;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध
;बपकरू1द्ध
ख्;बपकरू3द्ध;बपकरू3द्ध ख्;बपकरू8द्ध
;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू18द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू19द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू20द्ध
;बपकरू1द्ध;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध
;बपकरू19द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू20द्ध
5 ;बपकरू4द्ध 1;बपकरू27द्ध42 ;बपकरू30द्ध;बपकरू10द्ध;बपकरू31द्ध
;बपकरू9द्ध;बपकरू10द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू14द्ध;बपकरू15द्ध ;बपकरू4द्ध
;बपकरू4द्ध ;बपकरू4द्ध 25 ष् 2;बपकरू10द्ध21
सं॰सं॰सं॰सं॰11/आ0नी0-11/आ0नी0-11/आ0नी0-11/आ0नी0-I-06/2017-06/2017-06/2017-06/2017/962//962//962//962/ सा0प्र0सा0प्र0सा0प्र0सा0प्र0 सामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासन विभागविभागविभागविभाग ——— ladYiladYiladYiladYi 22222222 tuojh 2021tuojh 2021tuojh 2021tuojh 2021 दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक विषय :-विषय :-विषय :-विषय :- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति एवं उच्च शैक्षणिक संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 संस्थानों के नामांकन में बहु-दिव्यांगता को सम्मिलित करने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। के प्रावधानों को केन्द्रीय के प्रावधानों को केन्द्रीय के प्रावधानों को केन्द्रीय के प्रावधानों को केन्द्रीय दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। के प्रावधानों को केन्द्रीय के प्रावधानों को केन्द्रीय के प्रावधानों को केन्द्रीय के प्रावधानों को केन्द्रीय दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप करने के संबंध में।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के अर्द्ध सरकारी पत्र दिनांक-27.04. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के अर्द्ध सरकारी पत्र दिनांक-27 सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के अर्द्ध सरकारी पत्र दिनांक-27 2017 द्वारा पूर्व में निर्गत सभी अनुदेशों को समेकित करते हुए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अधीन लाने 2017 द्वारा पूर्व में निर्गत सभी अनुदेशों को समेकित करते हुए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अधीन ल 2017 द्वारा पूर्व में निर्गत सभी अनुदेशों को समेकित करते हुए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अधीन ल और प्रक्रियात्मक मसलों सहित कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने की दृष्टि से एक समेकित अनुदेश निर्गत किया गया है, और प्रक्रियात्मक मसलों सहित कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने की दृष्टि से एक समेकित अनुदेश निर्गत किया गया है, और प्रक्रियात्मक मसलों सहित कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने की दृष्टि से एक समेकित अनुदेश निर्गत किया गया है, इसके आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-13062 दिनांक-12.10.2017 द्वारा राज्याधीन इसके आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-13062 दिनांक-12 इसके आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-13062 दिनांक-12 2018 द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन के लिए सेवाओं की नियुक्ति में तथा संकल्प संख्या-7162 दिनांक-31.05.2018 द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन के लिए सेवाओं की नियुक्ति में तथा संकल्प संख्या-716 विस्तृत संकल्प निर्गत किया गया है। इस संकल्प के द्वारा राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति तथा शैक्षणिक संस्थानों में विस्तृत संकल्प निर्गत किया गया है। इस संकल्प के द्वारा राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति तथा शैक्षणिक संस्थानों में विस्तृत संकल्प निर्गत किया गया है। इस संकल्प के द्वारा राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति तथा शैक्षणिक संस्थानों में एवं 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण नामांकन में दिव्यांगजनों को 3 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के स्थान पर क्रमशः 4 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण नामांकन में दिव्यांगजनों को 3 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के स्थान पर क्रमशः 4 प्रतिशत अनुमान्य कराया गया है।
इन संकल्प में किये गए कतिपय प्रावधान भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में किये इन संकल्प में किये गए कतिपय प्रावधान भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में किये इन संकल्प में किये गए कतिपय प्रावधान भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में किये गए प्रावधान के समरूप नहीं होने के कारण इन संकल्प को परिमार्जित करने की आवश्यकता है। गए प्रावधान के समरूप नहीं होने के कारण इन संकल्प को परिमार्जित करने की आवश्यकता है। गए प्रावधान के समरूप नहीं होने के कारण इन संकल्प को परिमार्जित करने की आवश्यकता है।
2222.... अतः राज्य सरकार द्वारा राज् याधीन सेवाओं की नियुक्ति तथा उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में अतः राज्य सरकार द्वारा राज्याधीन सेवाओं की नियुक्ति तथा उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में दिव्यांगजनों को क्रमशः 4 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण अनुमान्य कराते हुए पूर्व के निर्गत सभी निदेशों को दिव्यांगजनों को क्रमशः 4 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण अनुमान्य कराते हुए पूर्व के निर्गत सभी निदेशों को दिव्यांगजनों को क्रमशः 4 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण अनुमान्य कराते हुए पूर्व के निर्गत सभी निदेशों को कत तथ्यों के समावेशन का निर्णय एकीकृत कर एक समेकित निदेश निर्गत किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत निम्नांकित तथ्यों के समावेशन का निर्णय एकीकृत कर एक समेकित निदेश निर्गत किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत निम्नांि लिया गया है :-
(1)(1)(1)(1) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-34 के तहत राज्य सरकार के सभी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-34 के तहत राज्य सरकार के सभी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-34 के तहत राज्य सरकार के सभी विभागों/कार्यालयों/राजकीय लोक उपक्रमों/निगमों/निकायों/बोर्डों के सभी प्रकार के पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों विभागों/कार्यालयों/राजकीय लोक उपक्रमों/निगमों/निकायों/बोर्डों के सभी प्रकार के पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों विभागों/कार्यालयों/राजकीय लोक उपक्रमों/निगमों/निकायों/बोर्डों के सभी प्रकार के पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों यांगों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-32 के तहत् के नियोजन में दिव्यांगों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-32 के तहत् यांगों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-32 के तहत्2 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 25 ष् 2;बपकरू10द्ध21 सभी सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे सभी शैक्षणिक संस्थान, जिन्हें राज्य सरकार से सहायता प्राप्त होती है, के अन्तर्गत नामांकन में दिव्यांग अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया जायेगा। यह आरक्षण अलग से नहीं अपितु चयनित दिव्यांग जिस श्रेणी से संबंधित होंगे, उनका सामंजन उसी श्रेणी के विरूद्ध किया जायेगा। अर्थात आरक्षित वर्ग (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यन्त पिछड़ा वर्ग एवं पिछड़ा वर्ग) के दिव्यांग संगत आरक्षित वर्ग से और गैर आरक्षित वर्ग के दिव्यांग अभ्यर्थी गैर आरक्षित वर्ग के विरूद्ध सामंजित किये जायेंगे। (2)(2)(2)(2) गुणागुण (मेरिट) के आधार पर दिव्यांगों की गणना गैर आरक्षित वर्ग के अन्तर्गत की जायेगी, बशर्ते उन्होने आरक्षण संबधित कोई छूट यथा आयू सीमा, अर्हतांक, कम्प्यूटर सक्षमता इत्यादि का लाभ प्राप्त नहीं किया हों। (3)(3)(3)(3) दिव्यांगों के लिए आरक्षण का प्रावधान यद्यपि कंडिका-2 (1) में उल्लिखित सेवाओं एवं संगठनों के सभी प्रकार के पदों एवं सेवाओं में किया गया है, फिर भी यदि उसमें दिव्यांगों के लिए आरक्षण उपयुक्त नहीं समझा जाता हो, तो संबंधित नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा इसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-20(1) के परन्तुक के आलोक में इसे दिव्यांगता आरक्षण से स्थायी रूप से मुक्त रखने संबंधी प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को प्रेषित कर सकते हैं। प्रशासी विभाग से प्राप्त प्रस्ताव को इस उद्देश्य हेतु गठित निम्न समिति के समक्ष रखा जायेगाः-
(क) मुख्य सचिव (ख) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग (ग) अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, समाज कल्याण विभाग (घ) प्रधान सचिव/सचिव, स्वास्थ्य विभाग (ड़) संबंधित विभाग के प्रधान सचिव/सचिव/विभागाध्यक्ष (च) निःशक्तता आयुक्त समिति की अनुशंसा के उपरान्त राज्य सरकार के अनुमोदनोपरान्त उक्त पदों को दिव्यांगता आरक्षण से स्थायी रूप से विमुक्त समझा जायेगा।
(4)(4)(4)(4) दिव्यांगता की परिभाषाएं - ((((i)))) गतिविषयक् दिव्यांगता (सुनिश्चित गतिविधियों को करने में किसी व्यक्ति की असमर्थता जो स्वयं और वस्तुओं की गतिशीलता से सहबद्ध है जिसका परिणाम पेशीकंकाल और तंत्रिका प्रणाली या दोनों में पीड़ा है), जिसके अन्तर्गत -
(क)(क)(क)(क) ''कुष्ठ रोगमुक्त व्यक्ति'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो कुष्ठ से रोगमुक्त हो गया है, किन्तु निम्नलिखित से पीड़ित है :-
(1) हाथ या पैरों में सुग्राहीकरण का ह्रास के साथ-साथ आंख और पलक में सुग्राहीकरण का ह्रास और आंशिक घात किंतु व्यक्त विरूपता नहीं है;
(2) व्यक्त विरूपता और आंशिक घात किंतु उसके हाथों और पैरों में पर्याप्त गतिशीलता है, जिससे वह सामान्य व्यावसायिक क्रियाकलापों में लगे रहने के लिए सक्षम है;
(3) अत्यन्त शारीरिक विरूपता के साथ-साथ वृद्ध जो उसे लाभप्रद व्यवसाय करने से निवारित करती है और ''कुष्ठ रोगमुक्त व्यक्ति'' पद का तद्नुसार अर्थ लगाया जाएगा;
(ख)(ख)(ख)(ख) ''प्रमस्तिष्क घात'' से कोई गैर-प्रगामी तन्त्रिका स्थिति का समूह अभिप्रेत है, जो शरीर के संचलन को और पेशियों के समन्वयन को प्रभावित करती है, जो मस्तिष्क के एक या अधिक विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में क्षति के कारण उत्पन्न होता है, जो साधारणतः जन्म से पूर्व, जन्म के दौरान या जन्म के तुरंत पश्चात् होता है;
(ग)(ग)(ग)(ग) ''बौनापन'' से कोई चिकित्सय या आनुवंशिक दशा अभिप्रेत है, जिसके परिणामस्वरूप किसी वयस्क व्यक्ति की लंबाई चार फीट दस इंच (147 से०मी०) या उससे कम रह जाती हैै;
(घ)(घ)(घ)(घ) ''पेशीयदुष्पोषण'' से वंशानुगत, आनुवंशिक पेशी रोग का समूह अभिप्रेत है, जो मानव शरीर को संचलित करने वाली पेशियों को कमजोर कर देता है और बहुदुष्पोषण के रोगी व्यक्तियों के जीन में वह सूचना अशुद्ध होती है या नहीं होती है, जो उन्हें उस प्रोटीन को बनाने से निवारित करती है, जिसकी उन्हें स्वस्थ पेशियों के लिए आवश्यकता होती है, इसकी विशेषता प्रगामी कंकाल पेशी की कमजोरी, पेशी प्रोटीनों में त्रुटि और पेशी कोशिकाओं और टिशुओं की मृत्यु है;
(ड़)(ड़)(ड़)(ड़) ''तेजाबी आक्रमण पीड़ित'' से तेजाब या समान संक्षारित पदार्थ को फेंककर किए गए हिंसक हमले के कारण विद्रूपित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ii) दृष्टिगत ह्रास -3 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 25 ष् 2;बपकरू10द्ध2;बपकरू10द्ध (क)(क)(क)(क) ''अंधता'' से ऐसी दशा अभिप्रेत है, जिसमें सर्वोत्तम सुधार के पश्चात् व्यक्ति में निम्नलिखित स्थितियों में से कोई एक स्थिति विद्यमान होती है, -
(1) दृष्टि का पूर्णतया अभाव; या (2) सर्वाधिक संभव सुधार के साथ बेहतर आंख में दृष्टि सुतीक्षणता 3/60 से कम या 10/200 (स्नेलन) से कम, या
(3) 10 डिग्री से कम के किसी कोण पर कक्षांतरित दृश्य क्षेत्र की परिसीमा; (ख)(ख)(ख)(ख) ''निम्न दृष्टि'' से ऐसी स्थिति अभिप्रेत है, जिसमें व्यक्ति की निम्नलिखित में से कोई एक स्थिति होती है, अर्थात्ः-
(1) बेहतर आंख में सर्वाधिक संभव सुधार के साथ 6/18 से अनधिक या 20/60 से कम से 3/60 तक या 10/200 (स्नेलन) तक दृश्य सुतीक्षणता; या
(2) 40 डिग्री से कम से 10 डिग्री तक की कक्षांतरित दृष्टि की क्षेत्र परिसीमा; (iii) ''श्रवण शक्ति का ह्रास'' - (क) ''बधिर'' से दोनों कानों में संवाद आवृत्तियों में 70 डेसिबिल श्रव्य ह्रास वाले व्यक्ति अभिप्रेत है; (ख) ''ऊंचा सुनने वाला व्यक्ति'' से दोनों कानों से संवाद आवृत्तियों में 60 डेसिबिल से 70 डेसिबिल श्रव्य ह्रास वाला व्यक्ति अभिप्रेत है;
(iv) ''वाक् और भाषा दिव्यांगता'' से लेराइनजेक्टोमी या अफेलिया जैसी स्थितियों से उद्भूत स्थायी दिव्यांगता अभिप्रेत है जो कार्बनिक या तंत्रिका संबंधी कारणों के कारण वाक् और भाषा के एक या अधिक संघटकों को प्रभावित करती है
(v) ''बौद्धिक दिव्यांगता'' से ऐसी स्थिति, जिसकी विशेषता बौद्धिक कार्य (तार्किक, शिक्षण, समस्या, समाधान) और अनुकूलित व्यवहार, दोनों में महत्वपूर्ण कमी होना है, जिसके अन्तर्गत दैनिक सामाजिक और व्यवहार्य कौशलों की रेंज है, जिसके अन्तर्गत -
(क) ''विनिर्दिष्ट विद्या दिव्यांगताओं'' से स्थितियों का एक ऐसा विजातीय समूह अभिप्रेत है, जिसमें भाषा को बोलने या लिखने की प्रक्रिया द्वारा आलेखन करने की कमी विद्यमान होती है, जो समझने, बोलने, पढ़ने, लिखने, अर्थ निकालने या गणितीय गणना करने में कमी के रूप में सामने आती है और इसके अन्तर्गत बोधक दिव्यांगता डायसेलेक्सिया, डायसग्राफिया, डायसकेलकुलिया, डायसप्रेसिया और विकासात्मक अफेसिया जैसी स्थितियां भी हैं;
(ख) ''स्वपरायणता स्पैक्ट्रस विकार'' से एक ऐसी तंत्रिका विकास की स्थिति अभिप्रेत है, जो विशिष्टतः जीवन के पहले तीन वर्ष में उत्पन्न होती है, जो व्यक्ति की सम्पर्क करने की, संबंधों को समझने की और दूसरों से संबंधित होने की क्षमता को अत्यधिक प्रभावित करती है और आमतौर पर यह अप्रायिक या घिसे-पिटे कर्मकांडों या व्यवहार से सहबद्ध होता है।
(vi) मानसिक व्यवहार, - ''मानसिक रूग्णता'' से चिंतन, मनोदशा, बोध, अभिसंस्करण या स्मरणशक्ति का अत्यधिक विकार अभिप्रेत है, जो जीवन की साधारण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समग्र रूप से निर्णय, व्यवहार, वास्तविकता की पहचान करने की क्षमता या योग्यता को प्रभावित करता है, किन्तु जिसके अन्तर्गत मानसिक मंदता नहीं है, जो किसी व्यक्ति का मस्तिष्क का विकास रूकने या अपूर्ण होने की स्थिति है, विशेषकर जिसकी विशिष्टता बुद्धिमता का सामान्य से कम होना है।
(vii) निम्नलिखित के कारण दिव्यांगता, - (क) चिरकारी तंत्रिका दशाएं, जैसे - (1) ''बहु-स्केलेरोसिक'' से प्रवाहक, तंत्रिका प्रणाली रोग अभिप्रेत है, जिसमें मस्तिष्क की तंत्रिक कोशिकाओं के अक्ष तंतुओं के चारों ओर रीढ़ की हड्डी की मायलिन सीथ क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे डिमायीलिनेशन होता है और मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं और रीढ़ की हड्डी की कोशिकाओं की एक-दूसरे के साथ सम्पर्क करने की क्षमता प्रभावित होती है;
(2) ''पार्किसन रोग'' से कोई तंत्रिका प्रणाली का प्रगामी रोग अभिप्रेत है, जो कम्प, पेशी कठोरता और धीमा, कठिन संचलन द्वारा चिन्हाकिंत होता है जो मुख्यतया मस्तिष्क के आधारीय गंडिका के अद्यपतन तथा तंत्रिका संचलन डोपामई के ह्रास से संबद्ध मध्य आयु और वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित करता है;
(ख) रक्त विकृति -4 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 25 ष् 2;बपकरू10द्ध21 (1) ''हेमोफीलिया'' से एक आनुवंशिक रोग अभिप्रेत है जो प्रायः पुरूषों को ही प्रभावित करता है किन्तु इसे महिला द्वारा अपने नर बालकों को संचारित किया जाता है, इसकी विशेषता रक्त के थक्का जमने की साधारण क्षमता का नुकसान होना है, जिससे छोटे से घाव का परिणाम भी घातक रक्तस्राव हो सकता है;
(2) ''थेलेसीमिया'' से वंशानुगत विकृतियों का एक समूह अभिप्रेत है, जिसकी विशेषता हिमोग्लोबिन की कमी या अभाव है;
(3) ''सिक्कल कोशिका रोग'' से होमोलेटिक विकृति अभिप्रेत है, जो रक्त की अत्यन्त कमी, पीड़ादायक घटनाओं और जो सह्बद्ध टिशुओं और अंगों को नुकसान से विभिन्न जटिलताओं में परिलक्षित होता है, ''हेमोलेटिक'' लाल रक्त कोशिकाओं की कोशिका झिल्ली के नुकसान को निर्दिष्ट करता है जिसका परिणाम हिमोग्लोबिन का निकलना होता है।
(viii) बहुदिव्यांगता (उपर्युक्त एक या एक से अधिक विनिर्दिष्ट दिव्यांगताएं) जिसके अन्तर्गत बधिरता, अंधता, जिससे कोई ऐसी दशा जिसमें किसी व्यक्ति के श्रव्य और दृश्य के सम्मिलित ह्रास के कारण गंभीर संप्रेषण, विकास और शिक्षण संबंधी गंभीर दशाएं अभिप्रेत है।
(ix) कोई अन्य प्रवर्ग जो भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किये जाएंं। (5)(5)(5)(5) आरक्षण के लिए दिव्यांगता की मात्रा - कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, भारत सरकार के ओ०एम० संख्या-36035/3/2004- Estt(Res) दिनांक-29.12.2005 के आलोक में केवल ऐसे व्यक्ति सेवाओं/पदों में आरक्षण के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 40 प्रतिशत संगत दिव्यांगता से ग्रस्त हों। जो व्यक्ति आरक्षण का लाभ उठाना चाहते हों, उन्हें सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी किया गया दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।
(6)(6)(6)(6) दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकार - दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-57 के आलोक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा विधिवत् रूप से गठित मेडिकल बोर्ड, सक्षम प्राधिकार होगा। केन्द्र/राज्य सरकार मेडिकल बोर्ड का गठन कर सकती है, जिसमें कम से कम तीन सदस्य होंगे। इन सदस्यों में कम से कम एक सदस्य, जैसा भी मामला हो, का मूल्याकन करने के लिए क्षेत्र विशेष का विशेषज्ञ होना चाहिए।
(7)(7)(7)(7) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-58 के आलोक में मेडिकल बोर्ड समुचित जाँच पड़ताल के पश्चात् स्थायी दिव्यांगता के ऐसे मामलों में स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करे, जहाँ दिव्यांगता की मात्रा में परिवर्तन होने की कोई गुंजाइश न हो। मेडिकल बोर्ड ऐसे मामलों में प्रमाण-पत्र की वैधता की अवधि इंगित करे, जिनमें दिव्यांगता की मात्रा में परिवर्तन होने की गुंजाइश हो। दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के जारी किये जाने से तबतक इन्कार नहीं किया जायेगा, जबतक आवेदक को उसका पक्ष सुनने का अवसर न दे दिया जाय। आवेदक द्वारा अभ्यावेदन देने के पश्चात् मेडिकल बोर्ड मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णय की समीक्षा कर सकता है और इस मामले में अपने विवेकानुसार आदेश दे सकता है।
(8)(8)(8)(8) तत्कालीन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्रावधानित आदर्श रोस्टर के आलोक में उक्त दिव्यांगों को निम्नांकित श्रृृंखला के अन्तर्गत आरक्षण देय होगा :-
| क) | अ ंध और निम्न दृष्टि; | रोस्टर बिन्दु-01 से 25 तक = 01 पद। |
| ख) | बधिर और श्रवण शक्ति में ह्रास; | रोस्टर बिन्दु-26 से 50 तक = 01 पद। |
| ग) | चलंत दिव्यांगता जिसके अंतर्गत प्रमस्तिष्क घात, रोगमुक्त कुष्ठ, बौनापन, तेजाब आक्रमण के पीड़ित और पेशीय दुष्पोषण भी है; | रोस्टर बिन्दु-51 से 75 तक = 01 पद। |
| घ) | स्वपरायणता, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता और मानसिक रूग्णता; | रोस्टर बिन्दु-76 से 100 तक = 01 पद। |
| ड.) | प ्र त्येक दिव्यांगता के लिए पहचान किए गए पदों में ख्रंड (क) से खंड (घ) के अधीन व्यक्तियों में से बहुदिव्यांगता जिसके अंतर्गत बधिर, अंधता भी हैं: |
और निम्न दृष्टि उम्मीदवार हेतु आरक्षण देय नहीं होगा। इसी क्रम में रोस्टर बिन्दु-38, 63 एवं 88 तक क्रमशः शेष प्रवर्ग यथा-(ख), (ग), (घ) एवं (ड़) के उम्मीदवार चयनित हो जाते हैं, तो क्रमशः रोस्टर बिन्दु-50, 75 एवं 100 तक अन्य दिव्यांग उम्मीदवार हेतु आरक्षण देय नहीं होगा।
चयनित दिव्यांग अभ्यर्थी का समायोजन उस समव्यवहार में उससे संबंधित प्रयुक्त होने वाले अंतिम रोस्टर बिन्दु के विरूद्ध किया जायेगा।
(9)(9)(9)(9) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-34 (2) के आलोक में जहां कोई रिक्ति किसी भर्ती वर्ष में उपयुक्त संदर्भित दिव्यांगजन की गैर-उपलब्धता के कारण या कोई अन्य पर्याप्त कारण से भरी नहीं जा सकेगी ऐसी रिक्ति गैर आरक्षित वर्ग में कर्णांकित करते हुएगैर आरक्षित वर्ग में कर्णांकित करते हुएगैर आरक्षित वर्ग में कर्णांकित करते हुएगैर आरक्षित वर्ग में कर्णांकित करते हुए पश्चात्वर्ती भर्ती वर्ष में अग्रणित होगी और पश्चात्वर्ती भर्ती वर्ष में भी उपयुक्त संदर्भित दिव्यांगजन उपलब्ध नहीं होता है, तो पहले यह पांच प्रवर्गों में से अदला-बदली द्वारा हो सकेगी और केवल जब उक्त वर्ष में भी पद के लिए दिव्यांगजन उपलब्ध नहीं होता है, तो नियोक्ता किसी दिव्यांगजन से भिन्न किसी व्यक्ति की नियुक्ति द्वारा रिक्ति को भर सकेगा:
परंतु यदि किसी स्थापन में रिक्तियों की प्रकृति ऐसी है कि दिए गए प्रवर्गों के व्यक्तियों को नियोजित नहीं किया जा सकता तो रिक्तियों की समुचित सरकार के पूर्व अनुमोदन से पांच प्रवर्गों में अदला-बदली की जा सकेगी। (10)(10)(10)(10) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-32 में निहित प्रावधानों के अनुरूप यह निदेश दिया जाता है कि राज्य सरकार के अधीन उच्च शैक्षणिक संस्थानों में तथा ऐसे सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में जिन्हें राज्य सरकार से सहायता मिली हो, नामांकन में दिव्यांगों के लिए 5 प्रतिशत स्थान आरक्षित रहेंगे। यह आरक्षण भी दिव्यांगता आधारित होगा, जातिगत आधारित नहीं होगा। नामांकन हेतु चयनित दिव्यांग उम्मीदवार जिस आरक्षित/गैर आरक्षित वर्ग का होगा, उसकी गणना उसी आरक्षित/गैर आरक्षित वर्ग के विरूद्ध होगी। उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन हेतु दिव्यांग किसे कहा जायेगा तथा विभिन्न प्रकार के दिव्यांगों के लिए आरक्षण की क्या व्यवस्था होगी, इस संबंध में भारत सरकार द्वारा निर्गत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों का अनुपालन किया जायेगा। (11)(11)(11)(11) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-20 के आलोक में कोई भी सरकारी स्थापन नियोजन से संबंधित किसी मामले में किसी दिव्यांगजन के विरूद्ध विभेद नहीं करेगा:
परन्तु समुचित सरकार किसी स्थापन में किये जाने वाले कार्यों के प्रकार को ध्यान में रखते हुए अधिसूचना द्वारा और ऐसे निबंधनों के अधीन रहते हुए यदि कोई हों, इस धारा के उपबंधों से किसी स्थापन को छूट प्रदान कर सकेगी।
(2) कोई सरकारी स्थापन, किसी ऐसे कर्मचारी को, जो अपनी सेवा के दौरान कोई दिव्यांगता ग्रहण करता है, उसे अभिमुक्त या उसके रैंक में कमी नहीं करेगा:
परन्तु यदि कोई कर्मचारी, दिव्यांगता ग्रहण करने के पश्चात् उस पद के लिए उपयुक्त नहीं रह जाता है जिसे वह धारित करता है तो उसे समान वेतनमान् और सेवा के फायदों के साथ किसी अन्य पद पर स्थानांतरित किया जायेगा:
परन्तु यह और कि यदि कर्मचारी को किसी अन्य पद पर समायोजित करना सम्भव नहीं है तो वह उपयुक्त पद उपलब्ध होने तक या अधिवर्षिता की आयु प्राप्त होने तक इनमें से जो पूर्ववर्ती हो, किसी अधिसंख्या पद पर रखा जा सकेगा।
(12)(12)(12)(12) आयु सीमा में छूट :- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-34 (3) के आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्धारित एवं समय-समय पर यथा संशोधित अधिकतम आयु सीमा के अतिरिक्त खुले प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर होने वाली नियुक्ति में सभी पदों एवं वर्गों के लिए दिव्यांगता के आधार पर अधिकतम आयु सीमा में 10 वर्षों की छूट रहेगी, जबकि सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर नियुक्ति की स्थिति में अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्षों की छूट रहेगी।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-32 (2) के आलोक में उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए संदर्भित दिव्यांगजनों को ऊपरी आयु सीमा में 5 वर्ष तक शिथिलता दी जायेगी।
(13)(13)(13)(13) श्रुतिलेखक उपलब्ध कराने के संबंध में :- विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था द्वारा दृृष्टिहीन या कम दृृष्टि वाले परीक्षार्थियों को श्रुतिलेखक की व्यवस्था की जायेगी। श्रुतिलेखक की शैक्षणिक योग्यता आयोजित परीक्षा (जिसमें परीक्षार्थी सम्मिलित होने वाला है) से एक स्तर नीचे होगा।
श्रुतिलेखक के पारिश्रमिक का भुगतान प्रति पाली 100/- (एक सौ) रुपये मात्र की दर से परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था द्वारा देय होगा।6 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 25 ष् 2;बपकरू10द्ध21 दृृष्टीहीन अथवा कम दृष्टि वाले परीक्षार्थी को संबंधित परीक्षा हेतु निर्धारित समय के साथ-साथ प्रति घण्टा 15 मिनट के दर से न्यूनतम 15 मिनट तथा अधिकतम 45 मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान किया जायेगा।
(14)(14)(14)(14) अर्हतांक में छूट :- सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्धारित एवं समय-समय पर यथा संशोधित अर्हतांक में छूट के अतिरिक्त खुली प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर होने वाली नियुक्ति में सभी पदों एवं वर्गों के लिए दिव्यांगता के आधार पर अर्हतांक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/महिला अभ्यर्थियों के समतुल्य न्यूनतम 32 प्रतिशत निर्धारित किया जायेगा।
(15)(15)(15)(15) कम्प्यूटर सक्षमता परीक्षा में उत्तीर्णता संबंधी शर्त्तों से विमुक्ति :- पूर्णतः दृृष्टि दिव्यांग (पूर्ण अंधेपन से ग्रसित) तथा एक हाथ अथवा दोनों से दिव्यांग कर्मियाें को कम्प्यूटर सक्षमता जाँच परीक्षा में उत्तीर्णता संबंधी शर्त्तों से विमुक्ति दी जायेगी।
(16)(16)(16)(16) परीक्षा शुल्क में छूट ः- सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्धारित एवं समय-समय पर यथा संशोधित परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त खुले/सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर होने वाली नियुक्ति में सभी पदों एवं वर्गों के लिए दिव्यांगता के आधार पर परीक्षा शुल्क अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के समतुल्य अर्थात गैर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित शुल्क का एक चौथाई देय होगा।
(17)(17)(17)(17) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा-23 (1) के निहित प्रावधानों के आलोक में प्रत्येक विभाग/कार्यालय/संस्थान आदि द्वारा दिव्यांगजनों के शिकायतों के निवारण हेतु एवं एतद् संबंधी आरक्षण की देख-रेख हेतु शिकायत निवारण पदाधिकारी की नियुक्ति की जायेगी।
3333.... एतद् संबंधी पूर्व निर्गत आदेश/संकल्प/परिपत्र आदि के असंगत अंश (यदि हों) इस हद तक संशोधित समझे जायेंगे। इस संकल्प निर्गत होने के बाद भी इस संकल्प के प्रावधानों से असंगत कोई कार्रवाई जो संकल्प संख्या-13062 दिनांक-12.10.2017 के आलोक में पूर्व में की गई हो, को वैध माना जायेगा। किसी बिन्दु पर विभेद होने की स्थिति में एतद् संबंधी पूर्व निर्गत मूल आदेशों/परिपत्रों आदि का अवलोकन किया जा सकता है। आवश्यकतानुसार सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना से परामर्श भी प्राप्त किया जा सकता है।
यह आदेश तुरंत प्रभावी होगा। आदेशआदेशआदेशआदेश- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में जन साधारण के सूचनार्थ प्रकाशित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, सरकार के संयुक्त सचिव।