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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 January 2020

Published 01 January 2020

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2020-01-01.1
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 3-3 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची पृष्ठ

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। ---

पूरक

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पूरक-क 4-12बिहार गजट, 1 tuojh 2020 2 भाग-1 नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। —————

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------- अधिसूचना 23 दिसम्बर 2019

सं0 वन भूमि-75/2018-1783(ई0)/प०व०--विभागीय अधिसूचना संख्या-747 (ई0) दिनांक 25.06.2019 द्वारा गठित राज्य कैम्पा प्राधिकरण के कंडिका- 'ज'(3) में वर्णित प्रावधानों के आलोक में मुख्य वन संरक्षक, मानव संसाधन एवं विकास, बिहार, पटना को संयुक्त मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, स्टेट कैम्पा प्राधिकरण, बिहार, पटना नामित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

------- जल संसाधन विभाग ------ आवश्यक सूचना 23 दिसम्बर 2019 विषय-रब्बी सिंचाई 2019-20 के दौरान पश्चिमी कोशी नहर प्रणाली की नहरों के अवशेष/ पुनस्र्थापन कार्यों हेतु जलश्राव बंद रखने के संबंध में । सं0 सिं0 को0-01/2001 पार्ट-III-755--मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, दरभंगा के परिक्षेत्राधीन पश्चिमी कोशी नहर प्रणाली की निम्नलिखित नहरों के अवशेष/पुनस्र्थापन कार्यों के कारण आगामी रब्बी सिंचाई 2019-20 की अवधि में जलापूर्ति बंद रखने का निर्णय लिया गया है :- (i) काकरघाटी शाखा नहर के गोकुल उप वितरणी एवं बरूआर उप वितरणी,

(ii) किंग्स नहर का परसौनी उप वितरणी, बरही उप वितरणी, दरिमा उप वितरणी, सिमरी उप वितरणी एवं विराट उप वितरणी,

(iii) उग्रनाथ शाखा नहर के वि0दू0 11.30 के डाउनस्ट्रीम में तथा इसी शाखा नहर से निसृत देवहार उप वितरणी एवं पालीवाल उप वितरणी,

(iv) झंझारपुर शाखा नहर एवं इससे निसृत डुमरिया उप वितरणी, खैरी उप वितरणी, रखवारी उप वितरणी, देवहार उप वितरणी एवं चिकना उप वितरणी ।

अतः इन नहरों के कमाण्ड क्षेत्र के कृषकों को सूचित किया जाता है कि आगामी रब्बी सिंचाई 2019-20 की अवधि में इन नहरों में जलापूर्ति नहीं की जा सकेगी । उनसे अनुरोध है कि उक्त अवधि में रब्बी सिंचाई हेतु वैकल्पिक व्यवस्था से पटवन करने का कष्ट करेंगे । उपरोक्त कार्य में किसानों का भरपूर सहयोग प्रार्थित है ।

आदेश से, राकेश कुमार, संयुक्त सचिव (प्रबंधन)। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 41—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in3 बिहार गजट, 1 tuojh 2020

भाग-2

बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश,

अधिसूचनाएं और नियम आदि।

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सामान्य प्रशासन विभाग ------ शुद्धि-पत्र 21 नवम्बर 2019 सं0 6/आ.-17/2018-सा.प्र.-15791--श्री दीपक आनंद, भा.प्र.से. (बिहार ः 2007) के विरूद्ध प्रत्यानुपातिक धनार्जन के मामले में दर्ज विशेष निगरानी इकाई थाना कांड संख्या-01/2018 दिनांक 02.01.2018 से संबंधित आरोपों की जाँच के लिए संचालन पदाधिकारी के नियुक्ति से संबंधित सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार के संकल्प ज्ञापांक-3522 दिनांक 13.03.2019 के द्वारा सभी संबंधित को भेजी गयी प्रतियों में यह तारीख लिपिकीय भूलवश 13.02.2019 अंकित हुआ। 2. उक्त विभागीय संकल्प को ज्ञापांक-3522 दिनांक 13.03.2019 के द्वारा निर्गत समझा जाय।

आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 41—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 1 tuojh 2020 4

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित

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सं0 6/आ.-17/2018-सा.प्र.-3522 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 13 मार्च 2019 श्री दीपक आनन्द, भा.प्र.से.(बिहारः2007) सम्प्रति निलंबित एवं श्रीमती शिखा रानी (पति-श्री दीपक आनन्द) के विरूद्ध प्रत्यानुपातिक धर्नाजन के आरोप के संबंध में दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-01/2018 दिनांक 02.01.2018 से उदभुत आरोप के मामले में श्री दीपक आनंद के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1969 के नियम 8 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्रवाई किये जाने के अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में विभागीय ज्ञापन ज्ञापांक संख्या-7811 दिनांक 13.06.2018 निर्गत करते हुए श्री आनन्द से बचाव बयान/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गयी थी।श्री आनन्द के दिनांक11.07.2018 -सह-पठित 26.10.2018 के लिखित बचाव बयान पर सम्यक विचारोपरांत बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं पाया गया और अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8 (6) (ं) के अंतर्गत श्री आनन्द के विरूद्ध गठित आरोप की जाँच हेतु मुख्य जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त करते हुए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नामित करने के लिए निगरानी विभाग को निदेशित करने का निर्णय लिया गया है।

2. तद्‌नुसार, श्री दीपक आनन्द के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को जाँच पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

3. श्री दीपक आनन्द सम्प्रति निलंबित को जाँच पदाधिकारी के समक्ष इस संकल्प की प्राप्ति होने की तिथि से 10 (दस) कार्य दिवसों में अथवा 10 (दस) कार्य दिवसों के बाद विहित किसी समय या उससे अनधिक दस दिनों के अंदर किसी समय जैसा जाँच पदाधिकारी आदेश दें, स्वयं या अपने द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के साथ उपस्थित होंगे। आदेश ः-आदेश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रति सभी सुसंगत कागजातों यथा आरोप का मद, कदाचारिता विवरणी, साक्ष्यों आदि की प्रति के साथ मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं श्री दीपक आनन्द, भा.प्र.से. (बिहारः2007) सम्प्रति निलंबित,मुख्यालय, आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया जाय। साथ ही, निगरानी विभाग को निदेशित किया जाता है कि विभाग के किसी पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त करे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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सं0 सिं॰मो॰ 251/2014-756

जल संसाधन विभाग

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संकल्प

23 दिसम्बर 2019

बिहार सिंचाई अधिनियम 1997 की धारा-46 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नीचे स्तम्भ-3 में अंकित नहर प्रणाली के शीर्ष से लेकर अंतिम छोर तक का जल प्रबंधन, रख-रखाव, राजस्व आकलन/ वसूली आदि कार्य, प्रणाली के नाम सम्मुख स्तम्भ-4 में अंकित कृषक समिति को आंतरित करने का निर्णय सरकार ने लिया है -5 बिहार गजट, 1 tuojh 2020

क्र मांक मुख्य अभियंता परिक्षेत्र/ प्रमंडल का नाम नहर प्रणाली का नाम कृषक समिति का नाम एवं पता समिति का निबंधन संख्या
1 2 3 4 5
1 सिंचाई सृजन, डिहरी/ सोन उच्च स्तरीय नहर प्रमंडल, भभुआ करौन्दा वितरणी करौन्दा वितरणी कृषक समिति ग्राम-सोहसा, पो0-मींव, थाना-बेलाँव, जिला-कैमूर S000125
2 सिंचाई सृजन, डिहरी/ सिंचाई प्रमंडल, भभुआ उसरी वितरणी उसरी वितरणी कृषक समिति ग्राम-अतरवलिया, पो0-कठेज, थाना-मोहनियाँ, जिला-कैमूर S000169
3 सिंचाई सृजन, डिहरी/ सिंचाई प्रमंडल, भभुआ लक्ष्मीपुर वितरणी लक्ष्मीपुर वितरणी कृषक समिति ग्राम-पनसेरवा, पो0-गौरा, थाना-मोहनियाँ, जिला-कैमूर S000168

2. उपर्युक्त नहर प्रणालियों का अंतरण निम्नलिखित मुख्य उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिये किया जायेगा- (क) नहर का संचालन (ख) रख-रखाव एवं संपोषण कार्य (ग) प्रणाली (शाखा नहर/वितरणी/उप वितरणी) के शीर्ष से अंतिम छोर तक पानी का समानुपातिक रूप से वितरण करना । जल का इष्टतम उपयोग करते हुए अधिकाधिक क्षेत्र में सिंचाई करना।

(घ) सिंचित क्षेत्र का लाभान्वित कृषकों के हस्ताक्षर सहित अभिलेख रखना तथा फसल तैयार हो जाने के बाद माँगपत्र संबंधित कृषकों को प्राप्त कराना ।

(ड़) कृषक समिति निर्धारित क्षेत्र से निर्धारित पटवन शूल्क की वसूली कर उसका 70 प्रतिशत सहमति ज्ञापन में वर्णित जिम्मेदारियों के निष्पादन के लिए खर्च करेगी तथा उसका उचित विवरण रखेगी जिसका नियमानुसार अंकेक्षण होगा तथा 30 प्रतिशत राशि, जो राज्य कोष में जमा की जायेगी वह कम से कम पूर्व के तीन वर्षों की वास्तविक उपलब्धि (औसत) के अनुरूप होगी, को वर्ष में दो बार (30 सितम्बर और 31 मार्च तक) कोषागारो में निश्चित रूप से जमा करायेगी जमा करायी गई राशि की सूचना संबंधित कार्यपालक अभियंता के माध्यम से विभाग को दी जायेगी । समिति का यह सतत प्रयास होगा की सिंचित क्षेत्र में क्रमशः वृद्धि होता कि जल्द से जल्द सम्भावित सिंचन क्षेत्र तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो जाय । (च) नहर के पटवन शूल्क की वसूली के समय कृषकों को दी जानेवाली रसीद पुस्तिका जल संसाधन विभाग के संबंधित प्रमंडल से कृषक समिति के सचिव को निर्गत की जायेगी ।

(छ) कृषक समिति नहर शूल्क के रूप में वसूली की गई राशि की सुरक्षा एवं उचित उपयोग के लिये पूरी तरह जिम्मेदार होगी । समिति निबंधन अधिनियम 1860 के अधीन निबंधक को जो वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा समर्पित करेगी उसकी एक प्रति संबंधित कार्यपालक अभियंता के माध्यम से विभाग को प्रेषित करेगी । 3. (क) कृषक समिति एवं विभागीय पदाधिकारी के बीच उत्पन्न विवाद का निपटारा एक आरबिट्रेशन समिति द्वारा किया जायेगा जिसमें दोनों पक्षों द्वारा मनोनित एक-एक सदस्य होंगे एवं तीसरा सदस्य दोनों पक्षों की सहमति से होगा ।

(ख) प्रणाली स्तर समिति एवं ग्रामीण स्तर समिति या एक ग्रामीण स्तर समिति से दूसरी ग्रामीण स्तर समिति या एक सामान्य कृषक एवं ग्रामीण स्तर समिति के कार्यकारिणी के बीच उत्पन्न विवाद का निराकरण आपसी बात-चीत से या फिर किसानों की आम सभा के निर्णय द्वारा किया जायेगा।

(ग) इस प्रणाली का प्रबंधन प्रयोग के रूपमें 5 (पांच) वर्षों के लिये सहमति ज्ञापन में उल्लिखित शर्तों पर अंतरित किया जायेगा ।

(घ) मात्र चालू फसल मौसम में नहर प्रचालन हेतु मेठ एवं मौसमी कर्मचारी यथावत बने रहेंगे और उनका वेतन भुगतान तत्काल विभाग करेगा, लेकिन पटवन शूल्क की वसूली के बाद कृषक समिति उपर्युक्त वेतन भुगतान पर हुए व्यय की राशि को विभाग/सरकार को वापस करे देगी । यह राशि उल्लिखित 30 (तीस) प्रतिशत दी जानेवाली राशि के अतिरिक्त होगी । वास्तविक अंतरण के पूर्व, संबंधित कार्यपालक अभियंता, कृषक समिति से इस आशय का शपथपत्र/अंडरटेकिंग प्राप्त कर लेंगे ।

(ड़) उक्त प्रणाली का प्रबंधन कृषक समिति को सौंपने के तीन वर्षों के बाद इसकी गहन समीक्षा जल संसाधन विभाग द्वारा की जायेगी । यदि कृषक समिति अपने उद्‌देश्यों में सफल नहीं हुई तो समिति से इस प्रणाली का प्रबंधन वापस लेने पर सरकार विचार करेगी ।

4. (क) जिन अंतरित प्रणाली में पुनस्र्थापन, मरम्मति कार्य कराना है उसमें यथासम्भव कृषक समिति के देख-रेख में कार्य कराने के पूर्ण जिम्मेवारी संबंधित कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता एवं मुख्य अभियंता पर होगी। इस संबंध में विभागीय परिपत्र सिं0को0-31/2001-444 पटना, दिनांक 06.07.2004 का शत प्रतिशत पालन किया जायेगा ।6 बिहार गजट, 1 tuojh 2020 (ख) इस प्रणाली को कृषक समिति को सौंपने के बाद उसके रख-रखाव में जल संसाधन विभाग द्वारा आवश्यक तकनीकी सहयोग दिया जायेगा । राजस्व वसूली से संबंधित कार्य-कलापों की समीक्षा/निरीक्षण इत्यादि करने का अधिकार जल संसाधन विभाग को रहेगा ।

(ग) विभागीय परिपत्र संख्या-सिं0को0-23/2003 पार्ट-II-338 दिनांक 09.04.2005 का अनुपालन कृषक समिति के लिये अनिवार्य होगा ।

5. यह आदेश तत्काल प्रभावी होगा ।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार गजट के अगले अंक में सर्वसूचनार्थ प्रकाशित की जाय ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश कुमार, संयुक्त सचिव (प्रबंधन)।

------- सं0 6/श्रम वि॰ आ॰-(02)-13/2018 श्र॰सं॰-3022 श्रम संसाधन विभाग ------ संकल्प 26 दिसम्बर 2019 श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने, घोर अनियमितता एवं कदाचार करने तथा सरकार की छवि धूमिल करने के आरोप प्रमाणित पाये जाने के कारण उनके पेंशन से 100% (शत-प्रतिशत) कटौती का दण्ड अधिरोपित करने के संबंध में।

श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने, घोर अनियमितता एवं कदाचार करने तथा सरकार की छवि धूमिल करने के आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के आलोक में विभागीय संकल्प संख्या-620 दिनांक-21.02.2007 द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई। इस विभागीय कार्यवाही में श्री पी॰एन॰ झा, तत्कालीन अपर सचिव, श्रम संसाधन विभाग संचालन पदाधिकारी तथा श्री रामदेव रजक, संयुक्त श्रमायुक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किये गये। श्री चौधरी द्वारा दायर CWJC No.-7679/2007 संतलाल चौधरी बनाम्‌ बिहार राज्य एवं अन्य में माननीय उच्च न्यायालय, द्वारा दिनांक-06.08.2008 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में उक्त विभागीय कार्यवाही को दिनांक-06.02.2009 (आदेश निर्गत की तिथि से छः माह तक) तक के लिए स्थगित किया गया था। स्थगन आदेश की अवधि समाप्त होने के पश्चात्‌ पुनः श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय संकल्प संख्या-601 दिनांक-17.03.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी एवं श्री गरीब साहू, तत्कालीन अपर सचिव, श्रम संसाधन विभाग, संचालन पदाधिकारी तथा श्री शैलेश कुमार झा, उप श्रमायुक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किये गये। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में यह मंतव्य अंकित किया कि ''निष्कर्ष के तौर पर यह अपराधिक प्रकृति का मामला है। अतः इसका निर्णय निगरानी न्यायालय में ही हो सकता है। अपराधिक कृत्य को विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित नहीं किया जा सकता है।'' संचालित पदाधिकारी के उक्त निष्कर्ष पर सम्यक विचारोपरान्त पाया गया कि अपराधिक कदाचार में लिप्त सरकारी सेवकों के विरूद्ध अपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ विभागीय कार्यवाही भी चलायी जा सकती है क्योंकि दोनों कार्यवाही में पृथक-पृथक जिम्मेवारियाँ बनती हैं। अतएव विभागीय संकल्प संख्या-3192 दिनांक-30.10.2012 द्वारा श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध नए सिरे से विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी श्री भूपेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन संयुक्त सचिव, तथा डॉ॰ अमरकान्त सिंह, उप श्रमायुक्त प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किये गये। श्री सिंह के स्थानान्तरण के पश्चात्‌ विभागीय संकल्प संख्या-377 दिनांक-13.02.2013 श्रीमती इन्दू सिंह, तत्कालीन उप सचिव, संचालन पदाधिकारी नियुक्त की गईं। दिनांक-31.07.2013 को श्री संतलाल चौधरी के सेवा निवृत हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प संख्या-3940 दिनांक-18.10. 2013 द्वारा स्वतः परिवर्तित किया गया। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्ध गठित तीनों आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया। श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री चौधरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर के समीक्षोपरान्त उनके विरूद्ध तीनों आरोप प्रमाणित पाये गये। अतः सक्षम प्राधिकार द्वारा श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त सम्प्रति सेवानिवृत का 100% (शत-प्रतिशत) पेंशन एवं उपदान जब्त किये जाने का दण्ड अधिरोपित किये जाने का औपबंधिक निर्णय लिया गया। प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक-1156 दिनांक-28.04.2014 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्श की मांग की गई। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक-761 दिनांक 30.6.2014 द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध अधिरोपित किये जाने वाले दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की। तदोपरान्त श्री चौधरी के विरूद्ध शत-प्रतिशत पेंशन एवं उपदान जब्त करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक दिनांक-05.08.2014 में स्वीकृति प्राप्त हुई।

2. इसी बीच श्री संतलाल चौधरी द्वारा दायर एल॰पी॰ए॰ संख्या-804/2014 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-07.07.2014 को पारित आदेश में उक्त वाद को दिनांक-09.07.2014 को सूचीबद्ध करने एवं तब तक कोई दण्डादेश पारित नहीं करने का आदेश दिया गया। अतः श्री चौधरी के विरूद्ध दण्ड अधिरोपित किए जाने संबंधी संकल्प निर्गत नहीं किया गया। एल॰पी॰ए॰ संख्या-804/14 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक-22.08.2014 को अंतिम आदेश पारित किया गया, जिसका प्रभावी अंश निम्न प्रकार हैः-"In the result and for reasons discussed above, this7 बिहार गजट, 1 tuojh 2020 appeal partly succeeds. While the order, dated 13.02.2013, passed by Disciplinary Authority directing a fresh enquiry and consequent enquiry report, submitted by the second Enquiry officer, are hereby set aside and quashed, the matters is remitted back to Diciplinary Authority with libery to resume the first enquiry, which had been initiated by the order, dated 21.02.2007, aforementioned by appointing afresh, if necessary, Enquiry Officer and Presenting Officer and if the enquiry is resumed, the writ petitioner-appellant shall be informed accordingly.

We further direct and clarify that if Disciplinary Authority decides to resume the enquiry, appoint Enquiry Authority and/or Presenting Officer, as the case may be, and inform the writ petitioner-appellant accordingly and, thus, having given notice, as regards resumption of the first enquiry, to the writ petitioner-appelant, ensure that unless the writ petitioner-appelant does not co-operate in getting the further enquiry so resumed, expeditiously, the further enquiry is concluded, in accordance with law, within a period of six months from the date of receipt of the notice of the resumption of such further enquiry by the writ petitioner-appellant."

उक्त वर्णित स्थिति में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में SLP दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता की राय ली गयी। विद्वान महाधिवक्ता द्वारा परामर्श दिया गया किः-

After giving my anxious consideration to the import of the order under opinion, Rule 17 & 18 of the Bihar Civil Servant (Classification Control & Appeal), Rule, 2005 and also after having gone through the opinion dated 17.09.2014 given by the Special Secretary cum Additional Law Secretary in this regard, I am of considered view that it may not be appropriate and may not serve any useful purpose by going for SLP in this matter, especially when by the order under reference the Disciplinary Authority has been given the liberty for resumption of the first enquiry.

माननीय न्यायालय के उपरोक्त आदेश तथा विद्वान महाधिवक्ता के परामर्शानुसार मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक दिनांक-23.

12.2014 में श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध दिनांक-05.08.2014 को मंत्रिपरिषद्‌ द्वारा स्वीकृत दण्ड को वापस लिया गया एवं माननीय न्यायालय के निदेशानुसार प्रथम जाँच संकल्प संख्या-620 दिनांक-21.02.2007 को resume करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-145 दिनांक-19.01.2015 द्वारा श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। श्रीमती इन्दु सिंह, तत्कालीन उप सचिव इस विभागीय कार्यवाही की संचालन पदाधिकारी तथा श्री अरूण कुमार, अवर सचिव (श्रम पक्ष) प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किये गये। श्रीमती इन्दु सिंह के स्थानान्तरण होने के पश्चात संकल्प ज्ञापांक-2611 दिनांक-08.09.2015 द्वारा श्री विजय कुमार सिंह, तत्कालीन उप सचिव, श्री विजय कुमार सिंह के स्थानान्तरण हो जाने के पश्चात संकल्प ज्ञापांक-2331 दिनांक-08.08.2016 द्वारा श्री भुवनेश्वर मिश्रा, तत्कालीन अपर सचिव, श्री मिश्रा के सेवा निवृत हो जाने के पश्चात संकल्प ज्ञापांक-308 दिनांक-09.02.2017 द्वारा श्री शैलेश कुमार, तत्कालीन संयुक्त सचिव तथा श्री शैलेश कुमार के सेवा निवृत हो जाने के पश्चात संकल्प ज्ञापांक-1487 दिनांक-21.06.2017 द्वारा श्री वीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त, श्रम संसाधन विभाग इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी नियुक्त किये गये। श्री अरूण कुमार, अवर सचिव-सह-प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का स्थानान्तरण होने के पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1997 दिनांक-04.08. 2017 द्वारा श्री वीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त को पूर्व की भाँति संचालन पदाधिकारी के पद पर यथावत रखते हुये श्री सतीश कुमार शाही, अवर सचिव-सह-प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किये गये।

3. श्री वीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-8106 दिनांक-27.12.2017 द्वारा श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का अधिगम उपलब्ध कराया गया जिसमें उन्होंने श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध गठित तीनों आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई एवं समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-69 दिनांक-09.01.2018 द्वारा श्री चौधरी से पंद्रह दिनों के अंदर द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर अप्राप्त रहने की स्थिति में विभागीय पत्रांक-271 दिनांक-01.02. 2018 एवं पत्रांक-323 दिनांक-06.02.2018 द्वारा श्री चौधरी को पुनः स्मारित किया गया। इसी बीच श्री संतलाल चौधरी द्वारा दायर एम॰जे॰सी॰ संख्या-880/2016 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 06.03.2018 को न्यायादेश पारित किया गया, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत हैः-

"Having heard learned counsel for the parties and on going through the enquiry proceedings produced before us after orders were passed by the Division Bench in detail running to more than 18 pages on 22.08.2014 in Letters Patent Appeal No. 804 of 2014, we find that after the first departmental proceedings was quashed and liberty was granted to the disciplinary authority to appoint a new enquiry officer and a presenting officer and to proceed with the enquiry in accordance with law, nothing has been done, on the contrary, the enquiry has beenबिहार गजट, 1 tuojh 2020 8 completed in a manner which does not meet the requirement of law, no witnesses on behalf of the Department were examined and based on the material already available, i.e. the material in the criminal case and the first enquiry, a finding of guilt has been recorded which is in total violation to the observations made and the direction issued by this Court in Letters Patent Appeal No.804 of 2014."

माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा एम॰जे॰सी॰ संख्या-880/2016 संतलाल चौधरी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक-15.03.2018 को अंतिम आदेश पारित किया गया, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत हैः-

"…………. We accept the regret and also prayer made in the show cause filed on 13th of March, 2018 and dispose of the matter granting liberty to the disciplinary authority to conclude the enquiry and take a final decision in the matter within a period of four months from the date of receipt of a certified copy of this order. Needless to emphasise that the petitioner shall be granted liberty to raise all objections as are permissible in law before the enquiry officer or the disciplinary authority, as the case may be, and they are expected to deal with the objections in accordance with law."

4. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के उक्त न्यायादेश के अनुपालन में संकल्प ज्ञापांक-748 दिनांक-27.03.2018 द्वारा विभागीय पत्रांक-69 दिनांक-09.01.2018, स्मार पत्रांक-271 दिनांक- 01.02.2018 एवं पत्रांक-323 दिनांक-06.02.2018, जिनके माध्यम से श्री संतलाल चौधरी को जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गई थी, को वापस लिया गया तथा श्री वीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी को दो माह के अन्दर जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का आदेश दिया गया। इस विभागीय कार्यवाही के दौरान आरोपित पदाधिकारी श्री संतलाल चौधरी द्वारा दिनांक-06.04.2018, दिनांक-19.04.2018 एवं दिनांक-03.05.2018 को अभ्यावेदन दिया गया जिसमें क्रमशः विभागीय कार्यवाही में आरोपित पदाधिकारी से कनीय पदाधिकारी को संचालन पदाधिकारी नियुक्त करने, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के विपरीत कार्यवाही चलाये जाने, संचालन पदाधिकारी द्वारा नियमावली में दर्ज प्रावधानों के अनुरूप गवाहों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण नहीं किये जाने का उल्लेख किया गया तथा विभागीय कार्यवाही में दाखिल आपत्तियों के निस्तार तक विभागीय कार्यवाही को स्थगित रखने का अनुरोध किया गया। श्री चौधरी की आपत्तियों का निस्तार आदेश ज्ञापांक-1027 दिनांक-09.05.2018 एवं विभागीय पत्रांक-1098 दिनांक-16.05.2018 द्वारा किया गया। इसके पश्चात श्री चौधरी द्वारा दायर CWJC No.- 8740/2018 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-11.05.2018 को पारित न्यायादेश में श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही पर 'Status quo qua' बनाये रखने का आदेश दिया गया। प्रासंगिक मामले में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक-10.08.2018 को निम्नांकित न्यायादेश दिया गयाः-

''In the present case, this court has passed the order dated 11.5.2018 by which status-quo order has been passed. As it appears that the order dated 15.3.2018 passed in M.J.C. No. 880 of 2016 was not brought to the notice of this Court, as the same is in conflict with the order of the Division Bench, in that view of the matter, the order of status-quo is withdrawn. Let the enquiry proceeding should be concluded as per the order passed by this Court. If any objection is filed, the Enquiry Officer or the Disciplinary Authority will look into the matter and will dispose of the same at the final stage.''

माननीय न्यायालय के उपर्युक्त आदेश के आलोक में विभागीय पत्रांक-1984 दिनांक-16.08.2018 द्वारा डॉ॰ वीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी से श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में अगे्रतर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा जाँच प्रतिवेदन यथाशीघ्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-160 दिनांक-11.01.2019 द्वारा इस विभागीय कार्यवाही का अधिगम उपलब्ध कराया गया।

5. संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में आरोपी पदाधिकारी श्री संतलाल चौधरी के बचाव बयान, तथा इस ट्रैप से संबंधित गवाहों यथा- परिवादी श्री रंजीत कुमार, डॉ॰ परवेज अख्तर, तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (टै्रप लीडर) निगरानी, श्री प्रकाश नाथ मिश्र, तत्कालीन आरक्षी उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना-सह-अनुसंधान पदाधिकारी, श्री विनय कुमार सिंह, तत्कालीन पुलिस निरीक्षक, निगरानी, श्री सोनु चौहान स्वतंत्र गवाह एवं श्री संजय कुमार राव, स्वतंत्र गवाह के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण के आधार पर यह मंतव्य दिया है कि परिवादी श्री रंजीत कुमार ने बयान देकर प्रतिपरीक्षण में भाग लेने से इंकार किया है, अतएव उनके बयान को निरस्त किया जा सकता है। परिवादी द्वारा माननीय विशेष न्यायालय के समक्ष तथा श्रमायुक्त, बिहार के यहाँ दायर अपीलवाद संख्या-07/2006 में भी स्वीकार किया है कि MW वाद संंख्या-44/04 में दिनांक-28.09.2006 को अंतिम आदेश पारित हो गया था और कोई परितोषण (रिश्वत) नहीं मांगा गया था और न ही दिया गया था। उनके द्वारा निगरानी में श्री चौधरी के विरूद्ध कोई रिश्वत शिकायत भी नहीं की गई है। गवाहों के परीक्षण/प्रतिपरीक्षण से यह भी प्रमाणित होता है कि निगरानी विभाग की कार्रवाई MW वाद संख्या-44/04 में अंतिम आदेश पारित होने की बाद की गयी थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आरोपी पदाधिकारी श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध किस परिस्थिति में कार्रवाई की यह समझ से परे है, जबकि परिवादी से रिश्वत मांगे जाने का न तो कोई कारण था न ही कोई9 बिहार गजट, 1 tuojh 2020 परिस्थिति। डॉ० परवेज अख्तर द्वारा माननीय निगरानी न्यायालय में बयान दिया गया है कि उन्होंने अभियुक्त के कार्यालय से MW वाद संख्या-44/04 का अभिलेख प्राप्त नहीं किया था तथा यदि अभिलेख प्राप्त करता तो वाद झूठा हो जाता। माननीय निगरानी न्यायालय में हुये प्रतिपरीक्षण में भी उन्होंने कहा है कि उनके सामने Demand और Acceptence नहीं हुआ तथा श्री विनय कुमार सिंह, पुलिस निरीक्षक, निगरानी विभाग द्वारा अपने बयान/प्रतिपरीक्षण में कहा गया है कि श्री चौधरी द्वारा न तो रिश्वत की मांग की गई न ही रिश्वत की राशि ली गई। स्वतंत्र गवाह संजय कुमार राव तथा सोनू चौहान ने ट्रैप की घटना को गलत बताया है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आरोपी पदाधिकारी श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध प्रथम आरोप प्रमाणित नहीं होता है। जब प्रथम आरोप ही प्रमाणित नहीं होता है तो आरोप संख्या-2 एवं आरोप संख्या-3 प्रमाणित नहीं हो सकते।

6. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गई एवं निम्नांकित पाँच बिन्दुओं पर संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमति व्यक्त की गई। अनुशासनिक प्राधिकार की समीक्षोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(2) तथा 18(3) के आलोक में विभागीय पत्रांक-704 दिनांक-19.03.2019 द्वारा असहमति के बिन्दुओं को अभिलिखित करते हुये तथा जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुये श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। असहमति के बिन्दु निम्नवत्‌ हैंः-(i) परिवादी श्री रंजीत कुमार द्वारा दिनांक-18.04.2018 को दिये गये गवाही में टै्रप की घटना को सत्य बताया है। साथ ही दिनांक-19.04.2018 को दिये गये प्रतिपरीक्षण में परिवादी द्वारा उल्लेख किया है कि अपीलवाद संख्या-07/2006 में श्रमायुक्त, बिहार के यहाँ दाखिल दस्तावेजों को उनके द्वारा दायर नहीं किया गया है। दस्तावेज पर हस्ताक्षर उनका है, परन्तु उनका हस्ताक्षर सादा कागज पर लिया गया था कि सारी बकाया राशि मिल जायेगी। इसलिए उन्होंने हस्ताक्षर कर दिया था। उसमें क्या लिखा है, उन्हें नहीं मालूम है। साथ ही परिवादी द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर को दिये गये परिवाद पत्र एवं अपीलवाद संख्या-07/2006 में श्रमायुक्त, बिहार के यहाँ दाखिल Deposition के लिखित हस्तलेख में भिन्नता है जिससे परिवादी द्वारा दिनांक-19.04.2018 को प्रतिपरीक्षण में दिये गये बयान को बल मिलता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री रंजीत कुमार के निगरानी विशेष न्यायालय में दिये गये बयान को अधिकथित करते हुये केवल उन्ही बिन्दुओं पर जोर दिया गया है जिनसे आरोप अप्रमाणित होते हों। संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वयं उल्लेख किया गया है कि परिवादी के दिनांक-19.04.2018 को हुये एकमात्र प्रतिपरीक्षण के दौरान आपके द्वारा जोर-जोर से चिल्लाकर परिवादी को डराया गया। परिवादी की दिनांक- 19.04.2018 के बाद अनुपस्थिति के लिए, आरोपी पदाधिकारी द्वारा उसे डराया जाना, परिवादी का हाथ टूटना एवं आर्थिक तंगी महत्वपूर्ण तथ्य हैं।

(ii) MW वाद संख्या-44/04 में अंतिम आदेश दिनांक-28.09.2006 को पारित किया गया। परन्तु परिवादी श्री रंजीत कुमार द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में परिवाद पत्र दिनांक-20.09.2006 को दिया गया है जो दर्शाता है कि निगरानी में परिवादी द्वारा शिकायत करने के बाद MW वाद संख्या-44/04 में आदेश पारित किया गया। परिवादी श्री रंजीत कुमार द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में दिये गये परिवाद के सत्यापनकर्त्ता, स्व॰ ए॰के॰ वर्मा, तत्कालीन अवर निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर ने दिनांक-11.10.2006 को सत्यापन में परिवाद पत्र को प्रमाणित पाया है जो संकेत करता है कि सम्भवतः दिनांक-11.10.2006 तक परिवादी को MW वाद संख्या-44/04 के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं थी। साथ ही इस संदर्भ में संचालन पदाधिकारी इस तथ्य की स्पष्ट व्याख्या करने में असफल रहे हैं कि आखिर निगरानी विभाग द्वारा आपके विरूद्ध रिश्वत की राशि Plant कर क्यों कार्रवाई की गई।

(iii) डॉ॰ परवेज अख्तर, टै्रप लीडर, तत्कालीन आरक्षी उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा भी दिनांक-04.05.2018 को दिये गये गवाही में टै्रप की घटना को सत्य बताते हुये आपके विरूद्ध आरोप से इंकार नहीं किया है। डॉ॰ अख्तर नेे दिनांक-15.05.2018 को हुये प्रतिपरीक्षण में आपके द्वारा निगरानी विशेष न्यायालय में दिये गये डॉ॰ अख्तर के बयान/प्रतिपरीक्षण की सत्यापित कॉपी को प्रदर्श करते हुये उसे उनका प्रतिपरीक्षण मानने से स्पष्ट इंकार किया है। साथ ही डॉ॰ अख्तर का कहना भी बिल्कुल सही है कि माननीय निगरानी विशेष न्यायालय, पटना में हुआ प्रतिपरीक्षण अपराधिक वाद का परीक्षण था, जबकि आज वे सरकारी कर्मी/पदाधिकारी के आचरण संबंधी अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया विभागीय कार्यवाही में उपस्थित हुये जो अपराधिक वाद से बिल्कुल भिन्न है। डॉ॰ परवेज अख्तर द्वारा माननीय निगरानी न्यायालय में दिया गया बयान कि उन्होंने अभियुक्त के कार्यालय से MW वाद संख्या-44/04 का अभिलेख प्राप्त नहीं किया था एवं यदि अभिलेख प्राप्त करता तो वाद झूठा हो जाता तथा माननीय निगरानी न्यायालय में हुये प्रतिपरीक्षण में कहना कि Demand और Acceptence उनके सामने नहीं हुआ, आरोप खंडित नहीं करता। डॉ॰ अख्तर के बयानों से प्रतीत होता है कि रिश्वत की राशि देने के लिए परिवादी श्री रंजीत कुमार के साथ सत्यापन कर्ता श्री ए॰के॰ वर्मा गये थे। ऐसी स्थिति में डॉ॰ अख्तर द्वारा Demand और Acceptence को न देखा जाना कोई अस्वभाविक घटना प्रतीत नहीं होती है। (iv) विभागीय कार्यवाही के दौरान स्वतंत्र गवाह श्री संजय कुमार राव तथा श्री सोनू चौहान ने अपने परीक्षण/प्रतिपरीक्षण में यह बताया है कि प्री-टै्रप मेमो तथा पोस्ट टै्रप मेमो में लिखी सारे बाते गलत हैं एवं टै्रप उनके सामने नहीं हुआ। यद्यपि इन स्वतंत्र गवाहों ने टै्रप की घटना को अस्वीकार किया है परन्तु इनके बयानों में विरोधाभाष झलकता है क्योंकि उनके बयानों से यह स्पष्ट नहीं होता है कि बेतिया, पश्चिम चम्पारण के निवासी होने के बावजूद वे मुजफ्फरपुर निगरानी कार्यालय में आरोपी पदाधिकारी को देखने के लिए क्यों गये थे?

बिहार गजट, 1 tuojh 2020 10

(v) श्री विनय कुमार सिंह, तत्कालीन आरक्षी निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना एवं श्री प्रकाश नाथ मिश्र, तत्कालीन आरक्षी उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना-सह-अनुसंधान पदाधिकारी के क्रमशः दिनांक-19.04.2018 एवं दिनांक-04.05.2018 को किये गये परीक्षण में भी टै्रप की घटना को सत्य बताते हुये आरोप से इंकार नहीं किया है। श्री प्रकाश नाथ मिश्र से प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया, परन्तु उन्होंने यह बयान दिया है कि इस काण्ड में अनुसंधान करते हुये पर्याप्त साक्ष्य एकत्र कर काण्ड के प्रतिवेदित धाराओं के अभियुक्त श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया है तथा यह मामला माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी टै्रप), पटना में विचाराधीन है।

7. विभागीय पत्रांक-704 दिनांक-19.03.2019 के आलोक में श्री चौधरी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर उनके पत्र दिनांक-26.04.2019 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री संतलाल चौधरी ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में सर्वप्रथम यह कहा है कि इस विभागीय कार्यवाही में उनसे कनीय पदाधिकारी को नियुक्त किया गया जो नियमानुकुल नहीं है। इसके अतिरिक्त उन्होंने उप सचिव द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के लिए निर्गत पत्र को विधि-विराधी कहा है क्योंकि इस संबंध में सक्षम प्राधिकार प्रधान सचिव हैं और उन्हीं के स्तर से द्वितीय कारण पृच्छा निर्गत किया जा सकता है। श्री चौधरी ने असहमति के बिन्दु क्रमांक-1 के संबंध में उल्लेख किया है कि परिवादी श्री रंजीत कुमार ने श्रमायुक्त के यहाँ अपीलवाद संख्या-MW-07/2006 में दिनांक-23.06.2008 को शपथ पत्र दाखिल किया है। उक्त शपथ पत्र के परीक्षण के क्रम में परिवादी रंजीत कुमार ने कहा था MW वाद संंख्या-44/04 में दिनांक-28.09.2006 का आदेश पैसा एवं पैरवी के आधार पर नहीं कराया गया है। निम्न न्यायालय में दिनांक-28.09.2006 को जो निदेश दिये गये हैं उसकी जानकारी उन्हें महामंत्री, लेबर यूनियन से हुई। श्री चौधरी ने यह बचाव बयान दिया है कि विभागीय कार्यवाही के दौरान परिवादी श्री रंजीत कुमार की गवाही प्रतिपरीक्षण के दौरान संचालन पदाधिकारी द्वारा उसे सूझाव के तौर पर शब्द मुहैया कराये गये, पूर्व के बयान से कनफ्रॉन्ट किया गया तथा ट्‌यूटर एवं लीड किया गया। वे इसका विरोध कर रहें थे। निगरानी विभाग द्वारा दिनांक-28.09.2006 को आदेश पारित हो जाने पर जान बूझकर उनके विरूद्ध कार्रवाई की गई। असहमति के बिन्दु क्रमांक-2 के संबंध में श्री संतलाल चौधरी यह तर्क दे रहें है कि MW वाद संख्या-44/04 में दिनांक- 28.09.2006 को आदेश पारित हो जाने के 12-13 दिनों वाद परिवाद का सत्यापन कैसे हो सकता था, जबकि परिवादी ने श्रमायुक्त के यहाँ अपील में तथा निगरानी न्यायालय में प्रतिपरीक्षण में दिये गये बयान में यह स्वीकार किया था कि संबंधित न्यायनिर्णय की जानकारी उसे दिनांक-29.09.2006 को हो गई थी तथा उसने आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध निगरानी के समक्ष कोई शिकायत नहीं की थी। अतः यह परिवाद झूठा है। असहमति के बिन्दु क्रमांक-3 के संबंध में श्री संतलाल चौधरी ने यह उत्तर दिया है कि डॉ परवेज अख्तर, ट्रैप लिडर ने निगरानी न्यायालय में प्रतिपरीक्षण दिया है कि उन्होंने MW वाद संख्या-44/04 से संबंधित रिकॉर्ड की जाँच नहीं की और यदि जाँच करता तो केस झूठा हो जाता। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि Demand और Acceptence उनके सामने नहीं हुआ। असहमति के बिन्दु क्रमांक-4 के संबंध में श्री संतलाल चौधरी कोई स्पष्ट उत्तर नहीं देते हैं उन्होंने उल्लेख किया है कि दोनों स्वतंंत्र गवाह निगरानी विभाग द्वारा दिये गये थे। उन्हें यह पता नहीं था कि उन्हें देखने के लिए मुजफ्फरपुर, निगरानी कार्यालय क्यों गये। असहमति के बिन्दु क्रमांक-5 के संबंध में श्री चौधरी ने उल्लेख किया है कि श्री विनय कुमार सिंह, पुलिस निरीक्षक ने दिनांक-14.09.2018 के प्रतिपरीक्षण में यह बयान दिया है कि रिश्वत की राशि आरोपित पदाधिकारी द्वारा न तो मांग की गयी एवं न लिया गया।

8. श्री संतलाल चौधरी ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में संचालन पदाधिकारी की नियुक्ति के संबंध में जो प्रश्न उठाया है उसके संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-1893 दिनांक-14.06.2011 के अनुसार संचालन पदाधिकारी के रूप में आरोपित सरकारी सेवक से वरीय पदाधिकारी की नियुक्ति की जानी है। डॉ॰ वीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त स्तर के पदाधिकारी हैं जबकि श्री संतलाल चौधरी दिनांक-31.07.2013 को सहायक श्रमायुक्त के पद से ही सेवा निवृत हो चुके हैं। इस तरह संचालन पदाधिकारी के रूप में डॉ॰ वीरेन्द्र कुमार की नियुक्ति नियमानुकूल है। जहाँ तक उप सचिव द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के लिए पत्र निर्गत करने का प्रश्न है इस संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 का नियम 18(3) अनुशासनिक प्राधिकार उसके स्वयं के निष्कर्षो के साथ जाँच प्रतिवेदन की प्रति आरोपित पदाधिकारी को भेजने या भेजवाने का प्रावधान करता है। इस तरह उप सचिव द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के लिए निर्गत नोटिस भी नियमानुकूल है। श्री संतलाल चौधरी ने अनुशासनिक प्राधिकार के असहमति के पाँच बिन्दुओं के संबंध में जो उत्तर समर्पित किया है उससे आरोप खंडित नहीं होते हैं। सर्वप्रथम महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि परिवादी श्री रंजीत कुमार ने विभागीय कार्यवाही के दौरान दिनांक-18.04.2018 को यह बयान दिया है कि उन्होंने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर दिनांक-20.09.2006 को परिवाद पत्र दिया था। दिनांक-13.10.2006 को धावादल के साथ वे भी थे एवं उन्होंने श्री चौधरी के हाथ में पाँच हजार रूपया दिया था। इसके बाद ट्रैप की कार्रवाई की गयी। दिनांक-19.04.208 को दिये गये प्रतिपरीक्षण में परिवादी द्वारा यह कहा गया है कि उन्होंने सहायक श्रमायुक्त, बेतिया के न्यायालय में MW वाद संख्या-44/04 श्री अनुप कुमार, के विरूद्ध दायर किया गया। केस हारने के पश्चात्‌ श्री अनुप कुमार ने श्रमायुक्त के यहाँ अपीलवाद संख्या-07/2006 दायर किया था जिसमें वह प्रतिवादी था। परिवादी श्री रंजीत कुमार ने यह भी कहा है कि अपीलवाद संख्या-07/2006 ने श्रमायुक्त, बिहार के यहाँ दाखिल दस्तावेज उनके द्वारा दायर नहीं किया गया। उनका सादा कागज पर हस्ताक्षर लिया गया था कि बकाया राशि मिल जाएगी, इसलिए उन्होंने हस्ताक्षर कर दिया था। उसमें क्या लिखा था उन्हें मालूम नहीं। परिवादी श्री रंजीत कुमार ने निगरानी न्यायालय में दिये गये बयान में भी श्री चौधरी को पैसा देने से संबंधित तथ्य का उल्लेख किया है। परिवादी ने यह बयान दिया है कि दिनांक-20.09.2006 को निगरानी विभाग मुजफ्फरपुर में परिवाद पत्र दाखिल करने के पश्चात्‌ दिनांक 13.10.2006 को श्री चौधरी से हमलोग मिलने गये तो आरोपी कंधा पर तौलिया रखकर मुँह धो रहे थे तथा बोले कि ऑफिस में बैठिये साथ ही यह भी कहे कि रूपया लाये हो तो मैं उन्हें पैसा दे11 बिहार गजट, 1 tuojh 2020 दिया। परिवादी रंजीत कुमार को विभागीय कार्यवाही में प्रतिपरीक्षण के दौरान डराने एवं डांटने के संबंध में श्री चौधरी का यह बचाव बयान भी विश्वसनीय नहीं हैं कि गवाही प्रतिपरीक्षण के दौरान संचालन पदाधिकारी द्वारा हस्तक्षेप कर परिवादी श्री रंजीत कुमार को सुझाव के तौर पर शब्द मुहैया कराये गये, पूर्व के बयान से कन्फ्रॉन्ट किया गया तथा ट्‌यूटर एवं लीड किया गया जिसका वे विरोध कर रहें थे, क्योंकि संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य नहीं दिया है। संचालन पदाधिकारी ने मंतव्य दिया है कि श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं। श्री चौधरी के बचाव बयान से आरोप खण्डित नहीं होता है।

यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि परिवादी रंजीत कुमार द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में मुजफ्फरपुर में दिनांक-20.09.

2006 को परिवाद पत्र दिया गया एवं दिनांक-11.10.2006 को सत्यापनकर्ता स्व० आनंद किशोर वर्मा, तत्कालीन अवर निरीक्षक अन्वेषण ब्यूरो मुजफ्फरपुर ने परिवाद पत्र को प्रमाणित पाया। स्व० आनंद किशोर वर्मा के सत्यापन प्रतिवेदन से यह भी स्पष्ट होता है कि परिवाद पत्र के सत्यापन हेतु आरोपित पदाधिकारी से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया। किन्तु दशहरा के अवसर पर घर जाने के कारण आरोपित पदाधिकारी से सम्पर्क नहीं हा पाया एवं इसी कारण लगभग बीस दिनों बाद परिवाद पत्र का सत्यापन किया जा सका एवं इस सत्यापित परिवाद पत्र के आलोक में दिनोंक-13.10.2006 को ट्रैप की कार्रवाई की गयी। चूँकि श्री आनंद किशोर वर्मा का निधन हो चुका है अतः उनका परीक्षण/प्रतिपरीक्षण नहीं किया जा सकता। परन्तु इससे उनका सत्यापन प्रतिवेदन गलत नहीं हो जाता। श्री चौधरी अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में यह कह रहे हैं कि लेवर यूनियन के महामंत्री श्री उमेश कुशवाहा से उनके यूनियन के बैधता पर सवाल किया गया था जिसके कारण दुर्भावना से ग्रसित होकर मजदूर श्री रंजीत कुमार को परिवादी बनाकर निगरानी के पदाधिकारीयों से मिलीभगत कर रिश्वत Plant कार्य किया। परन्तु श्री चौधरी अपने कथन के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दे रहे हैं।

श्री चौधरी यह भी उल्लेख कर रहे हैं कि विभागीय कार्यवाही के दौरान परिवादी श्री रंजीत कुमार ने प्रतिपरीक्षण में भाग लेने से इंकार किया एवं प्रतिपरीक्षण में भाग नहीं लेने के कारण संचालन पदाधिकारी ने उनके बयान को निरस्त कर दिया है, अतः परिवादी श्री रंजीत कुमार के बयान को प्रमाणिक नहीं माना जा सकता। परन्तु विभागीय कार्यवाही के अभिलेखों से यह स्पष्ट है कि परिवादी श्री रंजीत कुमार ने दिनांक-18.04.2018 को बयान दिया एवं साथ ही दिनांक-19.04.2018 को प्रतिपरीक्षण में भी भाग लिया। संचालन पदाधिकारी ने दिनांक-19.04.2018 को अपने आदेश पत्रक पर स्वयं उल्लेख किया है कि प्रतिपरीक्षण के शुरूआती दौर में ही आरोपित पदाधिकारी परिवादी श्री रंजीत कुमार को डरा रहे थे। श्री चौधरी आपे से बाहर हो गये और परिवादी को डाँट भी लगाये थे। उपर्युक्त तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि दिनांक-19.04.2018 को परिवादी श्री रंजीत कुमार का प्रतिपरीक्षण हुआ, ऐसी स्थिति में श्री रंजीत कुमार के बयान को निरस्त नहीं किया जा सकता। दिनांक-19.04.2018 के बाद की तिथियों में परिवादी श्री रंजीत कुमार ने विभिन्न कारणों से प्रतिपरीक्षण में भाग नहीं लिया परन्तु इससे श्री रंजीत कुमार द्वारा दिनांक-19.04.2018 को प्रतिपरीक्षण में दिये गये बयान बदल नहीं जाते।

डॉ परवेज अख्तर, तत्कालीन आरक्षी उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना ने इस विभागीय कार्यवाही के दौरान दिनांक-27.03.2018 को यह बयान दिया है कि ''दिनांक-13.10.2006 को परिवादी श्री रंजीत कुमार निगरानी के सभी सदस्यों के साथ मुजफ्फरपुर से 4ः00 बजे प्रातः प्रस्थान कर लगभग 8ः00 बजे प्रातः बेतिया पहुँचे तथा बेतिया में संतलाल चौधरी के आवास के इर्द-गिर्द हमलोग अपहचाने रूप में फैल गये। परिवादी एवं सत्यापनकर्ता को संतलाल चौधरी के आवास पर भेजा गया। करीब 9ः30 बजे प्रातः परिवादी के द्वारा पूर्व निर्धारित संकेत दिया गया जिसे देखकर हम सभी सदस्य श्री संतलाल चौधरी के आवास पर पहुँचे।'' डॉ परवेज अख्तर के बयान से यह स्पष्ट होता है कि रिश्वत की राशि देने के लिए परिवादी श्री रंजीत कुमार के साथ सत्यापनकर्ता आनंद किशोर वर्मा गये थे। अतएव डॉ अख्तर द्वारा Demand और Acceptence को न देखा जाना कोई अस्वभाविक घटना प्रतीत नही होती है एवं इससे आरोप खंडित नहीं होता है। जहाँ तक MW वाद संख्या-44/04 से संबंधित रिकॉर्ड की जाँच करने प्रश्न है, ट्रैप लिडर के नाते डॉ परवेज अख्तर का दायित्व ट्रैप की कार्रवाई करना था, न कि MW वाद संख्या-44/04 से संबंधित रिकॉर्ड की जाँच करना। विभागीय कार्यवाही के दौरान यद्यपि कि दोनों स्वतंत्र गवाहों ने अपने परीक्षण/प्रतिपरीक्षण में यह कहा है कि ट्रैप उनके सामने नहीं हुआ तथा प्री-ट्रैप तथा पोस्ट-ट्रैप मेमोरेंडम में लिखी गयी सारी बातें गलत हैं। जब वे संतलाल चौधरी को देखने के लिये निगरानी कार्यालय मुजफ्फरपुर गये तो देखा कि निगरानी के पुलिस कुछ टाईप कर रहे थे। परन्तु इन दोनों स्वतंत्र गवाहों के बयान में विरोधाभाष है। यह दोनों स्वतंत्र गवाह बेतिया के रहने वाले हैं। आखिर ये श्री संतलाल चौधरी को देखने के लिये निगरानी कार्यालय मुजफ्फरपुर क्यों गये ? श्री चौधरी भी इसका स्पष्ट उत्तर नहीं दे रहे हैं। श्री विनय कुमार सिंह, पुलिस निरीक्षक, निगरानी के द्वारा दिनांक-14.09.2018 को प्रतिपरीक्षण में दिये गये बयान से आरोप खंडित नहीं होता क्योंकि श्री सिंह ने आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप से इंकार नहीं किया। साथ ही श्री प्रकाश नाथ मिश्र, पुलिस उपाधिक्षक, निगरानी द्वारा भी यह बयान दिया है गया है कि (श्री मिश्र का प्रतिपरीक्षण नहीं हुआ) इस घटना में अनुसंधान करते हुए पर्याप्त साक्ष्य घटना के प्रतिवेदित धाराओं के अभियुक्त श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप पत्र दायर किया गया तथा यह मामला माननीय उच्च न्यायालय, निगरानी, पटना में विचाराधीन है। इस प्रकार श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृत्त, द्वारा दिये गये द्वितीय कारण पृच्छा के सम्यक समीक्षोपंरात उनके विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाये गये। फलस्वरूप बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 के अंतर्गत उनके पेंशन की राशि से 100% (शत प्रतिशत) कटौती का दण्ड अधिरोपित करने का औपबंधिक निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया।

9. सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-806 दिनांक-16.01.2018 की कंडिका 7(iv) द्वारा यह प्रावधान किया गया है कि ऐसे सेवानिवृत सरकारी सेवक जिनकी नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग की अनुशंसा के आधार पर होती है, के पेंशन से12 बिहार गजट, 1 tuojh 2020 कटौती का आदेश देने के पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त करते हुये, प्राप्त परामर्श पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाना है। उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक-1973 दिनांक-19.08.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श की मांग की गई। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक-1920 दिनांक-05.11.2019 द्वारा यह उल्लेख किया है कि श्री संतलाल चौधरी के विरूद्ध आयोग के पत्रांक-761 दिनांक 30.06.2014 द्वारा पूर्व में उनके शत-प्रतिशत पेंशन एवं उपदान जब्त करने के विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति दी जा चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना संख्या-9794 दिनांक-22.07.2019 तथा बिहार लोक सेवा आयोग (कार्य सीमन) (संशोधन) विनियमावली, 1957 के विनियम 11(7) के प्रावधानों के आलोक में श्री चौधरी के पेंशन से शत-प्रतिशत कटौती के वर्तमान विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर पुनः आयोग का परामर्श अपेक्षित एवं नियमानुकूल नही है। अतः विषयांकित विभागीय प्रस्ताव को बिना आयोग के परामर्श के वापस किया जाता है।

10. बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त होने के पश्चात्‌ समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि आयोग ने अपने पत्रांक-761 दिनांक 30.06.2014 द्वारा पूर्व में श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवा निवृत के विरूद्ध उनके शत-प्रतिशत पेंशन एवं उपदान जब्त करने के विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति दी जा चुकी है। वर्तमान दण्ड प्रस्ताव पर भी आयोग द्वारा कोई असहमति व्यक्त नहीं की गई है। श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवा निवृत के विरूद्ध घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने, घोर अनियमितता एवं कदाचार करने तथा सरकार की छवि धूमिल करने के आरोप प्रमाणित पाये गये हैं। अतएव श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवा निवृत के विरूद्ध गंभीर आरोपाें के प्रमाणित होने के कारण उन्हें दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 सह पठित नियम 139 के संगत प्रावधानो के अंतर्गत उनके पेंशन की राशि से 100% (शत-प्रतिशत) कटौती का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।

11. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की एक प्रति श्री संतलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त, बेतिया सम्प्रति सेवा निवृत, छवि कमला सदन, आनंदपुरी, पटना-800001 को निबंधित डाक/स्पीड पोस्ट से उपलब्ध करायें।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सूर्यकान्त मणि, उप-सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 41—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 January 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2020-01-01.1/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2020-01-01.1.