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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 13 January 2021

Published 13 January 2021

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2021-01-13.2
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार }kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-68 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 69-72 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची i`"B

i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 73-73 पूरक

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पूरक-क 74-822 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं।

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पटना उच्च न्यायालय

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अधिसूचनाएं

7 सितम्बर 2020

सं0 94 नि0ः--निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित पदाधिकारियों को, तालिका के स्तंभ-3 में निर्देशित स्थान एवं स्तम्भ 4 में दी गयी स्थानान्तरण श्रृंखला के अंतर्गत जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य हेतु स्थानांतरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान। स्थान का नाम जहॉ पदाधिकारी स्थानान्तरित किए गए। स्थानान्तरण श्रृंखला
1 2 3 4
1. श्री रूद्र प्रकाश मिश्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना दरभंगा रिक्त
2. श्री शैलेन्द्र सिंह, निबंधक (प्रशासन) पटना उच्च न्यायालय, पटना भोजपुर स्थित आरा रिक्त
3. श्री सुनील दत्त मिश्रा, सदस्य सचिव, बिहार राज्य लिगल सर्विसेस अथो र्रिटी, पटना पटना स्थानान्तरित श्री रूद्र प्रकाश मिश्रा के स्थान पर
4. श्री प्रेम रंजन मिश्रा, निबंधक, उच्च न्यायालय लिगल सर्विसेस कमिटि, पटना गया स्थानान्तरित श्री चन्द्र शेखर झा के स्थान पर
5. श्री परशुराम सिंह यादव, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, मुंगेर पूर्वी चम्पारण स्थित मोतिहारी रिक्त
6. डा0 रमेश चन्द्र द्विवेदी, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, गया नालन्दा स्थित बिहारशरीफ रिक्त

नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 7th September 2020

No. 94 A:--The following officers named in column no. 2 of the table given below are hereby transferred and posted as District and Sessions Judges at the stations mentioned in column no. 3 of the table against their respective names and in chain as indicated in column no. 4 of the table given below :

Sl. No. Name of the Officers with designation and present place of posting Name of the station where the officer has been transferred Chain of Transfer
1. 2. 3. 4.
1. Sri Rudra Prakash Mishra, District & Sessions Judge, Patna Darbhanga Since Vacant
2. Sri Shailendra Singh, Registrar (Administration) Patna High Court, Patna Bhojpur at Ara Since Vacant
3. Sri Sunil Dutta Mishra, Member Secretary, Bihar State Legal Services Authority, Patna Patna Vice Sri Rudra Prakash Mishra, since transferred
4. Sri Prem Ranjan Mishra, Registrar, High Court Legal Services Committee, Patna Gaya Vice Sri Chandra Shekhar Jha, since transferred
5. Sri Parshuram Singh Yadav, Principal Judge, Family Court, Munger East Champaran at Motihari Since Vacant
6. Dr. Ramesh Chandra Dwivedi, Principal Judge, Family Court, Gaya Nalanda at Biharsharif Since Vacant
3 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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7 सितम्बर 2020

सं0 96 नि0ः--निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित पदाधिकारियों को, तालिका के स्तंभ-3 में निर्देशित स्थान एवं स्तम्भ 4 में दी गयी स्थानान्तरण श्रृंखला के अंतर्गत जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य हेतु स्थानांतरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान। स्थान का नाम जहॉ पदाधिकारी स्थानान्तरित किए गए। स्थानान्तरण श्रृंखला
1 2 3 4
1. श्री मो0 शमीम अखतर, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, सुपौल बेगुसराय रिक्त
2. श्री राकेश पति तिवारी, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, भागलपुर मधुबनी श्री कृष्ण मुरारी शरण के स्थान पर जिनकी पदस्थापन की अनुशंसा सदस्य सचिव, बिहार राज्य लिगल सर्विसेज अथो र्रिटी, पटना के रूप मे की ं गयी है।
3. श्री अंजनी कुमार सिंह, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, पूर्वी चम्पारण स्थित मोतिहारी बक्सर रिक्त
4. श्री कुमुद रंजन सिंह, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, बांका खगड़िया रिक्त

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 7th September 2020

No. 96 A :--The following officers named in column no. 2 of the table given below are hereby transferred and posted as District and Sessions Judges at the stations mentioned in column no. 3 of the table against their respective names and in chain as indicated in column no. 4 of the table given below :

4 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021
Sl. No. Name of the Officers with designation and present place of posting Name of the station where the officer has been transferred Chain of Transfer
1. 2. 3. 4.
1. Sri Md. Shamim Akhtar, Principal Judge, Family Court, Supaul Begusarai Since Vacant
2. Sri Rakesh Pati Tiwari, Principal Judge, Family Court, Bhagalpur Madhubani Vice Sri Krishna Murari Sharan, who has been recommended for posting as Member Secretary, Bihar State Legal Services Authority, Patna
3. Sri Anjani Kumar Singh, Principal Judge, Family Court, East Champaran at Motihari Buxar Since Vacant
4. Sri Kumud Ranjan Singh, Principal Judge, Family Court, Banka Khagaria Since Vacant

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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7 सितम्बर 2020

सं0 95 नि0 :--स्थानांतरित श्री शैलेन्द्र सिंह के स्थान पर, श्री चन्द्र शेखर झा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया को उनके पद पर भार ग्रहण करने की तिथि से, माननीय मुख्य न्यायाधीश के आदेशानुसार, पटना उच्च न्यायालय, पटना का निबंधक (प्रशासन) नियुक्ति किया जाता है।

माननीय मुख्य न्यायाधीश के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 7th September 2020

No. 95 A :---Hon'ble Court have been pleased to appoint Sri Chandra Shekhar Jha, District & Sessions Judge, Gaya as Registrar (Administration), Patna High Court, Patna with effect from the date he assumes charge of his office vice Sri Shailendra Singh since transferred.

By order of Hon'ble the Chief Justice, N.K. Pandey, Registrar General.

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17 सितम्बर 2020

सं0 97 नि0ः--अपने वर्त्तमान कर्त्तव्यों से विरमित होने पर श्री कृष्ण मुरारी शरण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मधुबनी की सेवायें सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के पद पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्ति हेतु अधिकतम तीन वर्षों के लिए बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग, पटना के अन्तर्गत सौंपी जाती है।

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 17th September 2020

No. 97 A:---On being relieved of his present assignment, the services of Sri Krishna Murari Sharan, District and Sessions Judge, Madhubani are placed at the disposal of the State Government in the Department of General Administration, Patna5 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 for his appointment as Member Secretary, Bihar State Legal Services Authority, Patna, on deputation basis, for a maximum period of three years.

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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14 अक्तूबर 2020

सं0 175 नि0ः--सभी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी एवं न्यायिक दण्डाधिकारी, प्रथम श्रेणी जो इस रूप में कम-से-कम तीन साल की सेवा पूरी कर चुके हैं और जो व्यवहार न्यायालय में आगामी दुर्गापूजा अवकाश में कार्यरत रहेगें उन्हें उस अवधि के लिए इसके द्वारा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 1964 (47-1964) द्वारा यथा संशोधित आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अन्तर्गत उनके अपने-अपने जिलों/अनुमंडलों में उक्त अधिनियम की धारा-3 के अधीन बने किसी ऐसे आदेश जिसे राजपत्र अधिसूचित आदेश द्वारा उस संबंध में उल्लेखित है, के उल्लंघन के संबंध में हुए अपराधों के विषय में दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (अधिनियम 2, 1974) की धारा 260(1) (सी) के अधीन संक्षिप्त विचारण करने की शक्तियाँ अस्थायी रूप से प्रदान की जाती है।

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 14th October 2020

No. 175 A :--All the Chief Judicial Magistrate, Additional Chief Judicial Magistrate and Judicial Magistrate, 1st Class who have completed at least three years of service as such and who are detained during ensuing Civil Court's Durga Puja Vacation are hereby vested temporarily, for this period only, with the powers u/s 260(1)(c) of the code of Criminal Procedure 1973 (Act 2 of 1974) for the summary trial of offences arising generally within their respective Districts/Sub-Divisions relating to the contravention of any order made under sections 3 of the Essential commodities Act as amended by Essential Commodities (Amendment) Act 1964 (no. 47 of 1964) and duly notified in the official Gazette as laid down in section 12A of the Essential Commodities Act 1955.

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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19 अक्तूबर 2020

सं0 208 नि0 :--निम्न तालिका के स्तंभ-2 में उल्लिखित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश को, तालिका के स्तंभ-3 में निर्देशित जजी एवं स्थान पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य करने हेतु स्थानांतरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी सहित। अ) नए स्थान का पदनाम ब) पदाधिकारी का साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी जहाँ स्थानांतरित किये गये हैं
1. श्री दुर्गेश मणि त्रिपाठी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बगहा (पश्चिमी चम्पारण) अ) अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब) लखीसराय स) लखीसराय
2. श्री कन्हैया जी चौधरी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पूर्णियॉ (पूर्णियॉ) अ) अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब) बिहारशरीफ स) नालन्दा
3. श्री चन्द्र मोहन झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सहरसा (सहरसा) अ) अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब) बांका स) बांका
4. श्री संतोष कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हिलसा (नालन्दा) अ) अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब) बिहारशरीफ स) नालन्दा
5. श्री बसंत कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, छपरा (सारण) अ) अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ब) शेखपुरा स) शेखपुरा
6 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 19th October 2020

No. 208 A :---The Additional District and Sessions Judges, named in column no. 2 of the table given below are hereby transferred and posted as Additional District and Sessions Judges in the Judgeship to be stationed ordinarily at the places mentioned in column no. 3 of the table against their respective names : Sl. No.

Sl. No. Name of the Officers with designation and present place of posting with Judgeship. (a) Designation at the new station (b) Place where the officer is to be ordinarily stationed at (c) Name of the Judgeship in which posted on transfer
1. 2. 3.
1. Sri Durgesh Mani Tripathi, Additional District and Sessions Judge, Bagaha (West Champaran) (a) Additional District & Sessions Judge (b) Lakhisarai (c) Lakhisarai
2. Sri Kanhaiya Jee Choudhary, Additional District and Sessions Judge, Purnea (a) Additional District & Sessions Judge (b) Biharsharif (c) Nalanda
3. Sri Chandra Mohan Jha, Additional District and Sessions Judge, Saharsa (a) Additional District & Sessions Judge (b) Banka (c) Banka
4. Sri Santosh Kumar, Additional District and Sessions Judge, Hilsa (Nalanda) (a) Additional District & Sessions Judge (b) Biharsharif (c) Nalanda
5. Sri Basant Kumar, Additional District and Sessions Judge, Chapra (Saran) (a) Additional District & Sessions Judge (b) Sheikhpura (c) Sheikhpura

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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20 अक्तूबर 2020

सं0 210 नि0 :--श्रीमति ख्याति सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना को श्री त्रिभुवन नाथ, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, शिवहर के स्थान पर स्थानांतरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।7 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

The 20th October 2020

No. 210 A : Smt. Kheyati Singh, Additional District and Sessions Judge, Patna is transferred and posted as Additional District and Sessions Judge of Sheohar in place of Sri Tribhuwan Nath.

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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19 अक्तूबर 2020

सं0 207 नि0ः--निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित न्यायिक पदाधिकारियों (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) को उसी तालिका के स्तम्भ-3 में क्रमशः उनके नाम के सामने निर्देशित जजी एवं स्थान जहाँ पर वे अधिष्ठित रहेगे पर अवर न्यायाधीश सह अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के रूप में स्थानांतरित किया जाता है।

पुनः दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 11 की उपधारा (3) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय, स्तंभ-3 में अंकित अवर न्यायाधीश (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) को उनके पदस्थापन के जिला के क्षेत्राधिकारों के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक दण्डाधिकारी की शक्तियां प्रदान करता है, बशर्ते उनके द्वारा निष्पादित दिवानी तथा आपराधिक वादों की संख्या 30ः70 के अनुपात में हो।

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान (जजी सहित) अ) नये स्थान का पदनाम ब) पदाधिकारी का साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी/स्थान जहाँ स्थानांतरित किये जाते हैं।
1. श्री सतीश कुमार झा अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, बेगूसराय (बेगूसराय) (अ) अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (ब) बखरी (स) बेगूसराय
2. श्री महावीर प्रसाद अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, जमुई (जमुई) (अ) अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (ब) धमदाहा (स) पूर्णिया
3. श्री नवीन कुमार दूबे अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, मुंगेर (मुंगेर) (अ) अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (ब) बारसोई (स) कटिहार

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 19th October 2020

No. 207 A :---The Judicial Officers of the cadre of Civil Judge (Senior Division), named in column no. 2 of the table given below are transferred and posted as Sub Judge-cum-A.C.J.M. in the Judgeship to be stationed ordinarily at the station mentioned in column no. 3 of the table. Further in exercise of the powers conferred under Sub Section (3) of Section (11) of the Code of Criminal Procedure, 1973 (Act 2 of 1974) the High Court are pleased to confer upon the Subordinate Judge named below, the powers of a Judicial Magistrate of the 1st Class for the concerned Districts, provided that they shall work in such a way that their disposal of Civil and Criminal matter must be in the ratio of 30:70.

Sl. No. Name of the Officer, designation and present place of posting (with Judgeship) (a) Designation at the new station (b) Place where the officer is to be stationed at ordinarily (c) Name of the Judgeship/place in which transferred.
1. 2. 3.
1. Sri Satish Kumar Jha Sub Judge -cum-A.C.J.M., Begusarai (Begusarai) a) Sub Judge-cum-ACJM b) Bakhari c) Begusarai
2. Sri Mahavir Prasad Sub Judge-cum-A.C.J.M., Jamui (Jamui) a) Sub Judge-cum-ACJM b) Dhamdaha c) Purnea
3. Sri Navin Kumar Dubey Sub Judge-cum-A.C.J.M., Munger (Munger) a) Sub Judge-cum-ACJM b) Barsoi c) Katihar
8 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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20 अक्तूबर 2020

सं0 211 नि0ः--निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित न्यायिक पदाधिकारियों (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) को उसी तालिका के स्तम्भ-3 में क्रमशः उनके नाम के सामने निर्देशित जजी एवं स्थान जहॉ पर वे अधिष्ठित रहेगे पर अवर न्यायाधीश सह अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के रूप में स्थानांतरित किया जाता है।

पुनः दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 11 की उपधारा (3) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय, स्तंभ-3 में अंकित अवर न्यायाधीश (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) को उनके पदस्थापन के जिला के क्षेत्राधिकारों के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक दण्डाधिकारी की शक्तियां प्रदान करता है, बशर्ते उनके द्वारा निष्पादित दिवानी तथा आपराधिक वादों की संख्या 30ः70 के अनुपात में हो।

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान (जजी सहित) अ) नये स्थान का पदनाम ब) पदाधिकारी का साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी/स्थान जहाँ स्थानांतरित किये जाते हैं।
1. श्री निशित दयाल, असैनिक न्यायाधीश (वरिय कोटि) वर्तमान में निबंधक, बिहार भूमि न्यायाधीकरण, पटना। (अ) अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, (ब) शिवहर (स) शिवहर
2. श्री मनोरंजन कुमार झा, अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, बेतिया (पश्चिमी चम्पारण) (अ) अवर न्यायाधीश-सह-अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, (ब) पटना (स) पटना

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 20th October 2020

No. 211 A :---The Judicial Officers of the cadre of Civil Judge (Senior Division), named in column no. 2 of the table given below are transferred and posted as Sub Judge-cum-A.C.J.M. in the Judgeship to be stationed ordinarily at the station mentioned in column no. 3 of the table. Further in exercise of the powers conferred under Sub Section (3) of Section (11) of the Code of Criminal Procedure, 1973 (Act 2 of 1974) the High Court are pleased to confer upon the Subordinate Judge named below, the powers of a Judicial Magistrate of the 1st Class for the concerned Districts, provided that they shall work in such a way that their disposal of Civil and Criminal matter must be in the ratio of 30:70.

Sl. No. Name of the Officer, designation and present place of posting (with Judgeship) (a) Designation at the new station (b) Place where the officer is to be stationed at ordinarily (c) Name of the Judgeship/place in which transferred
1. 2. 3.
1. Sri Nishit Dayal Civil Judge (Sr. Division) presently posted as Registrar Bihar Land Tribunal, Patna a) Sub Judge -cum- ACJM b) Sheohar c) Sheohar
2. Sri Manoranjan Kumar Jha Sub Judge -cum- A.C.J.M., Bettiah (West Champaran) a) Sub Judge -cum- ACJM b) Patna c) Patna
9 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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पटना उच्च न्यायालय, पटना

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शुद्धि-पत्र

21 अक्तूबर 2020

सं0 44243--माननीय उच्च न्यायालय की अधिसूचना संख्या-211 नि. दिनांक 20.10.2020 में आंशिक सुधार करते हुए यह जोड़ा जाता है कि श्री निशित दयाल, असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि वर्तमान में निबंधक, बिहार भूमि न्यायाधीकरण, पटना को श्री राम सुजन पाण्डेय के स्थान पर अवर न्यायाधीश सह अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, शिवहर के रूप में स्थानान्तरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।

The 21st October 2020

No. 44243---In partial modification of Court's notification no. 211 A dated 20.10.2020, it is added that Sri Nishit Dayal, Civil Judge (Senior Division), presently posted as Registrar, Bihar Land Tribunal, Patna has been transferred and posted as Sub Judge-cum-A.C.J.M.-cum-Secretary, D.L.S.A., Sheohar in place of Sri Ram Sujan Pandey.

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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23 अक्तूबर 2020

सं0 217 नि0ः--निम्नलिखित न्यायिक पदाधिकारियों को उनके नाम के सामने तालिका के स्तम्भ III में अंकित

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान सम्पुष्टि की तिथि
I II III
1. श्री प्रजेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 14.08.2019
2. श्री आनंद नंदन सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीतामढ़ी। 16.08.2019
3. श्री संजय अग्रवाल, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दरभंगा। 20.08.2019
4. श्री सयैद मो0 शब्बीर आलम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जमुई। 13.08.2019
5. श्री दिग्विजय कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेतिया। 13.08.2019
6. श्री पुनीत कुमार गर्ग, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुजफ्फरपुर। 20.08.2019
7. श्री अखिलेश कुमार झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीवान। 13.08.2019
8. श्री अजय कुमार शर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आरा। 13.08.2019
9. सुश्री काजल झाम्ब, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भभुआ। 31.08.2019
10. श्री अनंत सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सासाराम। 13.08.2019
11. श्री पवन कुमार पाण्डेय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेतिया। 16.08.2019
12. श्री ब्रजेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, छपरा। 14.08.2019
13. श्री उदयवंत @ उदयवंत कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हाजीपुर। 14.08.2019
14. श्री अनुज कुमार जैन, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हाजीपुर। 14.08.2019
15. श्री आलोक गुप्ता, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भभुआ। 13.08.2019
16. श्री उज्ज्वल कुमार सिन्हा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना सिटी। 16.08.2019
17. श्री आशुतोष कुमार झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हाजीपुर। 14.08.2019
18. श्री अनुराग, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुंगेर। 16.08.2019
19. श्री सुशांत कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सीतामढ़ी। 16.08.2019
20. श्री गुरूविन्दर सिंह मलहोत्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 18.08.2019
21. श्री समीर कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नवादा। 13.08.2019
22. श्री भारत भूषण भसीन, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सासाराम। 18.08.2019
23. श्री गुंजन पाण्डेय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोपालगंज। 13.08.2019
24. श्री दिनेश शर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भागलपुर। 20.08.2019
25. श्री अमिताभ चौधरी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नौगछिया। 14.08.2019
26. सुश्री श्वेता कुमारी सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आरा। 10.08.2019
27. श्री मोतिश कुमार सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सहरसा। 14.08.2019
28. श्री बासनो शंकर मेहरोत्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आरा। 18.08.2019
29. श्री अभिषेक कुमार दास, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अररिया। 16.08.2019
30. श्री ऋषि कांत, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया। 14.08.2019
31. श्री राजेश कुमार बच्चन, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सासाराम। 29.08.2019
32. श्री रणवीर सिंह, संयुक्त निबंधक (स्थापना), पटना उच्च न्यायालय, पटना। 16.08.2019
33. श्री संदीप सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दानापुर। 14.08.2019
34. श्री सत्य भूषण आर्य, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, समस्तीपुर। 16.08.2019
35. सुश्री गीता गुप्ता, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 20.08.2019
36. श्री संतोष कुमार तिवारी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नवादा। 24.08.2019
37. श्री दीपक कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 14.08.2019
38. श्री राजीव रंजन कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 16.08.2019
39. श्री विकास कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना सिटी। 14.08.2019
40. सुश्री नम्रता तिवारी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया। 13.08.2019
41. श्री अरविन्द कुमार शर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मोतिहारी। 13.08.2019
42. श्री अविनाश कुमार-I, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 16.08.2019
43. श्री रविन्द्र सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेगूसराय। 18.08.2019
44. श्री दीपक भटनागर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेगूसराय। 20.08.2019
45. श्री धर्मेन्द्र झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, छपरा। 14.08.2019
46. श्री सुनील दत्त पाण्डेय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, औरंगाबाद। 18.08.2019
47. श्री धीरेन्द्र बहादुर सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बक्सर। 14.08.2019
48. श्री सुशील कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 14.08.2019
49. श्री रोहित शंकर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भागलपुर। 13.08.2019
50. श्री मनोज कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आरा। 10.08.2019
51. श्री मनोज कुमार द्विवेदी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दरभंगा। 16.08.2019
52. श्री उर्मिलजीत कौर, संयुक्त सचिव-सह-अपर विधि परामर्शी, विधि विभाग, पटना। 10.08.2019
53. श्री प्रमोद कुमार पंकज, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नवादा। 14.08.2019
54. श्री लव कुश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोपालगंज। 10.09.2019
55. श्री राहुल उपाध्याय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मोतिहारी। 10.08.2019
56. श्री हमबीर सिंह बघेल, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दरभंगा। 18.08.2019
57. श्री मनोज कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना सिटी। 14.08.2019
58. श्री विवेक कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, औरंगाबाद। 16.08.2019
59. श्री सरवेन्द्र प्रताप सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद। 13.08.2019
60. श्री राकेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुजफ्फरपुर। 21.08.2019
61. श्री सतीश कुमार देव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद। 13.08.2019
62. श्री अविनाश कुमार-II, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना। 14.08.2019
63. श्री प्रणव कुमार झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, समस्तीपुर। 10.08.2019
64. श्री पीयुष प्रभाकर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मोतिहारी। 13.08.2019
65. श्री रामाकांत, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, औरंगाबाद। 16.08.2019
66. श्री धृति जसलीन शर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सासाराम। 13.08.2019
67. श्री जय किशोर दूबे, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हिलसा। 13.08.2019
68. श्री आशुतोष पाण्डेय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मधुबनी। 14.08.2019
69. श्री ऋषि कुमार सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कटिहार। 25.08.2019
70. श्री पवन कुमार झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कटिहार। 10.08.2019
71. श्री इसरार अहमद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सुपौल। 01.09.2019
72. श्री दिनेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोपालगंज। 13.08.2019
73. श्री अरूण कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेगूसराय। 18.08.2019
74. श्री बीजेन्द्र कुमार धनखर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद। 13.08.2019
75. श्री गिरधारी उपाध्याय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मोतिहारी। 10.08.2019
76. श्री गजनफर हैदर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हाजीपुर। 14.08.2019
77. श्री मुंशी लाल गौतम, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेगूसराय। 18.08.2019
78. श्री मिलन कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मोतिहारी। 13.08.2019
79. श्री प्रमोद कुमार यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, खगड़िया। 13.08.2019
80. श्री असिताभ कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आरा। 10.08.2019
81. श्री शैलेन्द्र कुमार पाण्डा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बाढ़। 14.08.2019
82. श्री शशि कांत ओझा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नवादा। 21.08.2019
83. श्री महेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुंगेर। 14.08.2019
84. श्री बलजिंदर पाल, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पूर्णियाँ। 13.08.2019
85. श्री योगेश गोयल, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, समस्तीपुर। 16.08.2019
86. श्री सुधाकर पाण्डेय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हाजीपुर। 14.08.2019
87. श्री अरूण कुमार शर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बेतिया। 04.09.2019
10 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 11 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 12 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

उच्च न्यायालय के आदेश से, नवनीत कुमार पाण्डेय, महानिबंधक।13 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

The 23rd October 2020

No. 217 A :---The following officers are confirmed in the cadre of Bihar Superior Judicial Service with effect from the dates mentioned against their respective names in column III of the table given below :-

Sl. No. Name of the Officer with designation and present place of posting Date of confirmation
I II III
1. Sri Prajesh Kumar, A.D.J., Patna 14.08.2019
2. Sri Anand Nandan Singh, A.D.J., Sitamarhi 16.08.2019
3. Sri Sanjay Agarwal, A.D.J., Darbhanga 20.08.2019
4. Sri Syed Mohammad Shabbir Alam A.D.J., Jamui 13.08.2019
5. Sri Digvijay Kumar, A.D.J., Bettiah 13.08.2019
6. Sri Puneet Kumar Garg, A.D.J., Muzaffarpur 20.08.2019
7. Sri Akhilesh Kumar Jha, A.D.J., Siwan 13.08.2019
8. Sri Ajay Kumar Sharma, A.D.J., Ara 13.08.2019
9. Ms. Kajal Jhamb, A.D.J., Bhabhua 31.08.2019
10. Sri Anant Singh, A.D.J., Sasaram 13.08.2019
11. Sri Pawan Kumar Pandey, A.D.J., Bettiah 16.08.2019
12. Sri Brajesh Kumar, A.D.J., Chapra 14.08.2019
13. Sri Udaywant @ Udayvant Kumar, A.D.J., Hajipur 14.08.2019
14. Sri Anuj Kumar Jain, A.D.J., Hajipur 14.08.2019
15. Sri Alok Gupta, A.D.J., Bhabhua 13.08.2019
16. Sri Ujjwal Kumar Sinha, A.D.J., Patna City 16.08.2019
17. Sri Ashutosh Kumar Jha, A.D.J., Hajipur 14.08.2019
18. Sri Anurag, A.D.J., Munger 16.08.2019
19. Sri Sushant Kumar, A.D.J., Sitamarhi 16.08.2019
20. Sri Guruvinder Singh Malhotra, A.D.J., Patna 18.08.2019
21. Sri Samir Kumar, A.D.J., Nawadah 13.08.2019
22. Sri Bharat Bhushan Bhasin, A.D.J., Sasaram 18.08.2019
23. Sri Gunjan Pandey, A.D.J., Gopalganj 13.08.2019
24. Sri Dinesh Sharma, A.D.J., Bhagalpur 20.08.2019
25. Sri Amitava Choudhary, A.D.J., Naugachia 14.08.2019
26. Ms. Shweta Kumari Singh, A.D.J., Ara 10.08.2019
27. Sri Motish Kumar Singh, A.D.J., Saharsa 14.08.2019
28. Sri Banso Shanker Mehrotra, A.D.J., Ara 18.08.2019
29. Sri Abhishek Kumar Das, A.D.J., Araria 16.08.2019
30. Sri Rishi Kant, A.D.J., Gaya 14.08.2019
31. Sri Rajesh Kumar Bachchan, A.D.J., Sasaram 29.08.2019
32. Sri Ranvir Singh, Joint Registrar (Establishment), Patna High Court, Patna 16.08.2019
33. Sri Sandip Singh, A.D.J., Danapur 14.08.2019
34. Sri Satya Bhushan Arya, A.D.J., Samastipur 16.08.2019
35. Ms. Geeta Gupta, A.D.J., Patna 20.08.2019
36. Sri Santosh Kumar Tiwary, A.D.J., Nawadah 24.08.2019
37. Sri Deepak Kumar, A.D.J., Patna 14.08.2019
38. Sri Rajeev Ranjan Kumar, A.D.J., Patna 16.08.2019
39. Sri Vikas Kumar, A.D.J., Patna City 14.08.2019
40. Ms. Namrata Tiwary, A.D.J., Gaya 13.08.2019
41. Sri Arvind Kumar Sharma, A.D.J., Motihari 13.08.2019
42. Sri Avinash Kumar I, A.D.J., Patna 16.08.2019
43. Sri Ravinder Singh, A.D.J., Begusarai 18.08.2019
44. Sri Deepak Bhatnagar, A.D.J., Begusarai 20.08.2019
45. Sri Dharmendra Jha, A.D.J., Chapra 14.08.2019
46. Sri Sunil Dutta Pandey, A.D.J., Aurangabad 18.08.2019
47. Sri Dhirendra Bahadur Singh, A.D.J., Buxar 14.08.2019
48. Sri Sushil Kumar, A.D.J., Patna 14.08.2019
49. Sri Rohit Shankar, A.D.J., Bhagalpur 13.08.2019
50. Sri Manoj Kumar, A.D.J., Ara 10.08.2019
51. Sri Manoj Kumar Dwivedi, A.D.J., Darbhanga 16.08.2019
52. Sri Urmiljeet Kaur, Joint Secretary-cum-Additional Legal Remembrancer, Law Deptt., Patna 10.08.2019
53. Sri Pramod Kumar Pankaj, A.D.J., Nawadah 14.08.2019
54. Sri Law Kush Kumar, A.D.J., Gopalganj 10.09.2019
55. Sri Rahul Upadhyay, A.D.J., Motihari 10.08.2019
56. Sri Hambir Singh Baghel, A.D.J., Darbhanga 18.08.2019
57. Sri Manoj Kumar, A.D.J., Patna City 14.08.2019
58. Sri Vivek Kumar, A.D.J., Aurangabad 16.08.2019
59. Sri Sarvendra Pratap Singh, A.D.J., Jehanabad 13.08.2019
60. Sri Rakesh Kumar, A.D.J., Muzaffarpur 21.08.2019
61. Sri Satish Kumar Deo, A.D.J., Jehanabad 13.08.2019
62. Sri Avinash Kumar II, A.D.J., Patna 14.08.2019
63. Sri Pranav Kumar Jha, A.D.J., Samastipur 10.08.2019
64. Sri Piyush Prabhakar, A.D.J., Motihari 13.08.2019
65. Sri Ramakant, A.D.J., Aurangabad 16.08.2019
66. Sri Dhriti Jasleen Sharma, A.D.J., Sasaram 13.08.2019
67. Sri Jay Kishore Dubey, A.D.J., Hilsa 13.08.2019
68. Sri Ashutosh Pandey, A.D.J., Madhubani 14.08.2019
69. Sri Rishi Kumar Singh, A.D.J., Katihar 25.08.2019
70. Sri Pawan Kumar Jha, A.D.J., Katihar 10.08.2019
71. Sri Esrar Ahmed, A.D.J., Supaul 01.09.2019
72. Sri Dinesh Kumar, A.D.J., Gopalganj 13.08.2019
73. Sri Arun Kumar, A.D.J., Begusarai 18.08.2019
74. Sri Bijender Kumar Dhankhar, A.D.J., Jehanabad 13.08.2019
75. Sri Girdhari Upadhyay, A.D.J., Motihari 10.08.2019
76. Sri Ghazanfer Haider, A.D.J., Hajipur 14.08.2019
77. Sri Munshi Lal Gautam, A.D.J., Begusarai 18.08.2019
78. Sri Milan Kumar, A.D.J., Motihari 13.08.2019
79. Sri Pramod Kumar Yadav, A.D.J., Khagaria 13.08.2019
80. Sri Asitabh Kumar, A.D.J., Ara 10.08.2019
81. Sri Shailendra Kumar Panda, A.D.J., Barh 14.08.2019
82. Sri Shashi Kant Ojha, A.D.J., Nawadah 21.08.2019
83. Sri Mahesh Kumar, A.D.J., Munger 14.08.2019
84. Sri Baljinder Pal, A.D.J., Purnea 13.08.2019
85. Sri Yogesh Goel, A.D.J., Samastipur 16.08.2019
86. Sri Sudhakar Pandey, A.D.J., Hajipur 14.08.2019
87. Sri Arun Kumar Sharma, A.D.J., Bettiah 04.09.2019
14 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 15 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

By Order of the High Court, N.K. Pandey, Registrar General.

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जल संसाधन विभाग

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आवश्यक सूचना

7 जनवरी 2020

सं0 सिं॰को॰-01/2001 पार्ट-IV--12--मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, गया के परिक्षेत्राधीन सोन उच्चस्तरीय नहर के फरीदपुर वितरणी एवं बेनीपुर उप वितरणी में पुनस्र्थापन कार्य हेतु रब्बी सिंचाई 2020-21 के दौरान जलश्राव बंद रखने का निर्णय लिया गया है ।

अतः सोन उच्चस्तरीय नहर के फरीदपुर वितरणी एवं बेनीपुर उप वितरणी के कमाण्ड क्षेत्र के कृषकों को सूचित किया जाता है कि रब्बी सिंचाई 2020-21 के दौरान इन नहरो में जलापूर्ति नहीं की जा सकेगी । उनसे अनुरोध है कि उक्त अवधि में रब्बी सिंचाई हेतु वैकल्पिक व्यवस्था से पटवन करने का कष्ट करेंगे । उपरोक्त कार्य में किसानों का भरपूर सहयोग प्रार्थित है ।

आदेश से, अरूण कुमार द्विवेदी, संयुक्त सचिव (अभियंत्रण)।

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जल संसाधन विभाग

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अधिसूचनाए

29 दिसम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(डि0)14-04/2019-1349--श्री दिलीप कुमार (आई0डी0 सं०-जे-7640), तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत को सोन नहर अंचल आरा के अन्तर्गत रामनगर आई0बी0 जीर्णोद्धार एवं आई0बी0 के पथों के निर्माण कार्य में कार्य सम्पादन की प्रक्रिया में अनियमितता एवं अन्य कार्यों में बरती गयी गंभीर अनियमितता के लिए सरकार के स्तर पर पूर्ण समीक्षोपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-1671 दिनांक 06.08.2019 द्वारा निलंबित किया गया था। तदुपरांत आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण करते हुए मामले में अग्रेत्तर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। श्री कुमार दिनांक 31.05.2020 को सेवानिवृत हो चुके हैं। अतएव श्री कुमार, सहायक अभियंता (सेवानिवृत) को सेवानिवृत्ति की तिथि दिनांक 31.05.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री दिलीप कुमार, तत्का0 सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को दिनांक 31.05.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

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16 दिसम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(डि0)-14-14/2016-1298--श्री धीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 7677), सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, नावानगर के विरूद्ध सिंचाई प्रमंडल, नावानगर के अन्तर्गत निर्माणाधीन मलई बराज योजना के निर्माण में अनियमितता बरतने के मामले में विभागीय स्तर से गठित संयुक्त जाँच समिति के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2068, दिनांक 28.11.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित है। पुनः उक्त मामले में तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई एवं सम्यक विचारोपरांत श्री धीरेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल,16 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 नावानगर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए पूरक आरोप पत्र गठित करने का निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री धीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे 7677), सिंचाई प्रमंडल, नावानगर को तत्काल प्रभाव से विभागीय अधिसूचना संख्या-295, दिनांक 09.02.18 द्वारा निलंबित किया गया।

श्री कुमार दिनांक 30.09.2020 को सेवानिवृत हो चुके हैं। अतएव श्री धीरेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता (सेवानिवृत) को सेवानिवृति की तिथि दिनांक 30.09.2020 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री धीरेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता (निलंबित) सम्प्रति सेवानिवृत को दिनांक 30.09.2020 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

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20 अक्तूबर 2020

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2018-1227--श्री जफर रसीद खाँ (आई0डी0-3393) तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी के विरूद्ध संचिका - 01/लोक (ग्रा0का0वि0)08/2011 में दर्ज कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, जलपथ प्रमंडल, नालंदा एवं अन्य के विरूद्ध संदलपुर मौजा में मनरेगा के अन्तर्गत जमींदारी बांध के निर्माण में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने के आरोप संबंधी परिवाद पर दिनांक 04.05.2018 को सुनवाई के दौरान माननीय सदस्य, न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश पारित किया गया।

उक्त आदेश के आलोक में श्री जफर रसीद खाँ से, आदेश में वर्णित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1447 दिनांक 06.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिंह द्वारा जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में माननीय सदस्य न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार को पारित आदेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-100 दिनांक 08.01.2019 द्वारा निम्न वर्णित आरोप गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 मेें विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप-श्री जफर रसीद खाँ, तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी द्वारा अपने पदस्थापन काल में संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के संवेदक द्वारा उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में संदलपुर मौजा अन्तर्गत बांध के निर्माण के क्रम में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने संबंधी आरोप के उत्तरदायी है।

कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप मिट्टी कटाई नहीं कराने, संवेदक को 2 फीट से अधिक मिट्टी काटने से रोकने के प्रयास मेें असफल रहने, स्वीकृत प्राक्कलन में मिट्टी कटाई हेतु अस्थायी फसल क्षतिपूर्ति हेतु मुआवजा एवं निजी जमीन से ली जाने वाली मिट्टी की कीमत का प्रावधान रहने के बावजूद परिवादी को उसका भुगतान नहीं किए जाने से माननीय सदस्य (न्यायिक) लोकायुक्त, बिहार द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि ₹ 85639/- के अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने के कारण State Exchequer को ₹ 92117/- रुपये की वित्तीय क्षति के लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, समग्र योजना, अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1028 दिनांक 19.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा State Exchequre को हुई वित्तीय क्षति के लिए उत्तरदायी मानते हुए कुल वित्तीय क्षति 92117/- रुपये में समानुपातिक वसूली का मंतव्य भी दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2595 दिनांक 16.12.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री जफर रसीद खाँ द्वारा अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी का पत्रांक-143 दिनांक 06.02.2020 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया।

श्री जफर रसीद खाँ द्वारा प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई कि परिवादी श्री ब्रह्यदेव प्रसाद, पिता-स्व0 बिहारी महतो, ग्राम-संदलपुर (नालंदा) द्वारा माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के समक्ष दिनांक 28.03.11 को परिवाद दायर किया गया। जबकि परिवादी द्वारा संबंधित प्रमंडलीय/अंचलीय कार्यालय को परिवाद दायर किया जाना चाहिए था ताकि परिवाद का त्वरित एवं न्यायसंगत निष्पादन किया जाता। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बयान में यह उल्लेख नहीं किया है कि परिवादी के निजी जमीन से मिट्टी नहीं ली गई या जमीन मालिक की सहमति से मिट्टी काटी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि जमींदारी बांध के निर्माण कार्य के दौरान अधिक गहराई में बिना अनुमति के निजी जमीन से मिट्टी काटे जाने से परिवादी को सात वर्षों तक फसल की हानि एवं आर्थिक क्षति हुई।

जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ, नालंदा अन्तर्गत संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का एकरारनामा संख्या-8F2/2010-11 से कराए गए कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में निजी जमीन से मिट्टी कटाई एवं अस्थाई फसल क्षतिपूर्ति मुआवजा भुगतान का प्रावधान होने के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किए जाने से माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि पर17 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने के कारण State Exchequer को 92117/- की हुई क्षति के लिए आरोपी पदाधिकारी जिम्मेदार है। प्रस्तुत मामले में जिम्मेदार आरोपित पाँच अभियंताओं से राज्य को हुई क्षति कुल 92117/- रुपये की समानुपातिक वसूली की जानी है। श्री जफर रसीद खाँ द्वारा प्राप्त जवाब स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होने से प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित है।

अतएव श्री जफर रसीद खाँ, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होने के कारण श्री जफर रसीद खाँ को निम्न दण्ड अधिरोपित का निर्णय लिया गया -

(i) निन्दन (वर्ष 2010-11, 2011-12) (ii) संचयी प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक। (iii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली। उक्त दण्ड के निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। श्री जफर रसीद खाँ (आई0डी0-3393) तत्कालीन सहायक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अंचल, मोतिहारी को निम्न अनुमोदित दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया जाता है। (i) निन्दन (वर्ष 2010-11, 2011-12) (ii) संचयी प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक। (iii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

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12 अक्तूबर 2020

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2018-1197--श्री अजीत कुमार सिंह (आई0डी0-2418) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचिका - 01/लोक (ग्रा0का0वि0)08/2011 में दर्ज कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, जलपथ प्रमंडल, नालंदा एवं अन्य के विरूद्ध संदलपुर मौजा में मनरेगा के अन्तर्गत जमींदारी बांध के निर्माण में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने के आरोप संबंधी परिवाद पर दिनांक 04.05.2018 को सुनवाई के दौरान माननीय सदस्य, न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश पारित किया गया।

उक्त आदेश के आलोक में श्री सिंह से, आदेश में वर्णित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1448 दिनांक 06.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री सिंह द्वारा जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में माननीय सदस्य न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार को पारित आदेश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2458 दिनांक 29.11.2018 द्वारा निम्न वर्णित आरोप गठित कर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) मेें विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप-श्री अजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा अपने पदस्थापन काल में संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के संवेदक द्वारा उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में संदलपुर मौजा अन्तर्गत बांध के निर्माण के क्रम में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने संबंधी आरोप के उत्तरदायी है। कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप मिट्टी कटाई नहीं कराने, संवेदक को 2 फीट से अधिक मिट्टी काटने से रोकने के प्रयास मेें असफल रहने, स्वीकृत प्राक्कलन में मिट्टी कटाई हेतु अस्थायी फसल क्षतिपूर्ति हेतु मुआवजा एवं निजी जमीन से ली जाने वाली मिट्टी की कीमत का प्रावधान रहने के बावजूद परिवादी को उसका भुगतान नहीं किए जाने से माननीय सदस्य (न्यायिक) लोकायुक्त, बिहार द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि ₹ 85639/- के अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने के कारण State Exchequer को ₹ 92117/- रुपये की वित्तीय क्षति के लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, समग्र योजना, अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1022 दिनांक 19.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा State Exchequre को हुई वित्तीय क्षति के लिए उत्तरदायी मानते हुए कुल वित्तीय क्षति 92117/- रुपये में समानुपातिक वसूली का मंतव्य भी दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2594 दिनांक 16.12.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री सिंह द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 12.02.2020 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया।

श्री सिंह द्वारा प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई कि परिवादी श्री ब्रह्यदेव प्रसाद, पिता-स्व0 बिहारी महतो, ग्राम-संदलपुर (नालंदा) द्वारा माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के समक्ष दिनांक 28.03.11 को परिवाद दायर किया गया। जबकि परिवादी द्वारा संबंधित प्रमंडलीय/अंचलीय कार्यालय को परिवाद दायर किया जाना चाहिए था ताकि परिवाद का त्वरित एवं न्यायसंगत निष्पादन किया जाता। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बयान में यह उल्लेख नहीं किया है कि परिवादी के निजी जमीन से मिट्टी नहीं ली गई या जमीन मालिक की सहमति से मिट्टी काटी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि18 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 जमींदारी बांध के निर्माण कार्य के दौरान अधिक गहराई में बिना अनुमति के निजी जमीन से मिट्टी काटे जाने से परिवादी को सात वर्षों तक फसल की हानि एवं आर्थिक क्षति हुई।

जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ, नालंदा अन्तर्गत संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का एकरारनामा संख्या-8F2/2010-11 से कराए गए कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में निजी जमीन से मिट्टी कटाई एवं अस्थाई फसल क्षतिपूर्ति मुआवजा भुगतान का प्रावधान होने के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किए जाने से माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि पर अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने के कारण State Exchequer को 92117/- की हुई क्षति के लिए आरोपी पदाधिकारी जिम्मेदार है। प्रस्तुत मामले में जिम्मेदार आरोपित पाँच अभियंताओं से राज्य को हुई क्षति कुल 92117/- रुपये की समानुपातिक वसूली की जानी है। श्री सिंह द्वारा प्राप्त जवाब स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होने से प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित है।

अतएव श्री अजीत कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होने के कारण श्री सिंह को निम्न दण्ड अधिरोपित का निर्णय लिया गया -

(i) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत 05% पेंशन की कटौती अगले पाँच वर्षों के लिए। (ii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली। उक्त दण्ड के निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। श्री अजीत कुमार सिंह (आई0डी0-2418) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न अनुमोदित दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया जाता है।

(i) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत 05% पेंशन की कटौती अगले पाँच वर्षों के लिए। (ii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

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29 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2018-1175--श्री बब्बन कुमार सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता (आई0डी0-जे 7627) जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ के पद पर पदस्थापित थे तो उनके विरूद्ध सन्दलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के संवेदक द्वारा उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में सन्दलपुर मौजा अन्तर्गत जमींदारी बांध के निर्माण के क्रम में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने संबंधी आरोप प्रतिवेदित करते हुए आ0 संख्या-121 सह ज्ञापांक-2460, दिनांक 29.11.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में दिनांक 30.06.2020 को श्री सिंह सेवानिवृत हो गए हैं। अतएव श्री सिंह के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को उनके सेवानिवृत होने के कारण बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

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29 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(पट0)03-14/2018-1174--श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी (आई0डी0-जे 8098) तत्कालीन कनीय अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ शिविर-आरा के विरूद्ध संचिका - 01/लोक (ग्रा0का0वि0)08/2011 में दर्ज कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, जलपथ प्रमंडल, नालंदा एवं अन्य के विरूद्ध संदलपुर मौजा में मनरेगा के अन्तर्गत जमींदारी बांध के निर्माण में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने के आरोप संबंधी परिवाद पर दिनांक 04.05.2018 को सुनवाई के दौरान माननीय सदस्य, न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करने का आदेश पारित किया गया।

उक्त आदेश के आलोक में श्री द्विवेदी से आदेश में वर्णित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1444 दिनांक 06.07.2018 द्वारा स्पष्टीकरण किया गया। श्री द्विवेदी द्वारा जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में माननीय सदस्य न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार को पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश संख्या-120 सहपठित ज्ञापांक-2459 दिनांक 29.11.2018 द्वारा निम्न वर्णित आरोप गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के विहित रीति के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप-श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी, तत्कालीन कनीय अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ द्वारा अपने पदस्थापन काल में संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के संवेदक द्वारा उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में संदलपुर मौजा अन्तर्गत बांध के निर्माण के क्रम में खेत एवं फसल को पूर्णतः बर्बाद करने संबंधी आरोप के उत्तरदायी है।

कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में प्रावधान के अनुरूप मिट्टी कटाई नहीं कराने, संवेदक को 2 फीट से अधिक मिट्टी काटने से रोकने के प्रयास मेें असफल रहने, स्वीकृत प्राक्कलन में मिट्टी कटाई हेतु अस्थायी फसल क्षतिपूर्ति हेतु मुआवजा एवं निजी जमीन से ली जाने वाली मिट्टी कीमत का प्रावधान रहने के बावजूद परिवादी को उसका भुगतान नहीं किए जाने से19 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 माननीय सदस्य (न्यायिक) लोकायुक्त, बिहार द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि ₹ 85639/- के अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने के कारण State Exchequer को ₹ 92117/- रुपये की वित्तीय क्षति के लिए दोषी परिलक्षित होते हैं।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, समग्र योजना, अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना का पत्रांक-1025 दिनांक 19.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा State Exchequre को हुई वित्तीय क्षति के लिए उत्तरदायी मानते हुए कुल वित्तीय क्षति 92117/- रुपये में समानुपातिक वसूली का मंतव्य भी दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2598 दिनांक 16.12.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जिसके आलोक में श्री द्विवेदी द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 27.01.2018 द्वारा अपना जवाब विभाग को समर्पित किया गया।

श्री द्विवेदी द्वारा प्राप्त जवाब की तकनीकी समीक्षा की गई कि परिवादी श्री ब्रह्यदेव प्रसाद, पिता-स्व0 बिहारी महतो, ग्राम-संदलपुर (नालंदा) द्वारा माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना के समक्ष दिनांक 28.03.11 को परिवाद दायर किया गया। जबकि परिवादी द्वारा संबंधित प्रमंडलीय/अंचलीय कार्यालय को परिवाद दायर किया जाना चाहिए था ताकि परिवाद का त्वरित एवं न्यायसंगत निष्पादन किया जाता। आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बयान में यह उल्लेख नहीं किया है कि परिवादी के निजी जमीन से मिट्टी नहीं ली गई या जमीन मालिक की सहमति से मिट्टी काटी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि जमींदारी बांध के निर्माण कार्य के दौरान अधिक गहराई में बिना अनुमति के निजी जमीन से मिट्टी काटे जाने से परिवादी को सात वर्षों तक फसल की हानि एवं आर्थिक क्षति हुई।

जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ, नालंदा अन्तर्गत संदलपुर, गोपालपुर जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का एकरारनामा संख्या-8F2/2010-11 से कराए गए कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन में निजी जमीन से मिट्टी कटाई एवं अस्थाई फसल क्षतिपूर्ति मुआवजा भुगतान का प्रावधान होने के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किए जाने से माननीय लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 04.05.2018 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में परिवादी को मुआवजा की राशि पर अतिरिक्त 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने के कारण State Exchequer को 92117/- की हुई क्षति के लिए आरोपी पदाधिकारी जिम्मेदार है। श्री द्विवेदी द्वारा प्राप्त जवाब स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होने से प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित है।

अतएव श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी, तत्कालीन कनीय अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित होने के कारण श्री द्विवेदी को निम्न दण्ड अधिरोपित का निर्णय लिया गया -

(i) निन्दन (वर्ष 2010-11 एवं 2011-12) (ii) संचयी प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक। (iii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली। उक्त दण्ड के निर्णय पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। श्री तारकेश्वरधर द्विवेदी (आई0डी0-जे 8098) तत्कालीन कनीय अभियंता, जलपथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति अवर प्रमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल-2, कारीसाथ, शिविर-आरा को निम्न अनुमोदित दण्ड संसूचित एवं अधिरोपित किया जाता है।

(i) निन्दन (वर्ष 2010-11 एवं 2011-12) (ii) संचयी प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक। (iii) राज्य सरकार को हुई वित्तीय क्षति के रूप में ₹ 18424/- रुपये की वसूली।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

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23 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(ल0सिं0)-05-04/2014-1162--श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध परिवादी श्री पवन कुमार से 10,000/- (दस हजार रूपये) रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध इकाई की टीम द्वारा दिनांक 26.03.2014 को रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के फलस्वरूप कदाचार, भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी आदि आरोपों के लिए लघु जल संसाधन विभाग के अधिसूचना सं0-2311 दिनांक-22.05.2014 द्वारा दिनांक 26.03.2014 के प्रभाव से निलम्बित किया गया। तत्पश्चात लघु जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक 6320 दिनांक 06.11.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। श्री सिंह के सेवानिवृति दिनांक 31.12.2014 के पश्चात संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। श्री सुदर्शन सिंह, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में लघु जल संसाधन विभाग द्वारा यह पाए जाने पर कि श्री सिंह, जल संसाधन20 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 विभाग संवर्ग के अभियंता हैं, संबंधित विभागीय कार्यवाही के समस्त अभिलेखों को अग्रेतर कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराया गया।

श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उार की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरांत निम्नांकित तथ्य पाए गए।

श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान की लिखित शिकायत पर आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-19/14 दिनांक 26.03.14 अन्तर्गत धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियमत 1988 के अन्तर्गत संस्थित किया गया। कार्यपालक अभियंता द्वारा आरोप लगया गया था कि श्री सुदर्शन सिंह, अधीक्षण अभियंता द्वारा रिश्वत के रूप में उनसे 10,000/-रु0 की माँग की गई। इसकी शिकायत कार्यपालक अभियंता द्वारा आर्थिक अपराध इकाई से की गई। आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना ने शिकायत के जाँचोपरांत श्री सुदर्शन सिंह, अधीक्षण अभियंता को 10,000/- रु0 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध इकाई-3 बिहार, पटना से प्राप्त पत्र के आलोक में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। इस मामले में जाँच आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल से विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका 10 में श्री सिंह के विरूद्ध 10,000/- रु0 रिश्वत लिये जाने के आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री सिंह से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गई, जिसमें मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है :-

(i) पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान के द्वारा झूठा लिखित शिकायत आर्थिक अपराध थाना में किया गया था कि दिनांक 26.03.2014 को मैं पवन कुमार से 10,000/- (दस हजार रुपया) लिया था। चूँकि पवन कुमार ने प्रथम इत्तिला रिर्पोट में लिखा है मुझसे टायर खरीदने के नाम पर दस हजार रुपया का माँग करते है यह तथ्य बिल्कुल गलत एवं मनगढंत है। टायर खरीदने के लिए विभाग द्वारा आवंटन उपलब्ध कराया जाता है। पवन कुमार के द्वारा ऐसा कोई चिट या पेपर नहीं प्रस्तुत किया गया है, जिसमें साबित हो कि मैं पवन कुमार से टायर खरीदने के लिए दस हजार रुपया का माँग किया था।

(ii) पु0 अ0 नि0 विजय कुमार मेरे आवास पेठिया बाजार थाना-खगौल, जिला-पटना कभी नहीं आये थे। उन्होंने केश डायरी पारा 4 में जिस बात का उल्लेख किए है, वह बिल्कुल झुठा एवं मनगढंत है कि मैं पवन कुमार से टायर खरीदने के लिए 10,000/- (दस हजार) रुपया का माँग किया था।

(iii) यह बात सत्य है कि न तो मैं सत्यापनकर्त्ता के सामने दस हजार रुपया का माँग किया था ना ही मेरे हाथ दस हजार का नोट रिकभरी हुआ था।

(iv) मैं बिल्कुल निर्दोष हूँ। मुझे इस कांड में झूठा फँसाया गया है। चूँकि इस घटना के पहले मैं पवन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, सिवान पर विभागीय स्तर पर आरोप लगाया था। अतः बदला लेने की नियत से नियोजित ढंग से आर्थिक अपराध इकाई, पटना के साथ साजिश के तहत षडयंत्र कर झूठा केश में फँसाया गया है।

(v) मैं सरकारी सेवा में लगभग 33 वर्ष, कार्य किया था लेकिन एक भी आरोप हम पर नहीं लगा था ना ही इस केश के पहले हम पर कोई केश था, मैं जितना दिन सरकारी सेवा में थे इमानदारी से कार्य किया हूँ और हमको समय समय पर पदोन्नति मिलता गया।

(vi) हम पर झूठा रिश्वत लेने का आरोप लगाकार हमारे खिलाफ झूठा प्री0 ट्रैप एवं पोस्ट ट्रैप मेमोरेण्डम पुलिस उपाधीक्षक-सह-अनुसंधानकर्त्ता के द्वारा तैयार किया गया है। यह भी आरोप गलत है कि धावा दल के सदस्य के समक्ष रिश्वत की माँग किया था।

(vii) घटना के पूर्व पत्रांक नं0 192 दिनांक 17.02.2014 पत्रांक-214 दिनांक 01.03.2014 मेरे द्वारा श्री पवन कुमार राम जो तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नलकूल प्रमंडल, सिवान थे से तथाकथित वित्तीय अनियमितता के लिए स्पष्टीकरण की माँग की गई थी। इसी कारण बदले की भावना से दिनांक 26.03.2014 को झूठा आरोप लगा कर इस कांड में फँसा दिया गया।

समीक्षा-श्री सिंह के विरूद्ध मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने अपने कार्यपालक अभियंता श्री पवन कुमार से 10,000/- रु0 रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध इकाई द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया। इस कृत्य के लिए उनके विरूद्ध आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-19/14 दिनांक 26.03.2014 अन्तर्गत धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। श्री सिंह ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में इस आरोप का खंडन करते हुए 10,000/- रु0 रिश्वत लेने के आरोप को निराधार एवं बेबुनियाद बताया है। साथ ही श्री सिंह ने अपने अभ्यावेदन में इस बात का भी उल्लेख किया है कि श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता से उन्होंने वित्तीय अनियमितता के लिए स्पष्टीकरण की माँग की थी, जिसके कारण दुर्भावना से ग्रसित होकर श्री पवन कुमार से आर्थिक अपराध इकाई से सांठ-गांठ कर दस हजार रुपया रिश्वत लेने का झूठा आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया गया। अभ्यावेदन के साथ ऐसा कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है जो श्री सिंह के कथन की पुष्टि करता है। संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह द्वारा अपने बचाव-बयान में इसी तर्क को प्रस्तुत किया गया था। संचालन पदाधिकारी द्वारा सम्पूर्ण तथ्यों के विश्लेषणोपरांत निष्कर्षित किया गया है कि श्री सिंह के विरूद्ध श्री पवन कुमार, कार्यपालक अभियंता से दस हजार रुपया रिश्वत लिए जाने का आरोप प्रमाणित होता है।21 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूलप अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध 'शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक' का दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है। उक्त निर्णीत दण्ड पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुदर्शन सिंह, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर (सम्प्रति सेवानिवृत) को निम्न दण्ड अधिरोपित कर संसूचित किया जाता है - "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रूप से रोक"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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21 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(वीर)-07-16/2019-1151--श्री राजेश कुमार (आई0डी0-5295) तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी तटबंध अवर प्रमंडल, निर्मली द्वारा बिहार सरकारी सेवक हेतु निर्धारित आचरण के विपरीत अपने उच्च पदाधिकारी के साथ व्यवहार करने संबंधी प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-50 दिनांक 16.01.20 द्वारा निलंबित किया गया। साथ ही श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-940 दिनांक 03.07.20 द्वारा आरोप पत्र के साथ स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब एवं पुलिस अधीक्षक, सुपौल के ज्ञापांक-2081 दिनांक 18.06.20 के समीक्षात्मक टिप्पणी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार, सहायक अभियंता के विरूद्ध आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई है। उक्त के आलोक में श्री राजेश कुमार, तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी तटबंध अवर प्रमंडल, निर्मली को निलंबन मुक्त करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश कुमार, तत0 सहायक अभियंता, पश्चिमी तटबंध अवर प्रमंडल, निर्मली को निलंबन मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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16 सितम्बर 2020

सं0 22/नि॰सि॰(दर0)-16-14/2011/1145--श्री शम्भू प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता (आई0डी0-4036), पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा के विरूद्ध श्री रामदेव महतो सदस्य बिहार विधान सभा से प्राप्त परिवाद के आलोक में मुख्य अभियंता (सिंचाई सृृजन) दरभंगा के परिक्षेत्राधीन गोकुल उप वितरणी के वि0दू0-16.319 के बाहर निर्मित सेतु के निर्माण में हुई अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा की गई। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1032 दिनांक-21.09.2012 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण किया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण को स्वीकारयोग्य नहीं पाते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हएु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय संकल्प सहपठित ज्ञापांक-299 दिनांक 18.02.2016 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप :- गोकुल उपवितरणी के वि0दू0 16.319 पर निर्मित सेतु के सेंटर लाइन एवं नहर के सेंटर लाइन के बीच की दूरी 49'6'' है। इस प्रकार एक पथीय सेतु नहर के रेखांकण के बाहर निर्माण कराने के कारण नहर पर आवागमन हेतु एक पथीय सेतु का निर्माण कराना अनिवार्य होगा। जिससे विभाग को विाीय क्षति होगी। संरचना निर्माण में बरती गई लापरवाही एवं विभाग को हुई इस विाीय क्षति के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप के लिए संबंधित पदाधिकारी दोषी हैं। संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री प्रसाद द्वारा समर्पित बचाव बयान का मुख्य अंश :- (i) संरचना का निर्माण अमीनों द्वारा निर्धारित सेंटर लाईन पर कराया गया। (ii) अन्य निर्माणों की तरह भू-अर्जन की स्थिति एक जैसी होने के कारण नहरों में मिट्टी कार्य को छोड़कर केवल संरचनाओं का कार्य कराया गया एवं नियमित भुगतान प्रमंडल द्वारा कराया गया।

(iii) वर्तमान में इसी संरचना के माध्यम से नहर के किनारे का पानी सड़क के एक तरफ से दुसरे तरफ प्रवाहित होता है क्योंकि नहर के इस हिस्से में सी0डी0 का प्रावधान नहीं है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान समय मे निर्मित संरचना उपयोगी है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- भू-अधिपत्य के आधार पर अमीन द्वारा रेखांकण के पश्चात ही स्थल पर कार्य कराया जाता है। भू-अधिपत्य प्राप्ति के बावजूद भू-स्वामियों को भूगतान नहीं होने के कारण मिट्टी के कार्य में प्रबल विरोध के कारण बाधा को देखते हुए उच्चाधिकारियों द्वारा सरकारी जमीन पर संरचना निर्माण करने का निर्णय लिया गया एवं विाीय एवं भौतिक प्रगति कर लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयास किया गया। इस प्रकार अमीन द्वारा निर्धारित सेंटर लाईन पर संरचना निर्माण कराना एक मात्र विकल्प था। अतएव आरोपित पदाधिकारी प्रतिवेदित आरोप के लिए जिम्मेदार नहीं है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।22 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा :- संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दू पर श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-1785 दिनांक-22.08.2016 द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा किया गया। असहमति के बिन्दू :- संरचना के निर्माण कराने से संबंधित उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये निदेश तथा अमीनों द्वारा निर्धारित सेंटर लाईन पर ही संरचना का निर्माण कराया गया है, से संबंधित कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव साक्ष्य के अभाव में श्री प्रसाद के कथन को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे भी नहर बन जाने के बाद ही संरचना का निर्माण किया जाना चाहिए था। ताकि, ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार नहर के सेंटर लाईन एवं निर्मित सेतु के सेंटर लाईन के बीच 49'6'' की दूरी पायी गई है तथा नहर निर्माण के बाद आवागमन हेतु एक अन्य सेतु का निर्माण कराने की आवश्यकता बतायी गई है। इससे स्पष्ट है कि नहर प्रणाली हेतु निर्मित एक पथीय सेतु की उपयोगिता नहीं रह गयी है। अतएव माना जा सकता है कि उक्त संरचना के निर्माण पर किया गया व्यय निरर्थक है। श्री प्रसाद द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा का जवाब समर्पित किया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारणपृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि सेतु के सेंटर लाईन का निर्धारण विभागीय अमीन द्वारा ही किया गया एवं उसी सेंटर लाईन पर सेतु का निर्माण कराया गया, से संबंधित साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया। श्री प्रसाद का कहना कि कार्य के दौरान वरीय पदाधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया एवं प्रति माह अंचल एवं मुख्य अभियंता स्तर पर कार्य की समीक्षा की गई परन्तु किसी भी स्तर पर इस कार्य की पद्धति पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई। उक्त कथन के समर्थन में कोई भी निरीक्षण प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया। साथ ही साथ उड़नदस्ता अंचल के जाँच प्रतिवेदन में कहा गया है कि नहर निर्माण के पश्चात आवागमन हेतु एक अन्य सेतु का निर्माण कराना आवश्यक है। इससे स्पष्ट होता है कि उक्त संरचना नहर प्रणाली के लिए उपयोगी नहीं रहा। अतः श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप प्रमाणित होता है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-982 दिनांक 27.04.2018 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (I) तीन वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। (II) एक पथीय सेतु के निर्माण में व्यय की गई राशि की वसूली। दण्डादेश के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा पुनर्विचार याचिका समर्पित किया गया। जिसमें श्री प्रसाद द्वारा कहा गया कि प्रश्नगत कार्यों का नियमित भुगतान प्रमंडल द्वारा किया जा रहा था तथा कार्य की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा विभिन्न स्तर के पदाधिकारी द्वारा किया जा रहा था। चूँकि एकरारनामा का निष्पादन वरीय पदाधिकारी द्वारा किया गया था। जिसमें समय सीमा निर्धारित था। सहायक अभियंता की हैसियत से कार्य कराना आवश्यक था। उपरोक्त कथन के समर्थन में श्री प्रसाद द्वारा कोई अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। अतः साक्ष्य विहीन कथन स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। श्री प्रसाद द्वारा कहा गया है कि योजना में भू-अधिपत्य के आधार पर सरकारी अमीन द्वारा किये गये रेखांकण के पश्चात ही स्थल पर कार्य कराया गया। इस बात के समर्थन में भी श्री प्रसाद द्वारा कोई अभिलेख समर्पित नहीं किया गया है। फलतः यह स्थापित किया जाना संभव नहीं है कि संरचना का एलाईनमेंट सरकारी अमीन द्वारा निर्धारित किया गया है। नियमानुसार नहर बन जाने के बाद ही संरचना का निर्माण किया जाना चाहिए था ताकि ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार नहर के सेंटर लाईन एवं निर्मित सेतु के सेंटर लाईन के बीच 49' 6" की दूरी पाया गया है तथा नहर निर्माण के बाद आवागमन हेतु एक अन्य सेतु का निर्माण कराये जाने की आवश्यकता बतायी गयी है। इससे स्पष्ट है कि नहर प्रणाली हेतु निर्मित प्रश्नगत सेतु की उपयोगिता नहीं रह गयी है एवं संरचना के निर्माण पर किया गया व्यय निरर्थक व्यय की श्रेणी में आ जाता है। उपर्युक्त तथ्य के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए इनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-982 दिनांक 27.04.2018 द्वारा अधिरोपित दण्ड को बरकरार रखा जाता है। सरकार का उक्त निर्णय श्री शम्भू प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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16 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-11/2016-1144--श्री राम विनय शर्मा (आई0डी0-3612) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रबंधन, वाल्मीकिनगर के उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान गंडक बराज में दिनांक 21.07.2016 के शाम से दिनांक 22.07.2016 के सुबह तक गंडक नदी के जलश्राव में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण गंडक बराज के गेट संख्या-33 क्षतिग्रस्त हो जाने एवं पूर्वी मुख्य नहर में तीव्र गति से पानी प्रवेश करने तथा 6.00 RD पर नहर बाँध ओभरटॉप करने एवं जिसके कारण त्रिवेणी पावर हाउस के यंत्रो की क्षति तथा कॉलोनी के घरों की क्षति होने में बरती गई अनियमितता की जाँच मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर, मुख्य अभियंता, (याँत्रिक) एवं जिला23 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण के द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय समिति द्वारा की गई। प्राप्त तीनों जाँच प्रतिवेदनाें के समीक्षोपरांत श्री शर्मा के विरूद्ध प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1661, दिनांक 03.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1703, दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप ः- मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01 (बराज) कैम्प, दिनांक 23.07.16 में स्पष्ट उल्लेख है कि मुख्य अभियंता द्वारा आपको अनेको बार दूरभाष एवं पत्रांक 297 दिनांक 18.07.16 से आपात स्थिति से निपटने के लिये पर्याप्त संख्या में मजदूर रखने का निदेश दिया गया था एवं विशेष रूप से हिदायत दी गई थी कि गंडक बराज के गेटों एवं बाँधाें की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाय। परन्तु आपके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण गेटों को कम से कम समय में उठाया जाना संभव नहीं हुआ। जिसके कारण बराज का गेट सं॰ 33 क्षतिग्रस्त हो गया। उक्त से स्पष्ट है कि आपके द्वारा दायित्वों का निर्वहन में घोर उपेक्षा की गयी जिससे एक विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी एवं जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं। (2) श्री संजय कुमार तिवारी, कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिंटरिंग प्रमंडल संख्या-5, (प्रतिनियुक्त बगहा स्थल) द्वारा दिनांक 22.07.16 को सुबह 6 बजे गंडक नदी का जलश्राव अत्यधिक बढ जाने एवं इससे हुई क्षति की सूचना देने हेतु आपको जगाने का प्रयास किया गया फिर भी आप न तो जागे एवं न हीं आपके द्वारा कोई प्रत्युत्तर दिया गया। ज्ञातव्य है कि घटना की अवधि में गंडक बराज से 2.00लाख घनसेक से अधिक का जलश्राव प्रवाहित हो रहा था एवं जिस अवधि में आपसे सामान्य से अधिक कार्य सजगता की अपेक्षा की गयी, उस विषम परिस्थिति में भी आप अपने कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाह रहते हुए सोये रहे। मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01 (बराज) कैम्प, दिनांक 23.07.16 से स्पष्ट होता है कि निदेश देने के बावजूद भी (पत्रांक-290, दिनांक 15.07.2016, 338, दिनांक 21.07.16) आपके द्वारा नेपाली सिम क्रय नहीं किया गया। इससे परिलक्षित होता है कि आपके द्वारा अपने उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना की गई है। जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी हैं। (3) दिनांक 22.07.16 को गेट के संचालन में हुए गंभीर चूक से यह स्पष्ट होता है कि आपके द्वारा समय समय पर निरीक्षी पदाधिकारी के रूप में कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं किया जाता रहा। और न ही अधीनस्थों के कार्यकलाप पर नियंत्रण ही रखा गया। आपकी कर्त्तव्य उपेक्षा के कारण एक विनाशकारी र्दुघटना की स्थिति उत्पन्न हुई। जो आपकी पूर्ण अक्षमता को प्रमाणित करता है एवं जिसके लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी है। (4) आपके द्वारा कार्य पर्यवेक्षण को नजर अंदाज किये जाने के कारण गंडक बराज वाल्मीकिनगर का एक गेट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया। गेटिंग व्यवस्था के अन्य अव्यव भी काफी क्षतिग्रस्त हुए जिसकी प्रतिपूर्ति में एक बहुत बड़ी सरकारी राशि का व्यय होगा। यह व्यय एक Avoidable Expenditure था, जिसके लिये आप दोषी हैं।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-47, दिनांक 27.02.2017 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोप यथा आरोप सं0-01, 02, 03 एवं 04 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1943, दिनांक 07.11.17 द्वारा श्री शर्मा, तत0 कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

उक्त के आलोक में श्री शर्मा, तत्का0 कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 06.12.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

विभागीय अभिमत में उन्हें दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने, उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने के लिये दोषी माना गया है तथा क्षतिग्रस्त गेट के मरम्मति पर होने वाले व्यय के लिये दोषी नहीं माना गया है। संचालन पदाधिकारी ने विभागीय मंतव्य को नहीं मानते हुए गठित चारों आरोपों को सही होने का मंतव्य दिया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक के नियमावली 2005 में विहित रिति के बिल्कुल ही विपरीत है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन का बिन्दुवार उत्तर निम्नवत्‌ है :-

(1) आलोच्य गेट का रख-रखाव, मरम्मति, पुनस्र्थापन, निर्माण तथा संचालन याँत्रिक प्रभाग के जिम्मे था। चार वर्ष पूर्व से ही प्रमंडल द्वारा बराज गेटों के संचालन हेतु मजदूर नहीं रखे जा रहे थे। नदी में जलश्राव अत्याधिक वृद्धि के कारण ससमय गेटों को खोलना एवं अन्य याँत्रिक कार्य कराने में इनकी कोई भूमिका नहीं थी। अतः उन्हें जिम्मेवार नहीं माना जा सकता है। जहाँ तक गेट सं॰-33 के टूटने का प्रश्न है, Expert Review Committee द्वारा अनुशंसित Under Sluice Gate 1 से 6, 31 से 36 का S.S. Plate का Repair नहीं हो पाया था। यह याँत्रिक प्रभाग का कार्य था। कमिटी गेट सं॰ 7, 8, 9, 21 एवं 23 को Buckled पाया था। जब गेट सं॰ 33 का S.S. Plate क्षतिग्रस्त था एवं उक्त गेट में पेड़ फँस जाने के कारण गेट को शीघ्र उठाव नहीं हो सका एवं क्षतिग्रस्त हो गया। मैं अपने पत्रांक 3 दिनांक 09.06.16 से गेट सं॰ 31 से 33 की खराबी के ओर ध्यान याँत्रिक प्रभाग को आकृष्ट किया था। इस तरह गेट टूटने में उनकी जिम्मेवारी नहीं बनती है।24 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 (2) गेटों का संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग की थी। उनके द्वारा संचालन एवं सहयोग हेतु कोई पत्र या सुझाव नहीं दिया गया था। इस प्रकार गेटों के संचालन एवं सुरक्षा में उनके द्वारा लापरवाही नहीं बरती गयी है। जाँच पदाधिकारी द्वारा भी गेट टूटने एवं गेट के संचालन के लिये याँत्रिक प्रभाग को जिम्मेवार माना है। (3) दिनांक 21.07.16 के मध्य रात्रि के बाद ही जलस्तर में तीव्र गति से वृद्धि होने की सूचना सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 22.07.16 को सुबह 5ः00 बजे दी गयी। उसके पश्चात सभी आवश्यक कारवाई की गयी। (4) जेनेरेटर में तेल खत्म होने पर सुरक्षित भंडार में रखे गये डीजल से कुछ ही मिनट में तेल डाला गया। यह आरोप तथ्य आधारित नहीं है। (5़) वे शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर में पदस्थापित थे परन्तु बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा के कार्यपालक अभियंता एवं अंचल में तकनीकी सलाहकार के प्रभार में भी था एवं क्षेत्राधीन दोनों प्रमंडलों के क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु अनवरत भ्रमण करता रहता था।

(6) बराज गेट टूटना प्रमाणित है परन्तु यह गेट याँत्रिक प्रमंडल की निगरानी में टूटा है। गेट के टूटने में मेरी कोई भूमिका नहीं है। दिनांक 21.07.16 को पूरी तरह अपने कार्य स्थल वाल्मीकिनगर एवं बगहा के कार्य स्थलों का निरीक्षण किया है। अतः यह आरोप मनगढ़ंत है। मेरे द्वारा कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है।

(7) जिलाधिकारी बेतिया के जाँच प्रतिवेदन में भी गेट टूटने तथा गेट के संचालन के लिए याँत्रिक प्रमंडल को जिम्मेवारी माना गया है।

(8) बराज गेट टूटने को प्रमाणित माना गया है, परन्तु यह गेट याँत्रिक प्रमंडल के निगरानी में टूटा है यह भी प्रमाणित है। गेट के टूटने में मेरी कोई भूमिका नहीं है यह प्रमाणित होता है दिनांक 21.07.2016 को मैं पूरी तरफ से अपने कार्यस्थल वाल्मीकिनगर एवं बगहा कार्यस्थलों का निरीक्षण किया। इसलिए कार्यस्थल से नदारज संबंधी आरोप पूर्णतः मनगंढत है मेरे द्वारा कर्त्तव्य निर्वहन में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। मेरे द्वारा बाढ अवधि में न्यूनतम से न्यूनतम (3 से 4 घंटा) सोने की अवधि थी। इसलिए कार्य के बजाय सोने का आरोप लगाना अधारहीन है। बाढ़ के समय दो-दो प्रमंडलों को सुनिश्चित रखना ही अपने आप में बहुत ही मेहनत एवं भाग-दौड़ वाला काम है। लेकिन गेट टूटने के लिए जिम्मेवार मानना तथ्यों पर आधारित नहीं है उपरोक्त बिन्दुओं से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्ध लगाये गये लेस मात्र भी प्रमाणित नहीं होते हैं। अतः सभी आरोपों से मुक्त करने की कृपा की जाय।

श्री शर्मा, तत्का0 कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई, जिसमें निम्न तथ्य पाये गयेः- श्री शर्मा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में लगभग वही तथ्यों को संक्षिप्त रूप में वर्णन किया गया है। जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। आरोपी द्वारा अपने कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया है। श्री शर्मा के द्वारा विभागीय कार्यवाही के दरम्यान दिये गये बचाव बयान की समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा की गयी जो निम्नवत है :- (1) इस मामले में घटना यही है कि वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज में दिनांक 21.07.2016 के शाम से 22.07.2016 के सुबह तक गंडक नदी के जलश्राव में अत्याधिक वृद्धि के कारण गंडक बराज का गेट सं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया। पानी तीव्र गति से ओभरटॉप कर त्रिवेणी पावर हाउस के यंत्रों की क्षति एवं कॉलोनी के घंटो में क्षति हुई। अभियंतागण की लापरवाही के कारण विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। (2) आरोपी अभियंता पर मुख्य आरोप है कि मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के द्वारा अनेको बार दूरभाष पर एवं पत्रांक-297, दिनांक 18.07.2016 द्वारा आपात स्थिति से निपटने के लिये पर्याप्त संख्या में मजदूर रखने का निर्देश दिया गया। किन्तु इस निर्देश का पालन नहीं हुआ। गेट समुचित रख-रखाव वे देखभाल नहीं हुआ गेट टूट गया। दिनांक 22.07.16 के सुबह में उन्हें घर जगाने गया तो नहीं उठें। कार्यस्थल का सम्यक निरीक्षण नहीं किये जाने के कारण गेट संचालन में गंभीर चूक हुई। अब क्षतिग्रस्त गेट को बनाने जो बनाने में व्यय होगा, वह Avoidable Expenditure हुआ। (3) आरोपी अभियंता ने बचाव बयान दिया है, उसमें से उन्होंने गेट संचालन कार्य के लिए मुख्य अभियंता (याँत्रिक), मुजफ्फरपुर को जिम्मेवार माना है। इनके अनुसार इन्होंने मुख्य अभियंता (याँत्रिक), मुजफ्फरपुर एवं वरीय अधिकारी को गेटों के Machanically संचालित करने की विवशता की सूचना दी थी। SCADA System Disfunction था। एजेंसी PI System Pvt. Ltd. पर कार्रवाई करने एवं सभी गेटों का संचालन SCADA System से सुनिश्चित करने हेतु मुख्य अभियंता (याँत्रिक) मुजफ्फरपुर को लिखा गया था। (4) संक्षेप में गेट टूटने के लिए याँत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर एवं संबंधित एजेंसी को मानते हैं। (5) जबकि कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक), सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर श्री सुभाष कुमार वर्मा (जो इस मामले में आरोपी भी हैं) ने अपने बचाव बयान में कहा है कि दिनांक 15.06.2016 तक वाल्मीकिनगर में कैम्प कर 52 गेट को स्काडा से चालू कराया। 52 गेट संचालित था। मात्र 12 एवं 19 का इन्डोर खराब होने के कारण इसे बदलने हेतु पाई सिस्टम को निर्देश दिया। (6) किन्तु यहाँ प्रश्नगत विभागीय कार्यवाही में आरोपी के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित मुख्य आरोप है कि मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के निर्देश के बावजूद गेट की सुरक्षा के लिए पर्याप्त मजदूर नहीं रखें गये तथा दिनांक 22.07.2016 को घर में जगाने का प्रयास करने पर भी नहीं जगे।25 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 (7) गेट का रख-रखाव पूर्व से नहीं हो रहा था, इसके लिए संबंधित संवेदक और याँत्रिक प्रमंडल के अभियंता स्थिति स्पष्ट करेंगे कि बाढ़ के समय आरोपी अभियंता की जो जिम्मेवारी थी, उसका उन्होंने निर्वहण नहीं किया। (8) जिलाधिकारी, बेतिया के रिपोर्ट के अनुसार दिनांक 21.07.2016 को रात्रिकालीन पाली (10ः00 बजे रात्रि से सुबह 06ः00 बजे) में गंडक बराज कंट्रोल रूम में रोस्टर के अनुसार (1) सुबोध प्रसाद शर्मा, सहायक अभियंता, सिविल (2) श्री रंजन कुमार, कनीय अभियंता, सिविल (3) श्री अभिमन्यु शर्मा, निम्नवर्गीय लेखा लिपिक (4) श्री ओम प्रकाश महतो, कार्यालय परिचारी (5) श्री शत्रुधन राम, कार्यालय परिचारी तथा पाई सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड एस0के0 नगर, पटना के द्वारा नियुक्त संविदा कर्मी (6) श्री मनीष कुमार एवं (7) श्री मनीष तिवारी की ड्‌युटी थी। परंतु जाँच के क्रम में पाया गया कि पाई सिस्टम, प्राईवेट लिमिटेड के दोनों कर्मी अपनी ड्‌युटी के समय सोये हुए थे, सहायक अभियंता उपर वाले कमरे में सोये हुए थे तथा शेष सभी कर्मी एवं पदाधिकारी अपनी ड्‌युटी से अनुपस्थित थे। ड्‌युटी से अनुपस्थित इन कर्मियों द्वारा 10ः00 बजे रात्रि के बाद Log Book पर पानी का नदी से निस्सरण की मात्रा का पाठ्‌यांक भी नोट नहीं किया गया था, जिससे यह पता चलता है कि अधिक जलश्राव होने के कारण तिरहुत कैनाल का फाटक बंद कर नदी का बंद फाटक खोला गया। 01ः00 बजे रात्रि के बाद पानी का श्राव इतना बढ़ गया कि बराज के गिरे हुए फाटक के उपर से पानी बहने लगा। (9) बाढ़ के समय इन्हें घर में सोने या आराम करने की जिम्मेवारी नहीं दी गई थी। प्रपत्र-'क' में गठित आरोप, आरोपी के बचाव बयान एवं विभागीय समीक्षा एवं अभिमत से स्पष्ट है कि दिनांक 21.07.16 को ही उक्त बराज गेट पर पानी का दबाव काफी बढ गया। आरोपी अभियंता को पूरी सजगता बरतनी चाहिए। दिनांक 21.07.2016 को यदि स्थल का निरीक्षण करते तो उसी दिन वहाँ की स्थिति के बारे में जिलाधिकारी सहित सभी वरीय पदाधिकारी को सूचित करते, किन्तु दिनांक 21.07.2016 को उनलोगों के द्वारा स्थल पर उपस्थित रहने एवं उचित कार्रवाई करने का कोई प्रमाण नहीं। (10) बराज गेट पर पर्याप्त मजदूर रखने का निर्देश था। यहाँ जो स्थिति हो रही है कि जेनरेटर में तेल नहीं था, जिस कारण गेट को मशीन के बदले Manually कुछ मजदूर से उठाने का प्रयास हुआ। इससे विलंब हुआ। गेट पर दबाव बढा और गेट टूट गया। आपात स्थिति में भी बराज गेट पर मजदूर नहीं रखने और जेनरेटर में तेल नहीं रहने से सिविल के अभियंतागण की घोर लापरवाही है। (11) बाढ के समय इस तरह के कार्य की अपेक्षा वरीय पदाधिकारी से नहीं की जाती है। बाढ़ का समय आपात काल की स्थिति है। थोडी से लापरवाही से जानमाल की बडी क्षति हो सकती है। इस समय 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। (12) बराज गेट टूट गया यह प्रमाणित है। दिनांक 21.07.2016 को आरोपी अभियंता कार्यस्थल से नदारद थे, यह भी प्रमाणित है। गेट टूटने पर दौड-भाग करते है। आरोपी अभियंता ने कर्त्तव्य निर्वहण में घोर लापरवाही बरती है। बाढ के समय इनके लिए ड्‌युटी के बजाय सोना ज्यादा महत्वपूर्ण था। अतएव गेट टूटने के लिए ये जिम्मेवार माने जाते हैं। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा गठित आरोप से संबंधित साक्ष्य, आरोपी के बचाव बयान तथा विभागीय अभिमत के सम्यक समीक्षोपरान्त श्री शर्मा के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को पूर्णतः प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है चूँकि श्री शर्मा द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में आरोप से संदर्भित न तो कोई नया तथ्य ही दिया गया है न ही कोई नया साक्ष्य ही दिया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं विभागीय अभिमत के समय समीक्षित टिप्पणी के आलोक में श्री शर्मा को उच्चाधिकारी के निदेश देने के बावजूद आपात स्थिति से निपटने तथा घटित घटना का ससमय सूचना देने की ठोस व्यवस्था नहीं कर दायित्वों में लापरवाही बरतने के कारण गेट टूटने जैसी घटित घटना के लिये दोषी माना जाता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को उच्चाधिकारी के आदेश देने के बावजूद आपात स्थिति से निपटने एवं ससमय सूचना देने हेतु ठोस व्यवस्था नहीं कर दायित्व के निर्वहन में लापरवाही बरतने के कारण गेट टूटने जैसी घटना से संबंधित प्रमाणित आरोपों के लिए श्री शर्मा को निलंबन से मुक्त करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1346 दिनांक 04.07.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया - "तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-34 दिनांक 09.01.2020 से पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है - आरोप -1 :- अभियंता प्रमुख (उत्तर) के बेतार संवाद संख्या-201 दिनांक-21.07.2016 से स्पष्ट है कि गेट सं॰-33 के साथ अन्य गटों की मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से गेटों का संचालन की व्यवस्था को दिनांक-21.07.2016 तक ठीक नही कराया जा सका था। दिनांक-15.07.2016 को प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा बराज के निरीक्षण/ समीक्षा के दौरान सभी गेटों के सम्पोषण एवं स्काडा सिस्टम के तहत संचालन हेतु अविलम्ब ठीक करने का निदेश संवेदक एवं याँत्रिक प्रभाग के अभियंताओं को विभागीय पत्रांक-65 दिनांक-27.07.2016 द्वारा दी गयी थी। स्थल पंजी एवं उनके द्वारा उच्चाधिकारियों का ध्यान गेटाें की खराबी एवं स्काडा सिस्टम के Dysfunctional होने के कारण गेटों को उठाये जाने में कठिनाई की ओर आकृष्ट किया जाता रहा है। जिस क्रम में मुख्य अभियंता एवं प्रधान सचिव के स्तर पर आवश्यक निदेश याँत्रिक प्रभाग को दिया जाता रहा है, जिनके जिम्मे गेटों के संधारण एवं संचालन की मुख्य जिम्मेवारी थी। परन्तु उनके द्वारा उदासीनता बरतने के कारण दिनांक-21.07.2016 तक सभी गेटों की मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम में संचालन को ठीक नहीं किया गया।26 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 SCADA System से Automation द्वारा गेटों के संचालन की व्यवस्था के साथ सभी 36 गेटों की मरम्मति नहीं की जाती है। तबतक 36 गेटों को Manually किसी आपात स्थिति में अचानक एकाएक उठाने हेतु कितने भी मजदूर लगाये जाये गटों को उठाना कतई संभव नहीं है।

घटना के लिये इन्हें दोषी ठहराये जाने का क्या आधार हो सकता है, जब गटों के संचालन सम्पोषण का जिम्मा याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक का था, जिन्होने घटना की तिथि से पूर्व तक बार-बार ध्यान आकृष्ट कराये जाने के बाद भी न तो गेटों की मरम्मति की और न ही SCADA System के Automation को ही क्रियाशील बनाया गया। वैसी स्थिति में आपातकाल में बराज के 36 गटों को (HR के 16 गेटों को छोड़कर) तत्काल एक साथ Manually उठाना मुश्किल ही नहीं असभव है, चाहे जितने भी मजदूर रखे जाये तब भी, तब जब कई गेट खराब थे एवं क्रियाशील नहीं थे। आरोप -2 :-सूचना प्राप्त होने पर 5ः00 बजे सुबह बराज गेट सं॰-33 पर था को इस आधार पर संदिग्ध बताया गया कि मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा काफी प्रयास के पश्चात 7.45 बजे सुबह रंजन कुमार कनीय अभियंता से 33 Nos गेट क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई वैसी स्थिति में मुझे 5ः00 बजे कैसे सूचना प्राप्त हुई होगी। ज्ञात हो की मेरा निवास शीर्ष कार्य से मात्र 1/2 km की दूरी पर ही था, जहाँ सहायक अभियंता ने स्वयं आकर सूचना दिया। बराज नेपाल भाग में अवस्थित होने की वजह से भारतीय सिम द्वारा दूरभाष पर कही भी मुस्किल से सम्पर्क स्थापति होता पाता था। इसी वजह से नेपाली सिम लेन का आदेश हुआ था। इसी कारण मुख्य अभियंता को देरी से सूचना मिली एवं इन्हें पहले। आरोप -3 :-याँत्रिक प्रभाग के गेट पर अवस्थित स्थल पंजी में दिनांक-15.06.2016 से ही निरीक्षण, गेटों की मरम्मति एवं संचालन व्यवस्था को ठीक कराने के लिए लगातार टिप्पणी दर्ज करते हुए याँत्रिक प्रभाग एवं उस प्रभाग द्वारा निर्धारित संवेदक का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। बेतार संवाद सं॰-65 दिनांक-13.07.2016 एवं 134 दिनांक-19.07.2016 द्वारा गटों की खामिया एवं गेट संचालन की व्यवस्था संबंधी कमियों को उजागर करते हुए ठीक कराने निमित उच्चाधिकारियों को लिखा गया है, जिसका संज्ञान लेते हुए अभियंता प्रमुख (उत्तर) ने अपने संवाद 154 दिनांक-13.07.02016 एवं 201 दिनांक-21.07.2016 से याँत्रिक प्रभाग को दिशा निदेश दिया है।

प्रमंडलान्तर्गत 13 कनीय अभियंता के स्वीकृत बल के विरूद्ध मात्र 3 कनीय अभियंता थे, उसमें से भी 2 कनीय अभियंता को मुख्य अभियंता, मुजफ्‌फफ्ुरपुर के पत्रांक-01 दिनांक-18.06.2016 द्वारा नवसृजित बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। जिस कारण मात्र 1 कनीय अभियंता से बराज पर तीनों पालियों में ड्‌यूटि कराये जाने की विवशता थी। फलतः अभियंता की कमी के कारण पाली ड्‌युटि प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि निरीक्षण के क्रम में स्थल पंजी में दर्ज खामियाँ एवं अन्य पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराने के फलस्वरूप ही अभियंता प्रमुख एवं प्रधान सचिव महोदय द्वारा संज्ञान लेते हुए याँत्रिक प्रभाग को ससमय यथोचित दिशा निदेश दिया गया। परन्तु मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर ने याँत्रिक खामियों को दूर करने का कोई पहल नहीं किया और अधीनस्थ पर दोषारोपन कर स्वयं को पाक साफ करने का प्रयास किया गया।

उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों से स्पष्ट परिलक्षित होता है कि आवश्यक निरीक्षण करते हुए गेटों के संचालन की खामियों को स्थल पंजी में अंकित किया है एवं अधीनस्थों पर नियंत्रण रखते हुए उच्चाधिकारियों को सतत स्थिति से अवगत कराया है, जिसके कर्त्तव्य पालन का सम्यक बोध होता है, जिसे विभाग ने भी माना है साथ ही कनीय अभियंता की कमी के कारण पाली ड्‌यूटी में हुई कठिनाई में भी माना गया है। आरोप -4 :- गेटों का रख-रखाव एवं संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक PI System Pvt. ltd. था एवं घटना की तिथि दिनांक-21.07.2016 तक गटों में पाई गई कमियों को ठीक करना एवं स्काडा System से गटों के संचालन हेतु उच्चाधिकारियों एवं इनके स्तर से निदेश दिये जाने के बावजूद याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक द्वारा ठीक नहीं कराया जा सका तथा साथ ही जेनरेटर के संचालन हेतु Automatic Voltage Stabilizer की व्यवस्था भी याँत्रिक प्रभाग द्वारा नहीं कराये जाने के कारण गेटों में उठाव शीघ्र नहीं हो सका एवं गेट सं॰-33 पेड़ फस जाने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया।

श्री डी॰ के॰ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में Safety Review of large dams and barrage के लिये एक विशेषज्ञ समिति का गठन विभाग द्वारा किया गया था, जिसका प्रतिवेदन दिनांक-28.12.2014 केा विभाग को प्रेषित किया गया था, जिसमें 18 गेटों में याँत्रिक खराबी पायी गयी थी। उसमें से 5 गेट ठनवासक पाये गये थे। इस हेतु याँत्रिक प्रभाग के मुख्य अभियंता ने दिनांक-11.01.2016 के पत्र द्वारा प्राक्कलन विभाग को समर्पित किया गया था, जिसे अभियंता प्रमुख ने दिनांक-03.07.2016 के पत्र द्वारा कतिपय टिप्पणी के साथ सुधार कर भेजने का निदेश दिया था। इस तरह Expert Review Committee ने प्रतिवेदन पर अनुशंसित कार्रवाई घटना की तिथि तक नहीं हो सकी थी। इसके लिए वे दोषी नहीं है। विभाग स्तर पर भलीभाँति बराज के गेटों की स्थिति विदित थी और इस परिस्थिति में अचानक बाढ़ आने की स्थिति मे ं36 गेटों में से आधे क्षतिग्रस्त गेटाें का उत्तोलन प्रणाली के Dysfunction होने की स्थिति में शीघ्रतापूर्ण Manually उठाना कठीन ही नहीं असंभव Task है, जिसके लिये सिविल पदाधिकारी को कदापी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, विशेषकर जबकि गेटों के संधारण एवं Weighting Arrangement में SCADA System के Automation को Functional रखते हुए गेटों के उठाव की जिम्मेवारी याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक की थी। इनके द्वारा कंडिका-6.0.0, 6.0.1, 6.0.2 में State of U.P. vs Saroj Kumar Sinha जो (2010) 25cc, 777 की कंडिका-22, Sri Brij Bihari Singh v/s Bihar State Financial Corporation जो (2015) 175cc 541 की27 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 कंडिका-9 तथा CWJC no 16258/2017 में दिनांक-04.12.2018 को पारित न्यायादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आरोपाें को प्रमाणित करने हेतु दस्तावेजी साक्ष्यों के उनके Authors के प्रतिपरिक्षण एवं परिक्षण कराकर सम्पूष्ट कराये बिना मात्र उन दस्तावेजों के आधार पर दोषी मानकर दंडित कर दिया गया था। इसी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों को उनके Author द्वारा उनके मामले में भी गवाही लेकर प्रमाणित कराये बिना दोषी ठहराने का जो मंतव्य संचालन पदाधिकारी ने दिया है वह विधि सम्मत नहीं होने के कारण अवैध एवं अमान्य है।

अतः उपरोक्त तथ्यों, परिस्थितियों एवं न्याय निर्णय के आलोक में दोषमुक्त कर मेरे विरूद्ध पारित कठोर दण्डादेश को निरस्त करने पर पुनर्विचार किया जाय।

श्री शर्मा, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये - आरोप :-(1) जो मुख्य अभियंता के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 में निहित निदेश के आलोक में आपात स्थिति से निपटने हेतु पर्याप्त सं॰ में मजदूरों को नहीं रखना तथा गंडक बराज के गेटों एवं बाँधों की विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था नहीं करना फलतः गेट नं॰-33 का क्षतिग्रस्त होना। मुख्य अभियंता (याँ॰) के पत्रांक-1508 दिनांक-11.07.2016, Expert Review Committee का परामर्श एवं मुख्य अभयंता (याँ॰) के पत्रांक-74 दिनांक-11.01.2016 एवं 362 दिनांक-03.07.2016, 1575 दिनांक-20.07.2016 तथा अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि गंडक बराज के गेट सं॰-33 के साथ गटों के संचालन में खराबी थी। दिनांक-20.07.2016 तक सभी गेटो की मरम्मति एवं सुगमता से संचालन हेतु ठीक नहीं किया जा सका था। संचिका में रक्षित विभागीय पत्रांक-65 दिनांक-27.07.2016 से स्पष्ट होता है कि दिनांक-15.07.2016 को प्रधान सचिव द्वारा head regulator एवं 52 गेटों के संचालन स्काडा सिस्टम के तहत कार्य करने के स्थिति की समीक्षा की गयी है, जिसमें संवेदक को अविलम्ब गेटों को ठीक करने तथा स्काडा सिस्टम के संचालन के तहत संचालित करने का निदेश दिया गया है। आरोपी दोनों पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि इनके बेतार संवाद संख्या-65 दिनांक-13.07.2016 एवं 134 दिनांक-19.07.2016 से गेटों को मैकनिकली संचालित नहीं होने की विवसता की सूचना देने के क्रम में अभियंता प्रमुख (उत्तर) के बेतार संवाद 154 दिनांक-13.07.2016 एवं 201 दिनांक-21.07.2016 से सभी अक्रियाशील गेट की मरम्मति तथा स्काडा से सभी गेटों का संचालन सुनिश्चित करने का निदेश याँत्रिक प्रभाग को दिया गया। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि दोनों आरोपी पदाधिकारी द्वारा गटों के संचालन में हो रही कठीनाई को उजागर करते हुए उच्च पदाधिकारी एवं विभाग को सूचित किया गया है। परन्तु याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक द्वारा कार्य में उदासीनता बरतने के कारण दिनांक-21.07.2016 तक बराज के सभी गेटों की मरम्मति एंव संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं हो सका। फलतः गेट No 33 क्षतिग्रस्त होगा। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 से आपात स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक संख्या में श्रम बल रखने हेतु दिये गये निदेश के आलोक में आरोपी द्वारा कहा गया है कि गेटो का संचालन याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक को करना था। इसके बावजूद भी 4 अदद अकुराल मजदूर दिनांक-11.07.2016 से नियोजित किया गया था एवं गेटों के खराबी के कारण घटना के दिन तक ठीक नहीं होने के बावजूद घटना के समय याँत्रिक प्रभाग के 9 अदद मजदुर की सहायता से गटों को उठाने का प्रयास किया गया परन्तु संभव नहीं हो सका। गेट सं॰-33 में पेड़ फस जाने के कारण तत्काल उक्त गेटों को नहीं उठाया जा सका।

मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 (NR 106 दिनांक-18.07.2016) के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि यह पत्र को अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक-18.07.2016 को कार्यपालक अभियंता को पृष्ठांकित किया गया है एवं पत्र में अंकित है कि आपात स्थिति में गेटों को उठाने एवं गिराने हेतु समुचित सं॰ में मजदूरों को रखना सुनिश्चित करेगें, जिसका अनुपालन इन दोनों पदाधिकरियों द्वारा नहीं कर मात्र दिखाने के लिये मात्र 3 अदद मजदूर रखना एवं यह कहना की गेट मैनुअली उठाना संभव नहीं था स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप ः-(2) जो श्री संजय तिवारी, अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनेटरिंग अंचल, पटना (प्रवास बगहा) के द्वारा दिनांक-22.07.2016 को सुबह जगाने का प्रयास करने पर कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया गया। इनके द्वारा कहा गया है कि दिनांक-22.07.2016 को सहायक अभियंता से सुबह 5ः09 में सूचना प्राप्त होने पर अधीक्षण अभियंता के साथ बराज के गेट सं॰-33 के पास पहुँचा एवं उक्त गेट को खुलवाने का प्रयास किया जा रहा था एवं बाद में श्री तिवारी से बराज पर वाल्मीकिनगर से बगहा जाने के क्रम में मुलाकात हुई मेरे आवास पर 80 वर्षिय माँ एवं 54 वर्षिय पत्नी रहती थी। यदि श्री तिवारी द्वारा दरवाजा खटखटाया भी गया होगा तो इनकी अनुपस्थिति में माँ एवं पत्नी द्वारा आवाज नहीं सुनी गयी होगी। यह आरोप पूर्णतः श्री संजय तिवारी के द्वारा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को दी गयी सूचना पर आधारित है। उसी स्थिति में आरोपी के कथन को स्वीकार योग्य मानने अथवा नहीं मानने से पूर्व श्री तिवारी से मंतव्य प्राप्त किया जाना उचित था परन्तु आरोपी द्वारा कहा गया है कि श्री तिवारी से प्रतिपरीक्षण नहीं कराया गया अथवा नहीं से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है परन्तु मुख्य अभियंता का कथन कि दिनांक-22.07.2016 के 6ः00 बजे सुबह तक कार्यपालक अभियंता स्थल पर नहीं पहुँचे थे जबकि आरोपी का कथन कि वे 5.09 बजे सुबह बराज पर उपस्थिति थे/स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप (3) :- दिनांक-22.07.2016 को गेट संचालन में हुई गंभीर चूक से यह स्थापित होता है कि आपके द्वारा समय-समय पर निरीक्षण पदाधिकारी के रूप में कार्य स्थल का निरीक्षण नहीं किया गया है और न ही अधीनस्थ के कार्यकलाप पर28 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 नियंत्रण रखा गया। जो इनकी कर्त्तव्य उपेक्षा के कारण एक विनाशकारी दुर्घटना की परिस्थिति उत्पन्न हुई एवं इनकी पूर्ण अक्षमता को प्रमाणित करता है से संबंधित है। इन दोनों पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि गेटों के संचालन से संबंधित याँत्रिक प्रभाग के स्थल आदेश पंजी में निरंतर गेटों के संचालन व्यवस्था एवं गेटाें की खराबी संबंधी टिप्पणी दिनांक-15.05.2016 से लगातार दर्ज करते हुए मामले को प्रकाश में लाया गया। इसके अतिरिक्त बेतार संवाद संख्या-65 दिनांक-13.07.2016 एवं 134 दिनांक-19.07.2016 से गेटों की खामियाँ एवं संचालन संबंधित कर्मियों को ठीक करने हेतु लिखा गया है, जिसके क्रम में अभियंता प्रमुख अपने बेतार संवाद 154 दिनांक-13.07.2016 एवं 201 दिनांक-27.07.2016 से याँत्रिक प्रभाग को आवश्यक दिशा-निदेश देते हुए स्काडा सिस्टम ठीक करने का निदेश दिया गया। उक्त कथन की पुष्टि संचिका में रक्षित अभिलेख से होती है। आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रमंडल में स्वीकृत बल 13 अदद कनीय अभियंता के पद में से तीन कनीय अभियंता के पदस्थापित रहते हुए भी मुख्य अभियंता द्वारा उसमें से दो कनीय अभियंता को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। संचिका में रक्षित मुख्य अभियंता के पत्रांक-1 दिनांक-18.06.2016 से स्पष्ट है कि शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के सहायक अभियंता, श्री विरेन्द्र कुमार एवं कनीय अभियंता श्री हरेराम ठाकुर एवं मो॰ इरशाद अहमद की प्रतिनियुक्ति बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा के अधीन अपने कार्यों के अतिरिक्त किया गया है। उपरोक्त तथ्याें से स्पष्ट है कि आरोपी द्वारा बराज का निरीक्षण पूर्व के दिनों में की गयी है परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा कनीय अभियंता की कमी की स्थिति में गठित पाली ड्‌यूटी का सुचारू रूप से संचालित एवं आपात स्थिति से निपटने के लिये कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गयी है। ताकि आपात स्थिति में ससमय वस्तुस्थिति की जानकारी उच्च पदाधिकारी को दिया जा सके। जबकि मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-297 दिनांक-18.0.2016 से बराज के गेटों एवं बाँधों की सुरक्षा विशेष रूप से सुनिश्चित करने का हिदायत दिया गया था। अतएव बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप (4) :- कार्य के पर्यवेक्षण को नजर अंदाज किये जाने के कारण गंडक बराज का एक गेट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया एवं व्यवस्था की अन्य अव्यव भी काफी क्षतिग्रस्त हुए, जिसका क्षतिपूर्ति में एक बहुत बड़ी राशि का व्यय होना परिलक्षित है। यह व्यय एक Avoidable Expenditure होने से संबंधित है। इनके द्वारा कहा गया है कि गेटों का रख-रखाव एवं संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक की थी। चुकि उक्त तिथि दिनांक-21.07.2016 के पूर्व गेटों में पायी गयी कमियों को ठीक कराने हेतु आरोपी द्वारा लगातार याँत्रिक प्रभाग एवं उच्चाधिकारियों एवं विभाग से अनुरोध करने के बावजूद गेटों के संचालन हेतु स्काडा सिस्टम को याँत्रिक प्रभाग द्वारा ठीक नहीं कराया गया तथा जेनरेटर के संचालन हेतु ऑटोमेटिक भोलटेज रेगुलेटर नहीं लगाने के कारण गेट का उठाव शीघ्र नहीं हो सका एवं गेट संख्या-33 में पेड़ फस जाने के कारण उक्त गेट क्षतिग्रस्त हुआ है। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त गेट की मरम्मति पर होने वाले व्यय के लिये याँत्रिक प्रभाग को जिम्मेवार माना जा सकता है। परन्तु मुख्य अभियंता के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 के अनुपालन में पर्याप्त संख्या में श्रमबल का नियोजन किया जाता तो संभव था कि आपात स्थिति में गेटों का उठाव हो जाता एवं गेट सं॰-33 क्षतिग्रस्त नहीं होता, जो इनके विफलता को दर्शाता है। अतएव बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।

समीक्षोपरांत श्री राम विनय शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, चन्द्रायन, सहरसा के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-1346 दिनांक 04.07.19 द्वारा संसूचित दण्डादेश को यथावत रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राम विनय शर्मा, कार्यपालक अभियंता, पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, चन्द्रायन, सहरसा के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-1340 दिनांक 04.07.19 द्वारा संसूचित निम्न दण्डादेश को यथावत रखा जाता है।

"तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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16 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2016/1143--श्री अरूण कुमार (आई0डी0-4436) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर को उनके उक्त अवधि में पदस्थापन अवधि के दौरान गंडक बराज के गेट सं0-33 के क्षतिग्रस्त होने, कार्य स्थल का समय-समय पर निरीक्षण नहीं किये जाने, बराज के देखरेख एवं गेटों के संचालन में लापरवाही बरतने एवं अपने पदीय दायित्वों की घोर उपेक्षा करने से संबंधित मामले में बरती गई अनियमितता से संबंधित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1660, दिनांक 03.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1) के तहत निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1702, दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए प्रपत्र-'क' के साथ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। आरोप सं0-1- मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-01 (बराज) कैन्ट दिनांक 23.07.16 में स्पष्ट उल्लेख है कि मुख्य अभियंता द्वारा अनेकों बार दूरभाष एवं पत्रांक-297, दिनांक 18.07.2016 द्वारा आपात स्थिति से निबटने के लिए प्राप्त संख्या में मजदूर रखने का निदेश दिया गया था एवं विशेष रूप से हिदायत दी गई थी कि गंडक बराज के गेटों एवं बाँधों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाय, परन्तु इनके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण गेटों को कम से कम समय में उठाया जाना संभव नहीं हुआ है। जिसके कारण बराज का गेट सं0-3329 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 क्षतिग्रस्त हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि इनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों की घोर उपेक्षा की गई जिससे एक अति विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।

आरोप सं0-2-श्री संजय कुमार तिवारी, कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल सं0-05 (प्रतिनियुक्त बगहा स्थल) द्वारा दिनांक 22.07.2016 को सुबह 06ः00 बजे गंडक नदी का जलश्राव अत्यधिक बढ जाने एवं इससे हुई क्षति की सूचना देने हेतु इनको जगाने का प्रयास किया गया।

मुख्य अभियंता द्वारा आपको अनेको बार दूरभाष एवं पत्रांक-297, दिनांक 18.07.16 से आपात स्थिति से निपटने के लिये प्रयाप्त संख्या में मजदूर रखने का निदेश दिया गया था एवं विशेष रूप से हिदायत दी गयी थी कि गंडक बराज के गेटों एवं बाँधों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाय, परन्तु आपके द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण गेटों को कम से कम समय में उठाया जाना संभव नहीं हुआ। जिसके कारण बराज के गेट नं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया इससे स्पष्ट है कि आपने अपने दायित्वों की घोर उपेक्षा की गयी।

आरोप-3-दिनांक 22.07.16 को गेट संचालन में हुए चूक से स्पष्ट होता है इनके द्वारा समय-समय पर निरीक्षी पदाधिकारी के रूप में कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं किया जाता रहा है और न ही अधीनस्थ के कार्यकलाप पर नियंत्रण रखा गया। अतः इनकी कर्त्तव्य उपेक्षा के कारण एक विनाशकारी परिस्थिति उत्पन्न होने जैसी स्थिति बनी जो इनकी पूर्ण अक्षमता को प्रमाणित करता है।

आरोप-4-इनके द्वारा कार्य पर्यवेक्षण को नजर अंदाज किये जाने के कारण गंडक बराज का एक गेट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया। गेटिंग व्यवस्था के अन्य अव्यव भी काफी क्षतिग्रस्त हुए। जिसकी क्षतिपूर्ति में एक बहुत बड़ी सरकारी राशि का व्यय होगा। यह व्यय एक Avoidable Expenditure था। जिसके लिए आप दोषी है।

उपरोक्त तथ्यों से प्रमाणित होता है कि आपके द्वारा गंडक बराज के देख-रेख एवं गेटों के संचालन में लापरवाही बरती गई है। इनके द्वारा न तो ससमय सही निर्णय लिया गया और न ही इनके अधीनस्थ पर कोई नियंत्रण रहा। साथ ही इनके द्वारा किसी भी विपरीत परिस्थति का सामना करने हेतु पूर्व से कोई तैयारी भी नहीं की गई। जो इनके कर्त्तव्यों का सम्यक पालन नहीं किया जाना प्रमाणित करता है। फलतः इस तरह की घटना घटित हुई।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-44, दिनांक 27.02.2017 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित सभी आरोप यथा आरोप सं0-01, 02, 03 एवं 04 को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1944, दिनांक 07.11.17 द्वारा श्री कुमार, अधीक्षण अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा (अभ्यावेदन) की गई।

उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0, दिनांक 04.01.2018 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :-

गेट सं0 33 के टूटने के संदर्भ में पूर्व में ही बचाव बयान में कहा था कि Dam Safety के Expert Review Committee द्वारा गेट सं0 5, 7, 8, 9, 21 एवं 23 जो buckled था को बदलने के परामर्श का अनुपालन का घटना की तिथि तक नहीं हो पाया था। जब गेट सं० 33 का S S Plate टूटा हुआ था एवं गेट में दो पेड फँस जाने के कारण उक्त गेट को याँत्रिक प्रभाग द्वारा नहीं उठाया जा सका। विभागीय मंतव्य से भी गेट के टूटने एवं बदलने/मरम्मति के लिये इन्हें दोषी नहीं माना गया है।

मुख्य अभियंता के पत्रांक 297 दिनांक 18.07.16 के निदेश के क्रम में उक्त पत्र को पत्रांक-57 दिनांक 18.07.16 को पृष्ठांकित करते हुए कार्यपालक अभियंता को आवश्यक निदेश दिया गया था। यद्यपि गेटों के संचालन एकरारनामा के तहत PI System Pvt. Ltd. के जिम्मे याँत्रिक प्रभाग के नियंत्रणाधीन प्राधिकृत था, फिर भी कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वविवेक से 4 अकुशल मजदूर रखे गये थे।

दिनांक 22.07.16 के सुबह 6ः00 बजे कार्यपालक अभियंता के साथ गेट सं0 33 पर था तथा गेट उठाने की कारवाई की जा रही थी। जिस साक्ष्यों के आधार पर यह आरोप आधारित है उसका बिना प्रतिपरीक्षण कराये ही आरोप प्रमाणित मान लिया गया।

दिनांक 15.06.16 के पूर्व याँत्रिक प्रभाग द्वारा सभी गेटों के जुगाड़ विधि से संचालन किया गया था न कि डैम सेफ्टी द्वारा परामर्शित कार्यों को पूरा कर किया गया था। गेटों के मरम्मति एवं बदलने के प्राक्कलन स्वीकृति की कारवाई घटना के दिन तक प्रक्रियाधीन था। अतः संचालन पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियंता (याँ) का कथन कि दिनांक 15.06.16 को सभी 52 गेटों को ठीक करा लिया गया था। सही नहीं है (विभागीय पत्रांक 562 दिनांक 03.07.16)।

जिला पदाधिकारी द्वारा भी गेट टूटने तथा संचालन के लिये याँत्रिक प्रभाग को जिम्मेवार माना गया है। मुख्यालय में रहकर अधीनस्थ प्रमंडलों के क्षेत्रों का समय-समय पर निरीक्षण करते हुए आवश्यक निदेश देता रहा है। गेट टूटान के पूर्व से ही बराज पर प्रयाप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध था। जिसके बारे में सहायक अभियंता ने अपने बचाव-बयान में वर्णन की है।

गेट का टूटना प्रमाणित है जिसके लिये P I System Pvt. Ltd. को दोषी मानते हुए विभाग द्वारा 10 वर्षों के लिये इन्हें कालीकृत किया गया है।30 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 संचालन पदाधिकारी का कथन कि उभय पक्षों में किसी भी पक्ष ने अवसर दिये जाने के बावजूद भी कोई गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। जबकि संचालन पदाधिकारी से स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को साक्ष्य का परीक्षण करने का निदेश दिया जाय। परन्तु अवसर नहीं दिया गया। कृपया संचालन संबंधी Day by Day अंकित आदेश का Order Sheet की प्रति उपलब्ध करायी जाय। ताकि स्पष्ट हो सके कि कब अवसर दिया गया। जो CCA नियमावली के तहत आवश्यक है। गवाहों के मौखिक गवाही द्वारा दस्तावेजों को प्रमाणित कराये बिना उन दस्तावेजों का शाश्वत सत्य मानकर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य देना न्याय का उल्लंघन है एवं विधि सम्मत नहीं है।

इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा State of UP Vrs. Saroj Kumar Sinha के मामले में पारित न्यायादेश (2010) IOS.C.C.972(para-28) में प्रतिवेदित है कि -

"28 ……………………………….Since no oral evidence has been examined the documents have not been proved, and could not have been taken into consideration to conclude that the charges have been proved against the respondent"

परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। अनुरोध है कि जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न परिशिष्टि के साथ-साथ विभागीय मंतव्य की प्रति एवं संचालन प्रक्रिया में संधारित आदेशफलक की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध करायी जाय, द्वितीय कारण पृच्छा का प्रभावी पूरक उत्तर प्रस्तुत कर सकूँ।

श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा की जिसमें निम्न तथ्य पाये गये।

श्री कुमार द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में लगभग वही तथ्य एवं साक्ष्य दिया गया जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है एवं जिसकी समीक्षा संचालन पदाधिकारी के द्वारा माँगी गई विभागीय अभिमत के समय की गई। जो निम्नवत है :-

आरोप-1-इस आरोप का मुख्य अंश है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक-297, दिनांक 18.07.16 में निहित निदेश के आलोक में आपात स्थिति से निपटने के लिये प्रयाप्त संख्या में मजदूरों को नहीं रखा गया तथा बराज के गेटों एवं बाँधों की विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था नहीं करने के कारण गेट नं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया।

एकरारनामा एवं अन्य अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि गंडक बराज के गेटों का संधारण एवं संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित P I System Pvt. Ltd. को दिनांक 20.05.15 को दिया गया था।

मुख्य अभियंता (याँ0) के पत्रांक-1508, दिनांक 11.07.16 Expert Review comette का परामर्श एवं मुख्य अभियंता (याँ0) के पत्रांक-74, दिनांक 11.01.16 एवं 1575 दिनांक 20.07.16 तथा 1508 दिनांक 11.07.16 अभियंता प्रमुख के पत्रांक-65, दिनांक 27.07.16 तथा बेतार संवाद 154 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 21.07.16 से स्पष्ट होता है कि बराज के कई गेटों के S S Plate की मरम्मति करने की आवश्यकता थी तथा स्काडा सिस्टम भी Dysfunctional था। अभियंता प्रमुख के बेतार संवाद 154 दिनांक 20.07.16 से स्पष्ट होता है कि गेट सं0 33 के साथ अन्य कई गेटों का मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से संचालन करने की व्यवस्था को दिनांक 21.07.16 तक ठीक नहीं कराया जा सका था।

विभागीय पत्रांक- 65 दिनांक 27.07.16 से स्पष्ट होता है कि दिनांक 15.07.16 को प्रधान सचिव द्वारा बराज के निरीक्षण/समीक्षा के दौरान सभी 52 गेटों के सम्पोषण एवं स्काडा सिस्टम के तहत संचालन हेतु अविलंब ठीक करने का निदेश संवेदक तथा याँत्रिक प्रभाग के अभियंताओं को दी गयी है।

आरोपी द्वारा मुख्य रूप से कहा गया है कि याँत्रिक प्रभाग के स्थल आदेश पंजी पर गेटों की खराबियों को उजागर करते हुए उसकी मरम्मति एवं संचालन व्यवस्था को दुरूस्त करने का निदेश दिनांक 15.05.16 से लगातार याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक को दिया जाता रहा है। अंततः मेरे मार्गदर्शन में कार्यपालक अभियंता अपने बेतार संवाद 65 दिनांक 13.07.16 एवं 134 दिनांक 19.07.16 से गेटों को Mechanically संचालित नहीं होने की विवसता की सूचना उच्च पदाधिकारी तथा विभाग को दिया गया। जिसके क्रम में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा तो कोई कार्रवाई नहीं की गयी। परन्तु अभियंता प्रमुख अपने बेतार संवाद-54 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 21.07.16 से सभी अक्रियाशील गेटों की मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से सभी गेटों का संचालन सुनिश्चित करने का निदेश याँत्रिक प्रभाग को दिया गया है। तथा कार्यपालक अभियंता (याँ) को संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने का भी निदेश दिया गया है। जिसकी पुष्टि स्थल आदेश पंजी तथा अभिलेख से होती है परन्तु आरोपी द्वारा ऐसा कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि इनके द्वारा स्वयं के स्तर से असंचालित गेटों एवं संचालन में हो रहे कठिनाई को समीक्षा करते हुए वस्तुस्थिति से उच्च पदाधिकारी को अवगत कराया गया हो एवं इनके द्वारा याँत्रिक प्रभाग अथवा अधीनस्थ पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निदेश दी गयी है। यहाँ तक कि आपात स्थिति से निपटने के संदर्भ में मुख्य अभियंता द्वारा दिये गये निदेश पत्र को मात्र पृष्ठांकित करते हुए कार्यपालक अभियंता को दी गयी।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि याँत्रिक प्रभाग एवं सम्पोषण/संचालन कार्य में संलग्न संवेदक द्वारा कार्य में उदासीनता बरतने के कारण दिनांक 21.07.16 तक बराज के सभी गेटों का मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से संचालन को ठीक किया गया। परन्तु आरोपी द्वारा भी आपात स्थिति से निपटने हेतु कोई ठोस प्रयास नहीं किया जाना परिलक्षित होता है। मुख्य अभियंता के पत्रांक 297, दिनांक 18.07.16 से आपात स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक संख्या में मजदूर रखने एवं हरहाल में बराज को सुरक्षित रखने का दिये गये निदेश के आलोक में आरोपी द्वारा कहा गया है कि मेरे दिशा निदेश के31 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 आलोक में कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वविवेक से 4 अद्‌द मजदूर उक्त आदेश के पूर्व से (दिनांक 11.07.16) से ही रखा गया था। आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि गेटों के संचालन हेतु अनुबंधित संवेदक P I Systems Pvt. Ltd. द्वारा भी 9 मजदूर रखा गया था। गेटों की खराबी को घटना के दिन तक ठीक नहीं होने की स्थिति में घटना के समय याँत्रिक प्रभाग के 9 मजदूर एवं मेरे द्वारा रखे गये चार मजदूरों के सहायता से गेट को उठाया गया। परन्तु गेट सं0 33 में पेड फँस जाने के कारण तत्काल गेट नहीं उठाया जा सका। मास्टर रौल से स्पष्ट है कि 3 अद्‌द मजदूर दिनांक 11.07.16 से नियोजित किया गया था। मुख्य अभियंता के पत्रांक-297 दिनांक 18.07.16 से स्पष्ट होता है कि इस पत्र को अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 25.07.11 को कार्यपालक अभियंता को पृष्ठांकित किया गया है। पत्र में अंकित है कि आपात स्थिति में गेटों को उठाने एवं गिरने हेतु समुचित संख्या में मजदूरों को रखना सुनिश्चित करेंगे एवं हर हाल में गेट एवं बाँध को सुरक्षित रखना सुनिश्चित करेंगे। परन्तु उक्त पत्र में निश्चित सं0 में मजदूरों को रखने का उल्लेख नहीं है। ऐसी स्थिति में अधीक्षण अभियंता का दायित्व बनता था कि गेटों की मरम्मति एवं संचालन प्रणाली की स्थिति समीक्षोपरांत समुचित सं0 में मजदूरों को गेट के उठाने एवं गिराने हेतु रखने का निदेश कार्यपालक अभियंता को देते परन्तु इनके द्वारा मात्र उक्त पत्र को अग्रसारित कर दिया गया जो इनके कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही दर्शाता है। जहाँ तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था नहीं करने के कारण गेट नं0-33 क्षतिग्रस्त होने का प्रश्न है। जिला पदाधिकारी के प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि समय पर गेट का उठाव नहीं होने के कारण गेट नं0 33 से पेड फँस जाने के कारण उक्त गेट का उठाव नहीं हो सका है। परन्तु उपर वर्णित तथ्यों से परिलक्षित होता है कि याँत्रिक प्रभाग द्वारा अनुबंधित संवेदक द्वारा घटना की तिथि तक गेटों को मरम्मति तथा स्काडा सिस्टम को ठीक नहीं कराया जा सका था फलतः यथा समय गेटों को उठाव नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में उक्त घटना के लिये याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक को मुख्य रूप से दोषी माना जा सकता है साथ ही श्री कुमार समुचित व्यवस्था नहीं करने के लिये कुछ हद तक दोषी है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है। आरोप-2-इस आरोप का मुख्यतः दो भाग है। (क) श्री संजय तिवारी वर्तमान में अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना (प्रवाह बगहा) के द्वारा दिनांक 22.07.16 को सुबह 6ः00 बजे जगाने पर कोई प्रतिउत्तर नहीं देना। (ख) मुख्य अभियंता के पत्रांक 290 दिनांक 15.07.16 एवं 338 दिनांक 21.07.16 द्वारा निदेश देने के बाद भी नेपाली सिम का क्रय नहीं करना। आरोपी द्वारा कहा गया है कि दिनांक 22.07.16 को सुबह 5ः00 बजे सहायक अभियंता से सूचना प्राप्त होने पर कार्यपालक अभियंता के साथ बराज के गेट नं0 33 के पास पहुँचकर गेट को खुलवाने का प्रयास किया जा रहा था तथा बाद में श्री तिवारी से बराज पर उनके बगहा जाने के क्रम में मुलाकात हुई। मेरे आवास पर वृद्ध मामा एवं पिता रहते थे। यदि तिवारी द्वारा दरवाजा खटखटाया भी गया होगा तो मेरी अनुपस्थिति में माँ एवं पिता द्वारा आवाज नहीं सुनी गयी होगी। यह आरोप पूर्णतः श्री तिवारी के द्वारा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को दूरभाष से सूचित किये गये तथ्य के आधार पर आधारित हैं। ऐसी स्थिति में आरोपी के कथन को स्वीकार योग्य मानने अथवा नहीं मानने से पूर्व श्री संजय तिवारी, अधीक्षण अभियंता योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-3, पटना से मंतव्य प्राप्त किया जाना श्रेष्कर प्रतीत होता है। क्योंकि मुख्य अभियंता द्वारा कहा गया है कि काफी प्रयास के बाद सुबह लगभग 7ः45 बजे श्री रंजन कुमार, कनीय अभियंता से गेट सं0 33 क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। ऐसी स्थिति में आरोपी का कहना की वे सहायक अभियंता से सूचना प्राप्त होने पर सुबह 5ः00 बजे बराज के गेट सं0 33 पर थे संदिग्ध प्रतीत होता है। नेपाल सिम के क्रय के संदर्भ में इनके द्वारा कहा गया है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक-290 दिनांक 15.07.16 दिनांक 23.07.16 को प्राप्त हुआ। फिर भी मुख्य अभियंता के द्वारा दूरभाष पर दी गयी सूचना के आलोक में दिनांक 16.07.16 को ही सम्पर्क पदाधिकारी को बुलाकर नेपाल सिम उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया। आरोपी का उक्त कथन की पुष्टि सम्पर्क पदाधिकारी के पत्रांक 11 दिनांक 23.08.16 आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 338 दिनांक 21.07.16 तथा सिम प्राप्त नहीं होने की स्थिति में सम्पर्क पदाधिकारी को पत्रांक 61 दिनांक 22.07.16 द्वारा नेपाली सिम हेतु पुनः अनुरोध किया गया। जिसके क्रम में सम्पर्क पदाधिकारी के पत्रांक 10 दिनांक 16.08.16 से 6 अद्‌द सिम उपलब्ध कराया गया। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में माना जा सकता है कि नेपाली सिम प्राप्त करने हेतु विभागीय पत्रांक 501, दिनांक 14.07.16 एवं मुख्य अभियंता के पत्रांक 290 दिनांक 15.07.16 के अनुपालन में इनके द्वारा ससमय कार्रवाई की गयी है। अतएव श्री कुमार द्वारा निदेश का अनुपालन किया जाना परिलक्षित होता है। आरोप-3- इस आरोप के संदर्भ में आरोपी द्वारा कहा गया है कि याँत्रिक प्रभाग के आदेश पंजी में मेरे एवं अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा गेटों की मरम्मति एवं संचालन व्यवस्था को ठीक कराने हेतु दिनांक 15.05.16 से लगातार टिप्पणी दर्ज करते हुए याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त मेरे मार्गदर्शन में कार्यपालक अभियंता अपने बेतार संवाद 65 दिनांक 13.07.16 एवं 134 दिनांक 19.07.16 से गेटों की खामियाँ एवं संचालन संबंधी कमियों को उजागर करते हुए ठीक कराने हेतु उच्चाधिकारियों को लिखा गया है जिसके क्रम में अभियंता प्रमुख द्वारा अपने बेतार संवाद 154 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 21.07.16 से याँत्रिक प्रभाग को आवश्यक दिशा निदेश दिया गया है। इस प्रकार कर्त्तव्यों का निर्वहन करते हुए घटना की पूर्व से व्यवस्था ठीक कराने की कार्रवाई का बोध होता है। परनतु इनके स्वयं के स्तर पर गेटों के रख-रखाव/ मरम्मति एवं संचालन के संदर्भ एक भी पत्राचार किया गया हो परिलक्षित नहीं होता है। इनके32 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 द्वारा यह भी कहा गया है कि अंचल एवं इनके अधीन दोनों प्रमंडलों में सहायक अभियंता के 12 स्वीकृत बल के विरूद्ध मात्र 5 सहायक अभियंता कार्यरत थे एवं कनीय अभियंता के कुल स्वीकृत पद 31 के विरूद्ध मात्र तीन ही कनीय अभियंता कार्यरत थे। जिसमें से दो कनीय अभियंता को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा में मुख्य अभियंता द्वारा प्रतिनियुक्त कर दिया गया था। जिस कारण मात्र एक कनीय अभियंता से बराज पर तीनों पाली में ड्‌यूटी कराना जाना विवशता थी। फलतः पाली ड्‌यूटी प्रभावित होना स्वभाविक है। मुख्य अभियंता के पत्रांक 01, दिनांक 18.06.16 से स्पष्ट होता है कि शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के एक सहायक अभियंता तथा दो कनीय अभियंता को बाढ़ नि0 प्र0 बगहा में प्रतिनियुक्त किया गया है। ऐसी स्थिति में आरोपी के उपरोक्त कथन को सही माना जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा बराज एवं गेटों का निरीक्षण करते हुए खामियों को स्थल आदेश पंजी में दर्ज की गयी है परन्तु इनके अपने स्वयं के स्तर से गेटों का समुचित संचालन होने की दिशा में कोई पत्राचार किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। हलांकि अभियंताओं की कमी की स्थिति में गठित पाली ड्‌यूटी को सुचारू रूप से संचालन होने में कठिनाई होना स्वभाविक है। आरोप-4-आरोपी द्वारा इस संदर्भ में कहा गया है कि गेटों का रख-रखाव तथा संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक P I Systems Pvt. Ltd. की थी। चूँकि उक्त तिथि (दिनांक 21.07.16) तक गेटों में पायी गयी कमियों को ठीक करना तथा स्काडा सिस्टम से गेटों की संचालन हेतु उच्चाधिकारी एवं इनके स्तर से निदेश देने के बावजूद याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक द्वारा ठीक नहीं कराया जा सका था। साथ ही जेनरेटर के संचालन हेतु Automatic Voltage Regulator की व्यवस्था भी याँत्रिक प्रभाग द्वारा नहीं किये जाने के कारण गेटों के उठाव शीघ्र नहीं हो सका एवं गेट सं0 33 में पेड फँस जाने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। जिसे स्वीकार योग्य माना जा सकता है। किन्तु क्षतिग्रस्त गेटों की मरम्मति पर होने वाले व्यय के लिए श्री कुमार जिम्मेवार हैं। अतएव आरोप प्रमाणित होता है।

श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता द्वारा पूर्व में दिये गये बचाव बयान के अतिरिक्त अंकित किया गया है कि CCA नियमावली एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा State of UP Vrs सरोज कुमार सिन्हा के मामले में 2016 में पारित न्यायादेश के विपरीत उन्हें समुचित प्रति परीक्षण का अवसर दिये बिना एवं दस्तावेजों को प्रमाणित कराये बिना ही सत्य मानकर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य दिया गया है। जो विधि सम्मत नहीं है एवं इनके द्वारा पूरक उत्तर हेतु जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्न परिशिष्टि के साथ-साथ विभागीय मंतव्य की प्रति एवं संचालन प्रक्रिया में संधारित आदेश फलक की प्रति की माँग की गई है। जबकि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-6 में अंकित है कि उच्च पक्षों में किसी की पक्ष ने अवसर दिये जाने के बावजूद कोई गवाही/गवाह प्रस्तुत नहीं की गई। उक्त के आलोक में श्री कुमार, तत्का0 अधीक्षण अभियंता का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है। समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करते हुए आपात स्थिति से निपटने तथा ससमय सूचना देने की ठोस व्यवस्था नहीं करने का आरोप प्रमाणित होता है एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-194 दिनांक 17.01.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया - "दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-0 दिनांक 06.12.2019 से पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है - आरोप -1 :-अभियंता प्रमुख (उत्तर) के बेतार संवाद संख्या-201 दिनांक-21.07.2016 से स्पष्ट है कि गेट सं॰-33 के साथ अन्य गटों की मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम से गेटों का संचालन की व्यवस्था को दिनांक-21.07.2016 तक ठीक नही कराया जा सका था। दिनांक-15.07.2016 को प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा बराज के निरीक्षण/ समीक्षा के दौरान सभी गेटों के सम्पोषण एवं स्काडा सिस्टम के तहत संचालन हेतु अविलम्ब ठीक करने का निदेश संवेदक एवं याँत्रिक प्रभाग के अभियंताओं को विभागीय पत्रांक-65 दिनांक-27.07.2016 द्वारा दी गयी थी। स्थल पंजी एवं उनके द्वारा उच्चाधिकारियों का ध्यान गेटाें की खराबी एवं स्काडा सिस्टम के Dysfunctional होने के कारण गेटों को उठाये जाने में कठिनाई की ओर आकृष्ट किया जाता रहा है। जिस क्रम में मुख्य अभियंता एवं प्रधान सचिव के स्तर पर आवश्यक निदेश याँत्रिक प्रभाग को दिया जाता रहा है, जिनके जिम्मे गेटों के संधारण एवं संचालन की मुख्य जिम्मेवारी थी। परन्तु उनके द्वारा उदासीनता बरतने के कारण दिनांक-21.07.2016 तक सभी गेटों की मरम्मति एवं स्काडा सिस्टम में संचालन को ठीक नहीं किया गया।

SCADA System से Automation द्वारा गेटों के संचालन की व्यवस्था के साथ सभी 36 गेटों की मरम्मति नहीं की जाती है। तबतक 36 गेटों को Manually किसी आपात स्थिति में अचानक एकाएक उठाने हेतु कितने भी मजदूर लगाये जाये गटों को उठाना कतई संभव नहीं है।

घटना के लिये इन्हें दोषी ठहराये जाने का क्या आधार हो सकता है, जब गटों के संचालन सम्पोषण का जिम्मा याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक का था, जिन्होने घटना की तिथि से पूर्व तक बार-बार ध्यान आकृष्ट कराये जाने के बाद भी न तो गेटों की मरम्मति की और न ही SCADA System के Automation को ही क्रियाशील बनाया गया। वैसी स्थिति में आपातकाल में बराज के 36 गटों को (HR के 16 गेटों को छोड़कर) तत्काल एक साथ Manually33 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 उठाना मुश्किल ही नहीं असभव है, चाहे जितने भी मजदूर रखे जाये तब भी, तब जब कई गेट खराब थे एवं क्रियाशील नहीं थे। आरोप -2 :-सूचना प्राप्त होने पर 5ः00 बजे सुबह बराज गेट सं॰-33 पर था को इस आधार पर संदिग्ध बताया गया कि मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर द्वारा काफी प्रयास के पश्चात 7.45 बजे सुबह रंजन कुमार कनीय अभियंता से 33 Nos गेट क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई वैसी स्थिति में मुझे 5ः00 बजे कैसे सूचना प्राप्त हुई होगी। ज्ञात हो की मेरा निवास शीर्ष कार्य से मात्र 1/2 km की दूरी पर ही था, जहाँ सहायक अभियंता ने स्वयं आकर सूचना दिया। बराज नेपाल भाग में अवस्थित होने की वजह से भारतीय सिम द्वारा दूरभाष पर कही भी मुस्किल से सम्पर्क स्थापति होता पाता था। इसी वजह से नेपाली सिम लेन का आदेश हुआ था। इसी कारण मुख्य अभियंता को देरी से सूचना मिली एवं इन्हें पहले। आरोप -3 :-याँत्रिक प्रभाग के गेट पर अवस्थित स्थल पंजी में दिनांक-15.06.2016 से ही निरीक्षण, गेटों की मरम्मति एवं संचालन व्यवस्था को ठीक कराने के लिए लगातार टिप्पणी दर्ज करते हुए याँत्रिक प्रभाग एवं उस प्रभाग द्वारा निर्धारित संवेदक का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। बेतार संवाद सं॰-65 दिनांक-13.07.2016 एवं 134 दिनांक-19.07.2016 द्वारा गेटों की खामिया एवं गेट संचालन की व्यवस्था संबंधी कमियों को उजागर करते हुए ठीक कराने निमित उच्चाधिकारियों को लिखा गया है, जिसका संज्ञान लेते हुए अभियंता प्रमुख (उत्तर) ने अपने संवाद 154 दिनांक-13.07.02016 एवं 201 दिनांक-21.07.2016 से याँत्रिक प्रभाग को दिशा निदेश दिया है।

प्रमंडलान्तर्गत 13 कनीय अभियंता के स्वीकृत बल के विरूद्ध मात्र 3 कनीय अभियंता थे, उसमें से भी 2 कनीय अभियंता को मुख्य अभियंता, मुजफ्‌फरफ्ुर के पत्रांक-01 दिनांक-18.06.2016 द्वारा नवसृजित बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। जिस कारण मात्र 1 कनीय अभियंता से बराज पर तीनों पालियों में ड्‌यूटि कराये जाने की विवशता थी। फलतः अभियंता की कमी के कारण पाली ड्‌युटि प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि निरीक्षण के क्रम में स्थल पंजी में दर्ज खामियाँ एवं अन्य पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराने के फलस्वरूप ही अभियंता प्रमुख एवं प्रधान सचिव महोदय द्वारा संज्ञान लेते हुए याँत्रिक प्रभाग को ससमय यथोचित दिशा निदेश दिया गया। परन्तु मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर ने याँत्रिक खामियों को दूर करने का कोई पहल नहीं किया और अधीनस्थ पर दोषारोपन कर स्वयं को पाक साफ करने का प्रयास किया गया।

उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों से स्पष्ट परिलक्षित होता है कि आवश्यक निरीक्षण करते हुए गेटों के संचालन की खामियों को स्थल पंजी में अंकित किया है एवं अधीनस्थों पर नियंत्रण रखते हुए उच्चाधिकारियों को सतत स्थिति से अवगत कराया है, जिसके कर्त्तव्य पालन का सम्यक बोध होता है, जिसे विभाग ने भी माना है साथ ही कनीय अभियंता की कमी के कारण पाली ड्‌यूटी में हुई कठिनाई में भी माना गया है। आरोप -4 :- गेटों का रख-रखाव एवं संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक PI System Pvt. ltd. था एवं घटना की तिथि दिनांक-21.07.2016 तक गटों में पाई गई कमियों को ठीक करना एवं स्काडा System से गटों के संचालन हेतु उच्चाधिकारियों एवं इनके स्तर से निदेश दिये जाने के बावजूद याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक द्वारा ठीक नहीं कराया जा सका तथा साथ ही जेनरेटर के संचालन हेतु Automatic Voltage Stabilizer की व्यवस्था भी याँत्रिक प्रभाग द्वारा नहीं कराये जाने के कारण गेटों में उठाव शीघ्र नहीं हो सका एवं गेट सं॰-33 पेड़ फस जाने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया।

श्री डी॰ के॰ श्रीवास्तव की अध्यक्षता में Safety Review of large dams and barrage के लिये एक विशेषज्ञ समिति का गठन विभाग द्वारा किया गया था, जिसका प्रतिवेदन दिनांक-28.12.2014 केा विभाग को प्रेषित किया गया था, जिसमें 18 गेटों में याँत्रिक खराबी पायी गयी थी। उसमें से 5 गेट ठनवासक पाये गये थे। इस हेतु याँत्रिक प्रभाग के मुख्य अभियंता ने दिनांक-11.01.2016 के पत्र द्वारा प्राक्कलन विभाग को समर्पित किया गया था, जिसे अभियंता प्रमुख ने दिनांक-03.07.2016 के पत्र द्वारा कतिपय टिप्पणी के साथ सुधार कर भेजने का निदेश दिया था। इस तरह Expert Review Committee ने प्रतिवेदन पर अनुशंसित कार्रवाई घटना की तिथि तक नहीं हो सकी थी। इसके लिए वे दोषी नहीं है। विभाग स्तर पर भलीभाँति बराज के गेटों की स्थिति विदित थी और इस परिस्थिति में अचानक बाढ़ आने की स्थिति मे ं36 गेटों में से आधे क्षतिग्रस्त गटाें का उत्तोलन प्रणाली के Dysfunction होने की स्थिति में शीघ्रतापूर्ण Manually उठाना कठीन ही नहीं असंभव Task है, जिसके लिये सिविल पदाधिकारी को कदापी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, विशेषकर जबकि गेटों के संधारण एवं Weighting Arrangement में SCADA System के Automation को Functional रखते हुए गेटों के उठाव की जिम्मेवारी याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक की थी। इनके द्वारा कंडिका-6.0.0, 6.0.1, 6.0.2 में State of U.P. vs Saroj Kumar Sinha जो (2010) 25cc, 777 की कंडिका-22, Sri Brij Bihari Singh v/s Bihar State Financial Corporation जो (2015) 175cc 541 की कंडिका-9 तथा CWJC no 16258/2017 में दिनांक-04.12.2018 को पारित न्यायादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आरोपाें को प्रमाणित करने हेतु दस्तावेजी साक्ष्यों के उनके Authors के प्रतिपरिक्षण एवं परिक्षण कराकर सम्पूष्ट कराये बिना मात्र उन दस्तावेजों के आधार पर दोषी मानकर दंडित कर दिया गया था। इसी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों को उनके Author द्वारा उनके मामले में भी गवाही लेकर प्रमाणित कराये बिना दोषी ठहराने का जो मंतव्य संचालन पदाधिकारी ने दिया है वह विधि सम्मत नहीं होने के कारण अवैध एवं अमान्य है।34 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 अतः उपरोक्त तथ्यों, परिस्थितियों एवं न्याय निर्णय के आलोक में दोषमुक्त कर मेरे विरूद्ध पारित कठोर दण्डादेश को निरस्त करने पर पुनर्विचार किया जाय।

श्री कुमार, तत0 अधीक्षण अभियंता से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये - आरोप :-(1) जो मुख्य अभियंता के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 में निहित निदेश के आलोक में आपात स्थिति से निपटने हेतु पर्याप्त सं॰ में मजदूरों को नहीं रखना तथा गंडक बराज के गेटों एवं बाँधों की विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था नहीं करना फलतः गेट नं॰-33 का क्षतिग्रस्त होना। मुख्य अभियंता (याँ॰) के पत्रांक-1508 दिनांक-11.07.2016, Expert Review Committee का परामर्श एवं मुख्य अभयंता (याँ॰) के पत्रांक-74 दिनांक-11.01.2016 एवं 362 दिनांक-03.07.2016, 1575 दिनांक-20.07.2016 तथा अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि गंडक बराज के गेट सं॰-33 के साथ गेटों के संचालन में खराबी थी। दिनांक-20.07.2016 तक सभी गेटो की मरम्मति एवं सुगमता से संचालन हेतु ठीक नहीं किया जा सका था। संचिका में रक्षित विभागीय पत्रांक-65 दिनांक-27.07.2016 से स्पष्ट होता है कि दिनांक-15.07.2016 को प्रधान सचिव द्वारा head regulator एवं 52 गेटों के संचालन स्काडा सिस्टम के तहत कार्य करने के स्थिति की समीक्षा की गयी है, जिसमें संवेदक को अविलम्ब गेटों को ठीक करने तथा स्काडा सिस्टम के संचालन के तहत संचालित करने का निदेश दिया गया है। आरोपी दोनों पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि इनके बेतार संवाद संख्या-65 दिनांक-13.07.2016 एवं 134 दिनांक-19.07.2016 से गेटों को मैकनिकली संचालित नहीं होने की विवसता की सूचना देने के क्रम में अभियंता प्रमुख (उत्तर) के बेतार संवाद 154 दिनांक-13.07.2016 एवं 201 दिनांक-21.07.2016 से सभी अक्रियाशील गेट की मरम्मति तथा स्काडा से सभी गेटों का संचालन सुनिश्चित करने का निदेश याँत्रिक प्रभाग को दिया गया। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि दोनों आरोपी पदाधिकारी द्वारा गटों के संचालन में हो रही कठीनाई को उजागर करते हुए उच्च पदाधिकारी एवं विभाग को सूचित किया गया है। परन्तु याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक द्वारा कार्य में उदासीनता बरतने के कारण दिनांक-21.07.2016 तक बराज के सभी गेटों की मरम्मति एंव संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं हो सका। फलतः गेट No 33 क्षतिग्रस्त होगा। मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 से आपात स्थिति से निपटने हेतु आवश्यक संख्या में श्रम बल रखने हेतु दिये गये निदेश के आलोक में आरोपी द्वारा कहा गया है कि गेटो का संचालन याँत्रिक प्रभाग एवं संवेदक को करना था। इसके बावजूद भी 4 अदद अकुराल मजदूर दिनांक-11.07.2016 से नियोजित किया गया था एवं गेटों के खराबी के कारण घटना के दिन तक ठीक नहीं होने के बावजूद घटना के समय याँत्रिक प्रभाग के 9 अदद मजदुर की सहायता से गेटों को उठाने का प्रयास किया गया परन्तु संभव नहीं हो सका। गेट सं॰-33 में पेड़ फस जाने के कारण तत्काल उक्त गेटों को नहीं उठाया जा सका।

मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 (NR 106 दिनांक-18.07.2016) के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि यह पत्र को अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक-18.07.2016 को कार्यपालक अभियंता को पृष्ठांकित किया गया है एवं पत्र में अंकित है कि आपात स्थिति में गेटों को उठाने एवं गिराने हेतु समुचित सं॰ में मजदूरों को रखना सुनिश्चित करेगें, जिसका अनुपालन इन दोनों पदाधिकरियों द्वारा नहीं कर मात्र दिखाने के लिये मात्र 3 अदद मजदूर रखना एवं यह कहना की गेट मैनुअली उठाना संभव नहीं था स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप ः-(2) जो श्री संजय तिवारी, अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनेटरिंग अंचल, पटना (प्रवास बगहा) के द्वारा दिनांक-22.07.2016 को सुबह जगाने का प्रयास करने पर कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया गया। इनके द्वारा कहा गया है कि दिनांक-22.07.2016 को सहायक अभियंता से सुबह 5ः09 में सूचना प्राप्त होने पर अधीक्षण अभियंता के साथ बराज के गेट सं॰-33 के पास पहुँचा एवं उक्त गेट को खुलवाने का प्रयास किया जा रहा था एवं बाद में श्री तिवारी से बराज पर वाल्मीकिनगर से बगहा जाने के क्रम में मुलाकात हुई मेरे आवास पर 80 वर्षिय माँ एवं 54 वर्षिय पत्नी रहती थी। यदि श्री तिवारी द्वारा दरवाजा खटखटाया भी गया होगा तो इनकी अनुपस्थिति में माँ एवं पत्नी द्वारा आवाज नहीं सुनी गयी होगी। यह आरोप पूर्णतः श्री संजय तिवारी के द्वारा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर को दी गयी सूचना पर आधारित है। उसी स्थिति में आरोपी के कथन को स्वीकार योग्य मानने अथवा नहीं मानने से पूर्व श्री तिवारी से मंतव्य प्राप्त किया जाना उचित था परन्तु आरोपी द्वारा कहा गया है कि श्री तिवारी से प्रतिपरीक्षण नहीं कराया गया अथवा नहीं से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है परन्तु मुख्य अभियंता का कथन कि दिनांक-22.07.2016 के 6ः00 बजे सुबह तक कार्यपालक अभियंता स्थल पर नहीं पहुँचे थे जबकि आरोपी का कथन कि वे 5.09 बजे सुबह बराज पर उपस्थिति थे/स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप (3) :- दिनांक-22.07.2016 को गेट संचालन में हुई गंभीर चूक से यह स्थापित होता है कि आपके द्वारा समय-समय पर निरीक्षण पदाधिकारी के रूप में कार्य स्थल का निरीक्षण नहीं किया गया है और न ही अधीनस्थ के कार्यकलाप पर नियंत्रण रखा गया। जो इनकी कर्त्तव्य उपेक्षा के कारण एक विनाशकारी दुर्घटना की परिस्थिति उत्पन्न हुई एवं इनकी पूर्ण अक्षमता को प्रमाणित करता है से संबंधित है। इन दोनों पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि गेटों के संचालन से संबंधित याँत्रिक प्रभाग के स्थल आदेश पंजी में निरंतर गेटों के संचालन व्यवस्था एवं गेटाें की खराबी संबंधी टिप्पणी दिनांक-15.05.2016 से लगातार दर्ज करते हुए मामले को प्रकाश में लाया गया। इसके अतिरिक्त बेतार संवाद संख्या-65 दिनांक-13.07.2016 एवं 134 दिनांक-19.07.2016 से गेटों की खामियाँ एवं संचालन संबंधित कर्मियों को ठीक करने हेतु लिखा गया है, जिसके क्रम में अभियंता प्रमुख अपने बेतार संवाद 154 दिनांक-13.07.2016 एवं 201 दिनांक-27.07.2016 से याँत्रिक प्रभाग को आवश्यक दिशा-निदेश देते हुए स्काडा35 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 सिस्टम ठीक करने का निदेश दिया गया। उक्त कथन की पुष्टि संचिका में रक्षित अभिलेख से होती है। आरोपी द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रमंडल में स्वीकृत बल 13 अदद कनीय अभियंता के पद में से तीन कनीय अभियंता के पदस्थापित रहते हुए भी मुख्य अभियंता द्वारा उसमें से दो कनीय अभियंता को बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा में प्रतिनियुक्त कर दिया गया। संचिका में रक्षित मुख्य अभियंता के पत्रांक-1 दिनांक-18.06.2016 से स्पष्ट है कि शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के सहायक अभियंता, श्री विरेन्द्र कुमार एवं कनीय अभियंता श्री हरेराम ठाकुर एवं मो॰ इरशाद अहमद की प्रतिनियुक्ति बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बगहा के अधीन अपने कार्यों के अतिरिक्त किया गया है। उपरोक्त तथ्याें से स्पष्ट है कि आरोपी द्वारा बराज का निरीक्षण पूर्व के दिनों में की गयी है परन्तु आरोपी पदाधिकारी द्वारा कनीय अभियंता की कमी की स्थिति में गठित पाली ड्‌यूटी का सुचारू रूप से संचालित एवं आपात स्थिति से निपटने के लिये कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गयी है। ताकि आपात स्थिति में ससमय वस्तुस्थिति की जानकारी उच्च पदाधिकारी को दिया जा सके। जबकि मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-297 दिनांक-18.0.2016 से बराज के गेटों एवं बाँधों की सुरक्षा विशेष रूप से सुनिश्चित करने का हिदायत दिया गया था। अतएव बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है। आरोप (4) :- कार्य के पर्यवेक्षण को नजर अंदाज किये जाने के कारण गंडक बराज का एक गेट पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया एवं व्यवस्था की अन्य अव्यव भी काफी क्षतिग्रस्त हुए, जिसका क्षतिपूर्ति में एक बहुत बड़ी राशि का व्यय होना परिलक्षित है। यह व्यय एक Avoidable Expenditure होने से संबंधित है। इनके द्वारा कहा गया है कि गेटों का रख-रखाव एवं संचालन का दायित्व याँत्रिक प्रभाग एवं उनके द्वारा अनुबंधित संवेदक की थी। चुकि उक्त तिथि दिनांक-21.07.2016 के पूर्व गेटों में पायी गयी कमियों को ठीक कराने हेतु आरोपी द्वारा लगातार याँत्रिक प्रभाग एवं उच्चाधिकारियों एवं विभाग से अनुरोध करने के बावजूद गेटों के संचालन हेतु स्काडा सिस्टम को याँत्रिक प्रभाग द्वारा ठीक नहीं कराया गया तथा जेनरेटर के संचालन हेतु ऑटोमेटिक भोलटेज रेगुलेटर नहीं लगाने के कारण गेट का उठाव शीघ्र नहीं हो सका एवं गेट संख्या-33 में पेड़ फस जाने के कारण उक्त गेट क्षतिग्रस्त हुआ है। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त गेट की मरम्मति पर होने वाले व्यय के लिये याँत्रिक प्रभाग को जिम्मेवार माना जा सकता है। परन्तु मुख्य अभियंता के पत्रांक-297 दिनांक-18.07.2016 के अनुपालन में पर्याप्त संख्या में श्रमबल का नियोजन किया जाता तो संभव था कि आपात स्थिति में गेटों का उठाव हो जाता एवं गेट सं॰-33 क्षतिग्रस्त नहीं होता, जो इनके विफलता को दर्शाता है। अतएव बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं है।

समीक्षोपरांत श्री अरूण कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, गंडक बराज अंचल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-194 दिनांक 17.01.19 द्वारा संसूचित दण्डादेश को यथावत रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री अरूण कुमार, कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-194 दिनांक 17.01.19 द्वारा संसूचित निम्न दण्डादेश को यथावत रखा जाता है।

"दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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16 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2016-1142--श्री सुभाष कुमार वर्मा (आई0डी0-एम0-0538) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान गंडक बराज के गेट सं0-33 के क्षतिग्रस्त होने में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-1662, दिनांक 03.08.2016 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1704 दिनांक 05.08.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप सं0-1- वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज में दिनांक 21.07.16 के शाम से दिनांक 22.07.2016 के सुबह तक गंडक नदी के जलश्राव में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण गंडक बराज के गेट सं0-33 क्षतिग्रस्त हो गया एवं पूर्वी मुख्य नहर में तीव्र गति से पानी प्रवेश कर 6.00 आर.डी. पर नहर बांध ओभरटॉप कर गया। जिसके कारण त्रिवेणी पावर हाउस के यंत्रों की क्षति एवं कॉलोनी के घरों में भी क्षति हुई। इसकी जाँच मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, मुजफ्फरपुर, मुख्य अभियंता (याँत्रिक) एवं जिला पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण के द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय समिति द्वारा किया गया। प्राप्त तीनों जाँच प्रतिवेदनों के समीक्षोपरांत आपके विरूद्ध निम्न आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये हैं :-

1. गंडक बराज के गेटों के संचालन हेतु वार्षिक सम्पोषण कार्य को दिनांक 16.06.2016 को माननीय मंत्री महोदय द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में दिनांक 30.06.2016 तक गंडक बराज के सभी गेटों को स्काडा सिस्टम के तहत परिचालन सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया। पुनः अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण अपने एन.आर.-154 दिनांक 13.07.2016 से आपको गंडक बराज पर कैम्प कर बराज के सभी गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से कराना सुनिश्चित करने का निदेश देते हुए अनुपालन प्रतिवेदन की मांग की गई। घटना के दिन आप कार्य स्थल से अनुपस्थित पाये गये। दिनांक 22.07.16 को घटित घटना की जाँच तीन स्तर पर करायी गई। तीनों जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि गेटों का संचालन में स्काडा सिस्टम क्रियाशील नहीं36 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 रहा एवं आपात स्थिति में गेटों को मैनुअली संचालित करना पड़ा। साथ ही साथ गेट मैनुअली उठाने के क्रम में गेट सं0-33 भी क्षतिग्रस्त हो गया। उपरोक्त से स्पष्ट है कि आपके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है एवं उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना भी की गई। फलतः इस तरह की घटना घटी। जिसके लिए आप दोषी हैं।

2. गेटों के स्काडा सिस्टम से संचालन कार्य में संवेदक पाई सिस्टम प्रा0 लि0 द्वारा कार्य नहीं कराने की स्थिति में विभागीय एन.आर. सं0-165 दिनांक 14.07.2016 से आपको एकरारनामा के सुसंगत कंडिकाओं के तहत कार्रवाई करने का लगातार स्पष्ट निदेश दिया जाता रहा, परन्तु आपके द्वारा न तो संवेदक के उपर कोई कार्रवाई की गयी न तो गेटों के सुचारू रूप से संचालन हेतु कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही की गयी, जिसके कारण दिनांक 21.07.2016/ 22.07.16 को इस प्रकार की घटना घटित हुई। अगर आपके द्वारा विभागीय निदेशों के आलोक में ससमय सुमिचत कार्रवाई की गयी होती तो सम्भव था कि इस तरह की घटना नहीं घटती जो परिलक्षित करता है कि आपके द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरती गयी है। जिसके लिए आप दोषी हैं।

3. तीनों जाँच प्रतिवेदनों से परिलक्षित होता है कि आपका अपने अधीनस्थों/संवेदक पर नियंत्रण है, जो आपकी प्रशासनिक विफलता दर्शाता है। जिसके लिए आप दोषी है।

4. गेट सं0-33 के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण इसके मरम्मति आदि पर होने वाले संभावित व्यय के कारण सरकारी राशि का हानि होना स्वभाविक है। यह व्यय आपके कर्त्तव्यहीनता कार्य के प्रति लापरवाही, शिथिलता के कारण ही होना परिलक्षित है। जिसके लिए आप दोषी है। उक्त तीनों जाँच प्रतिवेदनों में लिखित तथ्यों से प्रमाणित हाता है कि आपके द्वारा गंडक बराज के देख-रेख एवं गेटों के संचालन में लापरवाही बरती गयी है। आपके द्वारा न तो ससमय सही निर्णय लिया गया और न ही आपका अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों पर कोई नियंत्रण है। साथ ही आपके द्वारा किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना करने हेतु पूर्व से कोई तैयारी भी नहीं की गई, जो आपके कर्त्तव्यों का सम्यक निर्वहन नहीं किया जाना प्रमाणित करता है। फलतः इस तरह की घटना घटित हुई जिसके लिए आप दोषी है। संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में श्री वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) द्वारा मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :- (1) माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग, पटना के दिनांक 16.06.2016 के स्थल निरीक्षण के निर्देश के अनुपालन में लगातार दिनांक 30.06.2016 तक वाल्मीकिनगर में कैम्प किया गया। उनके द्वारा पाई सिस्टम को पत्रांक-651 दिनांक 17.06. 2016 को स्काडा के सभी गेटों को दिनांक 30.06.2016 तक चालू करने का निर्देश दिया गया। इस प्रकार वाल्मीकिनगर कैम्प कर 52 गेटों को स्काडा से चालू कराते हुए पत्रांक-699 दिनांक 27.06.2016 द्वारा अनुपालन प्रतिवेदन मुख्य अभियंता (याँ0) को भेज दिया गया। मुख्य अभियंता, सिविल, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में जिन 2, 12, 16, 18 एवं 19 गेटों का जिक्र किया गया, उसे उनके द्वारा वाल्मीकिनगर में कैम्प करते हुए ठीक कराया गया एवं एन0आर0 15.07.16 द्वारा मुख्य अभियंता, सिविल मुजफ्फरपुर को दी गयी, जिससे स्पष्ट होता है कि 52 गेट स्काडा से संचालित हो रहे थे। मात्र गेट संख्या-12 एवं 19 का इन्डोर (इनकोडर) खराब होने के कारण इसे बदलने हेतु पाई सिस्टम को उनके द्वारा निर्देश दिया गया एवं इसकी सूचना मुख्य अभियंता (याँ0) को भी दी गयी। तत्पश्चात्‌ मुख्य अभियंता द्वारा दिये गये निदेश के आलोक में माननीय मंत्री महोदय के सीतामढ़ी एवं मुजफ्फरपुर में दिनांक 15.07.2016 एवं दिनांक 17.07.2016 बैठक में भाग लिया गया। तत्पश्चात मुजफ्फरपुर में रहकर अंचल के कार्यों का निष्पादन किया गया एवं बाद में उन्हें छपरा भी जाना पड़ा था। परन्तु दिनांक 22.07.16 को 06ः00 बजे सुबह में श्री अतुल कुमार, कनीय अभियंता (याँ0) द्वारा दूरभाष पर उन्हें घटना की सूचना दी गयी। ज्ञातव्य हो कि विभागीय निदेश के आलोक में वे मुजफ्फरपुर अंचल का कार्य देख रहे थे, ऐसी परिस्थति में उनके द्वारा एक ही समय तीनों स्थान पर रहना संभव नहीं था। इस प्रकार उन पर अनुपस्थित रहने का आरोप न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है। त्रिस्तरीय जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि घटना की रात्रि में अचानक नदी में जलश्राव बढ़ गया एवं पाई सिस्टम के दोनों कर्मी सोये पाये गये। इसी बीच अत्यधिक जलश्राव बढ़ने से गेट पर दबाव पड़ने से स्काडा फेल कर गया। जिस कारण कुछ गेटों को इलेक्ट्रीकली एवं मैन्युली उठाया गया। इस प्रकार पाई सिस्टम के कर्मी के समय पर सतर्क नहीं रहने के कारण दो पेड गेट संख्या-33 में फंस गये, जिसके दबाव से गेट संख्या-33 क्षतिग्रस्त हो गया। इस संबंध में जिलाधिकारी, बेतिया द्वारा स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है, जबकि मुख्य अभियंता, सिविल, मुजफ्फरपुर द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में इस तथ्य की अनदेखी की गयी। इस प्रकार त्रिस्तरीय जाँच समिति में गेट संख्या-33 के क्षतिग्रस्त होने के लिए पाई सिस्टम एवं उसके कर्मी को पूर्ण रूप से दोषी पाया है। अतः उन पर दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करने का आरोप सही प्रतीत नहीं होता है। (2) श्री वर्मा द्वारा बतलाया गया है कि दिनांक 11.07.2016 से 15.07.2016 को वाल्मीकिनगर कैम्प कर के सारे गेटों को स्काडा से चालू कराया गया। साथ ही उनके द्वारा समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता रहा एवं पाई सिस्टम को निर्देशित किया जाता रहा है। उनके द्वारा अधीक्षण अभियंता के स्तर से पत्रांक-790 दिनांक 10.07.2016 एवं कार्यपालक अभियंता स्तर से पत्रांक-776 दिनांक 13.07.16 द्वारा एकरारनामा के तहत बराज पर अनुभवी एवं दक्ष कर्मी रखने हेतु निर्देश दिया गया ताकि स्काडा से गेटों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। साथ ही उनको चेतावनी भी दी गयी कि विपरीत परिस्थितियों में पाई सिस्टम पूर्ण रूप से जिम्मेवार होंगे। उनके द्वारा पत्रांक 7824, दिनांक 23.07.2016 एवं पत्रांक-828, दिनांक 24.07.2016 द्वारा दण्डात्मक कार्रवाई करने के साथ पाई सिस्टम को कालीकृत करने की अनुशंसा की गई। मुख्य अभियंता (याँ0) के जाँच प्रतिवेदन से यह स्पष्ट हुआ है कि पाई सिस्टम द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेश की घोर37 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 अवहेलना की गयी जिस पर विभाग द्वारा पत्रांक-5409, दिनांक 04.10.2016 द्वारा 10 साल के लिए कालीकृत किया गया। जहाँ तक गेटों का सुचारू रूप से संचालन का प्रश्न है उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कार्यपालक अभियंता, बराज द्वारा दैनिक मजदूर का प्रावधान किया जाता है। इसके अतिरिक्त बराज पर जेनरेटर की व्यवस्था रहती है, जिसका संचालन एवं रख-रखाव असैनिक शाखा द्वारा किया जाता है। त्रिसदस्यीय जाँच प्रतिवेदन में भी उन्हें कहीं से दोषी नहीं पाया गया है। अतः उन पर लगाया गया आरोप सही प्रतीत नहीं होता है। (3) इस आरोप के संदर्भ में कहना है कि त्रिसदस्यीय जाँच प्रतिवेदन में उन्हें कहीं से भी दोषी नहीं पाया गया है। अतः उन पर प्रशासनिक विफलता का लगाया गया आरोप सही प्रतीत नहीं होता है। (4) ज्ञातव्य हो कि गण्डक बराज के 52 गेटों का रख-रखाव एवं संचालन का अनुबंध पाई सिस्टम के साथ था। गेटों को उठाने एवं गिराने का निर्देश बराज के असैनिक अभियंता नदी के जलश्राव के अनुसार पाई सिस्टम को दिया जाता है। त्रिसदस्यीय जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि पाई सिस्टम के दोनों कर्मी के सोये जाने एवं बराज पर प्रतिनियुक्त कर्मियाें को लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया। उनके द्वारा सही समय पर सक्रिय नहीं होने के कारण गेट संख्या-33 पर दो पेड फंसने के कारण पानी के अधिक दबाव से गेट संख्या-33 टेढ़ा होकर क्षतिग्रस्त हो गया। त्रिसदस्यीय जाँच प्रतिवेदन में उन्हें कहीं से भी दोषी नहीं पाया गया। ज्ञातव्य हो कि अधीक्षण अभियंता अंचल में एक तकनीकी सलाहकार एवं दो सहायक अभियंता के पद के विरूद्ध कोई भी अभियंता अंचल में एक तकनीकी सलाहकार एवं दो अभियंता कार्यरत नहीं थे। इसी तरह वाल्मीकिनगर प्रमण्डल में 1 कार्यपालक अभियंता, 6 सहायक अभियंता एवं 18 कनीय अभियंता के पद के विरूद्ध मात्र संविदा पर नियुक्त 2 कनीय अभियंता कार्यरत थे। इस तरह वे तीन जगह के प्रभार में थे। उनके द्वारा अधीक्षण अभियंता के स्तर से बाढ़ संबंधित सुरक्षात्मक कार्यों एवं आपात स्थिति से निपटने हेतु उनके पत्रांक-110, दिनांक 28.01.2016 पत्रांक-291 दिनांक 05.03.2016 पत्रांक-432, दिनांक 07.04.2016 एवं पत्रांक-679 दिनांक 02.07.2016 द्वारा वाल्मीकिनगर द्वारा वाल्मीकिनगर में स्वतंत्र कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के पदस्थापन हेतु अनुरोध किया परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई फिर भी उनके द्वारा दायित्वों का निर्वहन पुरी निष्ठा एवं जवाबदेही के साथ किया गया है। अतएव आरोप से मुक्त किया जा सकता है। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में ही श्री वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के दिनांक 30.11.2016 को सेवानिवृत हो जाने के कारण उन्हें दिनांक 30.11.2016 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए इनके विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना संख्या-190, दिनांक 07.02.17 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित किया गया। श्री वर्मा से प्राप्त बचाव बयान के आलोक में समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न बातें कही गई हैं :- श्री वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (याँ0) सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण बचाव बयान मुख्य अभियंता (याँ0) के द्वारा घटना के दो दिनों के पश्चात समर्पित प्रतिवेदन एवं जिलाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण द्वारा दिये गये प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत यह स्पष्ट है कि श्री वर्मा मूल रूप से कार्यपालक अभियंता (याँ0) सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, छपरा के पद पर पदस्थापित थे तथा इसके अलावे श्री वर्मा को छपरा से सुदूर सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के कार्याें का निष्पादन का दायित्व सौंपा गया था। इसके साथ ही सिंचाई याँत्रिक अंचल, मुजफ्फरपुर में भी प्रभारी अधीक्षण अभियंता (याँ0) के रूप में पदस्थापित किया गया था। इस अंचल के अन्तर्गत पड़ने वाले अन्य प्रमंडलों यथा मुजफ्फरपुर एवं समस्तीपुर के कार्यों का भी निरीक्षण एवं अनुश्रवण की जिम्मेवारी इनके उपर थी। बरसात के समय नदी में प्रवाहित Discharge का पुर्वानुमान करना उनके लिये संभव नहीं था। अतएव किस जगह पर कब रूका जाय, यह बिल्कुल उनके स्वविवेक एवं कार्य के औचित्य पर निर्भर कर रहा था। परन्तु कार्य के सुचारू रूप से संचालन करने हेतु उपलब्ध अभियंत्रण, स्थायी/अस्थायी कर्मचारी एवं उपलब्ध संसाधनों से पूर्व वर्ष की भांति काम कराया जा रहा था। अतः इनके द्वारा कार्य में लापरवाही बरतने, कर्तव्यों का पालन नहीं करने तथा उच्चाधिकारियों के आदेश का अवहेलना करने का आरोप सही प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्न बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-1441 दिनांक 07.11.2017 द्वारा श्री वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता (याँ0) से द्वितीय कारण पृच्छा की गई :- आरोप सं॰-01 :- जो तत्कालीन माननीय मंत्री महोदय तथा अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना के द्वारा दिये गये आदेश की अवहेलना करते हुए बराज के सभी गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से क्रियाशील नहीं कराने के कारण दिनांक-22.07.2016 को गेट सं॰-33 के क्षतिग्रस्त होने से संबंधित है। श्री वर्मा का कहना कि बराज के सभी 52 गेटों की स्काडा से चालू करते हुए पत्रांक-699, दिनांक-27.06.2017 से अनुपालन प्रतिवेदन मुख्य अभियंता (यांत्रिक) को भेजा गया तथा अभियंता प्रमुख के दिनांक-10.07.2016 को दिये गये निदेश के अनुपालन मे दिनांक-11.07.2017 को वाल्मीकिनगर गये थें। इससे स्पष्ट है कि तत्कालीन माननीय मंत्री महोदय के द्वारा दिनांक-16.06.2016 को स्थल निरीक्षण के दौरान दिये गये निदेश के बावजूद दिनांक-27.06.2016 के बाद दिनांक-10.07. 2016 तक वाल्मीकिनगर नहीं गये। आपके द्वारा यह भी कहा गया है कि मुख्य अभियंता (यांत्रिक) से दिनांक-14.07.2016 को प्राप्त निदेश के आलोक में दिनांक-15.07.2016 को वाल्मीकिनगर से लौटकर माननीय मंत्री महोदय के सीतामढ़ी एवं मुजफ्फरपुर में आयोजित बैठक मे दिनांक-16.07.2016 एवं 17.07.2016 को भाग लिया गया तथा दिनांक-22.07.2016 को घटना की सूचना मिलने पर वाल्मीकिनगर प्रस्थान किया गया। इससे स्पष्ट है कि दिनांक-17.07.2016 के बैठक के बाद दिनांक-21.07.2016 तक भी बराज पर नहीं गये जबकि अभियंता प्रमुख के द्वारा NR-154 दिनांक-13.07.2016 एवं 201,38 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 दिनांक-21.07.2016 से गेट सं॰-2, 16, 18, 19 एवं अन्य गेटों के संचालन में हो रही समस्या को ठीक कराने हेतु श्री वर्मा को कैम्प करने का निदेश दिया गया था। मूल संचिका मे रक्षित अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि गेट सं॰-31 से 36, 7, 18, 29, 12, 19, 5, 22 एवं 16 मे कुछ न कुछ खराबी के कारण इन सभी गेटों का स्काडा सिस्टम कार्य नहीं कर रहा था। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि विभागीय निदेशों का उल्लंघन करते हुए दायित्वों का ससमय निर्वहन नहीं करने के कारण गेट क्षतिग्रस्त होने जैसी घटना घटित हुई। अतएव आरोप सं॰-01 प्रमाणित होता है। आरोप सं॰-02 :- जो संवेदक द्वारा स्काडा सिस्टम ठीक नही करने के फलस्वरूप विभागीय NR-165 दिनांक-14.07.2016 से एकरारनामा के तहत कार्रवाई करने के निदेश दिये जाने के बावजूद संवेदक पर कोई कार्रवाई नही करने एवं न ही स्काडा सिस्टम को ठीक कराने हेतु कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने से संबंधित है। विभागीय NR-154 दिनांक-13.07.2016 से सभी गेटों को ठीक करते हुए अनुपालन प्रतिवेदन की माँग की गई। पुनः NR-165 दिनांक-14.07.2016 से संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने का निदेश आपको दिया गया। दिनांक-19.07.2016 तक गेट ठीक नहीं होने की स्थिति में कार्यपालक अभियंता (असैनिक) भी अपने NR-134 दिनांक-19.07.2016 से सूचना विभाग को दिया गया। तत्पश्चात विभागीय NR-201 दिनांक-21.07.2016 से असंचालित गेट सं॰-12, 19, 05, एवं 22 को ठीक करने का निदेश आपको दिया गया एवं पुनः संवेदक के विरूद्ध एकरारनामा के तहत कार्रवाई करने का भी निदेश दिया गया। इस संदर्भ में आपके द्वारा कहा गया कि दिनांक-11.07.2016 से 15.07.2016 तक कैम्प कर सारे गेटों का स्काडा से चालु किया गया तथा दिनांक-16.07.2016 से 17.07.2016 को माननीय मंत्री महोदय के बैठक मे भाग लेने के बाद दिनांक-21.07.2016 तक अंचलीय कार्यों का निष्पादन किया गया तथा घटित घटना के बाद पत्रांक-824, दिनांक-23.07. 2016 तथा 828, दिनांक-27.07.2016 के द्वारा संवेदक पर दण्डात्मक कार्रवाई के साथ कालीकृत करने की अनुशंसा की गई इससे स्पष्ट होता है कि इसे महत्वपूर्ण कार्य को दरकिनार कर निदेश देने के बावजूद आपके द्वारा न तो बराज पर जाना हुआ और न ही संवेदक के विरूद्ध गेट क्षतिग्रस्त होने के पूर्व कोई कार्रवाई की गई। जो आपके कर्तव्यों मे लापरवाही एवं निदेशों की अवहेलना को दर्शाता है। अतएव आरोप सं॰-02 प्रमाणित होता है। आरोप सं॰-03 :- जो अधिनस्थ/संवेदक पर नियंत्रण नही होने के कारण आपकी प्रशासनिक विफलता से संबंधित है। आपके द्वारा कहा गया है कि जाँच प्रतिवेदन में आपको दोषी नहीं माना गया है। आरोप सं॰-01 एवं 02 में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि संवेदक पर आपका नियंत्रण नहीं रहने के कारण गेट सं॰-33 क्षतिग्रस्त होने के पूर्व गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं हो सका। फलतः गेट क्षतिग्रस्त होने जैसी घटना घटित होना परिलक्षित था। जो आपकी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। अतएव आरोप सं॰-03 प्रमाणित होता है। आरोप सं॰-04 :- जो क्षतिग्रस्त गेट सं॰-33 के मरम्मति पर होने वाले व्यय से संबंधित है। आपका कहना है कि घटना की रात्रि में संवेदक के दोनों कर्मचारी सोए रहने एवं उनके सक्रीय नहीं रहने के कारण गेट में पेड़ फँस जाने के कारण गेट क्षतिग्रस्त हो गया। साथ ही सहायक अभियंता/कनीय अभियंता की कमी होना बताया गया है। आरोप सं॰-01 एवं आरोप सं॰-02 में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होता है कि गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं होने के कारण गेटों के उठाव में विलम्ब हुआ है। फलतः पानी के दबाव के कारण गेट में पेड़ फँस जाने के कारण गेट सं॰-33 को मैनुअली उठाने के क्रम में क्षतिग्रस्त होना परिलक्षित है जबकि असैनिक के पदाधिकारी द्वारा लगातार स्काडा से गेटों का संचालन हेतु अनुरोध किया गया है। साथ ही विभाग द्वारा भी निदेश दिया जाता रहा है परन्तु आपके द्वारा दिनांक-15.07.2016 के पश्चात दिनांक-22.07.2016 तक गेट को ठीक नहीं कराया जाना परिलक्षित है। जो आपकी लापरवाही एवं उदासीनता को दर्शाता है। उक्त के आलोक में श्री वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता (याँ0) द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गयी है :-

अभियंता प्रमुख के दिनांक 10.07.16 के निदेश के अनुपालन में दिनांक 11.07.17 से 15.07.17 तक कैम्प पर सभी गेटों को स्काडा सिस्टम से संचालित कराया था। जो कार्यपालक अभियंता के NR-5, 7 एवं 8 से भी स्पष्ट है कि सारे गेट संचालित हो रहे थे मात्र चार गेट 12, 18, 19 एवं 22 का संचालन Electrically किया जा रहा है। जिसे दिनांक 15.07.16 तक ठीक करा लिया गया था। साक्ष्य स्वरूप NR-11 संलग्न। ततपश्चात मुख्य अभियंता (याँ॰) के निदेशानुसार दिनांक 16.07.16 एवं 12.07.16 माननीय मंत्री महोदय के बैठक में भाग लिया गया। ततपश्चात दिनांक 18.07.16 से 21.07.16 तक मुजफ्फरपुर अंचल के कार्यो मुख्य अभियंता (याँ॰) के निदेशानुसार किया गया। अतः आदेश का अवहेलना करने का आरोप गलत है। (ii) गेटों का संचालन Three Tier System के द्वारा किये जाने का प्रावधान है। प्रथम स्काडा, दूसरा Electrically एवं तीसरा मैनुअली संचालित भी किया जाता है। पूर्व में स्काडा में गड़बड़ी होने की स्थिति में Electrically गेटों का संचालन किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त आपात स्थिति में दैनिक मजदूरों एवं जेनरेटर की व्यवस्था बराज प्रमंडल द्वारा किया जाता है। चूँकि संवेदक द्वारा दिनांक 15.07.16 को स्काडा सिस्टम से चालू करा दिया गया था। अतएव संवेदक पर कारवाई नहीं की गयी। वैसे मैनें पत्रांक 776 दिनांक 13.07.16 द्वारा चेतावनी देते हुए भुगतान रोक दिया। कार्यपालक अभियंता असैनिक बराज के NR-134 दिनांक 19.07.16 एवं विभागीय NR-201 दिनांक 21.07.16 द्वारा गेट 12, 19, 5, 22 को39 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 असंचालित होने की बात कही गयी जो तकनीकी दृष्टिकोण से सही नहीं था क्योंकि गेटों का संचालन स्काडा से नहीं हो पा रहा था, परन्तु Electrically किया जा रहा था। (iii) बराज पर एक ही कनीय अभियंता, श्री विवेक कुमार पदस्थापित थे। जबकि हर पाली में एक सहायक अभियंता एवं एक कनीय अभियंता को होना आवश्यक था। बाढ़ अवधि में सुरक्षात्मक एवं आपात स्थिति के लिये स्वतंत्र रूप से कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता के पदस्थापन हेतु अनेको बार अनुरोध किया गया। ताकि कार्यो का सही पर्यवेक्षण एवं प्रशासनिक नियंत्रण हो सके एवं आवश्कता पड़ने पर त्वरित कारवाई की जा सके। परन्तु घटना घटित होने के पश्चात अभियंता प्रमुख द्वारा सहायक एवं कनीय अभियंता का पदस्थापन किया गया। घटना के समय मैं अंचल का कार्य देख रहा था। ऐसी स्थिति में मेरे लिये नदी का डिस्चार्ज का पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं था। अतः प्रशासनिक विफलता एवं अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं रहने का आरोप गलत है। (iv) स्काडा सिस्टम में गड़बड़ी होने के कारण मैनुअली उठाने में विलम्ब होने के कारण गेट-33 क्षतिग्रस्त हुआ गलत है क्योंकि कार्यपालक अभियंता के NR-21 दिनांक 21.07.16 से स्पष्ट है कि गेट सं॰ 12, 19, 22 एवं 05 का संचालन Electrically किया जा रहा था जबकि शेष 48 गेटों का संचालन स्काडा से हो रहा था एवं सारे गेट सुरक्षित एवं क्रियाशील थे। संलग्न प्रिंट आउट से स्पष्ट है कि दिनांक 20.07.16 एवं घटना के दिनांक 21.07.16 को सारे गेटों का संचालन स्काडा से हो रहा है। जिला पदाधिकारी, बेतिया द्वारा जाँच प्रतिवेदन में कहा है कि श्री सुबोध प्रसाद शर्मा एवं श्री रंजन कुमार, कनीय अभियंता कंट्रोल रूम से अनुपस्थित थे। जिला पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के अनुसार कंट्रोल रूम में उपर सोये सहायक अभियंता को जगाया गया तब तक पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि गेट-33 पर दो पेड़ फँसे रहने एवं देर तक मैनुअली नहीं उठाये जाने के कारण यह फाटक फँस गया। इससे स्पष्ट है कि गेट की संचालन की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के पूर्व से ही गेट सं॰ 33 क्षतिग्रस्त हो चुका था। मुख्य अभियंता, सिविल द्वारा जाँच प्रतिवेदन में कहा गया है कि श्री सुबोध प्रसाद शर्मा, सहायक अभियंता कंट्रोल रूम से अपने अन्य कर्मियों के साथ ड्‌यूटी पर उपस्थित नहीं थे। रात्रि में उन्हें 2 बजे उठाया गया। तब तक पानी का स्तर बढ़ने के कारण Over Flow करने लगा। इसके बावजूद सहायक अभियंता द्वारा गेटों का संचालन में त्वरित कारवाई नहीं की गयी एवं गेट क्षतिग्रस्त हो गया। उल्लेखनीय है कि स्काडा सिस्टम की गड़बड़ी होने की स्थिति में गेटों का संचालन पूर्व के भाँति Electrically गेटों का संचालन किया जाता है। पावर नहीं रहने पर जेनरेटर की व्यवस्था बराज पर चौबिस घंटे रहता है जिसका रख रखाव बराज प्रमंडल का है। जब जेनरेटर खराब अथवा डीजल नहीं रहने पर गेटों का संचालन मैनुअली किया जाता है। जिला पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार डीजल उपलब्ध नहीं था। जिसके कारण जेनरेटर चलाने में विलम्ब हुआ। एवं कुछ गेटों का संचालन मैनुअली शेष तथा सारे गेट का संचालन स्काडा एवं Electrically किया गया। श्री वर्मा द्वारा अंतिम पारा में माननीय सर्वोच्य न्यायाल द्वारा Nand Kishore Prasad Vrs. State of Bihar के मामले में जो (1992) 2 Sec 10 में पारित न्याय निर्णय को उद्धित करते हुए कहा है कि तीन जगहों के प्रभार में होने के बावजूद भी दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से किया है। अतः आरोप मुक्त करते हुए भुतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति दी जाय।

श्री वर्मा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षा में निम्न तथ्य पाए गए :-

श्री वर्मा तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (याँ॰) के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप वार मामले की समीक्षा नही कर मात्र श्री वर्मा के याँत्रिक प्रभाग, छपरा एवं वाल्मीकिनगर एवं अंचल के तकनीकी सलाहकार के प्रभार में रहने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि बरसात के समय नदी में प्रवाहित डिस्चार्ज का पूर्वानुमान करना संभव नहीं था। अतएव किस जगह कब रूका जाय, यह बिल्कुल उनके स्वविवेक एवं कार्य के औचित्य पर निर्भर था, के आधार पर कार्य में लापरवाही बरतने, कर्त्तव्याें का पालन नहीं करने एवं उच्चाधिकारियों के आदेश का अवहेलना करने के आरोप को अप्रामाणित मानते हुए श्री वर्मा को आरोप से मुक्त करने पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की अनुशंसा की गयी है। को अस्वीकार योग्य मानते हुए श्री वर्मा के विरूद्ध गठित चारों आरोप के संदर्भ में प्राप्त बचाव बयान एवं साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए असहमति के बिन्दु पर श्री वर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। (I) आरोप-1 :- जो तत्कालीन माननीय मंत्री महोदय एवं अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना के द्वारा दिये गये निदेशों का अवहेलना करते हुए बराज के सभी गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से क्रियाशील नहीं कराने के कारण ससमय गेटों का उठाव नहीं होने के फलस्वरूप दिनांक 22.07.16 को गेट सं॰ 33 क्षतिग्रस्त होने से संबंधित है। श्री वर्मा द्वारा बचाव बयान के कंडिका (I) में कहा गया है कि अभियंता प्रमुख के दिनांक 10.07.16 के निदेश के अनुपालन में दिनांक 11.07.16 से कैम्प कर दिनांक 15.07.16 तक बराज के सभी गेटों को स्काडा सिस्टम से संचालित करवा दिया गया था। जबकि जिला पदाधिकारी, मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर तथा मुख्य अभियंता (याँ॰) के जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित होता है कि स्काडा सिस्टम क्रियाशील नहीं रहने के कारण गेट को मैनुअली उठाव कराने में हुए विलम्ब के कारण गेट क्षतिग्रस्त हुआ है। आरोपी श्री वर्मा द्वारा बचाव बयान के कंडिका-4 (iv) में स्वयं स्वीकार किया गया है कि कुछ गेटों का संचालन मैनुअली एवं अन्य गेटों का संचालन स्काडा एवं Electrically किया गया। जब सभी गेटों का संचालन स्काडा40 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 से हो रही थी तो गेटों का उठाव मैनुअली एवं Electrically कराने की जरूरत क्यों पड़ी। अतएव आरोपी का कि दिनांक 15.07.16 तक सभ गेटों का संचालन स्काडा से संचालित करा दिया गया था सही प्रतीत नहीं होता है। श्री वर्मा द्वारा कहा गया है कि तीन कार्यालय के प्रभार में रहने के कारण बाढ़ अवधि की गंभीरता एवं कार्य की महत्ता को देखते हुए कब कहा रूका जाय स्वविवेक से निर्णय लेते हुए दिनांक 18.07.16 से 21.07.16 तक अंचल के कार्यो का सम्पादन किया गया। उक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। जबकि अभियंता प्रमुख द्वारा NR-154 दिनांक 13.07.16 एवं 201 दिनांक 27.07.16 से भी गेटों के संचालन में हो रही समस्या को ठीक कराने हेतु कैम्प करने का निदेश दिया गया था। अतएव श्री वर्मा का उक्त कथन स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपी द्वारा कहा गया है कि गेटों का संचालन Three Tier System के द्वारा किया जाता है। (प्रथम स्काडा, दूसरा Electrically एवं तीसरा मैनुअली) स्काडा में खराबी रहने पर गेट को Electrically संचालन किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त आपात स्थिति में दैनिक मजदूरों एवं जेनरेटर की व्यवस्था की जाती है। जिसका रख रखाव बराज प्रमंडल द्वारा किया जाता है। विदित हो कि Electrically एवं Manually गेट के संचालन में विलम्ब होने की स्थिति से निपटने के लिये ही गेटों का रख रखाव तथा स्काडा सिस्टम से संचालित रहने के लिये ही PI System Pvt. Ltd. को दायित्व सौंप गया है एवं कार्य कराने का दायित्व याँत्रिक प्रमंडल को थी। अतएव स्काडा से गेट को संचालन कराना श्री वर्मा का दायित्व बनता था। उक्त के आलोक में आरोपी का कहना कि स्काडा में गड़बड़ी होने के कारण गेटों को मैनुअली उठाने में हुए विलम्ब के कारण गेट-33 क्षतिग्रस्त हुआ। पूर्णतः गलत एवं निराधार है स्वीकार योग्य नहीं है एवं इसमें इनका कोई दोष नहीं बनता है स्वीकार योग्य नहीं है। वर्णित तथ्यों के आलोक में विभागीय निदेशों का उल्लंघन करते हुए दायित्वों का ससमय निर्वहन नहीं करने के कारण गेट क्षतिग्रस्त होने जैसे घटित घटना के लिये दोषी पाये गये है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है। (II) आरोप-2 :- जो संवेदक द्वारा स्काडा सिस्टम ठीक नहीं करने के फलस्वरूप विभागीय NR-165 दिनांक 14.07.16 से एकरारनामा के तहत कारवाई करने के दिये गये निदेश के बावजूद संवेदक के विरूद्ध कोई कारवाई नहीं करने तथा न ही स्काडा सिस्टम को ठीक कराने हेतु वैक्ल्पिक व्यवस्था नहीं करने से संबंधित है। अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि विभागीय NR-154 दिनांक 13.07.16 से सभी गेटों को ठीक कराते हुए अनुपालन प्रतिवेदन की माँग की गयी। पुनः NR-165 दिनांक 14.07.16 से संवेदक के विरूद्ध कारवाई करने का निदेश दिया गया। दिनांक 19.07.16 तक सभी गेटों का संचालन स्काडा से नहीं होने की स्थिति में विभागीय NR-201 दिनांक 21.07.16 से असंचालित गेटों को स्काडा से ठीक कराने तथा पुनः संवेदक के विरूद्ध एकरारनामा के तहत कारवाई करने का निदेश दिया गया। इस संदर्भ में आरोपी द्वारा पूर्व बचाव बयान में कहा गया है कि विभागीय निदेश के आलोक में दिनांक 11.07.16 से 15.07.16 तक कैम्प कर सारे गेटों को स्काडा से चालू किया गया। तथा दिनांक 16.07.16 एवं 17.07.16 को माननीय मंत्री महोदय के बैठक में भाग लेने के बाद दिनांक 21.07.16 तक अंचलीय कार्य सम्पादन किया गया। तथा घटित घटना के बाद पत्रांक 824 दिनांक 23.07.16 एवं 828 दिनांक 27.07.16 के द्वारा संवेदक के विरूद्ध दण्डात्मक कारवाई की अनुशंसा की गयी। इस आरोप के संदर्भ में श्री वर्मा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में कोई भी तथ्य उद्धित नहीं दिया गया है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य को दरकिनार कर निदेश देने के बावजूद श्री वर्मा द्वारा न तो बराज पर गये। न ही संवेदक के विरूद्ध गेट क्षतिग्रस्त होने के पूर्व कारवाई नहीं की गयी जो उनके कर्त्तव्यों में लापरवाही एवं निदेश का अवहेलना दर्शाता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है। (III) आरोप-3 :- जो अधीनस्थ/संवेदक पर नियंत्रण नहीं होने के कारण इनकी प्रशासनिक विफलता से संबंधित है। इस आरोप के संदर्भ में श्री वर्मा द्वारा न तो कोई तथ्य उद्धित किया गया है न ही कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है। उपरोक्त कंडिका में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि संवेदक पर इनका कोई नियंत्रण नहीं रहने के कारण घटना के पूर्व सारे गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं हो सका एवं दिनांक 22.07.16 को गेट सं॰-33 क्षतिग्रस्त हो गया। जो इनकी प्रशासनिक विफलता दर्शाता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है। (IV) आरोप-4 :- जो क्षतिग्रस्त गेट सं॰-33 के मरम्मति पर होने वाले व्यय से संबंधित है। इस संदर्भ में श्री वर्मा द्वारा कहा गया है कि गेटों पर पानी का अत्याधिक दबाव होने तथा गेट सं॰-33 पर दो पेड़ फँसे रहने तथा देर तक मैनुअली गेट नहीं उठाये जाने के कारण गेट खराब हो गया था। इससे प्रमाणित होता है कि सहायक अभियंता एवं कर्मियों के सोये हुए रहने के क्रम तथा संचालन की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के पूर्व ही गेट-33 क्षतिग्रस्त हुआ। अतएव वर्णित तथ्यों एवं जिला पदाधिकारी तथा मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर के जाँच प्रतिवेदन से परिलक्षित है कि गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं होने के कारण गेटों का उठाव में विलम्ब हुआ है। एवं गेट में पेड़ फँस जाने के कारण गेट सं॰-33 को मैनुअली उठाने के क्रम में क्षतिग्रस्त हआ है। जबकि क्षेत्रीय असैनिक अभियंता द्वारा लगातार स्काडा सिस्टम को ठीक करने का अनुरोध किया गया है साथ ही विभागीय स्तर से भी निदेश दिया जाता रहा है। इसके बावजूद भी इनके द्वारा दि॰ 15.07.16 के पश्चात दिनांक 22.07.16 तक भी गेटों को ठीक नहीं कराया जाना परिलक्षित होता है एवं गेटों का ससमय उठाव नहीं होने के कारण दिनांक 22.07.16 को गेट क्षतिग्रस्त होना परिलक्षित है। जो इनकी लापरवाही एवं उदासीनता दर्शाता है। अतएव आरोप प्रमाणित होता है।41 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सुभाष कुमार वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) को बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्शोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1883 दिनांक 29.08.2019 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया -

"दस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सुभाष कुमार वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता(याँ0), सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के पत्रांक-0 दिनांक अंकित नहीं से पुनर्विलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है -

श्री वर्मा द्वारा कहा गया है कि साक्ष्य के रूप में उनके द्वारा घटना 21.07.216 का गेट का खैरियत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें गेट सं॰-33 में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। इसके अतिरिक्त अन्य गेटों का भी संचालन हो रहा है।

इसी तरह त्रिस्तरीय जाँच प्रतिवेदन में इन्हें 33 no गेट क्षतिग्रस्त होने के लिये कही से भी दोषी नहीं पाया है ऐसे में इस आधार पर किस कारण दोषी पाया गया है, इसका ठोस आधार नहीं है।

पुनः विभाग द्वारा नियुक्त संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में कही से दोषी नहीं पाया है। विभाग द्वारा नियुक्त संचालन पदाधिकारी याँत्रिक प्रभाग में मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर थे, जिन्होंने अपने स्तर से भी जाँच किया परन्तु कहीं से भी गेट संख्या- 33 के क्षतिग्रस्त होने के लिये दोषी नहीं पाया है।

श्री सुभाष कुमार वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता (याँ0) से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये-

श्री वर्मा को प्रमाणित चारों आरोपों के लिए पेंशन से 10% की कटौती 5 वर्षाें के लिए दण्ड संसूचित किया गया है। प्रश्नगत बराज में गेटों का संचालन स्काडा सिस्टम से नहीं होने के कारण गटाें के उठाव में काफी विलम्ब हुआ है एवं गेट में पेड़ फस जाने के कारण गेट सं॰-33 को मैनुअली उठाने के क्रम में क्षतिग्रस्त हो गया। जबकि क्षेत्रीय असैनिक अभियंता एवं अभियंता प्रमुख द्वारा लगातार स्काडा सिस्टम को ठीक कराने का अनुरोध किया जाता रहा। साथ ही विभागीय स्तर से भी निदेश दिया जाता रहा, इसके बावजूद भी इनके द्वारा दिनांक-22.07.2016 तक सभी गेटों को ठीक नहीं कराया गया एवं गेटों का ससमय उठाव नहीं होने से दिनांक-22.07.2016 को गेट क्षतिग्रस्त हो गया है। श्री वर्मा द्वारा अपने पूर्नविलोकन अर्जी में न तो कोई नया साक्ष्य ही दिया गया है और न ही कोई नया तथ्य ही दिया गया है। इनके द्वारा मात्र कहा गया है कि गेट सं॰-33 में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है एवं अन्य गेट का भी संचालन हो रहा है। उक्त कथन के समर्थन मे कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। अभिलेखों से परिलक्षित है कि दिनांक-22.07. 2016 को गेट सं॰-33 क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसी स्थिति में इनका पुर्नविचार याचिका स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। समीक्षोपरांत श्री वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक), सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-1883 दिनांक 29-08-19 द्वारा संसूचित दण्डादेश को यथावत रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुभाष कुमार वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता (याँ0) के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या-1883 दिनांक 29-08-19 द्वारा संसूचित निम्न दण्डादेश को यथावत रखा जाता है।

"दस प्रतिशत पेंशन की कटौती पाँच वर्षों के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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14 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(मुज0)06-03/2017-1131--श्री कैलु सरदार (आई0डी0-3485) तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान अंचल, मोतिहारी के उनके उक्त अंचल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2008-09 में चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी के 20 मील 41 चेन से 83 मील तक ईंट सोलिंग कार्य के निविदा के अनियमित निरस्तीकरण के कारण रू0 2.69 करोड़ का परिहार्य अतिरिक्त भुगतान सहित अन्य आरोपों के लिए लोक लेखा समिति की मुख्य समिति की बैठक में प्रतिवेदन संख्या-559 की कंडिका 3.2.6 से उत्पन्न अनुशंसा के आलोक में अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना से प्राप्त पत्र के आलोक में मामले की सम्यक समीक्षोपरांत सरकार द्वारा श्री सरदार के विरूद्ध निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-173 दिनांक 19.01.2017 से स्पष्टीकरण पूछा गया। आरोप सं0-क- श्री कैलु सरदार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 में चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी वर्तमान में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी के अन्तर्गत चम्पारण तटबंध के 20 मील 41 चेन से 83 मील तक ईंट सोलिंग कार्य के निविदा के अनियिमत निरस्तीकरण के कारण रू0 2.69 करोड का परिहार्य अतिरिक्त भुगतान हुआ। उक्त कार्य के 4 ग्रुपों में 2 बार निविदा रद्‌द होने के पश्चात मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, मोतिहारी से प्राप्त निदेश के आलोक में उक्त निविदा को 13 ग्रुपों में खंडित करने के कारण उपर वर्णित रू0 2.69 करोड का परिहार्य अतिरिक्त भुगतान हुआ।42 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 आरोप सं0-ख- श्री कैलु सरदार के द्वारा उक्त निविदा को ख्ांडित करने का सक्षम पदाधिकारियों से निदेश प्राप्त किये बिना ही निविदा 13 गु्रपों में खंडित की गई। इस प्रकार विभागीय पत्रांक-1/पीएमसी/629/2013-532 दिनांक 13.06. 2013 जिसमें स्पष्ट रूप से निदेशित है कि किसी परियोजना के लिए निविदा/कोटेशन कितने टुकड़ों में मांगी जाय। इसका निर्धारण वहीं पदाधिकारी करेंगे जो उस पूरे कार्य की निविदा/कोटेशन निष्पादन के लिए सक्षम है।

आरोप सं0-ग-मुख्य अभियंता से प्राप्त निदेश जो नियमसंगत नहीं था। इनके द्वारा इस संबंध में अधीक्षण अभियंता के रूप में मुख्य अभियंता के संज्ञान में नहीं लाया गया। इस प्रकार इनके द्वारा विभागीय निदेशों के अनुपालन में अपने कर्तव्य एवं दायित्वों के प्रति उदासीनता बरतते हुए मुख्य अभियंता को वस्तुस्थिति/विभागीय निदेश से अवगत नहीं कराया गया। श्री सरदार से स्पष्टीकरण का जवाब अप्राप्त रहने के कारण उनके विरूद्ध आरोप पत्र में गठित सभी आरोपों को प्रमाणित मानते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-1470 दिनांक 09.07.18 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सरदार द्वारा समर्पित बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई है :- आरोप सं0-क-आरोप का यह अंश वित्तीय वर्ष 2008-09 में चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी जो वर्तमान में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी के नाम से जाना जाता है, के अधीन चम्पारण तटबंध के 20 मील 41 चेन से 83 मील तक ईंट सोलिंग कार्य के निविदा के अनियमित निरस्तीकरण के कारण रू0 2.69 करोड़ का परिहार्य अतिरिक्त भुगतान होने से संबंधित है। इस क्रम में आरोप पत्र में इस तथ्य का भी उल्लेख है कि चार ग्रुपों में दार बार निविदा रद्‌द होने के पश्चात मुख्य अभियंता, मोतिहारी से प्राप्त निदेश के आलोक में उक्त निविदा को 13 ग्रुपों में विखंडित करने के कारण वर्णित रू0 2.69 करोड का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि ईंट सोलिंग कार्य हेतु चार ग्रुपों में निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-1/2008-09 के माध्यम से दिनांक 27.04.2008 को निविदा आमंत्रण सूचना निर्गत किया गया। प्राप्त निविदाओं के निस्तार हेतु दिनांक 14.07.2008 को सम्पन्न विभागीय निविदा समिति द्वारा पुनः निविदा आमंत्रित करने का निर्णय संसूचित किया गया। उक्त विभागीय निदेश के अनुपालन के कार्यपालक अभियंता, चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी द्वारा निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-2/2008-09 के माध्यम से पुनः निविदा आमंत्रित की गई जो दिनांक 31.07.2008, 01.08.2008 को समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ। उक्त आमंत्रित निविदा के निस्तार हेतु दिनांक 24.11.2008 को सम्पन्न विभागीय निविदा समिति के बैठक में निविदादाताओं के तकनीकी बीड में सफल न होने के कारण सभी निविदाओं को रद्‌द करते हुए पुनः निविदा आमंत्रित करने का निदेश निर्गत किया गया। इस क्रम में तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-3465 दिनांक 28.11. 2008 के माध्यम से अद्योहस्ताक्षरी को सूचित किया गया कि मात्र चार ग्रुपों में निविदा आमंत्रण के कारण निविदाकार तकनीकी बीड में सफल नहीं हो पा रहे हैं। अतः प्रशाखावार निविदा आमंत्रित की जाय जिस पर विभागीय अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निदेश के अनुपालन में पूर्व में चार ग्रुपों में आमंत्रित निविदा को 13 ग्रुपों में विखण्डित करते हुए निविदा आमंत्रित की गई, जिसमें से 6 अद्‌द ग्रुपों पर दिनांक 16.01.2009 को आहूत बैठक में विभागीय निविदा समिति द्वारा निर्णय लिया गया। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में ऐसा माना जा सकता है कि बार-बार निविदा आमंत्रित किये जाने के क्रम में व्यतीत अवधि में कार्य मद के दरों में वृद्धि हुई जिस कारण से रू0 2.69 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ, किन्तु इसे अनियमित भुगतान की श्रेणी में माना जाना न्यायसंगत नहीं होगा।

उपर्युक्त विषयक चम्पारण तटबंध के 20 मील 41 चेन से 83 मील तक ईंट सोलिंग कार्य की निविदा के अनियमित निरस्तीकरण के कारण रू0 2.69 करोड़ का परिहार्य भुगतान के संबंध में अद्योहस्ताक्षरी का बचाव बयान प्रतिवेदन दिनांक 25. 11.2018 भवदीय को समर्पित किया गया था। उक्त बचाव बयान के क्रम में रू0 2.69 करोड़ का परिहार्य भुगतान का विस्तृत उल्लेख निम्नरूपेण किया जाता है।

1. उल्लेखित कार्य का परिमाण विपत्र का कुल राशि रू0 1477.39 लाख था। बार-बार निविदा आमंत्रित किये जाने के क्रम में व्यतीत अवधि में कार्य मदों के दरों में वृद्धि हुई। दर वृद्धि के कारण तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा कार्य का पुनरीक्षित प्राक्कलन राशि रू0 1671.00 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई। दर वृद्धि एवं प्राक्कलन पुनरीक्षित के कारण बढ़ोतरी की राशि रू0 193.61 लाख हुई।

2. उल्लेखित कार्य का 13 (तेरह) गु्रपों में से विभागीय निविदा समिति द्वारा कुल 6 (छः) ग्रुप का एवं तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा कुल 7 (सात) गु्रप का निविदा निष्पादन किया गया। तत्पश्चात मुख्य अभियंता द्वारा विभिन्न ग्रुपों का कार्य निम्नरूपेण आवंटित किया गया जो पुनरीक्षित प्राक्कलित राशि से रू0 95.21 लाख अधिक है।

ग्रुप सं0-1- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-126 दिनांक 24.01.2009 ग्रुप सं0-2- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-127 दिनांक 24.01.2009 ग्रुप सं0-3- अनुसूचित दर से 8% (आठ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-128 दिनांक 24.01.2009 ग्रुप सं0-4- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-79 दिनांक 17.01.2009 ग्रुप सं0-5- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-80 दिनांक 17.01.2009 ग्रुप सं0-6- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-81 दिनांक 17.01.2009 ग्रुप सं0-7- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-82 दिनांक 17.01.2009 ग्रुप सं0-8- अनुसूचित दर से 5% (पाँच प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-130 दिनांक 24.01.2009 ग्रुप सं0-9- अनुसूचित दर से 6% (छः प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-129 दिनांक 24.01.200943 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 ग्रुप सं0-10- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-83 दिनांक 17.01.2009 ग्रुप सं0-11- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-251 दिनांक 09.02.2009 ग्रुप सं0-12- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-131 दिनांक 24.01.2009 ग्रुप सं0-13- अनुसूचित दर से 9% (नौ प्रतिशत) अधिक दर पर पत्रांक-236 दिनांक 05.01.2009

कार्य निष्पादन के पश्चात समेकित रूप से कुल रू0 1745.92 लाख का भुगतान किया गया। इस प्रकार पुनरीक्षित प्राक्कलित राशि से रू0 74.92 लाख का अधिक भुगतान किया गया। समेकित रूप से मूल परिमाण विपत्र की राशि से कुल रू0 193.61लाख रू0 74.92लाख =रू0 268.53 लाख यानि रू0 2.69 करोड़ का अधिक भुगतान हुआ। अतः आरोप से मुक्त किया जाय।

आरोप सं0-ख-आरोप का यह अंश पूर्व में चार ग्रुपों में आमंत्रित निविदा को विखंडित करते हुए 13 ग्रुपों में निविदा आमंत्रण से संबंधित है जिसे विभागीय पत्रांक-1पीएमसी/629/2013-532 दिनांक 13.06.2013 के आलोक में अनियमित माना गया है। इस संबंध में स्पष्ट करना है कि पूर्व के चार ग्रुप के कार्यों को 13 गु्रप में विखंडित करने का निदेश तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-3465 दिनांक 28.11.2008 के माध्यम से दिया गया। उक्त पत्र में लिये गये निर्णय पर विभागीय सहमति प्राप्त होने का भी उल्लेख है। साथ ही उक्त 13 ग्रुपों में से 6 अद्‌द गु्रपों के निविदा पर विभागीय निविदा समिति द्वारा निर्णय लेते हुए कार्यावंटन किया गया। इस तथ्य से भी इसकी पुष्टि होती है कि पूर्व के चार ग्रुप के निविदाओं को विखंडित करते हुए 13 ग्रुपों में निविदा आमंत्रित किये जाने पर विभागीय सहमति प्राप्त थी। अतः आरोप से मुक्त किया जाय।

आरोप सं0-ग-आरोप का यह अंश मुख्य अभियंता, मोतिहारी द्वारा निर्गत निदेश को नियमसंगत नहीं मानने से संबंधित है। मुख्य अभियंता का उक्त निदेश विभागीय पत्रांक-1/पीएमसी/629/2013-532 दिनांक 13.06.2013 के आलोक में सक्षम प्राधिकार द्वारा नियमसंगत नहीं माना गया है जिसमें स्पष्ट रूप से निदेशित है कि किसी परियोजना के लिए निविदा/कोटेशन कितने टुकड़ों में मांगी जाय, इसका निर्धारण वही पदाधिकारी करेंगे जो पूरे कार्य की निविदा/कोटेशन निष्पादन के लिए सक्षम है। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि विभागीय पत्र वर्ष 2013 में निर्गत है, जबकि विषयांकित मामला वित्तीय वर्ष 2008-09 से संबंधित है। अतः इस पत्र में निहित निदेश को प्रसंगाधीन मामले में प्रभावी नहीं माना जा सकता है। इस संदर्भ में कंडिका आरोप अंश-'ख' में पूर्व में भी स्पष्ट किया जा चुका है कि पूर्व में निविदित चार ग्रुप के कार्यों को 13 ग्रुपों में विखंडित किये जाने के निर्णय पर विभागीय सहमति प्राप्त थी। इसी कारण इन 13 ग्रुप के निविदाओं में से 6 अदद गु्रप के निविदाओं पर विभागीय निविदा समिति द्वारा निर्णय लेते हुए कार्यावंटन की कार्रवाई की गई। अतः मुख्य अभियंता से प्राप्त निदेश को नियम संगत न माना जाना न्यायोचित नहीं होगा। इसी कारणवश अद्योहस्ताक्षरी द्वारा मुख्य अभियंता के स्तर से निर्गत निदेश का अनुपालन किया गया जिसे कर्तव्य एवं दायित्व के प्रति उदासीनता की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि -

(i) चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी के अधीन वित्तीय वर्ष 2008-09 में चम्पारण तटबंध पर ईंट सोलिंग कार्य हेतु चार ग्रुपों में निविदा आमंत्रित की गई।

(ii) निविदा आमंत्रण सूचना सं0-1/2008-09 एवं 2/2008-09 द्वारा आमंत्रित निविदाओं में निविदाकार द्वारा तकनीकी बीड में सफल न होने के कारण विभागीय निदेश के अनुपालन में उक्त चार ग्रुपों को 13 ग्रुपों में विखंडित कर दिया गया। इस क्रम में व्यतीत अवधि में कार्य मद के दरों में वृद्धि होना स्वभाविक है। फलतः प्रस्तावित कार्यों पर रू0 2.69 करोड़ राशि का परिहार्य अतिरिक्त भुगतान हुआ जिसके लिए अद्योहस्ताक्षरी को जिम्मेवार माना जाना न्यायसंगत नहीं है। (iii) पूर्व में आमंत्रित चार ग्रुप के कार्याें को 13 ग्रुपों में विखंडित करने का निर्णय विभागीय स्तर पर लिया गया था, जैसा कि तत्कालीन मुख्य अभियंता के पत्रांक-3465 दिनांक 28.11.2009 के अवलोकन से स्वतः स्पष्ट है एवं इसकी पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि उक्त 13 ग्रुप के निविदाओं में से 6 ग्रुप के निविदाओं के निविदाओं पर निर्णय विभागीय निविदा समिति द्वारा ली गई। स्पष्ट है कि यदि चार ग्रुप के निविदाओं को 13 ग्रुपों में विखंडित करने का निर्णय विभागीय स्तर पर नहीं लिया गया होता तो विभागीय निविदा समिति द्वारा 6 ग्रुप के निविदाओं पर निर्णय भी नहीं लिया जाता। साथ ही विषयांकित निविदा प्रक्रिया को निरस्त करने का भी निदेश दिया जाता। अतः आरोप से मुक्त किया जाय। श्री सरदार से प्राप्त जवाब के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-100 दिनांक 29.05.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप निम्न बातें कही गई है - जाँच प्रतिवेदन-क- उपलब्ध अभिलेखों एवं आरोपित पदाधिकारी के लिखित बचाव बयान से वस्तुस्थिति स्पष्ट होती है कि विषयांकित कार्य का निविदा चार ग्रुपों में दिनांक 27.07.2008 को आमंत्रित की गयी थी। चारों ग्रुपों की निविदाओं के परिमाण विपत्र की कुल राशि 14.77 करोड रू0 था। दिनांक 14.04.2008 को सम्पन्न विभागीय निविदा समिति की बैठक में तकनीकी कारणों से निविदा को रद्‌द करने एवं पुनः निविदा आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया। पुनः कार्यपालक अभियंता, चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी के निविदा आमंत्रण सूचना 02-2008-09 द्वारा चार ग्रुपों में दिनांक 23.07.2008 को पुनः निविदा आमंत्रित की गयी। दिनांक 24.11.2008 को सम्पन्न विभागीय निविदा समिति की बैठक में तकनीकी कारणों से सभी निविदाओं को रद्‌द करने एवं पुनः निविदा आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया। तत्पश्चात तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर द्वारा पृष्ठांकित पत्रांक-3465 दिनांक 28.11.2008 से तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान अंचल, मोतिहारी (आरोपित पदाधिकारी) एवं तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, चम्पारण प्रखंड, मोतिहारी को निदेशित किया44 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 गया कि निविदा को प्रशाखावार विखंडित कर निविदा आमंत्रण तुरंत किया जाय। इस संदर्भ में तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर) से वार्ता का भी हवाला दिया गया था। (Annexure 1) तत्पश्चात तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी द्वारा दिनांक 15.12.2008 को 13 ग्रुपों में निविदा आमंत्रित की गयी। (Annexure 2) तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा दिनांक 17.12.2008 को विषयांकित कार्य का पुनरीक्षित प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दी गयी, जिसकी राशि 16.71 करोड़ था। (Annexure 3) पुनरीक्षित प्राक्कलन के आलोक में सभी 13 कार्यों के परिमाण विपत्र की राशि का योग 16.54 करोड रू0 था। 13 ग्रुपों के कार्यों में से 6 अदद ग्रुपों के कार्य मुख्य अभियंता के सक्षमता के अधीन नहीं रहने के कारण विभागीय निविदा समिति के द्वारा दिनांक 16.01.2009 एवं 04.02.2009 को अनुसूचित दर से 9 प्रतिशत अधिक दर पर संवेदक को कार्य आवंटित किया गया। (Annexure 4 & 5) तथा शेष 07 अद्‌द ग्रुपों की निविदा तत्कालीन मुख्य अभियंता के द्वारा अनुसूचित दर से 09 से 05 प्रतिशत अधिक दर पर संवेदक को कार्य आवंटित किया गया। अनुसूचित दर से अधिक राशि पर कार्यों का आवंटन होने के कारण कुल एकरारित राशि 17.67 करोड हो गयी तथा कार्य कराने के पश्चात संवेदक को 13 अदद ग्रुपों के कार्य का कुल भुगतान 17.67 करोड किया गया। उक्त से स्पष्ट है कि मूल परिमाण विपत्र की कुल राशि 14.77 करोड़ रूपया था परन्तु प्राक्कलन के पुनरीक्षण के पश्चात यह राशि बढकर 16.54 करोड हो गयी। चूंकि कार्य आवंटन अनुसूचित दर से अधिक दर पर हुआ था। जिसके कारण संवेदक को सभी ग्रुपों को मिला कर कुल भुगतान 17.46 करोड रू0 किया गया है। (संवेदक के अद्यतन भुगतान 17.46 करोड मूल परिमाण विपत्र की राशि 14.77 करोड = 2.69 करोड) इसी 2.69 करोड की राशि के भुगतान के लिए आरोपित पदाधिकारी को जिम्मेवार माना गया है। इस संदर्भ में महालेखाकार को समर्पित विभागीय स्पष्टीकरण में उक्त तथ्य को स्वीकार किया गया है। (Annexure 6) उपरोक्त वर्णित तथ्यों से परिलक्षित होता है कि प्राक्कलन के अद्यतन अनुसूचित दर पर पुनरीक्षण करने एवं सभी ग्रुपों की निविदाओं का कार्य आवंटन अनुसूचित दर से अधिक दर पर होने के कारण ही 2.69 करोड रूपया का अतिरिक्त व्यय हुआ है। इसके लिए आरोपित पदाधिकारी दोषी प्रतीत नहीं होते है। अतएव आरोप प्रमाणित नहीं होता है। जाँच प्रतिवेदन-ख- तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के पृष्ठांकित पत्रांक-3465 दिनांक 28.11. 2008 (Annexure-1) से आरोपित पदाधिकारी को निविदा को विखंडित कर निविदा आमंत्रण करने का आदेश दिया गया था। तत्कालीन मुख्य अभियंता को अपने आदेश के आलोक में विभाग से घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त करनी चाहिए थी। विभागीय निविदा समिति द्वारा 13 अद्‌द ग्रुपों में से 6 अद्‌द ग्रुपों का कार्य आवंटित किया गया। इससे परिलक्षित होता है कि निविदा को 13 भागों में विखंडित कर निविदा आमंत्रित करने में विभागीय सहमति अन्तरनिहित था। आरोपित पदाधिकारी द्वारा त्तकालीन मुख्य अभियंता का आदेश का अनुपालन किया गया था। अतएव आरोप प्रमाणित नहीं होता है। जाँच प्रतिवेदन-ग- आरोपित पदाधिकारी का यह कथन कि विभागीय पत्र वर्ष 2013 में निर्गत है। जबकि विषयांकित मामला वित्तीय वर्ष 2008-09 से संबंधित है, अतः उक्त पत्र में निहित निदेश को प्रसंगाधीन मामले में प्रभावी नहीं माना जा सकता है, यह स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा तत्कालीन मुख्य अभियंता को निविदा को विखंडित करने के संबंध में विभाग से घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त करने हेतु अनुरोध करना चाहिए था। इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी द्वारा चूक हूई है। अतएव आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1343 दिनांक 04.07.19 द्वारा श्री सरदार से लिखित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की मांग की गई। उक्त के आलोक में श्री सरदार द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 14.10.2019 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्न बातें कही गई हैं :- श्री कैुल सरदार से प्रमाणित आरोप के अंश (ग) के संदर्भ में अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव दिया गया है। जिसका मुख्य अंश है कि उल्लेखित कार्य के परिमाण विपत्र की कुल राशि1477.39 रू॰ की थी, जिसे पुनरीक्षित करते हुए 1671 लाख की स्वीकृति मुख्य अभियंता द्वारा दी गयी थी। उक्त प्राक्कलन के आधार पर 13 ग्रुपों में निविदा का निष्पादन किया गया था, जिसमें 6 ग्रुपों का निष्पादन विभागीय निविदा समिति के स्तर से एवं 7 ग्रुपों का निष्पादन मुख्य अभियंता के स्तर से वर्ष 2009 में किया गया था। यदि सक्षम प्राधिकार द्वारा संबंधित निविदा आमंत्रण सूचना जिसमें विखंडित करके निविदा आमंत्रण की गयी थी, से सहमत नहीं थे तो निविदा का निष्पादन भी उस समय नहीं होना चाहिए था। चूँकि निविदा का निष्पादन भी सक्षम प्राधिकार के स्तर से किया गया था उन्हें ही संबंधित निविदा को विखंडित किये जाने की शक्ति प्राप्त थी। ऐसी परिस्थति में घटनोत्तर स्वीकृति का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। अतः आरोप से मुक्त करने की महत्ती कृपा की जाय। श्री कैलु सरदार सेवानिवृत मुख्य अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

संचालन पदाधिकारी ने निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप के अंश 'ग' को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया है। आरोपित पदाधिकारी का कथन कि विभागीय पत्र वर्ष 2013 में निर्गत है जबकि विषयांकित मामला वित्तीय वर्ष 2008-09 से संबंधित है। अतः उक्त पत्र में निहित निदेश को प्रसंगाधीन मामले में प्रभावी नहीं माना जा सकता है, स्वीकार योग्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा तत्कालीन मुख्य अभियंता को निविदा को विखंडित करने के संबंध में विभाग से घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त करने हेतु अनुरोध करना चाहिए था । इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी द्वारा चूक हुई है।45 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 श्री सरदार द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव में लगभग वही तथ्य उद्धृत किया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। श्री सरदार द्वारा मुख्य रूप से कहा गया है कि यदि सक्षम प्राधिकार द्वारा संबंधित निविदा आमंत्रण सूचना, जिसमें विखंडित करके निविदा आमंत्रित की गयी थी, से सहमत नहीं थे तो निविदा का निष्पादन उस समय नहीं होना चाहिए था। चूँकि निविदा का निष्पादन भी सक्षम प्राधिकार के स्तर से किया गया था उन्हें ही निविदा विखंडित किये जाने की शक्ति प्राप्त थी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि विभागीय नियमानुसार किसी कार्य के निविदा आमंत्रण हेतु ग्रुपों में बाँटने के लिये सक्षम प्राधिकार वही होते है जो पूरे कार्य की राशि के लिये सक्षम प्राधिकार है।प्रस्तुत मामले में विभाग ही ग्रुपों में बाँटने के लिये सक्षम है। इन्हें गु्रप में बाँटकर निविदा आमत्रंण की कारवाई करने के पूर्व विभागीय अनुमति प्राप्त करना चाहिए थी जो इनके द्वारा नहीं किया गया जिसके लिये श्री सरदार दोषी हैं।

समीक्षोपरांत वर्णित तथ्यों के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप संख्या-ग यथा निविदा विखंडित करने के संबंध में सक्षम प्राधिकार से अनुमति प्राप्त नहीं करने का आरोप श्री कैलु सरदार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान अंचल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत मुख्य अभियंता के विरूद्ध प्रमाणित पाया गया एवं उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया।

"पेंशन से 5% (पाँच प्रतिशत) की कटौती एक वर्ष के लिए"। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में प्रस्तावित दण्ड पर विभागीय पत्रांक 633 दिनांक 28.04..2020 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श की माँग की गई।

उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना द्वारा अपने पत्रांक-909 दिनांक 07.08.2020 द्वारा श्री सरदार, तत0 अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध प्रस्तावित दण्ड पर अपनी सहमति प्रदान किया गया। अतएव सरकार द्वारा लिये गये उक्त वर्णित निर्णय के आलोक में श्री कैलु सरदार, सेवानिवृत मुख्य अभियंता, ललिता रेसीडेन्सी, फ्लैट नं0-406, रूपसपुर, नहर मोड़, रूपसपुर, पटना को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। "पेंशन से 5% (पाँच प्रतिशत) की कटौती एक वर्ष के लिए"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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10 सितम्बर 2020

सं0 22/नि॰सि॰(डि॰)-14-01/2014/1126--श्री धीरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे0 7677), अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर के पदस्थापन अवधि में रोहतास (सासाराम) मलई बराज के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-514 दिनांक-24.02.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के अन्तर्गत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- आरोप सं0-01 :- मलई बराज में Finish Rate पर बोल्डर पिचिंग/Stone metal filter को Supply and labour rate में तोड़कर प्राक्कलन (सं0-SCMC-4701-04/2012-13 एवं SCMC-4701-01/2013-14) तैयार करने एवं अग्रसारण हेतु उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.1.0, 6.3.0, 6.6.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-02 :- मलई बराज योजना में Inferior quality के बोल्डर की आपूर्ति लेकर (जिसकी निकट भविष्य में आवश्यकता नहीं है और जिसका ज्यादा हिस्सा Specification के अनुरूप नहीं है) तथा नक्शे के अनुसार Stone Metal की आवश्यकता नहीं होने पर भी संवेदक को रु0 46,45,670.40 का भुगतान किया जाना एवं दोनों एकरारनामा के विरूद्ध कुल मिलाकर रु 1,71,78,746/- के अनुत्पादक व्यय के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.2.0, 6.5.0 एवं 6.6.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-03 :- आपूर्ति लिए गये बोल्डर एवं स्टोन मेटल जाँच की तिथि में बिना लोकेशन डिटेल के अव्यवस्थित रूप में जहाँ-जहाँ स्टैकनुमा उक्त किये हुए थें जिनसे उनकी मापी नहीं ली जा सकती। एकरारनामा के लगभग 03 महीने पूर्व कार्यादेश निर्गत कर लिये गये उक्त आपूर्ति को वैध की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है। इस स्थिति को उत्पन्न करने के लिए एवं काल्पनिक स्टैक की मापी तथा काल्पनिक Void के अनुसार विपत्र तैयार करने और भुगतान करने के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.7 एवं 6.8 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-04 :- प्राक्कलन में Quarrysite का जिक्र नहीं किया गया है। भुगतान के पहले कार्यपालक अभियंता द्वारा खादान से स्टैक प्वाइंट तक की लीड (दूरी) का सत्यापन/जाँच स्वयं या सक्षम प्राधिकार द्वारा कर लेना अनिवार्य था। वास्तविक दूरी एकरारित लीड से काफी कम है। अतएव Excess lead के लिए रु 43,37,260.0 Excess भुगतान (प्राक्कलन में वर्णित Carriage charge गणना के आधार पर) हुआ। उक्त किये गये Extra भुगतान के लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.9.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं0-05 :- बिना विधिवत रूप से सामग्रियों को लेखा मे लिये किसी आपूर्ति मद (Supply Item) का भुगतान किया जाना किसी भी प्रकार से नियमानुकूल नहीं है। इसके लिए उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.11.0 के आलोक में आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।46 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन मे सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-267 दिनांक-21.02.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। आरोप सं0-01 :- मलई बराज योजना के प्राक्कलन मे बोल्डर एवं मेटल कार्यमद का Finished दर का प्रावधान नहीं कर आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान कर प्राक्कलन गठित किये जाने एवं अग्रसारण करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाया गया है। उपलब्ध अभिलेख से विदित होता है कि मलई बराज योजना का पुनरीक्षित प्राक्कलन (सं0-SCMC- 4701-04/2012-13 एवं SCMC-4701-01/2013-14) की तकनीकी स्वीकृति मुख्य अभियंता डिहरी द्वारा क्रमशः दिनांक-11.08.2012 एवं 20.04.2013 को दी गई जिसमें बोल्डर पीचिंग एवं मेटल फिल्टर कार्य मद के लिए आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया गया था। उक्त दोनों प्राक्कलन के गठन एवं अग्रसारण में श्री कुमार सहभागी रहे हैं। श्री कुमार का कहना है कि मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ स्तर से वर्ष 2012 में अनुमोदित प्राक्कलन में आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान रहने से स्पष्ट है कि वर्ष 2012 में आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान होता था। साक्ष्य के रूप में संलग्नित प्राक्कलन में आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया जाना स्पष्ट होता है। श्री कुमार द्वारा संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव-बयान की तरह पीचिंग कार्य में 10% Voids की कटौती किये जाने से संवेदक को अधिक भुगतान होने, Finished दर पर प्रावधान किये जाने के लिए विभागीय निदेश निर्गत नहीं होने, विभागीय अनुसूचित दर मे अलग-अलग प्रावधान रहने, वरीय पदाधिकारी द्वारा असहमत नहीं होने तथा एक ही संवेदक द्वारा आपूर्ति एवं Laying का कार्य मराये जाने से बीच में छोड़े जाने की संभावना नहीं होने को उल्लेखित किया गया है। साथ ही उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी के यह Current Practice में नहीं होने के निष्कर्ष को व्यक्तिपरक होने को प्रतिवेदित किया गया है। उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा कंडिका 6.1.0 में प्रतिवेदित किया गया है कि प्राक्कलन में बोल्डर आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया गया जो Current Practice में नहीं है। साथ ही बोल्डर आपूर्ति की वर्तमान आवश्यकता नहीं होने के बावजूद बोल्डर आपूर्ति लिया गया। चूँकि गाइड बाँध का मूल निर्माण अर्थात E/W प्रारंभ नहीं हुआ है। स्पष्ट है कि श्री कुमार प्राक्कलन गठन एवं कार्य के कार्यान्वयन से संबंधित रहे हैं एवं अलग-अलग मद के प्रावधान का लाभ लेते हुए एकरारनामा होने के पूर्व ही मार्च 2013 में बोल्डर एवं मेटल की आपूर्ति ले ली गई है। जिसे जाँच पदाधिकारी ने अनुत्पादक श्रेणी मे माना है। इस प्रकार संवेदक को तत्काल लाभ पहुँचाने की मंशा से आपूर्ति एवं श्रम मद का अलग-अलग प्रावधान किया जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार आरोप सं0-01 के संदर्भ में श्री कुमार का बचाव-बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-02 ः- प्रस्तुत आरोप Inferior Quality का बोल्ड/आपूर्ति लिये जाने, नक्श के विपरीत रु 46,45,670.00 का मेटल का आपूर्ति लिये जाने एवं दोनों एकरारनामा के विरूद्ध कुल रु 1,71,78,746.00 का अनुत्पादक व्यय किये जाने से संबंधित है। मलई बराज योजना के दांये एवं बांये गाईड बाँध के निर्माण के लिए किये गये एकरारनामा दिनांक-16.03.2013 (SBD-01/12-13 एवं SBD-02/12-13 ) के अनुसार बोल्डर एवं मेटल का आपूर्ति लिया जाना है जिसके तहत जाँच तिथि 07.04.2014 तक रु 1,25,33,076/- का बोल्डर एवं रु 46,45,670/- का मेटल कुल रु 1,71,78,746/- का अपूर्ति आरोपी द्वारा प्राप्त किया गया जो जाँच पदाधिकारी द्वारा स्थलीय जाँच में आपूरित बोल्डर Flatter, Augular Traingular तथा Plate/Wadge Shape पाया गया। श्री कुमार का कहना है कि बोल्डर के विशिष्टि में उँचाई के अतिरिक्त अन्य दो Dimension (यथा चौड़ाई एवं मोटाई) नहीं रहने की स्थिति में Cubical एवं समरूप आकार का नहीं होने का आरोप निराधार है। उड़नदस्ता द्वारा जाँचित बोल्डर के नमूनों की ऊँचाई 9'' से अधिक एवं वजन 40-70Kg पाया गया, जो विशिष्टि के अनुरूप परिलक्षित होता है। परन्तु उड़नदस्ता के स्थलीय जाँच में बोल्डर Flatter Angular पाये जाने से न्यून विशिष्टि का होना परिलक्षित होता हैं अतएव जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उपरोक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। गुणवाा जाँच के लिए कार्यपालक अभियंता से अनुरोध किये जाने एवं शोध प्रमंडल की जाँच में विशिष्टि के अनुरूप पाये जाने को उल्लेखित किया गया है। परन्तु बिना गुणवाा जाँच के ही विपत्र को जाँच करते हुए भुगतान हेतु अग्रसारित किया गया। अतएव उक्त कथन भी स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। रु 46,45,670/- के मेटल आपूर्ति लिये जाने के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि निस्तारित निविदा में बोल्डर के नीचे स्टोन मेटल फिल्टर के आलोक में मेटल की आपूर्ति ली गयी। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 6.5.0 के अनुसार मुख्य अभियंता, डिहरी द्वारा दिनांक- 20.12.2012 को बोल्डर के नीचे G.T Filter के प्रावधान वाले नक्शा को अनुमोदित किया गया है। अर्थात मेटल फिल्टर के लिए मार्च 2013 में आपूर्ति लिये के समय मेटल की आवश्यकता नहीं रह जाती है। अतएव उनका कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त मात्रा में बोल्डर के भंडारण पर किये व्यय को अनुत्पादक व्यय की श्रेणी में नहीं होने को आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है। आपूरित बोल्डर का उपयोग गाईड बाँधों के निर्माण में47 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 किया जाना है, जिसमें एक साल बाद 07.02.2014 को जाँच तिथि तक मिट्टी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है एवं मूल संरचना मलई बराज का निविदा निष्पादित भी नहीं हुआ है एवं आरोपित पदाधिकारी द्वारा एक वर्ष पूर्व मार्च 2013 में बोल्डर की आपूर्ति प्राप्त कर ली गयी। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-03 ः- प्रस्तुत आरोप बिना लोकेशन डिटेल के अव्यवस्थित रूप से जहाँ-तहाँ स्टैकनुमा डम्प किये बोल्डर/मेटल के काल्पनिक स्टैक की मापी एवं काल्पनिक Voids के अनुसार विपत्र तैयार करने एवं भुगतान किये जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि 01.03.2013 से 16.03.2013 के बीच कार्यालय परिसर, नावानगर पथ के दोनों तरफ एवं बराज स्थल पर स्टैक में रखे आपूरित बोल्डर/मेटल की कनीय अभियंता द्वारा ली गयी मापी मापीपुस्त में दर्ज की गयी। एक साल बाद 07.02.2014 को उड़नदस्ता जाँच के दौरान स्टैक अव्यवस्थित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। साथ ही कहना है कि कार्यपालक अभियंता CPWD द्वारा पथ मरम्मति के दौरान बोल्डर को हटाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा दिनांक-07.02.2014 को स्थलीय जाँच में स्टैक मापी योग्य नहीं पाया गया। प्रमंडल द्वारा स्टैकों की स्थिति के अनुकूल भी नहीं पाया गया। साथ ही मापीपुस्त में स्टैक का लोकेशन डिटेल अंकित किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। आरोप सं0-04 :- प्रस्तुत आरोप बोल्डर/मेटल की ढुलाई में खदान से स्टैक प्वाईंट तक लीड के बिना सत्यापन कराये वास्तविक लीड से अधिक लीड के लिए कुल रु 40,37,260/- अधिकाई भुगतान से संबंधित है। उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 6.9.0 में अंकित है कि मापीपुस्त के अनुसार बोल्डर/मेटल की ढुलाई 260 कि0मी0 लीड के आधार पर विपत्र तैयार किया गया। जाँचाधिकारी द्वारा गूगल मैप के आधार पर मानपुर (गया) खदान से आपूर्ति स्थल की दूरी 195 कि0मी0 पाया गया। इस प्रकार अतिरिक्त 65 कि0मी0 लीड के लिए रु 40,37,260/- अधिकाई भुगतान आकलित किया गया है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि गूगल मैप से गणित दूरी Shortest Path का होता है जो पथ की स्थिति नहीं दर्शाता है। जबकि प्राक्कलन में गया खदान से भाया दिनारा-मोहनियाँ-सासाराम-डिहरी-नावानगर मार्ग से 260 कि0मी0 लीड का प्रावधान किया गया है, जो उपलब्ध मार्ग था। साथ ही संवेदक के चालू विपत्र से रु 40.37 लाख की कटौती कर लिये जाने को प्रतिवेदित किया गया है। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-109 दिनांक-08.04.2016 से ढुलाई मद में रु 40.37 लाख कटौती कर लिये जाने की पुष्टि होती है। परन्तु उक्त कार्रवाई उड़नदस्ता द्वारा मामला को प्रकाश में लाने के बाद किया जाना परिलक्षित होता है। साथ ही ढुलाई मद में अधिकाई भुगतान होना दर्शाता है। उड़नदस्ता द्वारा गूगल मैप के आधार पर आकलित 195 कि0मी0 लीड को आरोपित पदाधिकारी द्वारा Shortest Path बताया गया है। विपत्र तैयार करने के पूर्व लीड का सत्यापन कार्यपालक अभियंता/अन्य सक्षम प्राधिकार से करा लेना चाहिए था एवं लीड का प्रावधान Shortest Path (विशेष परिस्थिति छोड़कर) के लिए किया जाना उचित होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं0-05 :- प्रस्तुत आरोप आपूर्ति मद के सामग्रियों को विधिवत रूप से लेखा मे लिये बिना विपत्र अंकित कर भुगतान किये जाने से संबंधित है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बोल्डर/मेटल की आपूर्ति से संबंध्तिा तीन विपत्रों के लिए तीन कनीय अभियंता, जो अन्य अवर प्रमंडल में पदस्थापित थें, से लेखा प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित करने हेतु अनुरोध किया गया एवं लेखा में लिये जाने के बाद ही विपत्र में हस्ताक्षर किया गया। प्रथम एवं द्वितीय चालू विपत्रों पर आरोपित पदाधिकारी द्वारा मार्च 2013 में हस्ताक्षर किया गया है। विपत्र पर आपूरित सामग्री लेखा में लिये जाने का प्रमाण-पत्र अंकित किया जाना परिलक्षित नहीं होता है। जबकि नियमानुकूल प्रमाण-पत्र अंकित किया जाना चाहिए था। आरोपित पदाधिकारी, जैसा कि बयान में अंकित किया है कि अपने पत्रांक-32 दिनांक-29.03.2014 एवं पत्रांक-35 दिनांक-07.04.2014 के माध्यम से संबंधित तीनों कनीय अभियंताओं को निदेश देने हेतु कार्यपालक अभियंता से अनुरोध किया गया है। स्पष्ट है कि विपत्र की जाँच के समय तक आपूरित सामग्री लेखा में नहीं लिया गया है। अतएव लेखा में लिये जाने के बाद विपत्र पर हस्ताक्षर किये जाने का आरोपित पदाधिकारी के कथन की पुष्टि नहीं हो पाती है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित पाया गया है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आरोपित पदाधिकारी का द्वितीय कारण पृच्छा का बयान स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। निष्कर्षः-विवेचना कंडिका 3.4.1 में अंकित तथ्यों, आरोपित पदाधिकारी का बचाव-बयान एवं संलग्नित साक्ष्य उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री धीरेन्द्र कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर का आरोप सं0-01 से 05 तक के संदर्भ में उनका द्वितीय कारण पृच्छा का उार स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है। साथ ही बोल्डर/मेटल ढुलाई मद में Extra लीड के लिए अतिरिक्त भुगतित राशि रु 40.37 लाख की वसूली संवेदक के चालू विपत्र से किये जाने एवं दायें/बायें बाँध के लिए कुल रु 1,71,78,746/- के अनुत्पादक श्रेणी में आपूरित बोल्डर/मेटल का उपयोग संबंधित बाँध में होना आरोपित पदाधिकारी के बयान से स्पष्ट होता है।48 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 समीक्षोपरांत उक्त आरोप 01, 02, 03, 04 एवं 05 को प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया :- 01. कालमान वेतन में तीन वेतन प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति। 02. प्रोन्नति की देय तिथि से दो वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक। उक्त दण्ड निर्णय पर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है तथा अनुमोदनोपरांत उक्त दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

उक्त निर्णीत दण्ड श्री धीरेन्द्र कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर को विभागीय अधिसूचना सं0-2360 दिनांक-12.11.2018 अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। जिसका विभागीय समीक्षोपरांत पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य नहीं रहने के कारण अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। अतएव उक्त निर्णय के आलोक में श्री धीरेन्द्र कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नावानगर द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-2360 दिनांक-12.11.2018 द्वारा अधिरोपित दण्ड को यथावत्‌ रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, इन्दुभूषण प्रसाद, अवर सचिव।

9 सितम्बर 2020

सं0 22/नि0सि0(मोति0)-08-03/2013(अंश-1)(खण्ड-ख)/1112--श्री अम्बिका प्रसाद (आई0डी0-जे 5509), तत्कालीन सहायक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक परियोजना अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1986 दिनांक-09.11.2017 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली नियम 43(बी) के तहत विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया। तकनीकी परीक्षक कोषांग निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया कि स्थानीय सामग्री यथा स्टोन मेटल, स्टोन चिप्स, बालू के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। फलस्वरूप सिर्फ सामग्री ढुलाई मद में 24.65 करोड़ रूपये का अनियमित भुगतान हुआ है। आलोच्य कार्य में की गई अनियमित भुगतान की गणना हेतु एक समिति गठित की गयी। समिति द्वारा कुल 8.9933624 करोड़ रूपये मात्र सामग्री (स्टोन मेटल, स्टोन चिप्स) ढुलाई मद में अनियमित/अधिकाई भुगतान की गणना की गयी है। साथ ही साथ प्रावधान के अनुरूप स्टोन मेटल, स्टोन चिप्स का उपयोग नहीं किये जाने से स्पष्ट स्थापित है कि निम्न विशिष्टि का कार्य कराया गया है। अतएव निम्न विशिष्टि का कार्य कराने एवं अधिकाई भुगतान करने में सहयोग करने के लिए वे दोषी हैं।

मामले की समीक्षा के क्रम में श्री प्रसाद के विरूद्ध निम्नांकित आरोप के लिए पूरक आरोप पत्र गठित किया गया, जिसे विभागीय पत्रांक-552, दिनांक 27.02.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी एवं श्री प्रसाद को उपलब्ध कराया गया :-

प्रश्नगत कार्य में बरती गई अनियमितता के संदर्भ में उनके पत्रांक-शून्य, दिनांक 19.04.17 से प्राप्त स्पष्टीकरण के साथ उपलब्ध कराये गये मापपुस्त संख्या-1456 के पेज संख्या-58-59 में No lead allowed अंकित किया हुआ है। जबकि इसी मामले में श्री अनिल कुमार सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण के साथ संलग्न इसी मापपुस्त के पृष्ठ 58-59 के किसी भी भाग में No lead allowed अंकित नहीं है। तत्पश्चात इस संदर्भ में उक्त मापपुस्त संख्या-1456 के सभी पृष्ठों की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने के साथ ही इसी संदर्भित उनके पत्रांक-188, दिनांक 23.06.12 को भी सत्यापित करने का निदेश कार्यपालक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर को दिया गया। जिसके अनुपालन में कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-308, दिनांक 01.09.17 से उक्त मापपुस्त के पेज संख्या-01-73 तक का सत्यापित प्रति उपलब्ध कराते हुए कहा गया है कि उनका पत्रांक-188, दिनांक 23.06.2012 प्रमंडलीय कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। कार्यपालक अभियंता से प्राप्त मापपुस्त संख्या-1456 के पेज 58 का निचला भाग एवं पेज 59 का उपरी भाग जहाँ उनके द्वारा समर्पित साक्ष्य में No lead allowed अंकित है, फटा हुआ है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि उनके द्वारा उक्त मापपुस्त से छेड़-छाड़ किया गया है। साथ ही विभाग को दिगभ्रमित/गुमराह करने का प्रयास किया जाना परिलक्षित होता है, जो एक गंभीर मामला है। जिसके लिए वे दोषी हैं। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1084 दिनांक-14.12.2018 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोपों (मूल आरोप एवं पूरक आरोप) को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-04 दिनांक-02.01.2019 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री प्रसाद से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। उक्त आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में आरोपों के संदर्भ में लगभग वही तथ्य एवं साक्ष्य दिया गया है, जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। जिसकी समीक्षा सम्यक रूप से संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में किया गया है एवं समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा दोनों आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। नये तथ्य के रूप में मापपुस्त संख्या-1456 के पृष्ठ 58 का निचला हिस्सा49 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 एवं पृष्ठ 59 का उपरी भाग को फाड़ने का प्रश्न है, इस संबंध में कहा गया है कि उक्त अवर प्रमंडल का कार्यभार सौंपने की तारीख 15.07.13 तक उपर्युक्त पृष्ठ फटा हुआ नहीं था। क्योंकि इनसे न तो पत्राचार किया गया, न हीं इनके विरूद्ध एफ0आई0आर0 दर्ज की गयी है। मापपुस्त फाड़ने का कार्य उनके प्रभार देने के बाद किया गया है, क्योंकि उनके प्रतिस्थानी को विपत्र बनाने में लाभ मिला होगा, स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि विभागीय पत्रांक-559, दिनांक 28.02.18 के अनुपालन में कार्यपालक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर द्वारा वास्तविक लीड के बजाय एकरारित लीड से सामग्री ढुलाई का विपत्र की अनुशंसा करने एवं मापपुस्त में बाद की तिथि में छेड़-छाड़ एवं फाड़कर विभाग को गुमराह करने के लिए वाल्मीकिनगर थाना में दिनांक 20.04.2018 को प्राथमिकी दर्ज करने हेतु अनुरोध किया गया है। जिसके आलोक में वाल्मीकिनगर थाना काण्ड संख्या-42/18 दिनांक 10.05.2018 दर्ज किया गया है। उपरोक्त तथ्यों के अतिरिक्त इनके द्वारा अन्य कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है।

संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित दोनों आरोप यथा प्रश्नगत कार्य में एकरारनामा के विपरीत स्थानीय सामग्री का उपयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य कराने एवं सामग्री ढुलाई हेतु वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित लीड से अनियमित भुगतान में सहयोग कर कुल 8.9933624 (आठ करोड़ निन्यानवें लाख तैंतीस हजार छः सौ चौबीस) रूपये मात्र सरकारी राशि की क्षति पहुँचाने तथा प्रश्नगत कार्य के मापपुस्त से छेड़-छाड़/फाड़कर विभाग को दिग्भ्रमित/गुमराह करने का प्रयास करने के आरोप को प्रमाणित पाये जाने के कारण सरकार द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-2628 दिनांक-19.12.2019 द्वारा ''शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक'' का दण्ड अधिरोपित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक-11.02.2020 समर्पित किया गया है। जिसकी समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गये :-

श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में आरोप 01 एवं 02 के संदर्भ में लगभग वही तथ्य दिया गया है जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है अथवा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में दिया गया है। समीक्षोपरांत दोनों आरोपों को प्रमाणित पाये जाने के पश्चात्‌ इनके विरूद्ध दण्ड निर्गत किया गया है। नये तथ्य के रूप में न तो कोई साक्ष्य दिया गया है न ही कोई तथ्य दिया गया है। समीक्षोपरांत उनके द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री अम्बिका प्रसाद (आई0डी0-जे 5509), तत्कालीन सहायक अभियंता, मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर सम्प्रति सेवानिवृत का विभागीय अधिसूचना सं0-2628 दिनांक-19.12.2019 द्वारा संसूचित दण्ड यथा "शत प्रतिशत पेंशन पर स्थायी रोक" के विरूद्ध समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राशिद कलीम अंसारी, उप सचिव।

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सामान्य प्रशासन विभाग

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अधिसूचना

15 दिसम्बर 2020

सं0 7/शक्ति प्र0-13-01/2020 सा0प्र0-11935--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल निम्नांकित अनुसूची के स्तम्भ-2 में उल्लेखित कार्मिक को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भाें में अंकित विवरण के अनुसार दण्डाधिकारी नियुक्त करते हैं और निदेश देते हैं कि उक्त कार्मिक अररिया जिले में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (ऐक्ट 2, 1974) की संगत धारा के अंतर्गत दण्डाधिकारी की प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेंगे।

क्र0 स0 कार्मिक का नाम एवं पद नाम द0प्र0सं0 1973 की धारा, जिसके तहत शक्ति प्रदान की गयी है तिथि/अवधि प्रयोजन दण्डाधिकारी (विशेष कार्यपालक/ कार्यपालक) जिला का नाम
1 2 3 4 5 6 7
1 जिला निर्वाचन पदधिकारी-सह- जिला पदाधिकारी, अररिया के पत्रांक-136 दि0 30.10. 2020 के साथ संलग्न सूची मं अंकित कार्मिक। े द0प्र0सं0 1973 की धारा-20 31.10.2020 से 07.11.2020 तक के लिए बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2020 कार्यपालक दंडाधिकारी अररिया

बिहार-राज्यपाल के आदेश से शालिग्राम पाण्डेय, अवर सचिव (प्र0)।50 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

गृह विभाग (विशेष शाखा)

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अधिसूचना

1 जनवरी 2021

सं0 एफ/नेपाल-09/2020-14--गृह मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा वर्ष 2019 में आयोजित DGP/IGPs के सम्मेलन में अन्य बिन्दूओं के अतिरिक्त निम्नलिखित निर्देश दिया गया हैः-"Need for improved coordination between the State Government/Agencies and Central Government/Agencies on border-related issues, including development and security. Coordination mechanism to be set up for this its first meeting be held early".

इस सम्मेलन मेंं दिये गये उपर्युक्त निर्देश के अनुपालन में सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा तंत्र को सुदृढ एवं विकसित करने हेतु नियमित रूप से अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा निम्न प्रकार सुरक्षा एवं अनुश्रवण समिति का गठन किया जाता है।

1. पुलिस महानिदेषक, बिहार, पटना --- अध्यक्ष 2. अपर निदेषक एस0आई0बी0 पटना --- सदस्य 3. अपर पुलिस महानिदेषक, विषेष शाखा, बिहार, पटना --- सदस्य सचिव 4. अपर पुलिस महानिदेषक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना --- सदस्य 5. अपर पुलिस महानिदेषक, (अभियान), बिहार, पटना --- सदस्य 6. पुलिस महानिरीक्षक (ए0टी0एस0), बिहार, पटना --- सदस्य 7. आयुक्त, कस्टम (निवारक), पटना --- सदस्य 8. महानिरीक्षक, एस0एस0बी0, पटना --- सदस्य 9. पुलिस महानिरीक्षक, विषेष शाखा, बिहार, पटना --- सदस्य सचिव 10. पुलिस महानिरीक्षक, रेल पटना --- सदस्य 11. पुलिस महानिरीक्षक, आर0पी0एफ0, पटना --- सदस्य 12. विषेष सचिव, गृह विभाग, पटना --- सदस्य 13. सहायक आयुक्त विषेष ब्यूरों, पटना --- सदस्य 14. पुलिस महानिरीक्षक, मध निषेध, बिहार, पटना --- सदस्य 15 सहायक निदेषक, राजस्व आसूचना निदेषालय (डी0आर0आई), पटना --- सदस्य 16. पुलिस महानिरीक्षक, एस0एस0बी0, सिलीगुड़ी (पष्चिम बंगाल) --- सदस्य 2. समिति की बैठक प्रत्येक दो माह पर नियमित रूप से होगी। समिति के अध्यक्ष अन्य विषेष आमंत्रित सदस्यों को भी आवष्यकता अनुसार बैठक में षामिल कर सकते हैं।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, भा॰प्र॰से॰, संयुक्त सचिव।

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बिहार विधन सभा सचिवालय

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अध्सिूचनाएं

22 दिसम्बर 2020

सं0 बिविविस-01/2020-672/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि अध्सिूचना संख्या-642, दिनांक-14 दिसम्बर, 2020 के क्रम में श्री विजय कुमार सिंह उपर्फ डब्लू सिंह, सविस क्षेत्रा संख्या-221, नवीनगर को वर्ष 2020-21 ;31 मार्च 2021द्ध के लिए गठित बिहार विरासत विकास समिति की शेष अवध् िके लिए सदस्य मनोनित किया जाता है ।

अध्सिूचना निर्गत होने की तिथि से माननीय सदस्य श्री विजय कुमार सिंह उपर्फ डब्लू सिंह, कृषि उद्योग विकास समिति के सदस्य नहीं रहेंगे ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

राज कुमार सिंह, सचिव।51 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

24 दिसम्बर 2020

सं0 आंसं एवं केसस-01/2020-1792/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि अध्सिूचना संख्या-1746, दिनांक-14 दिसम्बर, 2020 के क्रम में श्री अली अशरपफ सिद्दिकी, सविस, क्षेत्रा संख्या-158, नाथनगर को वर्ष 2020-21 ;31 मार्च, 2021द्ध के लिए गठित आंतरिक संसाध्न एवं केन्द्रीय सहायता समिति की शेष अवध् िके लिए सदस्य मनोनीत किया जाता है ।

अध्सिूचना निर्गत होने की तिथि से माननीय सदस्य श्री अली अशरपफ सिद्दिकी, अल्पसंख्यक कल्याण समिति के सदस्य नहीं रहेंगे ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

राज कुमार सिंह, सचिव।

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31 दिसम्बर 2020

सं0 1स्था-128/2020-2113/विस।--माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आप्त सचिव के दो पदों में से एक पद पर श्री आशुतोष कुमार राय ;बाह्‌य व्यक्तिद्ध को वेतन स्तर-9 में अंके-53,100/-रूपये प्रतिमाह नियत वेतन एवं समय-समय पर स्वीकृत अन्य अनुमान्य भत्ता के साथ दिनांक-25.11.2020 के अपराह्‌न से माननीय अध्यक्ष महोदय के कार्यकाल अथवा उनके प्रसाद पर्यन्त जो भी पहले हो, तक अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाता है ।

अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,

असीम कुमार, उप सचिव।

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(cid:7061)ामीण विकास विभाग --------

अधिसूचना 4 जनवरी 2021 सं0 (cid:7061)ा0वि0–08 (विविध-01/2020—350422---विभागीय अधिसूचना संख्या- 278807 दिनांक 20.07.2016 द्वारा गठित बिहार (cid:7061)ामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन करते (cid:7263)ए कं डिका (ग) मजदूर संगठन से सदस्य में (cid:7088)ीमती कामायनी स्वामी, संस्थापक, "जनजागरण शक्ति संगठन" एवं कं डिका (घ) में प(cid:7377)(cid:7088)ी सिस्टर सुधा वर्गीज, संस्थापक, "नारी गु ंजन" को सदस्य के रूप में नामित किया जाता है ।

2. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।

3. शेष यथावत रहेगा ।

आदेश से,

सी0 पी0 खडूजा, आयुक्त मनरेगा ।

-------- कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ अधिसूचनाएं 29 दिसम्बर 2020

सं0 कारा/स्था0 (चि0) 01-04/2020/9448--राज्य की विभिन्न काराओं में संविदा पर सामान्य चिकित्सक के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु दिनांक-07.08.2020 को प्रकाशित विज्ञापन संख्या-PR-04744(home) 2020-21 के आलोक में महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा Walk-in-interview के माध्यम से संविदा पर सामान्य चिकित्सकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु चयन सूची एवं प्रतीक्षा सूची तैयार की गई थी। चयनित अभ्यर्थियों को विभागीय अधिसूचना संख्या-6157 दिनांक-11.09.2020 द्वारा संविदा आधारित सामान्य चिकित्सक के पद पर नियुक्त किया गया था परंतु इनमें से कई सामान्य चिकित्सकों द्वारा पदस्थापित स्थान पर योगदान नहीं करने के कारण रिक्त रह गए पदों पर अनुमोदित प्रतीक्षा सूची से निम्नांकित सामान्य चिकित्सकों को संविदा पर नियुक्त करते हुए उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-4 में अंकित कारा में पदस्थापित किया जाता है :-

क्र0 चिकित्सक का नाम ग ृह जिला पदस्थापित कारा का नाम
1 2 3 4
1 डॉ0 राजीव रंजन पटना केन्द्रीय कारा, बक्सर
2 डॉ0 कुमार जन्मयजय भोजपुर (आरा) मंडल कारा, सासाराम
3 डॉ0 नितिन कुमार पटना उपकारा, दाउदनगर
4 डॉ0 विनोद कुमार वैशाली मंडल कारा, हाजीपुर
5 डॉ0 प्रमोद कुमार किशनगंज मंडल कारा, किशनगंज
6 डॉ0 अजय कुमार नालन्दा मंडल कारा, शेखपुरा
7 डॉ0 मिथिलेश कुमार मुकुल बॉका मंडल कारा, बॉका
8 डॉ0 अनु कुमारी सारण आदर्श केन्द्रीय कारा, बेऊर पटना
9 डॉ0 आकृति किरण पटना शिविर मंडल कारा, फुलवारीशरीफ
10 डॉ0 पूजा भारती भागलपुर मंडल कारा, मुंगेर
11 डॉ0 मो0 जावेद आलम अरवल मंडल कारा औरंगाबाद
12 डॉ0 विनय कुमार पटना उपकारा, नवगछिया
13 डॉ0 अशोक कुमार नवादा उपकारा, शेरघाटी
14 डॉ0 शहजुल आलम सुपौल मंडल कारा, मधेपुरा
15 डॉ0 दीपक कुमार आर्यन गोपालगंज केन्द्रीय कारा, मोतिहारी
16 डॉ0 धर्मेन्द्र कुमार चौरसिया सीवान मंडल कारा, सीवान
17 डॉ0 अख्तर हुसैन अररिया उपकारा, पटना सिटी
18 डॉ0 हेमन्त कुमार सुमन मुजफ्फरपुर केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर
19 डॉ0 शशि कुमार गोपालगंज मंडल कारा, छपरा
20 डॉ0 कंचन लाल पासवान अरवल उपकारा, दानापुर
21 डॉ0 विभा पटना उपकारा, दलसिंहसराय
22 डॉ0 युवराज आनंद जमुई मंडल कारा, नवादा
23 डॉ0 ब्रजनंदन पासवान समस्तीपुर मंडल कारा, जहानाबाद
24 डॉ0 संजय पासवान सीतामढ़ी मंडल कारा, सीतामढ़ी
52 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

कोई भी चिकित्सक नियमित नियुक्ति का दावा नहीं करेंगे।

3. सभी चिकित्सक अपने पदस्थापन कारा में अपने चिकित्सा संबंधी सभी प्रमाण-पत्रों की छायाप्रति तथा असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाघिकारी (सिविल सर्जन) के स्तर से निर्गत स्वास्थ्य परीक्षण प्रमाण-पत्र के साथ योगदान देना सुनिश्चित करेंगे। 4. सभी संबंधित चिकित्सकों को निदेश है कि वे पदस्थापन कारा में एक सप्ताह के अंदर अपना योगदान देना सुनिश्चित करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्र0)।

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29 दिसम्बर 2020

सं0 कारा/स्था0 (चि0) 01-04/2020-9449--राज्य की विभिन्न काराओं में संविदा पर विशेषज्ञ चिकित्सक के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु दिनांक-07.08.2020 को प्रकाशित विज्ञापन संख्या-PR-04744(home) 2020-21 के आलोक में महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ, बिहार, पटना की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा Walk-in-interview के माध्यम से संविदा पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु चयन सूची एवं प्रतीक्षा सूची तैयार की गई थी। चयनित अभ्यर्थियों को विभागीय अधिसूचना संख्या-6158 दिनांक-11.09.2020 द्वारा संविदा आधारित विशेषज्ञ चिकित्सक के पद पर नियुक्त किया गया था परंतु इनमें से कई विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा पदस्थापित स्थान पर योगदान नहीं करने के कारण रिक्त रह गए पदों पर अनुमोदित प्रतीक्षा सूची से निम्नांकित विशेषज्ञ चिकित्सकों को संविदा पर नियुक्त करते हुए उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-4 में अंकित कारा में पदस्थापित किया जाता है :-

क्र0 चिकित्सक का नाम ग ृह जिला पदस्थापित कारा का नाम
1 2 3 4
1 डॉ0 संजीत कुमार पाण्डेय सीवान मंडल कारा, गोपालगंज
2 डॉ0 मो0 उमर अबदुल्लाह पटना शिविर मंडल कारा, फुलवारीशरीफ
3 डॉ0 अभिनव प्रकाश पटना मंडल कारा, भभुआ
4 डॉ0 नीरज कुमार सिंह सुपौल मंडल कारा, अररिया

कोई भी चिकित्सक नियमित नियुक्ति का दावा नहीं करेंगे।53 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 3. सभी चिकित्सक अपने पदस्थापन कारा में अपने चिकित्सा संबंधी सभी प्रमाण-पत्रों की छायाप्रति तथा असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाघिकारी (सिविल सर्जन) के स्तर से निर्गत स्वास्थ्य परीक्षण प्रमाण-पत्र के साथ योगदान देना सुनिश्चित करेंगे। 4. सभी संबंधित चिकित्सकों को निदेश है कि वे पदस्थापन कारा में एक सप्ताह के अंदर अपना योगदान देना सुनिश्चित करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्र0)।

------ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचनाएं 22 दिसम्बर 2020

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3360/प॰व॰--श्री आलोक कुमार, भा॰व॰से॰, (BHः2007), जिनकी सेवा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार को सौंपी गयी है एवं सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में हैं, को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-13 ए) में प्रोफार्मा प्रोन्नति दी जाती है।

इन्हें प्रोन्नति का लाभ दिनांक-31.12.2020 के पश्चात इनसे ठीक कनीय को इस कोटि के समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा।

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3361/प॰व॰--श्री एस. सुधाकर, भा॰व॰से॰, (BHः2007), वन प्रमंडल पदाधिकारी, भागलपुर को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-13 ए) में प्रोफार्मा प्रोन्नति दी जाती है।

इन्हें प्रोन्नति का लाभ दिनांक-31.12.2020 के पश्चात समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा।

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3362/प॰व॰--श्री सुधीर कुमार कर्ण, भा॰व॰से॰, (BHः2007), वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-13 ए) में प्रोफार्मा प्रोन्नति दी जाती है।

इन्हें प्रोन्नति का लाभ दिनांक 31.12.2020 के पश्चात समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

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22 दिसम्बर 2020

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3363/प॰व॰--श्री नेषामणि के., भा॰व॰से॰, (BHः2008), वन प्रमंडल पदाधिकारी, नालंदा को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक-01.01.2021 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3364/प॰व॰--श्री अमित कुमार, भा॰व॰से॰, (BHः2008), निदेषक, संजय गाँधी जैविक उद्यान, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक-01.01.2021 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3365/प॰व॰--श्री संजय कुमार सिन्हा, भा॰व॰से॰, (BHः2008), वन प्रमंडल पदाधिकारी, बेगूसराय को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक-01.01.2021 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3366/प॰व॰--श्री संजय प्रकाष, भा॰व॰से॰, (BHः2008), वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन प्रवर कोटि (वेतन स्तर-13) में दिनांक-01.01.2021 के प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।54 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

14 अक्तूबर 2020

सं0 2/बि०व०से०(स्था०)-13/2006-2947/प०व०ज॰प॰--श्री राधाकांत कुमार, बि०व०से०, उप वन संरक्षक, कार्यालय-क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, पटना द्वारा स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आलोक में दिनांक-04.11.2019 से 21.11.2019 (02.11.2019 एवं 03.11.2019, Prefix) तक कुल-18 दिनों तक उपभोग किये गये अवकाश को बिहार सेवा संहिता के नियम-232 एवं नियम-234 में अंकित प्रावधानों के तहत कुल-36 दिनों के अर्द्धवैतनिक अवकाश के समतुल्य 18 (अठारह) दिनोंं के रूपातंरित अवकाश की स्वी—ति तथा इस निमित राज्य से बाहर इलाज कराने हेतु घटनोत्तर स्वी—ति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

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30 दिसम्बर 2020

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3437/प॰व॰--डॉ. गोपाल सिंह, भा॰व॰से॰, (BH:03), वन संरक्षक, पटना अंचल, पटना को मुख्य वन संरक्षक कोटि में प्रोन्नति के फलस्वरूप क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, पटना के पद पर दिनांक 01.01.2021 के प्रभाव से अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

डॉ. गोपाल सिंह, भा॰व॰से॰, वन संरक्षक, पटना अंचल, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेगें। सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3438/प॰व॰--श्री एस. चन्द्रषेखर, भा॰व॰से॰, (BH:03), सदस्य सचिव, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, पटना को मुख्य वन संरक्षक कोटि में प्रोन्नति के फलस्वरूप उनके द्वारा वर्त्तमान धारित पद को मुख्य वन संरक्षक कोटि में दिनांक 01.01.2021 के प्रभाव से उत्क्रमित करते हुए उन्हें सदस्य सचिव, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, पटना के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री एस. चन्द्रषेखर, भा.व.से. के पदस्थापन अवधि तक सदस्य सचिव, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, पटना के पद को मुख्य वन संरक्षक कोटि के समकक्ष घोषित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3439/प॰व॰--श्री एस. सुधाकर, भा॰व॰से॰, (BH:07), वन प्रमंडल पदाधिकारी, भागलपुर को वन संरक्षक कोटि में प्रोन्नति के फलस्वरूप वन संरक्षक, गया के पद पर दिनांक-01.01.2021 के प्रभाव से अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3440/प॰व॰--श्री सुधीर कुमार कर्ण, भा॰व॰से॰, (BH:07), वन प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत वन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को वन संरक्षक कोटि में प्रोन्नति के फलस्वरूप वन संरक्षक, सीवान के पद पर दिनांक-01.01.2021 के प्रभाव से अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

श्री सुधीर कुमार कर्ण, भा॰व॰से॰, वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर अंचल, मुजफ्फरपुर के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेगें। सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3441/प॰व॰--श्री संजय प्रकाश, भा॰व॰से॰, (BH:08), वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद वन प्रमंडल, औरंगाबाद को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत वन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3442/प॰व॰--श्री सत्यजीत कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:10), वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई वन प्रमंडल, जमुई को स्थानांतरित करते हुए निदेषक, संजय गाँधी जैविक उद्यान, पटना के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

निदेषक, संजय गाँधी जैविक उद्यान, पटना के पद पर वर्त्तमान में पदस्थापित पदाधिकारी के केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति हेतु विरमित होने के पश्चात श्री सत्यजीत कुमार, भा॰व॰से॰ उक्त पद का प्रभार ग्रहण करेगें।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3443/प॰व॰--श्री नीरज नारायण, भा॰व॰से॰, (BH:11), वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुंगेर वन प्रमंडल, मुंगेर को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी-सह-उप निदेषक, वाल्मिकी व्याघ्र आरक्ष, प्रमंडल-2, बेतिया के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3444/प॰व॰--श्री गौरव ओझा, भा॰व॰से॰, (BH:13), वन प्रमंडल पदाधिकारी-सह-उप निदेषक, वाल्मिकी व्याघ्र आरक्ष, प्रमंडल-2, बेतिया को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुंगेर वन प्रमंडल, मुंगेर के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3445/प॰व॰--श्री भरत चिन्तपल्लि, भा॰व॰से॰, (BH:18), संलग्न पदाधिकारी, जमुई वन प्रमंडल, जमुई को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, भागलपुर वन प्रमंडल, भागलपुर के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019 3446 /प॰व॰--श्री पियुश वर्णवाल, भा॰व॰से॰, (BH:18), संलग्न पदाधिकारी, मुंगेर वन प्रमंडल, मुंगेर को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, जमुई वन प्रमंडल, जमुई के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019 3447 /प॰व॰--श्री तेजस जायसवाल, भा॰व॰से॰, (BH:18), संलग्न पदाधिकारी, रोहतास वन प्रमंडल, सासाराम को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, औरंगाबाद वन प्रमंडल, औरंगाबाद के पद पर अगले आदेष तक पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।55 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

22 दिसम्बर 2020

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3358/प॰व॰--डॉ. गोपाल सिंह, भा॰व॰से॰, (BHः2003), वन संरक्षक, पटना अंचल, पटना, को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-14) में प्रोन्नति दी जाती है। इन्हें प्रोन्नति का लाभ दिनांक-31.12.2020 के पश्चात समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा।

सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-3359/प॰व॰--श्री एस. चन्द्रषेखर, भा॰व॰से॰, (BHः2003), सदस्य सचिव, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, पटना, को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेषों के अधीन मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-14) में प्रोन्नति दी जाती है।

इन्हें प्रोन्नति का लाभ दिनांक-31.12.2020 के पश्चात समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

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गन्ना उद्योग विभाग

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अधिसूचना

17 दिसम्बर 2020

सं॰ 01/स्था॰राज॰-120/2015-1327--गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना के अंतर्गत कार्यरत बिहार कृषि सेवा एवं बिहार ईख सेवा के निम्नांकित पदाधिकारियों को उनके नाम के सामने कॉलम-5 में अंकित कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार अगले आदेष तक दिया जाता हैंः-

क्रमांक पदाधिकारी का नाम ग ृह जिला पदस्थापन हेतु पद का नाम अतिरिक्त प्रभार का पद
1 2 3 4 5
01 श्री ओंकार नाथ सिंह आजमगढ (यू॰पी॰) संयुक्त निदेषक, ईख विकास मुख्यालय (अपने वेतनमान में। 1.उप निदेषक, ईख विकास, मोतिहारी। 2. सहायक निदे े शक, ईख विकास, मुुजफ्फरपुुर। 3. सहायक निदे े शक, ईख विकास, दरभंगा। 4. सहायक निदे शक, ईख विकास, सीतामढ़ी। े
02 श्री रमेष प्रसाद राउत दुमका (झारखंड) उप निदेषक, ईख विकास, पटना। 1. उप निदेषक, ईख विकास, पूसा समस्तीपुर। 2. सहायक निदेषक, ईख विकास, मुख्यालय। 3. सहायक निदेषक, ईख विकास, पटना। 4. सहायक निदेषक, ईख विकास, भोजपुर (आरा)। 5. सहायक निदेषक, ईख विकास, गया। 6. सहायक निदेषक, ईख विकास, जमूई। 7. सहायक निदेषक, ईख विकास, समस्तीपुर। 8. सहायक निदेषक, ईख विकास, भागलपुर।
03 श्री राम गोविंद सिंह रोहतास (बिहार) सहायक निदेषक, ईख विकास, गोपालगंज। 1. सहायक निदेषक, ईख विकास, पूर्णिया। 2 सहायक निदेषक, ईख विकास, सहरसा। 3 सहायक निदेषक, ईख विकास, मोतिहारी। 4 सहायक निदेषक, ईख विकास, बेतिया। 5 सहायक निदेषक, ईख विकास, बगहा। 6 सहायक निदेषक, ईख विकास, सिवान।
04 श्री जय प्रकाष नारायण सिंह बोकारो (झारखंड) ईख पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर। 1. संयुक्त ईखायुक्त (मु॰)। 2. सहायक ईखायुक्त, उत्तर बिहार, मुजफ्फरपुर। 3. विषेष ईख पदाधिकारी, गोपालगंज। 4. ईख पदाधिकारी, गोपालगंज।
05 श्री वेदव्रत कुमार पटना (बिहार) ईख पदाधिकारी, समस्तीपुर। 1. विषेष ईख पदाधिकारी, पटना। 2. ईख पदाधिकारी, बेतिया अंचल बेतिया। 3. ईख पदाधिकारी, रामनगर अंचल बेतिया।
06 श्री रेमन्त झा मधुबनी (बिहार) ईख पदाधिकारी, लहेरियासराय, दरभंगा। 1. ईख पदाधिकारी, मोतिहारी। 2. ईख पदाधिकारी, पूर्णियाँ। 3. ईख पदाधिकारी, सिवान।
56 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

2. इस संबंध मे ंपूर्व में निर्गत अधिसूचना इस हद तक संषोधित समझें जायेगेंं।

3. यह आदेष तुरंत प्रभावी होगा। 4. प्रस्ताव में माननीय मंत्री, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, नरेष कुमार, अवर सचिव।

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

31 दिसम्बर 2020

सं0 कौन/भी-106/2018-236/सी--श्री विनय कुमार ठाकुर, राज्य कर सहायक आयुक्त (अन्वेषण ब्यूरो), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध बेतिया अंचल, बेतिया के पदस्थापन काल में सर्वश्री केसान बिजनेस हाउस द्वारा कतिपय आरोप लगाये गये। श्री ठाकुर के विरूद्ध लगाये गये आरोपों की जाँच राज्य कर अपर आयुक्त (प्रषासन), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से कराया गया।

राज्य कर अपर आयुक्त (प्रषासन), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरान्त श्री ठाकुर से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री ठाकुर से प्राप्त स्पष्टीकरण पर राज्य कर अपर आयुक्त (प्रषासन), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से मंतव्य की मांग की गयी।

राज्य कर अपर आयुक्त (प्रषासन), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से मंतव्य प्राप्त होने के उपरान्त श्री ठाकुर के विरूद्ध आरोप गठित करते हुए लिखित बचाव अभिकथन की मांग की गयी। जिसके आलोक में श्री ठाकुर द्वारा बचाव अभिकथन समर्पित किया गया। बचाव अभिकथन के सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त श्री विनय कुमार ठाकुर, राज्य कर सहायक आयुक्त (अन्वेषण ब्यूरो), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर, तत्कालीन वाणिज्य-कर पदाधिकारी, बेतिया अंचल, बेतिया को 'चेतावनी' दिये जाने का निर्णय लिया जाता है, जिसकी प्रविष्टि इनके चारित्री वर्ष 2017-18 में की जायेगी।

प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अरूण कुमार मिश्रा, विषेष सचिव।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

22 जुलाई 2020

सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-35/2020-4446 (s)--पथ प्रमंडल, सहरसा के कार्यों का दिनांक- 05.06.2020 को समीक्षा की गयी जिसमें यह पाया गया कि पथ प्रमंडल, सहरसा अन्तर्गत एन॰एच॰- 107 बरियाही बाजार से सहरसा बायपास के कार्यों की प्रगति में कमी पायी गयी एवं 400 मीटर की दूरी में Lock Down के तुरन्त पहले WMM कार्य Dry किये बिना DBM का कार्य कर दिया गया, जिसके कारण कार्य Fail हो गया। इस हेतु विभागीय पत्रांक- 3375 दिनांक- 08.06.2020 द्वारा श्री श्याम सुन्दर दास, सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, सहरसा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री दास के पत्रांक- 405 दिनांक- 10.06.2020 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया।

2. श्री दास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में वर्णित आरोपों के संबंध में निम्न तथ्य अंकित किया गया हैः- (i) आलोच्य कार्य प्रारम्भ करने की तिथि 11.07.2019 एवं कार्य समाप्ति तिथि 10.07.2020 होने का उल्लेख करते हुए यह अंकित किया गया है कि संवेदक द्वारा 2.70 कि॰मी॰ PCC कार्य के विरूद्ध अब तक 0.770 कि॰मी॰ एवं 8.280 कि॰मी॰ बिटुमिनस कार्य के विरूद्ध अब तक 3.40 कि॰मी॰ में कार्य कराया जा चुका है। कार्य के धीमी प्रगति के बिन्दु पर यह अंकित किया गया है कि बार-बार विभाग तथा उनके द्वारा संवेदक पर काफी दबाव दिया जाता रहा है और संवेदक द्वारा बार-बार यह कहा जा रहा है कि समय-सीमा के अन्दर कार्य पूर्ण कर दिया जायेगा।

(ii) पथ के 400 मी॰ में लॉकडाउन के पूर्व किया गया कार्य, जो BC से शिल्ड नहीं किया जा सका था एवं कार्य करने के उपरांत वर्षा भी हो गयी, जिससे कहीं-कहीं Cracks हो गया। भवष्यि में इससे अधिक भाग क्षतिग्रस्त न हो, संवेदक से कहकर DBM का Fail Portion हटा दिया गया तथा पुनः कार्य गुणवत्ता के साथ कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कराया गया कार्य सही है एवं पथ की स्थिति अच्छी है। 3. विषयांकित मामले में श्री दास के स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि इस सम्पूर्ण योजना का कार्य 10 जून 2020 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, किन्तु उस अनुपात में प्रगति नहीं हुयी है। श्री दास द्वारा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यथोचित प्रयास नहीं किया गया है तथा उनके द्वारा कार्य में बरती गई लापरवाही प्रमाणित है। श्री दास ने भी धीमी प्रगति को एवं DBM Fail करना स्वीकार किया है।57 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के क्रम में श्री दास के पत्रांक- 405 दिनांक- 10.06.2020 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के उपनियम-v के तहत निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता हैः- (i) ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' । 4. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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10 अगस्त 2020

सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-55/2020-4600 (s)--पथ प्रमंडल, गोपालगंज अंतर्गत OPRMC Package No.- 36 के तहत्‌ मीरगंज-भागी पट्टी-सामौर पथ में पायी गयी त्रुटि/अनियमितताओं के संबंध में कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3, पथ निर्माण विभाग, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-9648 (एस॰) दिनांक 19.12.2018 द्वारा श्री भगवान राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, गोपालगंज से आलोच्य पथ में निम्नांकित त्रुटि के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गयीः-

(i) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 14 में कराये गये SDBC Gr- II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की मात्रा टॉलरेन्स लिमिट 4.19% से कम 3.503% पाया गया।

2. पूछे गये स्पष्टीकरण के आलोक में श्री भगवान राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति वरीय परियोजना अभियंता, कार्य प्रमंडल, कटिहार, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के पत्रांक- 449 (अनु॰) दिनांक-22.04.2019 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया। मामला तकनीकी प्रकृति के होने के कारण इसकी तकनीकी समीक्षा करायी गयी।

3. वर्णित पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में श्री राम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में मुख्य रूप से आलोच्य कार्य सम्पन्न होने के पश्चात्‌ जाँच किये जाने, सम्पादित बिटुमिनस परत पर यातायात चालू हो जाने के पश्चात्‌ बिटुमिन में स्वभाविक रूप से कमी होने, अलकतरा की मात्रा 3.503% होने पर पथ में Pots Develop होने जैसे संभावनाओं पर आधारित तथ्य/तर्क का उल्लेख किया गया है, जो स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि श्री राम द्वारा जिन तकनीकी/व्यवहारिक कारणों के संदर्भ में अलकतरा में कमी होने का तर्क दिया गया है, वस्तुतः इन्हीं कारणों से विभागीय मार्गदर्शिकानुसार टोलरेन्स लिमिट अनुमान्य किया गया है, परन्तु आलोच्य मामले में पायी गयी अलकतरा की औसत मात्रा टोलरेन्स लिमिट से भी कम है।

4. श्री राम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में ऐसा कोई ठोस एवं खंडनयुक्त तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिस पर युक्तिसंगत ढ़ग से विचार किया जा सके, जिसके फलस्वरूप उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई अवसर प्रतीत नहीं होता है।

तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के क्रम में श्री राम के पत्रांक- 449 (अनु॰) दिनांक- 22.04.2019 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के उपनियम-v के तहत्‌ निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता हैः-

''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' । 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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10 अगस्त 2020

सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-55/2020-4602 (s)--पथ प्रमंडल, गोपालगंज अंतर्गत OPRMC Package No.- 36 के तहत्‌ मीरगंज-भागी पट्टी-सामौर पथ में पायी गयी त्रुटि/अनियमितताओं के संबंध में कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या- 3, पथ निर्माण विभाग, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक- 233 (एस॰) दिनांक 13.01.2020 द्वारा श्री प्रभुनाथ, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ अवर प्रमंडल संख्या-1, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर से आलोच्य पथ में निम्नांकित त्रुटि के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गयीः-

(i) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 14 में कराये गये SDBC Gr- II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की मात्रा टॉलरेन्स लिमिट 4.19% से कम 3.503% पाया गया।

2. पूछे गये स्पष्टीकरण के आलोक में श्री प्रभुनाथ, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ अवर प्रमंडल संख्या-1, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर के पत्रांक- शून्य दिनांक- 20.02.2020 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया। मामला तकनीकी प्रकृति के होने के कारण इसकी तकनीकी समीक्षा करायी गयी।58 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 3. वर्णित पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में श्री प्रभुनाथ द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में मुख्य रूप से आलोच्य कार्य सम्पन्न होने के पश्चात्‌ जाँच किये जाने, सम्पादित बिटुमिनस परत पर यातायात चालू हो जाने के पश्चात्‌ बिटुमिन में स्वभाविक रूप से कमी होने, अलकतरा की मात्रा 3.503% होने पर पथ में Pots Develop होने जैसे संभावनाओं पर आधारित तथ्य/तर्क का उल्लेख किया गया है, जो स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि श्री राम द्वारा जिन तकनीकी/व्यवहारिक कारणों के संदर्भ में अलकतरा में कमी होने का तर्क दिया गया है, वस्तुतः इन्हीं कारणों से विभागीय मार्गदर्शिकानुसार टोलरेन्स लिमिट अनुमान्य किया गया है, परन्तु आलोच्य मामले में पायी गयी अलकतरा की औसत मात्रा टोलरेन्स लिमिट से भी कम है।

4. श्री प्रभुनाथ द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में ऐसा कोई ठोस एवं खंडनयुक्त तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिस पर युक्तिसंगत ढ़ग से विचार किया जा सके, जिसके फलस्वरूप उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई अवसर प्रतीत नहीं होता है।

तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के क्रम में श्री प्रभुनाथ के पत्रांक- शून्य दिनांक- 20.02.2020 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के उपनियम –(i)के तहत निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता है।

(i) ''निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15)'' । 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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9 सितम्बर 2020

सं0 निग/सारा-6 द॰बि॰ (ग्रा॰) आरोप-92/2019-5182 (s)--ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-2382 अनु॰, दिनांक-21.06.2013 द्वारा श्री ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, तदेन कनीय अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, सासाराम सम्प्रतिः सेवानिवृत सहायक अभियंता द्वारा कार्य प्रमंडल-2, सासाराम के पदस्थापन काल में मौजा भोखरी से गारा चौबे नगर, पो॰-बिसाडिहरी, थाना-करहगर जिला-सासाराम में तदेन माननीय भवन मंत्री श्री छेदी पासवान के द्वारा आवंटित राशि 5,00,000/- (पाँच लाख) रूपये के दुरूपयोग के संबंध में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रपत्र ''क'' एवं निगरानी प्रमंडल संख्या-01, पटना द्वारा किये गये जाँच प्रतिवेदन में निम्नांकित अनियमितता प्रतिवेदित करते हुए कार्रवाई का अनुरोध किया गयाः-

(1) पथ में 50 प्रतिशत Stone metal Gr I पत्थर Oversize पाया गया। (2) पथ में जहाँ-तहाँ Stone metal Gr I कार्य उखड़ा हुआ पाया गया। (3) पथ मे Sign Board नहीं पाया गया।

पुनः ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-563, दिनांक-05.02.2016 द्वारा उक्त मामले में श्री विद्यासागर से वित्तीय क्षति के रूप में आकलित की गयी राशि 4748/-(चार हजार सात सौ अड़तालीस) की वसूली की कार्रवाई का अनुरोध किया गया ।

2. उपरोक्त आरोपों के लिए श्री विद्यासागर, से विभागीय पत्रांक-689(एस) अनु॰, दिनांक 28.01.2020 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139(C)के तहत ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा वित्तीय क्षति के रूप में आकलित की गयी राशि 4748/-(चार हजार सात सौ अड़तालीस) की वसूली उनके पेंशन से किये जाने हेतु कारण पृच्छा की गयी। श्री विद्यासागर के द्वारा उनके पत्रांक-शून्य, दिनांक-14.02.2020 द्वारा कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया।

3. श्री विद्यासागर के द्वारा अपने कारण पृच्छा उत्तर के तहत मुख्य रूप से निम्नांकित तथ्य अंकित किया गया है :- (i) आरोप संख्या-01 के संबंध में अंकित किया गया है कि आलोच्य सड़क योजना में पूर्व में भी काम किया गया था, जो पूरी तरह टूट-फूट गया था। पत्थरों को चुनने का काम पहले करना पड़ा। पिकिंग आउट करने में 2647.50 घनफीट पत्थर प्राप्त हुए, जो ओवर साईज थे। इन पत्थरों का भी उपयोग योजना के कार्यान्वयन में किया गया, ताकि मैटिरियल खर्च कम पड़े। ऐसा करने का प्रावधान भी है। कुल प्रयुक्त स्टोन मैटेरियल की मात्रा का पिकिंग आउट से प्राप्त स्टोन मेटल 30 प्रतिशत है, जिसे जाँच पदाधिकारी ने अनुमान से 50 प्रतिशत लिखा है। उनके द्वारा कार्य के लिए ग्रेड-1 मेटल स्टोन ही क्रय कर लगाया गया, जो ओवर साईज नहीं था।

(ii) आरोप संख्या-02 के संबंध में अंकित किया गया है कि योजना कार्य बीच में रोक दिये जाने के कारण दिनांक-15.07.2009 को कार्य समाप्त मान लिय गया। जाँच दिनांक-30.04.2011 को किया गया। ग्रेड-1 स्टोन मेटल सड़क पर देहाती क्षेत्र में केजव्हील युक्त ट्रैक्टर जैसी गाड़ियाँ चलती रहती है। संभव है कुछ जगहों पर स्टोन मेटल ग्रेड-1 कार्य बाद में में उखड़ गया हो। 21 महीने बाद जाँच की गई थी, इस बीच कभी रख-रखाव का भी कार्य नहीं हुआ हो। इसके अतिरिक्त, लोकल बालू 4 इंच बिछाने के बाद स्टोन मेटल ग्रेड-1 बिछाया गया था। कुछ जगहों पर पत्थर उखड़ने का कारण यह भी रहा होगा।

(iii) आरोप संख्या-03 के संबंध में अंकित किया गया है कि जब तक साइन बोर्ड एवं किये गये कार्य का संयुक्त फोटो जमा नहीं किया जाता है तब तक जिला प्रशासन द्वारा योजना में द्वितीय किस्त उपलब्ध नहीं करायी जाती है। इस59 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 योजना में उन्हें द्वितीय किस्त उपलब्ध करायी गयी थी जो इस बात का प्रमाण है कि साईन बोर्ड उनके द्वारा अवश्य लगाया गया था। 4. श्री ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, तदेन कनीय अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, सासाराम सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक-31.01.2019) सहायक अभियंता के द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री विद्यासागर के कारण पृच्छा उत्तर की कंडिका-1 के तहत परस्पर विरोधाभाषी तथ्य अंकित किये जाने एवं बचाव में दिये गये तर्क व्यर्थ की संभावनाओं पर आधारित होने तथा उसके समर्थन में कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किये जाने की स्थिति में स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा प्रश्नगत मामले में मुख्य रूप से आरोपी से वित्तीय क्षति की आकलित राशि की वसूली किये जाने पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। अनुमोदित प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-2187(एस) अनु॰, दिनांक-18.03.2020 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग पटना से परामर्श की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग पटना के पत्रांक-182, दिनांक-18.05.2020 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139 के तहत विनिश्चित दंड पर आयोग का परामर्श नियमानुकूल एवं अपेक्षित नहीं होने की स्थिति में विभागीय दंड प्रस्ताव को आयोग के परामर्श के बिना वापस कर दिया गया।

ऐसी स्थिति में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री विद्यासागर के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-139(C) के तहत वित्तीय क्षति के रूप में आकलित राशि रू॰ की वसूली उनके सेवांत लाभों से किये जाने का निर्णय लिया जाता है ।

प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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22 जुलाई 2020

सं0 निग/सारा-4(पथ)-आरोप-35/2020-4444 (s)--पथ प्रमंडल, बेतिया के कार्यों का दिनांक- 05.06.2020 को समीक्षा की गई जिसमें यह पाया गया कि बानुछापर ऑयल डिपो से छावनी चौक पथ में दो नम्बर कल्भर्ट के पास श्री मनोज राय के घर के आगे नाले पर बनाया गया स्लैब टूट कर गिर गया है तथा गुणवत्ता सही नहीं पायी गई है। इनके द्वारा इस संदर्भ में स्वयं बैठक में अपनी ओर से कोई सूचना नहीं दी गई तथा पूछे जाने पर इनके द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर भी नहीं दिया जा सका। इस हेतु विभागीय पत्रांक- 3628 (एस॰) दिनांक- 12.06.2020 द्वारा श्री अक्षय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-2, पथ प्रमंडल, बेतिया सम्प्रति सहायक अभियंता बि॰रा॰पु॰नि॰नि॰लि॰, पटना से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार के पत्रांक- शून्य दिनांक 15.06.2020 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया।

2. श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में वर्णित आरोपों के संबंध में निम्न तथ्य अंकित किया गया हैः- (i) आलोच्य कार्य के पूर्ण नहीं होने के संबंध में कार्य प्रारम्भ की तिथि 10.12.2019 एवं कार्य पूर्ण होने की तिथि 09.06.2020 का उल्लेख करते हुए यह अंकित किया गया है कि इस कार्य में अतिक्रमण की भीषण समस्या थी। साथ ही इस संबंध में जिला पदाधिकारी, बेतिया के निरीक्षण प्रतिवेदन का भी संदर्भ दिया गया है।

(ii) आलोच्य कार्य के पूर्ण नहीं होने के संबंध में दिनांक- 25.03.2020 से पूरे देश में करोना संकट के कारण लॉकडाउन होने का संदर्भ दिया गया है। साथ ही विभागीय पत्रांक- 2898 (ई॰) दिनांक- 22. 04.2020 के आलोक में वैसी योजनायें जिसकी कार्य समाप्ति की अवधि दिनांक- 25.03.2020 या उसके बाद निर्धारित है उन सभी योजनाओं में 45 दिनों की स्वतः समयवृद्धि दिये जाने का संदर्भ देते हुए विस्तारित तिथि 22.07.2020 तक आलोच्य कार्य को पूर्ण करा दिये जाने का आवश्वासन दिया गया है। (iii) पथ के दो नम्बर कल्भर्ट के पास श्री मनोज राय के घर के आगे नाले पर बनाये गये स्लैब टूट कर गिर जाने तथा गुणवत्ता सही नहीं पाये जाने के बिन्दु को स्वीकार करते हुए यह कहा गया है कि विशिष्टि के अनुरूप स्लैब का निर्माण किया गया था, परन्तु मात्र पाँच दिनों के बाद ही उसके ऊपर से 200 बोरे सिमेंट से लदा ट्रेक्टर गुजरने के कारण स्लैब टूट गया। चूँकि सीमेंट कार्यों का Initial Setting Time सात दिनों का होता है इसलिए उक्त स्थिति में स्लैब का टूटा जाना स्वभाविक है। (iv) स्लैब कास्टींग की गुणवत्ता की जाँच Crushing Strength से ही की जा सकती है, इसलिए बिना इसकी जाँच कराये ही इसकी गुणवत्ता का त्रुटिपूर्ण कहा जाना तकनीकी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। (v) श्री कुमार द्वारा यह भी कहा गया है कि स्लैब टूट जाने की सूचना मिलते ही संवेदक से नये स्लैब का निर्माण दिनांक- 01.06.2020 को करा दिया गया।

3. विषयांकित मामले में श्री कुमार के स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि नाले के ऊपर बना स्लैब, निर्माण के 5 दिन के अंदर ही टूट गया। निर्माणाधीन कार्य की सुरक्षा करना एजेन्सी के साथ अभियंताओं की भी जिम्मेवारी है। श्री कुमार द्वारा अपने दायित्व के निर्वहन में चूक बरती गयी है तथा इनकी लापरवाही के कारण विभाग की छवि धूमिल हुई है।60 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के क्रम में श्री कुमार के पत्रांक- शून्य दिनांक- 15.06.2020 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के उपनियम-v के तहत्‌ निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता हैः-

(i) ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' । 4. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, विशेष सचिव।

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आदेश

26 अगस्त 2020

सं0 प्र॰11/विविध-03-11/2017-4847 (s)--पथ निर्माण विभाग अंतर्गत गठित परियोजना प्रबंधन ईकाई (Project Management Unit) के लिए स्वीकृत Programmer Analyst के पद पर नियोजन हेतु दिनांक 16.04.2018 से दिनांक 11.05.2018 तक प्राप्त Online आवेदन पत्र के आलोक में दिनांक 23.10.2018 एवं 24.10.2018 को साक्षात्कार समिति द्वारा लिये गये अंर्तवीक्षा एवं मेधा सूची के आधार पर विभागीय चयन समिति के अनुशंसा के आलोक में Application ID PRA/0001967 श्री सत्येन्द्र कुमार, पिता-श्री सीताराम प्रसाद, जन्म तिथि- 15.01.1972 पता- 30, केशरीनगर बाबाचौक पटना के पास, पटना-800024, गृह जिला-पटना ई-मेल[email protected] को Programmer Analyst के रिक्त पद पर संविदा के आधार पर योगदान की तिथि से 02 (दो) वर्ष के लिए नियोजन किया जाता है। 2. यह संविदा नियोजन अस्थाई है जिसे किसी भी समय बिना सूचना के समाप्त की जा सकता है। भविष्य में संविदा नियोजन के आधार पर स्थाई नियोजन के लिए किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा। 3. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे और सरकारी सेवक को अनुमान्य किसी भी सुविधा के वे हकदार नहीं होंगे। संविदा के आधार पर नियोजन के बाद सरकारी सेवा में नियमितीकरण का उनका कोई भी दावा नहीं बनेगा। 4. सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-2401 दिनांक 18.07.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में Programmer Analyst का मासिक पारिश्रमिक रू॰ 60,000/- (साठ हजार) निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी प्रकार का राशि देय नहीं होगा।

5. योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। 6. नियुक्ति पत्र निर्गत होने की तिथि से एक पक्ष के अंदर अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा अन्यथा संविदा नियोजन समाप्त कर दिया जायेगा।

7. मासिक पारिश्रमिक राशि का वहन मांग सं0-41 के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अधीन मुख्य शीर्ष 3054-सड़क तथा सेतु, उप मुख्य शीर्ष-80-सामान्य, लघु शीर्ष-001-निदेशन तथा प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-41-3054800010001, विषय शीर्ष-0001.28.02-संविदा सेवायें अन्तर्गत विकलनीय होगा।

8. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी को छुट्ठी की अनुमान्यता नहीं होगी। उन्हें सरकारी सेवकों को अनुमान्य आकस्मिक अवकाश मात्र अनुमान्य होगा। छह माहों की अवधि के संविदा आधारित नियोजन के संदर्भ में सरकारी सेवकों को अनुमान्य वार्षिक आकस्मिक अवकाशों की कुल संख्या के आधे की संख्या में आकस्मिक अवकाश अनुमान्य होगा। 9. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा।

10. योगदान के लिए यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा। 11. संविदा के आधार पर नियोजित किये जानेवाले कर्मी को संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

आदेश से, बब्लू कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)

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आदेश

26 अगस्त 2020

सं0 प्र॰11/विविध-03-11/2017-4848 (s)--पथ निर्माण विभाग अंतर्गत गठित परियोजना प्रबंधन ईकाई (Project Management Unit) के लिए स्वीकृत Network Hardware Administrator के पद पर नियोजन हेतु दिनांक 16.04.2018 से दिनांक 11.05.2018 तक प्राप्त Online आवेदन पत्र के आलोक में दिनांक 24.10.2018 एवं 25.10.2018 को साक्षात्कार समिति द्वारा लिये गये अंर्तवीक्षा एवं मेधा सूची के आधार पर विभागीय चयन समिति के अनुशंसा के आलोक में Application ID NHA/0000065 श्री कुमार उत्तम, पिता-श्री जर्नादन प्रसाद, जन्म तिथि- 04.02.1983 पता-मकान संख्या-92, द्वितीय तल, अशोका इन्कलेव-1, सेक्टर-34, फरीदाबाद, हरियाणा-121003 गृह जिला- रोहतास,61 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 ई-मेल[email protected] को Network Hardware Administrator के रिक्त पद पर संविदा के आधार पर योगदान की तिथि से 02 (दो) वर्ष के लिए नियोजन किया जाता है।

2. यह संविदा नियोजन अस्थाई है जिसे किसी भी समय बिना सूचना के समाप्त की जा सकता है। भविष्य में संविदा नियोजन के आधार पर स्थाई नियोजन के लिए किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

3. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे और सरकारी सेवक को अनुमान्य किसी भी सुविधा के वे हकदार नहीं होंगे। संविदा के आधार पर नियोजन के बाद सरकारी सेवा में नियमितीकरण का उनका कोई भी दावा नहीं बनेगा।

4. सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-2401 दिनांक 18.07.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में Network Hardware Administrator का मासिक पारिश्रमिक रू॰ 60,000/- (साठ हजार) निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी प्रकार का राशि देय नहीं होगा।

5. योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। 6. नियुक्ति पत्र निर्गत होने की तिथि से एक पक्ष के अंदर अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा अन्यथा संविदा नियोजन समाप्त कर दिया जायेगा।

7. मासिक पारिश्रमिक राशि का वहन मांग सं0-41 के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अधीन मुख्य शीर्ष 3054-सड़क तथा सेतु, उप मुख्य शीर्ष-80-सामान्य, लघु शीर्ष-001-निदेशन तथा प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-41-3054800010001, विषय शीर्ष-0001.28.02-संविदा सेवायें अन्तर्गत विकलनीय होगा।

8. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी को छुट्ठी की अनुमान्यता नहीं होगी। उन्हें सरकारी सेवकों को अनुमान्य आकस्मिक अवकाश मात्र अनुमान्य होगा। छह माहों की अवधि के संविदा आधारित नियोजन के संदर्भ में सरकारी सेवकों को अनुमान्य वार्षिक आकस्मिक अवकाशों की कुल संख्या के आधे की संख्या में आकस्मिक अवकाश अनुमान्य होगा। 9. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा।

10. योगदान के लिए यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा। 11. संविदा के आधार पर नियोजित किये जानेवाले कर्मी को संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

आदेश से, बब्लू कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)

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आदेश

26 अगस्त 2020

सं0 प्र॰11/विविध-03-11/2017-4849 (s)--पथ निर्माण विभाग अंतर्गत गठित परियोजना प्रबंधन ईकाई (Project Management Unit) के लिए स्वीकृत Professional Support Service Expert (Role-Professional Financial Expert) के पद पर नियोजन हेतु दिनांक 16.04.2018 से दिनांक 11.05.2018 तक प्राप्त Online आवेदन पत्र के आलोक में दिनांक 29.10.2018 को साक्षात्कार समिति द्वारा लिये गये अंर्तवीक्षा एवं मेधा सूची के आधार पर विभागीय चयन समिति के अनुशंसा के आलोक में Application ID PSF/0002445 श्री प्रणव कुमार झा, पिता- श्री नागेन्द्र झा, जन्म तिथि- 15.07.1973 पता-104 प्रथम तल, पवनपुत्र अपार्टमेंट, बी॰एस॰एफ॰सी॰ भवन के नजदीक, फ्रेजर रोड़, पटना-800001, गृह जिला-मधुबनी [email protected] को Professional Support Service Expert (Role- Professional Financial Expert) के रिक्त पद पर संविदा के आधार पर योगदान की तिथि से 02 (दो) वर्ष के लिए नियोजन किया जाता है।

2. यह संविदा नियोजन अस्थाई है जिसे किसी भी समय बिना सूचना के समाप्त की जा सकता है। भविष्य में संविदा नियोजन के आधार पर स्थाई नियोजन के लिए किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

3. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे और सरकारी सेवक को अनुमान्य किसी भी सुविधा के वे हकदार नहीं होंगे। संविदा के आधार पर नियोजन के बाद सरकारी सेवा में नियमितीकरण का उनका कोई भी दावा नहीं बनेगा।

4. सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-2401 दिनांक 18.07.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में Professional Support Service Expert (Role-Professional Financial Expert) का मासिक पारिश्रमिक रू॰ 1,00,000/- (एक लाख) निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी प्रकार का राशि देय नहीं होगा। 5. योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। 6. नियुक्ति पत्र निर्गत होने की तिथि से एक पक्ष के अंदर अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा अन्यथा संविदा नियोजन समाप्त कर दिया जायेगा।

7. मासिक पारिश्रमिक राशि का वहन मांग सं0-41 के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अधीन मुख्य शीर्ष 3054-सड़क तथा सेतु, उप मुख्य शीर्ष-80-सामान्य, लघु शीर्ष-001-निदेशन तथा प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-41-3054800010001, विषय शीर्ष-0001.28.02-संविदा सेवायें अन्तर्गत विकलनीय होगा।62 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 8. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी को छुट्ठी की अनुमान्यता नहीं होगी। उन्हें सरकारी सेवकों को अनुमान्य आकस्मिक अवकाश मात्र अनुमान्य होगा। छह माहों की अवधि के संविदा आधारित नियोजन के संदर्भ में सरकारी सेवकों को अनुमान्य वार्षिक आकस्मिक अवकाशों की कुल संख्या के आधे की संख्या में आकस्मिक अवकाश अनुमान्य होगा। 9. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा।

10. योगदान के लिए यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा। 11. संविदा के आधार पर नियोजित किये जानेवाले कर्मी को संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

आदेश से, बब्लू कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)

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आदेश

26 अगस्त 2020

सं0 प्र॰11/विविध-03-11/2017-4850 (s)--पथ निर्माण विभाग अंतर्गत गठित परियोजना प्रबंधन ईकाई (Project Management Unit) के लिए स्वीकृत Software Developer के पद पर नियोजन हेतु दिनांक 16.04.2018 से दिनांक 11.05.2018 तक प्राप्त Online आवेदन पत्र के आलोक में दिनांक 25.10.2018 एवं 26.10.2018 को साक्षात्कार समिति द्वारा लिये गये अंर्तवीक्षा एवं मेधा सूची के आधार पर विभागीय चयन समिति के अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित आवेदक को Software Developer के रिक्त पद पर संविदा के आधार पर योगदान की तिथि से 02 (दो) वर्ष के लिए नियोजन किया जाता है :-

Sl. No Application ID Applicant Name Father's Name D.O.B Gender Category Against Sekection Correspondence Address
1. SFD/0002528 Aditya Anurag H.D.- Patna Brind Behari Verma 09.01.1978 Male GEN Meena Niketan, A2, Setu Nagar, Anishabad, Patna, Bihar-800002. Email- [email protected]
2. SFD/0001746 Shyam Nandan Kishore H.D.- Patna Krishan Kumar Singh 12.12.1973 Male EBC Chhoti Rukanpura, B.V College, Patna-800014. Email- [email protected]

2. यह संविदा नियोजन अस्थाई है जिसे किसी भी समय बिना सूचना के समाप्त की जा सकता है। भविष्य में संविदा नियोजन के आधार पर स्थाई नियोजन के लिए किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

3. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे और सरकारी सेवक को अनुमान्य किसी भी सुविधा के वे हकदार नहीं होंगे। संविदा के आधार पर नियोजन के बाद सरकारी सेवा में नियमितीकरण का उनका कोई भी दावा नहीं बनेगा।

4. सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-2401 दिनांक 18.07.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में Software Developer का मासिक पारिश्रमिक रू॰ 60,000/- (साठ हजार) निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी प्रकार का राशि देय नहीं होगा। जाति प्रमाण पत्र संबंधित जिला पदाधिकारी से सत्यापन के उपरान्त ही पारिश्रमिक का भुगतान किया जायेगा।

5. योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। 6. नियुक्ति पत्र निर्गत होने की तिथि से एक पक्ष के अंदर अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा अन्यथा संविदा नियोजन समाप्त कर दिया जायेगा।

7. मासिक पारिश्रमिक राशि का वहन मांग सं0-41 के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अधीन मुख्य शीर्ष 3054-सड़क तथा सेतु, उप मुख्य शीर्ष-80-सामान्य, लघु शीर्ष-001-निदेशन तथा प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-41-3054800010001, विषय शीर्ष-0001.28.02-संविदा सेवायें अन्तर्गत विकलनीय होगा।

8. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी को छुट्ठी की अनुमान्यता नहीं होगी। उन्हें सरकारी सेवकों को अनुमान्य आकस्मिक अवकाश मात्र अनुमान्य होगा। छह माहों की अवधि के संविदा आधारित नियोजन के संदर्भ में सरकारी सेवकों को अनुमान्य वार्षिक आकस्मिक अवकाशों की कुल संख्या के आधे की संख्या में आकस्मिक अवकाश अनुमान्य होगा।63 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 9. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा।

10. योगदान के लिए यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा। 11. संविदा के आधार पर नियोजित किये जानेवाले कर्मी को संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

आदेश से, बब्लू कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)

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आदेश

26 अगस्त 2020

सं0 प्र॰11/विविध-03-11/2017-4845 (s)--पथ निर्माण विभाग अंतर्गत गठित परियोजना प्रबंधन ईकाई (Project Management Unit) के लिए स्वीकृत System/Infrastructure Analyst के पद पर नियोजन हेतु दिनांक 16.04.2018 से दिनांक 11.05.2018 तक प्राप्त Online आवेदन पत्र के आलोक में दिनांक 23.10.2018 को साक्षात्कार समिति द्वारा लिये गये अंर्तवीक्षा एवं मेधा सूची के आधार पर विभागीय चयन समिति के अनुशंसा के आलोक में Application ID SIA/0000808 श्री शुवेन्द्र कुमार, पिता-श्री बांके बिहारी सिंह, जन्म तिथि-21.11.1985 पता-ग्राम-छोटी रूकणपुरा, डाकघर-बी॰भी॰ कॉलेज, पटना-800014, गृह जिला-पटना, ई-मेल[email protected] को System/ Infrastructure Analyst के रिक्त पद पर संविदा के आधार पर योगदान की तिथि से 02 (दो) वर्ष के लिए नियोजन किया जाता है।

2. यह संविदा नियोजन अस्थाई है जिसे किसी भी समय बिना सूचना के समाप्त की जा सकता है। भविष्य में संविदा नियोजन के आधार पर स्थाई नियोजन के लिए किसी प्रकार का दावा मान्य नहीं होगा।

3. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी सरकारी सेवक नहीं माने जायेंगे और सरकारी सेवक को अनुमान्य किसी भी सुविधा के वे हकदार नहीं होंगे। संविदा के आधार पर नियोजन के बाद सरकारी सेवा में नियमितीकरण का उनका कोई भी दावा नहीं बनेगा।

4. सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-2401 दिनांक 18.07.2007 में निहित प्रावधान के आलोक में System/Infrastructure Analyst का मासिक पारिश्रमिक रू॰ 60,000/- (साठ हजार) निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी प्रकार का राशि देय नहीं होगा।

5. योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। 6. नियुक्ति पत्र निर्गत होने की तिथि से एक पक्ष के अंदर अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा अन्यथा संविदा नियोजन समाप्त कर दिया जायेगा।

7. मासिक पारिश्रमिक राशि का वहन मांग सं0-41 के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अधीन मुख्य शीर्ष 3054-सड़क तथा सेतु, उप मुख्य शीर्ष-80-सामान्य, लघु शीर्ष-001-निदेशन तथा प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-41-3054800010001, विषय शीर्ष-0001.28.02-संविदा सेवायें अन्तर्गत विकलनीय होगा।

8. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी को छुट्ठी की अनुमान्यता नहीं होगी। उन्हें सरकारी सेवकों को अनुमान्य आकस्मिक अवकाश मात्र अनुमान्य होगा। छह माहों की अवधि के संविदा आधारित नियोजन के संदर्भ में सरकारी सेवकों को अनुमान्य वार्षिक आकस्मिक अवकाशों की कुल संख्या के आधे की संख्या में आकस्मिक अवकाश अनुमान्य होगा। 9. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा।

10. योगदान के लिए यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा। 11. संविदा के आधार पर नियोजित किये जानेवाले कर्मी को संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

आदेश से, बब्लू कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)

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आदेश

26 अगस्त 2020

सं0 प्र॰11/विविध-03-11/2017-4846 (s)--पथ निर्माण विभाग अंतर्गत गठित परियोजना प्रबंधन ईकाई (Project Management Unit) के लिए स्वीकृत Professional Support Service Expert (Role Technical Support) के पद पर नियोजन हेतु दिनांक 16.04.2018 से दिनांक 11.05.2018 तक प्राप्त Online आवेदन पत्र के आलोक में दिनांक 23.10.2018 से दिनांक 27.10.2018 तक साक्षात्कार समिति द्वारा लिये गये अंर्तवीक्षा एवं मेधा सूची के आधार पर विभागीय चयन समिति के अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित आवेदक को Professional Support Service Expert (Role Technical Support) के रिक्त पद पर संविदा के आधार पर योगदान की तिथि से 02 (दो) वर्ष के लिए नियोजन किया जाता है :-

64 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021
Sl. No Application ID Applicant Name Father's Name D.O.B Gender Category against selection Correspondence Address
1. PST/0000020 Amit Kumar H.D.- Patna Prem Kumar 01.02.1994 Male GEN C/o-Jagdeo Sah New Bangalitola Devi Sthan, Patna, P.O-GPO, Pin-800001. [email protected]
2. PST/0000157 Aman Shekhar H.D.- Katihar Shekhar Biswas 30.01.1993 Male GEN Tanujalaya KaliBari, Katihar, Bihar-854105. [email protected]
3. PST/0000855 Shashank Prakash H.D.- Patna Gyan Prakash 26.10.1991 Male GEN Ghagha Gali, Patna, City-Patna, Pin-800008. Email- [email protected]
4. PST/0002123 Kritika Kaushal H.D.- Bhojpur Kumar Kaushalendra 08.11.1992 Female GEN(F) Near the Western Gate of HD Jain College Arra, Bihar- 802301. [email protected]
5. PST/0000235 Amrita Kumari H.D.- Gaya Pramod Pandey 27.05.1992 Female GEN(F) Pant Nagar, Ghughari tand Near Bypass Gaya, Bihar-823001. Email- [email protected]
6. PST/0000023 Jitendra Kumar H.D.- Nalanda Upendra Prasad 15.10.1993 Male BC C/o-Ramji Yadav, Vill- Mozaffara, P.O-Baradih, P.S- Islampur, Nalanda, Bihar- 801303. [email protected]
7. PST/0000921 Kumar Bhaskar H.D.- Patna Kumar Sarwa Nand 26.11.1991 Male EBC Flate No.-401, Basa Vihar Appt. Rajbansi Nagar, Road No.-1, Patna, Bihar-800023. [email protected]
8. PST/0002664 Sushant Kumar H.D.- Muzaffarpur Garib Nath Choudhary 15.12.1990 Male SC Sikandarpur, Near Rani Sati Mandir, Mazaffarpur, Bihar- 842001. Email- [email protected]
65 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

5. योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। 6. नियुक्ति पत्र निर्गत होने की तिथि से एक पक्ष के अंदर अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा अन्यथा संविदा नियोजन समाप्त कर दिया जायेगा। 7. मासिक पारिश्रमिक राशि का वहन मांग सं0-41 के स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अधीन मुख्य शीर्ष 3054-सड़क तथा सेतु, उप मुख्य शीर्ष-80-सामान्य, लघु शीर्ष-001-निदेशन तथा प्रशासन, उप शीर्ष-0001-निदेशन, विपत्र कोड-41- 3054800010001, विषय शीर्ष-0001.28.02-संविदा सेवायें अन्तर्गत विकलनीय होगा। 8. संविदा के आधार पर नियोजित कर्मी को छुट्ठी की अनुमान्यता नहीं होगी। उन्हें सरकारी सेवकों को अनुमान्य आकस्मिक अवकाश मात्र अनुमान्य होगा। छह माहों की अवधि के संविदा आधारित नियोजन के संदर्भ में सरकारी सेवकों को अनुमान्य वार्षिक आकस्मिक अवकाशों की कुल संख्या के आधे की संख्या में आकस्मिक अवकाश अनुमान्य होगा। 9. अनुबंध समाप्ति के पूर्व यदि पुनर्नियोजन नहीं होता है, तो वैसी स्थिति में निर्धारित तिथि को इनका अनुबंध स्वतः समाप्त माना जायेगा और इसके लिए आदेश निर्गत किया जाना अपेक्षित नहीं होगा। 10. योगदान के लिए यात्रा भत्ता अनुमान्य नहीं होगा। 11. संविदा के आधार पर नियोजित किये जानेवाले कर्मी को संलग्न विहित प्रपत्र में एकरारनामा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

आदेश से, बब्लू कुमार, उप सचिव (प्र॰को॰)।

------ समाहरणालय, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी (जिला स्थापना शाखा) ------- आदेश 3 दिसम्बर 2020

सं0 XVII-16/2015- 1221--क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फपुर के पत्रांक-6334 दिनांक-24.11.2008 द्वारा प्राप्त श्री भोला प्रसाद, पिता- गणेश प्रसाद, ग्राम-पीपरा, पो0-दामोदरपुर के परिवाद पत्र का अनुमंडल पदाधिकारी, चकिया से जाँच करायी गयी। अनुमंडल पदाधिकारी, चकिया ने अपने पत्रांक-239 दिनांक-09.06. 2009 से जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जिसमें उनके द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि श्री शंभू नाथ प्रसाद, पिता-श्री गणेश प्रसाद, ग्राम-पीपरा, पो0-दामोदर, जिला-पूर्वी चम्पारण ने अपना नाम बदलकर अपने बड़े भाई भोला प्रसाद, पिता-गणेश प्रसाद के नाम पर जनसेवक की नौकरी प्राप्त किये है तथा श्री प्रसाद ने धोखाधडी कपटपूर्ण एवं गंभीर अपराधिक कार्य किया है जो सरकारी सेवक आचार नियमावली के विरूद्ध है।

श्री भोला प्रसाद(वास्तविक नाम श्री शंभू नाथ प्रसाद) जनसेवक मेहसी प्रखंड को धोखाधड़ी, कपटपूर्ण एवं गंभीर अपराधिक कार्य करने के आरोप में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के भाग IV के नियम 9(i)(ख) के तहत्‌ इस कार्यालय के आदेश ज्ञापांक-303 दिनांक-02.05.2011 से तत्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय घोड़ासहन प्रखंड निर्धारित किया गया तथा अनुमंडल पदाधिकारी, चकिया से प्रपत्र ''क'' मेें आरोप पत्र गठित कर उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया।

अनुमंडल पदाधिकारी चकिया के पत्रांक-378 दिनांक-21.06.2013 से श्री भोला प्रसाद (वास्तविक नाम श्री शम्भू नाथ प्रसाद) निलंबित जनसेवक के विरूद्ध प्रपत्र ''क'' में आरोप पत्र गठित कर उपलब्ध कराया गया जिसे अनुमोदित करते हुए इस कार्यालय के पत्रांक-458 दिनांक-07.08.2014 से अनुमंडल पदाधिकारी अरेराज को संचालन पदाधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेहसी को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी -सह-अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज के पत्रांक-1293 दिनांक-29.09.2019 से श्री भोला प्रसाद निलम्बित जनसेवक मेहसी प्रखंड के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का संचालन प्रतिवदेन उपलब्ध कराया गया है जो निम्न प्रकार हैः-

क्रमांक आरोप पत्र के अनुसार आरोप आरोप का विवरण सक्ष्य तालिका
1 श्री शम्भू प ्रसाद, पिता-गणेश प्रसाद, सा0-पीपरा,थाना-पीपरा, जिला-पूर्वी चम्पारण द्वारा अपने बड़े भाई श्री भोला प्रसाद के नाम का निर्गत माध्यमिक परीक्षा का प्रमाण-पत्र के आधार पर अपने को भोला प्रसाद बताकर सरकार एवं अपने आप को जालसाज मे ं शामिल कर धोखाधड़ी का शिकार बन कर श्री भोला प्रसाद एम0 हाई स्कूल पीपरा से 1981 ई0 में वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में उर्तीण हुए थे। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा इन्हें निर्गत द्वितीयक प्रमाण-पत्र संख्या-81 सी0/046927 के अनुसार भोला प्रसाद की जन्म तिथि 01.03.1963 है। श्री शम्भू नाथ प्रसाद जो गणेश का द्वितीय पुत्र है। महावीर हाई स्कूल पीपरा से वर्ष 1985 ई0 की वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में उर्तीण हुए थे और बिहार विद्यालय परीक्षा अनुलग्नक-एनेक्चर-ए0 द्रष्टव्य। अ नुलग्नक-एनेक्चर बी0
जन सेवक पद पर सरकारी नौकरी प्राप्त कर वेतन प्राप्त कर रहे है। समिति के द्वारा निर्गत द्वितीयक प्रमाण पत्र संख्या 85 सी0/387659 के अनुसार शम्भुनाथ प्रसाद की जन्म तिथि 02.02.1969 है। उपलब्ध कराए गये कागजात की जाँच में विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा निर्गत माध्यमिक परीक्षा से संबंधित प्रमाण-पत्र संख्या-86 सी0/013786 के अनुसार श्री नलिन कुमार, पिता-गणेश प्रसाद के द्वारा माध्यमिक परीक्षा-1986 में पास की गई थी और इसमें इनका जन्म तिथि 28.08.1970 अंकित है। एन0सी0-1 जाँच के क्रम में श्री भोला प्रसाद ने स्वीकार किया कि इनका नाम नलिन कुमार भी है। ये इस प्रमाण-पत्र के आधार पर भारतीय वायु सेना मे सेवा किये है। ं जनसेवक के द्वारा जो निर्वाचक नामावली 2009 में नलिन कुमार का उम्र 36 वर्ष और भोला प्रसाद का उम्र 34 वर्ष दिखाया गया है। श्री भोला प्रसाद बड़े है और 1981 की वार्षिक माध्यमिक परीक्षा पास किए इनका जन्म तिथि-01.03.1963 है। इनके उम्र छुपाने के नियत से पुनः नलिन कुमार के नाम से 1986 में माध्यमिक परीक्षा उर्तीण हुए एवं इसके आधार पर ये वायु सेवा में सेवा प्राप्त कर सेवानिवृत भी हो चुके है। श्री शंभू नाथ प्रसाद जो छोटे भाई है। 1985 में वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में द्वितीय श्रेणी से पास किए लेकिन बडे भाई श्री भोला प्रसाद के द्वारा नाम बदल कर नलिन कुमार के नाम पर भारतीय वायु सेवा में नौकरी पा लेने के बाद श्री शम्भु नाथ प्रसाद के द्वारा भोला प्रसाद बनकर जनसेवक की नौकरी पाने में सफलता पायी। इस प ्रकार दोनो ं भाई जालसाजी कर जनसेवक एवं भारतीय वायु सेना मेें सरकारी नौकरी करने में सफल रहें है, जो कि सरकार के साथ धोखाधड़ी कर एक अपराधिक कार्य करने का प्रमाण है। द्रष्टव्य। अ नुलग्नक-एनेक्चर-सी0 i,ii एवं iii द्रष्टव्य। अ नुलग्नक-एनेक्चर-डी0 i,ii एवं iii द्रष्टव्य। अ नुलग्नक-एनेक्चर-ई0 द्रष्टव्य।
66 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः- उपरोक्त साक्ष्यों के आधार पर साक्ष्य उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा रखे गये तथ्यों के आलोक में यह आरोप प्रमाणित होता है कि आरोप सही है। श्री भोला प्रसाद अर्थात नलिन कुमार और शम्भु नाथ प्रसाद जनसेवक द्वारा सरकार के साथ घोखाधड़ी कर एक अपराधिक कृत्य किया गया है। अतः इन दोनों के विरूद्ध कठोरतम दण्डात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की जाती है।

संचालन पदाधिकारी-सह-अनुमंडल पदाधिकारी, अरेराज द्वारा श्री भोला प्रसाद निलंबित जनसेवक के विरूद्ध लगाये गये आरोप को प्रमाणित पाये जाने के कारण इस कार्यालय के ज्ञापांक-1255 दिनांक-16.10.19 से आरोपी कर्मी श्री भोला प्रसाद निलंबित जनसेवक, मेहसी प्रखंड से द्वितीय कारण पृच्छा करते हुए 15 दिनों के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का आदेश दिया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेहसी के पत्रांक-1202 दिनांक-13.11.2019 से सूचित किया गया है कि द्वितीय कारण पृच्छा आरोपी कर्मी श्री भोला प्रसाद निलंबित जनसेवक को तामिला करा दिया गया है। श्री प्रसाद द्वारा ससमय द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित नहीं करने के कारण इस कार्यालय के ज्ञापांक-1464 दिनांक-26.11.2019 से पुनः स्मारित करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समप्रित करने का निदेश दिया गया कि एक सप्ताह के अन्दर द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे अन्यथा समझा जायेगा की आपको संचालन प्रतिवेदन के संदर्भ में कुछ नहीं कहना है और विभागीय कार्यवाही निष्पादित कर दिया जायेगा। जिसका भी तामिला प्रतिवेदन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेहसी के पत्रांक-48 दिनांक-11.01.2020 से उपलब्ध कराया गया। दो पत्र प्राप्त करने67 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 के बावजूद भी श्री प्रसाद निलंबित जनसेवक मेहसी प्रखंड के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित नहीं किया गया। जिससे स्पष्ट होता है कि आरोप के संबंध में आरोपी कर्मी श्री भोला प्रसाद निलम्बित जनसेवक मेहसी प्रखंड को कुछ नहीं कहना है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि श्री भोला प्रसाद निलंबित जनसेवक मेहसी प्रखंड के द्वारा सरकार के साथ धोखाधड़ी कपटपूर्ण एवं गम्भीर आपराधिक कार्य किया गया है जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3,1 (I)(II)(III) के प्रतिकूल है। उन्हें कठोर दण्ड देना अनिवार्य हो गया है अन्यथा धोखाधड़ी, कपटपूर्ण एवं गम्भीर अपराधिक कार्य को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकारी कर्मियों में भी गलत संदेश जायेगा।

अतः उपरोक्त तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथा संशोधित नियम 14 (XI) में निहित प्रावधानों के तहत्‌ शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं शीर्षत कपिल अशोक, भा0प्र0से0 जिलाधिकारी-सह-जिला दण्डाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी श्री भोला प्रसाद निलंबित जनसेवक मेहसी प्रखंड को आदेश निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्तगी जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी का दण्ड अधिरोपित करता हूॅ साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारी, मेहसी को आदेश दिया जाता है कि आरोपी कर्मी श्री प्रसाद को गलत प्रमाण-पत्र पर नौकरी करने के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करे तथा अब तक जितनी राशि वेतन आदि मद में भुगतान प्राप्त किया गया है उसे नियमानुसार वसूली करना सुनिश्चित करें।

श्री भोला प्रसाद निलम्बित जनसेवक प्रखंड कार्यालय मेहसी से संबंधित सूचना निम्न प्रकार हैः- नामः- श्री भोला प्रसाद पिताः- श्री गणेश प्रसाद पदनामः- जनसेवक जन्म तिथिः- 01.03.1963 नियुक्ति की तिथिः- 23.11.1990 वर्त्तमान वेतनमानः- 5000-8000 स्थाई पताः- ग्राम-पीपरा बाजार, पो0-दामोदरपुर, थाना-पीपरा, जिला-पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी।

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी।

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VIGILANCE DEPARTMENT

BIHAR, PATNA

FORM No. I

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DECLARATION

The 18th December 2020

(Under Section 5 of the Bihar Special Courts Act 2009, and Rules 7 of Bihar Special Courts Rules 2010)

No. Ni. Vi. /Stha (Vi.Nya.)-04/2020-3336--WHEREAS, It is alleged that Sri Shailendra Kumar the then Junior Engineer, Zila Parishad, Nawada S/o Late B.P. Singh, Village-Vaali, P.S- Kashichak, District-Nawada., while holding the post of Sri Shailendra Kumar the then Junior Engineer, Zila Parishad, Nawada and serving in different capacities in the State of Bihar, committed an offence under clause (e) of sub-section (1) of Section 13 of the Prevention of Corruption Act, 1988 and that the matter was investigated in Vigilance P.S. Case No. Case No. 76/2017 dated 22-09-2017.

AND WHEREAS, on scrutiny of relevant materials available on record, the State Government is of the opinion that there is prima facie case of Commission of above mentioned criminal misconduct by said that Sri Shailendra Kumar the then Junior Engineer, Zila Parishad, Nawada who has accumulated properties disproportionate to his known sources of income by resorting to corrupt means.

68

बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 AND WHEREAS, it is felt necessary and expedient by the Government that the said offender should be tried for confiscation of the properties mentioned in the application by the Special Court Established under sub-section (1) of Section 3 of Bihar Special Courts Act, 2009;

NOW, THEREFORE, in exercise of the powers conferred by sub-section (1) of Section 5 of Bihar Special Courts Act, 2009, the State Government do hereby declare that the said offence be dealt with under the provision of Special Courts Act, 2009.

By the order of the Governor of Bihar,-

(Sd.)/-Illegible, Additional Chief Secretary.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 37—571+25-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in69 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

भाग-2

बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। —————

स्वास्थ्य विभाग

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आदेश

8 जनवरी 2021

सं॰ 17/विविध 1-113/2020-23(17)—डा॰ पल्लवी अग्रवाल, सहायक प्रध्यापक, पैथोलॉजी विभाग पटना चिकित्सा महाविद्यालय, पटना द्वारा अपना नाम सरनेम परिवर्तित करने संबंधी समर्पित अभ्यावेदन के साथ संलग्न अभिलेखों के आधार पर विचारोपरांत उनके नाम को परिवर्तित करते हुए ''डा॰ पल्लवी मेहरा'' किये जाने की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से,

कौशल किशोर, अपर सचिव।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचना

(शुद्धि-पत्र)

24 सितम्बर 2020

सं0 प्र॰2/स्था॰-वि॰उ॰-21-03/2018-5536(s)--बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-II में सीधे नियुक्ति पथ निर्माण विभाग संवर्ग के अभियंताओं को ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ का लाभ प्रदान करने हेतु दिनांक 27.12.2019 को सम्पन्न स्क्रींनिग समिति की बैठक में समिति के समक्ष प्रस्तुत विचारण सूची में प्रथम योगदान की तिथि की प्रविष्टि बिहार अभियंत्रण (असैनिक/यांत्रिक) सेवा वर्ग-I एवं II के अद्यतन वरीयता/औपबंधिक वरीयता सूची में अंकित प्रथम योगदान के तिथि के आधार पर किया गया था। उक्त विचारण सूची को समिति कीे समक्ष रखे जाने से पूर्व विभागीय वेबसाईट पर अपलोड कर इसकी सूचना राज्य स्तरीय दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित कराते हुये त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि (यदि कोई हो) के संबंध में संबंधित अभियंताओं से आपत्ति की मांग की गई थी। कुछ अभियंताओं द्वारा समर्पित आपत्ति का निराकरण के पश्चात विचारण सूची समिति के समक्ष रखी गई। समिति के अनुशंसा के उपरान्त विभागीय अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 द्वारा कुल-93 अभियंताओं को ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ की स्वीकृति दी गई।

2. महालेखाकार (ले॰ एवं हक॰) बिहार, पटना/वित्त (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार, पटना द्वारा कतिपय अभियंताओं के प्रथम योगदान की तिथि त्रुटिपूर्ण होना प्रतिवेदित किया गया। उक्त के आलोक में मामले की समीक्षा की गई। तत्‌पश्चात पाया गया कि सेवा विनियमन तथा सेवा पुस्तिका से भिन्न वरीयता सूची में प्रथम योगदान (प्रभार ग्रहण) की तिथि70 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 अंकित होने के कारण विचारण सूची में निम्नलिखित अभियंताओं के प्रथम योगदान की तिथि त्रुटिपूर्ण अंकित हो गया, किन्तु संबंधित अभियंताओं द्वारा कोई आपत्ति समर्पित नहीं की गई थी।

अतः विभागीय अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 को निम्नलिखित हद तक संशोधित की जाती हैः-

अ धि॰ संख्या- 10871 (एस) दिनांक 27.11.17 में क्र॰ सहायक अभियंता वर्ष 2011 का वरीयता क्रमांक प्रथम योगदान की तिथि/सेवा सम्पुष्टि की तिथि प्रथम सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन की देय तिथि द्वितीय सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन की देय तिथि तृतीय सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन की देय तिथि
1 2 3 4 6A 6B 7A 7B 8A 8B
संशोधित द य तिथि े से पूर्व का वेतनमान संशोधित द य तिथि से े पूर्व का वेतनमान संशोधित देय तिथि से पूर्व का वेतनमान संशोधित देय तिथि एवं वेतनमान संशोधित देय तिथि से पूर्व का वेतनमान संशोधित द य तिथि एवं े वेतनमान
पूर्व में अंकित संशोधित
9 श्री चन्द्र भानु तिवारी 151 EE 16.06.1987 03.07.2004 26.06.1987 03.07.2004 - - - - - 26.06.2017 Level-13
26 श्री ज्योतिनाथ 440 EE 25.07.1989 04.10.2007 24.07.1989 04.10.2007 - - - - - 24.07.2019 Level-13
27 श्री सागरिका चक्रवती 445 EE 19.07.1989 04.10.2007 19.08.1989 04.10.2007 - - - - - 19.08.2019 Level-13
35 श्री नवल किशोर सिंह 366 AE 25.01.1999 13.10.2009 23.01.1999 13.10.2009 - - - 23.01.2019 Level-12 - -
36 श्री सुनील कुमार सिंह 369 AE 01.07.1999 11.08.2010 28.06.1999 11.08.2010 - - - 28.06.2019 Level-12 - -
41 श्री जगन्नाथ प साद यादव ्र 276 AE 07.05.1997 13.10.2009 08.05.1997 13.10.2009 - - - - - -
42 श्री सुनील कुमार चौधरी 486 AE 14.09.2004 02.06.2012 01.10.2009 02.06.2012 - 01.10.2019 Level-11 - - - -
47 श्री रजनीश कुमार 820 AE 11.08.2008 01.01.2011 12.09.2008 01.01.2011 - 12.09.2018 Level-11 - - - -
48 श्री अमीत कुमार 821 AE 11.08.2008 11.08.2010 10.09.2008 11.08.2010 - 10.09.2018 Level-11 - - - -
49 श्री सत्येन्द्र पाठक 822 AE 11.08.2008 02.06.2012 30.09.2008 02.06.2012 - 30.09.2018 Level-11 - - - -
51 श्री रवि शंकर प्रसाद रवि 830 AE 11.08.2008 02.06.2012 11.09.2008 02.06.2012 - 11.09.2018 Level-11 - - - -
56 श्री संदीप 844 AE 11.08.2008 02.06.2012 02.04.2009 02.06.2012 - 02.04.2019 Level-11 - - - -
57 श्री समरेन्द्र नाथ झा 848 AE 11.08.2008 11.08.2010 30.09.2008 11.08.2010 - 30.09.2018 Level-11 - - - -
58 श्री अजय कुमार 853 AE 11.08.2008 11.08.2010 29.09.2008 11.08.2010 - 29.09.2018 Level-11 - - - -
59 श्री मनोज कुमार 854 AE 11.08.2008 11.08.2010 09.09.2008 11.08.2010 - 09.09.2018 Level-11 - - - -
60 श्री रवि कान्त 859 AE 11.08.2008 11.08.2010 10.09.2008 11.08.2010 - 10.09.2018 Level-11 - - - -
61 श्री संजीव कुमार 861 AE 13.09.2008 25.08.2010 25.08.2008 25.08.2010 - 25.08.2018 Level-11 - - - -
62 श्री सुभाष चन्द्र श्रीहर्ष 862 AE 11.08.2008 02.06.2012 06.09.2008 02.06.2012 - 06.09.2018 Level-11 - - - -
65 श्री संजीव कुमार सिंह 872 AE 11.08.2008 02.06.2012 30.09.2008 02.06.2012 - 30.09.2018 Level-11 - - - -
66 श्री मिथिलेश कुमार 873 AE 11.08.2008 11.08.2010 30.09.2008 11.08.2010 - 30.09.2018 Level-11 - - - -
69 श्री सिकन्दर पासवान 878 AE 06.08.2008 02.06.2012 13.09.2008 02.06.2012 - 13.09.2018 Level-11 - - - -
72 श्री ज्ञानचन्द्र दास 887 AE 11.08.2008 02.06.2012 12.09.2008 02.06.2012 - - - - - -
73 श्री रणधीर कुमार 888 AE 11.08.2008 11.08.2010 06.09.2008 11.08.2010 - 06.09.2018 Level-11 - - - -
75 श्री समलदेव कुमार 890 AE 11.08.2008 16.09.2010 17.09.2008 16.09.2010 - 17.09.2018 Level-11 - - - -
76 श्री कमलेश कुमार चौधरी 896 AE 11.08.2008 02.06.2012 07.09.2008 02.06.2012 - 07.09.2018 Level-11 - - - -
78 श्री अक्षय कुमार 900 AE 11.08.2008 24.01.2014 13.09.2008 24.01.2014 - 13.09.2018 Level-11 - - - -
80 श्री रणजीत कुमार 906 AE 11.08.2008 06.09.2008 06.09.2008 11.08.2010 - 06.09.2018 Level-11 - - - -
82 श्री अशोक कुमार सिंह 923 AE 11.08.2008 28.08.2010 26.09.2008 28.08.2010 - 26.09.2018 Level-11 - - - -
87 श्री मुकेश कुमार 931 AE 11.08.2008 11.08.2010 22.12.2008 11.08.2010 - 22.12.2018 Level-11 - - - -
93 श्री सरफराज खाँ 359 AE 20.04.1997 01.04.2008 29.08.1998 01.04.2008 - - - 29.08.2018 Level-12 - -
71 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

3. अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 के साथ संलग्न सूची के क्रमांक-7 पर अंकित श्री रधुनाथ प्रसाद के नाम के सामने कॉलम-7A से 8A तक भूलवंश त्रुटिपूर्ण वेतनमान अंकित हो गया है, जिसे निम्न रूपेण संशोधित की जाती है :-

क्र 0 अधि॰ संख्या- 10871 (एस) दिनांक 27.11.17 में क्र॰ वर्ष 2011 का वरीयता क्रमांक सहायक अभियंता का नाम द्वितीय सुनिश्चित /रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन की देय तिथि तृतीय ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰ सी॰पी॰ की देय तिथि/ स्थिति
1 2 3 7A 7B 8A
द य तिथि से पूर्व का े वेतनमान द य तिथि एवं वेतनमान े द य तिथि से पूर्व का वेतनमान े
पूर्व में अंकित संशोधित पूर्व में अंकित संशोधित प र्व में ू अंकित संशोधित
1 7 22 EE श्री रधुनाथ प्रसाद Level- 11 PB3+ Grade Pay 6600 22.02.09 Level- 12 22.02.09 PB3+ Grade Pay 7600 - PB3+Grade Pay 7600
72 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

2. अधिसूचना संख्या-1248 (एस) दिनांक 14.02.2020 का शेष प्रावधान यथावत रहेंगे।

आदेश से, दिवेश सेहरा, विशेष सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 37—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in73 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————

सूचना ------

सं0 10--म(cid:339) सं(cid:559)ा कु मारी उफ(cid:330) सं(cid:559)ा पांडेय, पति-आकाश कु मार, मुह(cid:671)ा-क(cid:692)प नगर, (cid:586)ू पुिलस लाइन, थाना-नवादा, िजला–भोजपुर निवासी, शपथ पत्र-27228/14.06.2019 के द्वारा बयान करती (cid:353)ँ िक म(cid:339) सं(cid:559)ा कु मारी उफ(cid:330) सं(cid:559)ा पांडेय, दोनों नामों से जानी/पहचानी जाती (cid:353)ँ।

सं(cid:559)ा कु मारी उफ(cid:330) सं(cid:559)ा पांडे।

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No. 20---I, Dev Narayan Yadav S/o Ram Pravesh Yadav resident of Village-Hans Rajpur Tola Gopali, P.O. & P.S. Ekma, Dist.-Saran, Bihar and services at D.T.P. DVC Durgapur (W.B.) do hereby declare that my name has been wrongly recorded as Deonarayan Yadav in Bihar School Examination Board in place of Dev Narayan Yadav. Also Dev Narayan Yadav and Deonarayan Yadav son of Ram Pravesh Yadav is the same and one identical person i.e. myself vide affidavit sworn on this no. 14621 Executive Magistrate Chapra (Saran) Date-14.12.2020.

Dev Narayan Yadav.

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No. 32---I, Mehul - b S/o Dinanath R/0 Ghagha Ghat, PO-Mahendru, PS-Sultanganj, Patna-6 declare vide Affidavit No. 7640 dated 04.09.2020 that my name has been changed from Mehul - b to Mehul Kumar for all future purposes.

Mehul - b.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 37—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in74 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

बिहार गजट

का

पूरक(अ0)

प्राधिकारी }kjk प्रकाशित

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सं0 2/सी0-111/2010-सा0प्र0-11676

सामान्य प्रषासन विभाग

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संकल्प

9 दिसम्बर 2020

श्री अमर नाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नौहट्‌टा, सहरसा सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक 26/गो0 दिनांक 28.01.2010 द्वारा साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। श्री साहा के विरूद्ध प्रखंड मुख्यालय से अनुपस्थित रहने, बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसल के लिए —षि अनुदान की राषि लाभुकों के बीच वितरित नहीं करने, इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची के विरूद्ध बी0पी0एल0 परिवार के लाभुकों के नाम बैंकों में खोले गये खाता संबंधी प्रतिवेदन नहीं भेजने, निदेष दिये जाने के बावजूद राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत्‌ डाटा इन्ट्री का कार्य प्रारम्भ नहीं करने, एस0जी0एस0वाई0 की राषि खर्च नहीं करने आदि आरोपों सहित अकर्मण्यता, र्काव्यहीनता एवं कार्यों के प्रति लापरवाही का आरोप प्रतिवेदित है।

श्री साहा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की वृहत जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12500 दिनांक 14.09.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी थी। श्री साहा दिनांक 30.09.2020 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही अभी तक प्रक्रियाधीन है।

अतः श्री अमर नाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नौहट्‌टा सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है। आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, हषिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/सी0-1050/2009-सा0प्र0-5464

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9 जून 2020

श्री अंजय कुमार राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 775/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, छपरा (सारण) सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, हथुआ, गोपालगंज के विरूद्ध प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, परसा, सारण के पद पर पदस्थापन अवधि में वित्तीय अनियमितता बरतने संबंधी आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, सारण द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 4581 दिनांक 02.06.2009 द्वारा प्राप्त हुआ। विभागीय पत्रांक 6235 दिनांक 30.06.2009 द्वारा उक्त प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर श्री राय द्वारा दिनांक 27.07.2009 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री राय के स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त इनके विरूद्ध प्रथम द्रष्टया आरोप सही पाये जाने के आलोक में आरोपों की वृहत जाँच हेतु अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9366 दिनांक 04.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 434 दिनांक 28.09.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-01 को अंशतः प्रमाणित एवं आरोप सं0-02, 03 एवं 04 को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।75 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में अंशतः प्रमाणित एवं प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 14612 दिनांक 05.11.2018 द्वारा श्री राय से बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री राय के पत्रांक 05 दिनांक 07.01.2019 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री राय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, जाँच पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं इनसे प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों यथा-आरोप संख्या-1, आरोप संख्या-2 एवं आरोप संख्या-3, जो मुख्यतया विाीय अनियमितता एवं विाीय नियमों का उल्लंघन से संबंधित है, को अंशतः प्रमाणित/प्रमाणित पाया गया है। श्री राय के द्वारा रोकड़ बही का नियमित रूप से निरीक्षण नहीं करना, अग्रिम राशि की वापसी कराने हेतु अपेक्षित कार्रवाई नहीं करना एवं बैंक में जमा राशि के ब्याज की राशि रोकड़ पंजी में प्रविष्टि नहीं किया जाना इनके विाीय प्रबंधन एवं नियमों के प्रति र्काव्यों एवं दायित्व के निर्वहन में लापरवाही को दर्शाता है। इनके द्वारा र्काव्यों में बरती गयी शिथिलता एवं लापरवाही के कारण से विाीय अनियमितता उत्पन्न हुई। आरोप संख्या-4 को भी जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित पाया गया है, जो श्री राय के अनुशासनिक र्काव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री राय द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकार किया गया तथा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''संचयात्मक प्रभाव से (ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज) दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड विनिश्चित किया गया।

उक्त विनिश्चित दंड पर विभागीय पत्रांक 2077 दिनांक 14.02.2019 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 514 दिनांक 07.06.2019 द्वारा श्री राय के विरूद्ध विनिश्चित दंड पर सहमति प्रदान की गयी।

उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री राय के विरूद्ध समर्पित अभ्यावेदन में प्रमाणित आरोप एवं बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा विनिश्चित दंड पर व्यक्त किये गये सहमति के आलोक में श्री अंजय कुमार राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 775/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, छपरा (सारण) सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, हथुआ, गोपालगंज के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8329 दिनांक 24.06.2019 द्वारा ''संचयात्मक प्रभाव से (ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज) दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया।

श्री राय ने उपर्युक्त दंडादेश के विरूद्ध दिनांक 06.12.2019 को पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया, जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9366 दिनांक 04.07.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में मांगे गये द्वितीय कारण पृच्छा में उनके द्वारा अपने बचाव बयान में जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उन्हीं तथ्यों को अपने पुनर्विलोकन याचिका में भी उल्लेखित किया गया है। इस प्रकार श्री राय द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन याचिका में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अंजय कुमार राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 775/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, छपरा (सारण) सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, हथुआ, गोपालगंज के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8329 दिनांक 24.06.2019 द्वारा इनके विरूद्ध ''संचयात्मक प्रभाव से (ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज) दो वेतनवृद्धि पर रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।

अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अंजय कुमार राय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 775/11, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, छपरा (सारण) सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, हथुआ, गोपालगंज के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8329 दिनांक 24.06.2019 द्वारा ''संचयात्मक प्रभाव से (ूपजी बनउनसंजपअम ममििबज) दो वेतनवृद्धि पर रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय। बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गुफरान अहमद, उप सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-01/2020-सा0प्र0-11643

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8 दिसम्बर 2020

श्री अरविन्द कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 591/11, तत्कालीन उप समाहर्त्ता -सह-प्रभारी सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, मधुबनी सम्प्रति जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, समस्तीपुर के विरूद्ध समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 484 दिनांक 24.01.2020 द्वारा आरोप-पत्र (साक्ष्य सहित) गठित कर उपलब्ध कराया गया।

उक्त आरोप पत्र में प्रतिवेदित किया गया है कि श्री झा द्वारा राष्ट्रीय विकास एवं समाज कल्याण परिषद (RVESKP) द्वारा संचालित विशेष दाक ग्रहण केन्द्र मधुबनी को जून, 2017 में डॉ0 आशा दास के मकान से श्रीमती रीता झा के मकान में स्थानांतरित किया गया। TISS की टीम द्वारा विशेष दाक ग्रहण केन्द्र में दिनांक 04.11.2017 को किये गये76 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 निरीक्षण में पाया गया कि यह भवन उसमें रहने वालों के लिए खतरनाक, अनुपयुक्त तथा अस्वास्थ्यकर था। साथ हीं जाँच एजेंसी ने भी अपने जाँच में इस भवन को अस्वास्थ्यकर प्रतिवेदित किया है। श्री झा द्वारा विशेष दाक ग्रहण संस्थान भवन को स्थानांतरित करने के पूर्व उस भवन का निरीक्षण नहीं किया गया तथा जानबूझकर गलत उद्देश्यों से 14 सूत्री जाँच प्रपत्र बिना भरे उस अनुपयुक्त भवन में विशेष दाक ग्रहण को स्थानांतरित करने की स्वी—ति दी गयी, जो इनकी लापरवाही, पदेन दायित्वों के निर्वहन में चूक का परिचायक है।

समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त इनके विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की वृहत जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17 के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है। विभागीय कार्यवाही में मुख्य विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर मुख्य विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया जाय। श्री झा से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।

आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, हषिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-10/2019-सा0प्र0-12494

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24 दिसम्बर 2020

श्री दिलीप कुमार अग्रवाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 959/11, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी, वाहन कोषांग पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध लोकसभा आम निर्वाचन, 2019 में पुलिस बल के आवागमन हेतु वाहन एवं वाहनों में ईंधन समय पर उपलब्ध नहीं कराये जाने तथा ससमय वाहन एवं ईंधन उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण चुनाव कार्यों में व्यवधान उत्पन्न होने संबंधी आरोपों के लिए निर्वाचन विभाग ज्ञापांक 5070 दिनांक 20.05.2019 द्वारा आरोप-पत्र (साक्ष्यों सहित) गठित कर उपलब्ध कराया गया।

निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र में अन्तर्विष्ट आरोपों के लिए श्री अग्रवाल से विभागीय पत्रांक 8134 दिनांक 10.09.202 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री अग्रवाल के पत्र दिनांक 25.09.2020 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

श्री अग्रवाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा अपने स्पष्टीकरण में बचाव हेतु अंकित तथ्यों की प्रमाणिकता के लिए कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव श्री अग्रवाल के स्पष्टीकरण को अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वी—त करते हुए आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री दिलीप कुमार अग्रवाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 959/11, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी, वाहन कोषांग पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध आरोपों की सम्यक्‌ जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

श्री दिलीप कुमार अग्रवाल (बि0प्र0से0) से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें। आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, हषिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।77 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021

सं0 2/आरोप-01-34/2018-सा0प्र0-12617

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28 दिसम्बर 2020

श्री दिलीप कुमार अग्रवाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 959/11, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, पष्चिम चम्पारण, बेतिया के विरूद्ध जिला परिवहन कार्यालय, बेतिया में लगभग 26 हजार निबंधन स्मार्ट कार्ड निर्गमन हेतु लंबित पाये जाने तथा विभागीय कार्यवाही की सुनवाई में उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में शामिल नहीं होने संबंधी प्रतिवेदित आरोप गठित कर जिला पदाधिकारी, बेतिया, पष्चिम चम्पारण के पत्रांक 286 दिनांक 14.09.2018 द्वारा श्री अग्रवाल के विरूद्ध अनुषासनिक कार्रवाई करने हेतु विभाग को उपलब्ध कराया गया।

उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 5321 दिनांक 22.04.2019 द्वारा श्री अग्रवाल से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसके आलोक में श्री अग्रवाल के पत्र दिनांक 16.05.2019 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री अग्रवाल द्वारा अपने उपर लगाये गये आरोप से इंकार किया गया है।

श्री अग्रवाल के विरूद्ध जिला परिवहन कार्यालय, बेतिया में लगभग 26 हजार निबंधन स्मार्ट कार्ड निर्गमन हेतु लंबित पाये जाने तथा विभागीय कार्यवाही की सुनवाई में उपस्थापन पदाधिकारी के रूप में शामिल नहीं होने संबंधी आरोप प्रतिवेदित है, जो कर्त्तव्यहीनता का द्योतक है। उसके आलोक में उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकारयोग्य प्र्रतीत नहीं होता है। श्री अग्रवाल के विरूद्ध आरोप गंभीर प्र—ति का है।

अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अग्रवाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13203 दिनांक 23.09.2019 द्वारा आरोपों की बृहद्‌ जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 230 दिनांक 04.04.2020 द्वारा श्री अग्रवाल के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोप संख्या-01 को प्रमाणित एवं आरोप संख्या-02 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर द्वारा समर्पित मंतव्य/निष्कर्ष निम्नवत्‌ है :- ''निबंधन स्मार्ट कार्ड लंबित रहने के कारण वाहन स्वामियों को निबंधन स्मार्ट कार्ड उपलब्ध नहीं हो पाया। वाहन के निबंधन के उपरांत निबंधन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना जिला परिवहन पदाधिकारी का दायित्व है। अतः निबंधन स्मार्ट कार्ड निर्गमन हेतु लंबित रखने की जिम्मेदारी से कार्यालय प्रधान होने के कारण श्री दिलीप कुमार अग्रवाल, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, बेतिया को मुक्त नहीं किया जा सकता है तथा बड़ी संख्या में निबंधन स्मार्ट कार्ड निर्गमन हेतु लंबित रखने के वे दोषी हैं एवं नियंत्री पदाधिकारी पर दोषारोपण सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल भी है।''

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर द्वारा समर्पित मंतव्य/निष्कर्ष पर विभागीय पत्रांक 6274 दिनांक 29.06.2020 द्वारा श्री अग्रवाल से बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री अग्रवाल के पत्र दिनांक 16.07.2020 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें इनका कहना है कि :-

(क) विभागीय कार्यवाही के अंतर्गत संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिनांक 15.02.2020 को समर्पित मेरे प्रारम्भिक बचाव अभिकथन के किसी भी बिन्दु ('क' से 'ज' तक) का प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा विभागीय मंतव्य में खंडन नहीं किया गया है। बिना कोई विवेचना के हीं और बिना किसी बिन्दु का खंडन किए हीं प्रस्तुतीकरण पदाधिाकरी ने मेरे विरूद्ध प्रतिकूल मंतव्य अंकित किया था-जो कि विरोधाभाषी, अनुचित एवं अग्राहय है। तथापित संचालन पदाधिकारी ने उसी मंतव्य को अक्षरषः महत्व दिया है।

(ख) उक्त मंतव्य पर मैंने अपना विरोध दर्ज कराते हुए दिनांक 20.03.2020 को एक पूरक स्पष्टीकरण समर्पित किया था। इसकी कोई चर्चा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में नहीं है। प्रतीत होता है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में तकनीकी रूप से की यह एक भारी चूक है।

(ग) विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा जो विभागीय मंतव्य मांगा गया था वह संचालन के नियमों के प्रतिकूल था। बिपार्ड (BIPARD) द्वारा प्रकाषित- 'विभागीय कार्यवाही हस्तक' के अध्याय-7 की कंडिका-10(ख) पृष्ठ संख्या-165 में अंकित है- ''....................आरोपी द्वारा समर्पित अभिकथन पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विभाग/अनुषासनिक प्राधिकार से मंतव्य की मांग किया जाना विधि सम्मत नहीं है ........। उक्त मंतव्य से संचालन पदाधिकारी के प्रभावित होने की आषंका रहती है जिससे विभागीय कार्यवाही प्रभावित/दूषित हो सकती है।''

बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के प्रावधानों के आलोक में भी यह विधिसम्मत नहीं है।

(घ) प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपस्थापित विभागीय मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन दोनों में हीं मूल आरोप के विषय वस्तु से भिन्न तथ्यों पर अभिमत दिया गया है। मूल आरोप यह है कि लंबित मामलों के निष्पादन के लिए दो बार निदेष दिये जाने के बावजूद मैंने ध्यान नहीं दिया। इसी बात का साक्ष्य भी संलग्न है पर निष्कर्ष इस बिन्दु पर न होकर 'लंबित क्यों था'-इस विषय पर केन्द्रित हो गया है।

(ड.) प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का विभागीय मंतव्य कंडिकावार नहीं होने के कारण स्वयं में त्रुटिपूर्ण था। फिर उस पर दायर मेरे आपत्ति/पूरक अभिकथन पर विचार किए बिना हीं उसी मंतव्य का समर्थन करना त्रुटिपूर्णता की पुनराविृति है। इस कारण विभागयी कार्यवाही का संचालन प्रदुषित हो गया है।78 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 आरोप संख्या-1 तथ्यात्मक रूप से मेरे उपर लागू नहीं होता है क्योंकि :-

(क) प्रपत्र 'क' के साथ साक्ष्य के रूप में संलग्न दोनों पत्र न तो मेरे नाम से है और न हीं मेरे कार्यावधि के हैं। इसमें से एक विभागीय पत्र तो निर्गत हीं नहीं है जबकि दूसरा पत्र मेरे स्थानापन्न के नाम से है। वस्तुतः दोनों पत्र मेरे कार्यावधि के बाद के हैं। फलस्वरूप ससाक्ष्य समर्थित आरोप संख्या-1 वस्तुतः साक्ष्य विहीनता की स्थिति में है। अतएव इस विभागीय कार्यवाही के साक्ष्य गलत एवं भ्रामक है। (ख) निबंधन कार्ड लंबित होने का मामला RTPS (लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम-2011) से आच्छादित होता हैं जिसके अनुसार जब तक 30 कार्य दिवस समाप्त नहीं हो जाता है तब तक उसे लंबित नहीं माना जाएगा। मेरे संदर्भ में ऐसा एक भी मामला नहीं है। निबंधन स्मार्ट कार्ड लंबित होने की संख्या एवं स्थिति में हर दिन परिवर्तन होता रहता है। अतएव किसी कार्यकाल के बाद की स्थिति का आरोप पूर्व पदाधिकारी पर लगाया जाना अनुचित है।

(ग) मैंने अपने कार्यकाल में कार्यों का निष्पादन बड़े ही तीव्र गति से किया था। इस हेतु मोतिहारी एवं बेतिया के उभयनिष्ठ प्रोग्रामर को बेतिया में हीं फुल टाईम तैनात कर दिया था। यह उल्लेखनीय है कि वाहन निबंधन में एकाएक वृद्धि की परिस्थिति में दिनांक 13.03.2018 को मैंने कम्प्यूटर सेक्सन प्रभारी श्री संजय कुमार मंडल से स्पष्टीकरण पूछते हुए त्वरित गति से कार्य निष्पादन करने का आदेष भी दिया था। प्रोग्रामर के मौखिक तैनाती के साक्ष्य के लिए बेतिया के उपस्थिति पंजी का अवलोकन किया जा सकता है। यह फिलहाल मेरे पास उपलबध नहीं है।

(घ) 26000 की यह संख्या निष्चित नहीं है, बल्कि लगभग में है। दिनांक 13.04.2018 को एक अनिर्गत एवं अपुष्ट विभागीय पत्र जो मेरे कार्यकाल के बाद की है, में भी वह संख्या लगभग होने के कारण अनिष्चित थी। मेरे स्थानान्तरण आदेष निर्गमन की तिथि 26.03.2018 में तथाकथित रूप में भी स्मार्ट कार्ड लंबित होने की संख्या वास्तव में क्या थी यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

(ड.) स्थानान्तरण की तिथि दिनांक 26.03.2018 के बाद नये पदाधिकारी ने प्रभार लेने में कई बार अपनी विवषता दिखाई थी तथा टालमटोल किया था। जबकि मैं और मेरा ऑफिस बराबर इस हेतु सचेष्ट रहा। दिनांक 03.04.2018 की सुबह से बात करते हुए देर संध्या तक हमलोग उनका इंतजार करते रहे। पर अंततः उन्होंने तत्कालीन अपर समाहर्त्ता के प्रकोष्ठ में यह कहते हुए मना कर दिया था कि उनके पास पहले से ही बहुत काम है तथा इसके लिए पहले उन्हें जिला पदाधिकारी महोदय से बात करनी होगी।

(च) स्थानान्तरण के बाद की उक्त परिस्थिति पर ध्यान दिये बिना जिस विभागीय पत्र को मेरे विरूद्ध उपयोग किया जा रहा है वह मेरे प्रभार देने के बाद का है, अनिष्चित है, आरोप के उद्‌देष्य से न होकर सुधारात्मक उद्‌देष्य का है तथा मेरे स्थानान्तरण आदेष के 18 दिन बाद का है। स्थानान्तरण का आदेष निर्गत हो जाने के बाद किसी पदाधिकारी के लिए वह स्थान संक्रमण काल होता है, वह भी अतिरिक्त प्रभार वाले पदाधिकारी के लिए। स्पष्ट है कि मेरे विरूद्ध इस विभागीय कार्यवाही को आरम्भ करने हेतु लगाये गये आरोप तार्किक नहीं है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अग्रवाल के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री अग्रवाल के बचाव अभ्यावेदन की सम्यक्‌ समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त आरोप संख्या-1 को ''प्रमाणित'' एवं आरोप संख्या-2 को ''अप्रमाणित'' पाया गया। आरोप संख्या-1 लगभग 26 हजार वाहन निबंधन स्मार्ट कार्ड को निर्गम हेतु लंबित रखने का आरोप संचालन पदाधिकारी ने जाँचोपरान्त सही प्रतिवेदित किया। अभ्यावेदन से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी ने लंबित समार्ट कार्ड के निष्पादन हेतु सार्थक प्रयास किए थे और प्रयास करने के पश्चात्‌ लगभग 2500 स्मार्ट कार्ड ही लंबित थे। अभ्यावेदन के साथ संलग्न पत्राचार से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी ने परिवहन विभाग से पत्राचार भी किया था, ताकि शीघ्र निष्पादन हो सके। यह भी द्रष्टव्य है कि आरोप के अवधि में उनके मूल पदस्थापन जिला परिवहन पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण था तथा उन्हें जिला परिवहन पदाधिकारी, पष्चिम चम्पारण का प्रभार दिया गया था। दोनों ही जिले बहुत बड़े आकार के हैं तथा कार्य की अधिकता है। इस प्रकार कुछ काम परिस्थितिजन्य कारणों से लंबित रहने की बात समझ में आती है। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री अग्रवाल को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''चेतावनी तथा दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोकने'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री दिलीप कुमार अग्रवाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 959/11, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, पष्चिम चम्पारण, बेतिया सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) चेतावनी तथा (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

आदेश :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, हषिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।79 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-16/2019-9451 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------- संकल्प 29 दिसम्बर 2020 श्री राजेष कुमार राय, अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(7) के विहित प्रावधान का उल्लंघन करते हुए श्री सुभाष कुमार, तत्कालीन सहायक अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में आरोप पत्र गठित करने में गंभीर लापरवाही बरती गई है। उक्त आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9161 दिनांक 23.10.2019 द्वारा श्री राय के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 229 दिनांक 04.04.2020 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राय के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया, जिसकी समीक्षा की गई एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं को अभिलेखित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांंक 6706 दिनांक 25.09.2020 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री राय से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। तद्‌आलोक में श्री राय द्वारा अपने पत्रांक 2660 दिनांक 08.10.2020 के माध्यम से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब समर्पित किया गया। 3. श्री राजेश कुमार राय, अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी द्वारा अपने ज्ञापांक 3244 दिनांक 04.10.2018 के माध्यम से श्री सुभाष कुमार, सहायक अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी को कर्तव्य में गंभीर लापरवाही बरतने के कारण निलम्बित किया गया था। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियन्त्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(7) के अनुसार निलम्बित सरकारी सेवक के विरूद्ध तीन माह के अंदर आरोप-पत्र गठन किये जाने का प्रावधान है। 4. श्री राजेश कुमार राय, अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी द्वारा निलम्बित सहायक अधीक्षक के विरूद्ध जो आरोप-पत्र गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया उसमें साक्षियों की सूची संलग्न नहीं थी एवं आरोप पत्र निर्धारित प्रपत्र में नहीं था। विभाग द्वारा त्रुटि निराकरण के लिए निदेशित किये जाने के उपरान्त दोबारा भेजे गये आरोप-पत्र पर उनका हस्ताक्षर अंकित नहीं था। इसके लिए पुनः विभाग द्वारा प्रयास किया गया। अंततः तीन महीने के उपरान्त श्री राय द्वारा अपने पत्रांक 294 दिनांक 29.01.2019 के माध्यम से निलम्बित सहायक अधीक्षक के विरूद्ध आरोप-पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया। 5. इस कार्य में श्री राय द्वारा बरती गई लापरवाही के लिए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। जिसके जाँचोपरान्त संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर द्वारा श्री राय के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। परन्तु श्री राय द्वारा अनेक बार त्रुटिपूर्ण आरोप-पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया था एवं काफी मुशक्कत के बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियन्त्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(7) द्वारा निर्धारित अवधि के उपरान्त सही आरोप-पत्र उपलब्ध कराये जाने के इस कार्य मेंं श्री राय की लापरवाही स्पष्ट परिलक्षित होने के कारण विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गई। 6. श्री राय द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कारा में कर्मियों की अत्यधिक रिक्ति एवं कार्यबोझ का हवाला देते हुए आरोप-पत्र गठित करने में हुए विलम्ब को परिस्थितिजन्य एवं गैरइरादतन बताया गया है। 7. श्री राय से कार्यालय प्रधान होने के कारण कार्य में स्वीकार्य (acceptable) गति एवं शुद्धता की अपेक्षा की जाती है। श्री राय द्वारा आरोप पत्र गठित करने में कई बार की गई गलती एवं उसमें लगाये गये अत्यधिक समय से श्री राय की कर्त्तव्य के प्रति स्पष्ट लापरवाही परिलक्षित होती है। अतः उनका द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार्य नहीं है। 8. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री राजेश कुमार राय, काराधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत उन्हें निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :- (i) '' निन्दन ''। (ii) '' दो (02) वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड ''। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)80 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 सं0 27/आरोप-01-50/2019-सा0प्र0-12690

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

30 दिसम्बर 2020

श्री मृत्युंजय कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1090/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, गोपालगंज के विरूद्ध जिला पदाधिकारी गोपालगंज के पत्रांक-3383 दिनांक-05.10.2016 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' अग्रेतर कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराया गया।

2. श्री कुमार के विरूद्ध जिला पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट निदेश देने के बावजूद भी तथ्यों से पूर्ण अवगत हुये बिना अनुमति आदेश पत्र निर्गत करने, पृच्छा किये जाने पर वस्तु स्थिति से अवगत नहीं कराने तथा अनभिज्ञता जाहिर करने, अपने कार्यालय कर्मियों पर नियंत्रण नहीं रहने/संवेदनशील मुद्दों की जानकारी नहीं देने तथा विधि व्यवस्था की समस्या एवं उससे उत्पन्न फलाफलों का मूल्यांकन नहीं करने का आरोप प्रतिवेदित किया गया।

3. प्रतिवेदित आरोप के लिये विभागीय पत्रांक-15077 दिनांक-08.11.2016 द्वारा श्री कुमार स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री कुमार द्वारा इस विभाग को अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

4. विभागीय पत्रांक-1223 दिनांक-02.02.2017 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के पत्रांक-688 दिनांक-27.02.2018 द्वारा मंतव्य विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री कुमार के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया। विभागीय पत्रांक-8455 दिनांक-26. 06.2018 द्वारा आरोप पत्र, प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से प्राप्त मंतव्य की छायाप्रति भेजते हुये आयुक्त सारण प्रमंडल, सारण से पूरे प्रकरण की समीक्षा कर मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। आयुक्त सारण प्रमंडल, सारण के पत्रांक-10 दिनांक-12.01.2019 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें अंकित किया गया है कि ''............ .......... जिला पदाधिकारी द्वारा मंतव्य प्रेषण के क्रम में सभी तथ्यों का विश्लेषण नहीं किया गया है, बल्कि संबंधित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण में वर्णित स्थिति के संबंध में एक अन्य पदाधिकारी द्वारा समर्पित प्रतिवेदन से प्रभावित होकर अपनी सहमति प्रदान की गयी है।

अतः अधोहस्ताक्षरी द्वारा उपरोक्त कारणों से जिला पदाधिकारी के द्वारा प्रेषित मंतव्य पर अपनी असहमति व्यक्त करते हुये पूर्व में इस स्तर से प्रेषित मंतव्य पर ही सहमति प्रदान की जाती है''।

5. विभागीय पत्रांक-10323 दिनांक-31.07.2019 द्वारा प्रमंडलीय आयुक्त सारण से सुस्पष्ट एवं कंडिकावार मंतव्य की मांग की गयी। आयुक्त के सचिव, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक-2437 दिनांक-25.11.2019 द्वारा आरोपवार मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें प्रतिवेदित किया गया कि ''इस आरोप के संदर्भ में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूर्व में तत्कालीन आयुक्त द्वारा इस आरोप के संबंध में दिये गये मंतव्य से मैं सहमत हूँ''।

6. श्री कुमार के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, गोपालगंज से प्राप्त आरोप पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

7. प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में श्री कुमार द्वारा अपना स्पष्टीकरण इस विभाग को समर्पित किया गया है, जिसमें उनके द्वारा कंडिकावार स्थिति स्पष्ट करते हुये प्रतिवेदित आरोपों से इनकार किया गया है तथा स्पष्टीकरण पर विचार करते हुए विधि व्यवस्था संबंधी मामले में जिला पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा लगाये गये आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। उनके द्वारा अंत में कहा गया है कि कार्य के दौरान विधि व्यवस्था संधारण एवं स्थिति पर नियंत्रण हेतु दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति संबंधी लिया गया निर्णय, सद्‌भाव (Good Faith) में लिया गया निर्णय था।

8 उपर्युक्त वर्णित तथ्यों तथा पूर्व में श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर तत्कालीन/वर्तमान आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री कुमार के स्पष्टीकरण की सम्य्‌क समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री कुमार के स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुये तथा प्रतिवेदित आरोपों के लिये उन्हें दोषी मानते हुये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित ''(i) निदंन (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।

9. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मृत्युंजय कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1090/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, गोपालगंज के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित ''(i) निन्दन (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव।81 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 सं0 27/आरोप-01-81/2019-सा0प्र0-12689 ------- 30 दिसम्बर 2020 श्रीमती किरण सिंह, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 1228/2011, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध जन वितरण दूकानों का निर्धारित मापदंड के अनुसार नियमित निरीक्षण एवं पर्याप्त पर्यवेक्षण नहीं किये जाने के कारण अरवल अनुमंडल के आश्रित परिवारों/लाभुकों का निर्धारित मात्रा एवं दर पर खाद्यान्न तथा किरासन तेल की आपूर्ति प्रत्येक महीने में नहीं होने एवं खाद्यान्न/किरासन तेल की कालाबाजारी करने संबंधी आरोप खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक-4309 दिनांक-11.09.2019 द्वारा प्रतिवेदित किया गया।

2. प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

3. विभागीय पत्रांक-15203 दिनांक-08.11.2019 द्वारा श्रीमती सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्रीमती सिंह द्वारा विभाग को अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमे उनके द्वारा कंडिकावार/आरोपवार स्थिति स्पष्ट करते हुये आरोपों से इनकार किया गया।

4. विभागीय पत्रांक-2305 दिनांक-13.02.2020 द्वारा श्रीमती सिंह के स्पटीकरण पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। उक्त के आलोक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1744 दिनांक-24.04.2020 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्रीमती सिंह के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं प्रतिवेदित किया गया।

5. श्रीमती सिंह के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्राप्त मंतव्य की सम्य्‌क समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत श्रीमती सिंह के विरूद्ध आंशिक रूप से प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिये उन्हें दोषी मानते हुये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित ''(i) निदंन (ii) दो वेतनवृद्धियां असंचयात्मक प्रभाव से रोकने'' का दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।

6. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्रीमती किरण सिंह, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 1228/2011, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों के तहत नियम-14 में उल्लिखित ''(i) निदंन (ii) दो वेतनवृद्धियां असंचयात्मक प्रभाव से रोकने'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव।

------- सं0 27/आरोप-01-09/2019-सा0प्र0-12629 ------- 29 दिसम्बर 2020 श्री ललित नारायण दूबे, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-21/08, तत्कालीन सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी, बेरमो कथरा स्टेट बैंक में गबन के आरोप में केस संख्या-आर0सी0-27 ए/88 धारा-120 बी, 409, 420, 467, 468, 471, 477ए भा0द0वि0 तथा धारा-5(2)-सह-पठित धारा-5(1) सी0 एवं डी0 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-11/1947 के अंतर्गत दिनांक 24.08.88 को गिरफ्तार कर बांकीपुर, केन्द्रीय कारा में बन्दी बनाये गये एवं विभागीय आदेश ज्ञाप सं0-11921 दिनांक-19.09. 1988 द्वारा गिरफ्तारी एवं जेल जाने की तिथि 24.08.1988 से अगले आदेश तक श्री दूबे को बिहार सेवा संहिता के नियम-99 एवं 100 तथा असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-49(ए) के तहत निलंबित किया गया। विभागीय ज्ञापांक-6042 दिनांक-05.05.1989 द्वारा श्री दूबे को निलंबन मुक्त किया गया। 2. श्री दूबे के विरूद्ध दर्ज सी0बी0आई0 वाद संख्या- आर0सी0-27 ए/88 पैट में अभियोजन स्वीकृति बिहार सरकार के विधि विभाग के आदेश संख्या एस0पी0-21/90/4623/जे0, पटना, दिनांक 31.08.1990 द्वारा दी गयी एवं सी0बी0आई0 द्वारा माननीय सी0बी0आई0 न्यायालय में मई 1991 में चार्जशीट दायर की गयी। 3. श्री दूबे के विरूद्ध आर0सी0 संख्या-27 ए/1988-पैट से संबंधित मुकदमे में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सी0बी0आई0, धनबाद द्वारा दिनांक 09.03.2018 एवं 12.03.2018 को श्री दूबे को सजायाफ्ता घोषित करते हुए विभिन्न धाराओं में सश्रम कारावास एवं अर्थ दंड दिये जाने का आदेश पारित किया गया है। 4. आलोच्य आपराधिक कुकृत्य में श्री दूबे की भूमिका मुख्य सूत्रधार की थी। इस हेतु उन्होंने सी.सी.एल के प्राधिकारों को दिनांक 16.10.1987 का एक अनुदेश-पत्र भेज कर कोयला व्यवसायियों के आवेदनों को सत्यापन हेतु उपलब्ध कराने की सूचना दी थी, जिसके लिए वह अधिकृत नहीं थे। संबंधित अभिलेखों को कुत्सित मंशा से ही उन्होंने संधारित नहीं किया।82 बिहार गजट, 13 जनवरी 2021 5. श्री दूबे, पदीय अधिकारों और दायित्वों का दुरुपयोग कर प्रासंगिक प्रकरण में, यदि सहयोग नहीं करते, तब बैंक की राशि का गबन संभव नहीं होता। इस प्रकार बैंक की प्रश्नगत राशि को हड़पने में श्री दूबे की पूर्ण सहभागिता थी। उनका यह कुकृत्य घोर कदाचार का भी परिचायक है। 6. श्री दूबे के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, विशेष न्यायालय, सी0बी0आई0, धनबाद द्वारा पारित आदेश एवं उनसे प्राप्त बचाव बयान/अभ्यावेदन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री दूबे द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए इनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) के संगत प्रावधानों के तहत शत-प्रतिशत (100%) पेंशन रोके जाने का दंड विनिश्चित किया गया। 7. श्री दूबे के विरूद्ध विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-5693 दिनांक-15.06.2020 एवं पत्रांक-10196 दिनांक-22.10.2020 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श/सहमति की मांग की गयी। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक-2161 दिनांक-24.11.2020 द्वारा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी।

8. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री ललित नारायण दूबे, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक -21/08, तत्कालीन सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी, बेरमो के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के संगत प्रावधानों के तहत ''शत-प्रतिशत (100%) पेंशन रोके'' जाने का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 37—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 13 January 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2021-01-13.2/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2021-01-13.2.