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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 28 February 2020

Published 28 February 2020

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2020-02-28.170
Languages
English, Hindi

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द्वारा

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पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

——— अधिसूचना

31 अक्टूबर 2019

सं॰ 5 नि॰गो॰वि॰(1)05/2012

डा॰ प्रमोद चन्द्र तिवारी तदेन्‌, सहायक निदेशक, क्षेत्राीय कुक्कुट 5 नि॰गो॰वि॰(1)05/2012-291-नि॰गो॰--डा॰ प्रमोद चन्द्र तिवारी तदेन्‌, सहायक निदेशक, क्षेत्राीय कुक्कुट प्रक्षेत्रा, भागलपुर के विरूद्ध अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने, वरीय पदाधिकारी के आदेश का अवहेलना करने तथा चक्रकोष के प्रक्षेत्रा, भागलपुर के विरूद्ध अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने, वरीय पदाधिकारी के आदेश का अवहेलना करने तथा चक्रकोष के प्रक्षेत्रा, भागलपुर के विरूद्ध अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने, वरीय पदाधिकारी के आदेश का अवहेलना करने तथा चक्रकोष के में संधारण नहीें करने संबंधी वित्तीय अनियमितता के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की शेष अंतर राशि रोकड़ पंजी में संधारण नहीें करने संबंधी वित्तीय अनियमितता के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की में संधारण नहीें करने संबंधी वित्तीय अनियमितता के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की

2012 के द्वारा डा॰ तिवारी के गयी थी। विभागीय कार्यवाही के फलाफल के उपरांत विभागीय आदेश 239 नि॰गो॰ दिनांक 27.07.2012 के द्वारा डा॰ तिवारी के गयी थी। विभागीय कार्यवाही के फलाफल के उपरांत विभागीय आदेश 239 नि॰गो॰ दिनांक 27

विरूद्ध निम्न दंड अधिरोपित किया गया :- विरूद्ध निम्न दंड अधिरोपित किया गया :-

i) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक तथा मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक तथा

ii) निलंबन अवधि में उन्हें सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। निलंबन अवधि में उन्हें सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

उक्त दंडादेश के विरूद्ध डा॰ तिवारी द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 09 2012 को समर्पित किया गया, जिसे उक्त दंडादेश के विरूद्ध डा॰ तिवारी द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 09.08.2012 को समर्पित किया गया, जिसे विभागीय आदेश 395 नि॰गो॰ दिनांक 10.12.2012 द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। विभागीय आदेश 395 नि॰गो॰ दिनांक 10

विभागीय आदेश 239 नि॰गो॰ दिनांक 27

2012 के विरूद्ध डा॰ तिवारी द्वारा विभागीय आदेश 239 नि॰गो॰ दिनांक 27.07.2012 एवं 395 नि॰गो॰ दिनांक 10.12.2012 के विरूद्ध डा॰ तिवारी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में C.W.J.C.No

C.W.J.C.No. 7720/2015 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 10.07.

.2019 को न्याय निर्णय ावी अंश निम्नवत है :- पारित किया गया जिसका प्रभावी अंश निम्नवत है :-

For the reasons recorded hereinabove, would therefore, quash the order dated For the reasons recorded hereinabove, would therefore, quash the order dated For the reasons recorded hereinabove, would therefore, quash the order dated 10.12.2012 issued by Special Secretary to the Government of Bihar, Animal 10.12.2012 issued by Special Secretary to the Government of Bihar, Animal 10.12.2012 issued by Special Secretary to the Government of Bihar, Animal Husbandry & Fishery Department. Let fresh order be issued by the authorities Husbandry & Fishery Department. Let fresh order be issued by the authorities Husbandry & Fishery Department. Let fresh order be issued by the authorities g due consideration on the pleas raised by the petitioner in his appeal. Let g due consideration on the pleas raised by the petitioner in his appeal. Let showing due consideration on the pleas raised by the petitioner in his appeal. Let 2 (), 22228888 फरवरी फरवरी फरवरी फरवरी 2020202020202020

final order be passed expeditiously, without any undue delay and preferably, within three months from the date of receipt/production of a copy of this order. उक्त पारित न्याय निर्णय के आलोक में डा॰ तिवारी के पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 09.08.2012 की समीक्षा सरकार द्वारा की गयी तथा समीक्षोपरांत पाया गया कि डा॰ तिवारी के विरूद्ध लगाये गये उपर्युक्त आरोप के लिए उन्हें निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। संचालित विभागीय कार्यवाही में जाँच पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि श्री प्रवीण कुमार, प्रतिनियुक्त लिपिक के द्वारा जाँच दल के समक्ष सभी अभिश्रव एवं रोकड़ पंजी में ससमय संधारित नहीं करने के कारण कुक्कुट प्रक्षेत्रा, भागलपुर में वित्तीय अनियमितता देखी गयी। साथ ही चक्रकोष का अंतर शेष राशि रू॰ 8,15,292/-(आठ लाख पंद्रह हजार दो सौ बानवे रूपये) जो संधारित नहीं था और जिसे वित्तीय अनियमितता के रूप में जाँच समिति द्वारा उजागर की गयी उसे संधारित कर लिया गया है और उसका डी॰ सी॰ बिल भी जमा कर लिया गया है। इस आधार पर जाँच पदाधिकारी द्वारा डा॰ तिवारी के विरूद्ध गठित वित्तीय अनियमितता के आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया है।

स्पष्ट है कि प्रासंगिक मामले में डा॰ तिवारी द्वारा कोई वित्तीय अनियमितता अथवा सरकारी राजस्व का गबन नहीं किया गया है। परन्तु डा॰ तिवारी के कार्यालय प्रधान होने के कारण उनके द्वारा अपने कर्त्तव्यों में शिथिलता बरती गयी है जिसके कारण रोकड़ बही का संधारण सही समय पर नहीं हो पाया था।

उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक विचारोपरांत सरकार द्वारा पाया गया कि सिर्फ अपने अधीनस्थ कर्मियों पर सही नियंत्राण नहीं रखे जानेे के कारण रोकड़ बही का संधारण सही समय पर नहीं करनेे के लिए डा॰ तिवारी को दो वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने संबंधी दी गयी शास्ति अधिक है। अतएव समीक्षोपरांत डा॰ तिवारी का सिर्फ एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने एवं निलंबन अवधि को कार्य अवधि मानते हुए वेतनादि दिये जाने का निर्णय लिया गया है। अतः उक्त निर्णय के आलोक में

i) डा॰ प्रमोद चन्द्र तिवारी को विभागीय आदेश 239 नि॰गो॰ दिनांक 27.07.2012 द्वारा अधिरोपित असंचयात्मक प्रभाव से रोकी गयी दो वृद्धि के स्थान पर एक वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने की शास्ति दी जाती है।

ii) निलंबन अवधि (दिनांक 02.11.2010 से 26.07.2012 तक) में डा॰ तिवारी को भुगतान की गयी जीवन निर्वाह भत्ता को समायोजित करते हुए उक्त अवधि के वेतनादि की भुगतान की जायेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

कामेश्वर दास, सरकार के अवर सचिव।

———— , , , द्वा () 170-571+100-000 Website: http://egazette.bih.nic.in

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