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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 March 2021

Published 19 March 2021

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2021-03-19.181
Languages
English, Hindi

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बिहार विधान सभा सचिवालयबिहार विधान सभा सचिवालयबिहार विधान सभा सचिवालयबिहार विधान सभा सचिवालय

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अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

18 मार्च18 मार्च18 मार्च18 मार्च 2021202120212021

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ कृप्रक्तकृप्रब्डज्,व्डव्छब्छत्ज्न्,त्रकृप्रक्तत्र'त्रक्ष्क्ष्कृऊझ्हृह्नत्रहृट्ठहृिंग्ध्ंट्टत्रम्क्त्‌क्हृहृट्ठस्ड्डथ्त्रकृप्रस्ट्ठग््रत्रिंव्डव्छळळ्रत्रद्दहृट्ठत्रकृऊझ्हृह्नत्रकृप्रस्हृड्डत्र क्तमहृहृत्रर्ट्ठिं्‌त्रकृ०ड्डहृ्‌ब्त्रिंछन्त्रर्हृिंन्नू्रत्रव्डव्छत्रहृिंट्ठत्रह्यध्ह्नठपबहृहृकृह्यट्टत्रझ्ध््यहृत्रबहृहृ्रत्रकृऊझ्हृह्नत्रकृप्रस्हृड्डत्रक्तमहृहृत्रश्त्रिंह्यकृग्हृत्रट्टबहृहृत्रहृिंग्ूत्रक्त्‌न्नहृड्डत्रकृड्डग्र्हृिंप्रश्त्रट्ठिंत्र कृड्डग्र्ब्छिंछैत्रट्ठिंत्र्यतट्ट॰ूट्टत्रह्मट्ठक्ग्त्र्यहृचह्नत्रझ्ट्ठट्टध्त्रक्तकृझ्ट्टत्रह्यहृिंकृक्हृट्टत्रकृग्हृिंत्रद्दहृट्टहृत्रझ्च'त्र

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बिहार लोकायुक्त ((((संशोध्न)))) विध्ेयक, 2021202120212021 बिहार लोकायुक्त अध्निियम, 2011201120112011 ((((बिहार अध्निियम 22, 201122, 201122, 201122, 2011)))) ((((समय-समय पर यथा संशोध्ति)))) को संशोध्ति करने के लिए विध्ेयक ।

प्रस्तावना।-प्रस्तावना।-प्रस्तावना।-प्रस्तावना।-

चूँकि बिहार लोकायुक्त अधिनियम, 2011" के अध्याय-7 में लोकायुक्त द्वारा की जाने वाली जाँच एवं अन्वेषण से संबंधित प्रक्रिया उपबंधित है और इसकी धारा-25 में लोकायुक्त द्वारा किसी लोक सेवक या अन्य व्यक्ति से सूचना आदि प्रस्तुत करने की अपेक्षा करने संबंधी प्रावधान अंकित है ;

और चूँकि यह प्रकाश में आया है कि लोकायुक्त संस्था के समक्ष परिवादकर्ताओं द्वारा झूठे मामले भी दर्ज किये जा रहे हैं जिसके कारण इस प्रतिष्ठित संस्था का समय बर्बाद हो रहा है ;

और चूँकि उक्त अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि लोकायुक्त संस्था के समक्ष झूठे परिवाद दायर करने वाले शिकायतकर्ताओं को इस संस्था द्वारा उसके कृत्य के लिए सजा दी जा सके ;

और चूँकि अन्य राज्यों के लोकायुक्त अधिनियम में ऐसे प्रावधान उपलब्ध हैंं ; और चूँकि बिहार लोकायुक्त संस्था के निर्बाध संचालन के लिए इस संस्था को झूठी शिकायत की स्थिति में दण्डात्मक कार्यवाही की शक्ति दिया जाना समीचीन है ;

इसलिए, अब भारत गणराज्य के 72वें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप से यह अधिनियमित हो :- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ।-(i) यह अधिनियम ''बिहार लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2021'' कहा जा सकेगा। (ii) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (iii) यह तत्काल प्रभाव से प्रवृत्त समझा जायेगा। 2222.... बिहार अधिनियम 22, 2011 (समयबिहार अधिनियम 22, 2011 (समयबिहार अधिनियम 22, 2011 (समयबिहार अधिनियम 22, 2011 (समय-ससससमय पर यथा संशोधित) की धारा मय पर यथा संशोधित) की धारा मय पर यथा संशोधित) की धारा मय पर यथा संशोधित) की धारा 25 के बाद एक नयी धारा25 के बाद एक नयी धारा25 के बाद एक नयी धारा25 के बाद एक नयी धारा 25 (क) जोड़ा 25 (क) जोड़ा 25 (क) जोड़ा 25 (क) जोड़ा जाना ।जाना ।जाना ।जाना ।- उक्त अधिनियम, 2011 की धारा 25 के बाद एक नयी धारा 25(क)े निम्नवत्‌ जोड़ा जायेगा :- "25(क) मिथ्या परिवाद के मामले में कार्रवाई ।-मिथ्या परिवाद के मामले में कार्रवाई ।-मिथ्या परिवाद के मामले में कार्रवाई ।-मिथ्या परिवाद के मामले में कार्रवाई ।- (1)(1)(1)(1) इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक व्यक्ति, जो जान-बूझकर या दुर्भाव से इस अधिनियम के अधीन कोई मिथ्या परिवाद करता है, दोषसिद्धि होने पर उस अवधि के लिए, जिसका विस्तार तीन वर्षों के लिए किया जा सकेगा, कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ; (2) सत्र न्यायालय के सिवाय कोई न्यायालय लोकायुक्त के अध्यक्ष द्वारा अनुसंधान किये गये किसी परिवाद के मामले में अथवा किसी मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी के न्यायालय के सिवाय कोई न्यायालय लोकायुक्त के सदस्य द्वारा अनुसंधान किए गए किसी परिवाद के मामले में उप-धारा(1) के अधीन अपराध का संज्ञान नहीं लेगा ; (3) कोई भी ऐसा न्यायालय, यथास्थिति, लोकायुक्त के अध्यक्ष अथवा लोकायुक्त के सदस्य के निदेश पर लोक अभियोजक द्वारा लिखित रूप में किए गए परिवाद के सिवाय उपर्युक्त अपराध का संज्ञान नहीं लेगा और सत्र न्यायालय ऐसे परिवाद पर उसको मामला सुपूर्द किए बिना भी, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी संज्ञान ले सकेगा। (4) ऐसा न्यायालय मिथ्या परिवाद करने वाले व्यक्ति की दोषसिद्धि पर जुर्माने की राशि में से प्रतिकर की वह राशि, जिसे वह उपयुक्त समझे, परिवादी पर अधिनिर्णीत कर सकेगा। (5) लोकायुक्त के अध्यक्ष अथवा लोकायुक्त के किसी सदस्य के समक्ष इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के किसी प्रक्रम पर यदि उन्हें प्रतीत हो कि ऐसी कार्यवाही में उपस्थित होने वाला कोई व्यक्ति अथवा कोई व्यक्ति, जिसने इस अधिनियम के अधीन किए गए परिवाद के समर्थन में कोई शपथ-पत्र दाखिल किया है, जानते हुए अथवा जानबूझकर मिथ्या साक्ष्य दिया है अथवा इस आशय से मिथ्या साक्ष्य की कूटरचना की है कि ऐसे साक्ष्य का उपयोग ऐसी कार्यवाही में की जाएगी, यथास्थिति, लोकायुक्त के अध्यक्ष अथवा लोकायुक्त के सदस्य को, यदि यह समाधान हो जाय कि न्याय हित में यह आवश्यक एवं समीचीन है कि मिथ्या साक्ष्य यथास्थिति, देने अथवा के कूटरचना के लिए संक्षिप्ततः विचारण किया जाना चाहिए, तो अपराधी को कारण दर्शाने का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद कि क्यों नहीं ऐसे अपराध के लिए उसे दंडित किया जाना चाहिए, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अधीन संक्षिप्त विचारण के लिए विहित प्रक्रियानुसार जहाँ तक हो सके, उस अपराधी का संक्षिप्ततः विचारण करेगा और इस अवधि के लिए कारावास से, जिसका विस्तार छह माह तक किया जा सकेगा अथवा उस जुर्माने से, जिसका विस्तार पाँच हजार रूपये तक किया जा सकेगा, अथवा दोनों से दंडादिष्ट कर सकेगा।

(6) जब भारतीय दंड संहिता की धारा-175, धारा-178, धारा-179 अथवा धारा-180 यथा वर्जित कोई अपराध लोकायुक्त के अध्यक्ष अथवा लोकायुक्त के सदस्य की दृष्टि से या उपस्थिति में सुपूर्द किया गया हो तो वह अपराधी को अभिरक्षा में निरूद्ध करवाएगा और किसी भी समय उसी दिन अपराधी का संज्ञान ले सकेगा और अपराधी को3 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध 1;बपकरू24द्ध ;बपकरू4र्द्ध 2;बपकरू27द्ध21 युक्तियुक्त कारण दर्शाने का अवसर देने के बाद कि क्यों नहीं उसे इस धारा के अधीन दंडित नहीं किया जाना चाहिए, अपराधी को उस अवधि के लिए, कारावास से , जिसका विस्तार एक माह तक किया जा सकेगा अथवा उस जुर्माने से, जिसका विस्तार पाँच सौ रूपये तक किया जा सकेगा अथवा दोनो से दंडादिष्ट कर सकेगा। (7) उप-धारा (6) के अधीन विचारण किए गए प्रत्येक मामले में, यथास्थिति, लोकायुक्त के अध्यक्ष अथवा लोकायुक्त के सदस्य अपराधी द्वारा किए गए कथन, (यदि हो), से अपराध गठित करने वाले तथ्यों के साथ-साथ निष्कर्ष तथा दंडादेश को अभिलिखित करेगा। (8) उप-धारा-5 या उप-धारा-6 के अधीन धारित विचारण पर सिद्धदोष कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय के समक्ष अपील कर सकेगा और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय -XXIX के प्रावधान, जहाँ वे लागू हों, इस उपधारा के अधीन अपीलों पर लागू होंगे, और अपीलीय न्यायालय, इस निष्कर्ष को जिसके विरूद्ध अपील की गई हो, बदल या उलट सकेगा अथवा सजा को कम कर सकेगा अथवा उलट सकेगा। (9) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उप-धारा-(5),(6), (7) और (8) के प्रावधान का प्रभाव होगा, किन्तु इन उप धाराओं में किसी बात से, यथास्थिति, लोकायुक्त के अध्यक्ष अथवा लोकायुक्त के सदस्य की शक्तियों पर, किसी अपराध के संबंध में उप-धारा (3) के अधीन अग्रसर होने पर, जहाँ यह उप-धारा-(5),(6) और (7) के अधीन अग्रसर होने हेतु चुनाव नहीं करता है, कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। (10) उप धारा-(5) से (9) में प्रयुक्त और इस अधिनियम में अपरिभाषित शब्दों एवं अभिव्यक्तियों के वहीं अर्थ होंगे जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में दिए गए हों।

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उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु

चूँकि "बिहार लोकायुक्त अधिनियम, 2011" के अध्याय-7 में लोकायुक्त द्वारा की जाने वाली जाँच एवं अन्वेषण से संबंधित प्रक्रिया उपबंधित है और इसकी धारा-25 में लोकायुक्त द्वारा किसी लोक सेवक या अन्य व्यक्ति से सूचना आदि प्रस्तुत करने की अपेक्षा करने संबंधी प्रावधान अंकित है; और चूँकि यह प्रकाश में आया है कि लोकायुक्त संस्था के समक्ष परिवाद कर्ताओं द्वारा झूठे मामले भी दर्ज किये जा रहे हैं, जिसके कारण इस प्रतिष्ठित संस्था का समय बर्बाद हो रहा है; और चूँकि उक्त अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि लोकायुक्त संस्था के समक्ष झूठे परिवाद दायर करने वाले शिकायतकर्ताओं को इस संस्था द्वारा उनके कृत्य के लिए सजा दी जा सके; और चूँकि अन्य राज्यों के लोकायुक्त अधिनियम में ऐसे प्रावधान उपलब्ध हैंं; और चूँकि बिहार लोकायुक्त संस्था के निर्बाध संचालन के लिए इस संस्था को झूठी शिकायत की स्थिति में दण्डात्मक कार्यवाही की शक्ति दिया जाना समीचीन है। इसके लिए बिहार लोकायुक्त अधिनियम, 2011 (बिहार अधिनियम 22, 2011) (समय-समय पर यथा संशोधित) को संशोधित करना इसका उद्देश्य है, जिसे अधिनियमित करना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।

(नीतीश कुमार)नीतीश कुमार)नीतीश कुमार)नीतीश कुमार) भारभारभारभार----साधकसाधकसाधकसाधक सदस्यसदस्यसदस्यसदस्य

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 March 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2021-03-19.181/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2021-03-19.181.