निबंधन संख्या पी0टी0-40
बिहार गजट
बिहार सरकार }kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-3 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 4-23 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची i`"B
i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA ---
पूरक
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पूरक-क
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2 बिहार गजट, 14 vizhy 2021भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं।
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(cid:356)ामीण कवािस कवभाग
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अधिसूचनाएं
5 अप्रील 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(म०)जहा०-01/2018-434667--(cid:373)ी चन्द्रभूषण गुप्ता (अनु0(cid:354)0-118945), तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, जहानाबाद सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, कुटुम्बा, औरं गाबाद के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के प(cid:361)ांक-48 दिनांक 12.01.209 (cid:554)ारा गठित आरोप प(cid:361) के आलोक म(cid:336) विभागीय प(cid:361)ांक-453939 दिनांक 17.01.2020 (cid:554)ारा विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित की गई ।
आरोप प(cid:361) म(cid:336) (cid:373)ीमती कु ं ती देवी, पति (cid:373)ी चेतनारायण सिंह, (cid:356)ाम-कल्पा खूद(cid:330), पंचायत- कल्पा जिला- जहानाबाद को इंदिरा आवास की सूची म(cid:336) नाम रहने के बावजूद इ(cid:304)(cid:573)रा आवास का लाभ नही ं दे ने का उल्लेख ं ती देवी का नाम पहचान संख्या-4063, BPL स्कोर 11 के साथ (cid:354)मांक-0625 पर BPL सूची म(cid:336) है। (cid:373)ीमती कु दज(cid:330) है। परन्तु (cid:373)ी गुप्ता के (cid:554)ारा BPL सूची म(cid:336) (cid:373)ीमती कु ं ती दे वी के (cid:354)मांक को छोड़कर नीचे के (cid:354)मांक वाले लाभाथ(cid:334) को इंदिरा आवास का लाभ दिया गया है जो विभागीय दिशा-निद(cid:337)श के विपरीत एवं स्थापित (cid:366)(िcid:354)या के वि(cid:349)(cid:544) है। विभागीय काय(cid:330)वाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित किया गया कि (cid:373)ी गाँधी ठाकु र विकलांग (cid:373)ेणी म(cid:336) तथा BPL सूची म(cid:336) इनका (cid:354)मांक 883 पर अंकित है। प(cid:303)रवादिनी (cid:373)ीमती कु ं ती दे वी, पति चेतनारायण सिंह (cid:356)ाम-कल्पा खूद(cid:330), पंचायत कल्पा का नाम BPL सूची के (cid:354)मांक 625 पर अंकित है। जिन लाभूकों को (cid:354)म तोड़कर लाभ देने के उल्लेख है वे लाभुक विकलांग (सामान्य) (cid:373)ेणी के ह(cid:339)। इस (cid:366)कार यह (cid:366)माणित नही ं होता है कि तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी (cid:373)ी चन्द्रभूषण गुप्ता (cid:554)ारा (cid:354)म तोड़कर इं(cid:304)(cid:573)रा आवास योजना का लाभ दिया है। (cid:373)ी चन्द्रभूषण गुप्ता तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, जहानाबाद (cid:554)ारा समपि(cid:330)त लि(cid:304)खत अभ्यावेदन म(cid:336) संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष (cid:366)तिवेदन के आलोक म(cid:336) उनपर लगाए आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है। अत: सम्यक विचारोपरांत (cid:373)ी चन्द्रभूषण गुप्ता (अनु0(cid:354)0- 118945), तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, जहानाबाद सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, कुटुम्बा, औरं गाबाद को सरकारी योजनाओं के निष्पादन म(cid:336) भविष्य म(cid:336) सचेष्ट रहने का निदेश देते (cid:352)ए आरोप मुक्त किया जाता है।
उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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5 अप्रील 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(म0)जहा0-वि0स0-04/2016-433925--(cid:373)ी बबलु कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, घोषी, जहानाबाद सम्प्रति सहायक प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, अर(cid:303)रया के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के प(cid:361)ांक-2293 दिनांक 20.11.2016 (cid:554)ारा प्राप्त आरोप प(cid:361), उप विकास आयुक्त, गया के प(cid:361)ांक- 3300 दिनांक 17.11.2018 के (cid:554)ारा प्राप्त आरोप प(cid:361) एवं जिला पदाधिकारी, गया के प(cid:361)ांक- 2048 दिनांक 22.07.2019 (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप की वृहत जांच हेतु संकल्प संख्या 447509 दिनांक 19.11.2019 (cid:554)ारा विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित किया गया।
संचालन पदाधिकारी (cid:554)रा समपि(cid:330)त जांच (cid:366)तिवेदन म(cid:336) आरोप के कई बिन्दुओं को (cid:366)माणित (cid:366)तिवेदित किया गया। उक्त (cid:366)माणित आरोपों पर (cid:373)ी बबलु कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, घोषी, जहानाबाद एवं बेलागंज, गया सम्प्रति सहायक प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, अर(cid:303)रया का लि(cid:304)खत अभ्यावेदन प्राप्त किया गया । आरोप प(cid:361)ों म(cid:336) धा(cid:303)रत आरोपों, संचालन पदाधिकारी के (cid:366)तिवेदन तथा (cid:373)ी कु मार के लि(cid:304)खत अभ्यावेदन म(cid:336) उल्लेखित तथ्यों की समी(cid:407)ा की गई । समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि (cid:373)ी बबलु कु मार के (cid:554)ारा अपने कर्तव्यों के निव(cid:330)हन म(cid:336) ढिलाई बरती गई ।
अत: (cid:373)ी बबलु कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, घोषी, जहानाबाद एवं बेलागंज, गया सम्प्रति सहायक प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, अर(cid:303)रया के वि(cid:349)(cid:544) असंचयात्मक (cid:366)भाव से एक वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड अधिरोपित किया जाता है ।3 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 आदेश दिया जाता है कि इस दंड की (cid:366)वि(िcid:700) (cid:373)ी कु मार के सेवा पुस्त म(cid:336) की जाय । आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।
आदे:-आदे कदया जाता है कि कार्यालय आदेश ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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5 अप्रील 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(मु०)लखी०-02/2019-434334--(cid:373)ी अभिषेक कु मार (cid:366)भाकर (अनु0(cid:354)0- 207560), (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, सूय(cid:330)गढ़ा, लखीसराय के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, लखीसराय के प(cid:361)ांक- 619 दिनांक- 09.06.2020 (cid:554)ारा गठित आरोप प(cid:361) म(cid:336) (cid:356)ाम पंचायत राज (cid:373)ीकिशुन, (cid:366)खंड सूय(cid:330)गढ़ा, जिला- लखीसराय म(cid:336) हर घर जल योजना म(cid:336) 21,11,100/- (इ(cid:383)ीस लाख ग्यारह हजार एक सौ (cid:349)पये कु ल) गलत खाता म(cid:336) हस्तांतरित होने के उपरान्त राशि वापस करने के (cid:366)ति संवेदनशील नही ं रहने का आरोप धा(cid:303)रत है। इसी (cid:366)कार (cid:356)ाम पंचायत टोरलपुर म(cid:336) लगभग 8 माह तक 49,27,474 (उन्चास लाख सताईस हजार चार सौ चौहत्तर (cid:349)पये कु ल) अवैध तरीके से अ(िcid:356)म के (cid:349)प म(cid:336) निकाली गई राशि को वापस लेने हेतु लापरवाही बरतने का आरोप गठित है। उक्त आरोप पर (cid:373)ी (cid:366)भाकर से स्पष्टीकरण की मांग की गई। अपने स्पष्टीकरण म(cid:336) उन्होने स्पष्ट किया है कि दिनांक 18.02.2019 को (cid:373)ीकिशुन के पंचायत सचिव (cid:373)ी सुधीर महतो के आवेदन/(cid:366)तिवेदन प्राप्त होते ही उनके (cid:554)ारा प(cid:361)ांक 577 दिनांक 22.02.2019 से जिला पंचायत राज पदाधिकारी, लखीसराय/जिला पदाधिकारी,लखीसराय को सूचना दी गई। (cid:373)ी महतो से स्पष्टीकरण भी पूछा गया जिसका जबाव उनके (cid:554)ारा समपि(cid:330)त नही ं किया गया। तत्पश्चात् ओरियंटल ब(cid:339)क शाखा लखीसराय से प(cid:361)ाचार कर एवं व्यक्तिगत (cid:349)प से शाखा (cid:366)बंधक से मिलकर राशि (cid:356)ाम पंचायत (cid:373)ीकिशुन के खाते म(cid:336) वापस कराई गयी। इसी (cid:366)कार (cid:356)ाम पंचायत टोरलपुर के संबंध म(cid:336) (cid:373)ी (cid:366)भाकर के (cid:554)ारा यह स्पष्ट किया गया है कि उनके (cid:554)ारा सूय(cid:330)गढ़ा (cid:366)खंड का (cid:366)भार दिनांक 18.06.2018 को (cid:356)हण किया गया तथा दिनांक 29.05.2017 से दिनांक 20.01.2018 तक आठ माह तक अवैध निकासी की गई। अत: उनके काय(cid:330)काल म(cid:336) अवैध निकासी का आरोप निराधार एवं सत्य से परे है। तत्कालीन पंचायत सचिव उनके (cid:366)भार (cid:356)हण करने के पूव(cid:330) से ही दिनांक 25.05.2018 से सूय(cid:330)गढ़ा थाना कांड संख्या 82/2018 म(cid:336) दज(cid:330) (cid:366)ाथमिकी के पश्चात् जेल म(cid:336) थे। जेल से छू टने के उपरान्त तत्कालीन मु(cid:304)खया तथा पंचायत सचिव को राशि वापस करने हेतु (cid:366)े(cid:303)रत किया गया। इस संबंध म(cid:336) उच्चाधिकारी से माग(cid:330)दश(cid:330)न हेतु अनुरोध भी किया गया। उक्त के आधार पर (cid:373)ी (cid:366)भाकर (cid:554)ारा उन्हें स्पष्टीकरण से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।
(cid:373)ी (cid:366)भाकर के वि(cid:349)(cid:544) गठित आरोप एवं समपि(cid:330)त स्पष्टीकरण समीक्षोपरान्त स्पष्ट है कि (cid:373)ी (cid:366)भाकर के (cid:554)ारा अस्थायी (cid:349)प से गबनित राशि वापस सही खाते म(cid:336) वापस ली गयी। किन्तु (cid:356)ाम पंचायत टोरलपुर के मामले म(cid:336) उनके (cid:554)ारा के प(cid:361)ाचार की खानापूति(cid:330) की गयी।
अत: अस्थायी वित्तीय विचलन जैसे मामलों म(cid:336) लापरवाही बरतने के लिए (cid:373)ी अभिषेक कु मार (cid:366)भाकर, (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, सूय(cid:330)गढ़ा, जिला- लखीसराय के वि(cid:349)(cid:544) चेतावनी की शा(cid:304)(cid:721) अधिरोपित करने का निण(cid:330)य लिया गया है ।
उक्त के आलोक म(cid:336) सम्यक विचारोपरांत (cid:373)ी अभिषेक कु मार (cid:366)भाकर (अनु0(cid:354)0- 207560), (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, सूय(cid:330)गढ़ा, लखीसराय के वि(cid:349)(cid:544) चेतावनी का दं ड अधिरोपित किया जाता है।
आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ी (cid:366)भाकर के चा(cid:303)र(cid:361)ी म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 4—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in4 बिहार गजट, 14 vizhy 2021
भाग-2
बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। —————
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद विद्यापति मार्ग, पटना-800001 ------ अधिसूचनाएं 10 सितम्बर 2020
सं0 1197--माँ अम्बिका महारानी मंदिर, ऑमी, थाना-दिघवारा, जिला-सारण पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3631 है।
इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु इस मंदिर के संचालन हेतु पर्षदीय अघिसूचना ज्ञापांक-1283, दिनांक 15.11.2007 द्वारा 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था तथा पर्षदीय आदेष ज्ञापांक-1747, दिनांक 27.12.2012 द्वारा नयी समिति के गठन तक इसका कार्यकाल विस्तार किया गया।
नयी समिति गठन हेतु जिला पदाधिकारी, सारण से 11 नामों की मांग की गयी थी जो जिला पदाधिकारी द्वारा वर्ष 2017 प्राप्त कराया गया पुनः वर्ष 2018 में जिला पदाधिकारी द्वारा कुछ नामों में संषोधन करते हुए नयी सूची पर्षद को उपलब्ध करायी इसी बीच ग्रामीणों द्वारा जन प्रतिनिधि की अध्यक्षता में 11 नामों का प्रस्ताव पर्षद को भेजा गया उपरोक्त प्राप्त तीनों सूचियों को अनुमंडल पदाधिकारी को विचार कर उनमें से या नये नाम जिन्हें वे उचित समझे भेजने का निर्देष दिया गया। उक्त के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-233, दिनांक-26.08.2020 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव भेजा है।
उपरोक्त परिस्थिति एवं पर्षदीय आदेष दिनांक-05.09.2020 के आलोक में उक्त मठ के परिसम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक नवीन न्यास समिति का गठन किया जाना है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए माँ अम्बिका महारानी मंदिर, ऑमी, थाना-दिघवारा, जिला-सारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''माँ अम्बिका महारानी मंदिर, ऑमी, थाना-दिघवारा, जिला-सारण न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''माँ अम्बिका महारानी मंदिर, ऑमी, थाना-दिघवारा, जिला-सारण न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।5 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास समिति न्यास परिसर के अन्दर के दुकानों आदि को सुव्यवस्थित करेगी और मंदिर के सौन्दर्यीकरण हेतु आवष्यक समुचित कार्रवाई पर्षद से अनुमति प्राप्त कर करेगी किन्तु इसमें मंदिर के प्राचीनतम स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
14. अध्यक्ष के अनुपस्थिति/व्यस्तता में उपाध्यक्ष द्वारा अध्यक्ष को सूचित कर न्यास समिति की बैठक बुलाएगें तथा बैठक की अध्यक्षता करेगे।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- 1. आयुक्त, सारण - पदेन-अध्यक्ष 2. श्री भीमनाथ तिवारी पिता स्व0 कुबेर तिवारी - उपाध्यक्ष 3. श्रीमति आषा देवी पति हरिष तिवारी - सचिव 4. श्री राजन महतो पिता स्व0 दिना महतो - सदस्य 5. श्री राकेष कुमार सिंह पिता स्व0 मदनमोहन सिंह - सदस्य 6. श्री जर्नादन सिंह चौहान पिता स्व0 प्रहलाद सिंह - सदस्य 7. श्री श्रवण साह पिता स्व0 भुनेष्वर साह - सदस्य 8. श्री रवि कुमार राम पिता श्री हरेन्द्र राम - सदस्य 9. थानाध्यक्ष, दिघवारा - पदेन-सदस्य पता :- ऑमी, थाना-दिघवारा, जिला-सारण। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम माँ अम्बिका महारानी मंदिर, ऑमी, थाना-दिघवारा, जिला-सारण पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। न्यास समिति के सचिव अधिसूचना की तिथि से पन्द्रह दिनों के अन्दर न्यास समिति की प्रथम बैठक बुलाकर कोषाध्यक्ष का चुनाव कर पर्षद को सूचित करेगे
इस न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना की तिथि से (02) दो वर्ष का होगा। न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से किया जाता है, पर्षद के गठन हो जाने के पश्चात् इसको स्थाई किये जाने पर विचार किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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23 नवम्बर 2020
सं0 1910--श्री बाबा भीमनाथ महादेव मठ, ग्राम-भगवानपुर, थाना-गुठनी, जिला-सिवान पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-485 है।
इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-205 दिनांक 09.05.2012 न्यास समिति का गठन पॉच वर्षो के लिए किया गया था, जिसका कार्यकाल समाप्त हो गया। नवीन न्यास समिति गठन हेतु अंचल अधिकारी, गुठनी, जिला-सिवान के पत्रांक-462 दिनांक-06.07.2020 द्वारा 12 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त हुआ। न्यास समिति के प्रस्ताव जो प्राप्त हुआ है, इन्हीं प्रस्तावित व्यक्तियों द्वारा ही मठ की भूमि बचाये जाने के संबंध में लगातार प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित नामों का सत्यापन भी प्राप्त हो गया है। यद्यपि कि प्रस्तावित नामों का कुछ व्यक्तियों के विरूद्ध आपराधिक मुकदमा का उल्लेख सत्यापन रिर्पोट में किया गया है, परन्तु सचिव द्वारा कथन किया गया कि उक्त वाद मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किए व्यक्तियों द्वारा ही समिति के सदस्यों को परेषान करने के उद्देष्य से गलत व असत्य घटना दिखाकर रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है।
उपरोक्त परिस्थति में उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्र्तगत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतित होेता है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री6 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 बाबा भीमनाथ महादेव मठ, ग्राम-भगवानपुर, थाना-गुठनी, जिला-सिवान की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए आदेष दिनांक-29.10.2020 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री बाबा भीमनाथ महादेव मठ, ग्राम-भगवानपुर, थाना-गुठनी, जिला-सिवान न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री बाबा भीमनाथ महादेव मठ, ग्राम-भगवानपुर, थाना-गुठनी, जिला-सिवान न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी न्यास समिति गठित की जाती है :-
1. श्री अखिलेन्द्र द्विवेदी उर्फ राजन द्विवेदी पिता स्व0 विष्वनाथ द्विवेदी ग्राम-चकरी, थाना-दरौली - अध्यक्ष 2. श्री मोतीचन्द चौधरी पिता स्व0 पुजा चाधरी, ग्राम-भगवानपुर - सचिव 3. श्री अभय यादव पिता श्री राजेन्द्र यादव, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 4. श्री सुरेष सिंह पिता स्व0 रामलखण सिंह, ग्राम-जतौर - सदस्य 5. श्री भीम पटेल पिता स्व0 बासदेव पटेल, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 6. हरेन्द्र राम पिता स्व0 राजमन राम, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 7. श्री मुम्तिनाथ पाण्डेय पिता स्व0 अवधविहारी पाण्डेय, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 8. श्री ओम प्रकाष लाल पिता स्व0 षिवसरन लाल, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 9. श्री रामचन्द्र ठाकुर उर्फ टेंगरी ठाकुर पिता स्व0 इन्द्रदेव ठाकुर, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 10. श्री सुनिल कुमार यादव पिता श्री मोती चन्द चौधरी, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य 11. श्री सत्यदेव सिंह पिता स्व0 नगिना सिंह, ग्राम-जतौर - सदस्य7 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम ''श्री बाबा भीमनाथ महादेव मठ, ग्राम-भगवानपुर, थाना-गुठनी, जिला-सिवान'' पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
सभी ग्राम-भगवानपुर, पो0-महुआ, थाना-गुठनी, जिला-सिवान उपर्युक्त सभी सदस्य एक बैठक कर कोषाध्यक्ष का चयन कर पर्षद को सूचित करेंगे। उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से किया जाता है, पर्षद के गठन हो जाने के पश्चात् इसको स्थाई किये जाने पर विचार किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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24 नवम्बर 2020
सं0 1944--पटना जिलान्तर्गत उलार सूर्य मंदिर, दुल्हिन बाजार पटना, अंचल-दुल्हिन बजार, पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-678 है।
इस न्यास के न्यासधारी महंत श्री अवध बिहारी दास जी है। श्री अवध बिहारी दास जी को तुलसी नगर अयोध्या द्वारा दिनांक 05.02.2019 को एक प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जिसका सत्यापन कार्यालय द्वारा भी कराया गया, जिसपर श्री अजय प्रसाद सिंह कार्यालय सचिव, श्री विहुअती भवन सेवा केन्द समिति अयोध्या द्वारा अपने पत्र दिनांक 10.02.2020 को पर्षद को सूचित किया गया कि उक्त प्रमाण पत्र दिनांक 05.12.2019 इनकी समिति द्वारा ही जारी किया गया है। पर्षद में अबतक किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मंदिर में न्यासधारी पुजारी महंत होने का दावा प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में महंत अवध बिहारी दास को इस न्यास का न्यासधारी नियुक्त किया गया तथा न्यास की व्यवस्था हेतु एक न्यास समिति के गठन किये जाने का निर्णय पर्षद द्वारा दिनांक 15.02.2020 को लिया गया। साथ ही महंत जी को निर्देष दिया गया कि अपने साथ मंदिर के अच्छे प्रषासन हेतु तीन व्यक्तियों का नाम जो धार्मिक एवं अच्छे छवि के हो प्रस्तुत करें। साथ ही अनुमंडल पदाधिकारी/अंचलाधिकारी से स्वच्छ छवि के पॉच लोगों के नामों की मांग की गयी। अनुमंडल पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-807 दिनांक 06.07.2020 के द्वारा पॉच सदस्यों का नाम प्रेषित किया साथ ही महंत अवध बिहारा दास ने चार व्यक्तियों का नाम पर्षद में प्रस्तुत किया। उपरोक्त दोनों सूचीयों को चरित्र सत्यापन हेतु पर्षदीय पत्रांक-887 दिनांक 29.08.2020 तथा पत्रांक-1023 दिनांक 01.09.2020 प्रेषित किया गया, जिसकी रिपोर्ट अप्राप्त रही अतः दोनों पक्षों की सहमती से चयनित 09 सदस्य न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से किये जाने का निर्णय किया गया, सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरान्त स्थायी करने पर निर्णय लिया जायेगा।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए पटना जिलान्तर्गत उलार सूर्य मंदिर, दुल्हिन बाजार पटना, अंचल-दुल्हिन बजार, अंचल-पालीगंज की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''पटना जिलान्तर्गत उलार सूर्य मंदिर, दुल्हिन बाजार पटना, अंचल-दुल्हिन बजार, अंचल-पालीगंज न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' पटना जिलान्तर्गत उलार सूर्य मंदिर, दुल्हिन बाजार पटना, अंचल-दुल्हिन बजार, न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।8 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास अस्थायी समिति गठित की जाती है :-
1. महंत अवध बिहारी दास - महंथ-सह-संरक्षक 2. अनुमण्डल पदाधिकारी, पालीगंज - पदेन अध्यक्ष 3. श्री सुरेष सिंह पिता स्व0 कैलाष सिंह - उपाध्यक्ष 4. श्री प्रमोद अवतार चन्द्रवंषी पिता स्व0 गनौरी प्रसाद - सचिव 5. श्री अरविन्द कुमार सुमन पिता श्री रामबालक यादव - कोषाध्यक्ष 6. श्री महेन्द्र सिंह पिता स्व0 बच्चू सिंह - सदस्य 7. श्री विद्या सिंह पिता स्व0 कपिल देव सिंह - सदस्य 8. श्री विनय कुमार पिता सिद्धेष्वर प्रसाद - सदस्य 9. श्री सुरज पासवान - सदस्य उलार सूर्य मंदिर, दुल्हिन बाजार पटना, अंचल-दुल्हिन बजार, अंचल-पालीगंज, जिला-पटना।
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम पटना जिलान्तर्गत उलार सूर्य मंदिर, दुल्हिन बाजार पटना, अंचल-दुल्हिन बजार, पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से किया जाता है कि पर्षद के गठन हो जाने के पश्चात् इनको स्थाई किये जाने पर विचार किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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24 नवम्बर 2020
सं0 1938--बिनपुरवा, सन्यासी आश्रम, ग्राम-बिनपुरवा, पो0-बढुपर, थाना-रामगढ़, जिला-कैमुर पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-232 है।
इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना पत्रांक 1322, दिनांक 13.01.2011 द्वारा एक न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसका कार्यकाल पॉच वर्षो का था। न्यास समिति पूर्व न्यास समिति का कार्यकाल संतोषजनक था, परन्तु बाद में समिति के अध्यक्ष तथा सचिव के हित विरूद्ध कार्य करना प्रारम्भ कर दिया तथा पर्षद में से भी कोई पत्राचार आय-व्यय विवरणी पर्षद शुल्क आदि दाखिल नहीं किया। पर्षद को यह भी षिकायत प्राप्त हुयी कि सचिव तथा उनके भाई द्वारा मठ की भूमि पर अतिक्रमण कर कुछ कच्चा निर्माण किया गया हैं। इस बीच ग्रामीणों द्वारा दिनांक 01.07.2019 को एक बैठक कर 11 व्यक्तियों का नामों का प्रस्ताव पर्षद को दिनांक-08.08.2019 को प्राप्त कराया गया, प्राप्त नामों का चरित्र सत्यापन हेतु थानाध्यक्ष को पर्षदीय पत्रांक-1281 दिनांक 25.10.2019 एवं पत्रांक-1209 दिनांक 14.09.2020 के द्वारा स्मार-पत्र प्रेषित किया गया। थाना प्रभारी, रामगढ़, जिला-कैमूर का पत्र डी0 आर0 नं0-2033 दिनांक 02.10.2020 द्वारा प्राप्त हुआ।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए बिनपुरवा, सन्यासी आश्रम, ग्राम-बिनपुरवा, पो0-बढुपर, थाना-रामगढ़, जिला-कैमुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बिनपुरवा, सन्यासी आश्रम, ग्राम-बिनपुरवा, पो0-बढुपर, थाना-रामगढ़, जिला-कैमुर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बिनपुरवा, सन्यासी आश्रम, ग्राम-बिनपुरवा, पो0-बढुपर, थाना-रामगढ़, जिला-कैमुर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।9 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास अस्थायी समिति गठित की जाती है :-
1. श्री राजा राम बिन्द पिता स्व0 टेगड़ी बिन्द 2. श्री षिव प्ररर्सन बिन्द पिता स्व0 सरजु बिन्द 3. श्री बिजेन्द्र बिन्द पिता श्री बिन्द 4. श्री राजेन्द्र चन्द्रवंषी पिता श्री धारी चन्द्रवंषी 5. श्री रामजी मुषहर पिता स्व0 बदलु मुषहर 6. श्री बिनोद बिन्द पिता राम नगिना बिन्द 7. श्री कृष्ण पटेल पिता स्व0 धुरफेन पटेल
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम बिनपुरवा, सन्यासी आश्रम, ग्राम-बिनपुरवा, पो0-बढुपर, थाना-रामगढ़, जिला-कैमुर पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
उपरोक्त न्यास समिति अपनी बैठक में अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष का चयन कर आपसी सहमती से पर्षद को अनुमोदन हेतु पर्षद को प्रेषित करेंगी।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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24 नवम्बर 2020
सं0 1942--श्री षिव मंदिर, ग्राम-चांदोरूईया, पो0-अखलासपुर, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर, पिन कोड-821101.
पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3646 है।
इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना पत्रांक-2019 दिनांक 11.01.2010 के द्वारा न्यास समिति का गठन किया गया था। जिसका कार्यकाल पॉच वर्षो का था, जिसका कार्यकाल समाप्त हो गया है।
पर्षदीय पत्रांक-619 दिनांक 03.09.2019 द्वारा अंचलाधिकारी भभुआ जिला-कैमूर से नवीन न्यास समिति गठन हेतु 11 सदस्यों का नाम प्रेषित करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है।10 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 पुनः पर्षदीय पत्रांक-2523 दिनांक 25.01.2020 के द्वारा अंचलाधिकारी को स्मार-पत्र दिया गया, जिसके अनुपालन में अंचलाधिकारी, भभुआ का पत्रांक-734 दिनांक 06.03.2020 पर्षद को 11 हिन्दू सज्जनों के नाम की एक सूची प्राप्त हुयी। प्राप्त सूची का पर्षद द्वारा पत्रांक-277 दिनांक 29.05.2020 के माध्यक्ष से चरित्र सत्यापन हेतु थानाध्यक्ष भभुआ को प्रेषित किया गया। पुनः पर्षदीय पत्रांक-637 दिनांक 06.07.2020 के द्वारा स्थानीय जनता से प्राप्त सूची का चरित्र सत्यापन प्रेषित किया गया। प्रतिवेदन अप्राप्त रहने पर पुनः पत्रांक-1219 दिनांक 14.09.2020 द्वारा स्मार-पत्र थानाध्यक्ष, भभुआ को प्रेषित किया गया, जिसके अनुपालन में थाना सदर जिला-कैमूर का पत्र डी0 आर0-8405 दिनांक 04.10.2020 जिसमें लिखा गया कि थाना अभिलेख में इनके विरूद्ध कोई षिकायत दर्ज नहीं पायी गयी। प्रस्तावित समिति के एक सदस्य जमुना पासवान ने पर्षद को अपने आवेदन पत्र दिनांक 18.03.2020 द्वारा समिति में न रखने का अनुरोध किया क्योंकि वह बाहर जाकर काम करते थे।
अतः उपरोक्त परिस्थति में उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्र्तगत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतित होेता है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री षिव मंदिर, ग्राम-चांदोरूईया, पो0-अखलासपुर, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री षिव मंदिर, ग्राम-चांदोरूईया, पो0-अखलासपुर, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री षिव मंदिर, ग्राम-चांदोरूईया, पो0-अखलासपुर, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास समिति को निर्देष दिया जाता है कि की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा जिसका संचालन उपध्यक्ष/कोषाध्यक्ष के नाम से संयुक्त रूप से किया जाता है। 4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें। 7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, - पदेन अध्यक्ष 2. श्री रामनुज कुमार पिता षिव पुजन प्रसाद - उपाध्यक्ष 3. श्री राम सागर राम पिता चेखुरी राम - सचिव11 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 4. श्री जवाहर बिन्द पिता स्व0 षिव राम बिन्द - कोषाध्यक्ष 5. श्री अक्षय कुमार पिता शोभनाथ बिन्द - सह-कोषाध्यक्ष 6. श्री राजू बिन्द पिता स्व0 गुरूचरण बिन्द - सदस्य 7. श्री संत कुमार सिंह पिता स्व0 षिव पुजन सिंह - सदस्य 8. श्री अमर कुमार पिता राम अवध प्रसाद - सदस्य 9. श्री गौतम कुमार पिता गुदन बिन्द - सदस्य 10. श्री मदयी कुमार पिता मुन्षी बिन्द - सदस्य 11. श्री रघुराई कुमार पिता षिव मंगल बिन्द - सदस्य
उपरोक्त सभी ग्राम-चांदोरूईया, पो0-अखलासपुर, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर, पिन कोड-821101.
NOTE:-राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम ''श्री षिव मंदिर, ग्राम-चांदोरूईया, पो0-अखलासपुर, थाना-भभुआ, जिला-कैमूर'' पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप एक वर्ष के लिए किया जाता है और एक वर्ष के क्रिया-कलाप को देखकर स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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17 सितम्बर 2020
सं0 1242--श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-बल्हा, था0अं0-कुषेष्वर स्थान (पष्चिम), जिला-दरभंगा, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4498 है। इस न्यास की सुचारू व्यवस्था हेतु अंचलाधिकारी, कुषेष्वर स्थान, दरभंगा से नाम मांगे जाने पर 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव अंचलाधिकारी द्वारा दिनांक 16/01/2020 को उपलब्ध कराया गया है। उक्त प्रस्तावित नामों का चरित्र-सत्यापन हेतु थानाध्यक्ष, कुषेष्वर स्थान को दिनांक 10/02/2020 एवं स्मार-पत्र दिनांक 26/08/2020 द्वारा चरित्र-सत्यापन रिर्पोट की मांग की गई, जो अभी तक अप्राप्त है। चूँकि वर्तमान में उक्त मंदिर तथा उसकी भूमि की सुरक्षा तथा व्यवस्था हेतु न तो कोई व्यक्ति है और न ही कोई समिति है, अतः केवल चरित्र-सत्यापन रिर्पोट न मिलने के आधार पर न्यास समिति के गठन के प्रस्ताव को स्थगित रखना उचित प्रतीत नहीं लगता है। उपरोक्त परिस्थितियों में अंचलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित सदस्योें की न्यास समिति गठन करने का निर्णय लिया गया है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0- बल्हा, था0अं0- कुषेष्वर स्थान (पष्चिम), जिला- दरभंगा'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, ग्रामपो0- बल्हा, था0अं0- कुषेष्वर स्थान (पष्चिम), जिला- दरभंगा'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, ग्रामपो0- बल्हा, था0अं0- कुषेष्वर स्थान (पष्चिम), जिला- दरभंगा'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।12 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है। थानाध्यक्ष से चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने एवं बोर्ड का गठन होने के पश्चात न्यास समिति को नियमित करने पर विचार किया जायेगाः-
1. श्री रामश्रृंगार सिंह पिता- स्व0 वासुदेव सिंह - अध्यक्ष 2. श्री रामाकान्त सिंह पिता- श्री रामस्वरूप सिंह - सचिव 3. श्री राणा जवाहर सिंह पिता- स्व0 जीवछ सिंह - कोषाध्यक्ष 4. श्री रामाकांत शर्मा पिता- स्व0 रामनंदन शर्मा - सदस्य 5. श्री नारायण कमती पिता- स्व0 तेतर कमती - सदस्य 6. श्री प्रवीण राम पिता- श्री भागो राम - सदस्य 7. श्री विजय सदा पिता- स्व0 भोला सदा - सदस्य 8. श्री राम विलास साह पिता- स्व0 त्रिवेणी साह - सदस्य 9. श्री अषोक राम पिता- श्री पीताम्बर राम - सदस्य 10.श्री राम सुन्दर पासवान पिता- स्व0 राजकुमार पासवान - सदस्य सभी ग्रामीण- बल्हा, था0अं0- कुषेष्वर स्थान (पष्चिम), जिला- दरभंगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, ग्रामपो0-बल्हा, था0अं0- कुषेष्वर स्थान (पष्चिम), जिला- दरभंगा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य, न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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22 सितम्बर 2020
सं0 1294--श्री राम लक्ष्मण जानकी मठ, ग्रामपो0- फतेहपुरवाला, अं0- ताजपुर, था0- मुसरीघरारी, जिला- समस्तीपुर, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4538 है।
उपरोक्त न्यास के देख-रेख पूर्व में महंत श्री रास बिहारी दास एवं श्री सियाराम दास संयुक्त रूप से करते थे। श्री सियाराम दास द्वारा सहदेव दास को चेला नियुक्त किया, पुनः दिनांक 30/12/2002 को निबंधित दस्तावेज द्वारा श्री रामानंद दास को चेला महंत नियुक्त किया। निबंधित दस्तावेज दिनांक 30/12/2002 के आलोक में श्री रामानंद दास को पर्षद के आदेष दिनांक 04/03/2020 द्वारा अस्थायी महंत के रूप में 01 वर्ष के लिए महत नियुक्त करते हुए मंदिर की कूल भुमि लगभग 8 बीघा है, जिसमें आम, नींबू, केला का बगान भी है तथा खेती की भूमि है, जिसकी बंदोवस्ती द्वारा प्राप्त आय-व्यय का स्पष्ट लेखा-जोखा, व्यय आदि की विवरणी के साथ पर्षद के समक्ष उपस्थापित करने और संतोषजनक कार्य पाये जाने पर पर्षद द्वारा अग्रिम आदेष पर विचार करने का आदेष पारित किया गया था।
उक्त आदेष के उपरांत श्री अमरेष कुमार मेहता द्वारा 10 अन्य व्यक्तियों का हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र दिनांक 17/07/2020 को प्राप्त कराया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि मंदिर और मंदिर की भूमि 03 माह की कुल आमदनी लगभग 3,42,500/- रू0 होता है। इस तरह एक में लगभग 10 लाख की आमदनी होगी। दुसरी तरफ महंत रामानंद दास द्वारा षिकायतर्कत्तों के विरूद्ध एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें उनहोेंने उल्लेख किया कि षिकायतकर्त्ता अपराधिक प्रवृति के हैं तथा मंदिर की भूमि को हड़पने का प्रयास कर रहे हैं और इस संबंध में में धारा-107 की कार्यवाई भी कुछ व्यक्तियों के13 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 विरूद्ध की गई, जिसमें पुलिस का रिर्पोट है कि विपक्षीगण मठ की भूमि को हड़पने के लिए प्रयासरत हैं। श्री रामानंद दास की स्वयं स्वीकृति है कि लगभग 18 वर्षों से उक्त मंदिर में रहकर इनके द्वारा 05-06 कमरों का निर्माण कराया गया है तथा यह भी स्वीकार करते हैं कि उन कमरों में इनका परिवार रहता है किंतु राम लक्ष्मण जानकी मंदिर की स्थिति अभी भी जर्जर बनी हुई है।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम लक्ष्मण जानकी मठ, ग्रामपो0- फतेहपुरवाला, अं0- ताजपुर, था0- मुसरीघरारी, जिला- समस्तीपुर'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम लक्ष्मण जानकी मठ न्यास योजना, ग्रामपो0- फतेहपुरवाला, अं0- ताजपुर, था0- मुसरीघरारी, जिला- समस्तीपुर'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम लक्ष्मण जानकी मठ न्यास समिति, ग्रामपो0- फतेहपुरवाला, अं0- ताजपुर, था0- मुसरीघरारी, जिला- समस्तीपुर'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. महंत श्री रामानंद दास को यह अधिकार होगा कि मंदिर की पूजा-पाठ, राग-भोग मंदिर की भूमि में निर्मित कमरों में रहकर करेंगे तथा मंदिर की भूमि को रखकर, बैंक से ऋण लेकर जो गाय क्रय किये हैं, उसमें 5 गायें अभी भी हैं, जो 40-45 लीटर दूध देती है, उन पषुओं की देख-रेख भी महंत जी स्वयं करेंगे एवं उससे प्राप्त आय भी अपने व्यक्तिगत उपयोग में ला सकेंगे।14 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 18. जमीन तथा बगानों की बंदोवस्ती खुली डाक द्वारा होगी, जिसकी पंजी संधारित की जायेगी एवं उक्त भूमि से होने वाली आय में से न्यास समिति 3,000/- रू प्रतिमाह महंत श्री रामानंद दास को मंदिर में राग-भोग, पूजा-पाठ या उनके व्यक्तिगत व्यय के रूप में देंगे और उसकी रसीद प्राप्त करेंगे।
19. खेती की भूमि, नींबू, केला, आम का बगान का वृक्ष है, उसकी देख-रेख समिति द्वारा की जाएगी, जिसका आय-व्यय विवरण पर्षद के समक्ष प्रतिवर्ष प्रस्तुत करेंगे तथा मंदिर की किसी भी भूमि को न हो तो अतिक्रमण करेंगे और न ही किसी को अतिक्रमण करने देंगे एवं न ही उसका विक्रय करेंगे।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित 07 सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है। बोर्ड का गठन होने के पश्चात न्यास समिति को नियमित करने पर विचार किया जायेगाः-
1. अंचलाधिकारी, ताजपुर, जिला- समस्तीपुर - पदेन अध्यक्ष 2. श्री विष्णुदेव प्रसाद सिंह पिता- श्री फुद्दी लाल सिंह - उपाध्यक्ष 3. श्री चन्देष्वर पस्राद सिंह पिता- स्व0 एकनाथ सिंह- - सचिव 4. श्री लक्ष्मण सिंह पिता- स्व0 सुखदेव ंिसंह - कोषाध्यक्ष 5. श्रीमती मुन्नी देवी पति- श्री रघुनाथ दास - सदस्य 6. श्री राज किषोर सिंह पिता- स्व0 आनंदी सिंह - सदस्य 7. श्रीमती रेणु कुमार पति- श्री संजय सिंह - सदस्य पता- ग्राम- फतेहपुर वाला, अं0- ताजपुर, था0- मुसरीघरारी, जिला- समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम लक्ष्मण जानकी मठ, ग्रामपो0- फतेहपुरवाला, अं0- ताजपुर, था0- मुसरीघरारी, जिला- समस्तीपुर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य, न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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7 दिसम्बर 2020
सं0 2180--श्री षिव मंदिर (बाबा बर्द्धवानेष्वरनाथ), ग्राम- देकुली, पो0- लहेरियासराय, था0अं0-बहादुरपुर, जिला- दरभंगा, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4542 है।
उक्त न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय पत्रांक- 2746, दिनांक 10/02/2020 द्वारा अंचलाधिकारी, बहादुरपुर, दरभंगा से न्यास समिति गठन वास्ते अधिकतम ग्यारह हिन्दू सज्जनों का नाम प्रस्तावित करने का आग्रह किया गया था, जिसके आलोक में अंचलाधिकारी, बहादुरपुर का प्रतिवेदन पत्रांक- 536, दिनांक 16/03/2020 प्राप्त हुआ, जिसका सत्यापन प्रतिवेदन भी संबंधित थाना से दिनांक 08/09/2020 को प्राप्त हो चुका है, जिसमें किसी प्रस्तावित व्यक्ति के विरूद्ध कोई आपराधिक इतिहास या षिकायत थाना पर दर्ज नहीं है, का उल्लेख है।
उपरोक्त परिस्थितियों में मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा उसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री षिव मंदिर (बाबा बर्द्धवानेष्वरनाथ), ग्राम- देकुली, पो0- लहेरियासराय, था0अं0- बहादुरपुर, जिला-दरभंगा'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री षिव मंदिर (बाबा बर्द्धवानेष्वरनाथ) न्यास योजना, ग्राम- देकुली, पो0- लहेरियासराय, था0अं0- बहादुरपुर, जिला- दरभंगा'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री षिव मंदिर (बाबा बर्द्धवानेष्वरनाथ) न्यास समिति, ग्राम- देकुली, पो0- लहेरियासराय, था0अं0- बहादुरपुर, जिला- दरभंगा'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। 4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।15 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 5. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए अंचलाधिकारी, बहादुरपुर द्वारा प्रस्तावित निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से गठित की जाती है तथां पर्षद का गठन होने के पश्चात न्यास समिति को नियमित करने पर विचार किया जायेगाः-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, जिला- दरभंगा -पदेन अध्यक्ष 2. श्री राम उचित झा पिता- स्व0 रामगोविन्द झा, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - उपाध्यक्ष 3. श्री मोहन झा पिता- स्व0 चन्द्रकान्त झा, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - सचिव 4. श्री भवीक्षण महतो पिता- स्व0 अनूप महतो, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - कोषाध्यक्ष 5. श्री अमरजी झा पिता- स्व0 केदार झा, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - सदस्य 6. श्रीमती गीता देवी पति- श्री राम लखन पासवान, ग्रा0- कबीलपुर, पो0- बहादुरपुर, दरभंगा - सदस्य 7. श्री अभिराम झा पिता- स्व0 बीर बहादुर झा, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - सदस्य 8. श्री त्रिभुवन झा पिता- स्व0 देवेन्द्र झा, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - सदस्य 9. श्री नन्दलाल ठाकुर पिता- स्व0 रकटू ठाकुर, ग्रा0पो0था0- बहादुरपुर, दरभंगा - सदस्य 10.श्री शत्रुघ्न कामती पिता- स्व0 परमेष्वर कामती, ग्रा0- देकुली, पो0- लहेरियासराय, दरभंगा - सदस्य 11. श्री हरिष्चन्द्र पासवान पिता- श्री अर्जुन पासवान, ग्रा0- क्वाही मिर्जापुर, पो0- लहेरियासराय- सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री षिव मंदिर (बाबा बर्द्धवानेष्वरनाथ), ग्राम- देकुली, पो0- लहेरियासराय, था0अं0- बहादुरपुर, जिला- दरभंगा'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य, न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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7 दिसम्बर 2020
सं0 2176--श्री षिव मंदिर, ग्राम- आलमपुर, पो0- गढ़सिसई, था0- विद्यापतिनगर, जिला- समस्तीपुर, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3559 है।
इस न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु एक न्यास समिति का गठन पर्षद द्वारा दिनांक 18/03/04 को किया गया था। पूर्व में न्यास समिति द्वारा आय-व्यय विवरण भी दाखिल किया जाता था, परंतु पिछले कुछ वर्षों से न्यास समिति द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। ग्रामीणों द्वारा दिनांक 04/01/2015 को एक आम सभा की बैठक की गई, जिसमें16 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 निर्णय लिया गया कि पूर्व न्यास समिति के 03 सदस्यों का स्वर्गवास हो गया है तथा कुछ सदस्य अपनी शारीरिक स्थिति के कारण सक्षम नहीं हैं। नई न्यास समिति में 11 लोगों को प्रस्ताव के साथ बनाए जाने का प्रार्थना-पत्र दिनांक 02/09/2016 को पर्षद में उपलब्ध कराया गया था, जिसपर पूर्व कमिटि के सदस्यों को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देष दिया गया था, परंतु वे उपस्थित नहीं हुए। पषदीय पत्र दिनांक 14/05/2018 द्वारा अंचलाधिकारी, विद्यापतिनगर से भी 11 व्यक्तियों के नामों की मांग न्यास समिति गठन हेतु की गई तथा उस पर स्मार-पत्र भी समय-समय पर प्रेषित किया गया, परंतु अंचलाधिकारी द्वारा किसी नाम का प्रस्ताव नहीं उपलब्ध कराया गया, जबकि प्रस्तावित न्यास समिति द्वारा पर्षद में वर्ष 2014-15 से 2019-20 की आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क तथा कुछ फोटोग्राफ भी दाखिल किया गया और सूचित किया गया कि उक्त श्री षिव मंदिर के बगल में ग्रामीणों के सहयोग तथा चंदे से एक नवीन पार्वती जी का मंदिर निर्माण की योजना है और कार्य भी प्रगति पर है, जिसकी फोटो भी दाखिल की गयी, जिसमें उल्लेख है कि प्रस्तावित नामों के विरूद्ध कोई प्रतिकूल टिप्पणी थाना अभिलेख में दर्ज नहीं है। उक्त प्रतिवेदन अभी तक पर्षद को प्राप्त नहीं हुआ है। उक्त मंदिर के पूर्व न्यास समिति के अधिकांष सदस्य या तो स्वर्गवासी हो गए या त्याग-पत्र दे चुके हैं। फोटो से प्रतीत होता है कि मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ है तथा श्री मृत्युंजय सिंह, प्रवीण कुमार तथा षिवचन्द्र महतो के हस्ताक्षर से आय-व्यय विवरण भी दाखिल किया गया है।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री षिव मंदिर, ग्राम- आलमपुर, पो0- गढ़सिसई, था0- विद्यापतिनगर, जिला-समस्तीपुर'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री षिव मंदिर न्यास योजना, ग्राम- आलमपुर, पो0- गढ़सिसई, था0-विद्यापतिनगर, जिला- समस्तीपुर'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री षिव मंदिर न्यास समिति, ग्राम- आलमपुर, पो0- गढ़सिसई, था0- विद्यापतिनगर, जिला- समस्तीपुर'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन दो सदस्यों (अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ / मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।17 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए ग्रामीणों की आम सभा द्वारा प्रस्तावित निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक पाए जाने के पश्चात स्थायी किए जाने पर विचार किया जायेगाः-
1. श्री मृत्युंजय कुमार सिंह पिता- श्री कपिलदेव सिंह - अध्यक्ष 2. श्री धीरज सिंह पिता- श्री जितेन्द्र प्रसाद सिंह - सचिव 3. श्री प्रवीण कुमार पिता- स्व0 राम लगन सिंह - कोषाध्यक्ष 4. श्री शंकर मांझी पिता- स्व0 महेन्द्र मांझी- - सदस्य 5. श्री नागेन्द्र राय पिता- स्व0 गांगो राय - सदस्य 6. श्री सज्जन ंिसह पिता- श्री राम लखन सिंह - सदस्य 7. पंडित श्री राम पुकार पाठक पिता- स्व0 रोहित पाठक - सदस्य 8. श्री षिवचन्द्र महतो पिता- स्व0 रामअवतार महतो - सदस्य 9. श्री रामा राय पिता- श्री बालेष्वर राय - सदस्य 10. श्री शंकर पासवान पिता- स्व0 जगेष्वर पासवान - सदस्य 11. श्री अमरेष सिंह पिता- स्व0 रामपुकार सिंह - सदस्य सभी का पता- ग्राम- आलमपुर, पो0- गढ़सिसई, था0- विद्यापतिनगर, जिला- समस्तीपुर। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री षिव मंदिर, ग्राम- आलमपुर, पो0- गढ़सिसई, था0- विद्यापतिनगर, जिला- समस्तीपुर'' के नाम मेें किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य, न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज (तीन वर्षों से अधिक) आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 नवम्बर 2020
सं0 1878--जय मनोकामना माई मंदिर, गोढ़िया, पोस्ट-हराज, थाना-षिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक अति प्राचीन सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4546 है।
इस मंदिर में अनेक दानदाताओं द्वारा भूमि दान की गयी है तथा एक विषाल मंदिर का निर्माण स्व0 प्रसाद राय द्वारा अपनी भूमि खाता संख्या-408, खेसरा संख्या-4729, रकवा-08 धुर पर किया गया था, जिसमें समाज के सभी लोग बिना रोक-टोक के पूजन-दर्षन को आते हैं तथा चंदा, दान, आदि देते हैं। उक्त मंदिर को पर्षद के आदेष दिनांक 28.08.2020 द्वारा सभी दस्तावेजों पर विचारोपरान्त निबंधन किया जा चुका है। स्व0 प्रसाद राय द्वारा निर्मित उक्त मंदिर जिस भूमि पर निर्मित है, उस भूमि का दान भी उनके पुत्र रामेष्वर राय व तुलसी राय द्वारा दिनांक 11.05.2020 को किया जा चुका है। दान-पत्र की फोटोप्रति भी पर्षद के समक्ष दाखिल की गयी, जिसमें साक्षी के रूप में उनके पुत्र सत्येन्द्र राय व शषिरंजन राय है। उक्त मंदिर के संचालन व देख-रेख के लिए एक आम सभा कर 11 (ग्यारह) व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिनांक-28.08.2020 को नियमावली के साथ प्रस्तुत किया गया था। पर्षद द्वारा उक्त नामों को थानाध्यक्ष, षिकारपुर, जिला-पूर्वी चम्पारण को पर्षदीय पत्रांक-1196 दिनांक 10.09.2020 द्वारा चरित्र सत्यापन हेतु भेजा गया, जिसका चरित्र सत्यापन पर्षद को दिनांक 01.10.2020 को प्राप्त हो गया है, जिसमें प्रस्तावित नामों के विरूद्ध थाना में कोई आपराधिक इतिहास नहीं है का वर्णन है।
उपरोक्त परिस्थति में उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्र्तगत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतित होेता है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए जय मनोकामना माई मंदिर, गोढ़िया, थाना-षिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए आदेष दिनांक 20.10.2020 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''जय मनोकामना माई मंदिर, गोढ़िया, थाना-षिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास18 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 समिति का नाम ''जय मनोकामना माई मंदिर, गोढ़िया, थाना-षिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी न्यास समिति गठित की जाती है :-
1. श्री रामेष्वर राय पिता स्व0 प्रसाद राय - अध्यक्ष 2. श्री सुरेष प्रसाद पिता स्व0 लक्ष्मी प्रसाद - उपाध्यक्ष 3. श्री जिमदार सहनी पिता स्व0 अंचित सहनी - सचिव 4. श्री सत्येन्द्र राय पिता श्री तुलसी राय - कोषाध्यक्ष 5. श्री तुलसी राय पिता स्व0 प्रसाद राय - सदस्य-सह-पुजारी 6. श्री अरविन्द राय पिता श्री जगत नारायण राय - सदस्य 7. श्री रामषरण राय पिता स्व0 जानकी राय - सदस्य 8. श्री जय किषुन सहनी पिता स्व0 नथुनी सहनी - सदस्य 9. श्री रामसागर राय पिता स्व0 लखराज राय - सदस्य 10. श्री रामाधार राय पिता स्व0 छठु राय - सदस्य 11. श्रीमती नागेष्वरी देवी पति श्री सर्वजीत प्रसाद यादव - सदस्य जय मनोकामना माई मंदिर, गोढ़िया, थाना-षिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण। NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम जय मनोकामना माई मंदिर, गोढ़िया, थाना-षिकारगंज, जिला-पूर्वी चम्पारण पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से किया जाता है, इसको स्थाई किये जाने पर विचार किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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4 नवम्बर 2020
सं0 1760--महामाया स्थान संतोषी माता मंदिर, पुरानी धर्मषाला चौक, जिला-मुजफ्फरपुर एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-1981 है।19 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 इस न्यास के सुचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु आदेष दिनांक-13.10.2020 द्वारा अधिसूचना ज्ञापांक-148 दिनांक-05.05.2020 द्वारा 10 सदस्यी न्यास समिति का गठन किया गया है, जिसमें श्री मनोज कुमार गुप्ता एवं श्री सतीष कुमार रजक को सदस्य मनोनित किया गया है।
न्यास समिति के सचिव, श्री अनिल कुमार सिन्हा ने अपने आवेदन पत्र दिनांक-25.06.2020 द्वारा पर्षद को सूचित किया है कि समिति में एक सदस्य के रूप में मनोज कुमार गुप्ता का मनोनयन किया गया है। दिनांक-23.05.2020 को जब मंदिर परिसर में सदस्यों से परिचय हेतु आहुत अनौपचारिक बैठक में मनोज कुमार के नाम के दो व्यक्ति वहां उपस्थित हो अपने दावेदारी पेष करने लगे तथा अपने समर्थकों के साथ आपस में गाली गलौच और मारपीट करने लगे, दोनों पक्ष द्वारा पुलिस थाने मे षिकायत दर्ज करायी गयी। सचिव द्वारा न्यास समिति के कार्य कालापों में गति प्रदान करने एवं दायित्वों के सफलता पूर्वक निर्वहन हेतु न्यास समिति में श्री श्याम भिमसेरिया, उद्योगपति का नाम प्रस्तावित किया और यह उल्लेख किया वह वर्त्तमान में लगभग 4-5 सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है और धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति है। उक्तनाम के साथ 03 अन्य नाम ओम प्रकाष सिंह, से0 नि0 षिक्षक, प्रकाषचन्द्र गुप्ता और भोला चौधरी के नामों का प्रस्ताव दिया।
श्री सतीष कुमार रजक के संबंध में पर्षद को जानकारी प्राप्त करायी गयी कि सतीष कुमार रजक पिछले कुछ वर्षो से मुजफ्फरपुर में नहीं रहते है। इस संबंध में सतीष कुमार रजक के भाई श्री सीतेष कुमार ने भी अपने भाई के स्थान पर अपनी सदस्यता हेतु एक प्रार्थना पत्र पर्षद में दाखिल किया है।
अत उपरोक्त परिस्थिति तथा पर्षदीय आदेष दिनांक-13.10.2020 के आलोक में पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-148 दिनांक-05.05.2020 द्वारा गठित न्यास समिति के सदस्य श्री मनोज कुमार गुप्ता एवं श्री सतीष कुमार रजक को न्यास समिति की सदस्यता से वंचित/मुक्त किया जाता है तथा इनके स्थान पर प्रस्तावित नाम श्री ओम प्रकाष सिंह, अ0प्र0 षिक्षक एवं श्री प्रकाष चन्द्र गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्त्ता को सदस्य के रूप में मान्यता दी जाती है और उक्त न्यास समिति में उपाध्यक्ष का पद रिक्त था, अतः उपाध्यक्ष के रूप में श्री श्याम भिमसेरिया के नाम की मान्यता दी जाती है।
उपरोक्त मनोनित सदस्यों का कार्यकाल न्यास समिति के अवषिष्ट अवधि तक रहेगी। और वे अधिसूचना ज्ञापांक-148, दिनांक-05.05.2020 में वर्णित योजना के अनुरूप कार्य करेंगे।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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23 नवम्बर 2020
सं0 1907--श्री महावीर मंदिर (श्री बउआ हनुमान मंदिर), पुराना बस स्टैण्ड रेलवे स्टेषन के दक्षिण, अंचल-डुमरा, पो0थानाजिला-सीतामढ़ी पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4525 है। इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु मुहल्लेवासियों के तरफ से दिनांक-14.10.2020 को एक आमसमा आयोजित कर 15 व्यतियों के नामों को प्रस्ताव न्यास समिति गठन के लिए दिया गया है। समर्पणकर्त्ता के परिवार के तरफ से श्री पूर्णचन्द मिश्र तथा परमेन्द्र कुमार मिश्र उपस्थित है तथा मंदिर प्रांगन में व्यवसाय कर रहे व्यक्ति श्री संजय कुमार उपस्थित है। पूर्णचन्द मिश्र द्वारा भी न्यास समिति का गठन किये जाने हेतु सहमति दी गयी तथा कथन किया कि न्यास समिति में कम से कम एक सदस्य समर्पणकर्त्ता के परिवार से होनी चाहिए जैस कि समर्पणनामा में उल्लेखित है। न्यास समिति गठन हेतु कुछ व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव श्री पूर्णचन्द मिश्र द्वारा दिया गया तथा प्रस्ताव दिया गया कि न्यास समिति में एक सरकारी अधिकारी को भी रखा जाय।
उपरोक्त परिस्थति में उभय पक्षों की सहमति पर विचारोपरान्त उक्त मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा 32 के अन्र्तगत एक योजना का निरूपन एवं इसके कार्यान्वन हेतु 08 सदस्यीय एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री महावीर मंदिर (श्री बउआ हनुमान मंदिर), पुराना बस स्टैण्ड रेलवे स्टेषन के दक्षिण, अंचल-डुमरा, पो0थानाजिला-सीतामढ़ी की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए आदेष दिनांक-17.10.2020 के आलोक में एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री महावीर मंदिर (श्री बउआ हनुमान मंदिर), पुराना बस स्टैण्ड रेलवे स्टेषन के दक्षिण, अंचल-डुमरा, पो0थानाजिला-सीतामढ़ी न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री महावीर मंदिर (श्री बउआ हनुमान मंदिर), पुराना बस स्टैण्ड रेलवे स्टेषन के दक्षिण, अंचल-डुमरा, पो0थानाजिला-सीतामढ़ी न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।20 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।
6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी न्यास समिति गठित की जाती है :-
1. अनुमंडल पदाधिकारी, सीतामढ़ी - पदेन अध्यक्ष 2. श्री पूर्णचन्द मिश्र पिता स्व0 बिन्देष्वरी प्रसाद मिश्र पता-सुरसंड रोड, सीतामढ़ी - उपाध्यक्ष 3. श्री नग नारायण चौधरी पिता स्व0 मुखलाल चौधरी पता-चकमहिला, जिला-सीतामढ़ी - सचिव 4. श्री परमेन्द्र कुमार पिता श्री पुर्णचन्द्र मिश्रा पता-सुरसंड रोड, सीतामढ़ी - कोषाध्यक्ष 5. श्री महेन्द्र साह पिता स्व0 दषरथ साह पता-अन्नपुर्णा होटल, सीतामढ़ी - सदस्य 6. श्रीमती आषा चौधरी पति श्री रमेष कुमार चौधरी पता-कोर्ट बाजार, सीतामढ़ी - सदस्य 7. श्री पारस मिश्रा - सदस्य 8. श्री श्यामनारायण जायसवाल पिता श्री रामाषीष चौधरी पता-सबनम मेडिकल, सीतमाढ़ी - सदस्य नवगठित न्यास समिति द्वारा मंदिर से होने वाली आय-व्यय का लेखा-जोखा रजिस्टर समुचित ढं़ग से संधारित करेगी। मंदिर परिसर में रखे दान-पेटी को कम से कम तीन सदस्यों की उपस्थित में खोला जायेगा तथा पैंसे की गिनती के उपरान्त यथाषीघ्र मंदिर के बैंक खाता में जमा किया जायेगा। मंदिर से संबंधित होने वाली कोई भी खर्च बैंक से निकासी कर किया जायेगा। मंदिर में पुजारी के रूप में श्री जितेन्द्र झा कार्य करेगें।
NOTE:- राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम श्री महावीर मंदिर (श्री बउआ हनुमान मंदिर), पुराना बस स्टैण्ड रेलवे स्टेषन के दक्षिण, अंचल-डुमरा, पो0थानाजिला-सीतामढ़ी पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा।
उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से किया जाता है, चरित्र सत्यापान एवं पर्षद के गठन हो जाने के पश्चात् इसको स्थाई किये जाने पर विचार किया जायेगा।
भवदीय, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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31 अक्तूबर 2020
सं0 1747--बोधगया मठ, जिला-गया पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-934/1960 है।21 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 बोध गया मठ, लगभग 500 वर्ष से अधिक प्राचीन है, इसका गौरवषाली इतिहास रहा है। यह सनातन धर्मालम्बियों के लिए आस्था का केन्द्र रहा है। इसमें पूर्व में लगभग 15000 एकड़ से अधिक भूमि थी। जिसमें से वर्ष 1952-53 के पूर्व लगभग 12,000 (बारह हजार) एकड़ भूमि संत विनोवा भावे भू-दान योजना हेतु प्रदान की गयी। वर्ष 1966 में पर्षद के निरीक्षक द्वारा बोधगया मठ का निरीक्षण किया गया, जिसमें उल्लेख है कि सन् 1893 ई0 में ''ए ग्रेट हिस्ट्री ऑफ बोधगया मठ'' नामक बुकलेट जो तत्कालीन जिला पदाधिकारी, जी0 ए0 ग्रिसन के आदेष पर राय राम अनुराग राम बहादुर डिप्टी मजिस्टे्रट द्वारा लिखित है, जो बंगाल सेक्रेटेरियट, कलकत्ता से मुद्रित हुआ। जिसमें वर्ष 1590 से समय-समय पर जो महंत हो रहे, उनके नामों का उल्लेख है। मठ का मकान और बगीचा जो लगभग 52 बीघा में स्थित है, जिसका निर्माण लगभग 300 वर्ष पूर्व किया गया था जो तीन मंजीला है और यह भी जानकारी में आयी कि महंत अपने सुविधा के लिए दरबारी और कोठारी की नियुक्ति करते थे और 12वें महंत कृष्ण दयाल गिरि तक महंत की नियुक्ति मठ के साधुओं द्वारा महंत के षिष्यों में से योग्य षिष्य कि की जाती थी। सर्वप्रथम सन् 1932 में दिनांक 13.09.1932 को कृष्ण दयाल गिरि ने निबंधित दस्तावेज द्वारा मठ की सुचारू प्रबंधन हेतु 07 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया। उक्त अभिलेख के आधार पर, सभापति गद्दीनषीन महंत होते थे तथा 03 साधुओं और 03 अन्य सदस्य को समिति में रखा जाता था। बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1951 में गठित होने पर अधिनियम की धारा 59, 60 के अन्तर्गत मठ के तत्कालीन महंत हरिहर गिरि को नोटिस जारी की गयी, जिसपर महंत हरिहर गिरि द्वारा टाईटिल सुट संख्या-23/1951 दाखिल किया, जो माननीय उच्च न्यायालय में ओरिजिनल सुट के रूप में ट्रान्सफर होकर टाईटिल सुट सं0-129/53 के रूप में रजिस्टर्ड हुआ। माननीय न्यायालय ने अपने आदेष दिनांक 12.03.1955 द्वारा महंत के दावें को खारिज करते हुए एक सार्वजनिक धार्मिक संस्था घोषित किया और उल्लेख किया कि यह मठ अधिनियम के अन्तर्गत आता है। उक्त आदेष को तत्कालीन महंत हरिहर गिरि द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अपील वाद एम0सी0ए0 संख्या-66/1955 दाखिल कर प्रष्नगत किया। जो समझौते के आधार पर दिनांक 24.04.1957 को निस्तारित हुआ, जिसमें लगभग 2333 एकड़ भूमि को सार्वजनिक न्यास के रूप में घोषित की गयी तथा 256 एकड़ भूमि महंत की निजी सम्पत्ति मानी गयी। परन्तु इसी बीच मठ की भू-सम्पत्ति को लगभग 15-20 हजार एकड़ भूमि को मठ में जो साधु, नौकर, गृहस्थ षिष्य के नाम बन्दोबस्ती दिखाकर जमीन को बयनामी कर दिया। तत्पष्चात् भू-हदबंदी अधिनियम की अन्तर्गत अधिकांष भूमि अर्जित की गयी और मात्र लगभग 100 एकड़ भूमि मठ में शेष रह गयी। महंत हरिहर गिरि द्वारा एक अनिबंधित अभिलेख दिनांक 23.02.1958 द्वारा सतानंद गिरि को मठ का महंत बनाया तथा मठ के संचालन हेतु एक समिति का भी गठन किया। हरिहर गिरि के पूर्व महंत कृष्ण दयाल गिरि द्वारा पर्षद में निबंधन के पूर्व मठ के संचालन हेतु एक समिति का गठन किया था, जो मठ के प्रषासनीक और व्यवस्थापनात्मक कार्य देखते थें। महंत सतानंद गिरि के विरूद्ध बहुत से आरोप मठ की सम्पत्ति के निस्तारण के संबंध में प्राप्त हुये। इसी बीच सतानंद गिरि ने दिनांक-16.08.1977 को अपना त्याग-पत्र दिया तथा दिनांक 27.08.1977 को अपने षिष्य धनसुख गिरि को महंत नियुक्त किया, जिसकी सूचना पर्षद को दिनांक 11.09.1977 को दी गयी। धनसुख गिरि द्वारा दिनांक 07.07.1978 को महंत के साथ मठ के संचालन हेतु न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में निबंधित अभिलेख तैयार किया, जिसमें मठ के प्रषासन/संचालन संबंधी सभी अधिकार निहित था। उक्त एग्रीमेन्ट को पर्षद द्वारा भी दिनांक 19.04.1979 को स्वीकृति प्रदान की गयी। वर्ष 1978 से समय-समय पर गठित समिति के तहत ही मठ का संचालन होता रहा।
समय-समय पर न्यास प्रबंधन के विरूद्ध भी आरोप प्राप्त होते रहे तथा पर्षद के आदेष दिनांक 31.10.2007 द्वारा उक्त एग्रीमेन्ट विलेख दिनांक 07.07.1978 को निरस्त कर सुदर्षन गिरि को महंत बनाते हुए सारे अधिकार दिए। महंत सुदर्षन गिरि का स्वर्गवास दिनांक 29.10.2013 को हो गया। उनकी मृत्यु के पश्चात् श्री रमेष गिरि द्वारा न्यासधारी के रिक्त पद पर मान्यता हेतु अनुरोध किया तथा अपने प्रार्थना-पत्र के साथ, महंत सुदर्षन गिरि का मृत्यु प्रमाण-पत्र, तथा एक सादे कागज पर कुछ साधु-संतो के हस्ताक्षर से दिनांक 09.11.2013 को गोस्वामी रमेष गिरि चेला- स्व0 महंत शतानंद गिरि को सुदर्षन गिरि के स्थान पर उत्तराधिकार नियुक्ति पत्र, इसी प्रकार दिनांक 10.11.2013 को चादर-पगड़ी समर्पित पत्र कि प्रति दाखिल किया।
तद्नुसार पर्षद के आदेष दिनांक 20.02.2014 द्वारा रमेष गिरि को बोध गया मठ के सभी दस्तावेजों में स्थानापन्न करने का आदेष तथा मठ की सम्पत्ति के संबंध में चल रहे वाद में वादी या प्रतिवादी बनने के लिए अधिकृत किया गया। आगे उल्लेख किया गया कि यदि एक वर्ष के अन्दर कोई दुसरा दावेदार उपस्थित नहीं होता है तो स्थायी रूप से इन्हें महंत के रूप में स्थानापन्न कर दिया जायेगा, शर्ते उल्लेखित थी। रमेष गिरि के अस्थायी महंत बनने के पश्चात्, मठ की सम्पत्ति को अवैध व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण करने, निर्माण करने आदि के संबंध में षिकायत महंत द्वारा स्वयं पर्षद को दी गयी। इसी बीच मठ में कार्यरत कर्मचारियों का महंत के साथ विरोधाभाष उत्पन्न हो गया। अतः एकदुसरे पर गम्भीर आरोप-प्रत्यारोप मठ की भूमि का स्थानान्तरण, आय का दुरूपयोग आदि कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा महंत के संरक्षण में मठ के कार्यभार देखने वालो द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य करने संबंधी आरोप आने लगे, जिसमें पक्षों की सुनवाई के पश्चात् पर्षद के आदेष दिनांक 13.10.2020 द्वारा निर्णय लिया गया कि बोध गया मठ के महंत रमेष गिरि काफी वृद्ध हो गये है तथा इनके द्वारा अधिकृत व्यक्तियों द्वारा मठ की सम्पत्ति से होने वाली आय की पुर्ण जानकारी महंत को नहीं देते है, बल्कि बिना किसी पर्षद के पूर्वानुमति के लाखों रुपये नकद राषि एडवान्स के रूप में प्राप्त कर अनगिनत लोगों को दुकान निर्माण हेतु मठ की भूमि को व्यक्तिगत भूमि दिखाते हुए अभिलेख का निष्पादन किया गया है, जिसकी पुर्ण जानकारी न महंत को दी गयी, न पर्षद मेंं दाखिल आय-व्यय विवरणी में दर्षित की गयी, न पर्षद की जानकारी में आज तक लाया गया, न मठ के बैंक खाते में रखा गया तथा सोतवा मठ एवं22 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 मुरलीपुर मठ, जिला-रोहतास व अन्य मठ जो पर्षद में स्वतंत्र रूप से निबंधित है और जिनका अपना अलग-अलग महंत है। बाहूबल व भय का प्रयोग कर उक्त मठों की सम्पत्ति को भी बोधगया मठ के महंत द्वारा निदेषित व्यक्ति बन्दोबस्ती कर राषि वसूल करने लगे और इस संबंध में भी पर्षद से कोई अनुमति नहीं प्राप्त की गयी तथा पर्षद के आदेषों की अवहेलना खुले रूप से की जाने लगी। पर्षद द्वारा पर्षद में उपस्थित महंत रमेष गिरि से उपरोक्त बिन्दुओं पर प्रष्न पुछने पर उन्होंने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की तथा कथन किया कि कागजातें पर हस्ताक्षर उनसे कराये गये है, लेकिन अन्य कोई जानकारी उन्हें नहीं है। अतः उनके सहयोग के लिए पर्षद द्वारा न्यास समिति गठन किए जाने के बिन्दु पर उन्होंने अपनी सहमति दी कि पर्षद जो योजना बनायेगी, वे उसका पालन करेंगे। उपरोक्त परिस्थितियों के आलोक में बोध गया मठ के संचालन हेतु निम्न योजना बनायी जाती है :-
योजना
1. बोधगया मठ तथा उससे संबंधित सम्पत्ति की बेहतर व्यवस्था के लिए अधिनियम की धारा 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम बोधगया मठ न्यास योजना हो। जिसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा एक न्यास समिति का गठन किया जा रहा है, जिसका नाम बोधगया मठ न्यास समिति होगा। जो मठ की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण का अधिकार होगा तथा इसमें मन्दिर की समग्र परिसर, दुकान, खेती की भूमि, संचालित संस्थान आदि का प्रबंधन एवं संचालन की शक्ति निहित होगी।
2. महंत रमेष गिरि इस मठ के महंत बने रहेगे तथा न्यास समिति के संरक्षक भी होगे। बैठक में भाग लेगे। न्यास समिति द्वारा इनके प्रति सम्मान दिया जायेगा, चूंकि ये बैरागी सन्यासी है। इनके निजी व्यय के लिए समिति मठ की आय का आकलन कर उसका एक अंष देंगी, जिससे उनके निजी व्यय, चिकित्सा आदि में कोई असुविधा न हो तथा मठ के धार्मिक आयोजन, साधु-सेवा आदि में महंत का सुझाव देने का अधिकार होगा, जिसे न्यास समिति विचार करेंगी। महंत कि आध्यात्मिक धार्मिक विचारो का प्रमुखता से पालन होगा।
3. न्यास समिति में एक अध्यक्ष पद होगा जो न्यास समिति के कार्यो को सर्वेक्षण करेंगी परन्तु निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
4. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव द्वारा बैठक बुलायी जायेगी, परन्तु बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा ही की जायेगी।
5. न्यास समिति में एक उपाध्यक्ष का पद होगा, जो समिति की बैठक (तीन माह तक) नहीं बुलाये जाती है या अध्यक्ष अनुपस्थित हैं तो उपाध्यक्ष अध्यक्ष को सूचित करते हुए सचिव से सम्पर्क कर बैठक सुनिष्चित करेंगे। जिसकी सूचना 10 दिन पूर्व कार्य बिन्दु सहित सभी सदस्यों को सूचित की जायेगी और अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
6. समिति में एक सचिव का पद होगा, सचिव न्यास समिति की सभी निर्णय को मूर्त्त रूप देने के उत्तरदायी होगे तथा पर्षद से पत्राचार अध्यक्ष/सचिव करने के लिए अधिकृत होगे तथा अध्यक्ष या सचिव द्वारा लिए गए किसी अकास्मिक निर्णय का अनुमोदन समिति की अगली बैठक में अवष्य लिया जायेगा।
7. समिति में एक कोषाध्यक्ष का पद होगा, जिसमें समिति के सम्यक लेखा का दायित्व होगा। समिति द्वारा न्यास बोघ गया मठ के नाम से से राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता जो चालू है, उसी में किरायेदारी एवं खेती तथा अन्य स्त्रोतो से प्राप्त होने वाली धनराषि हर दुसरे दिन बैंक में अवष्य जमा कर दी जायेगी और मठ के बैक खाते का संचालन कोषाध्यक्ष/अध्यक्ष या सचिव (दो व्यक्ति) के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
8. समिति हर वित्तिय वर्ष समाप्ति के चार माह के अन्दर सम्पुर्ण आय का अंकेक्षण कराकर अंकेक्षण प्रतिवेदन पर्षद को शीघ्र उपलब्ध करायी जायेगी।
9. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उपविधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए, न्यास की आय-व्यय विवरणी, बजट, वार्षिक अंकेक्षण, बैठक का कार्यवृत्त आदि का सामयिक परिक्षण पर्षद को अध्यक्ष/सचिव/कोषाध्यक्ष के माध्यम से अवष्य उपलब्ध करायेगी।
10. वर्त्तमान महंत रमेष गिरि द्वारा अधिकृत व्यक्तियों के अधिकार आज की तिथि से समाप्त की जाती है और मठ और मठ की सम्पत्ति के संबंध में किसी प्रकार का कोई अधिकार नहीं होगा, परन्तु न्यास समिति को महंत द्वारा अधिकृत व्यक्ति से मठ की सभी चल-अचल सम्पत्ति संबंधी दस्तावेज, बैंक खाता व अन्य प्रकार से प्राप्त की गयी राषि का हिसाब-किताब प्राप्त करने व रखने का अधिकार होगा।
11. न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य होगा कि मठ में परम्परानुसार धार्मिक आयोजन, साधु-सेवा, मूर्त्तियों की पूजा-अर्चना, राग-भोग सम्यक रूप से हो, जिसमें मठ की राषि का प्रयोग होगा तथा मठ से प्राप्त होने वाली चढ़ावे या दान की प्राप्ति रसिद जो दो प्रतियों में होगी, उसमें एक प्रति दानदाता को दी जायेगी तथा उससे संबंधित एक रजिस्टर होगा, जिसमें प्रतिदिन इस प्रकार से प्राप्त राषि का उल्लेख किया जायेगा और जो न्यास समिति की बैठक में समय-समय पर रखी जायेगी तथा राषि को मठ के नाम से चलित खाते में जमा किया जायेगा।
12. मठ की भूमि पर लगभग 200 से अधिक दुकाने है, समिति दुकानदारों से किराया प्राप्त कर उसकी रसिद देंगे। दुकानदारों को निर्देष दिया जाए कि मासिक किराया मठ के नाम से चलित बैंक खाते में जमा करे और उसकी रसिद की फोटोप्रति न्यास समिति के कोषाध्यक्ष को उपलब्ध करायेगे तथा कोषाध्यक्ष द्वारा एक रजिस्टर संधारण किया जायेगा, जिसमें दुकानदारों का नाम, उनके आधिपत्य में दुकान का क्षेत्रफल, खाता संख्या, प्लॉट संख्या तथा मासिक किराये की राषि का उल्लेख होगा।23 बिहार गजट, 14 vizhy 2021 13. न्यास समिति का कोई भी सदस्य या उनके रिस्तेदार या सहयोगी के माध्यम से न्यास सम्पत्ति से प्राप्त हाए एवं सम्पत्ति का दुरूपयोग करती पायी जायेगी तो उन्हें न्यास समिति की सदस्यता से सुनवाई का अवसर देते हुए वंचित किया जायेगा।
14. मठ परिसर में स्वच्छता, जलापूर्त्ति, बिजली तथा आने वाले साधु-संतो का भोजन, रहने आदि की व्यवस्था की पूर्त्ति के लिए न्यास समिति विषेष रूप से तत्पर रहेगी।
15. मठ में कार्यरत वर्त्तमान पुजारी योग्य होने की स्थिति में पूजा-अर्चना आदि का कार्य करेगे तथा भविष्य में पुजारी, अर्चकों, कर्मियों की नियुक्ति के लिए न्यास समिति बहुमत से चयन करेगी तथा उनके वेतन आदि का भुगतान न्यास कोष से किया जायेगा।
16. न्यास समिति की बैठक हर तीन माह में होगी, जिसमें समिति के समक्ष रखे गये प्रस्ताव तथा उनपर लिए गए निर्णय जो बहुमत पर आधारित होगा। इस संबंध में बैठक की कार्यवाही संबंधी रजिस्टर का संधारण होगा, जिसकी प्रति समय-समय पर पर्षद को भेजी जाएगी।
17. ऐसे विषय जो इस योजना में उल्लेख नहीं किया गया है और मठ के हित में आवष्यक समझा जाए तो न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद को अनुमोदन के पश्चात् कार्य करेगी।
18. न्यास समिति में कम से कम 07 और अधिक से अधिक 11 सदस्य होगे । कम-से-कम एक सदस्य मठ की भुमि पर व्यवसाय कर हरे व्यक्तियों में से होगा। व्यवसायी आपस में चुनाव कर 02 व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव पर्षद को भेजेगी। ऐसे व्यक्ति समिति में अस्थायी सदस्य के रूप से 01 वर्ष के लिए नामित होगे, कार्य संतोषजनक होने पर पुनः मात्र 01 वर्ष के लिए नामित किये जा सकेंगे। फिर इसी प्रकार व्यवसायी द्वारा प्रस्ताव भेजा जा सकेगा।
19. न्यास समिति में किसी प्रकार की अकास्मिक रिक्ती की पूर्त्ति के लिए न्यास समिति अपनी बैठक कर बहुमत से प्रस्ताव पास कर रिक्त पदों पर सूची प्रस्तावित करेंगी, जिसपर पर्षद विचार कर निर्णय लेगी।
20. इस योजना में परिवर्त्तन एवं संषोधन एवं रिक्तियों को पुर्ण करने का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 21. महंत एवं न्यास समिति के किसी भी सदस्यों को बिना पर्षद की अनुमति के मठ की किसी भी भूमि को किसी भी व्यक्ति या सरकार को बिना लिखित पूर्वानुमति के रेहन, बिक्री, बंधक, किराये आदि पर नहीं देगी।
इस योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए निम्न व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किया जाता है :- 1. महंत रमेष गिरि - महंत -सह-संरक्षक 2. जिला पदाधिकारी, गया - अध्यक्ष 3. श्री त्रिवेणी गिरि, पूर्व कोठारी, बोध गया मठ, - उपाध्यक्ष 4. महामंडलेष्वर सरोजिनी गिरि जी, - सचिव 5. श्री संजय पाल, पुत्र-श्री सत्यवीर सिंह - कोषाध्यक्ष 6. स्वामी आदित्यानंद गिरि चेला-स्व0 महं अवधेषानन्द गिरि - सदस्य 7. थानाध्यक्ष, बोधगया - सदस्य अध्यक्ष एवं सचिव को निर्देष दिया जाता है कि मठ की जो भी भूमि अवैध रूप से कब्जा में है, उसके संबंध में कार्यवाई कर भूमि का अतिक्रमणमुक्त कराये तथा खेती योग्य भूमि की बन्दोबस्ती प्रतिवर्ष के हिसाब से करें और उसके आय-व्यय का लेखा-जोखा सत्य व सही विवरण पर्षद के समक्ष उपस्थापित करें।
न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से या बोर्ड के गठन होने तक किया जाता है, पर्षद के गठन के पश्चात् इसके नियमित किये जाने पर विचार किया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि बोध गया मठ जिला-गया के नाम में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
नोटः-न्यास समिति के पदाधिकारी/सदस्य न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/बिक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 4—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in