उपधारा (1)" शब्द, कोष्ठकों और अंक के पश्चात् "और उपधारा (1क)"
शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे।
मूल अधिनियम की धारा 104 में संशोधन।-मूल अधिनियम की धारा 104 में, उपधारा (1) में, -
18181818.... मूल अधिनियम की धारा 104 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 104 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 104 में संशोधन।-
(क) "प्राधिकारण या अपील प्राधिकरण" शब्दों के पश्चात् "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण"
शब्द रखे जाएंगे;
(ख) "धारा 101 की उपधारा (1) के अधीन" शब्दों, अंकों और कोष्ठकों के पश्चात् "या
धारा 101ग के अधीन" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे।
19191919.... मूल अधिनियम की धारा 105 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 105 में संशोधन।- मूल अधिनियम की की धारा 105 में,-
मूल अधिनियम की धारा 105 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 105 में संशोधन।-
(क) शीर्ष के स्थान पर निम्नलिखित शीर्ष रखा जाएगा, अर्थात् :-
"प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की शक्तियां";
(ख) उपधारा (1) में, "अपील प्राधिकरण" शब्दों के पश्चात् "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण"
शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
9 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26262626 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019(ग) उपधारा (2) में, "अपील प्राधिकरण" शब्दों के पश्चात् "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" शब्द
अंतःस्थापित किए जाएंगे।
20202020.... मूल अधिनियम की धारा 106 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 106 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 106 में, -
मूल अधिनियम की धारा 106 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 106 में संशोधन।-
(क) शीर्ष के स्थान पर निम्नलिखित शीर्ष रखा जाएगा, अर्थात् :-
"प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की प्रक्रिया";
(ख) "अपील प्राधिकरण" शब्दों के पश्चात् "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" शब्द अंतःस्थापित किए
जाएंगे।
मूल अधिनियम की धारा 171 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 171 की उपधारा (3) के
21212121.... मूल अधिनियम की धारा 171 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 171 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 171 में संशोधन।-
पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"(3क) जहां उक्त उपधारा की अपेक्षानुसार जांच करने के पश्चात् उपधारा (2) में निर्दिष्ट
प्राधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने उपधारा (1) के अधीन
मुनाफाखोरी की है, वहां ऐसा व्यक्ति इस प्रकार मुनाफाखोरी की गई रकम के दस प्रतिशत के
बराबर शास्ति का संदाय करने का दायी होगा :
परंतु ऐसी कोई शास्ति उद्ग्रहणीय नहीं होगी यदि मुनाफाखोरी की रकम को प्राधिकरण
द्वारा आदेश पारित किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर जमा करा दिया गया है।
स्पष्टीकरण- स्पष्टीकरण- स्पष्टीकरण- स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए "मुनाफाखोरी" पद से ऐसी रकम अभिप्रेत है,
जिसे माल या सेवा या दोनों के प्रदाय पर कर की दर में कमी का फायदा या इनपुट कर
प्रत्यय का फायदा माल या सेवा या दोनों की कीमत में कमी की अनुरुपता के माध्यम से
प्राप्तिकर्ता को नहीं देने के कारण अवधारित किया गया है।"।
22222222.... मूल अधिनियम की धारा 174 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 174 में संशोधन।- मूल अधिनियम की धारा 174 में,
मूल अधिनियम की धारा 174 में संशोधन।-
मूल अधिनियम की धारा 174 में संशोधन।-
01 जुलाई, 2017 के प्रभाव से उपधारा (1) के पश्चात् निम्नलिखित नयी उपधारा (1क)
अंतःस्थापित की जायेगी और हमेशा अंतःस्थापित की हुई समझी जाएगी-
''(1क) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी -
(क) उपधारा (1) के खंड (ग) के प्रावधान वाणिज्य-कर विभाग, बिहार सरकार,
पटना द्वारा जारी अधिसूचना सं॰ एस॰ओ॰ 391, दिनांक 10 नवम्बर, 2011 पर लागू
नहीं होंगे, और
(ख) वाणिज्य-कर विभाग, बिहार सरकार, पटना द्वारा जारी अधिसूचना सं॰
एस॰ओ॰ 391, दिनांक 10 नवम्बर, 2011 की वैधता दिनांक 30 जून, 2017 तक
विस्तारित की जाती है।''
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 11 की उपधारा (1111) के अधीन जारी के अधीन जारी के अधीन जारी के अधीन जारी
23232323.... बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 11 की उपधारा
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 11 की उपधारा
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 11 की उपधारा
अधिसूचना संअधिसूचना संअधिसूचना संअधिसूचना सं॰ 555545 का भूतलक्षी रूप से संशोधन।- 45 का भूतलक्षी रूप से संशोधन।- 45 का भूतलक्षी रूप से संशोधन।- 45 का भूतलक्षी रूप से संशोधन।- (1) बिहार माल और सेवा कर अधिनियम,
2017 की धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन परिषद् की सिफारिशों पर राज्य सरकार द्वारा
जारी वाणिज्य-कर विभाग की अधिसूचना संख्या 02/2017-राज्य कर (दर), दिनांक 29 जून,
2017, जिसे बिहार गजट असाधारण अंक संख्या- 545, दिनांक 29 जून 2017 द्वारा
प्रकाशित किया गया था, की अनुसूची में क्रम सं. 103 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के
पश्चात् निम्नलिखित क्रम संख्यांक और प्रविष्टियां अंतःस्थापित की जाएंगी और 1 जुलाई,
2017 से भूतलक्षी रुप से अंतःस्थापित की हुई समझी जाएंगी, अर्थात् :-
1 2 3
"103क 26 यूरेनियम अयस्क सांद्र"।
10 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 22226666 uoEcjuoEcjuoEcjuoEcj 2019201920192019(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए सरकार के पास उक्त धारा में विनिर्दिष्ट
अधिसूचना का भूतलक्षी रुप से इस प्रकार संशोधन करने की शक्ति होगी और होनी समझी
जाएगी मानो सरकार के पास उक्त अधिनियम की धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन उक्त
अधिसूचना का भूतलक्षी रुप से संशोधन करने की शक्ति सभी तात्विक समयों पर थी।
(3) कोई प्रतिदाय सभी ऐसे करों, जिन्हें संग्रहित किया गया है, किंतु जो संग्रहित नहीं
किए गए होते यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना सभी तात्विक समयों पर प्रवृत्त हुई होती,
में से नहीं किया जाएगा।
विविविवित्तीय संलेखाीय संलेखाीय संलेखाीय संलेख
प्रस्तावित बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2019 में राज्य की संचित निधि से कोई
आवर्ती या गैर-आवर्ती व्यय शामिल नहीं है।
विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।
सुशील कुमार मोदी,
भार-साधक सदस्य।
उउउउद्देश्य एवं हेतु
ेश्य एवं हेतु
ेश्य एवं हेतु
ेश्य एवं हेतु
दिनांक 01 जुलाई, 2017 से पूरे देश में माल और सेवा कर प्रणाली लागू है। तद्नुसार राज्य में
भी बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 प्रख्यापित किया गया है।
इस कर प्रणाली के सर्वथा नये होने के कारण इसे लागू किये जाने के उपरान्त इसके कई प्रावधानों को लेकर कठिनाईयाँ अनुभूत की गई, जिसपर जीएसटी परिषद् की बैठकों में विचार किया गया। परिषद् द्वारा अनुशंसित संशोधनों के आलोक में संसद द्वारा यथा पारित वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2019 के माध्यम से केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की कई धाराओं में संशोधन किये गये है एवं कुछ नई धारायें अंतःस्थापित की गई है। वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2019 भारत के राजपत्र में दिनांक 01 अगस्त, 2019 को प्रकाशित भी किया जा चुका है। चूंकि केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम तथा राज्य माल और सेवा कर अधिनियम एक दूसरे के प्रतिबिंब (Mirror Image) हैं। अतः केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम में किये गये किसी भी संशोधन के आलोक में बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन किया जाना वांछनीय है। प्रस्तावित (संशोधन) विधेयक की मुख्य बातों में कम्पोजीसन लेवी का लाभ सेवा प्रदाताओं को भी उपलब्ध कराये जाने हेतु अधिनियम की धारा 10 में संशोधन, केवल मालों के आपूर्तिकर्ताओं के मामले में निबंधन हेतु Aggregate Turnover की सीमा में वृद्धि हेतु अधिनियम की धारा 22 में संशोधन, निबंधित एवं निबंधन के लिए इच्छुक व्यवसायियों के लिए आधार संख्यांक की अनिवार्यता हेतु अधिनियम की धारा 25 में संशोधन, रिटर्न फाईलिंग की प्रस्तावित नई व्यवस्था के अनुरूप धारा 39 में संशोधन, वार्षिक विवरणी दाखिल करने की समय सीमा के विस्तार की शक्तियाँ आयुक्त को प्रदान करने हेतु धारा 44 में संशोधन, Net Cash Tax lability पर ब्याज की गणना हेतु धारा 50 में संशोधन, केन्द्रीय स्तर से राज्य करों का रिफंड वितरित किये जाने के परिणाम स्वरूप राज्य सरकार द्वारा रिफंड की गई राशि के बराबर राशि केन्द्र सरकार को हस्तांरित करने हेतु हेतु धारा 54 में संशोधन, अग्रिम विनिर्णय हेतु राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण के गठन के संबंधित धारा 95, धारा 102, धारा 103, धारा 104, धारा 105 एवं धारा 106 में संशोधन एवं मुनाफाखोरी के मामलों में शास्ति अधिरोपण हेतु धारा 171 में संशोधन किया जाना आदि शामिल हैं।
बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन कराना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य
है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का मुख्य अभीष्ठ है।
सुशील कुमार मोदी,
भार-साधक सदस्य।
बटेश्वर नाथ पाण्डेय,
पटना,
दिनांक 26.11.2019
सचिव,
बिहार विधान सभा।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1290%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in