निबंधन la[;k पी0टी0-40
बिहार गजट
बिहार सरकार kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-11 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---
भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची i"B
i"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA ---
पूरक
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पूरक-क
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बिहार गजट, 22 vizhy 2020 2भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————
समाहरणालय,बक्सर
(स्थापना शाखा)
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आदेश
26 नवम्बर 2019
सं0 142/2019-20--सक्षम प्राधिकार -सह- जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर के पत्रांक 444/भू0अ0, दिनांक 16.07.2018 द्वारा प्रभारी पदाधिकारी, लोक शिकायत निवारण, आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमण्डल, पटना के ज्ञापांक 665, दिनांक 09.07.2018 के साथ परिवाद की अनन्य संख्या 430110106111703122/1A में आयुक्त, पटना प्रमण्डल पटना-सह-प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा दिनांक 15.06.2018 को पारित विनिश्चय की प्रति प्राप्त करायी गयी है। पारित विनिश्चय में उल्लेख है कि अपीलार्थी के अनुसार मौजा-चंदा, थाना नं0-147 खेसरा नं0-259, 260, 267, 269, 285 की एराजी फोर लेन निर्माण हेतु विभाग द्वारा अधिगृहित कर ली गयी है तथा उक्त एराजी का मुआवजा गलत व्यक्ति अरविन्द कुमार राय, पिता-बाल मुकुन्द राय, साकिन-चिलहरी, थाना-डुमराँव, जिला-बक्सर को मो0 10454213.13 (एक करोड़ चार लाख चौवन हजार दो सौ तेरह रूपये तेरह पैसे मात्र) का भुगतान किया गया है, जिसकी पुष्टि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा की गयी है। उक्त अनियमित रूप से हुये भुगतान के आलोक में आयुक्त, पटना प्रमण्डल पटना -सह- प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा दोषी प्रधान लिपिक के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर निलंबित करने का विनिश्चय पारित किया गया है। उपरोक्त पारित विनिश्चय के अनुपालन में सक्षम प्राधिकार -सह- जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा दोषी प्रधान लिपिक श्री वीरेन्द्र कुमार, जिला भू-अर्जन कार्यालय, बक्सर के विरूद्ध नगर थाना काण्ड सं0 390/2018 द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर पत्रांक 444, दिनांक 16.07.2018 द्वारा श्री कुमार को निलंबित करने की अनुशंसा की गयी थी। साथ ही पत्रांक 483, दिनांक 27.07.2018 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र गठित कर आरोप पत्र प्राप्त कराया गया है, जिसमें यह उल्लेख है कि श्री कुमार जिला भू-अर्जन कार्यालय, बक्सर में पदस्थापन अवधि में राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 84 के चौड़ीकरण संरचना हेतु भू-अर्जन अन्तर्गत श्री भगवान सिंह, पिता श्री लक्ष्मी सिंह को मौजा-कठार, थाना नं0 103, खाता सं0 496, खेसरा सं0 2821 अनावाद बिहार सरकार पर बने अवैध संरचना हेतु अवैध रूप से 701088.00 (सात लाख एक हजार अठासी) रूपये मात्र का भुगतान किया गया है।
श्री कुमार द्वारा अभिलेख में जमीन का किस्म अनावाद बिहार सरकार अंकित कराया गया है। उसके बावजूद भी बन्दोबस्ती के पूर्व जान-बुझकर अनावाद बिहार सरकार पर बने संरचना का भुगतान किया गया है, जो वित्तीय अनियमितता को स्पष्ट करता है। इसके अतिरिक्त अन्य आरोप भी गठित किया गया है।
परिवाद के अनन्य संख्या 430110106111703122/1A में दिनांक 15.06.2018 को आयुक्त, पटना प्रमण्डल पटना-सह-प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा पारित विनिश्चय एवं जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा की गयी अनुशंसा के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9 में निहित प्रावधान के आलोक में श्री वीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन लिपिक जिला भू-अर्जन कार्यालय, बक्सर सम्प्रति वर्तमान पदस्थापन प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर को इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक 01-1191/स्था0, दिनांक 28.07.2019 द्वारा निलंबित करते हुए निलम्बन अवधि में इनका मुख्यालय अनुमण्डल कार्यालय, बक्सर निर्धारित किया गया तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 में विहित प्रावधान के तहत श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, बक्सर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही में सरकार का पक्ष/साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर को उपस्थापन पदाधिकारी नामित किया गया। इसी क्रम में वर्णित सभी अभिलेखों की जॉंच की गयी। जॉंच के क्रम में पाया गया कि श्री वीरेन्द्र कुमार, निलंबित लिपिक द्वारा अभिलेख पर हस्ताक्षर नहीं किया गया है। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री भगवान सिंह पिता स्व0 लक्ष्मी सिंह, सा0-कठारखुर्द को मुआवजा भुगतान हेतु भेजे गये बैंंक एडभाईस पर श्री सिंह द्वारा हस्ताक्षर किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जानबूझकर अभिलेखों पर हस्ताक्षर अंकित नहीं की गया, जो उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती गयी है।
श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के निष्पादनोपरांत अपर समाहर्त्ता, बक्सर -सह- संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 03-1800/रा0, दिनांक 14.09.2019 द्वारा प्राप्त अभिलेख में श्री कुमार के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित आरोपों को प्रमाणित पाये जाने की अनुशंसा की गई, जिसका विवरण निम्नवत् है :-
3 बिहार गजट, 22 vizhy 2020| क्र0 सं0 | आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित आरोप | आरोपी द्वारा संचालन पदाधिकारी को प्रस्तुत स्पष्टीकरण | संचालन पदाधिकारी का मंतव्य | आरोपी द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1. | आरोप संख्या-01 श्री वीरेन्द्र कुमार के लिपिक के रूप में पदस्थापन काल में अनावाद बिहार सरकार पर बने अवैध संरचना हेतु अवैध रूप से 701088.00 (सात लाख एक हजार अठासी रूपये) मात्र का भुगतान के संदर्भ में कार्यालय के पत्रांक 414, दिनांक 30.12.2017 के द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। श्री कुमार द्वारा दिनांक 01. 02.2018 को समर्पित स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है कि यह भुगतान भू-अर्जन अधिनियम एवं नियमावली के तहत किया गया है, जबकि सरकार के विभागीय पत्रांक 6473, दिनांक 07.10.1971 में स्पष्ट अंकित किया गया है कि सरकारी भूमि के बन्दोबस्ती के उपरान्त हीं मुआवजा भुगतान की कार्रवाई की जा सकती है। श्री कुमार द्वारा अभिलेख में अनावाद बिहार सरकार अंकित होने के बावजूद भी बन्दोबस्ती के पूर्व जान-बुझकर अनावाद बिहार सरकार पर बने संरचना का भुगतान किया गया है। जो वित्तीय अनियमितता को स्पष्ट करता है एवं इस अनियमितता के लिये श्री कुमार दोषी है। | उक्त आरोप के संदर्भ में कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 84 के लिए अर्जित भूमि मौजा-कठार, थाना नं0-103, खाता संख्या-496, खेसरा संख्या-2821 अनावाद बिहार सरकार पर बने संरचना के मूल्यांकन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, कार्यान्वयन इकाई, पटना क े सहयोग से कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमण्डल, बक्सर के द्वारा किया गया है। तदोपरांत एन0एच0ए0आई0, पटना से प्राक्कलन स्वीकृत होने के पश्चात् मुआवजा के मूल्यांकनोपरांत हितबद्ध रैयत श्री भगवान सिंह, पिता- श्री लक्षमी सिंह, सा0- कठार को तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा मुआवजा प्राप्त करने हेतु नोटिस निर्गत किया गया था। नोटिस तामिला के पश्चात् आवेदन प्राप्त होने पर हितबद्ध रैयत को संरचना के मुआवजा भुगतान कार्यालय द्वारा किया गया है। उल्लेखनीय है कि नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 क े हितबद्ध व्यक्ति, प्रभावित परिवार, भू-स्वामी की परिभाषा निम्नवत है :- (X) हितबद्ध व्यक्ति स े तात्पर्य है :- ''I'' इस अधिनियम के अधीन भूमि के अधिग्रहण के कारण दिये जाने वाले प्रतिकार में एक हित के दावा करने वाले सभी व्यक्ति। ''III'' भूमि को प्रभावित करने वाले एक (easement) में हितबद्ध एक व्यक्ति। उक्त अधिनियम मे ं भूमि धारण करने की परिभाषा निम्नवत हैः- (एन) भूमि धारण करने से तात्पर्य एक स्वामी अधिभागी या अभिधारी या अन्यथा के तौर पर एक व्यक्ति द्वारा धारित समूचित जमीन से है एवं स्वामी की परिभाषा यथा (r) 'भू-स्वामी'-1 जिसका नाम संबंद्ध प्राधिकार के अभिलेखों में भूमि या इमारत या उसके अंश के स्वामी के तौर पर अभिलिखित है। (C) प ्रभावित परिवार म ं े सम्मिलित है वह परिवार जिसकी भूमि या अन्य संपत्ति अधिगृहित की | श्री कुमार के द्वारा मौजा - कठार, थाना नं0-103, खाता संख्या-496, खेसरा संख्या-2821, रकबा-0.055 ह क्टेयर े जो अनावाद बिहार सरकार की भूमि है, के संबंध मे अभिलेख में ं अंकित होने के बावजूद संबंधित भूमि पर बने अवैध संरचना का भुगतान किया गया है, जबकि मुआवजा प्राप्त करने हेतु नोटिस के उपरान्त प्राप्त कागजात के आधार पर सरकारी जमीन के मामले में अगर बन्दोबस्ती नहीं की गई हो एवं संरचना अवैध हो, तो ऐसी स्थिति में विभागीय निदेश के आलोक में जिला पदाधिकारी के समक्ष मामले को निर्णयार्थ रखा जाना है तथा निर्णय के आलोक में अग्रेत्तर कार्रवाई की जानी है। श्री कुमार द्वारा अपने बचाव में जो तथ्य स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है, वह साक्ष्य आधारित प्रमाणित नहीं है। | यह बताना आवश्यक है कि लाभुक के द्वारा संरचना के भुगतान का आवेदन भू-अर्जन पदाधिकारी को दिया गया, तत्पश्चात जॉचोपरांत भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा आवेदन कार्यालय को संदर्भित किया गया। इसके पश्चात कार्यालय द्वारा आवेदन पर संरचना की राशि की गणना कर भू-अर्जन पदाधिकारी को प्रस्तुत किया गया है। इसके पश्चात भू-अर्जन पदाधिकारी -सह- सक्षम पदाधिकारी द्वारा बैंक को पत्र से राशि हस्तान्तरण करने हेतु भेजा गया है। इसमे लिपिक का दोष नहीं ं है। भुगतान मेरे द्वारा नहीं भू-अर्जन पदाधिकारी -सह-सक्षम पदाधिकारी के द्वारा किया गया है। कार्यालय द्वारा सिर्फ भू-अर्जन पदाधिकारी क े आदेश का अनुपालन किया गया है। |
| गयी है। नये भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का यह भावना है कि भूमि के भू-स्वामियों तथा अन्य प्रभावित परिवारों को कम से कम प्रभावित करते हुए औद्योगिकरण, आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा नगरीकरण हेतु भूमि अधिग्रहण के लिए स्थानीय सरकार एवं संविधान के अधीन स्थापित ग्राम सभाओं के संस्थानों के साथ मंत्रणा करके एक मानवीय भागीदारीमूलक, सूचनात्मक एवं पारदर्शी सुनिश्चित करने तथा उन प्रभावित परिवारों को न्यायसंगत एवं उचित प्रतिकार उपलब्ध कराने को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम जिनकी भूमि अधिगृहित की गयी है या अधिगृहित किया जाना प्रस्तावित है या ऐसे अधिग्रहण द्वारा प्रभावित है तथा ऐसे प्रभावित व्यक्तियो के लिए ं पुनर्वास तथा पुनःव्यवस्थापन के लिए पर्याप्त प्रावधानों को बनाने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनिवार्य अधिग्रहण का संचयी प्रभाव का होना चाहिए कि ''प्रभावित व्यक्ति विकास में भागीदार बन जाये ं जिसमें परिणामतः अधिग्रहणोपरान्त उनके सामाजिक एवं आर्थिक दर्जे में सुधार हो तथा उससे जुड़े मामलों या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए एक अधिनियम।'' नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के धारा 103 का BIRDS EYE VIEW OF THE ACT निम्नवत है ः- Provides for provisions to be in addition to existing laws and not in derogation of, any other law for the time being in force. उल्लेखनीय ह ै कि हितबद्ध व्यक्ति पिछड़े जाति के सदस्य है तथा प्रश्नगत भूमि पर पैतृक रूप से निवास करता है। उक्त तथ्यों के आलोक में प्रश्नगत भुगतान कार्यालय द्वारा सरकार के हित में सदभावना पूर्वक किया गया है। | ||||
| 2. | आरोप संख्या-02 श्री कुमार द्वारा अधोहस्ताक्षरी के नाम से जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर को | लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा अनन्य परिवाद पत्र संख्या-43110106111703122 में सुनवाई दिनांक 17.01.2018 को लोक प्राधिकार के अनुपस्थित रहने की स्थिति में जिला लोक शिकायत | श्री कुमार द्वारा जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर के नाम से लोक शिकायत पदाधिकारी को अनन्य संख्या- | प्रश्नगत विषय में यह बताना आवश्यक ह ै कि भवदीय जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के द्वारा विशेष दुत भेज कर प्रतिवेदन देने का निदेश |
| अनन्य संख्या 43110106111703122 के मामले मे ं प्रेषित पत्र पत्रांक 17, दिनांक 17.01.2018 मे ं अधोहस्ताक्षरी के सहमति के बगैर For करके जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर का पदनाम से हस्ताक्षर अंकित करते हुए प्रत्युत्तर दिया गया है। इस संदर्भ में ज्ञापांक 34, दिनांक 01.02.2018 के द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गई, तो श्री कुमार के द्वारा दिनांक 06.02. 2018 को समर्पित स्पष्टीकरण में उल्लेख किया गया है कि पुछे गये कारण पृच्छा पर स्पष्टीकरण विनिश्चय पारित होने के पश्चात देना श्रेयस्कर प्रतीत होता है। स्पष्ट है कि श्री कुमार के द्वारा अधोहस्ताक्षरी एवं जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर को गुमराह करने एवं अपने वित्तीय अनियमितता के छुपाने के उद्देश्य से For कर हस्ताक्षर अंकित किया गया। किसी वरीय पदाधिकारी का For कर हस्ताक्षर अंकित करना अपने आप मे ं एक गंभीर मामला है। श्री कुमार का यह कृत्य घोर अनुशासनहीन्ता,वरीय पदाधिकारी को गुमराह करने वाला एवं गलत नियत से किये गये भुगतान को छुपाने हेतु वरीय पदाधिकारी को भ्रमित करने की श्रेणी में आता है। | निवारण पदाधिकारी, बक्सर द्वारा विशेष दुत के माध्यम से मुझे बुलाया गया तथा उनके द्वारा मौखिक रूप से कुछ भी लिखित में For करके प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया था। उक्त निदेश के अनुपालन हेतु तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी -सह- लोक प्राधिकार से मोबाईल से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया, परन्तु कोई रिस्पान्स नहीं मिलने पर मेरे द्वारा For करके प्रतिवेदन समर्पित किया गया था, जो सत्य एवं तथ्य पर आधारित है। इस मामले से संबंधित परिवादी के आवेदन पर अमीन एवं राजस्व कर्मचारी के जॉंचोपरान्त संचिका ससमय तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी बक्सर के समक्ष उपस्थापित की गई थी, परन्तु तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा उक्त जॉंच प्रतिवेदन पर संचिका के टिप्पणी भाग में नाजीर जो मुझसे कनीय है को विमर्श करने का आदेश अंकित किया गया था, जो कार्यालय संव्यवहार के अनुरूप नहीं है। | 43110106111703122 के मामले में प्रतिवेदन बिना उनके सहमति के प्रेषित करना उनके अनुशासनहीनता, बड़े पदाधिकारी को गुमराह करने वाला एवं गलत नियत से किये गये भुगतान को प्रमाणित करता है। | दिया गया था। मैने भू-अर्जन पदाधिकारी स े मोबाईल पर सम्पर्क करने का अनेक प ्रयास किया। क्योंकि वे कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। सम्पर्क न होने पर पुनः भवदीय जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के बुलाने पर निदेश के आलोक मे मैनें ं For करके वाद संबंधित सूचना दी, जिसमें कोई भी आपािजनक बात नहीं लिखी गयी है। प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि मैनें सिर्फ भुगतान होने की सूचना दी है और अन्य कोई बात नहीं लिखी है और ये परिस्थितिजन्य किया गया है या मुझसे करवाया गया है। इसमे मेरी सहमति नहीं थी। ं यह बात भवदीय जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी से प ुछा जा सकता है। कार्यालय संव्यवहार में पदाधिकारी के अनुपस्थिति मे उनके न रहने ं पर पदाधिकारी की ओर से For करके प्रतिवेदन दिया जाता है एवं इसके उपरांत भी तथ्य से भिन्न कोई बात नहीं कही गयी है। | |
| 3. | आरोप संख्या-03 श्री कुमार के द्वारा अंचल कार्यालय, डुमरॉव के पत्रांक 624, | मौजा- चन्दा, थाना नं0-145, खाता संख्या-05, खेसरा संख्या-64, 260, 269, 285 एवं 268 के रैयत श्री अरविन्द राय, पिता- बालमुकुन्द राय, | श्री कुमार के द्वारा मौजा-चन्दा, थाना नं0-145, खाता संख्या-05, खेसरा | इस आरोप के संदर्भ में सर्व-प्रथम यह बताना उचित है कि प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी नहीं की गयी है, |
| दिनांक 22.10.2017 द्वारा निर्गत व शावली ं को नजर अन्दाज कर नोटरी द्वारा बनाये गये वंशावली स ची ू के आधार पर श्री अरविन्द राय पिता बालमुकुन्द राय, साकिन- चिलहरी को श्रीमति लिलावती देवी के हिस्से की भी राशि का भुगतान के संदर्भ म ं े विस्तृत प्रतिवेदन पत्रांक 174, दिनांक 11.04. 2018 के माध्यम से अधोहस्ताक्षरी द्वारा जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर को समर्पित किया गया। जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर को समर्पित किया गया है। जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर के द्वारा दिनांक 11.04.2018 को विनिश्चय में तत्कालीन प्रधान सहायक श्री वीरेन्द्र कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई का निदेश दिया गया है। स्पष्टतः श्री वीरेन्द्र कुमार ने गलत नियत से अंचलाधिकारी के वंशावली को नजर अंदाज कर अरविन्द कुमार राय को 10454213.00 (एक करोड़ चार लाख चौवन हजार दो सौ तेरह) रूपये की भुगतान किया गया जो कि गम्भीर वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है। | सा0- चिलहरी को मुआवजा का भुगतान सभी औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए कार्यालय द्वारा भुगतान किया गया है। द्वितीय भाग अवचार विन्दु (3) में वर्णित अंचल कार्यालय, डुमरॉव के पत्रांक 624 दिनांक 22.10.2017 द्वारा निर्गत वंशावली के आलोक में श्री अरविन्द कुमार राय को भुगतान नहीं किया गया है। उक्त पत्रांक से निर्गत वंशावली लीलावती देवी, पति- स्व0 हरेश्वर राय, ग्राम- चिलहरी, पो0- चिलहरी, थाना- डुमरॉव के पक्ष में निर्गत किया गया है। यह वंशावली श्री अरविन्द कुमार राय के भुगतान के समय कार्यालय के संज्ञान में नहीं था। श्रीमती लीलावती देवी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग सं0-84 के भूमि अर्जन की प्रक्रिया वर्ष 2009 में प्रारम्भ हुई थी, तथा मुआवजा का भुगतान वर्ष 2012 से प्रारम्भ था, परन्तु श्रीमती लीलावती देवी द्वारा उनके भूमि अर्जन होने से संबंधित कोई आवेदन /दावा प्रस्तुत नहीं किया गया था। श्री राय के भुगतान के पश्चात परिवादी श्रीमती लीलावती देवी द्वारा कार्यालय मे ं आवेदन दिया गया है। फलतः इनका दावा Waiv की श्रेणी में आता है। उक्त वंशावली के आलोक में भुगतान नहीं किया गया है। तृतीय भाग अवचार - (1) उक्त आरोप के आलोक मे ं कहना है कि भू-अर्जन अधिनियम, 2013,दिनांक 01.01.2014 से प्रभावी है। ऐसी स्थिति में विभागीय पत्रांक 6473 दिनांक 07.10.1971 प्रभावी नहीं माना जा सकता है, साथ ही भूमि के मुआवजा भुगतान नहीं किया गया है। कार्यालय द्वारा मात्र संरचना का भुगतान कार्यहित मे रैयत को ं संरचना का हितबद्ध रैयत एवं संरचना पर स्वामित्व होने की स्थिति में किया गया है। तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा यह कहना कि प्रश्नगत अभिलेख मे र े समक्ष े उपस्थापित किया गया था के संबंध में कहना है कि मेरे द्वारा प्रश्नगत अभिलेख का अवलोकन नहीं किया गया है। तृतीय भाग अवचार - (2) उक्त आरोप के आलोक में कहना है कि भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर | संख्या-207, 268, 269 एवं 285 कुल रकबा 0. 210 हेक्टेयर के मुआवजा भुगतान के संबंध मे श्री अरविन्द ं कुमार राय एवं लीलावती देवी के बीच विवाद के जानकारी के बावजूद अरविन्द कुमार राय को जान-बुझकर उन्हें लाभ पहुॅचाने हेतु मुआवजा का भुगतान किया गया है, जो उनके गलत मंशा को दर्शाता है। | जैसा कि आरोपित किया गया है। अरविन्द कुमार राय का आवेदन दिनांक 19.08. 2015 को भुगतान हेतु दिया गया हैै और जॉंचोपरांत आदेश के बाद भुगतान हेतु अरविन्द कुमार राय का हस्ताक्षर 03.02.2017 को प्राप्त किया गया है। राशि का भुगतान करने हेतु बैंक को पत्र दिनांक 04.03. 2017 भेजा गया है। लीलावती द वी े का आवेदन बिना अनुलग्नक के दिनांक 22.05.2017 को समर्पित किया गया है। लीलावती देवी द्वारा दूसरा आवेदन दिनांक 11.11.2017 को दिया गया, जिसमें वंशावली एवं अन्य कागजात संलग्न है। आरोप पत्र में वंशावली पर जो प्रश्न उठाया गया है, वह दिनांक 11.11.2017 को दिये गये आवेदन के साथ संलग्न है। ऐसा नहीं है कि दोनों आवेदन एक ही समय में दिया गया है। श्री अरविन्द राय के भुगतान के पश्चात लीलावती देवी द्वारा अपना दावा प्रस्तुत किया गया है। अतएव यह मामला भू-अर्जन पदाधिकारी -सह- समक्ष पदाधिकारी के क्षेत्राधिकार से संबंधित है। इसमे कही भी ं लिपिकिय भूल नहीं की गयी है। अरविन्द कुमार राय के भुगतान के पश्चात लीलावती देवी द्वारा जो आवेदन दिया गया है उस पर निर्णय सक्षम पदाधिकारी को लेना है। तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी -सह- सक्षम प्राधिकार द्वारा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को जो प्रतिवेदन भेजा गया है उस प्रतिवेदन में प्रश्नगत भूमि के स्वत्व के बिन्दू पर कोई प्रतिवेदन नहीं है। वंशावली पर जो प्रश्न उठाया गया है वो भी दोनों पक्षोंं द्वारा विभिन्य तिथियों को दिया गया है। कार्यालय | |
| द्वारा विशेष दुत के माध्यम से मुझे बुला कर निदेश दिया गया था कि कुछ भी प्रतिवेदन दे, ताकि अगली तिथि निर्धारित की जा सके। उक्त मौखिक निदेश के आलोक में भवदीय तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर से मोबाईल पर सम्पर्क करने का प्रयास किया गया था, परन्तु सम्पर्क नहीं होने की स्थिति में For करके तथ्य पर आधारित प्रतिवेदन दिया गया है। उल्लेखनीय ह ै कि लोक शिकायत निवारण अधिनियम क े अन्तर्गत लोक प्राधिकार का प्रतिवेदन ही स्वीकार किया जाता है। ऐसी स्थिति में गुमराह / भ्रमित करने या गलत नियत से प्रतिवेदन नहीं दिया गया है बल्कि विशेष परिस्थिति में भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के मौखिक आदेश के अनुपालन हेतु दिया गया है, जो बिल्कुल तथ्य पर आधारित है। तृतीय भाग अवचार - (3) उक्त आरोप के आलोक मे कहना ं है कि अंचल कार्यालय, डुमरॉव के पत्रांक 624 दिनांक 22.10.2017 द्वारा निर्गत व शावली श्रीमती लीलावती ं देवी के पक्ष में निर्गत किया गया है। इस वंशावली के आलोक मे श्री ं अरविन्द राय, पिता- बालमुकुन्द राय, सा0- चिलहरी को मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया ह ै। प्रपत्र-'क' के साथ संलग्न अंचल कार्यालय, डुमरॉव के पत्रांक 361 दिनांक 01.08.2015 से निर्गत वंशावली में स्व0 हरेश्वर राय को नावल्द दर्शाया गया है, जिसमें आलोक में भुगतान किया गया है। लोक प्राधिकार द्वारा पत्रांक 174 दिनांक 11.04.2018 से भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर द्वारा पारित आदेश दिनांक 11.04.18 निम्न तथ्यों के आलोक मे क्षेत्राधिकार ं एवं विधि विरूद्ध है :- (a) राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3H(4) में अंकित है If any dispute arises as to the apportionment of the amount or any part thereof or to any person to whom the same or any part thereof is payable, the competent authority shall refer the dispute to the decision of the principal civil court of original jurisdiction within the limit of whose jurisdiction the land is situated. (b) प्रश्नगत आदेश CPC की धारा judicata 11 Res प्रभावित है, क्योंकि पूर्व में पूर्व के तत्कालीन भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर द्वारा इस मामले में विनिश्चय पारित किया गया है, जिसका परिवाद अनन्य संख्या-430110109091702981 वर्ष 2017 एवं 999980123101701472 वर्ष 2017 है। CPC की धारा 11 के अनुसार इस मामले को पुनः सुनवाई किया जाना विहित प ्रावधान के विरूद्ध है। उक्त परिवाद पत्र पर पारित विनिश्चिय की जानकारी तत्कालीन लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बक्सर को थी, जैसा कि परिवाद अनन्य संख्या- 430110106111703122 वर्ष 2017 के अभिलेख आदेश फलक दिनांक 27. 12.2017 में यह अंकित कि ''परिवादी द्वारा गया कि इस संबंध मे श्री ं अरविन्द कुमार राय को अधिग्रहण के मामले में भुगतान कर दिया गया है, जबकि एक अन्य परिवाद लीलावती देवी के नाम से दायर परिवाद में लोक प ्राधिकार द्वारा मामला न्यायालीय बताया गया'' बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम की धारा-2(क) क े प्रावधानानुसार न्यायालय या अधिकरण की अधिकारिता के अधीन किसी मामले से संबंधित शिकायत सम्मिलित नहीं है। लोक शिकायत निवारण अधिनियम की धारा-7 के प्रावधानानुसार पारित विनिश्चय/ आदेश के विरूद्ध विक्षुब्ध होने की स्थिति में अपील का प्रावधान है, परन्तु परिवादी श्रीमती लीलावती देवी द्वारा अपील दाखिल नहीं किया गया तथा उनके पुत्र परिवादी श्री अभिताभ सिंह के द्वारा पुनः भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष परिवाद दायर किया गया है। उक्त परिवाद पत्र पर वाद | ने स्वयं कही से वंशावली की मांग नहीं किया है। जो कागजात लाभुक के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है उन पर ही प ्रक्रिया पूरी कर भुगतान किया जाता है। भुगतान पूर्व इन्डोमेनिटी बान्ड लेकर ही भुगतान किया जाता है। अभिलेख के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि अरविन्द कुमार राय का आवेदन 19.08.2015 को प्राप्त है और लीलावती देवी का आवेदन दिनांक 22.05. 2017 को बिना आवश्यक कागजात के प्राप्त है और पुनः दुसरा आवेदन वंशावली एवं अन्य आवश्यक कागजात के साथ दिनांक 11.11.2017 जो कि भुगतान के आदेश के 9 माह बाद समर्पित किया गया है। इस तथ्य से स्पष्ट है कि एक ही दिन में सभी कार्यवाही पूरी करने का आरोप निराधार है एवं अभिलेख से मेल नही खाता है। लीलावती द वी े का आवेदन भी अरविन्द कुमार राय के आवेदन से 2 वर्ष बाद दिया गया है। अतः यह आरोप बेबुनियाद है कि अरविन्द कुमार राय को लाभ पहुचानें के नियत से किया गया है। लीलावती देवी क े परिवाद में लोक शिकायत निवारण प्राधिकार द्वारा पूर्व में निर्णित किया गया था, जिसमें प्राधिकार द्वारा उन्हे सक्षम न्यायालय में जाने का निदेश दिया गया था। यह वाद दिनांक 09.09.2017 को प्रारंभ किया गया था। इसके उपरांत पुनः उन्हीं के पुत्र द्वारा दायर परिवाद में मैं दोषी कैसे हो गया। तत्कालीन सक्षम प ्राधिकार के द्वारा इस वाद को सक्षम न्यायालय मे न भेज कर मुझे ं बली का बकरा बनाया गया है जो बिल्कुल ही न्यायसंगत नहीं है। यह संदर्भित करना आवश्यक है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3H के तहत सक्षम पदाधिकारी को सक्षम न्यायालय में भेजा जाना चाहिए था। अनन्य वाद सं0 430110106111703122 म ं े पारित विनिश्चय दिनांक 24.05.2018 में परिवादी श्री अभिताभ सिंह द्वारा यह कहा गया है कि अरविन्द कुमार राय एवं वीरेन्द्र क ुमार (लिपिक) आपस में संबंधी है जो सरासर बेबुनियाद एवं तथ्य से परे है। इस संबंध में मैनें श्रीमान लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को दिनांक 31.10.2018 को जॉंच करने हेतु अभ्यावेदन शपथ-पत्र के साथ दिया है। (छायाप्रति संलग्न) क्योकि इससे मामला पूर्वाग्रह से ग्रसित हो जाता है। इस बिन्दु पर प्रार्थना कि श्री अभिताभ सिंह से स्पष्टीकरण मांगा जाय और वो आरोप को साबित करे। यह भी उल्लेख करना आवश्यक है कि लीलावती देवी द्वारा लोक शिकायत निवारण प्राधिकार में दिनांक 09.09.2017 को आवेदन दिया गया एवं आदेश दिनांक 20.11.2017 को पारित किया गया साथ ही इनके पुत्र अमिताभ सिंह के द्वारा दिनांक 06.11.2017 को परिवाद दिया गया और निष्पादान/आदेश दिनांक 24.05.2018 को किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि एक ही मामले पर एक ही पक्षकार द्वारा एक ही विषय पर दो आवेदन दिया गया और दोनों को साथ साथ अलग-अलग प्रक्रिया चलाया गया और दोनों में एक ही वाद बिन्दु क े लिए अलग-अलग आदेश पारित किया गया है। यह भी उल्लेख करना परम आवश्यक ह ै कि दोनों परिवाद में पीठासीन | |||
| संस्थित किया गया है, जो अधिनियम के विरूद्ध है, जो लोक शिकायत निवारण अधिनियम एवं प्रावधान के विरूद्ध है। सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के अधिसूचना संख्या -18/लो0शि0को0-14-04/2016 -7695/पटना दिनांक 30.05.2016 से बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 के तहत परियोजनार्थ योजनाओं, कार्यक्रमों एवं सेवाओं जिनके संबंध में परिवाद दायर किया जा सकेगा एवं लोक प्राधिकार स्तर पर परिवाद का निवारण होगा अधिसूचित है। उक्त अधिसूचना मे भू-अर्जन से संबंधित ं मामले/विषय सुनवाई योग्य नहीं (Negetive List) में शामिल है। लोक शिकायत निवारण अधिनियम की धारा-8 के प्रावधानानुसार शास्ति अधिरोपित किये जाने वाले व्यक्ति को सुने जाने का युक्त अवसर प्रदान किया जायेगा, परन्तु भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा शास्ति अधिरोपित किये जाने के पूर्व कोई सूचना नहीं दी गयी है और न ही मुझे सुना गया है। भवदीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का उक्त आदेश नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध है, जो कि दंण्डित करने से पूर्व प्रभावित पक्ष को सुने जाने का अवसर प्रदान करता है। बिहार सरकार गृह विभाग के पत्रांक 6211,दिनांक 09.06.2008 मे ं यह निदेश है कि सभी अधिकारी/ कर्मी राज्य सरकार के अंग है। इसलिए यदि किसी के कार्यकलाप से सरकार को क्षति होती है तो सरकार जो कि नियोजक है उसी को यह अधिकार प्राप्त है कि वह उक्त कर्मी पर किस प्रकार की कार्रवाई करे । ं लिपिक क े नियुक्ति पदाधिकारी समाहर्त्ता है। स्पष्टतः लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा अधिरोपित शास्ति यथा प्राथमिकी दर्ज करने एवं विभागीय कार्रवाई प्रारम्भ करने का आदेश उनके क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं है। प रिवादी श्री अमिताभ सिंह का दावा एवं स्वत्व की समीक्षा पूर्णरूपेण भवदीय लोक प्राधिकार द्वारा नहीं किया गया है। | पदाधिकारी एक ही है जैसा कि हस्ताक्षर से स्पष्ट प्रतीत होता है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों में जो कि साक्ष्य पर आधारित है स्पष्ट है कि मै कही भी दोषी नहीं हुॅ। मेरे खिलाफ जान-बुझ कर वैमनस्यता से यह कार्यवाही संचालित की जा रही है और अभिलेख पर धारित साक्ष्यों को दरकिनार कर अन्य बातो के आधार पर दोष सिद्ध करने का असफल प्रयास किया जा रहा है जो बिल्कुल ही न्यायसंगत नहीं है। मैं किसी भी आरोप के लिए कही से भी उारदायी नहीं हू और नही मैनें अपने लिपिकीय कार्य के आलावा अन्य कोई कार्य किया है। | |||
| 4. | आरोप संख्या-04 श्री वीरेन्द्र कुमार दिनांक 17.02.2018 से 31.03.2018 तक गैर कानूनी रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहे। | उक्त आरोप पत्र के आलोक में कहना है कि एक्जिमा होने के कारण चलने फिरने मे ं कठिनाई होने एवं पत्नी का तबियत खराब रहने के कारण चिकित्सक के परामर्श से विशेष परिस्थिति में चिकित्सा अवकाश ह तु े भवदीय जिला पदाधिकारी को तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से ससमय आवेदन दिया गया है तथा उक्त आवेदन की अग्रिम प्रति भवदीय जिला पदाधिकारी को समर्पित किया गया था। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में सभी आरोप / अवचार को मैं अस्वीकार करता हूॅ। यह कारण पृच्छा अनुपूरक कारण पृच्छा दाखिल करने के विकल्प के साथ समर्पित कर रहा हूॅं। इसके अतिरिक्त मुझे कहना है कि तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा पूर्वाग्रह से एवं तत्कालीन लोक शिकातय निवारण पदाधिकारी द्वारा परिवादी के प्रभाव म ं े मेरे विरूद्ध शासित अधिरोपित करने का विनिश्चय पारित किया गया है। | श्री कुमार दिनांक 17.02.2018 से 31.03. 2018 तक गैरकानूनी रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहे है, के संबंध मे ं तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के द्वारा उपस्थिति कॉलम मे ं टिप्पणी अंकित किया गया है। | उक्त आरोप पत्र के आलोक में कहना है कि एक्जिमा होने के कारण चलने फिरने में कठिनाई होने एवं पत्नी का तबियत खराब रहने के कारण चिकित्सक के परामर्श से विशेष परिस्थिति में चिकित्सा अवकाश हेतु भवदीय जिला पदाधिकारी को तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से ससमय आवेदन दिया गया है तथा उक्त आवेदन की अग्रिम प्रति भवदीय जिला पदाधिकारी को समर्पित किया गया है। उपस्थिति पंजी के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि उपस्थिति कॉलम में तत्कालीन भवदीय जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा उपरिलेखन कर दिनांक 17.02.2018 से 28.02.2018 तक अनुपस्थित अ कित ं किया गया है तथा माह मार्च के उपस्थिति प जी ं क े उपस्थिति कॉलम में चिकित्सा अवकाश अंकित है तथा उपस्थिति भी काटी गयी है। उक्त अवधि में प्रार्थी को गैरकानूनी ढंग से अनुपस्थित होने के विरुद्ध कोई नोटिश निर्गत नहीं है। अतएव उक्त अनुपस्थिति को गैरकानूनी कहना न्यायोचित नहीं है। |
आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित आरोप, आरोपी कर्मी से प्राप्त कारण पृच्छा/अभ्यावेदन '' लाभुक के द्वारा संरचना के भुगतान का आवेदन भू-अर्जन पदाधिकारी को दिया गया, तत्पश्चात जॉचोपरांत भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा आवेदन कार्यालय को संदर्भित किया गया। इसके पश्चात कार्यालय द्वारा आवेदन पर संरचना की राशि की गणना कर भू-अर्जन पदाधिकारी को प्रस्तुत किया गया है। इसके पश्चात भू-अर्जन पदाधिकारी-सह-सक्षम पदाधिकारी द्वारा बैंक को पत्र से राशि हस्तान्तरण करने हेतु भेजा गया है। इसमें लिपिक का दोष नहीं है। भुगतान मेरे द्वारा नहीं भू-अर्जन पदाधिकारी-सह-सक्षम पदाधिकारी के द्वारा किया गया है। कार्यालय द्वारा सिर्फ भू-अर्जन पदाधिकारी के आदेश का अनुपालन किया गया है। प्रश्नगत विषय में यह बताना आवश्यक है कि भवदीय जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के द्वारा विशेष दूत भेज कर प्रतिवेदन देने का निदेश दिया गया था। मैने भू-अर्जन पदाधिकारी से मोबाईल पर सम्पर्क करने का अनेक प्रयास किया। क्योंकि वे कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। सम्पर्क न होने पर पुनः भवदीय जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के बुलाने पर निदेश के आलोक में मैंने For करके वाद संबंधित सूचना दी, जिसमें कोई भी आपािजनक बात नहीं लिखी गयी है। प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि मैनें सिर्फ भुगतान होने की सूचना दी है और अन्य कोई बात नहीं लिखी है और ये परिस्थितिजन्य किया गया है या मुझसे करवाया गया है। इसमें मेरी सहमति नहीं थी। यह बात भवदीय जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी से पूछा जा सकता है। कार्यालय संव्यवहार में पदाधिकारी के अनुपस्थिति में उनके न रहने पर पदाधिकारी की ओर से For करके प्रतिवेदन दिया जाता है एवं इसके उपरांत भी तथ्य से भिन्न कोई बात नहीं कही गयी है। उक्त आरोप पत्र के आलोक11 बिहार गजट, 22 vizhy 2020 में कहना है कि एक्जिमा होने के कारण चलने फिरने में कठिनाई होने एवं पत्नी का तबियत खराब रहने के कारण चिकित्सक के परामर्श से विशेष परिस्थिति में चिकित्सा अवकाश हेतु भवदीय जिला पदाधिकारी को तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से ससमय आवेदन दिया गया है तथा उक्त आवेदन की अग्रिम प्रति भवदीय जिला पदाधिकारी को समर्पित किया गया है। उपस्थिति पंजी के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि उपस्थिति कॉलम में तत्कालीन भवदीय जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा उपरिलेखन कर दिनांक 17.02.2018 से 28.02.2018 तक अनुपस्थित अंकित किया गया है तथा माह मार्च के उपस्थिति पंजी के उपस्थिति कॉलम में चिकित्सा अवकाश अंकित है तथा उपस्थिति भी काटी गयी है। उक्त अवधि में प्रार्थी को गैरकानूनी ढंग से अनुपस्थित होने के विरुद्ध कोई नोटिश निर्गत नहीं है। अतएव उक्त अनुपस्थिति को गैरकानूनी कहना न्यायोचित नहीं है।''- श्री कुमार के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन एवं जिला भू-अर्जन पदाधिकारी -सह- उपस्थापन पदाधिकारी, बक्सर से प्राप्त प्रतिवेदन के परिशीलन से आरोप पत्र में गठित आरोप खण्डित नहीं होते हैं, बल्कि प्रमाणित होते हैं। चूॅकि श्री कुमार द्वारा अपने दायित्व के निर्वहन में लापरवाही बरती गयी है, जो अपर समाहर्त्ता -सह-संचालन पदाधिकारी, बक्सर द्वारा भी प्रमाणित पाये गये है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री कुमार से पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक 01-1826/स्था0, दिनांक 24.09.2019 द्वारा द्वितीय अभ्यावेदन की मांग की गई। श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य नहीं दर्शाया गया है। इस प्रकार श्री कुमार के अभ्यावेदन के परिशीलन के पश्चात् श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोप खण्डित नहीं होते है।
अतः मैं राघवेन्द्र सिंह, भा0प्र0से0, समाहर्ता-सह-जिला दण्डाधिकारी, बक्सर श्री वीरेन्द्र कुमार सम्प्रति निलंबित लिपिक के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं जॉच पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त आरोपित कर्मी के विरूद्ध प्राप्त जॉच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आरोपित कर्मी श्री वीरेन्द्र कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित-2007 के नियम 14(xi) के तहत सेवा से ''बर्खास्तगी'' (DISMISSAL) जो ''सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी एवं निलंबन अवधि के लिए मात्र जीवन यापन भत्ता इन्हें देय होगा, की शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित करता हूॅ।
श्री कुमार को इसके अलावा पेंशन, ग्रेच्यूटी एवं अन्य सेवान्त लाभ देय नही होगा। श्री वीरेन्द्र कुमार से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्नवत है :-
1. नाम ः- श्री वीरेन्द्र कुमार 2. पिता का नाम ः- स्व0 कन्हैया सिंह 3. पदनाम ः- लिपिक 4. जन्म तिथि ः- 31.12.1967 5. नियुक्ति तिथि ः- 09.06.1995 6. वेतनमान ः- 9300-34800 7. स्थायी पता ः- ग्राम-शिवपुर, पो0-केसठ, थाना-नावानगर, जिला-बक्सर (बिहार)
इसकी सूचना सभी संबंधितों को दी जाय।
आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी, बक्सर। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना }kjk प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 02—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in