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ख्;बपकरू3द्ध;बपकरू3द्ध ख्;बपकरू8द्ध
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बिहार विधान सभा सचिवालय ——— अधिसूचना 30303030 नवम्बरनवम्बरनवम्बरनवम्बर 2021202120212021
सं॰ वि॰स॰वि॰-28/2021-3260/वि॰स॰—''बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021'' 2 ;बपकरू4द्ध ;बपकरू25द्धख्;बपकरू4द्ध;बपकरू4द्ध;बपकरू27द्ध 30 [कृप्रक्तकृप्रब्व्फ,व्डव्छ बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 (बिहार अधिनियम 20, 2013) में संशोधन करने के लिए विधेयक प्रस्तावनाः- राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करने के उद्देश्य से बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 अधिनियमित है। इस अधिनियम की धारा 5 की उपधारा 2 में निजी विश्वविद्यालय स्थापना हेतु निर्गत किए गए आशय पत्र में वर्णित शर्त्तों को अनुपालित करने की समय-सीमा निर्धारित है। राज्यहित में इस अधिनियम की धारा 5 की उपधारा 2 के परंतुक में संशोधन किया जाना आवश्यक है। इसलिए, भारत-गणराज्य के बहतरवे वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ।-
(1) यह अधिनियम बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2021 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह दिनांक 01.04.2021 से प्रवृत होगा।
2. बिहार अधिनियम 20, 2013 की धारा 5 का संशोधन - बिहार अधिनियम 20, 2013 की धारा 5 की उप धारा (2) के परन्तुक को निम्नवत् प्रतिस्थापित किया जाएगा :-
''परंतु प्रायोजक निकाय द्वारा आशय पत्र में वर्णित समयावधि में प्रयास करने के बावजूद भी अनुपालन प्रतिवेदन उचित कारणों से समर्पित किये जाने में असफल रहने की स्थिति में राज्य सरकार अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित करने की अवधि को यथोचित अवधि के लिए विस्तारित कर सकेगी।''
उद्देश्य एवं हेतु बिहार राज्य में निजी क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की स्थापना हेतु बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 अधिनियमित है। इस अधिनियम की धारा-5 की उपधारा (2) में किसी निजी विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु निर्गत किए जाने वाले आशय पत्र के आलोक में अनुपालन समर्पित किए जाने के लिए समय-सीमा का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान के अनुसार किसी प्रायोजक निकाय को आशय पत्र में वर्णित शर्त्तों का अनुपालन 02 वर्षों के अंदर किया जाना है। परंतु इस अवधि में प्रयास करने के बावजूद भी अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित किए जाने में असफल रहने की स्थिति में राज्य सरकार को अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित करने की अवधि को अधिकतम 02 वर्षों के लिए विस्तारित करने की शक्ति प्रदत्त है। राज्य में उच्चत्तर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करने के लिए प्रायोजक निकाय को आशय पत्र में वर्णित शर्त्तों का प्रयास करने के बावजूद 02 वर्षों के अंदर अनुपालित नहीं किए जाने की स्थिति में अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित करने की अधिकतम 02 वर्षों की विस्तारित अवधि को यथोचित अवधि के लिए विस्तारित किया जाना ही इस विधेयक का उद्देश्य है जिनको अधिनियमित कराना ही इसका मुख्य अभीष्ट है। (विजय कुमार चौधरी