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बिहार राज्य वन विकास निगम लि. का गठन वन विभाग, बिहार के संकल्प संख्या-वन निगम-6/74-225-व. दिनांक 20.01.1975 द्वारा किया गया था तथा दिनांक-10.02.1975 को इसका विधिवत निबंधन हुआ।
नवम्बर, 2000 में राज्य पुनर्गठन के पश्चात निगम के आस्तियों एवं दायित्वों का बिहार एवं झारखण्ड प्रदेशों के बीच विभाजन हेतु पूर्व में निगम के कार्य कलापों एवं अर्जित राजस्व के आधार पर दिनांक-05.03.2002 को 15ः85 के अनुपात में प्रस्ताव दिया गया। किन्तु झारखंड सरकार द्वारा इस पर बिना कोई सार्थक कार्रवाई किए पृथक रूप से दिनांक-23.03.2002 को झारखण्ड राज्य वन विकास निगम लि. का गठन कर लिया गया तथा झारखण्ड राज्य की भौगोलिक सीमा में स्थित निगम की संपतियों को अपने अधीन लेकर उसकी सीमा में पदस्थापित निगम कर्मियों से कार्य लिया जाने लगा। बिहार राज्य वन विकास निगम लि. के द्वारा इसको माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी (CWJC No. 939/2003)। लेकिन माननीय उच्च न्यायालय के पारित आदेश के विरूद्ध झारखण्ड सरकार द्वारा पहले LPA No. 91/2004 दायर किया गया। उक्त LPA में माननीय उच्च न्यायालय के आदेष के विरूद्ध माननीय उच्चतम् न्यायालय मेें अपील दायर किया गया। माननीय उच्चतम् न्यायालय द्वारा सक्षम स्तर पर मामले का निस्तारण करने का निदेश दिया गया। गृहमंत्रालय, भारत सरकार से इस संदर्भ में राज्य सरकार द्वारा कई बार अनुरोध किया गया।
बिहार सरकार द्वारा (अठारह) बोर्ड/निगमों के साथ बिहार राज्य वन विकास निगम लि. के परिसमापन का भी निर्णय लिया गया था लेकिन आस्तियों एवं देनदारियों का बँटवारा विधिवत् सम्पन्न नहीं होने के कारण अभी तक इस निगम का परिसमापन नहीं हो सका है। सरकार के आदेशानुसार निगम द्वारा परिसमापन हेतु कम्पनी पीटीशन संख्या-04/07 माननीय पटना उच्च न्यायालय में दायर किया गया था। दिनांक 05.10.2007 को माननीय उच्च न्यायालय ने निगम की परिसंपाियों एवं दायित्वों के शीघ्र विभाजन हेतु केन्द्र सरकार से अनुरोध करने एवं अन्य कारगर कार्रवाई करने से संबंधित आदेश पारित करते हुए कम्पनी पीटीशन को निष्पादित कर दिया गया। पुनः MJC No. 919/2010 में दिनांक 29.02.2012 को पारित आदेश के आलोक में मुख्य सचिव, बिहार एवं मुख्य सचिव, झारखण्ड के साथ दिनांक-22.08.2012 को बैठक की गई जिसमें बिहार राज्य वन विकास निगम लि0 के आस्तियों एवं दायित्वों के बँटवारे के संबंध में सिद्धांत तक किए गए। उक्त बैठक का कार्यवाही प्रतिवेदन झारखण्ड सरकार को2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:25)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:27)! 3 ॢदस&बर 2(cid:26)1(cid:23) अनुमोदनार्थ भेजा गया। बिहार तथा झारखंड राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक में बनी सहमति के बिन्दुओं के संदर्भ में बिहार सरकार द्वारा लिए गए अंतिम निर्णय से वन एवं पर्यावरण विभाग, झारखंड सरकार को अवगत कराए जाने का अनुरोध सरकार के विषेष सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग, झारखंड सरकार के पत्रांक-2206 दिनांक-25.04.2015 से किया गया है।
बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अन्तर्गत बिहार राज्य वन विकास निगम लि. (सम्प्रति अकार्यरत) के आस्तियों, दायित्वों एवं कर्मियों के बिहार और झारखंड राज्यों के बीच विभाजन पर मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में दिनांक-22.08.2012 को सम्पन्न उच्च स्तरीय बैठक में बनी सहमतियों का अनुमोदन पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक-3415/प.व., पटना-15, दिनांक-01.11.2012 द्वारा झारखण्ड सरकार को भेजा गया। वन एवं पर्यावरण विभाग, झारखंड सरकार के पत्रांक 2206, दिनांक 25.04.2015 द्वारा बिहार राज्य वन विकास निगम लि0 की परिसम्पतियों, देनदारियों तथा कर्मचारियों के विभाजन के संबंध में उक्त बैठक में बने सहमति के बिन्दु के संदर्भ में बिहार सरकार द्वारा लिये गये अंतिम निर्णय से झारखंड सरकार को अवगत कराने का अनुरोध किया गया। 2. मुख्य सचिव, बिहार तथा मुख्य सचिव, झारखंड की उक्त बैठक में यह सहमति बनी कि बिहार राज्य वन विकास निगम लि0 की परिसम्पतियों, देनदारियों तथा कर्मचारियों के विभाजन के संबंध में निम्नांकित बिन्दुओं पर विचारोंपरांत दोनों राज्य सरकारों द्वारा अंतिम निर्णय लिया जायेगा-
(क) बँटवारे का कट ऑफ डेट 01.04.2002 माना जा सकता है, क्योंकि इस तिथि तक बिहार राज्य वन विकास निगम दोनों राज्यों में कार्यरत था। तद्नुसार राज्य गठन के बाद 01.04.2002 तक का बैलेन्सशीट इत्यादि झारखण्ड राज्य वन विकास निगम को उपलब्ध कराया जाय। (ख) कर्मियों के विभाजन के संबंध में दिनांक 01.04.2002 को, जो कर्मचारी जहाँ पदस्थापित है, उनको उसी निगम का कर्मचारी माना जाय। 10 वर्षों के बाद एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानान्तरण/पदस्थापन उचित नहीं है। फलस्वरूप 01.04.2002 के पूर्व के पदाधिकारियों/ कर्मचारियों को देय राशि (वेतन, पेंशन, भविष्य निधि आदि) के बकाये का भुगतान बिहार राज्य वन विकास निगम द्वारा ही किया जायेगा, क्योंकि उस तिथि तक सभी राजस्व बिहार राज्य वन विकास निगम के खाते में ही गया है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि 01.04.2002 के पूर्व की कोई देयता अब नहीं है। सभी का भुगतान किया जा चुका है।
(ग) परिसंपाियों एवं देयताओं का बँटवारा बिहार एवं झारखण्ंड के वन निगमों के बीच 25ः75 के अनुपात में किया जा सकता है, क्योंकि इन दोनों राज्यों के बीच वन क्षेत्रों का अनुपात 22ः78 है और इसी अनुपात में वन विभाग के पदाधिकारियों और कर्मचारियों का बँटवारा भी हुआ है। अचल संपाियों का बँटवारा As is where is basis पर दोनों निगमों के बीच किया जाय। चल संपाि यथा फर्नीचर, गाड़ी इत्यादि भी As is where is basis के आधार पर बाँट दिया जाय, क्योंकि उनका एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानान्तरण अव्यवहारिक होगा।
(घ) बिहार सोलवेन्ट एण्ड केमिकल्स लि. तथा बिहार स्टेट टैनिन एक्सट्रैक्ट लि., जिसमेंं बिहार राज्य वन विकास निगम मात्र एक अंशधारक है, क्रमशः वर्ष 1995-96 एवं 1994-95 से लगभग बंद है। यह निगम स्वतंत्र होने के कारण उनके संबंध में अलग से निर्णय लिया जाय। 3333.... उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार राज्य सरकार द्वारा सम्यक विचारोंपरांत बिहार राज्य वन विकास निगम लि0 के आस्तियों, दायित्वों एवं कर्मियों का विभाजन बिहार और झारखंड के बीच निम्नलिखित रूप से किए जाने का निर्णय लिया जाता हैः-
(i) बिहार राज्य वन विकास निगम लि. के आस्तियों एवं दायित्वों के बिहार एवं झारखण्ड राज्य के बीच विभाजन का कट ऑफ डेट 01.04.2002 माना जायेगा।
(ii) बिहार राज्य वन विकास निगम लि० के जो कर्मचारी दिनांक-01.04.2002 को जिस राज्य की भौगोलिक सीमा में पदस्थापित थे, उन्हें उसी राज्य के वन निगम का कर्मचारी माना जायेगा। (iii) बिहार राज्य वन विकास निगम लि. की परिसंपाियों एवं देयताओं का बँटवारा बिहार एवं झारखण्ड के वन निगमों के बीच 25ः75 के अनुपात में, निगम की अचल सम्पति का बँटवारा As is where is basis एवं चल संपाि यथा फर्नीचर, गाड़ी इत्यादि भी As is where is basis के आधार पर बाँटा जायेगा।
(iv) बिहार सोलवेन्ट एण्ड केमिकल्स लि. तथा बिहार स्टेट टैनिन एक्सट्रैक्ट लि., जिसमेंं बिहार राज्य वन विकास निगम मात्र एक अंशधारक है, क्रमशः वर्ष 1995-96 एवं 1994-95 से लगभग बंद है। ये निगम स्वतंत्र होने के कारण उनके संबंध में अलग से निर्णय लिया जायेगा।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:25)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:27)! 3 ॢदस&बर 2(cid:26)1(cid:23) 4. बिहार राज्य वन विकास निगम लि. (सम्प्रति अकार्यरत) के आस्तियों, दायित्वों एवं कर्मियों के बिहार और झारखंड राज्यों के बीच विभाजन हेतु प्रबंध निदेषक, बिहार राज्य वन विकास निगम लि., पटना एवं प्रबंध निदेषक, झारखंड राज्य वन विकास निगम लि. राँची द्वारा विवरणी तैयार करने की कार्रवाई की जायेगी।
आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में सर्वसाधारण आदेशः- आदेशः- आदेशः- आदेशः- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में सर्वसाधारण आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में सर्वसाधारण आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में सर्वसाधारण की की की की जानकारी हेतु प्रकाषित किया जाय।जानकारी हेतु प्रकाषित किया जाय।जानकारी हेतु प्रकाषित किया जाय।जानकारी हेतु प्रकाषित किया जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से, दीपक कुमार सिंह,दीपक कुमार सिंह,दीपक कुमार सिंह,दीपक कुमार सिंह, सरकार के प्रधान सचिव।सरकार के प्रधान सचिव।सरकार के प्रधान सचिव।सरकार के प्रधान सचिव।
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