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2;बपकरू18द्ध ;बपकरू4द्ध;बपकरू14र्द्ध 1;बपकरू21द्ध43 ;बपकरू24द्ध;बपकरू25द्ध;बपकरू26द्ध
;बपकरू27द्ध;बपकरू25द्ध ;बपकरू4द्ध ;बपकरू21द्ध4;बपकरू30द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू31द्ध ष्;बपकरू14द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू31द्ध 1;बपकरू30द्ध रु 2;बपकरू25द्ध21
सं॰सं॰सं॰सं॰ 27/आरोप-01-27/आरोप-01-27/आरोप-01-27/आरोप-01-21212121/2019/1246/2019/1246/2019/1246/2019/12464444----सा0प्र0सा0प्र0सा0प्र0सा0प्र0
सामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासनसामान्य प्रषासन विभागविभागविभागविभाग
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22222222 vDrwcjvDrwcjvDrwcjvDrwcj 2021202120212021
2 ;बपकरू2द्ध;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध 1;बपकरू30द्ध रु 2;बपकरू25द्ध21होते हुए असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-8500 दिनांक-09.08.2021 द्वारा श्री रंजन से लिखित अभिकथन की मांग की गयी।
श्री रंजन द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन में बताया गया है कि योजनाओं के पर्यवेक्षण और निरीक्षण का दायित्व उनके द्वारा निभाया गया है। प्रस्तुत मामले में केवल एक पंचायत की कुछ योजनाओं में पदस्थापन के लगभग 9-10 साल बाद की गयी जांच में केवल पदस्थापन कार्यकाल के विन्दु पर दोष अधिरोपित किया गया है, जबकि इस नौकरी के प्रथम पदस्थापन में एक लोक सभा चुनाव, एक विधान सभा उप चुनाव एवं एक पैक्स चुनाव सम्पन्न हुआ। उनके द्वारा बताया गया है कि उनकी पदस्थापन अवधि मात्र लगभग 9 माह की थी। इस दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे प्रखंड में लागू रहने के कारण किसी भी नयी योजना को लाने पर रोक थी। इस प्रकार श्री रंजन द्वारा स्वयं पर लगे आरोपों का प्रतिवाद किया गया है।
श्री रंजन के विरूद्व प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन एवं जांच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर श्री रंजन द्वारा समर्पित लिखित अभिकथन की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री रंजन द्वारा घोषी प्रखंड के अन्तर्गत चल रही योजनाओं के पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण करने तथा पंचायत सचिवों पर नियंत्रण रखने के दायित्व का सम्यक निर्वहन नहीं किया गया है। इस प्रकार श्री रंजन से प्राप्त बचाव-बयान को संतोषप्रद नहीं मानते हुए श्री रंजन की एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्व रखने तथा निदंनअवरूद्व रखने तथा निदंनअवरूद्व रखने तथा निदंनअवरूद्व रखने तथा निदंन की शास्ति अधिरोपण का निर्णय लिया गया है।
श्री राकेश रंजन, बि0प्र0से0, कोटि क्रमांक 1226/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, घोषी, (जहानाबाद) सम्प्रति भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सिकरहना (पूर्वी चम्पारण) के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 यथासंशोधित के नियम-14 के अन्तर्गत (1) निदंन (आरोप वर्ष-2009) (2) एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने का दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने का एक वेतनवृद्वि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने का आदेश :-आदेश :-आदेश :-आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,