निबंधन संख्या पी0टी0-40
बिहार गजट
बिहार सरकार }kjk प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, inLFkkiu, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं। 2-25 भाग-1-क—Lo;alsod xqYeksa के समादे"Vkओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और eq[rkjh परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।
---
भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---
भाग-2—बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। 26-26 भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और mPp U;k;ky; के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और jkT; गजटों के उ(cid:7373)रण।
---
भाग-4—बिहार अधिनियम ---
विषय-सूची i`"B
i`"B भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:LFkkपित विधेयक,उDr विधान मंडल में उपLFkkपित या उपLFkkपित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और mDr विधान मंडल में पुर:LFkkपन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की T;ss"B अनुमति मिल चुकी है। ---
भाग-8—भारत की संसद में पुर:LFkkfir विधेयक, संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपLFkkपित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:LFkkiu के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---
भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---
भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, U;k;ky; सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं bR;kfnA ---
पूरक
---
पूरक-क
---
2 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021भाग-1 नियुक्ति, inLFkkiu] बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और vU; O;fDrxr सूचनाएं।
—————
वाणिज्य-कर विभाग
------
अधिसूचनाएं
1 नवम्बर 2021
सं0 6/अनु॰ 27-01/2021-2224--63वींं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर वाणिज्य-कर विभाग, की अधिसूचना संख्या 950 दिनांक 04.06.2020 के आलोक में बिहार वित्त सेवा में नियुक्त निम्नलिखित वाणिज्य-कर पदाधिकारी सम्प्रति राज्य-कर सहायक आयुक्त (परीक्ष्यमान) को उनके अभ्यावेदन के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित (64वीं) संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर बिहार पुलिस सेवा में चयनित होने के उपरांत सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना संख्या 7912 दिनांक 06.10.2021 के अलोक में बिहार पुलिस सेवा के अंतर्गत पुनरीक्षित वेतन स्तर-9 (रू॰ 53,100-1,67,800) में परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक के पद पर योगदान करने हेतु बिहार वित्त सेवा के वर्तमान पद (राज्य-कर सहायक आयुक्त) से अधिसूचना निर्गमन की तिथि से विरमित किया जाता है।
| क्रम स ॰ ं | नाम | जन्म तिथि | बिहार वित्त सेवा में योगदान की तिथि |
| 1 | श्रीमती चाँदनी सुमन, राज्य-कर सहायक आयुक्त, गाँधी मैदान, अंचल, पटना। | 29.09.1994 | 13.06.2020 |
| 2 | श्रीमती अनु कुमारी, राज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, पटना पश्चिमी प्रमंंडल, पटना। | 17.09.1989 | 03.07.2020 |
2. विरमन के पश्चात बिहार वित्त सेवा में भविष्य में इनका कोई दावा विचारणीय नहीं होगा। 3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अरूण कुमार मिश्रा, विशेष सचिव।
------
30 अक्तूबर 2021
सं0 6/गो0-34-05/2016-2222/वा0कर--श्री क्षितिज कुमार सिंह, राज्य-कर सहायक आयुक्त, कटिहार अंचल, कटिहार को अगले आदेश तक कार्य हित में वसूली कोषांग केन्द्रीय प्रमंडल, पटना के पद पर में प्रतिनियुक्त किया जाता है। 2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अरूण कुमार मिश्रा, विशेष सचिव।
------
20 अक्तूबर 2021
सं0 6/गो0-34-03/2016(खण्ड-1)-2115/वा0कर--सुश्री अनिशा (63वीं बैच), राज्य-कर सहायक आयुक्त को विभागीय अधिसूचना संख्या-6/गो0-34-01/2021-1088 दिनांक 30.06.2021 द्वारा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, पटना में पदस्थापित करते हुये अन्वेषण ब्यूरों, पश्चिमी प्रमंडल, पटना में प्रतिनियुक्त किया गया था। उक्त प्रतिनियुक्ति को अधिसूचना निर्गमन की तिथि से समाप्त किया जाता है।
सं0 6/गो0-34-03/2016(खण्ड-1)-/वा0कर--सुश्री ऋचांशा ऋजु, (63वीं बैच), राज्य-कर सहायक आयुक्त को विभागीय अधिसूचना संख्या-6/गो0-34-01/2021-1088 दिनांक 30.06.2021 द्वारा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, पटना में पदस्थापित करते हुये वाणिज्य-कर विभाग, मुख्यालय, बिहार, पटना में प्रतिनियुक्त किया गया था। उक्त प्रतिनियुक्ति को अधिसूचना निर्गमन की तिथि से समाप्त किया जाता है।
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अरूण कुमार मिश्रा, विशेष सचिव।3 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021
8 अक्तूबर 2021
सं0 6/प्रो0-06-01/2015-2098-वा0कर--वित्त विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-3ए-2-वे0पु0- 18/2009-7566, दिनांक-14.07.2010 के द्वारा दिनांक 01.01.2009 के प्रभाव से लागू रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना (एम0ए0सी0पी0) के अधीन बिहार वित्त सेवा के 05 (पॉच) पदाधिकारियों को 20 वर्षो की नियमित सेवा पूर्ण करने के उपरान्त उनके नाम के सामने कॉलम 4 में अंकित तिथि से द्वितीय रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना (एम0ए0सी0पी0) के अन्तर्गत वेतनमान् रू0 15,600-39,100 ग्रेड-पे 6600/- से उच्चतर वेतनमान् रू0 15,600-39,100़ ग्रेड-पे 7600/- की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
| क्र0 सं॰ | पदाधिकारियों का नाम/ र्वामान पदस्थापन | सेवा में प्रथम योगदान की तिथि | द्वितीय एम0ए0सी0पी0 की देय तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह, तत्कालीन बिहार वित्त सेवा के पदाधिकारी सम्प्रति (भा0प्र0से0) निदेशक, प्राथमिक शिक्षा विभाग, बिहार, पटना। | 04.07.1989 | 04.07.2009 |
| 2 | श्री अरूण कुमार मिश्रा, तत्कालीन बिहार वित्त सेवा के पदाधिकारी सम्प्रति (भा0प्र0से0), विशेष सचिव, वाणिज्य-कर विभाग, बिहार, पटना। | 13.07.1990 | 13.07.2010 |
| 3 | श्री अजय कुमार, सेवानिवृत्त वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, | 28.07.1989 | 28.07.2009 |
| 4 | श्री ध्रुव कुमार मिश्र, राज्य-कर संयुक्त आयुक्त, भभुआ अंचल, भभुआ सम्प्रति राज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुजफ्फरपुर पश्चिमी अंचल, मुजफ्फरपुर। | 26.05.1992 | 26.05.2012 |
| 5 | श्रीमती सरिता सिन्हा, भूतपूर्व राज्य-कर संयुक्त आयुक्त, (मृत्यु की तिथि-27.04.2021) | 14.05.1992 | 14.05.2012 |
3ए-2-वे0पु0-18/2009-7566 दिनांक 14.07.2010 में निहित प्रावधानों के आलोक में किया जायेगा।
3. उपर्युक्त किसी भी पदाधिकारी के संबंध में भविष्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर संबंधित पदाधिकारी को प्रदत वित्तीय उन्नयन के लाभ से संबंधित अधिसूचना को रद्द/संशोधित कर दिया जायेगा तथा उन्हें भुगतान की गई राशि की वसूली/प्रतिपूर्ति कर ली जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, राज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव।
------ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------- अधिसूचना 28 अक्तूबर 2021
सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰)-12/2019-4062/प॰व॰--श्री आशुतोष, भा॰व॰से॰, (BHः1988), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), बिहार, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक के Apex Scale (वेतन स्तर-17) में तत्काल प्रभाव से प्रोन्नति देते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।
2. श्री आशुतोष, भा॰व॰से॰, अगले आदेश तक प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।4 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021
x`g foHkkx
(vkj{kh 'kk[kk)
-------
अधिसूचनाएं
3 नवम्बर 2021
सं0 1/एल1-10-03/2009-गृ0आ0-8834--श्री जितेन्द्र कुमार, भा0पु0से0 (1993), अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत विभागीय अधिसूचना सं0-5804, दिनांक 11.08.2021 द्वारा स्वीकृत उपार्जित अवकाश दिनांक-09.08.2021 से 07.09.. 2021 तक को दिनांक 24.09.2021 तक (दिनांक-25/26.09.2021 को Suffix सहित) विस्तारित करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
-------
3 नवम्बर 2021
सं0 1/एल1-10-04/2012-गृ0आ0-8836--श्रीमती शोभा ओहटकर, भा0पु0से0 (1990), महानिदेशक-सह- महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत विभागीय अधिसूचना 7947, दिनांक-07.10.2021 द्वारा स्वीकृत उपार्जित अवकाश दिनांक-25.09.2021 से 03.10.2021 तक को दिनांक-08.10.2021 तक विस्तारित करने की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
-------
3 नवम्बर 2021
सं0 1/एल1-10-05/2020-गृ0आ0-8835--श्री आर0 एस0 भट्टी, भा0पु0से0 (1990), तत्कालीन पुलिस महानिदेशक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, बिहार, पटना सम्प्रति केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर को अखिल भारतीय सेवाएँ (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-12(3) के अन्तर्गत विभागीय अधिसूचना सं0-7123, दिनांक-15.09.2021 द्वारा दिनांक-06.09.2021 से 07.09.2021 तक 02 (दो) दिनों के स्वीकृत अर्द्धवैतनिक अवकाष को दिनांक 10.09.2021 तक (दिनांक 11.09.2021 को Suffix सहित) विस्तारित करने की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, के0 सेंथिल कुमार, सचिव।
-------
सहकारिता विभाग
------
अधिसूचना
29 अक्तूबर 2021
सं0 8/नि॰को॰(रा॰)परि॰-214/2019-3151--श्री संदीप कुमार ठाकुर, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, नवादा सम्प्रति अन्य मामले (ट्रैप केस) में सेवानिवृत्त के विरूद्ध बैंक द्वारा संचालित दैनिक जमा योजना में मो0 जावेद द्वारा किये गये अनियमितता से संबंधित मामले में शिथिलता बरतने के आरोप में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2584 दिनांक-18.07.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें जाँच आयुक्त-सह-सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। जाँच आयुक्त-सह-सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना द्वारा दिनांक-04.08.2020 को आरोप को पूर्णतः प्रमाणित करते हुए जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। विभागीय पत्रांक-2374 दिनांक-21.09.2020 द्वारा जाँच प्रतिवेदन/अधिगम की छायाप्रति आरोपी पदाधिकारी को भेजते हुए उनसे जाँच प्रतिवेदन के आलोक में लिखित अभ्यावेदन/निवेदन की मांग की गयी। तदनुसार विभागीय पत्रांक-464 दिनांक-17.02.2021 द्वारा आरोपी पदाधिकारी को एक और मौका देते हुए सिर्फ आरोप के संबंध में अपना बचाव बयान/पक्ष विभाग को उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया लेकिन उनके द्वारा आरोप के संबंध में कुछ नहीं कहा गया।
संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन/अधिगम एवं आरोपी पदाधिकारी द्वारा विभाग के समक्ष आरोप के संबंध में कोई तथ्य नहीं रखने के फलस्वरूप समीक्षोपरान्त विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1446 दिनांक-02.06.2021 द्वारा श्री संदीप कुमार ठाकुर, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0, नवादा सम्प्रति सेवानिवृत्त को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के लघु शास्तियाँ के तहत निन्दन के साथ एक वेतनवृद्धि पर रोक का दण्ड संसूचित किया गया।
प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय, बिहार, पटना द्वारा उठायी गयी कठिनाईयों एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के परामर्श/मंतव्य के आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-28 में विहित प्रावधानों के आलोक में मामले की पुर्नसमीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री ठाकुर को विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1446 दिनांक-02.06.2021 द्वारा संसूचित दंडादेश को इस हद तक संशोधित करते हुए बिहार5 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021 सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14(1) के तहत निन्दन का दण्ड संसूचित किया जाता है। आरोप वर्ष 2005-2009 (17.06.2005-11.06.2009) है। इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार के राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमल, उप-सचिव।
------ समाहरणालय, रोहतास (सासाराम) (स्थापना शाखा) ------- आदेश 29 मई 2021 सं0 16/21-22-683--प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्र संख्या-289, दिनांक 06.03.2013 एवं 05 (मु0), दिनांक 10. 04.2013 द्वारा सूचित किया गया है कि उनके ज्ञाप संख्या- 100, दिनांक 31.01.2013 द्वारा श्री मनोज कुमार को नजारत का प्रभार श्री रामेष्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को सौंपने का आदेष दिया गया था, परंतु उनके द्वारा कई स्मार एवं स्पश्टीकरण पूछे जाने के बावजूद मात्र चेक बुक का प्रभार श्री रामेष्वर प्रसाद सिंह को सौंपा गया। उनके द्वारा यह भी प्रतिवेदित किया गया है कि उनके द्वारा पूर्व के रोकड़ पंजी अद्यतन कर मांग करने पर उसका भी अनुपालन श्री सिंह, के द्वारा नहीं किया गया एवं उनके द्वारा गलत अभिश्रव बनाकर उस पर हस्ताक्षर करने का दबाव प्रखंड विकास पदाधिकारी पर बनाया जा रहा है। अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्र संख्या-681, दिनांक 26.04.2013 द्वारा सूचित किया गया है कि उन्हे प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दिनांक 25.04.2013 को 02ः00 बजे अपराह्न में दूरभाश पर सूचना दी गयी कि श्री मनोज कुमार द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी है एवं अभद्र व्यवहार किया गया है, जिसकी जॉच उनके द्वारा श्री पुरूशोतम सिंह, कार्यपालक दण्डाधिकारी, बिक्रमगंज से कराये जाने पर इसे सही पाया गया। इस प्रकार श्री मनोज कुमार द्वारा पदाधिकारी के आदेष की अवहेलना कर मनमानी पूर्वक रवैया अपनाकर नजारत का सम्पूर्ण प्रभार नहीं सौंपा गया तथा उनके द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की गयी। उनका यह कृत्य सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल है। उक्त आरोप के आलोक में श्री मनोज कुमार, तत्कालिन लिपिक, अंचल कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज को इस कार्यालय के आदेष संख्या- 11/2013-14, संसूचित ज्ञापांक 418/स्था0, दिनांक 07.05.2013 से निलंबित किया गया। तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज को श्री कुमार, लिपिक के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित कर अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के माध्यम से एक सप्ताह के अन्दर उपलब्ध कराने का निदेष दिया गया। पुनः इस कार्यालय के पत्र संख्या- 576/स्थापना, दिनांक 04.06.2013 द्वारा श्री मनोज कुमार, लिपिक के विरूद्ध प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित उपलब्ध कराने का निदेष दिया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्रांक 789, दिनांक 16.05.2013 द्वारा श्री मनोज कुमार, प्रतिनियुक्त लिपिक, प्रखंड नाजीर प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज के विरूद्ध प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ, जिसमें त्रुटि रहने के कारण इसे इस कार्यालय के पत्र संख्या- 739/स्थापना, दिनांक 18.07.2013 से अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज को वापस किया गया। तत्पष्चात अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्र संख्या- 1577, दिनांक 21.09.2013 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र- '' क '' प्रतिहस्ताक्षोपरान्त प्राप्त हुआ, जिसे अनुमोदित करते हुए इस कार्यालय के आदेष संख्या- 112/13-14, संसूचित ज्ञापांक 1136/स्था0, दिनांक 04.11.2013 के द्वारा श्री राम शंकर सिंह, अपर समाहर्त्ता, विभागीय जॉच को संचालन पदाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त कर विभागीय कार्यवाही संचालन करने हेतु भेजा गया। श्री मनोज कुमार, लिपिक के अनुरोध के आलोक में इस कार्यालय के आदेष संख्या- 143/13-14, संसूचित ज्ञापांक 19/स्था0, दिनांक 08.01.2014 से श्री कुमार को निलंबन से मुक्त करते हुए अंचल कार्यालय, नौहट्टा में पदस्थापित किया गया। निलंबन अवधि के वेतनादि की निकासी के संबंध में विभागीय कार्यवाही के निश्पादन के पष्चात उसके फलाफल पर विचार किया जायेगा। पुनः अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्र संख्या- 1374, दिनांक 21.10.2016 से पूरक आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में गठित कर भेजा गया, जिसे इस कार्यालय के पत्रांक 1056/स्थापना, दिनांक 06.12.2016 से अपर समाहर्त्ता, विभागीय जॉच, रोहतास, सासाराम को श्री मनोज कुमार, लिपिक के विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही में सम्मिलित कर बिहार सरकारी सेवक (नियंत्रण, वर्गीकरण एवं अपील) नियमावली 2005 के सुसंगत नियमों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करते हुए मंतव्य के साथ अभिलेख भेजने का निदेष दिया गया। अपर समाहर्त्ता (विभागीय जॉच) -सह- संचालन पदाधिकारी, रोहतास, सासाराम द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के पष्चात पत्र संख्या- 34/वि0 जॉच, दिनांक 15.06.2018 से मंतव्य प्राप्त हुआ। श्री मनोज कुमार, तत्कालिन लिपिक प्रखंड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज सम्प्रति प्रखंड कार्यालय, रोहतास के विरूद्ध गठित आरोप, आरोपी द्वारा समर्पित स्पश्टीकरण, संचालन पदाधिकार का मंतव्य का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है :-
| क्र0 | आरोप का विवरण | आरोपी का जबाब/स्पष्टीकरण | संचालन पदाधिकारी का मंतव्य |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज से संबंधी आरोप का विवरण :- नियंत्री पदाधिकारी के साथ मारपीट एवं दुव्र्यवहार :- दिनांक 25.04.2013 को | प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज का आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है। चुकि प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज का पत्रांक 493, दिनांक 25.04.13 एवं 499, दिनांक 27. | विभागीय कार्यवाही वाद संख्या 13/2013 श्री मनोज कुमार, लिपिक प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखण्ड कार्यालय, |
| उपस्थिति बनाकर कार्यालय से अनुपस्थित पाये जाने के फलस्वरूप स्पष्टीकरण की मॉग की गयी। आप स्पष्टीकरण पत्र लेकर नियंत्री पदाधिकारी के कक्ष में आये तथा अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए पत्र को फाड़ दिया, बैठकर शांति से बात करने के लिए कहे जाने पर और अधिक भडक उठे एव घुस्सा एवं फैट से मारने लगे। अचानक प्रहार से नियंत्री पदाधिकारी बुरी तरह से घायल हो गये। नियंत्री पदाधिकारी किसी प्रकार भाग कर अपनी जान बचाये तथा ईलाज कराने चिकित्सक के यहॉ पुहॅचे। ईलाज के पश्चात चिकित्सक से ईन्ज्युरी रिर्पोट लेकर बिक्रमगंज थाना में प्राथमिकि दर्ज करायी गयी। बिक्रमगंज थाना द्वारा प्र्राथमिकी संख्या 91/13 दिनांक 25. 04.2013 भा0द0वि0 की धारा 147, 341, 323, 353, 333 प्रारभ्भ की गयी है। आप उसी दिन (25.04.2013) से फरार है। नजारत का कार्य बुरी तरह से बाधित है। यह कृत उदंडता एवं अपराधिक प्रवृति का द्योतक है। | 04.13 न तो मेरे नाम से संबोधित है और नहीं प्र0कार्या0 से प्राप्त था। यदि कोई स्पष्टीकरण से संबंधित पत्र उनके द्वारा निर्गत की गयी है तो उनसे पावती रसीद के साथ पत्र की प्रति मांग कर उपलब्ध कराने की कृपा की जाय। प्र0 वि0 पदा0, बिक्रमगंज का पत्रांक 487, दिनांक 25.04.13 जिसके द्वारा 25.04.13 को उपस्थिति दर्ज कर वगैर अनुमति प्राप्त किए कार्यालय छोड़ने के आरोप में स्पष्टीकरण देने के संबंध मे है। वह भी आज तक हमे ं अप्राप्त है। जिसकी पावती रसीद की मांग की जा सकती है। जब स्पष्टीकरण प्राप्त ही नही था, तो उनके द्वारा स्पष्टीकरण दिए गए पत्र को उनके कार्यालय प्रकोष्ट मे जा कर ं फाड़ने और उनके साथ मार-पीट करने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप उनके द्वारा लगाना सत्य से परे एवं निराधार है। वास्तविकता यह है कि दिनांक 25.04.13 को निर्धारित समय पर कार्यालय पहुॅच कर उपस्थिति पंजी मे ं हस्ताक्षर की गयी थी, लगभग 11ः00 बजे पूर्वाहन श्री हरिशंकर प्रसाद, प्रधान लिपिक को मौखिक रूप से सूचना देकर अनु0कार्या0, बिक्रमगंज कार्यवश गया था। कार्यपालक दंडाधिकारी से सम्पर्क स्थापित कर लगभग 12ः00 बजे कार्यालय आ गया था। प्रखंड कार्यालय आने पर प्र0वि0पदा0 द्वारा अपने कार्यालय प्रकोष्ट में बुलाया गया और अकारण मेरे साथ गाली गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग उनके द्वारा किया जाने लगा। उक्त समय में प्र0वि0पदा0 के साथ बराबर घुमने वाले राजेश पासवान एवं अन्य लोग जिसे मै पहचानता नहीं हूॅ, मौजूद थे। उनके व्यवहार से क्षुब्ध हो कर मेरे द्वारा गाली-गलौज एवं असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं करने के लिए आग्रह किया गया तो वे और अधिक क्रोधित होकर मेरे साथ लप्पड-थप्पड़, फाईट-मुक्के एवं बेल्ट से प्रहार करने लगे तो मै पाया कि वे शराब पीकर नशे मे है। वे ं हमेशा शराब पीकर ही कार्यालय मे ं आते थ। इस लिए मै वहॉ से हट कर अपने नजारत शाखा में चला गया। नजारत शाखा में भी जाकर उनके द्वारा मेरे साथ लप्पड़-थप्पड़, फाईट-मुक्के एवं बेल्ट से प्रहार किया गया और मेरे पैकेट से 2000 (दो हजार) रू0 निकाल लिया गया। प्र0वि0पदा0 शारीरिक रूप | बिक्रमंगंज के विरूद्ध गठित आरोप पत्र '' प्रपत्र क'' में लगाये गये आरोपों के संबंध मे आरोपी ं से जवाब/स्पष्टीकरण की मॉग की गयी थी, जो प्राप्त है। आरोपी के स्पष्टीकरण पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी-सह-उप स्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज से भी मंतव्य की मॉग की गयी थी, जो प्राप्त है। प्राप्त मंतव्य एवं संलग्न कागजातो का अवलोकन करने से ज्ञात होता है की आरोपी पर आदेश का अवहेलना कर नजारत का सम्पूर्ण पभार नहीं सौपने, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार करने एवं मारपीट करने के आरोप में निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध ''प्रपत्र क'' गठित कर विभागीय कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया है। आरोप एवं मंतव्य निम्न प्रकार है :- आरोप सं0 1 :- नियंत्री पदाधिकारी के सथ मारपीट एवं दुव्र्यवहार :- आरोपी का अपने जवाब/स्ष्टीकरण मे कथन है ं कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज का आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है। वास्तविकता यह है कि दिनांक 25.04.2013 को निर्धारित समय पर कार्यालय पहूॅच कर उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर की गई थी। लगभग 11ः00 बजे पूर्वाहन में प्रधान लिपिक को मौखिक रूप से सूचना देकर अनुमंडल कार्यालय, बिक्रमगंज कार्यवश गया था। कार्यपालक दण्डाधिकारी से सम्पर्क स्थापित कर लगभग 12ः00 बजे कार्यालय आ गया था। कार्यालय आने पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने मुझे अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में बुलाया और अकारण मेरे साथ गाली-गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग उनके द्वारा किया गया। मेरे द्वारा गाली-गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग नही करने का अनुराध किया गया तो और क्रोधित होकर मेरे पैकेट से 2000.00 (दो हजार) रूपया निकाल लिया गया। मैं वहॉ से भागकर चिकित्सक से ईलाज | |
| से भी मुझसे अधिक शक्तिशाली एवं बलवान है। मै अपने मोबाईल से लगभग 01ः00 बजे अनु0पदा0, बिक्रमगंज को सूचित किया। मै घायल अवस्था में नजारत बन्द कर डाला एवं किसी प्रकार भाग कर अपनी जान बचाये तथा चिकित्सक से अपना इलाज कराया तथा अनुमंडलीय न्यायिक दण्डाधिकारी, बिक्रमगंज के यहॉ दिनांक 27.04.2013 को भा0द0वि0 की धारा 120 (बी0) 323, 379 एवं 504 के तहत परिवाद संख्या 246/2013 प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज (श्री अरूण कुमार एवं श्री राजेश पासवान) के विरूद्ध मुकदमा दायर किया जो निर्णयाधीन है। प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा दायर मुकदमा सं0- 91/2013 में मेरे द्वारा सेसन जज माननीय व्यवहार न्यायालय, रोहतास, सासाराम के न्यायालय से दिनांक 17.05.2013 को जमानत करा लिया गया है। उक्त घटना से चोटिल तथा भयाकान्त होकर मै कार्या0 जाने में असमर्थ था, तत्संबधी अवकाश का आवेदन मेरे द्वारा रजिस्टर्ड डाक से अगले दिन ही प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज को भेजा गया। स्पष्ट है कि मै फरार नहीं था। इस प्रकार प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा लगाया गया कर्त्तव्य से फरार होने का आरोप भी सत्य से परे है। प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा मेरे साथ पूर्व में दिनांक 14.02.13 एवं दिनांक 09.04.13 को भी दुव्र्यव्यवहार किया गया था। प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा चप्पल से मारने का प्रयास किया गया। जिसकी सूचना मेरे द्वारा अनु0पदा0, बिक्रमगंज एवं जिला पदाधिकारी महोदय, रोहतास को दी गयी थी। उक्त दोनों कर्मियों द्वारा भी दुव्र्यवहार की घटना की लिखित सूचना तत्कालिन अनु0पदा0, बिक्रमगंज एवं जिला पदा0 महोदय रोहतास को दी गयी थी। प्रखंड कार्या0 बिक्रमगंज के अन्य पुरूष/महिला कर्मचारियों द्वारा प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज के विरूद्ध अनु0पदा0, बिक्रमगंज के समक्ष दुव्र्यवहार की लिखित सूचना दी गयी है। विदित हो कि जिला पदा0 महोदाय रोहतास के आदेश सं0 11/2013-14 ज्ञापांक 418, दिनांक 07.05.13 द्वारा मुझे निलंबित किया गया था, लेकिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा समर्पित प्रपत्र 'क' में आरोप पत्र दिनांक 20.09. | कराया तथा अनुमंडलीय न्यायिक दण्डाधिकारी, बिक्रमगंज के यहाँ दिनांक 27.04.2013 को भा0द0वि0 की धारा के तहत परिवाद सं0 246/13 प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज (श्री अरूण कुमार एवं श्री राजेश पासवान) के विरूद्ध मुकदमा दायर किया जो निर्णयाधीन है। इस प्रकार उनके साथ मारपीट करने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाना सत्य से परे एवं निराधार है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी-सह-उपस्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज से प्राप्त मंतव्य मे लिखा है कि श्री कुमार ं द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण एवं लगाये गये आरोप पूर्णतः गलत है। मेरे द्वारा गाली-गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग इनके विरूद्ध नही किया गया। बल्की श्री कुमार द्वारा ही दिनांक 25.04. 2013 को उपस्थिति बनाकर कार्यालय से अनुपस्थित पाये जाने के कारण स्पष्टीकरण मांगने पर इनके द्वारा अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई। इसके पश्चात् बिक्रमगंज थाना मे ं प्राथमिकी दर्ज करायी गयी हैै। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप संख्या- 01 सत्य है। | ||
| 13 को समर्पित किया गया है, जबकि प्रपत्र 'क' के संलग्न अनुलग्नक को दिनांक 06.05.13 में अभिप्रमाणित किया गया है। जबकि जिला पदा0 महोदय रोहतास का ज्ञापांक 418, दिनांक 07. 05.13 प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में दिनांक 08.05.13 को प्राप्त है। जिसका साक्ष्य पत्र के पाश्र्व अंकित (हासिया) में अध्याक्षर प्र0वि0पदा0 का अंकित है। जो कार्या0 के अभिलेख से सम्पुष्ट है। इसका मतलब है कि प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा शडयंत्र के तहत मेरे विरूद्ध निलंबन के पूर्व से ही सुनियोजित साजिश रचा गया है। और निलंबन के पूर्व से ही सारे कागजात सुनियोजित तरीके से तैयार कर उनके द्वारा रखा गया था। जो स्पष्ट रूप में दुराग्रह एवं द्वेषता का प्रतीक है। | |||
| 2 | आदेश अवहेलना :- प्रखण्ड नजारत का कार्य बाधित न हों को घ्यान में रखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा आपको प्रखण्ड कार्यालय राजपुर से प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज में प्रतिनियुक्ति किया गया। तत्पश्चात् आपको नजारत का प्रभार स्थानान्तरित पूर्व नाजिर श्री मो0 उमर खॉ से लेने हेतु आदेशित किया गया। प्रभार लने के क्रम में पूर्व में े नाजीर द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि आपके द्वारा आंशिक प्रभार लिया गया है कि आपके द्वारा आंशिक प्रभार लिया गया है तथा अन्य प्रभार लेने को स्पष्ट इन्कार किया जा रहा है। इस संबंध मे आपको स्पष्टीकरण की ं मांग की गई, परन्तु आपके द्वारा कोई जवाब नही दिया गया। आपके द्वारा प्रभार नहीं लेने के े कारण विकास कार्यो पर प्रतिकूल प्रभाव पडा है। जिसकी सूचना इस कार्यालय के पत्रांक 1355/दिनांक 12.09.2012 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज को दे दी गयी है। ससमय प्रभार ग्रहण नहीं करना तथा स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देना आदेश अवहेलना एवं अनुशासनहीनता को प्रदर्शित करता है। | अनु0पदा0, बिक्रमगंज के आदेश ज्ञापांक 1775, दिनांक 16.08.12 द्वारा नजारत का प्रभार लेने के लिए मुझे प्रखंड कार्या0, राजपुर से प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में प्रतिनियुक्त किया गया था, जिसकी सम्पुष्टि जिला पदा0 महोदय रोहतास द्वारा अपने आदेश संख्या- 63/12-13 एवं ज्ञापांक सं0 1067/स्था0, दिनांक 23.10.12 द्वारा ही कर दी गयी है। विदित हो कि मै राजपुर प्र0 में नाजीर ही था, अनु0पदा0, बिक्रमगंज के आदेश ज्ञापांक 1775 दिनांक 16.08.12 के आलोक में प्र0वि0पदा0, राजपुर द्वारा 16.08.12 को 17.08.12 के अपराह्न के प्रभाव से विरमित कर दिया गया। विरमित एवं प्रभार देने संबंधी आदेश पत्रांक 914, दिनांक 17.08.12 मुझे दिनांक 18.08.12 को प्राप्त कराया गया। मै दिनांक 18.08.12 को बिक्रमगंज प्रखंड में योगदान किया था, अनु0पदा0, बिक्रमगंज के आदेश ज्ञापांक 1775, दिनांक 16.08.12 का अनुपालन सुनिश्चित करने में एक सप्ताह समय प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा लिया गया। यानि पत्रांक 1272, दिनांक 23.08.2012 को प्रभार लेने का आदेश निर्गत किया गया। प्र0कार्या0, बिक्रमगंज मे नजारत का ं कार्य करने के लिए प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा हमसे पूर्व उसी कार्यालय के श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को आदेश दिया गया था। जो वर्तमान में नजारत का कार्य कर रहे है। तत्पश्चात प्रखंड नाजीर बिक्रमगंज द्वारा | आरोप संख्या 02 आदेश अवहेलना :- आरोपी का अपने स्पष्टीकरण में कथन है कि अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के आदेश ज्ञापांक 1775 दिनांक 16.08.2012 द्वारा नजारत का प्रभार लेने हेतु प्र0कार्या0, राजपुर से प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में प्रतिनियुक्त किया गया जो दिनांक 17.08.2012 को विरमित हुआ दिनांक 18.08.2012 को प्र0कार्या0 में योगदान किया। दिनांक 23.08.2012 को प्रभार लेने का आदेश निर्गत हुआ। पूर्व नाजीर बिक्रमगंज से आंशिक प्रभार प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा मुझपर पुलिस बल का प्रयोग कर प्रखण्ड नजारत का प्रभार दिया गया। इसलिए प्रभार लेने के बाद जो भी पत्र मुझे प्राप्त कराया गया था स्पष्टीकरण का जवाब ससमय मेरे द्वारा दे दिया जाता था। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी-सह-उपस्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य मे लिखा है कि श्री कुमार ं द्वारा ससमय प्रभार ग्रहण नहीं करना तथा स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देना आदेश की अवहेलना एवं अनुशासनहीनता है। श्री कुमार के मारपीट कर कार्यालय से फरार होने के बाद नजारत का कार्य श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक से कार्यालय एवं विकास कार्य बाधित न हो |
| प्रभार सूची बनाना प्रारंभ किया गया और आंशिक प्रभार प्र0वि0पदा0 द्वारा मुझ पर पुलिस बल का प्रयोग कर प्रखंड नजारत का प्रभार दिया गया। प्र0वि0पदा0 द्वारा (हमेशा मौखिक रूप से निदेशित किया जा रहा था कि) अद्यतन रोकड़ पंजी का प्रभार लेकर कार्य करने के लिए मेरे उपर हमेशा दबाव बनाया जा रहा था। बाद में अन्य प्रभार की सूची भी पूर्व नाजीर द्वारा बनाया जाने लगा सूची तैयार होने के बाद मिलाने के पश्चात हस्ताक्षर कर सूची उपलब्ध करा देने की बात पूर्व नाजीर से मेरे द्वारा कही गयी थी। लेकिन प्रभार दिए एक सप्ताह भी नहीं हुआ कि मो0 उमर खॉ पूर्व नाजीर द्वारा अपने आवेदन दिनांक 01.09.12 में यह लिखा की नजारत संबंधी अन्य या पुराने कागजातों को लेने से मेरे द्वारा इन्कार किया जा रहा है। अत्यन्त ही खेदजनक एवं निराशाजनक है। मो0उमर खॉ द्वारा आरोप पत्र देने की तिथि को ही यानि दिनांक 01.09.12 को ही प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा अपने ज्ञापांक 1320 दिनांक 01.09.12 द्वारा एतद संबंधी आदेश आदेश निर्गत किया गया। जबकि प्रभार सूची से प्रभार को मिलाने मे समय भी लगता ं है। दिनांक 01.09.12 को बिक्रमगंज के प्रभार सूची पूराने प्रभार को मिलाने का आदेश प्र0वि0पदा0 द्वारा दिया जाता है तो दूसरे तरफ अपने पत्रांक 1337, दिनांक 04.09.12 द्वारा यह आदेश के साथ पत्र निर्गत किया जाता है कि दिनांक 05.09.12 को प्रखंड नजारत, राजपुर का प्रभार देना सुनिश्चित करें एवं दिनांक 06.09.12 को आप अपने को राजपुर प्रखंड से स्वतः विरमित समझे भवदीय स्वतः विचार करना चाहेंगे कि प्रखंड नजारत का प्रभार एक दिन में देना या लेना क्या संभव है। आदेश के आलोक में प्र0कार्या0 से स्वतः विरमित होकर प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में चला गया रोटिन कार्य करते हुए मै प्रभार सूची का मिलान भी कर रहा था कि प्र0वि0पदा0 द्वारा अपने पत्रांक 1355, दिनांक 12.09.12 द्वारा मेरे विरूद्ध शडयंत्र रचकर अनु0पदा0, बिक्रमगंज के यहॉ मिथ्या आरोप पत्र दायर कर दिया गया। उधर प्र0वि0पदा, राजपुर द्वारा मेरे उपर प्रभार देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। मेरे द्वारा प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा | इसलिए नजारत का कार्य लिया जा रहा हैे। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0-02 सत्य है। | ||
| अनेकों बार लिखित आवेदन पत्र एवं मौखिक रूप से प्रखंड, राजपुर का नजारत का प्रभार देने हेतु प्रतिनियुक्ति के लिए अनुरोध किया गया। इसी दरम्यान महालेखाकार कार्यालय, बिहार, पटना के पदाधिकारियों द्वारा प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज का अंकेक्षण करने के लिए आए हुए थे। उपर वर्णित तथ्यों से स्पष्ट होता है कि प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज के मनसा के विपरीत अनु0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा मुझे प्र0कार्या0, बिक्रमगंज का नजारत का प्रभार दिलाया गया था। इसलिए प्रभार लेने के एक पक्ष के अन्दर प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा मेरे विरूद्ध शडयंत्र रचा जाने लगा। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा Biased, Prejudice एवं Malafied भावना से उत्प्रेरित होकर मेरे विरूद्ध उक्त कार्रवाई की गयी। जो भी पत्र मुझे प्राप्त कराया गया था स्पष्टीकरण का जबाब ससमय मेरे द्वारा प्र0वि0पदा0 को दे दिया जाता था। | |||
| 3 | अनुशासनहीनता :- आप अपने मन से बिना किसी के अनुमति के कभी भी कार्यालय छोडकर चले जाते है। इस संबंध मे आप से स्पष्टीकरण की मांग ं की गई है परन्तु अभी तक किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिये है। अपने मन से अनुपस्थिति पंजी पर सी0एल0 दर्ज करते है और क्रॉस उपस्थिति पंजी पर सासाराम लिख देते है। | यह आरोप भी मनगढंत एवं बेबुनियाद है मै दिनांक 04.04.2013 को प्र0वि0पदा0 के मौखिक आदेशानुसार सरकारी कार्यवश सासाराम गया था। दिनांक 08.04.13 को 04ः00 बजे संध्या अनु0कार्या0, बिक्रमगंज गया था। दिनांक 06.04.13 को अवकाश का आवेदन देकर अवकाश में था। दिनांक 25.04.13 को प्र0लिपिक से मौखिक आदेश लेकर अनु0कार्या0, बिक्रमगंज 11ः00 बजे पूर्वाह्न में गया था। कार्यपालक दण्डाधिकारी से कार्य के सिलसिले में सम्पर्क स्थापित किया था। प्र0वि0 पदा0, बिक्रमगंज का ज्ञापांक 421 दिनांक 04.04.13, 438 दिनांक 09. 04.13, 487 दिनांक 25.04.13 मुझे आज तक प्राप्त नहीं है, ताकि मै अपना स्पष्टीकरण दे सकूं। अबतक जो पत्र प्राप्त हुआ है। उसका स्पष्टीकरण प0वि0पदा0, बिक्रमगंज को दे चुका हूॅ। अभी तक उपस्थिति के आधार पर प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा उपस्थिति प्रतिवेदन प्र0वि0पदा0, राजपुर को निलंबन से पूर्व भेजा जाता रहा है। जिसके आधार पर प्र0वि0पदा0, राजपुर द्वारा निर्धारित वेतन भुगतान किया गया है। | आरोप सं0 03 अनुशासनहीनता ः- आरोपी का अपने स्पष्टीकरण में कथन है कि यह आरोप भी मनगठंत एवं बेबुनियाद है। दिनांक 06.04.2013 को प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से दिनांक 06.04.2013 को आकस्मिक अवकाश दिनांक 25.04.2013 को प्रधान लिपिक से मौखिक आदेश लेकर बिक्रमगंज एवं सासाराम गया था। मुझसे कोई स्पष्टीकरण नहीं पुछा गया है और नहीं मुझे प्राप्त हुआ है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज के उपस्थिति प्रतिवदेन के आधार पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर के द्वारा मेरा वेतन का भुगतान किया गया है। प्र0वि0पदा0-सह-उपस्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज का मंतव्य है कि अरोप पूर्णतः सत्य है। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0 03 सत्य है। |
| 4 | विाीय अनियमितता :- आपके द्वारा मेसर्स रवि स्टेशनरी एवं ऑर्डर सप्लायर्स, बिक्रमगंज का पारित 42648.00 जिसे अभिश्रव पंजी में दर्ज कर दिया गया है। परन्तु अभी तक इसका भुगतान नहीं किया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के द्वारा माह फरवरी में विपत्र निकालने से संबंधित समीक्षा बैठक मे आपके द्वारा 36000/- का ं गलत अभिश्रव का विपत्र बनाया गया था, जिसे अनुमंडल पदाधिकारी महोदय के द्वारा जप्त कर लिया गया। जिला स्तर से कई महत्वपूर्ण प्रतिवेदन यथा 31.03.2013 का सहायक रोकड पुस्त की छायाप्रति डी0सी0 बिल उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि की मांग आप से की जाती थी, परन्तु आपके द्वारा इसे नहीं दिया गया, जिसकी सूचना अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज एवं उप समार्हाा, स्थापना, रोहतास, सासाराम को दी गई है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर के द्वारा अपने पत्र से सूचित किया गया है कि श्री मनोज कुमार के द्वारा 136000/- का अभिश्रव अभिश्रव पंजी में अंकित किया गया है परन्तु उसका भुगतान नहीं किया गया है। इसके अति उनके द्वारा यह भी सूचित किया गया है कि उनके पास अभी नजारत का 21500/- अवशेष राशि है। | प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्रांक 319 दिनांक 15.03.2013 के आलोक में कहना है कि महादलित के चयनित स्थलों पर झण्डोतोलन के लिए 15 अगस्त 2012 को 11200/- एवं 26 जनवरी 2013 के अवसर पर कार्य सम्पादन हेतु 16800/- रू0 विकास मित्र एवं प्रतिनियुक्त शिक्षकों को भुगतान किया गया, जिसमें दिसम्बर 2012 में 11200/- एवं 25.01.2013 को 10000/- रू0 यानि कुल 21200/- रू0 अभिश्रव के आलोक मे ं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज को दे दिया गया है, जो वर्ष 2012-13 के अग्रिम पंजी में देखा जा सकता है। रवि स्टेशनरी, बिक्रमगंज से 20842/- रू0 का अभिश्रव प्राप्त था, जिसे आपके द्वारा पारित करने के पश्चात् उन्हें भुगतान कर दिया गया है। जिसे अभिश्रव पंजी से मिलान किया जा सकता है। अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा फरवरी 2013 में विपत्र निकासी हेतु समीक्षा बैठक में पे शन शिविर का ं आपके मौखिक आदेशानुसार अभिश्रव तैयार कर विपत्र बनाया गया था। इस संबंध मे अनुमण्डल पदाधिकारी, ं बिक्रमगंज द्वारा प्रखण्ड नाजीर से प्रधान लिपिक एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज के आरोप पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। जिससे संबंधित स्पष्टीकरण मेरे द्वारा अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज को दिया गया है (छायाप्रति संलग्न)। अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा अभिश्रव पंजी से मिलान कर मुझे निदो र्ष साबित किया गया था। इस संबंध मे प्रधान सहायक श्री हरिशंकर ं प्रसाद एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज से अपने ज्ञापांक 295 दिनांक 19.02.2013 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। जिसे कार्यालय से मांग की जा सकती है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर द्वारा आरोपित की 136000.00 का अभिश्रव अभिश्रव पंजी में अंकित किया गया है, परन्तु उसका भुगतान नहीं किया गया है। यह सत्य से परे है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर के पत्र के विपरित प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा आरोप पत्र में तथ्य अंकित किया गया। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर के द्वारा | आरोप सं0 :- 04- प्रपत्र ''क'' में लगाया गया विाीय अनियमितता के संबंध में आरोपी का स्पष्टीकरण में कथन है कि रवि स्टेशनरी, बिक्रमगंज से 20842.00 रू0 का अभिश्रव प्राप्त था। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज से अभिश्रव पारित होने के पश्चात् उन्हें भुगतान कर दिया गया है, जबकि आरोपी पर आरोप लगाया गया है कि मेसर्स रवि स्टेशनरी एवं ऑर्डर सप्लायर्स, बिक्रमगंज का पारित मो0 42648.00 रूपया जिसे अभिश्रव पंजी में दर्ज कर दिया गया है, परन्तु अभीतक इसका भुगतान नहीं किया गया हैं। आरोपी ने अन्य आरोपाें से संबंधित स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य दिया है कि मेसेर्स रवि स्टेशरी, बिक्रमगंज का बकाये राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। आरोपी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण पूर्णतः गलत है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर के यहॉ की राशि समायोजन आरोपी द्वारा किया गया है या नहीं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर बता सकते है। जहॉ तक मेरे द्वारा प्राप्त किये गये अग्रिम का संबंध है इस कार्यालय का पत्रांक 1185 दिनांक 16.11.2013 तथा पत्र सं0 1320 दिनांक 19.12.2013 से स्थिति स्पष्ट हो जायेगा। श्री कुमार द्वारा अग्रिम पंजी मे ं Interpollation एवं छेडछाड की गयी है जो स्पष्टतः विाीय अनियमितता का द्योतक है। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0 04 सत्य है। |
| पंचायत निर्वाचन 2011 का अभिश्रव क्रमशः 88000.00, 48000.00, 4400.00, 5039.00 मात्र कुल 145439.00 का अभिश्रव पारित कर भुगतान करने के पश्चात अभिश्रव पंजी में दर्ज किया गया है। पंचायत निर्वाचन 2011 में मतगणना कर्मियों एवं पुलिस बल के लिए तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के आदेशानुसार खाना एवं नास्ता मे खर्च की गई थी। जिसका ं अभिश्रव प्रखण्ड नजारत, राजपुर में उपलब्ध है। जिसे तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी श्रीमति विभा रानी सम्प्रति प्रखण्ड विकास पदाधिकारी अलौती, जिला- खगड़िया में कार्यरत है। जिनसे सम्पुष्टि की जा सकती है। इसके अतिरिक्त प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर मेरे उपर 21500/- नजारत का राशि अवशेष दिखाया गया है, जो गलत एवं बेबुनियाद है। मेरे उपर प्रखण्ड नजारत, राजपुर का किसी प्रकार का बकाया नहीं है। जिसका रोकड़ पंजी के प्रभार प्रतिवेदन से स्पष्ट किया जा सकता है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा लगभग 2100/- रू0 का जीप बनाने का अभिश्रव का आरोप मुझ पर लगाया गया है कि भुगतान किये बगैर अभिश्रव पंजी में मेरे द्वारा दर्ज कर दी गई है। उसे अभिश्रव पंजी से मिलान किया जा सकता है। इस प्रकार का अभिश्रव अभिश्रव पंजी मे मेरे द्वारा ं अंकित नहीं किया गया है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज के पत्रांक 05/मु0, दिनांक 10.04.2013, एवं 289 दिनांक 06.03.2013 के क्रम में कहना है कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज के वगैर उच्चाधिकारी के आदेश अनियमित एवं नियम विरूद्ध प्रभार देने संबंधी आदेश के आलोक में 14.02.2013 तक रोकड़ पंजी मैं अद्यतन कर दिया था। दिनांक 10.04.2013 को चेक बुक एवं चेक पंजी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज द्वारा जबरन मुझसे लेकर प्रधान लिपिक श्री हरिशंकर प्रसाद के माध्यम से श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को दे दिया गया । दिनांक 14.02.2013 के बाद प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा चेक निर्गत किया जाता रहा, चेक बुक एवं चेक पंजी वापस नहीं किया गया। जिसके कारण दिनांक 14.02.2013 के बाद रोकड़ पंजी अद्यतन नहीं किया जा सका। दिनांक | |||
| 14.02.2013 के बाद रोकड़ पंजी अद्यतन करना प्रधान सहायक श्री हरिहर प्रसाद प्रखण्ड नाजीर श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह एवं आप स्वयं उतरदायी है। मेरे द्वारा प्रभार सूची भी तैयार कर दी गयी थी। जिसकी सूचना मेरे द्वारा अनेको बार मौखिक एवं ं लिखित रूप से दी गयी थी। अनुमण्डल पदाधिकारी बिक्रमगंज द्वारा प्रधान सहायक एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के समक्ष प्रभार नहीं देने की बात की गयी थी। चेक पंजी, चेक बुक एवं आवश्यक कागजात प्रखण्ड नजारत को वापस करने की सख्त आदेश दी गयी थी। जो प्रधान लिपिक श्री हरिशंकर प्रसाद, श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा अनुपालन नहीं किया गया। दिनांक 14.02.2013 के पूर्व माह सितम्बर 2012 से फरवरी 2013 तक भी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा प्रखण्ड नजारत बिक्रमगंज से बिना सक्षम पदाधिकारी के आदेश के निम्नलिखित अग्रिम राशि लिया गया । 1. 01.09.2012 8000.00 नगद 2. 08.10.2012 10000.00 चेक 3. 05.12.2012 10000.00 नगद 4. 11.12.2012 20000.00 नगद 5. 25.01.2013 10000.00 नगद 6. 14.02.2013 50000.00 नगद उक्त सारी राशि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा लिया गया है जिसमें प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज द्वारा दिनांक 19.01.2013 को 40000 रू0 समायोजन किया गया है, जिसकी पुष्टि उनके पत्रांक 694 दिनांक 18.06.2013 एवं ज्ञापांक 1185 दिनांक 16.11.2013 से हुई है, जिससे स्पष्ट है कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज द्वारा विाीय अनियमितता बरती गयी है। श्री अरूण कुमार, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज पूर्व में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बेनीपट्टी (जिला- मधुबनी) के पद पर पदस्थापित थे। बेनीपट्टी प्रखण्ड पदस्थापन काल में इनके द्वारा 429687.00 (चार लाख उन्नतीस हजार छः सौ सन्तावन) रू0 की हेरा फेरी किया गया है। इनके द्वारा विधान सभा 2010 के अवसर पर प्रखण्ड स्तर का काम जैसे रौशनी, | |||
| बैरीयर, टेन्ट आदि कार्य के विरूद्ध उक्त अभिश्रवों पर श्री अरूण कुमार, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा अपने पेन में अंकित किया गया है, कि भुगतान मेरे द्वारा किया गया है। लेकिन वास्तव में इनके द्वारा किसी अभिश्रव का भुगतान नहीं किया गया है। इस क्रम में श्री गौरी शंकर प्रधान का आवेदन दिनांक 07.06.2012 के अनुलग्नक सहित छायाप्रति जो 23 पृष्टों की है जो संलग्न की जाती है। | |||
| 5 | आदेश की अवहेलना :- आपके द्वारा नजारत का कार्य सुचारू रूप से नहीें होने के कारण श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को नजारत का प्रभार सौंपने हेतु जनवरी 13 में आदेश दिया गया था तथा इस कार्य हेतु अनेको स्मार दिया गया परन्तु आपके द्वारा नजारत का सम्पूर्ण प्रभार श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को नहीं दिया गया। इसके कारण कई प्रतिवेदन अभी तक भेजा नहीं जा सका है और कार्य करने मे कठिनाई हो रही है। ं इस तरह आपका कृत्य बिहार सरकारी सेवा आचरण नियमावली 1976 के नियम 3(1) का (i),(ii),(iii) का उलंघन है। | प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज का आरोप निराधार, बेबुनियाद एवं मनगढंत है। चेकबुक चेक पंजी एवं नजारत से लिए गये अग्रिम को प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज द्वारा नहीं लौटाने जाने के कारण न तो 14. 02.2013 के बाद रोकड बही लिखा सका नही तो किसी तरह कर नजारत का प्रभार श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को मेरे द्वारा दिलाया गया है। 26.04.2013 से 23.05.2013 तक मैं अवकाश में था। 24.05.2013 को जब मैं कार्यालय आकर योगदान दिया तथा अनुरोध किया की मै प्रभार देने को ं तैयार हूँ इसलिए इनभेन्ट्रीज से प्रभार दिलाने के बजाय मुझसे प्रभार दिला दिया जाय लेकिन आपके द्वारा ऐसा करने से इनकार किया गया। मेरे योगदान आवेदन प़त्र का छायाप्रति संलग्न है । अनुमण्डल पदाधिकारी, ै बिक्रमगंज के ज्ञापांक 1775 दिनांक 16. 08.2012 एवं जिला पदाधिकारी महोदय रोहतास का ज्ञापांक 1067 दिनांक 23. 10.2012 के आदेश के विपरीत तथा बिहार बोर्ड प्रकीर्ण नियमावली के नियम 110 के विपरीत छः माह के अन्दर प्रभार में बार-बार फेर बदल करना नियम विरूद्ध है। साथ-ही भ्रष्टाचार तथा कदाचार को बढावा देने के सदृष्य है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को राजपुर प्रखण्ड कार्यालय के लिए विरमित नहीं किया गया इस संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से स्पष्टीकरण की मॉग की गयी थी, जो कार्यालय में उपलब्ध है। मॉग कर अवलोकन किया जा सकता है। अपने आदेश ज्ञापांक 100 दिनांक 31.01.2013 द्वारा मेरा प्रभार बदल दिया गया तथा ज्ञापांक 136 दिनांक 05.02.2013, 175 दिनांक 16.02.2013, 247 दिनांक 02. | आरोप सं0 -05 आदेश की अवहेलना :- आरोपी का अपने स्पष्टीकरण में कथन है कि आरोप निराधार, बेबुनियाद एवं मनगढंत है। चेकबुक, चे कपंजी ं एवं नजारत से लिये गये अग्रिम को प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा नहीं लौटाये जाने के कारण न तो 14.02.2013 के बाद रोकड बही लिखा सका न तो किसी तरह का नजारत का प्रभार श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को मरे द्वारा दिलाया गया है। दिनांक 26.04.2013 से 23.05. 2013 तक अवकाश में था और दिनांक 24.05.2013 को पुनः योगदान दिया। नजारत का प्रभार दिलाने के लिए दबाव बनाये जाने लगा ताकि नजारत से लिये गये अग्रिम को हडपा जाय। इस आशय की विस्तृत सूचना अपने आवेदन के माध्यम से अनुमण्डल पदाधिकारी/जिला पदाधिकारी को साक्ष्य सहित दी जा चुकी है। साथ-ही मौखिक रूप से श्री रामेश्वर सिंह द्वारा नजारत का प्रभार नहीं लेने की बात प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज के समक्ष अनेकोे बार मौखिक भी सूचित की जाती थी। प्र0वि0पदा0-सह-उपस्थापन पदा0, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य में लिखा है कि आदेश की अवहेलना आरोपी द्वारा किया गया है। यह सत्य है। नजारत का प्रभार इनके द्वारा अनकों पत्र देने के बाद भी नहीं दिया गया । अन्ततः इनके द्वारा नियंत्री पदाधिकारी के साथ मार-पीट कर फरार हाने के पश्चात् इन्भेन्ट्री के माध्यम से श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को नजारत |
| 03.2013 एवं 420 दिनांक 04.04.2013 द्वारा प्रभार देने के लिए दबाव बनाया जाने लगा ताकि नजारत से लिए गये अगिम को हडप जाय। उक्त आशय की विस्तृत सूचना मेरे द्वारा अपने आवेदन के माध्यम से अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज एवं जिला पदाधिकारी, रोहतास को साक्ष्य सहित दी जा चुकी हैै। सुलभ प्रसंग हेतु उक्त पत्र की छायाप्रति संलग्न की जाती है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज द्वारा घोर अनियमितता वरती गयी है जिसका उल्लेख कंडिका 04 में की गयी है। साक्ष्य के रूप में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज के ज्ञापांक 694 दिनांक 08.06.2013 एवं ज्ञापांक 1185 दिनांक 16.11.2013 की छायाप्रति संलग्न कर दी गयी है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा प्रभार संबंधी जो भी पत्र प्राप्त कराया जाता था। मेरे द्वारा स्पष्टीकरण ससमय प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को उपलब्ध करा दिया जाता था। साथ-ही मौखिक रूप से भी श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह द्वारा नजारत का प्रभार नहीं लेने की बात प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के समक्ष मेरे द्वारा अनेको बार मौखिक भी सूचित की जाती थी। | का प्रभार दिलाया गया है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य मे ं लिखा है कि अरापी के द्वारा दिनांक 14.02.2013 के बाद रोकड पंजी को अद्यतन नहीं किया गया है और न हीं रोकड पंजी का ''डिटेल्स'' निकाला गया है, जिससे रोकड पंजी की स्थिति स्पष्ट हो सके। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0 05 सत्य है। | ||
| 6 | नाम मे अन्तर :- पूर्व में पत्राचार के क्रम में लिपिकीय भूल से कहीं श्री मनोज कुमार, प्रखण्ड नाजीर, बिक्रमगंज एवं कही श्री मनोज कुमार सिंह, नाजीर प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज अंकित हो गया है। वास्तव में इनका नाम मनोज कुमार है। | मेरा नाम श्री मनोज कुमार है। | आरोप सं0 06 :- नाम में अंतर ः- आरोपी पर प्रपत्र ''क'' में लगाया गया आरोप में यह उल्लेख किया गया है कि पूर्व में पत्राचार के क्रम में लिपिकीय भूल से कहीं मनोज कुमार, प्रखण्ड नाजिर, बिक्रमगंज एव कही श्री मनोज कुमार सिंह, नाजिर प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज अंकित हो गया है। वास्तव मे इनका नाम श्री मनोज ं कुमार है। अरोपी से प्राप्त स्पष्टीकरण में कथन है कि मेरा नाम मनोज कुमार है। इस प्रकार आरोपी पर लगाया गया आरोप असत्य है। |
| 7 | प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर से संबंधी आरोप का विवरण :-विाीय अनियमितता :- आपके द्वारा 15 अगस्त 2012 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुधा मिष्ठान भंडार, राजपुर से 15000/- रूपये के मंगाये गये मिठाई के पैकेट का अभिश्रव दिया गया तथा अभिश्रव के राशि की | प्र0वि0पदा0, राजपुर के पत्रांक 160 दिनांक 14.02.2013 एवं 177 दिनांक 20.02.2013 के क्रम में कहना है कि मै अपने आवेदन दिनांक 20.02.2013 द्वारा स्पष्ट कर दिया है कि 15 अगस्त 2012 के अवसर पर मिठाई का पैकेट मंगाया गया था। सुधा मिष्ठान भण्डार राजपुर से 15000.00 रू0 के मंगाये गये | आरोप सं0-7 विाीय अनियमितताः- प्रखण्ड कार्यालय राजपुर से संबंधित आरोप :- आरोपी का स्पष्टीकरण में कथन है कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर के पत्रांक 160 दिनांक 14.02.2013 एवं 177 दिनांक 20. 02.2013 के क्र मे मैं अपने |
| राशि की निकासी आपके द्वारा कर ली गई है, परन्तु भुगतान नहीं किया गया है। उक्त राशि को ज्ञापांक 160/ दिनांक 14.02.2013 से प्रखण्ड नजारत मे जमा करने का आदेश के ं बावजुद पैसा जमा नही किया गया है। यह क्रिया आदेश अवहेलना एवं विाीय अनियमितता को प्रदर्शित करता है। | मिठाई का पैकेट का अभिश्रव प्राप्त नहीं है और नहीं अभिश्रव पंजी मे दर्ज ं किया गया है। और नहीं इस प्रकार का अभिश्रव दिया गया है। जिसका अभिश्रव मुझे अप्राप्त था। उक्त राशि के विरूद्ध प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर द्वारा मुझे सुधा मिष्ठान राजपुर का 10000.00 रू0 का अभिश्रव दिया गया जिस पर पावती रसीद प्राप्त था। तत्पश्चात् 10000.00 रू0 का अभिश्रव लेकर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर को नाजीर के समक्ष दे दिया गया था। शेष 20000.00 रूपये मेरे द्वारा अन्य पारित अभिश्रव में समायोजित कर दिया गया। मेरे द्वारा दिनांक 20.02.2013 को एतद् संबंधी सूचना प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर को दे दी गयी है। जिसकी प्रतिउार का छायाप्रति संलग्न है। | आवेदन पत्र दिनांक 20.02.2013 से स्पष्ट कर दिया है कि 15 अगस्त 2012 के अवसर पर मिठाई का पैकेट सुधा मिष्ठान भण्डार, राजपुर से 15000.00 के मंगाये गये मिठाई के पैकेट का अभिश्रव प्राप्त नहीं है और नहीं अभिश्रव पंजी में दर्ज किया गया है और नहीं अभिश्रव पंजी मे दर्ज ं किया गया है और नहीं इस प्रकार का अभिश्रव दिया गया है। मुझे इसका अभिश्रव अप्राप्त था। उक्त राशि के विरूद्ध प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर द्वारा मुझे सुधा मिष्ठान भंडार, राजपुर का 10000.00 (दस हजार) अभिश्रव दिया गया जिसपर पावती रसीद प्राप्त था। तत्पश्चात् 10000 (दस हजार) रू0 का अभिश्रव लेकर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर के नाजिर के समक्ष दे दिया गया था। शेष 20000.00(बीस हजार) रू0 मेरे द्वारा अन्य पारित अभिश्रव में समायोजित कर दिया गया।इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा 15 अगस्त 2012 को सुघा मिष्ठान भंडार, राजपुर से 15000.00 रूपये के मंगाये गये मिठाई के पैकेट का अभिश्रव दिया गया तथा राशि की निकासी आरोपी के द्वारा कर ली गई, परन्तु भुगतान नहीं किया गया। उक्त राशि को प्रखण्ड नजारत मे जमा करने का आदेश ं देने के बाद भी पैसा जमा नहीं करना, आदेश अवहेलना एवं विाीय अनियमितता का द्योतक है। आरोपी पर लगाया गया आरोप सत्य है। मंतव्य :- अरोपी श्री मनोज कुमार, लिपिक प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज पर गठित अरोप ''प्रपत्र क'' में लगाया गया आरोप सं0 01 से 07 तक (06 को छोडकर) सत्य पाया गया। |
संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के आलोक में आरोपी कर्मी से द्वितीय कारण पृच्छा इस कार्यालय के ज्ञापांक 695/स्था0, दिनांक 07.08. 2018 से पूछा गया। जिसके संबंध में आरोपी कर्मी द्वारा अपनी द्वितीय कारण पृच्छा दिनांक 17.09.2018 को समर्पित की गयी, जिसका व्योरा निम्नवत है :-
17 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021| क्र 0 | आरोप का विवरण | संचालन पदाधिकारी का मंतव्य | आरोपी का द्वितीय कारण पृच्छा का जबाब |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज से संबंधी आरोप का विवरण :- नियंत्री पदाधिकारी के साथ मारपीट एवं दुव्र्यवहार :- दिनांक 25.04.2013 को उपस्थिति बनाकर कार्यालय से अनुपस्थित पाये जाने के फलस्वरूप स्पष्टीकरण की मॉग की गयी। आप स्पष्टीकरण पत्र लेकर नियंत्री पदाधिकारी के कक्ष में आये तथा अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए पत्र को फाड़ दिया, बैठकर शांति से बात करने के लिए कहे जाने पर और अधिक भडक उठे एव घुस्सा एवं फैट से मारने लगे। अचानक प्रहार से नियंत्री पदाधिकारी बुरी तरह से घायल हो गये। नियंत्री पदाधिकारी किसी प्रकार भाग कर अपनी जान बचाये तथा ईलाज कराने चिकित्सक के यहॉ पुहॅचे। ईलाज के पश्चात चिकित्सक से ईन्ज्युरी रिर्पोट लेकर बिक्रमगंज थाना में प्राथमिकि दर्ज करायी गयी। बिक्रमगंज थाना द्वारा प्र्राथमिकी संख्या 91/13 दिनांक 25.04.2013 भा0द0वि0 की धारा 147, 341, 323, 353, 333 प्रारभ्भ की गयी ह। आप उसी दिन (25.04.2013) से फरार है। नजारत का कार्य बुरी तरह से बाधित है। यह कृत उदंडता एवं अपराधिक प्रवृति का द्योतक है। | विभागीय कार्यवाही वाद संख्या 13/2013 श्री मनोज कुमार, लिपिक प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमंगंज के विरूद्ध गठित आरोप पत्र '' प्रपत्र क'' मे लगाये गये ं आरोपों के संबंध में आरोपी से जवाब/स्पष्टीकरण की मॉग की गयी थी, जो प्राप्त है। आरोपी के स्पष्टीकरण पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी-सह-उप स्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज से भी मंतव्य की मॉग की गयी थी, जो प्राप्त है। प्राप्त मंतव्य एवं संलग्न कागजातो का अवलोकन करने से ज्ञात होता है की आरोपी पर आदेश का अवहेलना कर नजारत का सम्पूर्ण पभार नहीं सौपने, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार करने एवं मारपीट करने के आरोप में निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध ''प्रपत्र क'' गठित कर विभागीय कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया है। आरोप एवं मंतव्य निम्न प्रकार है :- आरोप सं0 1 :- नियंत्री पदाधिकारी के सथ मारपीट एवं दुव्र्यवहार :- आरोपी का अपने जवाब/स्ष्टीकरण में कथन है कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज का आरोप निराधार एवं बेबुनियाद है। वास्तविकता यह है कि दिनांक 25. 04.2013 को निर्धारित समय पर कार्यालय पहूॅच कर उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर की गई थी। लगभग 11ः00 बजे पूर्वाहन में प्रधान लिपिक को मौखिक रूप से सूचना देकर अनुमंडल कार्यालय, बिक्रमगंज कार्यवश गया था। कार्यपालक दण्डाधिकारी से सम्पर्क स्थापित कर लगभग 12ः00 बजे कार्यालय आ गया था। कार्यालय आने पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने मुझे अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में बुलाया और अकारण मेरे साथ गाली-गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग उनके द्वारा किया गया। मेरे द्वारा गाली-गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग नही करने का अनुराध किया गया तो | कॉलम- 02 मे प्र0वि0पदा0, ं बिक्रमगंज द्वारा लगाया गया आरोप को कृपया अवलोकन किया जा सकता है, जिसके आलोक में मेरे द्वारा दिनांक 16. 12.2013 को विस्तृत व्योरा के साथ साक्ष्य सहित प्रतिवेदन अपर समाहर्त्ता (विभागीय जॉच), रोहतास, सासाराम को दिया गया था। चुकि वे ही मुझ पर चल रहे विभागीय जॉच के संचालन पदाधिकारी थे। लेकिन मेरे द्वारा समर्पित प्रतिवेदन (स्पष्टीकरण) में दिए गये विस्तृत व्योरा एवं संलग्न किए गए साक्ष्य के आधार पर कोई जॉच नहीं किया गया और तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज जो विभागीय जॉच के कार्रवाई में उपस्थापन पदाधिकारी बनाये गये थे के मंतव्य के आधार पर एक पक्षीय निर्णय लेते हुए क्रमांक- 1 के आरोप को सत्य करार दिया गया जो अपेक्षित प्रतीत नहीं होता है। भवदीय से अनुरोध है कि मेरे विरूद्ध गठित आरोप प्रपत्र 'क' के आलोक में दिनांक 16.12. 2013 को समर्पित साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण के आलोक मे गहन ं जॉच कर मुझे न्याय देने की कृपा की जाय। सुलभ प्रसंग हेतु दिनांक 16.12.13 का साक्ष्य सहित दिए गए स्पष्टीकरण को इस पत्र के परिशिष्ट 1 पर संलग्न की जाती है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से स्पष्ट होता है कि विभागीय कार्यवाही के उपस्थापन पदाधिकारी तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज को जिसके मंतव्य के आधार पर अपर समाहर्त्ता (विभागीय जॉच), रोहतास -सह- संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदन दिया गया है। जबकि अपर समाहर्त्ता (विभागीय जॉच), रोहतास, सासाराम के ज्ञापांक 146/वि0जॉच, दिनांक 30.11. 2013 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इस विभागीय कार्यवाही के उपस्थापन |
| और क्रोधित होकर मेरे पैकेट से 2000.00 (दो हजार) रूपया निकाल लिया गया। मै वहॉ से भागकर ं चिकित्सक से ईलाज कराया तथा अनुमंडलीय न्यायिक दण्डाधिकारी, बिक्रमगंज के यहाँ दिनांक 27.04. 2013 को भा0द0वि0 की धारा के तहत परिवाद सं0 246/13 प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज (श्री अरूण कुमार एवं श्री राजेश पासवान) के विरूद्ध मुकदमा दायर किया जो निर्णयाधीन है। इस प्रकार उनके साथ मारपीट करने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाना सत्य से परे एवं निराधार है। प्र0वि0पदा0 -सह- उपस्थापन पदा0, बिक्रमगंज से प्राप्त मंतव्य में लिखा है कि श्री कुमार द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण एवं लगाये गये आरोप पूर्णतः गलत है। मेरे द्वारा गाली-गलौज तथा असंसदीय भाषा का प्रयोग इनके विरूद्ध नही किया गया। बल्की श्री कुमार द्वारा ही दिनांक 25.04.2013 को उपस्थिति बनाकर कार्यालय से अनुपस्थित पाये जाने के कारण स्पष्टीकरण मांगने पर इनके द्वारा अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई। इसके पश्चात् बिक्रमगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी हैै। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप संख्या- 01 सत्य है। | पदाधिकारी प्रभारी पदा0, जिला सामान्य शाखा, रोहतास थे। सुलभ प्रसंग हेतु अपर समाहर्त्ता (विभागीय जॉच), रोहतास, सासाराम के ज्ञापांक 146/वि0जॉच, दिनांक 30.11. 2013 की छाया प्रति परिशिष्ट- 2 पर संलग्न करते हुए निवेदन पूर्वक कहना है कि तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज को उपस्थापन पदा0 बनाने से मुझे न्याय पाने के आसार खत्म हो जाते है। | ||
| 2 | आदेश अवहेलना :- प्रखण्ड नजारत का कार्य बाधित न हों को घ्यान में रखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज द्वारा आपको प्रखण्ड कार्यालय राजपुर से प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज में प्रतिनियुक्ति किया गया। तत्पश्चात् आपको नजारत का प्रभार स्थानान्तरित पूर्व नाजिर श्री मो0 उमर खॉ से लेने हेतु आदेशित किया गया। प्रभार लने के क्रम में पूर्व में े नाजीर द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि आपके द्वारा आंशिक प्रभार लिया गया है कि आपके द्वारा आंशिक प्रभार लिया गया है तथा अन्य प्रभार लेने को स्पष्ट इन्कार किया जा रहा है। इस संबंध में आपको स्पष्टीकरण की मांग की गई, परन्तु आपके द्वारा कोई जवाब नही दिया गया। आपके द्वारा प्रभार नहीं लेने के े कारण विकास कार्यो पर प्रतिकूल प्रभाव | आरोप संख्या 02 आदेश अवहेलना ः- आरोपी का अपने स्पष्टीकरण में कथन है कि अनुमण्डल पदाधिकारी, बिक्रमगंज के आदेश ज्ञापांक 1775 दिनांक 16.08.2012 द्वारा नजारत का प्रभार लेने हेतु प्र0कार्या0, राजपुर से प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में प्रतिनियुक्त किया गया जो दिनांक 17.08.2012 को विरमित हुआ दिनांक 18.08.2012 को प्र0कार्या0 में योगदान किया। दिनांक 23.08. 2012 को प्रभार लेने का आदेश निर्गत हुआ। पूर्व नाजीर बिक्रमगंज से आंशिक प्रभार प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा मुझपर पुलिस बल का प्रयोग कर प्रखण्ड नजारत का प्रभार दिया गया। इसलिए प्रभार लेने के बाद जो भी पत्र मुझे प्राप्त कराया गया था स्पष्टीकरण का जवाब ससमय मेरे द्वारा दे दिया | संचालन पदा0 -सह- अपर समाहर्त्ता (वि0जॉच) रोहतास, सासाराम द्वारा संचालन पदा0 के आदेश में अंकित प्रतिवेदन से विदित होता है कि मेरे द्वारा दिनांक 16.12.2013 को साक्ष्य सहित दिये गये स्पष्टीकरण के एक भी विन्दु पर जॉच नहीं करके तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज -सह- उपस्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज रोहतास के प्रभाव में आकर एक पक्षीय प्रतिवेदन देते हुए आरोप क्रमांक 2 को सही करार दिया गया है। मेरा साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण प्रशिष्ट 1 पर संलग्न है। भवदीय से सादर अनुरोध है कि उसकी जॉच अपने स्तर से स्वयं करने की कृपा की जाय। ताकि मुझे न्याय मिल सके। उक्त |
| पडा है। जिसकी सूचना इस कार्यालय के पत्रांक 1355/दिनांक 12.09.2012 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, बिक्रमगंज को दे दी गयी है। ससमय प्रभार ग्रहण नहीं करना तथा स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देना आदेश अवहेलना एवं अनुशासनहीनता को प्रदर्शित करता है। | जाता था। प्रखण्ड विकास पदा0 -सह- उपस्थापन पदाधिकारी, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य मे लिखा ं है कि श्री कुमार द्वारा ससमय प्रभार ग्रहण नहीं करना तथा स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देना आदेश की अवहेलना एवं अनुशासनहीनता है। श्री कुमार के मारपीट कर कार्यालय से फरार होने के बाद नजारत का कार्य श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक से कार्यालय एवं विकास कार्य बाधित न हो इसलिए नजारत का कार्य लिया जा रहा हैे। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0-02 सत्य है। | स्पष्टीकरण के कॉलम- 3 में सुस्पष्ट साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण दिया गया है। पूर्व प्रखंड नाजीर मो0 उमर खॉ द्वारा तत्कालिक नाजीर श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह द्वारा दिनांक 16.08.2012 को लिया गया प्रभार प्रतिवेदन जिसकी प्रति संलग्न है। स्पष्टीकरण के तथ्यों एवं संलग्न साक्ष्यों के जॉच से स्वतः स्पष्ट हो जाएगा कि तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज के इच्छा के विरूद्ध नजारत कार्य हेतु उच्च पदाधिकारी द्वारा मेरी प्रतिनियुक्ति करने से मेरे प्रति किस तरह से Malafied, Biased एवं Prejudice भावना अपनाए हुए थे। इस प्रकार तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज को उपस्थापन पदा0 बनाना जन हित एवं न्यायहित में अपेक्षित नहीं जान पड़ता है। | |
| 3 | अनुशासनहीनता :- आप अपने मन से बिना किसी के अनुमति के कभी भी कार्यालय छोडकर चले जाते है। इस संबंध मे आप से स्पष्टीकरण की मांग ं की गई है परन्तु अभी तक किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिये है। अपने मन से अनुपस्थिति पंजी पर सी0एल0 दर्ज करते है और क्रॉस उपस्थिति पंजी पर सासाराम लिख देते है। | आरोप सं0 03 अनुशासनहीनता :- आरोपी का अपने स्पष्टीकरण में कथन है कि यह आरोप भी मनगठंत एवं बेबुनियाद है। दिनांक 06.04.2013 को प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से दिनांक 06.04.2013 को आकस्मिक अवकाश दिनांक 25. 04.2013 को प्रधान लिपिक से मौखिक आदेश लेकर बिक्रमगंज एवं सासाराम गया था। मुझसे कोई स्पष्टीकरण नहीं पुछा गय है और नहीं मुझे प्राप्त हुआ है। प्र0वि0पदा0 बिक्रमगंज के उपस्थिति प्रतिवदेन के आधार पर प्र0वि0पदा0, राजपुर के द्वारा मेरा वेतन का भुगतान किया गया है। प्र0वि0पदा0-सह-उपस्थापन पदा0, बिक्रमगंज का मंतव्य है कि अरोप पूर्णतः सत्य है। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0 03 सत्य है। | क्रमांक 03 में लगाया गया आरोप को संचालन पदाधिकारी -सह- अपर समाहर्त्ता (विभागीय जॉच), रोहतास, सासाराम द्वारा तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज -सह- उपस्थापन पदा0 के मंतव्य के आधार पर सत्य करार दिया गया है। प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा निर्गत उपस्थिति प्रतिवेदन को भी नजरअंदाज कर दिया गया है, जो न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है। संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन को तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज के प्रभाव में आकर दिया गया प्रतिवेदन कहा जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। |
| 4 | विाीय अनियमितता :- आपके द्वारा मेसर्स रवि स्टेशनरी एवं ऑर्डर सप्लायर्स, बिक्रमगंज का पारित 42648. 00 जिसे अभिश्रव पंजी में दर्ज कर दिया गया है। परन्तु अभी तक इसका भुगतान नहीं किया गया है। अनु0पदा0, बिक्रमगंज के द्वारा माह फरवरी मे विपत्र निकालने से संबंधित ं समीक्षा बैठक में आपके द्वारा 36000/- का गलत अभिश्रव का | आरोप सं0 :- 04- प्रपत्र ''क'' मे ं लगाया गया विाीय अनियमितता के संबंध मे आरोपी का स्पष्टीकरण में ं कथन है कि रवि स्टेशनरी, बिक्रमगंज से 20842.00 रू0 का अभिश्रव प्राप्त था। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज से अभिश्रव पारित होने के पश्चात् उन्हें भुगतान कर दिया गया है, जबकि आरोपी पर आरोप लगाया गया है कि | वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोप को भी तत्कालिन प्र0वि0पदा0 -सह- उपस्थापन पदा0, बिक्रमगंज के मंतव्य के आधार पर सही करार दिया गया है। दिनांक 16.12.13 को साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण (परिशिष्ट 01 पर संलग्न) किसी भी विन्दु पर जॉच नहीं कर तत्कालिन प्र0वि0पदा0 जो गलत आरोप |
| विपत्र बनाया गया था, जिसे अनु0पदा0 महोदय के द्वारा जप्त कर लिया गया। जिला स्तर से कई महत्वपूर्ण प्रतिवेदन यथा 31.03.2013 का सहायक रोकड पुस्त की छायाप्रति डी0सी0 बिल उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि की मांग आप से की जाती थी, परन्तु आपके द्वारा इसे नहीं दिया गया, जिसकी सूचना अनु0पदा0, बिक्रमगंज एवं उप समार्हाा, स्थापना, रोहतास, सासाराम को दी गई है। प्र0वि0पदा0, राजपुर के द्वारा अपने पत्र से सूचित किया गया है कि श्री मनोज कुमार के द्वारा 136000/- का अभिश्रव अभिश्रव पंजी मे अंकित किया ं गया है परन्तु उसका भुगतान नहीं किया गया है। इसके अति उनके द्वारा यह भी सूचित किया गया है कि उनके पास अभी नजारत का 21500/- अवशेष राशि है। | मेसर्स रवि स्टेशनरी एवं ऑर्डर सप्लायर्स, बिक्रमगंज का पारित मो0 42648.00 रूपया जिसे अभिश्रव पंजी में दर्ज कर दिया गया है, परन्तु अभीतक इसका भुगतान नहीं किया गया हैं। आरोपी ने अन्य आरोपाें से संबंधित स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य दिया है कि मेसेर्स रवि स्टेशरी, बिक्रमगंज का बकाये राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। आरोपी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण पूर्णतः गलत है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर के यहॉ की राशि समायोजन आरोपी द्वारा किया गया है या नहीं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर बता सकते है। जहॉ तक मेरे द्वारा प्राप्त किये गये अग्रिम का संबंध है इस कार्यालय का पत्रांक 1185 दिनांक 16.11.2013 तथा पत्र सं0 1320 दिनांक 19.12.2013 से स्थिति स्पष्ट हो जायेगा। श्री कुमार द्वारा अग्रिम पंजी में Interpollation एवं छेडछाड की गयी है जो स्पष्टतः विाीय अनियमितता का द्योतक है। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0 04 सत्य है। | लगाने वाले पदा0 है के मंतव्य के आधार पर सहीं करार देना कहॉ तक न्यायोचित है विचारनीय है। तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा बरती गयी वित्तीय अनियमितता से संबंधित विस्तृत व्योरा मेरे द्वारा अपने स्पष्टीकरण दिनांक 16.12.2013 में साक्ष्य सहित संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। उसको भी संचालन पदा0 द्वारा नजर अंदाज कर दिया गया। जबकि वे सरकारी राशि को व्यक्तिगत व्यवहार में खर्च करते थे। तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज (श्री अरूण कुमार) का स्थानान्तरण बिक्रमगंज से कार्यपालक दण्डाधिकारी, अनुमंडल बक्सर के पद पर होने के पश्चात उनके एल0पी0सी0 पर 78800.00 रूपया वसूली करने के लिए अनु0पदा0, बक्सर को लिखा गया था। जिसके परिपेक्ष्य में श्री अरूण कुमार, कार्यपालक दण्डाधिकारी, बक्सर द्वारा अनु0पदा0, बक्सर को दिनांक 18.02.15 को एक आवेदन दिया गया कि बकाया वेतन की राशि खाता में आने के बाद अनुमंडल नजारत मे जमा ं कर दुॅगा। उनके आवेदन दिनांक 18.02.15 को परिशिष्ट 3 पर देखा जा सकता है। लेकिन वे पैसा नहीं जमा कर श्री अरूण कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना में CWJC No.- 5720/2015 दायर कर दिया गया। CWJC No.- 5720/2015 में दिनांक 01.10.2015 को पारित आदेश के आलोक में 78800.00 अनु0नजारत, बक्सर में जमा किया जो बाद में प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज को प्राप्त हुआ है। इस प्रकार श्री अरूण कुमार, तत्कालिन प्र0वि0पदा0 -सह- उपस्थापन पदा0, बिक्रमगंज के मंतव्य के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप 04 को सही करार देना कहॉ तक उचित है भवदीय स्वयं विचार करना चाहेंगे। | |
| मेरे स्थानान्तरण के उपरान्त मेरे द्वारा नये प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज से बकाया रहित प्रमाण पत्र मांगा गया तो मुझे बकाया रहित प्रमाण पत्र तत्कालिन प्रखंड नाजीर द्वारा प्राप्त हुआ, जिसे परिशिष्ट 05 पर देखा जा सकता है। तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज पर बिहार सरकार के नाम बिक्रमगंज प्रखंड की जनता के तरफ से खुला पत्र निकाला गया, जिसमे श्री अरूण कुमार, प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज पर रिश्वत लेने एवं खाता सं0- 10303503972 एवं 32710864762 में रिश्वत की राशि जमा करने की बात है। जिसके क्रम में अपर समाहर्त्ता (वि0जॉच) रोहतास, सासाराम द्वारा अपने पत्रांक 200 दिनांक 03.03.14 द्वारा अनु0पदा0, बिक्रमगंज एवं पत्रांक 735, दिनांक 26.05.14 द्वारा शाखा प्रबंधक, स्टेट बैंक, बिक्रमगंज से क्रमशः जॉच एवं खाता विवरणी की मॉग की गई। जिसे क्रमशः परिशिष्ट 06 पर एवं परिशिष्ट 07 पर संलग्न किया जाना है। अनु0पदा0, बिक्रमगंज के जॉच प्रतिवेदन के संबंध में कोई जानकारी नहीं है लेकिन स्टेट बैंक, बिक्रमगंज द्वारा निर्गत खाता सं0- 10303503972 एवं 32710864762 की विवरणी निर्गत की गयी जिसे परिशिष्ट 08 एवं परिशिष्ट 09 पर देखा जा सकता है। उपरोक्त स्थिति में स्वतः स्पष्ट है कि श्री अरूण कुमार सिंह, तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा सरकारी राशि में अनियमितता बरती जाती थी और वे एक रिश्वतखोर एवं घुसखोर पदा0 थे, फिर भी संचालन पदा0 उनके मंतव्य को आधार मानकर उनके आरोप को कैसे सत्य करार दिया गया। यह उच्च स्तरीय गहन जॉच का विषय है। साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण परिशिष्ट 01 पर संलग्न है। | |||
| 5 | आदेश की अवहेलना :- आपके द्वारा नजारत का कार्य सुचारू रूप से नहीें होने के कारण श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को नजारत का प्रभार सौंपने | आरोप सं0 -05 आदेश की अवहेलना :- आरोपी का अपने स्पष्टीकरण में कथन है कि आरोप निराधार, बेबुनियाद एवं मनगढंत | आरोप 05 के क्रम में मेरे द्वारा साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण दिनांक 16.12.13 को संचालन पदा0 को समर्पित किया जा चुका है। जो |
| हेतु जनवरी 13 मे आदेश दिया गया ं था तथा इस कार्य हेतु अनेको स्मार दिया गया परन्तु आपके द्वारा नजारत का सम्पूर्ण प्रभार श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को नहीं दिया गया। इसके कारण कई प्रतिवेदन अभी तक भेजा नहीं जा सका है और कार्य करने में कठिनाई हो रही है। इस तरह आपका कृत्य बिहार सरकारी सेवा आचरण नियमावली 1976 के नियम 3(1) का (i),(ii),(iii) का उलंघन है। | है। चेकबुक, चेंकपंजी एवं नजारत से लिये गये अग्रिम को प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज द्वारा नहीं लौटाये जाने के कारण न तो 14.02.2013 के बाद रोकड बही लिखा सका न तो किसी तरह का नजारत का प्रभार श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को मरे द्वारा दिलाया गया है। दिनांक 26.04.2013 से 23.05.2013 तक अवकाश में था और दिनांक 24.05. 2013 को पुनः योगदान दिया। नजारत का प्रभार दिलाने के लिए दबाव बनाये जाने लगा ताकि नजारत से लिये गये अग्रिम को हडपा जाय। इस आशय की विस्तृत सूचना अपने आवेदन के माध्यम से अनुमण्डल पदाधिकारी/जिला पदाधिकारी को साक्ष्य सहित दी जा चुकी है। साथ-ही मौखिक रूप से श्री रामेश्वर सिंह द्वारा नजारत का प्रभार नहीं लेने की बात प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिक्रमगंज के समक्ष अनेकोे बार मौखिक भी सूचित की जाती थी। प्र0वि0पदा0-सह-उपस्थापन पदा0, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य मे लिखा ं है कि आदेश की अवहेलना आरोपी द्वारा किया गया है। यह सत्य है। नजारत का प्रभार इनके द्वारा अनकों पत्र देने के बाद भी नहीं दिया गया । अन्ततः इनके द्वारा नियंत्री पदाधिकारी के साथ मार-पीट कर फरार हाने के पश्चात् इन्भेन्ट्री के माध्यम से श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह, लिपिक को नजारत का प्रभार दिलाया गया है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बिक्रमगंज ने अपने मंतव्य मे लिखा ं है कि अरापी के द्वारा दिनांक 14. 02.2013 के बाद रोकड पंजी को अद्यतन नहीं किया गया है और न हीं रोकड पंजी का ''डिटेल्स'' निकाला गया है, जिससे रोकड पंजी की स्थिति स्पष्ट हो सके। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि आरोपी पर लगाया गया आरोप सं0 05 सत्य है। | परिशिष्ट 01 पर संलग्न है। विस्तृत प्रतिवेदन क्रमांक 04 के आरोप के आलोक मे मेरे द्वारा ं उपर दिया जा चुका है। फिर भी संचालन पदा0 द्वारा तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज -सह- उपस्थापन पदा0 के मंतव्य के आधार पर कैसे सत्य करार दिया गया है, जबकि यह न्यायालय में निर्णयाधीन है और मेरे द्वारा दायर किया गया मुकदमा भी न्यायालय के निर्णयाधीन है। परिशिष्ट 01 पर संलग्न साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण दिनांक 16.12. 13 से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। न्यायहित में भवदीय द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की गहन जॉच करने की अनुरोध पूर्वक मुझे अपेक्षा है। | |
| 6 | नाम मे अन्तर :- पूर्व में पत्राचार के क्रम में लिपिकीय भूल से कहीं श्री मनोज कुमार, प्रखण्ड नाजीर, बिक्रमगंज एवं कही श्री मनोज कुमार सिंह, नाजीर प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज अंकित हो गया है। वास्तव में इनका नाम मनोज कुमार है। | आरोप सं0 06 :- नाम में अंतर :- आरोपी पर प्रपत्र ''क'' में लगाया गया आरोप में यह उल्लेख किया गया है कि पूर्व में पत्राचार के क्रम में लिपिकीय भूल से कहीं मनोज कुमार, प्रखण्ड नाजिर, बिक्रमगंज एव कही श्री मनोज कुमार सिंह, | आरोप 06 के क्रम में मेरे द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 16.12.13 को दिया जा चुका है। जो परिशिष्ट 01 पर संलग्न है। बिहार सरकार कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्र सं0- 12127, दिनांक 17.07.1979 के द्वारा |
| नाजिर प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज अंकित हो गया है। वास्तव में इनका नाम श्री मनोज कुमार है। आरोपी से प्राप्त स्पष्टीकरण में कथन है कि मेरा नाम मनोज कुमार है। इस प्रकार आरोपी पर लगाया गया आरोप असत्य है। | विभागीय कार्यवाही सम्पन्न करने की अवधि 90 दिन निर्धारित की गयी है, लेकिन इस विभागीय कार्यवाही को संचालन पदा0 द्वारा लगभग 05 वर्ष का समय लगया गया है। जो चिन्ता का विषय है। परिणामस्वरूप मै 05 वर्षों से मानसिक तनाव में रह रहा हूॅ, जिसका सीधे कुप्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। | ||
| 7 | प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर से संबंधी आरोप का विवरण :-विाीय अनियमितता :- आपके द्वारा 15 अगस्त 2012 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुधा मिष्ठान भंडार, राजपुर से 15000/- रूपये के मंगाये गये मिठाई के पैकेट का अभिश्रव दिया गया तथा अभिश्रव के राशि की राशि की निकासी आपके द्वारा कर ली गई है, परन्तु भुगतान नहीं किया गया है। उक्त राशि को ज्ञापांक 160/ दिनांक 14.02.2013 से प्रखण्ड नजारत में जमा करने का आदेश के बावजुद पैसा जमा नही किया गया है। यह क्रिया आदेश अवहेलना एवं विाीय अनियमितता को प्रदर्शित करता है। | आरोप सं0-7 विाीय अनियमितताः- प्रखण्ड कार्यालय राजपुर से संबंधित आरोप :- आरोपी का स्पष्टीकरण में कथन है कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर के पत्रांक 160 दिनांक 14. 02.2013 एवं 177 दिनांक 20.02. 2013 के क्र मे मैं अपने आवेदन पत्र दिनांक 20.02.2013 से स्पष्ट कर दिया है कि 15 अगस्त 2012 के अवसर पर मिठाई का पैकेट सुधा मिष्ठान भण्डार, राजपुर से 15000.00 के मंगाये गये मिठाई के पैकेट का अभिश्रव प्राप्त नहीं है और नहीं अभिश्रव पंजी मे दर्ज ं किया गया है और नहीं अभिश्रव पंजी में दर्ज किया गया है और नहीं इस प्रकार का अभिश्रव दिया गया है। मुझे इसका अभिश्रव अप्राप्त था। उक्त राशि के विरूद्ध प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राजपुर द्वारा मुझे सुधा मिष्ठान भंडार, राजपुर का 10000.00 (दस हजार) अभिश्रव दिया गया जिसपर पावती रसीद प्राप्त था। तत्पश्चात् 10000 (दस हजार) रू0 का अभिश्रव लेकर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, राजपुर के नाजिर के समक्ष दे दिया गया था। शेष 20000.00(बीस हजार) रू0 मेरे द्वारा अन्य पारित अभिश्रव में समायोजित कर दिया गया।इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा 15 अगस्त 2012 को सुघा मिष्ठान भंडार, राजपुर से 15000.00 रूपये के मंगाये गये मिठाई के पैकेट का अभिश्रव दिया गया तथा राशि की निकासी आरोपी के द्वारा कर ली गई, परन्तु भुगतान नहीं किया गया। उक्त राशि को प्रखण्ड नजारत मे जमा करने का आदेश ं देने के बाद भी पैसा जमा नहीं करना, आदेश अवहेलना एवं विाीय अनियमितता का द्योतक है। आरोपी | आरोप 07 के क्रम में मेरे द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 16. 12.13 मे स्थिति स्पष्ट की जा ं चुकी है, जो परिशिष्ट 01 पर अनुलग्नक सहित संलग्न है। प्र0वि0पदा0, राजपुर द्वारा निर्गत अंतिम वेतन प्रमाण पत्र एवं तत्कालिन प्रखंड नाजीर, राजपुर द्वारा बकाया रहित प्रमाण पत्र के अनुसार मुझ पर कोई बकाया राशि नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को कैसे सत्य करार दिया गया है भवदीय के स्तर से विचारणिय योग्य है। सुलभ संकेत हेतु प्र0वि0पदा0, राजपुर द्वारा निर्गत अंतिम वेतन प्रमाण पत्र की छाया प्रति परिशिष्ट 10 पर एवं बकाया रहित प्रमाण पत्र की छाया प्रति परिशिष्ट 11 पर संलग्न है। श्री अरूण कुमार, तत्कालिन प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज को फर्जीवाड़ा करने की महारथ हासिल थी। प्रमाण स्वरूप सरकारी गाड़ी की लॉग बुक की छाया प्रति परिशिष्ट 12 पर संलग्न की जाती है, जिसके अवलोकन से विदित होता है कि वे दिनांक 31.08.12 से 03.09.12 तक वे मुजफ्फरपुर में थे जबकि उनके द्वारा प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में 01.09.2012 की तिथि में पत्रांक 1320, दिनांक 01.09.12 पर हस्ताक्षर कया गया है एवं मो0 उमर खॉ, लिपिक के आवेदन दिनांक 01.09.12 के उपरान्त मे 01.09.12 की तिथि ं में हस्ताक्षर किया गया है ऐसी स्थिति में वे गहन जॉच का विषय है कि प्र0वि0पदा0, बिक्रमगंज 01.09.2012 को मुजफ्फरपुर में थे कि प्र0कार्या0, बिक्रमगंज में स्पष्ट है कि उनके |
| पर लगाया गया आरोप सत्य है। मंतव्य :- अरोपी श्री मनोज कुमार, लिपिक प्रखण्ड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखण्ड कार्यालय, बिक्रमगंज पर गठित अरोप ''प्रपत्र क'' में लगाया गया आरोप सं0 01 से 07 तक (06 को छोडकर) सत्य पाया गया। | द्वारा धोखाघड़ी और जालसाजी सरकारी अभिलेख में भी किया जाता था। उक्त दोनो पत्रों को परिशिष्ट 13 एवं 14 पर संलग्न की जाती है। |
आरोपी कर्मी के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी-सह- अपर समाहर्त्ता का अधिगम/अभिमत एवं आरोपी कर्मी द्वारा समर्पित कारण पृच्छा से स्पश्ट है कि आरोप की प्रकृति गंभीर है। द्वितीय कारण पृच्छा में आरोपी कर्मी ने कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया है। आरोप संख्या 01, 03 एवं 05 गंभीर अनुषासनहीनता एवं आरोप संख्या- 04 एवं 07 वित्तीय अनियमितता है। अभिश्रव का Unposted Voucher Register में दर्ज करने के बाद भुगतान नहीं करना संबंधित राषि का गबन माना जायेगा। क्योकि रोकड़ पंजी के संवरण शेश Closing Balance एवं संवरण विवरणी Closing Break up में यह राषि Single Lock की राषि से घट जाती है।
अन्य आरोप भी गंभीर अनुषासनहीनता एवं सरकारी कर्मी के आचरण के प्रतिकूल है जो सत्य पाया गया है।
निष्कर्श :-
आरोपित के विरूद्ध गठित आरोप, आरोपी द्वारा समर्पित स्पश्टीकरण, संचालन पदाधिकारी का अधिगमन तथा आरोपित के द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा में दुहराये गये असंतोशप्रद, तथ्यहीन एवं आधारहीन तर्क के अवलोकनोपरान्त वित्तीय अनियमितता के साथ गंभीर अनुषासनहीनता का आरोप सत्य प्रमाणित हुआ। श्री मनोज कुमार, तत्कालिन लिपिक प्रखंड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज सम्प्रति प्रखंड कार्यालय, रोहतास के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के समेकित विवेचना करने पर परिलक्षित होता है कि इनके विरूद्ध वृहद शास्तियाँ अधिरोपित की जाय।
अतः मैं धर्मेन्द्र कुमार, भा0प्र0से0, जिला दण्डाधिकारी एवं समाहर्त्ता, रोहतास, सासाराम बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 भाग-05 यथा संषोधित- 2007 के नियम 14 (xi) में निहित शक्तियों के आलोक में श्री मनोज कुमार, तत्कालिन लिपिक प्रखंड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज सम्प्रति प्रखंड कार्यालय, रोहतास को आदेष निर्गत की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करने का दण्ड अधिरोपित करता हूूँ। जो सरकार के अधीन भविश्य में नियोजन के लिये निरर्हता होगी। इस आषय की प्रविश्टि श्री मनोज कुमार के सेवा पुस्त में लाल सियाही से अंकित की जायेगी। साथ ही विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया समाप्त की जाती है। श्री मनोज कुमार, तत्कालिन लिपिक प्रखंड कार्यालय, राजपुर प्रतिनियुक्त प्रखंड कार्यालय, बिक्रमगंज सम्प्रति प्रखंड कार्यालय, रोहतास से संबंधित पूर्ण विवरण निम्न प्रकार है :-
1. नाम ः- श्री मनोज कुमार 2. पिता का नाम ः- श्री रामेष्वर सिंह 3. पदनाम ः- लिपिक 4. जन्म तिथि ः- 01.03.1978 5. नियुक्ति की तिथि ः- 22.06.2004 6. कार्यालय का नाम ः- प्रखंड कार्यालय, रोहतास 7. वेतनमान ः- वेतनमान 25500-81100 मूल वेतन- 41000/- 8. स्थायी पता ः- ग्रामपो0थाना-संझौली, जिला- रोहतास (बिहार)
आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी।
---------म। Home Department (Police Branch) ---------म। NOTIFICATION The 29th October 2021
No. 7/CCA-1026/2001 H(P)/8605--Consequent upon joining as the Seniormost Judge of Patna High Court, Hon'ble Mr. Justice Rajan Gupta has been nominated by Hon'ble the Chief Justice of Patna High Court as Chairman of the Advisory Board in place of Hon'ble Mr. Justice Ashwani Kumar Singh, as such it is expedient to re-constitiute the Advisory Board for the under mentioned Acts :-
1. Bihar Control of Crimes Act, 1981 2. National Security Act, 1980 3. Conservation of Foreign Exchange and Prevention of Smuggling Activities Act, 1974 and25 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021 4. Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988.
Now, therefore, in exercise of the powers conferred under the provision of the above Acts, the State Government is pleased to re-constitute the Advisory Board for above mentioned Acts as follows :
1 Hon'ble Mr. Justice Rajan Gupta Chairman 2 Hon'ble Justice Smt. Rekha Kumari (Retired.) Member 3 Hon'ble Mr. Justice Gopal Prasad (Retired.) Member
The re-constitution will come into effect with the issue of the notification
By the order of the Governor of Bihar, Girish Mohan Thakur, Under Secretary.
————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 31—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in26 बिहार गजट, 17 नवम्बर 2021
भाग-2
बिहार-jkT;iky और dk;kZ/;{kksa द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। —————
वाणिज्य-कर विभाग
-------
अधिसूचना
शुद्धि पत्र
26 अक्तूबर 2021
सं0 6/प्रो0-06-01/2015-2188--द्वितीय रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना (एम0ए0सी0पी0) संबंधी वाणिज्य-कर विभाग की अधिसूचना संख्या-2098 दिनांक 08.10.2021 के क्रमांक 01 में अंकित ''श्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह'' के स्थान पर ''श्री अमरेन्द्र प्रसाद सिंह'' शुद्ध रूप में पढ़ा जाय। शेष यथावत् रहेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, राज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना द्वारा प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 31—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in