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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 23 December 2020

Published 23 December 2020

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2020-12-23.46
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-26 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i"B

i"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 27-27 पूरक

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पूरक-क 28-282 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचना

10 दिसम्बर 2020

सं0 1/विविध-26/2020-6810(s)--बिहार राज्य मुकदमा नीति (Bihar Litigation Policy-2011) के कंडिका-2(4)(ख) में निहित प्रावधान के अनुसार विभाग में बढ़ते मुकदमों की संख्या में कमी लाने तथा उनके शिकायतों के निवारण हेतु विभागीय अधिसूचना संख्या-1090 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-1091 (एस) दिनांक 06.02.2015 द्वारा विभागीय स्तर पर अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है। वर्तमान में Covid-19 को देखते हुए समिति के वृहद स्वरूप को सीमित करने की आवश्यकता महसूस की गई है। अतः पूर्व में निर्गत अधिसूचना संख्या-1090 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-1091 (एस) दिनांक 06.02.2015 द्वारा अधिसूचित विभागीय स्तर पर अधिकार प्राप्त समिति का संशोधित गठन निम्नवत्‌ हैः- (i) सचिव/प्रधान सचिव/अपर मुख्य सचिव पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। - अध्यक्ष

(ii) विशेष सचिव पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। - संयोजक

(iii) अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। - सदस्य

(iv) अभियंता प्रमुख (संविदा एवं कार्य प्रबंधन) पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। - सदस्य

(v) अपर सचिव/संयुक्त सचिव पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। - सदस्य

(vi) विधि प्रभारी, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना। - सदस्य

2. विभागीय अधिसूचना संख्या-1090 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-1091 (एस) दिनांक 06.02.2015 को इस हद तक संशोधित समझा जाय।

3. उक्त प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बब्लु कुमार, उप-सचिव (प्र॰को॰)।

------- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचना 9 दिसम्बर 2020

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-07/2012-3275/प॰व॰--श्री ए॰के॰ पाण्डेय, भा॰व॰से॰, (BH:86), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), बिहार, पटना द्वारा दिनांक-29.10.2020 को स्वैच्छिक सेवानिवृति हेतु समर्पित आवेदन के आलोक में, अखिल भारतीय सेवायें (मृत्यु-सह-सेवानिवृति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम-16(2) के तहत श्री ए॰के॰ पाण्डेय को दिनांक-31.01.2021 के अपराह्‌न के प्रभाव से स्वैच्छिक सेवानिवृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।3 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग

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अधिसूचनाएं

8 दिसम्बर 2020

सं0 8/आ0 (राज0उ0)-02-14/2018-3986--श्री अमृतेश कुमार, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध, सिवान सम्प्रति अररिया के विरूद्ध सिवान पदस्थापन अवधि में तरवारा मोड़ पर दिनांक-18.09.2018 को की गयी छापेमारी में जप्त शराब को मालखाना में रखे जाने तथा जप्त प्रदर्श से 106 कार्टून अधिक शराब मालखाना में पाये जाने के मामले में बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधान का उल्लंघन, मालखाना का निरीक्षण/पर्यवेक्षण नही कर अधीक्षक उत्पाद के दायित्व के प्रति लापरवाही एवं शिथिलता बरतने, अपने अधीनस्थ पर नियंत्रण स्थापित करने में विफल रहना तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के प्रावधान का उल्लंघन के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-1875 दिनांक-22.05.2019 के द्वारा विभागीय कार्यवाही सांस्थित की गयी।

2. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके पत्रांक-1863 दिनांक-24.04.2020 के द्वारा समर्पित जॉच प्रतिवेदन में निष्कर्षित किया गया है कि छापेमारी की घटना के 12 दिनों पश्चात जिला पदाधिकारी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय समिति द्वारा मालखाना के भौतिक सत्यापन के उपरांत 280 कार्टून के बजाय 386 कार्टून शराब पाया जाना यह दर्शाता है कि जप्त प्रदर्श से अधिक शराब अवैध रूप से मालखाना में रखा गया था, जो मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 का उल्लंघन तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 का उल्लंघन है।

3. श्री कुमार द्वारा अपने द्वितीय बचाव बयान में उल्लिखित किया गया है कि उन्हें किसी तरह का शंका करने का आधार नजर नहीं आया और किसी तरह की शिकायत की सूचना उनके समक्ष नहीं आई। उनके द्वारा जान-बूझकर कहीं भी कोई चुक नहीं की गयी। विभागीय समीक्षा में इन बिन्दुओं पर सम्यक रूप से विचार नहीं किया गया है।

4. श्री कुमार का नियंत्री पदाधिकारी के रूप में दायित्व है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मियों द्वारा प्रतिवेदित सभी तथ्यों की समीक्षा करें तथा उनका ससमय भौतिक निरीक्षण एवं सत्यापन करें, जिसमें वे विफल रहे हैं। आरोपी पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है, अतएव इनका बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।

5. समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्ध बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधान का उल्लंघन, मालखाना का निरीक्षण/पर्यवेक्षण नही कर अधीक्षक उत्पाद के दायित्व के प्रति लापरवाही एवं शिथिलता बरतने, अपने अधीनस्थ पर नियंत्रण स्थापित करने में विफल रहना तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के उल्लंघन करने के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रंण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 (vi) के तह्‌त तीन वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध किये जाने का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया ।

6. विनिश्चित दंड के प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-3147 दिनांक-05.10.2020 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक-2163 /लो0से0आ0 दिनांक-24.11.2020 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव में सहमति व्यक्त किया गया है।

अतः संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, आरोपी पदाधिकारी के द्वितीय बचाव-बयान एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति पत्र पर सम्यक विचारोपरान्त श्री अमृतेश कुमार, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध, सिवान सम्प्रति, अररिया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रंण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-14 (vi) के तह्‌त तीन वार्षिक वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दंड अधिरोपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।

------- 7 दिसम्बर 2020 सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-02-01/2019-3971-श्री मनोज कुमार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध, बेगूसराय सम्प्रति निलंबित को राजीव नगर थाना, पटना द्वारा बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम-2016 की धारा 37(A) के अधीन थाना कांड सं0-537/2018 दिनांक-26.12.2018 दर्ज करते हुए न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के परिणामस्वरूप श्री सिंह को निलंबित करते हुए अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन, कर्त्तव्यहीनता और बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-2648 दिनांक-24.07.2019 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी। 2. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी तत्कालीन उपायुक्त मद्यनिषेध (आ0भ0) श्री ओम प्रकाश मंडल द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में निष्कर्षित किया गया है कि "आरोपी पदाधिकारी के पास से अवैध हथियार बरामद का आरोप प्रमाणित नहीं होता है। शराब पीने के मामले में ब्लड की जाँच नहीं किया जाना तथा ब्रेथ एनलाईजर में तकनीकी खराबी का प्रतिवेदित होना साक्ष्य को संदेहास्पद बनाता है। संदेह का लाभ आरोपी पदाधिकारी के पक्ष में जाता है। अतः शराब पीने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।" 3. संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से असहमत होते हुए निम्नलिखित असहमति के बिन्दु का उल्लेख करते हुए विभागीय पत्रांक-2654 दिनांक-01.09.2020 द्वारा द्वितीय बचाव-बयान की माँग की गयी।4 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 शराब पीने के संदेह पर पकड़े गये अभियुक्त की ब्रेथ एनलाइजर से प्राथमिक जाँच पुलिस या उत्पाद पदाधिकारी द्वारा की जाती है। बे्रथ एनलाइजर का कैलीब्रेशन हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी जाँचकर्त्ता को है, यह आवश्यक नहीं है। जाँचकर्त्ता द्वारा उपलब्ध बे्रथ एनलाइजर से जाँच कर प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है। आपके मामले में भी बे्रथ एनलाइजर के प्रतिवेदन के आधार पर ही पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की गयी है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन में इस बात की भी उल्लेख नहीं किया है कि पकड़े गये सभी अभियुक्तों का ब्लड सैंपल लेने का सरकारी निदेश अथवा परिपाटी रही है या नहीं। 4. श्री सिंह ने अपने द्वितीय बचाव-बयान में उल्लिखित किया है कि-"स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक-14 दिनांक-18.08.2016 में रक्त में अल्कोहल की उपस्थिति की जाँच हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्गत किया गया है। उक्त में वर्णित है कि न्यायिक दृष्टिकोण से पुलिस पदाधिकारी किसी व्यक्ति के खून में शराब की उपस्थिति की आवश्यकता होने पर अनुरोध पत्र के साथ उस व्यक्ति के रक्त परीक्षण हेतु अस्पताल में भेजा जायेगा।" 5. आरोपी पदाधिकारी ने अपने बचाव-बयान के साथ ऐसा कोई प्रमाणक प्रस्तुत नहीं किया है जिससे यह प्रमाणित हो सके कि उनके द्वारा रक्त जाँच का अनुरोध पुलिस पदाधिकारी से किया था। श्री सिंह के द्वारा सिर्फ अपने पूर्व के कथन का उल्लेख द्वितीय बचाव-बयान में किया है, कोई नया तथ्य या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है। अतएव इनका बचाव-बयान स्वीकार योग्य नहीं है। 6. अतः श्री मनोज कुमार सिंह, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध बेगूसराय सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन एवं उनके द्वितीय बचाव-बयान पर सम्यक विचारोपरान्त निम्नलिखित निर्णय संसूचित किया जाता है :- (i) श्री सिंह के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम -14(v) के तहत तीन वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दंड अधिरोपित किया जाता है। (ii) श्री सिंह को तत्कालिक प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। निलंबन अवधि का जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं होगा। 7. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।

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सहकारिता विभाग

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अधिसूचनाएं

28 अक्तूबर 2020

सं0 8/नि॰को॰(रा॰)विविध-835/2018-2763--श्री मिथिलेश कुमार, तत्कालीन सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, किशनगंज सम्प्रति जिला सहकारिता पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण, बेतियाँ के जिला सहकारिता पदाधिकारी, किशनगंज के द्वारा पैक्स एवं व्यापारमंडल के विरूद्ध बकाया सरकारी ऋण एवं अंकेक्षण शुल्क मद में कुल मांग एवं उसकी वसूली संबंधी प्रतिवेदन नहीं उपलब्ध कराने एवं अंकेक्षण शुल्क मद में बकाया सरकारी राजस्व की वसूली नहीं किये जाने के प्रतिवेदित आरोप में विभागीय पत्रांक-4061 दिनांक-07.12.2018 द्वारा स्पष्टीकरण की पृच्छा की गई। श्री मिथिलेश कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण पर निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना से मंतव्य प्राप्त किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण एवं निबंधक से प्राप्त मंतव्य के सम्यक समीक्षोपरान्त श्री कुमार प्रतिवेदित आरोप के लिए दोषी पाये गये हैं।

अतः श्री मिथिलेश कुमार, तत्कालीन सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, किशनगंज सम्प्रति जिला सहकारिता पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण, बेतियाँ को भविष्य के लिए चेतावनी का दण्ड संसूचित किया जाता है।

इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

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12 नवम्बर 2020

सं0 8/नि॰को॰ (रा॰)विभागीय-708/2020-2873--बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार, बिहार, पटना के पत्रांक-762 दिनांक-05.03.2020 एवं पत्रांक-1242 दिनांक-03.06.2020 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि श्री निकेश कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद द्वारा गोठौली पैक्स, प्रखंड-वारूण, औरंगाबाद के मतदाता सूची की तैयारी में बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार के निदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए प्राधिकार के पत्रांक-2293 दिनांक-11.12.2019 द्वारा श्री कुमार5 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुमार ने अपना स्पष्टीकरण अपने पत्रांक-2240 दिनांक-17.12.2019 द्वारा समर्पित किया। प्राधिकार द्वारा श्री कुमार का स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाये जाने के कारण चेतावनी निर्गत करने की अनुशंसा की गयी। उक्त अनुशंसा के आलोक में समीक्षोपरान्त श्री निकेश कुमार, जिला सहकारिता पाधिकारी, औरंगाबाद को चेतावनी दी जाती है।

इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

------- 11 दिसम्बर 2020 सं0 1/रा॰स्था॰निजी-68/2020 सह॰-3053--श्री अभय झा, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ (बिहार सहकारिता प्रशासनिक सेवा संवर्ग, वरीयता क्रमांक-32/18) सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में की सेवा श्री अशोक चौधरी, माननीय मंत्री, भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना, विज्ञान एवं प्रावैद्यिकी विभाग, बिहार, पटना, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, बिहार, पटना एवं शिक्षा विभाग, बिहार, पटना के आप्त सचिव के रूप में कार्य करने हेतु मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना को सौंपी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰प्रषा॰स्थाना॰-29/2020 सह॰/1911--बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के स्तम्भ-2 में अंकित निम्नांकित पदाधिकारियों को अपने कार्यों के अतिरिक्त स्तम्भ-5 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तात्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/सिविल लिस्ट/मेद्या क्रमांक/गृह जिला पदनाम वर्त्तमान पदस्थापन पद/स्थान अतिरिक्त प्रभार
1 2 3 4 5
1 श्री बिरेन्द्र ठाकुर 10/18 सहरसा उप निबंधक, स॰स॰ उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा/उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा/संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, पूणियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ
2. श्री कुमार शांत रक्षित 16/18 लखीसराय सहायक निबंधक, स॰स॰ सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ (बुनकर), गुलजारबाग, पटना संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना
3 श्री अनिल कुमार गुप्ता 72/18 सिवान सहायक निबंधक, स॰स॰ प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, समस्तीपुर प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, रहिका (मधुबनी)
4 श्री अमजद हयात वर्क 49/18 मुजफ्फरपुर सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, दरभंगा अतिरिक्त प्रभार सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, दरभंगा/ बेनीपुर/महाप्रबंधक, आई0सी0डी0पी0, दरभंगा जिला सहकारिता पदाधिकारी, मधुबनी/सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, मधुबनी/झंझारपुर /बेनीपट्‌टी
5 श्री बबन मिश्र 17/18 भोजपुर सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, भोजपुर जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर/ सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, बक्सर/डुमरॉव
6 श्री अरूण कुमार 65/18 जमुई सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, बाँका कार्यालय जिला सहकारिता पदाधिकारी, कटिहार
7 श्री निकेश कुमार 52/18 हजारीबाग सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, गया कार्यालय जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, स0स0, अरवल
8 श्री बाबू राजा 63/18 सिवान सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, जहानाबाद कार्यालय जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद
9 श्री सैयद मशरूख आलम 29/18 पश्चिमी चम्पा0 सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, सहरसा कार्यालय जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, स0स0, अररिया
10 श्री अमृताश ओझा पटना सहायक निबंधक, स॰स॰ सहायक निबंधक, स0स0, सोनपुर जिला सहकारिता पदाधिकारी, वैशाली (हाजीपुर)
11 श्री रंजीत कुमार 405/56वीं से 59वीं बेगूसराय सहायक निबंधक, स॰स॰ स॰नि॰, स॰स॰, समस्तीपुर प्रबंध निदेशक, मुंगेर-जमुई केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, मुंगेर
12 श्री शशिकान्त शशि 847/60वीं से 62वीं पटना सहायक निबंधक, स॰स॰ सहायक निबंधक, स॰स॰, गया प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, नवादा
6 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

2. उच्चतर पद में पदस्थापित होने की दषा में पदाधिकारी अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभारी समझे जायेंगे।

3. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰प्रषा॰स्थाना॰-29/2020 सह॰/1912--बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के स्तम्भ-2 में अंकित निम्नांकित पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित पद/स्थान से स्थानान्तरित करते हुए स्तम्भ-5 में अंकित पद पर पदस्थापित करते हुए स्तम्भ-6 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तात्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/सिविल लिस्ट/मेद्या क्रमांक/गृह जिला पदनाम वर्त्तमान पदस्थापन पद/स्थान नवपदस्थापित पदस्थापन अतिरिक्त प्रभार
1 2 3 4 5 6
1 मो॰ मुजीबुर्र रहमान, 07/18 सीतामढ़ी उप निबंधक, स॰स॰ उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर। संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, कार्यालय निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना। संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ (पणन), बिहार, पटना एवं उप निबंधक, सहयोग समितियाँ (न्या॰), पटना।
2 श्री जवाहर प्रसाद, 08/18 मधुबनी उप निबंधक, स॰स॰ उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा। उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर। संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर/संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, कोषी प्रमंडल, सहरसा
3 श्री शषि शेखर सिन्हा 18/18 जहानाबाद सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ उप निबंधक, सहयोग समितियाँ(ईंख), बिहार, पटना। अति॰प्रभार-प्रबंध निदेषक, बिहार राज्य सुगर को-ऑपरेटिव फेड॰लि॰, पटना। संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, मगध प्रमंडल, गया। --
4 श्री कृष्णा चौधरी, 21/18 पटना उप निबंधक, स॰स॰ संयुुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, मगध प्रमंडल, गया। संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, सारण प्रमंडल, छपरा। --
5 श्री संजय कुमार झा, 23/18 सहरसा सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, कटिहार। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर पश्चिमी। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर पूर्वी।
6 श्री मनोज कुमार सिंह, 24/18 सारण सहायक निबंधक, स॰स॰ उप महाप्रबंधक, बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, पटना। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ (अवकाश/प्रशिक्षण रक्षित), कार्यालय निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना। उप महाप्रबंधक, बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, पटना।
7 श्री अजय कुमार अंलकार, 25/18 वैशाली सहायक निबंधक, स॰स॰ व्याख्याता-सह- प्राचार्य, सहकारिता प्रशिक्षण केन्द्र, पूसा। जिला सहकारिता पदाधिकारी, सारण, छपरा। --
8 श्री मो॰ निसार अहमद, 39/18 मधुबनी सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, सारण, छपरा। उप महाप्रबंधक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि॰, पटना। --
9 श्रीमती लवली, 67/18 औरंगाबाद सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, पटना। प्रबंध निदेशक, दी पाटलिपुत्रा से॰को-ऑप॰ बैंक लि॰, पटना --
10 श्री अमर कुमार झा, 69/18 खगड़िया सहायक निबंधक, स॰स॰ प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, गया। प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, औरंगाबाद। प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰,गया।
11 श्री विनोद, 15/18 सिवान सहायक निबंधक, स॰स॰ प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, रहिका (मधुबनी)। प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य हस्तकरघा, बुनकर कॉप॰ फेड॰ लि॰, पटना प्राचार्य, सहकारिता प्रशिक्षण केन्द्र, पूसा
12 श्री अखिलेश कुमार 13/18 मुंगेर सहायक निबंधक, स॰स॰ जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि॰, पटना --
13 श्री सुभाष कुमार 50/18 शिवहर सहायक निबंधक, स॰स॰ सहायक अनुश्रवण पदाधिकारी, समेकित सहकारी विकास परियोजना, पटना सहायक निबंधक, अ॰र॰, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना, निबंधक, स॰ स॰ कार्यालय, बिहार, पटना सहायक अनुश्रवण पदाधिकारी, समेकित सहकारी विकास परियोजना, पटना
14 श्रीमती शशिबाला रावल, 54/18 गोपालगंज सहायक निबंधक, स॰स॰ अवकाश के पश्चात्‌ पदस्थापन की प्रतीक्षा में जिला सहकारिता पदाधिकारी, पटना। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, दानापुर। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मसौढी। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, बाढ़। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना सिटी।
7 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 8 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

2. उपर्युक्त नवपदस्थापन सूची के क्रमांक-2, 7, 11, 12 एवं 13 में अंकित पदाधिकारियों का स्थानान्तरण उनके अभ्यावेदन के आधार पर किया गया है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के संकल्प संख्या-434 दिनांक-01.03.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में अभ्यावेदन के आधार पर पदाधिकारियों के स्थानान्तरण/पदस्थापन की स्थिति में उन्हें स्थानान्तरण यात्रा भत्ता एवं पारगमन अवधि अनुमान्य नहीं होगी।

3. उच्चतर पद में पदस्थापित होने की दषा में पदाधिकारी अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभारी समझे जायेंगे।

4. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰अंके॰स्थाना॰-30/2020 सह॰/1913--बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा संवर्ग के स्तम्भ-2 में अंकित निम्नांकित पदाधिकारियों को अपने कार्यों के अतिरिक्त स्तम्भ-5 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तात्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/मूल कोटि की वरीयता पदनाम वर्त्तमान पदस्थापन पद/स्थान वर्त्तमान में अतिरिक्त प्रभार पद/स्थान
1 2 3 4 5
1 श्री जितेन्द्र कुमार 01/15 उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियां उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियां, प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक
पटना बिहार राज्य सहकारी बैंक, पटना लि॰, नालन्दा
2 श्री कामेश्वर ठाकुर 05/15 सीतामढ़ी उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियां उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियां कोषी एवं दरभंगा प्रमण्डल, सहरसा जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सुपौल। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मधेपुरा
3 मो॰ फरहान दानिश बेगूसराय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियां, शिवहर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियां, प0 चम्पा0, बेतिया
4 सुश्री स्वप्निल पटना जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियां, सारण (छपरा) जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियां, सिवान
9 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

2. उच्चतर पद में पदस्थापित होने की दषा में पदाधिकारी अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभारी समझे जायेंगे।

3. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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30 जून 2020

सं0 01/रा॰स्था॰अंके॰स्थाना॰-30/2020 सह॰/1914--बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा संवर्ग के स्तम्भ-2 में अंकित निम्नांकित पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित पद/स्थान से स्थानान्तरित करते हुए स्तम्भ-5 में अंकित पद पर पदस्थापित करते हुए स्तम्भ-6 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तात्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/मूल कोटि की वरीयता/ ग ृह जिला पदनाम वर्त्तमान पदस्थापन पद/स्थान नवपदस्थापित पदस्थापन अतिरिक्त प्रभार
1 2 3 4 5 6
1 श्री सुभाष चन्द्र वर्मा 10/15 मुंगेर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, कैमूर। कार्यालय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, गया --
2 श्री रतन कुमार बेगूसराय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, रोहतास। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, जहानाबाद। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, औरंगाबाद।
3 मो॰ इम्तियाज अहमद पटना जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर। कार्यालय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, नालन्दा, बिहारशरीफ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, नवादा। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, शेखपुरा।
4 श्री सुरेन्द्र नाथ तिवारी भोजपुर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, खगड़िया। कार्यालय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितिया बाँका/ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितिया कटिहार
5 श्री चन्द्र मोहन कुँअर दरभंगा जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सुपौल। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ,, मधुबनी --
6 श्री अजेय कुमार सिन्हा दरभंगा जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, कटिहार। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ॰, पूर्णियाँ, प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, कटिहार।
7 श्री रविन्द्र कुमार लाभ सीतामढ़ी जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, नालन्दा। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मोतिहारी
8 श्री जयनाथ सिंह भोजपुर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, बक्सर। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, अरवल। --
9 श्री सुधीर कुमार मुंगेर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, जहानाबाद। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, बेगूसराय। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, खगड़िया। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितिया, सहरसा।
10 श्री शशि भूषण प्रसाद पटना जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, अररिया। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भोजपुर, आरा। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, बक्सर।
11 श्री किशोर कुमार झा पूर्णियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, गया। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियां, अररिया। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियां, किशनगंज। प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, पूर्णियाँ
12 श्री कृष्णकान्त शर्मा 06/15 नालन्दा उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ पदस्थापन की प्रतीक्षा में उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, भूमि विकास बैंक, पटना। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, रोहतास/ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, कैमूर-भभुआ।
13 श्री अंजनी कुमार सिन्हा मुजफ्फरपुर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मधुबनी जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, दरभंगा। --
10 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

2. उपर्युक्त नवपदस्थापित सूची के क्रमांक-1, 2, 7, 8, 10 एवं 11 में अंकित पदाधिकारियों का स्थानान्तरण उनके अभ्यावेदन के आधार पर किया गया है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के संकल्प संख्या-434 दिनांक-01.03.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में अभ्यावेदन के आधार पर पदाधिकारियों के स्थानान्तरण/पदस्थापन की स्थिति में उन्हें स्थानान्तरण यात्रा भत्ता एवं पारगमन अवधि अनुमान्य नहीं होगी।11 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 3. उच्चतर पद में पदस्थापित होने की दषा में पदाधिकारी अपने ही वेतनमान में उच्चतर पद के प्रभारी समझे जायेंगे।

4. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आनन्द शर्मा, संयुक्त सचिव।

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सहकारिता विभाग

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सं0 1/रा॰स्था॰बि॰स॰से॰-पद॰-79/2007-1920

प्रेषक, संजय कुमार, प्रभारी पदाधिकारी।

सेवा में, प्रधान महालेखाकार (ले॰ एवं हक॰), बिहार, पटना।

पटना, दिनांक 3 जुलाई 2020 विषयः- श्री दिनेश कुमार, उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल का दिनांक 28.11.2015 से दिनांक-22.06.

2016 तक मकान किराया भत्ता के साथ वेतन पूर्जा निर्गत करने के संबंध में।

प्रसंगः- आपका पत्रांक-GN:250220201209580

महाशय, निदेशानुसार उपर्युक्त प्रासंगिक विषयक श्री दिनेश कुमार, उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल का दिनांक-28.11.2015 से दिनांक-22.06.2016 तक मकान किराया भत्ता की स्वीकृति दी जाती है।

विश्वासभाजन, संजय कुमार, प्रभारी पदाधिकारी।

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समाहरणालय, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी (जिला स्थापना शाखा) ------- आदेश 28 अगस्त 2020 सं0 1013--श्री दीनबन्धु पाण्डेय, राजस्व कर्मचारी, अंचल घोड़ासहन, द्वारा दिनांक-16.10.2017 को दिये गये आवेदन पत्र में आरोप लगाया गया की अंचलाधिकारी घोड़ासहन एवं प्रभारी अंचल निरीक्षक द्वारा अंचल कार्यालय के ज्ञापांक-877 दिनांक-31.12.2016 के आदेश के अनुपालन हेतु 25000/- रूपये की मांग रिश्वत के रूप से उनसे किया गया तथा दलालों के इशारे पर उनसे प्रभार नहीं लिया गया। अंचलाधिकारी द्वारा उन्हें मानसिक, आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने के कारण उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायाल पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-14755/2017 दायर किया गया जो तत्‌ समय सुनवाई हेतु लम्बित था।

उनके आवेदन पत्र में वर्णित तथ्यों की जाँच कर जाँच प्रतिवेदन अपर समाहर्त्ता पूर्वी चम्पारण मोतिहारी से इस कार्यालय के पत्रांक-1238 दिनांक-06.12.2017 के द्वारा की गई। अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री दीनबन्धु पाण्डेय के आचारण को दुःसाहस स्वेच्छाचारिता अनुशासनहीनता एवं आदेश की अवहेलना का परिचायक बताया गया। उक्त आलोक में इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक-123 दिनांक-19.01.2018 द्वारा श्री पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए निलम्बन मुख्यालय अनुमंडल कार्यालय अरेराज निर्धारित किया गया।

अंचलाधिकारी, घोड़ासहन के पत्रांक-54 दिनांक-20.01.2018 के द्वारा श्री दीनबन्धु पाण्डेय के विरूद्ध प्रपत्र ''क'' में आरोप पत्र गठित कर उपलब्ध कराया गया उसे अनुमोदित करते हुए विभागीय कार्यवाही का संचालन हेतु इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक-597 दिनांक-12.04.2018 के द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, सिकरहना (ढाका) को संचालन पदाधिकारी तथा अंचलाधिकारी घोड़ासहन को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-अनुमंडल पदाधिकारी सिकरहना (ढाका) के पत्रांक-32 दिनांक-25.01.2019 द्वारा प्राप्त संचालन प्रतिवेदन के आलोक में श्री दीनबन्धु पाण्डेय, निलम्बित राजस्व कर्मचारी, अंचल घोड़ासहन से इस कार्यालय के ज्ञापांक-268 दिनांक-06.03.2019 के द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा की मांग की गयी।

श्री दीनबन्धु पाण्डेय निलम्बित राजस्व कर्मचारी, अंचल घोड़ासहन के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-3961/2018 में दिनांक-18.11.2019 को पारित आदेश के आलोक में पुनः विभागीय कार्यवाही के12 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 संचालन हेतु इस कार्यालय के ज्ञापांक-1604 दिनांक-21.12.2019 के द्वारा अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी को संचालन पदाधिकारी तथा अंचलाधिकारी घोड़ासहन को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण मोतिहारी के पत्रांक-27 दिनांक-15.07.2020 द्वारा श्री दीनबन्धु पाण्डेय, निलम्बित राजस्व कर्मचारी घोड़ासहन के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसके आलोक में इस कार्यालय के ज्ञापांक-888 दिनांक-28.07.2020 द्वारा श्री पाण्डेय से अपना पक्ष पुनः रखने हेतु द्वितीय कारणपृच्छा की मांग की गई। संचालन पदाधिकारी का संचालन प्रतिवेदन तथा आरोपी कर्मी का द्वितीय कारणपृच्छा का विवरण निम्नवत्‌ हैः-

क्र0 आरोप आरोपी का स्पष्टीकरण उपस्थापन पदाधिकारी का प्रतिवेदन एवं मंतव्य संचालन पदाधिकारी का मंतव्य एवं अनुशांसा आरोपी कर्मी का कारण-पृच्छा
01. श्री दिनबंधु पाण्डेय, राजस्व कर्मचारी द्वारा अपने प्रभार के हल्का 06 घोड़ासहन की अवधि में बिहार दाखिल खारिज अधिनियम - 2011 एवं नियमावली में विहित प्रावधानों के विपरीत जान बुझकर दाखिल खारिज आवेदन सं- 0501110220815 01254मौजा- घुघुआ अन्तर्गत खाता स 9-08, ं खेसरा सं0- 2063, रकवा- 4 धुर गलत प्रतिवेदन करते हुए गैरमजरूआ आम भूमि (सरकारी भूमि) का दाखिल खारिज की स्वीकृति करा दिया गया ह ै और इस कृत्य से सरकार को क्षति पहॅुचाने का प्रयास किया गया है। इस आरोप के संबंध में कहना है कि खाता सं0- 08, खेसरा सं0- 2063,रकवा- 0-0-4 धुर जो अंकित किया गया है। वस्तुतः उस जमीन का दस्तावेज में रकवा -0-5-2 धुर है। जिसमें मात्र- 0-0-14 धुर जमीन गैरमजरूआ आम है। शेष सभी जमीन रैयती है। अंचल में योगदान करने के पश्चात्‌ मुझे कभी भी गैरमजरूआ आम जमीन के विवरण की सूची प्राप्त नही हुई है। अंचलाधिकारी महोदय से भी म रे े द्वारा लगातार सूची प्राप्त कराने ह त े ु अनुरोध किया गया। परन्तु अबतक मुझे इस आशय की सूची प्राप्त नही हुई है। आवेदक को यह जमीन बयनामा से प्राप्त हुआ है। मैंने प्रस्ताव भी दस्तावेज में अंकित जमीन का बयनामा हैं। गैरमजरूआ आम की सूची नही रहने के कारण ही मेरे द्वारा 0-5-2 धुर में सन्निहत 0-0-14 धूर का भी प्रस्ताव दाखिल खारिज मे दिया गया ं है। परन्तु सवे र्क्षण के क्रम ंमे जैसे ही मुझे सरकारी नक्शा प्राप्त हुआ मैंनें इस जमीन को चिन्हि्‌त करते हुए स्वयं अ चलाधिकारी ं हल्का कर्मचारी का स्पष्टीकरण स्वीकार्य नही है। उल्लेखनीय है कि हल्का कर्मचारी क े कार्यालय म ं े सरकारी भूमि स े संबंधित प जी ं संधारित रहती ह ै अगर पूर्व क े कर्मचारी द्वारा इन्हे उक्त पंजी प्रभार में प्राप्त नही हुआ तो राजस्व कर्मचारी को अंचलाधिकारी को उसकी लिखित सूचना देनी चाहिए थी। साथ ही राजस्व कर्मचारी के रूप म ं े कार्यरत कर्मी का यह दायित्व है कि प्रभार प्राप्त करते ही उसे सरकारी भूमि के संबंध मे जानकारी ं प्राप्त करने क े पश्चात दाखिल खारिज प्रस्ताव देना चाहिए था। श्री पाण्डेय द्वारा उनसेे सभी तथ्यों को जानबुझकर अनदेखी की गई और जब ममला संज्ञान में आया तो उनके द्वारा मानवीय भूल बनाकर अपना प़क्ष अंचलाधिकारी के समक्ष रखा गया। दाखिल खारिज मे की गई ं मूल मानवीय भूल की श्रेणी में नही आता है। यह पूर्णतः आवेदक के विरूद्ध 4 धुर गैरमजरूआ आम भूमि का दाखिल खारिज हेतु गलत प्रस्ताव देकर दाखिल खारिज की स्वीकृति करा देने का आरोप लगाया गया है इस आरोप के संबंध मे ं आरोपी के द्वारा अपने जवाब में उल्लेख किया गया है, कि गैरमजरूआ आम भूमि से संबंधित विवरणी उन्हे प्राप्त नही हुई। इसके लिए उनके द्वारा अंचलाधिकारी से सूची उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया। अंचलाधिकारी, घोड़ासहन के द्वारा आरोपी क े जबाव पर दिये गये मंतव्य में उल्लेख किया गया है, कि सरकारी भूमि से संबंधित पंजी उन्हे प्रभार में प्राप्त नही हुआ तो इसे लिखित सूचना देनी चाहिए थी। आरोपी का दायित्व था, कि प्रभार प्राप्त करते ही उसे सरकारी भूमि के संबंध मे जानकारी प्राप्त ं होने के पश्चात्‌ दाखिल-खारिज का प्रस्ताव देना चाहिए था यह भूल मानवीय भूल की श्रेणी में नही आता है। यह कार्य के प्रति लापरवाही एवं पद के दुरूपयोग को दर्शाता है। इस तरह आरोपित कर्मचारी के जबाव एवं उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत मंतव्य के आधार पर यह स्पष्ट होता है, कि दाखिल इस आरोप के संंबंध में कहना है कि खाता नं0-08, खेसरा नं0-2063, रकबा-0-0-4 धुर जो अंकित किया गया है। वस्तुतः उस जमीन का दस्तावेज म ं े रकबा 0-5-2 धुर है। जिसमें मात्र 0-0-14 धुर जमीन गैरमजरूआ आम है। शेष सभी जमीन रैयती है। अंचल में योगदान करने के पश्चात मुझें कभी भी गैरमजरूआ आम जमीन के विवरण की सूची प्राप्त नहीं हुई ह ै। अंचलाधिकारी महोदय से भी मेरे द्वारा लगातार सूची प्राप्त नहीं हुई है। आवेदक को यह जमीन बैयनमा से प्राप्त हुआ है। मैंने प्रस्ताव भी दस्तावेज में अंकित जमीन का बयनाया ह ै। गैरमजरूआ आम की सूची नहीं रहने के कारण ही मेरे द्वारा 0-5-2 धूर में सन्निहत 0-0-14 धूर का भी प्रस्ताव दाखिल खारिज में दिया गया है। परन्तु सवे र्क्षण के क्रम में जैसे ही मुझेें सरकारी नक्शा प्राप्त हुआ म ैंने इस जमीन को चिन्हित करते हुए स्वयं अंचल अधिकारी महोदय को इसकी सूचना देते हुए सुधार करने का अनुरोध किया , मेरे द्वारा दी गई सूचना के आलोक
महोदय को इसकी सूचना देते हुए सुधार करने का अनुरोध किया, मेरे द्वारा दी गई सूचना के आलोक में ही अंचलाधिकारी, घोड़ासहन क े पत्रांक-805दिनांक- 08.12.16 द्वारा त्रुटि निराकरण का प्रस्ताव भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सिकरहना को भेजा गया। साक्ष्य की छायाप्रति कारण पृच्छा के साथ संलग्न है। उपर्युक्त वर्णित विन्दुओ के आलोक में ं अनुरोध है कि गैरमजरूआ भूमि से संबंधित सूची उपलब्ध नही रहने के कारण दिये गये दाखिल खारिज के प्रस्ताव से संबंधित आरोप स े मुक्त करने की कृपा की जाय। श्री पाण्डेय के कार्य के प्रति लापरवाही एवं पद क े दुरूपयोग को दर्शाता है। इनके विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है। खारिज का प ्रस्ताव समर्पित करने के पूर्व इसकी गहन जॉच करनी चाहिए थी। गैरमजरूआ आम एवं गैरमजरूआ खास भूमि का संरक्षण करना हल्का कर्मचारी का मूल दायित्व है, उनका यह कहना कि सरकारी भूमि संबंधी प जी नही ं मिलने के कारण गैरमजरूआ आम भूमि का नामान्तरण प ्रस्ताव द े दिया गया जो स्वीकर योग्य नही है। यदि उन्हे पंजी प्राप्त नही हुआ था तो उन्हे अविलम्ब जिला अभिलेखगार स े प्रभार लेते ही सरकारी भूमि की सूची प ्राप्त कर लेना चाहिए था। लेकिन गलत प्रस्ताव देने के पश्चात्‌ वस्तु स्थिति संज्ञान में आने पर इनके द्वारा आरोप से बचने के लिए सरकारी भूमि की सूची प्राप्त नही होने का सहारा लिया गया है, जो सही नही है। यह आरोप शत्‌ प ्रतिशत प ्रमाणित होता है। में ही अंचलाधिकारी घोड़ासहन के पत्रांकः 805 दिनांकः 08.12. 2016 द्वारा त्रुटि निकाकरण का प्रस्ताव भूमि सुधार उप समाहत्ता सिकरहना को भेजा गया। साक्ष्य की छायाप्रति कारण पृच्छा के साथ संलग्न है। विदित हो कि मेरे द्वारा प्रभार ग्रहण करने के तिथि 19.07.2014 को अ चलाधिकारी ं महोदय को एक लिखित आवेदन देकर गैरमजरूआ मालिक एवं गैरमजरूआ आम स े संबंध्ाित सूची प्राप्त नहीं होने की बात बताया हूँ। परन्तु मेरे आवेदन पर विचार नहीं किया गया । परन्तु सर्वेक्षण के क्रम मे ं जब मुझें जानकारी हुई तो उक्त जमीन प्रस्ताव में त्रुटि निराकरण हेतु भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के यहाँ भेजा जा चुका है। उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी, मोतिहारी द्वारा भेदभाव से ग्रसित होकर मित्थ्या प्रतिवेदन दिया गया है। उपर्युक्त वर्णित बिन्दूओं के आलोक में अनुरोध है कि गैरमजरूआ भूमि स े संबंधित सूची उपलब्ध नहींं रहने के कारण दिये गये दाखिल खारिज के प्रस्ताव से संबंधित आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय।
1B श्री पाण्डेय द्वारा दाखिल खारिज आवेदन सं0- 0501110220816 00218 मे बिहार ं राज्य धार्मिक न्यास परिष्‌द्‌ से इस आरोप मे ं यह अंकित किया गया है, कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास स े सम्बद्ध कबीर पंथी मठ घोड़ासहन की भूमि नामांतरण का प्रस्ताव आरोपित कर्मी द्वारा जानबुझ कर मठ की जमीन का दाखिल खारिज का प्रस्ताव दिय गया है। जबकि संबंधित मठ एक पब्लिक धार्मिक न्यास पर्षद से संवद्ध कवीर पंथी मठ की भूमि के नामान्तरण का अनुशंसा जानबुझकर देने के आरोप के संबंध में आरोपी के द्वारा अपने जबाव में उल्लेख किया इस आरोप में यह अंकित किया गया है कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास से संबद्ध कबीर पंथी मठ घोड़ासहन की भूमि नामान्तरण का प्रस्ताव म रे े द्वारा
सबंध कबीर पंथी मठ, घोड़ासहन की भूमि के नामान्तर की स्वीकृति हेतु अनुशसा जानबुझकर दिया गया है। जबकि संबंधित मठ पर एक पब्लिक ट्रस्ट है, इसकी प री ू जानकारी रखते हुए उनके द्वारा ऐसी गलती की गयी है। मेरे द्वारा जानबुझकर दिया गया है। इस सबंध मे कहना है, कि ं उक्त मठ की जमीन खाता स 0-43 ं में अवस्थित है। इस खाता स ं संबंधित जमीन का नामान्तरण प्रस्ताव 1. श्री बाबुराम सिंह, 2. रामलाल प्रसाद, 3. नथुनी राम वगैरह एवं अन्य के नाम से पूर्व में दर रैयत घोषित करते हुए दाखिल खारिज किया गया है। इस सबंध में दाखिल खारिज वाद सं0 तत्कालीन अंचलाधिकारी क े ज्ञापांक-363 दिनांक-02.08.2008 द्वारा निर्गत आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि उक्त खाते की जमीन अधिभोगी रैयत की ह ै। तत्कालीन अंचलाधिकारी क े आदेशानुसार इसका जमाबंदी निर्माण भी है। अ चलाधिकारी, ं घोड़ासहन का यह आदेश तत्कालीन समाहर्त्ता, महोदय के न्यायालय से राजस्व अपील वाद सं0-145/92-93 में पारित आदेश क े अनुपालन में निर्गत किया गया है। उपरोक्त वर्णित आदेश के आलोक में ही मेरे द्वारा नामान्तरण प्रस्ताव तैयार किया गया एवं पूर्व से ेचल रही जमाबंदी से उक्त प्रस्ताव की जमीन का मिलान करते ह ुए जमाबंदी कायम किया गया है। उपरोक्त से स्पष्ट है, कि उच्चाधिकारी द्वारा उक्त खाता खेसरा की ट्रस्ट है। इसकी पूरी जानकारी रखते हुए भी उनके द्वारा ऐसी गलती की गई है। तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा नामान्तरण प ्रस्ताव को खारिज किया गया है। आरोपी के स्पष्टीकरण म ं े उल्लेखित दर रैयतों का खाता-43, खेसरा-2084 स े संबंधित है। जबकि आरोपित द्वारा प्रस्ताव खात-43, खेसरा-1462 की दी गई है। अतः स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नही ह ै। कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है। गया है, कि प्रासंगिक खाता से संबंधित जमीन का नामान्तरण प ्रस्ताव पूर्व के दर रैयत घोषित करते हुए तत्कालीन अंचलाधिकारी के द्वारा दाखिल खारिज वाद के आधार पर जमाबंदी निर्माण पूर्व से है, के आलोक मे ं नामान्तरण प्रस्ताव तैयार किया गया। आरोपी के जबाव पर उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा दिये गये मंतव्य मे उल्लेख ं किया गया ह ै, कि आरोपित कर्मी द्वारा जानबुझकर मठ की जमीन का दाखिल खारिज का प्रस्ताव दिया गया हैै। संबंधित मठ एक पब्लिक ट्रस्ट है। तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा नामान्तरण प्रस्ताव को खारिज किया गया है। आरोपी क े स्पष्टीकरण में उल्लेखित दर रैयतों का खात-43, खेसरा -2084 स े सबंधित ह ै। जबकि आरोपी के द्वारा नामान्तरण का प ्रस्ताव खाता सं0- 43, खेसरा सं0-1462 के लिए दिया गया। इस प्रकार आरोपी के जबाव एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य से स्पष्ट होता है, कि हल्का कर्मचारी के द्वारा जानबुझकर गलत मंशा के उदेश्य से मठ की भूमि का नामान्तरण हेतु प्रतिवेदन समर्पित किया गया एवं अपने कर्त्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही वरती गई है। यह आरोप प्रमाणित है। जान-बूझ कर दिया गया है। इस संबंद्ध मे ं कहना है कि उक्त मठ की जमीन खाता-43 में अवस्थित है। इस खाता से संबंधित जमीन का नामान्तरण प्रस्ताव 01.श्री बाबू राम सिंह 02. श्री रामलाल प्रसाद, 03. श्री नथुनी राम वगैरह एवं अन्य के नाम से पूर्व मे दररैयत ं घोषित करते हुए दाखिल खारिज किया गया है। इस संंबंध में दाखिल खारित वाद संख्या तत्कालीन अंचलाधिकारी ज्ञापांक-363 दिनांक- 02.08.2008 द्वारा निर्गत आदेश मे स्पष्ट किया ं गया है कि उक्त खाते की जमीन अधिभोगि रयैत की है। तत्कालीन अंचलाधिकारी क े आदेशानुसार इस जमाबंदी निर्माण भी है। अंचलाधिकारी घोड़ासहन का यह आदेश तत्कालीन समाहर्त्ता महोदय के न्यायालय में अपील संख्या-145/ 92-93 में पारित आदेश के अनुपालन में निर्गत किया गया है। उपरोक्त वर्णित आदेश के आलोक में ही मेरे द्वारा नामान्तरण प्रस्ताव तैयार किया गया एवं पूर्व स े चल रही जामबंदी स े उक्त प्रस्ताव की जमीन का मिलान करते हुए जमाबंदी कायम किया गया है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि उच्चाधिकारी द्वारा उक्त खाता खेसरा की जमीन को दर रयैत घोषित करने के आलोक में ही मेरे द्वारा नामान्तरण का प्रस्ताव एवं अंचलाधिकारी
जमीन को दररैयत घोषित करने के आलोक मे ं ही मेरे द्वारा नामान्तरण का प्रस्ताव दिया गया एवंं अंचलाधिकारी महोेदय के आदेश पश्चात्‌ जमाबंदी कायम किया गया है। इस प्रस्ताव पर किसी व्यक्ति द्वारा आपति अंकित नही किया गया। जिसका अवलोकन समान्तरण प्रस्ताव स े संबंधित अभिलेख से किया जा सकता है। अतः मुझे इस आरोप से े मुक्त करने की कृपा की जाय। महोदय के आदेश के पश्चात जमाबंदी कायम किया गया है। इस प्रस्ताव पर किसी किसी व्यक्ति द्वारा आपत्ति अंकित नहीं किया गया। जिसका अवलोकन नामान्तरण प्रस्ताव स े संबंधित अभिलेख से किया जा सकता है। उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी मोतिहारी द्वारा जो प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। जिसमें मठ की जमीन का प्रस्ताव कि बात दर्शायी गयी है। इस संबंध में कहना है कि मठ किसी ट्रस्ट से वह मठ संम्बद्ध नही रखता है तथा दोनों खेसरा खाता 43 के अन्दर है तथा बहुत सारे लोगों का आवासीय मकान एवं खेत है। यही कारण है कि तत्तकालीन समाहर्त्ता महोदय के न्यायालय से राजस्व अपील वाद संख्या-145/92-93 में पारित आदेश क े अनुपालन में निर्गत किया गया ह ै। उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा भ्रमित प्रतिवेदन दिया गया है। इसके पूर्व में सभी वरीय पदाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया। अतः मुझें इस आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय।
1C दाखिल खारिज आवेदन सं0- 0501110220816 00347 में गैरमजरूआ मालिक (सरकारी भूमि) के नामांतरण की इस आरोप मे ं यह आरोप अंकित किया है, कि गैमजरूआ मालिक (सरकारी भूमि) जमीन नामान्तरण का प्रस्ताव मेरे द्वारा दिया गया है। हल्का कर्मचारी का स्पष्टीकरण स्वीकार्य नही है। हल्का कर्मचारी द्वारा स्पष्टीकरण म ं े स्वीकार किया गया है, कि सरकारी जमीन को रजिस्ट्री दाखिल खारिज आवेदन सं0-347 में गैरमजरूआ मालिक (सरकारी भूमि) के नामान्तरण की स्वीकृति क े लिए अनुशंसा किये जाने के संबंध मे लगाये ं गये आरोप पर आरोपी के इस संबंध में यह आरोप अंकित किया है कि गैरमजरूआ मालिक (सकरारी भूमि) जमीन नामांतरण का प्रस्ताव मेरे द्वारा दिया गया है। इस संंबंध में कहना है कि उक्त जमीन
स्वीकृति के लिए अनुशसा श्री पाण्डेय के द्वारा की गयी ह ै। उपरोक्त कृत्य सरकार को जानबुझकर हानि पहॅुचाने का कृत्य है, जो बिहार सरकार कर्मचारी आचार नियमावली के विरूद्ध है। इस सबंध में कहना है कि उक्त जमीन जिसका खाता सं0-10, खेसरा सं0-1173, रकवा-0-0-16 धुर आवेदक द्वारा बैयनामा से प्राप्त किया गया है, जिसके दास्तावेज की छायाप्रति कारण पृच्छा के साथ संलग्न कर रहेें है। आवेदक को यह जमीन मोहित राउत उर्फ मुकुट राउत पिता-ढ़ोकल राउत से विक्री के द्वारा प्राप्त हुआ है, इस जमीन की जमाबंदी प जी-2 ं में विक्रेता के पिता के नाम से पूर्व से ही कायम है। मैने ं दस्तावेज एवं जमाबंदी कायम रहने के कारण नामान्तरण का प्रस्ताव दिया था। मेंनें प्रथम स्पष्टीकरण म ं े यह स्पष्ट कर दिया गया है, कि अंचल में सरकारी भूमि के संबंध में कोई सूची उपलब्ध नही है। यहॉ यह उल्लेखनीय है कि इस पर क्रेता लालबाबु राय का आवासीय मकान पूर्व से निर्मित ह ै। उपरोक्त से स्पष्ट है, कि आवेदक द्वारा बैयनामा से प्राप्त भूमि एवं पूर्व से कायम जमाबंदी के आलोक मेंही मेरे द्वारा नामान्तरण का प्रस्ताव दिया गया है। इसके लिए मुझे आरोपित करना न्यायोचित नही है। अतः अनुरोध है कि इस आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। (साक्ष्य की छायाप्रति संलग्न है) हुई और उन्हे साक्ष्य प्राप्त हुआ तो दाखिल खारिज का प्रस्ताव न दे कर दूसरे अस्वीकृत करने का प ्रस्ताव देते हुए जमाबंदी रद्दीकरण का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए था। आरोपित द्वारा ऐसा नही कर सरकारी जमीन के संबंध मं जानकारी नही होने का तर्क प्रस्तुत किया गया है। जो इनके कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं पद का दुरूपयोग को दर्शाता है। अतः उनके विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है। द्वारा अपने जबाव म ं े उल्लेख किया गया है, कि प ्रासंगिक भूमि आवेदक द्वारा वैनामा से प्राप्त किया गया था। जमाबंदी पंजी- 2 में विक्रेता के पिता के नाम पर कायम रहने क े फलस्वरूप नामान्तरण का प्रस्ताव दिया गया। आरोपी के जबाव पर उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य में उल्लेख किया गया है, कि सरकारी भूमि की रजिस्ट्री हुई और उन्हे साक्ष्य प ्राप्त ह ुआ तो दाखिल खारिज का प्रस्ताव न देकर अस्वीकृत करने का प्रस्ताव देते हुए जमाबंदी रद्‌दीकरण का प ्रस्ताव दिया जाना चाहिए था। इस तरह आरोपी के जबाव एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य के अनुसार पूर्व से विक्रेता के पिता के नाम जमाबंदी चल रहा था ,तो वैसी स्थिति म ं े नामान्तरण का प ्रस्ताव दिया गया जो सही नही है। क्योंकि राजस्व कर्मचारी का यह दायित्व बनता ह ै, कि राजस्व संबंधी कोई भी प्रस्ताव देने के पूर्व उसके खाता/खेसरा एवं रकवा उसके चौहदी जमाबंदी पंजी का अध्ययन करने के वाद ही प ्रस्ताव समर्पित करते लेकिन सिर्फ जमाबंदी चलने के आधार पर प ्रस्ताव समर्पित किया गया है। यह कार्य राजस्व कर्मी के दायित्वो के विपरीत ं था। यह आरोप प्रमाणित है। जिसका खाता-10, खेसरा-1173 रकबा- 0-0-16 धुर आवेदक द्वारा बैयनामा से प्रापत यिा गया है, जिसके दस्तावेज की छायाप्रति इस कारण पृच्छा के साथ संलग्न कर रहे है। आवेदक को यह जमीन मोहित राउत उर्फ म ुकुट राउत पिता-ढ़ोकल राउत से बिक्री के द्वारा प्रापत हुआ है। इस जमीन की जमाबंदी पंजी -2 में विक्रेता के पिता के नाम से प र्व से ू ही कायम ह ै। म ैंने दस्तावेज एवं जमाबंदी कायम रहने के कारण नामान्तरण का प्रस्ताव दिया था। मै न ं प्रथम े स्पष्टीकरण म ं े यह स्पष्ट कर दिया है कि अंचल में सरकारी भूमि के संबंध में कोई सूची उपलबध नहीं है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस पर क्रेता लालबाबू राय का आवासीय मकान पूर्व से निर्मित है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि आवेदक द्वारा बैयनामा से प्राप्त भूमि एवं पूर्व से कायम जमाबदीं के आलोक में ही मेरे द्वारा नामांतरण का प्रस्ताव दिया गया है। इसके लिए मुझे आरोपित करना न्यायोचित नहीं है। प्रभार प्राप्त करते हुए ही तत्कालीन अंचलाधिकारी को मैंने गैरमजरूआ मालिक, गैरमजरूआ आम की सूची मुहैया कराया जाय। सूची नहीं रहने के कारण प्रस्ताव दिया गया। परन्तु जमाबंदी कायम नहीं हैं और रसीद भी निर्गत नहीं है। सूचना के बाद पदाधिकारी का भी दायित्व बनता है कि सूची उपलब्ध करावे। इस जमीन पर क्रेता का मकान अवासीय केवाला के समय से है। इसके लिए आरोपित करना न्यायोचित नहीं है। उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा भ्रमित मन्तव्य संचालन पदाधिकारी को दिया जाता है जिससे संचालन पदाधिकारी द्वारा भेग पूर्ण प्रतिवेदन दिया गया है। अतः अनुरोध है कि इस आरोप से मुकत करने की कृपा की जाय। (साक्ष्य की छायाप्रति पूर्व में भेज दिया गया है।)
2. श्री दिनबंधु पाण्डेय द्वारा कार्यालय आदेश पत्रांक-877 दिनांक-12.02. 19 जिससे हल्का का प्रभार देने का अनुपालन अबतक नही किया गया है। प्रभार सौंपने हेतु श्री पाण्डेय को पत्रांक-08 दिनांक-09.01. 17, पत्रांक-25 दिनांक-16.01. 16, पत्रांक-780 दिनांक-25.09. 17, पत्रांक-844, दिनांक-16.10. 17, पत्रांक-70 दिनांक-30.01. 18 द्वारा लिखा गया किन्तु उनके द्वारा प्रभार नही सौंपा गया । उनका यह आचरण स्वेच्छारित एवं अनुशासनहीनता एवं इस आरोप के सबंध में मैंनें दिनांक-06.02.17 को ही अंचलाधिकारी महोदय का अपना स्पष्टीकरण समर्पित कर चुका हॅू। जिसकी छायाप्रति संलग्न है। मैं हमेशा प्रभार देने को तैयार था जिस राजस्व कर्मचारी को प्रभार ग्रहण करना था उसके द्वारा यह कहा गया कि राजस्व की राशि जमा करनेके पश्चात्‌ ही मैं प्रभार ग्रहण करूगॉ। मेरे द्वारा राजस्व मद की राशि अंचल नाजिर को प्राप्त भी करा दिया गया है। जिसकी प्राप्ति रसीद की छायाप्रति स लग्न ं है।नाजिर द्वारा मुझे बताया गया कि NR पंजी नही रहने के कारण रसीद निर्गत नही किया जा सकता है।इस सबंध मे मैंने ं अंचलाधिकारी महोदय को भी इसकी सूचना दी। निलम्बन अवस्था में मुख्यालय अरेराज श्री पाण्डेय द्वारा प्रभार के संम्बंधित आरोप के संम्बंध में अपने स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उपलब्ध उन्हे NR नही रहने के कारण प्रभार नही दिया गया। यह तथ्य स्वीकार्य नही ह ै। पंजी का प्रभार वैगर भी दिया NR के जा सकता था। आरोपी द्वारा संलग्न साक्ष्य पर किसका हस्ताक्षर ह ै, उल्लेखित नही है। आरोपी के कारण घोड़ासहन के 4 पंचायत का राजस्व कार्य आज भी वांधित है। अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज द्वारा वगैर NR का प्रभार नही होने का निर्देश दिया गया हो सत्य से परे है। यह आचरण श्री पाण्डेय के लापरवाही हठधर्मिता को प्रदर्शित करता है। अतः कार्रवाई आरोपी कर्मी केे विरूद्ध हल्का का प्रभार नही सौंपने के सबंध में लगाये गये आरोप पर आरोपी के द्वारा अपने जबाव में उल्लेख किया गया है, कि जिस राजस्व कर्मचारी को प्रभार ग्रहण करना था उसके द्वरा यह कहा गया कि राजस्व की राशि जमा कराने के पश्चात्‌ ही प्रभार ग्रहण किया जाएगा। आरोपी के द्वारा राजस्व मद की राशि अंचल नाजीर को प्राप्त करा दिया गया था, लेकिन NR नही रहने के कारण रसीद निर्गत नही हो सका निलम्बन के पश्चात्‌ भी दिनांक-25.05.18 को अरेराज अनुमंडल से घोड़ासहन गया लेकिन नही मिलने के NR कारण प्रभार नही द े सका। उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य मे उल्लेख ं किया गया है, कि बिना NR के भी पंजी-II का प्रभार दिया जा सकता इस आरोप के संबंध में मैंने दिनांक- 06. 02.2017 को ही अंचलाधिकारी महोदय का अपना स्पष्टीकरण समर्पित कर चुका हूँ। जिसकी छायाप्रति संलग्न है ं मैं हमेशा प्रभार देने को तैयार था जिस राजस्व कर्मचारी को प्रभार को प्रभार ग्रहण करना था उसके द्वारा यह कहा गया कि राजस्व की राशि जमा करने के पश्चात ही मैं प्रभार ग्रहण करूँगा। मेरे द्वारा राजस्व मद की राशि अंचल नाजीर को प्राप्त भी करा दिया गया है। जिसकी प्राप्ति रसीद की छायाप्रति संलग्न है। नाजिर द्वारा मुझे बताया गया कि पंजी नहीं रहने N.R. के कारण रसीद निर्गत नहीं किया जा सकता है। इस संबंध मे मैंने ं अंचल अघिकारी महोदय को भी इसकी सूचना दी। निलम्बन अवस्था म े ं मुख्यालय अरेराज, अनुमंडल
Dereliction का Duty द्योतक है। अनुमंडल निर्धारित होने के कारणमैंनेे अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज से वार्ता के अनुसार भी प्रभार देने हेतु 25.05.18 से 26. 05.18 तक मुख्यालय से बाहर रहने ह तु े अनुरोध किया था। साथ ही मैंनें यह भी अंकित किया था कि 75,000/- रूपये का एन0आर0 मिलने पर प्रभार दे दूगॉ। मैं 25. 05.18 को घोड़ासहन अंचल कार्यालय में गया भी परन्तु एन0आर0 नही मिलने के कारण प्रभार नही दे सका। अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज के द्वारा इस राशि के सबंध मे स्पष्ट किया ं गया कि एन0आर0 मिलेगा तब ही प्रभार दिजीएगा। उपर्युक्त से स्पष्ट है, कि मेरे द्वारा प्रभार देने मे किसी भी तरह ं कोई विलम्ब नही किया गया हैं। श्रीमान्‌ से अनुरोध है, कि मेरे द्वारा जमा कराई गई राशि का एन0आर0 दिलवाने ह तु आदेश े निर्गत करने की कृपा किया जाय। ताकि मैं अपना प्रभार दे सकूॅ। अतः विलम्ब संबंधी आरोपों से मुक्त करने की कृपा की जाए। का अनुशंसा की जाती है। था। आरोपी के द्वारा प्रभार नही देने के कारण चार पंचायत का राजस्व का कार्य आज भी वाधित है। यह आचरण आरोपी के लपरवाही एवं हठधर्मिता को प ्रदर्शित करता है। इस प्रकार आरोपित कर्मी हल्का कर्मचारी एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य के आधार पर यह स्पष्ट होता है, कि हल्का कर्मचारी क े द्वारा जानबुझ कर एवं अपने कर्त्तव्यों क े प्रति लापरवाही हठधर्मिता तथा सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के उदेश्य से हल्का का प्रभार नही दिया गया है। जिससे सरकार के राजस्व की क्षति एवं प्रभार नही द ने े का आरोप प र्णतः ू प ्रमाणित होता है। निर्धारित होने के कारण मैंने अनुमण्डल पदाधिकारी, अरेराज से वार्ता के अनुसार भी प्रभार देने हेतु 25.05. 2018 से 26.05.2018 तक मुख्यालय से बाहर रहने हेतु अनुरोध किया था। साथ ही मैंने यह भी अंकित किया था की 75,000/- रू0 का एन0आर0 मिलने पर प्रभार दे दूँगा। मै 25. ं 05.2018 को घोड़ासहन अंचल कार्यालय में गया भी परन्तु एन0 आर0 नहीं मिलने के कारण प्रभार नहीं दे सका। अनुमंडल पदाधिकारी अरेराज के द्वारा इस राशि के संबंध में स्पष्ट किया गया ह ै कि एन0आर0 मिलेगा तब ही प्रभार दीजिएगा। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि मेरे द्वारा प्रभार देने के किसी भी तरह कोई विलम्ब नहीं किया गया है। श्रीमान्‌ से अनुरोध है कि मेरे द्वारा जमा कराई गई राशि का एन0आर0 दिलवाने हेतु आदेश निर्गत करने की कृपा किया जाय। ताकि मैं अपना प्रभार दे सकूँ। अतः विलम्ब संबंधी आरोपी से मुक्त करने की कृपा की जाए। उपस्थापन पदाधिकारी घोड़ासहन एवं संचालन पदाधिकारी मोतिहारी के द्वारा अपने मंतव्य में मेरे विरूद्ध मिथ्या प्रतिवेदन दिया गया है, क्योंकि उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी का अनुमंडल पदाधिकारी अरेराज द्वारा अपने अपने पत्रांक-87 दिनांक-10.12.2019 के माध्यम से यह बताया गया है कि निलंबित राजस्व कर्मचारी जनवरी 2019 स े दिसम्बर 2019 तक पूर्णतः अनुपस्थित है। जबकि मैं दिनांकः 16. 06.2018 से अनुमंडल पदाधिकारी अरेराज के द्वारा स्वीकृत आवेदन है परन्तु अंचलाधिकारी घोड़ासहन के द्वारा प्रभार देने संबंधी कोई आदेश नहीं था। मैं एकाएक बीमार हुआ स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र रक्सौल में दिनांकः 20. 06.2018 को दिखाया। चिकित्सक न े आई0जी0एम0एस0 में रेफर कर दिया। इसकी सूचना अनुमंडल पदाधिकारी अरेराज को RTPS एवं डाक सेवा से सूचित कर दिये थे। अंचलाधिकारी द्वारा सरकारी रसीद एवं एल0पी0सी0 दिया जाता है। कार्य बाधित नहीं है। मेरा मंशा पूर्व से और वर्तमान में सरकारी कार्य में बाधा डालने का कभी भी नहीं रहा है। अतः आरोप से मुक्त किया जाय।
3 श्री पाण्डेय हल्का परिवर्त्तन के आदेश के पश्चात्‌ से बिना अनुमति के अनुपस्थित ह ै। जिसमें हल्का 06 से संबंधित सभी महत्वपूर्ण राजस्व कार्य तथा खतियान कम्प्यूटराईजेशन लोक शिकायत निवारण कार्य, राजस्व वसूली, आर0टी0पी0एस 0 अन्तर्गत नामांतरण एवं इस आरोप के संबंध में मुझे कहना है कि मैं किडनी रोग से पिड़ित हॅू। जिसका इलाज कोलम्बिया एसिया अस्पताल, गुड़गांव (हरियाणा) एवं उसके पश्चात्‌ इन्दिरा गॉधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना मे चल ं रहा है। चिकित्सक पूर्जा की छायाप्रति संलग्न है। मैंने बीमारी के कारण अवकाश स्वीकृत कराने का अनुरोध आवेदन पत्र के माध्यम से लगातार अंचलाधिकारी महोदय, श्री पाण्डेय द्वारा अवकाश पर रहने का तर्क प्रभार से सम्बद्ध नही है। श्री पाण्डेय के पास संबंधित अभिलेख वर्ष-2018 स े ही है। इतने लम्बे अवधि तक अगर श्री पाण्डेय को अनुपस्थित रहना था तो उन्हे प्रभार दे देना चाहिये था जिसे राजस्व कार्य प्रभावित नही होता। अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज के पत्रांक-87 आरोपी के विरूद्ध बिना अनुमती के अनुपस्थित रहने का आरोप है एवं अनुपस्थित रहने क े कारण राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हुए है। आरोपी के द्वारा अपने जबाव में उल्लेख किया गया है, कि वे वीमार है एवं उनका ईलाज गुड़गाव एवं पटना में चल रहा है। अवकाश स्वीकृत कराने का आवेदन पत्र के साक्ष्य मे ं अंचलाधिकारी, घोड़ासहन, अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज को देते आ रहा हूॅ। किडनी इस आरोप के संंबंध में मुझे कहना है कि मै ं किडनी रोग से पीड़ित हूँ। जिसका इलाज कोलम्बिया एसिया अस्पताल, गुड़गाँव (हरियाणा) एवं उसके पश्चात्‌ इन्दिरा गाँधी आयुर्विज्ञान स स्थान, ं पटना में चल रहा है। चिकित्सक प र्जा ू की छायाप्रति संलग्न है। मैंने बीमारी के कारण अवकाश स्वीकृत कराने का अनुरोध आवेदन पत्र के माध्यम से लगातार अंचल अधिकारी महोदय, घोड़ासहन एवं
एल0पी0सी कार्य प्रभावित हुए है। उनका यह आचरण स्वेच्छारिता घोर अनुशांसनहीनता एवं Dereliction का Duty द्योतक है तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का उल्लघंन है। घोड़ासहन एवं अनुमंडल पदाधिकारी, महोदय, अरेराज को देते हुए आ रहा हूॅ। ऐसे स्थिति मे ं बिना अनुमति के अनुपस्थित रहने का आरोप सही नही है। किडनी जैसे गम्भीर बीमारी क े कारण ही मैं अवकाश में प्रस्थान किया था एवं हूॅ। अतः अनुरोध है कि इस आरोप से मुझेेेे े मुक्त करने की कृपा किया जाय। दिनांक-10.12.2019 के द्वारा सूचित किया गया है, कि ये निलंबन के पश्चात्‌ अपने निर्धारित मुख्यालय, अरेराज से जनवरी 2019 से दिसम्बर 2019 तक पूर्णतः अनुपस्थित है। इस पत्र में इनके अवकाश पर रहने का कोई स चना ू नही है। अतः इनका स्पष्टीकरण स्वीकार्य नही है। यह इनके स्वेच्छाचारिता क ा े दर्शाता है। इनके विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है। की वीमारी के कारण ही वे अवकाश में प्रस्थान किया था। उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य मे उल्लेख ं किया गया ह ै, कि आरोपी कर्मी को लम्बे समय तक अनुपस्थित रहना था तो उन्हे प्रभार दे देना चाहिए था। अनुपस्थित रहने क े संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज के पत्रांक-87 दिनांक-01. 12.2019 के द्वारा सूचित किया गया ह ै, कि निलंबन हेतु निर्धारित मुख्यालय अरेराज से जनवरी 2019 स े दिसम्बर 2019 तक पूर्णतः अनुपस्थित ह ै। अवकाश में रहने का कोई सूचना नही है। इस तरह आरोपी कर्मी एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य के आधार पर यह प्रमाणित होता है, कि आरोपित कर्मी जानबुझ कर एवं हठधर्मिता प्रदर्शित करते हुए जनवरी 2019 से दिसम्बर 2019 तक अवैध रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहे। जिससे सरकारी कार्य प र्णतः ू प्रभावित ह ुआ। यह आरोप प र्णतः ू प ्रमाणित होता है। अनुमंडल पदाधिकारी माहदेय, अरेराज को देते आ रहा हूँ। ऐसे स्थिति में बिना अनुमति के अनुपस्थित रहने का आरोप सही नहीं है। कीडनी ज ैस ग भीर ं बीमारी के कारण ही मैं अवकाश मे ं प्रस्थान किया था एवं हूँ। अंचलाधिकारी घोडासहन को ई-मेल एवं डाक स वा े स े अवकाश हेतु आवेदन दिये है। उपस्थापन पदाधिकारी घोड़ासहन द्वारा दिये गये अपने मन्तव्य के आधार पर ही संचालन पदाधिकारी पूर्वी चम्पारण मोतिहारी द्वारा अपना भ्रामक मंतव्य श्रीमान्‌ को समर्पित किया गया है। जबकि मेरे द्वारा भी श्रीमान्‌ के यहाँ लिखित जबाब निबंधित डाक के माध्यम से भेजा गया है। जहाँ तक सरकारी कार्य की बाधा की बात है तो मेरे जानकारी में कार्य बाधित नहीं है। चूँकि सरकारी रसीद एवं एल0पी0सी0 श्रीमान्‌ के कार्यालय से निर्गत हुआ है। मैं सरकारी सेवा 27 वर्षाे तक कार्य किया किसी तरह का अनुशानहीनता एवं गलत आचरण की बात घोड़ासहन अंचल को छोड़ कर किसी अंचल से शिकायत नहीं है। मात्र घोड़ासहन बाजार का लेकर एवं अंचल परिसर में हरा पेड़ अवैध कटाई तथा बाजार अतिक्रमण पर रोक लगाने के कारण मेरे विरूद्ध शडयंत्र के तहत फँसाने की साजिश पदाधिकारियों द्वारा किया गया। चूँकि घोड़ासहन बाजार मेरे नाम से आवंटित था जिसके फलस्वरूप ही मुझे बिना किसी वरीय पदाधिकारी के लिखित आदेश के बाद भी मेरा वेतन 01.01.2017 से रोक कर रखा गया। जबकि मेरा निलम्बन दिनांक-19.01.2018 को हुआ। इसमें भी माननीय उच्च न्यायालय पटना का आदेश CWJC/3961/2018 में पारित आदेश हुआ है। इसमे ं उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी स्वयं पार्टी है। इस परिस्थिति में सरकारी सेवक अचार नियमावली का उल्लंधन मेरे द्वारा नहीं किया गया है। अतः अनुरोध है कि इस आरोप से मुझे मुक्त करने की कृपा किया जाए।
4 श्री पाण्डेय द्वारा अपने कार्यकाल में लगभग दो वर्ष तक थाना सं0-05 की जमाबंदी पंजी न होने की बात छुपाई ह ै। DLRMP तहत यह तथ्य सामने आया। उनका यह आचरण वो Dereliction Duty है। इस आरोप के सबंध में कहना ह ै, कि हल्का नं0-06 में थाना स 0-05 ं क े जमाबंदी प जी ं म ुझे प्रभार में प्राप्त नही हुआ है। मैंने इस तथ्य ं को छुपाया नही है। मैंने प्रभार ग्रहण की तिथि-19.07.14 को ही अ चलाधिकारी ं महोदय, को इसकी सूचना दे चुका हूॅ। अंचलाधिकारी महोदय द्वारा इसे स्थापना लिपिक को देते हुए संचिका मे उपस्थापित ं करने का आदेश दिया गया। इस प्रकार यह आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है। जिससे मुझे मुक्त करने की कृपा किया जाय। श्री पाण्डेय अगर बिमार थे और उन्हे लम्बे अवधि तक अवकाश पर रहना था तो सरकारी कार्य को बाधा नही पहॅुचाते हुए अपना प्रभार निर्देशित राजस्व कर्मचारी को देना चाहिए था जिसका पालन उनके द्वारा नही किया गया। लम्बे अवधि तक अवकाश का पत्र भेजकर उनके द्वारा सरकारी कार्य को वाधित किया गया है जो वर्त्तमान भी जारी है यह कृत जानबुझ कर किया जाना है। अतः इनके विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है। थाना स 0-05 ं की जमाबंदी पंजी नही होने की बात दो वर्षाे तक छुपाने के आरोप मे ं आरापी के द्वारा अपने जबाव में उल्लेख किया गया है, कि थाना नं0-05 की जमाबंदी पंजी उन्हे प्रभार में प्राप्त नही हुआ। प्रभार ग्रहण की तिथि दिनांंक-19.07. 14 को इसकी सूचना अंचलाधिकारी को दे दिया गया था। जिसपर स्थापना लिपिक को संचिका म उपस्थापित ं े करने का आदेश दिया गया। उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य मे उल्लेख ं किया गया ह ै, कि आरोपी बीमार थे और उन्हे लम्बे अवधि तक अवकाश पर रहना था, तो सरकारी कार्य को बाधा नही पहुॅचाते हुए अपना प ्रभार निदे र्शित राजस्व कर्मचारी को देना चाहिए था, जिसका पालन आरोपी के द्वारा नही किया गया। इस तरह आरोपी के विरूद्ध लगाये गये आरोप के संबंध म ं े आरोपी क े जबाव पर उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा दिये गये मंतव्य से स्पष्ट होता है, कि आरोपी के द्वारा उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप से बचने का सहारा लिया गया है। इस तरह यह आरोप भी प्रमाणित होता है। इस आरोप के संबंध में कहना है कि हल्का नं0-06 में थाना सं0-05 के जमाबंदी पंजी मुझे प्रभार में प्राप्त नहीं हुआ है। मैंने इस तथ्य को छुपाया नहीं है। मै ने प्रभार ग्रहण की ं तिथि 19.07.2014 को ही अ चलाधिकारी ं महोदय को इसकी सूचना दे चुकॉ ह ँ। ू अंचल अधिकारी महोदय द्वारा इसे स्थापना लिपिक को देते हुए संचिका में उपस्थापित करने का आदेश दिया गया । इस प्रकार यह आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है। जिससे मुझे मुक्त करने की कृपा किया जाय।
5 श्री पाण्डेय द्वारा दिनांक-04.02. 17 को अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी। द्वारा हल्का निरीक्षण के दौरान नामान्तरण ह तु े प्राप्त वादों का सिर्फ जमाबंदी पंजी में दाखिल करने और खारिज नही करने का तथ्य प्रकट हुआ था, उनका यह आचरण Dereliction Duty है। तथा आचरण नियमावली के प्रावधानों क घोर उल्लघंन है। इस आरोप के संबंध में कहना है, कि अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा हल्का निरीक्षण दिनांक-02.02.17 को किया गया है। उसी समय प्रभार लिस्ट अपर समाहर्त्ता महोदय को दे दिया। जबकि आरोप पत्र में निरीक्षण की तिथि-04.02.17 अंकित है। अपर समाहर्त्ता महोदय अपने निरीक्षण क े दौरान मुझपर किसी तरह का आरोप नही लगाये है, और न ही इस संबंध में मुझे कोई नोटिस अंचल कार्यालय स े प्राप्त हुआ ह ै। नियमानुसार अगर किसी तरह की त्रुटि थी तो अपर समाहर्त्ता महोदय तत्क्षण मुझपर कार्रवाई ह तु आदेश े देते जो कि उनके द्वारा नही दिया गया है। अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण द्वारा दिनांक-02.02.2017 को घोड़ासहन के हल्का सं0-06 जिसका प्रभार आरोपित के पास था,कि जॉच की गई। जॉच के क्रम में श्री दीनबन्धु पाण्डेय को अविलम्ब स्थानांतरित कर्मचारी को प्रभार सौंप कर सूचित करने को कहा गया था, किन्तु उनके द्वारा इस आदेश का भी अनुपालन नही किया गया। हल्का सं0-06 के जमाबंदी पंजी के निरीक्षण के दौरान 200 स े अधिक मामले ऐसे पाये गये जिनमें नई जमाबंदी का निर्माण कर दिया गया था एवं नई स ृजित जामबंदी पृष्ठ पर अंचलाधिकारी का आदेश स 0 ं एव किस जमाबंदी से ं खारिज कर वर्त्तमान जमाबंदी मे ं भूमि नामान्तरण की गई दर्ज कर दिया गया था, किन्तु जिस गठित आरोप के संबंध में हल्का कर्मचारी के द्वारा उल्लेख किया गया है, कि दिनांक-02.02.17 को हल्का निरीक्ष्ण किया गया उसी समय प्रभार लिस्ट अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण को दे दिया गया अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण के द्वारा निरीक्षण के दौरान आरोपी पर किसी तरह का आरोप नही लगाया गया और न ही इस आरोप के संबंध मे ं कोई नोटिस अ चल ं कार्यालय द्वारा उन्हे प्राप्त हुआ। उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य उल्लेख किया गया ह ै, अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण द्वारा दिनांक-02.02. 2017 को घोड़ासहन हल्का सं0-06 जिसका प्रभार आरोपी के पास था, कि जॉच की गई। जॉच के क्रम मे आरोपी ं कर्मी को प्रभार सौंप कर सूचित करने को कहा गया था, उसका अनुपालन नही किया गया। आरोपी कर्मी के जबाव एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य दोनो के ं समीक्षा के उपरान्त पाया गया कि इस आरोप के संबंध में कहना है कि अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा हल्का निरीक्षण दिनांक 02.02.2017 को किया गया है। उसी समय प्रभार लिस्ट अपर समाहर्त्ता महोदय को दे दिया। जबकि आरोप पत्र में निरीक्षण की तिथि 04.02.2017 अंकित ह ै। अपर समाहर्त्ता महोदय अपने निरीक्षण के दौरान मुझ पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाये है, और न ही इस संबंध में मुझे कोई नोटिस अंचल कार्यालय से प्राप्त हुआ है। नियमानुसार अगर किसी तरह की त्रुटि थी तो अपर समाहर्त्ता महोदय तत्क्षण मुझपर कार्रवाई हेतु आदेश देते जो कि उनके द्वारा नहीं दिया गया है। उपस्थापन पदाधिकारी घोड़ासहन एवं संचालन पदाधिकारी मोतिहारी द्वारा श्रीमान्‌ को भ्रामक प्रतिवेदन समर्पित कर किया गाय है। अपर समाहर्त्ता पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा मुझसे प्रभार सूची की प्रति ले ली गयी तथा प्रभार देने
जमाबंदी से भूमि खारिज की गई उसपर न तो इसका उल्लेख है और ना ही भूमि का रकवा ही घटाया गया है। वस्तुतः जिस पुरानी जमाबदी से नई जमाबंदी सृजित की गई उस जमाबंदी पर संबंधित खाता खेसरा की भूमि ही अंकित नही थी। उक्त प्रतिवेदन के आलोक में जिलाधिकारी, प र्वी ू चम्पारण द्वारा श्री पाण्डेय को निलंबित किया गया था। अतः आरोप सं0-05 सही सिद्ध होता है। आरोपित का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नही हैं। राजस्व कर्मचारी का यह आचरण Dereliction Duty एवं सरकारी कर्मी केे आचरण संहिता के विपरीत है। इस तरह आरोपी का जबाव स्वीकार योग्य नही है। आरोप प्रमाणित होता है। के संबंध में श्रीमान्‌ अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा किसी प्रकार का आदेश मुझे नहीं दिया गया। मैं तो प्रभार देने एवं राजस्वों को क्षतिपूर्ति के लिए ही माननीय उच्च न्यायालय में C.WJC 364/2017,3961/2 018 तक गया हूँ। पूर्व में भी प्रभार देने के लिए तैयार था और वर्तमान में भी है। जहाँ तक श्रीमान्‌ अपर समाहर्त्ता के प्रतिवेदन की बात है तो दिनांकः 02.02.2017 को जाँच किया गया। जबकि जाँच प्रतिवेदन दिनांकः 06.12.2017 को तत्कालीन समाहर्त्ता महोदय के यहाँ भ्रामक एवं मिथ्या जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। जिसके आलोक मे तत्कालीन ं समाहर्त्ता महोदय द्वारा मुझे दिनांकः 19.01. 2018 को निलंबित करते हुए निलम्बन की अवधि में मेरा मुख्यालय अरेराज अनुमंडल निर्धारित किया गया। तत्कालीन अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा अपने प्रतिवेदन में दो सौ गलतियाँ दर्शाया गया है जबकि तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा प्राथमिकी में मात्र तीन गलतियाँ दर्शाया गया है जबकि तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा प्राथमिकी में मात्र तीन गलतियाँ दर्शाया गया है। जिसके निराकरण हेतु विभागीय कार्यवाही से पहले ही वरीय पदाधिकारी को अंचलाधिकारी क े माध्यम से लिखा जा चुका है। जाँच के बाद आठ माह के पश्चात प्रतिवेदन समर्पित करना कहॉ तक सत्य ह ै। श्रीमान्‌ स्वयं समझ सकते है। वर्तमान अपर समाहर्त्ता महोदय को तत्कालीन समाहर्त्ता महोदय के द्वारा संचालन हेतु ज्ञापांकः 1604 दिनांक-21.12. 2019 को संचालन हेतु नियुक्त किया गया । जबकि माननीय उच्च न्यायालय के पारित आदेश के आलोक में जाँच कर प्रतिवेदन की मांग हुआ था परन्तु जाँच प्रतिवेदन दिनांकः 15.07.2020 को श्रीमान्‌ के यहाँ समर्पित किया गया है जबकि इसकी पहले मैं दिनांक-11.07. 2020 को न्यायालीय अवमानना हेतु माननीय उच्च न्यायालय मं गया े हूँ। अतः श्रीमान्‌ से प्रार्थना ह ै कि इस प्रकार के भ्रामक एंव मिथ्या प ्रतिवेदन को निरस्त करते हुए मुझे दोषमुक्त तथा निलम्बन मुक्त करने की कृप्या प्रदान किया जाय।
6 श्री पाण्डेय दिनांक-04.02. 17 को हल्का निरीक्षण क े दौरान अपर समाहर्त्ता, प र्वी ू चम्पारण, मोतिहारी द्वारा दिये गये मौखिक निर्देश क े बावजूद भी निरीक्षण ह त े ु जमाबंदी पंजी प्रस्तुत नही किये है। उनका यह आचरण घोर अनुशासनही-नत ा एवं कर्त्तव्यहीनता का आरोप मे यह भी है ं कि अपर समाहर्त्ता द्वारा जमाबंदी प जी ं मांग करने पर म रे े द्वारा नही दिखाया गया है और मै ड्‌यूटी ं से अनुपस्थित हो गया। यह भी आरोप पूर्णतः निराधार ह ै। निरींक्षण के क्रम मे ं अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा सम्पूर्ण जमाबदी पंजी सहित अन्य राजस्व कागजातों का भी जांच किया गया, जॉच के समय किसी तरह की प ्रतिकुल टिप्पणी अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा नही की निरीक्षण के क्रम मे ं आरोपित से अपर समाहर्त्ता, प र्वी ू चम्पारण द्वारा मौखिक रूप स े की अन्य पंजी-II मांग करने पर इनके द्वारा प्रस्तुत नही किया गया और ये निरीक्षण से अनुपस्थित हो गयैं अतः इनका स्पष्टीकरण स्वीाकार योग्य नही है। गठित आरोप के संबंध में हल्का कर्मचारी के द्वारा अपना पक्ष रखते ह ुए अपनी जबाव में उल्लेख किया गया है, कि अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण के द्वारा जमाबंदी पंजी सहित अन्य राजस्व कागजातों का भी जॉच किया गया एवं किसी तरह की प ्रतिकुल टिप्पणी नही की गई। आरोपी के जबाव पर उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य में उल्लेख किया गया है, कि निरीक्षण के क्रम में आरोपित से अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण आरोप मे यह भी है कि ं अपर समाहर्त्ता द्वारा जमाबंदी पंजी मांग करने पर मेरे द्वारा नहीं दिखाया गया है और मै ं ड्‌यूटी से अनुपस्थित हो गया। यह भी आरेाप पूर्णतः निराधार ह ै। निरीक्षण के क्रम में अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा सम्पूर्ण जमाबंदी पंजी सहित अन्य राजस्व कागजातों का भी जांच किया गया, जाँच के समय किसी तरह की प ्रतिकूल टिप्पणी अपर समाहर्त्ता महोदय द्वारा नहीं की गई और नह ही मेरे
द्योतक है। गई और न ही मेरे द्वारा जमाबंदी प जी ं को छुपाया गया है। अतः अनुरोध है कि इस आरोप से मुक्त करने की कृपा किया जाएं। द्वारा मौखिक रूप से अन्य हल्का सें संबंधित पंजी-II की मांग करने पर आरोपी कर्मी के द्वारा प्रस्तुत नही किया गया एवं निरीक्षण से अनुपस्थित हो गये। आरोपी के जबाव एवं उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्य से पता चलता है, कि आरोपी कर्मी के द्वारा अपर समाहर्त्ता, पूर्वी चम्पारण के आदेश का उल्लघन किया गया इस लिए यह आरोप भी प्रमाणित होता है। द्वारा जमाबंदी पंजी को छुपाया गया है। अतः अनुरोध है कि इस आरेाप से मुक्त करने की कृपा किया जाए। उपस्थापन पदाधिकारी घोड़ासहन एवं संचालन पदाधिकारी, मोतिहारी द्वारा श्रीमान्‌ के यहाँ मिथ्या प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। श्रीमान्‌ स्वयं समझ सकते है कि अपर समाहर्त्ता, महोदय के सामने एक राजस्व कर्मचारी को उनके लिखित या मौखिक आदेश का पालन नहीं करने की बात करना कहाँ तक सत्य ह ै। जबकि तत्कालीन अपर समाहर्त्ता महोदय अंचल कार्यालय घोड़ासहन में दिनांकः 02.02.2017 को सभी अभिलेखों की जाँच किये। इसके बाद मुझसे श्रीमान्‌ द्वारा सभी प्रकार का अभिलेखों और पंजी-II का जाँच किये। इसके पश्चात मुझसे प्रभार सूची लिए उपस्थापन पदाधिकारी एवं संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन मिथ्या है। अतः मुझे उक्त आरोप से मुक्त करने की कृप्या प ्रदान किया जाय।
13 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 14 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 15 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 16 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 17 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 18 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 19 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 20 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 21 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 22 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 23 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 24 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 25 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

उपरोक्त तथ्यों स्पष्ट होता है कि श्री दीनबन्धु पाण्डेय, निलम्बित राजस्व कर्मचारी, अंचल घोड़ासहन के द्वारा प्रस्तुत द्वितीय कारणपृच्छा में संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई स्पष्टीकरण में जो बातें कही गई है उसके अलावा कुछ नहीं कहा गया है।

उक्त आलोक में श्री पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत किये गये द्वितीय कारणपृच्छा को अस्वीकृत्त किया जाता है। उपरोक्त तथ्यों के विवेचना के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि श्री पाण्डेय पर अधिरोपित सभी आरोप प्रमाणित है जो उनके स्वेच्छाचारिता, दुःसाहस, अनुशासनहीनता तथा सरकारी आदेशों का अवहेलना तथा अपने कर्त्तव्य के प्रति निष्ठावान नहीं रहने का आरोप प्रमाणित होता है जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 1 (I) (II) (III) के प्रतिकूल है। एक सरकारी कर्मचारी के लिए इस प्रकार के कृत्त गंभीर मामला है। उन्हें कठोर दण्ड देना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा भ्रष्टाचार एवं अराजकता को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकारी कर्मियों में भी गलत संदेश जायेगा।

अतः उपरोक्त तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित के नियम- 14 (XI) में निहित प्रावधानों के तहत्‌ शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं शीर्षत कपिल अशोक, भा0प्र0से0 जिलाधिकारी-सह-जिला दण्डाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी श्री दीनबन्धु पाण्डेय, निलम्बित राजस्व कर्मचारी, अंचल घोड़ासहन को आदेश निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्तगी, जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्ह्‌ता होगी का दण्ड अधिरोपित करता हूँ।

श्री दीनबन्धु पाण्डेय, निलम्बित राजस्व कर्मचारी, अंचल घोड़ासहन से संबंधित सूचना निम्नवत्‌ हैः-

1. नाम - श्री दीनबन्धु पाण्डेय,26 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020 2. पिता का नाम - स्व0 विद्या पाण्डेय,

3. पदनाम - राजस्व कर्मचारी 4. जन्म तिथि - 10.08.1960 5. नियुक्ति की तिथि - 01.01.1988 6. वर्त्तमान वेतनमान - 9300-34800 7. वर्तमान पता -ग्राम-,सर्वोदयनगर, वार्ड नं0-18 रक्सौल,पो0-रक्सौल, थाना-रक्सौल,

जिला-पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी, पिनकोड-845305.

8. स्थायी पता -ग्राम-परसौनी,पो0-तेलूआ थाना-नौतन, जिला-पश्चिम चम्पारण, बेतिया।

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 34—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in27 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————

सूचना ------

सं0 1373--मै रेणु सिह, पिता–(cid:7088)ी रमाकान्त चौधरी, पति–संजय कु मार सिह, (cid:7061)ाम+पोस्ट– डीह बुचौली, थाना–ज(cid:7003)दाहा, जिला–बैशाली, बिहार, पूर्व में मेरा नाम कु मारी रेणु एवं रेणु था, शपथ पत्र संख्या–2533 दिनांक–09.10.2020 के अनुसार अब मैं रेणु सिह के नाम से जानी जाऊं गी ।

रेणु सिह ।

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No. 1374-- I, ABHINAV S/O Prafulla Kumar Ojha, R/O MIG-24, Hanuman Nagar, Kankarbagh, Lohiya Nagar, Patna-20 have added surname as Ojha. Now I shall be known as Abhinav Ojha. Aff. No 12829 dated 11.11.2020.

ABHINAV.

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No. 1375--I SUJIT Kumar Singh R/o-Flat no. 301 Narayana Residency rd.no.1,Tilak nagar rukunpura Patna 14, I have added surname of my son Ansh as Ansh Rajput affidavit .no.7299 dated 4/9/2020.

SUJIT Kumar Singh.

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No. 1376--I AMAN s/o- Sujit Kumar Singh R/o-Flat no.301 Narayana residency Road. no.1, Tilak nagar rukunpura Patna-14 affidavit no.7298 dated 4/9/2020 shall be known as Aman Rajput.

AMAN.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 34—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in28 बिहार गजट, 23 दिसम्बर 2020

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी kjk प्रकाशित

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सं0 6/आ.-21/2020-सा.प्र.-11918

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

14 दिसम्बर 2020

सितम्बर, 2019 के अंतिम सप्ताह में पटना में हुए बारिश से हुए जल-जमाव की दीर्घकालीन अवधि तक बने रहने की स्थिति के प्रकरण में श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह, भा.प्र.से. (बिहारः 2007), तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको), पटना द्वारा बरती गई लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता के आरोप के मामले में श्री सिंह के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। इस संबंध में निर्गत आरोप ज्ञापन संख्या-4413 दिनांक 29.04.2020 के आलोक में श्री सिंह द्वारा लिखित बचाव अभ्यावेदन दिनांक 04.06.2020 समर्पित किया गया। उक्त लिखित बचाव बयान में श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया। राज्य सरकार द्वारा सम्यक विचारोपरांत इन गंभीर आरोपों की गहन जाँच के लिए अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-8 (6) (ं) के अंतर्गत मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को जाँच पदाधिकारी और नगर विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव से अन्यून पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नामित करने का निर्णय लिया गया है।

2. तद्‌नुसार, श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह के विरूद्ध गठित आरोपों की गहन जाँच हेतु मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को जाँच पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

3. श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह जाँच पदाधिकारी के समक्ष इस संकल्प की प्राप्ति होने की तिथि से 10 (दस) कार्य दिवसो ंमें अथवा 10 (दस) कार्य दिवसों के बाद विहित किसी समय या उससे अनधिक दस दिनों के अंदर किसी समय जैसा जाँच पदाधिकारी आदेश दें, स्वयं या अपने द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के साथ उपस्थित होंगे। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की एक प्रति सभी सुसंगत कागजातों यथा आरोप का मद, कदाचारिता विवरणी, साक्ष्यों एवं बचाव बयान आदि की प्रति के साथ संबंधित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित किया जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से कन्हैयालाल साह, अवर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 34—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 23 December 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2020-12-23.46/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2020-12-23.46.