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सं॰ 2/आरोप-01-19/2015-14105/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 29 नवम्बर29 नवम्बर29 नवम्बर29 नवम्बर 2021202120212021
श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, रोहतास के विरूद्ध खरीफ विपणन मौसम 2012-13 में राज्य खाद्य निगम के करगहर क्रय केन्द्र में 1421.84 एम0टी0 अर्थात् 14218.4 क्वींटल धान जिसका सी0एम0आर0 9526.32 एम0टी0 है एवं जिसका मूल्य 2165.56 रू0 प्रति क्वींटल की दर से कुल 20629817.53 रू0 होता है, की राषि के गबन में संलिप्तता संबंधी आरोप के लिए गठित आरोप-पत्र में अंतर्विष्ट आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 17742 दिनांक 31.12.2019 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 602 दिनांक 12.07.2021 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में धान अधिप्राप्ति केन्द्र के वरीय पदाधिकारी होने के नाते क्रय केन्द्र का नियमित पर्यवेक्षण में श्री सिंह के स्तर से चूक करने का उल्लेख किया गया। श्री सिंह के विरूद्ध जाँच प्रतिवेदन में आरोप को आंषिक प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
आंषिक प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 9166 दिनांक 19.08.2021 द्वारा श्री सिंह से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। श्री सिंह के पत्रांक 1227 दिनांक 10.09.2021 द्वारा बचाव अभ्यावेदन/लिखित अभिकथन समर्पित किया गया, जिसमें इनका कहना है कि :-
''विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान मेरे द्वारा समर्पित तथ्यों एवं साक्ष्यों का सूक्ष्म अवलोकन एवं उचित मूल्यांकन नहीं किया गया है। विदित हो कि मैने वरीय प्रभारी होने के नाते अधिप्राप्ति प्रक्रिया की नियमित पर्यवेक्षण एवं निगरानी रखते हुए तथा अपने दायित्वों का सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने कर्तव्य का अनुपालन किया है। मैने पदासीन रहते हुए पत्रांक 116 दिनांक 01.04.2013 द्वारा चोरी की आष्ांका जताते हएु तत्कालीन थानाध्यक्ष, करगहर को प्रतिवेदित किया था। साथ ही साथ पत्रांक शून्य दिनांक 16.02.2013 द्वारा जिला पदाधिकारी, रोहतास को भी इस आषय का पत्र दिया था। मैंने दिनांक 16.02.2013, 11.03.2013 एवं 31.03.2013 को इस आषय का प्रतिवेदन दिया है। 2 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध इसके विपरीत विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान मेरे विरूद्ध कोई भी विष्वसनीय दोष एवं पुष्टिकारक साक्ष्य समर्पित नहीं किया गया है।
जिला पदाधिकारी के पत्रांक 1867/गो0 दिनांक 22.06.2013 द्वारा मुझसे स्पष्टीकरण की मांग की गई थी, जिसके संदर्भ में पत्रांक 92/निर्वा0 दिनांक 23.07.2016 द्वारा मैने आग्रह एवं सूचित किया था कि बिन्दुवार स्पष्टीकरण देने हेतु निरीक्षण प्रतिवेदन तथा अन्य सुसंगत दस्तावेजों/साक्ष्यों की आवष्यकता है। विभिन्न स्थानों पर हुए स्थानान्तरण एवं कई वांछित अभिलेख के साक्ष्य संकलन में समय की आवष्यकता है। इसके बाद साक्ष्य मिलने के उपरांत मेरे तरफ से जवाब सभी स्तरों पर दिया गया है तथा हमेषा न्यायालय में उपस्थित होकर अपना बचाव भी प्रस्तुत किया है।'' संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त बचाव अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि धान अधिप्राप्ति केन्द्र का नियमित एवं निकटतम निगरानी का दायित्व क्रय केन्द्र के वरीय पदाधिकारी होने के नाते आरोपी पदाधिकारी का यह दायित्व बनता था कि वे क्रय केन्द्र का नियमित पयवेक्षण करें। पर्यवेक्षण में पाई कमियों को न सिर्फ वरीय पदाधिकारियों को अवगत कराए अपितु उन त्रुटियों के निराकरण हेतु सतत प्रयास करें/follow up (अनुपरीक्षण) करें। सतत प्रयास के क्रम में जब आरोपी पदाधिकारी को यह पूर्व ज्ञात था कि केन्द्र से धान की चोरी हो सकती है तो सर्वप्रथम उस केन्द्र के धान को ही राईस मिल भेजना चाहिए था, जिसके लिए जिला प्रबंधक से आवष्यक समन्वय करना आवष्यक था, जो की नहीं किया गया। घटित घटना आरोपी पदाधिकारी द्वारा पर्यवेक्षण में चूक को दर्षाता है। साथ ही जिला पदाधिकारी के पत्रांक 1867/गो0 दिनांक 22.06.2013 द्वारा 24 घंटे के अन्दर स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु निदेष दिये जाने पर श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब समर्पित नहीं किया गया था। स्पष्टतः श्री सिंह का कार्य स्वेच्छाचारिता, वरीय पदाधिकारी के आदेषों की अवहेलना, अनुषासनहीनता का द्योतक है। उनका यह —त्य बिहार आचार नियमावली 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरांत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमति जताते हुए श्री सिंह के बचाव अभ्यावेदन को अस्वी—त किया गया एवं इनके विरूद्ध (i) निन्दन निन्दन निन्दन निन्दन (आरोप वर्ष 2012-13) (आरोप वर्ष 2012-13) (आरोप वर्ष 2012-13) (आरोप वर्ष 2012-13) तथातथातथातथा (ii) दो वर्ष के लिदो वर्ष के लिदो वर्ष के लिदो वर्ष के लिये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति ये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति ये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति ये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
अतएव अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अविनाष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1055/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, रोहतास सम्प्रति भूमि सुधार उप समार्हाा, औरंगाबाद सदर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2012-13) तथा निन्दन (आरोप वर्ष 2012-13) तथा निन्दन (आरोप वर्ष 2012-13) तथा निन्दन (आरोप वर्ष 2012-13) तथा (ii) दो वर्ष के लिये संचयी प्रभाव के बिदो वर्ष के लिये संचयी प्रभाव के बिदो वर्ष के लिये संचयी प्रभाव के बिदो वर्ष के लिये संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति । ना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति । ना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति । ना कालमान वेतन में निम्तर प्रक्रम पर अवनति ।
आदेष :-आदेष :-आदेष :-आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को सभी संबंधितों को सभी संबंधितों को सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कजानकारी एवं आवश्यक कजानकारी एवं आवश्यक कजानकारी एवं आवश्यक कार्रार्रार्रार्रवाई वाई वाई वाई के लिए के लिए के लिए के लिए भेज दी जाय।भेज दी जाय।भेज दी जाय।भेज दी जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से, रचना पाटिलरचना पाटिलरचना पाटिलरचना पाटिल,,,, सरकार के अपसरकार के अपसरकार के अपसरकार के अपर सचिव।र सचिव।र सचिव।र सचिव।
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