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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
20 सितम्बर 2019
सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-14
2011 एवं पत्रांक-5487 4366 दिनांक 13.07.2011 पत्रांक-4962 दिनांक 08.08.2011 एवं पत्रांक-5487
श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, (आई0डी0-3467) तत्कालीन 14-17/2011/2033--श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, (आई0डी0-3467) तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति मुख्य अभियंता, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति मुख्य अभियंता, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी सम्प्रति मुख्य अभियंता, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, अनियमितता, कदाचार एवं पटना के पद पर वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता, कदाचार एवं पटना के पद पर वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 के पदस्थापन काल में बरती गई 2012 द्वारा बिहार सरकारी स्पष्टीकरण उपरांत संकल्प ज्ञापांक-707 दिनांक 02.07.2012 द्वारा बिहार सरकारी अनुशासनहिनता के लिए उनसे स्पष्टीकरण उपरांत संकल्प ज्ञापांक-707 दिनांक वं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत निम्नांकित आरोपों के लिए 17 के अन्तर्गत निम्नांकित आरोपों के लिए सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम- वभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को इस विभागीय कार्रवाई का विभागीय कार्रवाई संचालित की गई, जिसमंें ि विभागीय कार्रवाई संचालित की गई, जिसमंें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को इस विभागीय कार्रवाई का संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 11 द्वारा अधिसूचना निर्गत तिथि से चालू सूचना सं॰-63, 65 एवं 66 दिनांक 14.01.11 द्वारा अधिसूचना निर्गत तिथि से चालू आरोप ः-आरोप ः-आरोप ः-आरोप ः-(1) विभागीय अधिसूचना सं॰-63, 65 एवं 66 दिनांक के पद पर पदावनत कर उन्हे मुख्यालय में योगदान प्रभार में कार्यरत कार्यपालक अभियंताओं को सहायक अभियंता के पद पर पदावनत कर उन्हे मुख्यालय में योगदान प्रभार में कार्यरत कार्यपालक अभियंताओं को सहायक अभियंता देने का निदेश दिया गया था तथा विभागीय पत्रांक-1243 दिनांक 2011 द्वारा मुख्य अभियंता, डिहरी सहित था विभागीय पत्रांक-1243 दिनांक 23.02.2011 द्वारा मुख्य अभियंता, डिहरी सहित संबंधित मुख्य अभियंताओं को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अविलम्ब स्थानीय व्यवस्था से प्रभार संबंधित मुख्य अभियंताओं को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अविलम्ब स्थानीय व्यवस्था से प्रभार संबंधित मुख्य अभियंताओं को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अविलम्ब स्थानीय व्यवस्था से प्रभार वरमित करने का निदेश दिया गया था, परन्तु आपके द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक वरमित करने का निदेश दिया गया था, परन्तु आपके द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक दिलाकर विरमित करने का निदेश दिया गया था, परन्तु आपके द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक अभियंताओं जिन्हें पदावनत किया गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा अभियंताओं जिन्हें पदावनत किया गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा अभियंताओं जिन्हें पदावनत किया गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा गया ताकि में न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकें तथा उन्हें अनुचित लाभ प्राप्त हो सकें। गया ताकि में न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकें तथा उन्हें अनुचि 2011 द्वारा विभागीय आदेश का ससमय अनुपालन ) इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.2011 द्वारा विभागीय आदेश का ससमय अनुपालन (2) इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी, परन्तु आपके द्वारा उक्त नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी, परन्तु आपके द्वारा उक्त नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी, परन्तु आपके द्वारा उक्त करण विभाग को समर्पित नहीं किया गया। जबकि विभाग द्वारा आदेश का अनुपालन न करते हुए अपना स्पष्टी आदेश का अनुपालन न करते हुए अपना स्पष्टीकरण विभाग को समर्पित नहीं किया गया। जबि निर्गत स्मार पत्रांक-4366 दिनांक 2011 के द्वारा बार-बार आपकों स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया गया। इसके बावजूद आपके दिनांक 02.09.2011 के द्वारा बार-बार आपकों स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया गया। इसके बावजूद आपके 2011 के द्वारा बार-बार आपकों स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया गया। इसके बावजूद आपके ीकरण समर्पित करना उचित नहीं समझा गया। इस प्रकार वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना ीकरण समर्पित करना उचित नहीं समझा गया। इस प्रकार वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करना उचित नहीं समझा गया। इस प्रकार वरीय पदाधिकारियों के आदेश की अवहेलना एवं सरकारी कार्याें के निष्पादन के प्रति आपकी उदासीनता स्पष्टतः परिलक्षित होती है जिसके लिए आप प्रथम एवं सरकारी कार्याें के निष्पादन के प्रति आपकी उदासीनता स्पष्टतः परिलक्षित होती है जिसके लिए आप प्रथम एवं सरकारी कार्याें के निष्पादन के प्रति आपकी उदासीनता स्पष्टतः परिलक्षित होती है जिसके लिए आप प्रथम द्रष्टया दोषी है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोि पत पदाधिकारी के विरूद्ध लगाये उक्त सभी आरोपों संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध लगाये उक्त सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मन्तव्य से सहमत होते हुए को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मन्तव्य से सहमत होते हुए को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मन्तव्य से सहमत होते हुए2 (), 6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी 2020202020202020 विभागीय पत्रांक-1376 दिनांक 18.08.2017 से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसका प्रतिउत्तर आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया गया। द्वितीय कारण पृच्छा के प्रतिउत्तर में अंकित बयान पूर्व में पूछे गये स्पष्टीकरण में प्राप्त जवाब के सदृश ही है जो संक्षिप्त में निम्नवत हैः- आरोपी पदाधिकारी का बचाव बयान आरोपी पदाधिकारी का बचाव बयान आरोपी पदाधिकारी का बचाव बयान आरोपी पदाधिकारी का बचाव बयान विभागीय अधिसूचना संख्या-65 एवं 66 दिनांक 14.01.2011 को उनके पत्रांक-215 एवं 216 दिनांक 20.01.11 से अधीक्षण अभियंता सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी, रूपांकण आयोजन एवं मोनिटरिंग अंचल, डिहरी के साथ साथ संबंधित कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराया। उक्त के क्रम में अधीक्षण अभियंता से सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी से पदावनत दो कार्यपालक अभियंताओं का प्रभार दिलाने संबंधित प्रस्ताव का अनुमोदन इनके पत्रांक-280 दिनांक 28.01.2011 से किया एवं विभागीय अधिसूचना सं॰-65 दिनांक 14. 01.2011 के अनुपालन हेतु अधीक्षण अभियंता रूपांकण आयो॰ एवं मोनिटरिंग अंचल, डिहरी को पत्रांक-279 दिनांक 28.01.11 से निर्देश दिया गया। पुनः संबंधित कार्यपालक अभियंताओं का प्रभार श्याम नंदन कुमार द्वारा प्रभार हेतु पत्रांक-1500 दिनांक 18.05.11 एवं 1504 दिनांक 18.05.11 से निदेश देते हुए आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित अधीक्षण अभियंता को प्रति दी गई । विभागीय अधीसूचना सं॰-65 दिनांक 14.01,2011 से पदावनत कार्यपालक अभियंता श्री श्याम नंदन कुमार द्वारा प्रभार सौंपे जाने की सूचना उनके पत्रांक-1533 दिनांक 24.05.11 से विभाग को दी गई एवं अन्य दो पदावनत कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक-198 दिनांक 20.05.11 एवं 252 दिनांक 21.05.11 से माननीय उच्च न्यायालय के पारित आदेश का हवाला देते हुए मार्गदर्शन एवं यथा स्थिति बनाये रखने का अनुरोध किया गया जिसके क्रम में पत्रांक-1540 दिनांक 25.05.11 से विभाग को सूचित किया जा चुका है। यह भी कहना है कि पदावनत कार्यपालक अभियंताओं द्वारा मुकदमा दायर करने की सूचना न तो उनके स्तर से और न विभाग के स्तर से उनको थी। विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.11 से स्पष्टीकरण हेतु स्मार पत्र में संदर्भित पत्र 1243 दिनांक 23.02.11 जो इस कार्यालय को अप्राप्त था, अपने पत्रांक-1700 दिनांक 21.06.11 द्वारा विशेष दूत से 28.06. 11 को प्राप्त किया गया । एवं इस पर पत्रांक-18 गो॰ दिनांक 09.07.11 द्वारा संबंधित अधीक्षण अभियंता को आवश्यक कार्रवाई हेतु निदेशित किया गया। उनका यह भी कहना है कि विभागीय पत्रांक-1243 दिनांक 23.02.11 जो 29.06.11 को प्राप्त हुआ, प्राप्ति के पूर्व ही उनके द्वारा ससमय यथोचित कार्रवाई की जा चुकी थी पदावनत कार्यपालक अभियंता विभागीय एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना के लिए स्वयं दोषी हैं क्योंकि विभागीय अधिसूचना सं॰-66 दिनांक 14.01.2011 के कंडिका-3 में उल्लेख है कि ''उपर्युक्त चालू प्रभार के पदस्थापन रद्द किये जाने के फलस्वरूप उपर्युक्त पदाधिकारियों को सहायक अभियंता (असैनिक) के पद पर पदस्थापन हेतु मुख्यालय में योगदान देने का निदेश दिया जाता है । स्पष्टीकरण के संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा उल्लेख किया गया है कि संबंधित स्पष्टीकरण पत्रांक-2453 दिनांक 10.08.2011 एवं पत्रांक-2028 दिनांक 22.06.12 से पूर्व में ही विभाग को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही कहना है कि उक्त परिपेक्ष्य में उड़नदस्ता का पत्रांक-1/शि॰ इन्द्रपुरी दिनांक 13.04.12 एवं 224 दिनांक 24.04.2012 द्वारा माँगे गये अभिलेख को भी पत्रांक-1448 दिनांक 05.05.2012 से विभाग को समर्पित किया जा चुका है। इनके द्वारा कार्य में किसी प्रकार का शिथिलता नही बरते जाने का भी उल्लेख किया गया है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि एक अन्य मामले में उड़नदस्ता का जाँच प्रतिवेदन का कंडिका-ix में मुख्य अभियंता, डिहरी (आरोपी पदाधिकारी) का पत्रांक-280 दिनांक 28.01.11 के अनुपालन में अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी द्वारा दो पदावनत कार्यपालक अभियंता के सिलसिले में विभागीय आदेश एवं तदनुसार मुख्य अभियंता का निदेश के अनुपालन में अनापेक्षित विलम्ब किये जाने का उल्लेख है। अर्थात विभागीय आदेश के अनुपालन में इनके द्वारा कोई विलम्ब नहीं किया गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय आदेशों का अनुपालन नहीं करने तथा संबंधित पदावनत कार्यपालक अभियंता को अपने पद पर बनाये रखने संबंधी परोक्ष या अपरोक्ष लाभ पहुँचाने जैसे कोई कार्य नहीं किया गया है। उनका यह भी कहना है कि कार्य में कोई उदासीनता नहीं बरती गई और न तत्परता में कमी किया गया और न गलत मंशा रहीं। अतएवं आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया है प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा के क्रम में निम्न तथ्यों पर विचार किया गया। श्री अम्बरकर, मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा विभागीय पत्रांक-65 एवं 66 दिनांक 14.01.11 को संबंधित अधीक्षण अभियंता एवं पदावनत कार्यपालक अभियंता को अग्रसारित किया गया। जिसके क्रम में अधीक्षण अभियंता द्वारा स्थानीय व्यवस्था से पदावनत कार्यपालक अभियंता से प्रभार दिलाने का प्रस्ताव श्री अम्बरकर मुख्य अभियंता को समर्पित किया गया। जिसे मुख्य अभियंता, डिहरी के पत्रांक-279 एवं 280 दिनांक 28.01.11 द्वारा अनुमोदित किया गया। उक्त निदेश के आलोक में पदावनत कार्यपालक अभियंता को प्रभार सौंप कर मुख्यालय में योगदान करना चाहिऐ था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। सर्वप्रथम उनके निदेश का पदावनत कार्यपालक अभियंताआं द्वारा अनुपालन नहीं किया जाना उनके प्रशासनिक विफलता का द्योतक है। पदावनत कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रभार नहीं सौंपे जाने की स्थिति में पदभार ग्रहण करने वाले पदाधिकारी को स्वतः प्रभार प्राप्त करने एवं पदभार सौंपे3 (), 6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी 2020202020202020 जाने वाले पदाधिकारी (पदावनत कार्यपालक अभियंता) को स्वतः विरमित करने का आदेश निर्गत किया जाना चाहिये था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया। साथ ही पदावनत कार्यपालक अभियंता द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने पर इनके सभी प्रदत्त शक्तियों को शिथिल करने एवं वेतनादि के भुगतान पर रोक जैसी कार्रवाई मुख्य अभियंता से अपेक्षित था जो उनके द्वारा नहीं किया गया। फलतः पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अपने पूर्व पद पर बने रहने का अवसर प्राप्त हुआ इस प्रकार श्री अम्बरकर मुख्य अभियंता द्वारा पत्रांक-279 एवं 280, दिनांक 28.01.11 से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को प्रभार सौंपने का आदेश औपचारिकता मात्र है। श्री अम्बरकर, मुख्य अभियंता के पत्रांक-1500 एवं 1504 दिनांक 18.05.11 से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को प्रभार सौंपने हेतु स्मारित किये गये जो इनके पूर्व के आदेश दिनांक 28.01.2011 से करीब पौने चार माह बाद दिये जाने से अभियंताओं के पदावनत जैसे संवेदनशील विभाग के निर्णय को गंभीरता पूर्वक नहीं लिया जाना परिलक्षित होता है। फलतः पदावनत कार्यपालक अभियंता श्री लॉजिन्स मिन्ज एवं रमेश साह को न्यायालय जाने का पर्याप्त समय एवं विभागीय निर्णय के विरूद्ध स्थगन आदेश प्राप्त करने का अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार श्री अम्बरकर के विरूद्ध प्रत्यक्ष रूप से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से इन्हें विरमित करने की कार्रवाई न कर पद पर बने रहने का मौका दिया गया ताकि वे न्यायालय में मुकदमा दायर कर सके एवं अनुचित लाभ प्राप्त कर सकें का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय आदेशो का अनुपालन में टालमटोल किये जाने एवं उक्त आदेशों को वास्तविक रूप में Implement कराने के बजाय अपने अधिनस्थों को मात्र सूचित करने की औपचारिकता निभाने के कारण विभागीय आदेशों का अनुपालन नहीं होने से उक्त स्थिति पैदा होने पर लगाये गये आरोप को प्रमाणित बताया गया। अतः द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउार स्वीकार योग्य नहीं है। विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.11 द्वारा श्री अम्बरकर से मांगे गये स्पष्टीकरण के क्रम में जवाब नहीं प्राप्त होने पर विभाग द्वारा निर्गत विभिन्न स्मार यथा पत्रांक-4386/13.07.2011, पत्रांक-4962/08.08.2011 के क्रम में इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक-2453 दिनांक 10.08.11, जो कि लगभग दो माह बाद दिया गया से इनके विभागीय आदेश का सम्यक अनुपालन नहीं किये जाने का बोध होता है। पत्रांक-2028 दिनांक 22.06.2012 द्वारा विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.11 के क्रम में स्पष्टीकरण देने का उल्लेख इस मामले में अप्रासंगिक है। इस प्रकार विभाग द्वारा बार-बार स्मार पत्र निर्गत किये जाने से सरकारी कार्याें के निष्पादन में इनके द्वारा बरती गयी उदासीनता परिलक्षित होता है संचालन पदाधिकारी द्वारा भी विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.2011 द्वारा माँगे गये श्री अम्बरकर से स्पष्टीकरण को Self explanatory एवं descriptive बताते हुए enclosure के रूप वाँछित पत्र 1243 दिनांक 23.02.11 को प्राप्त करने में 15 दिनों का अनावश्यक समय बर्बाद किया गया। इसके अतिरिक्त उक्त विभागीय स्पष्टीकरण सीधे मुख्य अभियंता से था जिसे अधीक्षण अभियंता का भेजने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इस प्रकार आरोपी द्वारा जानबुझकर विभागीय अनुदेशों को टालमटोल किये जाने के कारण स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया जो आरोपी के द्वारा सकल अनुशासनहीनता दर्शाता है। इस प्रकार विभागीय आदेश की अवहेलना एवं सरकारी कार्याें के निष्पादन में उदासीनता का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होता है। इस प्रकार उपर्युक्त तथ्यों, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं उनके बचाव बयान से पदावनत कार्यपालक अभियंताओं को अपने पद पर बने रहने का प्रत्यक्ष रूप से मौका देकर उन्हें माननीय न्यायालय से अनुचित लाभ प्राप्त करवाने और विभागीय आदेश की अवहेलना एवं सरकारी कार्याें के प्रति उदासिनता का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित प्रतीत होने से द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होता है। उक्त के आलोक में श्री ओमप्रकाश अम्बरकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया- ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।'' उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दंड प्रस्ताव पर बी0पी0एस0सी0 के पत्रांक-1155 दिनांक-14.08.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है। अतएव श्री ओम प्रकाश अम्बरकर, (आई0डी0-3467) तत्कालीन मुख्य अभियंता, डिहरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए निम्न दण्ड अधिरोपत कर संसूचित किया जाता है- ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।'' ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।'' ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।'' ''कालमान वेतन में दो वेतन प्रक्रम में स्थायी अवनति।''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 रसूल मियॉ, सरकार के अवर सचिव।
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