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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 20 October 2021

Published 20 October 2021

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2021-10-20.38
Languages
English, Hindi

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निबंधन संख्या पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-14 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण।

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भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची पृष्ठ

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। ---

पूरक

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पूरक-क

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2 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021

भाग-1 नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं।

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मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ------ तांिर्कक आदेश 24 सितम्बर 2021 सं0 8/आ0 (मु0 राज0नि0)-03-02/2018-3570--जे0के0 जूट मिल कम्पनी लिमिटेड, कटिहार के प्रोमोटर गौरहरि सिंघानिया परिवार था। जूट मिल आर्थिक संकट के कारण वर्ष 1994 से रूग्न अवस्था में था। फलतः कम्पनी के प्रोमोटर के द्वारा शेयर को शारदा परिवार को बेच दिया गया। कम्पनी की हिस्सेदारी के संबंध में श्री घनश्याम शारदा एवं मे0 शिव शंकर टे्रडिंग कम्पनी के बीच विवाद चल रहा था जिससे संबंधित विविध वाद माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद एवं माननीय उच्च न्यायालय, गुवाहाटी में दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, गुवाहाटी में दायर एफ0ए0ओ0 नं0-10/2013 में दिनांक 06.01.2014 को पारित आदेश के विरूद्ध माननीय सर्वोच्च न्यायालय में SLP (Civil) संख्या-5249/2014 घनश्याम शारदा बनाम मे0 शिव शंकर टे्रडिंग कम्पनी दायर किया गया था।

2. इसी बीच माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन रहने की अवधि में दिनांक 16.04.2014 को जे0के0 जूट मिल कम्पनी के डायरेक्टर श्री शोभा नन्द झा द्वारा श्री मृत्युंजय कुमार सिंह, लुधियाना के पक्ष में निष्पादित दस्तावेज निबंधन हेतु जिला अवर निबंधन कार्यालय, कटिहार में उपस्थापित किया गया। दस्तावेज के संबंध में तत्कालीन जिलाधिकारी-सह-जिला निबंधक, कटिहार द्वारा मौखिक रूप से निबंधन स्वीकार नहीं करने का निदेश दिया गया था। दस्तावेज में सन्निहित सम्पत्ति जिसका खाता सं0-64 खेसरा सं0-8, 31 कुल रकवा करीब 68 एकड़ एवं उस पर निर्मित संरचना था। दस्तावेज के जरसमन की राशि 35500000/-(तीन करोड़ पचपन लाख) रू0 दर्शाया गया था।

3. जे0 के0 जूट मिल की सम्पत्ति के क्रेता श्री मृत्युंजय कुमार सिंह के द्वारा जिला निबंधक-सह- समाहर्त्ता के न्यायालय में अपील वाद सं0-235/2013-14 दायर किया गया जिसमें उपस्थापित दस्तावेज को निबंधित करने का अनुरोध किया गया। जिला निबंधक-सह-समाहर्त्ता के द्वारा दिनांक 21.03.2014 को निम्नलिखित आदेश पारित किया गया जो उनके ज्ञापांक-1340 दिनांक 31.05.2014 द्वारा निर्गत है - From the aforesaid facts it is clear that the land under reference is Raiyati land (belonged to juggi lal Kamlapati Company Katihar) therein the government has no vested interest. Accordingly there appears to be no purpose for stay of it's registration. Therefore the District Sub Registrar, Katihar is free for conducting the proceeding under the Registration Act and the Rules framed under it with this order the present case is hereby disposed off. जिला निबंधक-सह-समाहर्त्ता द्वारा अपील वाद की सुनवाई के क्रम में जिला अवर निबंधक से प्रतिवेदन की मांग की गयी थी। जिला अवर निबंधक श्री ग्वालिया ने अपने पत्रांक-1-एन-01/2012/ 2271/नि0 दिनांक 28.10.2013 द्वारा प्रतिवेदित किया कि निबंधन अधिनियम एवं इसके अधीन गठित नियमावली के अंतर्गत उक्त दस्तावेज उपस्थापन स्वीकार करने में कोई वैधानिक अड़चन नहीं है। सुनवाई में सन्निहित भूमि को रैयती होने और जिला अवर निबंधक के प्रतिवेदन के आधार पर जिला निबंधक-सह-समाहर्त्ता द्वारा निबंधन अधिनियम और उसके अधीनस्त नियमावली के अंतर्गत कार्रवाई हेतु जिला अवर निबंधक, कटिहार को स्वतंत्र होने का आदेश पारित किया गया ।

4. श्री शारदा द्वारा दायर S.L.P. No. 5249/14 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 08.05.2014 को निम्नलिखित अंतरिम आदेश पारित किया गया -"However' it is directed that till further orders, capital assests of the Company shall not be disposed of without taking permission of this Court." 5. श्री घनश्याम शारदा के अधिवक्ता श्री अरूण प्यासा नें दिनांक 10.06.2014 को समाहर्त्ता को सम्बोधित पत्र में यह अंकित करते हुए कि कम्पनी SICA Act के अंतर्गत BIFR में निबंधित है और BIFR की अनुमति के बगैर कम्पनी की सम्पत्ति की बिक्री नही की जा सकती है एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायादेश का उल्लेख करते हुए आदेश वापस लेने का अनुरोध किया गया। पुनः जिला अवर निबंधक को सम्बोधित आवेदन में भी उन्होनें दस्तावेज का निबंधन नहीं करने का अनुरोध किया। इसके पश्चात श्री प्यासा के पत्र के क्रम में श्री निलय सेन, अधिवक्ता, कलकत्ता के द्वारा माननीय विभागीय मंत्री, जिला निबंधक-सह-समाहर्त्ता एवं जिला अवर निबंधक को दस्तावेज का निबंधन नहीं करने का आवेदन दिया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 08.05.2014 को पारित आदेश एवं दोनो अधिवक्ताओं के अनुरोध पत्र की प्रति संलग्न करते हुए जिला पदाधिकारी, कटिहार ने अपने पत्रांक-1645 दिनांक 26.06.2014 द्वारा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई हेतु जिला अवर निबंधक को भेज दिया। इसके बावजूद आरोपी पदाधिकारी श्री ग्वालिया द्वारा न्यायादेश के प्रतिकूल व्यक्तिगत3 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 लाभ के लिये पक्षकार को लाभ पहुॅचाने के उद्‌देश्य से वगैर समाहर्त्ता की अनुमति के दिनांक 30.06.2014 को वैधानिक राय मांगी गई एवं दिनांक 01.07.2014 को राय प्राप्त कर लिया गया। यह कार्रवाई इतनी जल्दीबाजी में की गई कि प्रस्ताव भेजे जाने और प्राप्ति का अभिलेख भी संधारित नहीं किया गया और दिनांक 02.07.2014 को सरकारी अधिवक्ता की राय को आधार बनाकर निबंधन कर दिया गया।

6. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SLP (Civil) संख्या-5249/2014 दिनांक 08.05.2014 को पारित आदेश के विपरीत जिला अवर निबंधक के द्वारा दस्तावेजों का निबंधन स्वीकार किये जाने के कारण माननीय सर्वोच्च न्यायालय में SLP के याचिकाकर्त्ता श्री घनश्याम शारदा के द्वारा Contempt Petition (Civil) 338/2014 दाखिल किया गया जिसमें समाहर्त्ता, कटिहार एवं जिला अवर निबंधक, कटिहार को भी Contemnor बनाया गया।

7. माननीय न्यायालय के न्यायादेश की अवमानना के लिए श्री संजय कुमार ग्वालिया तत्कालीन जिला अवर निबंधक, कटिहार को दोषी मानते हुए जिला पदाधिकारी, कटिहार के द्वारा आरोप पत्र भेजते हुए श्री ग्वालिया के विरूद्ध दण्डानात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी। जिला पदाधिकारी, कटिहार की अनुशंसा के आधार पर श्री ग्वालिया के विरूद्ध माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश को जान बूझकर अवहेलना करना, समाहर्त्ता-सह-जिला निबंधक द्वारा दिये गये निदेश की अवहेलना करना, पद का दुरूपयोग कर सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बिना दस्तावेज निबंधन करने के बिन्दु पर वैधानिक राय प्राप्त करना, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतना, बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के प्रावधान के प्रतिकूल आचरण करना आदि आरोप गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें निष्कर्षित किया गया है कि ''आरोपी पदाधिकारी द्वारा हड़बड़ी में असावधानी पूर्वक कार्य किया जाना परिलक्षित होता है। परन्तु दिनांक 08.05.2014 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध गठित आरोप Petition (s) For Special Leave to Appeal (Civil) No. (a). 5249/2014 में पारित आदेष " However it is directed that till further orders, capital assets of the Company shall not be disposed of without taking permission of this Court." के अवमानना के संबंध में इन्हें Contemnor-11 के रूप में चिन्हित करते हुए इनके कार्यो की पूर्णरूपेण समीक्षा की गई है तथा आरोपी पदाधिकारी को मात्र सावधान किया गया है। ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के अवमाननावाद में पारित न्यायादेश के आलोक में तथा विभागीय कार्यवाही के संचालन के समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध गठित आरोप के संबंध में भविष्य में इस तरह की कृत्यों की पुनरावृत्ति न हो इसलिए इन पर लघु दण्ड अधिरोपित किया जा सकता है।'' संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा में आरोप सं0-01 एवं 02 को प्रमाणित पाया गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करना एवं समाहर्त्ता के द्वारा दिये गये निदेशों का पालन नहीं करना जैसे गंभीर आरोप के संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बचाव वयान को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-4911 दिनांक 11.12.2017 द्वारा श्री ग्वालिया के बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 यथा संषोधित 2007 के नियम-14 (vi) के तहत्‌ 04 (चार) वेतनवृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने का दंड अधिरोपित किया गया।

8. अवमाननावाद संख्या-338/2014 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 18.11.2016 को निम्नलिखित आदेश पारित किया गया है - We now turn to the involvement of those officials concerned with registration, Who went ahead and registered the document on 02.07.2014 despite having been put to notice and served with a copy of the Order of 08.05.2014. Our attention has been invited to the opinion rendered by the office of the Advocate General, Bihar to the effect that even if there be any order passed by a civil court in connection with a private dispute between the parties, the registering authorities are bound to register a document presented for registration. This opinion was relied upon by the Government Advocate who then opined that the document in the present case could be registered. The request was allegedly made on 30.06.2014 and the opinion of the Government Advocate was promptly given on 01.07.2014. there is no register maintained diarizing the inward and outward letters and prima facie the entire theory appears to be suspicious and designed to confer a favour. However, since these are government servants, we grant them benefit of doubt and would only caution them. It is shocking that an order passed by this Court, in the face of the provisions of Article 142 of the Constitution, could be ignored or disregarded by the officials who went ahead and registered the document. However, we do not find sufficient grounds to invoke our contempt jurisdiction to punish them for violation of the order of 08.05.2014.

4 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021

9. विभागीय दण्डादेश के विरूद्ध श्री ग्वालिया द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC सं0- 5241/2018 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 23.03.2021 को निम्नांकित न्यायादेश पारित किया गयाः- "12. On going through the entire materials available on record, the Court finds that there are certain procedural irregularity in conduct of the departmental proceeding, particularly after the stage of second show-cause notice as the respondents have not objectively considered the reply to the secondshow-cause notice in proper perspective and, therefore, the decision to inflict punishment cannot sustain. Accordingly, the Court is constrained to allow the writ application for the infirmity in inflicting major punishment and consequently Annexure-9 cannot sustain and is hereby quashed. However, in view of the judgment of the Constitution Bench in the case of Managing Director, ECIL, Hyderabad v.B.Karunakar, reported in (1993) 4 SCC 727, the matter is remitted back for decision afresh for de-novo enquiry against the petitioner from the stage of second show-cause notice. 13. In the facts and circumstances of the case, the matter is remitted back to the disciplinary authority, who shall give fresh second show-cause notice and after opportunity of hearing to the petitioner pass appropriate order on the issue of quantum of punishment considering the fact that the petitioner being the Sub-Registrar has admitted registration of the document, while taking decision in the departmental proceeding, the respondents have to draw the distinction between contempt and misconduct. The respondents are hereby directed to take appropriate decision afresh in accordance the law within a maximum period of four months from the date of receipt/production of a copy of this order. 14. Before parting with, the Court deem it fit and proper to remind the authority that matter involving defiance of the direction issued by the Apex Court should not be taken leniently, irrespective of the fact that contempt proceeding was dropped extending the benefit of doubt. The standard of proof in as departmental proceeding is preponderance of probability, whereas in contempt proceeding the Court is required to see whether there is deliberate and willful disobedience of the direction of the Court. The observation of the Apex Court is indicative of the fact that the Court has not fully exonerated the petitioner, the Apex Court held out that it does not constitute willful defiance constituting contempt."

10. उक्त न्यायादेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-4911 दिनांक 11.12.2007 द्वारा 04 वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने के दण्डादेश को विभागीय अधिसूचना संख्या-1924 दिनांक 23.06.2021 द्वारा निरस्त करते हुए विभागीय पत्रांक-1929 दिनांक 23.06.2021 द्वारा श्री ग्वालिया से नये सिरे से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री ग्वालिया द्वारा दिनांक 11.07.2021 को द्वितीय बचाव वयान विभाग में समर्पित किया गया है।

11. श्री ग्वालिया ने अपने बचाव वयान में कहा है कि संचालन पदाधिकारी ने किसी भी आरोप को प्रमाणित नहीं पाया है, जबकि तथ्य यह है कि संचालन पदाधिकारी ने अपने समीक्षा में आरोप संख्या-1 एवं 2 में आरोपी पदाधिकारी को दोषी पाया है एवं निष्कर्षित किया है कि जिला अवर निबंधक के द्वारा हड़बड़ी एवं असावधानी पूर्ण कार्य किया गया है। अतएव आरोपी पदाधिकारी को लघु दण्ड दिया जा सकता है। श्री ग्वालिया का यह कहना कि विभागीय कार्रवाई चलाने हेतु जो प्रपत्र-'क' के आरोप संख्या-3 में आरोप के विवरण में यह दर्शाया गया है कि यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमाननावाद में उन्हें दोषी ठहराया गया होता तो विभागीय कार्यवाही का संचालन एवं प्रपत्र-'क' का गठन सही होता। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम न्याय निर्णय की प्रतीक्षा किये बिना ही एडवांस के रूप में विभागीय कार्यवाही संचालित कर दिया गया जो नियमानुसार सही नही था। आरोपी पदाधिकारी का यह कथन तर्क संगत नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रश्नगत दस्तावेज पर स्थगन आदेश दिनांक 08.05.2014 को पारित हुआ एवं इसकी प्रति जिला पदाधिकारी ने पत्रांक-1645 दिनांक 26.06.2014 के द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करने हेतु जिला अवर निबंधक को भेज दिया गया था एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम ओदष प्राप्त नही होने के बावजूद दिनांक 02.07.2014 को निबंधन कर दिया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अवमाननावाद दायर होने के पश्चात्‌ न्यायादेश का प्रथम दृष्टया अवमानना की पुष्टि के कारण विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी। अतएव आरोपी पदाधिकारी का कथन निराधार है। श्री ग्वालिया का अपने बचाव वयान में यह कहना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अवमाननावाद में कटिहार के सरकारी अधिवक्ता को बुलाया गया और उनका गवाही लिया गया। गवाही में सरकारी अधिवक्ता के द्वारा यह कहा गया कि5 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 जिला अवर निबंधक के द्वारा मेरे Legal Opininon को स्वंय आकर Collect नहीं किया गया बल्कि इसे मेरे द्वारा भिजवाया गया था। साथ ही उनका यह भी कहना है कि आरोप संख्या-2 को प्रमाणित करने हेतु सरकारी अधिवक्ता, कटिहार की गवाही विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष नहीं करायी गयी यदि वे कहते कि जिला अवर निबंधक स्वंय आकर Legal Opininon ले गये है तो आरोप संख्या-2 सही होता। तथ्य यह है कि सरकारी अधिवक्ता से वैधानिक राय की अपेक्षा 30.06.2014 को की गयी एवं दिनांक 01.07.2014 को वैधानिक राय जिला अवर निबंधक को उपलब्ध करा दिया गया। वैधानिक राय प्राप्त करने के प्रस्ताव एवं जिला अवर निबंधक भेजे जाने का कोई अभिलेख संधारित नहीं किया गया। यह पुष्टि करता है कि यह कार्य किसी खास पक्ष को लाभ पहुॅचाने के लिए जल्दीबाजी में की गयी है। आरोपी पदाधिकारी को माननीय सर्वोच्च न्यायालय का अंतरिम आदेष संज्ञान में रहते हुए जिला पदाधिकारी की अनुमति के बिना जिला स्तर पर वैधानिक राय प्राप्त करना किसी भी दृष्टिकोण से औचित्य पूर्ण नहीं था। माननीय न्यायालय के अंतिम आदेष की प्रतीक्षा किया जाना ही औचित्य पूर्ण था। श्री ग्वालिया का अपने बचाव वयान में कहना कि आरोप संख्या-3 को साबित करने हेतु साक्ष्य के रूप में विभागीय पत्रांक-3404 दिनांक 19.11.2010 एवं Legal Opininon दिनांक 01.07.2014 को उपलब्ध कराया गया परंतु यह आरोप सही है या गलत है इस आरोप को साबित करने हेतु कोई भी गवाह प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया। विभागीय कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि मैने सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी आदेश का अवहेलना नहीं किया हूॅ और जो भी कार्य किया गया है वह विभाग के विभिन्न पत्रांक एवं दिनांक के द्वारा जारी दिशा निर्देश के आलोक में किया गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अवमाननावाद की सुनवाई हुई और मुझे दोष मुक्त कर दिया गया ऐसी स्थिति मे जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दोष मुक्त किया गया है तो यह माना जायेगा कि सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी आदेश का अवहेलना नहीं किया गया है। जबकि तथ्य यह है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा उद्धृत विभागीय पत्रांक-3404 दिनांक 29.11.2010 द्वारा दिया गया दिशा निर्देश माननीय न्यायालय सब जज-01, कटिहार द्वारा पारित किसी खास न्यायादेष के संदर्भ में है। उक्त को आधार बनाकर तथा गलत व्याख्या कर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अवहेलना तथ्य परक एवं तर्क संगत नहीं है। अवमाननावाद में संदेह का लाभ देते हुए इस वाद को समाप्त किया गया है, न कि आरोपी पदाधिकारी को दोष मुक्त किया गया है। आरोपी पदाधिकारी के कृत्य पर नाराजगी व्यक्त करते हुए न्यायादेश में यह अंकित किया गया है कि ''It is shocking that an order passed by this Court, in the face of the provisions of Article 142 of the Constitution, could be ignored or disregarded by the officials who went ahead and registered the document." माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना के लिये जिला अवर निबंधक के दुःसाहस पर कड़ी टिप्पणी की है। स्पष्टतः आरोपी पदाधिकारी के प्रस्तुत कथन के आधार पर दोष मुक्त समझा जाना उचित नहीं है।

12. उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी पदाधिकारी द्वारा सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त किये बिना सरकारी अधिवक्ता से वैधानिक राय प्राप्त किया गया, न्यायादेश के विपरीत सरकारी अधिवक्ता के राय को आधार बनाकर जान बूझकर स्वेच्छाचारित एवं अदम्य दुःसाहस का परिचय देते हुए माननीय न्यायालय का अंतिम आदेश प्राप्त होने के पूर्व दिनांक 02.07.2014 को भूमि का निबंधन किया जाना व्यक्तिगत लाभ के लिये आरोपी पदाधिकारी की गलत मंशा एवं सहभागिता की पुष्टि करता है। आरोपी पदाधिकारी का यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के आलोक में सरकारी कर्मी के आचरण एवं कर्त्तव्य निष्ठा के प्रतिकूल है। अतएव श्री ग्वालिया को न्यायादेश के आलोक में प्राप्त द्वितीय बचाव वयान को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 (vi) के तहत्‌ 04 (चार) वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध किया जाता है।

आदेश से, चैतन्य प्रसाद, अपर मुख्य सचिव।

------ 1 अक्तूबर 2021 सं0 8/आ0 (मु0राज0नि0)-3-03/2019-3678--श्री अजय कृष्ण मिश्र, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मगध प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवा निवृत्त के विरूद्ध अनुपातहीन (Dispropotionate) धर्नाजन के मामले में निगरानी इकाई द्वारा प्राथमिकी संख्या-03/2014 दिनांक 27.08.2014 भ्र0नि0अधि0 1988 की धारा-13 (2)-सह-पठित 13 (ई0) के अधीन दर्ज किये जाने के कारण श्री मिश्र को विभागीय अधिसूचना संख्या-3808 दिनांक 05.09.2014 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पद का दुरूपयोग कर अनुपातहीन धर्नाजन करने एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के प्रावधानों के प्रतिकूल आचरण के आरोप में आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय संकल्प संख्या-5479 दिनांक 16.12.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी । 2. संचालन पदाधिकारी-सह7विभागीय जॉच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक-95 दिनांक 01.02.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें आरोप सं0-01 एवं 02 को प्रमाणित निष्कर्षित किया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-549 दिनांक 16.02.2018 द्वारा श्री मिश्र से प्रमाणित आरोपों पर द्वितीय बचाव वयान की मांग की गयी। श्री मिश्र के द्वारा अपने द्वितीय बचाव वयान में ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण का उल्लेख नहीं किया गया है, जिसके आधार पर उन्हें निर्दोष माना जा सके। श्री मिश्र द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं होने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-38 दिनांक 04.01.2019 द्वारा बिहार सकरारी सेवक6 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 सह यथा संशोधित नियमावली, 2007 के नियम-14 (xi) के तहत्‌ सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड अधिरोपित किया गया है। उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री मिश्र द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-24 (2) के तहत्‌ पुनर्विलोकन अर्जी दायर की गयी। श्री मिश्र द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया बल्कि संचालन पदाधिकारी के समक्ष एवं द्वितीय बचाव वयान में दिये गये तथ्यों की पुनरावृति की गयी है। मंत्रिपरिषद की बैठक दिनांक 18.02.2019 के मद सं0-12 के रूप में प्राप्त स्वीकृति के आलोक में अधिसूचना सं0-746 दिनांक 27.02.2019 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत किया गया है।

3. विभागीय दण्डादेश के विरूद्ध श्री मिश्र द्वारा मा0 उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No.- 6601/2019 दायर किया गया है। उक्त याचिका में मा0 उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 22.09.2020 को निम्नांकित न्यायादेश पारित किया गया हैः-

" In such view of the matter, the order of dismissal, vide memo no. 38 dated 04.01.2019 (Annexure-1) and the order of review, vide Memo no. 746 dated 27.02.2019 (Annexure-2), are quashed and the matter is remanded back to the authority concerned who will look into the grievance of the petitioner including the objection that he has filed and take decision in accordance with law within a period of four weeks from the date of receipt of a copy of this order. With the above observation and direction, this petition is allowed." 4. उक्त न्यायादेश के आलोक में विधि विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से विद्वान महाधिवक्ता, बिहार का मंतव्य प्राप्त किया गया। विद्वान महाधिवक्ता, बिहार के मंतव्य का मुख्य अंश निम्नवत्‌ हैः- " Opinion has been sought for with respect to the query for filing appeal against the order dated 22 nd of September 2020 passed in CWJC No. 6601 of 2019. By the aforesaid order, the Hon'ble Single Judge has quashed the order of dismissal, as contained in Memo No. 38 dated 04.01.2019 (Annexure-11) and the order of review as contained in Memo no. 746 dated 27.02.2019 (Annexure-2), and remanded the matter back to the quthority concerned to look into the matter including the objections raised by the petitioner and to pass afresh order in accordance with law. The Hon'ble Single Judge has held that from perusal of the order of dismissal dated 4th January 2019, it appears that the defence taken by the petitioner was not taken into consideration by the disciplinary authority and in a mechanical manner the order of dismissal was passed. It has long been said by the Courts that an order of dismissal is like a death penalty and the order of dismissal should be passed only after taking into consideration the defence of the delinquent employees and the evidence on the record and only therafter a reasoned order should be passed. In my opinion, it is not a case in which an appeal should be filed instead the department is well advised to look into the matter, consider the grievance / objections raised by the petitioner in his second show cause, to analyse and evaluate the evidence brought on the records and then only should pass and reasoned speaking order in accordance with law." 5 माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन हेतु सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग का परामर्श एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-948 दिनांक 08.03.2021 द्वारा श्री मिश्र के विरूद्ध दंडादेश की अधिसूचना सं0-38 दिनांक 04.01.2019 एवं उनकी पनुर्विलोकन अर्जी की अस्वीकृति की अधिसूचना सं0-746 दिनांक 27.02.2019 को निरस्त किया गया है। 6. श्री मिश्र के दिनांक 31.01.2020 को सेवा निवृत्त हो जाने के फलस्वरूप उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संकल्प सं0-1032 दिनांक 15.03.2021 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी0) के तहत्‌ सम्परिवत्तित किया गया है। 7. विभागीय संकल्प सं0-5479 दिनांक 16.12.2014 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्षित किया गया है कि आरोप संख्या-01 एवं 02 प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2014 की परिसम्पत्ति एवं दायित्व घोषणा में अपनी पत्नी के नाम उक्त लघु उद्योग इकाई और उसकी सम्पत्ति का जिक्र नहीं किया है। श्री मिश्र द्वारा घोषित परिसंपत्ति के अतिरिक्त (1) 17.15 लाख रूपये का उत्तर प्रदेश में फ्लैट नम्बर-208, गार्डेनिया ग्रीन, इंदिरा पुरम, गाजियाबाद (2) 25 लाख रूपये का पत्नी एवं उनके पार्टनर श्रीमती प्रेम कुमार के नाम से निवेश (3) 21.70 लाख रूपये का फ्लैट आर्य समाज रोड, दानापुर में उनकी पुत्री दीप्ति मिश्रा के नाम से (4) 65,500/-रूपये का 4.35 डिसिमल का पुत्र के नाम से प्लॉट नं0-1263/1870 नया गॉव, घनश्यामपुर, दरभंगा है। इस7 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 प्रकार विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा गणना के आधार पर घोषित परिसंपत्ति से लगभग 1.04,22,485/- रूपये अधिक की सम्पत्ति मानी गयी है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि यद्यपि आरोपित पदाधिकारी के पिता टिस्को, जमशेदपुर में कार्य करते हुए वर्ष 1999 में सेवानिवृत्त हुये, किन्तु यह भी सही है कि बहुत सारी संपत्तियॉ उनकी सेवानिवृत्ति के बाद और आरोपित पदाधिकारी के सेवा में आने के बाद खरीदी गयी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि उनकी पत्नी के पास स्वतंत्र आय के कई स्रोत थे और वे फैंटसी गार्मेट्‌स, लघु उद्योग इकाई चलाती थीं। दूसरी ओर वर्ष 2014 की परिसंपत्ति एवं दायित्व घोषणा में उन्होंने अपनी पत्नी के नाम उक्त लघु उद्योग इकाई और उसकी संपत्ति का जिक्र नहीं किया है। 8. श्री मिश्र द्वारा अपना द्वितीय बचाव बयान दिनांक 27.02.2018 को विभाग में समर्पित किया गया। श्री मिश्र द्वारा अपने बचाव वयान में संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन का खंडन किया गया है तथा उल्लेखित किया गया है कि निष्कर्ष भ्रामक, आधारहीन एवं सुसंगत तथ्यों से मेल नहीं खाता है। साथ ही उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके पूरे परिवार की सम्पत्ति का दायित्व उन पर डालकर आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज कर दिया गया है, जो लंबी अवधि से जॉच के अधीन है। विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी विवरणी को ही विभागीय जॉच आयुक्त द्वारा साक्ष्य मानकर दोनों आरोपों को प्रमाणित बताया गया है।

श्री मिश्र के पिता के द्वारा अर्जित राशि का उपयोग श्री मिश्र के परिजन की सम्पत्ति क्रय के लिए स्थानांतरित होने का प्रमाण/साक्ष्य उनके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। पत्नी के व्यवसाय का पूर्ण विवरण एवं उस व्यवसाय से अर्जित वर्षवार आय का विवरणी संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। पुत्र और पुत्री के नाम से क्रय किये गये अचल सम्पत्तियॉ उन दोनों के अर्जित आय से किया गया है, इसका साक्ष्य श्री मिश्र द्वारा नहीं दिया गया है। उपर्युक्त साक्ष्य के अभाव में यह स्पष्ट है कि श्री मिश्र ने स्वंय द्वारा अवैध स्रोत से अर्जित आय का उपयोग सम्पत्ति का क्रय करने में किया है। अतएव उपर्युक्त तथ्यों के आलोक मेेंं श्री मिश्र का बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं है। संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन एवं श्री मिश्र से प्राप्त द्वितीय बचाव वयान के समीक्षोपरांत बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी0) के तहत्‌ श्री मिश्र का 100 (सौ) प्रतिशत (शत प्रतिशत) पेंशन अवरूद्ध करने के प्रस्ताव में मा0 मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त करते हुए विभागीय पत्रांक-1497 दिनांक 22.04.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विभागीय दंड प्रस्ताव पर अभिमत की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक-1871 दिनांक 22.09.2021 द्वारा सूचित किया गया है कि दिनांक 07.09. 2021 को आहूत आयोग की पूर्ण पीठ में सम्यक्‌ विचारोपरांत विभागीय दण्ड प्रस्ताव में सहमति व्यक्त किया गया है। अतएव श्री अजय कृष्ण मिश्र, तत्का0 सहायक निबंधन महानिरीक्षक, मगध प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवा निवृत्त के बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी0) के तहत्‌ 100 (सौ) प्रतिशत (शत्‌ प्रतिशत) पेंशन अवरूद्ध करने का दण्ड अधिरोपित करते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त की जाती है।

9. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।

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अधिसूचनाएं

24 सितम्बर 2021

सं0 8/आ0 (राज0 नि0)-1-34/2020-3581--श्री संजय भारतीय, संयुक्त अवर निबंधक, पटना सम्प्रति संयुक्त अवर निबंधक, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध संयुक्त अवर निबंधक, पटना के पदस्थापन के दौरान दिनांक 15.12.2020 को जिला निबंधन कार्यालय, पटना के अभिलेखाकार का निरीक्षण श्री काशी कुमार, सहायक निबंधन महानिरीक्षक, बिहार, पटना एवं श्री सुशील कुमार सुमन, सहायक निबंधन महानिरीक्षक, पटना प्रमंडल, पटना द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान श्री संजय कुमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर का स्थानान्तरण होने के बावजूद कार्यालय में बने रहना और कार्य में अनियमितता के लिये कम्प्यूटर ऑपरेटर पर कार्रवाई हेतु निरीक्षण दल द्वारा निदेश दिये जाने पर श्री संजय भारतीय, संयुक्त अवर निबंधक, जिला निबंधन कार्यालय, पटना द्वारा आवेश में आकर खडे़ होकर ऑपरेटर का बचाव किया गया है। श्री भारतीय द्वारा अनुशासन का उल्लंघन के साथ-साथ अशोभनीय कार्य किया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1) का उल्लंघन है, जिसके लिए आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय पत्रांक-2101 दिनांक 05.07.2021 द्वारा श्री भारतीय से लिखित अभिकथन की मांग की गयी है।

2 श्री भारतीय ने अपने पत्रांक-1234 दिनांक 09.07.2021 को विभाग में अपना लिखित अभिकथन समर्पित किया गया है। श्री भारतीय का कहना है कि निरीक्षण के दौरान वहॉ उपस्थित अधिवक्ताओं के द्वारा ऑपरेटर श्री संजय कुमार के विरूद्ध पिक एण्ड चूज कर लोगों के कार्यो का सम्पादन किये जाने का आरोप लगाया गया जिसकी वजह से क्रमबद्ध तरीके से आवेदनों का निस्तार नहीं होने की बात कहीं गई। निरीक्षण दल को अवगत कराने का भरपुर प्रयत्न किया जिस दौरान अधिवक्तागण अत्यंत आपत्तिजनक रूप से शोर कर रहे थे जिससे वरीय अधिकारियों के निरीक्षण कार्य में काफी व्यवधान उत्पन्न हो रहा था। उक्त विचित्र परिस्थिति से विचलित होकर वरीय पदाधिकारियों द्वारा भ्रमवश इसे उनके स्तर से उनके प्रति अभर्यादित अनुशासनहीन व्यवहार की संज्ञा दिया जाना प्रतीत होता है जिसकी कल्पना करना भी मेरे लिए असह्‌य है। अब तक की पूरी सेवा में कभी भी किन्हीं वरीय पदाधिकारी के साथ अमर्यादित अनुशानहीनता व्यवहार किये जाने का कोई पूर्वादाहरण नहीं है।

3. सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-8237 दिनांक 06.07.2017 के अनुसार यदि प्रतिवेदित आरोप गम्भीर प्रकृति के नहीं हो और लघु शास्तियॉ अधिरोपित किये जाने योग्य हो तो, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण8 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संशोधित) के नियम-19 के प्रावधानों का अनुसरण करते हुए आरोप प्रकरण का अन्तिम निष्पादन किया जाय।

4. कार्यालय आदेश सं0-67 दिनांक 30.06.2020 के द्वारा पटना जिला अन्तर्गत विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत डाटा इन्ट्री ऑपरेटर/कम्प्यूटर ऑपरेटर का स्थानान्तरण किया गया है, जबकि श्री संजय कुमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर को 16.12.2020 को स्थानान्तरित स्थान पर योगदान देने हेतु विरमित नहीं किया गया। श्री संजय कुमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर का स्थानान्तरण होने के बावजूद कार्यालय में बने रहने और कार्य में अनियमितता, वरीय पदाधिकारी के समक्ष खड़े होकर बचाव कराना यह कृत्य अनियमित कार्य में सहभागिता का द्योतक है। अतएव श्री भारतीय से प्राप्त बचाव वयान को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत्‌ 02 (दो) असंचयात्मक प्रभाव वेतनवृद्धि अवरूद्ध करने के दंड अधिरोपित किया जाता है। 5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।

------- 1 अक्तूबर 2021 सं0 8/आ0 (राज0 उ0)-02-07/2018-3679--श्री अरविन्द कुमार, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध, वैशाली सम्प्रति सेवानिवृत को वैशाली जिलान्तर्गत पातेपुर थाना के मड़ईडीह ग्राम में दिनांक-04.06.2017 को की गयी छापेमारी में प्रतिवेदित अनियमितता, बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा-56 के प्रावधानों का उल्लंघन एवं बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के उल्लंघन के आरोप में विभागीय संकल्प सं0-80 दिनांक-10.01. 2019 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी, जिसे संकल्प सं0-561 दिनांक-15.02.2019 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

2. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी संयुक्त आयुक्त मद्यनिषेध द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में निष्कर्षित किया गया है कि आरोपी पदाधिकारी छापेमारी दल में सबसे वरीय पदाधिकारी हैं तथा वे छापेमारी दल का नेतृत्व कर रहे थे, सफलतापूर्वक छापेेमारी का नेतृत्व करने में असफल रहे। फलतः उनके द्वारा लापरवाही का आरोप प्रमाणित होता है। 3. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुये आरोपित पदाधिकारी से विभागीय पत्रांक-1276 दिनांक-20.04.2020 द्वारा द्वितीय बचाव-बयान की माँग की गयी।

4. श्री कुमार ने अपने द्वितीय बचाव-बयान में उल्लिखित किया है कि- दिनांक-04.06.2017 को वैशाली जिले के पातेपुर थाना के मड़ईडीह ग्राम में की गयी छापेमारी निरीक्षक मद्यनिषेध के नेतृत्व एवं उनके पर्यवेक्षण में की गयी। जप्ती सूची अवर निरीक्षक मद्यनिषेध, पातेपुर अंचल द्वारा तैयार कर अभियोग दर्ज किया गया। छापेमारी में रू0 578680/- बरामद होने की सूचना वरीय पदाधिकारी को दी गयी एवं समाहर्त्ता, वैशाली से आदेष प्राप्त कर उक्त राशि कोषागार वैशाली में सुरक्षित रख दी गयी।

श्री कुमार का कहना है कि कुछ दिनों बाद मौखिक रूप से अवर निरीक्षक मद्यनिषेध द्वारा कागज पर लिखे गये रू0 के Detail जोड़ने पर कोषागार में जमा राशि रू0 579430/- बताया गया। माननीय उच्च न्यायालय के न्याय निर्णय के आलोक में नवपदस्थापित अधीक्षक मद्यनिषेध, वैशाली द्वारा कोषागार से रू0 निकालकर Release करने के पूर्व गणना की गयी तो यह राशि रू0 578680/- पायी गयी, जो जप्ती सूची में दर्ज है। छापेमारी के घटना स्थल से चलने के पूर्व मेरे द्वारा पूछने पर अवर निरीक्षक मद्यनिषेध द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा Non Recovery जप्ती सूची विधिवत बना ली गयी है एवं उसपर स्वतंत्र गवाहों का हस्ताक्षर ले लिया गया है। अवर निरीक्षक मद्यनिषेध, पातेपुर द्वारा नाबालिग बच्ची का हस्ताक्षर लेकर साक्षी बनाया जाना, किसी अन्य व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया जाना, Non Recovery जप्ती सूची के एकदम निचले हिस्से में हस्ताक्षर लेना तथा अधिक संख्या में विहित प्रपत्र वाली जप्ती सूची लेकर नहीं चलने के फलस्वरूप सादे कागज पर Non Recovery जप्ती सूची बनाये जाने में अधीक्षक मद्यनिषेध की लापरवाही प्रमाणित नहीं होती है। अवर निरीक्षक मद्यनिषेध, पातेपुर की सेवा छापेमारी के दिन तक बारह वर्षों से अधिक की है तथा वे प्रशिक्षण प्राप्त हैं। छापेमारी में जप्ती सूची बनाना, गवाही लेना, विहित प्रपत्र में जप्ती सूची बनाना अंचल अवर निरीक्षक मद्यनिषेध का पूर्ण दायित्व है। 5. श्री अरविन्द कुमार, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा उक्त छापेमारी दल का नेतृत्व/नियंत्रण करने की जबावदेही थी एवं कागजी कार्रवाई अवर निरीक्षक मद्यनिषेध के द्वारा की गयी थी। इस प्रकरण में श्री कुमार के द्वारा छापेमारी दल पर नियंत्रण का अभाव एवं अधीनस्थ कर्मियों द्वारा की गयी चूक परिलक्षित होती है। अतएव इनका बचाव-वयान स्वीकार योग्य नहीं है।

6. समीक्षोपरांत श्री कुमार के द्वितीय बचाव वयान को अस्वीकृत करते हुए संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 बी के तहत उनके पेंशन से 30% प्रतिशत (तीस प्रतिशत) पेंशन 5 (पाँच) वर्षों तक कटौती करने का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

7. विनिश्चित दंड के प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-1766 दिनांक-14.06.2021 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में आयोग के पत्रांक-1872 /लो0से0आ0 दिनांक-22.09.2021 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव में सहमति व्यक्त किया गया है। अतः संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, आरोपी पदाधिकारी के द्वितीय बचाव बयान एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री अरविन्द कुमार, तत्कालीन अधीक्षक मद्यनिषेध, वैशाली सम्प्रति सेवानिवृत9 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43 (बी) के तहत उनके पेंशन से 30% प्रतिशत (तीस प्रतिशत) पेंशन 5 (पाँच) वर्षों तक कटौती करने का दंड अधिरोपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, संयुक्त सचिव।

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सामान्य प्रशासन विभाग

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अधिसूचनाएं

1 सितम्बर 2021 सं0 1/अ0-29/2008-सा0प्र0-9780--श्री आदेश तितरमारे, भा0प्र0से0 (2006), निदेशक, कृषि, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक-09.09.2021 से 17.09.2021 तक कुल 09 दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री आदेश तितरमारे की अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद-निदेशक, कृषि, बिहार, पटना के प्रभार में श्री विजय कुमार, भा0प्र0से0(2007), विशेष सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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2 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9888--श्री विशाल राज, भा0प्र0से0(2017),उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, शिवहर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, मधुबनी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9889--श्री अनिल कुमार, भा0प्र0से0 (2017), उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, लखीसराय को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, पश्चिमी चम्पारण, बेतिया के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9890--श्री आशुतोष द्विवेदी, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, मनिहारी, कटिहार को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9891--श्री वैभव श्रीवास्तव, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, आरा सदर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, नालन्दा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9892--श्री विनोद दूहन, भा0प्र0से0(2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, दानापुर, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, शिवहर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9893--श्री अभिषेक रंजन, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, मधुबनी सदर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9894--श्री शेखर आनन्द, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, बगहा, पश्चिमी चम्पारण को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, रोहतास (सासाराम) के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9895--सुश्री अम्रिषा बैन्स, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, मोहनियॉं, कैमूर को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, अरवल के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9896--श्री निखिल धनराज निप्पणीकर, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, जहानाबाद को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, लखीसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9897--श्री नितिन कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, पटना सदर, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, मधेपुरा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9898--श्रीमती साहिला, भा0प्र0से0(2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, नरकटियागंज, पश्चिम चम्पारण को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, सहरसा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।10 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9899--श्रीमती प्रतिभा रानी,भा0प्र0से0 (2018), अनुमण्डल पदाधिकारी, जमुई को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9900--श्री सौरभ सुमन यादव, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, मोतिहारी सदर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9901--सुश्री प्रीति, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, बॉंका के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9902--सुश्री खुशबू गुप्ता, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, मुंगेर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9903--श्री नवीन कुमार, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, पटना सदर, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9904--श्री यतेन्द्र कुमार पाल, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, नवगछिया, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9905--श्री विक्रम विरकर, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, दानापुर, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9906--सुश्री प्रियंका रानी, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, विक्रमगंज, रोहतास के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9907--श्री दीपक कुमार मिश्रा, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, बगहा, पश्चिम चम्पारण के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी-1006/2019-सा0प्र0-9908--श्री स्पर्श गुप्ता, भा0प्र0से0 (2019) (सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, दरभंगा सदर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. अनुमण्डल पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित किए गए उपर्युक्त सभी पदाधिकारियों को दण्ड प्रक्रिया संहिता-1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के अन्तर्गत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए कार्यपालक दण्डाधिकारी की शक्तियॉंं एवं संबंधित जिला में दण्ड प्रक्रिया संहिता-1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियॉंं प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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6 सितम्बर 2021 सं0 1/एल0-43/2003-सा0प्र0-10014--श्री मिहिर कुमार सिंह, भा0प्र0से0(93), आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अधीन दिनांक 06.09.2021 से 18.09.2021 तक कुल 13 दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री सिंह की आलोच्य अवकाश अवधि में उनके द्वारा धारित पद- आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के प्रभार में श्री मनीष कुमार, भा0प्र0से0(2005), आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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8 सितम्बर 2021 सं0 1/अ0-1008/2013-सा0प्र0-10180--श्री पंकज कुमार, भा0प्र0से0 ( 97), सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पथ विकास निगम, पटना/जाँच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) द्वारा पूर्व में विभिन्न तिथियों को उपभोगित 08 (आठ) दिवसीय आकस्मिक अवकाश को उनके अनुरोध पर अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली-1955 के नियम-10,11,12,19(1) एवं 20 के तहत उपार्जित छुट्‌टी के रूप में निम्नवत्‌ परिवर्तित किया जाता है :-

11 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021
क्र. पूर्व में उपभोगित आकस्मिक अवकाश की तिथि/अवधि/दिन आलोच्य परिवर्तन से आच्छादित उपार्जित अवकाश की तिथि/ अवधि/ दिन
1 दिनांक 03-07 मई,2021-05 दिन दिनांक 03-07 मई,2021-05 दिन
2 दिनांक 17-19 मई,2021-03 दिन दिनांक 17-19 मई,2021-03 दिन

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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9 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10208--श्री अमृत लाल मीणा, भा0प्र0से0(बी एच :89), अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना) को कैबिनेट नियुक्ति समिति का सचिवालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली की अधिसूचना संख्या-36/02/2021- EO(SM-1) दिनांक 11.08.2021 द्वारा अपर सचिव, (लॉजिस्टिक), वाणिज्य विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्राालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के पद पर नियुक्त किये जाने के फलस्वरुप, उन्हें धारित पद का प्रभार त्यागने की तिथि से नव-पदस्थापन पर योगदान देने हेतु विरमित किया जाता है। ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, संयुक्त सचिव।

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9 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10209--श्रीमती विजयलक्ष्मी एन0,भा0प्र0से0 (बी एच :95), प्रधान सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना को कैबिनेट नियुक्ति समिति का सचिवालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली की अधिसूचना संख्या-33/04/2021-EO(SM-1) दिनांक 23.08.2021 द्वारा संयुक्त सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली के पद पर नियुक्त किये जाने के फलस्वरुप, उन्हें धारित पद का प्रभार त्यागने की तिथि से नव-पदस्थापन पर योगदान देने हेतु विरमित किया जाता है। ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, संयुक्त सचिव।

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9 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10210--श्री आदेश तितरमारे, भा0प्र0से0 (बी एच :2006), निदेशक, कृषि, बिहार, पटना को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्राालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के कार्यालय आदेश संख्या- A-12022/6/2019-PE-I दिनांक 02.09.2021 द्वारा उपाध्यक्ष, मुम्बई पोर्ट ट्रस्ट, मुम्बई के पद पर नियुक्त किये जाने के फलस्वरुप, उन्हें धारित पद का प्रभार त्यागने की तिथि से नव-पदस्थापन पर योगदान देने हेतु विरमित किया जाता है। ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, संयुक्त सचिव।

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9 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10211--श्री नर्मदेश्वर लाल, भा0प्र0से0 (98), सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, संयुक्त सचिव।

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9 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10212--श्री प्रत्यय अमृत,भा0प्र0से0 (1991), अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना) अगले आदेश तक अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री प्रत्यय अमृत, अपर मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जायेंगे।

सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10213--श्री अरविन्द कुमार चौधरी, भा0प्र0से0 (1995), प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-परीक्षा नियंत्राक, बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद्‌, पटना/जॉंच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना) अगले आदेश तक प्रधान सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।12 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10214--श्री संजय कुमार अग्रवाल,भा0प्र0से0 (2002), सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-जॉंच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/विशेष कार्य पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना/आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना) अगले आदेश तक सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।

2. उपर्युक्त व्यवस्था के आलोक में श्री संजय कुमार अग्रवाल, विशेष कार्य पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जायेंगे।

सं0 1/पी-1004/2021-सा0प्र0-10215--श्री राजीव रौशन, भा0प्र0से0 (2010), अपर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका/मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली मिशन) अगले आदेश तक निदेशक, कृषि, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विमलेश कुमार झा, संयुक्त सचिव।

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10 सितम्बर 2021 सं0 1/सी0-1002/2021-सा0प्र0-10372--श्री एस0 सिद्धार्थ,भा0प्र0से0 (बी एच : 91), प्रधान सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना कोे शीर्ष वेतनमान (स्तर-17- 2,25,000/-नियत) में प्रभार ग्रहण की तिथि से प्रोन्नति प्रदान करते हुए अपर मुख्य सचिव के रुप में पदनामित किया जाता है।

2. श्री एस0 सिद्धार्थ द्वारा शीर्ष वेतनमान का प्रभार ग्रहण कियेे जाने की तिथि से उनके द्वारा धारित वर्तमान पद को उनकी पदस्थापन अवधि तक के लिए शीर्ष वेतनमान में उत्क्रमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

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20 सितम्बर 2021 सं0 1/पी-1007/2016-सा0प्र0-10883--श्री रुपेश कुमार श्रीवास्तव, आई0ओ0एफ0एस0 (2002) (प्रतिनियुक्ति के आधार पर योगदान देकर सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापन हेतु प्रतीक्षारत) को अगले आदेश तक विशेष सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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23 सितम्बर 2021 सं0 1/अ0-1016/2019-सा0प्र0-11192--श्री तनय सुल्तानिया, भा0प्र0से0 (बी एचः2017), उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, दरभंगा को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन वैयक्तिक व्यय पर संयुक्त अरब अमीरात की निजी विदेश यात्रा हेतु दिनांक-05.11.2021 से 11.11.2021 तक कुल 07 दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति एक्स-इंडिया लीव के रुप मेंं प्रदान की जाती है। 2. श्री तनय सुल्तानिया की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोेजन, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, दरभंगा उन्हें प्रदत्त दायित्वों/कार्यो के अतिरिक्त उप विकास आयुक्त-सह- मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, दरभंगा के भी प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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23 सितम्बर 2021 सं0 1/ अ0-1014/2015-सा0प्र0-11225--श्रीमती शैलजा शर्मा, भा0प्र0से0 ( 2013), संयुक्त सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- संयुक्त सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना) को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक-16.08.2021 से दिनांक -30.08.2021 तक कुल 15 (पन्द्रह) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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23 सितम्बर 2021 सं0 1/सी0-1007/2021-सा0प्र0-11227--श्री त्रिपुरारि शरण, भा0प्र0से0(बी एच : 85), मुख्य सचिव, बिहार की सेवा भारत सरकार द्वारा प्रदत्त स्वीकृति के आलोक में उनकी वार्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि-30.06.2021 के बाद आगामी तीन (03) माह के लिए (अर्थात, 01.07.2021 से 30.09.2021 तक के लिए) सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-1/सी0-1007/2021-सा0प्र0-6149 दिनांक-25.06.2021 से विस्तारित है।

2. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली के पत्राांक-26014/2/2020 -एआईएस-II(पेंशन) दिनांक 22.09.2021 द्वारा अखिल भारतीय सेवाएॅंं (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम 16(1) के तहत13 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 दिनांक-30.09.2021 के उपरान्त श्री त्रिापुरारि शरण की सेवा को आगामी तीन माह अर्थात दिनांक 31.12.2021 तक विस्तारित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

3. अतएव, श्री त्रिापुरारि शरण, भा0प्र0से0(बी एच : 85), मुख्य सचिव, बिहार की सेवा दिनांक 30.09.2021 के बाद आगामी तीन (03) माह के लिए (दिनांक 01.10.2021 से 31.12.2021 तक के लिए) विस्तारित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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27 सितम्बर 2021 सं0 1/अ0-1012/2021-सा0प्र0-11402--श्री मुकुल कुमार गुप्ता, भा0प्र0से0(2016), उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, जहानाबाद को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अधीन दिनांक 14.11.2021 से 14.12.2021 तक कुल 31 (इकत्तीस) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्री गुप्ता की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में श्री अरविन्द मंडल, अपर समाहर्त्ता, जहानाबाद अपने प्रदत्त दायित्वों/कार्यों के अतिरिक्त उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, जहानाबाद के प्रभार में भी रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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29 सितम्बर 2021 सं0 1/पी0-1005/2013 -सा0प्र0-11452--श्री प्रदीप कुमार, आई0 ई0 डी0 एस0 (राज्य में प्रतिनियुक्ति के आधार पर कार्यरत केन्द्रीय सिविल सेवा के पदाधिकारी), अपर सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना(अतिरिक्त प्रभार-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम, पटना) की सेवा उनके पैतृक विभाग/संस्थान (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्राालय, भारत सरकार, नई दिल्ली) को वर्तमान धारित पद का प्रभार छोड़ने की तिथि से वापस की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

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1 अक्तूबर 2021 सं0 1/अ0-1005/2018-सा0प्र0-11604--श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा, भा0प्र0से0 (2014),संयुक्त सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अधीन दिनांक 20.10.2021 से 03.11.2021 तक कुल 15 (पन्द्रह) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. श्रीमती शर्मा की आलोच्य अनुपस्थिति अवधि में उनके द्वारा धारित पद के प्रभार की व्यवस्था वित्त विभाग, बिहार, पटना द्वारा आन्तरिक रूप से की जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

------ मुख्य अभियंता का कार्यालय श्सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, सिवान। ------ कार्यालय आदेश 23 अगस्त 2021

सं0 1/स्था0अनु0-12-102/2020-35/सिवान--जिला अनुकम्पा समिति-सह-जिलाधिकारी, सारण, छपरा की अध्यक्षता में दिनांक 15.06.2021 को आयोजित जिला अनुकम्पा समिति, बैठक की कार्यवाही ज्ञापांक 75 मु0/स्था0, छपरा, दिनांक 17.06.2021 एवं जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा के पत्र संख्या- 822/स्था0 दिनांक 07.08.2021 द्वारा की गई अनुषंसा के आलोक में श्री नितेष पाण्डेय, माता- स्व0 सरोज देवी, भूतपूर्व अनुसेवक, सारण नहर प्रमंडल, एकमा को अनुकंपा के आधार पर वेतनमान लेवेल-II (19900-63200) ग्रेड पे-1900 रूपये एवं समय-समय पर सरकार द्वारा स्वीकृत भत्ते सहित निम्नवर्गीय लिपिक (वर्ग-03) के पद पर नियुक्त किया जाता है। उन्हें आदेश दिया जाता है कि वे अपना योगदान कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, मैरवा के कार्यालय में दिनांक 20.09.2021 तक देना सुनिष्चित करें अन्यथा उनकी नियुक्ति रद्द समझी जायेगी। यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है।

2. इनकी वरीयता नियुक्ति तिथि के पूर्व तैयार की गई वरीयता सूची में अंकित व्यक्तियों के बाद होगी। 3. स्व0 सरोज देवी के आश्रित परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण का दायित्व श्री नितेष पाण्डेय पर होगी। उत्तरदायित्व का निर्वाह पूरी तत्परता के साथ नहीं करने पर गंभीर कदाचार माना जायेगा। इसके लिए उनके विरूद्ध14 बिहार गजट, 20 vDrwcj 2021 नियमानुसार कार्रवाई भी की जायेगी। इसके अलावा दायित्व की अवहेलना की संपुष्टि होने पर सक्षम प्राधिकार द्वारा उनकी परिलब्धियों का एक अंश सरकारी सेवक के आश्रित सदस्यों को देने का आदेश दे सकती है।

4. नियुक्त पद पर योगदान करते समय उन्हें जिला सिवान के असैनिक शैल्य चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र हर हालत में प्रस्तुत करना होगा।

5. स्वीकृत रोस्टर बिन्दु के आधार पर नियमानुसार रोस्टर बिन्दु अग्रगणित किया जा सकेगा। 6. योगदान करने हेतु किसी प्रकार का यात्रा भत्ता देय नहीं होगी। 7. गलत कागजात/अभिलेख के आधार पर नियुक्ति प्राप्त कर लेने की सूचना प्रकट होने पर उन्हें सेवा से विमुक्त कर दिया जायेगा तथा समुचित कार्रवाई नियमानुसार की जायेगी।

8. अनुकंपा के आधार पर नियुक्त होने के पश्चात्‌ पुनः अनुकम्पा का लाभ लेते हुए संवर्ग परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।

9. नियुक्त पद पर योगदान करते समय उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता का मूल प्रमाण पत्र एवं वास्तविक जन्म तिथि से संबंधित प्रमाण पत्र मूल में संबंधित पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाँच कर संतुष्ट होकर उनके द्वारा इनका योगदान स्वीकृत किया जायेगा तथा इसकी सूचना तुरंत अधोहस्ताक्षरी को दी जायेगी।

10. योगदान लेने के साथ ही संबंधित पदाधिकारी श्री नितेष पाण्डेय से आश्रित के भरण पोषण एवं विवाह में तिलक दहेज नहीं लेने देने संबंधी घोषणा पत्र प्राप्त कर लेंगे।

11. उप सचिव, वित्त विभाग के पत्र संख्या 1964 दिनांक 31.8.2005 के अनुसार दिनांक 01.09.2005 एवं उसके बाद नियुक्त राज्य कर्मियों के लिए अंशदायी पेंशन योजना (NPS)लागू होगा।

आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, मुख्य अभियंता। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 27—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 20 October 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2021-10-20.38/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2021-10-20.38.