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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 24 March 2021

Published 24 March 2021

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2021-03-24.205
Languages
English, Hindi

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3 ;बपकरू19द्ध;बपकरू20द्ध 1;बपकरू22द्ध43 ;बपकरू24द्ध;बपकरू25द्ध;बपकरू26द्ध

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बिहार विधानबिहार विधानबिहार विधानबिहार विधान सभा सचिवालयसभा सचिवालयसभा सचिवालयसभा सचिवालय ——— રુf/ત્ત્શ્રરૂpuત્ત્ ૨૩ eત્ત્pક્ષ્ ૨૦૨૧

सं॰ वि॰स॰वि॰-13/2021-1629/वि॰स॰।—'' बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021'', जो बिहार विधान सभा में दिनांक 23 मार्च, 2021 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है ।

आदेष से, राज कुमार सिंहराज कुमार सिंहराज कुमार सिंहराज कुमार सिंह,,,, सचिव, बिहार विधान सभा।2 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध [वि॰स॰वि॰ 08, 2021 बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021 प्रस्तावना।- बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 7, 2007) 30 मार्च, 2007 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया और राज्य में प्रभावी है; और जबकि, उक्त अधिनियम के अधिनियमित होने के पूर्व राज्य की पुलिस सेवाएँ पुलिस अधिनियम, 1861 एवं उसके अधीन बनाये गए नियमों से शासित थी और बिहार सैन्य पुलिस, बंगाल सैन्य पुलिस अधिनियम, 1892, यथा बिहार राज्य में लागू, और उसके अधीन बनाये गए नियमों से शासित थी; और जबकि, बिहार तीव्रता से विकसित होता राज्य है, जिसे औद्योगिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, हवाई अड्‌डो, मेट्रो रेल आदि की सुरक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, राज्य के वृहत्तर हित में एक बहुज्ञान क्षेत्रीय कुशलता वाले सशस्त्र पुलिस बल की आवश्यकता है; और जबकि, बिहार की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए राज्य को एक समर्पित, कुशल प्रशिक्षित और पूर्णतः सुसज्जित सशस्त्र पुलिस बल की आवश्यकता है; और जबकि, बिहार सैन्य पुलिस की भूमिका एवं उसका पृथक संगठनात्मक ढाँ़चा को देखते हुए, उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु, इसकी विशेष सशस्त्र पुलिस के रुप में अलग पहचान बनाए रखना आवश्यक है; अतः, एक बहुज्ञान क्षेत्रीय विशेष सशस्त्र पुलिस बल के गठन, संगठनात्मक विकास और बेहतर विनियमन का उपबंध करना समीचीन है । भारत गणराज्य के बहतरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो। -

संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ।-

1. (1) यह अधिनियम बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगा। परिभाषाएँः-

2. इस अधिनियम में जबतक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(i) "अधिनियम" से अभिप्रेत है, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 (ii) "सक्रिय सेवा" इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति के संबंध में, "सक्रिय सेवा" से अभिप्रेत है, विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी को शत्रु समूहों अथवा क्षेत्र में अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध सौंपा गया कोई कर्तव्य अथवा ऐसा कर्तव्य जिसमें वह संलग्न हो; और किसी भी अवधि के दौरान ऐसे विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी की किसी खतरनाक अपराधी अथवा वास्तविक अथवा संभावित शांति भंग होने से निपटने के लिए की गई प्रतिनियुक्ति; और किसी भी अवधि के दौरान, ऐसी व्यस्त रहने की स्थिति, जिसे किसी भी प्रवर अधिकारी के आदेश से सक्रिय सेवा निर्धारित किया जाय।

(iii) "उप-समादेष्टा" वाहिनी के समादेष्टा के "द्वितीय अधिकारी" होगें और ऐसे व्यक्ति से अभिप्रेत है, जिसे सरकार द्वारा विशेष सशस्त्र पुलिस का उप-समादेष्टा नियुक्त किया गया हो;

(iv) "वाहिनी" से अभिप्रेत है, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस की ऐसी इकाई जिसे सरकार द्वारा वाहिनी के रूप में गठित किया गया है;

(v) "समादेष्टा" से अभिप्रेत है, ऐसे व्यक्ति जिनको सरकार द्वारा विशेष सशस्त्र पुलिस वाहिनी का समादेष्टा नियुक्त किया गया हो और इसमें जिला पुलिस का प्रभारी पुलिस अधीक्षक भी सन्निहित है;

(vi) "सरकार" से अभिप्रेत है, बिहार की राज्य सरकार; (vii) "अधिसूचना" से अभिप्रेत है, सरकार के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना; (viii) "विहित" से अभिप्रेत है, सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियम; (ix) "वरीय पदाधिकारी" से अभिप्रेत है, कोई पुलिस पदाधिकारी जिनको विशेष सशस्त्र पुलिस में अधिनियम की धारा 4 के अधीन नियुक्त किया गया हो;

(x) "विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी" से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति जिसने इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार इस अधिनियम की अनुसूची II में कथन पर हस्ताक्षर किए हैं और जो इस अधिनियम की अनुसूची III में वर्णित पुलिस अधिकारियों के किसी वर्ग से संबंधित है और कोई ऐसा अन्य अधिकारी जिसे अधिसूचित किया जाएगा;

3 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध

(xi) "विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान" से अभिप्रेत है, कोई लोक अथवा निजी क्षेत्र के औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक उपक्रम; महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान जैसे कि हवाई अड्‌डा, मेट्रो रेल, विद्युत संयंत्र, ऐतिहासिक और सांस्—तिक महत्व के स्थान, और कोई स्थान, प्रतिष्ठान या गतिविधि, जिसे सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाए;

(xii) "प्रवर" अधिकारी से विशेष सशस्त्र पुलिस के संबंध में अभिप्रेत है, कोई ऐसा अधिकारी जिसे उस अधिकरी से उच्चतर पंक्ति के अधिकारी के रूप में विहित किया गया हो;

(xiii) "विश्वास करने का कारण", "आपराधिक बल", "हमला", "कपटपूर्वक" और "स्वेच्छा से उपहति कारित" शब्दों और अभिव्यक्तियों का अभिप्रेत है, जो भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का 45) में निर्दिष्ट है।

विशेष सशस्त्र पुलिस का गठनः- 3. (1) राज्य की एक सशस्त्र पुलिस होगी, जो बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस कही जायेगी, जो लोक-व्यवस्था का संधारण, उग्रवाद से मुकाबला, विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठानों की बेहतर संरक्षा एवं सुरक्षा, इस तरह सुनिश्चित करेगी, जैसा कि अधिसूचित हो, और साथ ही ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगी, जो सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाए।

(2) विशेष सशस्त्र पुलिस को एक या अधिक वाहिनियों में इस तरह से और ऐसी अवधि के लिए गठित की जायेगी, जैसा कि विहित हो ।

(3) इस अधिनियम के आरंभ के समय विद्यमान बिहार सैन्य पुलिस वाहिनियों को इस अधिनियम के अधीन गठित किया गया समझा जाएगा और इसके पश्चात्‌ उन्हें इस अधिनियम की अनुसूची I में यथा वर्णित बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस वाहिनी कहा जाएगाः

परन्तु सरकार अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, किसी वाहिनी को इसमें से संशोधित, जोड़ या हटा सकेगी।

विशेष सशस्त्र पुलिस का अधीक्षण, समादेशन और प्रशासनः- 4. (1) विशेष सशस्त्र पुलिस का सामान्य अधीक्षण सरकार में निहित होगा और वह उसका प्रयोग कर सकेगी। विशेष सशस्त्र पुलिस की कमान, पर्यवेक्षण और प्रशासन पुलिस महानिदेशक, बिहार में निहित होगी, जो बिहार राज्य पुलिस बल के प्रमुख हैं।

(2) पुलिस महानिदेशक, बिहार, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों का निर्वहन, विशेष सशस्त्र पुलिस के प्रमुख के रूप में नियुक्त महानिदेशक/अपर महानिदेशक/ अन्य कोटि के पुलिस पदाधिकारी, की सहायता से करेगें।

(3) सरकार विशेष सशस्त्र पुलिस में ऐसी संख्या में महानिरीक्षकों, उप-महानिरीक्षकों, समादेष्टाओं और ऐसे अन्य पंक्ति के पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति करेगी, जैसा कि अधिसूचित हाें।

(4) विशेष सशस्त्र पुलिस में नियुक्त वरीय पदाधिकारी ऐसे शक्ति एवं कर्तव्य का प्रयोग करेंगे, जैसा कि विहित हों।

विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारियों के श्रेणी और ग्रेडः- 5. (1) विशेष सशस्त्र पुलिस के अधिकारियों का पदसोपान वह होगा, जो अधिनियम की अनुसूची III में वर्णित हो :

परन्तु सरकार अधिसूचना द्वारा उक्त अनुसूची में किसी पद को जोड़ या हटा सकेगी। (2) ऐसे सशस्त्र पुलिस अधिकारी, जो इस अधिनियम के आरंभ की तिथि को पदधारित हैं, को इस अधिनियम के अधीन विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी में नियुक्त किया गया समझा जाएगा । विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारियों का नामांकन एवं उनकी पदच्युतिः- 6. (1) किसी व्यक्ति को विशेष सशस्त्र पुलिस में नियुक्ति के पूर्व, अनुसूची II में दिए गए कथन को समादेष्टा या उप-समादेष्टा की उपस्थिति में पढ़ कर सुनाया जाएगा और, यदि आवश्यक हो, तो उसे समझाया जाएगा और उसे ऐसा पढ़ कर सुनाए जाने की पावती के रूप में उसके द्वारा कथन को हस्ताक्षरित किया जाएगा।

(2) विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी अधिनियम के तहत उसके द्वारा हस्ताक्षरित कथनानुसार शर्तों को छोड़कर, बल से स्वेच्छापूर्वक पदच्युत के हकदार नहीं होगें।

बिना वारण्ट गिरफ्तार करने की शक्तिः- 7. (1) कोई भी विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी, किसी विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान की सुरक्षा की जवाबदेही होने पर, बिना वारण्ट और बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है - (i) जो ऐसे विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान के किसी कर्मचारी को या उसे या किसी विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी को, ऐसे कर्मचारी के रूप में अपने कर्तव्य के निर्वहन में या ऐसे विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्य के निष्पादन में, जैसा भी मामला हो, या ऐसे विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने या4 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध रोकने के इरादे से, या इस तरह के विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी के रूप में उसके कर्तव्य के विधिवत निर्वहन में उसके द्वारा किए गए या किए जाने वाले किसी भी प्रयास के परिणाम में स्वेच्छापूर्वक उपहति कारित करता है या स्वेच्छापूर्वक उपहति कारित करने प्रयास करता है, या सदोष अवरोध करता है या सदोष अवरोध का प्रयास करता है या हमला करता है, या हमला करने का प्रयास करता है, या हमले का भय दिखाता है; या आपराधिक बल का प्रयोग करता है या प्रयोग करने की धमकी देता है, या प्रयोग करने का प्रयास करता है;

(ii) जिसका सम्बद्ध या जिसके विरूद्ध सम्बद्धता का एक उचित संदेह उत्पन्न होता हो, या जो अपनी उपस्थिति को छुपाने के लिए सावधानी बरतता पाया जाय, जिन परिस्थितियों से यह मानने का कारण हो, कि वह ऐसी सावधानी संज्ञेय अपराध करने के लिए बरत रहा है, जो संज्ञेय अपराध किसी विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान की सम्पत्ति से या परिसर में रखी सम्पत्ति से संबंधित हो ।

(iii) जो संज्ञेय अपराध करता है या करने का प्रयास करता है, जिससेें किसी भी विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान से संबंधित किसी भी कार्य को करने में लगे किसी भी व्यक्ति के जीवन को खतरा है या हो सकता है ।

(2) यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान स्थान के परिसर में अनधिकृत प्रवेश किया पाया जाता है, तो किसी भी विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी द्वारा, कोई भी अन्य कार्यवाही के पूर्वाग्रह के बिना, जो उसके खिलाफ की जा सकती है, ऐसे परिसर से हटा दिया जा सकता है।

बिना वारंट तलाशी लेने की शक्तिः- 8. (1) जब भी किसी विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी, जो अधिसूचित पंक्ति से अन्यून है, के पास यह मानने का कारण है कि धारा 7 में उल्लिखित कोई अपराध घटित हुआ है या घटित किया जा रहा है और यह कि तलाशी वारंट अपराधी के भागने या साक्ष्य छुपाने के अवसर दिये बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है, वह अपराधी को निरूद्ध कर सकता है और उसके शरीर और उसके वस्तुओं की तुरन्त तलाशी ले सकता है और यदि वह उचित समझता है, तो ऐसे किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है जिसके बारे में उसका यह विश्वास है कि उसने यह अपराध किया है। (2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अन्तर्गत तलाशियों से संबंधित प्रावधान, जहॉं तक हो, इस धारा के अन्तर्गत तलाशियों पर लागू होगें।

गिरफ्तारी के पश्चात्‌ अनुसरण की जाने वाली प्रक्रियाः- 9. इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी करने वाला कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी, अनावश्यक विलंब के बिना, ऐसे गिरफ्तार व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी को सौंप देगा या पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में, ऐसे गिरफ्तार व्यक्ति को, गिरफ्तारी के प्रसंग से संबंधित परिस्थितियों के प्रतिवेदन के साथ, निकटतम पुलिस स्टेशन तक ले जाएगा या भिजवाएगा ।

विशेष सशस्त्र पुलिस के वरीय पदाधिकारी के विशेषाधिकारः- 10. विशेष सशस्त्र पुलिस के प्रमुख में नियुक्त महानिदेशक/अपर महानिदेशक/ अन्य पंक्ति के पुलिस पदाधिकारी एवं विशेष सशस्त्र पुलिस के अन्य पदाधिकारी सहित, महानिरीक्षक, उप-महानिरीक्षक , समादेष्टा एवं उप-समादेष्टा, सभी विशेषाधिकारों के हकदार होगें, जो कि एक पुलिस अधिकारी को बिहार पुलिस अधिनियम, 2007, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 और वर्तमान में लागू किसी अन्य अधिनियम के तहत प्राप्त है।

जघन्य अपराधों के लिए दंडः- 11. कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी, जो -

(क) किसी भी विद्रोह या देशद्रोह की शुरुआत करता है, उसे उत्तेजित करता है, कारित करता है, या उसमें सम्मिलित होता है या किसी भी विद्रोह या देशद्रोह के समय उपस्थित होते हुए उसे दबाने के लिए अपना भरसक प्रयास नहीं करता है, या, किसी भी विद्रोह के विधमानता या इरादे के बारे में जानते हुए या विद्रोह का विश्वास करने के कारण रखते हुए देरी किए बिना अपने समादेशाधिकारी या अन्य प्रवर अधिकारी को जानकारी नहीं देता है; या

(ख) चाहे वह ड्यूटी पर हो या न हो, अपने प्रवर अधिकारी पर आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या करने का प्रयास करता है या उस पर हमला करता है; या

(ग) लज्जास्पद रूप से किसी गैरिसन, किले, चौकी या गार्ड, जो उसके प्रभार में है या जिसकी रक्षा करना उसका कर्तव्य है, को परित्यक्त करता है या सुपुर्द करता है ; या

(घ) राज्य के विरूद्ध शस्त्र उठाने वाले किसी व्यक्ति के साथ प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः पत्र व्यवहार करता है, या उसकी सहायता करता है या उसे राहत देता है या ऐसे किसी पत्र5 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध व्यवहार को, जो उसकी जानकारी में आता है, अपने समादेशाधिकारी या अन्य प्रवर अधिकारी को तत्काल प्रकट करने में लुप्त करता है; या

सक्रिय सेवा के दौरान जो - (ड.) अपने प्रवर अधिकारी के विधिपूर्ण समादेश की अवज्ञा करता है; या (च) सेवा का अभित्यजन करता है; या (छ) संतरी होते हुए, अपने पदस्थान पर सो जाता है, या नियमित रूप से अवमुक्त हुए या छुट्‌टी के बिना उसको छोड़ देता हैै; या

(ज) अपने समादेशाधिकारी या अपने पदस्थान या दल को लूट-पाट की तलाश में बिना आदेश छोड़ देता है; या

(झ) नियमित रूप से अवमुक्त हुए या छुट्‌टी के बिना अपनी गार्ड, पिकेट, दल या गश्ती दल को छोड़ देता है; या

(ञ) कैम्प या क्वार्टरों में खाद्य सामग्री या अन्य आवश्यक वस्तुएँ लाने वाले किसी व्यक्ति के प्रति आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या उस पर हमला करता है, या किसी संरक्षण गार्ड से जबरदस्ती करता है या बिना आदेश के किसी गृह या अन्य स्थान में लूट-पाट के लिए प्रवेश करता है या, किसी प्रकार की सम्पत्ति की लूट-पाट करता है, या उसे नष्ट करता है या उसे हानि पहॅुंचाता है; या

(ट) किसी कार्रवाई के दौरान, कैम्प, गैरिसन या क्वार्टरो में, जानबूझकर झूठी चेतावनी को कारित करता है या फैलाता हैै;

को, आजीवन कारावास या कम-से-कम सात वर्ष की अवधि के कारावास या ऐसी अवधि के लिए कारावास की सजा दी सकती है, जो चौदह वर्ष तक बढ़ सकती है, या सजा अथवा कारावास के अतिरिक्त इस धारा के अधीन तीन महीने के वेतन या उस सीमा तक का जुर्माना, जैसा भी मामला हो, किया जा सकता है अन्य जघन्य अपराधों के लिए दंडः- 12. कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी जो -

(क) किसी ड्‌यूटी या परेड या प्रगमन पथ पर रहते हुए नशे की हालत में रहता है; या (ख) किसी संतरी पर आघात करता है या उस पर बल का प्रयोग करने का प्रयत्न करता है;

या

(ग) किसी गार्ड, पिकेट या गश्ती दल का समादेशन करते हुए अपने भारसाधन में यथाविधि सुपुर्द किये गए किसी बंदी को लेने से इंकार करता है या अपने भारसाधन में रखे गए किसी बंदी को उचित प्राधिकार के बिना निर्मुक्त करता है या उपेक्षापूर्वक ऐसे किसी बंदी को भागने देता है ; या

(घ) गिरफ्तारी या परिरोध मे होते हुए विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा मुक्त किए जाने से पूर्व अपनी गिरफ्तारी या परिरोध से चला जाता हैै; या

(ड़) अपनी ड्‌यूटी के निष्पादन में अपने प्रवर अधिकारी के प्रति अत्यधिक अवज्ञाकारी या धृष्टता का व्यवहार करता है; या

(च) क्वार्टरों या फील्ड में किए जाने के लिए आदिष्ट किसी फील्ड कार्य या अन्य किसी प्रकार के कार्य करने में अधीक्षण करने या उसमे सहायता करने से इंकार करता है, या (छ) किसी भी विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी, जो उससे पंक्ति या पद में अधीनस्थ है, उसे आघात पहुँचाता है या उसका अन्यथा दुरुपयोग करता है, या

(ज) किसी भी पोस्ट अथवा कूच के समादेशन के दौरान, शिकायत प्राप्त होने पर कि उसकी समादेशन के अधीन किसी ने किसी व्यक्ति को पीटा है, या अन्यथा प्रताड़ित या उत्पीड़ित किया है या बलवा अथवा अनधिकृत प्रवेश किया है और ऐसी शिकायत के सत्यता के प्रमाण पर, घायल व्यक्ति को जहाँ तक संम्भव हो उचित प्रतिपूर्ति और मामले को उचित प्राधिकार को प्रतिवेदित करने में विफल रहता है; या

(झ) अपने आयुद्धो, वस्त्रादि, औजारों, उपस्करों, गोलाबारुद या साज-सज्जा, या विशेष सशस्त्र पुलिस की आवश्यक वस्तुएं या अन्य किन्ही वस्तुओं को जो उसको सौपी गई हो या किसी अन्य व्यक्ति की हो, परिकल्पनापूर्वक या उपेक्षा से क्षति पहुँचाता है, या खोता है, या कपटपूर्वक व्ययन कर देता है; या

(ञ) किसी रोग या अशक्तता का बहाना करता है या अपने में बीमारी या दुर्बलता पैदा करता है, या जान बुझकर रोगमुक्त होने में देरी करता है, या अपनी बीमारी या दुर्बलता को और बढ़ाता है; या

(ट) अपने आप को या अंन्य किसी व्यक्ति को सेवा के लिए अयोग्य कर देने के इरादे से स्वंय को या उस व्यक्ति को स्वेच्छापूर्वक उपहति कारित करता है; या6 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध सक्रिय सेवा में नही रहने के दौरान, जो (ठ) अपने प्रवर अधिकारी के विधिपूर्ण समादेश की अवज्ञा करता है; या (ड) किसी प्रकार की संपत्ति की लूट-पाट करता है या उसे नष्ट करता है; या (ढ) सेवा का अभित्यजन करता है;

को एक वर्ष अवधि तक के कारावास की सजा, या तीन महीने के वेतन तक का जुर्माना या दोनों दिया जा सकता है। लघु दंडः- 13. (1) समादेष्टा या उप-समादेष्टा या निरीक्षक (सशस्त्र) से अन्यून कोई पदाधिकारी जो की किसी अलग टुकड़ी या कोई पुलिस चौकी के समादेशन में हो या समादेष्टा या उप-समादेष्टा की अनुपस्थिति के दौरान, वाहिनी मुख्यालय के समादेशन में हो, के द्वारा विधिवत विचारण के बिना, किसी भी विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी जो उनके प्राधिकार के अंर्तगत हो, को अनुशासन के विरु़द्ध कोई लघु दोष, जो कि इस अधिनियम के अंर्तगत प्रावधानित न हो अथवा जो कि आपराधिक न्यायालय के समक्ष र्अभियोजन पर्याप्त गंभीर प्रकृति का ना हो, के लिए निम्नलिखित दंडों में से कोई भी दंड दे सकेगा यानि - (ंक) इसकी निरंतरता के दौरान क्र्वाटर-गार्ड अथवा किसी अन्य स्थान जिसे उपयुक्त समझा जाए, में सात दिनों तक का कैद एवं सभी वेतन एवं भत्ते का समपहरण;

(ख) क्वाटर में परिरोध अथवा परिरोध के बिना तीस दिनों की अवधि से अनाधिक दंड ड्रिल, अतिरिक्त पहरा, फटिग या अन्य डियुटी;

(2) इन दंडों में से किसी एक दंड को अलग से या किसी दंड के साथ या दूसरों के मिलान मेल में दिया जा सकता है।

अन्य विधियों के अधीन अभियोजन से व्यावृत्तिः- 14. इस अधिनियम में ऐसा कुछ नहीं है कि, बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम के अधीन, किसी दंडनीय कार्य या लोप के लिए अभियोजित किए जाने से किसी व्यक्ति को निवारित नहीं करेगी।

परन्तु किसी व्यक्ति को उसी अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जाएगा । न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लेने की प्रक्रियाः- 15. इस अधिनियम के तहत किसी भी अपराध का संज्ञान कोई भी न्यायालय नहीं लेगा जब आरोपित व्यक्ति एक विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी है, सिवाय ऐसे अपराध से गठित तथ्यों की लिखित रिर्पोट एवं सरकार द्वारा इस संबंध में अधिकृत पदाधिकारी की पूर्व मंजूरी पर।

विशेष सशस्त्र पुलिस के समादेष्टा की, विशेष सशस्त्र पुलिस से अन्यथा, अनुशासनिक एवं अन्य शक्तियाँः- 16. ऐस नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जो सरकार इस निमित अधिसूचित कर सकती है, विशेष सशस्त्र पुलिस के समादेष्टा को, बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा -3 के अधीन गठित बिहार पुलिस बल में नियुक्त पुलिस अधिकारियों, जो विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी नहीं हैं, के संबंध में वही अनुशासनात्मक शक्तियां प्राप्त होंगी, जो उनके संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक को प्राप्त होती है। इस प्रकार बनाये गये नियमों में ऐसी अनुशासनिक शक्तियों का प्रयोग करते समय अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया विहित हो सकेगी और ये नैसर्गिक सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। विशेष सशस्त्र पुलिस के सदस्यों के कार्यों के लिए संरक्षणः- 17. विशेष सशस्त्र पुलिस के किसी सदस्य द्वारा सक्षम प्राधिकार के आदेश के अनुसरण में किये गये कृत्य से उसके विरूद्ध किसी वाद या कार्यवाहियों में उसके लिए यह अभिवचन करना विधिसम्मत होगा कि उसके द्वारा ऐसा कृत्य प्राधिकार के ऐसे आदेश के अधीन किया गया था।

नियम बनाने की शक्तिः- 18. (1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधो को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।

(2) उपधारा (1) के उपबंधो की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सरकार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारियों के लिए निम्नलिखित मामलों में नियम बना सकेगी, अर्थात्‌ :-- (क) भर्ती, श्रेणी एवं ग्रेड, सेवा शर्ते, वेतन एवं भत्ते, सेवांतीय लाभ एवं इससे संंबंधित मामले; (ख) अनुशासन एवं आचार; (ग) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन कार्य करने के लिए प्राधि—त अधिकारियों की शक्तियां और कर्तव्य;

(घ) इस अधिनियम के अधीन उत्पन्न आपराधिक वाद में न्यायिक हिरासत में लेने हेतु, ऐसे वाद में गिरफ्तार/सिद्धदोष व्यक्तियों के परिरुद्ध हेतु कारागार विनिर्दिष्ट करने के लिए, और ऐसे आपराधिक वादों के निष्पादन हेतु ,7 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध (3) जब तक इस अधिनियम के अधीन इस संबंध में नियम नही बना लिए जाते हैं, बिहार एवं उड़ीसा मिलिट्री पुलिस हस्तक, 1933 के विद्यमान प्रावधान और सरकार द्वारा समय समय पर निर्गत किये गये नियम, विनियम, आदेश आदि, उस हद तक प्रवृत रहेंगे जहॉं तक वे इस अधिनियम के उपबंधो के विरोध मे नहीं हो।

सदन के समक्ष नियम का रखा जानाः- 19. (क) इस अधिनियम के तहत बनाए गए प्रत्येक नियम को राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। (ख) इस अधिनियम के अधीन बनाए गये सभी नियम उनके बनाए जाने के पश्चात यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखे जायेंगे, जब वह सत्र में हो; जिसकी कुल अवधि तीस दिन रहेगी, जो कि एक या एक से अधिक उत्तरोत्तर सत्र में पूरी हो सकेगी। यदि विधान मंडल उस नियम में कोई संशोधन करने के लिए सहमत हो जाएं या विधान मंडल नियम नहीं बनाये जाने के लिए सहमत हो जाए, तत्पश्चात्‌ वह नियम केवल ऐसे संशोधित रुप में ही प्रभावी होगा, या इसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा, जैसा भी हो।

तथापि ऐसे किसी संशोधन या निष्प्रभाव का, उस नियम के अंतर्गत किये गये किसी भी कार्य की वैधता पर, प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आदेश निर्गत करने की शक्तिः- 20. पुलिस महानिदेशक, बिहार, जो पुलिस बल के प्रमुख है, इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्य के निष्पादन हेतु, समय-समय पर आदेश निर्गत कर सकेगें जो कि इस अधिनियम एवं इसके अतंर्गत बनाए गए नियम से सुसंगत हो।

इस अधिनियम के उपबंध अन्य विधियों पर अधिभावीः- 21. (1) इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य तत्समय प्रवृत विधि में अंतर्विष्ट या ऐसे विधि की किसी प्रभावी लिखत के होने से असंगत होते हुए भी, अधिभावी होगें।

(2) इस अधिनियम के प्रारंभ पर, किसी अधिनियम, नियम, अधिसूचना या आदेश में बंगाल सैन्य पुलिस अधिनियम, 1892 का संदर्भ होने पर उसको बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 का संदर्भ माना जायेगा।

कठिनाईयों को दूर करने की शक्तिः- 22. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, कठिनाईयों को दूर करने के लिए, इस अधिनियम से असंगत न होने वाले, ऐसे उपबंध बना सकेगी, जो आवश्यक प्रतीत होते है ,

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ नहीं किया जाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, यथाशीघ्र बनाए जाने के पश्चात्‌, राज्य विधान सभा के प्रत्येक सदन मे अधिनियम की धारा 19 के खंड (ख) में उपबंधित अनुसार, रखा जाएगा । निरसन एवं व्यावृत्तिः- 23. (1) बंगाल सैन्य पुलिस अधिनियम, 1892 (1892 का V), बिहार राज्य में यथा लागू, का एतद्‌ द्वारा निरसन किया जाता है।

(2) उक्त अधिनियम के अधीन किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई कार्रवाई, ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस अधिनियम के तदनुरूप उपबंधों के अधीन किया गया कार्य या कार्रवाई समझी जाएगी, जब तक कि ऐसा कार्य या कार्रवाई इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, और तब तक प्रभावी रहेगी जब तक कि इस अधिनियम के अधीन किसी कार्य या कार्रवाई द्वारा अधिक्रमित नहीं की जाती।

अनुसूची I

[धारा 3(3) देखें]

इस अधिनियम के प्रारंभ के समय विद्यमान बिहार सैन्य पुलिस वाहिनी निम्नानुसार जानी जाएगी। 1. बिहार सैन्य पुलिस -1 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-1 कही जाएगी। 2. बिहार सैन्य पुलिस-2 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -2 कही जाएगी। 3. बिहार सैन्य पुलिस-3 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -3 कही जाएगी। 4. बिहार सैन्य पुलिस-4 (आईआरबी-1) को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-4 कही जाएगी। 5. बिहार सैन्य पुलिस-5 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -5 कही जाएगी। 6. बिहार सैन्य पुलिस-6 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -6 कही जाएगी । 7. बिहार सैन्य पुलिस-7 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -7 कही जाएगी। 8. बिहार सैन्य पुलिस-8 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -8 कही जाएगी।8 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध 9. बिहार सैन्य पुलिस-9 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -9 कही जाएगी। 10. बिहार सैन्य पुलिस-10 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -10 कही जाएगी। 11. बिहार सैन्य पुलिस-11 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -11 कही जाएगी। 12. बिहार सैन्य पुलिस-12 (आईआरबी-2) को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -12 कही जाएगी। 13. बिहार सैन्य पुलिस-13 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -13 कही जाएगी। 14. बिहार सैन्य पुलिस-14 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -14 कही जाएगी। 15. बिहार सैन्य पुलिस-15 (आईआरबी-3) को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -15 कही जाएगी । 16. बिहार सैन्य पुलिस-16 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -16 कही जाएगी। 17. महिला सशस्त्र वाहिनी को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (महिला) कही जाएगी। 18. बिहार स्वाभिमान पुलिस बटालियन को बिहार स्वाभिमान विशेष सशस्त्र पुलिस बल कही जाएगी । 19. अश्वारोही सैन्य पुलिस को अश्वारोही विशेष सशस्त्र पुलिस कही जाएगी। 20. विशेष भारतीय रिजर्व बटालियन को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -17 कही जाएगी। 21. राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल-1 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -18 कही जाएगी। 22. राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल-2 को बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस -19 कही जाएगी।

अनुसूची II

कथन

[धारा 6 देखें]

विशेष सशस्त्र पुलिस में तीन साल तक सेवा करने के बाद, आप किसी भी समय, जब आप सक्रिय सेवा में नहीं हो, अपनी सेवामुक्ति के लिए, जिस वाहिनी में आप सेवा कर रहे हो उसके समादेष्टा को, वैसे अधिकारी के माध्यम से आवेदन दे सकते है, जो आपके अधीनस्थ न हो, और आपके आवेदन की तारीख से दो महीने के बाद आपको सेवामुक्ति प्रदान कर दी जाएगी, जब तक कि आपकी सेवामुक्ति से बल की रिक्तियां स्वी—त बल के दसवें भाग से अधिक न हो जाएं; ऐसी स्थिति में आपको तब तक बने रहना होगा जब तक कि यह आपत्ति सक्षम अधिकारी द्वारा समाप्त नहीं कर दी जाती या हटा नहीं दी जाती। लेकिन जब आप सक्रिय सेवा में हो, आपके पास सेवामुक्ति लेने का कोई दावा नहीं रहेगा, और आपको तब तक बने रहना होगा और अपना कर्तव्य निष्पादन करते रहना होगा जब तक कि आपको विशेष सशस्त्र पुलिस में बने रहने की अनिवार्यता समाप्त नहीं हो जाती, तब आप अपना आवेदन उपरोक्त वर्णित तरीके से दे सकते हैं।

सेवामुक्ति के पश्चात पुनः भर्ती के आलोक में आपका पेंशन या सेवामुक्ति से पूर्व की सेवा से संबंधित कोई अधिकार नहीं रहेगा।

( विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी को उपरोक्त को पढ़ कर सुनाये जाने की पावती में उसका हस्ताक्षर) क.ख. मेरी उपस्थिति में क.ख. ने हस्ताक्षर किया जब मेरे द्वारा सुनिश्चित कर लिया गया कि उसने अभिप्राय को समझ लिया हैं। ग.घ.

समादेष्टा या उप-समादेष्टा

अनुसूची III [धारा 5(1) देखें] विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी निम्नलिखित श्रेणी के होंगे, जिनके पदानुक्रमानुसार पंक्ति का विवरण निम्नवत्‌ है और इसमें विहित समकक्ष पंक्ति भी सम्मिलित हैं।

1. प्रमुख निरीक्षक (सशस्त्र ) 2. निरीक्षक (सशस्त्र) 3. रिसालदार 4. अवर निरीक्षक (सशस्त्र) 5. सहायक अवर निरीक्षक (सशस्त्र) 6. हवलदार 7. सिपाही 8. बिगलर9 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध

उद्देश्य एवं हेतु

बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 7, 2007) पारित होने से पूर्व, राज्य की पुलिस सेवाएं बिहार राज्य में यथा लागू पुलिस अधिनियम, 1861, बंगाल मिलिट्री पुलिस अधिनियम, 1892 और इन अधिनियमियों के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा शासित होती थीं । पुलिस थानों में तैनात पुलिस अधिकारी, पुलिस अधिनियम, 1861 द्वारा शासित होते थे और सैन्य पुलिस में तैनात के अधिकारी बिहार राज्य में यथा लागू बंगाल मिलिट्री पुलिस अधिनियम, 1892 द्वारा शासित होते थे ।

लगभग एक शताब्दी से अपनी सुविख्यात अस्तित्व के दौरान, बिहार सैन्य पुलिस ने अपनी कार्य पद्धति, वर्दी, पदसोपान, वाहिनी आधारित संगठनात्मक ढांचे, इत्यादि के आधार पर जिला पुलिस से पृथक पहचान एवं संस्—ति विकसित की है। बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 में संपूर्ण पुलिस संगठन को एक पुलिस सेवा की बात कही गयी है। बिहार सैन्य पुलिस की भूमिका एवं उसका पृथक संगठनात्मक ढाँ़चा को देखते हुए इसकी विशेष सशस्त्र पुलिस के रुप में अलग पहचान बनाए रखना आवश्यक है। बिहार तीव्रता से विकसित होता राज्य है,े जिसे औद्योगिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, हवाई अड्‌डो, मेट्रो रेल आदि की सुरक्षा की आवश्यकतों को पूरा करने के लिए, राज्य के वृहत्तर हित में एक बहुज्ञानक्षेत्रीय कुशलता वाले सशस्त्र पुलिस बल की आवश्यकता है। सरकार द्वारा कार्यकारी आदेश से इन अधिकांश कर्तव्यों को बिहार सैन्य पुलिस को सौंपा गया है, लेकिन विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठानों यथा हवाई अड्‌डा, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वपूर्ण स्थलों, विधुत संयत्र, मेट्‌ो रेल, आदि की सुरक्षा के लिए बिहार सैन्य पुलिस के अधिकारियों को केन्द्रीय औधोगिक सुरक्षा बल के तर्ज पर गिरफ्तारी और तलाशी करने की शक्ति प्रदान करने की आवश्यकता हैं। क्योंकि सशस्त्र पुलिस अधिकारियों को विशेष शक्ति देने का प्रस्ताव है, कि इसके लिए विशेष प्रक्रिया उपबंध किया जाना आवश्यक है, ताकि इस शक्ति का प्रयोग उचित उद्‌यम के साथ हो और इसका दुरूपयोग न हो सके। बिहार की तीन राज्यों के साथ सीमाएं है और नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा भी जुड़ी हुई हैं। बिहार की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए राज्य को एक समर्पित, कुशल प्रशिक्षित और पूर्णतः सुसज्जित सशस्त्र पुलिस बल की आवश्यकता है। बिहार पुलिस आयोग ने 23 मार्च, 1961 की अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि ''बिहार सैन्य पुलिस'' को बंगाल पुलिस अधिनियम, 1892 में, यदि आवश्यक हो तो, अपेक्षित संशोधन कर ''बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस'' के रूप में पुर्ननामांकित किया जा सकता है, चूंकि ''मिलिट्री'' शब्द का प्रयोग अन्य राज्यों की सशस्त्र पुलिस बल द्वारा नहीं किया जा रहा है एवं राज्यों के सशस्त्र पुलिस बलों के नामांकन में एकरूपता बनाये रखना आवश्यक है।

अतः पुलिस महानिदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक के प्रभाराधीन और पुलिस महानिदेशक, बिहार के सम्पूर्ण समादेशन एवं पर्यवेक्षण में एक बहुज्ञानक्षेत्रीय ''बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस'' बल के गठन, संगठनात्मक विकास और बेहतर विनियमन का उपबंध करना समीचीन है ।

यह इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।

(नीतीश कुमार)(नीतीश कुमार)(नीतीश कुमार)(नीतीश कुमार) भार-साधक सदस्य।भार-साधक सदस्य।भार-साधक सदस्य।भार-साधक सदस्य। पटना पटना पटना पटना दिनांक-दिनांक-दिनांक-दिनांक-23232323....03030303....2021202120212021

राज कुमार सिंह,राज कुमार सिंह,राज कुमार सिंह,राज कुमार सिंह, सचिवसचिवसचिवसचिव बिहार विबिहार विबिहार विबिहार विधधधधान-ान-ान-ान-सभासभासभासभा।।।।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 24 March 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2021-03-24.205/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2021-03-24.205.