निबंधन संख्या पी0टी0-40
बिहार गजट
बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-6 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---
भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची पृष्ठ
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 7-7 पूरक
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पूरक-क 8-142 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 भाग-1 नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं।
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उद्योग विभाग
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अधिसूचना
12 जनवरी 2021
सं0 6 (स0) नि0प0/स0वि0नि0-03/2001 (खण्ड-II)-131--श्री बलराम सिंह, संयुक्त उद्योग निदेशक, तकनीकी विकास निदेशालय, बिहार, पटना को बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम, पटना के आर्टिल्स ऑफ एशोसियेशन की धारा-75(1) के कनीय निगम के निदेशक मंडल में अगले आदेश तक निदेशक मनोनात किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, विशेष सचिव।
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गृह विभाग
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प्रभार प्रतिवेदन
25 जनवरी 2021
सं0 508--अधोहस्ताक्षरी, मैं जितेन्द्र श्रीवास्तव, भा॰प्र॰से॰ (2000) सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना सं॰-1/पी-1001/2020-सा॰प्र॰-1009, दिनांक-23.01.2021 के आलोक में आज दिनांक-25.01.2021 के पूर्वाह्न में सचिव, गृह विभाग, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार स्वतः ग्रहण करता हूँ। (सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना सं॰-1/पी-1001/2020-सा॰प्र॰-1009, दिनांक- 23.01.2021 द्रष्टव्य।)
(जितेन्द्र श्रीवास्तव) भारग्राही पदाधिकारी।
आदेश से, गिरीष मोहन ठाकुर, अवर सचिव।
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गृह विभाग
(विषेष शाखा)
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अधिसूचना
18 जनवरी 2021
सं॰ एल/एच॰जी॰-14-27/2017-353--श्री दिलीप कुमार, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, जमुई द्वारा अपनी शारीरिक अस्वस्थता के कारण अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृति हेतु दिनांक 31.07.2018 एवं दिनांक 17.11.2018 को विभाग में आवेदन समर्पित किया गया।
अतएव बिहार सेवा संहिता के नियम-74 में निहित प्रावधान के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री दिलीप कुमार, जिला समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, जमुई को आदेश निर्गत की तिथि से स्वैच्छिक सेवानिवृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, भा॰प्र॰से॰, संयुक्त सचिव।
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(cid:356)ामीण कवािस कवभाग
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अधिसूचनाएं
29 दिसम्बर 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(पटना)नालंदा-09/2018-346385--(cid:373)ीमती मनीषा (cid:366)साद, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, हरनौत, नालन्दा सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, (cid:352)सैनगंज (सिवान) के वि(cid:349)(cid:544) (cid:356)ाम पोवारी, पंचाने नदी के कटाव से उत्पन्न बाढ़ की (cid:304)(cid:830)थति म(cid:336) शि थिलता, बाढ़ से जान माल की (cid:407)ति होने दे ने, पंचाने नदी पर विलम्ब से प(cid:352)ँचने, आपदा अधिनियम, 2005 के SOP का उल्लघंन करने, (cid:366)धान मं(cid:361)ी आवास3 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 योजना/इं(cid:304)(cid:573)रा आवास योजना के कार्यान्वयन म(cid:336) लापरवाही एवं शिथिलता के आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, नालन्दा के प(cid:361)ांक-2411 दिनांक 06.12.2018 (cid:554)ारा विभाग को आरोप प(cid:361) उपलब्ध कराया गया। सम्यक विचारोपरान्त (cid:373)ीमती मनीषा (cid:366)साद, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, हरनौत, नालन्दा सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, (cid:352)सैनगंज (सिवान) को असंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतनवृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड अधिरोपित करने का निण(cid:330)य लिया गया।
अत: (cid:373)ीमती (cid:366)साद के वि(cid:349)(cid:544) असंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतनवृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दं ड अधिरोपित किया जाता है।
आदेश दिया जाता है कि दंड की (cid:366)वि(िcid:700) (cid:373)ीमती (cid:366)साद के सेवापुस्त म(cid:336) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।
------ 31 दिसम्बर 2020 सं0 (cid:356)ा0वि0-14(म0)औरं 0-03/2016-347867--(cid:373)ी अजय कु मार (िcid:366)ंस, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, औरं गाबाद सदर, सम्(cid:366)ति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बलरामपुर, कटिहार के वि(cid:349)(cid:544) अनधिकृ त (cid:349)प से अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहने के लिए विभाग के स्तर पर आरोप प(cid:361) (cid:366)प(cid:361) 'क' का गठित किया गया। जिला-पदा धिकारी, औरं गाबाद के प(cid:361)ांक-404 दिनांक 06.02.2018 एवं प(cid:361)ांक-1739 दिनांक 18.05.2018 (cid:554)ारा भी दिनांक 07.01.2018 से लगतार अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहने का आरोप (cid:366)तिवेदित किया गया । (cid:366)तिवेदित आरोप पर (cid:373)ी (िcid:366)ंस का स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। आरोप (cid:366)प(cid:361) 'क' (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि (cid:373)ी (िcid:366)ंस अनधिकृ त (cid:349)प से लंबे समय तक बार-बार मुख्यालय से अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहे। यह उनके (cid:554)ारा उच्चाधिाकारियोंं के आदेश की अवहेलना तथा सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन म(cid:336) अभि(cid:349)चि नही ं लिए जाने (cid:552)ोतक है।
अत: (cid:373)ी अजय कु मार (िcid:366)ंस, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, औरं गाबाद सदर, सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बलरामपुर, कटिहार को चेतावनी का दण्ड दिया जाता है।
चेतावनी के दंड की (cid:366)वि(िcid:700) (cid:373)ी (िcid:366)ंस के सेवा पुस्त म(cid:336) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत कबहार राजप(cid:361) ेि अगले अंि म(cid:336) (cid:366)ािकत कयिा जाय तथा इसीि (cid:366)कत सभी सम्बधित र्ोि भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।
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30 दिसम्बर 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(म0)गया0-10/2019-347022--(cid:373)ी अश्विनी कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, मोहनपुर, गया सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, रोह, नवादा के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, गया के प(cid:361)ांक-3111 दिनांक 28.10.2019 (cid:554)ारा IAY एवं PMAY-G के अंतग(cid:330)त आवास के आवंटन म(cid:336) शिथिलता, लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं वरीय पदाधिकारी के आदेश का उल्लंघन करने संबंधित आरोप (cid:366)तिवेदित किया गया।
उक्त (cid:366)तिवेदित आरोप पर (cid:373)ी कु मार का स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा की गयी।4 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि (cid:373)ी कु मार के वि(cid:349)(cid:544) (cid:366)धान मं(cid:361)ी आवास योजना, (cid:356)ामीण अंतग(cid:330)त वित्तीय वष(cid:330)-2016-17 एवं 2017-2018 म(cid:336) समेकित ल(cid:407)्य के वि(cid:349)(cid:544) भुगतान एवं आवास पूण(cid:330)ता म(cid:336) (cid:366)गति धीमी थी। वष(cid:330)-2019-2020 म(cid:336) लक्ष्य के वि(cid:349)(cid:544) जियो टैगिंग, आवास स्वीकृति, (cid:366)थम एवं (िcid:554)तीय किस्त के भुगतान की (cid:304)(cid:830)थति भी अत्यन्त धीमी थी। धीमी (cid:366)गति के लिए (cid:373)ी (cid:373)ी अश्विनी कु मार, (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, मोहनपुर, गया जिम्मेबार ह(cid:339)।
अत: (cid:373)ी अश्विनी कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, मोहनपुर, गया सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, रोह, नवादा को चेतावनी का दण्ड दिया जाता है।
चेतावनी के दंड की (cid:366)वि(िcid:700) (cid:373)ी कु मार के सेवा पुस्त म(cid:336) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत कबहार राजप(cid:361) ेि अगले अंि म(cid:336) (cid:366)ािकत कयिा जाय तथा इसीि (cid:366)कत सभी सम्बधित र्ोि भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।
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31 दिसम्बर 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(पटना) पटना-03/2016-347869--(cid:373)ी नीरज कु मार राय, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिहटा, पटना सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, डोभी, गया के वि(cid:349)(cid:544) काय(cid:330) के (cid:366)ति लापरवाही, उदासीनता, स्वेच्छाचारिता/अनुशासनहीनता/विभागीय आदेश की अवहेलना/वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना के आरोप पर जिला पदाधिकारी, पटना के प(cid:361)ांक-2200 दिनांक 20.10.2016 (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त है।
उक्त (cid:366)तिवेदित आरोपो पर (cid:373)ी राय से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण के समी(cid:407)ोपरांत यह पाया गया कि (cid:373)ी राय के (cid:554)ारा काय(cid:330) म(cid:336) लापरवाही बरती गयी है।
अत: (cid:373)ी राय को असंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) पर रोक का दं ड अधिरोपित किया जाता है। आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ी राय के चा(cid:303)र(cid:361)ी म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।
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31 दिसम्बर 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(मु ं0)खग0-02/2017-347870--(cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बाराहाट, बाँका के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, बाँका के प(cid:361)ांक-143 दिनांक 27.02.2018 एवं प(cid:361)ांक- 03 दिनांक 05.01.2019 के (cid:554)ारा दो आरोप प(cid:361) प्राप्त (cid:352)आ।
उक्त दोनों आरोप प(cid:361) म(cid:336) (cid:373)ी अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) उच्चाधिकारी के साथ अभ(cid:363) एवं अमया(cid:330)दित व्यवहार करने, राज्यस्तरीय एम0आई0एस0 टीम (cid:554)ारा आयोजित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (cid:366)शि(cid:407)ण काय(cid:330)शाला म(cid:336) हंगामा कर बाधित करने, काय(cid:330)शाला का बहिष्कार करने, उच्चाधिकारी को धमकी दे ने एवं आदे श की अवहेलना करने तथा विभागीय नियम के वि(cid:349)(cid:544) अपने प्रतिस्थानी को (cid:366)भार सौंपने के उपरांत भी लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की राशि का भुगतान करने से संबंधित आरोप (cid:366)तिवेदित किया गया है। उक्त आरोप प(cid:361) के आलोक म(cid:336) संकल्प (cid:466)ापांक-408324 दिनांक 25.01.2019 (cid:554)ारा विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित की गयी।
विभागीय काय(cid:330)वाही के संचालनोपरान्त संचालन पदाधिकारी (cid:554)ारा निष्कर्ष (cid:366)तिवेदन समपि(cid:330)त किया गया। (cid:366)तिवेदन म(cid:336) अधिकांश आरोपों को संचालन पदाधिकारी (cid:554)ारा (cid:366)माणित (cid:366)तिवेदित किया गया। (cid:366)माणित आरोपों पर आरोपित पदाधिकारी का लि(cid:304)खत अभ्यावेदन प्राप्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के अभिमत एवं आरोपित पदाधिकारी के लि(cid:304)खत अभ्यावेदन की समी(cid:407)ा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत (cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल के वि(cid:349)(cid:544) लघु दं ड के (cid:349)प म(cid:336) असंचया(cid:527)क (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने की शा(cid:304)(cid:721) अधिरोपित करने का निण(cid:330)य लिया जाता है।5 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 तदालोक म(cid:336) (cid:373)ी मनोज कु मार अ(cid:356)वाल, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बाराहाट, बाँका सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, मढ़ौरा सारण को असंचया(cid:527)क (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड दिया जाता है।
उक्त दंड की (cid:366)वि(िcid:700) (cid:373)ी अ(cid:356)वाल के सेवापुस्त म(cid:336) की जाय।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत कबहार राजप(cid:361) ेि अगले अंि म(cid:336) (cid:366)ािकत कयिा जाय तथा इसीि (cid:366)कत सभी सम्बधित र्ोि भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।
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31 दिसम्बर 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(ति0) प0 चम्पारण-05/2019-347868--(cid:373)ी दिनेश कु मार सिंह, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, भितहॉ, प(िcid:686)म चम्पारण, बेतिया सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, दरौंदा, सीवान के वि(cid:349)(cid:544) (cid:366)धानमं(cid:361)ी आवास योजना ((cid:356)ामीण) के कार्यान्वयन म(cid:336) उदासीनता एवं अन्य आरोप पर जिला पदाधिकारी, प(िcid:686)म चम्पारण, बेतिया के प(cid:361)ांक-187 दिनांक 02.09.2019 (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त है। उक्त (cid:366)तिवेदित आरोपों पर (cid:373)ी कु मार से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण के समी(cid:407)ोपरांत यह पाया गया कि (cid:373)ी सिंह के (cid:554)ारा 308 लाभुकों को (cid:366)धानमं(cid:361)ी आवास योजना ((cid:356)ामीण) के तहत (cid:366)थम किस्त की राशि उपलब्ध कराया गया है, इसके बावजूद निमा(cid:330)ण काय(cid:330) लाभुको (cid:554)ारा शु(cid:349) नही ं किया गया है। दो वष(cid:330) की अवधि बीत जाने के उपरांत भी राशि वसूली हेतु (cid:373)ी सिंह के (cid:554)ारा कोई कार(cid:330) वाई नही ं की गयी ह(cid:339)।
अत: सम्यक विचारोपरांत (cid:373)ी दिनेश कु मार सिंह, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, भितहॉ, प(िcid:686)म चम्पारण, बेतिया सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, दरौंदा, सीवान को असंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड़ अधिरोपित किया जाता है।
आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ी दिनेश कु मार सिंह के चा(cid:303)र(cid:361)ी पु(cid:304)(cid:721)का म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।
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30 दिसम्बर 2020
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(ति0) सीतामढ़ी-01/2017-347163--(cid:373)ी नीरज आनन्द, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, रुन्नी-सैदपुर सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, नौबतपुर, पटना के वि(cid:349)(cid:544) खाद्यान्न के अतिरिक्त आवंटन जन वितरण (cid:366)णाली वि(cid:354)े ता को उपभोक्ता के अनुसार नही ं करने, नियमित निगरानी एवं पय(cid:330)वे(cid:407)ण नही ं करने तथा उठाव और वितरण की सूचना अनुमंडल काया(cid:330)लय अथवा जिला आपूति(cid:330) काया(cid:330)लय को नही ं उपलब्ध कराने के आरोप पर जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के प(cid:361)ांक-714 दिनांक 12.08.2017 (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त है।
उक्त (cid:366)तिवेदित आरोपो पर (cid:373)ी आनन्द से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया। (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण के समी(cid:407)ोपरांत यह पाया गया कि (cid:373)ी आनन्द के (cid:554)ारा खाद्यान्न के आवंटन म(cid:336) शिथिलता बरती गयी है।
अत: (cid:373)ी आनन्द को भविष्य में सचेष्ट रहने का निदे श दे ते (cid:352)ए आरोप मुक्त किया जाता है। उक् त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
रा(cid:352)ल रं जन मकहवाल, विशेष सचिव।6 बिहार गजट, 27 tuojh 2021
सामान्य प्रशासन विभाग
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अधिसूचना
23 जनवरी 2021
सं0 1/पी-1001/2020-सा0प्र0-1009-श्री जितेन्द्र श्रीवास्तव, भा0प्र0से0 (2000), सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना अतिरिक्त प्रभार-अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना अगते आदेश तक सचिव गृह विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे और अध्यक्ष, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जायेंगे।
सं0 1/पी-1001/2020-सा0प्र0-1010-श्री पंकज कुमार पाल, भा0प्र0से0 (2000) सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक अध्यक्ष बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।
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कृषि विभाग
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अधिसूचना
8 जनवरी 2021
सं0 बी०वि०प्रयो० (अधि०बी०वि०)-01/2017-10/कृ०--बीज अधिनियम, 1966 (1966 का 54 वाँ) की धारा-12 में विहित प्रावधान के अनुसार निम्नलिखित पदाधिकारियों को बीज विश्लेषक के रूप में अधिसूचित किया जाता हैः- 1. उप निदेशक (शष्य), बीज विश्लेषण, बिहार, पटना। 2. सहायक निदेशक (शष्य), बीज विश्लेषण, पटना। 3. सहायक निदेशक (शष्य), क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, भभुआ, कैमूर। 4. सहायक निदेशक (शष्य), क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, मुशहरी, मुजफ्फरपुर। 5. सहायक निदेशक (शष्य), क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, भागलपुर। 6. सहायक निदेशक (शष्य), क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, सहरसा। 7. सहायक निदेशक (शष्य), क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, दरभंगा। 8. सहायक निदेशक (शष्य), क्षेत्रीय बीज विश्लेषण प्रयोगशाला, मोतिहारी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विजय कुमार, विशेष सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 39—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in7 बिहार गजट, 27 tuojh 2021
भाग-9-ख
निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। —————
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सं0 69-म(cid:339) शैलभ पिता दीना नाथ (cid:366)साद आवास सूचि का(cid:817)(cid:600)े(cid:411) (cid:610)ैट नं ए/301 मज़ार गली शेखपुरा पटना बिहार 800014 एतद (cid:554)ारा घोषणा करता (cid:353)ँ कि म(cid:339)ने अपने मूल नाम शैलभ म(cid:336) पटना सदर नोटरी प(cid:304)(cid:624)क के शपथ प(cid:361) सं(cid:421)ा 86 दिनांक 12/10/2020 (cid:554)ारा उपनाम (cid:366)साद जोड़ लिया है। अब म(cid:339) शैलभ (cid:366)साद के नाम से जाना जाऊं गा।
शैलभ। No. 69--I, SHAILABH, S/O Dina Nath Prasad, R/O Suchi Complex Flat No. A-301, MazarGali, Sheikhpura, Patna, Bihar-800014, have endorsed title 'Prasad' in my principal name vide Notary Public Patna Sadar Affidavit Sl.No.86 dated 12/10/2020. Now, I will be known as Shailabh Prasad.
SHAILABH.
————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 39—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in8 बिहार गजट, 27 tuojh 2021
बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी द्वारा प्रकाशित
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सं0 के0/कारा/रा0प0-05/08--197 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ----- संकल्प 8 जनवरी 2021
श्री उमेष प्रसाद सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा (वर्तमान में केन्द्रीय कारा), पूर्णियाँ एवं मंडल कारा, भभुआ सम्प्रति सेवानिवृत्त दिनांक 31.07.1995 से 03.12.1997 एवं दिनांक 12.03.2008 से 05.09.2010 तक निलंबित रहे। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह को निलंबन अवधि में देय जीवन यापन भत्ता के बिन्दु पर निर्णय लिये जाने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-11 (5) के विहित प्रावधान के आलोक में विभागीय ज्ञापांक 7029 दिनांक 09.10.2020 द्वारा उनसे साठ दिनों के अन्दर अभ्यावेदन की मांग की गयी।
2. उक्त के आलोक में श्री सिंह द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 07.12.2020 समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि वर्ष 1995 में तत्कालीन मंडल कारा, पूर्णियाँ में पदस्थापन काल के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था, परन्तु सेवानिवृत्ति की तिथि 29.02.2016 तक उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही नहीं चलाई गई। अब बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी0) के परन्तुक (ए) (ii) के तहत किसी तरह की कार्रवाई कालबाधित है।
3. निलंबन अवधि दिनांक 31.07.1995 से 03.12.1997 तक-श्री उमेष प्रसाद सिंह, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा (वर्तमान में केन्द्रीय कारा), पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध कर्त्तव्यहीनता, लापरवाही एवं गबन के प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-3361 दिनांक 31.07.1995 द्वारा उन्हें तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय केन्द्रीय कारा, राँची निर्धारित किया गया था। विभागीय अधिसूचना संख्या-4717 दिनांक 04.12.1997 द्वारा श्री सिंह को निलंबन से मुक्त किया गया था।
4. श्री सिंह के अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। श्री सिंह के मंडल कारा (वर्तमान में केन्द्रीय कारा), पूर्णियाँ में पदस्थापन के दौरान विभागीय अधिसूचना संख्या-3361 दिनांक 31.07.1995 द्वारा कर्त्तव्यहीनता, लापरवाही एवं गबन के आरोप में तात्कालिक प्रभाव से उन्हें निलंबित किया गया था। विभागीय अधिसूचना संख्या-4717 दिनांक 04.12.1997 द्वारा श्री सिंह को निलंबन से मुक्त किया गया तथा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही यथावत् चलते रहने का आदेष अधिसूचित किया गया। श्री सिंह को इस मामले में कर्त्तव्यहीनता, लापरवाही एवं गबन के आरोप में निलंबित किया गया था। श्री सिंह के सेवा अभिलेख के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इस मामले से पूर्व एवं बाद में भी उन्हें कई मामलों में निलंबित किया गया था एवं विभागीय कार्यवाही चलाई गई थी। इन मामलों के अतिरिक्त श्री सिंह को अन्य कतिपय दूसरे मामलों में दंडित किया गया है। उन्हें विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 5215 दिनांक 20.08.2004 द्वारा '' निंदन '', अधिसूचना ज्ञापांक 604 दिनांक 20.02. 2009 द्वारा '' निंदन '' एवं '' तीन (03) वेतनवृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध '', अधिसूचना ज्ञापांक 402 दिनांक 28.01. 2011 द्वारा '' तीन (03) वेतनवृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध '', संकल्प ज्ञापांक 2596 दिनांक 30.04.2015 द्वारा '' आरोपित पदाधिकारी को इनके वर्तमान वेतनमान में एक (01) वेतनवृद्धि कम करके वेतन निर्धारित करते हुए एक (01) वेतन की अवनति का दंड '' तथा संकल्प ज्ञापांक 5748 दिनांक 19.09.2016 द्वारा '' दस प्रतिषत (10%) पेंषन तीन (03) वर्षों तक कटौती का दंड दिया गया है।
यद्यपि इस मामले में, तकनीकी आधार पर कालबाधित हो जाने के कारण, उनके विरूद्ध नये सिरे से विभागीय कार्यवाही चलाया जाना संभव नहीं है। परन्तु इस अवधि के पूर्व तथा बाद की अवधि में उन्हें दिये गये अनेक दंड से उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा के संबंध में कोई अनुकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सिंह का निलम्बन औचित्यपूर्ण है।9 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 5. उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री उमेष प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा (वर्तमान में केन्द्रीय कारा), पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत्त के निलंबन अवधि दिनांक 31.07.1995 से 03.12. 1997 तक के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 के उप नियम-7 एवं 8 के आलोक में निम्न आदेश पारित किया जाता है :-
''निलम्बन अविध में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा तथा इस अवधि की गणना पेंषन प्रदायी सेवा के रूप में की जायेगी।''
6. निलंबन अवधि दिनांक 12.03.2008 से 05.09.2010 तक- इसके अतिरिक्त श्री सिंह को मंडल कारा, भभुआ में पदस्थापन के दौरान वरीय पदाधिकारियों के आदेषोल्लंघन, अकर्मण्यता, अनुषासनहीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या 2747 दिनांक 12.03.2008 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए निलंबनावस्था में उन्हें कारा निरीक्षणालय, बिहार, पटना में संलग्न किया गया था। साथ ही उक्त प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या 6132 दिनांक 06.06.2008 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय अधिसूचना संख्या 3997 दिनांक 06.09.2010 द्वारा श्री सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया।
उक्त विभागीय कार्यवाही के फलाफल के पश्चात् प्रमाणित आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श प्राप्त कर विभागीय अधिसूचना संख्या 433 दिनांक 16.01.2015 द्वारा निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :-
(i) निंदन। (ii) दो (02) वेतनवृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोक। 7. श्री सिंह के मंडल कारा, भभुआ में पदस्थापन के दौरान उनके विरूद्ध पदीय दायित्वों के सम्यक् निर्वह्न में बरती गई लापरवाही के गंभीर आरोप प्रमाणित पाये गये हैं। इसके लिए बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श प्राप्त कर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह को ''निंदन'' एवं ''दो (02) वेतनवृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दंड अधिरोपित किया जा चुका है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सिंह का निलम्बन औचित्यपूर्ण है।
8. उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री उमेष प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, भभुआ सम्प्रति सेवानिवृत्त के निलंबन अवधि दिनांक 12.03.2008 से 05.09.2010 तक के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 के उप नियम-7 एवं 8 के आलोक में निम्न आदेश पारित किया जाता है :-
''निलम्बन अविध में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा तथा इस अवधि की गणना पेंषन प्रदायी सेवा के रूप में की जायेगी।'' आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीवान जाफर हुसैन खाँ, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।
----- सं0 08/आरोप-01-36/2017 सा॰प्र॰-467 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 11 जनवरी 2021 श्री सुजीत कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-921/11, गृह जिला-बेगूसराय के विरूद्ध दिनांक 31.12.2002 से बिना कोई सूचना दिये अनाधि—त रूप से अनुपस्थित रहने संबंधी आरोपो के लिए सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के प्रशाखा-12 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप पत्र की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 1613 दिनांक 31.01.2020 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार से पूछा गया स्पष्टीकरण डाक विभाग द्वारा बिना तामिला के वापस कर दिया गया। तत्पश्चात जिला पदाधिकारी, बेगूसराय को स्पष्टीकरण का पत्र भेजतेे हुए तामिला प्रतिवेदन की माँग की गयी। जिला पदाधिकारी, बेगूसराय के पत्रांक-767 दिनांक 13.08.2020 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि पत्र में अंकित पते पर श्री कुमार के नहीं रहने के कारण स्पष्टीकरण संबंधी पत्र उन्हें तामिला नहीं कराया जा सका और तामिला नहीं होने की स्थिति में विभागीय पत्रांक-1613 दिनांक 31.01.2020 की छायाप्रति उनके आवास पर चस्पा (साट) कर दिया गया। आरोपो की गंभीरता को देखते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मामले की वृहद जांच की आवश्यकता पायी गयी। विषयांकित मामला दिनांक 31.12.2002 से वगैर सूचना अनाधि—त रूप से अनुपस्थित रहने का है। अतएव बिहार सेवा संहिता का नियम-76 की 'समीक्षा' एवं 'निर्णजय विधि' के आलोक में मामले की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के प्रावधानों के तहत श्री कुमार, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-921/11, गृह जिला-बेगूसराय के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है। इस10 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 विभागीय कार्यवाही में मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना संचालन पदाधिकारी तथा अवर सचिव, (प्रभारी प्रशाखा-12), सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी होंगे। श्री कुमार से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव बयान के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
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सं0 27/मुक0-5-7/2019-सा0प्र0-750
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संकल्प
18 जनवरी 2021
मो0 कामिल अख्तर, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 833/11, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बछवाड़ा, बेगुसराय के विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक-2655 दिनांक-18.09.2008 द्वारा मो0 अख्तर को निलंबित करने तथा विभागीय कार्यवाही चलाने हेतु प्राप्त अनुशंसा के आलोक में समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13505 दिनांक 23.12.2008 द्वारा उन्हें निलंबित किया गया।
2. ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 13925 दिनांक 16.10.2008 द्वारा प्राप्त आरोप पत्र प्रपत्र-'क', मो0 अख्तर से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, बेगूसराय से प्राप्त मंतव्य के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10738 दिनांक 30.07.2012 द्वारा मो0 अख्तर के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें संयुक्त आयुक्त, विभागीय जांच, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
3. मो0 अख्तर के विरूद्ध बछवाड़ा प्रखंड अंतर्गत कृषि इनपुट सब्सिडी राशि के वितरण में अनियमितता के संबंध में अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से माह नवम्बर 2007 से अप्रैल 2008 तक लगभग 660 किसानों का फसल क्षति अनुदान की राशि 14,11,386/-रू0 रोक रखने, सरकारी निर्देश का उल्लंघन करने , संदेहात्मक एवं गलत जमीनों के विवरण के आधार पर बिना पंचायत, आपदा निगरानी एवं अनुश्रवण समिति के अनुशंसा के एक ही परिवार के 6 अयोग्य व्यक्तियों को कुल 53,570/-रू0 का भुगतान करने, अन्य पंचायतों में भी सरकारी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए फसल क्षति अनुदान के रूप में अयोग्य व्यक्तियों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने तथा अपने गलत कारनामों को छिपाने के लिए अंचल नजारत फसल क्षति अनुदान से संबंधित महत्वपूर्ण कागजातों को गायब कराने, जिसे प्रशासन के भारी दबाव के बाद लगभग डेढ़ महीने बाद चार बंद बोरों में अंचल अधिकारी, बछवाड़ा के निवास के बगल में पाया गया, के कुल चार आारोप प्रतिवेदित किये गये।
4. संयुक्त आयुक्त, विभागीय जांच, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक-1029 दिनांक-25.10.2012 से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 2485 दिनांक 12.02.2013 द्वारा असहमति के बिन्दु पर मो0 अख्तर से अभ्यावेदन की मांग की गयी। मो0 अख्तर से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 639 दिनांक 17.01.2014 द्वारा मो0 अख्तर को निलंबन मुक्त करते हुए तीन वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं प्रोन्नति पर पांच वर्षों तक रोक का दंड संसूचित किया गया। निलंबन अवधि के वेतन भुगतान के संबंध में मो0 अख्तर से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4658 दिनांक 04.04. 2014 द्वारा उनके निलंबन अवधि (दिनांक 23.12.2008 से 17.01.2014) के लिए देय वेतनादि से 25 प्रतिशत राशि की कटौती कर मात्र 75 प्रतिशत राशि का भुगतान करने की स्वीकृति प्रदान की गयी।
5. मो0 अख्तर से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11018 दिनांक 08.08.14 तथा पुनरीक्षण आवेदन को समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10423 दिनांक 20.07.15 द्वारा अस्वीकृत किया गया। 6. संसूचित दंडादेश के विरुद्ध मो0 अख्तर द्वारा मा0 उच्च न्यायालय, पटना में दायर CWJC सं0-5807/15 में मा0 न्यायालय द्वारा दिनांक 21.06.19 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् है :-
Matter is remanded to the Disciplinary Authority to take decision afresh in accordance with law after giving due consideration to all the points raised by the petitioner in his response to second show cause submitted on 25.02.2013.
7. विभागीय पत्रांक-2485 दिनांक 12.02.13 द्वारा असहमति के बिन्दु पर मो0 अख्तर से मॉंगे गये अभ्यावेदन के आलोक में मो0 अख्तर द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 25.02.13 में उनका कहना है कि जिन 162 चेकों को उनके द्वारा रोक कर रखने की बात कही गयी है, वह सत्य नहीं है । मूल आरोप पत्र में 660 किसानों के चेक तथा उनमें सन्निहित राशि 14,11,386/-रु0 को उनके द्वारा निजी स्वार्थ के खातिर रोक कर रखने का आरोप लगाया गया था, विभागीय जॉंच में इसकी सम्पुष्टि नहीं की गयी है । वे अपने प्राथमिक स्पष्टीकरण तथा विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित बचाव-बयान में भी इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके द्वारा किसी भी किसान का चेक नहीं रोका गया था । इस संबंध में किसी भी किसान से प्राप्त शिकायत पत्र आरोप पत्र के साथ संलग्न नहीं है, जिससे इस आरोप की दूर-दूर तक पुष्टि नहीं होती है । वे सी.आर.एफ. प्रावधान एवं राजकोषीय नियम संबंधी परिपत्र सं0-3134 दिनांक 31.08.07 में11 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 निर्धारित नियमानुसार तत्परता से कार्रवाई करते हुए प्रखंड, अनुमंडल एवं विभिन्न पंचायतों में सार्वजनिक स्थलों पर लाभुक किसानों के बीच चेक तामिला कराने हेतु अनेक शिविरों का आयोजन किये थे, जहॉं पंचायत राहत अनुश्रवण-सह-निगरानी समिति के समक्ष पंचायत सचिव/जनसेवक/अंचल निरीक्षक/प्रखंड कृषि पदाधिकारी को चेक वितरण का दायित्व सौंपा गया था, जिसमें भारी संख्या में कृषकों को इस योजना का लाभ देकर कृषि इनपुट सब्सिडी में प्राप्त कुल राशि का 94% से अधिक तथा राज्यांश राशि का लगभग 99% भुगतान किया गया । किसानों को चेक तामिला कर रहे कुछ कर्मचारियों द्वारा नियमानुसार चेक वितरण में शिथिलता एवं लापरवाही बरतने के लिए अनुशासनिक कार्रवाई हेतु उच्चाधिकारियों/सक्षम पदाधिकारियों के पास लिखित प्रतिवेदन भी दिये थे, लेकिन उनके द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण समय पर दायित्व का निष्पादन नहीं किया गया तथा अत्यधिक विलम्ब से एवं दबाव के बाद इनके द्वारा चेक बुक अभिश्रव, भुगतान पंजी आदि कागजात नाजिर के पास जमा किया गया, जिसके लिए लापरवाह कर्मियों का वेतन भी संबंधित कागजात के जमा करने तक उनके द्वारा स्थगित किया गया था । इनके द्वारा बिना निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की अनुमति के कुछ चेकों पर जमीन विवादित होने, किसानों के मृत हो जाने आदि कारणों से कटिंग कर दिया गया था तथा कुछ चेकों पर ओभर राईटिंग कर अंकित राशि को घटा या बढ़ा दिया गया था । उनके संज्ञान में मामला आने पर दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की गयी थी । इस प्रकार नजारत में रखे गये उपरोक्त 162 चेक Under Objection एवं वितरण योग्य नहीं रह गये थे । निर्धारित शिविरों के उपरान्त भी उक्त अयोग्य चेकों में से कोई भी दावेदार किसान ने अपने चेक के लिए उनके समक्ष मॉंग नहीं की, जिसका निराकरण उनके द्वारा नहीं करने पर वे दोषी हो जाते । आरोप पत्र में इस तरह का कोई उल्लेख नहीं है, न ही तत्संबंधी किसी किसान का बयान साक्ष्यस्वरूप आरोप पत्र के साथ संलग्न किया गया है । अनुमंडल पदाधिकारी के जॉंचोपरान्त उक्त चेक के विषय में आगे वितरण करने संबंधी कोई निर्देश भी उच्चाधिकारियों के स्तर से उन्हें प्राप्त नहीं हुआ । कुछ कर्मचारियों के असहयोगात्मक रवैये तथा प्रधान सहायक-सह-लेखापाल आदि की प्रतिनियुक्ति उच्चाधिकारियों द्वारा अन्यत्र कार्यालयों में कर दिये जाने के कारण लेखा-जोखा के संधारण में विलम्बत हो रहा था । उक्त अयोग्य चेक के कारण रोकड़ पंजी आदि का निस्तारीकरण और अधिक लम्बित रखना उचित नहीं था । इस तरह स्पष्ट है कि उन्होंने किसी भी किसान का चेक रोक कर नहीं रखा था, क्योंकि अगर उनकी ऐसी मंशा होती तो उनके द्वारा अनेक वितरण शिविरों का आयोजन विभिन्न तिथियों में विभिन्न स्थलों पर नहीं किया जाता ।
एक परिवार के 6 कृषकों को फसल क्षति अनुदान अनुचित ढंग से भुगतान करने के संबंध में उनका कहना है कि इसका खंडन उनके द्वारा तथ्यों एवं साक्ष्यों के आलोक में बचाव बयान में किया जा चुका है । उनके द्वारा कृषि इनपुट सब्सिडी भुगतान से संबंधित कृषि विभाग के उक्त परिपत्र में वर्णित सी.आर.एफ. प्रावधान एवं राजकोषीय नियम के आलोक में ही प्रभावित कृषकों का सर्वेक्षण, भुगतान की स्वीकृति एवं वितरण की दिशा में कार्रवाई की गयी थी, जिसमें सब्सिडी के लिए प्रक्रिया का निर्धारण पदाधिकारियों/क्षेत्रीय कर्मचारियों/जन प्रतिनिधियों के दायित्वों का निर्धारण एवं इस लाभ को प्राप्त करनेवाले खेतिहर कृषकों की पात्रता का निर्धारण किया गया है । उक्त नियमानुसार क्षतिग्रस्त फसल से संबंधित जमीन का सर्वेक्षण एवं कागजातों की जॉंच आदि का कार्य राजस्व कर्मचारी/अंचल निरीक्षक/प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने किया था तथा उनके प्रतिवेदन के आधार पर प्राप्त कृषि इनपुट सब्सिडी के मामलों पर प्रखंड विकास पदाधिकारी को स्वीकृति देना था । उनके द्वारा विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए उक्त कृषकों के प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया तथा नियमानुसार अनुश्रवण-सह-निगरानी समिति की मौजूदगी में उक्त कृषकों को अनुदान भुगतान की कार्रवाई की गयी। इस परिपत्र में एक परिवार के एक से अधिक कृषकों को लाभ देने से वंचित नहीं किया गया है और न ही राहत अनुश्रवण-सह-निगरानी समिति द्वारा वितरण के समय इन्हें रोका गया था, बल्कि संबंधित मुखिया-सह-अध्यक्ष, निगरानी समिति ने नियमानुसार उक्त कृषकों को पहचान कर सत्यापन किया था । जहॉं तक अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा उक्त पट्टेदार कृषकों के अनुदान राशि वापसी स्वीकार करने का प्रश्न है, जिला पदाधिकारी को दिग्भ्रमित करने का प्रयास है क्योंकि अनुमंडल पदाधिकारी इस बाबत दो तरह के प्रतिवेदन दिये हैं, जो परस्पर विरोधाभाषी है । लेकिन उन्होंने अपने प्रतिवेदन में यह स्वीकार किया है कि वे लोग साधारण कृषक थे और पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते थे तथा राजस्व कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर उन्हें अनुदान की स्वीकृति दी गयी थी । पट्टे की जमीन पर लगी फसल की क्षति के लिए कृषि इनपुट सब्सिडी देने पर कोई रोक नहीं है । उक्त जमीन विवादित नहीं थी । भू-स्वामी ने पट्टेदार कृषकों को लाभ नहीं देने के लिए कोई आपत्ति किसी भी समय दाखिल नहीं किया था । वास्तविक रूप में कृषि कार्य करने वालों का ही कृषि इनपुट का नुकसान होता है, न कि भू-स्वामी का । ऐसी स्थिति में किसी कृषक को, जो वास्तविक रूप से कृषि का कार्य करता था, उसे लगायी गयी फसल की क्षति की भरपायी के लिए इनपुट सब्सिडी के लाभ से वंचित करना न्याय के नैसर्गिक सिद्धान्त के अनुकूल प्रतीत नहीं होता है । समीक्षा बैठक में दिये गये निर्देश के आलोक में प्रत्येक लाभुक कृषक से भुगतान के समय एक लिखित शपथ पत्र लिया गया था, जिसमें गलत भुगतान लेने की स्थिति में उसके स्वयं दोषी होने तथा राशि वसूली के लिए दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख है । ऐसा प्रतीत होता है कि वे लोग साधारण किसान थे, किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उनके द्वारा अनुदान राशि वापस करने का निर्णय लिया गया होगा । प्रावधान में क्षेत्रीय कर्मियों/पदाधिकारियों की अलग-अलग भूमिका होने की स्थिति में किसी तरह की गड़बड़ी के लिए प्रतिवेदन देनेवाले क्षेत्रीय कर्मचारी उत्तरदायी होंगे तथा किसान भी शपथ पत्र के आलोक में दोषी होंगे ।
मूल आरोप पत्र तथा साक्ष्य में कहीं उल्लेख नहीं किया गया है कि बरामद कागजातों में प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा किसी प्रकार का छेड़-छाड़ किया गया है, केवल छेड़-छाड़ का परिचायक बताया गया है । यदि उनके द्वारा संबंधित कागजातों में छेड़-छाड़ करने की मंशा से उक्त कदम उठाया गया होता तो उन कागजातों में छेड़-छाड़ की बात उजागर12 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 हो जाती । उनके द्वारा कोई अनियमितता की ही नहीं गयी थी, तो वे इस प्रकार का कृत्य क्यों करने लगते, जिससे उनके किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं हुई थी ।
अधीनस्थ कर्मियों पर प्रभावी नियंत्रण के संबंध में उनका कहना है कि कुछ लोगों के असहयोगात्मक रवैये और उनके षड्यंत्र एवं स्थानीय राजनीति में संलिप्त रहने के कारण उन्हें महत्वपूर्ण कार्यों के सफल निष्पादन में काफी कठिनाई झेलनी पड़ी थी, जिसके लिए उनके द्वारा सुसंगत कार्रवाई की गयी थी ।
8. आरोप पत्र के साथ संलग्न अनुमंडल पदाधिकारी, तेघड़ा के पत्रांक-443 दिनांक 21.06.08 द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि लगभग 600 किसानों को चेक पर अंकित कुल राशि 14,11,386/-रु0 का चेक का भुगतान किसानों को अब तक नहीं हो सका, गोविन्दपुर-3 पंचायत में एक ही परिवार को कुल 53,570/-रु0 का गैर कानूनी ढंग से भुगतान किया गया तथा फतेहा पंचायत में एक ही परिवार के लोगों को भारी रकम का भुगतान किया गया। 9. मो0 अख्तर द्वारा 162 किसानों के फसल क्षति अनुदान भुगतान संबंधी चेक को रोक रखा गया तथा उन्हें अनुदान की राशि का भुगतान नहीं हो सका, जिसके लिए उन्होंने अपने अधीनस्थ कर्मियों द्वारा चेक पर तरह-तरह की आपत्ति दर्ज करने एवं ओभरराईटिंग कर अंकित राशि को घटाने या बढ़ाने को उत्तरदायी कहा है। उन्हें चाहिए था कि उक्त चेक से संबंधित लाभुकों की सही स्थिति की स्वयं जॉंच करते तथा सही लाभुकों को अनुदान की राशि का भुगतान करते एवं अयोग्य लाभुकों के संबंध में स्पष्ट आदेश पारित करते, किन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया।
10. एक ही परिवार के कई व्यक्तियों को फसल क्षति अनुदान अनियमित ढंग से भुगतान करने संबंधी आरोप के संबंध में, अनुमण्डल पदाधिकारी, तेघड़ा द्वारा जिला पदाधिकारी, बेगूसराय के निदेशानुसार आवश्यक जॉंचोपरान्त इन लाभुकों से दिनांक 05.08.08 को उक्त अनुदान की राशि वापस जमा कराया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा इन लाभुकों को अनुदान की अनियमित स्वीकृति दी गयी थी और अनुदान की राशि का भुगतान किया गया था।
11. फसल क्षति अनुदान से संबंधित महत्वपूर्ण कागजात के गायब/बरामद होने तथा अधीनस्थ कर्मियों पर प्रभावी नियंत्रण के संबंध में उनका कहना है कि कुछ लोगों के असहयोगात्मक रवैये और उनके षड्यंत्र एवं स्थानीय राजनीति में संलिप्त रहने के कारण उन्हें महत्वपूर्ण कार्यों के सफल निष्पादन में काफी कठिनाई झेलनी पड़ी थी, जिसके लिए उनके द्वारा सुसंगत कार्रवाई की गयी थी, इस संबंध में आरोप पत्र के साथ साक्ष्य स्वरूप संलग्न इन्भेंटरी सूची के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आरोपित के आवास से बरामद कागजातों की मात्रा काफी अधिक थी । बिना उनकी जानकारी के उतने कागजात किसी के द्वारा उनके आवास पर नहीं रखा जा सकता है, जिससे स्पष्ट है कि अपने कार्यालय/अधीनस्थों पर उनका नियंत्रण नहीं था ।
12. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि मो0 अख्तर द्वारा किसानों के चेक को रोक रखा गया तथा एक ही परिवार के कई व्यक्तियों को फसल क्षति अनुदान का भुगतान किया गया, जिसकी वसूली बाद में कर ली गयी एवं उनका कार्यालय/अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं था, जिसके लिए वे दोषी हैं ।
13. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं मो0 अख्तर द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की सम्यक समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत मो0 अख्तर के अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुये तथा मा0 न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में मो0 अख्तर को संसूचित दंडादेश संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-639 दिनांक 17.01.14, निलम्बन अवधि में मो0 अख्तर के 25% वेतन कटौती संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4658 दिनांक 04.04.14 एवं पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किये जाने संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11018 दिनांक 08.08.14 को वापस लेते हुये एवं किसानों के चेक को रोक रखने, एक ही परिवार के कई व्यक्तियों को फसल क्षति अनुदान का भुगतान किये जाने एवं कार्यालय/अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं रखने के लिए उन्हें दोषी पाते हुये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत् ''(i) निन्दन (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक (iii) देय तिथि से प्रोन्नति पर दो वर्षों तक रोक तथा (iv) निलम्बन अवधि के लिए देय वेतनादि से 10 % राशि की कटौती'' का दण्ड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
14. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार मो0 अख्तर को संसूचित दंडादेश संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-639 दिनांक 17.01.14, निलम्बन अवधि में मो0 अख्तर के 25% वेतन कटौती संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4658 दिनांक 04.04. 14 एवं पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किये जाने संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11018 दिनांक 08.08.14 को वापस लेते हुये मो0 कामिल अख्तर, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 833/11, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बछवाड़ा, बेगुसराय के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत् ''(i) निन्दन (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक (iii) देय तिथि से प्रोन्नति पर दो वर्षों तक रोक तथा (iv) निलम्बन अवधि के लिए देय वेतनादि से 10% राशि की कटौती'' का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव।13 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 सं0 08/आरोप-01-119/2015 सा॰प्र॰--358 ------ संकल्प 8 जनवरी 2021 श्री विनोद कुमार पंकज, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1147/2011, तत्कालीन जिला भूू-अर्जन पदाधिकारी, औरंगाबाद के विरूद्ध कर्त्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता, अनधि—त रूप से अनुपस्थित रहने एवं महत्वपूर्ण कार्यो को लंबित रखने से संबंधित आरोप जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के पत्रांक-102 (मु॰) दिनांक 12.12.2015, 248 (मु॰) दिनांक 23.12.2015 एवं 2917 दिनांक 10.08.2016 द्वारा आरोप पत्र अनुशासनिक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ। उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए श्री पंकज से विभागीय पत्रांक-2737 दिनांक 07.03.2017 स्पष्टीकरण माँगी गयी, परन्तु उनका स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा। फलस्वरूप सम्यक विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7617 दिनांक 21.06.2017 द्वारा श्री पंकज के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी (यथा आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया) के पत्रांक 660 दिनांक 13.03.2020 द्वारा जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। जिसमें आरोप संख्या-15 को प्रमाणित एवं शेष को अप्रमाणित बताया गया। आरोप संख्या-15 में यह उल्लेख है कि श्री पंकज द्वारा मदनपुर प्रखंड के ग्राम-नावाडीह पंचपोखड़ी नाला में नक्सलियों से हुए मुठभेड़ के घटना की मजिस्टेरियल जांच को 08 माह तक लंबित रखा गया तथा स्थानांतरण होने की अवधि तक इसे निष्पादित नहीं किया गया, जो संदेहास्पद कार्यशैली का परिचायक है। लम्बी अवधि तक वांछित जांच प्रतिवेदन नहीं सौंपने से ना केवल मुआवजे की भुगतान की कार्रवाई बाधित रही बल्कि राज्य सरकार द्वारा उक्त नक्सली मुठभेड़ में मारे गये जवान को पुरस्कार देने संबंधी प्रस्ताव को नहीं भेजा जा सका। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 4657 दिनांक 12.05.2020 द्वारा श्री पंकज से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री पंकज ने अपने लिखित अभिकथन में उल्लेख किया है कि जहाँ तक मजिस्टेरियल जांच नहीं करने का आरोप है, विदित है कि नक्सलियों से मुठभेड़ का घटना स्थल छोटानागपुर की पहाड़ी जंगल में अवस्थित है जहाँ पुलिस/पारा मिलिट्री फोर्स काफी बल एवं सशस्त्र अत्याधुनिक हथियार के साथ जाती है। यहाँ कहना है कि तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) औरंगाबाद से समाहरणालय में इस संबंध में वार्तालाप हुई थी लेकिन अपेक्षित पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो पाया। श्री पंकज के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री पंकज द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर की गयी। सम्यक विचारोपरांत पाया गया कि मदनपुर प्रखंड के ग्राम-नावाडिह पंचपोखड़ी नाला में नक्सलियों से हुए मुठभेड़ के घटना की मेजिस्टेरियल जांच हेतु श्री पंकज को दण्डाधिकारी के रूप में प्राधिकृत किया गया था। अतएव अपनी सुरक्षा का पर्याप्त बन्दोवस्त करके अपने दायित्व/जिम्मेवारी को उन्हें पूर्ण करना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया। जिसके चलते मुआवजे की भुगतान की कार्रवाई बाधित रहीं तथा राज्य सरकार द्वारा मुठभेड़ में मारे गये जवान को पुरस्कृत किये जाने संबंधी प्रस्ताव भी नहीं भेजा जा सका। श्री पंकज का यह कृत सरकारी कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता को दर्शाता है। इसकी पुष्टि संचालन पदाधिकारी द्वारा भी किया गया है तथा आरोप को प्रमाणित बताया गया है।
अतएव वर्णित तथ्यों के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए श्री विनोद कुमार पंकज, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-1147/2011, तत्कालीन जिला भूू-अर्जन पदाधिकारी, औरंगाबाद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :- (i) निन्दन (आरोप वर्ष-2011-12) (ii) दो वेतनवृद्धियों पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, /-मो0 सिराजुद्दीन अंसारी, अवर सचिव।
------ सं0 27/आरोप-01-75/2019-सा0प्र0-433 ------ संकल्प 11 जनवरी 2021 श्री नवल किशोर, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 625/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक, छपरा के विरूद्ध वाद संख्या-01/लोक(पंचायत)-224/2012 (श्री उपेन्द्र कुमार सिंह बनाम प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक एवं अन्य) में माननीय न्यायिक सदस्य, लोकायुक्त, बिहार, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक-15.04.2019 के अनुपालन में मशरक प्रखंड के वर्ष 2006-07 से 2009-10 की अवधि में इंदिरा आवास योजना में हुये निष्फल व्यय/दुर्विनियोग के मामले से संबंधित आरोप जिला पदाधिकारी, छपरा के पत्रांक-114 दिनांक-14.08.2019 द्वारा प्रतिवेदित किया गया।14 बिहार गजट, 27 tuojh 2021 2. जिला पदाधिकारी, छपरा द्वारा प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।
3. विभागीय पत्रांक-12982 दिनांक-19.09.2019 द्वारा श्री किशोर से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री किशोर द्वारा (दिनांक-07.09.2020) विभाग को अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें उनका मुख्य रूप से कहना है कि ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक-11755 दिनांक-10.10.06 द्वारा निर्गत निदेश की कंडिका-6 और 7 के अनुसार ''लाभुकों को राशि का भुगतान दो किस्तों में किया जायेगा। प्रथम किस्त के रूप में कुल 24,000/- (चौबीस हजार) रूपये तथा शेष राशि द्वितीय किस्त में भुगतेय होगी। इसके लिए प्रत्येक लाभुक के खाते में 24,000/- (चौबीस हजार) रूपये की राशि जमा की जायेगी। साथ ही लाभुकों को यह अनिवार्य रूप से यह बताया जाय कि उनके खाता में इंदिरा आवास निर्माण हेतु जमा की गयी राशि का यदि उनके द्वारा अन्य कार्य पर व्यय किया जाता है तो, वे राशि के दुरूपयोग के लिए दोषी पाये जायेंगे तथा उनके विरूद्ध थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आपराधिक मुकदमा चलाया जायेगा। लाभुकों को द्वितीय किस्त का भुगतान प्रथम किस्त की राशि के विरूद्ध आवास निर्माण मेें हुई प्रगति के आधार पर किया जायेगा।'' विाीय वर्ष 2006-07 का इंदिरा आवास के निर्माण हेतु आवंटन प्राप्त सारे लाभुकों को राशि मार्च, 2007 में ही दी गयी। दिनांक-31.05. 07 को स्थानान्तरण होने के फलस्वरूप अपना प्रभार दूसरे पदाधिकारी को सौंप कर वहाँ से स्थानान्तरित स्थान पर चले गये। श्री रंजीत कुमार सिंह, प्रखड विकास पदाधिकारी, मशरक द्वारा राजनीतिक षड्यंत्र के तहत् मा0 लोकायुक्त के सदस्य, श्री मिहिर कुमार झा के न्यायालय में झूठा, कूटरचित (False and fabricated) एवं आधारहीन प्रतिवेदन अपूर्ण इंदिरा आवास के अपने पत्रांक-153 दिनांक-16.02.19 से उप विकास आयुक्त, सारण को भेजा। श्री रंजीत कुमार सिंह के प्रतिवेदन के अवलोकन से स्वतः स्पष्ट है कि इंदिरा आवास योजना का कभी भी भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया। जून, 2007 से 16.02. 19 तक लगभग 12 वर्षो में किसी प्रखंड विकास पदाधिकारी ने अपूर्ण इंदिरा आवास का पूर्ण कराने के लिए कभी भी कोई नोटिश लाभुक को नहीं दी गयी। सूचना के अधिकार का तहत् प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक से वर्ष 2006-07 के अपूर्ण इंदिरा आवासों के संबंध में उनके भौतिक स्थिति की जानकारी माँगी गयी। प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक ने अपने पत्रांक-950 दिनांक-04.09.2020 से सूचना उपलब्ध करायी है। वर्ष 2006-07 में सभी 32 अपूर्ण इंदिरा आवास पूर्ण है। ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक-11755 दिनांक-10.10.06 के निदेश के आलोक में इंदिरा आवास के निर्माण की कार्रवाई की गयी, जिसकी कंडिका-6 में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि अपूर्ण रहने की स्थिति में लाभुक पर कार्रवाई की जायेगी। जिला प्रशासन द्वारा भेजे गये आरोप पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं करते हुए उनके द्वारा आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। 4 मामले की शुरूआत मार्च, 2007 में लाभुकों को राशि का भुगतान करने से हुई। दिनांक-31.05.2007 को श्री किशोर मशरक प्रखंड से स्थानान्तरित होकर चले गये। अतः दो महीने के अल्प अवधि में, जबकि अग्रिम भुगतान के बाद काम नींव स्तर के आसपास रहा होगा, उन पर योजना का पर्यवेक्षण नहीं करने का आरोप सत्य प्रतीत नहीं होता है। प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक, सारण के पत्रांक- 153 दिनांक-16.02.2019 के विस्तृत प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि अग्रिम भुगतान में अनियमितता वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 में पदस्थापित अन्य प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री सुखदेव प्रसाद के द्वारा की गयी है तथा उनके स्तर से ही उारदायित्व में लापरवाही हुई है।
5. श्री किशोर के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, छपरा द्वारा प्रतिवेदित आरोप एवं श्री किशोर द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सम्य्क समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत श्री किशोर के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण को स्वीकृत कर उन्हें दोषमुक्त करते हुये उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप को संचिकास्त करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
6. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री नवल किशोर, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 625/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक के विरूद्ध लगाये गये आरोप को संचिकास्त किया जाता है। आदेष :-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम शंकर, संयुक्त सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 39—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in