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सं॰ 02/आरोप-01-33/2014-13706/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 22222222 नवम्बरनवम्बरनवम्बरनवम्बर 2021202120212021
श्री अब्दुल हामिद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 687/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रहुई, नालंदा के विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 181002 दिनांक 20.03.2014 द्वारा आरोप प्रतिवेदित किया गया। श्री हामिद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप निम्नलिखित है :-
श्री अब्दुल हामिद द्वारा वित्तीय वर्ष 2004-05 एवं 2005-06 में कुल 14 (चौदह) ऐसे परिवारों को इंदिरा आवास की स्वी—ति दी गयी, जिनका नाम बी0पी0एल0 सूची में दर्ज नहीं था। अन्य व्यक्तियों के बी0पी0एल0 क्रमांक पर गैर बी0पी0एल0 परिवारों को इंदिरा आवास की स्वी—ति दी गयी, जिसके कारण कुल 14 (चौदह) बी0पी0एल0 परिवार के लोग इंदिरा आवास से वंचित रह गये। साथ ही सरकार को कुल 329400/- रू0 की आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
विभागीय पत्रांक 14193 दिनांक 15.10.2014 द्वारा श्री हामिद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर स्पष्टीकरण किया गया। श्री हामिद द्वारा उक्त के आलोक में अपने पत्रांक 448 दिनांक 28.05.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया, जिसमें श्री हामिद का कहना है कि ''तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रहुई श्री रमेष सिंह की आकस्मिक मृत्यु के पष्चात वे मात्र लगभग 03 माह (09.10.2004 से 12.01.2005) तक प्रखंड विकास पदाधिकारी, रहुई के प्रभार में थे। संदर्भित उक्त इंदिरा आवास का आवंटन मेरे द्वारा नहीं किया गया है, बल्कि उसका आवंटन तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री रमेष सिंह के द्वारा किया गया था तथा उनके द्वारा प्रथम किस्त की राषि निर्गत की गई थी। इसके आवंटन में मेरी कोई भूमिका नहीं है। योजना संख्या-48/04-05, 49/04-05, 61/04-05, 20/04-05, 73/04-05, 14/04-05, 152/04-05 में योजना की स्वी—ति तथा प्रथम किस्त का भुगतान तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा ही किया गया था और इन कुल सात योजनाओं में द्वितीय किस्त की राषि मेरे द्वारा निर्गत की गई है। द्वितीय किस्त की राषि निर्गत करते समय प्रथम किस्त की राषि लाभुकों द्वारा योजना में खर्च की गई है अथवा नहीं के बिन्दु पर जांच की जाती है तथा उसी के आधार पर द्वितीय किस्त की राषि निर्गत की जाती है। प्रथम किस्त की राषि के अनुकूल निर्माण सम्पन्न होने के बाद ही जन सेवक/पंचायत सेवक एवं पर्यवेक्षक तथा कनीय अभियंता से प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद ही मेरे द्वारा द्वितीय किस्त की स्वी—ति दी गई है, जो किसी भी दृष्टि से अनुचित नहीं है। उक्त सातों योजनाओं में लाभार्थियों का नाम BPLसूची में दर्ज है।2 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध उनके द्वारा किसी को भी इंदिरा आवास आवंटित नहीं किया गया है तब गैर BPL को इंदिरा आवास आवंटित करने का आरोप किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। जिन 16 गैर BPL लाभुकों को इंदिरा आवास आवंटन करने का आरोप लगाया गया है, वह सत्य से परे है, इन 16 लाभुकों में से मात्र 07 लाभुकों को मेरे द्वारा मात्र द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया है, और ये सभी लाभुक BPL श्रेणी के है। शेष 09 लाभुकों को उनके द्वारा कोई भुगतान नहीं किया गया है।''
श्री हामिद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री हामिद के विरूद्ध बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के समक्ष विचाराधीन सी0ए0जी0 की कंडिका-4.1.10 के अनुपालन वर्ष 2007-10 से संबंधित आरोप है। श्री हामिद द्वारा आरोपों के संबंध में दिये गये स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि उनके कार्य प्रणाली में पर्यवेक्षण का अभाव है। इनके द्वारा 16 लाभुकों में से 07 लाभुकों को द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया, किन्तु 09 गैर BPL लाभुकों को जिन्हें पूर्ववती प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा प्रथम किस्त की राषि पूर्व में दी गयी, उनके विरूद्ध जानकारी होने के बाद श्री हामिद द्वारा राषि वसूलने हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया। यह जानबूझकर मामला दबाने जैसा —त्य है। श्री हामिद के इस —त्य के कारण सरकार को आर्थिक क्षति हुई है। श्री हामिद का यह —त्य बिहार आचार नियमावली 1965 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त श्री हामिद के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9507 दिनांक 26.08.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-19(1) के प्रावधान के तहत नियम-14 में अंकित (i) निन्दन (आनिन्दन (आनिन्दन (आनिन्दन (आरोप वर्ष 2005-06) रोप वर्ष 2005-06) रोप वर्ष 2005-06) रोप वर्ष 2005-06) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोकअसंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोकअसंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोकअसंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक का दंड संसूचित किया गया।
उपरोक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री हामिद द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री हामिद का अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहना है कि :-
''मुझ पर पूर्व में यह आरोप लगाया गया था कि मैंने 16 गैर बी0पी0एल0 परिवारों को इंदिरा आवास आवंटित कर दिया, जिसके कारण सुयोग्य श्रेणी के परिवार लाभ लेने से वंचित रह गए और सरकार को आर्थिक क्षति हुई। इस आलोक में मैंने अपना स्पष्टीकरण पत्रांक 448 दिनांक 28.05.2015 द्वारा समर्पित किया था। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि मेरे द्वारा उक्त इंदिरा आवास का आवंटन किया ही नहीं गया था। मेरे द्वारा मात्र 7 लाभुकों को द्वितीय किस्त की राषि का भुगतान किया गया था। ये सभी सातों लाभुक बी0पी0एल0 परिवार के ही थे, जिसके लिए मैंने योजना पंजी की छायाप्रति एवं अभि0 की छायाप्रति संलग्न की थी। यथार्थ में इन लाभुकों को श्री रमेष कुमार सिंह पूर्व के प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा इंदिरा आवास का आवंटन एवं प्रथम किस्त के राषि का भुगतान किया गया था। प्रथम किस्त के रूप में ली गई राषि के अनुरूप इंदिरा आवास का कार्य कर लेने के जनसेवक/पंचायत सचिव एवं पर्यवेक्षक तथा कनीय अभियंता के प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद ही मेरे द्वारा द्वितीय किस्त की राषि स्वी—त की गई थी।
ये भी उल्लेखनीय है कि मैंने सातों योजना के लाभार्थियों का नाम बी0पी0एल0 सूची में दर्ज होने संबंधी प्रमाण के साथ अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया था। स्पष्ट है कि पूर्व में लगाया गया गैर बी0पी0एल0 धारी को इंदिरा आवास आवंटित करने का आरोप मुझ पर प्रमाणित नहीं होता है।
मुझ पर पर्यवेक्षण का अभाव तथा 9 लाभुकों को पूर्व के पदाधिकारी द्वारा दी गई राषि वसूलने हेतु कोई प्रयास नहीं करने तथा जानबूझकर मामला को दबाने जैसा —त्य के कारण सरकार को आर्थिक क्षति का आरोप बिना उचित चिंतन किए लगाया गया है।
मेरे समक्ष शेष नौ (9) अभिलेख विचारार्थ प्रस्तुत ही नही किए गए थे। इन नौ में से 5 मामले अभिलेख सं0-62/04-05, 81/04-05, 148/04-05, 149/04-05 तथा 169/04-05 श्री निरंजन कुमार झा, जो मेरे बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी के प्रभार में आए, उनके समक्ष प्रस्तुत किए गए थे और उनके द्वारा पाँचों को द्वितीय किस्त की राषि के भुगतान की स्वी—ति दी गई थी। शेष 04 अभिलेखसं0-79/05-06, 94/05-06, 114/05-06, 117/05-06, को भी उन्हीं के द्वारा इंदिरा आवास आवंटित करते हुए प्रथम किस्त की राषि का भुगतान किया गया। मैं मात्र लगभग तीन माह वर्ष 04-05 में (09.10.2004 से 12.01.2005) प्रभार में रहा और ये चारो अभिलेख वर्ष 05-06 में आवंटित एवं भुगतान किए गए।
इस संबंध में यह आरोप कि मेरे द्वारा मामले को दबाया गया था, वसूली की कार्रवाई नहीं की गई किसी भी दृष्टि से उचित एवं न्यायसंगत नहीं है।
यह भी उल्लेखनीय है कि मैं दिनांक 09.10.2004 से 12.01.2005 मात्र 93 दिन ही प्र0वि0पदा0 के प्रभार में रहा, जिसमें इंदिरा आवास सहित अन्य योजनाओं को भी गति देने का यथासंभव प्रयास किया था।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में विनम्र प्रार्थना है कि मेरे इस अभ्यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए मुझको संसूचित निन्दन एवं असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक का दंड वापस लेने की —पा की जाय।'' श्री हामिद से प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। श्री हामिद का कहना है कि उनके द्वारा मात्र 07 लाभुकों को इंदिरा आवास आवंटन से संबंधित द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया था। ये सभी 07 लाभुक बी0पी0एल0 परिवार के ही थे। उनका कहना है कि प्रथम किस्त के रूप में ली गयी राषि के अनुरूप इंदिरा आवास का3 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध कार्य कर लेने के जन सेवक/पंचायत सचिव एवं पर्यवेक्षक तथा कनीय अभियंता के प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद ही उनके द्वारा द्वितीय किस्त की राषि स्वी—त की गयी थी। साथ ही उनका कहना है कि 16 लाभुकों में से शेष 09 अभिलेख विचारार्थ प्रस्तुत नहीं किये गये थे, अतएव इस संंबंध में उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। उल्लेखनीय है कि श्री हामिद के विरूद्ध आरोप बिहार विधान सभा की लोकलेखा समिति के समक्ष सी0ए0जी0 की कंडिका-4.1.10 के अनुपालन वर्ष 2007-10 से संबंधित है। श्री हामिद का यह कहना कि उनके द्वारा पूर्व में प्रथम किस्त के रूप में ली गयी राषि के अनुरूप इंदिरा आवास का कार्य कर लेने के प्रतिवेदन के आधार पर द्वितीय किस्त कि राषि स्वी—त की गयी। स्पष्टतया उनके द्वारा लाभुकों के संबंध में स्वयं छानबीन कर सुनिष्चित हो लेना चाहिए था। केवल अपने अधीनस्थ के प्रतिवेदन के आधार पर ही निर्णय लिया जाना श्री हामिद का कार्यप्रणाली में पर्यवेक्षण का अभाव दर्षाता है। साथ ही 09 लाभुकों को दी गयी राषि के संबंध में उनके समक्ष अभिलेख उपस्थापित नहीं किये जाने के कारण दी गयी राषि की वसूली का प्रयास नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 11325 दिनांक 08.08.2008 द्वारा निर्गत दिषा-निर्देष में इंदिरा आवास योजना का पारदर्षी एवं प्रभावी बनाये जाने हेतु सारी जवाबदेही संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी गई है। श्री हामिद का योजना के कार्यान्वयन के प्रति लापरवाही को दर्षाता है। आवास एक बुनियादी जरूरत है तथा गृह विहीन परिवार को आवास उपलब्ध कराये जाने हेतु सरकार द्वारा इंदिरा आवास योजना शुरू की गई है। श्री हामिद का उक्त —त्य जनकल्याण से संबंधित योजना के कार्यान्वयन के प्रति जानबूझकर की गई चूक है। श्री हामिद के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में प्रतिवेदित आरोपों पर अपने बचाव में कोई नया तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है।
समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री हामिद के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9507 दिनांक 26.08.2021 द्वारा अधिरोपित दंड को पूर्वव्त बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अब्दुल हामिद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 687/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, रहुई, नालंदा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9507 दिनांक 26.08.2021 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2005-06) निन्दन (आरोप वर्ष 2005-06) निन्दन (आरोप वर्ष 2005-06) निन्दन (आरोप वर्ष 2005-06) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव असंचयात्मक प्रभाव असंचयात्मक प्रभाव असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोकसे तीन वेतनवृद्धि पर रोकसे तीन वेतनवृद्धि पर रोकसे तीन वेतनवृद्धि पर रोक का दंड को पूर्वव्त बरकरार रखा जाता है।
आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष :-आदेष :-आदेष :-आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से, षिवमहादेव प्रसादषिवमहादेव प्रसादषिवमहादेव प्रसादषिवमहादेव प्रसाद,,,, सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।
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