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सं॰ 2/आरोप-01-01/2018-9506/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन सामान्य प्रशासन सामान्य प्रशासन सामान्य प्रशासन विभागविभागविभागविभाग ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 26 अगस्त26 अगस्त26 अगस्त26 अगस्त 2222021021021021
श्री अनिल कुमार पाण्डेय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1028/11, तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, सहरसा के विरूद्ध समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 7014 दिनांक 15.12.2017 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।
विभागीय पत्रांक 675 दिनांक 12.01.2018 द्वारा समाज कल्याण विभाग से श्री पाण्डेय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के क्रम में विभागीय अधिसूचना संख्या 15983 दिनांक 14.12.2017 द्वारा परिचारित विहित प्रपत्र में आरोप-पत्र गठित कर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में समाज कल्याण विभाग के पत्रांक 3083 दिनांक 01.06.2018 द्वारा आरोप-पत्र गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।
श्री पाण्डेय के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के निदेश के बावजूद विाीय वर्ष 2003-04 से 2015-16 तक का उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं उपलब्ध कराये जाने संबंधी आरोप प्रतिवेदित है। उक्त के कारण विभाग द्वारा महालेखाकार कार्यालय, बिहार को समायोजन हेतु प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया जा सका था। इस संबंध में समाज कल्याण विभाग के पत्रांक 3500 दिनांक 02.08.2017 एवं 4631 दिनांक 04.10.2017 द्वारा निदेशित भी किया गया था। उपयोगिता प्रमाण-पत्र के समायोजन हेतु चलाये गये अभियान एवं युद्ध स्तर पर कार्य निष्पादन के निदेश के बावजूद इनके जिले में अक्टूबर, 2017 में 18 करोड़ रूपये से अधिक राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र समायोजन हेतु लंबित रहने का आरोप प्रतिवेदित किया गया।
समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्राप्त श्री पाण्डेय के स्पष्टीकरण में इनके द्वारा प्रतिवेदित आरोपों से इनकार किया गया। स्पष्टीकरण में आगे इनका कहना है कि विभाग द्वारा दिये गये निदेष/आदेष का पालन किया जाता रहा है। इनके द्वारा समय-समय पर विभिन्न योजनाओं से संबंधित उपयोगिता प्रमाण-पत्र समर्पित किया गया है। इनके द्वारा अक्टूबर, 2017 में 18 करोड़ रूपये से अधिक राषि की उपयोगिता प्रमाण-पत्र समायोजन हेतु लंबित राषि के संबंध में कोई स्पष्ट तथ्य नहीं रखा गया है। 2 ;बपकरू4द्ध ;बपकरू23द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू25द्ध;बपकरू30द्ध की अनुषंसा सामान्य प्रषासन विभाग से की गयी। प्राप्त आरोप-पत्र एवं साक्ष्यों के समीक्षोपरान्त पाया गया कि प्रतिवेदन में श्री पाण्डेय के प्रासंगिक पदस्थापन अवधि में कुल कितनी राषि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्त करना था तथा श्री पाण्डेय द्वारा कितनी राषि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्गत किया गया, स्पष्ट नहीं है। फलतः विभागीय पत्रांक 15502 दिनांक 28.11.2018 द्वारा समाज कल्याण विभाग को इस आषय का सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। सूचना अप्राप्त रहने की स्थिति में विभागीय पत्रांक 5920 दिनांक 19.06.2021, पत्रांक 9966 दिनांक 19.10.2020 एवं पत्रांक 1279 दिनांक 29.01.2021 द्वारा समाज कल्याण विभाग को स्मारित भी किया गया, परन्तु सूचना/प्रतिवेदन अप्राप्त रहा।
श्री पाण्डेय के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनके स्पष्टीकरण एवं विभागीय मंतव्य की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि विाीय वर्ष 2003-04 से वर्ष 2015-16 तक समेकित बाल विकास सेवाएँ निदेषालय, बिहार, पटना द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का उपयोगिता प्रमाण-पत्र को महालेखाकार, बिहार को समायोजन हेतु अभियान चला कर एवं युद्ध स्तर पर कार्य निष्पादन का निदेष श्री पाण्डेय को दिया गया था। साथ ही राज्य स्तरीय मासिक समीक्षा बैठकों/मासिक समीक्षा बैठक में भी लंबित राषि के समायोजन हेतु निदेष दिया गया, किन्तु लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र की शून्य स्थिति नहीं प्राप्त की जा सकी। उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव के द्वारा लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र के निष्पादन हेतु मासिक समीक्षा बैठकों में बड़े पैमाने पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित रखे जाने पर अप्रसन्नता व्यक्त की गयी। उक्त के बावजूद श्री पाण्डेय द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र की शून्य स्थिति हेतु कार्रवाई नहीं की गयी एवं अक्टूबर, 2017 में 18 करोड़ रूपये से अधिक राषि की उपयोगिता प्रमाण-पत्र समायोजन हेतु लंबित रह गई। स्पष्टतया वरीय पदाधिकारियों द्वारा समीक्षोपरान्त दिये गये निदेष के आलोक में श्री पाण्डेय द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र की शून्य स्थिति हेतु विषेष प्रयास नहीं किया गया। विदित हो कि समेकित बाल सेवाएँ निदेषालय द्वारा विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है, जिसमें श्री पाण्डेय द्वारा लापरवाही बरती गयी है। श्री पाण्डेय का यह —त्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के प्रतिकूल है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्याें के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त श्री पाण्डेय के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19(1) के प्रावधान के तहत नियम-14 में अंकित (i) संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अनिल कुमार पाण्डेय (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1028/11, तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, सहरसा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक।संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक।संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक।संचयी प्रभाव के बिना एक वेतनवृद्धि पर रोक। है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष :-आदेष :-आदेष :-आदेष :- आदेष दिया जाता आदेष दिया जाता आदेष दिया जाता आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, बिहार-राज्यपाल के आदेष से, बिहार-राज्यपाल के आदेष से, बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रचना पाटिलरचना पाटिलरचना पाटिलरचना पाटिल,,,, सरकार के अपसरकार के अपसरकार के अपसरकार के अपर सचिव।र सचिव।र सचिव।र सचिव।
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