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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 21 October 2020

Published 21 October 2020

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2020-10-21.37
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-13 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 14-15 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i"B

i"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA ---

पूरक

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पूरक-क 16-312 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। —————

निर्वाचन विभाग

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अधिसूचनाएं

14 अक्तूबर 2020

सं0 ई2-2-31/2016-45--बिहार निर्वाचन सेवा के निम्न अवर निर्वाचन पदाधिकारियों को कार्यहित में उनके वर्तमान पदस्थापन

क्र॰ सं॰ नाम गृह जिला वर्त्तमान पदस्थापन स्थल/कार्यालय प्रस्तावित पदस्थापन स्थल/कार्यालय
1 2 3 4 5
1. श्री कपिल शर्मा लखनउ (उ0प्र0) सोनपुर अनुमंडल, वैषाली अवर निर्वाचन पदाधिकारी, मुख्यालय
2. श्री एखलाक अंसारी कैमूर मुख्यालय अवर निर्वाचन पदाधिकारी, सोनपुर अनुमंडल, वैषाली

सुनिष्ति करेंगे।

3. इस संबंध में पूर्व निर्गत प्रतिनियुक्ति संबंधी अधिसूचना इस अधिसूचना के निर्गत की तिथि से रद्‌द समझे जायेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव।

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15 अक्तूबर 2020

सं0 ई2-2-47/2014-49--श्री राजेन्द्र कुमार कर्मषील, तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी, जहानाबाद संप्रति दिनांक 31.10.2019 को सेवानिवृत, के विरूद्ध जिलाधिकारी, जहानाबाद का पत्रांक 1031/गो॰ दिनांक 27.06.2016 द्वारा निम्नांकित आरोपों के संबंध मे विहित प्रपत्र में आरोप पत्र (प्रपत्र-क) गठित कर साक्ष्य सहित अनुषंसा उपलब्ध करायी गयीः-

I. वित्तीय अनियमितता-बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2015 के अवसर पर सामग्रियों की आपूर्ति L1 आपूर्तिकर्त्ता से प्राप्त न कर अपने चहेते आपूर्तिकर्त्ता से प्राप्त की गयी।

II. स्वेच्छाचारिता एवं प्राकृतिक न्याय का अनुपालन न करना-अग्रिम के भुगतान के क्रम में कोई मापदंड नहीं अपनाना तथा मनमाने ढ़ंग से अपने चहेते आपूर्तिकर्त्ता को अधिक अग्रिम का भुगतान किया जाना।

III. स्वेच्छाचारिता, वरीय पदाधिकारी के आदेष की अवहेलना, अनुषासनहीनता एवं कार्य के प्रति लापरवाही-अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित, निर्वाचन से संबंधित VC से अनुपस्थित।

IV. स्वेच्छाचारिता, घोर लापरवाही एवं अनुषासनहीनता।

2. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3589 दिनांक 20.09.2016 द्वारा श्री राजेन्द्र कुमार कर्मषील, तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी, जहानाबाद संप्रति सेवानिवृत, के विरूद्ध लगे उक्त आरोपों के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए प्रमंडलीय आयुक्त, मगध प्रमंडल गया को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. श्री कर्मषील के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का अंतिम रूप से निश्पादित नहीं होने तथा श्री कर्मषील के सेवानिवृति होने के कारण, संचालित विभागीय कार्यवाही में वित्तीय अनियमितता सम्मिलित रहने के फलस्वरूप विभागीय आदेष संख्या-207 दिनांक 26.11.2019 द्वारा बिहार पेंषन नियमावली के नियम-43(बी) में संपरिवर्त्तित किया गया।

4. संचालन पदाधिकारी-सह-प्रमंडलीय आयुक्त, मगध प्रमंडल गया के पत्रांक 2300 दिनांक 21.10.2019 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के पष्चात्‌ उपलब्ध कराया गया जांच प्रतिवेदन/मंतव्य के मुख्य अंष निम्नवत्‌ है-

i. बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2015 के अवसर पर श्री कर्मषील के द्वारा L1 फर्मों से सामग्री की आपूर्ति प्राप्त न कर L1 से अधिक दर पर First inning express, Patna से आपूर्ति प्राप्त की गयी। निर्वाचन कार्य की महत्ता एवं उसकी तात्कालिकता महत्वपूर्ण विशय है, परन्तु किसी भी परिस्थिति में वित्तीय नियमों एवं निर्धारित प्रावधानो का उल्लंधन नहीं किया जा सकता है। L1 आपूर्तिकर्त्ता से सामग्री, निविदा के शर्त्त के अनुसार ससमय नहीं प्राप्त होने की स्थिति में, श्री कर्मषील को अपने नियंत्री पदाधिकारी (जिला पदाधिकारी) के संज्ञान में मामला लाना चाहिए था और उनके आवष्यक निदेष प्राप्त होने के उपरान्त ही अग्रेतर कार्रवाई करनी चाहिए थी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा जिला पदाधिकारी के3 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 संज्ञान में मामला लाने का कोई साक्ष्य समर्पित नही किया गया है। इस प्रकार श्री कर्मषील द्वारा वित्तीय अनुषासन, प्रावधान एवं नियम के विरूद्ध L1 से आपूर्ति न लेकर First inning express से अधिक दर पर आपूर्ति ली गयी है। इस प्रकार प्रथम आरोप को प्रमाणित पाया गया। ii. आरोपी पदाधिकारी का यह दायित्व था कि वें अग्रिम भुगतान में पारदर्षिता एवं एकरूपता रखे, जिसका खयाल उनके द्वारा नहीं रखा गया। इनके द्वारा अग्रिम भुगतान के क्रम में First inning express के प्रति अत्याधिक झुकाव रखा गया। स्पश्टतः आरोपित पदाधिकारी के द्वारा बेतरतीब ढ़ंग से अग्रिम भुगतान हेतु प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रकार श्री कर्मषील पर लगे दूसरे आरोप को प्रमाणित पाया गया।

iii. बिना सक्षम पदाधिकारी के अनुमति के अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, दिनांक 15.10.2014 को विडियों कॉन्फ्रेसिंग से अनुपस्थित रहना, दिनांक 18.10.2014 को विडियों कॉन्फ्रेसिंग से अनुपस्थित रहने और निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण विशय में लापरवाही बरतने के संबंध में संचालन पदाधिकारी ने प्रतिवेदित किया है कि अपर समाहर्त्ता द्वारा अपने पत्रांक 699 दिनांक 14.05.2014 से प्रतिवेदित किया है कि दिनांक 13. 05.2014 को उप निर्वाचन पदाधिकारी 5ः00 बजे के बाद फार्म 18 पर मतगणना अभिकर्त्ता का फोटों सटा आवेदन का पहचान पत्र जिसपर बिना उप निर्वाचन पदाधिकारी का हस्ताक्षर के तथा बिना किसी प्रकार के मिलान किये अधोहस्ताक्षरी के समक्ष निर्वाचन पदाधिकारी का मुहर लगाकर प्रस्तुत किया गया था तथा हस्ताक्षर करने हेतु कहा गया, जिसके क्रम में अपर समाहर्त्ता द्वारा यह जानना चाहा गया कि कितने मतगणना अभिकर्त्ता को पहचान पत्र निर्गत किया जाना है तो वें यह बतलाने में असमर्थ रहे। अपर समाहर्त्ता द्वारा इसके पष्चात्‌ निर्वाचन कार्यालय जाकर बात करने का प्रयास किया गया तथा उन्हें हस्ताक्षर करने हेतु कहा गया, तो उन्होंने स्पश्ट शब्दों में कहा कि मैं कोई सहायक नहीं हूँ कि उनका मुहर के पास किया जाये। मैं उप निर्वाचन पदाधिकारी की हैसियत से अपना कार्य करता हूँ। उनके द्वारा यह भी कहा गया कि आपको जहाँ जाना है वहाँ जा सकते है। उप निर्वाचन पदाधिकारी का उपरोक्त कार्यकलाप उनके स्वेच्छाचारिता, उच्चाधिकारी के आदेष की अवहेलना एवं कर्त्तव्यहीनता का घोतक है। इस प्रकार तीसरे आरोप को भी प्रमाणित पाया गया।

iv. अनाधिकृत रूप से मुख्यालय से बाहर रहने के संबंध में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य है कि आरोपित पदाधिकारी प्रायः बिना जिला पदाधिकारी से अनुमति लिये अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। इनके द्वारा बचाव अभिकथन में किसी प्रकार का प्रमाणिक साक्ष्य यथा पूर्वानुमति, चिकित्सीय प्रमाण-पत्र आदि संलग्न नहीं किया गया है, बल्कि मनगढ़ंत बहानेवाजी की गयी है, जो स्वीकार करने योग्य नहीं है। वर्णित स्थिति में संचालन पदाधिकारी द्वारा चौथे आरोप को भी प्रमाणित पाया गया।

5. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त मगध प्रमंडल, गया का जांच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 7973 दिनांक 26.11. 2019 द्वारा जांच प्रतिवेदन में उल्लेखित बिन्दुओं के संबंध में श्री कर्मषील से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

6. श्री कर्मषील द्वारा दिनांक 24.01.2020 को द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित अपनी सफाई समर्पित किया गया, जिसपर विभागीय पत्रांक 777 दिनांक 03.03.2020 द्वारा जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से मंतव्य सहित प्रतिवेदन की मांग की गयी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से उनके पत्रांक 235 दिनांक 12.06.2020 द्वारा श्री कर्मषील के प्रतिउत्तर पर मंतव्य उपलब्ध कराया गया।

7. श्री राजेन्द्र कुमार कर्मषील, तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी, जहानाबाद संप्रति सेवानिवृत, के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन, श्री कर्मषील से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा संबंधी सफाई तथा जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के मंतव्य की विभाग द्वारा समीक्षा की गयी।

विभागीय समीक्षा के क्रम में यह तथ्य सामने आया कि आरोपित पदाधिकारी (श्री कर्मषील) द्वारा बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2015 के अवसर पर चुनाव सामग्रियों का क्रय, L1 आपूर्तिकर्त्ता से प्राप्त न कर दूसरे चहेते आपूर्तिकर्त्ता से प्राप्त की गयी, जिसकी स्वीकारोक्ति आरोपित पदाधिकारी द्वारा की गयी, जिसके फलस्वरूप सरकारी राषि की क्षति का मामला स्थापित हुआ है एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा अग्रिम दिये जाने के संबंध में प्रतिउत्तर में अंकित किया कि नियमावली में प्रावधान नही होने के फलस्वरूप उनके द्वारा स्वविवेक के आधार पर निर्णय लिया गया, जो संतोशजनक नहीं है। इसी प्रकार आरोपी पदाधिकारी द्वारा आपूर्तिकर्त्ता/सेवा प्रदाता को अग्रिम दिये जाने के क्रम में पारदर्षिता तथा एकरूपता का खयाल नहीं रखा गया तथा मनमाने ढ़ंग से अपने चहेते आपूर्तिकर्त्ता/सेवा प्रदाता को अग्रिम के रूप में अधिक राषि देने का कार्य किया गया। तद्‌नुसार श्री कर्मषील द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के क्रम में दिये गये उनकी सफाई को असंतोशप्रद पाते हुए अनुषासनिक प्राधिकार स्तर पर इसे अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।

8. श्री राजेन्द्र कुमार कर्मषील, तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी, जहानाबाद संप्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में सफाई को समीक्षोपरान्त अस्वीकृत किये जाने की स्थिति में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा उनके विरूद्ध बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत ''5% पेंषन की राषि 5 वर्शों के लिए कटौती (वापस) करने'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। 9. अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा कंडिका-8 में वर्णित निर्णय पर विभागीय पत्रांक 2585 दिनांक 18.08.2020 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति संसूचित करने का अनुरोध किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक 1635 दिनांक 01.10.2020 द्वारा आयोग का दिनांक 29.09.2020 के पूर्ण पीठ के बैठक में उक्त विभागीय निर्णय पर सहमति व्यक्त करने की सूचना दी गयी।

10. अतः उक्त विभागीय निर्णय के आलोक में श्री राजेन्द्र कुमार कर्मषील, तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी, जहानाबाद संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध, बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत ''5% पेंषन की राषि 5 वर्शों के लिए कटौती (वापस) करने'' का दंड अधिरोपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव।4 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 पुलिस उप-महानिरीक्षक का कार्यालय, बेगूसराय क्षेत्र, बेगूसराय

------- CHARGE REPORT (प्रभार प्रतिवेदन) 6 अक्तूबर 2020 सं0 526/सा0शा0--अधोहस्ताक्षरी मैं कुन्दन कुमार सिंह, पुलिस उपाधीक्षक(मुख्यालय), बेगूसराय दिनांक-27.08. 2020 के पूर्वाह्‌न में पुलिस उपाधीक्षक(प्रशासन), क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षक कार्यालय, बेगूसराय का स्वप्रभार ग्रहण किया। इस संदर्भ में सरकार के अवर सचिव, गृह विभाग(आरक्षी शाखा), बिहार, पटना के स्थानान्तरण आदेश ज्ञापांक सं0-2/पी0-01-20/2016 गृ0आ0-5335, दिनांक-25.08.2020 एवं पुलिस मुख्यालय, बिहार, पटना का गत्यादेश ज्ञापांक-1484/एक्स0पी0, दिनांक-25.08.2020 द्रष्टव्य है।

(कुन्दन कुमार सिंह) भारग्राही पदाधिकारी।

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, पुलिस उप-महानिरीक्षक, बेगूसराय क्षेत्र, बेगूसराय।

------ सं0 09/सैप-10-03/2019 गृ0आ0--7016 गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ------

प्रेषक, गिरीश मोहन ठाकुर, सरकार के अवर सचिव। सेवा में, महालेखाकार (ले0 एवं हक0), बिहार, पटना।

पटना, दिनांक 7 अक्तूबर 2020 विषय :- बिहार पुलिस के अन्तर्गत गठित स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (Special Auxiliary Police) में कार्यरत भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सैनिकों की अनुबंध अवधि वित्तीय वर्ष 2016-2017 से 2020-2021 तक अर्थात कुल 05 वर्षाें के लिये विस्तारित करने के संबंध में।

आदेश :- स्वीकृत।

बिहार राज्य में उग्रवादी/हिंसात्मक गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण रखने एवं विधि व्यवस्था के संधारण हेतु गृह (आरक्षी) विभाग के संकल्प संख्या-3379, दिनांक-27.03.2006 द्वारा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त 5000 सिपाहियों को अनुबंध पर नियुक्त कर एक वर्ष के लिए रखने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसका गठन स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (Special Auxiliary Police) के रूप में किया गया था तथा पुलिस अधिसूचना संख्या-5268, दिनांक-16.05.2006 द्वारा इसे बिहार पुलिस का अंग घोषित किया गया। तदोपरांत राज्य सरकार द्वारा एक वर्ष के लिए अनुबंध पर बिहार में स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (SAP) का गठन करने तथा आवश्यकतानुसार इसकी अवधि बढ़ाये जाने का आदेश संसूचित किया गया था। 2. गृह (आरक्षी) विभाग के संकल्प संख्या-7003, दिनांक-11.07.2007 के द्वारा पूर्व में गठित 5000 सैप बल में वृद्धि करते हुए कुल 12000 सैप बल को (11500 सैप जवान, 100 जे0सी0ओ0 एवं 400 रसोईयों) वित्तीय वर्ष 2007-08 में 09 माह के लिए अनुबंध के आधार पर नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया।

3. गृह (आरक्षी) विभाग के संकल्प संख्या-4170, दिनांक-14.05.2008 द्वारा वर्ष 2008-09 के लिए सैप बलों को पुराने अनुबंधों की शर्ताें एवं देय भुगतान के आधार पर नवीन अनुबंध कर पुनः विस्तारित किया गया। साथ ही जुनियर कमिशंड ऑफिसर के लिए आयु सीमा बढ़ाकर 50 वर्ष किया गया।

4. गृह (आरक्षी) विभाग के संकल्प संख्या-6739, दिनांक-14.10.2009 द्वारा अक्टूबर 2009 से मार्च 2010 तक के लिए स्वीकृत सैप बल (12000 सैप जवान, 100 जे0सी0ओ0 एवं 400 रसोईयों) के अतिरिक्त 5000 सैप बल (4800 सैप जवान, 50 जे0सी0ओ0 एवं 150 रसोईयों) को 06 महीने तक अनुबंध पर रखने की स्वीकृति दी गई, जिसके अनुसार सैप का कुल स्वीकृत बल 17000 (16300 सैप जवान, 150 जे0सी0ओ0 एवं 550 रसोईयों) हो गया।

5. गृह (आरक्षी) विभाग के संकल्प संख्या-3437, दिनांक-27.04.2010 द्वारा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैप जवानों का पुराने अनुबंधों की शर्ताें एवं देय भुगतान के आधार पर नवीन अनुबंध कर वर्ष 2010-11 के लिए नियोजित किया गया। साथ ही सैप बल के जवानों एवं जे0सी0ओ0 के चयन हेतु अधिकतम आयु सीमा क्रमशः 47 वर्ष एवं 52 वर्ष निर्धारित किया गया है।5 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 6. गृह (आरक्षी) विभाग के संकल्प संख्या-8700, दिनांक-30.11.2011 द्वारा सैप के स्वीकृत्त 17000 बल (16300 सैप जवान, 150 जे0सी0ओ0 एवं 550 रसोईयों) को वित्तीय वर्ष 2011-12 से 05 (पांच) वर्षों तक अर्थात 2015-16 तक अनुबंध पर रखने की स्वीकृति दी गयी थी।

7. सैप के गठन से विगत वर्षों में बिहार पुलिस की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि एवं पुलिस बल के मनोबल में सुधार हुआ है। सैप के गठन से उग्रवादियों एवं संगठित अपराधियों के विरूद्ध छापेमारियाँ तेज हुई है। सैप के गठन के पश्चात्‌ विगत वर्ष में अपराध नियंत्रण, उग्रवाद निरोधक एवं विधि-व्यवस्था संधारण में अपेक्षित सहायता मिली है।

8. सैप के कुल स्वीकृत बल 17000 के विरूद्ध वर्ष 2016-2017 से 2019-2020 तक के चार सालों में कार्यरत बल की संख्या लगातार घटती रही है। वर्ष 2019-2020 में कुल कार्यरत बल 5205 है, जिसमें 53 जे0सी0ओ0, 5087 सैप जवान एवं 65 रसोईया है।

9. अतः बिहार पुलिस के अन्तर्गत गठित स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (Special Auxiliary Police) में कार्यरत भारतीय सेना के सेवानिवृत सैनिकों के लिये कुल स्वीकृत 17000 बल की अनुबंध अवधि वित्तीय वर्ष 2016-2017 से 2020-2021 तक अर्थात कुल 05 वर्षाें के लिये विस्तारित करने की स्वीकृत्ति प्रदान की जाती है।

10. पुलिस मुख्यालय द्वारा वर्ष 2016-2017 से 2019-2020 तक के चार सालों में स्वीकृत बल के विरूद्ध कार्यरत सैप बल की उपलब्ध कराई गई व्यय विवरणी (संलग्न), के अनुसार कुल व्ययित राशि रूपये-4,68,30,43,800/-(चार अरब अरसठ करोड़ तीस लाख तैतालिस हजार आठ सौ रूपये मात्र) है, जिसकी घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है। 11. आगामी वित्तीय वर्ष 2020-2021 हेतु कुल स्वीकृत बल 17000 (16300 सैप जवान, 150 जे0सी0ओ0 एवं 550 रसोईयों) पर अनुमानित वार्षिक व्यय रू0-3,82,26,36,000/- (तीन अरब ब्यासी करोड़ छब्बीस लाख छत्तीस हजार रूपये मात्र) की स्वीकृति प्रदान की जाती है (व्यय विवरणी संलग्न), जो व्यय मांग संख्या-22 मुख्य शीर्ष ''2055-पुलिस, उपमुख्य शीर्ष-00, लघु शीर्ष-109-जिला पुलिस, उपशीर्ष-0005-स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस हेतु, विषय शीर्ष-0005-28-02-संविदा सेवाऐं एवं विपत्र कोड संख्या-22-2055001090005 के अतंर्गत विकलनीय होगा।

12. इस राशि पर महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, बिहार, पटना का सीधा नियंत्रण होगा। राशि की निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, पुलिस उप-महानिरीक्षक (प्रशासन), बिहार, पटना होंगे तथा जिला स्तर पर संबंधित जिला के पुलिस अधीक्षक होंगे। राशि की निकासी सचिवालय कोषागार, सिंचाई भवन, पटना से की जायेगी एवं जिला स्तर पर संबंधित जिला के कोषागार से की जायेगी।

13. उपर्युक्त में वित्त विभाग की सहमति एवं मंत्रिपरिषद्‌ की स्वीकृति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गिरीश मोहन ठाकुर, अवर सचिव।

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अधिसूचना

1 अक्तूबर 2020

सं0 4/वि0-1-10136/2005, गृ0 आ0-6569--लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28 (ए) के अन्तर्गत राज्य सरकार, बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2020 के लिए पुलिस महानिदेशक, बिहार तथा संबंधित क्षेत्र में पदस्थापित भारतीय पुलिस सेवा/बिहार पुलिस सेवा के सभी पदाधिकारियों/आरक्षियों एवं निर्वाचन कार्य हेतु अधियाचित अन्य सभी पुलिस पदाधिकारियों/आरक्षियों को नामित करती है।

2. नामित पुलिस पदाधिकारी, बिहार विधान सभा आम निर्वाचन 2020 के निर्वाचन अधिसूचित होने की तिथि से प्रारंभ होकर उक्त निर्वाचन के परिणाम के घोषित किये जाने की तारीख तक भारत निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्त समझे जायेंगे और ऐसे सभी पदाधिकारी/आरक्षी उस अवधि के दौरान भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, अधीक्षण और अनुशासन के अधीन होंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुनील कुमार, विशेष सचिव।

------- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचनाएं 9 अक्तूबर 2020

सं0 2/बि०व०से०(स्था०)-03/2020-2896/प०व०ज०प०,--श्री अनिल कुमार झा, बि०व०से०, सेवानिवृत सहायक वन संरक्षक, कार्यालय-वन प्रमंंडल पदाधिकारी, भोजपुर वन प्रमंडल, आरा द्वारा स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आलोक में दिनांक-06.01.2020 से 28.01.2020 तक 23 दिन तथा दिनांक-05.02.2020 से 07.04.2020 तक 63 दिन, कुल- 86 दिन तक उपभोग किये गये अवकाष को बिहार सेवा संहिता के नियम-232 एवं नियम-234 में अंकित प्रावधानों के तहत कुल-86 दिन के रूपातंरित अवकाष के समतुल्य 172 दिनों के अर्द्धवैतनिक अवकाष की स्वी—ति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।6 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 1 अक्तूबर 2020 सं0 2/बि०व०से०(स्था०)-10/2020-2809/प०व०ज०प०--बिहार वन सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों द्वारा विभागीय परीक्षा से विमुक्ति हेतु समर्पित अभ्यावेदन के आलोक में कार्मिक एवं प्रषासनिक सुधार विभाग सम्प्रति सामान्य प्रषासन विभाग के पत्रांक 4674, दिनांक 15.05.1992 तथा अधिसूचना संख्या-3127, दिनांक-06.03.2018 के प्रावधानों के तहत उनके नाम के सामने अंकित आवेदन की तिथि से विभागीय परीक्षा से विमुक्ति का आदेष दिया जाता है। क्र0 पदाधिकारी का नाम/पदस्थापन आवेदन की तिथि

क्र0 पदाधिकारी का नाम/पदस्थापन आवेदन की तिथि
1 श्री विमल कुमार, निदेषक-सह-वन प्रमंडल पदाधिकारी, राज्य वन प्रषिक्षण संस्थान, गया। 29.06.2020
2 श्री अम्बिका शरण सिन्हा, सहायक वन संरक्षक, मुंगेर वन प्रमंडल, मुंगेर। 30.06.2020
3 मे० जुनैद अली, सहायक वन संरक्षक, अररिया वन प्रमंडल, अररिया। 30.06.2020
4 श्री राम नरेष झा, सहायक वन संरक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी, अररिया। 30.06.2020
5 श्री नरेष प्रसाद, सहायक वन संरक्षक, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष, प्रमंडल-1 बेतिया। 11.09.2020

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

------ गृह विभाग (विषेष शाखा) ------- आदेश 12 अक्तूबर 2020 सं0 एल/एच॰जी॰-14-06/2018-5324--बिहार गृह रक्षा वाहिनी में जिला समादेष्टा के रूप में पदस्थापित निम्नांकित पदाधिकारी की सेवा बिहार पुलिस मैनुअल के नियम 648(क) के आलोक में जिला समादेष्टा (पुलिस उपाधीक्षक स्तर) कोटि में उनके नाम के सामने अंकित तिथि से सम्पुष्ट की जाती हैः-

क्रम सं॰ नाम/पदनाम सम्पुष्टि की तिथि
1 श्री मनोज कुमार नट, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, अररिया 16.11.2017

आदेश से, विमलेश कुमार झा, अपर सचिव।

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लघु जल संसाधन विभाग

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प्रभार प्रतिवेदन

20 अगस्त 2020

सं0 3234--अद्योहस्ताक्षरी मैं, अमृत लाल मीणा,भा0प्र0से0(1989), अपर मुख्य सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना द्वारा; श्री संतोष कुमार मल्ल,भा0प्र0से0(1997) को आज दिनांक-20.08.2020 के पूर्वाह्‌न/अपराह्‌न में सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का गृहित प्रभार सैांपा ।

(सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/पी0-1001/2020(खण्ड)-सा0प्र0-7165/ पटना-15, दिनांक-19 अगस्त,2020 द्रष्टव्य)

(अमृत लाल मीणा)

(संतोष कुमार मल्ल) भारमुक्त पदाधिकारी।

भारग्राही पदाधिकारी।

आदेश से,

प्रवीण कुमार झा, संयुक्त सचिव।7 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

सामान्य प्रशासन विभाग

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आदेष

6 अक्तूबर 2020

सं0 6/आ.-376/2006(खण्ड)-सा.प्र.-9306--पटना में सितम्बर 2019 में हुए दीर्घकालीन जलजमाव के कारणों की जाँच हेतु गठित उच्च स्तरीय जाँच समिति के प्रतिवेदन में श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह, भा.प्र.से. (2007), तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बुडको के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में श्री सिंह को अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1969 के नियम-3 के उपनियम-1 में निहित प्रावधान के अंतर्गत विभागीय आदेश ज्ञापांक-2369 दिनांक 14.02. 2020 के द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया था। 2. इस मामले में श्री सिंह के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1969 के नियमों के अधीन आरोप पत्र गठित कर विभागीय ज्ञापांक संख्या- 4413 दिनांक 29.04.2020 के द्वारा अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ की गयी है। श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों पर उनसे बचाव बयान प्राप्त हुआ है। 3. श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह, भा.प्र.से. (2007) के विरूद्ध संचालित इस विभागीय कार्यवाही में उनके द्वारा बचाव बयान समर्पित करने और इनके निलंबन की अवधि को सात माह बीत जाने की स्थिति में राज्य निलंबन समीक्षा समिति के द्वारा उन्हें निलंबन से मुक्त करने की अनुशंसा की गयी है। राज्य सरकार द्वारा इस पर सम्यक्‌ विचारोपरांत उन्हें निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। 4. इसके आलोक में श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह, भा.प्र.से. (बिहार : 2007) को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। 5. उनके निलंबन की अवधि की प्र—ति के संबंध में विभागीय कार्यवाही की समाप्ति पर निर्णय लिया जाएगा।

आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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शिक्षा विभाग

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अधिसूचनाएं

30 सितम्बर 2020

सं0 3/आ01-125/2018-427--श्री रंजीत पासवान, तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, (स्थापना) जमूई सम्प्रति जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, गया के विरूद्ध क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक मुंगेर प्रमंडल मुंगेर एवं जिला पदाधिकारी, जमूई द्वारा प्रतिवेदित आरोपों यथा अवैध एवं फर्जी प्रमाण पत्र पर नियुक्त शिक्षकों का वेतन भुगतान सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के बगैर करने, शिक्षक के बकाया वेतन की राशि से संबंधित त्रुटिपूर्ण प्रतिवेदन उपलब्ध कराने, वेतन भुगतान में अनियमितता, सेवा समाप्त किए गए शिक्षकों का वेतन भुगतान, जिला पदाधिकारी जमुई द्वारा शिक्षकों के बकाया भुगतान जॉच पूरी होने तक स्थगित रखने के बावजूद बैंक डेटिंग कर बिना लिपिक के ही स्वंय संचिका संधारित कर रू0 89,54,957/रूपये का भुगतान मात्र 5 प्रखंड के शिक्षकों के बीच करवाना एवं शिक्षकों के अमान्य संस्था के प्रमाण पत्र पर कार्यरत रहने से आरोप में बंद वेतन को नोटरी शपथ पत्र एवं आवंटन पत्र के आलोक में वेतन चालू करने के आदेश देने के आरोप में आरोप प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय संकल्प सं0-73 दिनांक 03.02.2020 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। 2. उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन में आरोप सं0-2,3 आंशिक रूप से तथा आरोप सं0-4 को प्रमाणित पाया गया है। प्रमाणित आरोप गंभीर एवं वितीय अनियमितता से जुडा हुआ है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री रंजीत पासवान, तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदािधकारी, स्थापना जमुई सम्प्रति-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी गया को दो वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड संसूचित करते हुए विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुशील कुमार, निदेशक (प्रशासन)-सह-अपर सचिव।

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9 अक्तूबर 2020

सं0 3/आ01-172/2016-455--श्रीमती विजया कुमारी, सेवानिवृत वरीय व्याख्याता, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय बॉकीपुर, पटना की प्रथम नियुक्ति सहायक शिक्षिका के पद पर हुई थी। माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में सी0बी0आई0 द्वारा निम्न अवर शिक्षा में नियुक्तियों की जॉच की गयी तथा जॉच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। उक्त जॉच प्रतिवेदन में श्रीमती विजया कुमारी की नियुक्ति विहित प्रक्रिया का अनुपालन (नियुक्ति के पूर्व विज्ञापन का प्रकाशित नहीं होना, रोस्टर स्वच्छ नहीं होना/चयन समिति की अनुशंसा नहीं होना इत्यादि) के बिना होने के कारण, अनियमित बतायी गयी। उक्त जॉच प्रतिवेदन के आलोक में निदेशक (मा0शि0) से प्राप्त प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों के लिए श्रीमती विजया कुमारी से बचाव अभिकथन की मांग की गयी। प्राप्त बचाव अभिकथन पर निदेशक (मा0शि0) से प्राप्त मंतव्य में बचाव अभिकथन को स्वीकार योग्य नही बताया गया। श्रीमती विजया कुमारी के बचाव अभिकथन पर प्राप्त मंतव्य के8 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प संख्या-843 दिनांक 19.12.2017 द्वारा श्रीमती विजया कुमारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी तथा श्रीमती विजया कुमारी दिनांक 30.11.2018 को सेवानिवृत होने के फलस्वरूप विभागीय संकल्प सं0 432 दिनांक-05.10.2020 द्वारा श्रीमती कुमारी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत समपरिवर्तित किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न कर प्रमाणित आरोपों के लिए श्रीमती कुमारी से द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया है। द्वितीय कारण पृच्छा उतर में श्रीमती कुमारी द्वारा विभागीय कार्यवाही में कही गयी बाते को दुहराया गया है। कोई ऐसा साक्ष्य उनके द्वारा संलग्न नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट हो सके कि समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया हो, रोस्टर स्वच्छ कराया गया हो (विज्ञापन में ही रोस्टर बिन्दु के अनुसार रिक्त पदों की सूचना अंकित रहती है) चयन समिति का विधिवत गठन हुआ हो, चयन समिति की विधिवत अनुशंसा हुई हो। 3. निम्न अवर सेवा (महिला शाखा) अवर शिक्षा सेवा (शिक्षण शाखा-महिला एवं पुरूष) के नियंत्री पदाधिकारी निदेशक, माध्यमिक शिक्षा है। उनके द्वारा श्रीमती विजया कुमारी के कथन पर सहमति नहीं व्यक्त की गयी। 4. श्रीमती विजया कुमारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत संतोषजनक नहीं पाए जाने के फलस्वरूप श्रीमती विजया कुमारी, सेवानिवृत वरीय व्याख्याता राजकीय कन्या उच्च विद्यालय बॉकीपुर के विरूद्ध प्रतिवेदित अनियमित नियुक्ति का आरोप प्रमाणित होता है। श्रीमती विजया कुमारी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत समपरिवर्तित करते हुए ''शत प्रतिशत (100%) पेंशन पर सदा के लिए रोक'' का दण्ड संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुशील कुमार, निदेशक (प्रशासन)-सह-अपर सचिव।

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लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग

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अधिसूचना

29 जुलाई 2020

सं0 8/वि0-1-107/2018-306--श्री दया शंकर मिश्र, कार्यकारी प्रभार अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्याें के अतिरिक्त कार्यहित में अस्थायी एवं वैकल्पिक व्यवस्था के तहत परियोजना निदेशक (Project Director), विश्व बैंक सम्पोषित नीर निर्मल परियोजना, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाता है। इसके लिए श्री मिश्र को कोई अतिरिक्त भत्ता देय नहीं होगा। 2. प्रस्ताव पर माननीय विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

3. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, प्रवीण कुमार गुप्ता, संयुक्त सचिव।

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सहकारिता विभाग

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अधिसूचनाएं

29 जुलाई 2020

सं0 01/रा॰स्था॰स्थाना॰/पद॰-40/2020 सह॰/2023--श्री बिरेन्द्र शर्मा, जिला सहकारिता पदाधिकारी, बेगूसराय (अतिरिक्त प्रभार-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, बेगूसराय/महाप्रबंधक, आई0सी0डी0पी0, बेगूसराय) को अपने कार्यों के अतिरिक्त जिला सहकारिता पदाधिकारी, खगड़िया एवं सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, खगड़िया का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक दिया जाता है।

2. श्री मिथिलेश कुमार, प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, बेगूसराय को अपने कार्यों के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, खगड़िया का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रचना पाटिल, अपर सचिव।

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27 अगस्त 2020

सं0 01/रा॰स्था॰एमएसीपी-02/2018 सह॰-2097--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना 2010' के प्रावधानों के तहत बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-12 से लेवल-13 में तृतीय रूपांतरित सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-9 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

क्र ॰सं॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम/मूल कोटि वरीयता पदस्थापन स्थान/कार्यालय तृतीय वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि
1 2 3 4
1. श्री ललन शर्मा अपर निबंधक, स॰स॰ 01/2018 तत्कालीन अपर निबंधक, स॰स॰ (प्रषासनिक) कार्यालय निबंधक, स॰स॰, बिहार, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त 03.03.2016
2. श्री मुकुल कुमार सिन्हा संयुक्त निबंधक, स॰स॰ 04/2018 तत्कालीन संयुक्त निबंधक, स॰स॰, सारण प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत्त 10.04.2020
3. श्री चन्द्रषेखर सिंह संयुक्त निबंधक, स॰स॰ 05/2018 तत्कालीन प्रबंध निदेषक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि0, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त 16.08.2019

2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना नियमावली 2010 के नियम परिषिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेषों के अनुरूप किया जायेगा।

3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाआें में पदस्थापन अवधि का एम0ए0 सी0पी0 लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राषि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा।

4. रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संषोधन की आवष्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संषोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राषि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी।

5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

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27 अगस्त 2020

सं0 01/रा॰स्था॰प्रषा॰स्थाना॰-29/2020 सह॰/2103--बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के स्तम्भ-2 में अंकित निम्नांकित पदाधिकारियों को अपने कार्यों के अतिरिक्त स्तम्भ-5 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तात्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/सिविल लिस्ट/मेद्या क्रमांक/गृह जिला पदनाम वर्त्तमान पदस्थापन पद/स्थान (अतिरिक्त प्रभार सहित) अतिरिक्त प्रभार
1 2 3 4 5
1 मो0 मुजीबुर्र रहमान 07/18 सीतामढ़ी उप निबंधक, स॰स॰ संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, कार्यालय निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना (संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ (पणन), बिहार, पटना एवं उप निबंधक, सहयोग समितियाँ(न्या॰), बिहार, पटना) प्रबंध निदेषक, बिहार राज्य सुगर कोपरेटिव फेडरेषन लि0, पटना
2 श्री जवाहर प्रसाद 08/18 मधुबनी उप निबंधक, स॰स॰ उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर (संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर एवं संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, कोषी प्रमंडल, सहरसा) उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, कोषी प्रमंडल, सहरसा
3 श्री अजय कुमार अलंकार 25/18 वैषाली सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, सारण, छपरा सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, छपरा
4 श्री अजय कुमार भारती 57/18 दरभंगा सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, समस्तीपुर (सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, दलसिंहसराय/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, रोसड़ा/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटोरी) प्राचार्य, सहकारी प्रषिक्षण केन्द्र, पूसा, समस्तीपुर एवं व्याख्याता, सहकारी प्रषिक्षण केन्द्र, पूसा, समस्तीपुर
5 श्री अरूण कुमार 65/18 जमुई सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, बाँका (सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, बाँका एवं जिला सहकारिता पदाधिकारी, कटिहार) सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, कटिहार
10 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

2. उच्चतर पद में पदस्थापित होने की दषा में पदाधिकारी अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभारी समझे जायेंगे।

3. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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13 मार्च 2020

सं0 01/रा॰स्था॰स्थाना॰/पदस्थापन-11/2020 सह॰-1167--श्री नयन प्रकाष, जिला सहकारिता पदाधिकारी, मोतिहारी (अति॰ प्रभार-प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, मोतिहारी/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मोतिहारी) अपने कार्यों के अतिरिक्त बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना अंतर्गत नवगठित तिरहुत सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ लि॰, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्यभारित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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15 मई 2020

सं0 01/रा॰स्था॰स्थाना॰/पद॰-64/2019 सह॰/1448--श्री अखिलेष कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर (अतिरिक्त प्रभार-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, बक्सर/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, डुमराँव) को अपने कार्यों के अतिरिक्त तत्काल प्रभाव से प्रबंध निदेषक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि॰, पटना का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰एमएसीपी-02/2018 सह॰-1904--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना 2010' के प्रावधानों के तहत बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-9 से लेवल-11 में प्रथम रूपांतरित सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-

क्र॰सं॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम/मूल कोटि वरीयता पदस्थापन स्थान/कार्यालय प्रथम वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि
1 2 3 4
1. श्री शंभू सेन कुमार, सहायक निबंधक, स॰स॰ 48/2018 सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ (अवकाष/प्रषिक्षण रक्षित), बिहार, पटना 01.01.2016
2. श्री संजय कुमार मंडल सहायक निबंधक, स॰स॰ 49/2018 जिला सहकारिता पदाधिकारी, खगड़िया 01.01.2016
3. श्री विद्या भूषण मिश्र सहायक निबंधक, स॰स॰ 51/2018 जिला सहकारिता पदाधिकारी, मुंगेर 13.07.2017
4. श्रीमती शषिबाला रावल सहायक निबंधक, स॰स॰ 54/2018 पदस्थापन की प्रतीक्षा में 21.06.2017
5. श्री अरविन्द कुमार पासवान सहायक निबंधक, स॰स॰ 58/2018 जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, सुपौल 30.06.2017
6. श्री नयन प्रकाष सहायक निबंधक, स॰स॰ 59/2018 जिला सहकारिता पदाधिकारी, मोतिहारी 27.06.2017
7. श्री बिरेन्द्र शर्मा सहायक निबंधक, स॰स॰ 61/18 जिला सहकारिता पदाधिकारी, बेगूसराय 26.10.2019
8. श्री बाबू राजा सहायक निबंधक, स॰स॰ 63/18 जिला सहकारिता पदाधिकारी, जहानाबाद 03.11.2019
9. श्री अरूण कुमार सहायक निबंधक, स॰स॰ 65/18 जिला सहकारिता पदाधिकारी, बाँका 31.10.2019
11 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना नियमावली 2010 के नियम परिषिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेषों के अनुरूप किया जायेगा।

3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाआें में पदस्थापन अवधि का एम0ए0 सी0पी0 लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राषि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा।

4. रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संषोधन की आवष्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संषोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राषि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी।

5. इसमें माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰एमएसीपी-02/2018 सह॰-1905--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना 2010' के प्रावधानों के तहत बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-11 से लेवल-12 में द्वितीय रूपांतरित सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन प्रदान की जाती हैः-

क्र॰सं॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम/मूल कोटि वरीयता पदस्थापन स्थान/कार्यालय द्वितीय वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि
1 2 3 4
1. श्री नागेन्द्र प्रसाद उप निबंधक, स॰स॰ 03/2018 तत्कालीन उप निबंधक, स॰स॰ (न्यायिक), कार्यालय निबंधक, स॰स॰, बिहार, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त 21.08.2009
2. मो0 मुजीबुर्र रहमान उप निबंधक, स॰स॰ 07/2018 उप निबंधक, स॰स॰, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर 12.09.2009
3. श्री जवाहर प्रसाद उप निबंधक, स॰स॰ 08/2018 उप निबंधक, स॰स॰, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा 27.10.2010
4. श्री विनोद सहायक निबंधक, स॰स॰ 15/2018 प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0, रहिका, मधुबनी 14.11.2010
5. श्री अजय कुमार अलंकार सहायक निबंधक, स॰स॰ 25/2018 व्याख्याता-सह-प्रषिक्षण केन्द्र, पूसा, समस्तीपुर 03.08.2015
6. श्री सैय्‌यद सरवर हुसैन सहायक निबंधक, स॰स॰ 28/2018 सहायक निबंधक, स॰स॰ (खादी), बिहार, पटना 07.12.2015
7. श्री सैय्‌यद मषरूख आलम सहायक निबंधक, स॰स॰ 29/2018 जिला सहकारिता पदाधिकारी, सहरसा 18.12.2015
8. श्री विजय कुमार सिंह सहायक निबंधक, स॰स॰ 35/2018 प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0, हाजीपुर 01.12.2015
12 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना नियमावली 2010 के नियम परिषिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेषों के अनुरूप किया जायेगा।

3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाआें में पदस्थापन अवधि का एम0ए0 सी0पी0 लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राषि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा।

4. रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संषोधन की आवष्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संषोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राषि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी।

5. इसमें माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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16 सितम्बर 2020

सं0 01/रा॰स्था॰प्रषा॰स्थाना॰-43/2020 सह॰/2319--श्री विजय कुमार सिंह, प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0, वैषाली (हाजीपुर) (अतिरिक्त प्रभार-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, हाजीपुर/महाप्रबंधक, आई0सी0डी0पी0, हाजीपुर) को अपने कार्यों के अतिरिक्त तत्काल प्रभाव से जिला सहकारिता पदाधिकारी, वैषाली (हाजीपुर) का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।

2 एतद संबंधी पूर्व में निर्गत अधिसूचना इस हद तक संषोधित समझा जाय।

बिहार के राज्यपाल के आदेष से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

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24 सितम्बर 2020

सं0 01/रा॰स्था॰निजी॰-27/2020 सह॰/2447--श्री कृष्णकान्त शर्मा, उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियां सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में को उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, मगध एवं पटना प्रमण्डल, पटना के पद पर तत्काल प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए पदस्थापित किया जाता है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।

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24 सितम्बर 2020

सं0 01/रा॰स्था॰प्रषा॰स्थाना॰-29/2020 सह॰/2448--श्री विनोद, सहायक निबंधक, सहयोग समितियां सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में को सचिव, बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिकरण, पटना के पद पर तत्काल प्रभाव से अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है ।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰एमएसीपी-02/2018 सह॰-1906--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना 2010' के प्रावधानों के तहत बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा संवर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-9 से लेवल-11 में प्रथम रूपांतरित सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-

क्र॰सं॰ पदाधिकारी का नाम/पदनाम/मूल कोटि वरीयता पदस्थापन स्थान/कार्यालय प्रथम वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि
1 2 3 3
1. श्री जितेन्द्र कुमार उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰ 01/2015 उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰, बिहार राज्य को-ऑपरेटिव बैंक लि0, पटना 01.01.2016
2. श्री संजय कुमार उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰ 02/2015 उप मुख्य अंकेक्षक, कार्यालय निबंधक, स॰स॰, बिहार, पटना 01.01.2016
3. श्री कामेष्वर ठाकुर उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰ 05/2015 उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰, कोषी एवं दरभंगा प्रमंडल, सहरसा 01.01.2016
4. श्री कृष्णकान्त शर्मा उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰ 06/2015 पदस्थापन की प्रतीक्षा में 01.01.2016
5. श्रीमती अनिता कुमारी उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰ 07/2015 उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰, भूमि विकास बैंक, पटना 01.01.2016
6. श्री धनन्जय कुमार उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰ 08/2015 उप मुख्य अंकेक्षक, स॰स॰, बिस्कोमान, पटना 01.01.2016
7. श्री वैद्यनाथ राय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, स॰स॰ 09/2015 जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, स॰स॰, लखीसराय 01.01.2016
13 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना नियमावली 2010 के नियम परिषिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेषों के अनुरूप किया जायेगा।

3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाआें में पदस्थापन अवधि का एम0ए0 सी0पी0 लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राषि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा।

4. रूपांतरित सुनिष्चित वृति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संषोधन की आवष्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संषोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राषि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी।

5. इसमें माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 25—571+25-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in14 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

भाग-2

बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। —————

सहकारिता विभाग

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शुद्धि-पत्र

8 जुलाई 2020

सं0 01/रा॰स्था॰अंके॰स्थाना॰-29/2020 सह॰-1981--बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के अतिरिक्त प्रभार संबंधी निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-1911 दिनांक-30.06.2020 के अतिरिक्त प्रभार सूची के क्रम संख्या-12 के कॉलम-5 में अंकित अतिरिक्त प्रभार को तत्कालीन प्रभाव से विलोपित किया जाता है। शेष यथावत रहेगा।

2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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8 जुलाई 2020

सं0 01/रा॰स्था॰अंके॰स्थाना॰-30/2020 सह॰-1982--बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा संवर्ग के स्थानान्तरण/ पदस्थापन संबंधी निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-1914 दिनांक-30.06.2020 के पदस्थापन सूची के क्रम संख्या-9 के कॉलम-6 में अंकित जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सहरसा के अतिरिक्त प्रभार को तत्कालीन प्रभाव से विलोपित किया जाता है। साथ ही पदस्थापन सूची के क्रम संख्या-12 को तत्कालीन प्रभाव से विलापित किया जाता है। शेष यथावत रहेगा।

2. बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा संवर्ग के अतिरिक्त प्रभार संबंधी निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-1913 दिनांक-30.06.2020 के अतिरिक्त प्रभार सूची के क्रम संख्या-3 के कॉलम-5 में अंकित अतिरिक्त प्रभार को तत्कालीन प्रभाव से विलोपित किया जाता है। शेष यथावत रहेगा।

3. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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सामान्य प्रषासन विभाग

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शुद्धि-पत्र

5 अगस्त 2019

सं0 ज्ञापांक-2/आरोप-01-30/2015-सा0प्र0-10667--श्रीमती एकता वर्मा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 955/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, पूर्णियाँ सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य खाद्य आयोग, पटना के विरूद्ध के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9248 दिनांक 11.07.2019 द्वारा (i) निन्दन एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित किया गया, जिसमें (i) निन्दन का आरोप वर्ष अंकित नहीं किया जा सका है।

अतः उक्त संकल्प में श्रीमती वर्मा के विरूद्ध (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड पढ़ा जाय।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।15 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

निर्वाचन विभाग

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शुद्धि-पत्र

14 अक्तूबर 2020

सं0 ई2-2-31/2016-46--विभागीय अधिसूचना संख्या-45 दिनांक 14.10.2020 द्वारा निर्गत पदस्थापन आदेष में टंकण भूलवष सोनपुर अनुमंडल, सारण के स्थान पर सोनपुर अनुमंडल, वैषाली टंकित हो गया है। अतः उक्त पदस्थापन अधिसूचना में सोनपुर अनुमंडल, वैषाली के स्थान पर सोनपुर अनुमंडल, सारण पढ़ा जाये।

उक्त अधिसूचना की शेश कंडिकाएँ यथावत्‌ रहेगी।

आदेश से, कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 25—571+25-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in16 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी kjk प्रकाशित

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सं0 2/आरोप-01-34/2018-सा0प्र0-13203

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

23 सितम्बर 2019

श्री दिलीप कुमार अग्रवाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-959/11, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, पष्चिम चम्पारण, बेतिया के विरूद्ध जिला परिवहन कार्यालय, बेतिया में लगभग 26 हजार निबंधन स्मार्ट कार्ड निर्गमन हेतु लंबित पाये जाने तथा विभागीय कार्यवाही की सुनवाई में उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में शामिल नहीं होने संबंधी प्रतिवेदित आरोप गठित कर जिला पदाधिकारी, बेतिया, पष्चिम चम्पारण के पत्रांक 286 दिनांक 14.09.2018 द्वारा श्री अग्रवाल के विरूद्ध अनुषासनिक कार्रवाई करने हेतु विभाग को उपलब्ध कराया गया।

प्राप्त आरोप-पत्र पर विभागीय पत्रांक 5321 दिनांक 22.04.2019 द्वारा श्री अग्रवाल से गठित आरोप-पत्र पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसके आलोक में दिनांक 16.05.2019 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री अग्रवाल द्वारा अपने उपर लगाये गये आरोप से इंकार किया गया है।

श्री अग्रवाल के विरूद्ध जिला परिवहन कार्यालय, बेतिया में लगभग 26 हजार निबंधन स्मार्ट कार्ड निर्गमन हेतु लंबित पाये जाने तथा विभागीय कार्यवाही की सुनवाई में उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में शामिल नहीं होने संबंधी आरोप प्रतिवेदित है, जो कर्त्तव्यहीनता का द्योतक है। उसके आलोक में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकारयोग्य प्र्रतीत नहीं होता है। श्री अग्रवाल के विरूद्ध आरोप गंभीर प्र—ति का है।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अग्रवाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ आरोपों की बृहद्‌ जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, बेतिया द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, बेतिया, पष्चिम चम्पारण से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त करते हुए उक्त आषय की सूचना संचालन पदाधिकारी प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर तथा सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को दिया जाय। श्री अग्रवाल से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-40/2015-सा0प्र0-16736

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10 दिसम्बर 2019

श्री अनिल कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 971/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, बोधगया के विरूद्ध राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1292 दिनांक 04.11.2015 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, गया द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया। श्री कुमार के विरूद्ध आरोप-पत्र में आरोप यथा-फर्जी संस्थाओं के नाम से दाखिल खारिज पर17 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 रोक लगाते हुए सृजित जमाबंदी को रद्‌द करने के बावजूद उक्त आदेषों की समीक्षा किये बिना रद्‌द किये जाने एवं जमाबंदी को पुनः कायम करने का निदेष संबंधित राजस्व कर्मचारी को देने इत्यादि का आरोप गठित है।

जिला पदाधिकारी, गया से प्राप्त आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित करते हुए अनुषासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उक्त आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों पर विभागीय पत्रांक 16207 दिनांक 05.12.2016 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार द्वारा दिनांक 05.12.2016 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर कई स्मारों के बाद जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक 5752 दिनांक 02.08.2019 द्वारा मंतव्य प्राप्त कराया गया। उक्त मंतव्य में जिला पदाधिकारी, गया द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य बताया गया है।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, गया के मंतव्य की सम्यक्‌ विचारोपरान्त आरोपों की वृहत जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, गया द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, गया को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-37/2017-सा0प्र0-11908

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29 अगस्त 2019

श्री अनिल कुमार सिन्हा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1049/11, तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी (अवधि 26.09.2007-17.03.2008, 29.03.2008-01.04.2008 तक) सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, औरंगाबाद के विरूद्ध बाबूबरही प्रखंड अन्तर्गत ग्राम पंचायत नसहा के आंगनबाड़ी केन्द्र सं0-75 मदनटोला नवटोली में फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर चयनित सेविका बबीता कुमारी, पति-श्री शत्रुध्न दास, ग्राम-मदनडोभ, प्रखंड-बाबूबरही के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने हेतु जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 682 दिनांक 29.06.2007 द्वारा निदेश दिया गया, परन्तु इनके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के आरोप के लिए समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3858 दिनांक 23.11.2017 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।

उल्लेखनीय है कि माननीय लोकायुक्त के आदेश के आलोक में श्री सिन्हा के विरूद्ध संचिका में उपलब्ध कागजात/दस्तावेजों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। विभागीय पत्रांक 56 दिनांक 02.01.2019 एवं पत्रांक 2595 दिनांक 25.02.2019 द्वारा श्री सिन्हा से प्रतिवेदित आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा के पत्र दिनांक 15.03.2019 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें श्री सिन्हा का कहना है कि-

''इनके द्वारा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही का अतिरिक्त प्रभार दिनांक 26.09.2007 को लिया गया था, जबकि श्रीमती बबीता देवी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा दिया गया निदेश 29.06.2007 का है। दिनांक 26.09.2007 को बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही का प्रभार ग्रहण किये जाने के उपरान्त उक्त पद के अतिरिक्त प्रभार में रहने तक इस हेतु इनको कोई स्मार भी प्राप्त नहीं था। संबंधित संचिका की छायाप्रति के अभाव में यह स्पष्ट किया जाना कठिन है कि कार्यालय द्वारा इनके समक्ष संचिका उपस्थापित की गयी थी अथवा नहीं।''

श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 5220 दिनांक 16.04.2019 द्वारा आई0सी0डी0एस0, समाज कल्याण विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। उक्त के आलोक में आई0सी0डी0एस0, समाज कल्याण विभाग के पत्रांक 2517 दिनांक 09.05.2019 द्वारा श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण पर मंतव्य समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेखित किया गया कि- ''समीक्षा में पाया गया कि श्री अनिल कुमार सिन्हा, बाबूबरही परियोजना प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के पद पर दिनांक 26.09.2007 से 17.03.2008 तक पदस्थापित थे। उक्त अवधि में श्री सिन्हा द्वारा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही के प्रभार में रहते हुए फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर चयनित सेविका श्रीमती बबीता कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया गया, जो सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही एवं सरकारी आदेश के उल्लंघन करने में दोषी पाये गये हैं।''18 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र, इनका स्ष्टीकरण एवं आई0सी0डी0एस0, समाज कल्याण विभाग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री अनिल कुमार सिन्हा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1049/11, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी के पद पर दिनांक 26.09.2007-17.03.2008, 29.03.2008-01.04.2008 तक पदस्थापित थे। जिला कल्याण पदाधिकारी-सह-जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 682 दिनांक 29.06.2007 द्वारा फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर चयनित सेविका श्रीमती बबीता कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज करने हेतु श्री सिन्हा को निदेश दिया गया था, परन्तु उक्त अवधि में श्री सिन्हा द्वारा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही के प्रभार में रहते हुए श्रीमती बबीता कुमारी पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया, जो सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही एवं सरकारी आदेश के उल्लंघन है।

समीक्षोपरान्त उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत श्री सिन्हा के विरूद्ध प्रशासनिक लापरवाही एवं र्काव्यहीनता बरतने संबंधित प्रमाणित आरोपों के लिए ''निन्दन एवं असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अनिल कुमार सिन्हा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1049/11, तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, औरंगाबाद के विरूद्ध के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित शास्तियाँ अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन, (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-10/2017-सा0प्र0-10561

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2 अगस्त 2019

नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना द्वारा श्री अनीस अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1082/11, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी सम्प्रति अनुमंडल पदाधिकारी, दाउद नगर, औरंगाबाद के विरूद्ध उनके पदस्थापन अवधि दिनांक 18.02.2014 से 17.08.2015 में नगर पंचायत, टिकारी अंतर्गत एल0ई0डी0 लाईट, डस्टबीन एवं पेयजल आर0ओ0 सिस्टम के क्रय में अनियमितता बरतने से संबंधित प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 3345 दिनांक 21.03.2017 द्वारा श्री अख्तर को नगर विकास एवं आवास विभाग को स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु निदेष दिया गया। उक्त के आलोक में श्री अख्तर के पत्रांक 1678 दिनांक 24.11.2017 द्वारा सूचित किया गया कि इनके पत्रांक 169 दिनांक 02.04.2017 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग को स्पष्टीकरण समर्पित किया जा चुका है। श्री अख्तर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी के पत्रांक 2328 दिनांक 06.12.2018 द्वारा गठित मंतव्य को जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक 10097 दिनांक 09.12.2018 द्वारा अग्रसारित किया गया।

श्री अख्तर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनका स्पष्टीकरण, अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी द्वारा गठित मंतव्य निम्नलिखित है :-

आरोप विवरणी :- 1. नगर पंचायत, टिकारी के कार्यालय निरीक्षण के क्रम मेंं पाई गई अनियमितता के संबंध में विभागीय पत्रांक 7748 दिनांक 21.10.2016 द्वारा जिला पदाधिकारी, गया से अनियमितता की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, जिसके आलोक में जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक 1031 दिनांक 28.10.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री अनीस अख्तर, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी में पदस्थापन अवधि (18.02.2014 से 17.08.2015 तक) में नगर पंचायत, टिकारी अंतर्गत एल0ई0डी0 लाईट, डस्टबीन एवं पेय जल आ0ओ0 सिस्टम के क्रय में अनियमितता का आरोप प्रमाणित पाया गया।

2. जिला पदाधिकारी, गया से प्राप्त उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री अनीय अख्तर, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी से स्पष्टीकरण की मांग की गई। तद्‌ालोक में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, गया से मंतव्य की मांग की गई, जिसके क्रम में जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक 10097 दिनांक 09.12.2018 द्वारा उनके स्पष्टीकरण पर अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी से मंतव्य की मांग करने पर अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी के पत्रांक 06.12.2018 द्वारा समर्पित मंतव्य विभाग को उपलब्ध कराया गया है।

3. अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी द्वारा श्री अनीस अख्तर, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी के स्पष्टीकरण पर गठित मंतव्य में उल्लेख किया गया है कि अनीस अख्तर द्वारा एल0ई0डी0 बल्ब की खरीद के पूर्व दिनांक 08.01.2015 के सशक्त स्थायी समिति की बैठक के प्रस्ताव संख्या 03 में 250 एल0ई0डी0 बल्ब खरीदने का प्रस्ताव लिया गया था। जबकि सामान्य बोर्ड में यह प्रस्ताव नहीं लिया गया था। 250 एल0ई0डी0 बल्क के भुगतान के बाद दिनांक 27.04.2016 को19 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 बोर्ड की बैठक में घटनोार स्वी—ति ली गयी है। घटनोार स्वी—ति का जिक्र नगरपालिका अधिनियम में नहीं है, फलस्वरूप इसके लिए श्री अख्तर दोषी हैं।

2. भवदीय के प्रासंगिक पत्र में डस्टबीन की चर्चा है, लेकिन अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी के पत्र में इस बिन्दु पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। फलस्वरूप इस बिन्दु पर स्पष्टीकरण का कोई प्रष्न नहीं है।

3. पेयजल आर0ओ0 सिस्टम के बिन्दु पर आरोपित किया गया है कि पूर्व के जाँच के समय निविदा की राषि से संबंधित कागजात, संबंधित पंजी तथा एकरारनामा प्रस्तुत नहीं किया गया। इस बिन्दु को स्पष्ट करते हुए कहना है कि निविदा की कार्रवाई विधिवत की गई थी तथा कार्यालय द्वारा संचिका आदि का संधारण किया गया था। पूर्व के जाँच के समय किन परिस्थतियों में संचिका, पंजी आदि प्रस्तुत नहीं किये गये, मैं नहीं कह सकता, क्योंकि जाँच के समय मैं टिकारी में पदस्थापित नहीं था। इस बिन्दु पर मैं विष्वास दिलाना चाहूँगा कि विषयान्र्गत संचिका एवं पंजी का संधारण किया गया था। जैसा कि अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी के प्रतिवेदन से भी स्पष्ट है कि पुनः जाँच के समय उनके समक्ष संबंधित कागजात प्रस्तुत किया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेखित किया है कि ''नगर पंचायत बोर्ड से संबंधित पंजी दिनांक 21.10.2016 को कार्यपालक पदाधिकारी एवं पूर्व अध्यक्ष के बीच उत्पन्न विवाद में टिकारी थाना में जमा है, जिसके कारण बोर्ड की पंजी का अवलोकन नहीं किया जा सका।''

मंतव्य :- (क) श्री अनीस अख्तर की कार्य अवधि दिनांक 18.02.2014 से 17.08.2015 तक थी। थाना के पास लगे आर0ओ0सिस्टम की जाँच दिनांक 30.01.2016 को की गई है। इस अवधि में खराब आर0ओ0सिस्टम का रख-रखाव की जवाबदेही इस अवधि में पदस्थापित कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी की होती है।

(ख) कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी के पत्रांक 581 दिनांक 26.10.2016 द्वारा प्रतिवेदित है कि-नगर पंचायत, टिकारी की बोर्ड बैठक दिनांक 25.09.2014 के प्रस्ताव संख्या 05 में 55 एल0ई0डी0 लाईट खरीदने की स्वी—ति प्रदान की गई थी। जिसका विज्ञापन हिन्दुस्तान समाचार पत्र दिनांक 14.11.2014 को पृष्ठ संख्या 08 पर विज्ञापन प्रकाषन किया गया था, जिसमें न्यूनतम दर 10400.00 (दस हजार चार सौ) रूपये प्रति अद्‌द की दर से फर्म दूदवा पॉवर इन्डस्ट्रीज, पटना को 55 एल0ई0डी0 लाईट लगाने का स्वी—ति दी गई थी। 250 एल0ई0डी0 लाईट सषक्त स्थाई समिति की बैठक में दिनांक 08.01.2015 के प्रस्ताव संख्या 03 में खरीद करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। जिसके आलोक में पत्रांक 21 दिनांक 15.01.2015 के द्वारा 100 एल0ई0डी0 लाईट एवं पत्रांक 53 दिनांक 03.03.2015 को 100 एल0ई0डी0 लाईट एवं पत्रांक 256 दिनांक 01.08.2018 को 50 एल0ई0डी0 लाईट कुल 250 एल0ई0डी0 लाईट खरीद किया गया था।

(ग) तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा मुख्य रूप से जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि 250 अद्‌द एल0ई0डी0 लाईट सषक्त स्थाई कमिटी से पारित कराकर खरीद की गई है तथा जो सामान्य बोर्ड से पारित नहीं है। जो अनियमितता प्रदर्षित करती है। श्री अनिस अख्तर, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी के प्राप्त स्पष्टीकरण के अवलोकन से ज्ञात होता है कि एल0ई0डी0 लाईट की खरीदारी प्रस्ताव नगर पंचायत बोर्ड एवं सषक्त स्थायी समिति से पारित होने के बाद इसका अनुपालन किया गया और दिनांक 07.04.2016 को आयोजित बोर्ड की सामान्य बैठक में उक्त पारित प्रस्ताव का पोस्ट फैक्टो सैक्षन प्राप्त कर लिया गया है। स्पष्टीकरण एवं संलग्न अनुलग्नक से प्रतीत होता है कि एल0ई0डी0 के क्रय में घटनोार स्वी—ति की गई है, परन्तु घटनोार स्वी—ति से संबंधित कोई जिक्र नगरपालिका अधिनियम, 2007 में नहीं है।

उपर्युक्त श्री अख्तर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं अनुमंडल पदाधिकारी, टिकारी, गया से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री अख्तर दिनांक 18.02.2014 से 17.08.2015 तक कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी पद पर पदस्थापित थे। श्री अख्तर द्वारा एल0ई0डी0 बल्ब की खरीद के पूर्व दिनांक 08.01.2015 के सशक्त स्थायी समिति की बैठक के प्रस्ताव संख्या 03 में 250 एल0ई0डी0 बल्ब खरीदने का प्रस्ताव पारित लिया गया था। जबकि सामान्य बोर्ड में यह प्रस्ताव नहीं लिया गया था। 250 एल0ई0डी0 बल्ब के भुगतान के बाद दिनांक 27.04.2016 को बोर्ड की बैठक में घटनोार स्वी—ति ली गयी है। घटनोार स्वी—ति का जिक्र नगरपालिका अधिनियम में नहीं है।

समीक्षोपरांत श्री अख्तर को उपर्युक्त आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत ''निन्दन (वर्ष 2015-16)'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतएव अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अनीस अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1082/11, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, टिकारी सम्प्रति अनुमंडल पदाधिकारी, दाउद नगर, औरंगाबाद को बिहार सरकारी सेवक20 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत ''निन्दन (वर्ष 2015-16)'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-01/2019-सा0प्र0-7434

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27 अगस्त 2020

श्री अपूर्व कुमार मधुकर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 451/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेसकौर, नवादा के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेसकौर के पदस्थापन अवधि में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना 30ः की योजना संख्या 02, 03, 04, 06, 07 एवं 32/2005-06 में दिए गए अग्रिम एवं खाद्यान्न आपूर्ति के दुर्विनियोग संबंधी बरती गयी अनियमितता के लिए साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर जिला पदाधिकारी, नवादा के पत्रांक 543 दिनांक 19.04.2017 द्वारा विभाग को प्राप्त हुआ।

उक्त प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 8563 दिनांक 13.07.2017 द्वारा श्री मधुकर से स्पष्टीकरण की गयी। श्री मधुकर द्वारा उक्त के आलोक में स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री मधुकर से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 11696 दिनांक 11.09.2017 द्वारा जिला पदाधिकारी, नवादा से मंतव्य की मांग की गयी। उक्त के आलोक में जिला पदाधिकारी, नवादा के पत्रांक 1928 दिनांक 27.11.2017 द्वारा द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री मधुकर के स्ष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं प्रतिवेदित किया गया।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मधुकर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, नवादा से प्राप्त मंतव्य के सम्यक्‌ विचारोपरान्त आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की वृहत जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3279 दिनांक 09.03. 2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

आयुक्त के सचिव, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 2285 दिनांक 21.10.2019 द्वारा श्री मधुकर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री मधुकर के विरूद्ध आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। प्रमाणित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 15644 दिनांक 20.11.2019 एवं स्मार पत्रांक 660 दिनांक 14.01.2020 द्वारा श्री मधुकर से बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री मधुकर द्वारा दिनांक 05.01.2020 को बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री मधुकर का बचाव अभ्यावेदन निम्नलिखित है :- ''सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना 30% के अंतर्गत ली गई योजना संख्या 02, 03, 04, 06, 07 एवं 32 वित्तीय वर्ष 2005-06 में इनके द्वारा अभिकर्त्ता को अग्रिम भुगतान करने के उपरांत योजना का सतत्‌ पर्यवेक्षण नहीं करके इनके द्वारा उत्तरदायी की समाप्ति समझ बैठे। फलतः उक्त योजनाओं के स्थल पर अभिकर्त्ता द्वारा कार्य पूर्ण नहीं कराया गया। उपरोक्त सभी योजनाएँ वर्ष 2005-06 की है। यह योजना सभी पंचायतों में संचालित थी। उपर वर्णित योजनाओं के कार्यान्वयन अभिकर्त्ता तत्कालीन पंचायत सचिव रामषरण यादव थे। इन सभी योजनाओं के लिए अग्रिम के रूप में कुल 36000 रूपये एवं कुल 24 क्वींटल अनाज दिया गया। दिनांक 14.03.2016 को उप विकास आयुक्त, नवादा द्वारा स्थलीय जाँच कर जिला पदाधिकारी, नवादा को जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें योजनाओं की आंषिक कार्य होने का उल्लेख किया गया। लाभुकों की अपेक्षापूर्ति नहीं होने के फलस्वरूप लाभुकों द्वारा गलत आरोप लगाया गया। चूँकि योजना वित्तीय वर्ष 2005-06 की है और जाँच वर्ष 2016-17 में किया गया है। इतने समायावधि बीत जाने के बाद योजना पहली स्थिति में नहीं है। अभिकर्त्ता से उस योजना में लगी लागत राषि सूद सहित वसूली कर ली गई है। यह योजना अनुसूचित जाति के व्यक्तिगत लाभ की योजना थी। जिसके अंतर्गत लाभुकों को योजना पूर्ण करने हेतु प्रत्यनषील रहना चाहिए और लाभुकों को अपना षिकायत प्रखंड विकास पदाधिकारी के संज्ञान में लाना चाहिए। जहाँ तक इनके संलिप्त होने की बात है। इन्होनें कभी बगैर पर्यवेक्षण के किसी अभिकर्त्ता को अग्रिम नहीं दी है। सप्ताहिक बैठक में सभी योजनाओं के बारे में जानकारी ली जाती थी। संबंधित योजना के बारे में भी जानकारी ली गई थी। अभिकर्त्ता एवं अभियंता द्वारा स्वयं पुष्टि की गई कि योजना का कार्य पूर्ण कर दिया गया है। मापीपुस्त एवं मास्टर रोल के आधार पर भुगतान किया गया है। सभी योजनाओं का मापीपुस्त समक्ष वर्ग के अभियंताओं द्वारा पर्यवेक्षित है। इस प्रकार इन्होंने सभी योजनाओं का पर्यवेक्षण संघन्न रूप से किया गया है।

ये मेसकॉर प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में अगस्त 2004 तक पदस्थापित थे। इन्होंने निरंतरता के साथ वहाँ के सभी योजनाओं का कार्यान्वयन एवं पर्यवेक्षण किया और योजनाओं के पूर्णतः के बारे में सभी अभिकर्त्ता एवं अभियंता से भी पूछताछ की थी। सभी से संतोषप्रद जबाव मिलने के बाद ही भुगतान की कार्रवाई की गई। आरोपित बिन्दुओं के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि योजना अभिकर्त्ता एवं अभियंता के द्वारा झूठतः बरती गई। इस प्रकार धोखा-धड़ी करके राषि की निकासी की गई। इनके विरूद्ध पर्यवेक्षण में कमी करने का आरोप सत्य नहीं है। इन्होंने अपने समय में सभी योजनाओं का Social Audit भी किया एवं समाज के विभिन्न तबकों एवं ग्रामीणों से योजना के पूर्णतः के बारे में पूछताछ की।''21 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 श्री मधुकर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं जाँच प्रतिवेदन पर श्री मधुकर से प्राप्त बचाव अभ्यावेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना 30% के अंतर्गत श्री मधुकर द्वारा अभिर्काा पंचायत सचिव श्री रामषरण यादव को अग्रिम का भुगतान किया गया। अभिर्काा को अग्रिम भुगतान करने के उपरांत योजना का सतत्‌ पर्यवेक्षण श्री मधुकर द्वारा करना चाहिए था एवं अग्रिम के अनुकूल कार्य करवाना चाहिए था, परन्तु इनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। अग्रिम भुगतान कर श्री मधुकर अपने उारदायित्व का इतिश्री समाप्ति समझ बैठे। फलतः उक्त योजनाओं में अभिकर्त्ता द्वारा स्थल पर कार्य पूर्ण नहीं कराया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन में श्री मधुकर के द्वारा यह स्वयं स्वीकार किया गया है कि कार्य अधिक होने के कारण योजना का समुचित पर्यवेक्षण नहीं हो पाया। कार्य अधिक होने के संबंध में आरोपी पदाधिकारी के द्वारा कोई साक्ष्य या कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया। सुनवाई के क्रम में इनके द्वारा यह भी कहा गया कि अभिलेख पर उपलब्ध दस्तावेज के अलावे कोई अन्य दस्तावेज समर्पित नहीं करना है तथा कोई अन्य बात नहीं कहनी है।

उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मधुकर के बचाव अभ्यावेदन को अस्वी—त किया गया तथा इनके विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों तहत्‌ ''संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मधुकर के विरूद्ध विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से विभागीय पत्रांक 4094 दिनांक 20.03.2020 द्वारा सहमति/परामर्ष की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 800 दिनांक 15.07.2020 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव से सहमति व्यक्त किया गया।

अतएव अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अपूर्व कुमार मधुकर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 451/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेसकौर, नवादा सम्प्रति जिला पंचायत राज पदाधिकारी, शेखपुरा के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत ''संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-52/2014-सा0प्र0-13311

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24 सितम्बर 2019

श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, मधुबनी के विरूद्ध उनके वरीय उप समाहर्त्ता, सीतामढ़ी-सह-प्रभारी काराधीक्षक, सीतामढ़ी के पद पर पदस्थापन अवधि में कारा अन्तर्गत अनियमित एवं नियम के विरूद्ध कार्य होने की गुप्त सूचना के आधार पर मंडल कारा, सीतामढ़ी में औचक छापामारी के क्रम में आपत्तिजनक सामग्रियों के प्राप्त होने, जेल परिसर में मंदिर का निर्माण कराये जाने, रमजान के महीने में जेल परिसर में इफ्तार पार्टी दिये जाने तथा मुस्लिम कैदियों के बीच वस्त्र वितरण किये जाने, NGO की वैधता की जाँच किये बिना NGO से जेनरेटर लिए जाने, संसीमित कुख्यात बन्दी द्वारा नया पंखा लगाये जाने, जमीन पर कालीन लगाये जाने इत्यादि प्रतिवेदित आरोपों के लिए गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक 2002 दिनांक 11.08.2014 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री सिंह से उक्त आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक 12739 दिनांक 12.09.2014 के द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। तत्पष्चात विभागीय पत्रांक 2683 दिनांक 19.02.2015, 4284 दिनांक 20.03.2015 एवं 5909 दिनांक 20.04.2015 द्वारा स्मारित भी किया गया श्री सिंह द्वारा उक्त निदेष के आलोक में दिनांक 10.04.2015 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ आरोप-पत्र में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9592 दिनांक 11.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1019 दिनांक 26.09.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री सिंह के विरूद्ध आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 14317 दिनांक 21.10.2016 द्वारा श्री सिंह को अपने बचाव में अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में श्री सिंह के पत्रांक 153 दिनांक 31.12.2016 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति/परामर्श के आलोक में समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प 14196 दिनांक 09.11.2017 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध (i) निन्दन एवं (ii) तीन वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड अधिरोपित किया गया।22 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 उक्त दंड के विरूद्ध श्री सिंह के पत्रांक 29/निर्वाचन दिनांक 09.05.2018 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री सिंह के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई नये तथ्य नहीं होने के कारण समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14196 दिनांक 09.11.2017 द्वारा संसूचित दंड को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11623 दिनांक 29.08.2018 द्वारा यथावत्‌ बरकरार रखा गया।

श्री सिंह के द्वारा उक्त दंड के विरूद्ध माननीय न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 5500/2019 श्री अविनाश कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 08.07.2019 को उक्त याचिका में पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"20. Thus, for the reasons, namely, (a) the documents relied in the inspection report of jail premises not having been furnished/supplied to the petitioner (b) no second show-cause notice having been given to the petitioner (c) the Presenting Officer not appointed in the department proceeding (d) complete reliance on the inspection report without the same having been proved (e) No evidence having been led on behalf of the department and (f) the explanation offered by the petitioner to the several heads of charges though categorized under two broad heads not having been taken into account in correct perspective, the orders impugned in the present writ petition is wholly unsustainable.

21. The orders impugned therefore are set aside. 22. The matter is remitted to the disciplinary authority to write out a fresh order in accordance with law, after giving the complete inspection report to the petitioner and giving him an opportunity to defend his case.

23. The departmental proceeding shall be concluded within a period of four months from the date of production/communication of a copy of this order.

24. With the aforesaid observation / direction, this petition stands allowed to the extent indicated above."

माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 08.07.2019 को पारित आदेश की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्ध अधिरोपित दंड संकल्प ज्ञापांक 14196 दिनांक 09.11.2017 एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11623 दिनांक 29.08.2018 को निरस्त करने एवं जाँच पदाधिकारी, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से माननीय न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश के आलोक में त्रुटियों का निराकरण कर समय-सीमा के अन्दर जाँच प्रतिवेदन प्राप्त करने का निर्णय लिया गया।

अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार निम्नलिखित निर्णय लिया जाता है :- (1) श्री अविनाश कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, के विरूद्ध अधिरोपित दंड संकल्प ज्ञापांक 14196 दिनांक 09.11.2017 एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11623 दिनांक 29.08.2018 को निरस्त किया जाता है।

(2) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(1) के तहत्‌ अग्रेतर जाँच हेतु जाँच पदाधिकारी, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को मूल अभिलेख वापस की जाती है। उक्त विभागीय कार्यवाही में विभागीय पक्ष रखने हेतु अपर समार्हाा, सीतामढ़ी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। संचालन पदाधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि माननीय न्यायालय द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 5500/2019 में दिनांक 08.07.2019 को पारित आदेश के आलोक में त्रुटियों का निराकरण कर जाँच प्रतिवेदन ससमय उपलब्ध कराया जाय।

श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।

आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/सी0-1020/2010-सा0प्र0-1571

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29 जनवरी 2020

श्री अमरनाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान सम्प्रति उप निदेषक (खाद्य), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्यों सहित जिला पदाधिकारी, सिवान के पत्रांक 849/सी0 दिनांक 07.04.2010 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री साहा के विरूद्ध गलत सूचना देकर मुख्यालय से बाहर जाने, ससमय ैप्व् मिलने के बावजूद उसे समय पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने, बैठकों में पूरी तैयारी के साथ भाग नहीं लेने, सप्लाई रिविजन संख्या 268/08 एवं 271/08 में आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के द्वारा पारित आदेष के अनुपालन में सकारण आदेष पारित नहीं करने, प्राप्त षिकायत के आलोक में जन वितरण प्रणाली बिक्रेताओं के विरूद्ध जाँच/ठोस कार्रवाई23 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 नहीं करने, मेसर्स गोयल स्टेषनरी ट्रेडर्स, सिवान को अवैध तरीके से सील करने तथा एक व्यक्ति को अवैध रूप से थाना हाजत में बन्द रखने, जाति प्रमाण-पत्र/निवास प्रमाण-पत्र/आय प्रमाण-पत्र के सत्यापन में मनमानी करने, वाहन चेकिंग के नाम पर वाहनों को पकड़कर अवैध तरीके से कई सप्ताह रखे जाने तथा जन प्रतिनिधियों के साथ अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप प्राप्त हुआ।

श्री साह से उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 10686 दिनांक 01.08.2014 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री साहा के पत्रांक 65/गो0 दिनांक 15.08.2014 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। उक्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 13208 दिनांक 22.09.2014 द्वारा जिला पदाधिकारी, सिवान से मंतव्य की मांग की गयी। अनेकों स्मारोपरांत जिला पदाधिकारी, सिवान के पत्रांक 2927/सी0 दिनांक 17.10.2016 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।

प्रतिवेदित आरोपों, श्री साहा के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री साहा के विरूद्ध आरोपों की बृहद्‌ जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 16862 दिनांक 20.12.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 347 दिनांक 07.03.2018 द्वारा श्री साहा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री साहा के विरूद्ध सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई एवं सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त निम्न बिन्दुओं पर असहमति व्यक्त की गयी :-

(i) सदर अनुमंडल में आपूर्ति व्यवस्था को दुरूस्त रखने की जिम्मेवारी अनुमंडल पदाधिकारी (श्री साहा) की थी, लेकिन उनके मनमाने कार्यकलाप से व्यवधान उत्पन्न हुआ। एस0आई0ओ0 मिलने के बावजूद समय पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को उसे उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण ससमय खाद्यान्न का उठाव नहीं हो पाया। इस संबंध में जिला पदाधिकारी, सिवान के ज्ञापांक 1020 दिनांक 05.11.2009 द्वारा एस0आई0ओ0 प्रतिहस्ताक्षर नहीं करने के लिए भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृाि नहीं करने की चेतावनी संसूचित किये जाने के बावजूद उनके द्वारा SIO प्रतिहस्ताक्षर नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा वितरण व्यवस्था में अपेक्षित सुधार एवं कालाबाजारी की रोकथाम के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गयी थी।

(ii) आपूर्ति टास्क फोर्स की बैठक में दिनांक 15.10.2009, 14.11.2009 एवं 06.02.2010 को श्री साहा अनुपस्थित रहे, जिसमें उनके द्वारा जिला पदाधिकारी, सिवान को पूर्व में अनिवार्य सरकारी कार्य की सूचना दिये जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया।

(iii) बी0पी0एल0 खाद्यान्न का उठाव कर उपभोक्ताओं के बीच वितरण न कर उसकी कालाबाजारी करने संबंधी आरोप के क्रम में संबंधित विक्रेताओं के विरूद्ध ठोस कार्रवाई किया जाना था, जो उनके पदस्थापन काल के पूर्व का है, लेकिन कुछ मामलों को अपने स्तर से जाँच कर उनके द्वारा प्रतिवेदित किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया।

विभागीय पत्रांक 10047 दिनांक 27.07.2018 द्वारा श्री साहा से असहमति के बिन्दु पर अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री साहा के पत्रांक 25/गो0 दिनांक 07.08.2018 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। समर्पित अभ्यावेदन में श्री साहा द्वारा मुख्य रूप से कहा गया कि :-

''(i) जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा निर्गत ज्ञापांक 1020 दिनांक 05.11.2009 की तिथि गलत अंकित की गयी है। यह पत्र दिसम्बर, 2009 का है। उक्त के अवलोकन से स्पष्ट होगा कि अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान के पत्रांक 1498 दिनांक 16.11. 2009 पर समीक्षोरान्त चेतावनी पत्र निर्गत किया गया था। अर्थात्‌ 16.11.2009 के पत्र के आलोक में जिला पदाधिकारी का पत्र 05.11.2009 को कैसे निर्गत हो सकता है? इस प्रकार यह कहना कि चेतावनी संसूचित किये जाने के बावजूद भी मेरे द्वारा एस0आई0ओ0 पर प्रतिहस्ताक्षर नहीं किया गया यह सत्य से परे है। उन्होंने जिला पदाधिकारी, सिवान से विमर्श का सभी एस0आई0ओ0 पर ससमय प्रहिस्ताक्षर कर दिया गया था। एस0आई0सी0 निर्गत होने के उपरान्त चेतावनी संसूचित की गयी थी। उनके द्वारा दृढ़ संकल्प के साथ जिला पदाधिकारी के उद्देश्य का पालन करते हुए वितरण व्यवस्था को सुचारू एवं कालाबाजारी पर पूर्ण रोक लगाया गया था। उनके कार्यकाल में कालाबाजारी का कोई मामला उजागर नहीं हुआ। (ii) जिला पदाधिकारी, सिवान के द्वारा आहुत बैठक दिनांक 15.10.2009, 14.11.2009 एवं 06.02.2010 से संबंधित सूचना पत्र एवं कार्यवाही की छायाप्रति की मांग की गयी थी, जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराय गया। यदि कार्यवाही की प्रति उन्हें उपलब्ध करायी गयी होती तो स्पष्ट हो जाता की तीनों बैठकों में कौन सम्पन्न हुई थी और कौन स्थगित कर दी गयी थी। विधि-व्यवस्था अथवा किसी विभागीय महत्वपूर्ण कारणों से बैठक में वे उपस्थित नहीं हो पाते थे तो इस संबंध में जिला पदाधिकारी, सिवान से दूरभाष पर पूर्व में ही अनुमति प्राप्त कर लेते थे तथा अपने अधीनस्थ को बैठक में भाग नहीं लेते तो उनसे स्पष्टीकरण पूछा जाता, जबकि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है।

(iii) प्रश्नगत मामला तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान के कार्यकाल का है। उनके द्वारा संबंधित बिक्रेताओं के विरूद्ध जाँच करायी गयी थी और स्वयं भी मामले की छान-बीन किया था। जाँच में कालाबाजारी का कोई मामला उजागर नहीं होने की पूरी जानकारी जिला पदाधिकारी से मिलकर उन्होंने दी थी। यदि कालाबाजारी का कोई मामला प्रकाश में आया होता तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाती।''

श्री साहा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन तथा इसके क्रम में गठित असहमति के बिन्दु तथा उसपर प्राप्त बचाव अभ्यावेदन की अनुषासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा24 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री साहा द्वारा समर्पित बचाव बयान (अभ्यावेदन) का कथन सही नहीं है, क्योंकि जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा मंतव्य में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एस0आई0ओ0 मिलने के बावजूद समय पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण ससमय खाद्यान्न का उठाव नहीं हो पाया। एस0आई0ओ0 द्वारा प्रतिहस्ताक्षर नहीं करने के कारण भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृाि नहीं करने की चेतावनी संसूचित किये जाने के बावजूद उनके द्वारा प्रतिहस्ताक्षर नहीं किया गया। चेतावनी की बात श्री साहा द्वारा भी स्वीकार किया गया है। आपूर्ति टास्क फोर्स की बैठक में अनुपस्थित रहने संबंधी अनिवार्य सरकारी कार्य की सूचना दिये जाने का कोई साक्ष्य उनके द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। ए0पी0एल0 खाद्यान्न का उठाव कर उपभोक्ताओं के बीच वितरण न कर उसकी कालाबजारी करने संबंधी कुछ मामलों को अपने स्तर से जाँच कर उनके द्वारा प्रतिवेदित नहीं किया गया।

वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बचाव अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए श्री अमरनाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान सम्प्रति उप निदेषक (खाद्य), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 तथा समय समय पर संशोधित के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌'दो वेतनवृद्धियाँ संचयी प्रभाव (Cummulative Effect) से रोकने' का दंड विनिष्चित किया गया।

विभागीय पत्रांक 16100 दिनांक 10.12.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से श्री साहा के विरूद्ध विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर परामर्ष की मांग की गई। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक 3568 दिनांक 28.03.2019 द्वारा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी।

बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अमरनाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान सम्प्रति उप निदेषक (खाद्य), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 तथा समय समय पर संशोधित के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7257 दिनांक 29.05.2019 द्वारा 'दो वेतनवृद्धियाँ संचयी प्रभाव (Cummulative Effect) से रोकने' का दण्ड अधिरोपित किया गया।

उक्त दंड के विरूद्ध श्री साहा के पत्रांक 12/गो0 दिनांक 11.07.2019 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी/अभ्यावेदन दाखिल किया गया है।

उक्त पुनर्विलोकन अर्जी/अभ्यावेदन में श्री साहा का कहना है कि ''इनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, सामान्य प्र—ति का है और Routing Work से संबंधित है। यह किसी भी प्रकार की अनियमितता से संबंधित नहीं है। अनुमंडल पदाधिकारी, सीवान के रूप में इनका कार्यकाल मात्र 51/2 महीने का था और उक्त अवधि में इन्होंने तत्कालीन जिला पदाधिकारी, सीवान के सभी आदेषों का अनुपालन ससमय किया है।

(i) जहाँ तक SIO पर अनुमंडल पदाधिकारी, सीवान के रूप में प्रतिहस्ताक्षर करने का सवाल है, इस संबंध में स्पष्ट करना है कि इन्होंने ससमय प्रतिहस्ताक्षर किया था, जबकि कुछ दिन पूर्व ही ये अनुमंडल पदाधिकारी, सीवान के पद पर पदस्थापित हुए थे। इस संबंध में इनके द्वारा निर्गत SIO की छायाप्रति की मांग जिला पदाधिकारी से किया था, जो अद्यतन अप्राप्त है। इनके द्वारा प्रतिहस्ताक्षरी SIO पर अंकित तिथि से स्पष्ट हो जायेगा कि इन्होंने जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा निर्गत चेतावनी से पूर्व ही SIO को निर्गत किया था। अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा SIO पर प्रतिहस्ताक्षर करने का कोई सरकारी प्रावधान नहीं है। यह व्यवस्था तत्कालीन जिला पदाधिकारी महोदय के मौखिक आदेष से किया गया था। अतः यह आरोप आधारहीन एवं साक्ष्यहीन है और संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के द्वारा इस आरोप को अप्रामाणित भी किया जा चुका है।

(ii) जहाँ तक BPL खाद्यान्नों का उठाव कर उपभोक्ताओं के बीच वितरण नहीं कर कालाबाजारी किये जाने का सवाल है, इस संबंध में निवेदन के साथ कहना चाहूँगा कि यह मामला इनके पदस्थापन के पूर्व का है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी, सीवान के आदेष से तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सीवान (श्री प्रभात कुमार सिन्हा) के द्वारा जाँच की गयी थी और उनके जाँच में कालाबाजारी का कोई मामला नहीं पाये जाने की बात जिला पदाधिकारी, सीवान को उनके द्वारा बतायी गयी थी। इनके पदस्थापन के उपरांत जिला पदाधिकारी द्वारा इन्हें उसकी छानबीन करने के लिए कहा गया, तदुपरान्त इन्होंने इसकी छानबीन की और कालाबाजारी का कोई भी मामला प्रकाष में नहीं आया। इस आषय की सूचना जिला पदाधिकारी को इन्होंने दी थी। बेहतर यह होता कि इसकी जाँच अपर समाहर्त्ता स्तर के पदाधिकारी द्वारा कराया जाता, जबकि ऐसा नहीं किया गया। यदि इस संबंध में किसी स्तर पर भी कालाबाजारी की बात उनकी जानकारी में होता तो निष्चय ही उनके द्वारा आवष्यक कार्रवाई की गयी होती। इनके कार्यकाल में इस संबंध में फिर इनसे कोई पूछ-ताछ नहीं किया गया और न ही कोई कार्रवाई करने का निदेष दिया गया। जब इस तरह का कोई मामला ही नहीं था तो किसी जन वितरण प्रणाली बिक्रेता के विरूद्ध कोई कारवाई करने का आधार ही नहीं बनता है। इस प्रकार यह आरोप आधारहीन और साक्ष्यहीन है। संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के द्वारा इस आरोप को अप्रामाणित भी किया जा चुका है।

(iii) जहाँ तक तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने का प्रष्न है, इस संबंध में इनका कहना है कि विधि-व्यवस्था या अन्य महत्वपूर्ण कार्य में संलग्न रहने की स्थिति में दूरभाष पर तत्कालीन जिला पदाधिकारी महोदय से अनुमति प्राप्त करने के उपरांत ही उक्त कार्य में लगता था। अगर ऐसी बात नहीं होती तो निष्चिय ही उक्त तीनों अनुपस्थिति के संबंध में इनके विरूद्ध उनके द्वारा आवष्यक कार्रवाई की गयी होती, जबकि उनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। एक अनुमंडल पदाधिकारी के जिम्मेवार पद पर रहते हुए कोई भी पदाधिकारी अकारण एवं सक्षम अनुमति के बिना अनुपस्थित नहीं रह सकता है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी, सीवान के द्वारा इनके विरूद्ध कार्रवाई किये जाने का कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया25 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 है, जिससे स्पष्ट है कि यह आरोप आधारहीन एवं साक्ष्यहीन है। जिसे संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा द्वारा अप्रमाणित किया जा चुका है।''

श्री साहा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, संचिका में उपलब्ध अभिलेख, बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त अभिमत एवं श्री साहा द्वारा दाखिल पुनर्विलोकन अर्जी/अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा समर्पित मंतव्य में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एस0आइ0ओ0 मिलने के बावजूद समय पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण ससमय खाद्यान्न का उठाव नहीं हो पाया। एस0आइ0ओ0 प्रतिहस्ताक्षर नहीं करने के कारण भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं करने की चेतावनी संसूचित किये जाने के बावजूद उनके द्वारा प्रतिहस्ताक्षर नहीं किया गया। चेतावनी की बात श्री साहा द्वारा भी स्वीकार किया गया है। आपूर्ति टास्क फोर्स के बैठक में अनुपस्थित रहने संबंधी अनिवार्य सरकारी कार्य की सूचना दिये जाने का कोई साक्ष्य श्री साहा द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। ए0पी0एल0 खाद्यान्न का उठाव कर उपभोक्ताओं के बीच वितरण न कर उसकी कालाबाजारी करने संबंधी कुछ मामलों को अपने स्तर से जाँच कर उनके द्वारा प्रतिवेदित नहीं किया गया।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री साहा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वी—त करने का निर्णय लेते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7257 दिनांक 29.05.2019 द्वारा अधिरोपित दंडादेष को यथावत्‌ रखने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अमरनाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान सम्प्रति उप निदेषक (खाद्य), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक 7257 दिनांक 29.05.2019 द्वारा अधिरोपित दंडादेष को यथावत्‌ रखा जाता है। आदेश :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/सी0-1052/2006-सा0प्र0-14268

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18 अक्तूबर 2019

श्री अखिलेश कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 871/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाचन पदाधिकारी, बाजपट्‌टी, सीतामढ़ी सम्प्रति उप सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग, कल्याण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध स्थानीय निकायों के चुनाव में अपने दायित्वों का निर्वहन समुचित रूप से नहीं करने एवं वरीय पदाधिकारियों के आदेष के अवहेलना से संबंधित आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के पत्रांक 348 दिनांक 28.03.2006 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' विभाग को उपलब्ध कराया गया।

श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी से प्राप्त मंतव्य के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10567 दिनांक 25.09.2008 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 72 दिनांक 03.05.2018 से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी का विश्लेषण एवं निष्कर्ष निम्नवत्‌ है :-

आरोप संख्या-1 ः-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि पंचायत निर्वाचन में अभ्यर्थियों की संख्या करीब 800 थी और प्रतीक आवंटन का कार्य दिनांक 23.03.2006 को हो सका, जिसका प्रकाशन नियमानुसार प्रपत्र-9 में किया गया। ये जिला मुख्यालय निर्वाचन से संबंधित प्रपत्र लाने गये थे। इनकी उपस्थिति के संबंध में प्रेक्षक ने अपने मोबाईल पर सम्पर्क कर कोई निदेश भी नहीं दिया। अतः आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप संख्या-2 :-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक होने के कारण निर्णय लेने में समय-समय पर परिवर्तन की आवश्यकता महसूस हुई और इसके आलोक में अस्वी—त में 'अ' काटकर स्वी—त किया गया और उक्त सुधार के नीचे उनके द्वारा अपना हस्ताक्षर भी किया गया है। इन्होंने अपने स्पष्टीकरण में यह कहा है कि सभी अभ्यर्थियों को समान मौका दिया गया और मामूली त्रुटियों को दूर कर उसका निराकरण किया गया, जो त्रुटि हुई है, वह सब नामांकन पत्र लेने वाले कर्मियों की अदूरदर्शिता के कारण हुआ है, जो अप्रत्याशित भीड़ के कारण नामांकन पत्र की जाँच ठीक ढंग से नहीं हो पाया। आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। आरोप संख्या-3 :-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि श्री रामबाबू राय का हस्ताक्षर नामांकन पत्र दो जगहों पर भिन्न था, परन्तु नाम निर्देशन प्रपत्र-7 को माइक से घोषणा करने पर राम बाबू ने आकर अपने हस्ताक्षर को सत्यापित किया, जिसके आधार पर उनका नाम पुनः जोड़ना पड़ा। चूँकि पंचायत निर्वाचन वृहद पैमाने पर होना था, जिसमें अभ्यर्थियों की संख्या अधिक थी, अतः मामूली त्रुटियों का होना स्वाभाविक बताया गया। आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।26 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 आरोप संख्या-4 ः-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि प्रत्याशी अंजु देवी का नामांकन नियमानुसार निर्णित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा भी इनके निर्णय में त्रुटि नहीं पायी गयी है। उन्होंने यह भी कहा है कि साक्ष्यों के आधार पर नामांकन स्वी—त/ अस्वी—त करने का अधिकार निर्वाची पदाधिकारी के पास सुरक्षित है। आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप संख्या-5 :-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि वह न तो किसी समारोह में शामिल हुए और न ही कोई तोरण द्वार उनके द्वारा बनावाया गया है। तोरण द्वार बनाने की सूचना उन्हें मिली थी और इसी कारण वह उस दिन प्रखंड नहीं गए। उन्होंने अपने समर्थन में यह कहा है कि स्थानीय जनता के द्वारा तोरण द्वार बनाने या नहीं बनाने, उनके विवेक पर निर्भर करता है और उसमें सरकारी पदाधिकारी का नियंत्रण नहीं है और इसके लिए उन्हें जिम्मेवार ठहराया जाना उचित नहीं होगा। आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप संख्या-6 :-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि चुनाव के कारण तथा स्थान की कर्मी के आलोक में प्रखंड प्रमुख का कमरा निर्वाचन कार्य हेतु अधियाचित किया गया था। अनुमंडल पदाधिकारी, पुपरी के आदेश पर ही प्रखंड प्रमुख के कक्ष का ताला खोला गया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका प्रखंड से कोई द्वेष नहीं था और यदि द्वेष रहता तो वे संवीक्षा के समय प्रमुख को बुलाकर उनके निर्वाचन क्षेत्र को सही कराकर उनका नामांकन स्वी—त नहीं करते। आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है।

आरोप संख्या-7 :-आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया है कि उनका पदस्थापन घोसवरी, पटना हो गया था और जिला पदाधिकारी से विरमित करने हेतु मौखिक निवेदन किया गया था, परन्तु पंचायत चुनाव के मद्‌देनजर उन्हें विरमित नहीं किया गया। उनके द्वारा अंचल अधिकारी का प्रभार लेकर पंजी को अप-टू-डेट कराने में हुए विलम्ब तथा अंचल अधिकारी के मैट्रिक परीक्षा में दंडाधिकारी की ड्‌यूटी में तैनात रहने के कारण उनकी अनुपलब्धता को देखते हुए प्रभार दिनांक 29.03.2006 को सौंपा गया। आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष पर विभागीय पत्रांक 7932 दिनांक 14.06.2018 द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। राज्य निर्वाचन आयोग के पत्रांक 550 दिनांक 07.03.2019 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर सहमति व्यक्त की गयी।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी का मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अंकित निष्कर्ष की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं उस पर राज्य निर्वाचन आयोग के मंतव्य के आलोक में सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अखिलेश कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 871/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाचन पदाधिकारी, बाजपट्‌टी, सीतामढ़ी सम्प्रति उप सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग, कल्याण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/सी0-1034/2009-सा0प्र0-6234

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26 जून 2020

डॉ0 सतीश चरण झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 742/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, अलौली, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध प्रखंड मुख्यालय में नहीं रहने, सरकारी वाहन का दूरूपयोग करने, प्रखंड कार्यालय पर अपने नियंत्रण नहीं रखने, सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने, कैशबुक अद्यतन नहीं रखने आदि का आरोप प्रतिवेदित है। प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3494 दिनांक 30.03.11 द्वारा डॉ0 झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री झा दिनांक 31.03.2020 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।

अतः डॉ0 सतीश चरण झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 742/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, अलौली, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) के तहत्‌ सम्परिवर्तित किया जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।27 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020

सं0 2/आरोप-01-16/2018-सा0प्र0-13204

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23 सितम्बर 2019

श्री गयन कुमार राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1159/11, तत्कालीन वरीय उप समार्हाा-सह-कार्यपालक पदाधिकारी, सासाराम सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-पटना प्रमंडल, पटना को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 1887 दिनांक 29.05.2018 द्वारा 10,000/-रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर (दिनांक 24.05.2018 को) न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की सूचना दी गयी। इसके आलोक में विभागीय पत्रांक 8325 दिनांक 22.06.2018 द्वारा श्री राम को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की तिथि (24.05.2018) से निलंबित किया गया।

विधि विभाग, बिहार, पटना का ज्ञापांक 147/जे0 दिनांक 14.08.2018 द्वारा भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम, (1988 का अधिनियम-49) की धारा-7/13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी) के अधीन अपराधों के लिए श्री राम के विरूद्ध अभियोजन की स्वी—ति दी गई है।

श्री राम द्वारा जमानत पर रिहा होने पर दिनांक 24.09.2018 को विभाग में योगदान समर्पित किये जाने के उपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14099 दिनांक 24.10.2018 द्वारा निलंबन जारी रखते हुए मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया गया। श्री राम के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया। विभागीय पत्रांक 13076 दिनांक 01.10.2018 द्वारा श्री राम से गठित आरोप-पत्र पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री राम को स्पष्टीकरण हेतु प्रेषित पत्र तामिला नहीं हो सका। इस संबंध में आयुक्त कार्यालय, पटना के पत्रांक 1838 दिनांक 20.11.2018 द्वारा सूचित किया गया कि श्री राम के द्वारा अबतक योगदान समर्पित नहीं किया गया। श्री राम के द्वारा इस संबंध में विभाग में भी कोई सूचना नहीं दी गयी है। आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 01 दिनांक 02.01.2019 द्वारा विभाग को सूचित किया गया कि श्री राम के विरूद्ध निर्गत आरोप-पत्र का भी तामीला नहीं हो पाया।

श्री राम को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से निदेश दिया गया कि वे अविलम्ब निर्धारित मुख्यालय में अपना योगदान समर्पित करें अन्यथा उनके विरूद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जायेगा। विभागीय पत्रांक 7704 दिनांक 10.06.2019 द्वारा आयुक्त कार्यालय, पटना से सूचना मांगी गयी। आयुक्त कार्यालय, पटना के पत्रांक 906 दिनांक 04.07.2019 द्वारा सूचित किया गया कि श्री राम के द्वारा अबतक योगदान समर्पित नहीं किया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, रोहतास (सासाराम) द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, रोहतास (सासाराम) को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री राम से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-98/2013-सा0प्र0-16470

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4 दिसम्बर 2019

श्री गयन कुमार राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1159/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, सिवान सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 2232 दिनांक 25.07.2014 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।

श्री राम के विरूद्ध आरोप है कि आयुक्त कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के विशेष कार्य पदाधिकारी के पत्रांक 320 दिनांक 09.12.2011 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित है कि श्री प्रेम कुमार गुप्ता, प्रधान सहायक, लेखापाल, नगर परिषद्‌, सीवान की 40 वर्ष की सेवा अवधि के बाद भी सेवानिवृा नहीं किया गया तथा लाखों की नाजायज निकासी की गई। जाँच प्रतिवेदन में यह भी प्रतिवेदित किया गया है कि श्री गुप्ता दिनांक 06.07.1969 को सेवा में आये तथा उनके 40 वर्ष सेवा अवधि दिनांक 05.07.2009 को पूरी हो गयी। लेकिन नगर परिषद्‌ द्वारा उन्हें सेवानिवृा नहीं कर उनसे दो साल अतिरिक्त कार्य लिया गया तथा दिनांक 31.07.2011 को उन्हें सेवानिवृा किया गया। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक 2106 दिनांक 19.04.2011 द्वारा सभी नगर निकायों को स्पष्ट आदेश निर्गत है कि 60 वर्ष की आयु या 40 वर्ष की सेवा अवधि जो पहले हो, सेवानिवृत किया जाय।28 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 12714 दिनांक 27.08.2015, 13446 दिनांक 25.09.2014, पत्रांक 5648 दिनांक 22.04.2016 एवं पत्रांक 14389 दिनांक 02.11.2018 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जो सम्प्रति अप्राप्त है। श्री राम को एक अन्य मामले में भी स्पष्टीकरण नहीं दिये जाने के फलस्वरूप प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सूचित किया गया, किन्तु उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, सिवान को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री राम से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-23/2017-सा0प्र0-13607

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1 अक्तूबर 2019

श्री गोपाल प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-1155/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी, कुमारखंड सम्प्रति अनुमंडल लोक षिकायत निवारण पदाधिकारी, जमुई के विरूद्ध विभिन्न कर्मियों द्वारा समर्पित अभिश्रव की जाँच नहीं करने के कारण 2.16 करोड़ राषि का डी0सी0 विपत्र लंबित रहने के आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, मधेपुरा के पत्रांक 465-2 दिनांक 05.07.2017 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) गठित कर अनुषासनिक कार्रवाई हेतु विभाग को उपलब्ध कराया गया।

श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप है कि इनके द्वारा अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी, कुमारखंड के पदस्थापन अवधि में वर्ष 2008 के दौरान आयी बाढ़ के पश्चात्‌ सहाय्‌य मद में प्राप्त राशि को बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिये प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के विभिन्न कर्मियों को अग्रिम दिये जाने के फलस्वरूप कर्मियों द्वारा राशि वितरण के पश्चात अंचल कार्यालय, कुमारखंड में अभिश्रव जमा किया गया परन्तु अभिश्रव को पारित नहीं किया गया और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गयी, जिसके कारण प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के विभिन्न कर्मियों के उपर अग्रिम अद्यतन समय तक लंबित है। उनमें से कई कर्मी सेवानिवृत्त हो गये हैं। अग्रिम लंबित रहने के कारण उन्हें सेवान्त लाभ का भुगतान नहीं किया जा सका। इस संबंध में आपदा प्रबंधन शाखा समाहरणालय, मधेपुरा द्वारा जिला पदाधिकारी, जमुई से अनुरोध के उपरांत श्री प्रसाद को दो दिनों के लिए अंचल कार्यालय कुमारखण्ड में प्रतिनियुक्त भी किया गया परन्तु उनके द्वारा अभिश्रवों की जॉंच नहीं की गयी फलतः 2.16 करोड़ राषि का डी0सी0 विपत्र अबतक लंबित है।

विभागीय पत्रांक 1348 दिनांक 29.01.2018 द्वारा श्री प्रसाद से प्रतिवेदित आरोप के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के संबंध में श्री प्रसाद के पत्रांक 17 दिनांक 07.04.2018 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण के आलोक में जिला पदाधिकारी, मधेपुरा से विभागीय पत्रांक 6365 दिनांक 16.05.2018, पत्रांक 10010 दिनांक 27.07.2018, पत्रांक 12814 दिनांक 25.09.2018, पत्रांक 2935 दिनांक 05.03.2019 एवं पत्रांक 9970 दिनांक 25.07.2019 द्वारा मंतव्य की मांग की गयी, जो सम्प्रति अप्राप्त रहा।

प्रतिवेदित आरोपों के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत स्पष्ट है कि विभिन्न कर्मियों द्वारा समर्पित अभिश्रव की जाँच नहीं की जा सकी, फलतः 2.16 करोड़ राषि का डी0सी0 विपत्र लंबित है। श्री प्रसाद का यह —त्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) का उल्लंघन तथा उच्चाधिकारियों के आदेष की अवहेलना एवं अनुषासनहीनता का द्योतक है। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकारयोग्य प्रतीत नहीं होता है। श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप की स्थिति गंभीर प्र—ति का प्रतीत होता है।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ आरोपों की बृहद्‌ जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु प्रमंडलीय आयुक्त, कोषी प्रमंडल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, मधेपुरा द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, मधेपुरा से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त करते हुए उक्त आषय की सूचना संचालन पदाधिकारी प्रमंडलीय आयुक्त, कोषी प्रमंडल, सहरसा तथा सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को दिया जाय।29 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 श्री प्रसाद से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-42/2018-सा0प्र0-5719

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15 जून 2020

श्री गोविन्द चौधरी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1000/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, घोसी, जहानाबाद सम्प्रति अपर समाहर्त्ता (लोक षिकायत निवारण)-सह-जिला लोक षिकायत निवारण पदाधिकारी, औरंगाबाद के विरूद्ध लोकायुक्त वाद सं0-01/लो0 (पंचायत)-03/2010 के आलोक में घोषी प्रखंड अन्तर्गत ग्राम पंचायत भारथु में विाीय वर्ष 2009-10, 2010-11 में दायित्वों का निवर्हन नहीं करने से संबंधित आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 99 दिनांक 25.04.2019 द्वारा आरोप-पत्र (साक्ष्य सहित) आवश्यक कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराया गया। जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा समर्पित आरोपों पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। श्री चौधरी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 8413 दिनांक 25.06.2019 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री चौधरी के पत्र दिनांक 20.07.2019 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री चौधरी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 13179 दिनांक 23.09.2019 द्वारा जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 34 दिनांक 22.02.2020 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री चौधरी के विरूद्ध कुल-08 आरोप में आरोप संख्या-01, 02 एवं 06 में यह अभिलेख से संबंधित है। आरोप संख्या-03, 04 एवं 05 में समीक्षा एवं पर्यवेक्षण की आवश्यकता थी, जो नहीं किया गया एवं आरोप संख्या-07 एवं 08 में अस्वीकारात्मक बताया गया।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण, एवं जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से प्राप्त मंतव्य की सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अन्तर्विष्ट आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा नामित पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। जिला पदाधिकारी, जहानाबाद को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने विभाग के किन्ही पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री चौधरी से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-13/2016-सा0प्र0-2991

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27 फरवरी 2020

श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी सम्प्रति जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भागलपुर के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3281 दिनांक 31.05.2016 द्वारा आरोप-पत्र (प्रपत्र 'क') एवं पत्रांक 9387 दिनांक 27.05.2016 द्वारा पूरक आरोप-पत्र (प्रपत्र 'क') भी विभाग को उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोप-पत्रों के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

श्री हुसैन के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 1589 दिनांक 05.02.2019 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री हुसैन के पत्रांक 322 दिनांक 02.03.2019 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 3728 दिनांक 18.03.2019, एवं पत्रांक 9879 दिनांक 24.07.2019 द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से विभागीय मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक 5875 दिनांक 12.12.2019 द्वारा विभागीय मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोप संख्या 01, 03 एवं 05 को स्वीकार योग्य नहीं माना गया तथा आरोप संख्या 02 एवं 04 को स्वीकार योग्य माना गया है।30 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से प्राप्त मंतव्य के सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री हुसैन के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, मधुबनी को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री हुसैन से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, अपर सचिव।

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सं0 08/आरोप-01-86/2017,सा॰प्र॰-9673

------ 13 अक्तूबर 2020 श्री सुरेश प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1369/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, जमुई के विरूद्ध दशहरा एवं मुहर्रम, 2017 के अवसर पर विधि व्यवस्था संधारण में लापरवाही बरते जाने के संबंध में जिला पदाधिकारी, जमुई के पत्रांक-1339 दिनांक 04.11.2017 द्वारा प्रतिवेदन उपलब्ध कराते हुए अनुशासनिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया। उक्त क्रम में जिला पदाधिकारी, जमुई से श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र की माँग की गयी, परन्तु स्मारित किये जाने के बावजूद जिला पदाधिकारी से आरोप पत्र अप्राप्त रहा। जिला पदाधिकारी से आरोप पत्र अप्राप्त रहने के फलस्वरूप उनके द्वारा प्रतिवेदित आरोप/अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित करते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के अनुमोदनोंपरांत विभागीय पत्रांक-16142 दिनांक 28. 11.2019 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। जिसके क्रम में श्री प्रसाद द्वारा अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-149-2 दिनांक 14.12.2019) समर्पित किया गया। जिसमें उनके द्वारा लगाये गये आरोपों को निराधार बताते हुए आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-966 दिनांक 20.01.2020 द्वारा जिला पदाधिकारी, जमुई से उनके स्पष्टीकरण पर मंतव्य की माँग की गयी। स्मारोपरांत मंतव्य अप्राप्त रहा। श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पत्र एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि प्रस्तुत मामला विधि व्यवस्था संधारण में लापरवाही बरते जाने के कारण दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस तथा ताजिया का अखाड़ा निकालने के दौरान दो समुदायों में साम्प्रदायिक तनाव/विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाने से संबंधित है। फलतः उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए मामले की विस्तृत जाँच कराने की आवश्यकता पायी गयी। अतएव सम्यक विचारोपरांत श्री सुरेश प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1369/11 के विरूद्ध गठित आरोपों की वृहद जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 (2) में विहित रीति से कराने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर तथा उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी जिला पदाधिकारी, जमुई द्वारा नामित कोई वरीय पदाधिकारी होंगे। श्री प्रसाद से अपेक्षा की जाती है वे अपने बचाव बयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा की संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हिमांशु कुमार राय, अपर सचिव।

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सं0 08/आरोप-01-146/2014,सा॰प्र॰-9171

------ 5 अक्तूबर 2020 श्री विश्वजीत हेनरी, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-815/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बनमनखी, पूर्णियाँ के विरूद्ध बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम एवं भू-हदबन्दी अधिनियम का घोर उल्लंघन करते हुए निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु अपने क्षेत्राधिकार से हटकर भूमि विवाद निराकरण वाद सं॰-80/11-12 में अनियमित आदेश पारित करने संबंधी आरोपों के लिए आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ के पत्रांक-513 दिनांक 10.07.2013 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न31 बिहार गजट, 21 अक्तूबर 2020 करते हुए विभागीय पत्रांक-8418 दिनांक 13.06.2016 द्वारा श्री हेनरी से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री हेनरी से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-7724 दिनांक 23.06.2017 द्वारा जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ से मंतव्य की माँग की गयी। श्री हेनरी के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ द्वारा अपने मंतव्य में यह उल्लेख किया गया है कि चूँकि मामला अपर समाहर्त्ता के न्यायालय में विचाराधीन था, अतः श्री हेनरी को भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के तहत वाद में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करना चाहिए था, जिसका उल्लंघन श्री हेनरी द्वारा किया गया है। अतः श्री हेनरी के विरूद्ध आरोपो को प्रमाणित पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2951 दिनांक 26.02.2020 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 में विहित प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित निम्नांकित दंड (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2011-12) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उपर्युक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री हेनरी द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 18.06.2020 समर्पित किया गया। जिसमें उनके द्वारा यह उल्लेख किया गया है कि ''भूमि विवाद निराकरण वाद सं॰-80/11-12 में क्षेत्राधिकार से हटकर निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु अनियमित आदेश पारित नहीं किया गया है। मेरे द्वारा पारित आदेश में वाद को अस्वी—त किया गया है। मेरे द्वारा पारित आदेश को माननीय अपीलीय प्राधिकार द्वारा विखंडित कर दिया गया। विधि द्वारा यह निरूपित सिद्धान्त है कि जबतक किसी न्यायिक या अर्द्ध न्यायिक पदाधिकारी के रूप में संगीन आरोप नहीं हो तो मात्र तकनीकी त्रूटिपूर्ण आदेश पारित किये जाने के आधार पर दंड नहीं दिया जा सकता है।'' श्री हेनरी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री हेनरी को भूमि विवाद निराकरण वाद सं॰-80/11-12 में अन्तिम आदेश पारित नहीं करना चाहिए था, क्योंकि यह मामला अपर समाहर्त्ता के न्यायालय में विचाराधीन था, जिसका उल्लंघन श्री हेनरी द्वारा किया गया है। इनके द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कोई भी नया तथ्य एवं साक्ष्य स्वरूप कोई नया अभिलेख/कागजात संलग्न नहीं किया गया है। अतः पुनर्विलोकन आवेदन स्वीकार योग्य नहीं है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री हेनरी द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2951 दिनांक 26.02.2020 द्वारा संसूचित दंड ((i) निन्दन (आरोप वर्ष-2011-12) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक) को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हिमांशु कुमार राय, अपर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 25—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 21 October 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2020-10-21.37/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2020-10-21.37.