निबंधन la[;k पी0टी0-40 बिहार गजट
बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-13 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---
भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची पृष्ठ
पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। ---
पूरक
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पूरक-क
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2 बिहार गजट, 2 जून 2021भाग-1 नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं।
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बिहार विधन सभा सचिवालय
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अध्सिूचनाएं
24 मार्च 2021
सं0 2स्था-03/2021- 752/विस।--श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, वरीय प्रतिवेदक, बिहार विधन सभा सचिवालय, पटना को महालेखाकार, बिहार पटना से प्राप्त पत्राांक-LR No : 0884/2020-2021 के आलोक में बिहार सेवा संहिता के नियम 230 एवं 248 ;कद्ध के तहत दिनांक 08.02.2021 से 18.02.2021 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है । इनके उपार्जित अवकाश कोष में शेष 289 दिनों की छुट्टी संग्रहित है ।
आदेश से,
अवर सचिव। --------
31 मार्च 2021
सं0 आवास-05/20-1607/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-259 के अध्ीन गठित सप्तदश बिहार विधन सभा की आवास समिति का कार्यकाल वत्र्तमान स्वरूप में माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए दिनांक किया है, जो निम्न प्रकार है :-
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
राज कुमार सिंह, सचिव ।
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31 मार्च 2021
सं0 बिविविस-01/2020-857/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा ने बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-292 त के अध्ीन वर्ष 2021-22 के लिए सप्तदश बिहार विधन सभा की बिहार विरासत विकास समिति का यथावत रूप में 01 अप्रील, 2021 से अगले आदेश तक के लिए गठित किया है :-
सविस सभापति
1. श्री भाई वीरेन्द्र 2. श्री कुमार सर्वजीत सविस सदस्य 3. श्री विनय बिहारी सविस सदस्य 4. श्री राजेश कुमार सविस सदस्य 5. श्री विद्या सागर केशरी सविस सदस्य 6. श्री पवन कुमार यादव सविस सदस्य3 बिहार गजट, 2 जून 2021 7. श्री मुकेश कुमार रौशन सविस सदस्य 8. श्री ट्टषि कुमार सविस सदस्य 9. श्री अजीत कुमार सिंह सविस सदस्य 10. श्री विश्व नाथ राम सविस सदस्य
11. श्री विजय कुमार सिंह उपर्फ डब्लू सिंह सविस सदस्य
श्री भाई वीेरेन्द्र, स॰वि॰स॰ इस समिति के सभापति एवं सभा सचिव इसके सचिव होंगे । अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
राज कुमार सिंह, सचिव ।
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31 मार्च 2021
सं0 गैसवि एवं संस-09/2020-1403/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-292;झद्ध के अध्ीन वर्ष 2021-22 के लिए बिहार विधन सभा की ''गैर सरकारी विध्ेयक एवं संकल्प समिति'' का गठन यथावत रूप में दिनांक-01 अप्रील, 2021 से अगले आदेश तक के लिए माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा द्वारा किया गया है, जो निम्न प्रकार है :- ता lúfoúlú
सविस सविस सविस सविस सविस सविस सविस
सविस
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सविस
सविस
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
राज कुमार सिंह, सचिव ।
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31 मार्च 2021
सं0 प्रश्न एवं ध्यास-02/2020-1401/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-292;कद्ध;1द्ध के अध्ीन माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा ने वर्ष 2021-22 के लिए सप्तदश बिहार विधन सभा की फ्प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समितिय् का गठन यथावत् रूप में 01 अप्रील, 2021 से अगले आदेश तक के लिए निम्न प्रकार किया है :-
1. श्री अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय सविस सभापति
2. श्री महबूब आलम सविस सदस्य
3. श्री अशोक कुमार सविस सदस्य
4. डॉ सी एन गुप्ता सविस सदस्य
5. श्री आनन्द शंकर सिंह सविस सदस्य
6. श्री श्रीकान्त यादव सविस सदस्य4 बिहार गजट, 2 जून 2021 7. श्री सुनील मणि तिवारी सविस सदस्य
8. श्री मिश्री लाल यादव सविस सदस्य 9. श्री मोहम्मद कामरान सविस सदस्य 10. श्री पंकज कुमार मिश्र सविस सदस्य
श्री अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय, सविस इस समिति के सभापति एवं बिहार विधन सभा सचिव इसके सचिव होंगे।
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
राज कुमार सिंह, सचिव ।
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31 मार्च 2021
सं0 शून्यकाल-14/20-1611/विस।--सर्वसाधरण की जानकारी के लिए यह प्रकाशित किया जाता है कि बिहार विधन सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-292ण के अध्ीन गठित सप्तदश बिहार विधन सभा की शून्यकाल समिति का कार्यकाल वत्र्तमान स्वरूप में माननीय अध्यक्ष, बिहार विधन सभा ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए दिनांक 01 अप्रील, 2021 से अगले आदेश तक के लिए किया है जो निम्न प्रकार है :-
1. श्री चन्द्रहास चौपाल सविस सभापति 2. श्री गुंजेश्वर साह सविस सदस्य 3. श्री हरिशंकर यादव सविस सदस्य 4. श्री अरूण शंकर प्रसाद सविस सदस्य 5. श्री लखेंद्र कुमार रौशन सविस सदस्य 6. श्री राजेश कुमार सिंह सविस सदस्य 7. श्री अनिल कुमार साहनी सविस सदस्य 8. श्री अरूण कुमार सिंह सविस सदस्य 9. श्री सत्तानन्द सम्बु) उर्पफ ललन सविस सदस्य 10. श्री कृष्णामुरारी शरण उर्पफ प्रेम मुखिया सविस सदस्य ।
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा के आदेश से,
राज कुमार सिंह, सचिव ।
--------- निगरानी विभाग सूचना भवन, पटना ------ अधिसूचना 13 अ्रप्रील 2021
सं0 1/नि0वि0स्था0-34/19-1798--पथ निर्माण विभाग, बिहार पटना की अधिसूचना संख्या-1697(s) दिनांक 15.03.2021 द्वारा श्री राजकुमार लाल, मुख्य अभियंता, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना की सेवा अगले आदेश तक निगरानी विभाग के अन्तर्गत तकनीकी परीक्षक कोषांग में अभियंता प्रमुख के पद पर पदस्थापन हेतु सौंपी गयी है। तदनुसार दिनांक 16.03.2021 को श्री लाल द्वारा योगदान समर्पित किया गया है। 2. उक्त के आलोक में उनके योगदान की तिथि 16.03.2021 के पूर्वाहन से योगदान स्वीकृत करते हुए निगरानी विभाग के अधीन तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना में अपने ही वेतनमान में अभियंता प्रमुख के पद पर पदस्थापित किया जाता है। 3. इसमें माननीय मुख्य (निगरानी) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो॰ जहाँगीर आलम, उप सचिव।5 बिहार गजट, 2 जून 2021 VIGILANCE DEPARTMENT BIHAR, PATNA FORM No. I ---------------- DECLARATION (Under Section 5 of the Bihar Special Courts Act 2009, and Rules 7 of Bihar Special Courts Rules 2010)
The 16th April 2021 No. Ni. Vi. /Stha (Vi.Nya.)-07/2020-1803--WHEREAS, It is alleged that Sri Sushil Kumar, the then Clerk, Civil Surgeon Office, Ara (Bhojpur), S/o Late Suvindra Singh, Vill. + P.S. - Udwantnagar, District-Bhojpur, Present Address - Ramnagar Chandwa, P.S. - Nawada, District - Bhojpur, while holding the post of Clerk, Civil Surgeon Office, Ara (Bhojpur) and serving in different capacities in the State of Bihar, committed an offence under clause (e) of sub-section (1) of Section 13 of the Prevention of Corruption Act, 1988 and that the matter was investigated in Vigilance Investigation Bureau, Bihar Case No. 65/2017 dated 23.08.2017. AND WHEREAS, on scrutiny of relevant materials available on record, the State Government is of the opinion that there is prima facie case of Commission of above mentioned criminal misconduct by said Sri Sushil Kumar, the then Clerk, Civil Surgeon Office, Ara (Bhojpur), who has accumulated properties disproportionate to his known sources of income by resorting to corrupt means. AND WHEREAS, it is felt necessary and expedient by the Government that the said offender should be tried for confiscation of the properties mentioned in the application by the Special Court Established under sub-section (1) of Section 3 of Bihar Special Courts Act, 2009; NOW, THEREFORE, in exercise of the powers conferred by sub-section (1) of Section 5 of Bihar Special Courts Act, 2009, the State Government do hereby declare that the said offence shall be dealt with under the provisions of Special Courts Act, 2009.
By the order of the Governor of Bihar, Sd./-Illegible, Additional Chief Secretary.
-------- समाहरणालय, रोहतास (सासाराम) (स्थापना शाखा) ------- आदेश 31 मार्च 2021
सं0 130/20-21-510--श्री पुरंजय ओझा, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, सासाराम सम्प्रति निलंबित राजस्व कर्मचारी मुख्यालय जिला राजस्व कार्यालय, रोहतास, सासाराम को निगरानी टीम द्वारा दिनांक 03.04.2018 को रिष्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के फलस्वरूप अपर समाहर्त्ता, रोहतास, सासाराम के ज्ञपांक 671 दिनांक 09.04.2018 द्वारा प्राप्त सूचना के आलोक में आदेष सं0 - 06/18-19 संसूचित ज्ञापांक 358/स्था0, दिनांक 28.04.2018 द्वारा गिरफ्तार होने की तिथि दिनांक 03.04.2018 के प्रभाव से निलंबित किया गया। इस कार्यालय के पत्रांक 638 दिनांक 28.07.2018 द्वारा अंचल अधिकारी, सासाराम से श्री ओझा के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर प्रपत्र - '' क '' की मांग की गई। अंचल अधिकारी, सासाराम द्वारा गठित आरोप प्रपत्र - '' क '' अनुमण्डल पदाधिकारी, सासाराम के पत्रांक 2380/स्था0, दिनांक 29.11.2018 से प्राप्त हुआ, जो अनुमण्डल पदाधिकारी, सासाराम से नये प्रपत्र में नहीं था। पुनः इस कार्यालय के पत्रांक 1066/स्था0, दिनांक 15.12.2018, पत्रांक 169 दिनांक 19.03.2019 एवं पत्रांक 279/स्था0, दिनांक 19.06.2019 से नये प्रपत्र में आरोप पत्र प्रपत्र - '' क '' अनुमण्डल पदाधिकारी, सासाराम से मांग की गई। तत्पष्चात् अनुमण्डल पदाधिकारी, सासाराम के पत्रांक 2583/स्था0, दिनांक 28.11.2019 द्वारा आरोप प्रपत्र - '' क '' प्रतिहस्ताक्षोपरान्त प्राप्त हुआ, जिसे अनुमोदित करते हुए श्री लालबाबू सिंह, अपर समाहर्त्ता, रोहतास, सासाराम को संचालन पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी, सासाराम को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु भेजा गया। आरोप पत्र में वर्णित आरोपों की गम्भीरता के मद्देनजर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 यथा संषोधित 2007 के नियम 14 में निहित प्रावधानानुसार रिष्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने संबंधी प्रमाणित आरोपों के कारण इस कार्यालय के आदेष6 बिहार गजट, 2 जून 2021 सं0-78/19-20 संसूचित ज्ञापांक 21/स्था0, दिनांक 09.01.2020 द्वारा नियम 9 (3) (ii) निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय जिला राजस्व शाखा, रोहतास, सासाराम में निर्धारित किया गया।
संचालन पदाधिकारी-सह- अपर समाहर्त्ता, रोहतास, सासाराम द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालनोपरान्त पत्रांक 202/रा0, दिनांक 12.02.2021 से मंतव्य/प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। श्री ओझा के विरूद्ध गठित आरोप, आरोपी कर्मी का स्पश्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन/मंतव्य का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है :-
आरोप के विरूद्ध आरोपी कर्मी का स्पश्टीकरण :- आरोपीकर्मी ने आरोप के विरूद्ध कण्डिकावार निम्न प्रकार अपना जबाव प्रस्तुत किया गया है :-
आरोप प्रपत्र- 'क'
| आरोप बिन्दू | आरोपी कर्मी का स्पश्टीकरण | संचालन पदाधिकारी का मंतव्य |
| 1. श्री पुरंजय ओझा, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, सासाराम द्वारा मु0 हेवन्ती देवी, पति - स्व0 कैलाष राम, ग्राम - बेलाढ़ी के खाता सं0 - 211, प्लॉट सं0 - 1722, 1723, रकबा - 48 डी0 जमीन का लगान रसीद काटने हेतु उनके पुत्र श्री योगेन्द्र राम द्वारा रिष्वत की राषि 18000/- (अठारह हजार) रूपये लेते हुए निगरानी अन्वेशण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया । | इस संबंध में आरोपी द्वारा बताया गया कि दिनांक 05.02.2008 को मेरे द्वारा प्रभार लेने के पश्चात हल्का संख्या - 13 मे ं काफी अनियमितता मेरे पूर्ववर्ती राजस्व कर्मचारी श्री राकेष कुमार सिंह द्वारा पाया गया, जिसकी लिखित सूचना मैंने अंचल अधिकारी, सासाराम को 24.03.2018 को दिया। श्री राकेष कुमार सिंह द्वारा मुझे अंचल अधिकारी के सामने धमकी दी गयी कि आपको बर्बाद कर दूंगा। उपरोक्त अभियोग के संदर्भ मे मेरा विनम्र अभिकथन यह ं है कि हेवन्ती देवी के पुत्र योगेन्द्र राम के द्वारा मुझे रिष्वत संबंधित कुल 18000/- (अठारह हजार) रूपया नगद दिये जाने के क्रम में ही रंगे हाथों निगरानी अन्वेशण ब्यूरो द्वारा मुझे गिरफ्तार कर लिया जाना, बिल्कुल ही दुर्भाग्य पूर्ण तथा दुर्भावना, साजिस, ईश्र्या एवं विद्वेष से प्रेरित होकर मेरे पूर्ववर्ती हल्का कर्मचारी श्री राकेष कुमार द्वारा अपने मेली एवं सरोकारी व्यक्ति योगेन्द्र राम को मोहरा के रूप में खड़ा करके मेरे विरूद्ध कुचक्र चलाकर साजिस के तहत ऐसा कृत्य कराया गया, जबकि सच्चाई तो यह है कि उक्त घटना के पूर्व योगेन्द्र राम या उनकी मां हेवन्ती देवी मेरे पास लगान रसीद निर्गत कराने का अन्य किसी कार्य से कभी मेरे पास आये ही नहीं। न हीं किसी प्रकार का अनुरोध भी किये। जहां तक मुझे गिरफ्तार किये जाने संबंधित निगरानी वाद सं0 - 12/8 स्पेसल केस नं0 - 17/18 का प्रष्न है, उक्त काण्ड सरासर झूठा है, मनगढंत है एवं दुर्भावना से प्र ेरित होकर मेरे पूर्ववर्ती कर्मचारी श्री राकेष कुमार द्वारा अंचल कार्यालय में कार्यरत अपने अन्य सहयोगियों एवं स्थानीय भू-माफियों की मिली भगत एवं साजिस के तहत मेरे विरूद्ध दर्ज कराकर मुझे नाहक फंसा कर मेरी गरिमा एवं प्रतिश्ठा को घूमित करने के उद्देष्य से किया गया, उक्त कथन की सम्पुश्टि इस बात से होती है कि कथिन हेवन्ती देवी का 2017 का लगान रसीद निर्गत करने संबंधी आवेदन दिनांक 21.03.2018 को अंचल अधिकारी, सासाराम के समक्ष प्रस्तुत आवेदन किया गया था, जो मेरे समक्ष कभी आया ही नहीं और न तो अंचल अधिकारी महोदय द्वारा मुझे कोई निर्देष ही दिया गया था। उल्लेखनीय यह भी है कि हेवन्ती देवी द्वारा मेरे विरूद्ध ऐसी कोई | आरोप सं0- 01 के संबंध मे आरोपी कर्मी ं का केस निगरानी अन्वेशण ब्यूरो के न्यायालय में लंबित है, जिसमं निर्णय नहीं हुआ है। अतः आरोप सं0- 01 पर कोई अभिमत नहीं दिया जा सकता.है। |
| षिकायत भी नहीं अंकित है कि मैंने उन्हें लगान रसीद निर्गत करने से इंकार किया या किसी प्रकार की कोई रिष्वत की ही मांग की। सच्चाई तो यह भी है कि कथित हेवन्ती देवी के पुत्र योगेन्द्र राम, जो उक्त निगरानी वाद के सूचक सह परिवादी है, इस संदर्भ मे कथित ं घटना के पूर्व मेरे पास कभी आये ही नहीं। इसी क्रम में मेरा सादर अभिकथन यह भी है कि जब मेरे विरूद्ध हेवन्ती देवी के आवेदन में लगान रसीद निर्गत करने एवं मेरे द्वारा इन्कार करने या मेरे द्वारा किसी प्रकार की रिष्वत की मांग किये जाने की षिकायत की नहीं की गयी है एवं मात्र साक्षर है तथा निर्धन श्रमिक है एवं उनके परिवार में उनके पास जीविकोपार्जन का सहारा मात्र उक्त भूमि ही है। वह योगेन्द्र राम अपनी मां के द्वारा अंचल कार्यालय में आवेदन दिये जाने तथा उक्त आवेदन की परिणती जाने बिना एकाएक 5 दिनों के बाद निगरानी अन्वेशण ब्यूरो, पटना में दिनांक 26.03.2018 को मेरे विरूद्ध रिष्वत की मांग किये जाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत करता है। उक्त आवेदन मेरे पूर्ववर्ती राजस्व कर्मचारी तथा उनके सहयोगी एवं स्थानीय भू-माफिया द्वारा साजिष एवं कुचक्र के तहत् योगेन्द्र राम के चचेरे भाई संजय कुमार सुमन की लिखावट में प्रस्तुत कराया जाने के सिवा अन्य कुछ नहीं प्रतीत होता, बल्कि उक्त आवेदन ही स्वयं में संदेहास्पद प्रतीत होता है। निगरानी अन्वेशण ब्यूरो में योगेन्द्र राम द्वारा प्रस्तुत उक्त आवेदन साजीसन पूर्ववर्ती कर्मचारी राकेष कुमार द्वारा इसलिए दाखिल कराया गया कि दिनांक 24.03.2018 को माननीय व्यवहार न्यायालय, सासाराम में स्वत्व वाद सं0 491/12 में मुझे सरकार का पक्ष प्रस्तुत करने हेतु संबंधित सरकारी अधिवक्ता श्री अजय कुमार त्रिपाठी से सम्पर्क कर उक्त वाद से संबंधित तथ्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर प्रति शपथ पत्र तैयार कराने के उद्देष्य से अंचलाधिकारी महोदय द्वारा मौखिक आदेष से भेजा गया था। जब मैंने संबंधित अधिवक्ता श्री तिवारी से सम्पर्क कर उक्त वाद से संबंधित तथ्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर प्रति शपथ पत्र तैयार कराने के उद्देष्य से अंचलाधिकारी महोदय द्वारा मौखिक आदेष से भेजा गया था। जब मैंने संबंधित अधिवक्ता श्री तिवारी से सम्पर्क कर उक्त वाद की संचिका का अवलोकन किया तो पाया कि निर्देष के बावजूद पूर्व तिथियों पर राकेष कुमार द्वारा किसी भी दिन न्यायालय में उपस्थिति नहीं दी गयी है तथा उसी क्रम में मैंने पाया कि श्री राकेष कुमार द्वारा राजस्व रसीद निर्गत किया गया है जबकि भूमि अनावाद बिहार सरकार की है। साथ ही अंचल अधिकारी महोदय को सूचित करने पर पंजी 2 का जब अवलोकन किया तो उसमें कई जगह काट-छाट, गलत | ||
| तरीके से प्रवृश्टि की गयी थी, मेरे द्वारा दिनांक 24.03.2018 को ही तत्काल अंचलाधिकारी महोदय को श्री राकेष कुमार, राजस्व कर्मचारी के कृत्यों का उल्लेख करते हुए आवेदन समर्पित किया गया, जिस पर दूसरे दिन 25.03.2018 को अंचल अधिकारी महोदय द्वारा कारण-पृच्छा की मांग की गयी। ज्योहिं श्री राकेष कुमार, रा0 कर्म0 को कारण पृच्छा मांगे जाने की जानकारी हुई तो वे स्वयं को बचाने के उद्देष्य से मेरे विरूद्ध साजिष कर 26.03.2018 को उक्त योगेन्द्र राम उनके चचेरे भाई तथा भू-माफियों के मिली-भगत से निगरानी अन्वेशण ब्यूरो के ं समक्ष झूठा आवेदन दिया गया। उक्त काण्ड की सत्यता स्वतः संदेह के दायरे में आ जाती है कि जब अभियोगी योगेन्द्र राम तथा उनकी मां हेवन्ती देवी के आवेदन में यह कहा गया है कि संबंधित भूमि का लगान रसीद 2016 तक निर्गत है और उन्हें मात्र 2017 की लगान रसीद की आवष्यकता थी, जिसका राजस्व महज 07/- रूपया राषि ही होती है जो तुच्दराषि है तो उसके एवज के मेरे द्वारा कथित 18000/-रू0 रिष्वत के रूप में मांग किया जाना किसी भी जन सामान्य की बुद्धि एवं विवेक से सर्वाथ परे हास्यास्पद बल्कि असत्य प्रतीत होती है। इतनी ही नहीं उक्त काण्ड मे विचारण ं के दौरान अपने साक्ष्य में उक्त अभियोगी योगेन्द्र राम, विषेश न्यायालय (निगरानी) पटना के समक्ष साक्षी संख्या 01 (एक) के रूप में परिक्षित कराया गया है जिसमें अपने साक्ष्य में न्यायालय को स्पश्ट रूप से कहा है कि उसने या इसकी मां के द्वारा लगान रसीद निर्गत संबंधी अंचल अधिकारी, सासाराम के समक्ष कभी कोई आवेदन नहीं दिया गया है। उसके इस साक्ष्य से यह प्रमाणित होता है कि योगेन्द्र राम एवं उनके परिवार को कथित वर्श 2017 का लगान रसीद निर्गत कराने की कोई आवष्यकता ही नहीं थी-यह मुझे उक्त झूठे मुकदमे ं में फसाने जाने के साजिष के सिवा अन्य कुछ भी नहीं है। उल्लेखनीय यह भी है कि अंचलाधिकारी द्वारा राकेष कुमार से कारण पृच्छा की मांग किये जाने पर उन्होंने अपने कारण पृच्छा में स्वयं स्वीकार किया है कि उक्त स्वत्ववाद 691/12 से संबंधित भूमि का लगान उनके द्वारा स्वयं काटा गया है जो दाखिल-खारिज वाद सं0 1136/17-18 आर0टी0पी0एस0 में है, परन्तु अन्य जांच के क्रम में यह पाया गया कि आर0टी0पी0एस0 में किसी अन्य व्यक्ति का नाम है जिसकी विस्तृत जांच की गयी जो जमाबंदी रद्दीकरण वाद सं0 03/18-19 की प्रक्रिया में लंबित ह ै। मेरे विरूद्ध निगरानी अन्वेशण ब्यूरो में दर्ज कराया गया उक्त काण्ड इस लिहाज से भी असत्य एवं संदेहास्पद बन जाता है कि मेरी कथित गिरफ्तार के समय कथित योगेन्द्र राम द्वारा मुझे 18000/- मेरे दाये हाथ में थमाये जाने के | ||
| समय ही मुझे तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया, परन्तु आष्चर्य तो यह है कि निगरानी द्वारा जब मेरे दाहिने हाथ की उंगली के अलावे बायें हाथ की उंगली वो पानी में डुबोये जाने पर मेरे बायें हाथ की उंगली के संपर्क में आयी पानी का रंग भी गुलाबी कैसे हो गया है, चूंकि उस हाथ की उंगली से रसायन लगे नोटों का कभी सम्पर्क ही नहीं हो सका। सच्चाई यह भी है कि मेरे आवास पर किसी भी प्रकार की रिष्वत की राषि लिये दिये जाने से संबंधित कोई घटना ही नहीं घटी, बल्कि मुझे बलपूर्वक पकड़ कर चन्द मिनटों के अन्दर ही सर्किट हाउस लाया गया, जहां पर कथित रासायनिक परिक्षण की प्रक्रिया निगरानी द्वारा दर्षायी गयी, जो उक्त काण्ड की प्राथमिकी के सर्वथा विपरीत है। मेरे इस कथन की पुश्टि कभी भी उक्त कथित रासायनिक परीक्षण के समय सर्किट हाउस में मौजूद परिचारी से कभी भी की जा सकती है। श्री ओझा, राजस्व कर्मचारी के द्वारा प्रायः रिष्वत ................. आचरण के प्रतिकूल ह ै। अभियोग संख्या- 2 :- 2/2 इस प्रष्न के संबंध में मुझे कहना है कि इसका किसी भी प्रकार का प्रमाण, साक्ष्य के साथ प्रष्न नहीं है- मेरी कार्य प्रणाली एवं मेरा आचरण विवादास्पद रहता तो इसके लिए मुझे पूर्व में स्पश्टीकरण की मांग की गयी होती एवं किसी प्रकार का न्यायालय में मुकदमा किया गया होता जो कि मेरे उपर नहीं है। पूर्व के अंचल मे भी ऐसा कोई आरोप नहीं ं है। यह मेरा आचरण सरकारी कार्य में लापरवाही एवं भ्रश्ट होता तो मैं 24.03.2018 को लिखित रूप से अंचल अधिकारी को अंचल कार्यालय के अभिलेखों में की गयी कि जालसाजी की लिखित सूचना नहीं देता। 33 साल की मेरी सेवाकाल की अवधि में अभी तक मेरे विरूद्ध, मेरे आचरण के प्रति कोई षिकायत कही नहीं पायी गयी है। वर्तमान पदस्थापना में भी मुझे मौखिक चेतावनी दिये जाने का अभियोग सरासर झूठा और निराधार है। आम जन की कोई षिकायत भी नहीं है। अतः मेरी कार्यप्रणाली से प्रषासन की किसी प्रकार की कोई बदनामी होने का प्रष्न ही पैदा नहीं होता। अतः स्पश्ट है कि मेरा आचरण कभी भी सरकारी कर्मी के आचरण के प्रतिकूल नहीं रहा है। अतः मेरे विरूद्ध लगाया गया यह अभियोग भी तथ्य से परे है। अभियोग सं0-03 के संबंध में मेरा सादर अनुरोध पूर्वक कथन है कि सरकारी राषि में जमा करने वाला था, मार्च में ही लेकिन अंचल अधिकारी महोदय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में मुझे सी0डबलू0जे0सी0 के एक मुकदमें में तिथि/समय लेने हेतु दिनांक 27.03.2018 को मौखिक आदेष से भेजा गया था। पैसा घर पर रखा था। तब तक जब मैं 03.04.2018 को वापस | ||
| अपने कार्यालय आया तो उसी दिन मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। तत्पष्चात् मैं जेल चला गया।में तिथि/समय लेने हेतु दिनांक 27. 03.2018 को मौखिक आदेष से भेजा गया था। पैसा घर पर रखा था। तब तक जब मैं 03.04. 2018 को वापस अपने कार्यालय आया तो उसी दिन मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। तत्पष्चात् मै ं जेल चला गया। जेल से जमानत पर छूटने के बाद दिनांक 29.06.2018 को मैंने अंचल कार्यालय, सासाराम में योगदान दिया। तब तक मैं निलंबित हो चुका था। वेतन बंद हो चुका था और निलंबन अवधि में मुझे जीवनयापन भाा का भुगतान भी नहीं किया गया। फलतः मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मैं उक्त राषि तुरंत जमा कर सकूं। लेकिन विवष होकर दिनांक 14. 11.2018 को मैंने अंचल अधिकारी, सासाराम को लिखित आवेदन दिया, जिसमें यह स्पश्ट रूप से उदघृत है कि मुझे सरकारी राषि जमा करनी है। अतः बकाया जीवन-यापन भाा देने की कृपा की जाय, ताकि जल्द से जल्द उक्त सरकारी राषि जमा कर सकूं, परन्तु दुर्भाग्यवष मेरे आवेदन पर कोई विचार ही नहीं किया गया। तब तक मेरी आर्थिक स्थिति दिनों-दिन बद से बदतर होती गयी। लाचार होकर अपने करीबी कई व्यक्तियों से कर्ज लेकर उक्त सरकारी राषि दिनांक 15.01.2019 को जमा कर दिया। विडंबना तो यह रही कि गिरफ्तारी के लगभग दो वर्श बाद मुझे पहली बार फरवरी, 2020 में जीवन-यापन भाा प्राप्त हुआ, तब तक मैं आर्थिक यातना के साथ ही साथ बुरी तरह शारीरिक एवं मानसिक यातना झेल चुका था, सच्चाई तो यह भी है कि फरवरी, 2020 के बाद पुनः जीवन-यापन भाा जो देय है, वह आज तक मुझे अप्राप्त है। उक्त सरकारी राषि मेरे द्वारा गबन करने की कोई नियत नहीं थी और मैंने जान-बूझ कर उक्त राषि सरकारी खाते में जमा करने में कभी कोई आनाकानी भी नहीं की बल्कि परिस्थिति से विवष होकर मुझे उक्त राषि सरकारी खाते में जमा करने में विलम्ब हुआ। 2/4 इस प्रष्न के उार हेतु मुझे कहना है कि मैंने कभी सरकारी कार्य में लापरवाही नहीं की है। साथ ही निश्ठा पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया हूं। मेरे विरूद्ध ऐसा कोई कार्य की प्रमाणिकता नहीं है कि जो मेरे भ्रश्ट आचरण एवं रिष्वत खोरी को बढ़ावा देने वाला हो- यदि ऐसा होता तो मैं 24. 03.2018 को पूर्ववर्ती कर्मचारी राकेष कुमार के द्वारा की गयी जालसाजी की अंचल अधिकारी को लिखित सूचना नहीं देता। उक्त मेरे द्वारा लिखित सूचना का परिणाम यह है कि मैं आज तक आपराधिक एवं विभागीय कार्यवाई का दंष झेल रहा हूं। अतः स्पश्ट है कि मै बिहार ं सरकारी सेवक आचरण नियमावली के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया हूं, जिसके लिए | ||
| मेरे दोशी होने का कोई प्रष्न ही पैदा नही होता। अतः मेरे विरूद्ध लगाया गया यह अभियोग तथ्य से परे है। | ||
| 2. श्री ओझा, राजस्व कर्मचारी द्वारा प्रायः रिष्वत की माँग के कारण आये दिन कार्यालय में आमजन से विवाद होते रहे हैं, जिसके लिए उन्हें कई बार मौखित चेतावनी दी गयी परन्तु उनके कार्य प्रणाली एवं आचरण में सुधार नहीं हुई जिससे प्रषासन की बदनामी हुई, जो सरकारी कर्मी के आचरण के प्रतिकूल है। | इसका प्रत्युार हेतु श्रीमान् से विनम्रता पूर्वक मुझे कहना है कि सरकारी कार्यों के निश्पादन हेतु आमजन से अवैध राषि की उगाही की प्रवृति के कारण प्रायः उत्पन्न होने वाले विवाद के कारण प्रषासन की छवि धूमिल हुई। इस संबंध में पूर्व में न तो मेरे उपर किसी प्रकार का कोई मुकदमा है एवं न ही मुझसे किसी प्रकार का स्पश्टीकरण ही पूछा गया है। अतः यह आरोप निराधार वो बेबुनियाद है। पूर्व के कार्य काल में भी मैंने ऐसा कोई कार्य नहीं किया है और मेरे किसी आचरण के चलते कभी कोई विवाद ही नहीं उत्पन्न हुआ तो प्रषासन की छवि धूमिल होने का कोई औचित्य ही पैदा नहीं होता- इसका विस्तृत प्रति उत्तर मेरे द्वारा द्वितीय भाग के अवचार या कदाचार के लांछनों के उत्तर मे दिया जा चुका ं है। | आरोप सं0- 02 के संबंध में अभिलेख के संलग्न साक्ष्य के अवलोकनोपरान्त पाया गया कि आरोपी कर्मी का आचरण एवं कार्यकलाप सरकारी कार्यों के निश्पादन हेतु निर्धारित मापदण्डो के प्रतिकूल रहा होगा। ं इस संदर्भ में आरोपी कर्मी के आरोप पर जिला पदाधिकारी, रोहतास द्वारा इन्हें निलंबित करते हुए निलंबित मुख्यालय जिला राजस्व प्रषाखा, रोहतास, सासाराम निर्धारित किया गया तथा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। सर्वप्रथम इन्हें सूचना पदाधिकारी रखने हेतु कार्यालय ज्ञापांक- 133/रा0, दिनांक- 25.01.2020 द्वारा निबंधित डाक RF-214015601 IN, दिनांक- 28.01.2020 से इनके आवासीय पता पर भेजा गया। निबंधित डाक कार्यालय में वापस आया, जिस पर अंकित है कि ''प्राप्तर्काा बाहर है, वापस किया।'' आरोपी कर्मी दिनांक 19.11.2018 से लगातार अपने निर्धारित मुख्यालय, जिला राजस्व प्रषाखा, रोहतास से अनुपस्थित रह रहे थे, जिसके कारण निर्धारित कार्यालय द्वारा भी इन्हें निर्गत सूचना का तामिला नहीं करा सका। पुनः आरोपी कर्मी को दिनांक 26.06. 2020 को न्यायालय में उपस्थित होकर पक्ष रखने हेतु समाचार पत्र के माध्यम से नोटिस का प्रकाषन कराया गया। तदोपरान्त आरोपी कर्मी दिनांक 26.06.2020 को न्यायालय में उपस्थित हुए। इनका उक्त आचरण सरकारी र्काव्यों के विरूद्ध है। अतः आरोप सं0- 02 सत्य प्रमाणित होता है। |
| 3. श्री ओझा, राजस्व कर्मचारी द्वारा वित्तीय वर्श 2017-18 में लगान की राषि मो0 150175/- (एक लाख पचास हजार एक सौ पचहत्तर) रूपये मात्र काफी समय व्यतीत होने एवं बार-बार सूचना के बावजूद सरकारी खाते में जमा करने में आनाकानी की गयी, अंत में प्राथमिकी दर्ज करने के पश्चात् इनके द्वारा दिनांक-25.01.2019 को लगान की राषि कार्यालय में जमा की गयी, जो सरकारी राषि के गबन करने की इनकी मानसिकता को परिलक्षित करती है। | मुझे तृतीय भाग के अवचार या कदाचार के लांछन सं0- 02 के संबंध मे वही कहना है कि ं मैं दिनांक 14.11.2018 को अंचल अधिकारी, सासाराम को अपने बकाया जीवन-यापन भाा का भुगतान किये जाने संबंधित आवेदन दिया था जिसमें स्पश्ट अपने उल्लेखित है कि मेरे उपर उक्त सरकारी राषि बकाया है जिसे अपने बकाया जीवन-यापन भाा से ही सरकारी खाते में जमा करने के उद्देष्य से मैंने आवेदन दिया था। यदि उक्त राषि गबन करने की मेरी नियत होती कि मैं अपने उपर उक्त राषि बकाया देने और उसे सरकारी खाते में जमा करने संबंधित वह आवेदन नहीं देता बल्कि सरकारी राषि अपने उपर बकाया रहने से स्पश्ट इनकार करता या कोई अन्य बहाना बना देता। जहां तक उक्त सरकारी राषि का जमा करने में मेरे द्वारा विलम्ब किये जाने की बात है वह परिस्थिति वष विवषता के कारण ही विलम्बित हुआ। इसका विस्तृत उल्लेख मैंने प्रपत्र क के द्वितीय भाग के | विाीय वर्श 2017-18 में किये गये लगान की वसूली मो0- 228555/- (दो लाख अठाईस हजार पांच सौ पचपन) रू0 विाीय वर्श समाप्ति की तिथि अर्थात् दिनांक 31.03.2018 तक नजारत में जमा कर देना चाहिए था, परन्तु इनके द्वारा 31 मार्च, 2018 तक क्रमषः 9800/- (नौ हजार आठ सौ) रू0 नाजिर रसीद सं0- 800418, दिनांक 24.02.18 तथा 8580/- (आठ हजार पांच सौ अस्सी)रू0 कुल 18380/- (अठारह हजार तीन सौ अस्सी) रू0 ही मात्र जमा किया गया, शेश मो0 210175/- (दो लाख दस हजार एक सौ पचहार) रू0 इनके द्वारा ससमय नजारत में जमा नहीं किया गया। मो0 60000/- (साठ हजार) रू0 इनके द्वारा नाजिर रसीद सं0- 800436, दिनांक- 28. 08.2018 को जमा किया गया। उसी प्रकार मो0 150175/- (एक लाख पचास हजार एक सौ पचहार) रू0 इनके द्वारा नाजिर |
| लांछन सं0- 03 के अपने उार में समर्पित कर चुका हूं। | रसीद सं0- 800492, दिनांक- 25.01.19 जमा किया गया है। इससे यह प्रमाणित होता है कि इनके द्वारा राषि का निष्चित रूप से दुर्विनियोग किया गया। आरोप सत्य प्रमाणित होता है। | |
| 4. उक्त से स्पश्ट है कि श्री पुरंजय ओझा, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, सासाराम की कार्यप्रणाली एवं आचरण भ्रश्टाचार एवं रिष्वतखोरी को बढ़ावा देने वाला है, इनका यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली के नियम 3 के 3 (I), 3 (II) एवं 3 (III) का उल्लंघन है, जिसके लिए ये दोशी हैं। | इस लांछन का उार मेरे द्वारा अपने अभिकथन में प्रपत्र 'क' मे लगाये गये लांछन सं0- 04 के ं प्रत्युार में पूर्व में ही दे चुका हूं। अतः मेरे उपर लगाया गया लांछन मेरे पूर्ववर्ती राजस्व कर्मचारी राकेष कुमार द्वारा स्वयं ही अपने द्वारा अंचल कार्यालय के अभिलेखों में की गयी विभिन्न जालसाजियों के अपराध से बचाव हेतु मेरे उपर ईश्र्या, व़िद्वेश एवं दुर्भावना से प्र रित े होकर अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर प्लानिंग करके मेरे विरूद्ध योजनाबद्ध तरीके से गहरे शडयंत्र के तहत् साजिष रचकर निगरानी अन्वेशण ब्यूरो मे योगेन्द्र राम के द्वारा केस दर्ज ं कराकर मुझे फसाया गया और उस केस को ही मुख्य आधार मानकर ही मेरे उपर यह विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी है जिसके लिए मैं कदापि उारदायी नहीं हू । चूंकि मैंने उक्त राकेष ं कुमार के जालसाजी के कृत्यो ं का पर्दाफाष करने की दुस्साहस की, जिसका परिणाम इस विभागीय कार्यवाही की सजा के तौर पर मैं भुगतने को विवष हूं। अतः उपरोक्त अभिकथन के आलोक में श्रीमान् से नम्र याचना है कि मुझे विभागीय कार्यवाही के दायित्व से यथाषीघ्र मुक्त करने की महती कृपा किया जाय। | आरोप सं0- 04 आरोपी कर्मी के द्वारा सरकारी आदेष का पालन नहीं किया जाना निष्चित रूप से संदेहास्पद रहा। प्रतिस्थिति जन साक्ष्य के आधार पर भी आरोप सत्य प्रमाणित होता है। |
निष्कर्श :- आरोपित के विरूद्ध गठित आरोप, आरोपी द्वारा समर्पित स्पश्टीकरण, संचालन पदाधिकारी का अधिगमन तथा आरोपित के द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा में दुहराये गये असंतोशप्रद, तथ्यहीन एवं आधारहीन तर्क के अवलोकनोपरान्त एवं लगान की राषि दुर्विनियोग के मामला सत्य पाया गया। श्री पुरंजय ओझा, निलंबित राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, सासाराम सम्प्रति मुख्यालय जिला राजस्व शाखा, रोहतास, सासाराम के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के समेकित विवेचना करने पर परिलक्षित होता है कि इनके विरूद्ध वृहद शास्तियाँ अधिरोपित की जाय।
ः- श्री पुरंजय ओझा
ः- पुनरीक्षित वेतनमान 44900-142400/60400
अतः मैं धर्मेन्द्र कुमार, भा0प्र0से0, जिला दण्डाधिकारी एवं समाहर्त्ता, रोहतास, सासाराम बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 भाग-05 यथा संषोधित -2007 के नियम 14 (xi) में निहित शक्तियों के आलोक में श्री पुरंजय ओझा, निलंबित राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, सासाराम सम्प्रति मुख्यालय जिला राजस्व शाखा, रोहतास, सासाराम को आदेष निर्गत की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करने का दण्ड अधिरोपित करता हूूँ। इन्हें निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कोई राषि देय नहीं होगी। साथ ही, '' बिहार पेंषन नियमावली, 1950 '' के नियम - 46 के तहत पेंषन देय नहीं होगी एवं भविश्य में सरकार के अधिन नियोजन के निरर्हता होगी। श्री पुरंजय ओझा, निलंबित राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, सासाराम सम्प्रति मुख्यालय जिला राजस्व शाखा, रोहतास, सासाराम से संबंधित पूर्ण विवरण निम्न प्रकार है :- 1. नाम 2. पिता का नाम ः- श्री किषुन लाल ओझा ः- राजस्व कर्मचारी 3. पदनाम 4. जन्म तिथि ः- 24.01.1963 5. नियुक्ति की तिथि ः- 08.12.1987 6. कार्यालय का नाम ः- अंचल कार्यालय, सासाराम (रोहतास)। 7. वेतनमान 8. स्थायी पता ः- ग्रामपो0- सेमरिया ओझा पट्टी, भाया-षाहपुर पट्टी, जिला- भोजपुर
(आरा) बिहार
आदेश से, (ह0)/-अस्पष्ट, जिला दण्डाधिकारी एवं समाहर्त्ता।13 बिहार गजट, 2 जून 2021
वित्त विभाग
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आदेश
19 अप्रील 2021
सं0 01/स्था0(ले0से0)-07/2017-2873/वि॰--वित्त विभागीय आदेश ज्ञापांक-4589 दिनांक 08.09.2020 के क्रम में मो० जमील, बिहार लेखा सेवा, वरीय कोषागार पदाधिकारी, दलसिंहसराय-सह-प्रभारी शाहपुर पटोरी कोषागार सम्प्रति प्रतिनियुक्त-वित्त विभाग, बिहार, पटना को महालेखाकार, बिहार एवं वित्त विभाग के बीच लंबित लेखा का सामंजन एवं लेखाकंन कार्यों के ससमय निष्पादन हेतु दिनांक 30.06.2021 तक प्रतिनियुक्ति अवधि विस्तारित किया जाता है । 2. प्रस्ताव में माननीय उप मुख्य(वित्त) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
आदेश से, ओम प्रकाश झा, अपर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना }kjk प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 7—571+25-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in