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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
20 सितम्बर 2019
सं॰ 22/नि॰सि॰(सम0)-14
2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम- य कार्यवाही का संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया जिसमें आरोप के बिन्दू निम्नवत् है अप्राप्त रहने पर विभागीय पत्रांक-2106 दिनांक 30.11.2017, 2227 दिनांक 15.12
2018 द्वारा स्मारित किया गया। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पत्र दिनांक 03.05
श्री कमलाकांत (आई0डी0-3165), तत्कालीन मुख्य 14-17/2011/2034--श्री कमलाकांत (आई0डी0-3165), तत्कालीन मुख्य अभियंता (चालू प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के पद पर वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 अभियंता (चालू प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के पद पर वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 अभियंता (चालू प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के पद पर वर्ष 2010-11 एवं 2011-12 शासनहिनता के लिए संकल्प ज्ञापांक-708 के पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता, कदाचार एवं अनुशासनहिनता के लिए संकल्प ज्ञापांक-708 के पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता, कदाचार एवं अनु वं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के दिनांक 02.07.2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण ए अन्तर्गत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, अन्तर्गत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, अन्तर्गत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, समें आरोप के बिन्दू निम्नवत् हैः- पटना को इस विभागीय कार्यवाही का संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया जि 2011 द्वारा अधिसूचना निर्गत की तिथि से सूचना सं॰-63, 65 एवं 66 दिनांक 14.01.2011 द्वारा अधिसूचना निर्गत की तिथि से आरोप :-आरोप :-आरोप :-आरोप :- (1) (1) (1) (1) विभागीय अधिसूचना सं॰-63, 65 एवं 66 दिनांक दावनत कर उन्हें मुख्यालय में चालू प्रभार में कार्यरत कार्यपालक अभियंता को सहायक अभियंता के पद पर पदावनत कर उन्हें मुख्यालय में चालू प्रभार में कार्यरत कार्यपालक अभियंता को सहायक अभियंता के पद पर प योगदान देने का निदेश दिया गया था त 2011 द्वारा मुख्य अभियंता, योगदान देने का निदेश दिया गया था तथा विभागीय पत्रांक-1243 दिनांक 23.02.2011 द्वारा मुख्य अभियंता, औरंगाबाद सहित संबंधित मुख्य अभियंता को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंता को अविलम्ब विरमित करने का औरंगाबाद सहित संबंधित मुख्य अभियंता को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंता को अविलम्ब विरमित करने का औरंगाबाद सहित संबंधित मुख्य अभियंता को सभी पदावनत कार्यपालक अभियंता को अविलम्ब विरमित करने का े द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता जिन्हें पदावनत किया े द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता जिन्हें पदावनत किया निदेश दिया गया था। परन्तु आपके द्वारा अपने परिक्षेत्र में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता जिन्हें पदावनत किया गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा गया ताकि वे न्यायालय में मुकदमा गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा गया ताकि वे न्यायालय में मुकदमा गया था, को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के लिए उन्हें अपने पद पर बनाये रखा गया ताकि वे न्यायालय में मुकदमा दायर कर सके। तथा उन्हें अनुचित लाभ प्राप्त हो सके। दायर कर सके। तथा उन्हें अनुचित लाभ प्राप्त हो सके। (2) इसी संदर्भ में विभागीय 2011 द्वारा विभागीय निदेश का ससमय अनुपालन पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.2011 द्वारा विभागीय निदेश का ससमय अनुपालन नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। आपके पत्रांक- 1168 नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। आपके पत्रांक- 1168 नहीं करने के लिए परोक्ष रूप से दोषी मानते हुए आपसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। आपके पत्रांक- 1168 11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इस प्रकार विभागीय आदेश का अवहेलना 11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इस प्रकार विभागीय आदेश का दिनांक- 04.07.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इस प्रकार विभागीय आदेश का के लिए प्रथम दृष्टया आप दोषी है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध लगाये गये उक्त सभी आरोपों को प्रमाणित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध लगाये गये उक्त सभी आरोपों को प्रमाणित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध लगाये गये उक्त सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पाया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते ह पाया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते ह 2017 से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी॰) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गई 2017 से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी॰) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गई पत्रांक-377 दिनांक 18.08.2017 से बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी॰) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गई 12.2017 एवं 639 जिसका प्रतिउत्तर अप्राप्त रहने पर विभागीय पत्रांक-2106 दिनांक 30 दिनांक 12.03.2018 द्वारा स्मारित किया गया। आरोपी 05.2018 से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब देने हेतु कुछ आवश्यक अभिलेखों की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया कारण पृच्छा का जवाब देने हेतु कुछ आवश्यक अभिलेखों की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया कारण पृच्छा का जवाब देने हेतु कुछ आवश्यक अभिलेखों की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया है।2 (), 6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी 2020202020202020 आरोपी पदाधिकारी का बचाव-बयान :-आरोपी पदाधिकारी का बचाव-बयान :-आरोपी पदाधिकारी का बचाव-बयान :-आरोपी पदाधिकारी का बचाव-बयान :- विभागीय पत्रांक-377 दिनांक 18.08.2017 द्वारा किये गये द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर कई स्मारों के बावजूद अबतक अप्राप्त रहने एवं आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने पत्र दिनांक 03.05.2018 से जवाब देने हेतु कुछ आवश्यक अभिलेखों की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध कराने के परिपेक्ष्य में पूर्व में दिये गये बचाव-बयान के आलोक में समीक्षा निम्नवत् है। समीक्षा ः-समीक्षा ः-समीक्षा ः-समीक्षा ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के विश्लेषण में उल्लेख किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में कहा गया है कि मुख्य अभियंता को कोई निदेश अंकित नहीं है। यदि विभाग आवश्यक समझता तो स्थानीय व्यवस्था के द्वारा प्रभावित पदाधिकारी को प्रभार मुक्त कराके विभागीय अधिसूचना में दिये गये निदेशों के अनुपालन हेतु विभाग द्वारा निदेश निर्गत किया जाता। आरोपित पदाधिकारी द्वारा आगे कहा गया है कि प्रभावित अभियंता द्वारा मुकदमा दायर किये जाने की जानकारी विभाग को रहने के बाद भी उक्त अधिसूचना मुख्य अभियंता औरंगाबाद के कार्यालय को विलम्ब से दिनांक 21.02.2011 को प्राप्त हुआ। सहायक अभियंता से लेकर अभियंता प्रमुख तक का स्थापना विभागाधीन होने के कारण मुख्य अभियंता को स्वविवेक से ऐसी स्थापना में निर्णय लेने का कोई अधिकार विभाग ने नहीं दिया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के माध्यम से रखे गये विभागीय अभिमत जिसमें उल्लेख है कि विभागीय अधिसूचना सं॰-66 दिनांक 14.01.2011 जो इनके परिक्षेत्राधीन कार्यरत कार्यपालक अभियंता श्री रामलखन महतो को वरीयता संशोधन हो जाने एवं कार्यपालक अभियंता (असैनिक) के पद पर प्रोन्नति के परिधि से बाहर हो जाने के फलस्वरूप कार्यपालक अभियंता (असैनिक) के पद पर चालू प्रभार में किये गये पदस्थापन को अधिसूचना निर्गत करने की तिथि से रद्द करने के आदेश पर आरोपी मुख्य अभियंता औरंगाबाद को आवश्यक कार्रवाई करने का निदेश दिया गया था। जिसमें स्वतः स्पष्ट हो जाता है कि उनके अधीन पदावनत कार्यपालक अभियंता को स्थानीय व्यवस्था से विरमित कराकर मुख्यालय में योगदान कराया जाता जो इनके द्वारा नहीं किया गया। आरोपी द्वारा अपने पूर्व के बचाव बयान में मात्र विभाग एवं सचिवालय सहायक की कमियाँ दर्शाते हुए अपने उपर लगे आरोप को नकारने की कोशिश की गई जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि माननीय उच्च न्यायालय में दायर CWJC No 2290/11 में आदेश पारित होने का इन्तजार किया जाता रहा क्योकि विभागीय पत्र 1243 दिनांक 23.12.11 द्वारा पुनः अविलम्ब विरमित करने हेतु स्पष्ट रूप से स्मारित करने के बावजूद आरोपी मुख्य अभियंता द्वारा स्थानीय व्यवस्था के तहत श्री महतो को विरमित करने के बजाय मात्र उक्त पत्र को अग्रसारित कर के अपने दायित्वों से इतिश्री कर ली गई। इसलिए संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि ''ऐसा परिलक्षित होता है कि प्रभावित पदाधिकारियों द्वारा न्यायालय में दायर CWJC में आदेश पारित होने का इन्तजार किया जा रहा था, क्योंकि प्रभावित पदाधिकारी द्वारा स्थगन आदेश (दिनांक 28.04.11) ले लिया गया था'' जिसे आरोपित पदाधिकारी श्री कमलाकांत के विरूद्ध परोक्ष रूप से प्रभावित पदाधिकारी को लाभ पहुँचाने एवं विभागीय निदेश का पालन नहीं करने के संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं॰-1 के लिए दोषी है। आरोप सआरोप सआरोप सआरोप सं॰- 2ं॰- 2ं॰- 2ं॰- 2 विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.2011 द्वारा विभागीय आदेश का ससमय अनुपालन नहीं करने हेतु परोक्ष रूप से इन्हे दोषी मानते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। स्पष्टीकरण का उत्तर श्री कमलाकांत द्वारा अपने पत्रांक-1168 दिनांक 04.07.2011 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया जिसे विभाग संतोषजनक नहीं पाते हुए विभागीय आदेश का अवहेलना के लिए दोषी होने का आरोप लगाया है।
विभागीय पत्रांक-3774 दिनांक 16.06.11 से पूछे गये स्पष्टीकरण में 7 दिनों के अन्दर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने अन्यथा विभाग एकतरफा निर्णय लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए बाध्य होने का निदेश आरोपी तत्कालीन मुख्य अभियंता औरंगाबाद को दिया गया था। स्पष्टीकरण का उत्तर दिनांक 04.07.11 से दिये जाने से स्पष्ट होता है कि 7 दिनों के अन्दर विभागीय निदेश के विरूद्ध 17-18 दिनों के अन्दर स्पष्टीकरण समर्पित किया गया परिलक्षित होता है। आरोपी द्वारा अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया है कि ''अधोहस्ताक्षरी मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग गया में पदस्थापन के अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के अतिरिक्त प्रभार में रहकर वहाँ का भी कार्य सम्पादन कर रहा हूँ। दोनो जगह के प्रभार में रहने के कारण कार्य की अधिकता के चलते मुख्य अभियंता, औरंगाबाद के कार्यालय के स्थापना सहित अन्य पत्राचार संबंधित कार्याें का सम्पादन सचिव (प्रवैधिकी) द्वारा कार्यहित में किया जाता रहा।'' संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन के उक्त आरोप पर विश्लेषण अंकित नहीं किया गया है एवं निष्कर्ष में समेकित रूप से आरोपित पदाधिकारी श्री कमलाकांत तत्कालीन मुख्य अभियंता के विरूद्ध विभागीय निदेश का पालन नहीं करने तथा पदावनत अभियंता को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने का आरोप प्रमाणित पाया है। इसप्रकार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होता है। उपर्युक्त तथ्यों, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपित पदाधिकारी के बचाव-बयान के समीक्षोपरांत श्री कमलाकांत, तत्कालीन मुख्य अभियंता, औरंगाबाद सम्प्रति सेवानिवृत जल संसाधन विभाग औरंगाबाद के विरूद्ध विभागीय निदेश का पालन नहीं करने तथा पदावनत कार्यपालक अभियंता को परोक्ष रूप से लाभ पहुँचाने का संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी पर लगाये गये आरोप प्रमाणित माने जाने से द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। उक्त के आलोक में श्री कमलाकांत, तत्कालीन मुख्य अभियंता(चालू प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद केा निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया-3 (), 6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी6 फरवरी 2020202020202020 ''देय पेंशन पर 10% की कटौती अगले पॉच वर्ष तक'' उक्त निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त दंड प्रस्ताव पर बी0पी0एस0सी0 के पत्रांक-1156 दिनांक 14.8.2019 द्वारा सहमति प्रदान की गई है। अतएव श्री कमलाकांत (आई0डी0-3165), तत्कालीन मुख्य अभियंता (चालू प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के विरूद्ध गठित विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप के लिए निम्न दंड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है-
''देय पेंशन पर 10देय पेंशन पर 10देय पेंशन पर 10देय पेंशन पर 10% की कटौती अगले 5 (पॉच) वर्ष तककी कटौती अगले 5 (पॉच) वर्ष तककी कटौती अगले 5 (पॉच) वर्ष तककी कटौती अगले 5 (पॉच) वर्ष तक''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 रसूल मियॉ, सरकार के अवर सचिव।
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