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सं॰ 02/आरोप-01-17/2019-14570/सा0प्र0 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 7 दिसम्बर7 दिसम्बर7 दिसम्बर7 दिसम्बर 2021202120212021
श्री हीरामुनी प्रभाकर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 938/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक, सारण के विरूद्ध सारण समाहरणालय, छपरा के पत्रांक 114 (अनु0) दिनांक 14.08.2019 द्वारा गठित आरोप-पत्र उपलब्ध कराया गया।
श्री प्रभाकर के विरूद्ध निम्नलिखित आरोप प्रतिवेदित है :- 1. सारण जिलान्तर्गत मशरक प्रखंड के पदस्थापन काल में श्री प्रभाकर द्वारा प्रखंड/पंचायत में वर्ष-2007-08 में इंदिरा आवास योजना की प्रति लाभुक स्वीकृति राशि 25000/- (पचीस हजार) रूपये में प्रत्येक लाभुकों को प्रथम किस्त की राशि मो0-24000/- (चौबीस हजार) रूपये का भुगतान किया गया था। 2. संचिका संख्या-01/(लो0पंचायत)-224/2012 में दर्ज सारण जिला अन्तर्गत मशरक प्रखंड/पंचायत में इंदिरा आवास योजना की राशि का फर्जी निकासी मामले में माननीय सदस्य न्यायिक, लोकायुक्त, बिहार द्वारा दिनांक 16.11.2018 को पारित आदेश के अनुपालन हेतु जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सारण के पत्रांक 3714 दिनांक 28.12.2018 द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक से अपूर्ण इंदिरा आवास के संबंध में प्रतिवेदन की माँग की गयी।
3. प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक के पत्रांक 153 दिनांक 16.02.2019 द्वारा विषयांकित वाद से संबंधित विाीय वर्ष 2006-07 से 2009-10 तक इंदिरा आवास के कुल-94 अपूर्ण/अधूरे आवासो की विवरणी उपलब्ध करायी गया, जिसमें संबंधित लाभुकों को प्रथम/द्वितीय किस्त के रूप में भुगतान की गई राशि की विवरण अंकित किया गया है।
4. प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक से प्राप्त प्रतिवेदनानुसार पाया गया है कि श्री प्रभाकर द्वारा वर्ष 2007-08 में इंदिरा आवास के स्वीकृत की गई योजनाओं में से 30 योजनाएँ अपूर्ण है, जिसमें लाभुकों को योजना की स्वीकृत राशि मो0-25000/- (पचीस हजार) में से प्रथम किस्त की राशि 24000/-(चौबीस हजार) रूपये का भुगतान प्रत्येक लाभुक को श्री प्रभाकर द्वारा किया जा चुका है।
5555.... चूँकि प्रखंड स्तर पर संचालित योजनाओं में विभागीय नियमों/अनुदेशों का अनुपालन का सुनिश्चित कराना प्रखंड विकास पदाधिकारी का दायित्व होता है, जिसके आलोक में योजनाओं का भौतिक सत्यापन/पर्यवेक्षण समय-समय पर इनके द्वारा नहीं किया गया फलस्वरूप योजनाएं अपूर्ण रहे साथ ही2 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध सरकारी राशि का दुरूपयोग हुआ। योजनाओं के अपूर्ण रहने के कारण प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक द्वारा पत्रांक 261 दिनांक 13.03.2019 से मशरक थाना काण्ड सं0 97/2019 दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त कार्यालय का पत्रांक 5753/लोक0 दिनांक 02.07.2021 के माध्यम से माननीय लोकायुक्त द्वारा परिवाद संख्या-1/लोक (पंचायत)-224/2012 में सारण जिला अन्तर्गत मषरक प्रखंड में इंदिरा आवास योजना में राषि का फर्जी निकासी के लिए तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारियों के विरूद्ध आदेष पारित किया गया है कि श्री हीरामुनी प्रभाकर (बि0प्र0से0), तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मषरक, सारण एवं अन्य दोषी पदाधिकारियों के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाय।
श्री प्रभाकर के विरूद्ध विभागीय स्तर पर गठित आरोप-पत्र पर अनुषासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। गठित आरोप-पत्र पर श्री प्रभाकर का स्पष्टीकरण बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल सप्लाईज कॉरपोरेषन, लि0, खाद्य भवन, पटना के माध्यम से प्राप्त है।
अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रभाकर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं इनके स्पष्टीकरण की सम्यक् विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7475 दिनांक 21.10.2021 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधान के तहत (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से असंचयात्मक प्रभाव से असंचयात्मक प्रभाव से असंचयात्मक प्रभाव से निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) दो वेतनवृद्धि पर रोकदो वेतनवृद्धि पर रोकदो वेतनवृद्धि पर रोकदो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड संसूचित किया गया।
उपरोक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री प्रभाकर द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया। पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में श्री प्रभाकर का कहना है कि :-
''मेरे विरूद्ध मषरख प्रखंड में वर्ष 2007-08 के प्रखंड विकास पदाधिकारी के प्रभार अवधि में इंदिरा आवास अपूर्ण रहने के कारण अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा आरोप-पत्र अनुमोदित कर स्पष्टीकरण की कार्रवाई की गई है, जिसपर अधोहस्ताक्षरी के द्वारा पत्रांक- 03ः02ः83ः01ः2010-7522 दिनांक 18.09.2020 से आरोपों पर स्पष्टीकरण समर्पित किया है। पुनः पूरक स्पष्टीकरण पत्रांक 7794 दिनांक 08.09.2021 समर्पित किया गया, परन्तु उक्त स्पष्टीकरण को अस्वी—त कर संकल्प ज्ञापांक 10123 दिनांक 07.09.2021 द्वारा दण्डित कर दिया गया है।
1111.... उक्त दण्डादेष पर बिन्दुवार स्थिति स्पष्ट करना है कि ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 11755 दिनांक 10.10.2006 के द्वारा वर्ष 2006-07 के लिए निर्गत मार्गदर्षिका की कंडिका-06 के अनुसार स्पष्ट है कि- ''लाभुको को राषि भुगतान दो किस्तों में किया जायेगा। प्रथम किस्त के रूप में कुल 24,000 (चौबीस हजार) रूपये तथा शेष राषि द्वितीय किस्त में भुगतेय होगी। इसके लिए प्रत्येक लाभुक के खाते में 24,000 (चौबीस हजार) रूपये की राषि जमा की जायेगी। साथ ही लाभुकों को यह अनिवार्य रूप से यह बताया जाय कि उनके खाता में इंदिरा आवास निर्माण हेतु जमा की गई राषि का यदि उनके द्वारा अन्य कार्य पर व्यय किया जाता है तो, वे राषि के दुरूपयोग के लिए दोषी पाये जायेंगे तथा उनके विरूद्ध थाना में प्राथमिकी दर्ज कर अपराधिक मुकदमा चलाया जायेगा।'' इस मार्गदर्षिका के अनुरूप प्रथम किस्त के रूप में 24,000 (चौबीस हजार) रूपये की राषि का प्रथम किस्त के रूप एडभाईस के माध्यम से लाभुकों के खाता में राषि भेजी गयी है। 2222.... मेरे प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी, मषरख के कार्यकाल दिनांक 19.07.2007 से 31.10.2008 तक में कुल-1041 इंदिरा आवासों की स्वी—ति दी गई, जिसमें से मात्र 05 इंदिरा आवास वर्तमान में अपूर्ण/लंबित है, जिसका कारण निम्न प्रकार है :-
प्रखंड विकास पदाधिकारी, मषरख के जाँच प्रतिवेदन के अनुसार लम्बित/अपूर्ण इंदिरा आवासों में दो लाभुक अन्यत्र पलायन कर चूके है (क्रमांक-05 एवं 06)। एक पति-पत्नी मृत हो चुके है (क्रमांक-08) और एक का कारण बी0डी0ओ0 के जाँच में स्पष्ट नहीं किया गया है (क्रमांक-09) एवं क्रमांक-07 में लाभुक का कहना है कि योजना की राषि प्राप्त नहीं किया गया है, जो बिलकुल निराधार एवं बेबुनियाद है क्योंकि एडवाईस ज्ञापांक 253 दिनांक 09.03.2008 के क्रमांक-04 पर अंकित श्री श्यामजी मांझी के खाता नं0 1702 में 24,000 (चौबीस हजार) रूपये की राषि भेजी गई है, जिसकी निकासी भी श्री मांझी द्वारा दो बार में 23,900 रूपये की निकासी भी की गई है, जिसके प्रमाण के रूप में एडवाईस की प्रति एवं शाखा प्रबंधक, एस0बी0आई0, बैंक शाखा, मषरख द्वारा निर्गत बैंक डिटेलस अनुलग्नक के रूप में संलग्न है (अपूर्ण इंदिरा आवास का जाँच प्रतिवेदन, एडवाईस ज्ञापांक 253 दिनांक 29.03.2008 एवं बैंक विवरणी दिनांक 06.03.2009 संलग्न)।
इस प्रकार उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि मेरे उपर लगाया गया आरोप तथ्यहीन एवं निराधार है। ऐसी बात नहीं है कि मेरे द्वारा इंदिरा आवास में निर्माण में लापरवाही/कोताही/कदाचार की गई है, बल्कि मेरी सतर्कता, र्काव्यनिष्ठा के कारण ही 99.5 प्रतिषत स्वी—त इंदिरा आवास योजना पूर्ण हुई है।'' श्री प्रभाकर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं इनसे प्राप्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत पाया गया कि प्रखंड स्तर पर संचालित योजनाओं में विभागीय नियमों/अनुदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराना प्रखंड विकास पदाधिकारी का दायित्व होता है, लेकिन योजनाओं का भौतिक सत्यापन/पर्यवेक्षण समय-समय पर इनके द्वारा नहीं किया गया फलस्वरूप योजनाएं अपूर्ण रही एवं सरकारी राशि का दुरूपयोग हुआ। योजनाओं के अपूर्ण रहने के कारण प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक द्वारा पत्रांक 261 दिनांक 13.03.2019 से मशरक थाना काण्ड सं0 97/2019 दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि विषयांकित मामले की विस्तृत समीक्षा/सुनवाई लोकायुक्त महोदय द्वारा वाद संख्या 224/2012 के तहत की गई। सुनवाई के उपरान्त दिनांक 19.04.2021 को पारित आदेष में श्री प्रभाकर के3 ;बपकरू5द्ध ;बपकरू10द्धख्;बपकरू5द्ध;बपकरू5द्ध;बपकरू15द्ध;बपकरू16द्ध विरूद्ध कड़ी कार्रवाई का आदेष दिया गया, ताकि भविष्य में इंदिरा आवास की राषि जो समाज के सबसे गरीब तबके के व्यक्तियों के लिए राज्य सरकार द्वारा कल्याणकारी योजना के रूप में चलाया जा रहा है, उसे भ्रष्टाचार मुक्त रखा जा सके। इंदिरा आवास योजना लोक कल्याणकारी योजना है एवं उसके कार्यान्वयन में एक लोक सेवक द्वारा लापरवाही बरता जाना र्काव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक है। श्री प्रभाकर का यह —त्य बिहार आचार नियमावली 1976 के नियम-3(1) के संगत प्रावधानों के प्रतिकूल है।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री प्रभाकर के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10123 दिनांक 07.09.2021 द्वारा अधिरोपित दंड को पूर्वव्त बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
अतः श्री हीरामुनी प्रभाकर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 938/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मशरक, सारण द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10123 निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक दिनांक 07.09.2021 द्वारा (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) निन्दन (आरोप वर्ष 2007-08) का दंड को पूर्वव्त बरकरार रखा जाता है।
आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष :-आदेष :-आदेष :-आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय। प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से,राज्यपाल के आदेष से, षिवमहादेव प्रसादषिवमहादेव प्रसादषिवमहादेव प्रसादषिवमहादेव प्रसाद,,,, सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।सरकार के अवर सचिव।
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