निबंधन संख्या पी0टी0-40
बिहार गजट
बिहार सरकार kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-21 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 22-22 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची i"B
i"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 23-23 पूरक
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पूरक-क 24-32बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 2 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————
परिवहन विभाग
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अधिसूचनाएं
3 फरवरी 2020
सं0 05/स्था0 (DTO)-30/2013 (खण्ड-1)/1033--श्री रजनीश लाल (बि0प्र0से0), जिला परिवहन पदाधिकारी, सुपौल (अतिरिक्त प्रभार जिला परिवहन पदाधिकारी, मधेपुरा) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक जिला परिवहन पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं0 05/स्था0 (DTO)-30/2013 (खण्ड-1)/1034--श्री फिरोज अख्तर (बि0प्र0से0), जिला परिवहन पदाधिकारी, बांका को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक जिला परिवहन पदाधिकारी, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं0 05/स्था0 (DTO)-30/2013 (खण्ड-1)/1035--श्री रवि कुमार (बि0प्र0से0), जिला परिवहन पदाधिकारी, जमुई को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक जिला परिवहन पदाधिकारी, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
2. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शैलेन्द्र नाथ, उप-सचिव।
------- 13 फरवरी 2020 सं0 05/स्था0-146/2007/1276--आयुक्त, दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा से प्राप्त अनुषंसा के आलोक में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 213(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री दुर्गा नन्द झा, बि0प्र0से0, आयुक्त के सचिव, दरभंगा को अपने कार्याे के अतिरिक्त संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, दरभंगा के कार्यों के निष्पादन हेतु अगले आदेष तक शक्ति प्रत्यायोजित की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, षैलेन्द्र नाथ, उप-सचिव।
------- पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ------- अधिसूचना 28 जनवरी 2020
सं0 2/स्था0 (12) 01/2019-279--पशु एवं मत्स्य संसाधन विभागीय अधिसूचना सं0-769-सह-पठित ज्ञापांक-770 दिनांक 07.03.2019 द्वारा डा0 प्रियम्बदा की नियुक्ति बिहार पशु चिकित्सा सेवा के मूल कोटि के पद पर करते हुए भ्रमणशील पशु चिकित्सा, बेलागंज, गया के पद पर पदस्थापित किया गया। तदालोक में उनके द्वारा दिनांक 18.03.2019 को योगदान करते हुए प्रभार ग्रहण किया गया।
2. डा0 प्रियम्बदा द्वारा अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों तथा पारिवारिक कारणों से दिनांक 27.03.2019 को पद से त्यागपत्र समर्पित करने का अभ्यावेदन दिया गया।
3. उक्त के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-2520 दिनांक 14.08.2019 द्वारा डा0 प्रियम्बदा के त्यागपत्र को स्वीकृत करने का निर्णय संसूचित किया गया।
4. डा0 प्रियम्बदा द्वारा क्षेत्रीय निदेषक, पशुपालन मगध क्षेत्र, गया के माध्यम से एक अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा यह अंकित किया गया कि व्यक्तिगत परेषानियों में व्यस्त रहने के कारण पूरी तरह असहाय होकर संघर्षरत थी जिससे हताषा में उनके द्वारा पद से त्यागपत्र का अभ्यावेदन दे दिया गया जिसके लिए वे क्षमा प्रार्थी है। अभ्यावेदन में उनके द्वारा उनके त्यागपत्र के आवेदन को निरस्त करने तथा अवकाष स्वीकृत करने का अनुरोध भी किया गया।
5. डा0 प्रियम्बदा के उक्त अभ्यावेदन के आलोक में विभाग द्वारा स्वीकृत उनके त्यागपत्र/ इस्तीफा को अस्वीकृत/रद्द करने के बिन्दु पर सामान्य प्रशासन विभाग का मंतव्य प्राप्त किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में विभाग द्वारा मामले की समीक्षा तथा समीक्षोपरान्त डा0 प्रियम्बदा के अभ्यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक3 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 विचार करते हुए उनके त्याग-पत्र की स्वीकृति संबंधी अधिसूचना सं0-2520 दिनांक 14.08.2019 को निरस्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
अतः सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में डा0 प्रियम्बदा तदेन भ्रमणषील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, बेलागंज गया की त्याग-पत्र की स्वीकृति संबंधी विभागीय अधिसूचना सं0-2520 दिनांक 14.08.2019 को निरस्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पे्रम कुमार गुप्ता ''प्रेम'', अवर सचिव।
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(cid:356)ामीण कवािस कवभाग
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अधिसूचनाएं
7 फरवरी 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(विविध) लो0का0-08/2018-456427--(cid:373)ी अरविन्द कुमार गुप्ता, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)भारी (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, छौड़ादानों, पूव(cid:334) चम्पारण के वि(cid:349)(cid:544) (cid:373)ी ठाकु र (cid:366)साद (cid:554)ारा प्रस्तुत किये गये या(cid:361)ा भत्ता विप(cid:361)/अभि(cid:373)व के समायोजन की दिशा म(cid:336) कोई कार(cid:330) वाई नही ं करने के संबंध म(cid:336) जिला पदाधिकारी, पूव(cid:334) चम्पारण, मोतिहारी के प(cid:361)ांक 75/स्था0 दिनांक 17.07.2019 (cid:554)ारा विहित (cid:366)प(cid:361) म(cid:336) आरोप-प(cid:361) प्राप्त (cid:352)आ। प्राप्त आरोप-प(cid:361) पर (cid:373)ी गुप्ता से स्पष्टीकरण की माँग की गयी ।
उक्त संदभ(cid:330) म(cid:336) (cid:373)ी गुप्ता के वि(cid:349)(cid:544) (cid:366)तिवेदित आरोप एवं प्राप्त स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि अभि(cid:373)व/विप(cid:361) के समायोजन हेतु ससमय कार(cid:330) वाई नही ं की गयी एवं कर्तव्य निव(cid:330)हन म(cid:336) लापरवाही बरती गयी।
अतएव (cid:373)ी गुप्ता को बिहार सरकारी सेवक (वग(cid:334)करण, नियं(cid:361)ण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत (cid:366)ावधानों के तहत ''वष(cid:330) 2015-16 के लिए निन्दन'' का दं ड अधिरोपित किया जाता है । आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ी गुप्ता के सेवा पु(cid:721) म(cid:336) इस दं ड की प्रविष्टी की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
कबहार-राज्यपाल ेि आदे से, ँि वल तनुज, अपर सचिव।
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6 फरवरी 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(भा0)भा0-05/2019-456316--(cid:373)ीमती छाया कु मारी, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिहपुर, भागलपुर के वि(cid:349)(cid:544) अपने दायित्वों का निव(cid:330)हन काया(cid:330)लय से नही ं कर आवास से करने, लंबे अवकाश से वापस आने के बावजूद भी काया(cid:330)लय के अभिलेख अपने पास अनाधिकृ त (cid:349)प से रखने, काया(cid:330)लय लैपटॉप निजी व्यवहार के उद्देश्य से अपने पास रखने, पद का दु(cid:349)पयोग एवं अनुशासनहीनता बरतने के लिए जिला पदाधिकारी, भागलपुर के प(cid:361)ांक-485 दिनांक 19.04.2015 (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) 'क' प्राप्त (cid:352)आ।
आरोप प(cid:361) म(cid:336) धा(cid:303)रत आरोपों के आलोक म(cid:336) (cid:373)ीमती छाया कु मारी से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। उक्त आरोप प(cid:361) म(cid:336) गठित आरोप एवं आरोपित पदाधिकारी (cid:554)ारा प्राप्त स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा विभाग (cid:554)ारा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत यह पाया गया कि (cid:373)ीमती कु मारी के (cid:554)ारा काया(cid:330)लय के अभिलेख एवं अन्य चीजों का (cid:366)भार देते समय लैपटॉप का (cid:366)भार नही ं दिया गया। (cid:366)मंडलीय आयुक्त के निरी(cid:407)ण (cid:366)तिवेदन म(cid:336) मामला उजागर होने के उपरांत उनके (cid:554)ारा लैपटॉप का (cid:366)भार दिया गया। अत: (cid:373)ीमती छाया कु मारी, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिहपुर, भागलपुर, सम्प्रति (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, मनिहारी, कटिहार सरकारी लैपटॉप लंबे समय तक अपने पास रखने की दोषी ह(cid:339)। अत: (cid:373)ीमती छाया कु मारी को 'चेतावनी' की सजा दी जाती है। आदेश दिया जाता है कि इसकी (cid:366)वि(िcid:700) (cid:373)ीमती कु मारी के सेवा पुस्त म(cid:336) की जाय।
कबहार-राज्यपाल ेि आदे से, ँि वल तनुज, अपर सचिव।
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12 फरवरी 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(द0)दर0-02/2017-456864--(cid:373)ी शशि (cid:366)काश, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)ख(cid:503) विकास पदाधिकारी, सिंहवाड़ा, दरभंगा के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी दरभंगा के प(cid:361)ांक- 1957 दिनांक 14.12.2017 (cid:554)ारा लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत लंबित मामलों काबिहार गजट, 19 Qjojh 2020 4 निष्पादन नही ं करने के आरोप म(cid:336) आरोप (cid:366)प(cid:361) 'क' विभाग को प्राप्त (cid:352)आ। उक्त आरोप (cid:366)प(cid:361) 'क' म(cid:336) वणि(cid:330)त आरोपों पर (cid:373)ी शशि (cid:366)काश (cid:554)ारा समपि(cid:330)त स्पष्टीकरण एवं इनके स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी दरभंगा से प्राप्त मंतव्य की विभाग (cid:554)ारा समी(cid:407)ा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि (cid:373)ी शशि (cid:366)काश अंचलाधिकारी के अतिरिक्त (cid:366)भार म(cid:336) थे। मूल पदस्थापन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी के (cid:349)प म(cid:336) रहने एवं अतिरिक्त काय(cid:330) भार के कारण उक्त (cid:366)भार वाले मामले के अनुपालन म(cid:336) विलम्ब (cid:352)आ। तथापि (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी के स्तर पर चार मामले लंबित पाये गये।
अतएव सम्यक विचारोपरान्त (cid:373)ी शशि (cid:366)काश, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)ख(cid:503) विकास पदाधिकारी, सिंहवाड़ा, दरभंगा सम्प्रति (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)ख(cid:503) विकास पदाधिकारी, ढाका, पूव(cid:334) चम्पारण को चेतावनी देते (cid:352)ए भविष्य म(cid:336) काय(cid:330) के (cid:366)ति सचेष्ट रहने का निदे श दिया जाता है।
आदे से, ँि वल तनुज, अपर सचिव।
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12 फरवरी 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(ति0)मु0-03/2018-456886--(cid:373)ी रत्नेश्वर कु मार, (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह- (cid:366)भारी (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, पा(cid:349), मुज(cid:608)रपुर के सरकारी आवास से दिनांक 15.01.2018 को कुख्यात फरार अपराधी तुलसी राय को नशे की हालत म(cid:336) पुलिस (cid:554)ारा गिर(cid:606)ार किये जाने, बिहार म(cid:552) निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा-32 की उपधारा (3) के तहत् अपराध का(cid:303)रत करने के लिए उ(cid:517)रदायी होने एवं उक्त अधिनियम की धारा-37 की उपधारा (घ) एवं धारा-38 की उपधारा-(2) के तहत् नजदीकी उत्पाद अथवा पुलिस पदाधिकारी को सूचित नही ं करने जैसे गंभीर आरोप के लिए (cid:373)ी कु मार के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी के प(cid:361)ांक-818 दिनांक 06.03.2018 (cid:554)ारा विहित (cid:366)प(cid:361) म(cid:336) प्राप्त आरोप प(cid:361) के आलोक म(cid:336) बिहार सरकारी सेवक (वग(cid:334)करण, नियं(cid:361)ण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम- 9(क) के तहत (cid:373)ी कु मार को विभागीय अधिसूचना सं0-360183 दिनांक 15.03.2018 (cid:554)ारा तात्कालिक (cid:366)भाव से अगले आदेश तक के लिए निल(cid:304)(cid:638)त किया गया। समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प संख्या-383692 दिनांक 09.08.2018 (cid:554)ारा (cid:373)ी कु मार के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित की गयी।
(cid:373)ी कु मार के वि(cid:349)(cid:544) संचालित विभागीय काय(cid:330)वाही म(cid:336) संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच (cid:366)तिवेदन/ निष्कर्ष (cid:366)तिवेदन के समीक्षोपरान्त इन्हें तत्काल (cid:366)भाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है।
(cid:373)ी रत्नेश्वर कु मार (cid:356)ामीण विकास विभाग (मुख्यालय) म(cid:336) योगदान समपि(cid:330)त कर(cid:336) गे। न्यायालयीय (cid:366)(िcid:354)या म(cid:336) न्यायालय के निण(cid:330)योपरांत विभागीय काय(cid:330)वाही म(cid:336) अंतिम निण(cid:330)य लिया जाएगा।
उक्त आदेश पर विभागीय मं(cid:361)ी का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे से, ँि वल तनुज, अपर सचिव।
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7 फरवरी 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(ति0)पू0च0-03/2017-456508--(cid:373)ी रमेन्द्र कु मार, तत्कालीन (cid:366)ख(cid:503) विकास पदाधिकारी, बंज(cid:303)रया, पूव(cid:334) चम्पारण के वि(cid:349)(cid:544) सी0डब्लु0जे0सी0 नं0 197/16 (cid:373)ी ललन साह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य म(cid:336) जिला विधि शाखा (cid:554)ारा निदे श दिये जाने के बावजूद (cid:366)तिशपथप(cid:361) दायर करने म(cid:336) एक वष(cid:330) का बिलम्ब करने के संबंध म(cid:336) जिला पदाधिकारी, पूव(cid:334) चम्पारण, मोतिहारी के प(cid:361)ांक-133 दिनांक 03.06.2017 (cid:554)ारा आरोप (cid:366)प(cid:361) 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोप पर (cid:373)ी कु मार से स्पष्टीकरण की मॉंग की गई। (cid:373)ी कु मार का स्पष्टीकरण प्राप्त (cid:352)आ। जिला पदाधिकारी से प्राप्त आरोप प(cid:361) एवं (cid:373)ी कु मार के स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त यह स्पष्ट है कि विधि शाखा (cid:554)ारा निद(cid:337)श प्राप्त होने के उपरान्त इन्हें लगातार अनु(cid:373)वण करना चाहिए था। इस हद तक कर्तव्य म(cid:336) चूक (cid:352)ई है।
अतएव सम्यक विचारोपरान्त (cid:373)ी कु मार को भविष्य में सचेष्ट रहने का निदे श दे ते (cid:352)ए आरोप से मुक्त किया जाता है।
आदे से, ँि वल तनुज, अपर सचिव।5 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचनाएं 29 जनवरी 2020
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-337/प॰व॰--श्री आलोक कुमार, भा॰व॰से॰, (BHः2007), सदस्य सचिव, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक 01.01.2020 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-338/प॰व॰--श्री एस. सुधाकर, भा॰व॰से॰, (BHः2007), वन प्रमंडल पदाधिकारी, भागलपुर को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक 01.01.2020 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-339/प॰व॰--श्री सुधीर कुमार, भा॰व॰से॰, (BHः2007), वन प्रमंडल पदाधिकारी, शोध प्रषिक्षण एवं जन सम्पर्क प्रमंडल, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक 01.01.2020 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-340/प॰व॰--श्री सुधीर कुमार कर्ण, भा॰व॰से॰, (BHः2007), वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक 01.01.2020 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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29 जनवरी 2020
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-335/प॰व॰--श्री नन्द किशोर, भा॰व॰से॰, (BHः2006), निदेषक, बागवानी, कृषि विभाग, बिहार, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-13 ए रूपये 1,31,100-2,16,600) में प्रोन्नति दी जाती है।
2. भारतीय वन सेवा वेतन नियमावली, 2016 के नियम-12 के तहत श्री नन्द किषोर द्वारा वर्त्तमान धारित पद (निदेषक, बागवानी, कृषि विभाग, बिहार, पटना) को उनके पदस्थापन अवधि तक के लिए वन संरक्षक कोटि के समकक्ष घोषित किया जाता है।
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-336/प॰व॰--श्री एस. कुमारासामी, भा॰व॰से॰, (BHः2006), वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना वन प्रमंडल, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-13 ए रूपये 1,31,100-2,16,600) में प्रोन्नति दी जाती है।
2. इन्हें प्रोन्नति का लाभ समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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5 फरवरी 2020
सं0 वनभूमि-75/2018-181(ई0)/प०व०ज०प०--माननीय सर्वोंच्च न्यायालय में दायर W.P. (c) संख्या-202/95ः टी०एन० गोदावर्मन तिरूमूलपाद बनाम भारत संघ व अन्य में दायर आई०ए० संख्या-5891/2019 में माननीय सर्वोंच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 04.11.2019 को पारित आदेश में कैम्पा निधि से संचालित योजनाओं एवं राशि के व्यय के अनुश्रवण हेतु राज्य सरकार के स्तर पर स्थापित अथवा प्रस्तावित व्यवस्था के संबंध में प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया है। इस न्यायादेश के अनुपालन हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार के पत्रांक-910, दिनांक 31.12.2019 द्वारा राज्य स्तर पर अनुश्रवण समिति के गठन का प्रस्ताव दिया गया है। तदालोक में कैम्पा निधि से आवंटित राशि के व्यय एवं कार्यों के अनुश्रवण हेतु राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति का गठन निम्नवत् गठन किया जाता हैः-
ः- अध्यक्ष i. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), बिहार, पटना। ii. अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक, बिहार, पटना। ः- सदस्य ः- सदस्य iii. अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा)-सह-नोडल पदाधिकारी (वन संरक्षण),
बिहार, पटना।
ः- सदस्य
iv. मुख्य वन संरक्षक, संयुक्त वन प्रबंधनबिहार गजट, 19 Qjojh 2020 6 ः- सदस्य ः- सदस्य ः- सदस्य सचिव v. मुख्य वन संरक्षक, सूचना एवं प्रौधोगिकी vi. निदेशक, हरियाली मिशन vii. वन संरक्षक, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन viii. राज्य वन विकास अभिकरण द्वारा दो मनोनीत सदस्य ः- सदस्य
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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31 दिसम्बर 2019
सं0 वन क्षेत्र पदा0-10/2018-4826/प॰व॰ज॰प॰--श्री ब्रज किशोर, बि0व0से0, तत्कालीन सहायक वन संरक्षक, कैमूर वन प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति उप वन संरक्षक, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, भागलपुर के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-2861, दिनांक 09.10.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी एवं इस विभागीय कार्यवाही में आरोपों की जाँच करते हुए श्री एस0 चन्द्र शेखर, भा0व0से0 को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। उक्त विभागीय कार्यवाही में जाँच पदाधिकारी के पत्रांक-152, दिनांक-30.03.2019 एवं पत्रांक-1155, दिनांक 03.10.2019 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री ब्रज किशोर, बि0व0से0 के विरूद्ध गठित पाँच आरोपों में आरोप सं0-2, 3, 4, 5 यथा दूरभाष पर झुठी सूचना देकर उच्चाधिकारी को गुमराह करना/वन्यप्राणी संरक्षण (कर्तव्य) में घोर लापरवाही बरतना/विभाग की छवि धुमिल करना तथा कर्त्तव्य पर घोर लापरवाही बरतना को अंषतः प्रमाणित पाया गया है। विभागीय पत्रांक-4003, दिनांक-05.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की एक प्रति श्री ब्रज किशोर, बि0व0से0 को भेजते हुए उनका लिखित अभ्यावेदन प्राप्त किया गया है। जाँच प्रतिवेदन एवं श्री ब्रज किषोर द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत श्री ब्रज किषोर बि0व0से0 पर निम्नांकित शास्ति अधिरोपित की जाती है ः-''निन्दन की सजा, जिसकी प्रविष्टि इनके वर्ष-2017-18 की चारित्री में की जाय।''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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29 जनवरी 2020
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-341/प0व0--श्री रविशंकर कुमार भा0व0से0(BH:95) क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक लीव रिजर्व में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना के कार्यालय में पदस्थापित किया जाता है।
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-342/प0व0--श्री संजय कुमार सिन्हा भा0व0से0(BH:2000) मुख्य वन संरक्षक, संयुक्त वन प्रबंधन, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य वन विकास निगम लि0, पटना, सदस्य सचिव, बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद, पटना) अगले आदेश तक मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, हरियाली मिशन, बिहार, पटना (दिनांक 01.02.2020 के प्रभाव से) एवं प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट टैनिन एक्सटै्रक्ट लि0 तथा बिहार सोलभेंट एण्ड केमिकल्स लि0, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-343/प0व0--श्री अभय कुमार द्विवेदी भा0व0से0(BH:2000) मुख्य वन संरक्षक-सह-राज्य नोडल पदाधिकारी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन एवं विकास, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
श्री द्विवेदी मुख्य वन संरक्षक-सह-राज्य नोडल पदाधिकारी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार, पटना तथा वन संरक्षक (मुख्यालय), कार्यालय-प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-344/प0व0--श्री के0 के0 अकेला, भा0व0से0(BH:2000) मुख्य वन संरक्षक, मानव संसाधन एवं विकास, बिहार पटना को स्थानांतरित करते हुए क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-345/प0व0--श्री सुरेन्द्र सिंह, भा0व0से0(BH:2001) निदेशक पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, पटना (अतिरिक्त प्रभार-वन संरक्षक, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन) अगले आदेश तक वन संरक्षक, वन्यजीव अंचल, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-346/प0व0--श्री कमलजीत सिंह, भा0व0से0(BH:2004) वन संरक्षक, वन्यजीव अंचल, पटना (अतिरिक्त प्रभार-वन संरक्षक-सह-अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना) को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक-सह-अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-347/प0व0--श्री एस0 कुमारा सामी, भा0व0से0(BH:2006) वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना को स्थानांतरित करते हुए वन संरक्षक, पूर्णिया के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।7 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 सं0 भा0व0से0 (स्था0) 15/2019-348/प0व0--सुश्री रूचि सिंह, भा0व0से0(BH:2017) संलग्न पदाधिकारी, नालंदा वन प्रमंडल बिहारशरीफ को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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6 दिसम्बर 2019
सं0 योजना बजट-09/2018-4504/प॰व॰--राज्य में बाँस के रोपण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न हितधारकों, विशेषज्ञों, उद्यमियों तथा कृषकों के माध्यम से इसके उपयोग के विभिन्न आयामों/सम्भावनाओं को अधिकाधिक लोकप्रिय तथा जनसधारण के लिए उपयोगी बनाने के निमित राज्य स्तर पर केन्द्र से समन्वय स्थापित करने हेतु विभागीय संकल्प संख्या-2777 दिनांक 28.09.2018 द्वारा राज्य स्तर पर कार्यकारी समिति गठित है।
कृषि एवं किसान मंत्रालय, भारत सरकार (राष्ट्रीय बाँस मिशन संभाग) के पत्रांक-F.N.-44-22/2018-NBM (PT.2) (FTS 75150) दिनांक 28.08.2019 द्वारा प्राप्त दिशा-निर्देश के आलोक में विभागीय संकल्प संख्या-2777 दिनांक 28.09.2018 द्वारा गठित राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति का पुर्नगठन निम्नवत् किया जाता है :-
| (1) | प्रधान सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन विभाग, बिहार, पटना | अध्यक्ष |
| (2) | प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), बिहार, पटना | सदस्य |
| (3) | प्रधान सचिव/सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (4) | प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (5) | प्रधान सचिव/सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (6) | प्रधान सचिव/सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, बिहार, पटना अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (7) | प्रधान सचिव/सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (8) | प्रधान सचिव/सचिव, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, बिहार, पटना अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (9) | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधि | सदस्य |
| (10) डॉ. ए.के. चौधरी, प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर, पी.टी.सी. लैब, टी.एन.बी. कॉलेज, भागलपुर | सदस्य | |
| (11) श्री अमरेश चौधरी (कृषक), ग्राम-भवारा कोठी, प्रखण्ड-कटिहार, जिला-कटिहार | सदस्य | |
| (12) | राज्य मिशन निदेषक (मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेषक, हरियाली मिषन, बिहार) | सदस्य सचिव |
2. इस समिति का कार्य एवं दायित्व :- (क) यह समिति राज्य के वार्षिक कार्य योजना को राष्ट्रीय बाँस मिशन के कार्यकारी पर्षद को भेजने के पूर्व अनुमोदित करेगी।
(ख) यह समिति योजना के प्रभावी कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए उत्तरदायी होगी। 3. इस संदर्भ में पूर्व में निर्गत विभागीय संकल्प संख्या-2777 दिनांक-28.09.2018 द्वारा गठित कार्यकारी समिति को इस हद तक संशोधित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 8
12 दिसम्बर 2019
सं0 02/बि॰व0से0 (आ॰)-08/2018-4627/प॰व॰--श्री ब्रज किषोर, बि.व.से., तत्कालीन सहायक वन संरक्षक, भभुआ सम्प्रति उप वन संरक्षक, कार्यालय ः क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, भागलपुर के विरूद्ध विभागीय संकल्प संख्या-128 दिनांक 10.01.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही प्रांरभ की गयी एवं इस विभागीय कार्यवाही में आरोप की जाँच हेतु श्री एस. चन्द्रशेखर, भा.व.से., को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। उक्त विभागीय कार्यवाही में जाँच पदाधिकारी के कार्यालय ज्ञापांक-1136 दिनांक 28.09.2019 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री ब्रज किशोर, बि.व.से., के विरूद्ध गठित छः आरोपों में आरोप संख्या-5 एवं 6 यथा ''बिना किसी सूचना एवं सक्षम प्राधिकार के पूर्वानुमति के मुख्यालय से गायब रहना तथा इस संबंध में गलत/झूठी सूचना देना एवं विभाग की गरिमा को भंग करना तथा उच्चाधिकारी से मिडिया के समक्ष गाली-गलौज एवं असंसदीय भाषा का प्रयोग कर अनुशासनहीनता कर बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम संख्या-3 (1)(iii) तथा 9 के विरूद्ध आचरण करना'' को प्रमाणित पाया गया है। विभागीय पत्रांक-3799 दिनांक 21.10.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की एक प्रति श्री ब्रज किशोर, बि.व.से. को भेजते हुए उनका लिखित अभ्यावेदन प्राप्त किया गया। जाँच प्रतिवेदन एवं श्री ब्रज किषोर द्वारा समर्पित लिखित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत राज्य सरकार द्वारा श्री ब्रज किशोर, बि.व.से., को निम्नांकित शास्ती अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :-
''निन्दन की सजा, जिसकी प्रविष्टि इनके वर्ष 2018-19 की चारित्री में की जाय।''श्श्
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।
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वाणिज्य-कर विभाग
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अधिसूचनाएं
7 फरवरी 2020
सं0 6/वि0पत्रा0-24-01/2020-392/वा0कर--अब्दुल रशीद अंसारी, राज्य-कर सहायक आयुक्त, बेतिया अंचल, बेतिया (60वी0 से 62वीं बैच) को उनके पूर्व के विभाग बिहार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में उनके अनुरोध पर पुनः वापस जाने हेतु अधिसूचना निर्गमन की तिथि से बिहार वित्त सेवा से विधिवत विरमित किया जाता है।
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, डा0 प्रतिमा, राज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव।
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12 फरवरी 2020
सं0 6/वि0पत्रा0-24-45/2008-432/वा0कर--श्री प्रभात कुमार वर्मा, राज्य-कर अपर आयुक्त (अपील), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को दिनांक 01.02.2020 के प्रभाव से राज्य-कर अपर आयुक्त (अपील), दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, डा0 प्रतिमा, राज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव।
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12 फरवरी 2020
सं0 6/गो0-34-06/2016-436/वा0कर--श्री दुर्गा प्रसाद मंडल, राज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रभारी), बेतिया अंचल, बेतिया की सेवानिवृत्ति के उपरान्त बेतिया अंचल में पदस्थापित वरीय पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार मिश्र, राज्य-कर उपायुक्त को अगले आदेश तक अंचल प्रभारी, बेतिया का कार्य करने हेतु प्राधिकृत किया जाता है।
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, डा0 प्रतिमा, राज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव।
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12 फरवरी 2020
सं0 6/गो0-34-06/2016-437/वा0कर--श्री धर्म देव कुमार, राज्य-कर सहायक आयुक्त, सहरसा अंचल, सहरसा को श्री कमल किशोर चौधरी, राज्य-कर संयुक्त आयुक्त के उपार्जित अवकाश की अवधि दिनांक 04.02.2020 से 04. 03.2020 तक के लिए अंचल प्रभारी, सहरसा के पद पर कार्य करने हेतु प्राधिकृत किया जाता है।
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, डा0 प्रतिमा, राज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव।9 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020
14 फरवरी 2020
सं0 6/गो॰-34-03/2019-472--वाणिज्य-कर विभाग में 56वीं0 से 59वीं0 बैच के नवनियुक्त परीक्ष्यमान राज्य कर सहायक आयुक्त श्री अमरेष कुमार, गृह जिला-पटना को अगले आदेष तक राज्य-कर सहायक आयुक्त, गोपालगंज अंचल, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
2. श्री अमरेष कुमार नवपदस्थापित स्थान पर सात दिन के अन्दर योगदान करेंगे एवं गोपालगंज अंचल से ही निर्धारित तिथि को नासिन एवं बिपार्ड का प्रषिक्षण प्राप्त करना सुनिष्चित करेंगे।
3. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अरूण कुमार मिश्रा, अपर सचिव।
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शिक्षा विभाग
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अधिसूचना
3 फरवरी 2020
सं0 3/आ01-66/2018/74--श्री राज किशोर सिंह, तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सारण (छापरा) सम्प्रति-जिला शिक्षा पदाधिकारी, खगड़िया के विरूद्ध ध्यानाकर्षण के माध्यम से बिहार विधान परिषद में प्रतिवेदित आरोपों यथा-नियम विपरीत कार्य करने, शिक्षकों के मनचाहे स्थानों पर स्थानांतरण/पदस्थापन कर अवैध राशि की उगाही करने/टी0ई0टी0 परीक्षा में परिक्षार्थियों को पास कराने हेतु छपरा के बाहर के शिक्षकों को मनचाहे केन्द्रों पर तैनाती करने, दागी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, मांझी को उक्त परीक्षा का केन्द्राधीक्षक बनाकर टी0ई0टी0 अभ्यार्थियों को पास कराया गया जिनमें इनकी बहु भी थी, की जॉच विभागीय स्तर से गठित जॉच कमिटि से करायी गयी। 2. जॉच कमिटि के प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप प्रपत्र-'क' गठित कर बचाव अभिकथन की मॉग की गयी। जॉच कमिटि से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन एवं श्री सिंह से प्राप्त बचाव अभिकथन के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह द्वारा स्थानांतरण/पदस्थापन में सावधानी एवं पारदर्शितता नहीं बरतने के प्रमाणित आरोप के लिए श्री सिंह को निम्न लघु दण्ड संसूचित करते हुए मामले को समाप्त किया जाता हैः- (i) आरोप वर्ष-2017-18 के लिए ''निन्दन''।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुशील कुमार, निदेशक (प्रशासन)-सह-अपर सचिव।
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श्रम संसाधन विभाग
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आदेश
4 फरवरी 2020
सं0 5/आर0एल0-40-01/2018 श्र0सं0-437--श्री कुमुद रंजन, तत्कालीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, गिद्धौर, जमुई सम्प्रति श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बेतिया सदर दिनांक 22.07.2014 को चिकित्सीय जांच हेतु तीन दिनों का अवकाश दिये जाने हेतु श्रम अधीक्षक, जमुई को आवेदन समर्पित किया। पुनः स्पीड-पोस्ट के माध्यम से ''बिना छुट्टी की अवधि का उल्लेख किये बिना'' अवधि विस्तार हेतु आवेदन, श्रम अधीक्षक, जमुई के कार्यालय में समर्पित किया। परन्तु उक्त तिथि के बाद श्री रंजन द्वारा श्रम अधीक्षक, जमुई के कार्यालय में योगदान समर्पित नहीं किया गया।
तदालोक में विभागीय पत्रांक-236 दिनांक 08.01.2018 द्वारा श्री रंजन को निलम्बित करते हुए श्रमायुक्त कोषांग में इनका मुख्यालय निर्धारित किया गया। श्री रंजन द्वारा उक्त निर्धारित मुख्यालय में दिनांक 09.01.2018 को अपना योगदान समर्पित किया गया। विभागीय आदेश ज्ञापांक-448 दिनांक 16.01.2018 द्वारा श्री रंजन को निलम्बन से मुक्त करते हुए श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बेतिया सदर के पद पर पदस्थापित किया गया। सहायक श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर, मुख्यालय बेतिया के पत्रांक-609 दिनांक 19.05.2018 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि श्री रंजन, तबीयत खराब का हवाला देते हुए आकस्मिक अवकाश का आवेदन देकर दिनांक 31.03.2018 से अभी तक लगागार मुख्यालय से अनुपस्थित हैं। विभागीय पत्रांक-4594 दिनांक 22.06.2018 द्वारा जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण, बेतिया से श्री रंजन का मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया। सहायक श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर, मुख्यालय बेतिया के पत्रांक-1032 दि0-18. 08.2018 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है, कि श्री रंजन के चिकित्सीय परीक्षण हेतु असैनिक शल्य चिकित्सा-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, प0 चम्पारण द्वारा दिनांक 13.08.2018 को चिकित्सा परिषद् का गठन किया गया, परन्तु दिनांक 12.08.2018 को श्री रंजन द्वारा सूचित किया गया कि वे लम्बी यात्रा कर बेतिया आकर चिकित्सीय परीक्षण कराने में असमर्थ हैं।
श्रम अधीक्षक, जमुई के पत्रांक-389 दिनांक 17.07.2018 द्वारा बिना आवेदन स्वीकृत कराये अपने मुख्यालय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप में श्री रंजन के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया10 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 गया। श्रम अधीक्षक, जमुई द्वारा विभाग को प्रेषित श्री रंजन के अंतिम वेतन प्रमाण पत्र में जुलाई, 2014 से 7 जनवरी, 2018 तक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण वेतन निकासी नहीं किये जाने का उल्लेख है। विभागीय पत्रांक-6127 दिनांक 16.08.2018 द्वारा श्री रंजन से आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परन्तु उनका जबाव अप्राप्त रहने की स्थिति में दिनांक 30.10.2018 को समाचार पत्र में प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करते हुए उनसे आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी, परन्तु उनका जबाव अप्राप्त रहा। तदालोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक-8240 दिनांक 28.12.2018 द्वारा श्री रंजन के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई संचालित की गयी जिसमें श्री रोहित राज सिंह, सहायक श्रमायुक्त, मुख्य निरीक्षी पदाधिकारी का कार्यालय, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-74 दिनांक 09.07.2019 द्वारा प्रासंगिक मामले में जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा मामले की सुनवाई विभिन्न तिथियों को निर्धारित कर आरोप के संबंध में आरोपी पदाधिकारी से बचाव का लिखित अभिकथन समर्पित करने की मांग की। परन्तु श्री रंजन उक्त निर्धारित सुनवाई में अनुपस्थित रहे एवं संचालन पदाधिकारी के आदेश की अवेहलना करते रहे। साथ ही उनके द्वारा कोई भी लिखित मंतव्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। उक्त स्थिति के आलोक में श्री रंजन को विभागीय कार्रवाई के प्रति कोई रूचि नहीं लेने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा एक पक्षीय निर्णय लेते हुए इनके विरूद्ध लगे आरोपों को प्रमाणित पाया।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-3363 दिनांक 01.08.2019 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-18(3) के तहत जांच प्रतिवेदन पर आरोपी पदाधिकारी से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
परन्तु उक्त संबंध में श्री रंजन का आवेदन अप्राप्त रहने की स्थिति में दिनांक 28.09.2019 को समाचार पत्र में प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करते हुए जांच प्रतिवेदन पर अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। परन्तु श्री रंजन का जबाव अभी तक अप्राप्त रहा है।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन के सम्यक जॉचोपरांत पाया गया कि श्री रंजन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बेतिया सदर को अनाधिकृत रूप से अपने कार्यालय से अनुपस्थित हैं। बार-बार निदेश दिये जाने के बाद भी वे लगातार रूप से अनुपस्थित रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि उनकी सरकारी सेवा में कोई रूचि नहीं है। वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक विचारोपरान्त उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के भाग-V नियम-14 (Xi) के आलोक में निम्न दण्ड अधिरोपित किया जाता हैः-
1. श्री कुमुद रंजन, तत्कालीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, गिद्धौर, जमुई सम्प्रति श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, बेतिया सदर, (जन्म तिथि-04.01.1979) को ''सेवा से बर्खास्तगी, जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी'', का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।
आदेश से, धर्मेन्द्र सिंह, श्रमायुक्त।
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गृह विभाग
(विशेेष शाखा)
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अधिसूचनाएं
13 फरवरी 2020
सं॰ एल/एच॰जी॰-1501/2005-1493--विा विभाग की संकल्प ज्ञापांक-7566, दिनांक-14.07.2010 के आलोक में बिहार गृह रक्षा वाहिनी के समादेष्टा संवर्ग के निम्नलिखित पदाधिकारी को बिहार कर्मचारी सेवा शर्त ''रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना-2010'' के प्रावधानों के तहत उनके नाम के सामने कॉलम-4 में अंकित तिथि से कॉलम-5 में उल्लिखित वेतनमान में तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन (एम॰ए॰सी॰पी॰) की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-
| क्र॰ | नाम/पदनाम/वेतनमान | जिला समादेष्टा के पद पर नियुक्ति कि तिथि | तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन की देय तिथि | तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन के फलस्वरूप अनुमान्य वेतन लेवल |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1 | श्री विमल कुमार शांडिल्य, वरीय जिला समादेष्टा, वेतन लेवल-12 | 20.10.1989 | 20.10.2019 | वेतन लेवल-13 |
3. स्वीकृत एम॰ए॰सी॰पी॰ में किसी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदा एम॰ए॰सी॰पी॰ योजना के लाभ संबंधी आदेश को रद्द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा तद्नुसार उन्हें भुगतान की गयी राशि का समायोजन किया जा सकेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, अपर सचिव।11 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020
13 फरवरी 2020
सं॰ एल/एच॰जी॰-1501/2005-1494--विा विभाग की अधिसूचना सं॰-6068, दिनांक 13.06.2013 के आलोक में बिहार गृह रक्षा वाहिनी के समादेष्टा संवर्ग के निम्नांकित पदाधिकारियों को विभागीय अधिसूचना सं॰-13890, दिनांक 21.09.2011 द्वारा दिनांक 01.01.2009 से प्रदा प्रथम रूपांतरित सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना (एम॰ए॰सी॰पी॰) को रद्द करते हुए बिहार कर्मचारी सेवा शर्त (सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना) नियमावली-2003 एवं बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त (सुनिश्चित वृाि उन्नयन योजना) निरसन (संशोधन) नियमावली, 2013 के प्रावधानों के तहत उनके नाम के सामने कॉलम-4 में अंकित तिथि से कॉलम-5 में उल्लिखित वेतनमान में प्रथम सुनिश्चित वृाि उन्नयन (ए॰सी॰पी॰) की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-
| क्र॰ | नाम/पदनाम/वेतनमान | जिला समादेष्टा के पद पर नियुक्ति कि तिथि | प्रथम सुनिश्चित वृाि उन्नयन की देय तिथि | प्रथम सुनिश्चित वृाि उन्नयन के फलस्वरूप अनुमान्य वेतनमान |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 2 | श्री जयंत प्रताप सिंह जिला समादेष्टा पी॰बी॰-3 ग्रेड पे 6600 | 02.05.1997 | 02.05.2009 | पी॰बी॰-3 ग्रेड पे 6600 |
| 3. | श्री राणा अमरेन्द्र कुमार दीपक जिला समादेष्टा पी॰बी॰-3 ग्रेड पे 6600 | 02.05.1997 | 02.05.2009 | पी॰बी॰-3 ग्रेड पे 6600 |
| 4. | श्री अनुज कुमार, जिला समादेष्टा पी॰बी॰-3 ग्रेड पे 6600 | 02.05.1997 | 02.05.2009 | पी॰बी॰-3 ग्रेड पे 6600 |
2. इसमें विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
3. स्वीकृत ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ में किसी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदा ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ योजना के लाभ संबंधी आदेश को रद्द/संशोधित कर दिया जाएगा तथा उन्हें भुगतान की गयी राशि का समायोजन किया जा सकेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, अपर सचिव।
------ कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ------- अधिसूचना 11 फरवरी 2020
सं0 1/प्रति.05-01/2019-165--श्री दीपक आनन्द भा॰प्र॰से॰, अपर सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक के लिए निदेशक, पुरातत्व, बिहार के पद का प्रभार सौंपा जाता है। 2. प्रस्ताव पर माननीय मंत्री, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, तारानन्द महतो वियोगी, उप-सचिव।
------ मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ------- अधिसूचनाएं 4 जनवरी 2019
सं0 8/आ0(राज0उ0)-02-31/2015-37--श्री सरोज कुमार, तत्का0 प्रभारी अधीक्षक उत्पाद, औरंगाबाद के प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में निगरानी थाना कांड सं0-110/2015 दिनांक 23.12.2015 दर्ज किये जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-333 दिनांक 19.01.2016 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प सं0-3664 दिनांक 2.8.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया है। श्री कुमार के दिनांक 31.08.2016 को सेवा निवृत्त हो जाने के फलस्वरूप उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि दिनांक 31.08.2016 से उन्हें निलम्बन मुक्त किया जाता है।12 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 2. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही जारी रहेगी। 3. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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4 जनवरी 2019
सं0 8/आ0(राज0 नि0)-1-34/2014/38--श्री अजय कृष्ण मिश्र, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मगध प्रमंडल, गया (निलंबित) के विरूद्ध अपने सेवाकाल में पद का दुरूपयोग कर आय से अधिक चल अचल सम्पत्ति अर्जित करने एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के प्रतिकूल आचरण करने के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-5479 दिनांक 16.12.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
2. संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जॉच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक-95 दिनांक 01.02.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोप सं0-01 एवं 02 को प्रमाणित निष्कर्षित किया गया है। 3. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-549 दिनांक 16.02.2018 द्वारा श्री मिश्र से द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी। श्री मिश्र के द्वारा अपने द्वितीय बचाव बयान में ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण का उल्लेख नहीं किया गया है जिसके आधार पर उन्हें निर्दोष माना जा सके।
4. श्री मिश्र द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं होने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली, 2005 सह यथा संषोधित नियमावली 2007 के नियम-14(xi) के तहत् सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लेते हुए विभागीय पत्रांक-1537 दिनांक 08.05.2018 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का परामर्श प्राप्त किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2096 दिनांक 02.11.2018 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया है।
5 अतएव उक्त के आलोक में पूर्ण विचारोपरान्त श्री अजय कृष्ण मिश्र, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मगध प्रमंडल, गया सम्प्रति निलंबित मुख्यालय- सहायक निबंधन महानिरीक्षक का कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 सह यथा संषोधित नियमावली 2007 के नियम-14(xi) के तहत् सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड अधिरोपित करते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त की जाती है। 6 इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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11 जनवरी 2019
सं0 8/आ0(राज0उ0)-02-30/2015-98--श्री मनोज कुमार सिंह, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, बेगुसराय सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-उपायुक्त उत्पाद, तिरहुत-सह-सारण प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध बक्सर पदस्थापन काल में अधीनस्थ कर्मियों पर अर्मयादित भाषा एवं जाति बोधक शब्द आदि का प्रयोग करना, बक्सर उत्पाद हाजत से अभियुक्त का फरार होना, कार्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता तथा षिथिलता बरतने एवं सुरक्षा के मानको की अनदेखी करना एवं प्रषासनिक क्षमता का अभाव, मद्य निषेध नीति के विपरीत कार्य कर उत्पाद सिपाही श्री पंजियार से शराब की मांग करना तथा उनके अवकाष को अस्वीकृत करना एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के प्रावधान के प्रतिकूल आचरण तथा बेगुसराय पदस्थापन काल में सरकारी दायित्वों के निर्वाहन में लापरवाही एवं सरकारी दिषा निर्देषों की अवहेलना करना आदि आरोप में विभागीय संकल्प सं0-1932 दिनांक 07.06.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी । 2. संचालन पदाधिकारी-सह-संयुक्त सचिव के पत्रांक-3166 दिनांक 15.11.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जॉच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जॉच प्रतिवेदन में बक्सर जिला के पदस्थापन काल में लगाये गये आरोप सं0-01, 02 एवं 04 को प्रमाणित एवं 03 को आंषिक प्रमाणित तथा बेगुसराय जिला के पदस्थापन काल में लगाये गये आरोप सं0-01 एवं 02 को प्रमाणित निष्कर्षित किया गया है। 3. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-3865 दिनांक 28.11.2018 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी। श्री सिंह द्वारा दिनांक 18.12.2018 को द्वितीय बचाव वयान विभाग में समर्पित किया गया। 4. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन एवं श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय बचाव वयान के समीक्षोपरांत श्री सिंह को निलंबन से मुक्त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), 2005 के नियम-14 (v) के तहत् दो वार्षिक वेतन वृद्धियॉ असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दण्ड अधिरोपित किया जाता है। 5. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।13 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020
5 फरवरी 2019
सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-2-22/2016-413--श्री राजू कुमार मिश्र, निरीक्षक उत्पाद, मोतिहारी के विरूद्ध कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं पर्यवेक्षण कार्य का अभाव, अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण नहीं रखने के कारण उत्पाद राजस्व की हानि होना एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमामवली, 1976 के प्रावधानों के प्रतिकूल कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा का पालन नहीं करना एवं अधीनस्थ सरकारी सेवक पर नियंत्रण का अभाव आदि के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-891 दिनांक 17.02. 2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी । उक्त विभागीय कार्यवाही में पूर्ण विचारोपरांत अधिसूचना सं0-4188 दिनांक 05.09.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत् श्री राजू कुमार मिश्र, निरीक्षक उत्पाद, मोतिहारी के 03 (तीन) वार्षिक वेतनवृद्धियॉ असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दण्ड अधिरोपित किया गया है। 2. उक्त दण्डादेष के विरूद्ध श्री मिश्र द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0नं0-17347/2016 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 27.11.2018 को निम्नांकित न्यायादेष पारित किया गया हैः- " In both the counts, the order passed by the Special Secretary, Bihar, Patna, containing memo no. 3156 dated 05.07.2016 does not servive, accordingly the same is quashed. The matter is remanded back to the disciplinary authority to consider the case of the petitioner afresh and take decision in accordance with law within a period of two months from the date of receipt/production of a copy of this order. It is clarified that this court is not giving any opinion on the merit of the case. With the aforesaid observations and directions, this writ petition is allowed to the aforesaid extent. 3. माननीय उच्च न्यायालय के आदेष के आलोक में नियमानुसार नये सिरे से कार्रवाई करने हेतु अधिसूचना सं0-4188 दिनांक 05.09.16 द्वारा अधिरोपित दण्ड को निरस्त किया जाता है। 4. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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7 फरवरी 2019
सं0 8/आ0(राज0 उ0)-2-11/2015/455--अधीक्षक उत्पाद कार्यालय, मुंगेर का अंकेक्षण में यह प्रकाष में आया है कि उत्पाद शुल्क वसूली से संबंधित टे्रजरी चलान में हेराफेरी कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुॅंचाई गयी है। अंकेक्षण प्रतिवेदन के आधार पर मामले की जॉंच की गयी और पाया गया कि विभिन्न पदाधिकारियों के पदस्थापन काल में फर्जी चलान के माध्यम से राजस्व क्षति पहुॅचाई गयी है।
2. श्री विनोद कुमार झा, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, मुंगेर सम्प्रति निरीक्षक उत्पाद, कटिहार के विरूद्ध कार्य के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही के फलस्वरूप फर्जी चालान के माध्यम से सरकारी राजस्व की क्षति पहुॅचना, प्रशासनिक क्षमता के अभाव के कारण अधीनस्थ कर्मियों/कार्यालय पर प्रभावकारी नियंत्रण नहीं रखना एवं निजी स्वार्थ के लिए पद का दुरूपयोग कर अनुज्ञाधारियों को अनुचित लाभ पहुॅचाकर सरकारी राजस्व का गबन करना आदि आरोप में विभागीय संकल्प संख्या-335 दिनांक 19.01.2016 यथा संशोधित संकल्प सं0-1542 दिनांक 18.03.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी । 3. संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जॉंच आयुक्त, बिहार पटना के पत्रांक-353 दिनांक 01..08.17 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोप संख्या-01,02 एवं 03 को प्रमाणित पाया गया है। 4. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-3648 दिनांक 23.08.2017 द्वारा श्री झा से द्वितीय बचाव बयान की मांग की गयी।
5. विभागीय पत्रांक-4641 दिनांक 15.11.2017 एवं 740 दिनांक 05.03.2018 द्वारा स्मारित करने के बावजूद श्री झा द्वारा द्वितीय बचाव बयान विभाग में समर्पित नहीं किया गया। समाचार पत्र में प्रेस विज्ञप्ति प्रकाषित करा कर द्वितीय बचाव बयान की माँग की गयी, परन्तु उनके द्वारा द्वितीय बचाव बयान विभाग में समर्पित नही किया गया।
6. इसके अतिरिक्त श्री झा के विभिन्न पदस्थापन काल में पाया गया कि वे अपने पूरे सेवा काल में कार्य के प्रति लापरवाह, उदासीन, अनुषासनहीन, और अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे है। पूर्व में इन्हें कई दंड अधिरोपित किये जा चुके है, जिसमें पदावनत करने का बृहत दंड भी है, लेकिन उनके कार्यषैली में कोई परिवर्तन दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है। इस तरह के पदाधिकारियों को सेवा में बने रहने देना उचित नहीं हेै। अतएव पूरे सेवा काल में कर्तव्यहीनता, लापरवाही, अनुषासनहीनता, अनाधिकृत अनुपस्थिति एवं राजस्वहित के प्रतिकूल कार्यो के आवर्ती आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 यथा संषोधित 2007 के नियम 14 (पग) के अंतर्गत अनिवार्य सेवा निवृत्ति का दंड अधिरोपित करने का विभाग द्वारा निर्णय लिया गया।14 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 7. विभागीय निर्णय पर पत्रांक-2573 दिनांक 25.07.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/अभिमत की अपेक्षा की गई। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना ने अपने पत्रांक-2635 दिनांक 31.12.2018 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया है।
8. श्री झा के विरूद्ध अनिवार्य सेवा निवृति का दण्ड अधिरोपित करने हेतु मंत्रिपरिषद के विचारार्थ प्रस्ताव रखा गया। मंत्रिपरिषद की बैठक दिनांक-01.02.2019 में मद सं0-20 के रूप में विभागीय प्रस्ताव की स्वीकृति प्रदान की गई है। 9. अतः मंत्रिपरिषद के निर्णय के आलोक में श्री विनोद कुमार झा, तत्कालीन अधीक्षक उत्पाद, मुंगेर सम्प्रति निरीक्षक उत्पाद कटिहार, को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 यथा संशोधित नियमावली, 2007 के नियम 14 (IX) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दण्ड अधिरोपित करते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त की जाती है। 10. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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2 अगस्त 2019
सं0 8/आ0 (राज0उ0)-2-16/2016-2769--श्री विकास कुमार सिन्हा, तत्का0 सहायक आयुक्त उत्पाद, गया सम्प्रति सहायक आयुक्त उत्पाद, भोजपुर के विरूद्ध मे0 षिप्रा बिवरेज प्रा0 लि0 पर अधिरोपित दण्ड की राषि वसूल नहीं करने के कारण विभाग द्वारा कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं राजस्व क्षति आदि आरोप में विभागीय संकल्प सं0-3818 दिनांक-11.08.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2, विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी श्री श्रीकृष्ण पासवान, उपायुक्त उत्पाद, पटना-सह-मगध प्रमंडल, पटना द्वारा अपना जॉच प्रतिवेदन पत्रांक-146 दिनांक 27.09.2016 समर्पित किया गया, जिसमें राजस्व क्षति एवं लापरवाही के आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया है। 3. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमत होते हुये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(3) के अन्तर्गत विभागीय ज्ञापांक-2976 दिनांक 11.07.2017 द्वारा द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी। श्री सिन्हा द्वारा अपना बचाव वयान अपने पत्रांक-1770 दिनांक 08.08.2017 द्वारा समर्पित किया गया, जिसमें आरोप से मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया है। 4.संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन एवं आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय बचाव वयान के समीक्षोपरांत 03 (तीन) वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने के प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-4760 दिनांक 28.11.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गयी। 5. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-59 दिनांक 09.04.2018 द्वारा परामर्ष दिया गया है कि वाद सं0-30/2016 में दिनांक 19.07.2016 को पर्षदीय न्यायालय द्वारा पारित स्थगनादेष के आलोक में उक्त न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा अन्तिम आदेष पारित हो जाने के पश्चात् आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर सम्यक् समीक्षोपरान्त दण्ड अधिरोपन की कार्रवाई करते हुए आयोग के विचारार्थ प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाय। 6.श्री सिन्हा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही तीन वर्षो से लम्बित है। विभाग द्वारा सर्वश्री षिप्रा बिवरेज प्रा0 लि0 की 1.00 (एक) करोड़ की जमानत राषि जब्त की जा चुकी है, जो कम्पनी पर अधिरोपित अर्थदण्ड का 10 प्रतिषत अर्थात् 20.67 (लाख) से अधिक है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया है। सर्वश्री षिप्रा बिवरेज प्रा0 लि0 के सारे साजो-सामान एवं संयत्र को राज्य के बाहर स्थानांतरण करने की अनुमति विभाग द्वारा दी जा चुकी है। अतः वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री विकास कुमार सिन्हा के विरूद्ध पूर्व प्रस्तावित दण्ड पर पुनर्विचार करते हुए श्री सिन्हा को आरोपों से मुक्त किया जाता है तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागया कार्यवाही को समाप्त की जाती है। 7. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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28 जून 2019
सं0 9/आरोप (राज0)(उ0)-2-02/2012-2254--श्री अष्विनी कुमार, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, नवादा के विरूद्ध विदेषी शराब/वीयर के न्यूनतम प्रत्याभूत मात्रा में उठाव नहीं होने से राजस्व की अपूरणीय क्षति, अनुज्ञप्तिधारी से मिलीभगत कर निजी लाभ उठाना एवं कर्त्तव्य में षिथिलता एवं उच्चाधिकारी के निर्देषों की अवहेलना आदि आरोपों के लिये विभागीय संकल्प संख्या-2498 दिनांक 22.05.2012 द्वारा विभागीय जॉच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। विभागीय जॉच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी ने जॉच में श्री अष्विनी कुमार के विरूद्ध गठित तीनों आरोपों को पूर्णतया प्रमाणित पाया । जॉच प्रतिवेदन एवं श्री अष्विनी कुमार से प्राप्त द्वितीय बचाव वयान के आधार पर सम्यक् विचारोपरांत श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 यथा संशोधित 2007 के नियम-14 (xi) के परन्तुक के तहत् सेवा से बर्खास्त करने का दण्ड अधिरोपित करने के प्रस्ताव में मंत्रिपरिषद् की बैठक दिनांक 16.06.2016 के मद सं0-28 के रूप में प्रदान की गयी स्वीकृति के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-3038 दिनांक 28.06.2016 द्वारा सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड अधिरोपित किया गया ।15 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 2. श्री कुमार द्वारा उक्त दण्डादेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No.& 610/2017 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 09.05.2017 को आदेश पारित किया गया है, जिसका मुख्य अंश निम्न है :- " The order of the disciplinary authority is non-speaking and proceeds to uphold the guilt mechanically without discussing the defence led by the petitioner and as I have observed, without dealing with the issue raised. The entire proceedings questioned in the writ petition is a bundle of illegalities and cannot be upheld and in consequence, the entire proceedings including the chargesheet, the enquiry report together with the impugned order of dismissal bearing memo No.3038 dated 28.6.2016 passed by the State Government in its Registration, Excise and Prohibition Department impugned at Annexure-28 cannot be upheld and are accordingly quashed and set aside. The petitioner is reinstated with full consequential benefits. The writ petition is allowed. In result, the review petition stands disposed of."
3. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के दिनांक 09.05.2017 को पारित आदेश के विरूद्ध विधि विभाग के परामर्ष से L.P.A. No.- 1123/2017 दायर किया गया। L.P.A. No.-1123/2017 में माननीय उच्च न्यायालय , पटना द्वारा दिनांक 11.10.2018 को अधोलिखित आदेष पारित किया गया हैः- "In view of the above and for the reasons stated above, we modify the impugned judgment and order passed by the learned Single Judge to the extent to reserve liberty in favour of the appellant-State to hold a fresh de novo enquiry in accordance with law and the rules on the same charge. The present Letters Patent Appeal is partly Allowed to the aforesaid extent.."
4. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा L.P.A. No.- 1123/2017 में दिनांक 11.10.2018 को पारित आदेष के विरूद्ध अपील दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग का परामर्ष प्राप्त किया गया। विधि विभाग का परामर्ष निम्न हैः- "The Hon'ble Division Bench only upheld the part of the order of the Hon'ble Single Judge by which the punishment of dismissal had been inflicted and enquiry proceeding after the stage of framing of the charge memo and gave liberty to the State to move afresh from the stage of framing of charges (the same charge) and hold a de novo enquiry afresh in accordance with law.
The said order being an order in favour of the State, why the State wishes to file an appeal is not manifest.
In my opinion, it is open to the State to proceed afresh i.e. on the same charge and to conduct a de novo enquiry in accordance with law."
5. माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा L.P.A. No.-1123/2017 में पारित आदेष में श्री अष्विनी कुमार के विरूद्ध पूर्व गठित आरोप के आधार पर नियामानुसार नये सिरे से विभागीय कार्यवाही चलाने की छूट दी गयी है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(5) के अनुसार ''जहॉ सरकारी सेवक पर सेवाच्युक्ति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अधिरोपित शास्ति किसी न्यायालय के किसी आदेष द्वारा निरस्त कर दी जाती है या के परिणाम स्वरूप शून्य घोषित होती है या शून्य हो जाती है और अनुषासनिक प्राधिकार, मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के पष्चात् ऐसी परिस्थिति में यदि न्यायालय ने मामले के गुणावगुण पर विचार किये बिना मात्र तकनीकी आधार पर आदेष पारित किया हो, सरकारी सेवक के विरूद्ध ऐसे आरोपों, जिन पर सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्त की शास्ति मूलतः अधिरोपित की गयी थी, की पुनः जाँच करने का विनिष्चय करता है वहाँ सरकारी सेवक सेवाच्युति, बर्खास्तगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मूल आदेष की तिथि से नियुक्ति प्राधिकार द्वारा निलम्बित किया हुआ समझा जायेगा और अगले आदेष तक निलम्बनाधीन रहेगा।''
6. मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सं0-1093 दिनांक 20.11.2018 के आलोक में विधि विभाग के माध्यम से श्री अष्विनी कुमार को सेवा में वहाल कर पूर्व गठित आरोपों के आधार पर नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित करने और श्री कुमार को उनकी बर्खास्तगी की तिथि 28.06.2016 से लगातार अगले आदेष तक निलंबित रखने एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किये जाने का प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष रखा गया।
7. मुख्य सचिव की अध्यक्ष्ता में गठित समिति द्वारा दिनांक 25.06.2019 की बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार निम्नलिखित अनुषंसा की गयी हैः-16 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-3038 दिनांक-28.06.2016 द्वारा अधिरोपित सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड को निरस्त कर पुनः सेवा में बर्खास्तगी की तिथि 28.06.2016 से ही लगातार अगले आदेष तक निलम्बनाधीन रखते हुए सेवा में बहाल करने एवं निलंबन अवधि के लिए जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किये जाने तथा L.P.A. No.- 1123/2017 में माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक 11.10.2018 को पारित आदेष के आलोक में श्री अष्विनी कुमार के विरूद्व पूर्व गठित आरोपों पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के प्रावधानों के अनुसार नियमानुकूल विभागीय कार्यवाही पुनः नये सिरे से प्रारंभ करने की अनुषंसा की गयी।''
8. अतः समिति की अनुषंसा के आलोक में श्री अष्विनी कुमार, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, नवादा के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-3038 दिनांक 28.06.2016 द्वारा सेवा से बर्खास्तगी का दंडादेष को निरस्त करते हुए उसी तिथि से सेवा में बहाल किया जाता है। श्री कुमार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियमावली 2005 के नियम-9 (5) के तहत् दिनांक 28.06.2016 के प्रभाव से अगले आदेष तक निलंबनाधीन रहेगें। निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय उपायुक्त मद्य निषेध, पटना-सह-मगध प्रमंडल, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। श्री कुमार को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जायेगा।
9. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
-------- 30 दिसम्बर 2019 सं0 9/आरोप(राज0)( नि0)-01-17/2012-4805--श्री अषोक कुमार मौर्य, तत्कालीन जिला अवर निबंधक, खगड़िया सम्प्रति सेवा निवृत्त को उनके विभिन्न पदस्थापन कार्यालयों में अपने कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने, विभागीय निर्देष का उल्लंघन, कदाचार, अनियमितता एवं राजस्व की भारी क्षति पहुॅचाने आदि गंभीर आरोपों के लिए निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प संख्या-1049 दिनांक 05.04.2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई थी।
2. संचालन पदाधिकारी विभागीय जॉच आयुक्त, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-716 सी0डी0ई दिनांक 30.08.2011 द्वारा जॉच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन में निम्नरूप से निष्कर्षित किया गया। आरोप सं0-1-जॉच में तथाकथित राजस्व क्षति का आकलन सही नहीं पाया गया एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा कदाचार एवं अनियमितता बरतने के आरोप की पुष्टि नहीं होती है (2) आरोपित पदाधिकारी द्वारा जानबुझ कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुॅचाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। मात्र यह कहा जा सकता है कि इन दस्तावेजों को भेजने में कुछ विलंब हुआ है। यद्यपि विलंब के बावजूद भी यह विप्रेषण permissible समय सीमा के अन्तर्गत था, फिर भी आज तक, सूचना के अधिकार, से प्राप्त जानकारी से स्पष्ट होता है कि कमी मुद्रांक शुल्क की वसूली नहीं की गई। जबकि आरोपी को वहॉ से निलंबित हुये 01 वर्ष 08 माह की अवधि बीत चुकी है। अतएव आरोपी के कारण राजस्व की क्षति के आरोप के संबंध में दिया गया स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य है (3) आरोपित पदाधिकारी द्वारा उपरोक्त विभागीय निर्देष के उल्लंघन का कोई मामला प्रमाणित नहीं होता है (4) आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप प्रमाणित नहीं होते है। विभागीय जॉच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा में यह पाया गया कि विभागीय कार्यवाही में कतिपय बिन्दुओं का विष्लेषण नहीं हो सका है। प्रस्तुत मामला राजस्व क्षति का है। एक के बाद एक नौ दस्तावेजों के दो फसला जमींन को चौड़ के रूप में निबंधित किया गया, जिसमें 5,76,384/-(पॉच लाख छिहत्तर हजार तीन सौ चौरासी) रूपये के राजस्व की क्षति आकलित हुई । दूसरे आरोप के संबंध में जब कार्यालय में इस आषय का आवेदन प्राप्त हो गया था कि संबंधित जमीन उच्च श्रेणी की है तो भी 47(A) में रेफर करने में आरोपी पदाधिकारी द्वारा 11 माह से अधिक का विलंब किया जो गलत मंषा को दिखाता है। अतएव जॉच प्रतिवेदन से असहमति व्यक्त करते हुए विभागीय पत्रांक-1419 दिनांक 01.04.2014 द्वारा श्री मौर्य से द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी। श्री मौर्य द्वारा दिनांक 25.02.2013 को समर्पित बचाव के लिखित अभिकथन में असहमति के बिन्दुओं पर ऐसा कोई तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जो विचारणीय हो। अतएव श्री मौर्य के बचाव का लिखित अभिकथन को अस्वीकार करते हुए सेवा से बर्खास्त करने के संबंध में विभागीय पत्रांक-3935 दिनांक 10.06.2013 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्ष की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1487 दिनांक 04.10.2013 के द्वारा विभागीय प्रस्ताव में असहमति प्रदान की गयी। श्री मौर्य के विरूद्ध अन्य पदस्थापन स्थानों में निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गया थाः-
| कार्यालय | आरोप | अधिरोपित किया गया दण्डादेष |
| अवर निबंधक, बहेड़ा | अनियमित निबंधन स्वीकार करने से सरकार को राजस्व क्षति | विभागीय स कल्प ं स 0-1549 ं दिनांक 25.05.11 द्वारा तीन वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध |
| अवर निबंधक, नवादा | अनियमित निबंधन स्वीकार करने से सरकार का राजस्व क्षति | विभागीय स कल्प ं स 0-3810 ं दिनांक 19.12.11 द्वारा दो वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध |
| जिला अवर निबंधक, धनवाद | अनियमित निबंधन स्वीकार करने से सरकार को राजस्व क्षति | विभागीय अधिसूचना सं0-714 दिनांक 29.03.05 द्वारा पॉच वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प ्रभाव स े अवरूद्ध तथा 426997/- रू0 का आर्थिक सजा। |
| ि जला अवर निबंधक, सहरसा | अनियमित निबंधन स्वीकार करने से सरकार को राजस्व क्षति | विभागीय आदेष सं0-1342 दिनांक 21.05.10 द्वारा दो वार्षिक वेतन वृद्धियॉ असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध |
उपर्युक्त से स्पष्ट है कि आरोपी पदाधिकारी ने अपने सेवाकाल के विभिन्न पदस्थाापन में अनियमित कार्य किया है। श्री मौर्य द्वारा की गई अनियमितता को देखते हुए उन्हें सेवा में बने रहने देने का औचित्य नहीं रह गया था। अतएव पूर्व विचारोपरांत राज्य सरकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 यथा संषोधित 2007 के नियम-14 (ix) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-4371 दिनांक 09.10.2014 द्वारा श्री मार्य को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दण्ड अधिरोपित किया गया ।
3. उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री मौर्य द्वारा मा0 उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No. -5232/2015 दायर किया गया। उक्त याचिका में मा0 उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 22.01.2019 को निम्नांकित न्यायादेष पारित किया गयाः- "The notification dated 9.10.2014 is clearly unsustainable for the reasons indicated hereinabove. The order dated 9.10.2014 is therefore quashed. As a result of quashing of the order dated 9.10.2014 the order dated 29.1.2015 rejecting the petitioner's application under Rule 24 (2) of the Bihar CCA Rules 2005 is also unsustainable inasmuch as the same merely reaffirms the illegal conclusion contained in notification dated 9.10.2014. That apart the order dated 19.1.2015 is without assigning any reason and is cryptic order which by itself is unsustainable for the said defect.
The writ petition is allowed. As a result of quashing of the impugned orders the petitioner will be entitled to all consequential benefits.
4. उक्त न्यायादेश के विरूद्ध अपील दायर करने हेतू Grounds of appeal तैयार कर L.P.A. दायर करने हेतु विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया। विधि विभाग द्वारा निम्नांकित परामर्श दिया गया :-
" The Departmental inquiry commissioner in his inquiry report dated 30.8.2012 had exonerated the petitioner of C.W.J.C.No 5232/2015 from the charges levelled against him. The second show cause notice issued to him by the Disciplinary authority on 5.12.2012 was quashed by order dated 13.2.2014 passed in C.W.J.C.No. 9923/2013 as the same was found to be in violation of the provisions of Rule 18(2) of the Bihar Govt. servants (C.C.A.) Rules, 2005. Thereafter by Memo No. 437 dated 9.10.2014 fresh order of punishment , that is, compulsory retirement was passed by the Disciplinary authority. The said order has been set aside vide order dated 22.1.2019 passed in C.W.J.C.No. 5232/2015 as the single Judge found that there has been gross violation of the provisions of Rule 18(6) of the aforementioned Rules, 2005 in as much as it was found that order dated 9.10.2014 passed by the Disciplinary authority does not contain any conclusion or finding on any article of charge.
In the above view of the matter, I do not find any good ground for filling L.P.A. against the writ Court order dated 22.1.2019.
7. माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा CWJC No.- 5232/2015 में दिनांक-22.01.2019 को पारित आदेष के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-4371 दिनांक 09.10.2014 द्वारा श्री मौर्य के विरूद्ध अनिवार्य सेवा निवृत्ति का अधिरोपित दण्ड पर विचार करने हेतु मुख्य सचिव, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित समिति के विचारार्थ रखा गया।
8. समिति की बैठक दिनांक 02.12.2019 में सम्यक् विचारोपरांत सी0डब्लू0जे0सी0सं0-5232/2015 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 22.01.2019 को पारित न्यायादेष का अनुपालन करत हुए विभागीय अधिसूचना सं0-4371 दिनांक 09.10.2014 को निरस्त किए जाने की अनुषंसा की गयी है।
9. अतः समिति की अनुषंसा के आलोक में श्री अषोक कुमार मौर्य, तत्का0 जिला अवर निबंधक, खगड़िया सम्प्रति सेवा निवृत्त के विरूद्ध अधिरोपित दंडादेष विभागीय अधिसूचना सं0-4371 दिनांक 09.10.2014 को निरस्त किया जाता है। 10. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार वर्मा, अवर सचिव।
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29 मई 2019
सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-2-21/2019-1952--श्री अरूण कुमार मिश्र, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षक मद्य निषेध, कटिहार के विरूद्ध कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता के कारण राजस्व क्षति, अनुज्ञप्ति18 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 का विलंब से विघटन एवं पद का दुरूपयोग करते हुए राजस्व क्षति की सूचना जिला पदाधिकारी को नहीं देना, बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 का उल्लंघन करना एवं विभागीय नियमावली एवं वित्तीय नियमावली का उल्लंघन करने आदि आरोप में संकल्प संख्या-1489 दिनांक 16.03.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी ।
2. संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक-189 दिनांक 22.02.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। जॉच प्रतिवेदन में आरोप सं0-02 को प्रमाणित एवं आरोप सं0-01 को अंषतः प्रमाणित तथा आरोप सं0-03, 04 को प्रमाणित नहीं होता है, निष्कर्षित किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 के तहत् संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोप एवं आरोप सं0-03 एवं 04 में विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-897 दिनांक 15.03.2018 द्वारा श्री मिश्र से द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी । 3. श्री मिश्र द्वारा अपने पत्रांक-444 दिनांक 20.06.2018 द्वारा द्वितीय बचाव बयान विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए लगाये गए आरोपों से मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया। श्री मिश्र ने अपने द्वितीय बचाव में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया है।
4. संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं श्री मिश्र से प्राप्त बचाव वयान के समीक्षोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियमावली 2015 के नियम-14 (vi ) के तहत् 03 (तीन) वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने के प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-127 दिनांक 16.01.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-278 दिनांक 08.05.2019 द्वारा सम्यक् विचारोपरांत विभागीय दण्ड प्रस्ताव में सहमति व्यक्त किया गया है। अतएव श्री मिश्र के बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 (vi ) के तहत् 03 (तीन) वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दण्ड अधिरोपित करते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त की जाती है।
5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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15 फरवरी 2019
सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-2-06/2015-564--श्री विनोद कुमार झा, तत्कालीन सहायक आयुक्त उत्पाद, भोजपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त उपायुक्त उत्पाद के विरूद्ध अवैध शराब का निर्माण, चौर्य बिक्री तथा कारोबारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने में विफलता एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता, प्रभावी पर्यवेक्षण का अभाव आदि आरोप में विभागीय संकल्प संख्या-4491 दिनांक 07.10.2015 द्वारा बिहार पेंषन नियमावली 1950 के नियम-43 (बी.) के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी ।
2. संचालन पदाधिकारी -सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक-476 दिनांक 03.10.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध करायी गयी है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-4927 अनु0, दिनांक 11.12.2017 द्वारा श्री झा से द्वितीय बचाव बयान की मांग की गयी ।
3. श्री झा द्वारा अपना द्वितीय बचाव बयान दिनांक 02.01.2018 को विभाग में समर्पित किया गया। उनके द्वारा अपने बचाव वयान में ऐसा कोई तथ्य नहीं उल्लिखित किया गया है, जिस पर विचार किया जा सके।
4. संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं श्री झा द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव बयान पर सम्यक् विचारोपरान्त अवैध शराब के निर्माण, चौर्य बिक्री तथा अवैध कारोबारियों पर प्रषासनिक नियंत्रण में विफलता, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता, प्रभावी पर्यवेक्षण का अभाव जैसे आदि गंभीर आरोपों के लिए बिहार पेंषन नियमावली के नियम-43 (a) के तहत् उनके पेंषन की राषि से 10 : (दस) प्रतिषत पेंषन की कटौती करने का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया । विभागीय पत्रांक-1720 दिनांक 23.05.18 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-2636 दिनांक 31.12.2018 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव अधिक होने के कारण आनुपातिक नहीं है, का अभिमत दिया गया है। बिहार लोक सेवा आयोग के अभिमत के आधार पर श्री झा का बिहार पेंषन नियमावली के नियम-43(a) के तहत् उनके पेंषन की राषि से 5 (पांच) प्रतिषत राषि की कटौती का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।
5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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15 फरवरी 2019
सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-2-01/2019-565--श्री मनोज कुमार सिंह, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, बेगुसराय को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1)(क)(ग) एवं (2) (क) के तहत् विभागीय अधिसूचना सं0-332 दिनांक 30.01.2019 द्वारा दिनांक 11.01.19 से निलंबित किया गया है। कारागार से मुक्त होने के उपरांत19 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 श्री सिंह का निलंबन अवधि में मुख्यालय उपायुक्त उत्पाद का कार्यालय, तिरहुत-सह-सारण प्रमंडल, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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27 फरवरी 2019
सं0 8/आ0(राज0 नि0)-1-34/2014-746--श्री अजय कृष्ण मिश्र, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मगध प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवा के बर्खास्त द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 24(2) के तहत पुनर्विलोकन अर्जी दायर किया गया है। श्री मिश्र के विरूद्ध अपने सेवाकाल में पद का दुरूपयोग कर आय से अधिक चल अचल सम्पत्ति अर्जित करने एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के प्रतिकूल आचरण करने के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-5479 दिनांक 16.12.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। उक्त विभागीय कार्यवाही में श्री मिश्र को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 सह यथा संषोधित नियमावली 2007 के नियम-14 (xi) के तहत् मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति प्राप्त कर अधिसूचना सं0-38 दिनांक 04.01. 2019 द्वारा सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड अधिरोपित किया गया है।
2. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावाली 2005 के नियम-24(2) के अनुसार सरकार के आदेश के विरूद्ध कोई अपील नहीं की जा सकेगी, हालांकि ज्ञापन के रूप में पुनर्विलोकन अर्जी दाखिल की जा सकेगी। श्री मिश्र द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया हैं। अतएव श्री मिश्र का पुनर्विलोकन अर्जी स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् की बैठक दिनांक 18.02.2019 में मद संख्या-12 के रूप में प्रस्ताव की स्वीकृति प्रदान की गई है।
अतः श्री अजय कृष्ण मिश्र, तात्कालीन सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मगध प्रमण्डल, गया सम्प्रति सेवा से बर्खास्तगी के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है। 1. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार वर्मा, अवर सचिव।
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7 मार्च 2019
सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-2-11/2017-820--श्री राजकिषोर प्रसाद सिंह, तत्का0 निरीक्षक उत्पाद, रोहतास सम्प्रति निरीक्षक उत्पाद, औरंगाबाद के विरूद्ध कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं बिना पूर्वानुमति के मुख्यालय से बाहर रहना आदि आरोप में विभागीय संकल्प संख्या-1643 दिनांक 16.05.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी । 2. संचालन पदाधिकारी-सह-संंयुक्त आयुक्त उत्पाद, बिहार, पटना के पत्रांक-2595 दिनांक 24.09.18 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसमें आरोप सं0-01 एवं 02 कोः प्रमाणित नहीं होता है, निष्कर्षित किया गया है।
3. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-3760 अनु0, दिनांक 19.11.2018 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय बचाव बयान की मांग की गयी ।
4. श्री सिंह ने दिनांक 14.12.2018 द्वारा द्वितीय बचाव बयान विभाग में समर्पित किया गया है। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन और आरोपी पदाधिकारी द्वारा अल्प अवधि में किये गये कार्य के मद्देनजर श्री सिंह को आरोप मुक्त करते हुए भविष्य के लिए सचेत किया जाता है।
5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार वर्मा, अवर सचिव।
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7 मार्च 2019
सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-2-10/2017-821--श्री किषोर कुमार साह, तत्का0 प्रभारी सहायक आयुक्त उत्पाद, रोहतास सम्प्रति सहायक आयुक्त उत्पाद, गया के विरूद्ध कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं बिना पूर्वानुमति के मुख्यालय से बाहर रहना आदि आरोप में विभागीय संकल्प संख्या-1644 दिनांक 16.05.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी । 2. संचालन पदाधिकारी-सह-संंयुक्त आयुक्त उत्पाद, बिहार, पटना के पत्रांक-2466 दिनांक-12.09.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसमें आरोप सं0-01 एवं 02 कोः प्रमाणित नहीं होता है, निष्कर्षित किया गया है।
3. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-3761 अनु0, दिनांक-19.11.2018 द्वारा श्री साह से द्वितीय बचाव बयान की मांग की गयी ।20 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 4. श्री साह ने पत्रांक-2366 दिनांक 12.12.2018 द्वारा द्वितीय बचाव बयान विभाग में समर्पित किया गया है। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन और आरोपी पदाधिकारी द्वारा अल्प अवधि में किये गये कार्य के मद्देनजर श्री साह को आरोप मुक्त करते हुए भविष्य के लिए सचेत किया जाता है।
5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण कुमार वर्मा, अवर सचिव।
-------- 7 मार्च 2019 सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-14/2019-822--श्रीमती पूजा भारती, अवर निबंधक, फारबिसगंज (अररिया) को राजस्व क्षति, अधिनियमों, नियमों एवं सरकारी निर्देषों के विपरीत कार्य करने के आरोप मेें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 (1)(क) के तहत् निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय, सहायक निबंधन महानिरीक्षक, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 (1) के अंतर्गत जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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5 जुलाई 2019
सं0 8/आ0 (राज0नि0)-1-25/2017-2405--श्री नीरज कुमार, तत्का0 जिला अवर निबंधक, नालन्दा को निगरानी अन्वेषण व्यूरो, पटना के धावा दल के द्वारा दिनांक 21.07.2017 को रू0 15000/- (पन्द्रह हजार) रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायायिक हिरासत में भेजने जाने एवं निगरानी थाना काण्ड सं0-058/2017 दिनांक 21.07.2017 दर्ज किये जाने के कारण श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (व्रर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(2) (A) के तहत् विभागीय अधिसूचना सं0-3322 दिनांक 02.08.2017 द्वारा दिनांक 21.07.2017 से निलंबित किया गया है तथा न्यायिक हिरासत से रिहा होने पर विभागीय अधिसूचना सं0-4151 दिनांक 26.09.2017 द्वारा पुनः निलंबित किया गया है।
2, श्री कुमार के निलंबन की अवधि 12 माह से अधिक की हो गयी है। 3. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही पूर्ण नहीं हो सकी है। 4. श्री कुमार के अभ्यावेदन पर निलंबन अवधि में उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-10 (1) के आलोक में निलम्बनादेश निर्गत होने के तिथि से बारह माह पश्चात् दिनांक 27.09. 2018 के प्रभाव से पूर्व से निर्गत 50 प्रतिशत जीवन निर्वाह भत्ता में वृद्धि करते हुए 75 प्रतिशत किया जाता है। 5. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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2 अगस्त 2019
सं0 8/आ0 (राज0उ0)-2-26/2016-2776--श्री प्रियरंजन, तत्कालीन अधीक्षक उत्पाद, गोपालगंज सम्प्रति सीवान के विरूद्ध दिनांक 16.08.2016 को गोपालगंज जिला में हुई जहरीली कांड में अवैध शराब का निर्माण एवं चौर्य व्यापार पर प्रतिबंध लगाने पर असफल, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतना तथा प्रभावकारी पर्यवेक्षण एवं अधीनस्थ कर्मियों पर नियंत्रण का अभाव आदि आरोप में विभागीय संकल्प सं0-345 दिनांक-25.01.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2, संचालन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त उत्पाद, पटना-सह-मगध प्रमंडल, पटना द्वारा अपने पत्रांक-16 दिनांक 28.
01.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है, जिसमें निष्कर्षित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण, समर्पित साक्ष्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप सं0-01, 02 प्रमाणित नहीं होता है एवं आरोप सं0-03 आंशिक प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से आरोप सं0-01 एवं 02 में असहमत होते हुए एवं आरोप सं0-03 में प्रमाणित आरोप पर विभागीय पत्रांक-539 दिनांक-14.02.2019 द्वारा आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय बचाव वयान की मांग की गई । आरोपित पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-201 दिनांक-15.02.2019 द्वारा द्वितीय बचाव वयान समर्पित किया गया जिसमें आरोपों से मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया।
3. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन एवं आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय बचाव वयान पर सम्यक् विचारोपरान्त श्री प्रियरंजन, अधीक्षक उत्पाद, गोपालगंज सम्प्रति अधीक्षक मद्य निषेध, सीवान के विरूद्ध वर्ष 2016-17 के21 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 (i) के तहत् '' निन्दन'' का दण्ड अधिरोपित किया जाता है।
4. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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17 सितम्बर 2019
सं0 9/आरोप (राज0)(उ0)-2-29/2012-3405--श्री सुरेन्द्र प्रसाद, तत्का0 निरीक्षक उत्पाद, गोपालगंज सम्प्रति निरीक्षक मद्य निषेध, खगड़िया के विरूद्ध गोपालगंज जिलान्तर्गत भारत सुगर मिल, सिधवलिया से मुख्यालय के बिना अनुमति के दो मुहरबंद बेातल में छोआ का नमूना प्राप्त कर रसायन परीक्षक, पटना को भेजने एवं संबंधित मिल को कानूनी लाभ पहुॅचाने आदि आरोप में विभागीय संकल्प सं0-6264 दिनांक 06.12..2012 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2, संचालन पदाधिकारी उपायुक्त उत्पाद, दरभंगा-सह-कोशी-सह-पूर्णियॉ प्रमंडल, दरभंगा ने अपने पत्रांक-119 दिनांक 24.06.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जॉच प्रतिवेदन विभाग में समर्पित किया गया। जॉच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि सभी अभिलेखों, साक्ष्यों, छोआ-प्रावधानों, प्रतिपरीक्षणों एवं लिये गये बयानों के आधार पर विस्तार से विश्लेषण के आधार पर आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
3. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1642 दिनांक 16.04.2014 एवं 2777 दिनांक 01.07.2014 द्वारा आरोपी पदाधिकारी से द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी। श्री प्रसाद द्वारा दिनांक 07..05. 2014 एवं 14.07.2014 को अपना द्वितीय बचाव वयान विभाग में समर्पित किया गया । बचाव बयान में सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए आरोप से मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया है। 4. संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन,ं आरोपी पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय बचाव वयान एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज का प्रतिवेदन(पत्रांक-160 दिनांक 14.01.2013) जिसके द्वारा इस मामले में प्रतिवेदित किया है कि श्री सुरेन्द्र प्रसाद , निरीक्षक उत्पाद ने सामान्य प्रक्रिया के तहत छोआ का नमूना भेजा था तथा नमूना भेजने में कोई अन्यथा मंषा परिलक्षित नहीं होती है, के आधार पर श्री प्रसाद, तत्का0 निरीक्षक उत्पाद के विरूद्ध गठित आरोप की पुष्टि नहीं हो पा रही है।
अतः वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री सुरेन्द्र प्रसाद, तत्का0 निरीक्षक उत्पाद को आरोपों से मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। 5. इसमें सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
-------- सामान्य प्रशासन विभाग ------ आदेश 6 फरवरी 2020 सं0 08/आरोप-01-26/2019,सा॰प्र॰-1894--श्री वीरेन्द्र नारायण पाण्डेय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-771/11, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, दरभंगा के विरूद्ध अनधि—त उपस्थिति, विभागीय भू-अर्जन कार्यो में अभिरूचि नहीं लेने, निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य के प्रति उदासीन रवैया अपनाने, बिना अनुमति के मुख्यालय से बाहर रहने एवं बिना प्रभार सौंपे उपार्जित अवकाश में प्रस्थान कर जाने संबंधी आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1086, दिनांक 21.01.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विषयगत विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है तथा इसी बीच श्री पाण्डेय दिनांक 31.01.2020 को वाध्र्यक्य सेवानिवृत्त हो गये है। अतएव विभागीय पत्रांक-1893 दिनांक 14.06.2011 द्वारा निर्गत निदेशों के आलोक में उक्त विभागीय कार्यवाही बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी॰) के तहत स्वतः सम्परिवर्तित मानी जायेगी। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 48—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 19 Qjojh 2020 22
भाग-2
————— बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश,
अधिसूचनाएं और नियम आदि। ------
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग
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''शुद्धि-पत्र''
10 फरवरी 2020
सं0 1/स्था0 (12) 01/2019-428--पशु एवं मत्स्य संसाधन विभागीय अधिसूचना सं0-279-सह-पठित ज्ञापांक-280 दिनांक 28.01.2020 में अंकित संचिका संख्या 2/स्था0 (12) 01/2019 के तथा ज्ञापांक में अंकित 1/स्था0 (2) 02/2019 के स्थान पर 01/स्था0 (12) 01/2019 शुद्ध रूप में पढा़ एवं समझा जाय। 2. अधिसूचना के शेष बातें यथावत रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पे्रम कुमार गुप्ता ''प्रेम'', अवर सचिव।
------- कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- शुद्धि-पत्र 6 फरवरी 2020
सं0 कारा/स्था0(अधी0)-01-14/18-1078--विभागीय संकल्प ज्ञापांक 357 दिनांक 14.01.2020 के द्वारा दिनांक 03.01.2020 को मंडल कारा, हाजीपुर में एक विचाराधीन बंदी मनीष कुमार उर्फ तेलिया को कारा के अंदर एक अन्य बंदी द्वारा गोली मारकर हत्या कर देने की घटना में सुरक्षा में हुई गंभीर चूक, र्काव्यहीनता, घोर लापरवाही एवं अक्षमता के आरोप के लिए श्री रमेष कुमार, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर को निलंबित करते हुए केन्द्रीय कारा, बक्सर में संलग्न किया गया है।
उक्त संकल्प में टंकण भूल के कारण'' श्री रमेष प्रसाद, अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर '' के स्थान पर श्री रमेष कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर अंकित हो गया है।
2. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 357 दिनांक 14.01.2020 में अंकित ''श्री रमेष कुमार, अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर'' के स्थान पर ''श्री रमेष प्रसाद, अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर'' पढ़ा जाय।
3. शेष कंडिकाएँ यथावत् रहेंगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 48—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in23 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020
भाग-9-ख
निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————
lwpuk
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No. 340---I MD Idris Uddin @ Idris Uddin S/o Gafur Uddin @ Sheikh Gafur, Vill+ Post- Moratalab, PS–Rahui, Dist- Nalanda (803118) in my Matric Certificate my name written as Idris Uddin after affidavit I changed my name as Md Idris Uddin. Affidavit no. 311 dated 07/01/2020.
Md Idris Uddin.
&&&&&&&&
No. 341---I SHIVEE want to change my name as SHIVEE KASHYAP vide affidavit no. 1331 dated 17/01/20 for all future purposes. I will be known as SHIVEE KASHYAP.
Shivee.
————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 48—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.inबिहार गजट, 19 Qjojh 2020 24
बिहार गजट
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पूरक(अ0)
प्राधिकारी kjk प्रकाशित
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सं0 6/आ0-376/2006(खण्ड)सा॰प्र॰-1314
सामान्य प्रशासन विभाग
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संकल्प
24 जनवरी 2020
निगरानी विभाग(अन्वेषण ब्यूरो), बिहार के पत्रांक-2756/अ.प.शा. दिनांक 06.12.2016 द्वारा सूचित किया गया था कि श्री एस. एम. राजू, भा.प्र.से.(91) सम्प्रति निलंबित, तत्कालीन सचिव, अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग, बिहार के विरूद्ध राज्य के बाहर विभिन्न तकनीकी संस्थानों/महाविद्यालयों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों तथा छात्राओं को वर्ष 2013-14 और इससे पूर्व के वर्षों में छात्रवृति भुगतान में हुई अनियमितताओं के मामलों में भ्रष्टाचार अधिनियम-1988 की धारा-13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(सी) (डी) के अंतर्गत निगरानी थाना कांड संख्या-127/16, दिनांक 29.11.16 दर्ज किया गया है जो सम्प्रति अनुसंधानान्तर्गत है।
2. मामले की गंभीरता, निहित नैतिक भ्रष्टाचार एवं श्री राजू के कर्त्तव्य निर्वहन में संभावित असहजता को देखते हुए तथा मामला अनुसंधानांतर्गत होने के कारण राज्य सरकार द्वारा सम्यक् विचारोपरांत अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1969 के नियम-3 के उपनियम-3 के प्रावधानों के अंतर्गत श्री एस. एम. राजू, भा.प्र.से.(1991), तत्कालीन सचिव, अनुसूचित जाति/ जनजाति कल्याण विभाग, बिहार, पटना को तत्काल प्रभाव से आदेश संख्या-336 दिनांक 12.01. 2017 द्वारा निलंबित किया गया है।
3. श्री राजू के निलंबन की समीक्षा प्रावधानानुसार राज्य निलंबन समीक्षा समिति द्वारा निर्धारित समय-समय पर की गई और श्री राजू के निलंबन के बरकरार रखने की अनुशंसा के आलोक में निलंबन विस्तारित करते हुए बरकरार रखा गया। 4. दो वर्ष से अधिक निलंबन बरकरार रखने संबंधी प्रावधान के संदर्भ में अनुशंसा केन्द्रीय मंत्रालय निलंबन समीक्षा समिति की समीक्षा के लिए विभागीय पत्र संख्या-16280 दिनांक 13.12.2018 द्वारा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार से अनुरोध किया गया। इस संबंध में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के दिनांक 11.01.2019 के पत्र के द्वारा केन्द्रीय मंत्रालय निलंबन समीक्षा समिति की समीक्षा और सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों के आलोक में श्री राजू का निलंबन अगले छः महीने तक बरकरार रखने की अनुशंसा की गयी। उक्त अनुशंसा पर राज्य सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय संकल्प संख्या-1929 दिनांक 12.02.2019 के द्वारा श्री राजू के निलंबन को अगले छः माह तक बरकरार रखा गया। पुनः केंद्रीय निलंबन समीक्षा समिति के पत्र दिनांक 15.07.2019 में निहित अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार के द्वारा विचारोपरांत विभागीय संकल्प संख्या-10052 दिनांक 25.07.2019 द्वारा श्री एस.एम. राजू के निलंबन को अगले छः माह तक बरकरार रखा गया।
5. श्री राजू के कदाचार के गंभीर प्र—ति को देखते हुए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के दिनांक 10.
01.2020 के पत्र में निहित केंद्रीय निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार द्वारा विचारोपरांत श्री एस.
एम. राजू, भा.प्र.से. (1991) के निलंबन को अगले छः माह तक बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
आदेष :- यह आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधित को भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।25 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 सं0 6/आ.-52/2016-सा.प्र.-2173 ------ संकल्प 11 फरवरी 2020 श्री जितेन्द्र कुमार सिंह, भा.प्र.से. (बिहार ः 2005) के विरूद्ध उनके बिहार प्रशासनिक सेवा कार्यकाल में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, वैशाली के पद पर पदस्थापित रहने के दौरान दायित्व की अवहेलना एवं अनाधिकृत अनुपस्थिति के आरोप के मामले में श्री सिंह के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1969 के नियम 8 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्रवाई किये जाने के अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में विभागीय ज्ञापन ज्ञापांक संख्या-12275 दिनांक 21.09.2017 निर्गत करते हुए श्री सिंह से बचाव बयान/लिखित अभ्यावेदन की मांग की गयी थी। 2. इस विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा माननीय केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, पटना बेंच के समक्ष ओ.ए. संख्या- 50/583/2017 दायर किया गया। माननीय न्यायाधिकरण के दिनांक 25.10.2017 के अंतरिम आदेश के द्वारा सुनवाई की अगली तिथि तक श्री सिंह के विरूद्ध निर्गत उक्त आरोप ज्ञापन के संबंध में कार्रवाई स्थगित रखने का निदेश दिया गया। माननीय न्यायाधिकरण के दिनांक 25.10.2017 के उक्त आदेश के बाद मामले की सुनवाई नहीं हुई। इस क्रम में मामले की प्रगति के संबंध में विद्वान सरकारी अधिवक्ता से दूरभाष पर संपर्क/पत्रााचार किया गया, परन्तु विद्वान सरकारी अधिवक्ता से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई। इस मामले के संबंध में स्टैडिंग कॉन्सिल संख्या-8, पटना उच्च न्यायालय के दिनांक 10.12.2019 के पत्रा द्वारा माननीय पटना उच्च न्यायालय आरोपित पदाधिकारी के द्वारा दायर सी.डब्लू.जे.सी. संख्या-.. ............../2019 के रिट याचिका की प्रति प्राप्त हुई, जिससे ज्ञात हुआ कि मामले में माननीय केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, पटना बेंच द्वारा दिनांक 25.07.2019 को अंतिम आदेश पारित किया गया है। माननीय केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, पटना बेंच के इस आदेश के द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध निर्गत विभागीय ज्ञापन ज्ञापांक संख्या-12275 दिनांक 21.09.2017 के संबंध में माननीय न्यायाधिकरण के इस आदेश की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के अन्दर आवेदक श्री सिंह को बचाव बयान समर्पित किये जाने का निदेश दिया गया था। साथ ही, आवेदक के बचाव बयान पर 60 दिनों के अन्दर अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा श्री सिंह के बचाव बयान विचार किये जाने का आदेश दिया गया था। 3. माननीय केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, पटना बेंच द्वारा दिनांक 25.07.2019 को अंतिम आदेश के अनुपालन में श्री सिंह द्वारा कोई बचाव बयान/लिखित अभ्यावेदन समर्पित नहीं किया गया है और सी.डब्लू.जे.सी. संख्या-................/2019 में माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया है। इस स्थिति में राज्य सरकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8 (6) (a) के अंतर्गत श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप की जाँच हेतु मुख्य जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी और इस कार्य में सहयोग के लिए स्थापना उप समाहर्त्ता, वैशाली को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है। 4. उक्त निर्णय के आलोक में श्री जितेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, वैशाली सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को जाँच पदाधिकारी तथा स्थापना उप समाहर्त्ता, वैशाली को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। 5. श्री जितेन्द्र कुमार सिंहमुख्य जाँच आयुक्त के समक्ष इस संकल्प की प्राप्ति होने की तिथि से 10 (दस) कार्य दिवसों में अथवा 10 (दस) कार्य दिवसों के बाद विहित किसी समय या उससे अनधिक दस दिनों के अंदर किसी समय जैसा जाँच पदाधिकारी आदेश दें, स्वयं या अपने द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के साथ उपस्थित होंगे। आदेश ः-आदेश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रति सभी सुसंगत कागजातों यथा आरोप का मद, कदाचारिता विवरणी, साक्ष्यों आदि की प्रति के साथ विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं श्री जितेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, वैशाली सम्प्रति सेवानिवृत्त तथा स्थापना उप समाहर्त्ता, वैशाली को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।
------- सं0 08/आरोप-01-26/2019,सा॰प्र॰-1086 ------ संकल्प 21 जनवरी 2020 श्री वीरेन्द्र नारायण पाण्डेय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-771/11 के विरूद्ध जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, दरभंगा के पदस्थापन काल में अनधि—त अनुपस्थिति, विभागीय भू-अर्जन कार्यो में अभिरूचि नहीं लेने, निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य के प्रति उदासीन रवैया अपनाने, बिना अनुमति के मुख्यालय से बाहर रहने एवं बिना प्रभार सौंपे उपार्जित अवकाश में प्रस्थान कर जाने संबंधी आरोपों के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-626 दिनांक 07.08.2019 द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई हेतु अनुशंसा प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-15209 दिनांक 08.11.2019 द्वारा श्री पाण्डेय से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री पाण्डेय का स्पष्टीकरण (दिनांक 28.11.2019) प्राप्त हुआ।26 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 श्री पाण्डेय के विरूद्ध गठित आरोप पत्र एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी तथा पाया गया कि जिला पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा श्री पाण्डेय से बार-बार स्पष्टीकरण पूछे जाने के बावजूद इनके कार्यकलाप में कोई सुधार नहीं हुआ तथा इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। इनकी निर्वाचन कार्य में शिथिलता एवं कर्त्तव्यहीनता के कारण लोक सभा निर्वाचन, वर्ष 2019 की तैयारी में बाधा पहुँची। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री पाण्डेय का स्पष्टीकरण अस्वीकार करते हुए मामले की विस्तृत जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत श्री पाण्डेय के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा नामित वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। श्री पाण्डेय से अपेक्षा की जाती है वे अपने बचाव बयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दे, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।
-------- सं0 15/एम 1-20/2018--306 शिक्षा विभाग ------ संकल्प 10 फरवरी 2020 विषय :-राज्य के विश्वविद्यालय/अंगीभूत महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप उदभूत बकाया भुगतान हेतु विभागीय संकल्प संख्या 591 दिनांक 06.03.2019 में आंशिक संशोधन करने की स्वीकृति के संबंध में। भारत सरकार के पत्रांक 1-7/2015-U.II(1) एवं पत्रांक 1-7/2015-U.II(2) दिनांक 02.11.2017 द्वारा विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों के शिक्षकों/पदाधिकारियों के सातवें वेतन पुनरीक्षण हेतु आदेश निर्गत किया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा किए गए वेतन पुनरीक्षण के आलोक में शिक्षा विभागीय संकल्प संख्या 591 दिनांक 06.03.2019 द्वारा राज्य के विश्वविद्यालय/अंगीभूत महाविद्यालय के कार्यरत शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए पुनरीक्षित वेतनमान एवं भत्तों की स्वीकृति प्रदान की गई है। 2. विभागीय संकल्प संख्या 591 दिनांक 06.03.2019 की कंडिका 21 में वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप उद्भूत बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया का समावेश है। विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण से उद्भूत बकाया भुगतान हेतु उक्त कंडिका में प्रावधानित है कि ''राज्य के विश्वविद्यालयोें/महाविद्यालयों (घाटानुदानित एवं अल्पसंख्यक सहित) के शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप उद्भूत बकाया राशि का भुगतान किस्तवार किए जाने हेतु शिक्षा विभाग, वित्त विभाग की सहमति से निर्णय लेगा। परंतु बकाया भुगतान की जो राशि केन्द्र सरकार से प्राप्त होने वाली है, उसे केन्द्र सरकार से प्राप्त होने के उपरांत ही भुगतान करने पर राज्य सरकार विचार करेगी''। 3. उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार के वेतन पुनरीक्षण संकल्प के अनुसार राज्य के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों एंव समतुल्य सम्वर्ग के कर्मियों के वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप दिनांक 01.01.2016 से दिनांक 31.03.2019 तक की अवधि में होने वाले अतिरिक्त वित्तीय व्यय भार का 50% राशि केन्द्र सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति किया जाना है। इसके आलोक में देय बकाया राशि का 50% भुगतान हेतु विभागीय पत्रांक 2206 दिनांक 26.09.2019. द्वारा केन्द्र सरकार से अनुरोध किया गया। परंतु केन्द्र सरकार के F.1-1/2019-U II दिनांक शून्य, अक्टूबर 2019 द्वारा यह निदेश दिया गया है कि सर्वप्रथम राज्य सरकार देय बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करे, तदोपरांत केन्द्र सरकार द्वारा उक्त राशि के 50% की प्रतिपूर्ति की जाएगी। 4. केन्द्र सरकार के उक्त निदेश के आलोक में अब सर्वप्रथम राज्य सरकार के स्तर से विश्वविद्यालय शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप दिनांक 01.01.2016 से 31.03.2019 तक की अवधि के लिए पडने वाले अतिरिक्त वित्तीय व्यय भार/बकाया का भुगतान किया जाना है। तदोपरांत उसका 50% राशि केन्द्र सरकार से प्रतिपूर्ति के रूप में प्राप्त होगा। 5. उपरोक्त के आलोक में विभागीय संकल्प संख्या 591 दिनांक 06.03.2019 की कंडिका 21 में शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप उदभूत बकाया भुगतान के संदर्भ में वर्णित प्रावधान को निम्नवत् प्रतिस्थापित/संशोधित किया जाता है :- ''राज्य के विश्वविद्यालयोें/महाविद्यालयों (घाटानुदानित एवं अल्पसंख्यक सहित) के शिक्षकों के वेतन पुनरीक्षण के फलस्वरूप उद्भूत बकाया राशि का भुगतान शिक्षा विभाग, वित्त विभाग की सहमति से करेगा।'' आदेश-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र में जनसाधारण की सूचना हेतु अगले अंक में प्रकाशित किया जाए।
ंबिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, विशेष सचिव।27 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 सं0 एल/एच॰जी॰-14-12/2018-1306 गृह विभाग (विषेष शाखा) ------ संकल्प 7 फरवरी 2020 श्री अनुज कुमार, तत्कालीन जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, सुपौल सम्प्रति जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, भोजपुर के विरूद्ध सुपौल पदस्थापन काल में मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता एवंं अपने अधीनस्थ कर्मी में व्यक्तिगत अभिरूची रखने संबंधी आरोप प्रपत्र-क में गठित कर मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के पत्रांक-2631, दिनांक-18.06.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही आरंभ किये जाने की अनुशंसा की गई। 2. पूर्व में मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के ज्ञापांक-647, दिनांक-12.02.2018 द्वारा श्री कुमार से उक्त आरोपों के संबंध में आरोप प्रारूप गठित करते हुए सात दिनों के अंदर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया था। परन्तु श्री कुमार द्वारा अपना स्पष्टीकरण अपने कार्यालय के पत्रांक-908, दिनांक-15.10.2018 द्वारा मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना को समर्पित किया गया, जो मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के पत्रांक-675, दिनांक-24.01.2019 द्वारा विभाग में प्राप्त हुआ। विभागीय पत्रांक-3135, दिनांक-19.03.2019 द्वारा स्पष्टीकरण की मूल प्रति वापस करते हुए महासमादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना से समीक्षा कर स्पष्ट मंतव्य/संशोधित आरोप प्रपत्र विभाग को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। 3. श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर मुख्यालय, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना के पत्रांक-2334, दिनांक-03. 05.2019 द्वारा प्राप्त मंतव्य में स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं होना प्रतिवेदित किया गया।
4. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रपत्र 'क' में गठित एवं अनुमोदित आरोपों की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-7655, दिनांक-18.07.2019 द्वारा आरोपित को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (4) के तहत बचाव अभिकथन समर्पित किए जाने का निदेश दिया गया। आरोपित द्वारा अपना बचाव अभिकथन अपने कार्यालय के पत्रांक-649, दिनांक-05.08.2019 द्वारा विभाग को समर्पित किया गया है। 5. चूँकि बिहार राज्यपाल को यह विष्वास करने का कारण है कि श्री अनुज कुमार, तत्कालीन जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, सुपौल सम्प्रति जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, भोजपुर के विरूद्ध लगाये गये आरोपों की प्रकृति गंंभीर है, अतएव सम्यक विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित कर मामले की जाँच कराये जाने का निर्णय लिया गया है। श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया है तथा उपस्थापन पदाधिकारी नामित करने के लिए महासमादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना को प्राधिकृत किया जाता है। 6. श्री कुमार से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना प़क्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, विमलेष कुमार झा, अपर सचिव।
------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-20/2019-1026 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 5 फरवरी 2020
चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि दिनांक 21.07.2019 को जिला प्रषासन, वैषाली द्वारा मंडल कारा, हाजीपुर में की गई औचक छापेमारी में 08 मोबाईल फोन, 01 मेमोरी कार्ड एवं 5200/- रूपया नगद की बरामदगी की घटना में श्री रमेष प्रसाद, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति निलंबित (अन्य मामले में) के द्वारा अपने कर्त्तव्यों के निर्वह्न में गंभीर लापरवाही एवं उदासीनता बरती गई है। श्री प्रसाद का यह कृत्य बिहार कारा हस्तक के विहित प्रावधानों के सर्वथा प्रतिकूल है, जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतः यह निर्णय लिया गया है कि श्री रमेष प्रसाद, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति निलंबित (अन्य मामले में) के विरूद्ध संलग्न प्रपत्र 'क' में अंकित आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के सुसंगत प्रावधानों के आलोक में विभागीय कार्यवाही संचालित की जाय।28 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 3. इस विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 (2) के तहत संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. श्री प्रसाद से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
5. संचालन पदाधिकारी विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन निर्धारित अवधि के अन्दर समर्पित करेंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
-------- सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-02-07/2018-80 मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ------- संकल्प 10 जनवरी 2019
चूॅकि बिहार के राज्यपाल को यह विष्वास करने के कारण है कि श्री अरविन्द कुमार, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, वैषाली सम्प्रति अधीक्षक उत्पाद, बांका द्वारा वैषाली जिला में पदस्थापन अवधि में स्वयं के नेतृत्व में थाना-पातेपुर के मंडई डीह ग्राम में दिनांक 04.06.2017 को श्री अजित सिंह एवं श्री जगदीष सिंह के घर छापामारी की गयी थी। छापेमारी में उत्पाद प्रदर्ष के साथ-साथ उसी ग्राम के श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, पिता-स्0 राज कुमार सिंह, ग्राम-मडई डीह के घर की तलाषी की गयी और उनके घर से बिहार मद्य निषेंध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के विपरित अनियमित रूप से रूपया जब्त किया गया। जब्त रूपया को श्री जगदीष सिंह एवं अजीत सिंह के घर के पीछे मकई के खेत से बरामद होने का उल्लेख जब्ती सूची में दर्ज कराया गया। श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह के घर की तलाषी के बाद स्थानीय व्यक्ति को स्वतंत्र गवाह नहीं बनाकर श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह की नाबालिग पुत्री एवं उसकी सहेली को गवाह बनाया गया। अपने निजी लाभ हेतु जब्त राषि से कम राषि जब्ती सूची में दर्षाया गया। अतएव बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 की धारा-56 के प्रावधानों का उल्लंघन एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3 का उल्लंघन आदि आरोप विनिर्दिष्ट है। जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री अरविन्द कुमार के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों के जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति में विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए श्री श्रीकृष्ण पासवान, संयुक्त आयुक्त मद्य निषेध को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
3. श्री अरविन्द कुमार के विरूद्ध उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रषाखा पदाधिकारी, प्रषाखा-8 ए को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. श्री अरविन्द कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेशः-आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप प्रपत्र-'क' के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-20/2019-3171
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संकल्प
4 सितम्बर 2019
चूॅकि बिहार के राज्यपाल को यह विष्वास करने के कारण है कि श्री विनय कुमार प्रसाद, जिला अवर निबंधक, पूर्वी चम्पारण के विरूद्ध मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड, पटना एवं अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण के द्वारा पूर्वी चम्पारण के तौजी सं0-951, मौजा-वरियारपुर, थाना सं0-196 के विभिन्न खेसराओं की जमीन का हस्तानांतरण संबंधी दस्तावेजों के निबंधन पर रोक लगाने का अनुरोध एवं वक्फ स्टेट सं0-1628 वरियापुर, मोतिहारी, जिला पूर्वी चम्पारण की सम्पत्ति का विवरण संज्ञान में रहने के बावजूद श्री प्रसाद द्वारा उक्त स्टेट के खाता संख्या-302 खेसरा सं0-281 कुल रकबा-6.03 डी0 जमीन का चार दस्तावेजों, सं0-1400, 1401, 1402, 1403 दिनांक 02.02.2019 के माध्यम से विक्रय पत्र का निबंधन किया गया है, जो नियम के विरूद्ध है।
सहायक निबंधन महानिरीक्षक (मु0) के द्वारा की गई जॉच में यह तथ्य प्रकाष में आया है कि स्कोर सॉफ्ट वेयर में उक्त खेसरा संख्या की प्रविष्टि है, किन्तु दस्तावेज में अंकित गलत वार्ड संख्या को आधार मान कर दस्तावेज का निबंधन29 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 स्वीकार किया गया है, जबकि जमींन के थाना संख्या और खेसरा संख्या का रोक सूची से मिलान किया जाना युक्ति संगत है। रोक पंजी से प्रस्तुत दस्तावेजों के थाना संख्या एवं खेसरा संख्या का मिलान नहीं करना लापरवाही का सूचक है। थाना संख्या और खेसरा संख्या का स्पष्ट उल्लेख मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के पत्र में अंकित है और जिला अवर निबंधक को दस्तावेजों के निबंधन से आठ दिन पूर्व संज्ञान में आ चुका था अतएव सहायक निबंधन महानिरीक्षक ने जॉच में जिला अवर निबंधक श्री प्रसाद को दोषी पाया है ।
उपर्युक्त जमीन नगरपालिका क्षेत्र में अवस्थित है। दस्तावेज में भूमि का किस्म व्यवसायिक अंकित है। नगरपालिका क्षेत्र के अन्दर जमीनों का स्थल निरीक्षण स्वयं जिला अवर निबंधक को करने हेतु विभागीय निदेष निर्गत है। दस्तावेज में जमीन का किस्म व्यवसायिक अंकित होने के आधार पर राजस्व हित में जिला अवर निबंधक द्वारा स्वयं स्थल निरीक्षण किया जाता तो निष्चित रूप से जमीन के संबंध में जानकाार हासिल होती और इस तरह का अनियमित निबंधन नहीं हो पाता। इस प्रकार जिला अवर निबंधक द्वारा मामला संज्ञान में होने के बावजूद निबंधित किया गया हैै।
श्री प्रसाद का यह कार्य निबंधन अधिनियम, 1908, सरकारी निदेषों, बिहार सरकारी सेवक आचार नियामवली, 1976 के नियम-3 के प्रावधानों के प्रतिकूल आदि आरोप विनिर्दिष्ट है। जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
3 अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री विनय कुमार प्रसाद के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों के जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति में विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए मुख्य जॉच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है, इसमें मुख्य सचिव, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है। श्री प्रसाद के विरूद्ध उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रषाखा पदाधिकारी, प्रषाखा-8 ए को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। 4. श्री विनय कुमार प्रसाद से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेश :- आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप पत्र के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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सं0 9/आरोप (राज0)( उ0)-02-02/2019-2833
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संकल्प
6 अगस्त 2019
L.P.A. No. 1123/2017 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 11.10.2018 को पारित न्यायादेष के आलोक में श्री अष्विनी कुमार, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, नवादा के विरूद्ध विदेषी शराब/वीयर के न्यूनतम प्रत्याभूत मात्रा में उठाव नहीं होने से राजस्व की अपूरणीय क्षति, अनुज्ञप्तिधारी से मिलीभगत कर निजी लाभ उठाना एवं कर्त्तव्य में षिथिलता एवं उच्चाधिकारी के निर्देषों की अवहेलना आदि आरोप में पुनः विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है। जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री अष्विनी कुमार, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, नवादा सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-उपायुक्त मद्य निषेध, पटना-सह-मगध प्रमंडल, पटना के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों के जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति में विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए मुख्य जॉच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है, इसमें मा0 मुख्यमंत्री, बिहार का अनुमोदन प्राप्त है। श्री कुमार के विरूद्ध उक्त विभागीय कार्यवाही में श्री कुमार अमित, विषेष अधीक्षक मद्य निषेध, को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। 4. श्री अष्विनी कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेशः-आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप पत्र के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 30 सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-02-01/2019-2648
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संकल्प
24 जुलाई 2019
चूॅकि बिहार के राज्यपाल को यह विष्वास करने के कारण है कि श्री मनोज कुमार सिंह, निलंबित अधीक्षक मद्य निषेध, मुख्यालय-उपायुक्त उत्पाद, तिरहुत-सह-सारण प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को शराब पीने के आरोप में राजीव नगर थाना के द्वारा कांड सं0-537/18 दिनांक 26.12.2018 दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाना, बिहार मद्य निषेध ओर उत्पाद अधिनियम 2016 एवं आम्र्स एक्ट की धारा-25 (1-B) a, 26 दर्ज तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमामवली, 1976 के नियम-3 आदि आरोप विनिर्दिष्ट है। जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री मनोज कुमार सिंह के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों के जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 (2) में विहित रीति में विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए श्री ओम प्रकाष मंडल, उपायुक्त मद्य निषेध (मुख्यालय) को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। श्री सिंह के विरूद्ध उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रषाखा पदाधिकारी, प्रषाखा-8 ए को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. श्री मनोज कुमार सिंह से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेशः-आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप पत्र के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
-------- सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-02-07/2018-561 ------- संकल्प 15 फरवर्री 2019 श्री अरविन्द कुमार, तत्का0 अधीक्षक उत्पाद, वैषाली के विरूद्ध विभागीय संकल्प सं0-80 दिनांक 10.012019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित है। श्री कुमार दिनांक 31.01.2019 को सेवा निवृत्त हो चुके हैं। 2. श्री कुमार के सेवानिवृत्त हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम 43 (बी0) के तहत् सम्परिवर्त्तित किया जाता है। 3. संकल्प की अन्य शर्त्तें यथावत रहेगी। 4. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। आदेशः-आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
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सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-02-07/2018-81
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संकल्प
10 जनवरी 2019
चूॅकि बिहार के राज्यपाल को यह विष्वास करने के कारण है कि श्री अजय शंकर सहाय, तत्का0 निरीक्षक उत्पाद, वैषाली सम्प्रति अधीक्षक उत्पाद, बेगुसराय द्वारा वैषाली जिला में पदस्थापन अवधि में थाना-पातेपुर के मंडई डीह ग्राम में दिनांक 04.06.2017 को श्री अजित सिंह एवं श्री जगदीष सिंह के घर छापामारी की गयी थी। छापेमारी में उत्पाद प्रदर्ष के साथ-साथ उसी ग्राम के श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, पिता-स्व0 राज कुमार सिंह, ग्राम-मडई डीह के घर की तलाषी की गयी और उनके घर से बिहार मद्य निषेंध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के विपरित अनियमित रूप से रूपया जब्त किया गया। जब्त रूपया को श्री जगदीष सिंह एवं अजीत सिंह के घर के पीछे मकई के खेत से बरामद होने का उल्लेख जब्ती सूची में दर्ज कराया गया। श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह के घर की तलाषी के बाद स्थानीय व्यक्ति को स्वतंत्र गवाह नहीं बनाकर श्री धीरेन्द्र कुमार सिंह की नाबालिग पुत्री एवं उसकी सहेली को गवाह बनाया गया। अपने निजी लाभ हेतु जब्त राषि से कम राषि जब्ती सूची में दर्षाया गया। अतएव बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 की धारा-56 के प्रावधानों का उल्लंघन एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम-3 का उल्लंघन आदि आरोप विनिर्दिष्ट है। जैसा कि संलग्न आरोप पत्र में वर्णित है।
2. अतएव बिहार के राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि श्री अजय शंकर सहाय के विरूद्ध संलग्न विनिर्दिष्ट आरोपों के जॉच के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-1731 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 (2) में विहित रीति में विभागीय कार्यवाही चलायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के लिए श्री श्रीकृष्ण पासवान, संयुक्त आयुक्त मद्य निषेध को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।श्री अजय शंकर सहाय के विरूद्ध उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रषाखा पदाधिकारी, प्रषाखा-8 ए को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. श्री अजय शंकर सहाय से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव वयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेशः-आदेष दिया जाता है कि संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति आरोप प्रपत्र-'क' के साथ संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं आरोपी पदाधिकारी को भी उपलब्ध करा दिया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अभय राज, संयुक्त सचिव।
------- सं0 नि0को0 रोहतास-04/2014-227(15)/रा0 राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ------ संकल्प 13 फरवरी 2020
श्री महेश राम, तत्कालीन सहायक चकबंदी पदाधिकारी, सासाराम (रोहतास) को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के धावादल द्वारा दिनांक-26.08.2014 को परिवादी श्री नन्दजी प्रजापति से 4,000/- (चार हजार) रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। श्री राम के विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं0-054/2014, दिनांक-26.08.2014 दर्ज किया गया, जिसकी सूचना पुलिस अधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक-2199/अप0शा0, दिनांक-28.08.2014 से विभाग को प्राप्त हुआ। विभागीय आदेश सं0-693 (चक0), दिनांक-30.09.2014 द्वारा श्री राम को हिरासत में लिये जाने की तिथि-26.08.2014 के प्रभाव से निलंबित किया गया तथा पुलिस अधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक-2281/अप0शा0, दिनांक-09.09.2014 से अभियोजन स्वीकृति हेतु किये गये अनुरोध के आलोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक-730 (नि0को0), दिनांक-15.10.2014 द्वारा श्री राम के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गई।
2. अनुदेशक चकबंदी निदेशालय, बिहार, पटना के पत्रांक-299/चक0, दिनांक-24.03.2015 से उपलब्ध कराये गये आरोप प्रपत्र 'क' की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-481, दिनांक-22.04.2015 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री राम का स्पष्टीकरण दिनांक-11.05.2015 विभाग को प्राप्त हुआ, जिसमें उनके द्वारा अपना बचाव बयान प्रस्तुत करते हुए नन्दजी प्रजापति का आवेदन पत्र एवं मणिकान्त सिंह का सत्यापन प्रतिवेदन की माँग की गई तथा गठित आरोपों को पूर्णतः निराधार एवं असत्य बताया गया। श्री राम द्वारा पुनः एक पूरक बचाव बयान समर्पित करते हुए कुछ दस्तावेजों की माँग की गई।
3. अनुदेशक चकबंदी निदेशालय, बिहार, पटना के पत्रांक-299/चक0, दिनांक-24.03.2015 से प्राप्त आरोप पत्र पूर्ण नहीं होने के कारण विभागीय पत्रांक-1395, दिनांक-11.12.2015 द्वारा अनुदेशक, चकबंदी निदेशालय, बिहार, पटना से पूरक आरोप पत्र की माँग की गई। संयुक्त निदेशक, चकबंदी (मु0), बिहार, पटना के पत्रांक-172/चक0, दिनांक-29.01. 2016 द्वारा पूरक आरोप प्रपत्र 'क' तथा पत्रांक-443/चक0, दिनांक-11.04.2016 द्वारा संशोधित पूरक आरोप प्रपत्र 'क' विभाग को समर्पित किया गया।
4. विभागीय पत्रांक-645, दिनांक-09.06.2016 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण की माँग की गई। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित करते हुए पूरक आरोप प्रपत्र 'क' एवं पत्रांक-01, दिनांक-05.01.2016 की सत्यापित प्रति की माँग की गई। इस प्रकार श्री राम द्वारा अपने विरूद्ध गठित आरोप प्रपत्र 'क' में अंकित आरोपों के संबंध में अपने स्पष्टीकरण में कुछ भी अंकित नहीं किया गया जबकि विभागीय पत्रांक-645, दिनांक-09.06.2016 द्वारा आरोप प्रपत्र 'क' अनुलग्नक सहित की प्रति उन्हें उपलब्ध करा दी गई थी।
5. सम्यक् विचारोपरान्त मामले के सम्यक् जाँच हेतु अपर समाहर्त्ता, रोहतास को संचालन पदाधिकारी नियुक्त करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत विभागीय आदेश सं0-916 (नि0को0), दिनांक-29.08.2016 द्वारा श्री राम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
6. कालान्तर में अपर समाहर्त्ता, रोहतास-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-2158 /रा0, दिनांक-08.12.2017 से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें आरोपी पदाधिकारी के बचाव बयान एवं प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपस्थापित किये गये साक्ष्य, कागजातों एवं अभिकथन के आधार पर श्री राम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को प्रमाणित दर्शाया गया। प्रमाणित आरोपों के संबंध में जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-80, दिनांक-07.02.2018 द्वारा श्री राम से द्वितीय कारण-पृच्छा की माँग की गयी। उक्त के आलोक में श्री राम द्वारा अपना आवेदन दिनांक-22.02.2018 विभाग को समर्पित किया गया, जिसमें द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने के पूर्व कुछ दस्तावेजों की पुनः माँग की गयी। विभागीय पत्रांक-690, दिनांक-20.08.2018 द्वारा आवेदक नंदजी प्रजापति का आवेदन, श्री मणिकान्त सिंह का सत्यापन प्रतिवेदन एवं विभागीय कार्यवाही संचालन से संबंधित अभिलेख की छायाप्रति संलग्न करते हुए पुनः द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने हेतु32 बिहार गजट, 19 Qjojh 2020 निदेशित किया गया है। श्री राम द्वारा पुनः द्वितीय कारण-पृच्छा समर्पित करने के बजाय अभ्यावेदन समर्पित करते हुए विभागीय कार्यवाही को अमान्य बताने का प्रयास किया गया।
7. श्री राम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध सभी कागजातों के समीक्षोपरान्त पाया गया की आरोपी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है तथा उनके पास से रिश्वत की राशि 4,000/-(चार हजार) रूपये बरामद हुई है। आरोपी के विरूद्ध पदीय कर्तव्यों के निर्वहण में भ्रष्टाचार का आरोप प्रमाणित पाया गया है, जिसके संबंध में आरोपी से अभ्यावेदन की माँग के बावजूद उनके द्वारा बचाव पक्ष में अभ्यावेदन समर्पित करने के बजाय विभागीय कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए द्वितीय कारण-पृच्छा देने से इनकार किया किया गया, जबकि आरोपी द्वारा उठाये गये सवालों के संबंध में विभाग द्वारा आवश्यक दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराया गया है। उनका यह कृत्य उनके पदीय भ्रष्ट आचरण को प्रमाणित करता है।
8. सम्यक् विचारोपरान्त उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम के विरूद्ध सरकारी सेवा से बर्खास्तगी, जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी, का दण्ड विनिश्चित किया गया।
9. श्री महेश राम, तत्कालीन चकबंदी पदाधिकारी, सासाराम सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड ''सरकारी सेवा से बर्खास्तगी, जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी'' संबंधी संलेख पर विभागीय पत्रांक-186, दिनांक-27.01.2020 द्वारा राज्य मंत्रिपरिषद् की स्वीकृति हेतु भेजा गया। राज्य मंत्रिपरिषद् की दिनांक-28.01. 2020 को सम्पन्न बैठक में मद सं0-24 के रूप में सम्मिलित करते हुए उक्त दण्ड प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की गयी। 10. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 (xi) के प्रावधानों के तहत श्री महेश राम, तत्कालीन सहायक चकबंदी पदाधिकारी, सासाराम, रोहतास सम्प्रति निलंबित मुख्यालय चकबंदी निदेशालय, बिहार, पटना को सरकारी सेवा से बर्खास्तगी, जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी, का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
श्री महेश राम से संबंधित ब्यौरे निम्नवत हैः-
1. नाम ः- श्री महेश राम
2. पदनाम ः- तत्कालीन सहायक चकबंदी पदाधिकारी, सासाराम, रोहतास सम्प्रति निलंबित
मुख्यालय चकबंदी निदेशालय, बिहार, पटना।
3. जन्म तिथि ः- 03.10.1964 4. नियुक्ति की तिथि ः- 29.04.2011
5. स्थाई पता ः-ग्राम-मोची साई, वार्ड नं0-15, पो0-चाईबासा, थाना-मुफ्फसिल, जिला-पश्चिम
सिंहभूम, राज्य-झारखण्ड।
आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कंचन कपूर, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 48—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in