निबंधन संख्या पी0टी0-40
बिहार गजट
बिहार सरकार }kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-20 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
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भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 21-21 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।
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भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची i`"B
i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA 22-44 पूरक
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पूरक-क 45-552 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं।
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गृह विभाग
(विषेष शाखा)
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अधिसूचनाएं
25 अक्तूबर 2021
सं0 जी/म0प्रति0-03-03/2021-8080/गृ0वि0--बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 (बिहार अधिनियम 3, 2021) दिनांक 24.03.2021 से राज्य में प्रभावी है। बिहार के राज्यपाल द्वारा इस अधिनियम की धारा-2(XI) एवं 3(1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए गया जिला स्थित वैश्विक धरोहर ''महाबोधि मंदिर, बोधगया'' की सुरक्षा एवं संरक्षा की जवाबदेही बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस को सौंपते हुए इसे तुरंत के प्रभाव से विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान के रूप में अधिसूचित किया जाता है।
2. इस प्रतिष्ठान की सुरक्षा एवं संरक्षा हेतु बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के हवलदार पद से अन्यून तैनात अधिकारी को कर्त्तव्य के दौरान बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 की धारा-7, धारा-8 एवं धारा-9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विकास वैभव, विशेष सचिव।
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25 अक्तूबर 2021
सं0 जी/म0प्रति0-03-03/2021-8081/गृ0वि0--बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 (बिहार अधिनियम 3, 2021) दिनांक 24.03.2021 से राज्य में प्रभावी है। बिहार के राज्यपाल द्वारा इस अधिनियम की धारा-2(XI) एवं 3(1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा क्षेत्रीय सम्पर्कता योजना उड़ान के अंतर्गत संचालित दरभंगा जिला स्थित दरभंगा हवाई अड्डा की सुरक्षा की जवाबदेही बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस को सौंपते हुए इसे तुरंत के प्रभाव से विनिर्दिष्ट प्रतिष्ठान के रूप में अधिसूचित किया जाता है।
2. इस प्रतिष्ठान की सुरक्षा हेतु बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के हवलदार पद से अन्यून तैनात अधिकारी को कर्त्तव्य के दौरान बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम, 2021 की धारा-7, धारा-8 एवं धारा-9 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विकास वैभव, विशेष सचिव।
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x`g foHkkx
(vkj{kh 'kk[kk)
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अधिसूचनाएं
20 सितम्बर 2021
सं0 1/एल1-10-08/2019-गृ0आ0-7270--श्री आमीर जावेद, भा0पु0से0 (2012), रेल पुलिस अधीक्षक, जमालपुर को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11ं, 20 के अन्तर्गत दिनांक 20.09.2021 से 04.10.2021 तक कुल 15 (पंद्रह) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री आमीर जावेद के अवकाश अवधि में श्री सत्यवीर सिंह, भा0पु0से0 (2008), समादेष्टा, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-09, जमालपुर, श्री जावेद के दैनिक कार्याें के प्रभार में रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।3 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
15 सितम्बर 2021
सं0 1/एल01-10-02/2007-गृ0आ0-7122--श्रीमती के0 सुहिता अनुपम, भा0पु0से0 (1998), पुलिस महानिरीक्षक (आधुनिकीकरण), बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 20.04.2021. से दिनांक 08.06.2021 तक कुल 50 (पचास) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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7 अक्तूबर 2021
सं0 1/एल1-10-04/2012-गृ0आ0-7947--श्रीमती शोभा ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), महानिदेशक-सह- महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 25.09.2021 से 03.10.2021 तक कुल 9 (नौ) दिनों का उपार्जित अवकाश की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्रीमती ओहटकर के उक्त अवकाश अवधि में श्री जितेन्द्र मिश्रा, भा0पु0से0 (2004) पुलिस उप-महानिरीक्षक- सह-उप-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना को उनके दैनिक कार्यों के प्रभार में रखने की घटनोार अनुमति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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7 अक्तूबर 2021
सं0 1/एल1-10-04/2012-गृ0आ0-7948--श्रीमती शोभा ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), महानिदेशक-सह- महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-12, एवं 13 के अन्तर्गत दिनांक 17.04.2021 से 30.04.2021 तक कुल 14 (चौदह) दिनों का रूपान्तरित अवकाश (14 x 2 = 28 दिनों के अर्द्धवैतनिक अवकाश के समतुल्य) एवं दिनांक-01/02.05.2021 (शनिवार/रविवार) को suffix सहित, की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्रीमती ओहटकर के उक्त अवकाश अवधि में श्री पंकज सिन्हा, भा0पु0से0 (2004), तत्कालीन पुलिस उप-महानिरीक्षक- सह-उप-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना को उनके दैनिक कार्यों के प्रभार में रखने की घटनोार अनुमति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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15 सितम्बर 2021
सं0 1/एल01-10-05/2020-गृ0आ0-7123--श्री आर0एस0 भट्टी, भा0पु0से0 (1990), पुलिस महानिदेशक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पटना (सम्प्रति केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति हेतु विरमित) को अत्यावश्यक निजी कार्य हेतु अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-12(3) के अन्तर्गत दिनांक 06.09.2021 से दिनांक 07.09.2021 तक 02 (दो) दिनों का अर्द्धवैतनिक अवकाश [दिनांक 04/05.09.2021 (शनिवार/रविवार) को Prefix सहित] की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री भट्टी के उक्त अवकाश अवधि में श्री एम0 आर0 नायक, भा0पु0से0 (1998), पुलिस महानिरीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पटना को उनके द्वारा धारित पद के अतिरिक्त प्रभार में रखने की अनुमति दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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26 अक्तूबर 2021
सं0 1/एल1-10-06/2021-गृ0आ0-8446--श्री राजीव रंजन नं0-2, भा0पु0से0 (2012), पुलिस अधीक्षक (अभियान), विशेष कार्य बल, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 08.09.2021 से 06.11.2021 तक कुल 60 (साठ) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।4 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
7 अक्तूबर 2021
सं0 1/एल1-10-08/2015-गृ0आ0-7949--श्री अमरकेश डी0, भा0पु0से0 (2013), पुलिस अधीक्षक यातायात, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 03.12.2021 से 01. 01.2022 तक कुल 30 (तीस) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री अमरकेश डी0, भा0पु0से0 (2013) के उक्त अवकाश अवधि में पुलिस अधीक्षक, यातायात, पटना के अतिरिक्त प्रभार में श्री अम्बरीष राहुल, भा0पु0से0 (2017) नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य), पटना रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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7 अक्तूबर 2021
सं0 1/एल1-10-13/2013-गृ0आ0-7950--श्री एम0 आर0 नायक, भा0पु0से0 (1998), पुलिस महानिरीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 22.09.2021 से 01.10.2021 तक 10 (दस) दिनों के उपार्जित अवकाश एवं दिनांक 02/03.10.2021 को 02 (दो) दिनों का अनुमति अवकाश की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री नायक के उक्त अवकाश अवधि में पुलिस महानिरीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पटना के अतिरिक्त प्रभार में श्री विजय कुमार वर्मा, भा0पु0से0 (2003) पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना को रखने की घटनोार अनुमति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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15 सितम्बर 2021
सं0 1/एल1-10-23/2015-गृ0आ0-7089--श्रीमती मीनू कुमारी, भा0पु0से0 (2010), पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11ं, 20 के अन्तर्गत दिनांक 26.04.2021 से 13.06.2021 तक कुल 49 (उनचास) दिनों का उपार्जित अवकाश की घटनोार स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
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गन्ना उद्योग विभाग
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अधिसूचना
11 अक्तूबर 2021
सं॰ 01/स्था0-राज0-217/2021-1703--बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा 64वी॰ संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार ईख सेवा के लिए अनुषंसित निम्नांकित अभ्यर्थियों को अधोलिखित शर्त्तों के अधीन पे मैट्रिक्स लेवल-9 ( 53,100-1,67,800) में राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अनुमान्य भत्तों के साथ परीक्ष्यमान ईख पदाधिकारी के रूप में औपबंधिक रूप से नियुक्त करते हुए उनके नाम के समक्ष कॉलम-8 में अंकित जिला में व्यवहारिक प्रषिक्षण हेतु पदस्थापित किया जाता हैः-
| क्र॰ सं॰ | अनुक्रमांक | अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम एवं पता | ग ृह जिला | जन्मतिथि | मेधा क्रमांक | आयोग द्वारा आवंटित आरक्षण रोस्टर | न्व पदस्थापित कार्यालय का नाम | अतिरिक्त प्रभार |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 |
| 1 | 211233 | श्री श्रीराम सिंह, पिता-श्री श्रीकांत सिंह, ग्राम-बलथर, पोस्ट-सोनो, जिला-जमुई, बिहार-811314 | जमुई | 16.02.1991 | 179 | 01 | ईख पदाधिकारी, बेतिया अंचल बेतिया। | ईख पदाधिकारी, रामनगर अंचल बेतिया। |
| 2 | 485818 | श्री राहुल क ुमार, पिता-श्री मनोहर चौधरी, पता-षिवराम चौधरी टोला, पोस्ट-कुतलूपुर, थाना-मुफसिल, मंुंगेर, जिला-मुंगेर, बिहार, 811202 | मुंगेर | 31.12.1986 | 187 | 01 | ईख पदाधिकारी, मोतिहारी। | - |
2. चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने की प्रत्याषा में उपर्युक्त सभी अभ्यर्थी की औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ की जाती है कि चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन प्रतिवेदन अनुकूल प्राप्त नहीं होने पर उनकी सेवा तत्कालिक प्रभाव से निरस्त कर दी जायेगी। छः माह के अन्दर चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने की स्थिति में इस औपबंधिक रूप से नियुक्त अभ्यर्थियों की सेवा अगले छः माह के लिए राज्य सरकार का अनुमोदन प्राप्त कर तबतक विस्तारित होता रहेगा, जबतक कि प्रतिवेदन प्राप्त नही हो जाय।
3. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी क्षेत्रीय प्रषिक्षण के दौरान दो सप्ताह का कोषागार प्रषिक्षण संबंधित कोषागार के अधीन प्राप्त करेंगे।
4. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी अपने पद पर पदस्थापित रहते हुए मुख्यालय एवं क्षेत्रीय प्रषिक्षण प्राप्त करेंगे। 5. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी क्षेत्रीय/जिला स्तरीय प्रषिक्षण संबंधित जिला के अधीन प्राप्त करेंगे। 6. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी अपने पद पर पदस्थापित रहते हुए ही एस0आर0आई0, पूसा में छः माह का प्रषिक्षण और बिहार लोक प्रषासन एवं प्रषिक्षण संस्थान, पटना में तीन माह का प्रषिक्षण प्राप्त करेंगे। इस हेतु अलग से आदेष निर्गत किया जायेगा।
7. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी द्वारा समर्पित शैक्षणिक प्रमाण-पत्र एवं अन्य प्रमाण-पत्रों के संबंधित बोर्ड/संस्था से सत्यापन के क्रम में यदि कोई प्रतिकूल प्रतिवेदन प्राप्त होता है, तब इनकी सेवा तत्काल के प्रभाव से रद्द कर दी जायेगी एवं उनके विरुद्व आवष्यक विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकेगी।
8. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी की परीक्ष्यमान अवधि 02 वर्षो की होगी तथा उनकी आपसी वरीयता बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित संयुक्त मेधा क्रमांक के अनुसार होगी।
9. वित्त विभाग, बिहार पटना के संकल्प संख्या-1964 दिनांक-21.08.2005 एवं पत्रांक-768 पे.को. दिनांक-03.07.
2007 के अनुसार इन कर्मियों पर नई अंषदायी पेंषन योजना लागु होगा।
10. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी सामान्य प्रषासन विभाग (पूर्व में कार्मिक एवं प्रषासनिक सुधार विभाग) द्वारा निर्गत संकल्प संख्या-1919 दिनांक-18.01.1976 के अनुपालन में दहेज न लेने/न देने संबंधी घोषणा पत्र योगदान/ प्रभार ग्रहण करते समय अनिवार्य रुप से प्रस्तुत करेंगे।
11. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी को नियुक्ति पत्र प्राप्त करने/योगदान देने हेतु पदस्थापित स्थान पर आने-जाने के लिए कोई भत्ता देय नहीं होगा।
12. नवनियुक्त ईख पदाधिकारी को योगदान के समय असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तृत करना आवष्यक होगा।
13. अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से 15 दिनों के अन्दर नवनियुक्त ईख पदाधिकारी निष्चित रूप से योगदान देना सुनिष्चित करेगें, अन्यथा यह समझा जायेगा कि योगदान करने के इच्छुक नहीं है और ऐसी स्थिति में उनकी नियुक्ति स्वतः रद्द समझी जायेगी।
14. वैसे अभ्यर्थी जो पूर्व से किसी नियोक्ता के अंतर्गत सेवारत है, योगदान के समय विरमन पत्र प्रस्तुत करेंगे। अभ्यर्थी को अन्य सेवा से त्यागपत्र देने की स्थिति मेें सक्षम प्राधिकार द्वारा त्यागपत्र स्वीकृति से संबंधित पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
15. प्रस्ताव पर सरकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, षाहिद परवेज, उप-सचिव।
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(cid:356)ामीण कवािस कवभाग
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अधिसूचनाएं
18 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(पटना) नालन्दा (लोक शि0-03/2021-599967--(cid:373)ीमती गीता, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, एकं गरसराय, नालन्दा के वि(cid:349)(cid:544) अपर मुख्य सचिव, सामान्य (cid:366)शासन विभाग, के प(cid:361)ांक-1026 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 दिनांक 22.12.2020 (cid:554)ारा आरोप प्राप्त है। आरोप म(cid:336) लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के अंतग(cid:330)त दायर प(cid:303)रवाद की सुनवाईयों म(cid:336) अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहने का आरोप (cid:366)तिवेदित है।
उक्त (cid:366)तिवेदित आरोप पर (cid:373)ीमती गीता से स्पष्टीकरण प्राप्त है। जिसम(cid:336) (cid:366)तिवेदित है कि सरकारी काय(cid:330)/दायित्वों का निवा(cid:330)हन की व्यवस्था के कारण उक्त तिथि को अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, हिलसा के सम(cid:407) जाँच (cid:366)तिवेदन के साथ प(cid:407) रखने हेतु (cid:366)भारी (cid:366)खंड पंचायत राज पदाधिकारी, एकं गसराय को (cid:366)ाधिकृ त किया गया था। परन्तु उनका वाहन हिलसा जाने के (cid:354)म म(cid:336) खराब हो जाने के कारण वह अनुमंडलीय शिकायत निवारण पदाधिकारी के सम(cid:407) उप(cid:304)(cid:830)थत नही ं हो सके ।
(cid:373)ीमती गीता के वि(cid:349)(cid:544) सामान्य (cid:366)शासन विभाग से (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा विभाग (cid:554)ारा किया गया समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि (cid:373)ीमती गीता का स्पष्टीकरण स्वीकार करने योग्य नही ं है। अत: (cid:373)ीमती गीता, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, एकं गरसराय, नालन्दा के वि(cid:349)(cid:544) कड़ी चेतावनी का दंड अधिरोपित किया जाता है।
आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ीमती गीता के चा(cid:303)र(cid:361)ी म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
राज्यपाल ेि आदे से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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11 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(म0)औरं 0-01/2020-598199--(cid:373)ी लोक (cid:366)काश, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, कुटुम्बा, औरं गाबाद सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिहियां, भोजपुर (आरा) के वि(cid:349)(cid:544) (cid:366)भारी बाल विकास प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, औरं गाबाद के पद पर रहते (cid:352)ये मई, 2019 म(cid:336) बाल विकास प(cid:303)रयोजना काया(cid:330)लय, कुटुम्बा, औरं गाबाद म(cid:336) टी0एच0आर0/एच0सी0एम0 वितरण नही ं किये जाने म(cid:336) लापरवाही एवं कर्तव्यहीनता बरतने संबंधित आरोप प(cid:361) समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के प(cid:361)ांक-3306 दिनांक 13.08.2021 (cid:554)ारा प्राप्त है ।
समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप पर (cid:373)ी (cid:366)काश का स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया जिसम(cid:336) उनके (cid:554)ारा स्पष्ट किया गया है कि अ(cid:366)ैल, 2019 म(cid:336) पूरक पोषाहार तथा टी0एच0आर0 का वितरण ससमय किया गया । तकनीकी कारणवश आवंटन उपलब्ध नही ं रहने के कारण मा(cid:361) मई, 2019 म(cid:336) पूरक पोषाहार तथा टी0एच0आर0 का वितरण नही ं किया जा सका ।
समाज कल्याण विभाग (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप एवं आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि (cid:373)ी (cid:366)काश (cid:554)ारा आवंटन प्राप्त करने हेतु तत्परता नही ं बरतने जैसी मामूली भूल (cid:352)ई है। अतएव सम्यक विचारोपरांत (cid:373)ी लोक (cid:366)काश, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी-सह-बाल विकास प(cid:303)रयोजना पदाधिकारी, कुटुम्बा, औरं गाबाद (cid:554)ारा आवंटन पाप्त करने हेतु तत्परता नही ं बरतने के लिए इन्हें सचेष्ट किया जाता है।
उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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11 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(भा0)भा0-03/2019-598203--(cid:373)ी अरविन्द कु मार, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, स(cid:590)ौला (अतिरिक्त (cid:366)भार गोराडीह), भागलपुर सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, अस्थावॉं (नालन्दा) के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, भागलपुर के प(cid:361)ांक-271 दिनांक 21.02.2019 (cid:554)ारा प्राप्त आरोप प(cid:361) म(cid:336) धा(cid:303)रत आरोपों के आलोक म(cid:336) अधिसूचना संख्या-382647 दिनांक 09.02.2021 (cid:554)ारा असंंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड दिया गया । उक्त आदेश म(cid:336) (cid:366)खंड गोराडीह, (cid:356)ाम पंचायत मोहनपुर, वाड(cid:330)-12 म(cid:336) फज(cid:334) पंजी तैयार कर वाड(cid:330) क्रियान्वयन एवं (cid:366)बंधन समिति के सदस्य सचिव को हटाने हेतु ही लगातार तीन बैठक बुलाने जो मुख्यमंत्री नल-जल योजना से संबंधित संगत विभागीय माग(cid:330)दशि(cid:330)का का उल्लंघन है, का उल्लेख है ।7 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 अधिरोपित दंड के वि(cid:349)(cid:544) (cid:373)ी कु मार के (cid:554)ारा दिनांक-01.03.2021 को पुनवि(cid:330)लोकन अभ्यावेदन समपि(cid:330)त किया गया । विभाग (cid:554)ारा पुनवि(cid:330)लोकन अभ्यावेदन की समी(cid:407)ा की गयी । समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि इनके वि(cid:349)(cid:544) पा(cid:303)रत लघु दंड की अधिसूचना म(cid:336) स्वचछ भारत मिशन, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत (cid:366)खंड को ओ0डी0एफ0 करने म(cid:336) लापरवाही बरतने का भी उल्लेख किया गया है, जबकि (cid:373)ी कु मार के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, भागलपुर (cid:554)ारा गठित आरोप प(cid:361) म(cid:336) उक्त कथन कही ं भी अभिलि(cid:304)खत नही ं की गयी है । (cid:373)ी कु मार के अभ्यावेदन म(cid:336) यह भी उल्लेख किया गया है कि वाड(cid:330) सचिव को वष(cid:330) 2017 म(cid:336) हटाया गया है, जबकि ये अधिसूचित (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी के (cid:366)शि(cid:407)ण म(cid:336) जाने के कारण मई, 2018 से जुलाई 2018 के (cid:366)थमा(cid:544)(cid:330) तक (cid:366)भारी (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी के (cid:349)प म(cid:336) काय(cid:330)रत थे ।
(cid:373)ी कु मार के अभ्यावेदन की समी(cid:407)ा विभाग (cid:554)ारा की गयी । समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि य(cid:552)पि (cid:366)प(cid:361) 'क' म(cid:336) स्वच्छ भारत मिशन, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ओ0डी0एफ0 करने म(cid:336) लापरवाही बरतने संबंधी आरोप का उल्लेख नही ं है फिर भी इनके (cid:554)ारा कर्तव्यों के निव(cid:330)हन ढिलाई बरती गयी ।
अतएव अधिसूचना संख्या-382647 दिनांक 09.02.2021 (cid:554)ारा असंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने के दं ड को निरस्त करते (cid:352)ये (cid:373)ी अरविन्द कु मार के वि(cid:349)(cid:544) असंंचयात्मक (cid:366)भाव से एक वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड अधिरोपित किया जाता है ।
आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ी कु मार के चा(cid:303)र(cid:361)ी म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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11 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(भा0)भा0-01/2019-598195--(cid:373)ी सुनील कु मार, (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह- तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, पीरप(cid:339)ती, भागलपुर सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, समेली, कटिहार के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, भागलपुर के प(cid:361)ांक-09 (cid:366)0 दिनांक 23.03.2019 के (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त (cid:352)आ। आरोप प(cid:361) के आलोक म(cid:336) संकल्प (cid:466)ापांक-421736 दिनांक 26.04.2019 (cid:554)ारा निलंबित कर विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से जाँच (cid:366)तिवेदन प्राप्त होने के उपरांत अधिसूचना संख्या-270698 दिनांक 25.06.2020 (cid:554)ारा (cid:373)ी कु मार को निलंबन मुक्त कर चेतावनी का दं ड दिया गया।
उक्त दंड के वि(cid:349)(cid:544) (cid:373)ी कु मार (cid:554)ारा (cid:366)खंड काया(cid:330)लय, समेली, कटिहार के प(cid:361)ांक-817 दिनांक 29.04.2021 (cid:554)ारा पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। विभाग (cid:554)ारा पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन की समी(cid:407)ा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि (cid:373)ी कु मार के पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन म(cid:336) कोई भी नया तथ्य अंकित नही ं किया गया है।
अत: समी(cid:407)ोपरांत (cid:373)ी कु मार के अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते (cid:352)ये इस मामले को संचिकास्त किया जाता है।
उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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18 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(पटना) भोजपुर-07/2018-599926--(cid:373)ी वीर बहादुर पाठक, (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, कोईलवर, भोजपुर के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, भोजपुर के प(cid:361)ांक 925 दिनांक 05.11.2018 (cid:554)ारा बिना अवकाश स्वीकृत कराये मुख्यालय से अनाधिकृ त (cid:349)प से अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहना, वरीय पदाधिकारी से दू रभाष पर धृष्टता पूव(cid:330)क बात करना एवं पूछे गए स्पष्टीकरण का उत्तर नही ं देने का आरोप (cid:366)तिवेदित किया गया।
जिला पदाधिकारी (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप पर काया(cid:330)लय, (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, भोजपुर (आरा) के प(cid:361)ांक 183 दिनांक 03.02.2019 (cid:554)ारा (cid:373)ी वीर बहादुर पाठक का स्पष्टीकरण प्राप्त (cid:352)आ।8 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 (cid:373)ी पाठक के वि(cid:349)(cid:544) (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा विभाग (cid:554)ारा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-466296 दिनांक 16.06.2021 के (cid:554)ारा निदं न का दं ड अधिरोपित किया गया । उक्त दंड के वि(cid:349)(cid:544) (cid:373)ी पाठक के (cid:554)ारा पुनवि(cid:330)लोकन अभ्यावेदन समपि(cid:330)त किया गया है । (cid:373)ी पाठक से प्राप्त पुनवि(cid:330)लोकन आवेदन के अवलोकन से यह (cid:366)तीत होता है कि इसम(cid:336) कोई नया तथ्य नही ं है ।
अत: (cid:373)ी पाठक से प्राप्त पुनवि(cid:330)लोकन आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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27 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(सा0)गो0-03/2019-611293--(cid:373)ी अरविन्द कु मार गुप्ता, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)भारी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बैकुण्ठपुर, गोपालगंज के वि(cid:349)(cid:544) जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के प(cid:361)ांक-636/स्था0 दिनांक 09.09.2019 (cid:554)ारा आरोप प(cid:361) प्राप्त (cid:352)आ। उक्त आरोप प(cid:361) म(cid:336) वणि(cid:330)त आरोपों पर (cid:373)ी गुप्ता (cid:554)ारा समपि(cid:330)त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त विभागीय अधिसूचना (cid:466)ापांक 466142 दिनांक 16.06.2021 (cid:554)ारा 'निंदन' का दंड अधिरोपित किया गया है।
उक्त दंड के वि(cid:349)(cid:544) (cid:373)ी गुप्ता (cid:554)ारा (cid:366)खंड काया(cid:330)लय, बैकुण्ठपुर, गोपालगंज के प(cid:361)ांक-820 दिनांक 22.06.2021 से पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया । विभाग (cid:554)ारा पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन की समी(cid:407)ा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि (cid:373)ी गुप्ता के पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन म(cid:336) कोई भी नया तथ्य अंकित नही ं किया गया है । अत: समी(cid:407)ोपरांत (cid:373)ी गुप्ता के पुनवि(cid:330)चार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते (cid:352)ये इस मामले को संचिकास्त किया जाता है ।
उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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27 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(द0) मधु0-03/2021-611290--(cid:373)ीमती निवेदिता, (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, राजनगर, मधुबनी के वि(cid:349)(cid:544) विशेष सचिव, समाज कल्याण विभाग के प(cid:361)ांक-622 दिनांक 09.02.2021 (cid:554)ारा आरोप प्राप्त है । आरोप म(cid:336) लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के अंतग(cid:330)त दायर प(cid:303)रवाद की सुनवाइयों म(cid:336) अनुप(cid:304)(cid:830)थत रहने का आरोप (cid:366)तिवेदित है।
उक्त (cid:366)तिवेदित आरोप पर (cid:373)ीमती निवेदिता के प(cid:361)ांक-1482 दिनांक 28.08.2021 से स्पष्टीकरण प्राप्त है जिसम(cid:336) उनके (cid:554)ारा स्पष्ट किया गया है कि विधि व्यवस्था संधारण एवं अन्य काय(cid:344) म(cid:336) व्यस्त रहने के कारण अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण काया(cid:330)लय म(cid:336) उप(cid:304)(cid:830)थत नही ं हो सके ।
(cid:373)ीमती निवेदिता के वि(cid:349)(cid:544) समाज कल्याण विभाग (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोप एवं स्पष्टीकरण की समी(cid:407)ा विभाग (cid:554)ारा की गयी। समी(cid:407)ोपरांत पाया गया कि इनका सतही स्पष्टीकरण स्वीकार करने योग्य नही ं है। अत: (cid:373)ीमती निवेदिता, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजनगर, मधुबनी के वि(cid:349)(cid:544) 'चेतावनी' का दं ड अधिरोपित किया जाता है।
आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ीमती निवेदिता की चा(cid:303)र(cid:361)ी म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
राज्यपाल ेि आदे से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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27 अक्तूबर 2021
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(द0)मधु0-06/2018-611289--(cid:373)ी अहमर अब्दाली, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिस्फी, मधुबनी के वि(cid:349)(cid:544) मुख्य काय(cid:330)पालक पदाधिकारी-सह-मिशन निदेशक जीविका के प(cid:361)ांक-9 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 BRLPS-LSBA/Admn/16/18/337 दिनांक 23.07.2018 (cid:554)ारा जियो टैगिंग म(cid:336) शिथिलता का आरोप (cid:366)तिवेदित करते (cid:352)ये कार(cid:330) वाई की अनुशंसा की गयी।
उक्त (cid:366)तिवेदित आरोपों पर (cid:373)ी अब्दाली से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया । प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय प(cid:361)ांक-435310 दिनांक 31.07.2019 के (cid:554)ारा मुख्य काय(cid:330)पालक पदाधिकारी-सह-मिशन निदे शक जीविका से मंतव्य की मांग की गयी । जीविका के प(cid:361)ांक- BRLPS-LSBA/Admn/16/18/1101 दिनांक 15.02.2020 से मंतव्य प्राप्त (cid:352)आ जिसम(cid:336) (cid:373)ी अब्दाली को सख्त चेतावनी निग(cid:330)त करते (cid:352)ये दिनांक 29.02.2020 तक शत (cid:366)तिशत जियो टैगिंग का निदेश देने एवं उक्त तिथि तक अपे(िcid:407)त (cid:366)गति नही ं किये जाने के उपरांत पुन: स्पष्टीकरण प्राप्त करने का मंतव्य (cid:366)तिवेदित किया गया। तदालोक म(cid:336) विभागीय (cid:466)ापांक-460978 दिनांक 24.03.2020 (cid:554)ारा (cid:373)ी अब्दाली को तत्संबंधी निदेश देते (cid:352)ए उनसे अनुपालन (cid:366)तिवेदन की मांग की गयी ।
(cid:373)ी अब्दाली से काया(cid:330)लय (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिस्फी, मधुबनी के प(cid:361)ांक-305 दिनांक 19.01.2021 (cid:554)ारा अनुपालन (cid:366)तिवेदन प्राप्त है । उक्त (cid:366)तिवेदन के समी(cid:407)ोपरांत यह पाया गया कि 185 जीयो टैगिंग लंबित है एवं शेष 4303 का शौचालय निमि(cid:330)त नही ं है। स्पष्टत: शत-(cid:366)तिशत लक्ष्य की (cid:366)ा(cid:304)(cid:593) नही ं की गयी। अतएव इनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नही ं है ।
अतएव सम्यक विचारोपरांत (cid:373)ी अहमर अब्दाली, तत्कालीन (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, बिस्फी, मधुबनी को जियो टै गिंग म(cid:336) निधा(cid:330)(cid:303)रत लक्ष्य की (cid:366)ा(cid:304)(cid:593) म(cid:336) शिथिलता बरतने के लिए 'असंचयात्मक (cid:366)भाव से दो वेतन वृ(cid:304)(cid:544) अव(cid:349)(cid:544) करने का दंड' अधिरोपित किया जाता है।
आदेश दिया जाता है कि (cid:373)ी अहमर अब्दाली के चा(cid:303)र(cid:361)ी पु(cid:304)(cid:721)का म(cid:336) इस दं ड की (cid:366)वि(िcid:700) की जाय। उक्त आदेश पर स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदे:-आदे कदया जाता है कि अकधसूचना ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
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पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
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अधिसूचना
18 अक्तूबर 2021
सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3044/प॰व॰--श्री अनिल कुमार प्रसाद, भा॰व॰से॰, (BH:88), को प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-16) में प्रोन्नति के फलस्वरूप उनके द्वारा वर्त्तमान धारित पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, कार्य नियोजना, अनुसंधान एवं विस्तार, बिहार, पटना को उनके पदस्थापन काल तक के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-16) में उत्क्रमित एवं समकक्ष घोषित करते हुए उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक, कार्य नियोजना, अनुसंधान एवं विस्तार, बिहार, पटना के उत्क्रमित पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। श्री अनिल कुमार प्रसाद, भा॰व॰से॰, प्रबंध निदेशक, बिहार वानिकी विकास निगम लि., पटना, प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य वन विकास निगम लि., पटना एवं उसके अनुशंगी इकाई के अतिरिक्त प्रभार में रहेगें।
सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3045/प॰व॰--श्री सी.पी. खण्डूजा, भा॰व॰से॰, (BH:89), को प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-16) में प्रोन्नति के फलस्वरूप उनके द्वारा वर्त्तमान धारित पद निदेशक, सामाजिक वानिकी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को उनके पदस्थापन काल तक के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-16) में उत्क्रमित एवं समकक्ष घोषित करते हुए उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, सामाजिक वानिकी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के उत्क्रमित पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-3046/प॰व॰--श्री अरविन्दर सिंह, भा॰व॰से॰, (BH:95), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा)-सह-नोडल पदाधिकारी (वन संरक्षण), बिहार, पटना, अतिरिक्त प्रभार - मुख्य वन संरक्षक (आई.टी.), बिहार, पटना एवं मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना अपने कार्याें के अतिरिक्त अगले आदेश तक मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य कैम्पा प्राधिकरण, बिहार के अतिरिक्त प्रभार में रहेगें।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।10 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
8 अक्तूबर 2021
सं0 1/स्था0 (2) 01/ 2020-2811--वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-7566 दिनांक 14.07.2010 एवं समय-समय पर निर्गत अन्य संकल्पों के संदर्भ में दिनांक 10.08.2021 को सम्पन्न विभागीय स्क्रीनिंग कमिटी की अनुषंसा एवं तदोपरांत सक्षम प्राधिकार से अनुमोदनोपरांत निम्नवत् बिहार पशु चिकित्सा सेवा के पदाधिकारियाें को 20 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने के पश्चात उनके द्वितीय रूपांतरित सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन का लाभ वेतन बैण्ड 3 ग्रेड वेतन 7600/- रूपये में निम्नवत सूची के क्रमांक-4 में अंकित तिथि से प्रदान किये जाने की स्वीकृति दी जाती है :-
| क्र0 | पदाधिकारी का नाम | जन्म तिथि/नियुक्ति की तिथि | द्वितीय एम0ए0सी0पी0 की देय तिथि (वेतन बैण्ड 3 गे्रड वेतन 7600/-) |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | डा0 रामचन्द्र कुमार रवि भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, गढ़ियाबलुआ, पूर्णिया सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, सोनवर्षा, सहरसा | 21.03.1970 02.05.1995 | 02.05.2015 |
| 2 | डा0 राजेश कुमार सहायक कुक्कुट पदाधिकारी, खगड़िया सम्प्रति भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, दलसिंगसराय, समस्तीपुर | 05.11.1969 24.05.1995 | 24.05.2015 |
| 3 | डा0 कुन्दन कुमार मिश्रा भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, चकाई, जमुई सम्प्रति पशु शल्य चिकित्सक, कटिहार | 20.05.1967 22.05.1992 | 22.05.2012 |
| 4 | डा0 सूर्य नारायण सिंह पशुपालन पदाधिकारी (प0वि0), वृ0प0वि0परि0 (क्षे0स्तर), छपरा सम्प्रति जिला पशुपालन पदाधिकारी, सारण, छपरा | 04.06.1965 05.04.1991 | 05.04.2011 |
| 5 | डा0 सत्य नारायण यादव भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति परियोजना पदाधिकारी, फ्रोजेन सिमेन बैंक, पूर्णिया | 02.06.1965 04.04.1991 | 04.04.2011 |
2. उपर्युक्त पदाधिकारी के रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन से संबंधित वेतन पूर्जा महालेखाकार/वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना द्वारा विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्णता अथवा विमुक्ति प्रदान किये जाने की स्थिति संपुष्ट करने के बाद विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्ण होने अथवा विमुक्ति की तिथि से ही वित्तीय उन्नयन का आर्थिक लाभ अनुमान्य करते हुए निर्गत किया जाएगा।
3. उपर्युक्त एम0ए0सी0पी0 का लाभ प्रदान किये जाने के निमित भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि (यथा वेतनमान, ग्रेड पे, पे बैण्ड एवं देय तिथि) पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारियों को प्रदान की गयी वित्तीय योजना के लाभ से संबंधित आदेष को रद्द/संषोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हे अधिक भुगतान की गयी राषि की वसूली एकमुष्त कर ली जायेगी। सेवानिवृति की स्थिति में यह वसूली देय पावनाओं से की जायेगी।11 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 4. उपर्युक्त वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप संबंधित पदाधिकारी के वेतन का निर्धारण वित्त विभागीय संकल्प में निहित प्रावधान के आलोक में किया जायेगा तथा मौलिक नियमावली के नियम 22 (1) (ए) (1) के आलोक में वेतन निर्धारण का विकल्प की तिथि, अधिसूचना निर्गत की तिथि से एक माह में यदि चाहें तो देंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशवेन्द्र कुमार, विशेष सचिव।
-------- 8 अक्तूबर 2021 सं0 1/स्था0 (2) 01/ 2020-2813--वित्त विभाग की अधिसूचना संख्या-4685 वि0 (2) दिनांक-25.06.2003 तथा अधिसूचना संख्या-1802 दिनांक-23.03.2006 के संदर्भ मंंें दिनांक 10.08.2021 को सम्पन्न विभागीय स्क्रीनिंग कमिटी की अनुषंसा एवं तदोपरांत सक्षम प्राधिकार से अनुमोदनोपरांत निम्नांकित बिहार पशु चिकित्सा सेवा के पदाधिकारियों को 12 वर्ष एवं 24 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने के पश्चात उनके प्रथम सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन का लाभ वेतनमान 10000-15200/- रूपये एवं द्वितीय सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन का लाभ वेतनमान 12000-16500/- रूपये में निम्नवत सूची के क्रमांक-4 एवं 5 में अंकित तिथि से प्रदान किये जाने की स्वीकृति दी जाती है :-
| क्र0 | पदाधिकारी का नाम | जन्म तिथि/नियुक्ति की तिथि | प्रथम ए0सी0पी0 की देय तिथि (वेतनमान 10000-15200/-) | द्वितीय ए0सी0पी0 की देय तिथि (वेतनमान 12000-16500/-) |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1 | डा0 रमेश प्रसाद सिंह सेवानिवृत पशुपालन पदाधिकारी, ल0प0वि0परि0, कटिहार | 03.02.1946 05.03.1975 | 09.08.1999 | 09.08.1999 |
| 2 | डा0 उपेन्द्र नारायण यादव सेवानिवृत जिला पशुपालन पदाधिकारी, प0 चम्पारण, बेतिया | 06.06.1957 13.04.1983 | 09.08.1999 | 13.04.2007 |
| 3 | स्व0 डा0 एहसान अहमद सिद्दिकी, भूतपूर्व सहायक निदेशक, पशुपालन, दरभंगा क्षेत्र, दरभंगा | 07.10.1946 18.08.1973 | 09.08.1999 | 09.08.1999 |
2. उपर्युक्त पदाधिकारियों को सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन से संबंधित वेतन पूर्जा महालेखाकार/वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना द्वारा विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्णता अथवा विमुक्ति प्रदान किये जाने की स्थिति संपुष्ट करने के बाद विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्ण होने अथवा विमुक्ति की तिथि से ही वित्तीय उन्नयन का आर्थिक लाभ अनुमान्य करते हुए निर्गत किया जाएगा। 3. उपर्युक्त ए0सी0पी0 का लाभ प्रदान किये जाने के निमित भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि (यथा वेतनमान, ग्रेड पे, पे बैण्ड एवं देय तिथि) पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदान की गयी वित्तीय योजना के लाभ से संबंधित आदेष को रद्द/संषोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हे अधिक भुगतान की गयी राषि की वसूली एकमुष्त कर ली जायेगी। सेवानिवृति की स्थिति में यह वसूली देय पावनाओं से की जायेगी। 4. उपर्युक्त वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप संबंधित पदाधिकारी के वेतन का निर्धारण वित्त विभागीय संकल्प में निहित प्रावधान के आलोक में किया जायेगा तथा मौलिक नियमावली के नियम 22 (1) (ए) (1) के आलोक में वेतन निर्धारण का विकल्प की तिथि, अधिसूचना निर्गत की तिथि से एक माह में यदि चाहें तो देंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशवेन्द्र कुमार, विशेष सचिव।
-------- 8 अक्तूबर 2021 सं0 1/स्था0 (2) 01/ 2020-2815--वित्त विभाग की अधिसूचना संख्या-4685 वि0 (2) दिनांक 25.06.2003 तथा अधिसूचना संख्या-1802 दिनांक-23.03.2006 के संदर्भ मंंें दिनांक-10.08.2021 को सम्पन्न विभागीय स्क्रीनिंग कमिटी की अनुषंसा एवं तदोपरांत सक्षम प्राधिकार से अनुमोदनोपरांत निम्नांकित बिहार पशु चिकित्सा सेवा के पदाधिकारियों को 12 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने के पश्चात उनके प्रथम सुनिष्चित वित्तीय उन्नयन का लाभ वेतनमान 10000-15200/- रूपये मे निम्नवत सूची के क्रमांक-4 में अंकित तिथि से प्रदान किये जाने की स्वीकृति दी जाती है :-
12 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021| क्र0 | पदाधिकारी का नाम | जन्म तिथि/नियुक्ति की तिथि | प्रथम ए0सी0पी0 की देय तिथि (वेतनमान 10000-15200/-) |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1. | स्व0 डा0 नरेन्द्र कुमार मिश्र सेवानिवृत भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, बिक्रमगंज, रोहतास | 08.01.1943 01.09.1965 | 09.08.1999 |
| 2. | स्व0 डा0 शत्रुध्न प्रसाद सिंह सेवानिवृत भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, चिलबिला, रोहतास | 27.07.1953 20.04.1979 | 09.08.1999 |
2. उपर्युक्त पदाधिकारियों को सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन से संबंधित वेतन पूर्जा महालेखाकार/वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना द्वारा विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्णता अथवा विमुक्ति प्रदान किये जाने की स्थिति संपुष्ट करने के बाद विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्ण होने अथवा विमुक्ति की तिथि से ही वित्तीय उन्नयन का आर्थिक लाभ अनुमान्य करते हुए निर्गत किया जाएगा। 3. उपर्युक्त ए0सी0पी0 का लाभ प्रदान किये जाने के निमित भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि (यथा वेतनमान, ग्रेड पे, पे बैण्ड एवं देय तिथि) पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदान की गयी वित्तीय योजना के लाभ से संबंधित आदेष को रद्द/संषोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हे अधिक भुगतान की गयी राषि की वसूली एकमुष्त कर ली जायेगी। सेवानिवृति की स्थिति में यह वसूली देय पावनाओं से की जायेगी। 4. उपर्युक्त वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप संबंधित पदाधिकारी के वेतन का निर्धारण वित्त विभागीय संकल्प में निहित प्रावधान के आलोक में किया जायेगा तथा मौलिक नियमावली के नियम 22 (1) (ए) (1) के आलोक में वेतन निर्धारण का विकल्प की तिथि, अधिसूचना निर्गत की तिथि से एक माह में यदि चाहें तो देंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशवेन्द्र कुमार, विशेष सचिव।
-------- 8 अक्तूबर 2021 सं0 1/स्था0 (2) 01/ 2020-2817--वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-7566 दिनांक 14.07.2010 एवं समय-समय पर निर्गत अन्य संकल्पों के संदर्भ में दिनांक 10.08.2021 को सम्पन्न विभागीय स्क्रीनिंग कमिटी की अनुशंसा एवं तदोपरांत सक्षम प्राधिकार से अनुमोदनोपरांत निम्नवत् बिहार पशु चिकित्सा सेवा के पदाधिकारी को 10 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने के पश्चात उनके प्रथम रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन का लाभ वेतन बैण्ड 3 ग्रेड वेतन 6600/- रूपये में निम्नवत सूची के क्रमांक-4 में अंकित तिथि से प्रदान किये जाने की स्वीकृति दी जाती है :-
| क्र0 | पदाधिकारी का नाम | जन्म तिथि/ नियुक्ति की तिथि | प्रथम एम0ए0सी0पी0 की देय तिथि (वेतन बैण्ड 3 गे्रड वेतन 6600/-) |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | डा0 एजाज कासिम सेवानिवृत अवर प ्रमंडल पशुपालन पदााधिकारी, शेखपुरा | 20.07.1960 11.10.1983 | 06.12.2017 |
2. उपर्युक्त पदाधिकारी के रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन से संबंधित वेतन पूर्जा महालेखाकार/वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना द्वारा विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्णता अथवा विमुक्ति प्रदान किये जाने की स्थिति संपुष्ट करने के बाद विभागीय परीक्षा अंतिम रूप से उत्तीर्ण होने अथवा विमुक्ति की तिथि से ही वित्तीय उन्नयन का आर्थिक लाभ अनुमान्य करते हुए निर्गत किया जाएगा। 3. उपर्युक्त एम0ए0सी0पी0 का लाभ प्रदान किये जाने के निमित भविष्य में किसी प्रकार की त्रुटि (यथा वेतनमान, ग्रेड पे, पे बैण्ड एवं देय तिथि) पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारियों को प्रदान की गयी वित्तीय योजना के लाभ से संबंधित आदेष को रद्द/संषोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हे अधिक भुगतान की गयी राषि की वसूली एकमुष्त कर ली जायेगी। सेवानिवृति की स्थिति में यह वसूली देय पावनाओं से की जायेगी। 4. उपर्युक्त वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप संबंधित पदाधिकारी के वेतन का निर्धारण वित्त विभागीय संकल्प में निहित प्रावधान के आलोक में किया जायेगा तथा मौलिक नियमावली के नियम 22 (1) (ए) (1) के आलोक में वेतन निर्धारण का विकल्प की तिथि, अधिसूचना निर्गत की तिथि से एक माह में यदि चाहें तो देंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशवेन्द्र कुमार, विशेष सचिव।13 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
सहकारिता विभाग
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अधिसूचनाएं
11 अक्तूबर 2021
सं0 01/रा०स्था०स्थाना०-40/2021 सह०-2834--श्री रामाश्रय राम, जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी (अतिरिक्त प्रभार-महाप्रबंधक, आई॰सी॰डी॰पी॰, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी/ सहायक निबंधक, स॰स॰, मोतिहारी/ सिकरहना) को अपने कार्यों के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, तिरहुत सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ लि॰, मोतिहारी का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है।
2. श्री अनिल कुमार गुप्ता, प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, समस्तीपुर (अतिरिक्त प्रभार-जिला सहकारिता पदाधिकारी, समस्तीपुर/सहायक निबंधक, स॰स॰, समस्तीपुर/दलसिंह सराय/रोसड़ा/पटोरी/व्याख्याता, सहकारी प्रशिक्षण केन्द्र, पूसा, समस्तीपुर) को अपने कार्यों के अतिरिक्त प्राचार्य, सहकारी प्रशिक्षण केन्द्र, पूसा, समस्तीपुर का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है। 3. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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11 अक्तूबर 2021
सं0 01/रा०स्था०(निजी)-59/2020 सह०/2832--वित्त (वै॰दा॰नि॰को॰) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1562(22) दिनांक 30.09.2021 के आलोक में मो॰ इम्तियाज अहमद, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, स॰स॰, नालंदा को अपने पुत्री को विवाह हेतु बिहार सेवा संहिता के नियम 227, 230 एवं 248 में निहित प्रावधानानुसार दिनांक-06.10.2021 से 27.10.2021 तक कुल 22 (बाईस) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. उक्त स्वीकृति के पश्चात् 278 (दो सौ अठहत्तर) दिनों का उपार्जित अवकाश शेष रहेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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30 सितम्बर 2021
सं0 01/रा॰स्था॰स्थाना॰-40/2021 सह॰-2707--श्री रामाश्रय राम, जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी (अतिरिक्त प्रभार- सहायक निबंधक,स॰स॰, मोतिहारी/सिकरहना) को अपने कार्यों के अतिरिक्त महाप्रबंधक, आई॰सी॰डी॰पी॰, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है।
2. श्री ललन कुमार शर्मा, जिला सहकारिता पदाधिकारी, बेगूसराय (अतिरिक्त प्रभार-प्रबंध निदेशक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, बेगूसराय/सहायक निबंधक, स॰स॰, बेगूसराय) को अपने कार्यों के अतिरिक्त महाप्रबंधक, आई॰सी॰डी॰पी॰, बेगूसराय का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है।
3. श्री रंजीत कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्णियाँ (अतिरिक्त प्रभार-सहायक निबंधक, स॰स॰, पूर्णियाँ) को अपने कार्यों के अतिरिक्त महाप्रबंधक, आई॰सी॰डी॰पी॰, पूर्णियाँ का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से दिया जाता है। 4 . इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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16 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०एम०ए०सी०पी०-30/2021 सह०-2550--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना 2010, के प्रावधानों के तहत् बिहार सहकारिता प्रशासनिक सेवा सवंर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-12 से लेवल-13 में तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती है :-
| क्र०सं० | पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/मूल कोटि वरीयता | पदस्थापन स्थान/कार्यालय | तृतीय वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | मो0 मुजीबुर्र रहमान, उप निबंधक, सहयोग समितियाँ 07/18 | संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, कार्यालय निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना। | 12.09.2019 |
| 2 | श्री जवाहर प्रसाद, उप निबंधक, सहयोग समितियाँ 08/18 | उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर। | 27.10.2020 |
| 3 | श्री विरेन्द्र ठाकुर, उप निबंधक, सहयोग समितियाँ 10/18 | उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर। | 27.10.2020 |
| 4 | श्री अखिलेश कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 13/18 | प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि०, पटना। | 01.11.2020 |
| 5 | श्री विनोद, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 15/18 | सचिव, बिहार स्वाबलम्बी सहकारी समिति अधिकरण, पटना। | 14.11.2020 |
| 6 | श्री कुमार शांत रक्षित, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 16/18 | विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार, पटना। | 22.02.2021 |
| 7 | श्री बबन मिश्र, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 17/18 | तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी, भोजपुर, आरा सम्प्रति सेवानिवृत्त। | 30.10.2020 |
| 8 | श्री शशि शेखर सिन्हा, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 18/18 | उप निबंधक, सहयोग समितियाँ (ईख), बिहार। | 08.11.2020 |
2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना नियमावली 2010, के नियम परिशिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेशों के अनुरूप किया जायेगा। 3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाओं में पदस्थापन अवधि का एम०ए०सी०पी० लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राशि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा। 4. रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संशोधन की आवश्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संशोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। 5. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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8 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०एम०ए०सी०पी०-30/2021 सह०-2474--विभागीय अधिसूचना सं०-1905 दिनांक 30.06.2020 द्वारा बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना 2010, के प्रावधानों के तहत् श्री सैयद मशरूख आलम, तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी, सहरसा सम्प्रति जिला सहकारिता पदाधिकारी, सीतामढ़ी को दिनांक 18.12.2015 के प्रभाव से प्रदत्त द्वितीय रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन की तिथि को संशोधित करते हुए दिनांक 01.07.2019 के प्रभाव से द्वितीय वित्तीय उन्नयन का लाभ प्रदान किया जाता है। 2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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8 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०एम०ए०सी०पी०-30/2021 सह०-2473--विभागीय अधिसूचना सं०-2097 दिनांक 27.08.2020 द्वारा बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना 2010, के प्रावधानों के तहत् श्री चन्द्रशेखर सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि०, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त को दिनांक 16.08.2019 के प्रभाव से प्रदत्त तृतीय रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन को तत्कालीन प्रभाव से निरस्त किया जाता है। 2. इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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8 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०एम०ए०सी०पी०-30/2021 सह०-2472--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना 2010, के प्रावधानों के तहत् बिहार सहकारिता प्रशासनिक सेवा सवंर्ग के निम्न पदाधिकारियों को15 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से पी0बी0-3, ग्रेड वेतन-6600/- (पुनरीक्षित लेवल-11) से पी0बी0-3, ग्रेड वेतन-7600/- (पुनरीक्षित लेवल-12) में द्वितीय रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती है :-
| क्र०सं० | पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/मूल कोटि वरीयता | पदस्थापन स्थान/कार्यालय | द्वितीय वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री दिनेश कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 02/18 | उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना। | 01.04.2010 |
| 2 | श्री अखिलेश कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 13/18 | प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य सहकारी बैंक लि०, पटना। | 01.11.2010 |
| 3 | श्री प्रभाकर कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 45/18 | जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर। | 01.04.2016 |
2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना नियमावली 2010, के नियम परिशिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेशों के अनुरूप किया जायेगा। 3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाओं में पदस्थापन अवधि का एम०ए०सी०पी० लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राशि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा। 4. रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संशोधन की आवश्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संशोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। 5. इसमें माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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8 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०एम०ए०सी०पी०-30/2021 सह०-2471--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना 2010, के प्रावधानों के तहत् बिहार सहकारिता प्रशासनिक सेवा सवंर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-9 से लेवल-11 में प्रथम रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती है :-
| क्र०सं० | पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/मूल कोटि वरीयता | पदस्थापन स्थान/कार्यालय | प्रथम वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री सुभाष कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 50/18 | सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ (अ॰र॰), कार्यालय निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना। | 01.04.2021 |
| 2 | श्री मिथिलेश कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ 66/18 | जिला सहकारिता पदाधिकारी, वैशाली, हाजीपुर। | 25.03.2021 |
2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना नियमावली 2010, के नियम परिशिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेशों के अनुरूप किया जायेगा। 3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाओं में पदस्थापन अवधि का एम०ए०सी०पी० लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राशि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा। 4. रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संशोधन की आवश्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संशोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। 5. इसमें माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।16 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
8 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०(पदस्थापन)-39/2021 सह०/2470--श्री रविन्द्र कुमार लाभ, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर को अगले आदेश तक अपने कार्यों के अतिरिक्त जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, मधुबनी का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।
2. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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8 सितम्बर 2021
सं0 01/रा०स्था०एम०ए०सी०पी०-30/2021 सह०-2468--बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त्त 'रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना 2010, के प्रावधानों के तहत् बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा सवंर्ग के निम्न पदाधिकारियों को स्तम्भ-4 में अंकित तिथि से लेवल-9 से लेवल-11 में प्रथम रूपांतरित सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाती है :- क्र०सं० पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/मूल कोटि
| क्र०सं० | पदाधिकारी का नाम/ पदनाम/मूल कोटि वरीयता | पदस्थापन स्थान/कार्यालय | प्रथम वित्तीय उन्नयन अनुमान्यता की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री मुकेश कुमार, उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ 03/15 | उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, सारण प्रमंडल, छपरा। | 01.01.2016 |
| 2 | श्री अरविन्द कुमार अजय, उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ 04/15 | उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, कोशी एवं दरभंगा प्रमंडल, सहरसा। | 01.01.2016 |
| 3 | श्री सुभाष चन्द्र वर्मा, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ 10/15 | जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, गया। | 09.08.2020 |
| 4 | श्री राजेश कुमार, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ 11/15 | जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी। | 07.08.2020 |
2. वित्तीय उन्नयन के फलस्वरूप पदाधिकारियों का वेतन निर्धारण रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना नियमावली 2010, के नियम परिशिष्ट-I के प्रावधानों एवं समय-समय पर इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा निर्गत अनुदेशों के अनुरूप किया जायेगा। 3. गैर संवर्गीय/बाह्य सेवा शर्त्तों/सहकारी संस्थाओं में पदस्थापन अवधि का एम०ए०सी०पी० लाभ स्वीकृति के फलस्वरूप बकाया राशि का भुगतान संबंधित संस्थाओं द्वारा किया जायेगा। 4. रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना का लाभ स्वीकृति में किसी कारणों से भविष्य में संशोधन की आवश्यकता होने पर संबंधित पदाधिकारी को स्वीकृत लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संशोधित किया जा सकेगा तथा उन्हें भुगतान की गयी अधिक राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। 5. इसमें माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सियाराम सिंह, उप-सचिव।
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बिहार विधान सभा सचिवालय
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अधिसूचनाएं
6 अक्तूबर 2021
सं0 1स्था॰-214/2021-1996/वि॰स॰।--बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 64वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार विधान सभा सचिवालय में प्रशाखा पदाधिकारी के पद के लिए अनुशंसित निम्नांकित अभ्यर्थियों को अधोलिखित शर्त्तो के अधीन पे मैट्रिक्स लेवल-09 में राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अनुमान्य भत्तों के साथ प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर औपबंधिक रूप से नियुक्त किया जाता हैः-
| क्रम सं॰ | अनुक्रमांक | अभ्यर्थी का नाम | पिता का नाम एवं पता | जन्म तिथि | मेधा क्रमांक | आयोग द्वारा आवंटित आरक्षण रोस्टर |
| 1. | 296838 | सीतेश कुमार झा | श्री विजय कुमार झा ग्रामपोस्ट-नेऊरी, थाना-बिरौल, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-847103 | 15.05.1993 | 44 | 01 |
| 2. | 448726 | राजीव रंजन | श्री राम नरेश कुमार सिन्हा द्वारा-आर.एन.के. सिन्हा, ग्रामपोस्ट-ओईयाव, थाना-अस्थावां, जिला-नालंदा, बिहार, पिन-803103 | 15.01.1995 | 46 | 01 |
| 3. | 338950 | पूर्णेंदु शेखर दास | श्री बिनोद बिहारी दास रोड नं॰-1, पंचशील नगर, पण्डरा, रातू रोड, पोस्ट-हेहल, राँची, झारखण्ड, पिन-834005 | 02.09.1991 | 52 | 01 |
| 4. | 355292 | अमितेष रंजन | श्री अंजनी कुमार श्रीवास्तव सी/3, लाल तारा भवन, ए.जी. कॉलोनी, शास्त्रीनगर, पटना, बिहार, पिन-800025 | 08.08.1984 | 57 | 01 |
| 5. | 490030 | चंदन कुमार | श्री राम उदय चौधरी मुहल्ला-सर्वोदय नगर, महंत कॉलेज के पीछे, वार्ड स ख्या-40, ं पोस्ट-मिर्जापुर बंद्वार, जिला-बेगूसराय, बिहार, पिऩ-851129 | 11.02.1988 | 62 | 01 |
| 6. | 206958 | सुशील कुमार | श्री राम अवतार आराजी नं॰-202, पंचवटी विनायकपुर, निकट झण्डा चौराहा, पोस्ट-नवीन नगर, थाना-कल्याणपुर, तहसील-कानपुर सदर, कानपुर नगर, उत्तरप्रदेश, पिन-208025 | 11.09.1990 | 77 | 01 |
| 7. | 550303 | सुन्दरम आनंद | श्री सर्वदानंद कुमार ग्राम-ध्रुवगंज, पोस्ट-खरीक बाजार, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-853202 | 16.04.1986 | 80 | 01 |
| 8. | 142232 | सुधांशु राय | श्री शैलेन्द्र कुमार राय लोहदी, महावीर मार्ग, हनुमान मंदिर के नजदीक, मिर्जापुर, उत्तरप्रदेश, पिन-231001 | 06.10.1994 | 87 | 01 |
| 9. | 549017 | शिल्पा यादव | श्री रामानंद यादव मकान नं॰-48/56-ए, गली नं॰-13, नई बस्ती, आनंन्द पर्वत, नई दिल्ली, पिन-110005 | 10.01.1991 | 88 | 01 |
| 10. | 180081 कौशलेन्द्र कुमार | श्री नरेश प्रसाद ग्राम-नवाबचक, पोस्ट-गुरूआ, थाना-गुरूआ, जिला-गया, बिहार, पिन-824205 | 12.07.1995 | 91 | 04 | |
| 11. | 272124 | हर्ष प्रताप सिंह | श्री प्रताप जगदीश सिंह पिता-प्रताप जगदीश सिंह, ग्राम-पुरैनी बाजार, ब्लॉकपोस्टथाना-पुरैनी, उदा किशुनगंज मधेपुरा, बिहार, पिन-852116 | 31.01.1996 | 119 | 05 |
| 12. | 534034 कनुप्रिया मिश्रा | श्री अरूण कुमार 295के.ए., वार्ड न ॰-23, ं ब लबनवा, े मोतिहारी, प र्वी ू चम्पारण, बिहार, पिन-845401 | 14.08.1992 | 136 | 01 | |
| 13. | 221605 | मीमाँशा चौधरी | श्री धर्मनाथ चौधरी द्वारा-धर्मनाथ चौधरी, 108, गाँधी चौक, ग्राम-खुटौना, जिला-मधुबनी, बिहार, पिन-847227 | 05.03.1995 | 143 | 01 |
| 14. | 228982 जयंती | श्री सुबोध कुमार मोहल्ला-बेला शंकर, वार्ड नं-03, पोस्ट-लालबाघ, थाना-ल.ना.मि.वि.वि. थाना, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-846004 | 21.03.1996 | 155 | 01 | |
| 15. | 314341 | शशि भूषण कुमार | श्री राज किशोर साह ग्रामपोस्ट-शुभंकरपुर, थाना-नगर, जिला-दरभंगा, बिहार, पिन-846006 | 26.01.1992 | 180 | 04 |
| 16. | 243321 | शिवांशु आनंद | श्री कैलाश प्रसाद शर्मा ग्राम-मसदी (पूर्वी),पोस्टथाना-सुल्तानगंज, जिला-भागलपुर, बिहार, पिन-813213 | 01.03.1983 | 188 | 04 |
| 17. | 131776 | नेहा भारती | श्री गजेन्द्र मोहन प्रसाद ग्रामपोस्ट-बेला मच्छपकौनी, वार्ड नं॰-05, थाना-बेला, प ्रखंड-परिहार, अनुमंडल-सीतामढी सदर, जिला-सीतामढ़ी, बिहार, पिन-843324 | 11.01.1994 | 205 | 05 |
| 18. | 405479 रूशदा रहमान | श्री अतुर रहमान रौयल एलेक्ट्रीकल्स, मौरया घाट, लाल मकान, गया, बिहार, पिन-823001 | 05.01.1991 | 229 | 06 | |
| 19. | 350628 | प्रज्ञाग्नि | श्री राम चंद्र महतो पिता-राम च द्र ं महतो (अधिवक्ता), मंसरी तल्ले, मुंगेर, बिहार, पिन-811201 | 25.12.1991 | 318 | 05(VI) |
| 20. | 504164 | शिरीष कुमार | श्री विश्वनाथ बैठा ग्राम-गौसपुर, चकमजाहिद, थाना-महुआ, जिला-वैशाली, बिहार, पिन-844122 | 15.10.1988 | 748 | 02 |
| 21. | 300850 | सौरभ प्रकाश | श्री ओम प्रकाश मंडल पिता-ओम प्रकाश मंडल, ग्रामपोस्ट-जोठा, थाना-धोरैया, जिला-बांका, बिहार, पिन-813109 | 08.12.1989 | 752 | 02 |
| 22. | 165305 | पूनम कुमारी | श्री योगेन्द्र राम पिता-योगेन्द्र राम, मुहल्ला-बागमली, पोस्ट-हाजीपुर, थाना-हाजीपुर नगर, जिला-वैशाली, बिहार, पिन-844101 | 09.01.1986 | 1026 | 02 |
| 23. | 547268 | महिमा प्रभाकर | श्री रमेश पासवान द्वारा-स्व॰ छोटे लाल, मो॰-लालजी टोला, पोस्ट-जी.पी.ओ., थाना-गाँधी मैदान, सरकारी स्कूल के पास, पटना, बिहार, पिन-800001 | 16.02.1992 | 1182 | 02 |
2. वैसे अभ्यर्थीगण जिनका चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने की प्रत्याशा में औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त्त के साथ अगले छः माह के लिए की जाती है कि चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन अनुकूल प्राप्त नहीं होने पर उनकी सेवा तत्कालिक प्रभाव से निरस्त कर दी जायेगी। छः माह के अन्दर चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने की स्थिति में इस औपबंधिक रूप से नियुक्त अभ्यर्थियों की सेवा अगले छः माह के लिए अनुमोदन प्राप्त कर विस्तारित करने की कार्रवाई की जायेगी।19 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 3. भविष्य में शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र/अभिलेखों के संबंध में गलत सूचना पाये जाने की स्थिति में इनकी सेवा कभी भी किसी पूर्व सूचना के समाप्त कर दी जायेगी एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई भी की जायेगी।
4. सभी नियुक्त अभ्यर्थी की परीक्ष्यमान अवधि दो वर्षों की होगी तथा उनकी आपसी वरीयता बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित संयुक्त मेधा क्रमांक के अनुसार होगी।
5. वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-1964, दिनांक 21.08.2005 एवं पत्रांक-768 पे॰को॰, दिनांक 03.07.2007 के अनुसार इन कर्मियों पर नई अंशदायी पेंशन योजना लागू होगी।
6. सभी नवनियुक्त प्रशाखा पदाधिकारी दिनांक 18.10.2021 तक बिहार विधान सभा सचिवालय में अपना योगदान समर्पित करेंगे।
7. सभी अभ्यर्थी सामान्य प्रशासन विभाग (कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग) द्वारा निर्गत संकल्प संख्या-1919, दिनांक 18.01.1976 के अनुपालन में दहेज न लेने संबंधी घोषणा-पत्र एवं मद्य निषेध कानून का अनुपालन संबंधी घोषणा पत्र योगदान देने के समय अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करेंगे।
8. योगदान के समय अभ्यर्थियों को असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
9. अभ्यर्थियों को योगदान देने हेतु आने-जाने के लिए कोई यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।
10. वैसे अभ्यर्थी जो पूर्व से किसी नियोक्ता के अंतर्गत सेवारत हैं, योगदान के समय विरमन पत्र प्रस्तुत करेंगे। अभ्यर्थी को अन्य सेवा से त्यागपत्र देने की स्थिति में सक्षम प्राधिकार द्वारा त्यागपत्र स्वीकृति से संबंधित पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
अध्यक्ष, बिहार विधान सभा के आदेश से, पवन कुमार सिन्हा, उप-सचिव।
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6 अक्तूबर 2021
| क्रम सं॰ | अनुक्रमांक | अभ्यर्थी का नाम | पिता का नाम एवं पता | जन्म तिथि | मेधा क्रमांक | आयोग द्वारा आवंटित आरक्षण रोस्टर |
| 1. | 174853 | प्रभात कुमार | श्री उदय नाथ झा द्वारिकापुरी, गाँव-दिलावरपुर, थाना-बहादुरपुर, डाकघर-मिल्कीचक, जिला-दरभंगा, पिन-846009 | 04.02.1995 | 48 | 01 |
| 2. | 454363 | आकाश दीप | श्री अशोक कुमार गुप्ता गुप्ता मेडिकल हॉल, छोटी बलिया, स्टेशन रोड, लखमिनिया, बेगूसराय, पिन-851211 | 30.05.1990 | 171 | 04 |
सं0 1स्था॰-198/2021-1998/वि॰स॰।--बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 64वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार विधान सभा सचिवालय में जनसंपर्क पदाधिकारी के पद के लिए अनुशंसित निम्नांकित अभ्यर्थियों को अधोलिखित शर्त्तो के अधीन पे मैट्रिक्स लेवल-09 में राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अनुमान्य भत्तों के साथ जनसंपर्क पदाधिकारी के पद पर औपबंधिक रूप से नियुक्त किया जाता हैः- क्रम सं॰
2. वैसे अभ्यर्थी जिनका चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त होने की प्रत्याशा में औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त्त के साथ अगले छः माह के लिए की जाती है कि चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन अनुकूल प्राप्त नहीं होने पर उनकी सेवा तत्कालिक प्रभाव से निरस्त कर दी जायेगी। छः माह के अन्दर चरित्र एवं पूर्ववृत सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने की स्थिति में इस औपबंधिक रूप से नियुक्त अभ्यर्थियों की सेवा अगले छः माह के लिए अनुमोदन प्राप्त कर विस्तारित करने की कार्रवाई की जायेगी।
3. भविष्य में शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र/अभिलेखों के संबंध में गलत सूचना पाये जाने की स्थिति में इनकी सेवा कभी भी किसी पूर्व सूचना के समाप्त कर दी जायेगी एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई भी की जायेगी।
4. दोनों नियुक्त अभ्यर्थी की परीक्ष्यमान अवधि दो वर्षों की होगी तथा उनकी आपसी वरीयता बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित संयुक्त मेधा क्रमांक के अनुसार होगी।
5. वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-1964, दिनांक 21.08.2005 एवं पत्रांक-768 पे॰को॰, दिनांक 03.07. 2007 के अनुसार इन कर्मियों पर नई अंशदायी पेंशन योजना लागू होगी।
6. दोनों नवनियुक्त जनसंपर्क पदाधिकारी दिनांक 18.10.2021 तक बिहार विधान सभा सचिवालय में अपना योगदान समर्पित करेंगे।
7. दोनों अभ्यर्थी सामान्य प्रशासन विभाग (कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग) द्वारा निर्गत संकल्प संख्या-1919, दिनांक 18.01.1976 के अनुपालन में दहेज न लेने संबंधी घोषणा-पत्र एवं मद्य निषेध कानून का अनुपालन संबंधी घोषणा पत्र योगदान देने के समय अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करेंगे।20 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 8. योगदान के समय अभ्यर्थियों को असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
9. अभ्यर्थियों को योगदान देने हेतु आने-जाने के लिए कोई यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।
10. वैसे अभ्यर्थी जो पूर्व से किसी नियोक्ता के अंतर्गत सेवारत हैं, योगदान के समय विरमन पत्र प्रस्तुत करेंगे। अभ्यर्थी को अन्य सेवा से त्यागपत्र देने की स्थिति में सक्षम प्राधिकार द्वारा त्यागपत्र स्वीकृति से संबंधित पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
अध्यक्ष, बिहार विधान सभा के आदेश से, पवन कुमार सिन्हा, उप-सचिव।
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18 अक्तूबर 2021
सं0 1स्था-229/2021-2084/वि स ।--बिहार विधन सभा सचिवालय ;भरती एवं सेवा शर्त्तेद्ध नियमावली, 2018 की धरा-6;कद्ध में प्रदत्त शक्तियों के अध्ीन बिहार के राज्यपाल ने सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार की अध्सिूचना संख्या-7/डी 01-305/96 साप्र-12227, दिनांक 18.10.2021 एवं पटना उच्च न्यायालय, पटना की अध्सिूचना संख्या-47437-47452, दिनांक 18.10.2021 के अनुसरण में श्री शैलेन्द्र सिंह, जिला एवं सत्रा न्यायाध्ीश, भोजपुर, आरा को सचिव, बिहार विधन सभा के पद पर पदभार ग्रहण की तिथि से अगले आदेश तक प्रतिनियुक्ति के आधर पर नियुक्त किया है ।
अध्यक्ष, बिहार विधान सभा के आदेश से, पवन कुमार सिन्हा, उप-सचिव।
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18 अक्तूबर 2021
सं0 1 स्था-230/2021-2082/वि स ।--बिहार विधन सभा सचिवालय ;भरती एवं सेवा शर्त्तेद्ध नियमावली, 2018 की धरा-6;कद्ध में प्रदत्त शक्तियों के अध्ीन बिहार के राज्यपाल ने सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार की अध्सिूचना संख्या-7/ए 1-303/95 साप्र-12226, दिनांक 18.10.2021 एवं पटना उच्च न्यायालय, पटना की अध्सिूचना संख्या-47504-47519, दिनांक 18.10.2021 के अनुसरण में श्री पवन कुमार पाण्डेय, अपर जिला एवं सत्रा न्यायाध्ीश, बेतिया को संयुक्त सचिव, बिहार विधन सभा के पद पर पदभार ग्रहण की तिथि से अगले आदेश तक प्रतिनियुक्ति के आधर पर नियुक्त किया है ।
अध्यक्ष, बिहार विधान सभा के आदेश से, पवन कुमार सिन्हा, उप-सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 29—571+50-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in21 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
भाग-2
बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। —————
सामान्य प्रशासन विभाग
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शुद्धि-पत्र
7 सितम्बर 2021
सं0 2/आरोप-01-41/2014-सा0प्र0-10076--श्री अशोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 621/11, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी, गोपालगंज-सह-प्रभारी अधीक्षक, मंडल कारा, गोपालगंज के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.03.2019 द्वारा (i) निन्दन एवं (ii) दो वेतनवृद्धियाें पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया था।
उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार के पत्रांक-कैम्प दिनांक 25.03.2019 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.03.2019 को द्वारा अधिरोपित दंडादेश को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9756 दिनांक 22.07. 2019 द्वारा यथावत् रखा गया।
उक्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9756 दिनांक 22.07.2019 में टंकन भूलवश विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.03.2019 के स्थान पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3243 दिनांक 08.03.2019 अंकित हो गया है, जिसे विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3245 दिनांक 08.03.2019 पढ़ा जाय। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 29—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in22 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
भाग-9-ख
निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA —————
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद विद्यापति मार्ग, पटना-800001 ------- अधिसूचनाएं 24 मार्च 2021
सं0 3511--भागलपुर जिलान्तर्गत श्रीराम जानकी रमणजी सुजापुर ठाकुरबाड़ी, नाथनगर, जिला-भागलपुर, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-314 है।
उक्त न्यास के संचालन हेतु पर्षदीय आदेष पत्रांक- 862, दि0- 22/09/2014 द्वारा महंत राम किंकर दास को अस्थायी न्यासधारी बनाया गया था। श्री दास वर्ष 2013 से 2020 तक की आय-व्यय विवरणी जब पर्षद द्वारा उन्हें विभिन्न नोटिस द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी, तब दि0- 08/09/2020 एवं दि0- 13/12/2020 दाखिल की है, जो स्पष्ट करता है कि मंहत द्वारा मठ की भूमि से होने वाली आय का सही विवरण नहीं दिया जा रहा है। महंतजी एवं मंदिर की भूमि पर रह रहे किरायेदार जो वहां रहकर व्यवसाय कर रहे हैं, के बीच काफी विवाद हो चुका है। इन्हीं सब परिस्थितियों पर विचार करते हुये वर्ष 2016 से ही न्यास समिति बनाये जाने हेतु अंचलाधिकारी से नामोें की मांग की जा रही थी, परंतु पूर्व में प्रस्ताव नहीं प्राप्त होने के कारण महंत जी द्वारा ही ठाकुरबाड़ी की देखभाल की जा रही है। अंचलाधिकारी, नाथनगर के पत्रांक- 295, दि0- 26/02/2020 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसका पुलिस सत्यापन प्रतिवेदन भी दि0- 09/11/2020 को पर्षद को प्राप्त हो चुका है।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन, मठ तथा संबंधित भूमि की सुरक्षा तथा व्यवसायियों के विवाद के निस्तारण हेतु एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जोबिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी रमणजी सुजापुर ठाकुरबाड़ी, नाथनगर, जिला- भागलपुर''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी रमणजी सुजापुर ठाकुरबाड़ी न्यास योजना, नाथनगर, जिला- भागलपुर''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी रमणजी सुजापुर ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, नाथनगर, जिला- भागलपुर'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन सचिव, कोषाध्यक्ष एवं महंत के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। बैंक खाता नं0- 3492294167 (सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया), शाखा नाथनगर, भागलपुर, जो वर्तमान में महंत रामकिंकर दास के नाम से हे, जिसका नाम परिवर्तन कर श्री रामजानकी रमण ठाकुरबाड़ी, सुजापुर के नाम करवाकर उक्त तीनों व्यक्तियों के नाम से संचालन किया जायेगा।
5. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।23 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
17. नवगठित न्यास समिति महंत राम किंकर दास के द्वारा दिये गये निर्देषों का उचित सम्मान करेगी तथा मंदिर में जो राषि, चढ़ावा के रूप में, जो फल, फूल, मिष्ठान्न व राषि प्राप्त होगी, उस पर महंत का अधिकार होगा। न्यास समिति मंदिर की भूमि की बंदोवस्ती, दान-पेटी से प्राप्त आय तथा रसीद से प्राप्त आय के हकदार होंगे, जिसमें से प्राप्त राषि से महंत जी को चिकित्सा, यात्रा एवं धार्मिक आयोजन मंदिर के राग-भोग आदि हेतु उनके आवष्यकतानुसार देंगे।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) महंत रामकिंकर दास, श्री जानकी रमणजी सुजापुर ठाकुरबाड़ी, नाथनगर, भागलपुर -संरक्षक (2) श्री भवेष यादव पिता-स्व0 दालेष्वर यादव, सा0-नरगा, नाथनगर, भागलपुर - अध्यक्ष (3) श्री देवाषीष बनर्जी पिता-स्व0 षिवदास बनर्जी, सा0-बंगाली टोला, चम्पा नगर, नाथनगर -सचिव (4) प्रो0 मधुसुदन झा पिता-स्व0 कमलाकांत झा, सा0-ललित ना0 सिंह लेन, सुजापुर, नाथनगर-कोषाध्यक्ष (5) श्री विष्णुदेव मंडल पिता-स्व0 स्व0 जंगली मंडल, सा0-वसंतपुर, दोगच्ही, नाथनगर -सदस्य (6) श्रीमति आनंदलता कुमारी पति-श्री दीपक यादव, सा0-अनाथालय रोड, नाथनगर - सदस्य (7) श्रीमति नीलम देवी पति-श्री विजय प्र0 यादव, सा0-सुजापुर, नाथनगर - सदस्य (8) श्री अषोक राय पिता-श्री सहदेव राय सा0-नरगा, नाथनगर, भागलपुर - सदस्य (9) श्री संजय कुमार पिता- श्री सुधीर प्र0 साह, सा0-के0बी0 लाल रोड, नाथनगर - सदस्य (10) श्री षिवषंकर सिन्हा पिता-स्व0 वेचन प्र0 सिन्हा, सा0-पुरानी सराय, नाथनगर - सदस्य (11) श्री बासुकी रजक पिता-स्व0 हरि रजक, सा0-धोबी टोला, नाथनगर - सदस्य उक्त न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले पाँच वर्ष का होगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि''श्री राम जानकी रमणजी सुजापुर ठाकुरबाड़ी, नाथनगर, जिला- भागलपुर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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26 मार्च 2021
सं0 3563--भागलपुर जिलान्तर्गत श्री आदिषक्ति शुंगल महामाया देवी ओरियप मंदिर, ग्राम- ओरियप, थाना- अन्तिचक, भाया- कहलगाँव,जिला-भागलपुर,बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-3993 है।
इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 3781, दि0- 19/02/16 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, कहलगांव की अध्यक्षता मेें 05 वर्षों के लिए एक न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसका कार्यकाल समाप्त हो गया है। उक्त मंदिर के संबंध में की जा रही सुनवायी दि0- 26/02/2021 में श्री बद्री मंडल, श्री शक्ति मंडल अपने अधिवक्ता24 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 के साथ उपस्थित हुये तथा उनके द्वारा पर्षद के पूर्व आदेष के आलोक में 05 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव न्यास समिति में रखे जाने हेतु किया गया तथा अपनी वंषावली भी दाखिल की एवं प्रार्थना किया कि समर्पणनामा में मंदिर में कार्य करने हेतु इनके पुर्वजों को अधिकृत किया गया था, इनके पूर्वज तुलाराव इन्हीं के वंषज से आते हैं, लिहाजा न्यास समिति में इनके परिवार के सदस्य का भी नाम रखा जाए। संचिका से स्पष्ट है कि पूर्व में न्यास समिति का गठन किया गया था, परंतु तुला राउत के परिवार के सदस्यों द्वारा न्यास समिति को सुचारू रूप से कार्य करने में बार-बार बाधा उत्पन्न की जाती रही है। दिनांक 15/12/2020 को तुला राउत के वंषज उपस्थित हुये और यह स्वीकार किया कि यह उनकी निजी मंदिर नहीं है, परंतु पिछले कई पीढ़ीयों से इस मंदिर का पूजा-पाठ, राग-भोग सेवायत के रूप में करते आ रहे हैं। दि0- 26/02/2021 की सुनवायी में कथन किया गया कि समिति में उनके द्वारा प्रस्तावित कुछ सदस्यों को रखा जाय, जिससे ग्रामीणों के साथ मिलकर आपसी सौहार्दपूर्ण माहौल में मंदिर में विकास का कार्य किया जाये। पत्रांक-866, दिनांक 08/09/2020 द्वारा अंचलाधिकारी, कहलगाँव से भी न्यास समिति गठन हेतु नामों की सूची प्राप्त है।
उपरोक्त परिस्थिति में अंचलाधिकारी, कहलगाँव से प्राप्त सूची दि0- 08/09/2020 तथा तुला राउत के वंषज जो पर्षद के समक्ष उपस्थित हुये, उनके द्वारा दाखिल वंषावली तथा प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक् विकास हेतु बि0 हि0 धा0 न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक ''अस्थायी'' न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री आदि षक्ति शुंगल महामाया देवी ओरियप मंदिर, ग्राम-ओरियप, थाना- अन्तिचक, भाया- कहलगाँव, जिला- भागलपुर''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री आदिषक्ति शुंगल महामाया देवी ओरियप मंदिर न्यास योजना, ग्राम- ओरियप, थाना- अन्तिचक, भाया- कहलगाँव, जिला- भागलपुर''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री आदिषक्ति शुंगल महामाया देवी ओरियप मंदिर न्यास समिति, ग्राम- ओरियप, थाना- अन्तिचक, भाया- कहलगाँव, जिला- भागलपुर'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें वर्त्तमान सचिव एवं कोषाध्यक्ष का नाम अंकित करा कर उसी बैंक खाते का संचालन किया जाऐगा) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाता का संचालन सचिव एवंकोषाध्यक्षके संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाय। 5. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।25 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अनुमंडल पदाधिकारी, कहलगाँंव, जिला- भागलपुर - अध्यक्ष (2) श्री बद्री मंडल पिता- कुलदीप मंडल - उपाध्यक्ष (3) श्री प्रकाष मंडल पिता- गोपाल मंडल - सचिव (4) श्री विजय मंडल पिता- भद्दो मंडल - उप सचिव (5) श्री अम्भो कुमार मंडल पिता- जगदीष मंडल - कोषाध्यक्ष (6) श्री अमरेन्द्र कुमार पिता- स्व0 अर्जून मंडल - सदस्य (7) श्री कैलाष मंडल पिता- रामपुकार मंडल - सदस्य (8) श्री ललन मंडल पिता- मन्नू मंडल - सदस्य (9) श्री किषोर मंडल पिता- स्व0 लिलो मंडल - सदस्य (10) श्री सरयुग मंडल पिता- स्व0 हरचु मंडल - सदस्य (11) श्री गीत प्रसाद मंडल पिता- स्व0 सिंधु मंडल - सदस्य सभी ग्राम-ओरियप, था0-अन्तिचक, भाया-कहलगाँवं, जिला-भागलपुर। उपरोक्त अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले 01 वर्ष का होगा। समिति सदस्यों का चरित्र-सत्यापन प्राप्त होने के उपरांत समिति के स्थायीकरण / अवधि-विस्तार पर विचार किया जायेगा। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि''श्री आदिषक्ति शुंगल महामाया देवी ओरियप मंदिर, ग्राम- ओरियप, थाना- अन्तिचक, भाय- कहलगाँव, जिला- भागलपुर'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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24 मार्च 2021
सं0 3513--लखीसराय जिलान्तर्गत श्री राम जानकी मन्दिर, पीरी बाजार , ग्रामपो0थाना-पीरी बाजार, जिला-लखीसराय बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4030 है।
उक्त न्यास के संचालन हेतु पर्षदीय आदेष पत्रांक-380, दिनांक 06.06.2012 द्वारा पाँच व्यक्तियों को मिलकर कार्य करने का निर्देष दिया गया था। उक्त आदेष में वर्णित श्री रामावतार दास की मृत्यु हो चूकी है, जबकि कुषेष्वर सरण और श्री संतोष दास गाँव छोड़कर दुसरे जिले में कहीं रहते है। पर्षद को दिनांक 29.11.2018 को एक ग्यारह सदस्यीय न्यास समिति बनाये जाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था, जिसका चरित्र सत्यापन थाना के माध्यम से कराया गया, जो पर्षद को ज्ञापांक-486, दिनांक 16.09.2020 के माध्यम से प्राप्त हुआ, जिसमें उल्लेख है, कि प्रस्तावित नौ व्यक्तियों के नाम व पता सही है, एवं इनके विरूद्ध थाना अभिलेख में कोई कान्ड दर्जन नहीं है। परन्तु दो सदस्य श्री अरूण कुमार सिंह और पंकज कुमार सिंह के विरूद्ध पीरी बाजार थाना कान्ड संख्या-4/2019 एवं 148/2019 दर्ज है। न्यास सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु एक सुदृढ़ न्यास समिति का होना जरूरी है।
उपरोक्त परिस्थिति में प्रस्तावित सूची तथा सत्यापन प्रतिवेदन पर विचारोपरान्त उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक अस्थायी न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री राम जानकी मन्दिर, पीरी बाजार, ग्रामपो0थाना-पीरी बाजार, जिला-लखीसराय'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर, पीरी बाजार , ग्रामपो0थाना-पीरी बाजार, जिला-लखीसराय'' होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर, पीरी बाजार,26 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 ग्रामपो0थाना-पीरी बाजार, न्यास समिति जिला-लखीसराय'' होगी, जिसमें न्यास की समग्रचल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा। न्यास के खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंट पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होनेवाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्जकर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अंचलाधिकारी, सूर्यगढ़ा, जिला-लखीसराय - अध्यक्ष।
(2) श्री सुभाषचन्द्र सिंह - सचिव।
(3) श्री श्याम किषोर सिंह - कोषाध्यक्ष।
(4) श्री संजीव कुमार - सदस्य।
(5) श्री विनय कुमार सिंह - सदस्य।
(6) श्री नीरज कुमार - सदस्य।
(7) श्री सुनील कुमार सिंह - सदस्य।
(8) श्री किषोरी सिंह - सदस्य।
(9) श्री मकसु यादव - सदस्य।
सभी-ग्रामपो0थाना-पीरी बाजार, जिला-लखीसराय।
उक्त अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले एक वर्ष का होगा। न्यास समिति के कार्यो की समिक्षा के उपरान्त समिति के स्थायीकरण/अवधि विस्तार पर बाद में विचार किया जायेगा। प्रस्तावित नाम श्री अरूण कुमार सिंह और पंकज कुमार सिंह के संदर्भ में प्रथम सूचना रिपोर्ट प्राप्त होने पर विचार किया जायेगा।27 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री राम जानकी मन्दिर, पीरी बाजार, ग्रामपो0थाना-पीरी बाजार, न्यास समिति जिला-लखीसराय'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमिका हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मतकार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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26 मार्च 2021
सं0 3565--बांका जिलान्तर्गतश्री कृष्ण काली भगवती स्थान, ग्राम-हरिवंषपुर, तेलडीहा, पो0-छत्रहार, थाना-षम्भूगंज, जिला-बांका पर्षद में सार्वजनिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसका निबंधन सं0-4516 है।
उक्त न्यास के संबंध में संचिका पर दिनांक-16.12.2019 को सभी पक्षों की सुनवाई की गयी थी तथा अंचलाधिकारी की रिपोर्ट आदि पर विचार करते हुए यह पाया गया कि उक्त मन्दिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। गाँव तथा दुर-दुर के लोग की आस्था का केन्द्र है। पूर्व में योगेषचन्द्र एवं अनिरूद्ध चन्द्र दास द्वारा निजी होने का दावा किया गया था और पर्याप्त अवसर के बाद भी वे निजी मन्दिर होने के संबंध में दस्तावेज दाखिल नहीं कर सके। उन्होंने यह तथ्य पर्षद में स्वीकार किया कि उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है।
तदोपरान्त उनकी भी सहमति एवं सभी तथ्यों पर विचार करते हुए मन्दिर को सार्वजनिक घोषित करते हुए निबंधन किये जाने का आदेष दिया गया। अनिरूद्ध प्रसाद द्वारा यह कथन किया गया कि न्यास समिति में उनके तरफ से भी 03 व्यक्ति विजय कुमार, श्यामा चरण और अवनित कौषल को सदस्य के रूप में रखा जाए। ग्रामीणों द्वारा भी एक बैठक कर 11 नामों का प्रस्ताव दिनांक-31.01.2020 को दिया गया, जिसमें 03 प्रषासनिक पदाधिकारी के भी नाम हैं। अंचलाधिकारी, शम्भूगंज ने अपनी रिपोर्ट दिनांक-21.07.2016 (पर्षद में प्राप्त) द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव दिया है, उक्त दोनों सूची में कुछ नाम सामान्य है तथा कुछ प्रषासनिक अधिकारी के नाम है। दोनों सूची को संबंधित थाना भेजकर उनका चरित्र सत्यापन प्राप्त की गयी। जो दिनांक-15.02.2020 को प्राप्त हुआ। दिनांक-05.03.2021 को न्यास समिति बनाये जाने के संबंध में पर्षद के सामने शंकर कुमार दास, महेषचन्द्र दास, कन्हाई चन्द दास, शम्भु दास एवं श्यामचरण दास उपस्थित हुए। चूंकि अधिनियम के अनुसार 11 से अधिक व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन नहीं किया जा सकता है साथ ही पर्षद की परम्परा यह रही है, कि एक परिवार से एक ही सदस्य को न्यास समिति में रखा जा सकता है। अतः उक्त तथ्यों के आलोक में उपस्थित सदस्यों की सहमति से 11 व्यक्तियों की न्यास समिति का गठन किए जाने का निर्णय लिया गया।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री कृष्ण काली भगवती स्थान, ग्राम-हरिवंषपुर, तेलडीहा, पो0-छत्रहार, थाना-षम्भूगंज, जिला-बांका ''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री कृष्ण काली भगवती स्थान, ग्राम-हरिवंषपुर, तेलडीहा, पो0-छत्रहार, थाना-षम्भूगंज, जिला-बांका ''होगाऔर इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री कृष्ण काली भगवती स्थान, ग्राम-हरिवंषपुर, तेलडीहा, पो0-छत्रहार, थाना-षम्भूगंज, जिला-बांका ''होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।28 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अनुमण्डल पदाधिकारी , बांका - अध्यक्ष (2) श्यामाचरण दास, पिता-स्व0 भोलानाथ दास - उपाध्यक्ष (3) अनिरूद्ध चन्द्र दास, पिता- स्व0 नारायण चन्द्र दास - सचिव (4) महेषचन्द्र दास पिता- स्व0 षिवनारायण दास - कोषाध्यक्ष (5) शम्भुनाथ दास, पिता- स्व0 नवीन चन्द्र दास - सदस्य (6) विजय कुमार दास, पिता- स्व0 प्रभाष चन्द्र दास - सदस्य (7) अभिनीत कौषल, पिता- स्व0 कृष्ण मोहन दास - सदस्य (8) सनत कुमार पिता- स्व0 देवेष चन्द्र दास - सदस्य (9) महेष्वर मंडल, पिता-स्व0 भोला मंडल - सदस्य (10) सिकन्दर तांती, पिता- स्व0 राजपति तांती - सदस्य (11) कन्हाई चन्द्र दास पिता- स्व0 प्रभाष चन्द्र दास - सदस्य सभी-ग्राम-हरिवंषपुर, तेलडीहा, पो0-छत्रहार, थाना-षम्भूगंज, जिला-बांका। उक्त न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले पाँच वर्षो का होगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि समिति के अध्यक्ष, अनुमण्डल पदाधिकारी प्रषासनिक पदाधिकारी है, यदि वह किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाते है तो बैठक आदि की अध्यक्षता उपाध्यक्ष द्वारा संचालित कर कार्रवाई की जायेगी तथा मन्दिर की आय-व्यय आदि का संचालन राष्ट्रीयकृत बैंक में मन्दिर के नाम खाता खोलकर कोषाध्यक्ष तथा उनके साथ सचिव या अध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से की जायेगी। उक्त धार्मिक स्थल एक हिन्दु धार्मिक स्थल है और हिन्दु धार्मिक स्थल में कहीं बलि आदि की परम्परा नहीं है। और पूर्व में भी अंचलाधिकारी द्वारा बलीप्रथा पर रोक लगाया गया था। उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री कृष्ण काली भगवती स्थान, ग्राम-हरिवंषपुर, तेलडीहा, पो0-छत्रहार, थाना-षम्भूगंज, जिला-बांका ''के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/ बदलैन/विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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15 मार्च 2021
सं0 3452--लखीसराय जिलान्तर्गत श्री षिव मंदिर, ग्राम-बेला, पोस्ट-मतासी, थानाअंचल-हलसी, जिला- लखीसराय बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4336 है।
उक्त न्यास के संचालन, संपत्तियों की सुरक्षा एवं विकास हेतु एक न्यास समिति के गठन के लिए पर्षदीय पत्रांक- 324, दिनांक 01/06/2020 द्वारा अंचलाधिकारी, हलसी से 05 स्वच्छ छवि के नामों का प्रस्ताव माँगा गया था। पुनः पर्षद द्वारा अंलचाधिकारी को दिनांक 26/08/2020 को स्मारित किया गया। ग्रामीणों द्वारा दिनांक 17/03/2020 को संपन्न29 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 बैठक की कार्यवाही की प्रति संलग्न करते हुए पर्षदीय पत्र दिनांक 05/11/2020 एवं दिनांक 19/01/2021 द्वारा अंचलाधिकारी को स्मारित किया गया, परंतु वांछित प्रतिवेदन अप्राप्त है। पर्षद की सुनवायी दिनांक 03/03/2021 में प्रार्थी द्वारा भी आम सभा की बैठक दिनांक 17/03/2020 के आलोक में न्यास समिति का गठन किये जाने का अनुरोध किया गया।
उपरोक्त परिस्थिति मेें उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक अस्थायी न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री षिव मंदिर, ग्राम- बेला, पोस्ट-मतासी, थानाअंचल-हलसी, जिला-लखीसराय''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री षिव मंदिर न्यास योजना, ग्राम- बेला, पोस्ट- मतासी, थानाअंचल- हलसी, जिला- लखीसराय''होगा और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री षिव मंदिर न्यास समिति, ग्राम- बेला, पोस्ट- मतासी, थानाअंचल- हलसी, जिला- लखीसराय'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
3. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 4. मंदिर / मठ परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मंदिर / मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मंदिर / मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा । महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी / महंत की अर्हता का निर्धारण की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर / मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
16. मंदिर / मठ के अधीनस्थ भूमि की बंदोवस्ती का अधिकार न्यास समिति को होगा, जिसका आय-व्यय विवरण, पर्षद के समक्ष प्रतिवर्ष प्रस्तुत किया जायेगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की अस्थायी रूप से एक वर्ष लिएन्यास समिति गठित की जाती हैः-
(1) प्रखंड विकास पदाधिकारी, हलसी,लखीसराय - अध्यक्ष (2) श्री गिरजा सिंह पिता- स्व0 बंगाली राम - उपाध्यक्ष30 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 (3) श्री धीरज कुमार पिता- श्री सहदेव चौरसिया - सचिव
(4) श्री संत कुमार पिता-श्री कमलेष्वर राम - कोषाध्यक्ष (5) श्री रोहित कुमार - सदस्य सभी का पता- ग्राम- बेला, पो0- मतासी, था0- हलसी, जिला- लखीसराय। (6) थानाध्यक्ष, हलसी, लखीसराय - सदस्य उक्त अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले 01 वर्ष का होगा। समिति के सदस्यों का चरित्र-सत्यापन प्रतिवेदन अनुकूल प्राप्त होने पर समिति के स्थायीकरण/अवधि-विस्तार पर बाद में विचार किया जायेगा।
उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री षिव मंदिर, ग्राम-बेला, पोस्ट-मतासी, थानाअंचल-हलसी, जिला-लखीसराय'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन /विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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26 मार्च 2021
सं0 3567--लखीसराय जिलान्तर्गत श्री मदन मोहन ठाकुरबाड़ी, ग्राम-प्रतापपुर, पो0-डुमरी, प्रखण्ड-बड़हिया, जिला-लखीसराय पर्षद में सार्वजनिक न्यास के रूप में निबंधित है, जिसका निबंधन सं0-884 है।
पूर्व में पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-981, दिनांक 25.09.2007 द्वारा 11 सदस्यीय न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसके अध्यक्ष अनुमंडलाधिकारी, लखीसराय तथा सचिव श्री अरूण कुमार सिंह थे। उक्त ठाकुरबाड़ी के पास लगभग 60 बीघा भूमि है, परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि पूर्व न्यास समिति द्वारा मंदिर की भूमि से होने वाली आय-व्यय विवरणी, बजट एवं पर्षदीय षुल्क कभी भी भुगतान नहीं किया गया। पर्षद द्वारा बार-बार स्मारित करने के बाद वर्ष 2014 में अंकेक्षण रिपोर्ट के साथ 2011-12, 2012-13 एवं 2013-14 में ठाकुरबाड़ी की भूमि से बंदोबस्ती की राषि क्रमषः रू0 1,53,000/-, रू0 1,53,500/- एवं रू0 1,53,600/- दिखलाते हुए पर्षदीय षुल्क के रूप में दिनांक 12-08-2014, दिनांक 04-09-2014 एवं 13-07-2016 को क्रमषः रू0 10,000/-, रू0 5,000/- एवं रू0 10,000/- अर्थात कुल रू0 25,000/-जमा किया गया है। पर्षद द्वारा समिति के सचिव को बार-बार स्मारित करने के वावजूद भी कोई उतर नहीं दिया गया तथा न ही आय-व्यय विवरणी, बजट एवं पर्षदीय षुल्क अद्यतन जमा किया गया है। पर्षद द्वारा नई न्यास समिति के गठन किये जाने हेतु अंचलाधिकारी से 11 स्वच्छ व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव मांगा गया था तथा अंचलाधिकारी ने अपने पत्र दिनांक 13-12-2017 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया है।अंचलाधिकारी से प्राप्त उक्त नामों पर आपति आई कि क्रम सं0-2 एवं 7 एक ही परिवार के सदस्य हैं। अतः उनमें से एक व्यक्ति को रखते हुए पुनः प्रस्ताव भेजने का निदेष अंचलाधिकारी को दिया गया। पुनः अंचलाधिकारी ने अपने पत्र दिनांक 13-03-2018 द्वारा 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद में उपलब्ध कराया है तथा इन नामों का सत्यापन थाना के स्तर से किया गया तथा थाना प्रभारी ने अपने पत्र दिनांक 09-02-2021 द्वारा सत्यापन प्रतिवेदन पर्षद को उपलब्ध कराया है। इसी बीच ग्रामीणों द्वारा दिनांक 16-07-2019 को सम्पन्न आम सभा की बैठक की कार्यवाही पर्षद में उपलब्ध कराई गई, एवं 9 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव प्राप्त हुआहै।कुछ ग्रामीणों द्वारा अंचलाधिकारी द्वारा भेजे गये नामों पर आपत्ति व्यक्त की गयी है। अतः उपर्युक्त दोनों सुझावों (सूची) के आलोक में समिति गठन किये जाने का निर्णय लिया गया।
उपरोक्त परिस्थिति में उक्त न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं इस न्यास का सम्यक् विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 के अन्तर्गत एक योजना का निरूपण तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक अस्थायी न्यास समिति का गठन एक वर्ष के लिए आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं,अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दूधार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए 'श्री मदन मोहन ठाकुरबाड़ी, ग्राम-प्रतापपुर, पो0-डुमरी, प्रखण्ड-बड़हिया, जिला-लखीसराय''के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री मदन मोहन ठाकुरबाड़ी, ग्राम-प्रतापपुर, पो0-डुमरी, प्रखण्ड-बड़हिया, जिला-लखीसराय'' होगाऔर इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री मदन मोहन ठाकुरबाड़ी, ग्राम-प्रतापपुर, पो0-डुमरी, प्रखण्ड-बड़हिया, जिला-लखीसराय'' होगी, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार रहेगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।31 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर (यदि पूर्व से न्यास के नाम से खाता संचालित हो, तो उसमें) जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।न्यास के खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा।
4. मठ/मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अनुमंडलाधिकारी, लखीसराय - पदेन अध्यक्ष
(2) श्री कष्णनंदन सिंह - उपाध्यक्ष
(3) श्री राम नरेष सिंह - सचिव
(4) श्री राजीव कुमार - कोषाध्यक्ष
(5) श्री दिवाकर सिंह - सदस्य
(6) श्री गोरे रजक - सदस्य
(7) श्री राजेष्वरी प्रसाद सिंह - सदस्य
(8) श्री राम लाल सिंह - सदस्य
(9) श्री बच्चा सिंह - सदस्य
(10) श्री अनुज सिंह - सदस्य
(11) श्री मनोज सिंह - सदस्य
सभी-ग्राम-प्रतापपुर, पो0-डुमरी, प्रखण्ड-बड़हिया, जिला-लखीसराय उक्त अस्थायी न्यास समिति का कार्यकाल अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से अगले एक वर्ष का होगा। समिति के उन सदस्यों का जिनका अभी चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन प्राप्त नही है, प्रतिवेदन प्राप्त होने पर समिति के स्थायीकरण/अवधि विस्तार पर बाद में विचार किया जायेगा।
उपर्युक्त सभी सदस्यों को निदेष दिया जाता है कि एक साथ मिल-जुल कर धार्मिक आस्था से मंदिर के विकास का कार्य करें तथा भूमि की बंदोबस्ती अनुमंडलाधिकारी, उपाध्यक्ष एवं सचिव द्वारा बैठक कर कराई जाय तथा बंदोबस्ती की कार्रवाई कम से कम दो व्यक्तियों की उपस्थिति में ही सुनिष्चित की जाय।32 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 उक्त आदेष के आलोक मेें राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि ''श्री मदन मोहन ठाकुरबाड़ी, ग्राम-प्रतापपुर, पो0-डुमरी, प्रखण्ड-बड़हिया, जिला-लखीसराय'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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2 जुलाई 2021
सं0 1425--श्री राम जानकी मन्दिर (नन्द लाल बाबा ठाकुरबाड़ी), हटिया रोड, निर्मली, जिला-सुपौल पर्षद में निबंधित धार्मिक न्यास है, जिसकी संख्या-3891, दिनांक-16.12.2008 को किया गया है। उक्त मन्दिर में पूर्व में लगभग 11 ए0 भूमि थी, जिसमें पूर्व के महंतो द्वारा कॉलेज वगैरह को दान कर दी गयी। वर्त्तमान में मन्दिर के पास 08 कट्ठा जमीन है, जिसमें लगभग 14 दुकाने है। उक्त मन्दिर की देख-भाल पूर्व में महंत नंद लाल दास द्वारा की जाती थी तथा पर्षद के आदेष ज्ञापांक-5883, दिनांक-04.01.2002 द्वारा एक न्यास समिति का भी गठन किया गया था, परन्तु न्यास समिति का कार्य भी संतोषप्रद नहीं पाया गया। समिति की समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण तथा कुछ अन्य तकनिकी कारणों से पर्षद के आदेष दिनांक-05.08.2008 द्वारा उक्त समिति को भंग करते हुए महंत रामभूषण दास को उक्त मन्दिर का न्यासधारी नियुक्त किया गया था तथा पर्षद के आदेष में स्पष्ट उल्लेख था कि न्यासधारी बैंक में मन्दिर के नाम से खाता खोलेगे तथा किरायेदार से प्राप्त किराया बैंक में जमा की जायेगी और किराया बाजार दर पर होगा, परन्तु विगत 12 वर्षो से न्यासधारी रामभूषण दास द्वारा न तो कभी पर्षद में उपस्थित हुए, न बजट प्रस्तुत किया, न आय-व्यय विवरणी दाखिल किया और न हीं कभी पर्षद शुल्क जमा किया। मन्दिर की स्थिति भी दिन-प्रति-दिन दयनिय होती गयी। ग्रामीणों द्वारा मन्दिर के जीर्णोद्धार तथा देख-रेख हेतु एक आमसभा की बैठक दिनांक-17.11.2019 को श्री रामभूषण दास की अध्यक्षता में की गयी, जिसमें मन्दिर के पुनः निर्माण हेतु 12 सदस्यों की एक न्यास समिति बनाये जाने का निर्णय लिया गया तथा उक्त बैठक में डॉ0 रामचन्द्र प्रसाद द्वारा जीर्णोद्धार हेतु 51 हजार रुपये दान दिये जाने की घोषण की और इस बिन्दु पर विचार किया गया कि कोई भी दुकानदार जो किराया बहुत वर्षो से नहीं दे रहे है, निर्धारित की गयी कि 15 सौ रुपये प्रति दुकानदार किराया की राषि ली जाए तथा अपने प्रार्थना-पत्र के साथ बैठक की प्रति तथा वर्त्तमान में मन्दिर की जीर्ण-षिर्ण अवस्था की फोटोग्राफ दाखिल किया। दिनांक-05.03.2020 को महंत रामभुषण दास द्वारा भी एक प्रार्थना-पत्र दिया गया कि पूर्व में बैठक के अनुसार चन्दा आदि का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है और 2-4 माह में मन्दिर का निर्माण प्रारम्भ हो जायेगा। आगे उल्लेख किया कि वर्त्तमान में मन्दिर के आस-पास के दुकानों को किराया 3 से 5 हजार रुपये है, परन्तु मन्दिर व्यवसाय कर रहे दुकानदारों द्वारा बैठक में लिए गये निर्णय के आलोक में 1500/- रुपया भी किराया का भुगतान नहीं किया जा रहा है। किराया नहीं देने वाले 07 दुकानदारों क सूची भी प्रार्थना-पत्र के साथ तथा बैठक दिनांक-01.03.2020 की प्रति भी दाखिल किया। उपरोक्त बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में प्रस्तावित नामों की सूची अनुमण्डल पदाधिकारी को उनके मंतव्य के लिए भेजा गया गया, इस निर्देष के साथ कि यदि प्रस्तावित नामों में कोई संषोधन या कोई नया नाम जो धार्मिक प्रवृति के अच्छे व्यक्ति है, प्रस्तावित कर सकते है।
अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक-1484-2, दिनांक-28.12.2020 द्वारा 11 नामों का प्रस्ताव पर्षद को प्राप्त कराया, जिनमें 10 नाम वहीं है जो आमसभा दिनांक-01.03.2020 एवं 17.11.2019 में प्रस्तावित किया था। उक्त नामों का चरित्र सत्यापन रिपोर्ट भी प्राप्त है।
अतः उपरोक्त परिस्थितियों में मैं अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दु धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो न्यास की उपविधि 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री राम जानकी मन्दिर (नन्द लाल बाबा ठाकुरबाड़ी), हटिया रोड, निर्मली, जिला-सुपौल के सुचारू प्रबध्ांन, सम्पत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षण तथा सम्यक विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण करता हूँ तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर (नन्द लाल बाबा ठाकुरबाड़ी), हटिया रोड, निर्मली, जिला-सुपौलन्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी मन्दिर (नन्द लाल बाबा ठाकुरबाड़ी), हटिया रोड, निर्मली, जिला-सुपौल न्यास समिति'' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण, संरक्षण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, विकास एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था सुनिष्चित करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष में से किन्ही दो के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा।33 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 5. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्य वृत एवं पर्षद शुल्क आदि ससमय सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी। 6. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
7. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
8. न्यास समिति न्यास की अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि की वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी। 9. न्यास समिति/पदासधिकारी/सदस्य न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा, अगर वे ऐसा करते हैं तो वह शुन्य एवं अवैध होगा।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। 12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
उपर्युक्त योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों की न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित की जाती है :-
(1) श्री चन्द्र मोहन कामत पे0-स्व0 बहादुर कामत - अध्यक्ष (2) श्री राम नारायण कामत, पे0-स्व0 गोसाई कामत - सचिव (3) श्री गुरू शरण कामत पे0-स्व0 सुखाय कामत - कोषाध्यक्ष (4) श्री बाबा महंत राम भूषण दास - न्यासधारी-सह-सदस्य (5) श्री महेन्द्र कामत पे0- स्व0 सरयुग कामत - सदस्य (6) श्री कन्हैया कामत पे0-स्व0 पृथ्वी लाल कामत - सदस्य (7) श्री योगी लाल राय पे0-स्व0 अनिरूद्ध राय - सदस्य (8) श्री कुसुम लाल कामत पे0- स्व0 अमृत कामत - सदस्य (9) श्री योगेन्द्र मंडल पे0- स्व0 राम टहल मंडल - सदस्य (10) श्री राजेन्द्र कामत पे0- स्व0 महावीर कामत - सदस्य (11) श्रीमती सदनी देवी पति- श्री सोने लाल दास - सदस्य उपरोक्त सभी ग्रामपो0थाना-निर्मली, जिला-सुपौल। उक्त आदेष के आलोक में राजस्व अभिलेख में संबंधित भूमि श्री राम जानकी मन्दिर (नन्द लाल बाबा ठाकुरबाड़ी), हटिया रोड, निर्मली, जिला-सुपौल के नाम में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति के पदाधिकारी/सदस्य न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/बिक्रय/ पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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5 जून 2021
सं0 431--श्री व्येंकटेष्वरनाथ ठाकुरबाड़ी (बख्तियारपुर बड़ी ठाकुरबाड़ी), बाढ़, जिला- पटना पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 234 है।
इस न्यास के न्यासधारी श्री दिनकर दास त्यागीजी हैं। पर्षदीय आदेष दि0- 02/05/2007 द्वारा श्री दिनकर दास त्यागी को न्यासधारी की मान्यता प्रदान की गयी थी। वर्ष 2013-17 में उपरोक्त न्यास की भूमि पर श्री राधेकृष्ण मंदिर का निर्माण करवाया गया तथा एक कम्युनिटी हॉल का भी निर्माण बिना पर्षद की अनुमति के स्वयंभू समिति द्वारा किया गया एवं इसका निबंधन अभिलेख ट्रस्ट डीड निबंधित करा लिया गया। उपरोक्त मंदिर का निर्माण सार्वजनिक चन्दा से किया गया। इसमेें न्यासधारी श्री दिनकर दास त्यागी जी की सहमति एवं सहयोग प्राप्त थी। मंदिर की व्यवस्था हेतु स्थानीय लोगों द्वारा छः सदस्यों का चुनाव किया गया। इसमें से सदस्य श्री शैलेन्द्र का स्वर्गवास हो चुका है। शेष 05 सदस्य रह गये थे। न्यासधारी एवं स्वयंभू न्यास समिति के सदस्यों द्वारा पर्षद में आवेदन देकर अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके लिए दोनों पक्षों को दि0- 06/04/2021 को सुना गया। दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत न्यास समिति गठन हेतु अच्छे सामाजिक व्यक्तियों का नाम प्रस्तुत करने का निर्देष दिया गया। उपरोक्त आदेष के आलोक में दि0- 15/04/2021 को पुनः सुनवायी गयी तथा दोनों पक्षों की ओर से समिति गठन हेतु सुची संलग्न की गयी। श्री दिनकर त्यागी के अधिवक्ता श्री दिग्विजय सिंह द्वारा निम्न चार नाम क्रमषः 1. महंत मणिराम दास 2. श्री दिनकर दास त्यागी 3. श्री कमल नयन दास एवं 4. श्री अन्तर्यामी शरण के नाम का आग्रह किया गया। द्वितीय पक्ष की ओर से 08 सदस्यों की सूची प्रस्तुत की गयी।34 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 उपरोक्त श्री बैंकटेष भगवान मंदिर उर्फ बड़ी ठाकुरबाड़ी, जिसकी सभी भूमि देवोंत्तरदार है, इसके महंत / पुजारी / न्यास समिति को उक्त भूमि के प्रबंधन, व्यवस्था एवं पूजा-पाठ का ही अधिकार है तथा दोनों पक्षों द्वारा दी गयी सूची तथा विकासात्मक कार्य एवं प्रबंधन आदि कार्यों पर विचारोपरांत दस सदस्यों की न्यास समिति का अस्थायी गठन तथा इसके कार्याव्यन हेतु एक योजना का निरूपण किया जाता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री व्येंकटेष्वरनाथ ठाकुरबाड़ी (बख्तियारपुर बड़ी ठाकुरबाड़ी), बाढ़, जिला- पटना'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री व्येंकटेष्वरनाथ ठाकुरबाड़ी (बख्तियारपुर बड़ी ठाकुरबाड़ी) न्यास योजना, बाढ़, जिला- पटना'' होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री व्येंकटेष्वरनाथ ठाकुरबाड़ी (बख्तियारपुर बड़ी ठाकुरबाड़ी) न्यास समिति, बाढ़, जिला- पटना'' होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. श्री दिनकर दास त्यागी को भगवान बैंकटेष मंदिर मे पूजा-पाठ का अधिकार होगा। चढ़ावे की राषि जो आयेगी, वह भी दिनकर दास को प्राप्त होगी। मंदिर में दान-पात्र रखा जायेगा। मंदिर में स्थित दुकानों, खेती योग्य भूमि एवं राधाकृष्ण से संबंधित आय, मंदिर के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा एवं निकासी की जायेगी। इसका संचालन अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त स्तर से की जायेगी। आवष्यकता पड़ने पर साधु-संतों का निवास और भोजन, दोनों मंदिरों का राग-भोग का दायित्व न्यास समिति पर रहेगा। 5. न्यास समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि मंदिर की जो भूमि अतिक्रमण कर ली गयी है, उस संबंध में सक्षम पदाधिकारी के यहां कार्रवाई करेंगे तथा मंदिर के नाम से राजस्व अभिलेखोें में दाखिल-खारिज की कार्रवाई करेंगे।
6. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
7. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
8. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
9. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
10. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
11 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
12. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
13. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 14. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
15. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः-35 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 (1) अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़, जिला- पटना- अध्यक्ष (2) श्री दिनकर दास त्यागी चेला मं0 सरयुग दास- उपाध्यक्ष (3) श्री अच्युतानंद याजी पिता-स्व0 पं0 शीलभद्र याजी- सचिव (4) श्री मणिराम दास- संयुक्त सचिव (5) श्री श्याम किषोर प्रसाद पिता- स्व0 मथुरा प्रसाद- कोषाध्यक्ष (6) श्री नरेष राम मिस्त्री पिता- वसंत राय- सदस्य (7) श्री राजकुमार पिता- नरेष प्रसाद- सदस्य (8) श्री गरूड़ दास- सदस्य (9) श्री दयानंद शर्मा पिता- स्व0 राम झरोखा शर्मा- सदस्य (10) श्री दिनेष प्रसाद सिंह पिता- स्व0 हरवंष नारायण सिंह- सदस्य सभी का पता- श्री व्येंकटेष्वरनाथ ठाकुरबाड़ी (बख्तियारपुर बड़ी ठाकुरबाड़ी), बाढ़, जिला- पटना। उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री व्येंकटेष्वरनाथ ठाकुरबाड़ी (बख्तियारपुर बड़ी ठाकुरबाड़ी), बाढ़, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्यों को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि काहस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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24 नवम्बर 2020
सं0 1940--पटना जिलान्तर्गत श्री रामजानकी ठाकुरवाड़ी, सैदपुर, भिखना पहाड़ी मोड़, पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-986 है।
इस न्यास की सूचारू प्रबंधन, उन्नयन तथा सम्यक विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना पत्रांक 1471, दिनांक-07.08.
2015 द्वारा एक न्यास समिति का गठन किया गया था, जिसका कार्यकाल पॉच वर्षो का था, जिसका कार्यकाल समाप्त हो गया। न्यास समिति ने अपने पॉच वर्षो के कार्यकाल के दौरान आय-व्यय विवरण, पर्षद शुल्क नहीं दिया गया। 05 साल का हिसाब 5 साल के पश्चात् 2020 में दाखिल किया, जबकि नवीन न्यास समिति का गठन किया जाता है तथा जो समिति के उद्देष्यों को इंगित करता है। अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख था कि मंदिर से होने वाली आय को राष्ट्रीयकृत बैंक में मंदिर के नाम से सचिव और कोषाध्यक्ष के माध्यम से संचालन किया जायेगा, परन्तु बैंक में खाता व्यक्तिगत नाम से खोला गया और कोषाध्यक्ष को संचालन के लिए पक्ष नहीं बनाया गया। प्राईवेट स्कूल के लिए कमरों का निर्माण कर जगह दी गयी, जिस संबंध में पर्षद से कोई पूर्वानुमति नहीं प्राप्त की गयी तथा यह भी षिकायत प्राप्त हो रही है कि मंदिर में लगभग अवैध रूप से वसूली की जाती है, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं रखा जाता है। यह भी आरोप आ रहा है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा निर्माण की सामग्री भी रखी जाती है, कुछ लोगों द्वारा किराया भुगतान किया जाता है और कुछ लोगों द्वारा नहीं किया जाता है।
उपरोक्त सभी परिस्थितियाँ यह स्पष्ट करती है कि न्यास समिति का काम किसी भी तरह से संतोषप्रद नहीं है अतः नयी न्यास समिति का स्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए गठन किया जाता है।
अतः मैं अखिलेष कुमार जैन, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए पटना जिलान्तर्गत श्री रामजानकी ठाकुरवाड़ी, सैदपुर, भिखना पहाड़ी मोड़ की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु निम्नांकित योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''पटना जिलान्तर्गत श्री रामजानकी ठाकुरवाड़ी, सैदपुर, भिखना पहाड़ी मोड़ न्यास योजना होगा'' तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम '' पटना जिलान्तर्गत श्री रामजानकी ठाकुरवाड़ी, सैदपुर, भिखना पहाड़ी मोड़ न्यास समिति'' होगा। जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी प्रावधानों का सम्यक अनुपालन सुनिष्चित करेंगे तथा वार्षिक आय-व्यय का विवरण, बजट एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन बैठक का कार्यवृत एवं देय शुल्क राषि पर्षद को ससमय भेजेंगे तथा न्यास परम्परा का पालन करेंगे।36 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 6. न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य को न्यास की कोई भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण, बदलैन, बिक्रय, रेहन तथा पट्टा पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा अगर वे एैसा करते है तो शुन्य वो अवैध होगा। अगर कोई सदस्य/पदाधिकारी इस तरह की कार्रवाई करेंगे तो उनपर अपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही न्यास समिति के पदाधिकारियों का यह प्रथम कर्त्तव्य होगा कि न्यास की सभी भू-सम्पत्तियों का जमाबंदी न्यास के नाम से कराकर पर्षद को सूचित करेगें। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतेगें।
7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
8. न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
9. न्यास समिति न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं व्यवस्था के साथ-साथ अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि यदि कोई है, को वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी।
10. इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास सम्पत्ति से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी। न्यास के प्रतिकुल कार्य करते पाये जाने की स्थिति में सदस्य को समिति के कार्यकाल की अवधि के दौरान ही उन्हे सदस्यता से मुक्त किया जा सकता हैं।
12. न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पात्रित होंगे तो उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास अस्थायी समिति गठित की जाती है :-
(1) थानाध्यक्ष, कदमकुँआ - संरक्षक (2) श्री इन्द्रजीत प्रसाद - अध्यक्ष (3) श्री भरत सिंह मेहता - उपाध्यक्ष (4) श्री राजेष कुमार चन्द्रवंषी - सचिव (5) श्री रजनीष सिंह - कोषाध्यक्ष (6) श्री राजन उपाध्याय - सदस्य (7) श्री दूर्गा प्रसाद - सदस्य (8) श्री विनोद यादव - सदस्य (9) श्री संजीव कुमार सिंह - सदस्य श्री रामजानकी ठाकुरवाड़ी, सैदपुर, भिखना पहाड़ी मोड़, जिला-पटना।
छव्ज्म्रू.राजस्व अभिलेख में मंदिर के सभी सम्पत्तियों का इन्द्राज मंदिर के नाम पटना जिलान्तर्गत श्री रामजानकी ठाकुरवाड़ी, सैदपुर, भिखना पहाड़ी मोड़ पर ही रहेगा, किसी व्यक्ति विषेष के नाम पर नामान्तरण अथवा संषोधन नहीं होगा। उपरोक्त न्यास समिति का गठन अस्थाई रूप से एक वर्ष के लिए किया जाता है।
भवदीय, आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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आदेष
17 अप्रील 2021
सं0 210--श्री गौरीषंकर बैकुंठनाथ मंदिर, बैकटपुर, खुसरूपुर, जिला- पटना, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 515 है। इस न्यास के सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक् विकास हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक- 678, दिनांक- 11/07/2013 द्वारा डॉ0 रणवीर नन्दन की अध्यक्षता में एक न्यास समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति द्वारा किये गये विकासात्मक कार्यों के आलोक में पर्षदीय आदेष ज्ञापांक- 1561, दि0- 31/12/2018 द्वारा न्यास समिति के कार्यकाल को दो वर्ष के लिए अवधि विस्तारित किया गया।
न्यास समिति द्वारा इस कार्यकाल में किये गये विकासात्मक कार्य एवं पिछले वर्षों में दाखिल किये गये ऑडिट रिर्पोट को संतोषजनक पाते हुये, पुनः तीन वर्ष लिए न्यास समिति के कार्यकाल को विस्तारित किया जाता है। साथ ही निर्देष दिया जाता है कि मंदिर की आय-व्यय विवरणी प्रतिवर्ष अप्रैल माह में अवष्य दाखिल हो जानी चाहिए।37 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 न्यास समिति के दो सदस्य श्री अजय सिंह किसी दुसरे शहर में रहते हैं तथा श्री योगेन्द्र प्र0 सिंह अपनी अस्वस्थता के कारण त्याग-पत्र दे दिये हैं। उन दोनोंं के स्थान पर न्यास समिति चाहे तो, प्रस्ताव पास कर, दो नये नाम समिति में जोड़ने हेतु भेज सकते हैं।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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अधिसूचनाएं
7 जून 2021
सं0 541--श्री गोपेष्वरनाथ षिव मंदिर, गरहुआ टोला, महेन्द्रु, जिला- पटना बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना की धारा- 34 के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 4213 है।
इस मंदिर की व्यवस्था, दान-कर्त्ता महताबो देवी द्वारा गठित समिति द्वारा किया जा रहा है। इसके कुछ सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है। पूर्व मेें उन्होंने पांच पंचों के नाम से विलेख तैयार किया था जिसके सभी सदस्यों की मृत्यु हो गयी है। मो0 महताबो देवी द्वारा 09 सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया था, जिसके दो सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है। दो सदस्य मंदिर कार्यों में रूचि नहीं रखते हैं। वर्तमान में पांच सदस्यों द्वारा मंदिर की व्यवस्था किया जा रहा है। सार्वजनिक चंदे से मंदिर की सुरक्षा हेतु चहारदीवारी का निर्माण कराया गया है। पूर्व में भी मंदिर के विकास हेतु न्यास गठित किये जाने की सलाह पर्षद द्वारा दी गयी थी। परंतु दोनों पक्षों द्वारा सहमति नहीं होने के कारण न्यास समिति का गठन नहीं किया जा सका। उनका कथन है कि शीघ्र न्यास समिति का गठन किया जाय।
संचिका पर दि0- 06/01/2021 को पन्द्रह व्यक्तियों का हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें ग्यारह व्यक्तियों के नाम का प्रस्ताव प्राप्त हुआ। उक्त प्रस्ताव में मंदिर की देखभाल, चहारदीवार निर्माण, रंग-रोगन आदि का कार्य करने में सक्रिय कुछ सदस्य के नामों पर विचार नहीं किया गया। दि0- 06/01/2021 की बैठक में जो प्रस्ताव पारित किया गया है वह भी उचित प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि उक्त बैठक में पन्द्रह व्यक्तियों के हस्ताक्षर में से ग्यारह व्यक्तियों के नामो का प्रस्ताव है। उक्त बैठक को आम सभा, ग्रामीणों द्वारा की गयी नहीं माना जा सकता है। श्री अषोक कुमार द्वारा कार्यरत सदस्यों में तथा दि0- 06/01/2021 को प्रस्तावित नामों पर विचारोपरांत न्यास समिति का गठन करने का निर्णय लिया जाता है तथा इसकी व्यवस्था हेतु निम्न प्रकार से योजना का निरूपण भी किया जाता है।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री गोपेष्वरनाथ षिव मंदिर, गरहुआ टोला, महेन्द्रु, जिला- पटना'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री गोपेष्वरनाथ षिव मंदिर न्यास योजना, गरहुआ टोला, महेन्द्रु, जिला- पटना'' होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री गोपेष्वरनाथ षिव मंदिर न्यास समिति, गरहुआ टोला, महेन्द्रु, जिला- पटना'' होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर उसमें जमा किया जायेगा। समिति मंदिर के नाम से खाता खोलेगी तथा उक्त खाते का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। यदि खाता पूर्व से संचालित है, तो उक्त खाते में नाम-संषोधन कर उसका संचालन होगा।
4. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
5. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
6. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
7. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
8. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ / मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
9 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।38 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 10. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
11. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 12. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
13. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों / निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
14. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
15. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) श्री देवनाथ सिंह पिता- स्व0 लेखराज प्रसाद- अध्यक्ष़ (2) श्री संजय सिन्हा पिता- स्व0 हरि लाल मेहता- उपाध्यक्ष (3) श्री अषोक कुमार सिन्हा- स्व0 नारायण महतो- सचिव (4) श्री रघुवीर प्रसाद पिता-' स्व0 महावीर महतो कोषाध्यक्ष (5) श्री षिवनाथ मेहता पिता- नथुनी महतो, सदस्य (6) श्री विजय कुमार पिता- स्व0 अनुग्रह महतो सदस्य (7) श्री योगेन्द्र प्रसाद पिता- स्व0 रामभजन महतो सदस्य (8) श्री राकेष कुमार सिन्हा पिता- श्री रणधीर कुमार सिन्हा- सदस्य (9) श्री कुमार इन्द्रजीत पिता- स्व0 शंकर महतो- सदस्य सभी का पता-श्री गोपेष्वरनाथ षिव मंदिर, गरहुआ टोला, महेन्द्रु, जिला- पटना। उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री गोपेष्वरनाथ षिव मंदिर, गरहुआ टोला, महेन्द्रु, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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7 जून 2021
सं0 543--प्राचीन गौरीषंकर मंदिर एवं माँ दुर्गा स्थान तथा भगवती मंदिर, खुसरूपुर, गन्नीचक, स्टेषन रोड, जिला- पटना पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-4493 है।
इस न्यास की सुचारू व्यवस्था एवं प्रबंधन हेतु न्यास समिति गठित किये जाने हेतु अंचलाधिकारी से 11 धार्मिक एवं अच्छे चरित्र के व्यक्तियों के नामों की मांग दि0-30/10/2019 को किया गया था तथा स्मार-पत्र दि0-05/04/20 द्वारा की गयी, के आलोक में कोई प्रस्ताव नहीं प्राप्त हुआ है। इसी बीच ग्रामीणों द्वारा बैठक कर 11 व्यक्तियों के नामों का प्रस्ताव पर्षद को दि0-25/01/2020 को उपलब्ध कराया गया, जिस पर लगभग 50 ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी हैं। अंचलाधिकारी का नाम प्राप्त नहीं होने पर ग्रामीणोें से प्राप्त नामों का चरित्र-सत्यापन संबंधित थाना भेजा गया। थाना द्वारा अपना प्रतिवेदन दि0- 29/09/20 को प्रेषित करते हुए उल्लेख किया कि 04 व्यक्ति क्रमषः कुणाल गौरव एवं उनके पिता- श्री सीताराम त्रिपाठी, विष्णु नारायण चौबे तथा उमेष कुमार सिंह के विरूद्ध आपराधिक कांड दर्ज है। इसके संंबंध में उपरोक्त व्यक्ति पर्षद के समक्ष उपस्थित हैं और कथन किया की सीताराम त्रिपाठी एवं कुणाल कुमार दोनों पिता-पुत्र हैं और मंदिर मेें अवैध रूप से कब्जा करने वाले उमानाथ यादव, दीनानाथ यादव पुत्रगण अर्जुन यादव तथा भाई जग्गी यादव द्वारा सीताराम त्रिपाठी के साथ मारपीट की गयी थी, जिसके संबंध में प्रार्थी ने प्रथम सुचना प्रतिवेदन थाना कांड सं0- 205/18 दर्ज कराया था, इसी से बचने के लिए उमानाथ यादव द्वारा काउण्टर केस खुसरूपुर थाना कांड सं0- 206/18 दर्ज कराया हैै। दोनों प्रथम सूचना रिर्पोट की प्रति उपलब्ध करायी गयी, जिससे स्पष्ट होता है कि जो आरोप लगाया गया है कि वह नो इन्जूरी का केस है और दोनों पक्ष एक-दूसरे विरूद्ध मंदिर के विवाद को लेकर प्रथम सूचना दर्ज करायी गयी। सीताराम त्रिपाठी एवं कुणाल गौरव पिता-पुत्र हैं। अतः मामले की प्रकृति को देखते हुए सीताराम त्रिपाठी को भी न्यास समिति में रखा जाता है। श्री विष्णु नारायण चौबे के संबंध में कथन किया गया कि एस0डी0पी0ओ0 द्वारा जांच में श्री चौबे के विरूद्ध अपराध नहीं पाया गया तथा एक अन्य व्यक्ति उमेष कुमार सिंह के विरूद्ध जो केस है, उसमें पक्षोें के बीच सुलह हो गया है, परंतु चुंकि विष्णु नारायण चौबे पुलिस द्वारा अन्वेषण के पश्चात् कोर्ट का कोई आदेष नहीं है तथा उमेष कुमार सिंह के पक्ष में न्यायालय का कोई निर्णय नहीं है।
उपरोक्त परिस्थिति में शेष 06 व्यक्ति तथा अध्यक्ष के रूप में अनुमंंडल पदाधिकारी को नामित करते हुए न्यास समिति का गठन अस्थायी रूप से 01 वर्ष के लिए किया जाता है।39 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''प्राचीन गौरीषंकर मंदिर एवं माँ दुर्गा स्थान तथा भगवती मंदिर, खुसरूपुर, गन्नीचक, स्टेषन रोड, जिला- पटना'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''प्राचीन गौरीषंकर मंदिर एवं माँ दुर्गा स्थान तथा भगवती मंदिर न्यास योजना, खुसरूपुर, गन्नीचक, स्टेषन रोड, जिला- पटना'' होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''प्राचीन गौरीषंकर मंदिर एवं माँ दुर्गा स्थान तथा भगवती मंदिर न्यास समिति, खुसरूपुर, गन्नीचक, स्टेषन रोड, जिला- पटना'' होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों (सचिव एवं कोषाध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति एक वर्ष के लिए अस्थायी रूप से गठित की जाती है। कार्य संतोषजनक पाये जाने पर अवधि विस्तार के संबंध में निर्णय लिया जायेगाः- (1) अनुमंडल पदाधिकारी, पटना सिटी- अध्यक्ष़ (2) श्री उमेष सिंह यादव पिता-श्री आनन्दी सिंह यादव- उपाध्यक्ष (3) सीताराम त्रिपाठी पिता-स्व0 बांके बिहारी त्रिपाठी- सचिव (4) श्री सूजय कुमार पिता-श्री विजय सिंह- कोषाध्यक्ष (5) श्रीमति सुनीता देवी पति-श्री सुरेन्द्र नट- सदस्य (6) श्री षिवषंकर सिंह पिता-श्री रणविजय सिंह- सदस्य (7) श्री सुनील कुमार पिता-श्री ओम प्रकाष सिन्हा- सदस्य उक्त आदेष के आलोक मेें प्राचीन गौरीषंकर मंदिर एवं माँ दुर्गा स्थान तथा भगवती मंदिर, खुसरूपुर, गन्नीचक, स्टेषन रोड, जिला-पटना के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा।40 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्य न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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15 जून 2021
सं0 729--श्री रामजानकी मंदिर, मसौढ़ी, जिला- पटना पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-949 है।
इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु गठित न्यास समिति का कार्यकाल समाप्त होने जाने के उपरांत नवीन न्यास समिति गठन हेतु अंचलाधिकारी / अनुमंडल पदाधिकारी से दि0- 16/11/19 एवं दि0-16/01/20 द्वारा नाम उपलब्ध कराने का निर्देष दिया गया था। अनुमंडल पदाधिकारी, द्वारा अपने पत्रांक- 204, दि0-24/02/20 द्वारा ग्यारह नामों का प्रस्ताव प्रेषित किया। कार्यरत न्यास समिति द्वारा विगत पांच वर्षों में मंदिर के विकास का कार्य किया गया है, उसका विवरण समिति ने अपने दि0-25/01/21 में उल्लेखित किया है। संचिका से यह भी स्पष्ट है कि समिति समय-समय पर प्रत्येक वर्ष आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क की राषि जमा करती रही है। न्यास समिति गठन करते समय मंदिर की आय 4 लाख 71 हजार रू0 और वर्ष 2018-19 में 11 लाख 71 हजार रू0 दिखायी गयी है तथा न्यास समिति के विगत पांच वर्षों में किये गये विकासात्मक कार्यों भगवान शंकर, माँ दुर्गा, राम जानकी एवं भगवान भाष्कर मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। मंदिर के प्रांगण में संगमरमर व टाइल्स की व्यवस्था पूर्ण की गयी। मंदिर परिसर में शौचालय, पानी आदि की व्यवस्था नियमित रूप से की जाती है तथा मंदिर के पीछे पुजारी के निवास हेतु निर्माण, पानी, शौचालय की व्यवस्था समिति द्वारा की गयी है। उपरोक्त सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रस्तावित सूची में से क्रम सं0- 9 के नाम मेें संषोधन करते हुए श्री मनोज गोस्वामी को डॉ0 अवधेष शर्मा के स्थान पर रखते हुए न्यास समिति अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए गठित करने का निर्णय लिया जाता है। इनका चरित्र-सत्यापन प्राप्त होने पर विस्तार / स्थायी किये जाने पर विचार किया जायेगा।
अतः मैं, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की उप विधि सं0- 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''श्री रामजानकी मंदिर, मसौढ़ी, जिला- पटना'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री रामजानकी मंदिर न्यास योजना, मसौढ़ी, जिला- पटना'' होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री रामजानकी मंदिर न्यास समिति, मसौढ़ी, जिला- पटना'' होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि मंदिर की जो भूमि अतिक्रमण कर ली गयी है, उस संबंध में सक्षम पदाधिकारी के यहां कार्रवाई करेंगे तथा मंदिर के नाम से राजस्व अभिलेखोें में दाखिल-खारिज की कार्रवाई करेंगे।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।41 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) अनुमंडल पदाधिकारी, मसौढ़ी, जिला- पटना- पदेन अध्यक्ष (2) श्री यदुनंदन ंिसह पिता- स्व0 पन्नु लाल- सचिव (3) श्री मृत्युंजय कुमार पिता- स्व0 धनराज सिंह- कोषाध्यक्ष (4) श्री शषि प्रसाद गुप्ता पिता- स्व0 राम खेलावन प्रसाद गुप्ता- सदस्य (5) श्री सिद्धनाथ केषरी पिता- विषुब लाल केषरी- सदस्य (6) श्री चन्द्रकेत सिंह चंदेल पिता- स्व0 कामता सिंह- सदस्य (7) श्री सुनील कुमार सिंह पिता- स्व0 षिव लाल सिंह- सदस्य (8) श्री पंकज कुमार पिता- श्री हरवंष सिंह- सदस्य (9) श्री मनोज गोस्वामी- सदस्य (10) श्री पंकज कुमार सिंह पिता- स्व0 जनेष्वर प्रसाद सिंह- सदस्य (11) श्रीमति कुमार खुषबु रानी पति- श्री विजय कुमार सिंह- सदस्य सभी का पता- श्री रामजानकी मंदिर, मसौढ़ी, जिला- पटना। उक्त आदेष के आलोक मेें ''श्री रामजानकी मंदिर, मसौढ़ी, जिला- पटना'' के नाम मेें किसी प्रकार को कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। नोटः-न्यास समिति/पदाधिकारी/सदस्यों को न्यास की कोई भी सम्पत्ति/भूमि का हस्तान्तरण/बदलैन/विक्रय/पट्टा/ लीज आदि पर देने या किसी प्रकार से न्यास सम्पत्ति का दुरूपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो शुन्य वो अवैध होगा तथा न्यास समिति के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।
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12 जुलाई 2021
सं0 1745--पटना जिलान्तर्गत गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास समिति, रोड नं0-12, गर्दनीबाग पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0-1391 है।
इस न्यास की व्यवस्था हेतु पर्षदीय ज्ञापांक- 1561, दिनांक-14/08/2015 द्वारा न्यास समिति का गठन पांच वर्षों के लिए किया गया था। न्यास समिति द्वारा अपने कार्यकाल में अंकेक्षण प्रतिवेदन, आय-व्यय विवरणी, पर्षद शुल्क आदि ससमय पर्षद में समर्पित किया जाता रहा। पर्षद को श्री अरूण कुमार वर्मा- सचिव का प्रतिवेदन पत्रांक-38, दिनांक- 06/07/2020 प्राप्त है, जिसमें न्यास समिति के बैठक के कार्यवाई की प्रति समर्पित करते हुए, न्यास समिति के कार्यकाल को विस्तारित करने का अनुरोध किया गया। इस बीच न्यास के सचिव- श्री अरूण कुमार वर्मा का निधन दि0-21/09/20 को हो गया। पर्षद को न्यास समिति के पत्रांक- 01, दिनांक- 17/06/21 द्वारा एक सूची प्राप्त हुयी। इस सूची में न्यास समिति को अधिसूचित किया जाने का अनुरोध किया गया।
उपरोक्त परिस्थिति में न्यास समिति द्वारा अपने कार्यकाल में किये गये कार्यों के आलोक में प्रस्तावित सदस्यों की न्यास समिति गठित किये जाने का निर्णय पर्षद द्वारा लिया जाता है।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा- 32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उप विधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए ''गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास समिति, रोड नं0- 12, गर्दनीबाग, पटना- 800002'' के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है ।
योजना
1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास योजना, रोड नं0- 12, गर्दनीबाग, पटना- 800002'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास42 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 समिति का नाम ''गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास समिति, रोड नं0- 12, गर्दनीबाग, पटना- 800002'' होगा, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल संपत्ति के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकासी कर व्यय किया जायेगा।
4. न्यास समिति को यह भी निर्देष दिया जाता है कि मंदिर की जो भूमि अतिक्रमण कर ली गयी है, उस संबंध में सक्षम पदाधिकारी के यहां कार्रवाई करेंगे तथा मंदिर के नाम से राजस्व अभिलेखोें में दाखिल-खारिज की कार्रवाई करेंगे। अधिनियम की धारा-44 के प्रावधान लागु रहेंगे।
5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ध्यान रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण्ण रखा जायेगा। महिला दर्षनार्थियों/श्रद्धालुओं की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा।
8. न्यास समिति द्वारा मठ/मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी तथा उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मठ/मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो एवं पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो।
10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के उपरांत बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्र्ता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन हेतु भेजेगी।
16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित ग्यारह सदस्यों की स्थायी न्यास समिति का गठन किया जाता है :-
(1) डॉ0 रणवीर नन्दन - अध्यक्ष (2) डॉ0 संजीव कुमार (विभागाध्यक्ष, हृदय रोग) - सचिव '' (3) पं0 श्री सत्यप्रकाष पाण्डेय - कोषाध्यक्ष '' (4) श्री अंजनी कुमार सिंह (भा0प्र0से0, अ0प्रा0) - सदस्यााध्यक्ष (5) श्री चंचल कुमार (भा0प्र0से0) - ''सदस्य (6) श्री अषोक कुमार सिंह (आई0पी0एस0) - ''सदस् (7) श्री अंजनी कुमार सिन्हा (पुलिस उपाधीक्षक, अ0प्रा0) - ''सदस्य (8) श्री आषीष कुमार मिश्रा (वरिष्ठ पत्रकार) - '' '' (9) डॉ0 नीता नाथ - '' '' (10) श्री वेद प्रकाष - '' '' (11) पं0 श्री मुकेष रंजन झा (काली पुजारी) - '' पता-श्री गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी प्रबंध न्यास समिति, रोड नं0- 12, गर्दनीबाग, पटना- 2.
''आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।43 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
29 जुलाई 2021
सं0 2320--बोधगया मठ, जिला-गया पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-934/1960 है।
इस न्यास के सुचारू प्रबंधन हेतु एक न्यास समिति का गठन पर्षद के आदेष ज्ञापांक-1747, दिनांक-31.10.2020 द्वारा किया गया था। उक्त आदेष को बोधगया मठ के महंथ रमेष गिरि द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0 डब्लु0 जे0 सी0 संख्या-1491/2020 द्वारा प्रष्नगत किया गया। जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने उक्त आदेष को इस आधार पर निरस्त किया कि उक्त आदेष अध्यक्ष द्वारा पारित किया गया है तथा पर्षद को माननीय उच्च न्यायालय ने निर्देष दिया कि पर्षद का गठन हो गया है और दोनों पक्षों को पर्याप्त सुनवाई का अवसर देते हुए नये सिरे से निर्णय करें। याचिका के विचाराधीन रहते हुए महंत रमेष गिरि मठ छोड़कर बनारस या कही अन्यत्र रहने लगे। इस संबंध में उन्होनें कई पत्र भी पर्षद को दिया कि वह डर वष मठ छोड़ रहे है और वर्ष 2020 से इस मठ में रहीं रह रहे है। इसी बीच त्रिवेणी गिरि द्वारा पर्षद को पत्र और फोटोग्राफ उपलब्ध कराया गया कि साधु-संतो और समाज के लोगों द्वारा उन्हें महंत नियुक्त किया गया है। इस संबंध में त्रिवेणी गिरि को अभी पर्षद द्वारा मान्यता नहीं दी गयी है, चूंकि यह सुनवाई का विषय है। इस संबध्ां में महंत रमेष गिरि के अधिवक्ता का कथन है कि रमेष गिरि को कभी भी महंत के पद से हटाया नहीं गया है और न ही कोई आदेष इनके विरूद्ध पारित किया गया है।
उपरोक्त सभी परिस्थितियाँ यह स्पष्ट करती है कि महतों की नियुक्ति के संबंध में गम्भीर विवाद है और इसी विवाद के चलते मठ की सम्पत्ति का दुरूपयोग हो रहा है। इसमें अतिक्रमण कर अवैध निर्माण भी किया जा रहा है दुकानदार आदि द्वारा भी सही तरीके से किराया नहीं दिया जा रहा है और कभी सत्य आय-व्यय विवरण भी किसी भी पक्ष के द्वारा दाखिल नहीं की गयी है तथा मठ के प्रबंधन में न केवल आर्थिक और प्रषासनिक गम्भरी समस्या है, बल्कि इसके साथ-साथ मठ के अन्दर तथा सभी पक्षों के बीच शांति भंग के साथ-साथ किसी अप्रिय घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सभी पक्षों की तरफ से यह प्रार्थना की जा रही है कि जबतक कोई निर्णय नहीं होता जाता है तबतक मन्दिर की व्यवस्था प्रषासनिक पदाधिकारियों की एक समिति बना कर की जाए। अतः बिहार हिन्दु धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए बोधगया मठ, जिला-गया के सुचारू प्रबध्ांन, चल-अचल सम्पत्तियों की सुरक्षा, दुकानों के किराया आदि को सुरक्षित करने के उद्देष्य से प्रषासनिक पदाधिकारियों की समिति अगले आदेष तक के लिए गठन की जाती है। जिसके निम्न सदस्य होगें :-
1. माननीय सदस्य, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद
2. जिला पदाधिकारी, गया
3. वरीय आरक्षी अधीक्षक, गया
4. अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर, गया
5. भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर, गया
6. कार्यपालक पदाधिकारी, बोधगया
समिति द्वारा निम्न कार्य निष्पादित किया जायेगा :-
1. जिला पदाधिकारी, गया/समिति में से चुने हुए व्यक्ति अगले आदेष तक मठ की सभी प्रक्रिया के प्रषासनिक और आर्थिक व्यवस्था एवं चल-अचल सम्पत्ति, किराया आदि को पुर्ण रूप से अपने नियंत्रण में लेते हुए देख-भाल करेंगी।
2. सभी दुकानदार/किरायेदार/पट्टाधारी को निर्देष दिया जाता है कि समिति द्वारा निर्देषित व्यक्ति/जिला पदाधिकारी, गया को ही प्रत्येक माह किराये का भुगतान करेंगे तथा चल-अचल सम्पत्ति से जो आय प्राप्त होगी वह भी उनके द्वारा ही लिया जायेगा।
3. मठ में निवास कर रहे साधुओं द्वारा कोई आयोजन किया जाता है तो उसकी पूर्व सूचना जिला पदाधिकारी को देंगे तब जिला पदाधिकारी उसकी व्यवस्था हेतु खर्च आदि की व्यवस्था भी उक्त समिति द्वारा ही की जायेगी 4. पूर्व परम्पराओं के अनुसार में मठ में पूजा-पाठ जिस प्रकार से चल रहा है, उसी प्रकार चलता रहेगा। 5. जिला पदाधिकारी को यह भी निर्देष दिया जाता है कि अपने स्तर से मन्दिर/मठ में कितनी दुकाने है, कितनी चल-अचल सम्पत्ति है, इसका भी सत्यापन करा ले तथा साथ ही साथ जो खटाले उनका भी निरीक्षण कराकर रिपोर्ट पर्षद के समक्ष शीघ्र भेजे।
6. मठ के बैक खाते में से किसी भी प्र्र्रकार की कोई राषि की निकासी किसी भी व्यक्ति या महंत द्वारा नहीं किया जायेगा।
7. जबतक महंती के बिन्दु पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तबतक मठ में स्थित ''महंथ का आसन'' ग्रहण किसी व्यक्ति द्वारा नहीं किया जायेगा। सामान्य रूप से पूजा-पाठ सभी व्यक्ति कर सकते है।
''आदेश से, अखिलेष कुमार जैन, अध्यक्ष।44 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 सूचना -------
सं0 1015--मैं धर्मेन्द्र कुमार सिंह, पिता स्व॰ कुबेर सिंह, निवासी-राशी निवास, पश्चिमी कच्ची तालाब रोड, गर्दनीबाग, पो॰-जी॰पी॰ओ॰, जिला- पटना-800001 (बिहार) शपथ पत्र सं॰-15095 तारीख 14.09.2021 द्वारा यह घोषणा करता हूँ कि Vansh (वंश) मेरा पुत्र है। अब वह Kumar Vansh के नाम से जाना एवं पहचाना जायेगा।
धर्मेन्द्र कुमार सिंह।
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सं0 1016--मैं, शिवम (SHIVAM) पिता- रमेश कुमार सिंह, पता- कुसुमपुरम कॉलोनी, दानापुर, थाना- रूपसपुर, पटना। शपथ पूर्वक बयान करता हूँ कि मैं अब शिवम सिंह के नाम से जाना जाऊँगा। शपथपत्र संख्या-442 दिनांक 27.08.2021.
शिवम (SHIVAM)।
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सं0 1017--मैं हर्ष, पिता-स्व0 रंजीत शरण, बी0 73 पुलिस कॉलोनी अनिसाबाद, थाना-गर्दनीबाग, पटना-800002, बिहार शपथ पत्र सं0 10295/28.06.2021 द्वारा सुचित करता हूॅं कि अब मैं हर्ष शरण के नाम से जाना व पहचाना जाउंगा।
हर्ष। No. 1017--I, Harsh S/O Late Ranjit Sharan residing at B-73, Police Colony Anisabad, Patna, Bihar 800002, have changed my name to Harsh Sharan vide affidavit no. 10295 dated 28/06/21 at Patna.
Harsh.
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सं0 1018-- मैं कुमार गौरव, पिता-नवनीत शरण, निवासी बी-73, पुलिस कॉलोनी, अनिसाबाद, थाना-गर्दनीबाग, पटना-800002 बिहार शपथ पत्र सं0 10296/28.06.21 द्वारा सुचित करता हूं कि अब मैं गौरव शरण के नाम से जाना व पहचाना जाउंगा।
कुमार गौरव। No. 1018--I, Kumar Gaurav S/o Navneet Sharan residing at B-73, Police colony Anisabad, Patna, Bihar 800002, have changed my name to Gaurav Sharan vide affidavit no. 10296 dated 28/06/21 at Patna.
Kumar Gaurav.
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No. 1019-- I, AAKANKSHA KUMARI, D/o Jitendra Bhatt R/o Anand Vihar Comp., New P. P. Colony, Patna-13 vide affidavit no.12409 dated 22.12.2020 shall be known as Aakanksha Bhatt.
AAKANKSHA KUMARI.
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No. 1023-- I, Mithlesh Kumar S/o Dev Narayan Ray resident of At+P.O.-Bairiya P.S.- Gopalpur, Distt. Patna 800007 declare vide affidavit no. 171 dated 23.09.2021 shall be known as Mithlesh Narayan Ray.
Mithlesh Kumar.
————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 29—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in45 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021
बिहार गजट
का
पूरक(अ0)
प्राधिकारी }kjk प्रकाशित
—————
सं0 (cid:356)ा0वि0-14(सा0)गो0-01/2017-598208
(cid:356)ामीण कवािस कवभाग
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संकल्प
11 अक्तूबर 2021
(cid:373)ी (cid:778)(िcid:700) पाठक, तत्कालीन (cid:356)ामीण विकास पदाधिकारी-सह-(cid:366)भारी (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, कु चायकोट, गोपालगंज सम्प्रति (cid:366)खंड विकास पदाधिकारी, सं(cid:356)ामपुर, पूव(cid:334) चम्पारण के वि(cid:349)(cid:544) शि(cid:407)क नियोजन, 2008 के अन्तर्गत अनियमित एवं अवैधानिक ढंग से नियोजन करने संबंधी आरोपों के लिये जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के प(cid:361)ांक 579/स् था0 दिनांक 17.08.2021 (cid:554)ारा विहित (cid:366)प(cid:361) म(cid:336) आरोप प(cid:361) उपलब्ध कराया गया। जिला पदाधिकारी, पूव(cid:334) चम्पारण (cid:554)ारा (cid:366)तिवेदित आरोपों पर (cid:373)ी पाठक का स्पष्टीकरण प्राप्त है।
(cid:373)ी पाठक के वि(cid:349)(cid:544) आरोप एवं इनके (cid:554)ारा समपि(cid:330)त स्पष्टीकरण की विभाग (cid:554)ारा समी(cid:407)ा की गयी। समीक्षोपरान्त आरोप की वृहत जॉंच हेतु (cid:373)ी पाठक के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने का निण(cid:330)य लिया गया।
(cid:373)ी पाठक के वि(cid:349)(cid:544) विभागीय काय(cid:330)वाही संचालित करने हेतु (cid:373)ी शैलेन्द्र कु मार भारती, उप सचिव, (cid:356)ामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज (cid:554)ारा नामित पदाधिकारी को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है ।
तदनुसार एतद (cid:554)ारा (cid:373)ी पाठक को आदेश दिया जाता है कि संकल्प की (cid:366)ति प्राप्त होने पर संचालन पदाधिकारी के सम(cid:407) उप(cid:304)(cid:830)थत होकर जैसा कि संचालन पदाधिकारी आदेश द(cid:336) अपना स्पष्टीकरण/लि(cid:304)खत बचाव बयान (साक्ष्य सहित) उनके सम(cid:407) प्रस्तुत कर(cid:336) गे।
विभागीय काय(cid:330)वाही के संचालन के प्रस्ताव म(cid:336) स(cid:407)म (cid:366)ाधिकार का आदेश प्राप्त है।
आदे-आदे कदया जाता है कि संकल्प ीि (cid:366)कत सभी संबंकधतं र्ोि सूचनाथ(cid:330) एवं आवश्यक ािर(cid:330) वाई हेतु भेज दी जाय ।
आदेश से, बालामु(cid:349)गन डी0, सचिव।
------- सं0 1/एम02-60-15/2021 गृ0आ0—7268 गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ----- संकल्प 20 सितम्बर 2021 आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के जाँच प्रतिवेदन एवं उसमें निहित निष्कर्ष तथा पुलिस महानिदेशक, बिहार की अनुशंसा के आलोक में भोजपुर, आरा जिला में बालू के अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, इसमें संलग्न लोगों को मदद पहुँचाने, अवैध उत्खनन/परिवहन में संलिप्त रहने, अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने एवं संदिग्ध आचरण से संबंधित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(1)(a) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते46 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 हुए श्री राकेश कुमार दूबे, भा0पु0से0 (नवप्रोन्नत), तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, भोजपुर, आरा को विभागीय संकल्प 5102, दिनांक 27.07.2021 के माध्यम से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। साथ ही, उक्त गंभीर आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित करने के निमित विभागीय ज्ञापन 6293, दिनांक 24.08.2021 द्वारा ''आर्टिकल्स ऑफ चार्ज'', ''स्टेटमेंट ऑफ इम्प्यूटेषन्स ऑफ मिसबिहेवियर एण्ड मिसकण्डक्ट'' एवं साक्ष्य/गवाहा तालिका सहित निर्गत किया गया।
2. और चूँकि अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के अंतर्गत विहित प्रक्रिया के आलोक में श्री दूबे के निलंबन के संबंध में अपेक्षित प्रतिवेदन गृह मंत्रालय, भारत सरकार को भेजते उनके निलंबन को संपुष्ट करने हेतु विभागीय पत्रांक 5202, दिनांक 28.07.2021 के माध्यम से अनुरोध किया गया।
3. और चूँकि गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पत्रांक 26011/24/2021-IPS.II, दिनांक 06.08.2021 के माध्यम से श्री दूबे के निलंबन अवधि को दिनांक 24.09.2021 तक संपुष्ट की गयी है अर्थात श्री दूबे के निलंबन अवधि की वैधता निलंबन की तिथि 27.07.2021 से 60 दिनों अर्थात दिनांक 24.09.2021 तक है।
4. और चूँकि श्री दूबे के विरूद्ध आरोप पत्र दिनांक 24.08.2021 को निर्गत करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने हेतु नियमानुसार 30 दिनाें का समय प्रदान किया गया है। श्री दूबे से उनका लिखित अभिकथन/बचाव बयान प्राप्त नहीं हुआ है। श्री दूबे से बचाव-बयान प्राप्त होने के पश्चात् उसपर सक्षम प्राधिकार के निर्णय/आदेष के अनुरूप अग्रतर कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित होगी। इसके अतिरिक्त श्री दूबे के विरूद्ध आय से अधिक (अप्रत्यानुपातिक धनार्जन) की जाँच हेतु पुलिस महानिदेशक, बिहार/आर्थिक अपराध इकाई, बिहार से अनुरोध किया गया है। सम्प्रति आर्थिक अपराध इकाई की जाँच की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। ऐसी स्थिति में श्री दूबे के निलंबन को बनाये रखने के औचित्य/आधार के संबंध में निलंबन समीक्षा समिति द्वारा विचार किया गया तथा विचारोपरांत समिति द्वारा श्री दूबे के निलंबन अवधि को दिनांक 24.09.2021 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 22.01.2022 तक विस्तारित करने की अनुषंसा की गयी, जिसे सक्षम प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
5. अतः अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के प्रावधानों के अंतर्गत निलंबन समीक्षा समिति की अनुषंसा के आलोक में श्री राकेश कुमार दूबे, भा0पु0से0 (नवप्रोन्नत) के निलंबन की अवधि दिनांक 24.09.2021 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 22.01.2022 तक विस्तारित की जाती हैै।
6. श्री राकेश कुमार दूबे, भा0पु0से0 (नवप्रोन्नत) को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
----- सं0 1/एम02-60-15/2021 गृ0आ0--7269 ----- संकल्प 20 सितम्बर 2021 आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के जाँच प्रतिवेदन एवं उसमें निहित निष्कर्ष तथा पुलिस महानिदेशक, बिहार की अनुशंसा के आलोक में औरंगाबाद जिला में बालू के अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन में अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, इसमें संलग्न लोगों को मदद पहुँचाने, अवैध उत्खनन/परिवहन में संलिप्त रहने, अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने एवं संदिग्ध आचरण से संबंधित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(1)(ंa) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री सुधीर कुमार पोरिका, भा0पु0से0 (2010), तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, औरंगाबाद को विभागीय संकल्प 5103, दिनांक 27.07.2021 के माध्यम से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। साथ ही, उक्त गंभीर आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित करने के निमित विभागीय ज्ञापन 6292, दिनांक 24.08.2021 द्वारा ''आर्टिकल्स ऑफ चार्ज'', ''स्टेटमेंट ऑफ इम्प्यूटेषन्स ऑफ मिसबिहेवियर एण्ड मिसकण्डक्ट'' एवं साक्ष्य/गवाहा तालिका सहित निर्गत किया गया।
2. और चूँकि अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के अंतर्गत विहित प्रक्रिया के आलोक में श्री पोरिका के निलंबन के संबंध में अपेक्षित प्रतिवेदन गृह मंत्रालय, भारत सरकार को भेजते उनके निलंबन को संपुष्ट करने हेतु विभागीय पत्रांक 5202, दिनांक 28.07.2021 के माध्यम से अनुरोध किया गया।
3. और चूँकि गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पत्रांक 26011/25/2021-IPS.II, दिनांक 06.08.2021 के माध्यम से श्री पोरिका के निलंबन अवधि को दिनांक 24.09.2021 तक संपुष्ट की गयी है अर्थात श्री पोरिका के निलंबन अवधि की वैधता निलंबन की तिथि 27.07.2021 से 60 दिनों अर्थात दिनांक 24.09.2021 तक है।
4. और चूँकि श्री पोरिका के विरूद्ध आरोप पत्र दिनांक 24.08.2021 को निर्गत करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने हेतु नियमानुसार 30 दिनाें का समय प्रदान किया गया है। श्री पोरिका से उनका लिखित अभिकथन/बचाव बयान प्राप्त नहीं हुआ है। श्री पोरिका से बचाव-बयान प्राप्त होने के पश्चात् उसपर सक्षम प्राधिकार के निर्णय/आदेष के अनुरूप अग्रतर कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित होगी। इसके अतिरिक्त श्री पोरिका के विरूद्ध आय से अधिक (अप्रत्यानुपातिक धनार्जन) की जाँच हेतु पुलिस महानिदेशक, बिहार/आर्थिक अपराध इकाई, बिहार से अनुरोध किया गया है। सम्प्रति आर्थिक अपराध इकाई की जाँच की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। ऐसी स्थिति में श्री पोरिका के निलंबन को बनाये रखने के औचित्य/आधार के संबंध में निलंबन समीक्षा समिति द्वारा विचार किया गया तथा विचारोपरांत समिति द्वारा श्री पोरिका के निलंबन अवधि को दिनांक 24.09.202147 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 22.01.2022 तक विस्तारित करने की अनुषंसा की गयी, जिसे सक्षम प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
5. अतः अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुषासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के प्रावधानों के अंतर्गत निलंबन समीक्षा समिति की अनुषंसा के आलोक में श्री सुधीर कुमार पोरिका, भा0पु0से0 (2010) के निलंबन की अवधि दिनांक 24.09.2021 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 22.01.2022 तक विस्तारित की जाती हैै।
6. श्री सुधीर कुमार पोरिका, भा0पु0से0 (2010) को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
----- सं0 27/आरोप-01-105/2019-सा0प्र0-11655 सामान्य प्रशासन विभाग ------ संकल्प 1 अक्तूबर 2021
श्रीमती पूनम कुमारी, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 1185/11, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, खगड़िया के विरूद्ध कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, खगड़िया के पद पर पदस्थापन अवधि में विभिन्न टैक्स मदों में वसूल की गई कुल राशि रू0 85.45 लाख रूपये नगर पालिका निधि के बैंक खाते/ट्रेजरी में जमा नहीं करने एवं गंभीर विाीय अनियमितता बरतने संबंधी आरोपों के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-5426 दिनांक-18.10.19 द्वारा विहित प्रपत्र-'क' में आरोप-पत्र उपलब्ध कराया गया।
2. नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त आरोप पत्र के आलोक में इस विभाग के स्तर से आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। तदोपरांत विभागीय पत्रांक-1963 दिनांक-06. 02.2020 द्वारा श्रीमती पूनम कुमारी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्रीमती कुमारी के पत्र दिनांक-29.12.2020 द्वारा विभाग को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
3. श्रीमती पूनम कुमारी के स्पष्टीकरण की समीक्षा के क्रम में विभागीय पत्रांक-1694 दिनांक-08.02.2021 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग से यह सूचित करने का अनुरोध किया गया कि आरोप-पत्र में अंकित राशि 85.45 लाख रूपये नगरपालिका निधि के बैंक खाते/ट्रेजरी में जमा किया गया है अथवा नहीं। नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2548 दिनांक-06.08.2021 द्वारा सूचित किया गया कि ''इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, खगड़िया के पत्रांक 361 दिनांक 10.07.2021 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि उनके द्वारा विभिन्न टैक्स मदों में वसूल की गई राशि कुल 8545130/- (पच्चासी लाख पैतालिस हजार एक सौ तीस) रूपये में से 5,65,920/- (पांच लाख पैंसठ हजार नौ सौ बीस) रूपये चालान संख्या-सी020 दिनांक-15.11.2018 द्वारा कोषागार में जमा कराया गया है। स्पष्ट है कि श्रीमती पूनम कुमारी द्वारा कार्यालय प्रधान के रूप में अपने पदीय दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया गया है तथा वे राशि नगर पालिका निधि के खाते/ कोषागार में जमा नहीं करने एवं गंभीर विाीय अनियमितता बरतने के लिए दोषी है।''
4. नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्रतिवेदित आरोप एवं प्रतिवेदन तथा श्रीमती पूनम कुमारी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सम्यक् समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरांत प्रस्तुत मामले की विस्तृत जांच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17(2) के प्रावधानों के तहत श्रीमती पूनम कुमारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है। 5. श्रीमती पूनम कुमारी के विरूद्ध संचालित की जा रही इस विभागीय कार्यवाही में आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी/उपस्थापन पदाधिकारी जिला पदाधिकारी, खगड़िया द्वारा नामित वरीय पदाधिकारी होंगे।
6. श्रीमती पूनम कुमारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु संचालन पदाधिकारी के आदेशानुसार उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होगें। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।
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सं0 27/आरोप-01-113/2019-सा0प्र0-11813
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5 अक्तूबर 2021
श्री प्रेमकान्त सूर्य (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1363/11, तत्कालीन प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी, रोहतास के विरूद्व खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-4903 दिनांक-16.10.2019 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।48 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 2. विभागीय पत्रांक-8227 दिनांक-06.08.2021 द्वारा श्री सूर्य से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सूर्य के पत्रांक-842, दिनांक-24.08.2021 द्वारा अपना स्पष्टीकरण इस विभाग को उपलब्ध कराया गया।
श्री सूर्य के विरूद्ध आरोप है कि सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा दिनांक-23.09.
2019 को Video conferencing के माध्यम से आयोजित विभागीय कार्यो की समीक्षा के क्रम में रोहतास जिलान्तर्गत कुल 332677 कार्डधारकों (RC-01) एवं कुल 1604473 सदस्यों (RC-02) में से क्रमशः 278729 एवं 1127703 आधार सीडिंग किया गया। वर्तमान में (RC-01) आधार सीडिंग हेतु 53948 कार्डधारियों एवं RC-02 आधार सीडिंग हेतु 476770 लाभुकों का आधार सीडिंग लंबित है। रोहतास जिले में RC-01 (83.78%) एवं RC-02 (70.28%) की प्रविष्टि की गति काफी धीमी है। समीक्षा के क्रम में यह भी पाया गया कि रोहतास जिले में राशन कार्ड में नये नाम जोड़ने से संबंधित स्वीकृत कुल 63503 आवेदनों में से मात्र 11254 नये राशन कार्ड निर्गत/ निर्माण किये गये हैं, जबकि 52249 आवेदनों का अंतिम रूप से निष्पादन नहीं किया गया है। अन्त्योदय अन्न योजनान्तर्गत 898 राशन कार्डो का सत्यापन अब तक लंबित है एवं विभाग द्वारा जन वितरण प्रणाली दुकानदारों से संबंधित सूचना मांगी गयी थी, जिसे ससमय उपलब्ध नहीं कराया गया।
समर्पित स्पष्टीकरण में श्री सूर्य का कहना है कि जिला आपूर्ति पदाधिकारी के अतिरिक्त प्रभारित पद के दायित्वों का निर्वहन करने का उनके द्वारा प्रयास किया गया है, जिसके तहत (RC-01) एवं (RC-02) आधार सीडिंग में रोहतास जिला द्वारा क्रमशः 85 प्रतिशत एवं 71 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया गया है। राशन कार्ड निर्गमन की कार्रवाई हेतु श्री सूर्य द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को निदेशित किया गया है।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में प्रतिवेदित आरोप एवं श्री सूर्य से प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक् समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त राशन कार्ड में नये नाम जोड़ने से संबंधित लक्ष्य का मात्र 35 प्रतिशत पूरा करने के फलस्वरूप इस मामले में अपने दायित्व का सम्य्क निर्वहन नहीं कर पाने, दायित्वहीनता एवं लापरवाही बरतने का आरोप के लिये इन्हें दोषी मानते हुये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित)के नियम-14 के अन्तर्गत (i) ''निन्दन'' का दंड देने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया।
9. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री प्रेमकान्त सूर्य (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1363/11, तत्कालीन प्रभारी जिला आपूर्ति पदाधिकारी, रोहतास के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित) के नियम-14 के अन्तर्गत (i) ''निन्दन'' (वर्ष 2019-20) का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।
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सं0 27/मुक0-5-5/2020-सा0प्र0-12308
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20 अक्तूबर 2021
श्री मनोज कुमार रजक, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-893/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नरकटियागंज, बेतिया द्वारा बिहार बोर्ड नियमावली के नियम 332 एवं 333 की अनदेखी करने, प्रखंड नजारत के रोकड़बही में सामयिक प्रविष्टि नहीं कराने एवं शिथिलता बरते जाने से संबंधित प्रतिवेदित आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, प0 चम्पारण, बेतिया ने श्री रजक से स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। श्री रजक ने अपना स्पष्टीकरण जिला पदाधिकारी, बेतिया को समर्पित किया। इनके स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत जिला पदाधिकारी, बेतिया द्वारा श्री रजक के विरूद्ध आरोप पत्र गठित कर स्पष्टीकरण सहित इस विभाग को उपलब्ध कराते हुए इनके विरूद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई करने एवं लघु दण्ड देने की अनुशंसा की गई।
2 जिला पदाधिकारी, प0 चम्पारण, बेतिया द्वारा श्री रजक के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पर इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण तथा जिला पदाधिकारी की अनुशंसा के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6333 दिनांक-11.06. 2008 द्वारा इन्हें निन्दन की सजा (वर्ष 2006-07) दी गयी।
3 उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री रजक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी.डब्लू.जे.सी. सं.-13168/2010 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक-18.04.2018 को आदेश पारित किया गया है, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत् है :-
Accordingly the order dated 11th June, 2008 passed by the Additional secretary is set aside. If so advised, they may proceed in accordance with law.
4 माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक-18.04.2018 को पारित आदेश के आलोक में श्री मनोज कुमार रजक, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-893/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नरकटियागंज, बेतिया के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6333 दिनांक-11.06.2008 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड निन्दन की सजा (वर्ष 2006-07) को वापस लेने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया है।
5. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा दिनांक-18.04.2018 को पारित आदेश के आलोक में श्री मनोज कुमार रजक, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक-893/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी,49 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 नरकटियागंज, बेतिया के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6333 दिनांक-11.06.2008 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड निन्दन की सजा (वर्ष 2006-07) को वापस लिया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जय शंकर प्रसाद, संयुक्त सचिव।
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सं0 2/आरोप-01-54/2014-सा0प्र0-10397
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13 सितम्बर 2021
श्री जय किशोर प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 777/08, तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्, सिवान के विरूद्ध नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 2232 दिनांक 25.07.2014 द्वारा साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' एवं संचिका में उपलब्ध साक्ष्य/अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित कर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।
श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 13628 दिनांक 29.09.2014 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद के पत्र दिनांक 25.10.2014 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 17109 दिनांक 12. 12.2014 द्वारा श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण पर नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक 2602 दिनांक 13.08.2021 द्वारा श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण पर मंतव्य उपलब्ध कराया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण को असंतोषजन पाते हुए आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।
श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनके स्पष्टीकरण एवं नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य की सम्यक् समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त आरोप की गंभीरता एवं नगर विकास एवं आवास विभाग के मंतव्य के आलोक में गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के प्रावधानों के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
जिला पदाधिकारी, सिवान को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।
श्री प्रसाद से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।
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सं0 2/आरोप-01-03/2018-सा0प्र0-9180
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19 अगस्त 2021
श्री अनिल कुमार सिन्हा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1049/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी के विरूद्ध वर्ष 2007-08 में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजनान्तर्गत 14वीं लोकसभा के माननीय सांसद श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव, झंझारपुर संसदीय क्षेत्र की अनुशंसा के अनुसार स्वी—त योजनाओं को ससमय पूर्ण कराये जाने में उदासीनता एवं लापरवाही बरतने संबंधी आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 455 दिनांक 12.03.2020 द्वारा आरोप-पत्र गठित कर उपलब्ध कराया गया।
उक्त आरोप-पत्र एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर श्री सिन्हा के विरूद्ध विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के संबंध में श्री सिन्हा से विभागीय पत्रांक 11766 दिनांक 10.12.2020 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। उक्त के आलोक में श्री सिन्हा के पत्रांक 1016 दिनांक 29.12.2020 द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 1022 दिनांक 25.01.2021 द्वारा जिला पदाधिकारी, मधुबनी से मंतव्य की मांग की गयी, जिसके आलोक में जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 1294 दिनांक 27.07.2021 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया। श्री सिन्हा के विरूद्ध आरोप, इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी का मंतव्य निम्नलिखित है :- आरोप सं0-01 :-बाबूबरही प्रखंड के अन्तर्गत हनुमान नगर ब्रह्मोत्तरा में कब्रिस्तान की घेराबंदी का निर्माण कार्य से संबंधित योजना के कार्यान्वयन हेतु प्रथम किस्त मो0 2,22,300.00 रू0 उपलब्ध करा दिये जाने के बावजूद आरोपी पदाधिकारी50 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 द्वारा योजना को पूर्ण कराने में अभिरूचि नहीं ली गयी तथा समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया, फलस्वरूप योजना अपूर्ण रही।
स्पष्टीकरण :-अधोहस्ताक्षरी बाबूबरही प्रखंड, मधुबनी के प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में दिनांक 16.04.2007 से 02.04.2008 तक प्रभार में थे। आरोप में वर्णित दोनों योजना मेरे प्रभार वाले वित्तीय वर्ष 2007-08 का है। विदित हो कि 2007 में बाबूबरही प्रखंड के साथ-साथ मधुबनी जिला के कई अन्य प्रखंडों में भीषण बाढ़ आने के कारण आवागमन के सारे मार्ग अवरूद्ध थे। योजना को पूर्ण करने हेतु आवश्यक सामग्री यथा गिट्टी, बालू, सिमेंट आदि का परिवहन किसी भी रूप में संभव नहीं था। उस समय मैं अंचल अधिकारी बाबूबरही-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाबूबरही के पद पर कार्यरत था। तत्कालीन जिला पदाधिकारी, मधुबनी श्री राहुल सिंह, भा0प्र0से0 द्वारा सभी अंचलाधिकारियों को उक्त भीषण बाढ़ के समय सभी कार्यों से आपदा राहत कार्य को प्राथमिकता देकर बाढ़ में फँसे लोगों की जान बचाने एवं उन्हें राहत मुहैया कराने का निदेष दिया गया था। अधोहस्ताक्षरी द्वारा भी तत्कालीन जिला पदाधिकारी के आदेश के अनुपालन में बाढ़ पीड़ितों के मदद के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर किया गया।
उसी समय सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार द्वारा मेरी सेवा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार से वापस कर मुझे कार्यपालक दण्डाधिकारी के रूप में समाहरणालय, पटना में पदस्थापित करते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय में योगदान की तिथि से ही प्रतिनियुक्ति कर दी गयी। सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार के उक्त आदेश के अनुपालन में मेरे द्वारा दिनांक 02.04.2008 को अंचल अधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाबूबरही का प्रभार सौंपकर समाहरणालय, पटना में योगदान किया गया।
अधोहस्ताक्षरी के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र (प्रपत्र 'क') में आरोप मदों को सिद्ध करने हेतु साक्ष्य के रूप में जिन 29 (उन्तीस) पत्रों का उल्लेख किया गया है वे सभी पत्र वर्ष 2010 से 2017 के बीच निर्गत है, जबकि अधोहस्ताक्षरी द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार की अधिसूचना के आलोक में दिनांक 02.04.2008 को ही अंचल अधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाबूबरही का प्रभार त्याग दिया गया था। उक्त तथ्य श्री संजय कुमार सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक 344905/पटना दिनांक 26.12.2017 में उल्लेखित अधोहस्ताक्षरी के पदस्थापन अवधि से भी प्रमाणित होता है।
अतः वर्ष 2007-08 में मधुबनी में आए भीषण बाढ़ के कारण आवागमन का मार्ग बाधित होने, फरवरी, 2008 में ही मेरा स्थानान्तरण हो जाने तथा आरोप को सिद्ध करने हेतु साक्ष्य के रूप में निर्गत पत्र प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाबूबरही के पद पर पदस्थापन अवधि (16.04.2007 - 02.04.2008) के दो साल बाद 2010 से 2017 के बीच निर्गत होने संबंधी तथ्यों से स्पष्ट है कि मुझपर लगाया गया आरोप तथ्यहीन एवं बेबुनियाद है।
जिला पदाधिकारी, मधुबनी का मंतव्य ः-बाबूबरही प्रखंड के अन्तर्गत हनुमान नगर ब्रह्मोत्तरा में कब्रिस्तान की घेराबंदी का निर्माण कार्य से संबंधित मूल अभिलेख संख्या-03/2007-08 का अवलोकन किया।
अभिलेख के अनुसार दिनांक 30.11.2007 तक संवेदक को दी गई कुल राशि 2,22,500.00 रू0 मापीपुस्त दिनांक 26.
11.2007 तक कुल मापी मो0 1,79,433.00 रू0 दर्ज है। तकनिकी सहायक द्वारा भौतिक सत्यापन में पाया गया कि सड़क के किनारे से सामने के तरफ 50 प्रतिशत कार्य हो चुका है, पीछे से घेराबंदी का कार्य नहीं हुआ है।
श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा इस योजना में मो0-2,22,500.00 रू0 अग्रिम दिया गया था, जिसके आलोक में कार्य मो0 1,79,433.00 रू0 का मापीपुस्त दर्ज किया गया है। अभिकर्त्ता के द्वारा ली गयी अग्रिम के अनुरूप कार्य नहीं हो पाया।
उक्त अग्रिम राशि का कार्य पूर्ण के पश्चात् दी गयी। तकनिकी सहायक ने भौतिक सत्यापन में भी किया कि ली गई अग्रिम मो0 2,22,500.00 रू0 के आलोक में मो0 1,79,433.00 रू0 का कार्य पूर्ण किया गया। संभवतः वर्ष 2007 में भीषण बाढ़ के कारण कार्य बाधित हो गई होगी। लगभग 09 माह के पश्चात् श्री सिन्हा स्थानांतरित होकर पटना समाहरणालय में पदस्थापित हो गये। अतः श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य है।
आरोप सं0-02 :-बाबूबरही प्रखंड के अन्तर्गत पिपराघाट में शौचालय/पेयजल सहित सामुदायिक भवन का निमार्ण कार्य से संबंधित योजना के कार्यान्वयन हेतु दोनों किस्त मो0-4,50,000.00 (चार लाख पचास हजार रू0) रू0 उपलब्ध करा दिये जाने के बावजूद आरोपी पदाधिकारी द्वारा योजना को पूर्ण कराने में अभिरूचि नहीं ली गयी तथा समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया, फलस्वरूप योजना अपूर्ण रही।
स्पष्टीकरणः-आरोपित पदाधिकारी श्री सिन्हा द्वारा आरोप सं0-01 के संबंध में जो स्पष्टीकरण अंकित किया गया है, वही स्पष्टीकरण आरोप सं0-02 में भी अंकित किया गया है।
जिला पदाधिकारी, मधुबनी का मंतव्य ः-बाबूबरही प्रखंड के अन्तर्गत पिपराघाट में शौचालय/पेयजल सहित सामुदायिक भवन का निमार्ण कार्य से संबंधित मूल अभिलेख सं0-02/2007-08 का अवलोकन किया।
अभिलेख के अनुसार दिनांक 12.10.2007 तक संवेदक को दी गई कुल राशि 2,17,500.00 रू0 दिनांक 04.07.2008 को मो0 1,00,000.00 रू0 दिनांक 15.06.2009 को मो0 1,00,000.00 रू0 कुल अग्रिम मो0 4,17,500.00 रू0। मापीपुस्त दिनांक 05.06.2007 को मो0 1,09,119.00 रू0 तथा दिनांक 15.10.2008 तक मो0-3,25,903.00 रू0 का दर्ज हुआ है। तकनिकी सहायक द्वारा पाया गया कि छत ढ़लाई का कार्य हो चुका है, प्लास्टर के साथ खिड़की, दरवाजा का काम भी हो चुका है, शौचालय का कार्य नहीं हुआ है। एक चापाकल लगा हुआ पाया गया।
श्री सिन्हा द्वारा इस योजना में मो0 2,17,500.00 रू0 अग्रिम दिया गया था जिसके आलोक में कार्य कराते हुए दिनांक 05.09.2007 तक मो0 1,09,119.00 रू0 का मापीपुस्त दर्ज किया गया है। कालान्तर में इनके द्वारा दी गयी अग्रिम के विरूद्ध मापीपुस्त संधारित किया गया है।51 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 उक्त अग्रिम राशि का कार्य पूर्ण के पश्चात् दी गयी। तकनीकी सहायक ने भौतिक सत्यापन में भी किया कि ली गयी अग्रिम मो0 2,17,500.00 रू0 के आलोक में मो0 1,09,119.00 रू0 का कार्य पूर्ण किया गया। संभवतः वर्ष 2007 में भीषण बाढ़ के कारण कार्य बाधित हो गयी होगी। लगभग 09 माह के पश्चात् श्री सिन्हा स्थानांतरित होकर पटना समाहरणालय में पदस्थापित हो गये।
इस प्रकार श्री अनिल कुमार सिन्हा द्वारा अपने कार्यकाल में दिये अग्रिम में 50 प्रतिशत से अधिक कार्य अपने पर्यवेक्षण में करा लिया गया था। बाढ़ एवं अन्य कार्य तथा स्थानांतरण के कारण संभवतः कार्य पूर्ण नहीं हुई होगी। अतः श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य है।
श्री सिन्हा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों, उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी से प्राप्त मंतव्य की सम्यक् समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री सिन्हा के विरूद्ध उनकेे पदस्थापन अवधि में वर्ष 2007-08 में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजनान्तर्गत 14वीं लोकसभा के माननीय सांसद श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव, झंझारपुर संसदीय क्षेत्र के एच्छिक कोष से स्वी—त योजनाओं को ससमय पूर्ण करने की दिशा में उदासीनता बरतने से संबंधित है। बाबूबरही प्रखंड के अन्तर्गत हनुमान नगर ब्रह्मोत्तरा में कब्रिस्तान की घेराबंदी का निर्माण कार्य से संबंधित योजना के संबंध में जिला पदाधिकारी का कहना है कि ली गई अग्रिम मो0 2,22,500.00 रू0 के आलोक में मो0 1,79,433.00 रू0 का कार्य पूर्ण किया गया। साथ ही बाबूबरही प्रखंड के अन्तर्गत पिपराघाट में शौचालय/पेयजल सहित सामुदायिक भवन का निमार्ण कार्य से संबंधित योजना के लिए ली गयी अग्रिम मो0 2,17,500.00 रू0 के आलोक में मो0 1,09,119.00 रू0 का कार्य पूर्ण किया गया। उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी द्वारा श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण पर कहना है कि संभवतः वर्ष 2007 में भीषण बाढ़, अन्य कार्य एवं स्थानांतरण के कारण संभवतः कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका है। इस प्रकार जिला पदाधिकारी द्वारा संभावनाओं के आधार पर श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया है। श्री सिन्हा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को संभावनाओं के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है।
वर्णित दोनों योजनाओं के ससमय क्रियान्वयन में उदासीनता एवं पर्यवेक्षण का अभाव पाया गया है। दोनों योजना में दी गयी अग्रिम का शत-प्रतिशत मापी पुस्त प्राप्त नहीं होने की स्थिति में कार्य तेजी के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया। श्री सिन्हा द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु दिये गये दिशानिदेर्शों का अनुपालन नहीं किया गया है, जिस कारण से योजना को ससमय पूर्ण नहीं किया जा सका। स्पष्टतया श्री सिन्हा के द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही एवं कार्यो के पर्यवेक्षण में शिथिलता बरती गई है। ध्यातव्य है कि सांसद मद से लोक कल्याणकारी योजनाओं का कार्य कराया जाता है। श्री सिन्हा द्वारा ऐसे महत्वपूर्ण योजनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया एवं निर्माण कार्य के कार्य में लापरवाही बरती गयी, जो एक लोक सेवक के लिए र्काव्यहीनता का द्योतक है। इनका यह —त्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3(1) के प्रतिकूल है।
समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19(1) प्रावधान के तहत ''निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08)'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अनिल कुमार सिन्हा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1049/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाबूबरही, मधुबनी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19(1) प्रावधान के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है-
(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08)
आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।
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सं0 2/सी0-111/2010-सा0प्र0-11244
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24 सितम्बर 2021
श्री अमरनाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नौहट्टा, सहरसा सम्प्रति सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध प्रखंड मुख्यालय से अनुपस्थित रहने, बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसल के लिए —षि अनुदान की राशि लाभुकों के बीच वितरित नहीं करने, इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची के विरूद्ध बी0पी0एल0 परिवार के लाभुकों के नाम बैंकों में खोले गये खाता संबंधी प्रतिवेदन नहीं भेजने, निदेश दिये जाने के बावजूद राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत् डाटा इन्ट्री का कार्य प्रारम्भ नहीं करने, एस0जी0एस0वाई0 की राशि खर्च नहीं करने, अकर्मण्यता, र्काव्यहीनता एवं कार्यों के प्रति लापरवाही बरतने इत्यादि आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक 26/गो0 दिनांक 28.01.2010 द्वारा साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया।
श्री साहा से उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 2538 दिनांक 24.05.2010 द्वारा स्पष्टीकरण की गयी। श्री साहा के पत्रांक 66 दिनांक 15.08.2014 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
श्री साहा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री साहा के विरूद्ध आरोपों की वृहत् जाँच करने हेतु बिहार सरकारी52 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12500 दिनांक 14.06.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा के पत्रांक 869 दिनांक 26.08.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप संख्या-1(3) एवं 2 को ''आंशिक रूप से प्रमाणित'' एवं शेष आरोप को ''अप्रमाणित'' प्रतिवेदित किया गया। श्री साहा का दिनांक 30.09.2020 को सेवानिवृा हो जाने के उपरान्त इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11676 दिनांक 09.12.2020 द्वारा बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक 8042 दिनांक 08.09.2020 द्वारा श्री साहा से बचाव अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री साहा के पत्रांक 15/गो0 दिनंक 15.09.2020 द्वारा बचाव अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री साहा ने अपने अभिकथन में कहा है कि किसी भी आरोप को प्रमाणित होने के लिए प्रासंगिक साक्ष्य की आवष्यकता होती है, जिसका यहाँ सर्वथा अभाव है। बिना प्रासंगिक साक्ष्य के कोई आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित नहीं हो सकता है। आरोप संख्या-2 जिसे संचालन पदाधिकारी ने आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया है के संबंध में इनका कहना है कि कोई भी साक्ष्य जिला प्रशासन के पास नहीं है अर्थात् प्रश्नगत आरोप साक्ष्यहीन एवं बेबुनियाद है।
श्री साहा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, इनसे प्राप्त बचाव अभ्यावेदन, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं संचिका में उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा की गयी। उपलब्ध प्रतिवेदन/अभिलेखों के समीक्षोपरांत श्री साहा के विरूद्ध निम्नांकित तथ्य पाया गया :-
जिला पदाधिकारी, सहरसा द्वारा दिनांक 02.12.2008 को अंचल कार्यालय नौहट्टा के रोकड़ पंजी में —षि अनुदान मद में मो0 रू0 1385100.00 शेष पाया, जबकि यह राशि वर्ष 2007 बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के विरूद्ध —षकों को दिया जाना था। लेकिन इस राशि का वितरण किसानों को नहीं किया गया।
किसानों के बीच व्याप्त असंतोष के फलस्वरूप दिनांक 16.01.2008 को बिहार राज्य किसान सभा द्वारा धरना दिया गया। प्रखंड कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से लिखित में दिया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री साहा प्रायः 12-12.30 बजे अप0 तक कार्यालय आते हैं, कभी-कभी 3-4 बजे अप0 तक कार्यालय आते हैं और 5.00 बजे संध्या के बाद चले जाते हैं। कार्यालय अवधि में कार्यालय में रहकर कार्य नहीं करने तथा इंदिरा आवास, —षि अनुदान का कार्य नहीं किये जाने के फलस्वरूप उत्पन्न जन आक्रोश के कारण लगभग चार दिनों से नौहट्टा प्रखंड में संचालित अनशन को दिनांक 10.05.2008 को उप विकास आयुक्त, सहरसा के हस्तक्षेप के पश्चात् समाप्त किया गया।
आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 869 दिनांक 26.08.2020 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में भी श्री साहा के विरूद्ध आरोप संख्या-1(3) एवं 2 को ''आंशिक रूप से प्रमाणित'' एवं शेष आरोप को ''अप्रमाणित'' प्रतिवेदित किया गया।
समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री साहा के बचाव अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत ''05 प्रतिशत पेंशन पाँच वर्षों के लिए कटौती'' का शास्ति अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा भी सहमति दी गयी। उक्त के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6866 दिनांक 09.07.2021 द्वारा श्री साहा के विरूद्ध ''05 प्रतिशत पेंशन पाँच वर्षों के लिए कटौती'' का शास्ति अधिरोपित एवं संसूचित किया गया।
श्री साहा द्वारा अधिरोपित दंड पर विचार हेतु पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें मुख्यतया निम्नलिखित बिन्दुओं का उल्लेख किया गया है :-
''आरोप संख्या-2(1) में भी यह आरोप है कि कार्यालय में मेरे अनुपस्थिति के कारण लाभ के योजनाओं का कार्यान्वयन समुचित रूप में नहीं होने के कारण आम जनता एवं जनप्रतिनिधि आक्रोशित थे तथा आमरण अनशन किया करते थे। किन्तु आरोप संख्या-2(1) के संदर्भ में प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। जिला पदाधिकारी, सहरसा के मंतव्य में यह स्पष्ट अंकित किया गया है कि ''आरोपी पदाधिकारी के पक्ष में कोई साक्ष्य नहीं होने के कारण आरोप आधारहीन प्रतीत होता है।'' तद्नुसार आरोप को प्रमाणित नहीं मानते हुए अपने अभियुक्ति में संचालन पदाधिकारी के द्वारा लिखा गया है कि ''आरोप प्रमाणित नहीं होता है।'' आरोप संख्या-1(3) और 2 से संबंधित कोई भी साक्ष्य प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी के द्वारा मुझे उपलब्ध नहीं कराया गया और मेरे द्वारा मांगे गये कोई भी कागजात ही मुझे दिया गया। फिर भी उन आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित मान लिया गया जबकि बिहार सी0सी0ए0रूल्स में स्पष्ट रूप से प्रावधानित है कि किसी भी आरोप के प्रमाणिकता के लिए संदर्भित साक्ष्य (त्मसंअंदज म्अपकमदबम) का होना आवश्यक है, जिसका नजर अंदाज किया गया।
मैंने अपने स्पष्टीकरण में उपरोक्त वर्णित तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख किया था, फिर भी अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य को सम्पुष्ट कर दिया गया तथा 5 प्रतिशत पेंशन की कटौती 5 वर्षों के लिए दंड मुझ पर अधिरोपित कर दिया गया, जो कि सर्वथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त के प्रतिकूल है। प्रश्नगत् संकल्प संख्या 6866 दिनांक 09.07.2021 अपने आप में स्वतः विरोधाभास से परिपूर्ण है क्योंकि विभाग द्वारा इस तथ्य को अवहेलना की गई है कि एक आरोप जो 2 हेड में है दोनों में साक्ष्यों का अभाव है, परन्तु समान आरोप संख्या-2(1) को अप्रमाणित माना गया, जबकि आरोप संख्या-1(3) एवं 2 को आंशिक रूप से प्रमाणित मान लिया गया। प्रपत्र ''क'' में लगाये गये आरोप पूर्णतः स्थानीय नेता के दबाव में लगाया गया था, जिसमें एक स्थानीय नेता श्री जीवछ चौधरी जो लगातार अनशन एवं धरना प्रदर्शन में लगे53 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 रहते थे एवं अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु मुझ पर गैर मजरूआ आम जमीन को उनके नाम से जमाबंदी कायम करने का दबाव बनाया जा रहा था और जब मैं उनके दबाव के आगे नहीं झूका तो उन्होंने धरना प्रदर्शन कर उच्च अधिकारियों पर दबाव बनाया गया तथा मेरे स्थानान्तरण के पश्चात् तत्कालीन जिला पदाधिकारी, सहरसा के द्वारा बिना कोई साक्ष्य के प्रपत्र ''क'' का गठन मेरे विरूद्ध किया गया, जबकि करीब एक वर्ष पूर्व ही मेरा स्थानान्तरण प्रखंड विकास पदाधिकारी, नौहट्टा (सहरसा) के पद से हो चुका था।
मैंने अपने पदस्थापन काल में अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्णरूपेण किया था किन्तु पता नहीं किन तथ्यों के आधार पर बिना प्रासंगिक साक्ष्य के ही आरोप संख्या-1(3) एवं 2 को आंशिक रूप से प्रमाणित मान लिया गया। यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि न ही संचालन पदाधिकारी और न ही अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा इस तथ्य को ध्यान में रखा गया कि लगाये गये आरोप पूर्णतः साक्ष्य विहिन है और मुझ पर उपर्युक्त दंड अधिरोपित कर दिया गया, जो सर्वथा उपलब्ध तथ्यों के प्रतिकूल है। द्रष्टव्य है कि माननीय उच्च न्यायालय, एवं सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न न्याय निर्णयों में अनुशासनिक प्राधिकार को विभागीय में कार्यवाही में तथ्यों में परिसिलन (च्मतनेंस) एवं साक्ष्यों के अवलोकन का दायित्व दिया है तथा दंड अधिरोपित करने में उन तथ्यों के आधार पर मंतव्य निश्चित करने का दिशा निर्देश दिया गया है। राम अवतार सिंह बनाम भोजपुर, रोहतास, ग्रामीण बैंक में यह व्यवस्था दिया गया है :-
श्ज्ीम क्पेबपचसपदंतल ंनजीवतपजल ूीपसम ेंेपहदपदह चनदपेीउमदज ेीवनसक जांम पदजव बवदेपकमतंजपवद ूीमजीमत जीम बींतहम ींअम इममद चतवअमक वत दवज ेवण्श्
श्री साहा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा पूर्व में दिये गये अभ्यावेदन में अंकित बिन्दुओं का पुनः उल्लेख किया गया है। आरोप संख्या-1(3) एवं आरोप संख्या-2 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। जिला पदाधिकारी, सहरसा (पत्रांक 3639 दिनांक 16.12.2008) एवं उप विकास आयुक्त, सहरसा (पत्रांक 10-1/गो0 दिनांक 10.05. 2008) के पत्र से स्पष्ट है कि श्री साहा समय पर कार्यालय नहीं आते थे तथा इंदिरा आवास, —षि अनुदान कार्य नहीं किये जाने के फलस्वरूप नौहट्टा प्रखंड में आक्रोश उत्पन्न हुआ। इसके कारण क्षेत्र में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हुई एवं जनप्रतिनिधि एवं आम जनता आक्रोशित होकर आमरण अनशन पर बैठ गये। श्री साहा का यह —त्य लापरवाही, अकर्मण्यता एवं लापरवाही को परिलक्षित करता है एवं जो बिहार आचार नियमावली 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री साहा से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने एवं उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6866 दिनांक 09.07.2021 द्वारा अधिरोपित दंड ''पाँच प्रतिशत पेंशन पाँच वर्षों के लिए कटौती'' को पूर्ववत् बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
अतः उपर्युक्त लिये गये निर्णय के आलोक में श्री अमरनाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नौहट्टा, सहरसा सम्प्रति सम्प्रति सेवानिवृा के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6866 दिनांक 09.07.2021 द्वारा अधिरोपित दंड ''पाँच प्रतिशत पेंशन पाँच वर्षों के लिए कटौती'' को पूर्ववत् बरकरार रखा जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रचना पाटिल, अपर सचिव।
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सं0 2/आरोप-01-07/2021-सा0प्र0-11950
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7 अक्तूबर 2021
श्री अजय कुमार ठाकुर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 161/19, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना (सम्प्रति निलंबित) के विरूद्ध परिवहन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 4036 दिनांक 19.07.2021 द्वारा आरोप प्रतिवेदित है कि जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना के पदस्थापन अवधि में उनके द्वारा कार्यालय में कार्यरत लिपिक/प्रोग्राम/डाटा इन्ट्री ऑपरेटर/कार्यपालक सहायक द्वारा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली एवं विभागीय आदेशों की अवहेलना करते हुए BS-III एवं BS-IV वाहनों को बैकलॉग इन्ट्री कर निबंधन किया गया और अपने लॉगिन आई0डी0 से 05 वाहनों का बैकलॉग इन्ट्री एवं 547 वाहनों को Approval दिया गया। वाहनों के निबंधन करने में फर्जी मनी रसीद का प्रयोग किया गया, जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ है।
उक्त आरोपों के लिए श्री ठाकुर के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र पर विभागीय पत्रांक 9767 दिनांक 01.09.2021 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी, किन्तु स्मारित किये जाने के बावजूद भी उनसे स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा।
उपरोक्त गंभीर आरोप एवं परिवहन विभाग, बिहार, पटना के अनुशंसा के आलोक में श्री ठाकुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के प्रावधानों के तहत् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11918 दिनांक 06.10.2021 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया।
श्री ठाकुर के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया,54 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 जिसमें मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।
श्री ठाकुर से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।
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सं0 2/आरोप-01-07/2021-सा0प्र0-11918
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6 अक्तूबर 2021
श्री अजय कुमार ठाकुर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 161/11, तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना सम्प्रति परिवहन पदाधिकारी, जहानाबाद के विरूद्ध परिवहन विभाग, बिहार, पटना से आरोप प्रतिवेदित है कि जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना के पदस्थापन अवधि में उनके द्वारा कार्यालय में कार्यरत लिपिक/प्रोग्राम/डाटा इन्ट्री ऑपरेटर/कार्यपालक सहायक द्वारा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली एवं विभागीय आदेशों की अवहेलना करते हुए BS-III एवं BS-IV वाहनों को बैकलॉग इन्ट्री कर निबंधन किया गया और अपने लॉगिन आई0डी0 से 05 वाहनों का बैकलॉग इन्ट्री एवं 547 वाहनों को Approval दिया गया। वाहनों के निबंधन करने में फर्जी मनी रसीद का प्रयोग किया गया, जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ है।
उक्त आरोपों के लिए श्री ठाकुर के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र पर विभागीय पत्रांक 9767 दिनांक 01.09.2021 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी, किन्तु स्मारित किये जाने के बावजूद भी उनसे स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा।
उपरोक्त गंभीर आरोप एवं परिवहन विभाग, बिहार, पटना के अनुशंसा के आलोक में श्री ठाकुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के प्रावधानों के तहत् तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबन अवधि में श्री ठाकुर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1) के तहत् जीवन निर्वाह भाा देय होगा।
निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया जाता है।
आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रचना पाटिल, अपर सचिव।
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सं0 2/आरोप-01-06/2021-सा0प्र0-11290
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24 सितम्बर 2021
डॉ0 सतीश चरण झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 742/11, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, रोसड़ा सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर के पत्रांक 66(मु0) दिनांक 28.05.2019 द्वारा माननीय लोकायुक्त के कार्यालय में दायर वाद संख्या-01/लोक (नगर विकास विभाग)-11/12 में विाीय अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं सरकारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं करने संबंधी आरोपों के लिए आरोप-पत्र उपलब्ध कराया गया। जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप-पत्र एवं साक्ष्यों/अभिलेखों के आधार पर विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।
विभागीय पत्रांक 7778 दिनांक 29.07.2021 द्वारा डॉ0 झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। डॉ0 झा के पत्रांक-शून्य दिनांक 27.08.2021 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
डॉ0 झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की सम्यक् समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि डॉ0 झा के विरूद्ध विाीय अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं सरकारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं करने संबंधी आरोप प्रतिवेदित है। उनके विरूद्ध माननीय लोकायुक्त द्वारा दिनांक 19.02.2018 एवं 30.08.2018 को पारित आदेश के आलोक में मामले की जाँच उप विकास आयुक्त, समस्तीपुर की अध्यक्षता में त्रि-सदस्यीय समिति द्वारा कराई गयी। समिति के अनुसार अंकेक्षण प्रतिवेदन के आलोक में रोकड़ पंजी/चेक पंजी में दर्ज राशि को अप्राधिकृत एवं अनियमित व्यय मानते हुए व्यय की गयी राशि का जिम्मेवार हैं। अंकेक्षण प्रतिवेदन एवं अभिलेखों के जाँच के क्रम में पाया गया है कि डॉ0 झा द्वारा अपने र्काव्यों एवं दयित्वों का निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण विाीय अनियमितता हुई।55 बिहार गजट, 3 नवम्बर 2021 डॉ0 झा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों की विस्तृत जाँच हेतु बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के प्रावधानों के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।
डॉ0 से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 29—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in