(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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(स(cid:27)(cid:25) पटन(cid:4) (cid:29)(cid:29)4) पटन(cid:4)(cid:30) व५ह!प०तव(cid:4)र(cid:30) 1 अ(cid:6)तूबर 2020 सं॰ 3/एम0-66/2019-6832/सा0प्र0 सामान्य प्रषासन विभाग ——— संकल्प 23 जुलाई 2020 विषयः- प्रशासन के सुदृढ़ीकरण हेतु सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की आवधिक समीक्षा के संबंध में।
बिहार सरकार के वैसे सरकारी सेवक, जिसकी उम्र 50 वर्ष से ज्यादा हो चुकी हो तथा उसकी कार्य दक्षता या आचार ऐसा नहीं है जिससे उसे सेवा में बनाये रखना न्याय हो अथवा जिसे सेवा में बनाये रखना लोकहित में नहीं हो, के कार्यकलाप की आवधिक समीक्षा हेतु प्रक्रिया का निर्धारण राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन था।
2. बिहार सेवा संहिता के नियम-74(क) में प्रावधानित है कि "राज्य सरकार किसी सरकारी सेवक को, जिसने अपनी प्रथम नियुक्ति की तारीख से कर्त्तव्य के 21 वर्ष और कुल सेवा के 25 वर्ष पूरे किये हों, सेवानिवृत्ति करा सकती है, यदि वह समझे कि उसकी कार्य दक्षता या आचार ऐसा नहीं है जिससे उसे सेवा में बनाए रखना न्याय हो।" इसी प्रकार बिहार सेवा संहिता के नियम-74(ख)(ii) में प्रावधानित है कि "सम्बद्ध नियुक्ति प्राधिकारी किसी सरकारी सेवक को कम-से-कम तीन माह की पूर्व लिखित सूचना अथवा ऐसी सूचना के बदले में तीन माह के वेतन तथा भत्ते समतुल्य राशि देकर 30 वर्ष की अर्हक सेवा अथवा 50 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने पर अथवा इसके बाद सूचना में निर्दिष्ट किसी तिथि को लोकहित में उस सरकारी सेवक को सेवा से निवृत्त होने की अपेक्षा कर सकेगा।"2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 [Çत३बर 2(cid:22)2(cid:22) 3. उक्त वर्णित स्थिति में सम्यक् विचारोपरोन्त उपर्युक्त कंडिका-2 में वर्णित प्रावधान के आलोक में बिहार सरकार के सरकारी सेवक के कार्यकलाप की आवधिक समीक्षा हेतु प्रक्रिया निम्नरूप में निर्धारित किया जाता है-
(i) बिहार सेवा संहिता के नियम 74(क) अथवा 74(ख)(ii) के प्रावधानों के तहत बिहार सरकार के सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की आवधिक समीक्षा की जाय। ऐसी समीक्षा समूह-'क', 'ख', 'ग' एवं 'अवर्गीकृत'- सभी समूह के कर्मियों के संदर्भ में की जायेगी।
(ii) प्रत्येक विभाग में समीक्षा के लिए समिति का गठन निम्नरूप में किया जायेगा- (क) समूह 'क'- अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव की अध्यक्षता में, (ख) समूह 'ख'- अपर सचिव/संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में, (ग) समूह 'ग' एवं 'अवर्गीकृत' समूह- संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में;
परन्तु यदि संबंधित कर्मी के नियुक्ति प्राधिकार संयुक्त सचिव से न्यून स्तर के हों, तब निदेशक/उप सचिव/संबंधित नियुक्ति प्राधिकार समिति के अध्यक्ष होंगे। राज्य स्तरीय अराजपत्रित संवर्गों को छोड़कर शेष अराजपत्रित कर्मियों के मामले में विभागाध्यक्ष/संगठन के प्रमुख द्वारा समिति की संरचना निर्धारित की जायेगी;
परन्तु उक्त वर्णित समितियों की बैठक में विभाग/कार्यालय के संबंधित नोडल निगरानी पदाधिकारी (अराजपत्रित कर्मियों के संदर्भ में उनके प्रतिनिधि) को भी आमंत्रित किया जायेगा।
(iii) जिन कर्मचारियों का उम्र किसी वर्ष जुलाई से दिसम्बर माह में 50 वर्ष से ज्यादा होने वाली हो, उनके मामलों की समीक्षा समिति द्वारा उसी वर्ष जून माह में की जाय तथा जिन कर्मचारियों का उम्र किसी वर्ष जनवरी से जून माह में 50 वर्ष से ज्यादा होने वाली हो, उनके मामलों की समीक्षा समिति द्वारा पिछले वर्ष के दिसम्बर माह में की जाय।
(iv) समिति द्वारा समीक्षा के क्रम में सरकारी सेवकों के संदर्भ में निम्न बिन्दुओं पर विचार किया जायेगा- (क) सत्यनिष्ठा का संदिग्ध होना- संबंधित कर्मी की सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने की स्थिति में अन्य कारकों पर विचार किये बिना उसकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति की अनुशंसा की जायेगी।
(ख) कार्य दक्षता या आचार- समीक्षा का बिन्दु यह होगा कि सरकारी सेवक की कार्य दक्षता या आचार ऐसा नहीं है जिससे उसे सेवा में बनाये रखना न्याय हो अथवा जिसे सेवा में बनाये रखना लोकहित में नहीं हो।
(v) समिति द्वारा समीक्षा के क्रम में सरकारी सेवक के पूर्ण सेवा इतिहास (पिछले 05 वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन/चारित्री सहित) पर विचार किया जायेगा। (vi) समिति द्वारा समर्पित समीक्षा प्रतिवेदन पर सम्यक् विचारोपरान्त संंबंधित नियुक्ति प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त कर संबंधित सरकारी सेवक को बिहार सेवा संहिता के नियम-74(क) अथवा 74(ख)(ii) के प्रावधान के आलोक में अनिवार्य सेवानिवृत्त कराये जाने का निर्णय संसूचित किया जायेगा।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 [Çत३बर 2(cid:22)2(cid:22) 4. विचार के क्रम में समिति द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुजरात राज्य बनाम उमेदभाई एम0 पटेल, 2001 (3) SCC 314 के मामले में की गयी निम्नांकित राय/टिप्पणी को भी संज्ञान में रखा जाय-
(क) जब किसी सरकारी सेवक की सेवा सामान्य प्रशासन के लिए उपयोगी न रह जाय, तब उसे लोकहित में अनिवार्य सेवानिवृत्त कराया जा सकता है।
(ख) सामान्यतया अनिवार्य सेवानिवृत्ति का ऐसा आदेश संविधान के अनुच्छेद-311 के प्रावधान के तहत दंड/शास्ति नहीं माना जायेगा।
(ग) बेहतर प्रशासन के लिए अनुपयोगी सरकारी सेवक को अनिवार्य सेवानिवृत्त कराये जाने का निर्णय लेने के क्रम में उसके पूर्ण सेवा इतिहास को संज्ञान में लिया जाना चाहिए।
(घ) सरकारी सेवक के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन/चारित्री में अंकित किसी प्रतिकूल प्रविष्टि को भी ऐसा निर्णय लिये जाने के क्रम में विचार में लेते हुए उसे उपयुक्त अधिमानता (Weightage) दिया जाना चाहिए।
(ङ) यहाँ तक की असंसूचित प्रतिकूल प्रविष्टि को भी विचार में लाया जा सकता है। (च) वैसे मामलों, जिनमें विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाना अपेक्षित हो, में विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने से बचने के लिए इस प्रावधान के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश निर्गत नहीं किया जाना चाहिए।
(छ) यदि किसी सरकारी सेवक के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन/चारित्री में अंकित प्रतिकूल प्रविष्टि के बावजूद भी उसे प्रोन्नति दी गयी हो, तो यह तथ्य सरकारी सेवक के पक्ष में जायेगा।
(ज) अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रावधान को दंडात्मक/दमनात्मक प्रावधान के रूप में उपयोग में नहीं लाना चाहिए।
5. उपर्युक्त कंडिका-3 में वर्णित प्रावधानों को लागू करने हेतु सभी विभागों द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जाय।
आदेश से, गुफरान अहमद, सरकार के उप सचिव।.
———— [ध(cid:3)¡क(cid:6) स०चव(cid:12)लय म१(cid:17)ण(cid:12)लय(cid:6) ॢबह(cid:12)र(cid:6) पटन(cid:12) ह(cid:12)र(cid:12) (cid:27)क(cid:12)०शत eव(cid:31) म१ॢ(cid:17)त? ॢबह(cid:12)र गजट #[स(cid:12)ध(cid:12)रण$ 664%571+10%ड(cid:3)(ट)(प(cid:3)(? Website: http://egazette.bih.nic.in