Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 29 December 2021

Published 29 December 2021

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2021-12-29.48
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

निबंधन la[;k पी0टी0-40

बिहार गजट

बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित भाग-1—नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं। 2-19 भाग-1-क—स्वयंसेवक गुल्मों के समादेष्टाओं के आदेश। --- भाग-1-ख—मैट्रीकु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0- इन-एड0, एम0एस0 और मुख्तारी परीक्षाओं के परीक्षा-फल, कार्य(cid:7059)म, छात्रवृत्ति प्रदान, आदि।

---

भाग-1-ग—शिक्षा संबंधी सूचनाएं, परीक्षाफल आदि ---

भाग-2—बिहार-राज्यपाल और कार्याध्यक्षों द्वारा निकाले गये विनियम, आदेश, अधिसूचनाएं और नियम आदि। ---

भाग-3—भारत सरकार, प(िcid:7391)म बंगाल सरकार और उच्च न्यायालय के आदेश, अधिसूचनाएं और नियम, 'भारत गजट' और राज्य गजटों के उ(cid:7373)रण।

---

भाग-4—बिहार अधिनियम ---

विषय-सूची पृष्ठ

पृष्ठ भाग-5—बिहार विधान मंडल में पुर:स्थापित विधेयक,उक्त विधान मंडल में उपस्थापित या उपस्थापित किये जानेवाले प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और उक्त विधान मंडल में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-7—संसद के अधिनियम जिनपर राष्ट्रपति की ज्येेष्ठ अनुमति मिल चुकी है। ---

भाग-8—भारत की संसद में पुर:स्थापित विधेयक, संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में उपस्थापित प्रवर समितियों के प्रतिवेदन और संसद में पुर:स्थापन के पूर्व प्रकाशित विधेयक। ---

भाग-9—वि(cid:6980)ापन ---

भाग-9-क—वन विभाग की नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। 20-20 पूरक

---

पूरक-क

---

2 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

भाग-1 नियुक्ति, पदस्थापन, बदली, शक्ति, छु (cid:7349)ी और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं।

—————

वित्त विभाग

-------

अधिसूचनाएं

23 दिसम्बर 2021

सं0 1/स्था॰(ले॰से॰)-15/2021-8721/वि॰--श्री इन्द्र नारायण झा, बिहार वित्त सेवा को वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या-3919/वि॰, दिनांक-30.06.2021 द्वारा आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार, पटना में आन्तरिक वित्तीय सलाहकार के पद पर पदस्थापित किया गया था। श्री झा के दिनांक-30.11.2021 को वार्द्धक्य सेवानिवृत्त हो जाने के फलस्वरूप आपदा प्रबंधन विभाग में आन्तरिक वित्तीय सलाहकार का पद रिक्त हो गया है। अतः आन्तरिक व्यवस्था के अन्तर्गत कार्यहित में श्री अशोक कुमार, बि॰वि॰प्र॰से॰, आन्तरिक वित्तीय सलाहकार, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को आपदा प्रबंधन विभाग के आन्तरिक वित्तीय सलाहकार का प्रभार सौंपा जाता है। 2. प्रस्ताव में माननीय उपमुख्य (वित्त) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 3. यह आदेश तत्काल से प्रभाव से लागू होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गोरखनाथ, विशेष सचिव।

-------

28 दिसम्बर 2021

सं॰ 1/स्था॰(ले॰से॰)-04/2021--8835/वि॰--बिहार वित्तीय प्रशासन सेवा के निम्नांकित 27 (सत्ताईस)

क्र. पदाधिकारी का नाम/पदनाम/पदस्थापन स्थान मेधा क्र॰ सेवा संपुष्टि की तिथि
1 2 3 4
1. श्री घनश्याम कुमार, स॰आ॰वि॰स॰, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना। 1 26.02.2021
2. श्री आलोक कुमार सिंह, स॰आ॰वि॰स॰, भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना। 3 01.03.2021
3. श्री शरदचन्द्र झुनझुनवाला, सहायक कोषागार पदाधिकारी, नवादा। 5 18.02.2021
4. श्रीमती संजू कुमारी, सहायक कोषागार पदाधिकारी, सारण छपरा। 9 01.03.2021
5. श्री बिनोद कुमार सिंह, स॰आ॰वि॰स॰, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना। 11 20.02.2021
6. मो॰ सरवर आलम अंसारी, सहायक कोषागार पदाधिकारी, भागलपुर। 12 15.02.2021
7. श्री वैसुर रहमान अंसारी, स॰आ॰वि॰स॰, विधि विभाग, बिहार, पटना। 25 01.03.2021
8. श्रीमती नेहा सिन्हा, सहायक कोषागार पदाधिकारी, समाहरणालय, पटना। 32 20.02.2021
9. श्री ललित कुमार, स॰आ॰वि॰स॰, परिवहन विभाग, बिहार, पटना। 36 26.02.2021
10. श्री आनन्द कुमार, स॰आ॰वि॰स॰, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना। 43 18.02.2021
11. श्रीमती बबीता कुमारी, सहायक कोषागार पदाधिकारी, समाहरणालय, पटना। 46 21.02.2021
12. श्री जयेन्द्र नारायण शास्त्री, सहायक कोषागार पदाधिकारी, दरभंगा। 66 18.02.2021
13. श्री मृत्युंजय कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, मुँगेर। 68 26.़02.2021
14. श्री ज्ञानेन्दु प्रसाद, सहायक कोषागार पदाधिकारी, सहरसा। 69 18.02.2021
15. श्री सुधीर कुमार गिरी, सहायक कोषागार पदाधिकारी, मुँगेर। 72 18.02.2021
16. श्री विजय कुमार सिन्हा, स॰आ॰वि॰स॰, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना। 73 28.02.2021
17. श्री अखिलेश कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, सिंचाई भवन, पटना। 77 28.02.2021
18. श्री रवि कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, निर्माण भवन, पटना। 80 18.02.2021
19. श्री संतोष कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, सारण, छपरा। 84 22.02.2021
20. मो॰ नुरूल हक, सहायक कोषागार पदाधिकारी, किशनगंज। 95 20.02.2021
21. श्री राजन कुमार निर्झर, वित्त नियंत्रक, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना। 100 20.02.2021
22. श्री राजीव कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, सुपौल। 103 20.02.2021
23. सुश्री आकांक्षा पुरी, सहायक कोषागार पदाधिकारी, औरंगाबाद। 115 20.02.2021
24़. श्री संजय कुमार सुमन, सहायक कोषागार पदाधिकारी, मधुबनी। 118 20.02.2021
25. श्री मुकेश सम्राट, सहायक कोषागार पदाधिकारी, गया। 134 18.02.2021
26. सुश्री पुनम कुमारी राम, स॰आ॰वि॰स॰, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना। 137 18.02.2021
27. श्री रजनी कान्त कुमार, सहायक कोषागार पदाधिकारी, कैमुर (भभुआ)। 153 25.02.2021
3 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गोरखनाथ, विशेष सचिव।

------- पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ------ अधिसूचना 21 दिसम्बर 2021

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-4620/प॰व॰--श्री सी.पी. खण्डूजा, भा॰व॰से॰, (BH:89), प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, सामाजिक वानिकी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। श्री सी.पी. खण्डूजा, भा॰व॰से॰, निदेशक, सामाजिक वानिकी, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-4621/प॰व॰--श्री राकेश कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:91), को प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-16) में प्रोन्नति के फलस्वरूप उनके द्वारा वर्त्तमान धारित पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं आदर््र भूमि, बिहार, पटना को उनके पदस्थापन काल तक के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-16) में उत्क्रमित एवं समकक्ष घोषित करते हुए उन्हें प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं आदर््र भूमि, बिहार, पटना के उत्क्रमित पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। श्री राकेश कुमार, भा॰व॰से॰ मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कोष, निदेशक, हरियाली मिशन, बिहार एवं मुख्य वन संरक्षक, संयुक्त वन प्रबंधन, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेगें। सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-4622/प॰व॰--श्री एन. जवाहर बाबू, भा॰व॰से॰, (BH:91), वन संरक्षक, लीव रिजर्व, कार्यालय ः प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए उन्हें वन संरक्षक (मुख्यालय), कार्यालय : प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 भा॰व॰से॰ (स्था॰)-15/2019-4623/प॰व॰--श्री सुधीर कुमार, भा॰व॰से॰, (BH:04), वन संरक्षक (मुख्यालय), कार्यालय : प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए उन्हें वन संरक्षक, वन्य प्राणी अंचल, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है। श्री सुधीर कुमार, भा॰व॰से॰ वन संरक्षक-सह-अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार, पटना एवं वन संरक्षक-सह-अपर निदेशक, हरियाली मिशन, दक्षिण बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में बने रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सुबोध कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव।

-------

पथ निर्माण विभाग

------

अधिसूचनाएं

6 अगस्त 2021

सं0 निग/सारा-4-(पथ)-आरोप-91/10-3883(s)--कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 द्वारा पथ प्रमंडल समस्तीपुर के अंतर्गत विभिन्न पथों की जाँच के पश्चात समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में पाई गई अनियमितता के संदर्भ में श्री इन्द्रजीत कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल समस्तीपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से स्पष्टीकरण पूछा गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त निम्न आरोपों के लिए विभागीय संकल्प संख्या- 10295 (एस) अनु॰ दिनांक- 12.09.2011 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-

(i) वाजिदपुर-दलसिंह सराय-नरहन रोसड़ा पथः-

4 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

औसत कम्प्रेसिव स्टे्रन्थ न्यूनतम 105 kg/cm2होना चाहिए। उक्त पाँच ईंटों के नमूनों का वाटर एवजावर्सन 21.66% से 23.41% तक पाया गया है, जिसका औसत 22.31% आता है, जबकि प्रावधान अधिकतम 20% का है।

5 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

5. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा C.W.J.C No.-803/2016में दिनांक-04.01.2019 को पारित न्यायादेश में विभागीय पत्रांक-11822 (S)Weदिनांक-09.12.2014 द्वारा निर्गत द्वितीय कारण पृच्छा को इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि आरोपित पदाधिकारी से असहमति के बिन्दुओं पर की गई द्वितीय कारण पृच्छा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य पर आधारित न होकर विभागीय तकनीकी समिति के मंतव्य पर आधारित है, जो बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावाली 2005 (यथासंशोधित नियमावली 2007) के नियम-18 में अंकित प्रक्रिया का उलंघन हैं। इसके फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-4234 (S) सह-पठित ज्ञापांक-4235 (एस) दिनांक-15.05.2015 द्वारा निर्गत दंडादेश को भी निरस्त कर दिया गया। 6. माननीय उच्च न्यायालय पटना द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में समीक्षोंपरांत सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या- 4609 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक- 4610 (एस) दिनांक- 08.05.2019 द्वारा श्री इन्द्रजीत कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल, समस्तीपुर सम्प्रतिः अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के विरूद्ध प्रश्नगत मामले में विभागीय पत्रांक-11822(S)We दिनांक-09.12.2014 द्वारा पूछे गये द्वितीय कारण पृच्छा एवं विभागीय अधिसूचना संख्या-4234(एस) सह-पठित ज्ञापांक-4235(एस) दिनांक-15.05.2015 द्वारा संसूचित ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' संबंधी निर्गत दंडादेश को निरस्त करते हुए देय परवर्ती लाभ अनुमान्य किया गया। 7. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक-04.01.2019 को पारित उक्त न्यायादेश की कंडिका-18 में दी गई छूट के तहत्‌ निम्न असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक- 6982 (एस) दिनांक- 30.07.2019 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयीः-

6

बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 (iii) इसके अतिरिक्त, आरोपी श्री कुमार के द्वारा पूर्व में संचालन पदाधिकारी के समक्ष समर्पित किये गये बचाव-बयान में अंकित तथ्य यथा-ईंटों के Compressive Strength की जाँच Destructive Testके आधार पर की जाती है, जिसके अनुसार जाँच करने पर ईंट टूट जाती है एवं उसका प्रयोग निर्माण कार्य में करना संभव नहीं हो पाता है- का उल्लेख किया गया है। इस संबंध में तथ्य यह है कि निर्माण कार्य में प्रयोग किये जाने वाले सम्पूर्ण ईंटों की गुणवत्ता जाँच करने का न तो प्रावधान है और न ही यह व्यवहारिक है, बल्कि निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाले ईंटों में से नियमानुसार नमूना के तौर पर मात्र कुछ ईंटों का ही गुणवत्ता जाँच की जाती है। आरोपी श्री कुमार के उक्त तर्क से यह परिलक्षित होता है कि निर्माण कार्य में ईंटों के प्रयोग किये जाने के पूर्व उनके द्वारा इसकी गुणवत्ता जाँच ही नहीं कराया गया है। इस प्रकार, उक्त बिन्दु पर आरोपी के द्वारा दिया गया तर्क स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

9. तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरान्त श्री कुमार के पत्रांक- 168 अनु॰ दिनांक- 05.08. 2019 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील)नियमावली-2005 यथा संशोधित 2007के नियम-14 के उपनियम-VIके तहत ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''के दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार के रूप में माननीय मुख्यमंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त किया गया। 10. उक्त के आलोक में विभागीय पत्रांक- 1478 (एस) अनु॰ दिनांक- 05.03.2021 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध अनुमोदित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। 11. प्रश्नगत मामले में विभागीय पत्रांक- 1478 (एस) अनु॰ दिनांक- 05.03.2021 के प्रसंग में सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक- 05/प्रो॰-24-02/2021/618/लो॰से॰आ॰ दिनांक- 28.06.2021 द्वारा विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी। 12. तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा एवं सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में श्री इन्द्रजीत कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, बिहार चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम, पटना के द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः- ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

------- 1 अक्तूबर 2021 सं॰ निग/सारा-उ॰बि॰रा॰उ॰प॰-116/2013-4968(s)--श्री रामकृष्ण प्रसाद, तत्कालीन कनीय अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति सहायक अभियंता (अवकाश रक्षित), अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या- 104 के कि॰ मी॰ 153 (अंश), 154 (अंश), 155 (अंश) एवं 156 (अंश) में कराये गये PCC एवं Black Topping कार्यों में पायी गयी त्रुटियों के लिए विभागीय पत्रांक- 297 (एस) अनु॰ दिनांक- 10.01.2014 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। साथ ही आलोच्य मामले से संबंधित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोंपरांत श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-3903 (ई) अनु॰ दिनांक-24.06.2015 द्वारा प्रपत्र-"क" गठित करते हुये कारण-पृच्छा की गयी। श्री कुमार के पत्रांक- शून्य दिनांक- 31.08.2015 द्वारा कारण-पृच्छा का उत्तर विभाग को समर्पित किया गया। 2. श्री कुमार से प्राप्त कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 9100 (एस॰) अनु॰ दिनांक- 30.11.2018 द्वारा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 3. मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक- 836 (अनु॰) दिनांक- 13.11.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन के अन्तर्गत श्री कुमार के विरूद्ध गठित 04 आरोपों के परिप्रेक्ष्य में सभी आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य गठित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के गठित अभिमत/मंतव्य से सहमति व्यक्त की गयी। 4. तद्‌ालोक श्री रामकृष्ण प्रसाद, तत्कालीन कनीय अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 9100 (एस॰) अनु॰ दिनांक- 30.11.2018 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के अन्तर्गत सम्यक विचारोपरान्त आरोप मुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप सचिव।7 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

1 अक्तूबर 2021

सं॰ निग/सारा-उ॰बि॰रा॰उ॰प॰-116/2013-4970(s)--श्री अवधेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-104 के कि॰ मी॰ 153 (अंश), 154 (अंश), 155 (अंश) एवं 156 (अंश) में कराये गये PCC एवं Black Topping कार्यों में पायी गयी त्रुटियों के लिए विभागीय पत्रांक- 289 (एस) अनु॰ दिनांक-10.01.2014 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। साथ ही आलोच्य मामले से संबंधित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोंपरांत श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-5590 (एस) अनु॰ दिनांक-24.06.2015 द्वारा प्रपत्र-"क" गठित करते हुये कारण-पृच्छा की गयी। श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक-31.08.2015 द्वारा कारण-पृच्छा का उत्तर विभाग को समर्पित किया गया। 2. श्री कुमार से प्राप्त कारण-पृच्छा उत्तर की विभागीय समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 9103 (एस॰) अनु॰ दिनांक-30.11.2018 द्वारा मुख्य अभियंता, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 3. मुख्य अभियंता-सह-संचालन पदाधिकारी, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक- 520 (अनु॰) दिनांक-10.07.2019 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जाँच प्रतिवेदन के अन्तर्गत श्री कुमार के विरूद्ध गठित 04 आरोपों के परिप्रेक्ष्य में आरोप संख्या-01, 02 एवं 03 को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-04 को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य गठित किया गया। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के गठित अभिमत/मंतव्य से सहमति व्यक्त करते हुये श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-8615 (एस) अनु॰ दिनांक-18.09.2019 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा के रूप में लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक-15.10.2019 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा के रूप में अपना लिखित अभिकथन विभाग को उपलब्ध कराया गया। 4. तद्‌ालोक में श्री कुमार से द्वितीय कारण-पृच्छा के रूप में प्राप्त लिखित अभिकथन की विभागीय समीक्षा की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत श्री अवधेश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 9103 (एस॰) अनु॰ दिनांक- 30.11.2018 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही के अन्तर्गत सम्यक विचारोपरान्त आरोप मुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है। 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

-------

1 अक्तूबर 2021

सं॰ निग/सारा-04(पथ)-आरोप-48/2021-4972(s)--पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत तुर्की से कच्ची-पक्की सड़क तक कराये गये पथ एवं नाला निर्माण कार्य की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3, के द्वारा किया गया एवं एतद संबंधी प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-535 अनु0 दिनांक-31.07.2018 एवं पत्रांक-624 अनु0 दिनांक-10.08.2018 के द्वारा गुणवत्ता/अंतिम जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोंपरांत निम्न त्रुटि पाई गयीः-

(i) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 15 में कराये गये DGBM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.0167% पायी गयी, जो टॉलरेन्स लिमिट 3.782% से कम है।

8 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

कुछ गलती हुयी है, जिसका प्रमाण है कि मार्च- 2019 में किए गये जाँच में कि॰मी॰ 15 में DGMB Gr.- II का Bitumen Content Tolerance Limit में पाया गया है।

(ii) त्रुटि संख्या-2 के संबंध में श्री कुमार का यह तर्क है कि-उड़नदस्ता द्वारा Compressive Strength का Desired Strength at age की गणना M30 कंक्रीट मिक्स डिजाईन के आधार पर किया गया प्रतीत होता है, जबकि Compressive Strength की तुलना 75 of Desired Strength at age से करना उचित होगा, क्योंकि IS 456 की कंडिका- 17.4.3 में उल्लेखित है कि Average core strength shall not be less than 85% of 28 days cube strength and individual strength shall not be less than 75% of 28 days cube strength.

उक्त Compressive Strength का मान कम पाये जाने के लिए श्री कुमार ने कई कारणों का उल्लेख किया है। यथा- कार्य स्थल का Site Condition PCC कार्य के लिए निर्धारित Standard Site Condition से Inferior थे। शहर के घनी आवादी के बीच PCC का कार्य के दौरान आवागमन को पूर्णतः बंद करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से संभव नहीं था, फलस्वरूप यातायात चालू स्थिति में ही PCC कार्य व Curring कार्य किया गया। श्री कुमार द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि Insitu Core Sample के Compressive Strength का मान Standard Cylinder के Strength से हमेशा कम पाया जाता है, क्योंकि कोर कटिंग करने के दौरान Vibration के कारण कंक्रीट में Disturbance पैदा होता है। श्री कुमार का कहना है कि जाँच पदाधिकारी द्वारा 09 सैम्पल एकत्रित किया गया, जिसमें सैम्पल का Age अलग-अलग है। प्रत्येक Age के लिए मात्र एक सैम्पल का टेस्ट करने से IS 516 के कंडिका- 5.4 का अनुपालन नहीं किया गया है। कंडिका- 5.3 के अनुसार सैम्पल का Age उसमें पानी मिलाने के समय से Calculate करना था, लेकिन जाँच पदाधिकारी द्वारा अपने मन से सैम्पल का Age निर्धारित कर दिया गया है।

यह भी उल्लेख किया गया है कि Cylindrical Concrete Sample जो कि कोर कटर से पथ से काटे जाते हैं, उनका End Surface का Caping करना आवश्यक होता है, लेकिन ऐसा नहीं करने से Stress Concentration के चलते सैम्पल कम ही लोड पर फेल हो जाता है। IS 516 की कंडिका- 4.4 के उल्लेख है कि "The Ends of all cylindrical test equipments that are not plain within 0.05 mm shall be caped" and the ends of the specimen shall be also caped before testing. इसी कोड की कंडिका 4.5 में उल्लेखित है कि after checking for irregularities the core shall be placed in water at a temperature of 24֯c to 30֯c for 48 hours before testing. TRI प्रयोगशाला द्वारा प्रेषित जाँचफल इस बात की पुष्टि करता है कि कोर सैम्पल का कैपिंग नहीं किया गया। Height के तीनों मापियों में अंतर होना भी स्पष्ट करता है कि नमूने का End Smooth नहीं किये गये। इस अनियमितता के कारण Stress Concentration हुआ एवं सभी सैम्पल अपने वास्तविक Strength से कम ही लोड में फेल कर गए। स्पष्टीकरण के अन्त में उक्त वर्णित तथ्यों का सार के रूप में उल्लेख किया गया है कि Compressive Strength में कमी का कारण- कार्य स्थल पर Standard site condition की अनुपलब्धता, Core cutting drilling के समय Concrete में संभावित बाधा, End surface of core का Smooth नहीं होना, जिससे Stress Concentration का उत्पन्न होना, कोर सैम्पल का Caping एवं Proper Curing नहीं होना एवं जाँच के दौरान Indian Standard Code में निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन होना है।

3. श्री कुमार के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर विभागीय समीक्षा में स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि Flying Squad द्वारा Sampleका collection पारदर्शिता के साथ नियमानुसार किया जाता है तथा TRIमें गुणवत्ता के जाँच में काफी सावधानी बरतते हुए द्विस्तरीय Codingके आधार पर जाँच की जाती है। साथ ही यह भी पाया गया कि श्री कुमार द्वारा गठित आरोपों के संबंध में कोई प्रमाणिक तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जबकि DGBM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा एवं PQC कार्य के Compressive Strength का मान निर्धारित टॉलरेन्स लिमिट से भी कम पाया गया है। स्पष्ट है कि पथ का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य कराने मे श्री कुमार विफल रहे हैं, जो श्री कुमार के दायित्व के प्रतिकूल है।

4. अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरान्त श्री अंजनी कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुरके स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुये प्रमाणित पाये गये त्रुटियों के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील), नियमावली-2005 (यथा संशोधित) के नियम-14(v) के तहत्‌ निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता हैः- (1) ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।''9 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

-------

1 अक्तूबर 2021

सं॰ निग/सारा-04(पथ)-आरोप-48/2021-4974(s)--पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत तुर्की से कच्ची-पक्की सड़क तक कराये गये पथ एवं नाला निर्माण कार्य की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 के द्वारा किया गया एवं एतद संबंधी प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-535 अनु0 दिनांक-31.07.2018 एवं पत्रांक-624 अनु0 दिनांक-10.08.2018 के द्वारा गुणवत्ता/अंतिम जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षोंपरांत निम्न त्रुटि पाई गयीः-

(i) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 15 में कराये गये DGBM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.0167% पायी गयी, जो टॉलरेन्स लिमिट 3.782% से कम है।

10 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

करने से Stress Concentration के चलते सैम्पल कम ही लोड पर फेल हो जाता है। IS 516 की कंडिका- 4.4 के उल्लेख है कि "The Ends of all cylindrical test equipments that are not plain within 0.05 mm shall be caped" and the ends of the specimen shall be also caped before testing. इसी कोड की कंडिका 4.5 में उल्लेखित है कि after checking for irregularities the core shall be placed in water at a temperature of 24֯c to 30֯c for 48 hours before testing. TRI प्रयोगशाला द्वारा प्रेषित जाँचफल इस बात की पुष्टि करता है कि कोर सैम्पल का कैपिंग नहीं किया गया। Height के तीनों मापियों में अंतर होना भी स्पष्ट करता है कि नमूने का End Smooth नहीं किये गये। इस अनियमितता के कारण Stress Concentration हुआ एवं सभी सैम्पल अपने वास्तविक Strength से कम ही लोड में फेल कर गए। स्पष्टीकरण के अन्त में उक्त वर्णित तथ्यों का सार के रूप में उल्लेख किया गया है कि Compressive Strength में कमी का कारण- कार्य स्थल पर Standard site condition की अनुपलब्धता, Core cutting drilling के समय Concrete में संभावित बाधा, End surface of core का Smooth नहीं होना, जिससे Stress Concentration का उत्पन्न होना, कोर सैम्पल का Caping एवं Proper Curing नहीं होना एवं जाँच के दौरान Indian Standard Code में निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन होना है।

3. श्री सिंह के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर विभागीय समीक्षा में स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि Flying Squad द्वारा Sampleका collection पारदर्शिता के साथ नियमानुसार किया जाता है तथा TRIमें गुणवत्ता के जाँच में काफी सावधानी बरतते हुए द्विस्तरीय Codingके आधार पर जाँच की जाती है। साथ ही यह भी पाया गया कि श्री सिंह द्वारा गठित आरोपों के संबंध में कोई प्रमाणिक तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जबकि DGBM Gr.-II कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा एवं PQC कार्य के Compressive Strength का मान निर्धारित टॉलरेन्स लिमिट से भी कम पाया गया है। स्पष्ट है कि पथ का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य कराने मे श्री सिंह विफल रहे हैं, जो श्री सिंह के दायित्व के प्रतिकूल है।

4. अतएव उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरान्त श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता-1, राष्ट्रीय उच्च पथ (उत्तर) उपभाग, पथ निर्माण विभाग, पटना के स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वी—त करते हुए प्रमाणित पाये गये त्रुटियों के लिए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील), नियमावली-2005 (यथा संशोधित) के नियम-14(i) के तहत्‌ निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता हैः- (1) आरोप वर्ष 2014-15 के लिए ''निन्दन'' का दण्ड।

5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

-------

4 अक्तूबर 2021

सं॰ निग/सारा-(एन0एच0)-आरोप-10/2021-4990(s)--राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के अन्तर्गत कार्यान्वित कार्य योजनाओं का अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के द्वारा भ्रमण किया गया।ं भ्रमण के क्रम में परियोजनाओं के बारे में मो॰ नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी को निम्न विशिष्ट निर्देंश दिये गयेे-

(क) NH-28B के किलो मीटर 97 से 104 का कार्य अपूर्ण था, जिसे एक (01) माह के अंदर पूर्ण करना था। उक्त कार्य के अन्तर्गत 3.05 मीटर कालीकरण एवं एक-एक मीटर चौड़ाई में पेभर ब्लॉक लगाने का निर्देश दिया गया था। उक्त कार्यान्वित कार्य योजनाओं का पुनः दिनांक-03.02.2021 को विभागीय समीक्षा की गयी। उक्त विभागीय समीक्षा में पाया गया कि तत्समय DBM का भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। साथ ही यह भी पाया गया कि पेभर ब्लॉक लगाने की कोई तैयारी नहीं की गयी है।

(ख) NH-28B के किलो मीटर 91 एवं 94 में ROB का निर्माण किया जाना है, जिसकी वित्तीय निविदा 04 फरवरी 2021 को खुलनी थी। विभागीय समीक्षा के क्रम में लगातार निर्देंश दिया जाता रहा है कि भू-अर्जन का कार्य शीघ्र पूर्ण करायें। परंतु दिनांक- 03.02.2021 को विभागीय समीक्षा की तिथि तक एक भी रैयत का भुगतान नहीं होने की जानकारी प्रदान की गयी।

2. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में NH-28B के किलो मीटर 97 से 104 का कार्य कमजोर प्रबंधन क्षमता के कारण अपूर्ण रहने तथा किलो मीटर 91 एवं 94 में स्थित ROB के निर्माण कार्य के लिए भू-अर्जन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करने में अभिरूचि नहीं लिये जाने के कारण विकास के कार्यक्रम प्रभावित होने के बिन्दु को दृष्टिपथ में रखते हुये मो॰ नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी से विभागीय पत्रांक-769(एस) दिनांक-04.02.2021 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। साथ ही अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर को आलोच्य मामले में समय पर निर्देंशों का पालन नहीं किये जाने के संबंध में प्रतिवेदन समर्पित किये जाने का निदेश दिया गया।11 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 3. मो॰ नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के पत्रांक-180 अनु॰ दिनांक 08.02.2021 द्वारा स्पष्टीकरण का उत्तर समर्पित किया गया, जिसके अन्तर्गत निम्नलिखित तथ्यों/तर्कों को रखा गया- (क) उनके कार्यालय पत्रांक-21 दिनांक-08.01.2021 द्वारा पेभर ब्लॉक का प्राक्कलन अधीक्षण अभियंता, रा॰उ॰प॰ अंचल, मुजफ्फरपुर को समर्पित किया गया। उक्त कार्य EPC के अन्तर्गत रहने के कारण संवेदक के द्वारा ही Change of Scope के तहत प्राक्कलन समर्पित किया जाना था। संवेदक द्वारा प्राक्कलन समर्पित नहीं करने के कारण स्थानीय व्यव्स्था के तहत दूसरे संवेदक के माध्यम से पेभर ब्लॉक लगाने का कार्य प्रारंभ किया गया है। पूरे पथांश में DBM का कार्य तथा 04 किलो मीटर में BC का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। (ख) भू-अर्जन से संबंधित रैयतों के भुगतान की दिशा में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेतिया द्वारा रैयतों को नोटिश जारी किया गया है। जिसमें से कुछ रैयतों द्वारा भुगतान लेने हेतु आवेदन समर्पित किया गया है। रैयतों के आवेदन की जाँच में पायी गयी कुछ त्रुटियाँ का निराकरण के बाद भुगतान की जायेगी। रैयतों के भुगतान में तेजी लाने हेतु जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेतिया द्वारा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 3. आलोच्य मामले में अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-128 अनु॰ दिनांक-20.02. 2021 द्वारा मुख्य रूप से प्रतिवेदित किया गया कि कार्य EPC mode में होना था एवं इस हेतु प्राक्कलन संवेदक द्वारा समर्पित किया जाना था, परंतु निदेश के बावजूद संवेदक द्वारा अनावश्यक विलंब किया गया। समय-सीमा के अंदर कार्य नहीं करने के लिए कार्यपालक अभियंता को एकरारनामा के सुसंगत कंडिका के आलोक में संवेदक के विपत्र से LD impose करना चाहिए था, जिसे नहीं करने के कारण संवेदक पर दबाव नहीं बनाया जा सका। इसके लिए कार्यपालक अभियंता को दोषी माना गया। साथ ही आलोच्य पथ के किलो मीटर 91 एवं 94 में स्थित ROB के निर्माण कार्य के संबंध में प्रतिवेदित किया गया कि भू-अर्जन में कार्यपालक अभियंता के स्तर से जिला भू-अर्जन पदाधिकारी से समन्वय का अभाव रहा। दैनिक प्रगति हेतु कार्यपालक अभियंता द्वारा किसी कनीय अभियंता को जिला भू-अर्जन कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया जाना चाहिए था। 4. मो॰ नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण उत्तर के तहत रखे गये तथ्यों/तर्कों की समीक्षा अधीक्षण अभियंता से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत मो॰ नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता का स्पष्टीकरण उत्तर को संतोषजनक नहीं पाया गया। 5. तद्‌नुसार नौशाद आलम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के स्पष्टीकरण उत्तर पत्रांक-180 अनु॰ दिनांक-08.02.2021 को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत उनके विहित समानुपातिक दायित्व को दृष्टिपथ में रखते हुए सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (v) के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है-

(i) "दो (02) वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।"

6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

-------

6 अक्तूबर 2021

सं0 निग/सारा-1(पथ) नि0विं0-09/2021-5049(s)--निगरानी अन्वेषण व्यूरो के पत्रांक-1096 दिनांक-20.09.

2021 द्वारा श्री कौन्तेय कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पटना सिटी, गुलजारबाग के विरूद्ध ₹1,76,82,920/-(एक करोड़ छिहत्तर लाख बेरासी हजार नौ सौ बीस रूपये) के प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में निगरानी थाना कांड सं0-38/2021 दिनांक-13.09.2021 धारा-13(2) सह-पठित धारा-13(1) (बी) भ्र0नि0अधि0, 1988 (संशोधित अधिनियम-2018) दर्ज किये जाने की सूचना दी गई है। यह कांड सम्प्रति अनुसंधानांतर्गत है।

2. प्रश्नगत मामले में समीक्षोपरान्त श्री कौन्तेय कुमार, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पटना सिटी, गुलजारबाग को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(ग) में निहित प्रावधान के तहत तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय अभियंता प्रमुख (मु0) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।

4. श्री कुमार को निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्त्तों के तहत अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

5. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

-------

1 नवम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-1 (पथ)-80/2020-5391(s)--श्री अनुज कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ के पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के पदस्थापन काल में12 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 एस॰एच॰- 68 उपहारा से सेनारी पथ के कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 के जाँच प्रतिवेदन जो निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 699 अनु॰ दिनांक 08.09.2017 के माध्यम से विभाग को प्राप्त हुआ, के आधार पर विभागीय पत्रांक 4568 (एस॰) दिनांक 19.06.2018 के द्वारा निम्नलिखित पायी गयी त्रुटियों के लिए उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी :-

(i) पथ के 3रें कि॰मी॰ में कराये गये SDBC Gr. II में अलकतरा की मात्रा 3.76% पायी गयी है। (ii) पथ के 3रें कि॰मी॰ में कराये गये BM Gr. II में अलकतरा की मात्रा 2.23% पायी गयी है। 2. उपर्युक्त स्पष्टीकरण के आलोक में श्री कुमार ने पत्रांक 04 दिनांक 15.01.2019 द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से आलोच्य SDBC एवं BM परत के कार्य कराते समय Hot Mix Plant से निकलने वाले Mix की जाँच नहीं किये जाने, क्षेत्रीय गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल से एतद संबंधी गुणवत्ता जाँचफल विशिष्टी के अनुरूप पाये जाने, आलोच्य कार्य कराये जाने के लगभग 05 महीने बाद परीक्षण एवं शोध संस्थान द्वारा जाँच किये जाने के कारण बिटुमिन की मात्रा में स्वभाविक रूप से कमी होने एवं प्रस्तुत मामले से भिन्न एक अन्य मामले में आरोपी अभियंता को आरोप मुक्त किये जाने का उल्लेख किया है।

3. श्री कुमार के स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी तथा तदनुसार पाया गया कि श्री कुमार के द्वारा आलोच्य कार्य में बिटुमिन में कमी पाये जाने के संबंध में जिन व्यवहारिक/तकनीकी कारणाें के होने का तर्क दिया गया है, वस्तुतः इन्हीं कारणों के संदर्भ में विभाग द्वारा Tolerance Limit निर्धारित किया गया है। परन्तु प्रस्तुत मामले में अलकतरा की औसत मात्रा का मान निर्धारित Tolerance Limit के प्रतिकूल पाया गया है। अतएव इस बिन्दु पर श्री कुमार का तर्क संतोषजनक नहीं है।

4. श्री कुमार के द्वारा प्रस्तुत मामले से भिन्न एक अन्य मामले में आरोपी अभियंता को आरोप मुक्त किये जाने के संबंध में उल्लेखनीय है कि प्रत्येक मामले में गुणवत्ता जाँचफल भिन्न-भिन्न पाये जाते हैं और परिस्थितियाँ भी भिन्न-भिन्न होती हैं, इसलिए श्री कुमार का दिया गया तर्क यथोचित नहीं है। इसके अतिरिक्त श्री कुमार के द्वारा कोई ठोस तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

5. उपर्युक्त कंडिका-02, 03 एवं 04 के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोंपरांत अधिसूचना संख्या-5855 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5856 (एस), दिनांक 07.10.2020 के द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री कुमार के विरूद्ध निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया गयेः-

(i) दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। 6. श्री कुमार ने उक्त संसूचित दण्डादेश के विरूद्ध पत्रांक-92 अनु॰, दिनांक 04.11.2020 के द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया, जिसमें उक्त दोनों आरोपों के संदर्भ में मुख्य रूप से निम्नलिखित तथ्यों को अंकित किया गया हैः- 6.1. सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण के रूप में विभाग द्वारा निर्गत प्रावधानों का पूर्ण अनुशीलन करते हुए उपहारा से सेनारी पथ के 3रे कि॰मी॰ में BM Gr-II एवं SDBC Gr-II का कार्य सम्पन्न कराते समय Hot mix plant से Bituminous mix निकालने के तुरंत बाद नमूना संग्रह कर पथ प्रमंडल संख्या-01, औरंगाबाद में स्थापित गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल में Bitumen Content की जाँच क्रमशः दिनांक 25.03. 2017 एवं दिनांक 28.03.2017 को की गई। जिसका जाँचफल पूर्णतः विशिष्टियों के अनुरूप BM Gr-II में 3.32 प्रतिशत अलकतरा एवं SDBC Gr-II में 4.99 प्रतिशत अलकतरा पाया गया था एवं जाँचफल कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, संख्या-01, औरंगाबाद एवं संबंधित सहायक अभिंयता को ससमय समर्पित किया गया था जो कम संसाधनों के बीच मेरे द्वारा कर्त्तव्य निर्वहन की कटिबद्धता को दर्शाता है। 6.2. पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के आदेश सह-पठित ज्ञापांक-340 (एस), दिनांक 07.01.2010 की कंडिका-03 (i) में स्पष्ट निर्णय के अनुसार Hot Mix Plant से Bituminous Mix गिरने के तुरंत बाद जाँची की गयी है। जिसमें स्पष्ट उल्लेखित है कि बाद में कराये गये जाँच के आधार पर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना उचित प्रतीत नहीं होता है।

6.3. कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 द्वारा विषयाकित पथ के 3रे कि॰मी॰ के स्थल जाँच दिनांक 23.08.2017 एवं 24.08.2017 में सम्पूर्ण पथांश पाँच महीने बाद भी पॉटलेस पायी गयी थी। जिसका उल्लेख कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या- 03 के पत्रांक-245 (गो॰) अनु॰, दिनांक 04.09.2017 के प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन में किया गया है, जो वर्त्तमान में लगभग 3 वर्ष बाद भी पॉटलेस है, जिसकी वर्त्तमान स्थिति की सूचना कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-01, औरंगाबाद से भी प्राप्त की जा सकती है।

6.4. स्पष्टीकरण में उल्लेखित उक्त पथांश के Proper grading और दर्शायी गयी Bitumen content के bituminous mix से अगर BM एवं SDBC परत का Laying किया जाता तो Laying के 5 महीने बाद भी सम्पूर्ण पथांश की स्थिति पॉटलेस नहीं पायी जाती। जबकि कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-03 के प्रांरभिक जाँच प्रतिवेदन में 5 महीने बाद भी सम्पूर्ण पथांश पॉटलेस पाया गया है एवं वर्त्तमान में लगभग 3 वर्ष बाद भी सम्पूर्ण पथांश पॉटलेस है।

7. श्री कुमार के पुनर्विचार अभ्यावेदन में रखे गये तथ्यों की विभागीय समीक्षा की गयी, तद्‌नुसार पाया गया कि उनके द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है। मात्र पूर्व में समर्पित तथ्यों/तर्को को ही13 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 नये सिरे से प्रस्तुत किया गया है। चूंकि श्री कुमार के द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा के उपरांत स्वीकार योग्य नहीं पाये जाने की स्थिति में उनके विरूद्ध उक्त दण्ड अधिरोपित किया गया है। ऐसी स्थिति में उनके समर्पित अद्यतन पुनर्विचार अभ्यावेदन की पुनः नये सिरे से समीक्षा किये जाने का कोई युक्तिसंगत अवसर प्रतीत नहीं होता है। उपर्युक्त के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री अनुज कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ के पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-92 अनु॰, दिनांक 04.11.2020 को अस्वीकृत किया जाता है।

8. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।

-------

17 नवम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-4(पथ)-आरोप-52/2021-5551(s)--पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ अन्तर्गत CMBDयोजना के तहत धमदाहा-बनमनखी पथ के कि॰मी॰ 0.00 से 25.50 कि॰मी तक के उन्नयन कार्य (वर्ष 2014-15) का निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निार्मण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक- 565 अनु॰ दिनांक-27.10.2016 एवं 04 अनु॰ दिनांक-02.01.2017 द्वारा समर्पित प्रारंभिक एवं अंतिम/गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के क्रम में पायी गयी निम्न त्रुटियों/अनियमितताओं के लिए विभागीय पत्रांक-6521 (S)We दिनांक-24.08.2018 द्वारा श्री प्रभाशंकर कोकिल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ सम्प्रति सेवानिवृत प्रभारी अधीक्षण अभियंता से स्पष्टीकरण की मांग की गयीः-

(i) आलोच्य पथ कार्य के बगल में फ्लैंक में मिट्‌टी कार्य नहीं किये जाने के कारण अधिकांश भाग में असुरक्षित Edge Drop पाया गया।

(ii) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 5.500 के मध्य भाग में खोदे गये पिट में GSB के परत में पुरानी Bituminous Mix के अवशेष पाये गये।

(iii) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 6 में कराये गये GSB परत की औसत मुटाई 115mm पायी गयी, जबकि प्रावधान 125mm है।

(iv) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 6 में कराये गये WMM कार्य में EI + FI का औसत मान 41.29% पायी गयी, जो टॉलरेन्स लिमिट से अधिक है।

2. वर्णित पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में श्री कोकिल से पूछे गये स्पष्टीकरण के अनुपालन में उनके पत्रांक- 2061 (अनु॰) दिनांक- 18.09.2018 द्वारा अपना उत्तर समर्पित किया गया। श्री कोकिल द्वारा अपने आवेदन में निम्न तथ्यों/तर्काें का उल्लेख किया गयाः-

(i) त्रुटि संख्या-(i) के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि उक्त पथांश में Bituminous कार्य 2016 के बरसात के बाद माह अक्टूबर- 2016 में कराया गया। बरसात में पथ Flank के क्षतिग्रस्त होने एवं बरसात के बाद पथ में ऊपरी परतों का कार्य होने पर पथ का लेवल ऊँचा हो जाने से Edge Drop पाया गया, जबकि श्री कोकिल दिनांक- 08.07.2016 तक ही कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ के पद पर पदस्थापित थे। अतः Edge Drop संबंधित त्रुटि से अपना कोई संबंध नहीं होने की बात की है।

(ii) त्रुटि संख्या-(ii) के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि जाँच पदाधिकारी द्वारा जाँच में नौ बिन्दुओं पर खोदे गये Pits में मात्र 1 बिन्दु पर Bituminous Mix के अवशेष GSB परत में पाये जाना, पथ का ग्रामीण कार्य विभाग से हस्तांतरित किये जाने के पश्चात्‌ पथ निर्माण विभाग द्वारा प्रथम बार इसका निर्माण कार्य कराया जाना तथा कार्यपालक अभियंता का मात्र 10% Checking का जिम्मेदारी होने की बात कही गयी है। (iii) त्रुटि संख्या-(iii) के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि ग्रामीण कार्य विभाग से हस्तांतरित पथ का प्रत्येक 30 मी॰ की दूरी पर पथ का Existing Levels लेकर L/S एवं C/S तैयार कर OGL के आधार पर FRL (Finished Road Level) निर्धारित किया गया है। पथ के Profile को सही रखने हेतु प्रस्तावित FRL के अनुसार पथ क्रस्ट की मुटाई जगह-जगह पर Vary करने की बात कही गयी है। इन्होंने Morth के Specification 4th (Revision) के Clause 902.3 में Sub Base के लिए Surface Levels में Flexible Pavement के लिए Tolerance Limit +10mm एवं -20mm है, जबकि विभाग इन्ही विचलन को आधार मानते हुए Base/Sub Base Course में 4% तक के विचलन का प्रावधान रखा है। (iv) त्रुटि संख्या-(iv) के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि MORTH Table 900-3 Sr. No.- 4 (iii) के अनुसार FI+EI के लिए Stone Aggregate का 1 (one) Test कार्य के प्रयोग के पूर्व 500 cum of Aggregate पर किया जाना है। पुनः इसे 100 cum पर किया जाना है। FI+EI की जाँच कार्यपालक अभियंता के अधीनस्थ पथ कार्य से जुड़े संबंधित पदाधिकारी के दायित्व में होना, 13 जून 2006 को CRRI, नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त तकनीकी अभिमतों में14 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 EI + FI का मान 40% रहने पर भी Structure के स्थायित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़ना इत्यादि बात की गयी है।

3. श्री कोकिल द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री कोकिल द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में जिन व्यवहारिक एवं तकनीकी कारणों का संदर्भ दिया गया है वस्तुतः इन्हीं व्यवहारिक एवं तकनीकी कठिनाईयों के मद्‌देनजर रखते हुए विभागीय मार्गदर्शिका के तहत्‌ टॉलरेन्स अनुमान्य किया गया है। परन्तु प्रस्तुत मामले में पायी गयी त्रुटि का मान टॉलरेन्स लिमिट के प्रतिकूल है। इसके अतिरिक्त श्री कोकिल के द्वारा अपने बचाव में कोई ठोस एवं प्रमाणित तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है। तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा में पाया गया कि श्री कोकिल के द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में कोई ऐसा ठोस एवं खंडनयुक्त तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिस पर युक्तिसंगत ढंग से विचार किया जा सके जिसके फलस्वरूप उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई अवसर प्रतीत नहीं होता है।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरांत वर्णित त्रुटि संख्या-(iii) के प्रमाणित पाये जाने के लिए श्री कोकिल के पत्रांक- 2061 अनु॰ दिनांक- 18.09.2018 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक विचारोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली- 2005 के नियम- 14 के उपनियम-(i) के तहत्‌ निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता है।

(i) ''निन्दन (आरोप वर्ष 2015-16)'' ।

4. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष कार्य पदाधिकारी।

-------

10 दिसम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-4(पथ)-आरोप-35/2020-5934(s)--पथ प्रमंडल, सहरसा के कार्यों का दिनांक- 05.06.2020 को समीक्षा की गयी जिसमें यह पाया गया कि पथ प्रमंडल, सहरसा अन्तर्गत एन॰एच॰- 107 बरियाही बाजार से सहरसा बायपास के कार्यों की प्रगति में कमी पायी गयी एवं 400 मीटर की दूरी में Lock Down के तुरन्त पहले WMM कार्य Dry किये बिना DBM का कार्य कर दिया गया, जिसके कारण कार्य Fail हो गया। इस हेतु विभागीय पत्रांक- 3375 दिनांक- 08.06.2020 द्वारा श्री श्याम सुन्दर दास, सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, सहरसा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री दास के पत्रांक- 405 दिनांक- 10.06.2020 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया।

2. श्री दास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर में वर्णित आरोपों के संबंध में निम्न तथ्य अंकित किया गया हैः- (i) आलोच्य कार्य प्रारम्भ करने की तिथि 11.07.2019 एवं कार्य समाप्ति तिथि 10.07.2020 होने का उल्लेख करते हुए यह अंकित किया गया है कि संवेदक द्वारा 2.70 कि॰मी॰ PCC कार्य के विरूद्ध अब तक 0. 770 कि॰मी॰ एवं 8.280 कि॰मी॰ बिटुमिनस कार्य के विरूद्ध अब तक 3.40 कि॰मी॰ में कार्य कराया जा चुका है। कार्य के धीमी प्रगति के बिन्दु पर यह अंकित किया गया है कि बार-बार विभाग तथा उनके द्वारा संवेदक पर काफी दबाव दिया जाता रहा है और संवेदक द्वारा बार-बार यह कहा जा रहा है कि समय-सीमा के अन्दर कार्य पूर्ण कर दिया जायेगा।

(ii) पथ के 400 मी॰ में लॉकडाउन के पूर्व किया गया कार्य, जो BC से शिल्ड नहीं किया जा सका था एवं कार्य करने के उपरांत वर्षा भी हो गयी, जिससे कहीं-कहीं Cracks हो गया। भवष्यि में इससे अधिक भाग क्षतिग्रस्त न हो, संवेदक से कहकर DBM का Fail Portion हटा दिया गया तथा पुनः कार्य गुणवत्ता के साथ कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कराया गया कार्य सही है एवं पथ की स्थिति अच्छी है।

3. विषयांकित मामले में श्री दास के स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत पाया गया कि इस सम्पूर्ण योजना का कार्य 10 जून 2020 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, किन्तु उस अनुपात में प्रगति नहीं हुयी है। श्री दास द्वारा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यथोचित प्रयास नहीं किया गया है तथा उनके द्वारा कार्य में बरती गई लापरवाही प्रमाणित है। श्री दास ने भी धीमी प्रगति को एवं DBM Fail करना स्वीकार किया है।

तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के क्रम में श्री दास के पत्रांक- 405 दिनांक- 10.06.2020 के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 के उपनियम-v के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-4446(एस)-सह-पठित ज्ञापांक 4446(एस) दिनांक 22.07.2020 के द्वारा निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित किया गयाः- (i) ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' । 4. वित्त (वै0दा0नि0को0) विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक- 622(21) दिनांक -28.06.2021 के द्वारा सूचित किया गया कि श्री श्याम सुन्दर दास, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-4446 (एस) दिनांक-22.07.2020 के द्वारा दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड का प्रभाव श्री दास के दिनांक-31.12.2020 को सेवानिवृत हो जाने के कारण प्रभावी नहीं हो पाया है।15 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 इस संबंध में एक अन्य समरूप मामले में संसूचित दण्ड लागू नहीं हो पाने के विन्दु पर सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त परामर्श में परामर्शित है कि दण्डादेश की तिथि से दण्ड पुनरीक्षित करते हुए प्रतिस्थानी दण्डादेश निर्गत किया जाय एवं दण्डादेश को उसी तिथि से प्रभावी किया जाय जिस तिथि को मूल दण्डादेश निर्गत किया गया है।

5. सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त उक्त परामर्श के आलोक में श्री श्यााम सुन्दर दास तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा सम्प्रति सेवानिवृत को विभागीय अधिसूचना संख्या-4446 (एस) सह पठित ज्ञापांक-4447(एस) दिनांक-22.07.2020 द्वारा संसूचित दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक के दण्ड को संसूचित दण्ड की तिथि से पुनरीक्षित करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।

(i) ''आरोप वर्ष 2019-20 के लिए निन्दन का दण्ड।

6. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष कार्य पदाधिकारी।

-------

16 दिसम्बर 2021

सं॰ 1/स्था॰-13/2002 (खंड-II)-6018(s)--श्री अमृत लाल मीणा, भा॰प्र॰से॰ (89), अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति के फलस्वरूप श्री प्रत्यय अमृत, भा॰प्र॰से॰ (91), अपर मुख्य सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के अंशधारी के रूप में मनोनित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शैलजा शर्मा, संयुक्त सचिव।

-------

17 नवम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-4(पथ)-आरोप-52/2021-5553(s)--पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ अन्तर्गत CMBD योजना के तहत धमदाहा-बनमनखी पथ के कि॰मी॰ 0.00 से 25.50 कि॰मी पथ निर्माण कार्य में निदेशक, प्रशिक्षण, परीक्षण एवं शोध संस्थान, पथ निार्मण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक- 565 अनु॰ दिनांक- 27.10.2016 एवं 04 अनु॰ दिनांक- 02.01.2017 द्वारा समर्पित प्रारंभिक एवं अंतिम/गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा के क्रम में पायी गयी निम्न त्रुटियों/अनियमितताओं के लिए विभागीय पत्रांक-6519(S)We दिनांक-24.08.2018 द्वारा श्री वासुदेव नन्दन, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, धमदाहा, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ से स्पष्टीकरण की मांग की गयीः-

(i) आलोच्य पथ कार्य के बगल में फ्लैंक में मिट्‌टी कार्य नहीं किये जाने के कारण अधिकांश भाग में असुरक्षित Edge Drop पाया गया।

(ii) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 5.500 के मध्य भाग में खोदे गये पिट में GSB के परत में पुरानी Bituminous Mix के अवशेष पाये गये।

(iii) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 6 में कराये गये GSB परत की औसत मुटाई 115mm पायी गयी, जबकि प्रावधान 125mm है।

(iv) आलोच्य पथ के कि॰मी॰ 6 में कराये गये WMM कार्य में EI + FI का औसत मान 41.29% पायी गयी, जो टॉलरेन्स लिमिट से अधिक है।

2. वर्णित पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में श्री नन्दन से पूछे गये स्पष्टीकरण के अनुपालन में उनके पत्रांक-शून्य (अनु॰) दिनांक- 02.07.2019 द्वारा अपना उत्तर समर्पित किया गया। श्री नन्दन द्वारा अपने आवेदन में निम्न तथ्यों/तर्काें का उल्लेख किया गयाः-

(i) त्रुटि संख्या-(i) के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि पथ अवर प्रमंडल, धमदाहा के द्वय प्रभार से मुक्त होने के लगभग 03 माह के बाद पथ के निर्माणाधीन स्थिति में कि॰मी॰ 6.0 को स्थल निरीक्षण दिनांक- 21.10.2016 को उड़नदस्ता के द्वारा किया गया था। ऐसी स्थिति में फ्लैंक में मिट्टी कार्य अपूर्ण रहने के कारण असुरक्षित Edge Drop संबंधित कथित त्रुटि से प्रत्यक्ष/परोक्ष मेरा कोई संबंध नहीं है। (ii) त्रुटि संख्या-(ii) के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि कि॰मी॰ 6.0 में उड़नदस्ता दल के द्वारा तीन Cross Section यथा 5.15 कि॰मी॰, 5.50 कि॰मी॰ एवं 5.90 कि॰मी॰ पर तीन-तीन बिन्दुओं (बायें, मध्य, दायें) पर खोदकर मोटाई की मापी की गयी थी। इन 9 (नौ) बिन्दुओं पर मोटाई मापी के लिए खोदे गये Pit में मात्र 1 बिन्दु के Pit कि॰मी॰ 5.5 के मध्य भाग में GSB के परत में पुराने Bit Mix के अवशेष पाये जाने का उल्लेख है। इसे स्वतः स्पष्ट है कि कि॰मी॰ 6 में 9 बिन्दुओं पर खोदे गये Pit में मात्र 1 बिन्दु के Pit में कथित रूप से पुराने Bituminous Mix के अवशेष पाये गये। इस आधार पर GSB के परत में16 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 पुराने Bituminous Mix के अवशेष संबंधित त्रुटि की कोई प्रासंगिकता नहीं है तथा सहायक अभियंता का मात्र 50% Checking का जिम्मेवारी होने की बात कही गयी है।

(iii) त्रुटि संख्या-(iii) के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि पथ के 6ठें कि॰मी॰ में WMM तक का कार्य दिनांक- 08.04.2016 तक सम्पन्न करा लिया गया था। बाद में संवेदक के द्वारा उपर्युक्त दिनांक- 08.04.2016 तक सम्पन्न कराये गये Non Bituminous कार्य पर लगभग 6 माह पश्चात्‌ अक्टूबर- 2016 में Bituminous कार्य कराया गया। बरसात के दरम्यान Non Bituminous परत के उखड़ने एवं यातायात परिचालन कठिन होने का उल्लेख प्रमंडलीय संचिका में उपलब्ध है। स्पष्ट है कि 6 माह में क्षतिग्रस्त WMM एवं GSB परत को BM करने के पूर्व सही ढ़ंग से Repair नहीं करवाया गया था। अतः ऐसी स्थिति में कि॰मी॰ 6 में कराये गये GSB परत की औसत मुटाई में 10mm की पाई गयी कमी से संबंधित कथित त्रुटि से संबंध नहीं होने की बात कही गयी है।

(iv) त्रुटि संख्या-(iv) के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि मेरे प्रभार मुक्त होने के पश्चात पथ में Non Bituminous कार्य यथा GSB, WMM आदि के उपरान्त पथ में बरसात के बाद भी लंबी अवधि तक BM एवं SDBC का कार्य नहीं कराया गया था। माह अक्टूबर में उखड़े Non Bituminous कार्य को मरम्मति कराकर BM का कार्य कराया गया होगा। एक ही कि॰मी॰ में (EI+FI) का मान तीन Cross Section पर 35.84%, 47% एवं 41.03% (औसत 41.29%) स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि BM के पूर्व पथ में सुधार कार्य करवाया गया था। अतः EI+FI में आई विसंगति संबंधित कथित त्रुटि से प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से संबंध नहीं होने की बात कही गयी है।

3. श्री नन्दन द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री नन्दन द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में जिन व्यवहारिक एवं तकनीकी कारणों का संदर्भ दिया गया है वस्तुतः इन्हीं व्यवहारिक एवं तकनीकी कठिनाईयों के मद्‌देनजर रखते हुए विभागीय मार्गदर्शिका के तहत्‌ टॉलरेन्स अनुमान्य किया गया है। परन्तु प्रस्तुत मामले में पायी गयी त्रुटि का मान टॉलरेन्स लिमिट के प्रतिकूल है। इसके अतिरिक्त श्री नन्दन के द्वारा अपने बचाव में कोई ठोस एवं प्रमाणित तथ्य/तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है।

तद्‌ालोक में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा में पाया गया कि श्री नन्दन के द्वारा अपने स्पष्टीकरण उत्तर में कोई ऐसा ठोस एवं खंडनयुक्त तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिस पर युक्तिसंगत ढंग से विचार किया जा सके जिसके फलस्वरूप उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार किये जाने का कोई अवसर प्रतीत नहीं होता है।

उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विभागीय स्तर पर की गयी समीक्षा के उपरांत वर्णित त्रुटि संख्या-(iii) के प्रमाणित पाये जाने के लिए श्री नन्दन के पत्रांक- शून्य अनु॰ दिनांक- 02.07.2019 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण उत्तर को अस्वीकृत करते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली-2005) के नियम-14 के उपनियम-v के तहत्‌ निम्न शास्ति अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया जाता है।

(1) ''एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक''।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष कार्य पदाधिकारी।

-------

19 नवम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-1 (पथ)-आरोप-32/2016--5573(s)--श्री रामानन्द मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डूडा-02, पटना सम्प्रति सेवानिवृत (दिनांक 31.07.2018)के विरूद्ध मुख्यमंत्री शहरी विकास योजनाओं के 50.00 लाख रूपये तक विभिन्न 22 पथों से संबंधित निविदा का निष्पादन गलत तरीके से करते हुए अपने चहेते निविदाकार को कार्य आवंटित किये जाने संबंधी नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रतिवेदित आरोपों के आधार पर विभाग द्वारा आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 4959 (एस) दिनांक 27.06.2018 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसे उनके सेवानिवृति (दिनांक 31.07.2018) के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6419(एस) दिनांक 20.08.2018 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) में सम्परिवर्तित किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक- 185 अनु॰ दिनांक 17.01.2020 के द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री मंडल के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। विभागीय समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक- 1731 (एस) दिनांक 02.03.2020 के द्वारा श्री मंडल से लिखित अभिकथन के रूप में द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री मंडल ने पत्रांक- शून्य (अनु॰) दिनांक 21.03.2020 के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर एवं पत्रांक- शून्य (अनु॰) दिनांक 15.10.2020 के द्वारा पूरक द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया। 3. श्री मंडल के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ है :-

''मुख्यमंत्री शहरी विकास योजनाओं के 50.00 लाख रूपये तक के राशि के विभिन्न 22 पथों की निविदा श्री मंडल के द्वारा निकाली गई थी, जिसकी निविदा सं0-07/2014-15 थी। इस निविदा आमंत्रण सूचना के विभिन्न पथों के निविदा निस्तार में काफी अनियमितता बरती गयी, बहुत निविदाकारों का निविदा आमंत्रण सूचना के शत्र्तों के आधार पर अनियमित तरीके से निविदा रद्‌द कर दिया गया था, जैसा कि एक संवेदक मे0 गौरव कुमार के द्वारा उक्त निविदा के ग्रुप सं0-20 पर17 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 शिकायत किया गया कि Existing Commitmentका शपथ पत्र नहीं अपलोड करने के कारण उसकी निविदा रद्‌द कर दी गयी तथा अपने चहेते निविदाकार को कार्य आवंटित कर दिया गया।

नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक 746 दिनांक 30.04.15 एवं पत्रांक 928 दिनांक 21.05.15 द्वारा श्री मंडल को स्मारित किया गया कि किन-किन निविदाकारों को Existing Commitment का शपथ पत्र नहीं देने के कारण निविदा से बाहर कर अपने चहेते निविदाकारों को कार्य आवंटित कर दिया गया, किन्तु श्री मंडल द्वारा अपना प्रतिवेदन नहीं दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि श्री मंडल के द्वारा गलत तरीके से निविदा का निष्पादन किया गया।

श्री मंडल के द्वारा राज्य योजना के 34 योजनाओं का निविदा निकाला गया, जिसमें निविदा आमंत्रण सूचना में प्रतिशत दर अंकित करना था, जबकि वित्तीय बीड में प्रतिशत नहीं लिखकर निविदाकारों के बीच भ्रामक स्थिति फैलाया गया।

इस प्रकार, कार्यपालक अभियंता, डूडा-2, पटना के पदस्थापन के दौरान श्री मंडल के द्वारा विभिन्न कार्यों में बरती गई अनियमितता के संबंध में अधीक्षण अभियंता, डूडा, बिहार, पटना द्वारा अपने जॉंच प्रतिवेदन में निविदा निष्पादन में गलत तरीका अपनाया जाना प्रतिवेदित किया गया है, साथ-हीं श्री मंडल के विरूद्ध प्राप्त परिवाद पत्रों पर स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर जान-बूझकर स्पष्टीकरण नहीं दिया जाना भी प्रतिवेदित है, जो श्री मंडल की अनुशासनहीनता, उच्श्रृंखलता एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है।'' 4. उक्त आरोप के संदर्भ में संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदनके तहत मुख्यतः निम्नवत तथ्य अंकित किया गया है :-

(i) NIT में Existing commitment शपथ पत्र के रूप में मांगा गया था, परन्तु यदि संवेदक द्वारा अपने Letter head पर Existing commitment Upload किया गया था, तो मूल भावना Existing commitment की जानकारी से था, इस कारण श्री गौरव कुमार वर्मा को निविदा में असफल नहीं किया जाना चाहिए था।

(ii) संवेदक श्री गौरव कुमार वर्मा के रजिस्ट्रेशन कागजात के संदेहास्पद पाये जाने के संबंध में आरोपी पदाधिकारी के कथन को इस आधार पर अमान्य किया गया है कि संवेदक का रजिस्ट्रेशन कागजात ग्रामीण कार्य विभाग से निर्गत था, यदि उन्हें इस पर संदेह था तो इसकी सम्पुष्टि ग्रामीण कार्य विभाग से कराये जाने के पश्चात संवेदक के निविदा पर निर्णय लिया जाना अपेक्षित था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया।

(iii) चहेते निविदाकार को निविदा आवंटित किये जाने के आरोप के बिन्दु पर अंकित किया गया है कि चूंकि पॉंच निविदाकारों में से एक निविदाकार श्री गौरव कुमार वर्मा को छोड़कर शेष चारों निविदाकारों के बीच उनकी उपस्थिति में लॉटरी के माध्यम से कार्य आवंटित किया गया था, इस कारण चहेते निविदाकार को कार्य आवंटित करने का मामला आरोपी के विरूद्ध नहीं बनता है।

5. विभागीय समीक्षा मेंसंचालन पदाधिकारी द्वारा गठित उक्त अभिमत के आधार पर आरोपी श्री मंडल के विरूद्ध गठित आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का दिये गये निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री मंडल से पत्रांक-1731 (एस), दिनांक 02.03.2020 के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। तद्‌ालोक में आरोपी पदाधिकारी श्री रामानन्द मंडल के द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक- शून्य दिनांक- 21.03.2020 समर्पित किया गया। श्री मंडल के द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के तहत मुख्य रूप से निम्नवत तथ्य अंकित किया गया :-

(क) संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये तर्क यथा- ''NITमें Existing commitment शपथ पत्र के रूप में मांगा गया था, परन्तु यदि संवेदक द्वारा अपने Letter head पर Existing commitment uploadकिया गया था, तो मूल भावना Existing commitmentकी जानकारी से था, इस कारण श्री गौरव कुमार वर्मा को निविदा में असफल नहीं किया जाना चाहिए था'' - के बिन्दु पर श्री मंडल द्वारा अंकित किया गया है कि इससे सहमत नहीं हुआ जा सकता है, क्योंकि कार्यपालक अभियंता के रूप में उनके द्वारा मात्र उक्त तथ्यों के आधार पर ही संवेदक के निविदा को अमान्य नहीं किया गया था, बल्कि उक्त तथ्यों के अतिरिक्त भी कई ऐसे महत्वपूर्ण आधार/कारण/तथ्य पाये गए थे। सम्पूर्ण तथ्यों/अभिलेखों/कागजातों के आधार पर सम्यक विचारोपरान्त ही संवेदक श्री वर्मा की निविदा को अमान्य करने का निर्णय लिया गया था। जैसे संवेदक श्री वर्मा द्वारा एक तरफ जहाँ Existing Commitment निर्धारित शपथ पत्र के बदले लेटर पैड पर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ अपलोड किया गया लेटर पैड भी श्री वर्मा द्वारा हस्ताक्षरित नहीं था। चूंकि लेटर पैड स्वहस्ताक्षरित था, इसीलिए लेटर पैड के माध्यम से भी दिये गए Existing Commitment को मान्य नहीं किया जा सकता था।

(ख) इसके अतिरिक्त संवेदक श्री गौरव कुमार वर्मा के तथाकथित लेटर पैड पर अंकित पत्राचार का पता एवं उनके Registration Paperपर अंकित पत्राचार का पता दोनों भिन्न-भिन्न था।

(ग) संवेदक श्री गौरव कुमार वर्मा के निविदा कागजात शपथ-पत्र के साथ समर्पित किया गया था, जिसपर संवेदक के रूप में गौरव कुमार वर्मा, पिता-श्री शिवनाथ वर्मा, पता-इन्द्रपुरी रोड नं॰-03, मकान सं॰-42 सरयुग निवास, पटना/राहुल कुमार, पिता-श्री शिवनाथ वर्मा, पता-जेवर ज्वेलर्स, एस॰के॰ पुरी, कस्तुरी पथ, बोरिंग रोड पटना का नाम अंकित किया गया, जबकि इनके द्वारा समर्पित किये गये Registration paperपर मात्र गौरव कुमार वर्मा का ही नाम18 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 अंकित पाया गया। साथ ही registration paper पर से संवेदक के रूप में श्री राहुल कुमार वर्मा के नाम एवं फोटो को छेड़छाड़ कर हटाया गया भी प्रतीत हो रहा था। (घ) श्री गौरव कुमार वर्मा के द्वारा समर्पित किये गये निविदा कागजात का ग्रामीण कार्य विभाग, वैशाली के सहायक अभियंता श्री राजेश चौधरी द्वारा Attested किया गया था एवं उनका Mob. No-8986915232भी अंकित था, पर अपने कार्यालय सहयोगियों की उपस्थिति में वार्ता की गई थी, इस क्रम में श्री चौधरी द्वारा श्री गौरव कुमार वर्मा के निविदा कागजात को Attestedनही करने की बात बतायी गयी।

(च) उपर्युक्त के आलोक में श्री मंडल के द्वारा उल्लेख किया गया है कि श्री गौरव कुमार वर्मा की निविदा को अमान्य किये जाने के संबंध में उनके द्वारा लिया गया निर्णय पूर्णतः तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उनके द्वारा जिन अभिलेखों/कागजातों के आधार पर अर्थात्‌ संवेदक श्री वर्मा के Existing Commitment संबंधित Letter Pad, Registration Paperएवं Affidevitत्रुटिपूर्ण होने के आधार पर उनके निविदा को अमान्य करने का निर्णय लिया गया, उन अभिलेखों एवं कागजातों को किसी ने भी अर्थात्‌्‌ न तो स्वयं संवेदक श्री गौरव कुमार वर्मा न तो नगर विकास एवं आवास विभाग और न ही संचालन पदाधिकारी के द्वारा सही होने की पुष्टि कर सका। ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी का उपर्युक्त तर्क औचित्यहीन है, जबकि संवेदक श्री वर्मा के निविदा कागजात को अमान्य करने के लिए उपर्युक्त वर्णित कारण में से कोई एक कारण ही पर्याप्त था।

(छ) इसके अतिरिक्त, श्री मंडल के द्वारा एक अन्य पूरक कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक- शून्य दिनांक- 15.10.2020 भी समर्पित किया गया, जिसके तहत मुख्य रूप से मे0 गौरव कुमार वर्मा के रजिस्ट्रेशन कागजात को संदेहास्पद अथवा फर्जी होने का संदर्भ देते हुए रजिस्ट्रेशन कागजात को ग्रामीण कार्य विभाग से सम्पुष्टि कराये जाने का अनुरोध किया गया। 6. श्री मंडल के उक्त अनुरोध के आलोक में मेसर्स गौरव कुमार वर्मा के रजिस्ट्रेशन कागजात की सम्पुष्टि ग्रामीण कार्य विभाग से कराये जाने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक 855 दिनांक 12.02.21 के द्वारा मेसर्स गौरव कुमार वर्मा के रजिस्ट्रेशन कागजात की सम्पुष्टि करते हुए रजिस्ट्रेशन की प्रति उपलब्ध कराया गया। 7. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में विषयांकित मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री मंडल के अनुरोध के आलोक में मेसर्स गौरव कुमार वर्मा के रजिस्ट्रेशन कागजात की ग्रामीण कार्य विभाग से सम्पुष्टि कराये जाने के क्रम में उनके द्वारा इसे सही बताया गया। ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी के द्वारा यह अभिमत गठित किया जाना कि यदि श्री मंडल को मेसर्स गौरव कुमार वर्मा के रजिस्ट्रेशन कागजात पर संदेह था तो इसकी सम्पुष्टि ग्रामीण कार्य विभाग से कराये जाने के पश्चात ही संवेदक के निविदा पर निर्णय लिया जाना अपेक्षित था - यह तर्कसंगत रूप से स्थापित हो जाता है। 8. अतएव उक्त वर्णित तथ्यों एवं समीक्षा पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त आरोपी श्री मंडल के समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक- शून्य दिनांक 21.03.2020 एवं पूरक द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 15.10.20 को अस्वीकृत करते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में श्री मंडल के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत उनके पेंशन से 10 प्रतिशत की कटौती 02 (दो) वर्षो तक किये जाने के निर्णित दण्डपर विभागीय पत्रांक-3235 (एस), दि॰ 08.07.2021 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मांग की गयी । बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1875,दिनांक 22.09.2021 के द्वारा उक्त निर्णित दण्ड पर सहमति व्यक्त की गयी। उपर्युक्त के आलोक में सम्यक विभागीय समीक्षोपरांत श्री रामानन्द मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, डुडा-02, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध आंशिक रूप से प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए निम्नलिखित दण्ड संसूचित किया जाता है :- (क) श्री मंडल के पेंशन से 10% की कटौती 02 वर्षो तक किये जाने का दंड। 9. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष कार्य पदाधिकारी।

-------

16 दिसम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-1 (पथ)-आरोप-21/2020-6020 (s)--श्री अजय कुमार, सहायक अभियंता (संविदा प्रबंधन), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति प्रबंधक (तक॰) PIU, BSRDCL, मुजफ्फरपुर के सहायक अभियंता (संविदा प्रबंधन) के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी अन्तर्गत MDR Road रसूलपुर-बाजपट्‌्‌टी-गड़हा रोड कि॰मी॰ 20.50-40.00 के तकनीकी बीड में मेसर्स राजेन्द्र सिंह एण्ड बदर्स द्वारा असत्य प्रमाण-पत्र समर्पित किये जाने के लिए दिनांक 31.05.2019 को विभागीय निविदा समिति के निर्णय 6.3 के आलोक में अभियंता प्रमुख के द्वारा मेसर्स राजेन्द्र सिंह के विरूद्ध कार्रवाई की जानी थी। संबंधित संचिका प्र॰-07/निविदा-03-98/2019 में दिनांक 31.05.2019 को विभागीय निविदा समिति की कार्यवाही निर्गत किये जाने के उपरांत अन्तिम रूप से दिनांक 16.08.2019 को प्रशाखा पदाधिकारी को कार्रवाई के लिए उपलब्ध करायी गयी। इस प्रकार इस मामले में अनावश्यक ढ़ाई माह का विलम्ब हुआ, जिसके लिए श्री अजय कुमार को चिन्हि्‌त करते हुए विभागीय पत्रांक-2912, दिनांक 20.05.2020 के द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार ने पत्रांंक-शून्य, दिनांक 08.06.2020 के द्वारा अपना स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया, जिसके विभागीय समीक्षोपरांत असंतोषजनक पाते हुए उक्त आशय के आरोप के लिए ही विभागीय संकल्प ज्ञापांक-866 (एस) दिनांक 10.02.2021 के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।19 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1471, दिनांक 16.07.2021 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को सिद्ध करने के लिए प्रमाणित एवं ठोस साक्ष्य के अभाव की स्थिति में उन्हें आरोप से मुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया है। 3. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

-------

10 सितम्बर 2021

सं॰ निग/सारा-1 (पथ) आरोप-57/2018-4603 (s)--श्री सुनील कुमार सुमन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कोचस सम्प्रति निलंबित के उक्त पदस्थापन अवधि में OPRMC (Output & Performance Based Road Assets Maintenance Contract)के अंतर्गत पैकेज संख्या-61 में सासाराम-चौसा राज्य उच्च पथ के दीर्घकालीन पथ संधारण में पायी गयी गंभीर अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-9691 (एस), दिनांक 20.12.2018 के द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक-02 (एस) दिनांक 01.01.2019 के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. श्री सुमन द्वारा उनके निलंबन आदेश को निरस्त किये जाने हेतु मान्‌नीय उच्च न्यायालय में CWJC No- 8569/2020दायर किया गया था। मान्‌नीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 09.04.2021 को रिट याचिका को इस निर्देश के साथ निष्पादित कर दिया गया है कि न्यायादेश की तिथि से दो माह के अन्दर श्री सुमन के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को सम्पन्न कर लिया जाय, अन्यथा इनका निलंबन पारित न्यायादेश की तिथि से दो माह पूरी हो जाने पर स्वतः समाप्त हो जायेगा। 3. श्री सुमन के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1271 अनु॰ दिनांक 22.04.2019 से प्राप्त हुआ, जिसपर असहमति का बिन्दु सृजित करते हुए विभागीय पत्रांक-247 (एस), दिनांक 13.01.2021 के द्वारा श्री सुमन से द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गई। श्री सुमन ने पत्र दिनांक 22.03.2021 के द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर समर्पित किया, जिसपर सम्प्रति अंतिम आदेश प्रक्रियाधीन है। 4. CWJC No-8569/2020में मान्‌नीय पटना उच्च न्यायालय के दिनांक 09.04.2021 के न्यायादेश के अनुपालन में श्री सुनील कुमार सुमन, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कोचस के निलंबन को समाप्त किया जाता है। श्री सुमन के निलंबन अवधि का विनियमन के संबंध में निर्णय उनके विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर लिया जायेगा। प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव। ————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना }kjk प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 37—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in20 बिहार गजट, 29 fnlEcj 2021

भाग-9-ख

निविदा सूचनाएं, परिवहन सूचनाएं, न्यायालय सूचनाएं और सर्वसाधारण सूचनाएं इत्यादि। —————

सूचना -----

सं0 1246--मैं शुभम, आत्मज (cid:7088)ी अंशुमान कु मार सिह, निवासी-(cid:7010)लैट सं. 104, महासरस्वती टावर, गोखुला गैस एजेंसी के नज़दीक, अभियंता नगर, बेली रोड, पटना, बिहार- 801503, एतद् द्वारा घोषणा करता (cid:7264)ँ कि भविष्य में सभी प्रयोजनार्थ शुभम सिह के नाम से जाना जाऊँगा| शपथ पत्र संख्या 94, दिनांक 20.7.2021

शुभम| No. 1246--I, Shubham S/o Anshuman Kumar Singh, R/o Flat No. 104, MahaSaraswati Tower, Abhiyanta Nagar, Gokhula Gas Agency, Bailey Road, Patna, Bihar-801503 declare that now I shall be known as Shubham Singh for all future purposes. Vide Affidavit No.-94 Dated 20.07.2021

Shubham.

————— अधीक्षक, सचिवालय मु(cid:7076)णालय बिहार, पटना }kjk प्रकाशित एवं मु(िcid:7076)त। बिहार गजट, 37—571+10-डी0टी0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 29 December 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2021-12-29.48/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2021-12-29.48.