(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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(स(cid:27)(cid:25) पटन(cid:4) (cid:29)11) पटन(cid:4)(cid:30) श१ व(cid:4)र(cid:30) 16 अ(cid:7)तूबर 2020 सं॰ 2/आरोप-01-42/2014-6374/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 30 जून 2020
श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1148/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, बक्सर सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, शेरघाटी, गया के विरूद्ध भारतीय खाद्य निगम में 36,710.13 M.T. CMR जमा नहीं करने, रबी विपणन वर्ष 2012-13 में क्रय किये गये अधिप्राप्ति गेंहूँ में से 17,074.53 M.T. गेंहूँ भारतीय खाद्य निगम में जमा नहीं कराने, अपने दायित्वों का सम्यक् निर्वहन नहीं कर राजपुर प्रखंड क्रय केन्द्र के 1279.36 क्विंटल धान को सड़ाने तथा 4,960 क्विंटल धान को डैमेज कर निगम को आर्थिक क्षति पहुँचाने संबंधी प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल सप्लाईज कारपोरेशन लि0, पटना द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' एवं दो पूरक आरोप-पत्र साक्ष्य सहित प्राप्त हुआ।
श्री कुमार से मूल आरोप-पत्र एवं पूरक आरोप-पत्रों में अंतर्विष्ट आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर उनके द्वारा दिनांक 20.08.2014, 28.08.2014 एवं 24.07.2015 को अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री कुमार के उक्त स्पष्टीकरण पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल सप्लाईज कारपोरेशन लि0, पटना के ज्ञापांक 5417 दिनांक 06.05.2016 द्वारा द्वितीय पूरक आरोप-पत्र के स्पष्टीकरण पर मंतव्य प्राप्त हुआ जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं प्रतिवेदित किया गया।
2. श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं प्रबंध निदेषक, बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल सप्लाईज कारपोरेषन लि0, पटना के मंतव्य पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के विरूद्ध आरोपों की वृहद जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानोंं के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10202 दिनांक 26.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना (सम्प्रति मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना) को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1(cid:18) [Çत३बर 2(cid:23)2(cid:23) 3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 232 दिनांक 27.02.2018 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने निष्कर्ष में श्री कुमार के विरूद्ध गठित कुल-5 आरोपों में से आरोप संख्या-01, 05 को प्रमाणित एवं आरोप संख्या-02, 04 को अंशतः प्रमाणित तथा आरोप संख्या 03 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया, संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष निम्नवत् है :-
''वर्ष 2011-12 में बक्सर जिले में सी0एम0आर0 जमा करने की तिथि 30.09.2012 निर्धारित थी, जिसका अवधि विस्तार 30.04.2013 तक किया गया। यद्यपि कुछ अवधि इनके पूर्ववर्ती पदाधिकारी की थी, किन्तु आरोपित पदाधिकारी का कार्यकाल उस दौरान काफी था। दिनांक 01.04.2013 को जिला पदाधिकारी, बक्सर की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्पष्ट रूप से निदेष दिया गया था कि दिनांक 30.04.2013 तक बकाया शत-प्रतिषत सी0एम0आर0 भारतीय खाद्य निगम में जमा करने हेतु युद्ध स्तर पर कार्य किया जाय और किसी भी परिस्थिति में दिनांक 30.04.2013 तक किसी स्तर पर षिथिलता को जवाबदेही संबंधित पदाधिकारी/कर्मी/मिलर की मानी जायेगी। तदनुसार उनके विरूद्ध नियमानुकूल आवष्यक कार्रवाई की जायेगी। सी0एम0आर0 जमा करने की अवधि का विस्तार दिनांक 30.04.2013 तक कर दिये जाने के कारण आरोपित पदाधिकारी अपने योगदान के 9 महीने के बाद तक इस कार्य हेतु समय पाये थे। ऐसी परिस्थिति में बिहार राज्य खाद्य निगम को करोड़ों रूपये की क्षति के लिए वह अवष्य जिम्मेदार है। अतः आराअतः आराअतः आराअतः आरोप सं0-(1) प्रमाणित ेप सं0-(1) प्रमाणित ेप सं0-(1) प्रमाणित ेप सं0-(1) प्रमाणित होता है।होता है।होता है।होता है।
आरोपित पदाधिकारी द्वारा स्वीकार किया गया है कि विभिन्न क्रय केन्द्रों के प्रभारियों द्वारा 50,292.50 क्विंटल गेहूँ का गबन किया गया, किन्तु आरोपित पदाधिकारी ने सिर्फ दो क्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया था, जिसमें अधिप्राप्ति गेहूँ की मात्रा शून्य पाई गयी थी। यदि आरोपित पदाधिकारी द्वारा सभी क्रय केन्द्रों का निरीक्षण समय-समय पर किया गया होता तो उक्त गेहूँ की मात्रा का गबन नहीं होता। इतना ही नहीं आरोपित पदाधिकारी ने गबन करने वाले विभिन्न क्रय केन्द्रों के प्रभारियों पर न तो प्राथमिकी दर्ज की और न ही उनके विरूद्ध नीलाम पत्र वाद दायर किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा यह भी स्वीकार किया गया है कि कम गुणवाा होने के कारण गेहूँ की नीलामी की गयी थी। यदि उक्त गेहूँ समय पर भारतीय खाद्य निगम को पहुंचायी गयी होती तो निगम को आर्थिक हानि नहीं होती। उक्त गेहूँ की नीलामी समाहरणालय सभाकक्ष में आरोपित पदाधिकारी की देख-रेख में हुई थी। इसलिए उनके पूर्ववर्ती पदाधिकारी के साथ-साथ श्री कुमार भी निगम को हुई क्षति के लिए जिम्मेदार है। अतः यह आरोप अंषतः प्रमाणित होता है। मार्च, 2013 में दो बार अवधि विस्तार के बाद भी आरोपित पदाधिकारी ने 169.55 मे0टन चावल का उठाव भारतीय खाद्य निगम से नहीं किया और वह व्ययगत हो गया, जबकि उसकी राषि पूर्व मे निगम मे जमा थी। इस प्रकार उठाव नहीं करने से निगम को काफी नुकसान हुआ। आरोपित पदाधिकारी ने निगम के श्रमिकों की हड़ताल, विमुक्ति आदेष में विलम्ब, भौतिक सत्यापन आदि कारणों से फरवरी, 2013 के विरूद्ध 80 प्रतिषत खाद्यान्न व्ययगत होने की बात स्वीकार की है। दो बार अवधि विस्तार करने के बावजूद उठाव न होने से आरोपित पदाधिकारी की कार्यदक्षता पर भी सवाल उठता है। ऐसी परिस्थिति में यह आरोप आंषिक रूप से प्रमाणित होता है।यह आरोप आंषिक रूप से प्रमाणित होता है।यह आरोप आंषिक रूप से प्रमाणित होता है।यह आरोप आंषिक रूप से प्रमाणित होता है।
प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि दिसम्बर, 2012 में दिये गये आवंटन और जमा की गयी राषि के विरूद्ध आरोपित पदाधिकारी ने शत प्रतिषत release order का उठाव नहीं किया, जिससे गरीब लाभुकों को उक्त खाद्यान्न नहीं मिला। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि निगम में चावल का भंडारण शून्य था इसलिए शत-प्रतिषत उठाव नहीं हुआ। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया कि पूरे महीने चावल का भंडारण भारतीय खाद्य निगम, बक्सर में शून्य नहीं था। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बक्सर जिले में कई समस्याएँ थी, किन्तु यदि कुछ समस्याओं का मान भी लिया जाय तो भी 1235.60 मे0टन खाद्यान्न का उठाव न होना और लाभुकों को उक्त खाद्यान्न का वितरण न करना यह सिद्ध करता है कि आरोपित पदाधिकारी अपने कार्य के प्रति सजग और र्काव्यनिष्ठ नहीं थे। अतः यह आरोप प्रमाणित होता है।अतः यह आरोप प्रमाणित होता है।अतः यह आरोप प्रमाणित होता है।अतः यह आरोप प्रमाणित होता है।''
4. विभागीय पत्रांक 3671 दिनांक 16.03.2018 एवं स्मार पत्रांक 1817 दिनांक 08.02.2019 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध प्रमाणित एवं अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा दिनांक 27.02.2019 को बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
5. श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनसे प्राप्त बचाव अभ्यावेदन एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री कुमार द्वारा भारतीय खाद्य निगम में 36,710.13 मे0टन सी0एम0आर0 जमा नहीं करने, रबी विपणन वर्ष 2012-13 में क्रय किए गए अधिप्राप्ति गेहूँ में से 17,074.53 मे0टन गेहूँ भारतीय खाद्य निगम में जमा नहीं करने, भारतीय खाद्य निगम को सी0एम0आर0/गेहूँ का जमा किये गये विपत्र की राषि प्राप्त नहीं करने, आवंटन के विरूद्ध खाद्यानों का उठाव नहीं करने तथा टी0पी0डी0एस0 के अंतर्गत आर0ओ0 का क्रय नहीं करने के कारण निगम की आर्थिक हानि हुई।
अगर श्री कुमार द्वारा अपने र्काव्यों का निर्वहन समुचित रूप से किया जाता तथा सभी क्रय केन्द्रों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता तो अधिप्राप्ति गेहूँ का गबन नहीं होता एवं सरकारी राजस्व की हानि नहीं होती। साथ ही जिन क्रय केन्द्र प्रभारी द्वारा गेहूँ का गबन किया गया, उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाती तथा राशि वसूली की कार्रवाई की जाती, तो सरकार को अर्थिक क्षति नहीं होती।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1(cid:18) [Çत३बर 2(cid:23)2(cid:23) 6. उक्त के आलोक में श्री कुमार का आचरण बिहार सरकारी सेवक के अनुरूप नहीं पाये जाने तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 73 के संगत प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के बचाव अभ्यावेदन को अस्वी—त किया गया। इनके के विरूद्ध प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों की प्र—ति, तथ्य एवं गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 के संगत प्रावधानों तहत् ''अनिवार्य सेवानिवृाि'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
7. विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 16312 दिनांक 02.12.2019 एवं स्मार पत्रांक 3113 दिनांक 28.02.2020 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की मांग की गई। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक 194/लो0से0आ0 दिनांक 20.05.2020 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी।
8. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्ष से सहमत होते हुए अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1148/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक राज्य खाद्य निगम, बक्सर सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, शेरघाटी, गया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एंव अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत् ''अनिवार्य सेवानिवृाि''''अनिवार्य सेवानिवृाि''''अनिवार्य सेवानिवृाि''''अनिवार्य सेवानिवृाि'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1148/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक राज्य खाद्य निगम, बक्सर सम्प्रति अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, शेरघाटी, गया एवं सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से, हहहहशिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद,शिवमहादेव प्रसाद, सरकार सरकार सरकार सरकार के अवर सचिव।के अवर सचिव।के अवर सचिव।के अवर सचिव।
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